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  • MP में बीजेपी का ‘मेगा एडजस्टमेंट प्लान’: 31 विभागों की समितियों में 10,500 कार्यकर्ताओं को मिलेगा मौका

    MP में बीजेपी का ‘मेगा एडजस्टमेंट प्लान’: 31 विभागों की समितियों में 10,500 कार्यकर्ताओं को मिलेगा मौका


    नई दिल्ली। मध्य प्रदेश में सत्ता और संगठन के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करने के उद्देश्य से भारतीय जनता पार्टी ने एक व्यापक ‘कार्यकर्ता एडजस्टमेंट अभियान’ शुरू किया है। इस रणनीति के तहत प्रदेश के सभी 55 जिलों में विभिन्न सरकारी समितियों और बोर्डों के जरिए करीब 10,500 से अधिक कार्यकर्ताओं को जिम्मेदारियां सौंपी जाएंगी। यह पहल न केवल संगठन को मजबूत करने की दिशा में अहम मानी जा रही है, बल्कि जमीनी स्तर पर पार्टी की पकड़ को भी और सुदृढ़ करेगी।
    पिछले एक सप्ताह से निगम-मंडलों में नियुक्तियों का सिलसिला जारी है और अब इसे जिला स्तर तक विस्तार दिया जा रहा है। पार्टी का फोकस पंचायत से लेकर जिला स्तर तक सक्रिय कार्यकर्ताओं को प्रशासनिक ढांचे में शामिल करना है, ताकि वे सीधे शासन-प्रक्रिया का हिस्सा बन सकें। इसके लिए 31 विभागों के अंतर्गत 70 से अधिक प्रकार की समितियों का गठन किया जा रहा है।
    हर जिले में प्रभारी मंत्रियों को नियुक्तियों की जिम्मेदारी दी गई है। वे जिला स्तर के कोर ग्रुप के साथ मिलकर योग्य कार्यकर्ताओं के नामों का चयन कर रहे हैं। यह प्रक्रिया लगभग अंतिम चरण में है और मुख्यमंत्री कार्यालय से इसकी लगातार निगरानी की जा रही है। दरअसल, 27 जनवरी को ही इस संबंध में दिशा-निर्देश जारी कर दिए गए थे, जिसके बाद अब तेजी से अमल शुरू हुआ है।
    यदि औसतन आंकलन किया जाए तो हर जिले में लगभग 190 से 200 सदस्यों को विभिन्न समितियों में जगह मिलेगी। इस तरह पूरे प्रदेश में हजारों कार्यकर्ता प्रशासनिक जिम्मेदारियों से जुड़ेंगे। यह संख्या पंचायत और ब्लॉक स्तर को जोड़ने पर और भी बढ़ सकती है।
    विभागवार देखें तो पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग की 8 समितियों में ‘दिशा’, जल स्वच्छता और युवा ग्राम शक्ति जैसी इकाइयां प्रमुख हैं। वहीं, स्कूल शिक्षा विभाग में जिला स्तरीय समितियों में हर जिले से करीब 9 सदस्यों की नियुक्ति होगी। उच्च शिक्षा की जनभागीदारी समितियों में प्रति कॉलेज एक अध्यक्ष और 13 सदस्यों को शामिल किया जाएगा, जो कार्यकर्ताओं के लिए बड़ा अवसर होगा।
    सामाजिक न्याय, योजना एवं सांख्यिकी विभाग की समितियों में भी बड़ी संख्या में पद उपलब्ध हैं। जिला अंत्योदय समिति में 10 से 30 तक सदस्य नियुक्त किए जा सकते हैं। नगरीय निकायों की समितियों में भी 5 से 21 सदस्यों का प्रावधान रखा गया है। इसके अलावा जेल, पुलिस, तकनीकी शिक्षा, खेल और पीएचई विभागों में भी विभिन्न समितियों के माध्यम से नियुक्तियां की जाएंगी।
    आर्थिक और विकास से जुड़े विभागों में भी कार्यकर्ताओं को शामिल किया जाएगा। खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति, उद्योग, कृषि और उद्यानिकी विभागों की समितियां इस अभियान का अहम हिस्सा हैं। इन सभी नियुक्तियों में प्रभारी मंत्रियों की सिफारिश और कोर ग्रुप की सहमति को प्राथमिकता दी जा रही है।
    बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल का कहना है कि हर नियुक्ति में सर्वसम्मति सुनिश्चित की जा रही है, ताकि योग्य कार्यकर्ताओं को सही स्थान मिल सके। आने वाले कुछ हफ्तों में सभी जिलों की सूची अंतिम रूप ले लेगी और इसके साथ ही प्रदेश में बीजेपी का संगठनात्मक ढांचा और अधिक सक्रिय नजर आएगा।
  • इंदौर में जल संकट गहराया, कांग्रेस का उग्र प्रदर्शन, नगर निगम पर लापरवाही के आरोप

