Tag: Neem Karoli Baba

  • 15 बार देख चुकी हैं 'हनुमान अंश' फिर भी हर बार छलक आते हैं आंसू! नीम करोली बाबा की बेटी से मुलाकात का रागिनी सोना ने खोला राज

    15 बार देख चुकी हैं 'हनुमान अंश' फिर भी हर बार छलक आते हैं आंसू! नीम करोली बाबा की बेटी से मुलाकात का रागिनी सोना ने खोला राज


    नई दिल्ली। फिल्म हनुमान अंश इन दिनों बॉक्स ऑफिस पर शानदार प्रदर्शन कर रही है। फिल्म ने दुनियाभर में 329.30 करोड़ रुपये से ज्यादा की कमाई कर ली है। फिल्म की इस सफलता को लेकर निर्माता रागिनी सोना ने एक ऐसा अनुभव साझा किया है जिसने फिल्म की कहानी के साथ आध्यात्मिक पहलू को भी चर्चा में ला दिया है। रागिनी का मानना है कि फिल्म को नीम करोली बाबा का आशीर्वाद मिला है। उन्होंने रिलीज से पहले बाबा की बेटी गिरिजा जी जिन्हें अम्मा जी के नाम से भी जाना जाता है उनसे हुई मुलाकात का अनुभव साझा किया है।

    रागिनी सोना के मुताबिक फिल्म के निर्देशक विशाल चतुर्वेदी की इच्छा थी कि फिल्म को आगे बढ़ाने से पहले नीम करोली बाबा के परिवार का आशीर्वाद लिया जाए। इसी सिलसिले में टीम ने अम्मा जी से संपर्क किया। बातचीत के दौरान जब उनसे पूछा गया कि क्या वह हनुमान अंश फिल्म देखना चाहेंगी तो उन्होंने कहा कि जब उन्हें सही समय लगेगा तब वह फिल्म देखेंगी। रागिनी के मुताबिक अब तक अम्मा जी फिल्म को करीब 15 बार देख चुकी हैं और हर बार फिल्म देखते हुए उनकी आंखों में आंसू आ जाते हैं।

    रागिनी ने बताया कि मुलाकात के दौरान अम्मा जी ने उनसे फिल्म बनाने की प्रेरणा के बारे में पूछा। इसके जवाब में उन्होंने अपने बचपन का एक अनुभव साझा किया। रागिनी ने बताया कि जब वह छह साल की थीं तब उनकी मुलाकात नीम करोली बाबा से हुई थी। वहीं विशाल ने बाबा को लेकर किए गए अपने शोध के बारे में बताया। बातचीत के दौरान रागिनी ने यह भी बताया कि उनके पिता नैनीताल में पोस्टेड थे। इसके बाद उनके अनुसार फोन पर ऐसा अनुभव हुआ जिसे वह आज भी चमत्कार मानती हैं।

    रागिनी के मुताबिक अम्मा जी ने अचानक उनके पिता का नाम बता दिया। इसके बाद उन्होंने आगरा स्थित उनके करीब 50 साल पुराने घर की लोकेशन तक बता दी और उनके बड़े भाई का नाम भी लिया। रागिनी का कहना है कि अम्मा जी ने कहा कि उन्हें सब कुछ अपनी आंखों के सामने साफ दिखाई दे रहा है। इस दौरान फिल्म निर्देशक विशाल भी मौजूद थे और रागिनी ने उन्हें इस अनुभव का प्रत्यक्षदर्शी बताया।

    इस घटना से रागिनी बेहद भावुक हो गईं और उनकी आंखों से आंसू निकल आए। उन्होंने अम्मा जी से पूछा कि उन्हें यह सब कैसे पता चला। रागिनी के अनुसार अम्मा जी ने इसका कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया और कहा कि उन्हें खुद नहीं पता लेकिन सब कुछ साफ दिखाई दे रहा था। इस अनुभव के बाद रागिनी का विश्वास और मजबूत हो गया कि शायद उन्हें इस फिल्म का हिस्सा बनने के लिए बाबा का आशीर्वाद मिला है।

