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  • मध्य प्रदेश में पुलिस महकमे को बड़ी मजबूती, 3 नई SISF बटालियन बनेंगी; हजारों पुलिसकर्मियों को प्रमोशन और भर्ती का ऐलान

    मध्य प्रदेश में पुलिस महकमे को बड़ी मजबूती, 3 नई SISF बटालियन बनेंगी; हजारों पुलिसकर्मियों को प्रमोशन और भर्ती का ऐलान


    भोपाल । मध्यप्रदेश में औद्योगिक संस्थानों और महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों की सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए राज्य सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सोमवार को भोपाल के रवीन्द्र भवन में आयोजित पुलिस विभाग की नवीन भर्ती और पदोन्नति आभार प्रदर्शन समारोह में राज्य औद्योगिक सुरक्षा बल यानी एसआईएसएफ की तीन नई बटालियन गठित करने का ऐलान किया। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि इन तीन बटालियनों में से एक का गठन खंडवा में किया जाएगा, जबकि बाकी दो बटालियन कहां स्थापित होंगी इसका फैसला बाद में किया जाएगा। सरकार के इस कदम को औद्योगिक और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण संस्थानों की सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने की दिशा में अहम माना जा रहा है।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इसी कार्यक्रम में राज्य के अति पिछड़े जनजातीय समूहों के युवाओं को सुरक्षा बल में अवसर देने की भी घोषणा की। उन्होंने कहा कि बैगा, भारिया और सहरिया समुदायों की अलग-अलग कंपनियां गठित की जाएंगी। इन कंपनियों में संबंधित जनजातीय समुदायों के युवाओं को शामिल किया जाएगा। सरकार का उद्देश्य इन समुदायों के युवाओं को रोजगार और सुरक्षा बल में प्रतिनिधित्व देने के साथ उन्हें मुख्यधारा से जोड़ना भी है। इस फैसले से आदिवासी क्षेत्रों के युवाओं के लिए सरकारी सेवा में नए अवसर खुलने की उम्मीद है।

    कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने पुलिस विभाग में पदोन्नति को लेकर भी सरकार की उपलब्धियां गिनाईं। उन्होंने बताया कि जुलाई 2026 में प्रदेश के विभिन्न विभागों में पदोन्नति की प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई और पुलिस विभाग में 58 संवर्गों के कुल 27,534 अफसरों और कर्मचारियों को पदोन्नति मिली। इनमें 30 रक्षित निरीक्षक पदोन्नत होकर उप पुलिस अधीक्षक बने हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि लंबे समय से पदोन्नति का इंतजार कर रहे पुलिसकर्मियों के लिए यह फैसला उनके मनोबल को बढ़ाने वाला है। उन्होंने कहा कि पुलिसकर्मियों के कंधों पर लगे सितारे सिर्फ पदोन्नति का प्रतीक नहीं बल्कि बढ़ी हुई जिम्मेदारी और क्षमता का भी संकेत हैं।

    मुख्यमंत्री ने यह भी स्वीकार किया कि पदोन्नति में लंबे समय तक आई रुकावट के कारण 20 हजार से ज्यादा पुलिसकर्मी सेवानिवृत्त हो गए और उन्हें अपने सेवाकाल में पदोन्नति का लाभ नहीं मिल सका। उन्होंने कहा कि इस बात का उन्हें मलाल है, लेकिन अब पदोन्नति का रास्ता खोल दिया गया है और आगे पात्रता के आधार पर पुलिसकर्मियों को आगे बढ़ने के अवसर मिलते रहेंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि पुलिस विभाग को मजबूत बनाने के लिए नए पदों की स्वीकृति और नियमित भर्ती पर सरकार लगातार काम कर रही है।

    डीजीपी कैलाश मकवाना ने बताया कि दिसंबर 2024 में पदभार संभालने के बाद पुलिस विभाग की विभिन्न शाखाओं की विस्तृत समीक्षा की गई थी। इस दौरान भर्ती एवं चयन शाखा में करीब 20 हजार पद खाली मिले। इनमें सब इंस्पेक्टर, सूबेदार, स्टेनो और एएसआई एम जैसे महत्वपूर्ण पद भी शामिल थे। डीजीपी के मुताबिक इन पदों पर करीब आठ साल से भर्ती नहीं हुई थी। लंबे समय तक रिक्तियां रहने के कारण मौजूदा पुलिसकर्मियों पर काम का दबाव बढ़ रहा था और इसका असर विभाग की कार्यक्षमता पर भी पड़ रहा था।

    सरकार ने अब इस स्थिति को बदलने के लिए भर्ती प्रक्रिया तेज की है। डीजीपी ने बताया कि वर्ष 2025 में करीब 6,500 पदों पर भर्ती का प्रस्ताव सरकार को भेजा गया था। इसके बाद विभिन्न पदों पर भर्ती की अनुमति मिली। वर्ष 2026 में भी पुलिस विभाग के अलग-अलग पदों पर 9,662 भर्तियों की अनुमति दी गई है। विभिन्न संवर्गों में 14,704 उम्मीदवारों का चयन हो चुका है, जबकि पुलिस बैंड और एफएसएल से जुड़ी भर्तियां दूसरे चरण में हैं। कुल मिलाकर 9,751 से अधिक पदों पर भर्ती प्रक्रिया आगे बढ़ रही है।

    नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने के लिए भी सरकार ने अतिरिक्त पदों को मंजूरी दी है। डीजीपी ने बताया कि मुख्यमंत्री की स्वीकृति से हॉक फोर्स में 325 और विशेष सहयोगी दस्ते में 882 पद स्वीकृत किए गए हैं। उन्होंने कहा कि लगातार उठाए गए कदमों और सुरक्षा बलों को मजबूत करने के परिणामस्वरूप मध्यप्रदेश नक्सल समस्या से मुक्त होने वाला देश का पहला राज्य बना है।