    इंदौर में जल संकट गहराया, कांग्रेस का उग्र प्रदर्शन, नगर निगम पर लापरवाही के आरोप

    इंदौर । मध्यप्रदेश के इंदौर शहर में बढ़ते जल संकट को लेकर राजनीतिक माहौल गर्म हो गया है। गुरुवार को कांग्रेस ने सड़क पर उतरकर नगर निगम के खिलाफ जोरदार विरोध प्रदर्शन किया और “हल्ला बोल, पोल खोल” अभियान के तहत मटका फोड़ कर अपनी नाराजगी जताई। यह प्रदर्शन मोती तबेला चौराहा और छत्रीबाग क्षेत्र में किया गया, जहां कार्यकर्ताओं ने खाली मटके फोड़कर नगर निगम के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।

    इस प्रदर्शन का नेतृत्व शहर कांग्रेस कमेटी के कार्यवाहक अध्यक्ष देवेंद्र सिंह यादव और मध्यप्रदेश राजीव विकास केंद्र के प्रदेश प्रवक्ता मुकेश शाह ने किया। दोनों नेताओं ने आरोप लगाया कि शहर में पानी की समस्या लगातार गंभीर होती जा रही है, लेकिन प्रशासन इस ओर ध्यान नहीं दे रहा है।

    कांग्रेस नेताओं का कहना है कि नगर निगम आम जनता से पूरे महीने का पानी का बिल वसूल रहा है, जबकि सप्लाई केवल 15 दिन ही सही तरीके से हो रही है। कई इलाकों में नर्मदा पाइपलाइन अभी तक नहीं पहुंची है, जिसके कारण लोगों को पानी के लिए टैंकरों पर निर्भर रहना पड़ रहा है।

    प्रदर्शन के दौरान यह भी आरोप लगाया गया कि भगीरथपुरा, सुदामा नगर, मूसाखेड़ी, बाणगंगा और चंदन नगर जैसे क्षेत्रों में ड्रेनेज लीकेज की वजह से गंदा और बदबूदार पानी सप्लाई हो रहा है, जिससे लोगों के स्वास्थ्य पर खतरा बढ़ गया है।

    कांग्रेस ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि नगर निगम के टैंकरों का उपयोग आम जनता की बजाय होटलों और निर्माण कार्यों में किया जा रहा है, जबकि कई मोहल्लों में लोग पानी के लिए परेशान हैं। इससे शहर में असमान वितरण व्यवस्था का आरोप भी लगाया गया।

    प्रदर्शनकारियों ने यह भी कहा कि नई पाइपलाइन से जुड़े कई कार्य और फाइलें लंबित पड़ी हैं, जिससे कई वार्डों में जल संकट और गहरा गया है। शहर के कई हिस्सों में नर्मदा का पानी अंतिम छोर तक नहीं पहुंच पा रहा, जिससे स्थिति और खराब होती जा रही है। कांग्रेस नेताओं ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही गंदे पानी की सप्लाई और टैंकरों की कमी जैसी समस्याओं का समाधान नहीं किया गया तो नगर निगम का उग्र घेराव किया जाएगा।

    इस प्रदर्शन ने शहर में जल संकट को लेकर प्रशासन पर दबाव बढ़ा दिया है। अब देखना यह होगा कि नगर निगम इन आरोपों पर क्या प्रतिक्रिया देता है और पानी की समस्या को लेकर क्या ठोस कदम उठाए जाते हैं।

  • प्रदर्शन पड़ा भारी ,केन बेतवा प्रोजेक्ट के विरोध, में 50 लोगों पर केस दर्ज

    प्रदर्शन पड़ा भारी ,केन बेतवा प्रोजेक्ट के विरोध, में 50 लोगों पर केस दर्ज


    छतरपुर । मध्यप्रदेश के छतरपुर जिले में केन-बेतवा लिंक परियोजना के विरोध में चल रहे प्रदर्शन को लेकर पुलिस ने बड़ा एक्शन लिया है। इस मामले में यूथ कांग्रेस के प्रदेश उपाध्यक्ष अभिषेक परमार समेत करीब 50 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। कार्रवाई के बाद इलाके में राजनीतिक हलचल तेज हो गई है।