    रागिनी और उनकी टीम ने नीम करोली बाबा के पोते धनंजय जी से भी मुलाकात की। उन्होंने उनके सरल स्वभाव का जिक्र करते हुए कहा कि बाबा का संदेश सभी से प्रेम करने और सभी को भोजन कराने का था और परिवार आज भी इस भावना को आगे बढ़ा रहा है।

    रागिनी ने क्रिकेटर विराट कोहली और अभिनेत्री अनुष्का शर्मा का भी जिक्र किया। उनके मुताबिक दोनों ने नई पीढ़ी के बीच नीम करोली बाबा को लेकर जिज्ञासा बढ़ाने में भूमिका निभाई है। रागिनी का कहना है कि कुछ आध्यात्मिक अनुभव ऐसे होते हैं जिन्हें शब्दों में पूरी तरह समझाना मुश्किल होता है और केवल महसूस किया जा सकता है। उनके अनुसार हनुमान अंश अब दर्शकों को नीम करोली बाबा के जीवन और संदेश से परिचित कराने का एक माध्यम बन गई है।

  • हनुमान अंश को 100 करोड़ की OTT डील मिलने की खबर पर आया बड़ा अपडेट प्रोड्यूसर रागिनी सोना ने बताया पूरा सच

    हनुमान अंश को 100 करोड़ की OTT डील मिलने की खबर पर आया बड़ा अपडेट प्रोड्यूसर रागिनी सोना ने बताया पूरा सच


    नई दिल्ली। फिल्म हनुमान अंश इन दिनों सिनेमाघरों में दर्शकों के बीच लगातार चर्चा में बनी हुई है। फिल्म को दर्शकों के साथ ही क्रिटिक्स की तरफ से भी अच्छा रिस्पॉन्स मिला है और बॉक्स ऑफिस पर इसकी कमाई लगातार आगे बढ़ रही है। इसी बीच फिल्म की OTT डील को लेकर एक ऐसी खबर सामने आई जिसने हर किसी का ध्यान खींच लिया। दावा किया जा रहा था कि हनुमान अंश को OTT प्लेटफॉर्म की तरफ से 100 करोड़ रुपये की डील का ऑफर मिला है। अब फिल्म की प्रोड्यूसर रागिनी सोना ने इस खबर की सच्चाई सामने रख दी है।

    रागिनी सोना ने NDTV से बातचीत में 100 करोड़ रुपये की OTT डील की खबर को पूरी तरह अफवाह बताया है। उन्होंने साफ किया कि फिल्म की टीम को ऐसा कोई ऑफर नहीं मिला है। प्रोड्यूसर के मुताबिक फिलहाल टीम के लिए सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि ज्यादा से ज्यादा दर्शक फिल्म को सिनेमाघरों में जाकर देखें और इसे अपना प्यार दें। उन्होंने कहा कि इस समय किसी ऑफर या रकम से ज्यादा मायने दर्शकों का प्यार रखता है।

    प्रोड्यूसर ने यह भी कहा कि फिल्म को मिल रही सफलता में दर्शकों की बड़ी भूमिका है। उनका मानना है कि जिस तरह लोग खुद फिल्म के बारे में बात कर रहे हैं और इसे दूसरे लोगों तक पहुंचा रहे हैं वह अपने आप में खास बात है। रागिनी सोना ने इसे नीम करोली बाबा का चमत्कार भी बताया। उनके मुताबिक दर्शक ही फिल्म का प्रचार कर रहे हैं और ऐसा अनुभव उन्होंने पहले कभी नहीं देखा।

    रागिनी ने यह भी स्पष्ट किया कि फिल्म की टीम को किसी भी OTT प्लेटफॉर्म से 100 करोड़ रुपये का ऑफर नहीं मिला है। उन्होंने कहा कि फिल्म से जुड़े फैसले टीम के साथ चर्चा के बाद ही लिए जाएंगे। अगर भविष्य में OTT को लेकर कोई बड़ा फैसला होता है तो इसकी आधिकारिक जानकारी दी जाएगी। फिलहाल फिल्म की टीम को खुद यह जानकारी नहीं है कि हनुमान अंश OTT पर कब रिलीज होगी।