    मुख्यमंत्री ने पुलिसकर्मियों का उत्साह बढ़ाते हुए कहा कि पुलिस की वर्दी पहनने के बाद व्यक्ति के भीतर जिम्मेदारी और साहस का अलग भाव पैदा होता है। उन्होंने कहा कि पुलिस देशभक्ति और जनसेवा की भावना के साथ अपनी अलग पहचान बनाती है। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि गृह विभाग की जिम्मेदारी उनके पास होने के कारण वह पुलिस और आंतरिक सुरक्षा से जुड़े विषयों पर विशेष ध्यान देने का प्रयास करते हैं। कार्यक्रम में गृह विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों और पुलिस विभाग के आला अधिकारियों की मौजूदगी में मुख्यमंत्री का अभिनंदन किया गया और नई भर्तियों तथा पदोन्नतियों के लिए आभार व्यक्त किया गया।

  • हबीबगंज पुलिस की दो बड़ी चूक कोर्ट में उजागर, एक केस 5 साल गलत कोर्ट में चला, पॉक्सो में दो आरोपी बरी

    हबीबगंज पुलिस की दो बड़ी चूक कोर्ट में उजागर, एक केस 5 साल गलत कोर्ट में चला, पॉक्सो में दो आरोपी बरी


    मध्य प्रदेश। भोपाल की हबीबगंज थाना पुलिस की विवेचना में हुई गंभीर लापरवाहियां अदालत में उजागर हुई हैं। दो अलग-अलग मामलों में पुलिस की जांच प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए अदालत ने एक मामले में पांच वर्षों से चल रहे ट्रायल को निरस्त कर किशोर न्याय बोर्ड भेजने के निर्देश दिए, जबकि दूसरे पॉक्सो प्रकरण में विवेचना की गंभीर खामियों के चलते दोनों आरोपियों को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया। इन दोनों मामलों ने पुलिस की जांच प्रक्रिया और दस्तावेजी कार्रवाई की विश्वसनीयता पर गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं।

    पहला मामला वर्ष 2021 के एक मारपीट प्रकरण से जुड़ा है। पुलिस ने घटना के समय 17 वर्षीय किशोर को बालिग मानकर गिरफ्तार किया और उसके खिलाफ नियमित सत्र न्यायालय में चालान पेश कर दिया। इसके बाद करीब पांच वर्षों तक नियमित अदालत में ट्रायल चलता रहा। जब मामला अंतिम बहस के दौर में पहुंचा तो बचाव पक्ष ने अदालत के सामने किशोर की वास्तविक उम्र से जुड़े दस्तावेज पेश किए।

    सुनवाई के दौरान यह तथ्य सामने आया कि गिरफ्तारी से पहले ही किशोर के आधार कार्ड की प्रति थाने में जमा कराई जा चुकी थी, जिसमें उसकी जन्मतिथि 14 मार्च 2004 दर्ज थी। इसके बावजूद पुलिस ने उसे बालिग बताते हुए नियमित अदालत में चार्जशीट दाखिल कर दी, जबकि कानून के अनुसार मामला किशोर न्याय बोर्ड के समक्ष प्रस्तुत किया जाना चाहिए था।

    अदालत ने जन्मतिथि की पुष्टि के लिए माता-पिता और संबंधित ग्राम पंचायत सचिव के बयान दर्ज किए। मूल जन्म रजिस्टर के आधार पर यह प्रमाणित हुआ कि घटना के समय किशोर की उम्र 17 वर्ष से कुछ अधिक थी। इसके बाद अदालत ने नियमित न्यायालय में चल रही कार्यवाही समाप्त करते हुए थाना प्रभारी को सभी दस्तावेज किशोर न्याय बोर्ड में प्रस्तुत करने के निर्देश दिए। वहीं सह-आरोपी के खिलाफ मुकदमे की सुनवाई जारी रहेगी।

    दूसरा मामला 15 वर्षीय किशोरी से दुष्कर्म के आरोप से जुड़ा था। विशेष पॉक्सो अदालत में सुनवाई के दौरान पुलिस की जांच में कई गंभीर कमियां सामने आईं। विवेचना अधिकारी ने दावा किया कि पीड़िता को बेंगलुरु से बरामद किया गया था, लेकिन इस कार्रवाई से संबंधित कोई आधिकारिक रिकॉर्ड अदालत में प्रस्तुत नहीं किया गया। इतना ही नहीं, बेंगलुरु की स्थानीय पुलिस को भी बरामदगी की सूचना नहीं दी गई थी।

    अदालत ने यह भी पाया कि कथित बरामदगी पंचनामे पर मुख्य आरोपी के हस्ताक्षर तक नहीं कराए गए। इन परिस्थितियों में अदालत ने माना कि जांच प्रक्रिया में गंभीर खामियां हैं और बचाव पक्ष द्वारा लगाए गए आरोपों को पूरी तरह नकारा नहीं जा सकता। इसी आधार पर दोनों आरोपियों को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया गया।

    अदालत ने यह भी उल्लेख किया कि पीड़िता द्वारा आरोप लगाने के बावजूद मुख्य आरोपी की गिरफ्तारी तत्काल नहीं की गई। रिकॉर्ड के अनुसार पीड़िता की बरामदगी के तीन दिन बाद आरोपी को केवल नोटिस देकर गिरफ्तार किया गया, जबकि दूसरे आरोपी की गिरफ्तारी भी कई दिन बाद हुई। इस देरी और जांच प्रक्रिया की कमियों ने अभियोजन पक्ष के मामले को कमजोर कर दिया।

