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  • यूजीसी मानकों के पालन और पारदर्शिता पर बहस, राज्य सरकार को समय मिला..

    यूजीसी मानकों के पालन और पारदर्शिता पर बहस, राज्य सरकार को समय मिला..


    जबलपुर । रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. राजेश वर्मा की नियुक्ति को चुनौती देने वाली याचिका पर मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने राज्य सरकार को जवाब दाखिल करने के लिए चार सप्ताह की अंतिम मोहलत दी है यह आदेश शुक्रवार को न्यायमूर्ति विशाल धगट की एकलपीठ ने सुनवाई के दौरान दिया अगली सुनवाई 23 मार्च को निर्धारित की गई है

    याचिका में नियुक्ति प्रक्रिया पर प्रश्न उठाए गए
    याचिका एनएसयूआई के जिला अध्यक्ष सचिन रजक द्वारा दायर की गई है याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता उत्कर्ष अग्रवाल ने तर्क दिया कि कुलगुरु की नियुक्ति निर्धारित नियमों के अनुरूप नहीं हुई याचिका में कहा गया कि पीएचडी उपाधि के बाद न्यूनतम दस वर्ष का शैक्षणिक अनुभव अनिवार्य होता है जबकि इस मानदंड का पालन नहीं किया गया

    यूजीसी मानकों और चयन प्रक्रिया पर बहस
    सुनवाई के दौरान यह भी मुद्दा उठा कि विश्वविद्यालय अनुदान आयोग द्वारा निर्धारित शैक्षणिक योग्यताओं और चयन प्रक्रिया के प्रावधानों का उल्लंघन हुआ है याचिका में तर्क दिया गया कि यदि प्राध्यापक पद पर मूल नियुक्ति ही नियमों के विरुद्ध रही हो तो कुलगुरु पद पर की गई नियुक्ति की वैधता पर सवाल उठना स्वाभाविक है

    राज्य सरकार ने मांगा अतिरिक्त समय
    राज्य सरकार की ओर से शासकीय अधिवक्ता वेद प्रकाश तिवारी ने न्यायालय में पक्ष रखा और जवाब दाखिल करने के लिए अतिरिक्त समय का अनुरोध किया न्यायालय ने आदेश में कहा कि प्रतिवादियों को 7 अप्रैल 2025 को नोटिस तामील किया जा चुका है लेकिन अब तक कोई जवाब प्रस्तुत नहीं हुआ इसे देखते हुए चार सप्ताह का अंतिम अवसर दिया गया

    सार्वजनिक हित और विशेषज्ञों की राय
    मामला उच्च शिक्षा प्रशासन और नियुक्ति प्रक्रिया की पारदर्शिता से जुड़ा होने के कारण इसे सार्वजनिक हित से महत्वपूर्ण माना जा रहा है विशेषज्ञों का मानना है कि न्यायालय का अंतिम निर्णय विश्वविद्यालय प्रशासनिक नियुक्तियों के मानकों और जवाबदेही के दायरे को स्पष्ट कर सकता है

    आगामी सुनवाई पर सभी की नजरें
    फिलहाल सभी पक्षों की नजर अगली सुनवाई पर टिकी है जहां राज्य सरकार का जवाब और न्यायालय की टिप्पणी मामले की दिशा तय कर सकती है यह विवाद न केवल आरडीवीवी बल्कि राज्य के अन्य विश्वविद्यालयों में प्रशासनिक नियुक्तियों के लिए भी उदाहरण बन सकता है

  • मप्र बजट सत्र का पहला दिन: कांग्रेस ने भागीरथपुरा दूष‍ित पानी का उठाया मुद्दा, सरकार को घेरा

    मप्र बजट सत्र का पहला दिन: कांग्रेस ने भागीरथपुरा दूष‍ित पानी का उठाया मुद्दा, सरकार को घेरा