    दिलचस्प बात यह है कि फिल्म की OTT यात्रा को लेकर पहले भी एक जानकारी सामने आ चुकी है। निर्देशक विशाल चतुर्वेदी ने बताया था कि एक OTT प्लेटफॉर्म ने उनकी फिल्म को रिलीज करने से मना कर दिया था। इसके बाद टीम ने फिल्म को सिनेमाघरों में रिलीज करने का फैसला किया। थिएटर में रिलीज के बाद फिल्म को जिस तरह का रिस्पॉन्स मिला उसने पूरी तस्वीर बदल दी।

    निर्देशक विशाल चतुर्वेदी ने फिल्म लिखने के अपने तरीके को लेकर भी दिलचस्प जानकारी साझा की थी। उन्होंने बताया था कि कहानी लिखते समय उन्होंने अपने कमरे से सभी डिजिटल डिवाइस हटा दिए थे। उन्होंने पूरी फिल्म की कहानी पेन और पेपर पर लिखी थी। इसके बाद अपने असिस्टेंट की मदद से इसे डिजिटल रूप दिया गया। उन्होंने यह भी बताया था कि फिल्म का ओपनिंग सीन लिखने में उन्हें करीब 45 दिन लगे क्योंकि उनके लिए फिल्म की शुरुआत बेहद महत्वपूर्ण थी।

    अब 100 करोड़ रुपये की OTT डील की खबर पर प्रोड्यूसर के बयान के बाद यह साफ हो गया है कि फिलहाल ऐसी किसी डील की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। फिल्म की टीम का पूरा ध्यान अभी सिनेमाघरों में मिल रहे दर्शकों के प्यार पर है। OTT रिलीज को लेकर कोई आधिकारिक फैसला सामने आने तक 100 करोड़ रुपये की डील वाली खबर को महज अफवाह ही माना जा रहा है।

  • 200 करोड़ कमाने वाली ‘हनुमान अंश’ ऑस्कर की रेस से बाहर डेडलाइन चूकी टीम ने खुद बताई वजह

    200 करोड़ कमाने वाली ‘हनुमान अंश’ ऑस्कर की रेस से बाहर डेडलाइन चूकी टीम ने खुद बताई वजह


    नई दिल्ली। नीम करोली बाबा की भक्ति और हनुमान जी से जुड़ी कहानी पर बनी फिल्म ‘हनुमान अंश’ इस समय बॉक्स ऑफिस पर शानदार प्रदर्शन कर रही है। बेहद कम बजट में बनी इस फिल्म ने दर्शकों के बीच ऐसी पकड़ बनाई है कि इसकी कमाई 200 करोड़ रुपये के पार पहुंच चुकी है। करीब छह सप्ताह से सिनेमाघरों में बनी हुई फिल्म को लेकर लगातार चर्चा हो रही है। इसी बीच फिल्म के ऑस्कर की रेस में शामिल न हो पाने को लेकर एक बड़ी जानकारी सामने आई है।

    फिल्म की प्रोड्यूसर नम्रता सिंह ने हाल ही में बातचीत के दौरान बताया कि ‘हनुमान अंश’ के पास ऑस्कर के लिए सबमिट होने का मौका था लेकिन टीम तय समय सीमा का ध्यान नहीं रख सकी। उनके मुताबिक फिल्म को ऑस्कर के लिए भेजने की आखिरी तारीख 7 सितंबर थी लेकिन उनकी टीम को इस डेडलाइन की जानकारी नहीं थी। जब फिल्म की सफलता के बीच लोगों ने उनसे सवाल किया कि आखिर इतनी चर्चा में रहने वाली फिल्म ऑस्कर के लिए क्यों नहीं भेजी गई तो उन्होंने इस चूक के बारे में खुलकर बात की।