    जानकारी के अनुसार ग्राम ढोड़न में परियोजना के विरोध में प्रदर्शन किया जा रहा था जहां स्थिति उस समय बिगड़ गई जब प्रदर्शनकारियों और प्रशासन के बीच टकराव की स्थिति बन गई। पुलिस का आरोप है कि इस दौरान शासकीय कार्य में बाधा डाली गई कर्मचारियों के साथ अभद्रता की गई और सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाया गया। इन आरोपों के आधार पर बमीठा थाने में गंभीर धाराओं के तहत FIR दर्ज की गई है।

    बताया जा रहा है कि इस कार्रवाई की शुरुआत चंद्रनगर रेंजर की शिकायत के बाद हुई। मामले ने उस वक्त और तूल पकड़ लिया जब प्रदर्शन से जुड़ा एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। यह वीडियो कथित तौर पर अभिषेक परमार की ओर से अपलोड किया गया था जिसके आधार पर पुलिस ने प्रदर्शन में शामिल अन्य लोगों की पहचान शुरू की। अब तक 15 से 20 लोगों की पहचान की जा चुकी है और आगे भी जांच जारी है।

    बमीठा थाना प्रभारी वाल्मीकि चौबे के मुताबिक वन परिक्षेत्र अधिकारी राजेंद्र तिवारी ने लिखित शिकायत दर्ज कराई थी जिसके बाद यह कार्रवाई की गई। FIR में सरकारी कर्मचारी पर हमला शासकीय कार्य में बाधा डालना और लोक संपत्ति नुकसान निवारण अधिनियम 1984 की धारा 3 (1) के तहत प्रकरण दर्ज किया गया है।

    पुलिस का कहना है कि वायरल वीडियो और अन्य साक्ष्यों के आधार पर आगे भी आरोपियों की पहचान की जाएगी और आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। इस पूरे घटनाक्रम के बाद प्रशासन अलर्ट मोड में है और इलाके में कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए अतिरिक्त सतर्कता बरती जा रही है।

    यह मामला अब सिर्फ कानून व्यवस्था तक सीमित नहीं रह गया है बल्कि राजनीतिक रंग भी लेता नजर आ रहा है। एक ओर जहां प्रशासन इसे कानून के उल्लंघन का मामला बता रहा है वहीं दूसरी ओर प्रदर्शनकारी इसे अपने अधिकारों की आवाज बता रहे हैं। आने वाले दिनों में यह मुद्दा और गरमा सकता है।

  • अजाक्स में वर्चस्व की लड़ाई तेज, मामला RSS प्रमुख Mohan Bhagwat तक पहुंचा

    अजाक्स में वर्चस्व की लड़ाई तेज, मामला RSS प्रमुख Mohan Bhagwat तक पहुंचा


    नई दिल्ली। मध्यप्रदेश में अनुसूचित जाति-जनजाति अधिकारी कर्मचारी संघ (अजाक्स) के भीतर चल रही वर्चस्व की लड़ाई अब बड़ा विवाद बन चुकी है। यह टकराव इतना बढ़ गया है कि मामला मोहन भागवत तक पहुंच गया है। संगठन के भीतर दो गुट आमने-सामने हैं और एक-दूसरे पर गंभीर आरोप लगा रहे हैं।
    संघ प्रमुख से हस्तक्षेप की मांग
    पूर्व अपर मुख्य सचिव जेएन कंसोटिया के समर्थक गुट ने संघ प्रमुख को लिखित शिकायत भेजी है। संगठन महामंत्री गौतम पाटिल ने आरोप लगाया कि कुछ लोग बाहरी हस्तक्षेप के जरिए अजाक्स पर नियंत्रण करने की कोशिश कर रहे हैं। खासतौर पर सुरेन्द्र मिश्रा और मुकेश मौर्य पर संगठन में दखल देने के आरोप लगाए गए हैं।
    सदस्यता और गबन के आरोप
    शिकायत में मुकेश मौर्य पर गंभीर वित्तीय अनियमितताओं के आरोप भी लगाए गए हैं। दावा किया गया कि करीब ₹17.95 लाख की सदस्यता राशि में गड़बड़ी हुई, जिसमें से ₹12.95 लाख का हिसाब नहीं दिया गया। यह भी कहा गया कि नियमों के अनुसार केवल सरकारी कर्मचारी ही सदस्य बन सकते हैं, जबकि मौर्य एक निजी संस्थान से जुड़े बताए गए हैं।
    फर्जी कार्यकारिणी और कब्जे का आरोप
    गौतम पाटिल ने आरोप लगाया कि जुलाई 2023 में फर्जी बैठकों के आधार पर एक नकली कार्यकारिणी तैयार कर उसे पंजीयन के लिए पेश किया गया। साथ ही, अजाक्स भवन पर कब्जा करने की कोशिश का भी आरोप लगाया गया है। शिकायत में इसे धोखाधड़ी और आपराधिक विश्वासघात जैसी गंभीर श्रेणी का मामला बताया गया है।
    मौर्य का पलटवार
    दूसरी ओर मुकेश मौर्य ने सभी आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए पलटवार किया है। उन्होंने कहा कि कंसोटिया और उनके समर्थक ट्रस्ट बनाकर संगठन की संपत्ति हड़पना चाहते हैं। मौर्य के अनुसार, उनके प्रांताध्यक्ष बनने के बाद ही विवाद खड़ा किया गया।
    उन्होंने यह भी कहा कि वे विरोधी गुट के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराएंगे और आरोप लगाया कि संगठन कार्यालय को घेरकर दबाव बनाया जा रहा है।
    बढ़ता विवाद, सियासी रंग
    इस पूरे विवाद ने अब राजनीतिक और सामाजिक रंग ले लिया है। अजाक्स जैसे बड़े कर्मचारी संगठन में आंतरिक संघर्ष से न सिर्फ संगठन की साख प्रभावित हो रही है, बल्कि प्रदेश की सामाजिक और प्रशासनिक व्यवस्था पर भी इसका असर पड़ सकता है।
  • मुरैना हत्याकांड पर उमंग सिंघार का वार बोले प्रदेश में कानून का डर खत्म

