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  • नगर निकाय चुनाव से पहले बड़ा प्रशासनिक बदलाव बैतूल को नगर निगम बनाने की तैयारी तेज 26 पंचायतों का सर्वे शुरू

    नगर निकाय चुनाव से पहले बड़ा प्रशासनिक बदलाव बैतूल को नगर निगम बनाने की तैयारी तेज 26 पंचायतों का सर्वे शुरू


    नई दिल्ली। मध्य प्रदेश में अगले वर्ष प्रस्तावित नगरीय निकाय चुनाव से पहले बैतूल को नगर निगम का दर्जा दिए जाने की तैयारी तेज हो गई है। नगरीय विकास एवं आवास विभाग के निर्देश के बाद जिला प्रशासन ने प्रस्तावित नगर निगम की सीमा तय करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। कलेक्टर को उन ग्राम पंचायतों का अध्ययन कर रिपोर्ट तैयार करने की जिम्मेदारी दी गई है जिन्हें नई नगर निगम सीमा में शामिल किया जाना प्रस्तावित है। इसी रिपोर्ट के आधार पर राज्य सरकार अंतिम निर्णय लेगी।

    बैतूल को नगर निगम बनाने की चर्चा इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि यह भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष और स्थानीय विधायक हेमंत खंडेलवाल का विधानसभा क्षेत्र है। प्रशासनिक स्तर पर इस दिशा में गतिविधियां तेज होने के बाद इस प्रस्ताव को लेकर राजनीतिक और स्थानीय स्तर पर भी चर्चाएं बढ़ गई हैं।

    नगर निगम गठन की प्रक्रिया के तहत जनपद पंचायत बैतूल की मुख्य कार्यपालन अधिकारी ने प्रस्तावित ग्राम पंचायतों में कार्यरत कर्मचारियों का विस्तृत ब्यौरा तैयार कराया है। इसमें पंचायत सचिव रोजगार सहायक और अन्य कर्मचारियों की जानकारी एकत्र की गई है। यह रिपोर्ट संबंधित एसडीएम और राजस्व अधिकारियों के माध्यम से कलेक्टर को भेजी जा चुकी है ताकि प्रशासनिक मूल्यांकन पूरा किया जा सके।

    जानकारी के अनुसार इस विषय पर जिला प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के बीच बैठक भी आयोजित की गई है जिसमें प्रस्तावित क्षेत्रों को नगर निगम सीमा में शामिल करने की संभावनाओं पर चर्चा हुई। इसके बाद संबंधित गांवों की प्रशासनिक स्थिति आबादी और अन्य आवश्यक मानकों का परीक्षण शुरू किया गया है।

    प्रस्ताव के अनुसार कुल 26 ग्राम पंचायतों को बैतूल नगर निगम की सीमा में शामिल किया जा सकता है। इनमें कढ़ाई दनोरा बड़ोरा आरूल बाजपुर भैंसदेही खेड़ली मरामझिरी टेमनी जामठी खेड़ला डहरगांव खेड़ी सांवलीगढ़ महदगांव भड़ूस कुम्हारटेक भोगीतेड़ा रोढ़ा सूरगांव भरकावाड़ी खंडारा मलकापुर मिलानपुर बयावाड़ी ढोड़वाड़ा और खड़ला शामिल हैं। इन क्षेत्रों के शामिल होने से नगर निगम की आबादी और क्षेत्रफल दोनों में उल्लेखनीय वृद्धि होगी।

    यदि राज्य सरकार इस प्रस्ताव को मंजूरी देती है तो नगर निगम गठन से पहले कैबिनेट की स्वीकृति आवश्यक होगी। इसके बाद संबंधित ग्राम पंचायतों को पंचायत क्षेत्र से हटाकर नगर निगम सीमा में शामिल किया जाएगा। साथ ही इन क्षेत्रों के मतदाताओं के नाम पंचायत मतदाता सूची से हटाकर नगर निगम की मतदाता सूची में जोड़े जाएंगे। पूरी प्रक्रिया समय पर पूरी करना आवश्यक होगा ताकि अगले नगरीय निकाय चुनाव नई व्यवस्था के तहत कराए जा सकें।

    वर्तमान में मध्य प्रदेश में 16 नगर निगम हैं। इनमें भोपाल इंदौर ग्वालियर जबलपुर उज्जैन सागर रीवा सतना सिंगरौली छिंदवाड़ा रतलाम मुरैना कटनी देवास खंडवा और बुरहानपुर शामिल हैं। इसके अलावा मुख्यमंत्री पहले ही विदिशा को नगर निगम बनाने की घोषणा कर चुके हैं हालांकि वहां प्रक्रिया अभी अंतिम चरण तक नहीं पहुंची है। अब बैतूल को लेकर भी प्रशासनिक प्रक्रिया तेज होने से आने वाले महीनों में महत्वपूर्ण फैसला होने की संभावना जताई जा रही है।

  • मध्य प्रदेश की सियासत में हलचल राहुल गांधी के पोस्टर पर विवाद दिग्विजय सिंह का वीडियो वायरल मंत्री का ऑटो चलाना बना चर्चा का विषय