    इन दोनों मामलों ने स्पष्ट किया है कि विवेचना में छोटी-सी लापरवाही भी न्यायिक प्रक्रिया को वर्षों तक प्रभावित कर सकती है। अदालत के फैसलों ने यह संदेश दिया है कि जांच एजेंसियों के लिए कानूनी प्रक्रिया, दस्तावेजी साक्ष्य और निर्धारित नियमों का पालन करना अनिवार्य है, क्योंकि जांच में हुई त्रुटियों का सीधा असर न्याय मिलने की प्रक्रिया पर पड़ता है।

  • ऑपरेशन हमदर्द बना अपनों तक पहुंचने का सहारा, जीआरपी तैयार कर रही बेसहारा लोगों का डिजिटल डोजियर

    ऑपरेशन हमदर्द बना अपनों तक पहुंचने का सहारा, जीआरपी तैयार कर रही बेसहारा लोगों का डिजिटल डोजियर


    मध्य प्रदेश। रेलवे स्टेशन अक्सर हजारों यात्रियों की आवाजाही के साथ कई ऐसी कहानियों के भी गवाह बनते हैं, जहां कोई अपनों से बिछड़ जाता है तो कोई मजबूरी में स्टेशन को ही अपना ठिकाना बना लेता है। ऐसे ही लोगों को नई जिंदगी और परिवार का साथ दिलाने के उद्देश्य से मध्यप्रदेश जीआरपी ने ‘ऑपरेशन हमदर्द’ शुरू किया है। यह अभियान केवल बेसहारा लोगों की पहचान तक सीमित नहीं है, बल्कि उन्हें उनके परिवार से मिलाने और जरूरतमंदों के पुनर्वास का भी माध्यम बन रहा है।

    एक जुलाई से शुरू हुए इस विशेष अभियान के तहत रेलवे स्टेशनों पर रहने वाले बेसहारा, लावारिस और बिछड़े लोगों का डिजिटल डोजियर तैयार किया जा रहा है। इसमें उनकी तस्वीर, पहचान, व्यक्तिगत जानकारी और उपलब्ध अन्य विवरण दर्ज किए जा रहे हैं, ताकि जरूरत पड़ने पर उनकी पहचान आसान हो सके और परिजनों तक पहुंचने का रास्ता तैयार किया जा सके। अभियान के शुरुआती 11 दिनों में ही 363 लोगों का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार किया जा चुका है। केवल शनिवार को ही 31 लोगों की पहचान दर्ज की गई, जिनमें 21 पुरुष, 7 महिलाएं, 2 बालक और एक बालिका शामिल रहे।

    अभियान के दौरान कई भावुक कर देने वाले मामले भी सामने आए। आमला रेलवे स्टेशन पर मिले मोहम्मद कौशर करीब दस वर्षों से भीख मांगकर जीवन गुजार रहे थे। पूछताछ में उन्होंने बिहार के बेगूसराय का पता बताया। जीआरपी ने स्थानीय पुलिस और जनप्रतिनिधियों की मदद से उनके परिवार का पता लगाया। जब वीडियो कॉल पर वर्षों बाद भाई से बातचीत हुई तो दोनों की आंखें नम हो गईं। बाद में परिवार भोपाल पहुंचा और आवश्यक प्रक्रिया पूरी होने के बाद कौशर को उनके परिजनों के सुपुर्द कर दिया गया।

    एक अन्य मामले में आमला स्टेशन पर मिली 16 वर्षीय किशोरी ने बताया कि घर में डांट पड़ने के बाद वह नाराज होकर बिना बताए निकल आई थी। जीआरपी ने तुरंत उसके पिता से संपर्क किया और कानूनी औपचारिकताएं पूरी कर उसे सुरक्षित परिवार तक पहुंचा दिया।

    ग्वालियर रेलवे स्टेशन पर भी दो छोटे भाई-बहन अकेले बैठे रोते मिले। उनके पिता मोबाइल चार्जर लेने बाहर गए थे और लौटने में देर हो गई थी। बच्चों की घबराहट देखकर जीआरपी ने उन्हें सुरक्षित रखा और कुछ ही देर में पिता को तलाश कर दोनों बच्चों को उनके हवाले कर दिया।

    जीआरपी अधिकारियों के अनुसार अभियान का उद्देश्य केवल पहचान दर्ज करना नहीं है, बल्कि बेसहारा लोगों को सामाजिक संस्थाओं और आश्रय गृहों से जोड़कर उनका पुनर्वास भी सुनिश्चित करना है। वहीं, नाबालिग बच्चों से जुड़े मामलों में जुवेनाइल जस्टिस एक्ट के तहत आवश्यक कार्रवाई की जा रही है, ताकि उनकी सुरक्षा और भविष्य दोनों सुरक्षित रह सकें।

    ‘ऑपरेशन हमदर्द’ तकनीक और संवेदनशील पुलिसिंग का ऐसा प्रयास बनकर उभरा है, जो रेलवे स्टेशनों पर भटक रहे लोगों के लिए उम्मीद की नई किरण साबित हो रहा है। डिजिटल डोजियर के जरिए न केवल उनकी पहचान सुरक्षित हो रही है, बल्कि उन्हें अपनों तक पहुंचाने और सम्मानजनक जीवन दिलाने की दिशा में भी ठोस पहल की जा रही है।

  • इंदौर में नवविवाहित युवक का संदिग्ध सुसाइड, पति-पत्नी के विवाद की जांच में जुटी पुलिस

    इंदौर में नवविवाहित युवक का संदिग्ध सुसाइड, पति-पत्नी के विवाद की जांच में जुटी पुलिस


