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  • सीएम के दौरे से प्रशासन की फुर्ती, बदहाल सड़क कुछ घंटों में चकाचक, नरसिंहपुर में हेलिकॉप्टर की लैंडिंग से उड़ा तंबू

    सीएम के दौरे से प्रशासन की फुर्ती, बदहाल सड़क कुछ घंटों में चकाचक, नरसिंहपुर में हेलिकॉप्टर की लैंडिंग से उड़ा तंबू


    भोपाल। मध्य प्रदेश में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के हालिया दौरों से जुड़े कुछ दिलचस्प नजारे चर्चा में हैं। कहीं मुख्यमंत्री के हेलिकॉप्टर की लैंडिंग के दौरान तेज हवा से तंबू उड़ गया तो कहीं उनके दौरे से पहले प्रशासन ने कुछ ही घंटों में सड़क की मरम्मत कर दी। दूसरी ओर अशोकनगर में सिंधिया की बैठक के दौरान खाली कुर्सियां दिखाई दीं। इन घटनाओं ने राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में चर्चा को जन्म दिया है।
    पहला मामला नरसिंहपुर का है जहां मुख्यमंत्री मोहन यादव के हेलिकॉप्टर की लैंडिंग के दौरान तेज हवा के झोंकों से वहां लगाया गया तंबू उड़ गया। मुख्यमंत्री के स्वागत के लिए मंत्री विधायक सांसद और अधिकारी हेलिपैड के पास मौजूद थे। हेलिकॉप्टर के पंखों से उठी तेज हवा के कारण धूल उड़ने लगी और तंबू भी हवा में उखड़ गया। अचानक हुए इस घटनाक्रम से मौके पर मौजूद लोगों में कुछ देर के लिए अफरा-तफरी का माहौल बन गया। हालांकि राहत की बात यह रही कि इस घटना में किसी के घायल होने या नुकसान की खबर सामने नहीं आई। घटना का वीडियो सामने आने के बाद लोग इसे लेकर तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं।
    दूसरा मामला मुरैना का है जहां मुख्यमंत्री को एक स्कूल का निरीक्षण करना था। स्कूल तक पहुंचने वाली सड़क की हालत खराब बताई गई थी। मुख्यमंत्री के दौरे की जानकारी के बाद प्रशासन ने तेजी दिखाते हुए कुछ ही घंटों में सड़क को दुरुस्त कर दिया। आम दिनों में बदहाल सड़कों से परेशान रहने वाले लोगों के लिए यह बदलाव चर्चा का विषय बन गया। इस घटनाक्रम के बाद यह सवाल भी उठ रहा है कि जब किसी वीआईपी दौरे के दौरान प्रशासन इतनी तेजी से काम कर सकता है तो आम दिनों में भी सड़कों की मरम्मत और बुनियादी सुविधाओं पर इसी तरह ध्यान क्यों नहीं दिया जाता। हालांकि सड़क निर्माण और मरम्मत के काम की वास्तविक स्थिति तथा उसकी गुणवत्ता का आकलन संबंधित विभाग की जानकारी के आधार पर ही किया जा सकता है।
    तीसरा मामला केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के अशोकनगर दौरे से जुड़ा है। यहां वे जनप्रतिनिधियों की बैठक में शामिल होने पहुंचे थे। कार्यक्रम में बैठने के लिए पर्याप्त कुर्सियां लगाई गई थीं लेकिन कई कुर्सियां खाली नजर आईं। सिंधिया के मंच पर पहुंचने के दौरान खाली कुर्सियों को हटाने की कवायद भी दिखाई दी। इस दृश्य के बाद कार्यक्रम में जनप्रतिनिधियों की कम मौजूदगी को लेकर चर्चा होने लगी। हालांकि बैठक में उपस्थिति कम रहने की वजह स्पष्ट नहीं है। यह आयोजन की व्यवस्था से जुड़ा मामला था या जनप्रतिनिधियों की अनुपस्थिति के पीछे कोई अन्य कारण था इसकी पुष्टि उपलब्ध जानकारी से नहीं होती।
    इसी दौरे के दौरान सिंधिया अशोकनगर में आयोजित जनजातीय सम्मेलन में भी शामिल हुए। यहां आदिवासी परंपरा के अनुसार उनका स्वागत किया गया और उन्हें विशेष मुकुट पहनाया गया। सिंधिया पूरे कार्यक्रम के दौरान मुकुट पहने नजर आए और उन्होंने इसी रूप में भाषण भी दिया। उनके इस अंदाज ने कार्यक्रम में मौजूद लोगों का ध्यान खींचा। पारंपरिक स्वागत और पहनावे की तस्वीरें भी चर्चा में रहीं।
    इन घटनाओं के बीच प्रशासनिक व्यवस्था और राजनीतिक कार्यक्रमों के आयोजन को लेकर अलग-अलग सवाल उठ रहे हैं। मुख्यमंत्री के दौरे से पहले सड़क का तेजी से दुरुस्त होना सरकारी मशीनरी की तत्परता को दिखाता है लेकिन आम नागरिकों के लिए भी ऐसी ही नियमित व्यवस्था जरूरी है। वहीं राजनीतिक कार्यक्रमों में उपस्थिति और आयोजन की तैयारियां भी चर्चा का हिस्सा बनी हुई हैं। फिलहाल इन घटनाओं की खासियत यही है कि एक ही दौर में प्रशासनिक फुर्ती से लेकर राजनीतिक आयोजनों के अलग-अलग दृश्य सामने आए हैं।

  • कांग्रेस-BJP कार्यकर्ताओं के साथ हादसा, CM मोहन यादव की एक टिप्पणी से चौंके विधायक, मंत्री को कह दिया सेठ जी

    कांग्रेस-BJP कार्यकर्ताओं के साथ हादसा, CM मोहन यादव की एक टिप्पणी से चौंके विधायक, मंत्री को कह दिया सेठ जी


    सिलवानी । मध्य प्रदेश की राजनीति में इन दिनों विरोध प्रदर्शन से लेकर नेताओं के बयानों और नौकरशाही के अंदरूनी घटनाक्रम तक कई दिलचस्प मामले सामने आ रहे हैं। रायसेन के सिलवानी में कांग्रेस के प्रदर्शन के दौरान एक कार्यकर्ता आग की चपेट में आ गया तो ग्वालियर में भाजपा की सेवा ज्योति यात्रा के दौरान भी एक कार्यकर्ता झुलस गया। वहीं रतलाम में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के एक संबोधन ने राजनीतिक गलियारों में चर्चा छेड़ दी। उन्होंने मंत्री चैतन्य काश्यप को सेठ जी कहकर संबोधित किया तो रतलाम ग्रामीण के विधायक मथुरालाल डामर को पूर्व विधायक बता दिया। दूसरी ओर शत्रु संपत्ति को लेकर हुई सरकारी बैठक में एक प्रमुख सचिव के बचाव का मामला भी चर्चा में रहा।