    भोपाल। मध्य प्रदेश विधानसभा के बजट सत्र के पहले दिन सोमवार को कांग्रेस विधायक दल ने राज्य सरकार पर तीखे सवाल उठाए और जनहित के मुद्दों को सदन में जोरदार तरीके से पेश किया। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने राज्यपाल के अभिभाषण पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि इसमें सरकार और प्रधानमंत्री की उपलब्धियों का विस्तार से उल्लेख है, लेकिन प्रदेशवासियों की वास्तविक समस्याओं और पीड़ा को उचित जगह नहीं मिली।
    उमंग सिंघार ने इंदौर के भागीरथपुरा में हुई दु:खद घटना का हवाला देते हुए कहा कि सरकार की लापरवाही से 35 निर्दोष लोगों की जान गई। उन्होंने पूछा कि क्या उन परिवारों का दर्द और उनके सवाल इस सदन के लिए महत्वपूर्ण नहीं हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि कांग्रेस विधायक दल इस मामले को गंभीरता से उठाएगा और जिम्मेदारों को चिन्हित करने की मांग करेगा।

    मीडिया से बातचीत में उमंग सिंघार ने कहा कि बजट केवल घोषणाओं का दस्तावेज नहीं होना चाहिए, बल्कि यह प्रदेश की जमीनी हकीकत को उजागर करने का माध्यम होना चाहिए। उन्होंने बढ़ते प्रदेश कर्ज पर श्वेत पत्र जारी करने की मांग की, ताकि जनता को आर्थिक स्थिति की पारदर्शी जानकारी मिल सके।

    उन्होंने यह भी कहा कि कांग्रेस विधायक दल बजट में की गई घोषणाओं और उनकी जमीनी वास्तविकता के बीच के अंतर को सदन में सामने लाएगा। नेता प्रतिपक्ष ने दोहराया कि वह लगातार जनता के मुद्दों को उठाएगी और सरकार को जवाबदेह बनाएगी।

  • प्रधानमंत्री मोदी के क्रांतिकारी विकास मार्ग पर अग्रसर मध्यप्रदेश : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

    प्रधानमंत्री मोदी के क्रांतिकारी विकास मार्ग पर अग्रसर मध्यप्रदेश : मुख्यमंत्री डॉ. यादव


    मध्यप्रदेश । मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि मध्यप्रदेश सरकार प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के विकास मॉडल को अपनाते हुए प्रदेश की आर्थिक प्रगति को नई गति देने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने नई दिल्ली में वरिष्ठ संपादक एवं लेखक पद्मश्री श्री आलोक मेहता द्वारा रचित पुस्तक ‘रिवॉल्यूशनरी राज – नरेन्द्र मोदी: 25 इयर्स’ कॉफी टेबल बुक ग्रहण करते हुए यह बात कही। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राज्य में बड़े पैमाने पर देशी-विदेशी निवेश को आकर्षित कर औद्योगिक विकास, रोजगार सृजन, स्टार्ट-अप्स, शिक्षा, स्वास्थ्य तथा ग्रामीण विकास से जुड़ी योजनाएँ प्रभावी रूप से क्रियान्वित की जा रही हैं।

    यह भेंट-वार्ता दिल्ली से दावोस स्विट्ज़रलैंड में आयोजित विश्व आर्थिक मंच की बैठक में भाग लेने से पूर्व हुई। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री की नई शिक्षा नीति के प्रभावी क्रियान्वयन में मध्यप्रदेश अग्रणी भूमिका निभा रहा है। प्रदेश में पुस्तकों और पठन-संस्कृति को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से गीता भवन निर्माण योजना में पुस्तकालयों का प्रावधान भी किया गया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश सरकार पत्रकारों, साहित्यकारों एवं सांस्कृतिक कलाकारों को सामाजिक जागरूकता के लिए हर संभव सहयोग, सहायता एवं प्रोत्साहन देती रहेगी।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि पुस्तक में उल्लिखित समाज कल्याण, महिला सशक्तिकरण, युवाओं में अनुशासन तथा आत्मनिर्भर विकसित भारत के प्रधानमंत्री के सपनों को साकार करने के लिए वे पूर्णतः प्रतिबद्ध हैं। उन्होंने पुस्तक की विस्तृत भूमिका केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह द्वारा लिखे जाने को विशेष रूप से महत्वपूर्ण बताया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि केंद्रीय मंत्री श्री शाह, प्रधानमंत्री के संकल्पों को क्रियान्वित करते हुए आतंकवाद और नक्सल समस्या से प्रभावी ढंग से निपट रहे हैं, जिससे देश विकास के पथ पर निरंतर आगे बढ़ रहा है। ऐसे विचारों को जन-जन तक पहुँचाने में यह पुस्तक महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है और इसे शिक्षण संस्थानों व पुस्तकालयों तक पहुँचाया जाना चाहिए।उल्लेखनीय है कि पुस्तक का प्रकाशन शुभी पब्लिकेशंस द्वारा किया गया।