    इंदौर । इंदौर के मल्हारगंज थाना क्षेत्र में एक 20 वर्षीय युवक द्वारा फांसी लगाकर आत्महत्या किए जाने का मामला सामने आया है। युवक ने करीब दो महीने पहले ही प्रेम विवाह किया था। शुरुआती जांच में पति-पत्नी के बीच घरेलू विवाद की बात सामने आई है, जबकि मृतक के परिजनों ने पूरे घटनाक्रम पर संदेह जताते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की है। पुलिस ने मर्ग कायम कर मामले की जांच शुरू कर दी है।

    पुलिस के अनुसार मृतक की पहचान हुजुरगंज निवासी राजू पुत्र भागीरथ वर्मा के रूप में हुई है। शनिवार शाम परिजनों को सूचना मिली कि राजू ने अपने घर में फांसी लगा ली है। सूचना मिलते ही परिवार के सदस्य मौके पर पहुंचे। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया।

    परिजनों ने बताया कि राजू ने करीब दो महीने पहले प्रेम विवाह किया था। शादी के बाद दोनों परिवार से अलग रहकर अपना वैवाहिक जीवन बिता रहे थे। राजू एक प्रिंटिंग प्रेस में नौकरी करता था और परिवार के अनुसार सामान्य जीवन जी रहा था। हालांकि शादी के बाद पति-पत्नी के बीच अक्सर विवाद होने की बात सामने आई है। परिवार के लोग कई बार दोनों के बीच समझौता कराने की कोशिश भी कर चुके थे।

    मृतक के भाई कुणाल वर्मा ने इस घटना को लेकर संदेह व्यक्त किया है। उनका कहना है कि पूरे मामले की गहराई से और निष्पक्ष जांच की जानी चाहिए ताकि मौत की वास्तविक वजह सामने आ सके। परिजनों का कहना है कि केवल आत्महत्या मानकर मामले को बंद नहीं किया जाना चाहिए और सभी परिस्थितियों की गंभीरता से जांच होनी चाहिए।

    पुलिस के मुताबिक घटनास्थल से कोई सुसाइड नोट बरामद नहीं हुआ है। ऐसे में आत्महत्या के पीछे की वजह का पता लगाने के लिए परिजनों पत्नी और अन्य संबंधित लोगों से पूछताछ की जा रही है। पुलिस मोबाइल फोन और अन्य तकनीकी पहलुओं की भी जांच कर रही है ताकि घटना से जुड़ी हर जानकारी जुटाई जा सके।

    मल्हारगंज थाना पुलिस का कहना है कि पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट मिलने के बाद मौत के कारणों को लेकर अधिक स्पष्ट तस्वीर सामने आएगी। फिलहाल पुलिस सभी संभावित पहलुओं को ध्यान में रखते हुए जांच कर रही है और जांच पूरी होने के बाद आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

  • इंदौर में सनसनी, CHMO कार्यालय के पीछे मिला युवक का शव, सिर पर पत्थर से हमले के निशान

    इंदौर में सनसनी, CHMO कार्यालय के पीछे मिला युवक का शव, सिर पर पत्थर से हमले के निशान


    इंदौर । इंदौर के सेंट्रल कोतवाली थाना क्षेत्र में रविवार सुबह उस समय सनसनी फैल गई जब मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी कार्यालय के पीछे एक अज्ञात युवक का शव बरामद हुआ। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और जांच शुरू कर दी। प्रारंभिक जांच में युवक के सिर पर गंभीर चोट के निशान मिलने के बाद पुलिस हत्या की आशंका के तहत मामले की जांच कर रही है।

    घटना पालिका प्लाजा के पीछे स्थित मंदिर के ओटले की है जहां सुबह स्थानीय लोगों ने करीब 45 वर्षीय एक व्यक्ति को मृत अवस्था में पड़ा देखा। लोगों ने तत्काल पुलिस को सूचना दी। मौके पर पहुंची पुलिस ने घटनास्थल का निरीक्षण किया और शव को कब्जे में लेकर जांच शुरू की।

    पुलिस अधिकारियों के अनुसार मृतक के सिर पर पत्थर जैसी किसी भारी वस्तु से वार किए जाने के स्पष्ट निशान मिले हैं। शुरुआती जांच में यह आशंका जताई जा रही है कि युवक की कहीं और हत्या करने के बाद शव को इस स्थान पर लाकर फेंका गया हो सकता है। हालांकि पुलिस फिलहाल सभी संभावित पहलुओं को ध्यान में रखकर जांच कर रही है।

    मृतक की अब तक पहचान नहीं हो सकी है। पुलिस आसपास के थाना क्षेत्रों से गुमशुदा व्यक्तियों की जानकारी जुटा रही है और मृतक की शिनाख्त कराने के प्रयास किए जा रहे हैं। पहचान होने के बाद ही हत्या के पीछे की वजह और मृतक के संबंधों के बारे में अहम जानकारी सामने आ सकेगी।

    घटनास्थल और उसके आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज भी पुलिस ने खंगालना शुरू कर दिया है। जांच टीम यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि देर रात या तड़के किसी संदिग्ध व्यक्ति की गतिविधि कैमरों में कैद हुई है या नहीं। पुलिस को उम्मीद है कि फुटेज से आरोपियों तक पहुंचने में मदद मिल सकती है।

    शव को पोस्टमॉर्टम के लिए अस्पताल भेज दिया गया है। पुलिस का कहना है कि पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट आने के बाद मौत के सही कारण और घटना के समय का पता चल सकेगा। इसके बाद आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

    फिलहाल पुलिस हत्या की आशंका को ध्यान में रखते हुए तकनीकी साक्ष्यों और घटनास्थल से मिले सुरागों के आधार पर मामले की गहन जांच में जुटी हुई है।

  • भोपाल कार लूट केस में बड़ा खुलासा, FIR पर उठे सवाल, वारदात के दो घंटे बाद साथ बैठे मिले आरोपी और फरियादी