    रायसेन जिले के सिलवानी में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग और एसआईआर के विरोध में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन किया। इस दौरान मुख्य चुनाव आयुक्त का पुतला जलाया जा रहा था तभी अचानक आग भड़क उठी और एक कार्यकर्ता इसकी चपेट में आ गया। युवक के सिर और कपड़ों में आग लग गई। अचानक हुई घटना से घबराया कार्यकर्ता वहां से भागा। मौके पर मौजूद लोगों ने तत्परता दिखाते हुए आग बुझाई जिससे बड़ा हादसा टल गया। घटना का वीडियो भी सामने आया है। इस घटना ने एक बार फिर दिखाया कि राजनीतिक विरोध के दौरान उत्साह के साथ सुरक्षा का ध्यान रखना भी बेहद जरूरी है।

    इधर ग्वालियर में भाजपा की सेवा ज्योति यात्रा के दौरान भी कुछ ऐसा ही घटनाक्रम हुआ। सांसद भरत सिंह कुशवाह मशाल लेकर चल रहे थे। इसी दौरान एक उत्साहित कार्यकर्ता सेवा ज्योति को यात्रा रथ पर स्थापित करने के लिए ऊपर चढ़ गया। जब उसे मशाल सौंपी जा रही थी तभी उसकी लौ से आग कार्यकर्ता के कपड़ों पर गिर गई। देखते ही देखते उसकी शर्ट जलने लगी। आसपास मौजूद लोगों ने उसे आग लगने की जानकारी दी जिसके बाद युवक ने किसी तरह आग बुझाई और नीचे उतर आया। इस घटना में सांसद भरत सिंह कुशवाह भी आग की चपेट में आने से बाल बाल बच गए। घटना का वीडियो सामने आने के बाद यात्रा के दौरान सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।

    उधर रतलाम में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के वर्चुअल संबोधन ने अलग ही चर्चा पैदा कर दी। बलराम महोत्सव में उन्होंने मंत्री चैतन्य काश्यप को सेठ जी कहकर संबोधित किया और उनके लिए तालियां भी बजवाईं। इसके बाद रतलाम ग्रामीण के विधायक मथुरालाल डामर को पूर्व विधायक कह दिया। मुख्यमंत्री की जुबान फिसलने से विधायक के चेहरे के भाव देखने लायक हो गए। कार्यक्रम में रतलाम के महापौर प्रहलाद पटेल की गैरमौजूदगी पर भी मुख्यमंत्री ने चुटकी ली। उन्होंने कहा कि महापौर किसानों के कार्यक्रम में आने के बजाय अपना मैरिज गार्डन चला रहे हैं और नगर निगम भी संभाल रहे हैं। कुछ देर बाद महापौर पहुंचे तो मुख्यमंत्री ने उन्हें और उनके साथ आए नेता को राम लक्ष्मण कहकर संबोधित किया। उनके इस अंदाज की सियासी गलियारों में खूब चर्चा हो रही है।

    इसी बीच शत्रु संपत्ति को लेकर हुई सरकारी बैठक में एक प्रमुख सचिव बिना पूरी तैयारी के पहुंच गए और मांगी गई जानकारी नहीं दे पाए। नाराजगी सामने आने पर उन्होंने जानकारी नहीं मिलने की बात कही लेकिन संबंधित अतिरिक्त मुख्य सचिव ने स्पष्ट किया कि सूचना पहले ही भेजी जा चुकी थी। मामला बिगड़ता देख बैठक में मौजूद एक वरिष्ठ अधिकारी ने प्रमुख सचिव का बचाव किया और कहा कि उन्हें जानकारी नहीं मिली थी। इस तरह बैठक का माहौल संभल गया। मध्य प्रदेश में इन घटनाओं ने राजनीति के साथ प्रशासनिक गलियारों में भी चर्चाओं को हवा दे दी है।

  • भागीरथपुरा त्रासदी पर फिर गरमाई सियासत 36 मौतों की जांच में सामने आईं पाइपलाइन और प्रशासनिक लापरवाही की परतें

    भागीरथपुरा त्रासदी पर फिर गरमाई सियासत 36 मौतों की जांच में सामने आईं पाइपलाइन और प्रशासनिक लापरवाही की परतें


    इंदौर। भागीरथपुरा दूषित पेयजल त्रासदी को लेकर मध्यप्रदेश की सियासत एक बार फिर गरमा गई है। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने शुक्रवार को इंदौर के रेसीडेंसी में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर न्यायिक जांच रिपोर्ट का हवाला देते हुए सरकार और नगर निगम की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। उन्होंने प्रभावित परिवारों को राहत देने के साथ प्रशासनिक और तकनीकी स्तर पर जिम्मेदारी तय करने की मांग की। न्यायिक जांच आयोग ने भागीरथपुरा में हुई 36 मौतों की परिस्थितियों की जांच की है। रिपोर्ट में दूषित पानी से जुड़ी मौतों को लेकर अलग अलग निष्कर्ष सामने आए हैं। सार्वजनिक हुई रिपोर्ट के अनुसार कई प्रशासनिक और तकनीकी कमियों को भी गंभीरता से दर्ज किया गया है।

    जांच रिपोर्ट में पुराने पेयजल और सीवरेज नेटवर्क की स्थिति पर गंभीर सवाल उठाए गए हैं। आयोग के सामने पुराने जल और सीवर नेटवर्क से जुड़े कई महत्वपूर्ण तकनीकी रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं कराए जा सके। इनमें नक्शे अलाइनमेंट प्लान इंजीनियरिंग डिजाइन वर्क ऑर्डर और निरीक्षण से जुड़े दस्तावेज शामिल बताए गए हैं। आयोग ने इन रिकॉर्ड के गायब होने के कारणों की अलग से जांच की जरूरत भी बताई है। रिपोर्ट के मुताबिक पुराने नेटवर्क की निगरानी और रखरखाव में कमियां थीं और संवेदनशील पाइपलाइन को समय पर बदलने की प्रक्रिया भी आगे नहीं बढ़ सकी।

    सिंघार ने फाइल मूवमेंट का मुद्दा उठाते हुए कहा कि पाइपलाइन बदलने से जुड़ी फाइल लंबे समय तक लंबित रही। उन्होंने सवाल किया कि जरूरी काम से जुड़ी फाइल इतनी लंबी अवधि तक क्यों रुकी रही। हालांकि न्यायिक जांच की रिपोर्ट में जिम्मेदारी तय करने का आधार केवल किसी फाइल के मेयर के पास लंबित रहने को नहीं बनाया गया है। रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि टेंडर प्रक्रिया में एक चरण पर 10 दिन की अस्पष्ट देरी हुई थी और इस देरी के लिए कुछ अधिकारियों की भूमिका पर जिम्मेदारी तय की गई।