  • कर्नल सोफिया कुरैशी विवाद: सुप्रीम कोर्ट ने MP सरकार को फटकारा मंत्री विजय शाह की माफी पर उठाए सवाल

    कर्नल सोफिया कुरैशी विवाद: सुप्रीम कोर्ट ने MP सरकार को फटकारा मंत्री विजय शाह की माफी पर उठाए सवाल


    नई दिल्ली। कर्नल सोफिया कुरैशी को लेकर विवादित बयान मामले में सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश सरकार को कड़ी फटकार लगाई। कोर्ट ने नाराजगी जताई कि एसआईटी ने मंत्री विजय शाह के खिलाफ मुकदमा चलाने की अनुमति मांगी थी, लेकिन राज्य सरकार ने 19 अगस्त 2025 से अब तक कोई निर्णय नहीं लिया।

    मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत का सख्त रुख

    CJI सूर्यकांत ने कहा कि एसआईटी ने पूरी जांच कर विजय शाह के खिलाफ मुकदमा चलाने की सिफारिश राज्य सरकार को भेजी थी।

    अब तक लंबित निर्णय के चलते कानून के अनुसार कार्रवाई नहीं हो सकी।

    खुफिया विभाग के डीआईजी डी. कल्याण चक्रवर्ती से कोर्ट ने मामले के अन्य पहलुओं पर ध्यान रखने के निर्देश दिए।

    विजय शाह की माफी पर सवाल

    मंत्री की ओर से माफी पेश करने का दावा किया गया, लेकिन कोर्ट ने कहा कि रिकॉर्ड में कोई माफीनामा मौजूद नहीं है।

    सुप्रीम कोर्ट ने उनकी माफी को मगरमच्छ के आंसू बताते हुए इसे कानूनी राहत से अलग करार दिया।

    ऑनलाइन माफी पर भी कोर्ट ने असंतोष जताया और स्पष्ट किया कि ऐसे कदमों से कार्रवाई से राहत नहीं मिल सकती।

    सुप्रीम कोर्ट का आदेश

    मध्य प्रदेश सरकार को अभी तुरंत कार्रवाई करने और एसआईटी की सिफारिशों के मुताबिक मंजूरी देने का निर्देश।कोर्ट ने स्पष्ट किया कि अब लंबित मामलों में विलंब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

  • उज्जैन प्रवास पर मुख्यमंत्री मोहन यादव बृहस्पति महादेव के दर्शन आमजन से संवाद और विकास कार्यों का लिया जायजा

    उज्जैन प्रवास पर मुख्यमंत्री मोहन यादव बृहस्पति महादेव के दर्शन आमजन से संवाद और विकास कार्यों का लिया जायजा


    उज्जैन। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव गुरुवार को उज्जैन प्रवास के दौरान धार्मिक सामाजिक और विकास से जुड़े कार्यक्रमों में पूरी तरह सक्रिय नजर आए। महाकाल उत्सव के समापन के अगले ही दिन मुख्यमंत्री का यह दौरा आस्था, संवाद और विकास-तीनों आयामों को एक साथ समेटे रहा। मकर संक्रांति के पावन अवसर पर उन्होंने दिन की शुरुआत गोलामंडी क्षेत्र स्थित प्राचीन बृहस्पति महादेव मंदिर में दर्शन-पूजन से की और प्रदेशवासियों के सुख, शांति और समृद्धि की कामना की।