    मुरैना हत्याकांड पर उमंग सिंघार का वार बोले प्रदेश में कानून का डर खत्म


    भोपाल । मध्य प्रदेश के भोपाल में सियासी हलचल उस वक्त तेज हो गई जब उमंग सिंघार ने मुरैना में हुई दर्दनाक घटना को लेकर राज्य सरकार पर तीखा हमला बोला विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष सिंघार ने रेत माफिया द्वारा वन विभाग के आरक्षक की हत्या को कानून व्यवस्था की बड़ी विफलता बताया

    दरअसल हाल ही में मुरैना में अवैध रेत खनन को रोकने गई टीम पर हमला हुआ था जिसमें वन विभाग के आरक्षक हरकेश गुर्जर की ट्रैक्टर से कुचलकर हत्या कर दी गई इस घटना ने पूरे प्रदेश को झकझोर कर रख दिया है

    इस मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए उमंग सिंघार ने कहा कि प्रदेश में कानून व्यवस्था पूरी तरह से ध्वस्त हो चुकी है और अपराधियों के हौसले लगातार बढ़ते जा रहे हैं उन्होंने कहा कि जिस तरह दिनदहाड़े रेत माफिया ने कानून के रक्षक पर हमला कर उसकी जान ले ली वह बेहद भयावह और चिंताजनक है

    सिंघार ने अपने बयान में साफ तौर पर कहा कि यह घटना इस बात का संकेत है कि अपराधियों में अब कानून का कोई डर नहीं बचा है उन्होंने सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि प्रदेश में अवैध खनन माफिया खुलेआम सक्रिय हैं और प्रशासन उन्हें रोकने में नाकाम साबित हो रहा है

    नेता प्रतिपक्ष ने यह भी कहा कि इस तरह की घटनाएं केवल एक व्यक्ति की मौत नहीं बल्कि पूरे सिस्टम पर सवाल खड़े करती हैं उन्होंने मांग की कि दोषियों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की जाए और प्रदेश में कानून व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं

    मुरैना की यह घटना अब सिर्फ एक आपराधिक मामला नहीं रह गई है बल्कि इसने प्रदेश की सुरक्षा व्यवस्था और प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर व्यापक बहस छेड़ दी है आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर राजनीतिक बयानबाजी और भी तेज होने की संभावना है

  • इंदौर में राजनीतिक हिंसा, भाजपा कार्यकर्ताओं ने किया पथराव, जिला अध्यक्ष अस्पताल में भर्ती

    इंदौर में राजनीतिक हिंसा, भाजपा कार्यकर्ताओं ने किया पथराव, जिला अध्यक्ष अस्पताल में भर्ती


    इंदौर में शनिवार को सियासी पारा चरम पर पहुंच गया जब भाजपा और कांग्रेस कार्यकर्ता आमने-सामने आ गए शहर के कांग्रेस मुख्यालय गांधी भवन के बाहर प्रदर्शन करने पहुंचे भाजपा कार्यकर्ताओं और वहां पहले से मौजूद कांग्रेसियों के बीच झड़प हो गई

    स्थिति उस समय और बिगड़ गई जब भाजपा की ओर से गांधी भवन पर पथराव शुरू कर दिया गया पथराव के दौरान कांग्रेस के जिला अध्यक्ष विपिन वानखेड़े गंभीर रूप से घायल हो गए उनके सिर पर गहरी चोट आई और उन्हें तुरंत अस्पताल ले जाया गया