    भोपाल कार लूट केस में बड़ा खुलासा, FIR पर उठे सवाल, वारदात के दो घंटे बाद साथ बैठे मिले आरोपी और फरियादी


    भोपाल । भोपाल के कोहेफिजा थाना क्षेत्र में दर्ज कार लूट के चर्चित मामले ने अब नया मोड़ ले लिया है। शुरुआती तौर पर लूट की वारदात के रूप में दर्ज इस मामले में पुलिस जांच के दौरान ऐसे साक्ष्य सामने आए हैं जिन्होंने पूरे घटनाक्रम पर कई नए सवाल खड़े कर दिए हैं। पुलिस को फरियादी और मुख्य आरोपी के बीच पैसों के लेनदेन से जुड़ी चैट मिली है। इसके साथ ही एक ऐसा सीसीटीवी फुटेज भी सामने आया है जिसमें एफआईआर में दर्ज लूट के समय से करीब दो घंटे बाद आरोपी और फरियादी एक ही ढाबे पर साथ बैठे दिखाई दे रहे हैं।

    पुलिस के अनुसार पंचवटी कॉलोनी निवासी 27 वर्षीय सौरव सीतलानी ने शिकायत दर्ज कराई थी कि उसके परिचित आदित्य शर्मा उर्फ छोटू ने उसे परवलिया स्थित एक ढाबे पर बुलाया था। वहां आदित्य के साथ बाबर उर्फ मंडी मुईन और बुशरान भी मौजूद थे। खाना खाने के बाद सभी लोग सौरव की टाटा टियागो कार से भोपाल लौट रहे थे। आरोप है कि मनुआभान टेकरी के पास आदित्य ने दोस्त से मिलने का बहाना बनाकर कार रुकवाई और इसके बाद चारों ने मारपीट कर कार लूट ली।

    हालांकि जांच के दौरान सामने आए सीसीटीवी फुटेज ने इस कहानी पर सवाल खड़े कर दिए हैं। फुटेज के अनुसार लूट की कथित वारदात के लगभग दो घंटे बाद सभी लोग परवलिया रोड स्थित उसी ढाबे पर एक साथ बैठे दिखाई दे रहे हैं। अब पुलिस यह भी जांच कर रही है कि सीसीटीवी में दर्ज समय सही है या किसी तकनीकी कारण से उसमें गड़बड़ी है। इसके लिए ढाबा संचालक से भी पूछताछ की जाएगी।

    जांच में फरियादी और मुख्य आरोपी के बीच हुई चैट भी पुलिस के हाथ लगी है जिसमें पैसों के लेनदेन का जिक्र है। इससे यह आशंका भी जताई जा रही है कि मामला केवल कार लूट का नहीं बल्कि आर्थिक विवाद से भी जुड़ा हो सकता है। पुलिस अब इस पहलू की भी गहराई से जांच कर रही है।

    जांच के दौरान एक और महत्वपूर्ण तथ्य सामने आया है। पुलिस के अनुसार फरियादी पहले एक मोबाइल एप के माध्यम से ऑनलाइन सट्टा संचालन से जुड़ा रहा है और इस मामले में उसे राजस्थान पुलिस पहले गिरफ्तार भी कर चुकी है। पुलिस को यह जानकारी भी मिली है कि आरोपी भी उसी नेटवर्क से जुड़े हो सकते हैं। इसी वजह से अब पूरे मामले में सट्टा कनेक्शन की भी जांच की जा रही है।

    फिलहाल पुलिस ने दो आरोपियों बुशरान और मुईन को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है जबकि मुख्य आरोपी आदित्य समेत अन्य फरार आरोपियों की तलाश जारी है। लूटी गई टाटा टियागो कार भी अभी तक बरामद नहीं हो सकी है। पुलिस तकनीकी साक्ष्यों मोबाइल चैट सीसीटीवी फुटेज और कॉल डिटेल के आधार पर पूरे घटनाक्रम की कड़ियां जोड़ने में जुटी हुई है।

    कोहेफिजा थाना प्रभारी लोकेंद्र सिंह ठाकुर का कहना है कि फरियादी का पुराना रिकॉर्ड सामने आया है लेकिन शुरुआती जांच में यह स्पष्ट हुआ है कि उसके साथ मारपीट हुई और कार भी छीनी गई। उन्होंने बताया कि फरार आरोपियों की तलाश जारी है और सभी पहलुओं की निष्पक्ष जांच के बाद आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

  • वर्दी से वायरल स्टार तक का सफर, सोशल मीडिया कमाई और विभागीय कार्रवाई के बीच क्यों दिया हेड कॉन्स्टेबल ने इस्तीफा

    वर्दी से वायरल स्टार तक का सफर, सोशल मीडिया कमाई और विभागीय कार्रवाई के बीच क्यों दिया हेड कॉन्स्टेबल ने इस्तीफा


    मध्यप्रदेश । मध्य प्रदेश पुलिस के सबसे चर्चित सोशल मीडिया चेहरों में शामिल शहडोल के निलंबित हेड कॉन्स्टेबल विवेकानंद तिवारी इन दिनों फिर सुर्खियों में हैं। करोड़ों फॉलोअर्स और सोशल मीडिया पर जबरदस्त लोकप्रियता हासिल करने वाले तिवारी ने पुलिस सेवा से इस्तीफा देकर सबको चौंका दिया। हालांकि उनका इस्तीफा अभी विभाग ने स्वीकार नहीं किया है और पूरे मामले की विभागीय जांच जारी है। इस घटनाक्रम ने सरकारी सेवा और सोशल मीडिया से होने वाली कमाई के बीच संतुलन को लेकर नई बहस छेड़ दी है।