    आयोग ने पूर्व नगर निगम आयुक्तों में से कुछ अधिकारियों को जिम्मेदारी से मुक्त किया है जबकि तत्कालीन अतिरिक्त आयुक्तों और कार्यपालन यंत्री से जुड़े स्तर पर प्रशासनिक चूक को लेकर टिप्पणियां की गई हैं। रिपोर्ट के अनुसार टेंडर की अंतिम स्वीकृति से जुड़े अधिकार संबंधित अतिरिक्त आयुक्त के स्तर पर थे। इसी आधार पर तत्कालीन नगर निगम आयुक्त को उस देरी के लिए जिम्मेदार नहीं माना गया। यह निष्कर्ष उन राजनीतिक आरोपों से अलग है जिनमें जनप्रतिनिधियों या शीर्ष प्रशासनिक पदों की जवाबदेही का सवाल उठाया गया है।

    भागीरथपुरा में दूषित पानी की समस्या सामने आने के बाद पुराने पाइप नेटवर्क को बदलने का काम शुरू किया गया था। शुरुआती दौर में प्रशासन और स्थानीय लोगों की ओर से मौतों की संख्या को लेकर अलग अलग आंकड़े सामने आए थे। फरवरी में विधानसभा में सरकार की ओर से भी मौतों के आंकड़े को लेकर आधिकारिक जानकारी दी गई थी जबकि विपक्ष और स्थानीय लोगों ने इससे अधिक मौतों का दावा किया था। बाद में न्यायिक जांच ने 36 मौतों के मामलों की परिस्थितियों की समीक्षा की।

    जांच रिपोर्ट का व्यापक संकेत यह है कि त्रासदी को किसी एक दिन की घटना के बजाय लंबे समय से चली आ रही तकनीकी कमियों पाइपलाइन की स्थिति रखरखाव निगरानी और प्रशासनिक प्रक्रियाओं के संदर्भ में देखा गया है। रिपोर्ट में जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई और प्रभावित परिवारों को राहत देने से जुड़े सुझाव भी महत्वपूर्ण हैं। ऐसे में अब मुख्य सवाल यह है कि सरकार आयोग की सिफारिशों पर किस तरह आगे बढ़ती है और प्रभावित परिवारों को राहत कब तक मिलती है।

    सिंघार ने सरकार से इसी आधार पर जवाबदेही तय करने की मांग की है। वहीं उपलब्ध न्यायिक जांच रिपोर्ट में निर्वाचित जनप्रतिनिधियों को घटना के लिए जिम्मेदार ठहराने के बजाय मुख्य टिप्पणियां अधिकारियों तकनीकी व्यवस्था पाइपलाइन रखरखाव और प्रक्रिया में हुई देरी से संबंधित हैं।

  • एमपी में गजब घटनाओं की भरमार, CMHO ऑफिस में पिल्लों का जन्म, विधायक के बाइक स्टंट से मचा हंगामा

    एमपी में गजब घटनाओं की भरमार, CMHO ऑफिस में पिल्लों का जन्म, विधायक के बाइक स्टंट से मचा हंगामा


    भोपाल । मध्यप्रदेश में इन दिनों राजनीति प्रशासन और सरकारी व्यवस्थाओं से जुड़ी ऐसी घटनाएं सामने आ रही हैं जो चर्चा का विषय बन गई हैं। कहीं सरकारी स्वास्थ्य कार्यालय में आवारा कुतिया ने छह पिल्लों को जन्म दे दिया तो कहीं प्रदेश के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल में सांप के पहुंचने से लोगों में हड़कंप मच गया। इसी बीच कालापीपल के भाजपा विधायक घनश्याम चंद्रवंशी का बाइक चलाते हुए स्टंट करने का वीडियो सामने आया तो आगर जिले के सुसनेर में कांग्रेस विधायक भैरों सिंह परिहार का तहसीलदार को फोन पर फटकार लगाने का मामला भी सुर्खियों में आ गया। इन घटनाओं ने सरकारी व्यवस्थाओं से लेकर जनप्रतिनिधियों के आचरण तक कई सवाल खड़े कर दिए हैं।

    छतरपुर में मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी यानी CMHO के कार्यालय में रविवार रात एक आवारा कुतिया पहुंच गई। बताया गया कि वह कार्यालय के एक खाली केबिन में अलमारियों और फाइलों के बीच चली गई और वहीं उसने छह पिल्लों को जन्म दे दिया। सोमवार सुबह जब कर्मचारी कार्यालय पहुंचे तो फाइलों के बीच पिल्लों को देखकर हैरान रह गए। घटना का वीडियो सामने आने के बाद कार्यालय की साफ सफाई और सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठने लगे। मामला अधिकारियों तक पहुंचा तो कलेक्टर ने CMHO को व्यवस्थाएं सुधारने के निर्देश दिए।

    इसी तरह इंदौर के एमवाय अस्पताल में भी एक सांप के पहुंचने से अफरा तफरी मच गई। अस्पताल की न्यू ओपीडी में सांप काफी देर तक घूमता रहा। उसे देखकर वहां मौजूद लोगों में हड़कंप मच गया। बाद में काफी मशक्कत के बाद सांप को पकड़ा गया और अस्पताल परिसर से बाहर निकाला गया। इससे पहले अस्पताल में चूहों की मौजूदगी को लेकर भी सवाल उठ चुके हैं। अब सांप के पहुंचने की घटना ने अस्पताल की साफ सफाई और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर चर्चा बढ़ा दी है।

    उधर कालापीपल से भाजपा विधायक घनश्याम चंद्रवंशी का बाइक चलाते हुए वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आया। वीडियो में वह कुछ समय के लिए दोनों हाथ छोड़कर बाइक चलाते दिखाई दिए। वीडियो वायरल होने के बाद नियमों की अनदेखी को लेकर सवाल उठे। विधायक ने सफाई देते हुए कहा कि उन्होंने कोई स्टंट नहीं किया था और यह उत्साह में हो गया। उन्होंने आगे ऐसी गलती नहीं करने की बात कही। खास बात यह है कि विधायक पहले लोगों को हेलमेट और सड़क सुरक्षा नियमों का पालन करने की सलाह देते नजर आए थे।

    आगर जिले के सुसनेर में कांग्रेस विधायक भैरों सिंह परिहार का तहसीलदार से फोन पर विवाद भी चर्चा में रहा। नगर परिषद अध्यक्ष पद के उपचुनाव के दौरान विधायक ने बिना सूचना EVM बदले जाने का आरोप लगाते हुए तहसीलदार से फोन पर नाराजगी जताई। बातचीत के दौरान उन्होंने तीखे शब्दों का इस्तेमाल किया। हालांकि बाद में विधायक खुद पूछते सुनाई दिए कि फोन पर कौन था।

    इन घटनाओं के बीच प्रशासनिक गलियारों में संभावित IAS तबादलों की चर्चा भी तेज है। एक जिले के कलेक्टर द्वारा अपनी कुर्सी बचाने के लिए कथित तौर पर प्रभावशाली संपर्कों का सहारा लेने की चर्चा है। हालांकि इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि सामने नहीं आई है। कुल मिलाकर मध्यप्रदेश में इन दिनों सरकारी व्यवस्थाओं और जनप्रतिनिधियों से जुड़ी कई घटनाएं एक साथ सुर्खियों में हैं।