    स्थानीय लोगों और पुलिस अधिकारियों के अनुसार घटना अचानक हुई और झड़प में कई अन्य कार्यकर्ता भी घायल होने के कगार पर थे मौके पर भारी संख्या में पुलिस तैनात की गई और स्थिति को नियंत्रित किया गया

    पुलिस ने बताया कि पथराव करने वालों की पहचान की जा रही है और आवश्यक कार्रवाई की जाएगी कांग्रेस और भाजपा दोनों ही पार्टियों ने घटना की निंदा की है और प्रशासन से शीघ्र जांच की मांग की है

    घटना के बाद गांधी भवन के आसपास क्षेत्र को सील कर दिया गया और हिंसक भीड़ को नियंत्रित करने के लिए अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया स्थानीय प्रशासन ने सभी पक्षों से शांति बनाए रखने की अपील की है

    विशेषज्ञों का मानना है कि चुनावी मौसम में शहरों में ऐसे सियासी तनाव बढ़ सकते हैं ऐसे मामलों में समय पर नियंत्रण और न्यायिक कार्रवाई बेहद जरूरी होती है ताकि कानून व्यवस्था बनी रहे

  • एमपी बजट पर सियासी संग्राम: PCC चीफ जीतू पटवारी ने बजट को ‘ठग-गुब्बारा और धांधलियों का बजट’ कहा, भ्रष्टाचार की नसबंदी की मांग

    एमपी बजट पर सियासी संग्राम: PCC चीफ जीतू पटवारी ने बजट को ‘ठग-गुब्बारा और धांधलियों का बजट’ कहा, भ्रष्टाचार की नसबंदी की मांग


    भोपाल । मध्य प्रदेश में वित्त वर्ष 2026-27 के बजट पेश होने के साथ ही सियासी तनाव भी तेज़ हो गया है। बुधवार को वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा द्वारा पेपरलेस बजट विधानसभा में पेश किया गया, जिसमें किसानों, महिलाओं, युवाओं और गरीबों के लिए बड़े प्रावधान किए गए हैं। इस दौरान विपक्ष खासकर कांग्रेस ने बजट पर तीखी टिप्पणी की, इसे जनता के साथ धोखा, ठग, गुब्बारा और धांधलियों का बजट करार दिया।
    कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में आरोप लगाया कि यह बजट भ्रष्टाचार की नसबंदी करने की बजाय सरकार का ढोंग बजट है। उन्होंने कहा कि सरकार सदन में कुत्तों की नसबंदी जैसी बातों पर समय बर्बाद कर रही है, जबकि असल मुद्दों भ्रष्टाचार और आर्थिक संकट पर काम होना चाहिए। पटवारी ने दावा किया कि पिछले वित्त वर्ष में केंद्र से मिलने वाला ₹50,000 करोड़ नहीं मिला, जिसके कारण सरकार अब तक अपने बजट का सिर्फ़ आधा ही खर्च कर सकी है और यह बजट फर्जी तथा खोखला है।

    पटवारी ने कर्ज बढ़ने का मुद्दा भी उठाया और कहा कि सरकार रोज़ाना ₹213 करोड़ कर्ज ले रही है तथा इस वित्त वर्ष में लगभग ₹72,000 करोड़ का उधार लिया गया है, जिससे राज्य गंभीर आर्थिक संकट के कगार पर है। उन्होंने कहा कि बजट को वास्तविकता के साथ पेश करना चाहिए और मुख्यमंत्री मोहन यादव को राज्य के अधिकारों की रक्षा के लिए कड़े कदम उठाने की जरूरत है। विपक्ष ने बजट को गुब्बारा एवं धांधलियों का बजट बताया, जिसमें सिर्फ वाढ़ती व्यय और घोषणाओं का फोकस है लेकिन जमीन पर कोई ठोस योजना या क्रियान्वयन नहीं दिख रहा। इतना ही नहीं, कांग्रेस ने आरोप लगाया कि बजट में निवेश वाले वादे सिर्फ़ शोरगरबा हैं और वास्तव में जनता को इससे कोई ठोस लाभ नहीं मिलेगा।