    विवेकानंद तिवारी फेसबुक यूट्यूब और इंस्टाग्राम जैसे प्लेटफॉर्म पर बेहद लोकप्रिय हैं। उनके सभी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म मिलाकर करीब एक करोड़ अठासी लाख फॉलोअर्स बताए जाते हैं। पुलिस विभाग ने तीन जून को उन्हें निलंबित किया था। आरोप था कि वे कई बार बिना अनुमति ड्यूटी से अनुपस्थित रहे और इसी दौरान वर्दी में वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर अपलोड करते रहे। इसके करीब दो सप्ताह बाद उन्होंने पुलिस सेवा से इस्तीफा दे दिया।

    विभागीय जांच में सबसे बड़ा सवाल उनकी सोशल मीडिया से होने वाली आय को लेकर उठा है। विभिन्न ऑनलाइन एनालिटिक्स वेबसाइटों के अनुमानों के आधार पर दावा किया जा रहा है कि उनके डिजिटल प्लेटफॉर्म से लाखों रुपये मासिक और करोड़ों रुपये सालाना की संभावित कमाई हो सकती है। हालांकि इन आंकड़ों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। विवेकानंद तिवारी ने इन दावों को बढ़ा चढ़ाकर पेश किया गया बताया है। उनका कहना है कि वास्तविक आय इससे काफी कम है और सभी सोशल मीडिया अकाउंट उनकी पत्नी के नाम पर संचालित होते हैं। उन्होंने जांच एजेंसियों को अपने और पत्नी के बैंक खातों का पूरा रिकॉर्ड भी उपलब्ध कराने की बात कही है।

    पुलिस विभाग का दूसरा आरोप यह है कि तिवारी कई बार निर्धारित समय पर ड्यूटी पर नहीं पहुंचे और बिना अनुमति अनुपस्थित रहे। विभाग के अनुसार जिन दिनों उनकी गैरहाजिरी दर्ज हुई उन्हीं दिनों उनके सोशल मीडिया अकाउंट पर नए वीडियो अपलोड किए गए। वहीं तिवारी का कहना है कि वे मेडिकल अवकाश पर थे और इसकी जानकारी विभाग के आधिकारिक व्हाट्सएप ग्रुप में पहले ही साझा कर दी गई थी। उनके अनुसार अवकाश की प्रक्रिया पूरी नहीं होने के कारण गलतफहमी पैदा हुई और उन्हें अनुपस्थित मान लिया गया।

    विवाद का एक बड़ा कारण वर्दी में वीडियो बनाना भी बना। पुलिस मुख्यालय पहले ही स्पष्ट निर्देश जारी कर चुका है कि कोई भी पुलिसकर्मी वर्दी में ऐसे वीडियो या रील नहीं बनाएगा जिससे विभाग की गरिमा प्रभावित हो। विभाग का आरोप है कि विवेकानंद तिवारी निजी वीडियोग्राफरों और कर्मचारियों की मदद से व्यावसायिक उद्देश्य से कंटेंट तैयार करते थे। हालांकि तिवारी का कहना है कि उन्होंने कभी ड्यूटी के दौरान वीडियो नहीं बनाए और अधिकतर वीडियो पहले से रिकॉर्ड किए गए थे जिन्हें उनकी पत्नी बाद में अपलोड करती थीं।

    मामले के दौरान पुलिस विभाग ने उन्हें दो विकल्प भी दिए थे। पहला यह कि वे पुलिस के सोशल मीडिया सेल में रहकर जनजागरूकता से जुड़े आधिकारिक वीडियो बनाएं। दूसरा यह कि वे पुलिस मुख्यालय की सोशल मीडिया शाखा में सेवाएं दें। लेकिन इससे पहले ही उन्होंने इस्तीफा सौंप दिया।

    विवेकानंद तिवारी का कहना है कि निलंबन के बाद लगातार मानसिक दबाव और अपमान की भावना के कारण उन्होंने नौकरी छोड़ने का निर्णय लिया। दूसरी ओर विभाग से जुड़े सूत्रों का मानना है कि सोशल मीडिया से संभावित अधिक आय भी इस फैसले का एक कारण हो सकती है। फिलहाल विभागीय जांच जारी है और अंतिम निष्कर्ष उसी के बाद सामने आएगा।

  • रहस्यमयी गुमशुदगी से हत्या तक कर्ज प्रेम संबंध और एक फोन कॉल में उलझी नरसिंहपुर की सनसनीखेज कहानी

    रहस्यमयी गुमशुदगी से हत्या तक कर्ज प्रेम संबंध और एक फोन कॉल में उलझी नरसिंहपुर की सनसनीखेज कहानी


    मध्य प्रदेश। मध्य प्रदेश के नरसिंहपुर जिले में एक युवक की रहस्यमयी गुमशुदगी और सात दिन बाद तालाब से मिली लाश ने पूरे इलाके को झकझोर दिया। शुरुआत में यह मामला गुमशुदगी या हादसे का माना जा रहा था लेकिन पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने पूरी कहानी बदल दी। जांच में सामने आए एक फोन कॉल कर्ज के विवाद और पारिवारिक रिश्तों से जुड़े कई पहलुओं ने इस हत्याकांड को और भी रहस्यमय बना दिया।

    घटना 24 जनवरी 2021 की है। करेली निवासी 32 वर्षीय सपनेश पटेल शाम के समय अपने काम से लौटने की तैयारी कर रहे थे। तभी उनके मोबाइल पर एक परिचित का फोन आया जिसमें उन्हें पार्टी में शामिल होने के लिए बुलाया गया। सपनेश तुरंत वहां जाने के लिए निकल गए लेकिन इसके बाद उनका कोई सुराग नहीं मिला। रात भर इंतजार करने के बाद भी जब वह घर नहीं लौटे और उनका मोबाइल भी बंद मिला तो परिजनों की चिंता बढ़ गई।