    मुख्यमंत्री अपनी पत्नी सीमा यादव के साथ मंदिर पहुंचे, जहां वैदिक मंत्रोच्चार के बीच विधि-विधान से अभिषेक और आरती की गई। पूजा के बाद उन्होंने कहा कि बृहस्पति महादेव मंदिर से उनका पुराना और भावनात्मक जुड़ाव रहा है। सार्वजनिक जीवन के हर महत्वपूर्ण पड़ाव पर वे यहां आशीर्वाद लेने आते रहे हैं। मुख्यमंत्री पद संभालने के बाद यह उनका पहला बृहस्पतिवार दर्शन था, जिसे उन्होंने अपने लिए विशेष और भावुक क्षण बताया।पूजन के उपरांत मुख्यमंत्री ने उज्जैन के धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व पर भी विस्तार से बात की। उन्होंने कहा कि उज्जैन केवल आध्यात्मिक आस्था का केंद्र नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक विरासत का जीवंत प्रतीक है। सिंहस्थ महापर्व 2028 की तैयारियों को लेकर उन्होंने भरोसा दिलाया कि राज्य सरकार पूरी गंभीरता और योजना के साथ काम कर रही है। सड़क, पेयजल, स्वच्छता, यात्री सुविधाएं और आधारभूत ढांचे से जुड़े कार्यों को समय पर पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि आने वाले वर्षों में उज्जैन वैश्विक स्तर पर अपनी पहचान और मजबूत कर सके।

    धार्मिक कार्यक्रम के बाद मुख्यमंत्री का अंदाज पूरी तरह बदला नजर आया, जब वे शहर के बीच एक साधारण सी चाय की दुकान पर पहुंचे। यहां उन्होंने आम नागरिकों के साथ बैठकर चाय पी और अनौपचारिक बातचीत की। लोगों ने मुख्यमंत्री के सामने शहर की समस्याएं, रोजमर्रा की जरूरतें और विकास से जुड़ी अपेक्षाएं रखीं। मुख्यमंत्री ने न सिर्फ ध्यान से उनकी बातें सुनीं, बल्कि समाधान का भरोसा भी दिया। जब चाय का भुगतान करने की बारी आई और दुकानदार ने पैसे लेने से मना किया, तो मुख्यमंत्री ने मुस्कराते हुए स्वयं भुगतान किया। इस सरल व्यवहार ने वहां मौजूद लोगों का दिल जीत लिया।

    इसके बाद मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने शासकीय माधव विज्ञान महाविद्यालय के समीप निर्माणाधीन गीता भवन का निरीक्षण किया। अधिकारियों ने उन्हें बताया कि यह भवन जी प्लस टू संरचना में तैयार किया जा रहा है और अप्रैल 2026 तक इसके पूर्ण होने का लक्ष्य रखा गया है। मुख्यमंत्री ने निर्माण की गुणवत्ता, प्रगति और समय-सीमा की विस्तार से समीक्षा की। उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए कि कार्य में किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी और भवन तय समय में उच्च गुणवत्ता के साथ पूरा होना चाहिए।मुख्यमंत्री का यह उज्जैन दौरा साफ संकेत देता है कि उनकी प्राथमिकताओं में आस्था जनता से सीधा संवाद और विकास कार्यों की निगरानी-तीनों समान रूप से शामिल हैं।

  • इंदौर पानी विवाद: हाईकोर्ट ने MP सरकार को घेरा, मौतों के आंकड़ों पर उठाए सवाल

    इंदौर पानी विवाद: हाईकोर्ट ने MP सरकार को घेरा, मौतों के आंकड़ों पर उठाए सवाल

    नई दिल्ली। इंदौर में दूषित पेयजल से हो रही मौतों ने अब न्यायपालिका का ध्यान खींच लिया है। इस गंभीर मामले को लेकर मध्य प्रदेश हाई कोर्ट में अहम सुनवाई हुई, जहां कुल 5 जनहित याचिकाओं पर एक साथ विचार किया गया। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने राज्य सरकार की कार्यप्रणाली पर तीखे सवाल उठाते हुए सख्त रुख अपनाया।