  • गडकरी ने RTO को चेताया तो करण सिंह वर्मा ने कहा अगले जन्म में नाग बनोगे, सीधी में कीचड़ में फंसी महापौर की कार

    गडकरी ने RTO को चेताया तो करण सिंह वर्मा ने कहा अगले जन्म में नाग बनोगे, सीधी में कीचड़ में फंसी महापौर की कार


    भोपाल । मध्य प्रदेश में 21 साल बाद सरकारी बस सेवा की शुरुआत के साथ ही प्रदेश के सियासी गलियारों में कई दिलचस्प तस्वीरें और बयान चर्चा में हैं। भोपाल में मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा के शुभारंभ कार्यक्रम में केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने बसों की फिटनेस और RTO व्यवस्था को लेकर अधिकारियों को सख्त संदेश दिया। वहीं सीहोर में राजस्व मंत्री करण सिंह वर्मा ने अपने भाषण में अच्छे कर्म करने और किसी का बुरा नहीं चाहने की सीख देते हुए कहा कि गलत काम करने वालों को अगले जन्म में नाग बनना पड़ सकता है। इसी बीच सीधी जिले में सड़क निर्माण की मांग को लेकर चल रहे धरने में पहुंचीं सिंगरौली की महापौर रानी अग्रवाल की गाड़ी कीचड़ में फंस गई और उन्हें करीब दो किलोमीटर पैदल चलकर धरना स्थल तक पहुंचना पड़ा।

    भोपाल में सुगम परिवहन सेवा के शुभारंभ कार्यक्रम में नितिन गडकरी ने बसों की गुणवत्ता और फिटनेस को लेकर RTO अधिकारियों को चेतावनी दी। उन्होंने अपने संबोधन में व्यंग्य करते हुए कुछ अधिकारियों को गांधीवादी बताया और कहा कि गांधी की नोट दिखाई देने पर तुरंत ठप्पा लगाने की बात कही। गडकरी का यह बयान RTO व्यवस्था में भ्रष्टाचार के आरोपों पर उनके सख्त रुख के तौर पर देखा गया। उन्होंने स्पष्ट संदेश दिया कि यदि किसी ऐसी बस को मंजूरी दी जाती है जो निर्धारित मानकों पर खरी नहीं उतरती तो संबंधित अधिकारी पर कार्रवाई हो सकती है।

    गडकरी का जोर बसों की गुणवत्ता और यात्रियों की सुरक्षा पर था। उन्होंने कहा कि बसों को सड़क पर उतारने से पहले कड़ी जांच और परीक्षण जरूरी है। फिटनेस मानकों पर खरी उतरने के बाद ही किसी बस को सड़क पर चलने की अनुमति मिलनी चाहिए। मध्य प्रदेश में शुरू हुई नई परिवहन सेवा के तहत 351 बसें उतारी गई हैं जिनमें 180 इलेक्ट्रिक बसें भी शामिल हैं।

    इसी कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने नई बसों के भगवा रंग को लेकर कांग्रेस पर तंज किया। उन्होंने कहा कि प्रदेश की सड़कों पर भगवा रंग की बसें चलना उनके लिए खुशी की बात है और विपक्ष को यह पसंद नहीं आएगा। सरकारी बस सेवा के दोबारा शुरू होने के मौके पर मुख्यमंत्री ने इसे प्रदेश के सार्वजनिक परिवहन के लिए महत्वपूर्ण कदम बताया।

    उधर सीहोर जिले में राजस्व मंत्री करण सिंह वर्मा का बयान भी चर्चा में आ गया। एक कार्यक्रम में उन्होंने लोगों को किसी का बुरा नहीं करने और बदले की भावना से दूर रहने की सलाह दी। उन्होंने पौराणिक प्रसंगों का उल्लेख करते हुए कहा कि गलत काम करने वालों को सुधर जाना चाहिए वरना अगले जन्म में नाग बनना पड़ेगा। उनके इस बयान के बाद कार्यक्रम का यह हिस्सा सोशल मीडिया और स्थानीय चर्चाओं में सुर्खियों में रहा।

    अब बात सीधी की जहां सड़क की बदहाली ने एक जनप्रतिनिधि को भी रास्ते में रोक दिया। खड्डी खुर्द के बगैहा टोला में सड़क निर्माण की मांग को लेकर सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर लीला साहू ग्रामीणों के साथ 11 दिनों से धरने पर थीं। इसी आंदोलन को समर्थन देने सिंगरौली की महापौर और आम आदमी पार्टी की प्रदेश अध्यक्ष रानी अग्रवाल पहुंचीं। लेकिन धरना स्थल तक पहुंचने से पहले ही उनकी गाड़ी कच्ची और कीचड़ भरी सड़क में फंस गई। ग्रामीणों ने धक्का देकर वाहन को बाहर निकाला। इसके बाद महापौर को करीब दो किलोमीटर पैदल चलकर धरना स्थल तक जाना पड़ा।

    महापौर रानी अग्रवाल ने मौके पर सड़क की स्थिति देखी और ग्रामीणों की परेशानी को लेकर सरकार को पत्र लिखने की बात कही। ग्रामीणों के अनुसार यह रास्ता आसपास के कई गांवों को मुख्य मार्ग से जोड़ता है और बारिश के दौरान कीचड़ के कारण आवागमन मुश्किल हो जाता है।

    इस तरह एक ही दिन मध्य प्रदेश में परिवहन व्यवस्था को लेकर गडकरी की सख्त चेतावनी से लेकर मंत्री के धार्मिक संदर्भ वाले बयान और खराब सड़क में फंसी महापौर की गाड़ी तक कई घटनाएं चर्चा में रहीं। इन घटनाओं ने सरकारी परिवहन व्यवस्था से लेकर सड़क और प्रशासनिक व्यवस्थाओं पर अलग-अलग सवालों को सामने ला दिया है।

  • राहुल गांधी के लेटर में बड़ी चूक, दो पैराग्राफ दोहराए गए, पुराना पत्र हटाकर क्यों जारी करना पड़ा नया लेटर

    राहुल गांधी के लेटर में बड़ी चूक, दो पैराग्राफ दोहराए गए, पुराना पत्र हटाकर क्यों जारी करना पड़ा नया लेटर


    भोपाल। मध्य प्रदेश की सियासत में इन दिनों कई ऐसे मामले चर्चा में हैं जिनमें नेताओं के बयान कार्यक्रमों की व्यवस्थाएं और प्रशासनिक घटनाक्रम सुर्खियां बटोर रहे हैं। इंदौर में राहुल गांधी के छात्रों की गूंज कार्यक्रम के बाद मुख्यमंत्री मोहन यादव को लिखी चिट्ठी से लेकर जबलपुर में सेवा संकल्प यात्रा की दिशा को लेकर सामने आए अलग अलग बयानों और बड़वानी में दिव्यांगों के उपकरण वितरण कार्यक्रम के टलने तक तीन मामले चर्चा में हैं।