    मध्य प्रदेश की सियासत में हलचल राहुल गांधी के पोस्टर पर विवाद दिग्विजय सिंह का वीडियो वायरल मंत्री का ऑटो चलाना बना चर्चा का विषय


    मध्य प्रदेश मध्य प्रदेश की राजनीति में शनिवार को कई घटनाएं चर्चा का विषय बनी रहीं। छतरपुर में कांग्रेस के एक कार्यक्रम के दौरान मंच पर लगे पोस्टर में राहुल गांधी के हाथ में संविधान की उलटी प्रति दिखाई देने से पार्टी विपक्ष के निशाने पर आ गई। वहीं पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह का एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर चर्चा में रहा जिसमें वह एक मशहूर फिल्मी डायलॉग पूरा नहीं कर सके। दूसरी ओर प्रदेश सरकार के मंत्री विश्वास सारंग का ऑटो चलाते हुए वीडियो भी लोगों का ध्यान खींचता रहा।

    छतरपुर में कांग्रेस ने छात्रों से जुड़े मुद्दों पर प्रेस वार्ता आयोजित की थी। हालांकि कार्यक्रम के मुद्दों से ज्यादा चर्चा मंच पर लगे पोस्टर और बैनर की हुई। पोस्टर में राहुल गांधी के हाथ में संविधान की प्रति उलटी दिखाई दे रही थी। वहीं एक अन्य बैनर में उनके चेहरे पर केक लगा हुआ नजर आया। कांग्रेस नेताओं ने इसे प्रिंटिंग की तकनीकी गलती बताया लेकिन विपक्ष ने इस मुद्दे पर पार्टी की आलोचना की।

    इसी बीच भोपाल में मीसाबंदियों के एक कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इस मामले पर कांग्रेस पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि संविधान की सबसे अधिक अनदेखी और दुरुपयोग कांग्रेस के शासनकाल में हुआ है। मुख्यमंत्री की इस टिप्पणी के बाद पोस्टर विवाद को लेकर राजनीतिक बयानबाजी और तेज हो गई।

    उधर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह भी एक कार्यक्रम के दौरान अलग कारण से सुर्खियों में रहे। कार्यक्रम की एंकर ने पहले उनसे फिल्मों के शौक के बारे में पूछा जिस पर उन्होंने मुस्कुराते हुए जवाब दिया कि सिनेमा का शौक किसे नहीं होता। इसके बाद उनसे मशहूर फिल्मी डायलॉग ये ढाई किलो का हाथ पूरा करने के लिए कहा गया। सवाल सुनकर दिग्विजय सिंह हंस पड़े लेकिन उन्होंने डायलॉग पूरा करने के बजाय बात को टाल दिया। इसके बाद उनका यह वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से साझा किया जाने लगा।

    इधर प्रदेश सरकार में मंत्री विश्वास सारंग का एक अलग अंदाज भी देखने को मिला। अपने विधानसभा क्षेत्र में मीसाबंदी रहे बुजुर्ग रामकुमार पटेल से मुलाकात करने पहुंचे सारंग ने कुछ समय के लिए ऑटो की ड्राइविंग सीट संभाली और ऑटो चलाया। उन्होंने इस वीडियो को अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर भी साझा किया जिसके बाद यह लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गया।

    इन घटनाओं के बीच राजनीतिक गलियारों में प्रशासनिक हलचल की भी चर्चा रही। बताया जा रहा है कि एक विभाग में नए डायरेक्टर के रूप में पदभार संभालने वाले युवा आईएएस अधिकारी ने लंबे समय से प्रभाव रखने वाले एक अधिकारी की जिम्मेदारियों और प्रभाव को सीमित करना शुरू कर दिया है। हालांकि इस संबंध में कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है और यह चर्चा राजनीतिक तथा प्रशासनिक हलकों तक सीमित है।

    कुल मिलाकर प्रदेश की राजनीति में एक ही दिन पोस्टर विवाद नेताओं के वायरल वीडियो और प्रशासनिक चर्चाओं ने सियासी माहौल को गर्माए रखा।

  • बीजेपी मध्यप्रदेश में संगठन का बड़ा विस्तार 106 सदस्यीय प्रदेश कार्यसमिति घोषित दिग्गज नेताओं से लेकर नए चेहरों तक साधे गए राजनीतिक और सामाजिक समीकरण

    बीजेपी मध्यप्रदेश में संगठन का बड़ा विस्तार 106 सदस्यीय प्रदेश कार्यसमिति घोषित दिग्गज नेताओं से लेकर नए चेहरों तक साधे गए राजनीतिक और सामाजिक समीकरण


    मध्यप्रदेश  मध्यप्रदेश में भारतीय जनता पार्टी ने संगठनात्मक स्तर पर बड़ा कदम उठाते हुए नई प्रदेश कार्यसमिति की घोषणा कर दी है। प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल की ओर से जारी सूची में कुल 106 नेताओं को प्रदेश कार्यसमिति सदस्य बनाया गया है। इस नई टीम में मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया सहित पार्टी के कई वरिष्ठ और प्रभावशाली नेताओं को शामिल किया गया है। इसके साथ ही विभिन्न क्षेत्रों और सामाजिक वर्गों के प्रतिनिधित्व को महत्व देते हुए अनेक नए चेहरों को भी जिम्मेदारी सौंपी गई है।