    मौतों के आंकड़ों पर HC की नाराजगी
    पिछली सुनवाई में राज्य सरकार की ओर से कोर्ट में एक स्टेटस रिपोर्ट पेश की गई थी, जिसमें दूषित पानी से सिर्फ 4 मौतों की जानकारी दी गई। जबकि जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल अलग है। कोर्ट के संज्ञान में आया कि इस मामले में अब तक 17 लोगों की मौत हो चुकी है। इस विरोधाभास को लेकर हाई कोर्ट ने सरकार को कड़ी फटकार लगाई और रिपोर्ट की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े किए। कोर्ट ने कहा कि इतने गंभीर मामले में गलत आंकड़े पेश करना बेहद चिंताजनक है।

    पूरे प्रदेश के पानी पर उठे सवाल
    हाई कोर्ट ने सिर्फ इंदौर ही नहीं, बल्कि पूरे मध्य प्रदेश के पीने के पानी की गुणवत्ता पर चिंता जताई। कोर्ट ने कहा कि अगर लोगों को मिलने वाला पानी ही दूषित है, तो यह बेहद गंभीर स्थिति है। यह समस्या केवल एक इलाके तक सीमित नहीं मानी जा सकती।

    मुख्य सचिव को वर्चुअली पेश होने का आदेश
    मामले की गंभीरता को देखते हुए हाई कोर्ट ने मध्य प्रदेश के मुख्य सचिव को वर्चुअली पेश होने के निर्देश दिए हैं। अगली सुनवाई की तारीख 15 जनवरी तय की गई है। कोर्ट ने साफ किया कि वह इस मामले में किसी और अधिकारी की नहीं, बल्कि सीधे मुख्य सचिव की बात सुनना चाहता है।

    कोरोना की तरह मांगा मेडिकल बुलेटिन
    कोर्ट ने प्रशासन को निर्देश दिया कि जिस तरह कोरोना महामारी के दौरान रोजाना मेडिकल बुलेटिन जारी किया जाता था, उसी तरह दूषित पानी से फैली बीमारी और मौतों का भी नियमित अपडेट दिया जाए।

    अब तक 17 मौतें, 110 मरीज भर्ती
    स्वास्थ्य विभाग के अनुसार दूषित पानी से अब तक 421 लोग बीमार हुए, जिनमें से 311 मरीज डिस्चार्ज हो चुके हैं। फिलहाल 110 मरीज अस्पताल में भर्ती हैं, जबकि 15 मरीज आईसीयू में इलाजरत हैं।

    15 जनवरी की सुनवाई पर टिकी निगाहें
    अब पूरे प्रदेश की नजरें 15 जनवरी की अगली सुनवाई पर टिकी हैं, जहां यह साफ होगा कि सरकार इस गंभीर लापरवाही पर क्या जवाब देती है और आगे क्या ठोस कदम उठाए जाते हैं

  • वर्ल्ड चैंपियन बनीं MP की ब्लाइंड बेटियां, लेकिन सम्मान से वंचित: न नौकरी, न इनाम-क्यों हो रहा दिव्यांग खिलाड़ियों से भेदभाव?

    वर्ल्ड चैंपियन बनीं MP की ब्लाइंड बेटियां, लेकिन सम्मान से वंचित: न नौकरी, न इनाम-क्यों हो रहा दिव्यांग खिलाड़ियों से भेदभाव?


    मध्य प्रदेश।  भारत ने जब पहला ब्लाइंड विमेंस टी-20 वर्ल्ड कप जीता तो यह सिर्फ एक खेल जीत नहीं थी बल्कि जज़्बे संघर्ष औरआत्मनिर्भरता की ऐतिहासिक कहानी थी। इस जीत में मध्य प्रदेश की तीन बेटियों-सुनीता सराठे नर्मदापुरम सुषमापटेल दमोह और दुर्गा येवले बैतूल-ने अहम भूमिका निभाई। लेकिन विडंबना देखिए कि वर्ल्ड चैंपियन बनने के बावजूदइन बेटियों को अपने ही राज्य में अब तक न सम्मान मिला न पुरस्कार और न ही नौकरी की कोई घोषणा।इस ऐतिहासिक टूर्नामेंट में भारतीय टीम पूरे सफर में अजेय रही। फाइनल मुकाबले में भारत ने नेपाल को 7 विकेट सेहराकर ट्रॉफी पर कब्जा जमाया। खास बात यह रही कि जीत दिलाने वाले प्रदर्शन में MP की बेटियों का योगदान निर्णायक था। इसके बावजूद राज्य सरकार की चुप्पी अब सवालों के घेरे में है।