    इंदौर में 19 सितंबर को हुए छात्रों की गूंज कार्यक्रम में ओबीसी आरक्षण और लंबित नियुक्तियों का मुद्दा उठा था। इसके बाद राहुल गांधी ने मुख्यमंत्री मोहन यादव को पत्र लिखकर मध्य प्रदेश में 27 प्रतिशत ओबीसी आरक्षण लागू करने और चयन प्रक्रिया पूरी कर चुके अभ्यर्थियों की नियुक्तियों का रास्ता साफ करने की मांग की। राहुल गांधी ने 22 सितंबर को पत्र लिखा था और 23 सितंबर को इसे सार्वजनिक किया। उन्होंने पत्र में छात्रों की ओर से उठाए गए शिक्षा रोजगार और भविष्य से जुड़े मुद्दों का भी उल्लेख किया।

    हालांकि पत्र सार्वजनिक होने के बाद इसका एक संशोधित संस्करण सामने आया। शुरुआती पोस्ट में पत्र के अंतिम हिस्से के दो पैराग्राफ दोहराए गए थे। इसके बाद पुरानी पोस्ट हटाकर संशोधित पत्र साझा किया गया। इस वजह से पत्र में हुई टाइपिंग या संपादन संबंधी गलती भी चर्चा में आ गई। दूसरी ओर मुख्यमंत्री मोहन यादव ने ओबीसी आरक्षण के मुद्दे पर कहा कि 13 प्रतिशत पदों का मामला न्यायिक प्रक्रिया से जुड़ा है। ऐसे में इस मुद्दे पर कांग्रेस और सरकार के बीच राजनीतिक आरोप प्रत्यारोप भी देखने को मिल रहे हैं।

    दूसरा मामला जबलपुर में सेवा संकल्प यात्रा के स्वागत से जुड़ा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन के अवसर पर सेवा संकल्प अभियान के तहत यात्राएं निकाली जा रही हैं। जबलपुर में यात्रा के स्वागत के दौरान यात्रा की दिशा को लेकर भाजपा नेताओं के बयानों और यात्रा के साथ चल रहे कलश पर लिखी जानकारी में अंतर की बात सामने आई। रिपोर्ट के मुताबिक मंत्री राकेश सिंह और भाजपा नगर अध्यक्ष रत्नेश सोनकर ने यात्रा के वडनगर से वाराणसी जाने की जानकारी दी जबकि यात्रा के साथ मौजूद कलश पर वाराणसी से वडनगर की दिशा लिखी होने का उल्लेख किया गया। इसी वजह से स्वागत कार्यक्रम के दौरान यात्रा की दिशा को लेकर चर्चा शुरू हुई।

    तीसरा मामला बड़वानी के पानसेमल का है जहां करीब 200 दिव्यांग और उनके परिजन सहायक उपकरण लेने पहुंचे थे। 21 सितंबर को आयोजित सामाजिक सशक्तीकरण शिविर में व्हीलचेयर ट्राइसाइकिल और दूसरे उपकरण वितरित किए जाने थे। शिविर की तैयारियां पूरी थीं और लाभार्थी भी पहुंच चुके थे लेकिन कार्यक्रम अचानक स्थगित हो गया। रिपोर्टों के अनुसार निर्धारित कार्यक्रम में विधायक की मौजूदगी नहीं हो पाने के कारण वितरण टल गया और लाभार्थियों को बिना उपकरण लिए लौटना पड़ा।

    बाद में दोबारा कार्यक्रम आयोजित कर उपकरण वितरित किए गए। इस घटनाक्रम के बाद कार्यक्रमों की तैयारी और लाभार्थियों को समय पर सुविधाएं उपलब्ध कराने को लेकर सवाल उठे। रिपोर्ट में विधायक की ओर से कार्यक्रम की जानकारी नहीं होने की बात भी सामने आई है जबकि कार्यक्रम के बैनर पर उनका नाम मुख्य अतिथि के रूप में दर्ज था।

    इन तीनों घटनाओं ने मध्य प्रदेश की राजनीति और प्रशासनिक व्यवस्थाओं से जुड़े अलग अलग पहलुओं को सामने रखा है। एक तरफ ओबीसी आरक्षण और लंबित नियुक्तियों का मुद्दा राजनीतिक बहस का हिस्सा बना हुआ है। दूसरी तरफ सेवा संकल्प यात्रा के दौरान सामने आया दिशा संबंधी अंतर चर्चा में रहा। वहीं पानसेमल में दिव्यांग लाभार्थियों को कार्यक्रम टलने के कारण दोबारा इंतजार करना पड़ा। इन घटनाओं के जरिए प्रदेश में राजनीतिक गतिविधियों के साथ साथ सार्वजनिक कार्यक्रमों की योजना और क्रियान्वयन भी चर्चा में आ गया है।

  • कहीं नेता के लिए रुकी जनसुनवाई, कहीं फरियादी खुद विधायक को घर ले गई: अधूरे ब्रिज पर नारे और पंडितजी का बंगला भी चर्चा में

    कहीं नेता के लिए रुकी जनसुनवाई, कहीं फरियादी खुद विधायक को घर ले गई: अधूरे ब्रिज पर नारे और पंडितजी का बंगला भी चर्चा में


    भोपाल । मध्य प्रदेश में राजनीति और नौकरशाही की ऐसी तस्वीरें सामने आई हैं जिनमें कहीं आम और खास के बीच का फर्क दिखाई देता है तो कहीं जनता और जनप्रतिनिधि के बीच सीधे संवाद की एक उम्मीद नजर आती है। शिवपुरी में जनसुनवाई के दौरान भाजपा नेता के पहुंचते ही कलेक्टर का कुर्सी से उठकर उनसे मिलना और फिर उन्हें अपने केबिन में लेकर जाना चर्चा का विषय बन गया। दूसरी ओर गुना में एक बुजुर्ग महिला कांग्रेस विधायक जयवर्धन सिंह का हाथ पकड़कर उन्हें अपने आधे अधूरे घर तक ले गई। इन दोनों घटनाओं ने लोकतंत्र और प्रशासन की प्राथमिकताओं पर अपने अपने तरीके से सवाल खड़े किए हैं।

    शिवपुरी में कलेक्टर जनसुनवाई कर रहे थे और आम लोग अपनी समस्याएं लेकर पहुंचे हुए थे। इसी दौरान भाजपा जिला अध्यक्ष वहां पहुंचे। बताया गया कि कलेक्टर ने उनसे मुलाकात की और फिर जनसुनवाई के बीच ही उन्हें अपने केबिन में लेकर चले गए। कुछ देर बाद कलेक्टर वापस लौटे और लोगों की समस्याएं सुनने का सिलसिला फिर शुरू हुआ लेकिन तब तक यह दृश्य चर्चा में आ चुका था। सवाल यह उठने लगा कि यदि कोई आम व्यक्ति अपनी समस्या लेकर जनसुनवाई में पहुंचता है तो उसे अपनी बारी का इंतजार करना पड़ता है लेकिन किसी राजनीतिक पदाधिकारी के आने पर प्राथमिकता बदल क्यों जाती है। यह घटना भले कुछ मिनटों की रही हो लेकिन आम और खास के बीच व्यवहार के अंतर को लेकर बहस जरूर छेड़ गई।

