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  • आतंकवादियों की बहन बयान पर विजय शाह को लेकर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई: अभियोजन मंजूरी का फैसला राज्यपाल के पास, कोर्ट ने कहा रिपोर्ट पेश करें

    आतंकवादियों की बहन बयान पर विजय शाह को लेकर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई: अभियोजन मंजूरी का फैसला राज्यपाल के पास, कोर्ट ने कहा रिपोर्ट पेश करें


    भोपाल । मध्य प्रदेश के जनजातीय कार्य मंत्री कुंवर विजय शाह से जुड़े विवादित बयान के मामले में सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। कर्नल सोफिया कुरैशी को लेकर दिए गए बयान के बाद दर्ज FIR को चुनौती देने वाले मामले में सुप्रीम कोर्ट ने जांच और अभियोजन मंजूरी की स्थिति पर जानकारी ली। चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ के सामने सरकार की ओर से बताया गया कि मामले की जांच पूरी हो चुकी है और जांच रिपोर्ट फिलहाल सीलबंद है। अब चार्जशीट या क्लोजर रिपोर्ट दाखिल करने से पहले सक्षम प्राधिकारी से अभियोजन की मंजूरी लेना जरूरी है। सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि इस मामले में कैबिनेट स्तर पर विचार हो चुका है और फाइल अंतिम निर्णय के लिए राज्यपाल के पास भेजी गई है।

    सुनवाई के दौरान अदालत ने जांच की स्थिति को लेकर स्पष्ट सवाल किया कि जब जांच रिपोर्ट पूरी तरह तैयार है तो क्या अब केवल सरकार की मंजूरी का इंतजार किया जा रहा है। सरकार की ओर से इसकी पुष्टि की गई। अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल के एम नटराज ने बताया कि कैबिनेट इस विषय पर विचार कर चुकी है और फाइल राज्यपाल के पास भेजी गई है। उन्होंने उम्मीद जताई कि जल्द ही इस पर अंतिम निर्णय हो जाएगा। सरकार की ओर से मंत्री के माफीनामे का भी हवाला दिया गया। अदालत से अनुरोध किया गया कि सक्षम प्राधिकारी जब मामले पर विचार करे तो विजय शाह की ओर से घटना के अगले दिन सार्वजनिक रूप से मांगी गई माफी को भी ध्यान में रखा जाए।

    विजय शाह की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता मनिंदर सिंह ने भी अदालत के सामने यही बात रखी कि मंत्री ने बयान के बाद माफी मांग ली थी और इस तथ्य को रिकॉर्ड पर लिया जाना चाहिए। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल मामले के गुण दोष पर कोई टिप्पणी नहीं की। अदालत ने कहा कि जांच पूरी हो चुकी है और रिपोर्ट सीलबंद है। अभियोजन मंजूरी का विषय फिलहाल सक्षम प्राधिकारी के सामने लंबित है। मंजूरी मिलने के बाद सीलबंद रिपोर्ट को संबंधित सक्षम अदालत के सामने पेश किया जाएगा।

    सुनवाई के दौरान कोर्ट ने जांच अधिकारी और DIG इंटेलिजेंस डी कल्याण चक्रवर्ती की भूमिका को लेकर भी स्थिति स्पष्ट की। अदालत ने कहा कि जांच अधिकारी अपना काम पूरा कर चुके हैं इसलिए उन्हें बार बार व्यक्तिगत रूप से अदालत में आने की जरूरत नहीं है। अब सक्षम प्राधिकारी के फैसले के बाद नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी। यदि अभियोजन की मंजूरी नहीं मिलती है तो क्लोजर रिपोर्ट दाखिल किए जाने की बात भी अदालत के सामने रखी गई।

    मामला मध्य प्रदेश सरकार के मंत्री विजय शाह की उस टिप्पणी से जुड़ा है जो उन्होंने 11 मई 2025 को इंदौर के महू के रायकुंडा गांव में हलमा कार्यक्रम के दौरान कर्नल सोफिया कुरैशी को लेकर की थी। ऑपरेशन सिंदूर के संदर्भ में दिए गए बयान में उन्होंने कर्नल सोफिया को आतंकवादियों की बहन कहकर टिप्पणी की थी। बयान सामने आने के बाद इस पर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर तीखी प्रतिक्रिया हुई थी। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने मामले का स्वत संज्ञान लिया था और बाद में सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर जांच के लिए विशेष जांच दल यानी SIT का गठन किया गया।

    इस मामले में सुप्रीम कोर्ट पहले भी मध्य प्रदेश सरकार के रुख पर नाराजगी जता चुका है। अभियोजन की मंजूरी में देरी को लेकर अदालत ने सरकार को सख्त चेतावनी दी थी और कहा था कि उसके निर्देशों का पालन किया जाना चाहिए। पिछली सुनवाई में मंत्री की ओर से कई बार माफी मांगे जाने की दलील भी दी गई थी लेकिन अदालत ने इसे पर्याप्त नहीं माना था।

    अब पूरा मामला अभियोजन की मंजूरी पर टिक गया है। मध्य प्रदेश कैबिनेट ने मंत्री के खिलाफ मुकदमा चलाने की मंजूरी नहीं देने का प्रस्ताव राज्यपाल को भेजा है। राज्यपाल के निर्णय के बाद ही यह तय होगा कि सीलबंद जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे अभियोजन की कार्रवाई होगी या मामले में क्लोजर रिपोर्ट दाखिल की जाएगी।

  • भोपाल । MP की सियासत में UCC पर फिर संग्राम नेता प्रतिपक्ष बोले बीजेपी का काला कानून खत्म करेगी कांग्रेस सरकार

    भोपाल । MP की सियासत में UCC पर फिर संग्राम नेता प्रतिपक्ष बोले बीजेपी का काला कानून खत्म करेगी कांग्रेस सरकार


    भोपाल । मध्यप्रदेश की राजनीति में समान नागरिक संहिता यानी यूसीसी को लेकर एक बार फिर सियासी बहस तेज हो गई है। भोपाल के बुधवारा चौराहे पर आजादी के पखवाड़े के समापन के मौके पर आयोजित कार्यक्रम में कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं ने सरकार की यूसीसी नीति पर जमकर हमला बोला। कार्यक्रम में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी और नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार समेत कई कांग्रेस नेता शामिल हुए। इसी मंच से उमंग सिंघार ने बड़ा राजनीतिक ऐलान करते हुए कहा कि यदि आने वाले समय में कांग्रेस की सरकार बनती है तो यूसीसी को खत्म किया जाएगा। उन्होंने आरोप लगाया कि बीजेपी ने विधानसभा में बहुमत के बल पर इस कानून को पारित कराया है।