    अगले दिन परिवार ने रिश्तेदारों और दोस्तों के यहां तलाश शुरू की लेकिन कहीं कोई जानकारी नहीं मिली। आखिरकार करेली थाने में गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई गई। इस बीच गांव में तरह तरह की चर्चाएं भी शुरू हो गईं। कुछ लोगों ने बताया कि सपनेश पर पहले भी कर्ज था और संभव है कि वह फिर कहीं चला गया हो। हालांकि पुलिस ने हर पहलू को ध्यान में रखते हुए जांच जारी रखी।

    जांच के दौरान पुलिस ने कॉल डिटेल खंगाली तो पता चला कि लापता होने से पहले सपनेश की आखिरी बातचीत उनके रिश्तेदार सूर्यप्रकाश पटेल से हुई थी। पूछताछ में सूर्यप्रकाश ने स्वीकार किया कि उसने ही सपनेश को शराब पार्टी के लिए बुलाया था लेकिन इसके बाद वह लगातार यही कहता रहा कि सपनेश शायद कर्ज के कारण कहीं चला गया होगा। उसके बयान पुलिस के संदेह को और गहरा करते गए।

    सात दिन बाद डूडा गांव के पास एक तालाब में ग्रामीणों ने एक शव देखा। सूचना पर पहुंची पुलिस ने शव को बाहर निकलवाया और परिजनों से पहचान कराई। शव सपनेश का ही था। लंबे समय तक पानी में रहने के कारण शव सड़ चुका था लेकिन पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने सबसे बड़ा खुलासा किया। डॉक्टरों ने साफ किया कि मौत डूबने से नहीं बल्कि गला दबाकर हत्या करने से हुई थी। गले पर तार जैसी किसी वस्तु से कसने के स्पष्ट निशान मिले थे। इसके बाद पुलिस ने हत्या का मामला दर्ज कर जांच का दायरा और बढ़ा दिया।

    इसी दौरान सपनेश के भाई ने पुलिस को बताया कि सूर्यप्रकाश का उनके घर में लगातार आना जाना था और उसने कई बार उसे सपनेश की पत्नी के साथ बेहद घुलते मिलते देखा था। इस जानकारी के बाद जांच की दिशा बदल गई और पुलिस ने यह पता लगाने की कोशिश शुरू की कि हत्या के पीछे असली वजह कर्ज थी या पारिवारिक संबंधों से जुड़ा कोई विवाद।

    फिलहाल इस सनसनीखेज मामले में कई सवाल अब भी अनुत्तरित हैं। क्या हत्या की साजिश पहले से रची गई थी या यह किसी विवाद का नतीजा थी। इन सवालों के जवाब जांच के अगले चरण में सामने आने की उम्मीद है।

  • MP पुलिस की बेटी ने रचा इतिहास, माउंट किलिमंजारो फतह करने वाली पहली महिला अधिकारी बनीं दीपिका गौतम

    MP पुलिस की बेटी ने रचा इतिहास, माउंट किलिमंजारो फतह करने वाली पहली महिला अधिकारी बनीं दीपिका गौतम


    मध्यप्रदेश । मध्यप्रदेश पुलिस की एक महिला अधिकारी ने अपने साहस, दृढ़ संकल्प और जुनून से ऐसा इतिहास रच दिया है, जिस पर पूरा प्रदेश गर्व कर सकता है। भोपाल स्थित एससीआरबी (SCRB) पुलिस मुख्यालय में पदस्थ इंस्पेक्टर दीपिका गौतम ने अफ्रीका की सबसे ऊंची चोटी माउंट किलिमंजारो को फतह कर मध्यप्रदेश पुलिस के इतिहास में अपना नाम दर्ज करा लिया है। इस उपलब्धि के साथ वह प्रदेश पुलिस की पहली महिला अधिकारी बन गई हैं, जिन्होंने इस प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय पर्वत अभियान को सफलतापूर्वक पूरा किया है।

    तंजानिया में स्थित माउंट किलिमंजारो समुद्र तल से लगभग 5,895 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है और इसे दुनिया के सबसे प्रसिद्ध पर्वत अभियानों में गिना जाता है। दीपिका गौतम ने 29 मई को इस ऊंची चोटी पर पहुंचकर तिरंगा लहराया और अपनी उपलब्धि से देश तथा प्रदेश का नाम रोशन किया।

    इस अभियान की सबसे खास बात यह रही कि अंतरराष्ट्रीय पर्वतारोहण दल में दीपिका भारत की एकमात्र प्रतिभागी थीं। कठिन मौसम, ऊंचाई पर ऑक्सीजन की कमी और लगातार बदलती प्राकृतिक परिस्थितियों के बीच उन्होंने यह चुनौती स्वीकार की और सफलता हासिल की।

    दीपिका बताती हैं कि नौकरी और परिवार की जिम्मेदारियों के बीच अक्सर लोग अपने सपनों को अधूरा छोड़ देते हैं, लेकिन उन्होंने अपने सपनों को कभी पीछे नहीं छोड़ा। उनका मानना है कि जीवन में लक्ष्य और सपने होना बेहद जरूरी है, क्योंकि यही व्यक्ति को आगे बढ़ने की प्रेरणा देते हैं। इसी सोच ने उन्हें अफ्रीका की सबसे ऊंची चोटी तक पहुंचने का हौसला दिया।

    माउंट किलिमंजारो का यह अभियान आसान नहीं था। पांच दिनों तक चले इस कठिन सफर में उन्हें तीन अलग-अलग बेस कैंप पार करने पड़े। अंतिम चरण की चढ़ाई रात के समय शुरू हुई, जब तापमान माइनस 10 से 15 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया था। ऊंचाई बढ़ने के साथ मौसम लगातार बदल रहा था और हर कदम पर नई चुनौती सामने थी। इसके बावजूद दीपिका ने धैर्य, शारीरिक क्षमता और मानसिक मजबूती का परिचय देते हुए अपने लक्ष्य को हासिल किया।

