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  • MP की राजनीति में एक दिन के कई रंग: शिवलिंग लेकर दिखे सीएम तो जीप में ज्यादा भीड़ पड़ी भारी बच्चों ने पूछे विकास के सवाल

    MP की राजनीति में एक दिन के कई रंग: शिवलिंग लेकर दिखे सीएम तो जीप में ज्यादा भीड़ पड़ी भारी बच्चों ने पूछे विकास के सवाल


    भोपाल । मध्य प्रदेश की राजनीति में मंगलवार का दिन कई दिलचस्प घटनाओं का गवाह बना। कहीं मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव मंच पर शिवलिंग को कंधे पर उठाते नजर आए तो कहीं इंदौर के महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने मुख्यमंत्री की तुलना भगवान द्वारिकाधीश से कर दी। देवास में कांग्रेस की तिरंगा यात्रा के दौरान नेताओं की भीड़ एक खुली जीप पर भारी पड़ गई और कुछ नेता नीचे जा गिरे। वहीं छतरपुर में बच्चों ने मंत्री दिलीप अहिरवार का काफिला रोककर अपने स्कूल और सड़क से जुड़ी समस्याएं सामने रख दीं। इन घटनाओं के वीडियो और तस्वीरें सामने आने के बाद राजनीतिक गलियारों में भी इनकी खूब चर्चा हो रही है।

    इंदौर में एक कार्यक्रम के दौरान भाजपा कार्यकर्ताओं ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को शिवलिंग भेंट किया। शिवलिंग हाथ में लेते ही मुख्यमंत्री ने उसे अपने कंधे पर उठा लिया। उनका यह अंदाज फिल्म बाहुबली के चर्चित दृश्य की याद दिलाता नजर आया। कार्यक्रम में मौजूद लोगों ने इस पल का वीडियो बनाया जो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल होने लगा। इसके बाद इस दृश्य को लेकर राजनीतिक चर्चाओं का दौर भी शुरू हो गया।

    इसी कार्यक्रम में इंदौर के महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने मुख्यमंत्री को लेकर अपने संबोधन में भगवान द्वारिकाधीश का संदर्भ दिया। उन्होंने चंदन नगर में सड़क निर्माण से जुड़ी मांग रखते हुए मुख्यमंत्री से समस्या के समाधान की अपील की। संबोधन के दौरान महापौर से एक और दिलचस्प गलती हो गई। वे मंत्री तुलसी सिलावट का नाम लेना चाह रहे थे लेकिन जुबान फिसलने के कारण उन्होंने कैलाश विजयवर्गीय को जल संसाधन मंत्री बता दिया। मुख्यमंत्री के इशारे के बाद महापौर ने तुरंत अपनी गलती सुधार ली।

    उधर देवास के कांटाफोड़ में कांग्रेस की तिरंगा यात्रा के दौरान एक अलग ही तस्वीर सामने आई। यात्रा में शामिल होने के लिए एक खुली जीप में कई कांग्रेस नेता सवार हो गए। बताया गया कि जीप में 10 से ज्यादा लोग मौजूद थे। पीछे अधिक वजन होने के कारण जीप का अगला हिस्सा ऊपर उठ गया और पीछे बैठे कुछ नेता नीचे जा गिरे। इस दौरान पूर्व मंत्री सज्जन सिंह वर्मा कांग्रेस जिला अध्यक्ष मनीष चौधरी और पूर्व विधायक विपिन वानखेड़े समेत कई नेता जीप में मौजूद थे। हादसे में एक महिला कांग्रेस नेता के घायल होने की बात सामने आई है जिन्हें उपचार के दौरान टांके लगाए गए।

    इस घटना के बाद सोशल मीडिया पर कांग्रेस के सबका साथ जैसे राजनीतिक नारों को लेकर भी चुटकी ली गई। हालांकि रैली के दौरान वाहन पर क्षमता से अधिक लोगों के सवार होने की स्थिति सुरक्षा को लेकर सवाल जरूर खड़े करती है।