    नई कार्यसमिति को भाजपा के आगामी राजनीतिक और संगठनात्मक अभियानों के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। पार्टी नेतृत्व ने इस सूची के माध्यम से स्पष्ट संकेत दिया है कि आने वाले वर्षों में संगठन को और अधिक मजबूत बनाने के लिए अनुभव और युवा नेतृत्व के बीच संतुलन स्थापित किया जाएगा। प्रदेश कार्यसमिति में वरिष्ठ नेताओं के साथ महिला प्रतिनिधित्व को भी पर्याप्त महत्व दिया गया है। कई महिला नेताओं को शामिल कर भाजपा ने संगठन में महिलाओं की बढ़ती भूमिका को रेखांकित करने का प्रयास किया है।

    घोषित सूची में जगदीश देवड़ा कैलाश विजयवर्गीय प्रह्लाद पटेल विष्णु दत्त शर्मा नरेंद्र सिंह तोमर के करीबी नेताओं सहित कई अनुभवी कार्यकर्ताओं को स्थान मिला है। वहीं विभिन्न संभागों और जिलों से जुड़े नेताओं को भी प्रतिनिधित्व देकर क्षेत्रीय संतुलन साधने की कोशिश की गई है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भाजपा ने इस नई कार्यसमिति के जरिए संगठन के भीतर सभी प्रमुख वर्गों और क्षेत्रों को साथ लेकर चलने का संदेश दिया है।

    सूची जारी होने के बाद पार्टी कार्यकर्ताओं में उत्साह का माहौल देखा जा रहा है। कार्यसमिति में शामिल नेताओं ने इसे संगठन के प्रति अपनी जिम्मेदारी और पार्टी नेतृत्व के विश्वास का सम्मान बताया है। वहीं जिन नए चेहरों को मौका मिला है उनके लिए यह राजनीतिक रूप से बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है। भाजपा नेतृत्व का मानना है कि मजबूत संगठन ही चुनावी सफलता की सबसे बड़ी कुंजी है और इसी सोच के तहत कार्यसमिति का गठन किया गया है।

    राजनीतिक दृष्टि से यह घोषणा इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि प्रदेश में आने वाले समय में नगरीय निकाय चुनाव पंचायत चुनाव और 2028 के विधानसभा चुनाव की तैयारियां धीरे-धीरे शुरू होने वाली हैं। ऐसे में भाजपा संगठन को बूथ स्तर तक सक्रिय करने और सरकार की योजनाओं को जनता तक पहुंचाने के लिए नई टीम पर भरोसा जता रही है। पार्टी की रणनीति साफ है कि संगठन और सरकार के बीच बेहतर समन्वय स्थापित कर राजनीतिक आधार को और मजबूत किया जाए।

    नई प्रदेश कार्यसमिति में वरिष्ठ नेताओं के अनुभव और युवा कार्यकर्ताओं की ऊर्जा का समावेश भाजपा की भविष्य की रणनीति को दर्शाता है। माना जा रहा है कि यह टीम न केवल संगठनात्मक गतिविधियों को गति देगी बल्कि आगामी चुनावी चुनौतियों के लिए भी पार्टी को मजबूत आधार प्रदान करेगी। भाजपा की इस घोषणा को प्रदेश की राजनीति में एक महत्वपूर्ण संगठनात्मक कदम माना जा रहा है जिसकी राजनीतिक चर्चा आने वाले दिनों में और तेज हो सकती है।

  • राज्यसभा चुनाव में गरमाई राजनीति, सीएम का बड़ा बयान- जीत तक चैन नहीं

    राज्यसभा चुनाव में गरमाई राजनीति, सीएम का बड़ा बयान- जीत तक चैन नहीं


    मध्यप्रदेश । मध्य प्रदेश की राजनीति में राज्यसभा की तीसरी सीट को लेकर मुकाबला बेहद रोचक हो गया है। भाजपा ने महेश केवट को प्रत्याशी बनाकर चुनावी समीकरणों में नया मोड़ ला दिया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने नामांकन के दौरान इसे रामायण से जोड़ते हुए कहा कि रामराजा की नगरी में भगवान राम का आशीर्वाद एक बार फिर निषादराज की परंपरा को आगे बढ़ा रहा है।

    महेश केवट ने भी इसे रामायण की भावना से जोड़ते हुए कहा कि जैसे भगवान राम ने निषादराज को गले लगाया था, वैसे ही भाजपा ने वंचित वर्ग को सम्मान दिया है। इसी बयान के बाद राजनीतिक हलकों में “केवट की नैया” और “सियासी रामायण” की चर्चा तेज हो गई है।