    विधायक आरिफ मसूद की ओर से आयोजित जंग ए आजादी में उलमा की कुर्बानी कार्यक्रम के समापन समारोह में यूसीसी को लेकर कांग्रेस का रुख खुलकर सामने आया। उमंग सिंघार ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि सरकार की मंशा इस कानून को गांव गांव तक लागू करने की है। उन्होंने इसे काला कानून बताते हुए कहा कि बीजेपी ने अपने बहुमत का इस्तेमाल करके इसे पास करा लिया है लेकिन सत्ता परिवर्तन होने पर कांग्रेस इसे खत्म करने की दिशा में कदम उठाएगी। उनके इस बयान के बाद मध्यप्रदेश की सियासत में यूसीसी को लेकर नया विवाद खड़ा होना तय माना जा रहा है।

    कार्यक्रम में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने भी केंद्र और राज्य की बीजेपी सरकार पर राजनीतिक हमला बोला। उन्होंने कार्यक्रम के आयोजक आरिफ मसूद की तारीफ करते हुए कहा कि मौजूदा दौर में जब समाज में नफरत का माहौल होने की बात कही जा रही है तब आजादी का पखवाड़ा आयोजित कर उन्होंने राहुल गांधी की मोहब्बत की दुकान के विचार को आगे बढ़ाने का काम किया है। कार्यक्रम के दौरान अतिथियों ने बच्चों को नकद पुरस्कार देकर सम्मानित भी किया।

    मध्यप्रदेश में यूसीसी के प्रावधानों को लेकर सरकार की ओर से समान नागरिक व्यवस्था पर जोर दिया गया है। इसके तहत विवाह और तलाक से जुड़े नियमों को एक समान बनाने का प्रावधान है। बहुविवाह पर रोक के साथ विवाह और विवाह विच्छेद के पंजीकरण को अनिवार्य किया गया है। इसके अलावा लिव इन रिलेशनशिप को लेकर भी पंजीकरण और सूचना से जुड़े नियम निर्धारित किए गए हैं। समर्थकों का तर्क है कि इन प्रावधानों से वैवाहिक अधिकारों में समानता आएगी और महिलाओं तथा बच्चों के कानूनी अधिकार मजबूत होंगे।

    उत्तराधिकार और संपत्ति के मामलों में भी समान अधिकार का प्रावधान यूसीसी की प्रमुख विशेषताओं में बताया गया है। बेटे और बेटियों को संपत्ति में समान अधिकार देने की व्यवस्था की गई है। इसके साथ ही बच्चों के अधिकारों और भरण पोषण से जुड़े प्रावधानों को भी अधिक समान बनाने की कोशिश की गई है। कानून में विवाह और पारिवारिक संबंधों से जुड़ी कुछ पारंपरिक प्रथाओं पर भी प्रतिबंध लगाया गया है। हालांकि इन प्रावधानों को लेकर अलग अलग राजनीतिक दलों और सामाजिक समूहों की राय अलग रही है।

    यूसीसी के दायरे को लेकर जनजातीय समाज को विशेष छूट का प्रावधान भी चर्चा में रहा है। अनुसूचित जनजातियों की पारंपरिक सामाजिक व्यवस्था और रीति रिवाजों को ध्यान में रखते हुए उन्हें कानून के कुछ प्रावधानों से बाहर रखने की व्यवस्था की गई है। सरकार इसे सांस्कृतिक विविधता के संरक्षण से जोड़ती है जबकि कांग्रेस समेत विपक्षी दल इसके कई प्रावधानों और लागू करने के तरीके पर सवाल उठाते रहे हैं।

    भोपाल के इस कार्यक्रम के बाद यूसीसी एक बार फिर मध्यप्रदेश की राजनीति के केंद्र में आ गया है। उमंग सिंघार के सरकार बनने पर कानून खत्म करने वाले बयान ने आगामी राजनीतिक बहस को और धार दे दी है। अब यह मुद्दा केवल कानूनी प्रावधानों तक सीमित न रहकर बीजेपी और कांग्रेस के बीच वैचारिक और राजनीतिक टकराव का नया आधार बन सकता है।

  • MP News: अपनी ही सरकार पर विधायक ने उठाए सवाल, भाजपा कार्यक्रम में महिला सम्मान पर बवाल; भोपाल थाने में TI और हिंदू नेता आमने-सामने

    MP News: अपनी ही सरकार पर विधायक ने उठाए सवाल, भाजपा कार्यक्रम में महिला सम्मान पर बवाल; भोपाल थाने में TI और हिंदू नेता आमने-सामने


    भोपाल । मध्य प्रदेश की राजनीति में इन दिनों सड़क से लेकर सरकारी दफ्तर और पार्टी के कार्यक्रम तक कई ऐसे मामले सामने आ रहे हैं जो सियासी गलियारों में चर्चा का विषय बन गए हैं। कहीं भाजपा विधायक अपनी ही सरकार की सड़क व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए जनता के गुस्से का डर बता रहे हैं तो कहीं भाजपा के कार्यक्रम में महिला जनप्रतिनिधियों को बैठने के लिए कुर्सी तक नहीं मिलने पर सवाल खड़े हो रहे हैं। दूसरी ओर भोपाल के एक थाने में पुलिस अधिकारी और हिंदू संगठन के नेता के बीच तीखी बहस का वीडियो सामने आने के बाद पुलिस और सामाजिक संगठनों के बीच तालमेल को लेकर भी चर्चा शुरू हो गई है।

    जबलपुर जिले के पाटन से भाजपा विधायक अजय विश्नोई ने प्रदेश की खराब सड़कों को लेकर खुलकर अपनी बात रखी है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में सड़कों की हालत खराब है और इसका सीधा असर जनप्रतिनिधियों पर पड़ता है। उनका कहना है कि जब सड़कें खराब होती हैं तो परेशान जनता सबसे पहले स्थानीय विधायक से सवाल करती है। विधायक ने यह भी कहा कि सड़क चाहे लोक निर्माण विभाग की हो या प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना से जुड़ी हो कई जगहों पर स्थिति खराब है। उनके बयान को अपनी ही सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाने के तौर पर देखा जा रहा है।

    विधायक ने सड़क निर्माण में भ्रष्टाचार और ठेकेदारी व्यवस्था को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए। उनका कहना है कि ठेकेदार काम हासिल करने की प्रतिस्पर्धा में कम दर पर ठेके लेते हैं और निर्माण प्रक्रिया में अनियमितताओं के कारण सड़कों की गुणवत्ता प्रभावित होती है। खराब सड़कें केवल आवागमन की परेशानी नहीं बल्कि आम लोगों की नाराजगी का कारण भी बनती हैं। यही वजह है कि विधायक ने कहा कि जनता की नाराजगी का पहला सामना स्थानीय जनप्रतिनिधियों को करना पड़ता है।