    छतरपुर के बसराही गांव में मंत्री दिलीप अहिरवार का काफिला बच्चों ने रोक लिया। मंत्री चंदला विधानसभा क्षेत्र से गुजर रहे थे तभी बच्चों ने रास्ते में आकर उनसे अपने स्कूल और गांव की समस्याओं के बारे में बात की। बच्चों ने स्कूल तक खराब सड़क स्कूल की बाउंड्री वॉल और बिजली से जुड़ी परेशानियां बताईं। मंत्री ने वाहन से उतरकर बच्चों की बातें सुनीं और समस्याओं के समाधान का भरोसा दिया।

    यह घटना इस मायने में भी खास रही कि बच्चों ने बिना किसी झिझक के सीधे मंत्री के सामने अपनी समस्याएं रखीं। गांव की बुनियादी सुविधाओं से जुड़े सवालों को लेकर बच्चों की सक्रियता ने लोगों का ध्यान खींचा है। अब देखना होगा कि बच्चों की ओर से बताई गई समस्याओं के समाधान के लिए प्रशासन कितनी तेजी से कदम उठाता है।

    इन घटनाओं के बीच प्रशासनिक गलियारों से जुड़ी एक चर्चा भी सामने आई है। राजधानी में हाल ही में पदस्थ हुए एक आईएएस अधिकारी को सरकारी बंगला आवंटित होने और उसमें उनकी पसंद के अनुसार रेनोवेशन शुरू होने की बात कही जा रही है। इसी बीच अधिकारी की कटारा हिल्स इलाके में एक निजी बंगले में रुचि की चर्चा भी प्रशासनिक हलकों में है। हालांकि इस मामले से जुड़े दावों की आधिकारिक पुष्टि सामने नहीं आई है।

    कुल मिलाकर मध्य प्रदेश की सियासत और प्रशासन से जुड़ी इन घटनाओं ने एक ही दिन में कई रंग दिखा दिए। मुख्यमंत्री का शिवलिंग उठाने वाला अंदाज हो या महापौर की जुबान फिसलने का मामला कांग्रेस नेताओं का जीप से गिरना हो या बच्चों का मंत्री का काफिला रोककर अपनी बात कहना इन सभी घटनाओं ने लोगों का ध्यान खींचा है।

  • नामांतरण मामलों की जानकारी न मिलने पर भड़के विधायक, प्रशासन पर लगाया लापरवाही का आरोप

    नामांतरण मामलों की जानकारी न मिलने पर भड़के विधायक, प्रशासन पर लगाया लापरवाही का आरोप


    नई दिल्ली ।  मध्य प्रदेश के रतलाम जिले की सैलाना विधानसभा से विधायक Kamleshwar Dodiyar ने नगर परिषद सैलाना के खिलाफ कड़ा रुख अपनाते हुए 14 मई से धरने पर बैठने की चेतावनी दी है। विधायक का आरोप है कि नगर परिषद द्वारा जनहित से जुड़े नामांतरण प्रकरणों की जानकारी समय पर उपलब्ध नहीं कराई जा रही है, जो लोकतांत्रिक व्यवस्था और जनप्रतिनिधि के अधिकारों का उल्लंघन है।

    विधायक डोडियार ने बताया कि उन्होंने 28 अप्रैल 2026 को पत्र क्रमांक 244/VIP/2026 के माध्यम से मुख्य नगरपालिका अधिकारी से नामांतरण मामलों की विस्तृत जानकारी मांगी थी। इसमें यह पूछा गया था कि 26 मार्च 2026 तक कितने नामांतरण प्रकरण प्राप्त हुए, उनमें से कितने स्वीकृत और कितने अस्वीकृत किए गए।

    इसके अलावा उन्होंने स्वीकृत और अस्वीकृत मामलों की अलग-अलग सूची, आवेदकों के नाम, संपत्ति का विवरण, खसरा नंबर, वार्ड नंबर और स्वीकृति तिथि जैसी विस्तृत जानकारी भी मांगी थी। साथ ही यह भी स्पष्ट करने को कहा गया था कि स्वीकृत सभी प्रकरण नगरीय सीमा क्षेत्र में आते हैं या नहीं।

    विधायक का कहना है कि इतने महत्वपूर्ण जनहित के मुद्दे पर नगर परिषद द्वारा निर्धारित समय सीमा में कोई जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई, जिससे क्षेत्र के लोगों में असंतोष बढ़ रहा है। नागरिकों की लगातार शिकायतें भी सामने आ रही हैं कि नामांतरण मामलों में अनावश्यक देरी की जा रही है।