    आंकड़ों की जंग और सत्ता की रणनीति
    वर्तमान राजनीतिक गणित के अनुसार भाजपा के पास करीब 48 वोट बताए जा रहे हैं, जबकि जीत के लिए 58 वोटों की जरूरत है। यही वजह है कि तीसरी सीट का समीकरण पूरी तरह अनिश्चित बना हुआ है। दूसरी ओर कांग्रेस ने भी अपने विधायकों को टूट-फूट से बचाने के लिए सख्त रणनीति अपनाई है।

    कांग्रेस ने 62 विधायकों को बेंगलुरु शिफ्ट करने का फैसला किया है ताकि क्रॉस वोटिंग की आशंका को रोका जा सके। पार्टी नेताओं का दावा है कि सभी विधायक एकजुट हैं, लेकिन अंदरूनी डर ने सियासी माहौल को गर्म कर दिया है।

    कांग्रेस की बाड़ाबंदी और भाजपा पर आरोप
    कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी और वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह ने आरोप लगाया है कि भाजपा विधायकों की खरीद-फरोख्त की कोशिश कर सकती है। वहीं भाजपा खेमे का दावा है कि उनके पास अतिरिक्त समर्थन जुटाने की रणनीति मौजूद है। राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा भी तेज है कि क्या भाजपा विपक्षी खेमे में सेंध लगाने में सफल होगी या कांग्रेस अपनी एकजुटता बचा पाएगी।

    ‘पुष्पा’ गेटअप में महाकाल दर्शन, वायरल वीडियो से उठे सवाल
    उज्जैन के महाकाल मंदिर में एक युवक का ‘पुष्पा’ फिल्म स्टाइल में दर्शन करने का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। युवक ने अल्लू अर्जुन के किरदार जैसा गेटअप अपनाया और मंदिर परिसर में आकर्षण का केंद्र बन गया।

    हैरानी की बात यह रही कि सुरक्षा कर्मी उसके साथ मौजूद रहे और उसे वीआईपी तरीके से दर्शन भी कराए गए। कुछ कर्मचारियों ने उसके साथ सेल्फी भी ली, जबकि मंदिर में फोटो-वीडियो पर रोक है। इस घटना के बाद मंदिर की सुरक्षा व्यवस्था और नियमों के पालन पर सवाल खड़े हो गए हैं।

    सियासत, धर्म और व्यवस्था पर सवाल
    एक तरफ राज्यसभा चुनाव में रामायण के पात्रों के जरिए सियासी संदेश दिए जा रहे हैं, तो दूसरी तरफ मंदिर में ‘पुष्पा’ स्टाइल वायरल वीडियो व्यवस्था पर सवाल उठा रहा है। मध्य प्रदेश की राजनीति और प्रशासनिक घटनाएं इन दिनों लगातार सुर्खियों में बनी हुई हैं।

  • कालापीपल में सियासी तनाव: बयान पर सियासत गरम, प्रदर्शन के दौरान पुलिस-कार्यकर्ता भिड़ंत

    कालापीपल में सियासी तनाव: बयान पर सियासत गरम, प्रदर्शन के दौरान पुलिस-कार्यकर्ता भिड़ंत


    कालापीपल । कालापीपल में सोमवार को उस समय तनावपूर्ण स्थिति बन गई जब मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के हालिया बयान के विरोध में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन किया। यह विरोध मुख्यमंत्री द्वारा कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी को लेकर दिए गए बयान के बाद तेज हुआ।

    प्रदर्शन के दौरान बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता सड़क पर उतर आए और मुख्यमंत्री के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। कार्यकर्ताओं ने मुख्यमंत्री के बयान को “अशोभनीय” बताते हुए माफी की मांग की और पुतला दहन का प्रयास किया।

    पुलिस ने रोका पुतला दहन, मौके पर बढ़ा तनाव
    स्थिति तब बिगड़ गई जब पुलिस ने प्रदर्शनकारियों से मुख्यमंत्री का पुतला छीन लिया। इस दौरान कार्यकर्ताओं और पुलिस के बीच हल्की झड़प भी हुई। हालात काबू में लाने के लिए पुलिस ने बल प्रयोग किया और भीड़ को हटाने के लिए वाटर कैनन का इस्तेमाल किया।
    घटना के दौरान कुछ समय के लिए माहौल तनावपूर्ण बना रहा, हालांकि अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती के बाद स्थिति पर नियंत्रण पा लिया गया।

    राजनीतिक बयान से भड़की सियासत
    यह पूरा विवाद मुख्यमंत्री के उस बयान के बाद शुरू हुआ, जिसमें उन्होंने कहा था-
    “हम तो अभिनंदन लाल हैं, तुम टपोरी लाल हो।” मुख्यमंत्री ने विपक्ष पर सरकार के विकास कार्यों का विरोध करने का आरोप लगाते हुए जीतू पटवारी पर भी तीखी टिप्पणी की थी। उन्होंने कहा था कि ऐसे प्रदेशाध्यक्ष पहले कभी नहीं देखे गए, जिनके कार्यकाल में चुनावी उम्मीदवार भी मैदान छोड़कर चले गए।