    दूसरी तस्वीर गुना के एक भाजपा कार्यक्रम से सामने आई जहां भाजपा विधायक प्रियंका मीणा और नगर पालिका अध्यक्ष सविता गुप्ता को काफी देर तक खड़े रहना पड़ा। कार्यक्रम में मौजूद पुरुष नेताओं के लिए कुर्सियां और सोफा मौजूद थे लेकिन दोनों महिला जनप्रतिनिधियों के लिए बैठने की व्यवस्था नजर नहीं आई। आखिरकार विधायक ने खुद अपनी कुर्सी लगाई और बैठ गईं। इसके बाद अपने भाषण में उन्होंने महिला जनप्रतिनिधियों को बराबरी का सम्मान दिए जाने की बात कही। उन्होंने महिला आरक्षण और राजनीतिक भागीदारी का जिक्र करते हुए कहा कि महिलाओं को भी बराबरी के साथ बैठाने से ही वास्तविक महिला सशक्तीकरण की तस्वीर सामने आएगी।

    इस घटना के बाद भाजपा के कार्यक्रमों में महिला जनप्रतिनिधियों के सम्मान और व्यवस्थाओं को लेकर सवाल उठने लगे हैं। प्रियंका मीणा इससे पहले भी महिलाओं से जुड़े मुद्दे पर अपनी ही पार्टी के विधायक पन्नालाल शाक्य के साथ सार्वजनिक मंच पर बहस को लेकर चर्चा में रह चुकी हैं।

    इसी बीच भोपाल के जहांगीराबाद थाने का एक वीडियो भी चर्चा में है। यहां हिंदू उत्सव समिति के अध्यक्ष चंद्रशेखर तिवारी और थाना प्रभारी राजन सिंह के बीच एक मामले को लेकर तीखी बहस हो गई। बताया गया कि हिंदू संगठन के कार्यकर्ता शिकायत पर कार्रवाई की मांग को लेकर थाने पहुंचे थे। इसी दौरान पुलिस और संगठन के प्रतिनिधियों के बीच बात बढ़ गई। मौके पर एसीपी उमेश तिवारी भी मौजूद थे और दोनों पक्षों को शांत कराने का प्रयास करते नजर आए।

    इस पूरे घटनाक्रम के वीडियो सामने आने के बाद पुलिस की कार्यप्रणाली और सामाजिक संगठनों के साथ संवाद को लेकर सवाल उठ रहे हैं। तीनों घटनाओं ने मध्य प्रदेश की सियासत और प्रशासन से जुड़े अलग अलग पहलुओं को एक साथ चर्चा में ला दिया है। सड़क व्यवस्था पर विधायक की नाराजगी हो या महिला जनप्रतिनिधियों को सम्मान देने का सवाल या फिर थाने में पुलिस और संगठन के बीच तीखी बहस ये घटनाएं बताती हैं कि जनता और जनप्रतिनिधियों से जुड़े मुद्दों पर अब सार्वजनिक जवाबदेही की मांग लगातार बढ़ रही है।

  • भाजपा युवा मोर्चा में संगठन विस्तार की रफ्तार तेज, 12 जिलाध्यक्षों का ऐलान; अभी भी कई जिलों में नियुक्तियां बाकी

    भाजपा युवा मोर्चा में संगठन विस्तार की रफ्तार तेज, 12 जिलाध्यक्षों का ऐलान; अभी भी कई जिलों में नियुक्तियां बाकी


    भोपाल। मध्यप्रदेश में भाजपा युवा मोर्चा के संगठनात्मक विस्तार की प्रक्रिया लगातार आगे बढ़ रही है। पार्टी ने युवा मोर्चा के 12 और जिलाध्यक्षों की घोषणा कर दी है। इसके साथ ही अब तक प्रदेश के 27 जिलों में युवा मोर्चा के जिलाध्यक्षों की नियुक्ति हो चुकी है। हालांकि प्रदेश के बाकी जिलों में अभी नियुक्तियों का इंतजार बना हुआ है। नई नियुक्तियों के साथ संगठन ने कई जिलों में युवा नेतृत्व को जिम्मेदारी सौंपते हुए जिला स्तर पर अपनी टीम को मजबूत करने की दिशा में कदम बढ़ाया है। खास बात यह है कि नई सूची में 9 जिलों के जिला महामंत्रियों के नाम भी घोषित किए गए हैं।

    भाजपा युवा मोर्चा की ओर से जारी नई नियुक्तियों में भोपाल ग्रामीण ग्वालियर ग्रामीण मऊगंज सतना कटनी पांढुर्णा धार ग्रामीण बुरहानपुर देवास विदिशा उज्जैन ग्रामीण और शाजापुर शामिल हैं। इससे पहले जुलाई में 15 जिलाध्यक्षों की घोषणा की गई थी। इस तरह करीब एक महीने के अंतराल में पार्टी ने 12 और जिलों में अध्यक्षों की नियुक्ति की है। लगातार हो रही इन नियुक्तियों को संगठन में नई टीम को सक्रिय करने की प्रक्रिया के तौर पर देखा जा रहा है।

    भोपाल ग्रामीण में वीरेंद्र सिंह राजपूत को जिलाध्यक्ष की जिम्मेदारी दी गई है। उनकी पत्नी रूमा राजपूत भोपाल शहर के वार्ड 85 की पार्षद हैं। वहीं ग्वालियर ग्रामीण में शिवराज यादव को जिलाध्यक्ष और मनोज गुर्जर को जिला महामंत्री बनाया गया है। मऊगंज में प्रवीण सिंह को जिलाध्यक्ष तथा विवेक तिवारी को महामंत्री की जिम्मेदारी मिली है। सतना में यश यादव जिलाध्यक्ष और शुभम परिहार महामंत्री बनाए गए हैं।

    कटनी में पारस जैन को जिलाध्यक्ष और देवांश श्रीवास्तव को जिला महामंत्री नियुक्त किया गया है। पांढुर्णा में विवेक रामचाकले को जिलाध्यक्ष तथा पंकज बंजारी को महामंत्री बनाया गया है। धार ग्रामीण में उज्ज्वल सोलंकी को जिलाध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपी गई है। बुरहानपुर में भरत रावल जिलाध्यक्ष और अमित वास्कले जिला महामंत्री बने हैं।

    इसी तरह देवास में रजत पाल सिंह को जिलाध्यक्ष तथा मोहित जाट को जिला महामंत्री बनाया गया है। विदिशा में अनुज मित्तल को जिलाध्यक्ष और शिवेन्द्र सिंह राजपूत को महामंत्री की जिम्मेदारी मिली है। उज्जैन ग्रामीण में हरजीत सिंह जिलाध्यक्ष और राहुल धाकड़ जिला महामंत्री बनाए गए हैं। शाजापुर में हर्षवर्धन मंडलोई को जिलाध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