    पटवारी ने सवाल उठाया कि यदि प्रति व्यक्ति आय बढ़ी है, तो क्यों गरीबी बनी हुई है और राशन की लंबी कतारें आज भी चल रहीं हैं? उन्होंने कहा कि बजट में रोज़गार और महंगाई जैसे मुद्दे पर कोई ठोस प्रावधान नहीं है और सरकार का आर्थिक समझ बिल्कुल जीरो है। इसके अलावा कांग्रेस ने न्यायिक जांच की मांग भी की, विशेष रूप से बेटियों की सुरक्षा और एेसी अन्य भयावह स्थितियों पर जहाँ प्रतिदिन लड़कियों के लापता होने और बलात्कार की घटनाएं बढ़ रही हैं। पीसीसी चीफ ने कहा कि यह मामला सिर्फ़ प्रदेश का नहीं है इसके लिए केंद्रीय गृह एवं विदेश मंत्रालय को भी तत्काल हस्तक्षेप करना चाहिए।

    वहीं, बजट सत्र के दौरान वित्त मंत्री ने सत्तापक्ष की ओर से बजट को गरीबों, महिलाओं और युवाओं के हित का बताया और कहा कि इसमें कोई नया टैक्स नहीं लगाया गया है। लेकिन विपक्ष इस बात पर अड़ा है कि बजट सिर्फ़ प्रचार का औज़ार है और आर्थिक वास्तविकताओं से इसका कोई वास्ता नहीं है।  इस बीच बजट को सरकार की लंबी-अगली रणनीति के रूप में देखा जा रहा है और समर्थन तथा विरोध दोनों तरफ से इसका सियासी विश्लेषण जारी है।

  • बजट सत्र में हंगामा, सीएम को ‘नीलकंठ’ बनने की सीख; विजयवर्गीय भीड़ देखकर हैरान

    बजट सत्र में हंगामा, सीएम को ‘नीलकंठ’ बनने की सीख; विजयवर्गीय भीड़ देखकर हैरान


    भोपाल । मध्य प्रदेश विधानसभा के बजट सत्र की शुरुआत हंगामेदार रही। राज्यपाल के अभिभाषण के दौरान नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने बीच में हस्तक्षेप करते हुए नल जल योजना और इंदौर में दूषित पानी से हुई मौतों का जिक्र न होने पर आपत्ति जताई। इसके बाद विपक्ष ने नारेबाजी शुरू कर दी। शोर-शराबे के बीच अभिभाषण जारी रहा लेकिन अंततः सदन की कार्यवाही अगले दिन तक के लिए स्थगित करनी पड़ी। कांग्रेस ने सरकार को कर्ज के मुद्दे पर घेरने की रणनीति बनाई है। इस पर भाजपा विधायक पन्नालाल शाक्य ने चुटीले अंदाज में कहा जिसके पास घी होगा वो घी पिएगा और जिसके पास पानी होगा वो पानी पिएगा।

    सीएम को नीलकंठ बनने की सलाह

    मुख्यमंत्री मोहन यादव ग्वालियर जिले के डबरा में नवग्रह शक्ति पीठ के प्राण-प्रतिष्ठा समारोह में पहुंचे थे। इस दौरान उन्होंने पूर्व मंत्री नरोत्तम मिश्रा का नाम लेते समय जुबान फिसलने पर तुरंत सुधार भी किया। कार्यक्रम में कथावाचक कुमार विश्वास ने मुख्यमंत्री को संबोधित करते हुए कहा कि सत्ता में अमृत के साथ विष भी मिलता है और समय आने पर अपयश भी पीना पड़ता है अर्थात मुख्यमंत्री को नीलकंठ बनना होगा।

    कुबेरेश्वर धाम में भीड़ पर विजयवर्गीय की टिप्पणी

    सीहोर स्थित कुबेरेश्वर धाम में मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने कथावाचक प्रदीप मिश्रा की लोकप्रियता की सराहना की। उन्होंने कहा कि पहले सीहोर की पहचान कचोरी से होती थी अब पंडित प्रदीप मिश्रा के नाम से होती है। भीड़ देखकर उन्होंने कहा कि राजनीति में भीड़ जुटाना पड़ता है लेकिन यहां हर ओर श्रद्धालु नजर आ रहे हैं यह सनातन और भक्ति की शक्ति है।

    कांग्रेस विधायक का हर्ष फायरिंग वीडियो
    श्योपुर से कांग्रेस विधायक बाबू जंडेल का एक वीडियो सामने आया है जिसमें वे महाशिवरात्रि पर निकली शिव बारात में घोड़े पर सवार होकर हर्ष फायरिंग करते दिख रहे हैं। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है और कहा है कि नियमों के तहत कार्रवाई की जाएगी।

    मंच पर आदिवासी संस्कृति की झलक
    खंडवा में आयोजित कार्यक्रम में पंधाना विधायक छाया मोरे पारंपरिक आदिवासी वेशभूषा में नजर आईं और मंच पर नृत्य प्रस्तुत किया। मुख्यमंत्री ने उनकी सराहना करते हुए आदिवासी संस्कृति की प्रशंसा की।