    इसी लापरवाही के विरोध में विधायक ने 14 मई से नगर परिषद के खिलाफ अनिश्चितकालीन धरने की घोषणा की है। उन्होंने इसकी सूचना सैलाना एसडीएम और थाना प्रभारी को भी दे दी है तथा धरने के दौरान सुरक्षा और आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने की मांग की है। यह मामला अब प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के बीच टकराव का रूप लेता दिख रहा है, जिस पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।

  • दलित आदिवासी और OBC के मुद्दे पर सरकार घिरी UCC पर नेता प्रतिपक्ष का बड़ा बयान

    दलित आदिवासी और OBC के मुद्दे पर सरकार घिरी UCC पर नेता प्रतिपक्ष का बड़ा बयान

    भोपाल । मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में समान नागरिक संहिता यानी UCC को लेकर सियासी माहौल गर्माता जा रहा है सरकार जहां इस कानून को लागू करने की दिशा में आगे बढ़ रही है वहीं विपक्ष ने इस पर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने सरकार की मंशा और प्रक्रिया दोनों पर सवाल उठाते हुए इसे लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ बताया है

    उमंग सिंघार ने कहा कि सरकार को यह स्पष्ट करना चाहिए कि UCC को सर्वसम्मति से लागू किया जाएगा या इसे जबरन थोपा जाएगा उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार संविधान और लोकतंत्र की भावना के विपरीत काम कर रही है सिंघार ने खास तौर पर दलित और आदिवासी समुदायों को लेकर चिंता जताई और पूछा कि क्या इन वर्गों को UCC के दायरे में शामिल किया जाएगा या नहीं

    उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि सात सदस्यों की कमेटी आखिर कैसे तय करेगी कि किन लोगों को इस कानून में शामिल किया जाना चाहिए और किन्हें नहीं उनके अनुसार इतने महत्वपूर्ण विषय पर निर्णय लेने से पहले प्रदेश की जनता से व्यापक राय लेना जरूरी है उन्होंने सरकार से अपील की कि वह इस मुद्दे पर पारदर्शिता बरते और जनता के साथ संवाद स्थापित करे

    इस दौरान सिंघार ने असलम चमड़ा मामले को लेकर भी सरकार पर निशाना साधा उन्होंने आरोप लगाया कि असलम हो या अन्य आरोपी उन्हें सत्ता पक्ष का संरक्षण मिल रहा है उन्होंने कहा कि इन मामलों में नगर निगम और विभागीय स्तर पर कनेक्शन सामने आ रहे हैं लेकिन कार्रवाई के नाम पर केवल खानापूर्ति की जा रही है

    नेता प्रतिपक्ष ने यह भी कहा कि विपक्ष ने अपनी जिम्मेदारी निभाते हुए मुद्दों को उठाया लेकिन सत्ता पक्ष ने आरोपियों को बचाने का काम किया उन्होंने सरकार से जवाब मांगा कि आखिर इन मामलों में सख्त कार्रवाई क्यों नहीं की जा रही

    इसके अलावा सिंघार ने OBC आरक्षण के मुद्दे पर भी सरकार को घेरा उन्होंने कहा कि सरकार इस विषय पर गंभीर नहीं है और केवल राजनीतिक लाभ के लिए OBC वर्ग का इस्तेमाल कर रही है उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार बार बार मामले को कोर्ट के पाले में डाल रही है और खुद जिम्मेदारी लेने से बच रही है

    सिंघार ने यह भी कहा कि सरकार अपने लोगों को लाभ पहुंचाने में ज्यादा रुचि दिखा रही है जबकि आम जनता के मुद्दों को नजरअंदाज किया जा रहा है उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर कब तक OBC आरक्षण जैसे महत्वपूर्ण मुद्दे पर निर्णय टलता रहेगा

    कुल मिलाकर UCC OBC आरक्षण और अन्य मामलों को लेकर मध्य प्रदेश में राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है जहां एक ओर सरकार इसे सुधार की दिशा में कदम बता रही है वहीं विपक्ष इसे जनता के हितों के खिलाफ बताते हुए लगातार हमलावर बना हुआ है आने वाले समय में यह मुद्दा और अधिक तूल पकड़ सकता है और प्रदेश की राजनीति को प्रभावित कर सकता है