    इसके विपरीत गुना जिले में राघौगढ़ विधानसभा क्षेत्र के दौरे पर पहुंचे कांग्रेस विधायक जयवर्धन सिंह के सामने एक बुजुर्ग महिला ने अपनी परेशानी सीधे रखी। महिला विधायक का हाथ पकड़कर उन्हें अपने घर तक ले गई और अपना अधूरा मकान दिखाया। उसने बताया कि घर में प्लास्टर और पुताई का काम अब तक पूरा नहीं हो पाया है। विधायक ने महिला को मदद और घर का काम पूरा कराने का भरोसा दिया। यह दृश्य राजनीति की तस्वीर के रूप में चर्चा में रहा लेकिन इसके पीछे एक बड़ा संदेश भी छिपा है कि जनता को अपने प्रतिनिधियों तक बिना डर और संकोच पहुंचने का अधिकार होना चाहिए। लोकतंत्र की असली खूबसूरती तभी है जब कोई आम नागरिक बेझिझक अपने जनप्रतिनिधि का हाथ पकड़कर अपनी परेशानी बता सके।

    उधर इंदौर जिले के महू में अधूरे रेलवे ओवरब्रिज को लेकर राजनीतिक विरोध का अलग तरीका देखने को मिला। ब्रिज निर्माण में हो रही देरी से नाराज कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने उसकी बाउंड्री पर सरकार नेता और ठेकेदार को निशाने पर लेते हुए नारे लिखवा दिए। काम की धीमी रफ्तार और विकास के नाम पर सवाल उठाते इन स्लोगन की तस्वीरें सोशल मीडिया पर तेजी से फैल गईं। इसके बाद प्रशासन ने बाउंड्री पर लिखे नारों को सफेद रंग से पुतवा दिया। कांग्रेस ने इसी मुद्दे पर विरोध प्रदर्शन और कीर्तन भी किया। विपक्ष का तर्क है कि यदि निर्माण कार्य पूरा करने में भी उतनी ही तेजी दिखाई जाती जितनी नारों को मिटाने में दिखाई गई तो शायद विरोध की जरूरत ही नहीं पड़ती।

    राजनीति के इन खुले दृश्यों के बीच भोपाल की अंदरूनी सियासत से जुड़ी चर्चा भी सुर्खियों में रही। खबर में एक ऐसे भाजपा नेता का जिक्र है जिन्हें पंडितजी के नाम से संबोधित किया गया है और जो विधायक या मंत्री न होने के बावजूद अपना सरकारी बंगला 2028 तक बचाने में सफल रहे हैं। चर्चा है कि बंगले को लेकर बदलाव की तैयारी थी लेकिन दिल्ली स्तर पर हस्तक्षेप के बाद मामला बदल गया। बंगला समाज सेवा के नाम पर आवंटित बताया जा रहा है जबकि राजनीतिक गलियारों में इसे भविष्य की सियासत के केंद्र के रूप में भी देखा जा रहा है।

    कुल मिलाकर मध्य प्रदेश की इन घटनाओं ने सत्ता राजनीति और प्रशासन की कई परतें खोल दी हैं। कहीं आम आदमी इंतजार करता दिखाई देता है और खास व्यक्ति को प्राथमिकता मिलती नजर आती है तो कहीं एक बुजुर्ग महिला सीधे अपने विधायक तक पहुंचकर अपनी समस्या बताती है। अधूरे विकास कार्यों पर विपक्ष नारे लिखकर सरकार को घेरता है और दूसरी तरफ सत्ता के गलियारों में बंगले बचाने की सियासत चलती है। यही राजनीति और व्यवस्था की वह तस्वीर है जिसमें सवाल भी हैं और उम्मीदें भी।

  • ‘मामा वापस आओ’ से ‘जीतू को CM बनाओ’ तक गूंजे नारे: MP की सियासत में नया सियासी शोर, विधायक प्रतिनिधि पर ग्रामीण को थप्पड़ मारने का आरोप

    ‘मामा वापस आओ’ से ‘जीतू को CM बनाओ’ तक गूंजे नारे: MP की सियासत में नया सियासी शोर, विधायक प्रतिनिधि पर ग्रामीण को थप्पड़ मारने का आरोप


    भोपाल। मध्यप्रदेश की राजनीति में इन दिनों नारों और बयानों ने सियासी माहौल को अलग ही रंग दे दिया है। कहीं केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान के लिए मामा वापस आओ के नारे गूंज रहे हैं तो कहीं कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी को मुख्यमंत्री बनाने की आवाज उठ रही है। दूसरी तरफ मंदसौर जिले में सड़क की समस्या को लेकर भाजपा विधायक का काफिला रोकने के बाद विवाद खड़ा हो गया है और विधायक प्रतिनिधि पर एक ग्रामीण को थप्पड़ मारने का आरोप लगा है। इन घटनाओं ने प्रदेश की राजनीति में चर्चा का नया विषय पैदा कर दिया है।

    भोपाल में एक कार्यक्रम के दौरान केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान के प्रति लोगों का पुराना मामा वाला प्यार एक बार फिर दिखाई दिया। कार्यक्रम में लोगों ने आई लव यू मामा और मामा वापस आ जाइए जैसे नारे लगाए। जवाब में शिवराज सिंह चौहान ने लोगों की ओर फ्लाइंग किस भेजे और आई लव यू टू कहकर उनका अभिवादन किया। उन्होंने मंच से कहा कि वह सभी से प्यार करते हैं और यह प्यार का सिलसिला जिंदगी भर चलता रहेगा।

    इस दौरान शिवराज सिंह चौहान का एक बयान खासा चर्चा में रहा। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री और मंत्री आते जाते रहते हैं लेकिन मामा परमानेंट हैं। शिवराज के इस बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में भी चर्चाएं तेज हो गईं। हालांकि शिवराज सिंह चौहान के लिए मामा वाला संबोधन कोई नया नहीं है। लंबे समय से उनके समर्थक और आम लोग उन्हें इसी नाम से पुकारते रहे हैं और मुख्यमंत्री पद से हटने के बाद भी कई कार्यक्रमों में उनके लिए मामा वापस आओ जैसे नारे सुनाई देते रहे हैं।

    उधर कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी के लिए भी कार्यकर्ताओं और समर्थकों ने मुख्यमंत्री बनाने के नारे लगाए। देवास जिले के खातेगांव में कार्यकर्ताओं ने प्रदेश का मुख्यमंत्री कैसा हो जीतू पटवारी जैसा हो के नारे लगाए। इसके बाद भोपाल में चयनित शिक्षक अभ्यर्थियों के आंदोलन के दौरान जीतू पटवारी जब अभ्यर्थियों की मांगों के समर्थन में पहुंचे तो वहां भी उनके पक्ष में मुख्यमंत्री बनाने के नारे गूंजे। समर्थकों ने हमारा मुख्यमंत्री कैसा हो जीतू पटवारी जैसा हो और अगला सीएम कैसा हो जीतू भैया जैसा हो जैसे नारे लगाए।