    कांग्रेस की प्रतिक्रिया और मांग
    कांग्रेस नेताओं ने इस बयान को अपमानजनक बताते हुए मुख्यमंत्री से सार्वजनिक रूप से माफी मांगने की मांग की है। पार्टी कार्यकर्ताओं का कहना है कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में इस तरह की भाषा स्वीकार्य नहीं है।

    जमीनी हालात पर प्रशासन की नजर
    प्रशासन ने घटना के बाद क्षेत्र में सुरक्षा बढ़ा दी है और स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है। पुलिस का कहना है कि किसी भी तरह की अव्यवस्था बर्दाश्त नहीं की जाएगी और शांति बनाए रखने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं।

  • मेरे लिए पहले से सोच चुके थे प्रधानमंत्री’, शिवराज सिंह चौहान की किताब से निकले राजनीतिक सफर के अहम खुलासे

    मेरे लिए पहले से सोच चुके थे प्रधानमंत्री’, शिवराज सिंह चौहान की किताब से निकले राजनीतिक सफर के अहम खुलासे

    नई दिल्ली । मध्य प्रदेश की राजनीति में वर्ष 2023 के विधानसभा चुनाव के बाद हुए बड़े बदलावों ने उस समय व्यापक राजनीतिक चर्चा को जन्म दिया था। लंबे समय तक राज्य की कमान संभालने के बाद सत्ता परिवर्तन और नए नेतृत्व के चयन को लेकर कई तरह की अटकलें सामने आई थीं। अब इन घटनाओं से जुड़ी कई अहम बातें सामने आई हैं, जिन्हें केंद्रीय मंत्री Shivraj Singh Chouhan ने अपनी नई पुस्तक में विस्तार से साझा किया है। राजनीतिक घटनाक्रमों से जुड़े इन अनुभवों ने एक बार फिर उस दौर की चर्चाओं को ताजा कर दिया है।

    अपनी पुस्तक में शिवराज सिंह चौहान ने मुख्यमंत्री पद से केंद्रीय राजनीति तक के सफर का जिक्र करते हुए कई व्यक्तिगत और राजनीतिक अनुभव साझा किए हैं। उन्होंने लिखा कि विधानसभा चुनावों में बड़ी जीत के बाद पार्टी ने राज्य में नए नेतृत्व को आगे बढ़ाने का निर्णय लिया था। उन्होंने इस बदलाव को संगठन का निर्णय मानते हुए पूरी सहजता के साथ स्वीकार किया। उनके अनुसार राजनीति में पद से अधिक महत्वपूर्ण संगठन और जिम्मेदारी होती है।

    पुस्तक में एक प्रसंग का उल्लेख करते हुए उन्होंने बताया कि मध्य प्रदेश में नए मुख्यमंत्री के शपथ ग्रहण समारोह के दौरान प्रधानमंत्री Narendra Modi ने उनसे दिल्ली आने और बातचीत करने की बात कही थी। उस समय राजनीतिक चर्चा का केंद्र नए मुख्यमंत्री थे, लेकिन बाद में जब उन्होंने केंद्रीय मंत्री पद की शपथ ली तो उन्हें एहसास हुआ कि उनके भविष्य को लेकर पहले से एक सोच तैयार की जा चुकी थी। उन्होंने लिखा कि बाद में यह स्पष्ट हुआ कि उनके लिए नई भूमिका को लेकर योजना पहले से तय थी।

    शिवराज सिंह चौहान ने अपने राजनीतिक जीवन के उस महत्वपूर्ण दौर का भी उल्लेख किया, जब मध्य प्रदेश में नए मुख्यमंत्री के रूप में Mohan Yadav के नाम की घोषणा हुई। उन्होंने लिखा कि स्वाभाविक रूप से ऐसी परिस्थितियों में भावनात्मक प्रतिक्रियाएं सामने आ सकती थीं, लेकिन संगठन के संस्कार और पारिवारिक सीख ने उन्हें संयम बनाए रखने की प्रेरणा दी। उन्होंने इसे एक कार्यकर्ता की वास्तविक परीक्षा बताया।

    उन्होंने अपनी पुस्तक में यह भी लिखा कि उनकी पार्टी अनुशासन और त्याग के सिद्धांतों पर आधारित है और वह किसी पद से जुड़े रहने की मानसिकता में विश्वास नहीं करते। उनके अनुसार संगठन जो जिम्मेदारी देता है, उसे स्वीकार करना ही एक कार्यकर्ता का कर्तव्य होता है। यही सोच उन्हें नए दायित्व की ओर आगे बढ़ाने में सहायक बनी।

    मुख्यमंत्री पद छोड़ने के बाद उन्होंने आगामी लोकसभा चुनाव को नई जिम्मेदारी की तरह लिया। उन्होंने लिखा कि उन्होंने पूरे समर्पण के साथ चुनावी अभियान में काम किया और उन क्षेत्रों तक पहुंचे जहां पहले संगठन को सीमित सफलता मिली थी। चुनाव परिणामों को उन्होंने सामूहिक प्रयास और संगठन की शक्ति का परिणाम बताया।

    राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह पुस्तक केवल व्यक्तिगत संस्मरण नहीं बल्कि एक महत्वपूर्ण राजनीतिक दौर की अंदरूनी झलक भी पेश करती है। इससे सत्ता परिवर्तन, संगठनात्मक निर्णयों और नेतृत्व की प्रक्रिया को समझने का एक नया दृष्टिकोण सामने आता है।

  • मध्य प्रदेश में वीआईपी काफिले पर सियासी घमासान, दिल्ली तक पहुंचा मामला

    मध्य प्रदेश में वीआईपी काफिले पर सियासी घमासान, दिल्ली तक पहुंचा मामला

    भोपाल। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ईंधन बचत और सादगी की अपील के बावजूद मध्य प्रदेश में बड़े वाहन काफिलों के साथ निकाली गई रैलियों ने अब सियासी हलचल बढ़ा दी है। पार्टी संगठन ने इसे गंभीर अनुशासनहीनता मानते हुए सख्त रुख अपनाया है और ऐसे नेताओं को 17 मई को भोपाल स्थित प्रदेश भाजपा कार्यालय में तलब किया गया है।

    सूत्रों के मुताबिक, इन नेताओं से सीधे सवाल-जवाब किए जाएंगे कि पीएम की अपील के बावजूद उन्होंने बड़े काफिले और शक्ति प्रदर्शन वाली रैलियां क्यों निकालीं। इस पूरे मामले की रिपोर्ट दिल्ली स्थित भाजपा हाईकमान ने भी तलब की है, जिससे संगठन स्तर पर दबाव और बढ़ गया है।

    8-9 जगहों पर रैलियां, आलाकमान नाराज
    जानकारी के अनुसार, प्रधानमंत्री की 10 मई की अपील के बाद भी प्रदेश में कम से कम 8 से 9 स्थानों पर बड़े वाहन काफिलों के साथ स्वागत रैलियां निकाली गईं। इसे पार्टी नेतृत्व ने गंभीरता से लिया है और इसे सीधे तौर पर अनुशासन और निर्देशों की अनदेखी माना जा रहा है। अब पार्टी का स्पष्ट संदेश है कि संगठनात्मक अनुशासन से कोई समझौता नहीं किया जाएगा।

    कई नेताओं पर पहले ही गिरी गाज
    इस मामले में कुछ नेताओं पर पहले ही कार्रवाई हो चुकी है-
    सज्जन सिंह यादव (भिंड किसान मोर्चा अध्यक्ष) – 100 वाहनों के काफिले के साथ रैली, नियुक्ति रद्द
    सौभाग्य सिंह ठाकुर (पाठ्यपुस्तक निगम अध्यक्ष) – 700 वाहनों के काफिले पर कारण बताओ नोटिस, अधिकारों में कटौती इसके अलावा कई अन्य नेताओं पर भी सवाल उठे हैं, जिनमें बड़े काफिलों के साथ दौरे और कार्यक्रम शामिल हैं।

    किन नेताओं को भोपाल तलब किया गया
    अब जिन नेताओं से जवाब मांगा जा रहा है, उनमें शामिल हैं-
    टिकेंद्र प्रताप सिंह – 200 वाहनों के काफिले के साथ जिला कार्यालय पहुंचे
    पवन पाटीदार – 24 वाहनों के साथ चंबल दौरे पर गए
    वीरेंद्र गोयल – 30 से अधिक वाहनों का काफिला, ई-रिक्शा में भी मौजूद
    रेखा यादव – सैकड़ों वाहनों की रैली, छतरपुर में ट्रैफिक जाम
    सत्येंद्र भूषण सिंह – ई-रिक्शा से पहुंचे, लेकिन बड़ा काफिला साथ रहा
    राकेश सिंह जादौन – ई-रिक्शा के साथ वाहन काफिला चर्चा में

    सीएम भी सख्त, काफिला घटाया
    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भी इस संदेश को गंभीरता से लेते हुए अपने काफिले से 5 वाहन कम कर दिए हैं। वहीं, डिप्टी सीएम और अन्य मंत्रियों ने भी अपने-अपने काफिलों में कटौती की है। पार्टी अब यह संदेश दे रही है कि प्रधानमंत्री की अपील सिर्फ बयान नहीं, बल्कि संगठनात्मक निर्देश है जिसे हर स्तर पर लागू किया जाना चाहिए।

     17 मई को होगी ‘क्लास’, हो सकती है कार्रवाई
    17 मई को भोपाल में होने वाली बैठक में नेताओं से विस्तृत जवाब मांगा जाएगा। अगर स्पष्टीकरण संतोषजनक नहीं मिला तो संगठनात्मक कार्रवाई की संभावना से इनकार नहीं किया जा रहा है। पार्टी नेतृत्व अनुशासन और छवि को लेकर किसी भी तरह की ढील देने के मूड में नहीं दिख रहा है।

    वाहन काफिला विवाद ने मध्य प्रदेश बीजेपी संगठन में हलचल बढ़ा दी है। पीएम मोदी की सादगी और ईंधन बचत की अपील के बाद अब पार्टी खुद अपने नेताओं पर सख्त होती दिख रही है। आने वाले दिनों में इस मामले में और बड़े फैसले संभव हैं।