    नई नियुक्तियों के बाद युवा मोर्चा के संगठनात्मक ढांचे को लेकर गतिविधियां और तेज होने की उम्मीद है। जिलाध्यक्षों की जिम्मेदारी केवल संगठन विस्तार तक सीमित नहीं होगी बल्कि युवाओं को पार्टी से जोड़ने संगठनात्मक कार्यक्रमों को गति देने और जमीनी स्तर पर कार्यकर्ताओं की सक्रियता बढ़ाने में भी उनकी भूमिका महत्वपूर्ण रहेगी। हालांकि अभी भी कई जिलों में जिलाध्यक्षों की नियुक्ति बाकी है। ऐसे में आने वाले दिनों में भाजपा की ओर से शेष जिलों को लेकर भी फैसले सामने आने की संभावना है। अब नजर इस बात पर रहेगी कि पार्टी बाकी जिलों में किन नए चेहरों पर भरोसा जताती है और युवा मोर्चा की पूरी टीम कब तक आकार लेती है।

  • BJP युवा मोर्चा की नई टीम तैयार, ग्वालियर से भोपाल और उज्जैन तक बदली कमान; जानें किसे मिली कौन सी जिम्मेदारी

    BJP युवा मोर्चा की नई टीम तैयार, ग्वालियर से भोपाल और उज्जैन तक बदली कमान; जानें किसे मिली कौन सी जिम्मेदारी


    भोपाल । मध्य प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी ने युवा मोर्चा के संगठन को और मजबूत करने की दिशा में एक और बड़ा कदम उठाया है। प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल की सहमति के बाद भाजयुमो प्रदेश अध्यक्ष श्याम टेलर ने 12 जिलों में नए जिलाध्यक्षों की घोषणा की है। इसके साथ ही 9 जिलों में जिला महामंत्रियों की नियुक्ति भी की गई है। नई जिम्मेदारियां ग्वालियर ग्रामीण मऊगंज सतना कटनी पांढुर्णा भोपाल ग्रामीण धार ग्रामीण बुरहानपुर देवास विदिशा उज्जैन ग्रामीण और शाजापुर में दी गई हैं। इससे पहले जुलाई में भी युवा मोर्चा ने 15 जिलों में अध्यक्षों की नियुक्ति की थी। उस सूची में ग्वालियर नगर समेत कई जिलों को नई कमान मिली थी। (peptechtime.com)

    ताजा नियुक्तियों में ग्वालियर ग्रामीण की जिम्मेदारी शिवराज यादव को दी गई है जबकि मनोज गुर्जर को जिला महामंत्री बनाया गया है। मऊगंज में प्रवीण सिंह जिलाध्यक्ष और विवेक तिवारी महामंत्री होंगे। सतना में यश यादव को जिलाध्यक्ष की जिम्मेदारी मिली है और शुभम परिहार जिला महामंत्री बनाए गए हैं। कटनी में पारस जैन को जिलाध्यक्ष तथा देवांश श्रीवास्तव को महामंत्री नियुक्त किया गया है। इन नियुक्तियों के जरिए पार्टी ने ग्रामीण और संगठनात्मक क्षेत्रों में युवा नेतृत्व को आगे बढ़ाने का संकेत दिया है।

    पांढुर्णा में विवेक रामचाकले को जिलाध्यक्ष बनाया गया है जबकि पंकज बंजारी को जिला महामंत्री की जिम्मेदारी मिली है। भोपाल ग्रामीण में वीरेंद्र सिंह राजपूत को युवा मोर्चा का जिलाध्यक्ष नियुक्त किया गया है। धार ग्रामीण में उज्ज्वल सोलंकी को जिलाध्यक्ष बनाया गया है। इन दोनों जिलों में फिलहाल जिला महामंत्री के नाम की घोषणा नहीं की गई है।

    बुरहानपुर में भरत रावल को जिलाध्यक्ष और अमित वास्कले को जिला महामंत्री बनाया गया है। देवास में रजत पाल सिंह को अध्यक्ष तथा मोहित जाट को महामंत्री की जिम्मेदारी दी गई है। विदिशा में अनुज मित्तल जिलाध्यक्ष होंगे जबकि शिवेंद्र सिंह राजपूत को जिला महामंत्री बनाया गया है। उज्जैन ग्रामीण में हरजीत सिंह को जिलाध्यक्ष और राहुल धाकड़ को जिला महामंत्री की जिम्मेदारी मिली है। शाजापुर में हर्षवर्धन मंडलोई को जिलाध्यक्ष नियुक्त किया गया है। यहां भी महामंत्री का नाम फिलहाल घोषित नहीं किया गया है।

    बीजेपी युवा मोर्चा में लगातार हो रही इन नियुक्तियों को संगठन विस्तार की रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है। जुलाई में प्रदेश के 15 जिलों में अध्यक्षों की पहली बड़ी सूची जारी हुई थी जिसमें सागर ग्रामीण हरदा सीधी टीकमगढ़ खरगोन जबलपुर ग्रामीण बैतूल झाबुआ उज्जैन नगर ग्वालियर नगर रतलाम बड़वानी शहडोल सीहोर और खंडवा शामिल थे। उस सूची में छह जिलों के महामंत्रियों की भी घोषणा की गई थी। (starsamachar.com)

    पार्टी के युवा संगठन में जिला अध्यक्षों की भूमिका अहम मानी जाती है। इन पदाधिकारियों के जरिए बूथ स्तर तक युवा कार्यकर्ताओं को सक्रिय करने और संगठन की गतिविधियों को गति देने की जिम्मेदारी रहती है। आने वाले समय में प्रदेश के बाकी जिलों में भी नियुक्तियां होने की संभावना है। इससे युवा मोर्चा का संगठनात्मक ढांचा और मजबूत होने के साथ आगामी राजनीतिक गतिविधियों में युवाओं की भूमिका बढ़ सकती है।

    इधर बीजेपी महिला मोर्चा ने भी प्रदेश में संगठनात्मक नियुक्तियों का ऐलान किया है। महिला मोर्चा की प्रदेश अध्यक्ष अर्चना परांजपे राजगढ़े की ओर से जारी सूची में अलग अलग संभागों के लिए प्रभारियों की नियुक्ति की गई है। चंबल की जिम्मेदारी ज्योति तोमर को जबकि ग्वालियर की जिम्मेदारी क्रांति जोशी को दी गई है। सागर में शालिनी खरबानी रीवा में आशा गुप्ता शहडोल में डॉ. स्वप्ना वर्मा और जबलपुर में डॉ. सारिका उपाध्याय को जिम्मेदारी मिली है। इसके अलावा छिंदवाड़ा नर्मदापुरम भोपाल इंदौर निमाड़ उज्जैन और मंदसौर संभाग में भी महिला पदाधिकारियों को जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं।