  • विजय शाह विवाद सुप्रीम कोर्ट में आज सुनवाई पूर्व कानून मंत्री पीसी शर्मा बोले मंत्री पद से हाथ धोना पड़ेगा

    विजय शाह विवाद सुप्रीम कोर्ट में आज सुनवाई पूर्व कानून मंत्री पीसी शर्मा बोले मंत्री पद से हाथ धोना पड़ेगा


    मध्य प्रदेश के जनजातीय कार्य मंत्री कुंवर विजय शाह की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। उनका विवादित बयान कर्नल सोफिया कुरैशी पर 2025 में दिया गया था और अब यह मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच चुका है। आज सुप्रीम कोर्ट में इस मामले की अहम सुनवाई हो रही है। यह विवाद ऑपरेशन सिंदूर के बाद एक सार्वजनिक कार्यक्रम में शाह द्वारा कथित आपत्तिजनक बयान देने से शुरू हुआ था। आरोप है कि यह बयान सेना अधिकारी की गरिमा को ठेस पहुंचाने और सांप्रदायिक घृणा फैलाने वाला था।

    मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने पहले FIR दर्ज करने का आदेश दिया था जिसे शाह ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी। सुप्रीम कोर्ट ने SIT गठित की और अगस्त 2025 में जांच पूरी हुई। जनवरी 2026 में कोर्ट ने सरकार को दो हफ्ते में अभियोजन मंजूरी पर फैसला लेने को कहा था लेकिन अब तक मंजूरी लंबित है। कोर्ट ने पहले ही शाह की माफी को देर से देने के कारण खारिज कर दिया था और कहा कि अब मामले में राहत मिलना मुश्किल है।

    पूर्व कानून मंत्री और कांग्रेस नेता पीसी शर्मा ने सुनवाई से पहले बड़ा दावा किया है। उन्होंने कहा कि विजय शाह को अब मंत्री पद से हाथ धोना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि शाह ने चार बार माफी मांगी लेकिन कोर्ट अब राहत नहीं देगी। पीसी शर्मा ने इस मामले को केवल राजनीतिक नहीं बल्कि महिलाओं की गरिमा और सेना अधिकारी के सम्मान का मुद्दा बताया। उनका कहना था कि सरकार के मंत्री द्वारा दिया गया बयान महिलाओं और सेना के सम्मान के खिलाफ था और इसे अनदेखा नहीं किया जा सकता।

    सिंह ने कहा कि कांग्रेस इसे महिला सशक्तिकरण और सुरक्षा का मुद्दा बनाकर जनता तक पहुंचाएगी। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार योजनाओं के नाम पर केवल राजनीतिक दावे कर रही है लेकिन वास्तविकता में अपने मंत्री को बचा रही है। कांग्रेस नेता इसे लाडली बहना जैसी योजनाओं की पोल खोलने का अवसर मान रहे हैं।

    SIT रिपोर्ट में धारा 196 BNS के तहत केस मजबूत पाया गया है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि चाहे सरकार मंजूरी दे या न दे, केस आगे बढ़ेगा। CJI की बेंच ने सरकार से त्वरित फैसला लेने को कहा है। इससे भाजपा सरकार पर दबाव बढ़ गया है। यदि अभियोजन मंजूरी मिलती है तो शाह पर मुकदमा चलेगा और यह उनके राजनीतिक करियर को प्रभावित करेगा। आदिवासी बहुल क्षेत्रों में उनके प्रभाव को देखते हुए BJP सतर्क है। विशेषज्ञों का मानना है कि कोर्ट की सख्ती से सरकार को अब निर्णय लेना अनिवार्य होगा।

    राजनीतिक स्तर पर यह मामला विपक्ष को अवसर प्रदान कर रहा है। कांग्रेस इसे चुनावी मुद्दा बना सकती है और महिला सम्मान तथा सेना की गरिमा का संदेश जनता तक पहुंचा सकती है। वहीं भाजपा के लिए यह चुनौती बनी हुई है कि वह मंत्री को बचाने की कोशिश में राजनीतिक दबाव और न्यायिक प्रक्रिया में संतुलन बनाए।आज की सुनवाई इसलिए अहम मानी जा रही है क्योंकि इसका नतीजा न केवल विजय शाह के राजनीतिक भविष्य पर प्रभाव डालेगा बल्कि मध्य प्रदेश में महिला सुरक्षा, सेना सम्मान और राजनीतिक नैतिकता को लेकर बहस को भी नया मोड़ देगा।