    हालांकि मध्यप्रदेश में अगला विधानसभा चुनाव अभी दूर है और मुख्यमंत्री पद की संभावनाओं पर अभी से कोई ठोस निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी। कांग्रेस के भीतर भी भविष्य में मुख्यमंत्री पद के लिए कई नेताओं के नाम चर्चा में आ सकते हैं। फिलहाल जीतू पटवारी के समर्थन में लग रहे नारे कांग्रेस की अंदरूनी राजनीति और कार्यकर्ताओं के उत्साह को जरूर दिखा रहे हैं।

    वहीं मंदसौर जिले के गरोठ में भाजपा विधायक चंदर सिंह सिसोदिया के काफिले को ग्रामीणों ने सड़क की समस्या बताने के लिए रोक लिया। आरोप है कि काफिला रोके जाने के बाद माहौल तनावपूर्ण हो गया। इस घटना का वीडियो भी सामने आया है जिसमें विधायक ग्रामीणों से बात करते दिखाई दे रहे हैं।

    ग्रामीणों का आरोप है कि इस दौरान विधायक प्रतिनिधि अनिल राठौर ने एक ग्रामीण को थप्पड़ मार दिया। कुछ लोगों ने यह आरोप भी लगाया कि वीडियो बना रहे लोगों के मोबाइल ले लिए गए। मामले को लेकर एक ग्रामीण ने पुलिस को लिखित शिकायत दी है और अब पूरा विवाद थाने तक पहुंच गया है। आरोपों की जांच और पुलिस की कार्रवाई पर भी नजर बनी हुई है।

    इधर इंदौर भाजपा शहर अध्यक्ष सुमित मिश्रा का एक बयान भी चर्चा में रहा। वंदे मातरम् को लेकर कांग्रेस पर निशाना साधते समय उन्होंने सरदार वल्लभभाई पटेल को देश का पहला प्रधानमंत्री बता दिया। जबकि भारत के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू थे और सरदार पटेल कभी प्रधानमंत्री नहीं रहे। इस बयान के बाद कांग्रेस ने भाजपा नेता के सामान्य ज्ञान और इतिहास की जानकारी पर सवाल उठाए।

    कुल मिलाकर मध्यप्रदेश की राजनीति में इन दिनों बयान नारे और विवाद लगातार सुर्खियां बना रहे हैं। शिवराज सिंह चौहान के मामा परमानेंट वाले बयान से लेकर जीतू पटवारी के लिए मुख्यमंत्री के नारों और गरोठ में विधायक प्रतिनिधि पर लगे थप्पड़ के आरोप तक हर मामला राजनीतिक चर्चा को नई दिशा दे रहा है।

  • नेताजी ने गड्ढे में बैठकर मनाया जन्मदिन, सांसद की गाड़ी ट्रैक्टर से निकली; भोपाल में चमकती सड़कें बनीं सवाल

    नेताजी ने गड्ढे में बैठकर मनाया जन्मदिन, सांसद की गाड़ी ट्रैक्टर से निकली; भोपाल में चमकती सड़कें बनीं सवाल


    भोपाल । मध्यप्रदेश में बारिश के बाद सड़कों की हालत को लेकर एक बार फिर सवाल उठने लगे हैं। प्रदेश के अलग अलग शहरों और गांवों से सामने आ रही तस्वीरें बता रही हैं कि कहीं सड़कें गड्ढों में तब्दील हो चुकी हैं तो कहीं कच्चे रास्ते बारिश के बाद कीचड़ में बदल गए हैं। हालात ऐसे हैं कि आम लोगों के साथ अब जनप्रतिनिधियों को भी इन खराब रास्तों का सामना करना पड़ रहा है। बीना में सड़क के गड्ढे में बैठकर नेता ने विरोध जताया तो मंडला में भाजपा सांसद फग्गन सिंह कुलस्ते का काफिला कीचड़ में फंस गया। इसके बाद भोपाल की सड़कों को लेकर भी सरकार से सवाल पूछे जा रहे हैं।

    बीना में कांग्रेस नेता इंदर सिंह ठाकुर ने सड़क की बदहाली के खिलाफ अनोखे अंदाज में प्रदर्शन किया। खास बात यह रही कि उन्होंने अपना जन्मदिन भी इसी विरोध के बीच मनाया। समर्थकों के साथ सड़क पर पहुंचे नेता ने शासन और प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की और बारिश के पानी से भरे गड्ढे में बैठ गए। इसके बाद वह गड्ढे में लेटते और तैरते हुए भी नजर आए। उनका कहना था कि सड़क की हालत इतनी खराब हो चुकी है कि लोगों का निकलना मुश्किल है। प्रदर्शन के बाद तहसीलदार ने फोन पर समस्या का समाधान कराने का भरोसा दिया। आश्वासन मिलने के बाद प्रदर्शन खत्म हुआ लेकिन सड़क की मरम्मत कब होगी इसका इंतजार अब भी है। यानी जन्मदिन पर नेता जी सुर्खियों में आ गए लेकिन सड़क को अभी सुधार का इंतजार है।

    उधर मंडला में सड़क की बदहाली की ऐसी तस्वीर सामने आई जिसने विकास के दावों पर ही सवाल खड़े कर दिए। भाजपा सांसद फग्गन सिंह कुलस्ते एक गांव में सामुदायिक भवन के लोकार्पण कार्यक्रम में पहुंचे थे। कार्यक्रम स्थल तक पहुंचने के लिए पक्का रास्ता नहीं होने के कारण बारिश के बाद कच्चा रास्ता पूरी तरह कीचड़ में बदल गया था। जैसे ही सांसद का काफिला वहां पहुंचा वाहनों के पहिए कीचड़ में धंस गए। कुछ देर में स्थिति ऐसी हो गई कि सांसद और अधिकारियों को अपनी गाड़ियों से उतरना पड़ा। इसके बाद ग्रामीण आगे आए और ट्रैक्टर की मदद से एक एक करके वाहनों को कीचड़ से बाहर निकाला गया।

    इस घटना के बाद स्थानीय स्तर पर यह सवाल भी उठ रहा है कि जब जनप्रतिनिधि और अधिकारी खुद खराब रास्ते में फंस गए हैं तो क्या अब इस इलाके में सड़क निर्माण की समस्या को गंभीरता से लिया जाएगा। जिस रास्ते से ग्रामीण लंबे समय से गुजरने को मजबूर हैं उसी रास्ते पर सांसद के काफिले के फंसने से सड़क की जरूरत और ज्यादा सामने आ गई है।

    राजधानी भोपाल की तस्वीर भी पूरी तरह राहत देने वाली नहीं है। शहर के कई इलाकों में बारिश के बाद सड़कें गड्ढों से भर गई हैं। कहीं सड़क पर बड़े गड्ढे हैं तो कहीं पानी जमा होने के कारण सड़क और गड्ढे के बीच अंतर करना मुश्किल हो रहा है। सवाल इसलिए भी उठ रहा है क्योंकि भोपाल में ही प्रदेश सरकार के मंत्री और बड़े अधिकारी बैठते हैं। इसके बावजूद आम लोगों को खराब सड़कों और जलभराव से जूझना पड़ रहा है।