    बीजेपी के दोनों मोर्चों में एक साथ संगठनात्मक गतिविधियां तेज होने से साफ है कि पार्टी जिला स्तर पर अपनी टीम को सक्रिय करने पर जोर दे रही है। युवा और महिला कार्यकर्ताओं को नई जिम्मेदारियां देकर संगठन बूथ और जमीनी स्तर पर अपनी मौजूदगी मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

  • MP Politics: उज्जैन में VIP कल्चर पर उठे सवाल, गुना में मंच पर भिड़े विधायक; मुरैना सांसद की भी फिसली जुबान

    MP Politics: उज्जैन में VIP कल्चर पर उठे सवाल, गुना में मंच पर भिड़े विधायक; मुरैना सांसद की भी फिसली जुबान


    भोपाल । मध्य प्रदेश की राजनीति और प्रशासन से जुड़ी घटनाओं में बुधवार को कई ऐसे मामले सामने आए जिन्होंने लोगों का ध्यान अपनी ओर खींचा। कहीं धार्मिक स्थल पर VIP दर्शन को लेकर आम श्रद्धालुओं की परेशानी चर्चा में रही तो कहीं भाजपा के ही मंच पर विधायक आपस में उलझते नजर आए। खंडवा में आवारा कुत्तों की समस्या को लेकर एक अनोखा प्रदर्शन किया गया और मुरैना में भाजपा सांसद की जुबान ऐसी फिसली कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ही रेल मंत्री बता दिया। इन घटनाओं ने राजनीतिक गलियारों से लेकर सोशल मीडिया तक खूब चर्चा बटोरी।

    उज्जैन के नागचंद्रेश्वर मंदिर में नागपंचमी के मौके पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। यह मंदिर साल में सिर्फ एक बार नागपंचमी के दिन श्रद्धालुओं के लिए खुलता है। ऐसे में लाखों लोगों की आस्था इस मंदिर से जुड़ी होती है। लेकिन भीड़ के बीच VIP दर्शन को लेकर सवाल उठे। आरोप है कि कई VIP लोगों को गर्भगृह में जाकर आराम से पूजा और दर्शन का मौका मिला जबकि आम श्रद्धालु घंटों लाइन में खड़े रहे। बाहर श्रद्धालुओं को सुरक्षा व्यवस्था के तहत तेजी से आगे बढ़ाया जाता रहा और कई लोग ठीक से दर्शन भी नहीं कर सके।

    बताया गया कि मंत्री कैलाश विजयवर्गीय भाजपा विधायक गोलू शुक्ला कांग्रेस विधायक महेश परमार और भाजपा सांसद अनिल फिरोजिया की बेटी समेत कई VIP गर्भगृह तक पहुंचे। उन्होंने भगवान नागचंद्रेश्वर का जल और दूध से अभिषेक किया तथा पूजा अर्चना की। VIP दर्शन की तस्वीरों और वीडियो के सामने आने के बाद आम श्रद्धालुओं के बीच नाराजगी देखने को मिली। सवाल यही उठता रहा कि जब भगवान के दरबार में सभी भक्त समान हैं तो दर्शन व्यवस्था में इतना अंतर क्यों दिखाई देता है।

    इधर गुना में भाजपा विधायक पन्नालाल शाक्य के एक बयान को लेकर मंच पर ही विवाद की स्थिति बन गई। रामायण प्रसंग सुनाते हुए शाक्य ने माता सीता के लिए ऐसे शब्दों का इस्तेमाल किया जिस पर चाचौड़ा से भाजपा विधायक प्रियंका पेंची ने आपत्ति जताई। पन्नालाल शाक्य ने रामायण के युद्ध का जिक्र करते हुए कहा कि युद्ध में पुरुषों की मृत्यु हुई जबकि महिलाओं की नहीं। इसके बाद महाभारत का उदाहरण देते हुए भी उन्होंने इसी तरह की बात कही।

    मंच पर मौजूद प्रियंका पेंची ने उनकी बात को गलत बताते हुए आपत्ति दर्ज कराई। दोनों के बीच मंच से ही कुछ देर नोकझोंक हुई। प्रियंका पेंची ने कहा कि महिलाओं ने भी बलिदान दिया है और वह खुद भी महिला हैं। इस घटनाक्रम के बाद पन्नालाल शाक्य के बयान को लेकर विपक्ष को भी भाजपा पर हमला करने का मौका मिल गया।

    खंडवा में जनसुनवाई के दौरान विरोध प्रदर्शन का तरीका भी चर्चा में रहा। नगर निगम में नेता प्रतिपक्ष दीपक राठौर एक युवक को कुत्ते का गेटअप पहनाकर कलेक्ट्रेट पहुंच गए। आवारा कुत्तों की समस्या को लेकर उन्होंने इसी अंदाज में प्रशासन का ध्यान आकर्षित किया। युवक ने कुत्ते की वेशभूषा में कलेक्टर के नाम ज्ञापन सौंपा।

    नेता प्रतिपक्ष ने आरोप लगाया कि आवारा कुत्तों की नसबंदी और नियंत्रण के नाम पर करीब 40 लाख रुपए खर्च किए गए हैं लेकिन इसके बावजूद समस्या कम नहीं हुई। उन्होंने खर्च का हिसाब मांगते हुए कार्रवाई की मांग उठाई। मुद्दा गंभीर था लेकिन प्रदर्शन का तरीका लोगों के बीच चर्चा और मजाक का विषय भी बन गया।

    मुरैना में भाजपा सांसद शिवमंगल सिंह तोमर की जुबान भी फिसल गई। कैलारस से वीरपुर तक मेमो ट्रेन की शुरुआत के बाद मीडिया से बातचीत में उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को रेल मंत्री कह दिया। उन्होंने ट्रेन शुरू होने पर भारत सरकार के रेल मंत्री नरेंद्र मोदी को बधाई देने की बात कही। हालांकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी रेल मंत्री नहीं बल्कि देश के प्रधानमंत्री हैं। सांसद के बयान का वीडियो सामने आने के बाद लोग सोशल मीडिया पर तरह तरह की प्रतिक्रियाएं देने लगे।

    इन घटनाओं के बीच मध्य प्रदेश भाजपा के संगठन को लेकर भी अंदरखाने चर्चाएं तेज हैं। पार्टी के राष्ट्रीय संगठन में प्रदेश के कई नेताओं को जिम्मेदारियां मिली हैं। इन नियुक्तियों के बाद नेताओं के बीच सीनियर और जूनियर को लेकर नई चर्चा शुरू होने की बात कही जा रही है। कुछ नेताओं को मिली जिम्मेदारियों को संगठन में अहम माना जा रहा है जबकि एक नेता की भूमिका को लेकर राजनीतिक हलकों में अलग अलग कयास लगाए जा रहे हैं।