  • राजधानी भोपाल में पानी और गोमांस का विस्फोट कांग्रेस का ISBT निगम कार्यालय घेराव रावण रूपी पुतला दहन

    राजधानी भोपाल में पानी और गोमांस का विस्फोट कांग्रेस का ISBT निगम कार्यालय घेराव रावण रूपी पुतला दहन


    भोपाल में बीते एक महीने से गोमांस मिलने और गंदे पानी की सप्लाई को लेकर लगातार उठ रहे सवालों के बीच सोमवार 9 फरवरी को कांग्रेस ने बड़ा आंदोलन छेड़ दिया। कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने ISBT स्थित नगर निगम कार्यालय का घेराव कर नगर प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। प्रदर्शन का नेतृत्व कांग्रेस नेता रविंद्र साहू झूमरवाला ने किया। इस दौरान महापौर मालती राय और एमआईसी सदस्यों को राजधानी की अव्यवस्था का जिम्मेदार ठहराते हुए रावण रूपी पुतला दहन किया गया।

    प्रदर्शन के दौरान माहौल बेहद तनावपूर्ण हो गया। कांग्रेस कार्यकर्ता निगम कार्यालय में प्रवेश करने की कोशिश करते नजर आए जिस पर पुलिस से धक्का मुक्की भी हुई। कार्यकर्ताओं के हाथों में महापौर का 11 सिर वाला बड़ा कटआउट था। इसमें एक सिर महापौर का जबकि शेष दस सिर उन अफसरों और जनप्रतिनिधियों के बताए गए जिन्हें कांग्रेस ने गोमांस और दूषित पानी के संकट का जिम्मेदार बताया।

    कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि भोपाल में हालात तेजी से बिगड़ते जा रहे हैं। शहर के कई इलाकों में पानी की सप्लाई में सीवेज मिल रहा है जिससे आम नागरिकों की सेहत खतरे में है। उन्होंने कहा कि जिस तरह इंदौर में दूषित पानी पीने से 33 लोगों की मौत हो चुकी है उसी तरह भोपाल में भी गंभीर खतरा मंडरा रहा है। कई इलाकों में सीवेज और पानी की लाइनें साथ साथ बिछी हैं और लीकेज के कारण गंदा पानी सीधे घरों तक पहुंच रहा है।

    कांग्रेस का कहना है कि वार्ड कार्यालयों में होने वाली जल सुनवाई केवल औपचारिकता बनकर रह गई है। लोगों की शिकायतों को गंभीरता से नहीं लिया जा रहा। कुछ मामलों में तो नाले के पानी को भी पीने योग्य बताकर जनता को गुमराह किया गया। हाल ही में एक मीडिया जांच में वार्ड कर्मचारी द्वारा नाली के पानी को पीने योग्य बताने का मामला सामने आने के बाद भी जिम्मेदार अधिकारियों पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई।

    गोमांस मामले को लेकर भी कांग्रेस ने नगर निगम और प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए। कांग्रेस नेता रविंद्र साहू ने कहा कि स्लॉटर हाउस में गोमांस मिलने के मामले में केवल छोटे कर्मचारियों को बलि का बकरा बनाया गया है जबकि असली जिम्मेदारों पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने दावा किया कि स्लॉटर हाउस से जुड़ा प्रस्ताव खुद एमआईसी की बैठक में पारित हुआ था फिर भी महापौर और एमआईसी सदस्यों को बचाया जा रहा है।

    गोमांस मामले की शुरुआत 24 दिसंबर 2025 को हुई जब जहांगीराबाद थाना प्रभारी मान सिंह चौधरी ने एफआईआर दर्ज की। इसमें 17 दिसंबर को कंटेनर नंबर यूपी 15 जेटी 4286 में मांस मिलने का जिक्र किया गया। 18 दिसंबर को वेटनरी अस्पताल जहांगीराबाद में 265 क्विंटल मांस के सैंपल लिए गए जबकि शेष मांस कंटेनर चालक को सुपुर्द कर दिया गया। बाद में मथुरा की फोरेंसिक लैब जांच में मांस के गोवंशीय होने की पुष्टि हुई।

    इस खुलासे के बाद हिंदूवादी संगठनों ने अरेरा हिल्स थाने के सामने प्रदर्शन किया और पुलिस ने जिंसी स्थित आधुनिक स्लॉटर हाउस में दस्तावेज जब्त किए। कांग्रेस का कहना है कि यह पूरा मामला प्रशासनिक लापरवाही और राजनीतिक संरक्षण का नतीजा है। पार्टी ने चेतावनी दी है कि यदि दोषियों पर कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन और तेज किया जाएगा।