    इसी बीच मंत्रियों और विधायकों के निवास वाले इलाकों की बेहतर सड़कों को लेकर भी तुलना की जा रही है। पीडब्ल्यूडी मंत्री राकेश सिंह के बंगले के सामने की सड़क को लेकर कहा जा रहा है कि वहां सड़क की स्थिति बेहतर दिखाई देती है जबकि शहर के दूसरे हिस्सों में गड्ढे लोगों की परेशानी बढ़ा रहे हैं। मंत्री ने सड़कों की गुणवत्ता बेहतर होने और अच्छी सड़कें बनाए जाने की बात कही है। अब लोगों की नजर इस बात पर है कि ये दावे जमीन पर कब दिखाई देंगे।

    बीना के गड्ढे से लेकर मंडला के कीचड़ और भोपाल की जर्जर सड़कों तक सामने आई तस्वीरों ने सड़क व्यवस्था को लेकर बहस तेज कर दी है। लोगों की मांग साफ है कि बारिश के बाद सिर्फ गड्ढों पर मिट्टी या अस्थायी मरम्मत न हो बल्कि मजबूत और टिकाऊ सड़कें बनाई जाएं। क्योंकि सड़क पर चलने वाला आम आदमी हो या फिर सांसद का काफिला आखिर रास्ता सभी को एक ही मिलता है।

  • आतंकवादियों की बहन बयान पर विजय शाह को लेकर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई: अभियोजन मंजूरी का फैसला राज्यपाल के पास, कोर्ट ने कहा रिपोर्ट पेश करें

    आतंकवादियों की बहन बयान पर विजय शाह को लेकर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई: अभियोजन मंजूरी का फैसला राज्यपाल के पास, कोर्ट ने कहा रिपोर्ट पेश करें


    भोपाल । मध्य प्रदेश के जनजातीय कार्य मंत्री कुंवर विजय शाह से जुड़े विवादित बयान के मामले में सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। कर्नल सोफिया कुरैशी को लेकर दिए गए बयान के बाद दर्ज FIR को चुनौती देने वाले मामले में सुप्रीम कोर्ट ने जांच और अभियोजन मंजूरी की स्थिति पर जानकारी ली। चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ के सामने सरकार की ओर से बताया गया कि मामले की जांच पूरी हो चुकी है और जांच रिपोर्ट फिलहाल सीलबंद है। अब चार्जशीट या क्लोजर रिपोर्ट दाखिल करने से पहले सक्षम प्राधिकारी से अभियोजन की मंजूरी लेना जरूरी है। सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि इस मामले में कैबिनेट स्तर पर विचार हो चुका है और फाइल अंतिम निर्णय के लिए राज्यपाल के पास भेजी गई है।

    सुनवाई के दौरान अदालत ने जांच की स्थिति को लेकर स्पष्ट सवाल किया कि जब जांच रिपोर्ट पूरी तरह तैयार है तो क्या अब केवल सरकार की मंजूरी का इंतजार किया जा रहा है। सरकार की ओर से इसकी पुष्टि की गई। अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल के एम नटराज ने बताया कि कैबिनेट इस विषय पर विचार कर चुकी है और फाइल राज्यपाल के पास भेजी गई है। उन्होंने उम्मीद जताई कि जल्द ही इस पर अंतिम निर्णय हो जाएगा। सरकार की ओर से मंत्री के माफीनामे का भी हवाला दिया गया। अदालत से अनुरोध किया गया कि सक्षम प्राधिकारी जब मामले पर विचार करे तो विजय शाह की ओर से घटना के अगले दिन सार्वजनिक रूप से मांगी गई माफी को भी ध्यान में रखा जाए।

    विजय शाह की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता मनिंदर सिंह ने भी अदालत के सामने यही बात रखी कि मंत्री ने बयान के बाद माफी मांग ली थी और इस तथ्य को रिकॉर्ड पर लिया जाना चाहिए। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल मामले के गुण दोष पर कोई टिप्पणी नहीं की। अदालत ने कहा कि जांच पूरी हो चुकी है और रिपोर्ट सीलबंद है। अभियोजन मंजूरी का विषय फिलहाल सक्षम प्राधिकारी के सामने लंबित है। मंजूरी मिलने के बाद सीलबंद रिपोर्ट को संबंधित सक्षम अदालत के सामने पेश किया जाएगा।

    सुनवाई के दौरान कोर्ट ने जांच अधिकारी और DIG इंटेलिजेंस डी कल्याण चक्रवर्ती की भूमिका को लेकर भी स्थिति स्पष्ट की। अदालत ने कहा कि जांच अधिकारी अपना काम पूरा कर चुके हैं इसलिए उन्हें बार बार व्यक्तिगत रूप से अदालत में आने की जरूरत नहीं है। अब सक्षम प्राधिकारी के फैसले के बाद नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी। यदि अभियोजन की मंजूरी नहीं मिलती है तो क्लोजर रिपोर्ट दाखिल किए जाने की बात भी अदालत के सामने रखी गई।

    मामला मध्य प्रदेश सरकार के मंत्री विजय शाह की उस टिप्पणी से जुड़ा है जो उन्होंने 11 मई 2025 को इंदौर के महू के रायकुंडा गांव में हलमा कार्यक्रम के दौरान कर्नल सोफिया कुरैशी को लेकर की थी। ऑपरेशन सिंदूर के संदर्भ में दिए गए बयान में उन्होंने कर्नल सोफिया को आतंकवादियों की बहन कहकर टिप्पणी की थी। बयान सामने आने के बाद इस पर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर तीखी प्रतिक्रिया हुई थी। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने मामले का स्वत संज्ञान लिया था और बाद में सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर जांच के लिए विशेष जांच दल यानी SIT का गठन किया गया।

    इस मामले में सुप्रीम कोर्ट पहले भी मध्य प्रदेश सरकार के रुख पर नाराजगी जता चुका है। अभियोजन की मंजूरी में देरी को लेकर अदालत ने सरकार को सख्त चेतावनी दी थी और कहा था कि उसके निर्देशों का पालन किया जाना चाहिए। पिछली सुनवाई में मंत्री की ओर से कई बार माफी मांगे जाने की दलील भी दी गई थी लेकिन अदालत ने इसे पर्याप्त नहीं माना था।

    अब पूरा मामला अभियोजन की मंजूरी पर टिक गया है। मध्य प्रदेश कैबिनेट ने मंत्री के खिलाफ मुकदमा चलाने की मंजूरी नहीं देने का प्रस्ताव राज्यपाल को भेजा है। राज्यपाल के निर्णय के बाद ही यह तय होगा कि सीलबंद जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे अभियोजन की कार्रवाई होगी या मामले में क्लोजर रिपोर्ट दाखिल की जाएगी।