    कुल मिलाकर उज्जैन से लेकर गुना खंडवा और मुरैना तक सामने आई ये घटनाएं मध्य प्रदेश की राजनीति और प्रशासन के अलग अलग रंग दिखाती हैं। कहीं VIP कल्चर को लेकर सवाल हैं तो कहीं नेताओं के बयान और प्रदर्शन के तरीके सुर्खियां बन रहे हैं। आने वाले दिनों में इनमें से कुछ मुद्दे राजनीतिक बहस का हिस्सा बन सकते हैं।

  • दतिया के जनादेश का राजनीतिक असर, कांग्रेस ने जीत का जश्न मनाया; भाजपा में जवाबदेही तय करने की तैयारी

    दतिया के जनादेश का राजनीतिक असर, कांग्रेस ने जीत का जश्न मनाया; भाजपा में जवाबदेही तय करने की तैयारी


    भोपाल। दतिया उपचुनाव के नतीजों ने मध्य प्रदेश की राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है। कांग्रेस ने इस सीट पर जीत दर्ज कर न केवल अपना कब्जा बरकरार रखा बल्कि लंबे समय बाद कार्यकर्ताओं में नया उत्साह भी भर दिया। जीत का जश्न भी कांग्रेस ने अनोखे अंदाज में मनाया। नेताओं और कार्यकर्ताओं ने मिठाई की जगह मेलोडी टॉफी बांटकर जीत की खुशियां साझा कीं और राजनीतिक संदेश देने की भी कोशिश की। दतिया से लेकर भोपाल तक कांग्रेस कार्यकर्ता सड़कों पर उतरे और जीत का उत्सव मनाया। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने इस जनादेश को मध्य प्रदेश की राजनीति में बदलाव का संकेत बताते हुए इसे जनता की सकारात्मक सोच की जीत बताया और दतिया की जनता का आभार व्यक्त किया।

    दूसरी ओर भाजपा के लिए यह परिणाम आत्ममंथन का विषय बन गया है। चुनाव प्रचार के दौरान जीत का भरोसा जताने वाले नेताओं के सुर नतीजे आने के बाद बदल गए। मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने कहा कि दतिया पहले भी कांग्रेस की सीट थी और अब भी कांग्रेस के पास ही है। उन्होंने यह भी कहा कि वर्ष 2023 के विधानसभा चुनाव की तुलना में भाजपा को इस बार करीब सत्रह सौ वोट अधिक मिले हैं। वहीं नगरीय विकास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने स्वीकार किया कि उपचुनाव भले ही आम चुनाव जितने महत्वपूर्ण नहीं होते लेकिन हार को हल्के में नहीं लिया जा सकता। उन्होंने स्पष्ट किया कि पार्टी पूरे परिणाम की गंभीर समीक्षा करेगी ताकि भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा न बने।

    उपचुनाव के नतीजों के बाद पूर्व मंत्री डॉ नरोत्तम मिश्रा भी चर्चा के केंद्र में आ गए। चुनाव प्रचार के दौरान उनका भावुक होना काफी चर्चा में रहा था। हार के बाद विपक्ष ने भीतरघात के आरोप लगाए और नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने कहा कि टिकट नहीं मिलने की नाराजगी का असर चुनाव परिणाम पर पड़ा। हालांकि नरोत्तम मिश्रा ने इन तमाम अटकलों पर विराम लगाते हुए साफ कहा कि उन्हें किसी पद की इच्छा नहीं है। उन्होंने कहा कि वे पहले भी पार्टी के कार्यकर्ता थे और आगे भी कार्यकर्ता ही रहेंगे। उनकी केवल एक अभिलाषा है कि पार्टी उन्हें जो भी जिम्मेदारी दे उसे पूरी निष्ठा से निभाने का अवसर मिले। अब राजनीतिक गलियारों में इस बात की चर्चा तेज है कि भाजपा नेतृत्व भविष्य में उन्हें कौन सी भूमिका सौंपता है।

    भाजपा प्रत्याशी आशुतोष तिवारी ने हार स्वीकार करते हुए जनादेश का सम्मान किया। मीडिया से बातचीत के दौरान वे भावुक भी नजर आए। भीतरघात से जुड़े सवाल पर उन्होंने कहा कि यदि किसी ने पार्टी के खिलाफ काम किया है तो उसे आत्ममंथन करना चाहिए क्योंकि भाजपा को मां मानने वाले कार्यकर्ता से ऐसी उम्मीद नहीं की जाती। उन्होंने कहा कि पार्टी की पहचान अनुशासन और सेवा भाव से है इसलिए व्यक्तिगत नाराजगी को संगठन से ऊपर नहीं रखा जाना चाहिए। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने भी स्पष्ट किया कि पार्टी पूरे चुनाव की समीक्षा करेगी और यदि कोई कार्यकर्ता अनुशासनहीनता या भीतरघात का दोषी पाया गया तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

    **सूत्रों के अनुसार भाजपा ने चुनाव के दौरान हुई गतिविधियों से जुड़े डिजिटल साक्ष्य भी जुटाए हैं और उन्हें संगठन के वरिष्ठ नेतृत्व तक भेजा गया है। माना जा रहा है कि समीक्षा पूरी होने के बाद दतिया से ही अनुशासनात्मक कार्रवाई की शुरुआत हो सकती है। ऐसे में दतिया उपचुनाव का परिणाम केवल एक सीट का फैसला नहीं बल्कि प्रदेश की राजनीति में नए समीकरणों और रणनीतियों की शुरुआत माना जा रहा है। कांग्रेस जहां इस जीत से उत्साहित होकर इसे आगामी राजनीतिक लड़ाइयों का आधार बना रही है वहीं भाजपा हार के कारणों का विश्लेषण कर संगठन को और मजबूत बनाने की तैयारी में जुट गई है। दोनों दलों के लिए यह परिणाम आने वाले चुनावों की दिशा तय करने वाला महत्वपूर्ण संकेत माना जा रहा है।

  • कांग्रेस का संगठनात्मक रिपोर्ट कार्ड तैयार, दिल्ली बैठक में 10 जिला अध्यक्षों की छुट्टी पर हो सकता है फैसला

    कांग्रेस का संगठनात्मक रिपोर्ट कार्ड तैयार, दिल्ली बैठक में 10 जिला अध्यक्षों की छुट्टी पर हो सकता है फैसला