  • VIP कल्चर से दूरी: 15-20 गाड़ियों की जगह बस से पहुंचे मंत्री और अधिकारी

    VIP कल्चर से दूरी: 15-20 गाड़ियों की जगह बस से पहुंचे मंत्री और अधिकारी


    नई दिल्ली ।Gautam Tetwal ने बड़वानी दौरे के दौरान वीआईपी कारकेड की परंपरा से हटकर अनोखी पहल की। शुक्रवार को वे अफसरों और जनप्रतिनिधियों के साथ एक ही बस में सफर करते हुए कलेक्ट्रेट पहुंचे। आमतौर पर 15-20 गाड़ियों के लंबे काफिले के साथ चलने वाले मंत्री का यह अंदाज चर्चा का विषय बन गया।

    बस में उनके साथ Narendra Modi की ऊर्जा बचत अपील का संदेश भी नजर आया। यात्रा में भाजपा जिला अध्यक्ष अजय यादव, पानसेमल विधायक श्याम बरड़े, कलेक्टर जयति सिंह और एसडीएम भूपेंद्र सिंह पटेल समेत कई अधिकारी शामिल रहे।

    ऊर्जा बचत और सामूहिक परिवहन पर जोर
    मंत्री डॉ. टेटवाल ने कहा कि वैश्विक ऊर्जा संकट को देखते हुए ईंधन बचाना समय की जरूरत है। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री Mohan Yadav लगातार सामूहिक परिवहन और ईंधन बचत को बढ़ावा देने की अपील कर रहे हैं। इसी सोच के तहत यह पहल की गई।

    पहले लंबा रहता था कारकेड
    आमतौर पर मंत्री और वीआईपी दौरों में कई सरकारी और निजी वाहन शामिल होते हैं, जिससे ईंधन की खपत बढ़ती है। लेकिन इस बार मंत्री ने अपने प्रोटोकॉल वाहनों की संख्या सीमित रखी और सभी अधिकारियों को एक बस में साथ लेकर पहुंचे।

    लोगों में चर्चा का विषय बनी पहल
    मंत्री की यह पहल जिले में चर्चा का विषय बनी रही। स्थानीय लोगों ने इसे सकारात्मक संदेश बताते हुए कहा कि यदि जनप्रतिनिधि और अधिकारी इस तरह सामूहिक परिवहन अपनाएं, तो इससे ईंधन बचत के साथ ट्रैफिक और प्रदूषण भी कम हो सकता है।

  • बीजेपी विधायक पर गंभीर आरोप: महिला कांग्रेस पहुंची राज्यपाल के दरबार, विधायकी रद्द करने की मांग

    बीजेपी विधायक पर गंभीर आरोप: महिला कांग्रेस पहुंची राज्यपाल के दरबार, विधायकी रद्द करने की मांग


    भोपाल । भोपाल में सियासी हलचल उस वक्त तेज हो गई जब महिला कांग्रेस के प्रतिनिधिमंडल ने मंगूभाई पटेल से मुलाकात कर बीजेपी विधायक के खिलाफ गंभीर आरोपों को लेकर शिकायत दर्ज कराई। यह मामला चिंतामणि मालवीय से जुड़ा है, जिन पर एक बुजुर्ग महिला के घर पर कब्जा करने सहित अन्य गंभीर आरोप लगाए गए हैं।

    महिला प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष रीना बौरासी सेतिया के नेतृत्व में पहुंचे प्रतिनिधिमंडल ने राज्यपाल को ज्ञापन सौंपते हुए कहा कि उज्जैन में एक वृद्ध महिला की संपत्ति पर कथित रूप से अवैध कब्जा किया गया है। इस संबंध में उन्होंने दस्तावेज और एफिडेविट भी राज्यपाल को सौंपे हैं, ताकि मामले की निष्पक्ष जांच हो सके और पीड़ित को न्याय मिल सके।

    प्रतिनिधिमंडल ने यह भी आरोप लगाया कि संबंधित विधायक के खिलाफ पहले से ही यौन शोषण जैसे गंभीर मामलों में शिकायतें दर्ज हैं। ऐसे में उन्होंने राज्यपाल से मांग की कि इस पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए विधायक की सदस्यता समाप्त की जाए। उनका कहना है कि जनप्रतिनिधियों पर इस तरह के आरोप लोकतांत्रिक व्यवस्था और समाज के विश्वास को आहत करते हैं, इसलिए कड़ी कार्रवाई जरूरी है।

    मुलाकात के दौरान महिला कांग्रेस ने केवल इस मामले को ही नहीं उठाया, बल्कि महिलाओं के राजनीतिक प्रतिनिधित्व को लेकर भी अपनी मांग रखी। उन्होंने लोकसभा और मध्यप्रदेश विधानसभा में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण लागू करने की मांग दोहराई। प्रतिनिधिमंडल का कहना था कि जब तक महिलाओं को पर्याप्त प्रतिनिधित्व नहीं मिलेगा, तब तक उनके मुद्दों को प्रभावी तरीके से उठाया नहीं जा सकेगा।