    हालांकि यह उनका पहला बड़ा अंतरराष्ट्रीय पर्वत अभियान था, लेकिन रोमांच और ट्रेकिंग के क्षेत्र में उनका अनुभव पहले से ही काफी समृद्ध रहा है। वह कई बार अमरनाथ और केदारनाथ जैसी कठिन धार्मिक यात्राएं पूरी कर चुकी हैं। पर्वतारोहण और साहसिक गतिविधियों के प्रति उनका विशेष लगाव रहा है, जिसने उन्हें इस मुकाम तक पहुंचाया।

    दीपिका स्वयं को मल्टीटास्किंग व्यक्ति मानती हैं और उनका विश्वास है कि जीवन में नई चुनौतियों को स्वीकार करना ही सफलता का मार्ग बनाता है। उनकी यह उपलब्धि न केवल महिला पुलिस अधिकारियों के लिए प्रेरणा है, बल्कि उन सभी लोगों के लिए भी एक संदेश है जो जिम्मेदारियों के बीच अपने सपनों को जीवित रखना चाहते हैं।

    माउंट किलिमंजारो फतह करने के बाद अब दीपिका का अगला लक्ष्य भी तय हो चुका है। हालांकि उन्होंने अपने आगामी अभियान का खुलासा नहीं किया है, लेकिन संकेत दिए हैं कि अगले वर्ष वह विदेश में एक और बड़े पर्वतारोहण मिशन का हिस्सा बन सकती हैं। उनकी यह उपलब्धि आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा और साहस का प्रतीक बन गई है।

  • देवास में चोरी गिरोह का पर्दाफाश: एलएंडटी पाइप चोरी मामले में पुलिस की बड़ी कार्रवाई

    देवास में चोरी गिरोह का पर्दाफाश: एलएंडटी पाइप चोरी मामले में पुलिस की बड़ी कार्रवाई


    मध्‍य प्रदेश /देवास जिले के बागली क्षेत्र में एलएंडटी कंपनी से पाइप चोरी के एक संगठित मामले का पुलिस ने सफलतापूर्वक खुलासा किया है। कांटाफोड़ थाना पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए इस घटना में शामिल तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जबकि इस मामले से जुड़े अन्य आरोपियों की तलाश अभी भी जारी है। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से चोरी किए गए लोहे के पाइप और वारदात में इस्तेमाल की गई पिकअप गाड़ी सहित लगभग 5 लाख रुपए मूल्य का माल बरामद किया है, जिससे पूरे क्षेत्र में इस कार्रवाई की चर्चा हो रही है।

    यह पूरा मामला 14 मई का बताया जा रहा है, जब एलएंडटी कंपनी प्रबंधन की ओर से पाइप चोरी की लिखित शिकायत पुलिस थाने में दर्ज कराई गई थी। शिकायत मिलते ही पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच शुरू की। शुरुआती जांच में यह स्पष्ट हुआ कि चोरी की घटना सुनियोजित तरीके से अंजाम दी गई थी और इसमें एक संगठित गिरोह की भूमिका हो सकती है। इसके बाद पुलिस ने तकनीकी साक्ष्यों और स्थानीय मुखबिर तंत्र की मदद से जांच को आगे बढ़ाया।

    लगातार प्रयासों के बाद पुलिस को महत्वपूर्ण सुराग हाथ लगे, जिनके आधार पर संदिग्धों की पहचान की गई। इसके बाद विशेष टीम ने घेराबंदी कर तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ के दौरान आरोपियों ने अपना जुर्म स्वीकार कर लिया और बताया कि उन्होंने तुमड़ीखेड़ा क्षेत्र के पास से एलएंडटी कंपनी के पाइप चोरी किए थे। आरोपियों के बयान और उनकी निशानदेही के आधार पर पुलिस ने चोरी किया गया पूरा सामान बरामद कर लिया।

    हालांकि पुलिस की इस कार्रवाई के बावजूद मामला पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है। जांच में यह भी सामने आया है कि इस चोरी की घटना में कुल सात लोग शामिल थे, जिनमें से चार आरोपी अभी फरार हैं। बताया जा रहा है कि ये फरार आरोपी चोरी के माल को खरीदने और उसे आगे बेचने के नेटवर्क से जुड़े हुए हैं। पुलिस अब इस पूरे गिरोह की कड़ियों को जोड़ने में जुटी है और फरार आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए लगातार दबिश दी जा रही है।

    पुलिस अधिकारियों के अनुसार, यह कार्रवाई केवल एक चोरी के मामले का खुलासा नहीं है, बल्कि एक संभावित संगठित अपराध नेटवर्क की ओर भी इशारा करती है। इसलिए जांच को और व्यापक किया जा रहा है ताकि इस पूरे गिरोह की जड़ तक पहुंचा जा सके। कांटाफोड़ थाना प्रभारी के नेतृत्व में की गई इस कार्रवाई को पुलिस की एक महत्वपूर्ण सफलता के रूप में देखा जा रहा है, जिसने न केवल चोरी का खुलासा किया बल्कि त्वरित कार्रवाई से माल भी बरामद कर लिया।

    इस घटना के बाद क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था और औद्योगिक इकाइयों की निगरानी को लेकर भी चर्चा तेज हो गई है। पुलिस का कहना है कि फरार आरोपियों की जल्द गिरफ्तारी सुनिश्चित की जाएगी और पूरे मामले का पूरी तरह से पर्दाफाश किया जाएगा, जिससे भविष्य में ऐसी घटनाओं पर रोक लगाई जा सके।