    भोपाल। मध्य प्रदेश कांग्रेस में संगठन सृजन अभियान के तहत नियुक्त किए गए जिलाध्यक्षों की आज सबसे बड़ी परीक्षा होने जा रही है। पिछले वर्ष अगस्त में लंबी प्रक्रिया के बाद बनाए गए जिला कांग्रेस अध्यक्षों के कामकाज की समीक्षा के लिए कांग्रेस हाईकमान ने दिल्ली स्थित पार्टी मुख्यालय में महत्वपूर्ण बैठक बुलाई है। इस बैठक के नतीजे प्रदेश संगठन में बड़े बदलाव का रास्ता खोल सकते हैं और खराब प्रदर्शन करने वाले कई जिलाध्यक्षों की जिम्मेदारी भी छिन सकती है।

    दिल्ली में आयोजित इस समीक्षा बैठक की कमान कांग्रेस के राष्ट्रीय संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल संभालेंगे। बैठक दो चरणों में आयोजित होगी। पहले चरण में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार और मध्य प्रदेश के प्रभारी हरीश चौधरी के साथ संगठन की स्थिति और जिलों की रिपोर्ट पर विस्तृत चर्चा की जाएगी। इसके बाद दूसरे चरण में विभिन्न जिलाध्यक्षों से सीधे संवाद कर उनके कार्यों का मूल्यांकन किया जाएगा।

    सूत्रों के अनुसार कांग्रेस ने प्रदेश के सभी जिलाध्यक्षों को उनके कामकाज और संगठन विस्तार के आधार पर चार श्रेणियों ए बी सी और डी में विभाजित किया है। सबसे बेहतर प्रदर्शन करने वाले ए श्रेणी के जिलाध्यक्षों को इस बैठक में नहीं बुलाया गया है। पार्टी नेतृत्व का मानना है कि इन जिलाध्यक्षों ने संगठन निर्माण अभियान में उत्कृष्ट कार्य किया है। इन्हें भविष्य में अलग से दिल्ली बुलाकर राहुल गांधी स्वयं संवाद करेंगे और आगामी रणनीति में उनकी भूमिका तय की जाएगी।

    बी श्रेणी में शामिल जिलाध्यक्षों को आज की बैठक में शामिल किया गया है। इनसे उनके संगठनात्मक प्रदर्शन की समीक्षा की जाएगी और यह बताया जाएगा कि उन्हें किन क्षेत्रों में सुधार कर ए श्रेणी तक पहुंचना है। पार्टी नेतृत्व चाहता है कि इन जिलों में संगठन और अधिक मजबूत हो तथा आगामी चुनावों के लिए बूथ स्तर तक कार्यकर्ताओं की सक्रियता बढ़ाई जाए।

    सी श्रेणी में आने वाले जिलाध्यक्षों को अंतिम अवसर दिया जाएगा। समीक्षा के बाद उन्हें निश्चित समय सीमा में संगठनात्मक प्रदर्शन सुधारने के निर्देश मिलेंगे। यदि निर्धारित अवधि में अपेक्षित परिणाम नहीं मिले तो भविष्य में उनके खिलाफ भी कार्रवाई की जा सकती है।

    सबसे अधिक निगाहें डी श्रेणी के जिलाध्यक्षों पर टिकी हैं। इन्हें कमजोर प्रदर्शन करने वाला माना गया है और ऐसे करीब दस जिलाध्यक्षों को बैठक के बाद पद से हटाया जा सकता है। माना जा रहा है कि समीक्षा पूरी होते ही इनके स्थान पर नए चेहरों की नियुक्ति की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी ताकि संगठन को अधिक सक्रिय और चुनावी दृष्टि से मजबूत बनाया जा सके।

    हाल ही में दतिया निकाय चुनाव में मिली सफलता के बाद कांग्रेस नेतृत्व संगठन को और मजबूत करने के मूड में है। पार्टी अब केवल राजनीतिक गतिविधियों तक सीमित नहीं रहना चाहती बल्कि बूथ स्तर तक मजबूत नेटवर्क तैयार करने पर जोर दे रही है। यही वजह है कि संगठन सृजन अभियान के तहत नियुक्त पदाधिकारियों की जवाबदेही तय की जा रही है और प्रदर्शन को ही आगे की जिम्मेदारी का आधार बनाया जा रहा है।

    राजनीतिक जानकारों का मानना है कि दिल्ली में होने वाली यह समीक्षा बैठक मध्य प्रदेश कांग्रेस के लिए निर्णायक साबित हो सकती है। इससे न केवल संगठन में नई ऊर्जा आएगी बल्कि आगामी चुनावों की रणनीति भी इसी के आधार पर तैयार की जाएगी। बैठक के बाद होने वाले फैसलों पर प्रदेशभर के कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं की नजरें टिकी हुई हैं।

  • दतिया उपचुनाव में लोकतंत्र का उत्सव मतदान केंद्रों पर उमड़ी भीड़ तकनीकी बाधाओं के बाद भी प्रक्रिया रही सुचारु

    दतिया उपचुनाव में लोकतंत्र का उत्सव मतदान केंद्रों पर उमड़ी भीड़ तकनीकी बाधाओं के बाद भी प्रक्रिया रही सुचारु


    दतिया  दतिया विधानसभा उपचुनाव में गुरुवार को लोकतंत्र का उत्साह पूरे जिले में देखने को मिला। सुबह सात बजे मतदान शुरू होने के साथ ही शहर और ग्रामीण क्षेत्रों के मतदान केंद्रों पर मतदाताओं की लंबी कतारें नजर आईं। दोपहर तक जिले के 291 मतदान केंद्रों पर कुल 32.53 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया। निर्वाचन आयोग और जिला प्रशासन ने शांतिपूर्ण तथा निष्पक्ष मतदान के लिए व्यापक इंतजाम किए हैं और सभी केंद्रों पर सुरक्षा बलों की तैनाती की गई है।

    मतदान शुरू होने से पहले तीन मतदान केंद्रों पर ईवीएम से जुड़े उपकरणों में तकनीकी खराबी सामने आई। मतदान केंद्र क्रमांक 186 पर वीवीपैट क्रमांक 108 पर बैलेटिंग यूनिट और क्रमांक 290 पर कंट्रोल यूनिट में समस्या आई थी। हालांकि मॉक पोल के दौरान सभी राजनीतिक दलों के एजेंटों और कैमरों की मौजूदगी में खराब उपकरणों को तुरंत बदल दिया गया। इसके बाद सभी केंद्रों पर तय समय पर मतदान प्रक्रिया शुरू कर दी गई।