    इस पूरे घटनाक्रम के बाद प्रदेश की राजनीति में एक नया विवाद खड़ा हो गया है। अब सभी की नजरें राज्यपाल के रुख और आगे होने वाली कार्रवाई पर टिकी हैं। यदि आरोपों की पुष्टि होती है, तो यह मामला प्रदेश की राजनीति में बड़ा मोड़ ला सकता है।

  • MP में बीजेपी का ‘मेगा एडजस्टमेंट प्लान’: 31 विभागों की समितियों में 10,500 कार्यकर्ताओं को मिलेगा मौका

    MP में बीजेपी का ‘मेगा एडजस्टमेंट प्लान’: 31 विभागों की समितियों में 10,500 कार्यकर्ताओं को मिलेगा मौका


    नई दिल्ली। मध्य प्रदेश में सत्ता और संगठन के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करने के उद्देश्य से भारतीय जनता पार्टी ने एक व्यापक ‘कार्यकर्ता एडजस्टमेंट अभियान’ शुरू किया है। इस रणनीति के तहत प्रदेश के सभी 55 जिलों में विभिन्न सरकारी समितियों और बोर्डों के जरिए करीब 10,500 से अधिक कार्यकर्ताओं को जिम्मेदारियां सौंपी जाएंगी। यह पहल न केवल संगठन को मजबूत करने की दिशा में अहम मानी जा रही है, बल्कि जमीनी स्तर पर पार्टी की पकड़ को भी और सुदृढ़ करेगी।
    पिछले एक सप्ताह से निगम-मंडलों में नियुक्तियों का सिलसिला जारी है और अब इसे जिला स्तर तक विस्तार दिया जा रहा है। पार्टी का फोकस पंचायत से लेकर जिला स्तर तक सक्रिय कार्यकर्ताओं को प्रशासनिक ढांचे में शामिल करना है, ताकि वे सीधे शासन-प्रक्रिया का हिस्सा बन सकें। इसके लिए 31 विभागों के अंतर्गत 70 से अधिक प्रकार की समितियों का गठन किया जा रहा है।
    हर जिले में प्रभारी मंत्रियों को नियुक्तियों की जिम्मेदारी दी गई है। वे जिला स्तर के कोर ग्रुप के साथ मिलकर योग्य कार्यकर्ताओं के नामों का चयन कर रहे हैं। यह प्रक्रिया लगभग अंतिम चरण में है और मुख्यमंत्री कार्यालय से इसकी लगातार निगरानी की जा रही है। दरअसल, 27 जनवरी को ही इस संबंध में दिशा-निर्देश जारी कर दिए गए थे, जिसके बाद अब तेजी से अमल शुरू हुआ है।
    यदि औसतन आंकलन किया जाए तो हर जिले में लगभग 190 से 200 सदस्यों को विभिन्न समितियों में जगह मिलेगी। इस तरह पूरे प्रदेश में हजारों कार्यकर्ता प्रशासनिक जिम्मेदारियों से जुड़ेंगे। यह संख्या पंचायत और ब्लॉक स्तर को जोड़ने पर और भी बढ़ सकती है।
    विभागवार देखें तो पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग की 8 समितियों में ‘दिशा’, जल स्वच्छता और युवा ग्राम शक्ति जैसी इकाइयां प्रमुख हैं। वहीं, स्कूल शिक्षा विभाग में जिला स्तरीय समितियों में हर जिले से करीब 9 सदस्यों की नियुक्ति होगी। उच्च शिक्षा की जनभागीदारी समितियों में प्रति कॉलेज एक अध्यक्ष और 13 सदस्यों को शामिल किया जाएगा, जो कार्यकर्ताओं के लिए बड़ा अवसर होगा।
    सामाजिक न्याय, योजना एवं सांख्यिकी विभाग की समितियों में भी बड़ी संख्या में पद उपलब्ध हैं। जिला अंत्योदय समिति में 10 से 30 तक सदस्य नियुक्त किए जा सकते हैं। नगरीय निकायों की समितियों में भी 5 से 21 सदस्यों का प्रावधान रखा गया है। इसके अलावा जेल, पुलिस, तकनीकी शिक्षा, खेल और पीएचई विभागों में भी विभिन्न समितियों के माध्यम से नियुक्तियां की जाएंगी।
    आर्थिक और विकास से जुड़े विभागों में भी कार्यकर्ताओं को शामिल किया जाएगा। खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति, उद्योग, कृषि और उद्यानिकी विभागों की समितियां इस अभियान का अहम हिस्सा हैं। इन सभी नियुक्तियों में प्रभारी मंत्रियों की सिफारिश और कोर ग्रुप की सहमति को प्राथमिकता दी जा रही है।
    बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल का कहना है कि हर नियुक्ति में सर्वसम्मति सुनिश्चित की जा रही है, ताकि योग्य कार्यकर्ताओं को सही स्थान मिल सके। आने वाले कुछ हफ्तों में सभी जिलों की सूची अंतिम रूप ले लेगी और इसके साथ ही प्रदेश में बीजेपी का संगठनात्मक ढांचा और अधिक सक्रिय नजर आएगा।