  • नर्मदापुरम में क्रेडिट की सियासत शिवराज के स्वागत में दिखीं सांसद लेकिन पोस्ट से गायब हुआ नाम

    नर्मदापुरम में क्रेडिट की सियासत शिवराज के स्वागत में दिखीं सांसद लेकिन पोस्ट से गायब हुआ नाम

    नर्मदापुरम । मध्य प्रदेश के नर्मदापुरम में एक साधारण सा स्वागत कार्यक्रम अचानक सियासी चर्चा का केंद्र बन गया जब केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान के दौरे के दौरान हुई एक छोटी सी सोशल मीडिया गतिविधि ने बड़े सवाल खड़े कर दिए इस घटना ने एक बार फिर यह साबित कर दिया कि राजनीति में हर तस्वीर और हर शब्द के अपने मायने होते हैं

    मंगलवार रात करीब 10 बजकर 10 मिनट पर शिवराज सिंह चौहान का काफिला भाजपा सांसद दर्शन सिंह चौधरी के जनता कार्यालय पहुंचा जहां उनका भव्य स्वागत किया गया ढोल नगाड़ों और आतिशबाजी के बीच उन्हें पारंपरिक तरीके से हल भेंट किया गया कार्यक्रम छोटा था और शिवराज सिंह करीब 10 मिनट रुककर आगे बढ़ गए लेकिन इसके बाद जो हुआ उसने पूरे मामले को चर्चा में ला दिया

    कार्यक्रम के बाद सांसद दर्शन सिंह चौधरी ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर स्वागत की तस्वीरें साझा कीं इन तस्वीरों में क्षेत्र के कई प्रमुख नेता और कार्यकर्ता नजर आए पोस्ट में विधायकों और जिला अध्यक्ष का नाम विस्तार से लिखा गया लेकिन हैरानी की बात यह रही कि राज्यसभा सांसद माया नारोलिया का नाम पूरी तरह से गायब था

    दिलचस्प पहलू यह है कि जिन तस्वीरों को पोस्ट किया गया उनमें माया नारोलिया स्पष्ट रूप से सामने की पंक्ति में खड़ी दिखाई दे रही हैं वह विधायक के ठीक बगल में मुस्कुराती नजर आती हैं यानी उनकी मौजूदगी किसी से छिपी नहीं थी इसके बावजूद पोस्ट में उनका नाम शामिल न होना कई सवाल खड़े कर रहा है

    इस पूरे घटनाक्रम के बाद स्थानीय राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है लोग यह जानने की कोशिश कर रहे हैं कि यह महज एक मानवीय भूल है या फिर इसके पीछे कोई सियासी रणनीति या आंतरिक खींचतान छिपी हुई है कई लोग इसे भाजपा के भीतर चल रही क्रेडिट की राजनीति से जोड़कर देख रहे हैं जहां बड़े नेताओं के कार्यक्रमों में अपने योगदान को प्रमुखता देने की होड़ रहती है

    राजनीति में क्रेडिट लेना और देना दोनों ही अहम माना जाता है ऐसे में किसी वरिष्ठ नेता का नाम नजरअंदाज करना सामान्य बात नहीं मानी जाती खासकर तब जब वह कार्यक्रम में प्रमुख रूप से मौजूद हों यही वजह है कि इस छोटी सी चूक ने बड़ा रूप ले लिया है और सोशल मीडिया पर लोग इस पर तरह तरह की प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं

    हालांकि इस मामले पर अभी तक किसी भी नेता की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है लेकिन जिस तरह से यह मुद्दा चर्चा में आया है उससे साफ है कि आने वाले दिनों में यह सियासी समीकरणों पर असर डाल सकता है

    यह घटना एक बार फिर दिखाती है कि आज के दौर में सोशल मीडिया केवल जानकारी साझा करने का माध्यम नहीं बल्कि राजनीति का एक महत्वपूर्ण मंच बन चुका है जहां एक छोटी सी पोस्ट भी बड़े राजनीतिक संदेश दे सकती है और कभी कभी अनजाने में ही विवाद का कारण बन जाती है