    कलेक्टर एवं जिला निर्वाचन अधिकारी स्वप्निल वानखेड़े ने बताया कि तकनीकी खराबियों का समय रहते समाधान कर लिया गया था और कहीं भी मतदान प्रभावित नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि सभी मतदान केंद्रों पर मतदान शांतिपूर्ण और व्यवस्थित ढंग से चल रहा है तथा प्रशासन लगातार हर गतिविधि पर नजर बनाए हुए है।

    इस बीच बसई क्षेत्र के लखनपुर गांव में ग्रामीणों ने मुख्य सड़क निर्माण की मांग को लेकर मतदान का बहिष्कार करते हुए सड़क नहीं तो वोट नहीं के नारे लगाए। सूचना मिलने पर एसडीएम अशोक अवस्थी मौके पर पहुंचे और ग्रामीणों से बातचीत की। प्रशासन की समझाइश के बाद लगभग 50 ग्रामीणों ने मतदान किया और लोकतांत्रिक प्रक्रिया में भागीदारी निभाई।

    कांग्रेस प्रत्याशी घनश्याम सिंह ने मतदान के बाद अपनी जीत का दावा करते हुए कहा कि जनता इस बार बदलाव का मन बना चुकी है और भाजपा के अहंकार का जवाब वोट के जरिए देगी। उन्होंने आरोप लगाया कि बसई क्षेत्र के एक मतदान केंद्र पर कांग्रेस के पोलिंग एजेंट को प्रवेश नहीं दिया गया जिसकी शिकायत निर्वाचन अधिकारियों से की गई है।

    वहीं भाजपा प्रत्याशी आशुतोष तिवारी ने मतदान से पहले पीतांबरा पीठ पहुंचकर पूजा अर्चना की और दतिया के विकास युवाओं को रोजगार तथा क्षेत्र में शांति और समृद्धि की कामना की। इसके बाद उन्होंने विभिन्न मतदान केंद्रों का दौरा कर कार्यकर्ताओं और पोलिंग एजेंटों से मुलाकात की। उन्होंने दावा किया कि जनता का भरपूर समर्थन भाजपा के साथ है और पार्टी को बड़ी जीत मिलेगी।

    दतिया विधानसभा क्षेत्र में कुल दो लाख बीस हजार चार सौ मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग कर रहे हैं। मतदान शाम छह बजे तक जारी रहेगा। अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक मंजीत सिंह चावला सहित वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों ने कई मतदान केंद्रों का निरीक्षण कर सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लिया। निर्वाचन आयोग का कहना है कि मतदान पूरी तरह शांतिपूर्ण और पारदर्शी तरीके से संपन्न कराने के लिए सभी आवश्यक इंतजाम किए गए हैं और मतदाताओं की सुविधा का विशेष ध्यान रखा जा रहा है। लोकतंत्र के इस महत्वपूर्ण पर्व में मतदाताओं की सक्रिय भागीदारी उपचुनाव को और अधिक महत्वपूर्ण बना रही है।

  • पूर्व IAS नियाज़ खान की राजनीति में एंट्री की इच्छा: बोले- कांग्रेस और भाजपा शायद स्वीकार न करें, नई पार्टी बनी तो करूंगा जॉइन

    पूर्व IAS नियाज़ खान की राजनीति में एंट्री की इच्छा: बोले- कांग्रेस और भाजपा शायद स्वीकार न करें, नई पार्टी बनी तो करूंगा जॉइन


    भोपाल । मध्य प्रदेश के पूर्व आईएएस अधिकारी और चर्चित लेखक नियाज़ खान ने सक्रिय राजनीति में आने की इच्छा जाहिर कर एक नई राजनीतिक चर्चा छेड़ दी है। सोशल मीडिया पर साझा की गई अपनी पोस्ट में उन्होंने कहा कि देश में बढ़ते भ्रष्टाचार और राजनीतिक व्यवस्था में सुधार लाने के लिए अब राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाना जरूरी हो गया है। उनके इस बयान के बाद राजनीतिक और सामाजिक हलकों में प्रतिक्रियाओं का दौर शुरू हो गया है।

    नियाज़ खान ने अपनी पोस्ट में लिखा कि वह कांग्रेस पार्टी में शामिल होना चाहते हैं, लेकिन उन्हें लगता है कि उनके हिंदू उदारवादी विचारों के कारण कांग्रेस उन्हें स्वीकार नहीं करेगी। उन्होंने यह भी कहा कि भारतीय जनता पार्टी ने भी उनके साथ हमेशा अलग व्यवहार किया और प्रशासनिक सेवा के दौरान उन्हें कभी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां नहीं दीं। उनके अनुसार, इससे यह स्पष्ट होता है कि भाजपा भी उन्हें अपने साथ जोड़ने की इच्छुक नहीं रही।

    पूर्व आईएएस अधिकारी ने अपनी पोस्ट में आगे लिखा कि यदि भविष्य में कॉकरोच जनता पार्टी राजनीति में सक्रिय रूप से उतरती है तो वह उस पार्टी से जुड़ने पर विचार करेंगे। उनका कहना है कि वर्तमान समय में राजनीति ही समाज और देश की सबसे बड़ी सेवा का माध्यम बन चुकी है। इसलिए यदि व्यवस्था में बदलाव लाना है तो राजनीतिक प्रक्रिया का हिस्सा बनना आवश्यक है।

    नियाज़ खान प्रशासनिक सेवा के साथ-साथ साहित्य जगत में भी अपनी अलग पहचान रखते हैं। उन्होंने ‘ब्राह्मण द ग्रेट’, ‘ब्राउन डेजर्ट IV-786’ और ‘बी रेडी टू डाई’ जैसे कई चर्चित उपन्यास लिखे हैं। उनकी किताबें अक्सर सामाजिक और वैचारिक मुद्दों पर केंद्रित रही हैं, जिसके कारण वे समय-समय पर सार्वजनिक बहस का हिस्सा भी बने हैं।

    सोशल मीडिया पर उनकी पोस्ट सामने आने के बाद लोगों की अलग-अलग प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। कुछ लोगों ने उनके राजनीति में आने के फैसले का स्वागत किया, जबकि कुछ ने उनके बयान को लेकर सवाल भी उठाए। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि किसी पूर्व वरिष्ठ नौकरशाह का इस तरह खुलकर अपनी राजनीतिक प्राथमिकताएं सार्वजनिक करना चर्चा का विषय बनना स्वाभाविक है।

    हालांकि, नियाज़ खान ने फिलहाल किसी राजनीतिक दल में औपचारिक रूप से शामिल होने की घोषणा नहीं की है। उनका बयान केवल अपनी इच्छा और संभावित विकल्पों को लेकर है। ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि आने वाले समय में वह वास्तव में सक्रिय राजनीति का हिस्सा बनते हैं या नहीं और यदि बनते हैं तो किस राजनीतिक मंच से अपनी नई पारी की शुरुआत करते हैं।