    दूसरे राज्यों ने बढ़ाया मान MP पीछे क्यों?
    जहां ओडिशा सरकार ने अपनी खिलाड़ियों को 11 लाख रुपए और सरकारी नौकरी कर्नाटक ने 10 लाख रुपए और नौकरीऔर आंध्र प्रदेश ने 15 लाख रुपए देने की घोषणा की वहीं मध्य प्रदेश सरकार की ओर से अब तक कोई आधिकारिक ऐलान नहीं हुआ। हैरानी की बात यह है कि इन तीनों खिलाड़ियों का आंध्र प्रदेश में भव्य सम्मान हुआ। वहां के डिप्टी सीएम पवन कल्याण ने प्रत्येक खिलाड़ी को 5-5 लाख रुपए की पुरस्कार राशि दी। यानी दूसरे राज्य ने MP की बेटियों को वह सम्मान दिया जो उनका अपना राज्य नहीं दे सका।

    क्रांति को फोन आया इन बेटियों को अपॉइंटमेंट भी नहीं
    क्रिकेट एसोसिएशन फॉर द ब्लाइंड मध्य प्रदेश के जनरल सेक्रेटरी और कोच सोनू गोलकर ने नाराज़गी जताते हुए कहा कि जब महिला क्रिकेटर क्रांति गौड़ वर्ल्ड कप जीतकर लौटीं तो नेताओं के फोन आए घोषणाएं हुईं। लेकिन इन दिव्यांग बेटियों के लिए एक अपॉइंटमेंट तक नहीं मिल रहा।गोलकर ने सवाल उठाया- क्या ये बेटियां सिर्फ इसलिए नजरअंदाज की जा रही हैं क्योंकि ये दिव्यांग हैं? अगर सम्मान नहीं मिला तो यह सीधा भेदभाव है। खिलाड़ियों का दर्द: फोन पर बधाई मिली मिलने कोई नहीं आया वर्ल्ड कप में सबसे ज्यादा विकेट लेने वाली ऑलराउंडर सुनीता सराठे कहती हैं मैंने दो विकेट लिए छह रन आउट किए लेकिन सरकार ने न बुलाया न सम्मानित किया। विधायक-सांसदों ने फोन पर बधाई दी पर मिलने कोई नहीं आया। दुर्गा येवले बताती हैं कि उन्होंने तीन रन आउट और दो स्टंपिंग की फिर भी सरकार की तरफ से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई। हम गांव से हैं परिवार हम पर निर्भर है। अगर नौकरी मिल जाए तो ज़िंदगी बदल सकती है।

    सुषमा पटेल का कहना है-
    यह हमारा पहला वर्ल्ड कप था और हम ट्रॉफी लेकर लौटे। सामान्य खिलाड़ियों को तुरंत सम्मान मिलता है लेकिन हमारे साथ भेदभाव क्यों? दिव्यांग खिलाड़ियों के लिए अलग स्पोर्ट्स पॉलिसी की मांग कोच सोनू गोलकर का कहना है कि जब तक दिव्यांग खिलाड़ियों के लिए अलग और ठोस स्पोर्ट्स पॉलिसी नहीं बनेगी तब तक ऐसी अनदेखी होती रहेगी। अगर क्रांति गौड़ के लिए खजाना खुल सकता है तो इन बेटियों के लिए क्यों नहीं? अब सवाल साफ है-क्या वर्ल्ड चैंपियन बनना भी दिव्यांग खिलाड़ियों के लिए काफी नहीं? क्या सम्मान सिर्फ कुछ चुनिंदा चेहरों तक सीमित है?