  • महिला आरक्षण पर कांग्रेस का बड़ा फैसला नेताओं की पत्नियों को नहीं मिलेगा टिकट

    महिला आरक्षण पर कांग्रेस का बड़ा फैसला नेताओं की पत्नियों को नहीं मिलेगा टिकट

    भोपाल । भोपाल में आयोजित महिला कांग्रेस की अहम बैठक में महिला आरक्षण को लेकर एक बड़ा और संकेतात्मक फैसला सामने आया है जिसने प्रदेश की राजनीति में नई बहस को जन्म दे दिया है सूत्रों के अनुसार बैठक में इस बात पर गंभीर चर्चा हुई कि यदि किसी विधानसभा या लोकसभा सीट को महिलाओं के लिए आरक्षित किया जाता है तो वहां पुरुष नेताओं की पत्नियों या पारिवारिक सदस्यों को टिकट नहीं दिया जाएगा बल्कि पार्टी की सक्रिय और जमीनी महिला कार्यकर्ताओं को प्राथमिकता दी जाएगी

    यह बैठक प्रदेश कांग्रेस कमेटी कार्यालय में आयोजित हुई जहां महिला सशक्तिकरण और संगठन को मजबूत करने के उद्देश्य से कई मुद्दों पर विचार विमर्श किया गया इस दौरान यह बात प्रमुख रूप से सामने आई कि महिला आरक्षण का वास्तविक उद्देश्य तभी पूरा होगा जब उन महिलाओं को आगे बढ़ने का अवसर दिया जाए जो लंबे समय से संगठन के लिए काम कर रही हैं और जमीनी स्तर पर सक्रिय भूमिका निभा रही हैं

    बैठक में मौजूद नेताओं ने यह भी कहा कि अब समय आ गया है कि राजनीति में परिवारवाद की परंपरा को सीमित किया जाए खासकर उन परिस्थितियों में जहां महिलाओं के लिए सीट आरक्षित की जाती है वहां केवल पारिवारिक आधार पर टिकट देना महिला नेतृत्व के वास्तविक विकास में बाधा बन सकता है यही कारण है कि पार्टी के भीतर इस सोच को आगे बढ़ाया जा रहा है कि टिकट वितरण में पारदर्शिता और योग्यता को प्राथमिकता दी जाए

    सूत्रों के मुताबिक इस प्रस्ताव को पॉलिटिकल अफेयर्स कमेटी के समक्ष रखने की तैयारी की जा रही है जहां इसे औपचारिक मंजूरी मिल सकती है यदि यह प्रस्ताव पारित होता है तो यह न केवल मध्यप्रदेश बल्कि पूरे देश में कांग्रेस के लिए एक सकारात्मक संदेश के रूप में देखा जाएगा क्योंकि इससे यह संकेत जाएगा कि पार्टी महिला सशक्तिकरण को केवल नारे तक सीमित नहीं रखना चाहती बल्कि उसे व्यवहार में भी लागू करना चाहती है

    राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस तरह का कदम पार्टी के भीतर नई ऊर्जा का संचार कर सकता है और उन महिला कार्यकर्ताओं को प्रोत्साहित करेगा जो वर्षों से संगठन में सक्रिय रहते हुए भी अवसर की प्रतीक्षा कर रही हैं इससे पार्टी की छवि में भी सुधार हो सकता है और युवा तथा महिला मतदाताओं के बीच विश्वास बढ़ सकता है

    हालांकि इस प्रस्ताव को लेकर अंतिम निर्णय अभी बाकी है लेकिन जिस तरह से इसे लेकर चर्चा हुई है उससे साफ संकेत मिलते हैं कि कांग्रेस अब संगठनात्मक ढांचे में बदलाव और सुधार की दिशा में आगे बढ़ रही है आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि यह प्रस्ताव किस रूप में लागू होता है और इसका राजनीतिक परिदृश्य पर क्या प्रभाव पड़ता है

    कुल मिलाकर भोपाल में हुई इस बैठक ने यह स्पष्ट कर दिया है कि महिला आरक्षण के मुद्दे पर कांग्रेस केवल औपचारिकता निभाने के बजाय ठोस और प्रभावी कदम उठाने की दिशा में सोच रही है जो आने वाले चुनावों में पार्टी की रणनीति का अहम हिस्सा बन सकता है