    नम्रता सिंह ने बताया कि उनकी टीम काफी छोटी है और एक साथ कई जिम्मेदारियां संभाल रही थी। फिल्म की सफलता के बाद अब उसका तेलुगू वर्जन तैयार किया जा रहा है। इसके अलावा दूसरी भाषाओं में रिलीज की तैयारी भी चल रही है। टीम फिल्म को दिव्यांग दर्शकों के लिए अधिक सुविधाजनक बनाने की दिशा में भी काम कर रही है। ऐसे में ऑस्कर सबमिशन की अहम डेडलाइन पर पर्याप्त ध्यान नहीं जा सका।

    फिल्म के कलाकार और निर्देशक भी अलग अलग जगहों पर प्रचार और अन्य जरूरी कामों में व्यस्त हैं। इसी वजह से प्रोडक्शन ऑफिस में भी पूरी टीम मौजूद नहीं थी। नम्रता के लिए यह अनुभव इसलिए भी चुनौतीपूर्ण रहा क्योंकि ‘हनुमान अंश’ उनके प्रोड्यूसर के तौर पर शुरुआती बड़े प्रोजेक्ट्स में से एक है। फिल्म के निर्देशक विशाल चतुर्वेदी भी पहली बार इस तरह की बड़ी जिम्मेदारी संभाल रहे थे।

    फिल्म को दुनियाभर में रिलीज करना भी टीम के लिए आसान नहीं रहा। अलग अलग देशों में फिल्म रिलीज करने के लिए कई तरह की प्रक्रियाओं और नियमों को पूरा करना पड़ा। सेंसर से जुड़े काम और विदेशी बाजार में रिलीज की तैयारियों के दौरान टीम ने कई चीजें पहली बार सीखीं। इसके बावजूद फिल्म को इंटरनेशनल स्तर पर पहुंचाने की कोशिश जारी रही।

    टीम के लिए 11 सितंबर की तारीख भी बेहद खास रही क्योंकि इसी दिन नीम करोली बाबा का महासमाधि दिवस मनाया जाता है। फिल्म के मेकर्स बाबा के भक्त हैं और इसी वजह से वे इस खास दिन फिल्म को विदेशों में भी रिलीज करना चाहते थे। इस लक्ष्य को पूरा करने के लिए टीम ने पूरी ताकत लगा दी और फिल्म को अंतरराष्ट्रीय दर्शकों तक पहुंचाने की दिशा में काम किया।

    अब ‘हनुमान अंश’ की कहानी को आगे बढ़ाने की तैयारी भी शुरू हो गई है। प्रोड्यूसर नम्रता सिंह के मुताबिक फिल्म पर आधारित एक वीडियो गेम बनाया जा रहा है। खास बात यह है कि इसे वही कंपनी तैयार कर रही है जिसने लोकप्रिय गेम FAU-G बनाया है। इसके अलावा फिल्म की कहानी को कॉमिक बुक के रूप में भी आगे बढ़ाने की तैयारी है और इसके लिए एक बड़े कॉमिक पब्लिशर से बातचीत चल रही है।

    फिल्म के दूसरे पार्ट ‘हनुमान अंश 2’ को लेकर भी चर्चाएं तेज हैं। इसके साथ विराट कोहली और अनुष्का शर्मा के कैमियो को लेकर भी अटकलें सामने आई हैं हालांकि मेकर्स ने अभी इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। ऐसे में ऑस्कर का मौका भले ही हाथ से निकल गया हो लेकिन ‘हनुमान अंश’ की कहानी अब फिल्म से आगे गेम कॉमिक और संभावित सीक्वल के जरिए एक बड़े संसार का रूप लेती नजर आ रही है।

  • बाबा नीब करौरी की जन्मस्थली पर स्वामित्व विवाद, छह पोतियों और ट्रस्टी को नोटिस, मांगे दावेदारी के सबूत

    बाबा नीब करौरी की जन्मस्थली पर स्वामित्व विवाद, छह पोतियों और ट्रस्टी को नोटिस, मांगे दावेदारी के सबूत

    फिरोजाबाद। टूंडला के अकबरपुर स्थित प्रख्यात संत बाबा नीब करौरी की जन्मस्थली के पैतृक मकान पर स्वामित्व को लेकर उठे विवाद की जिला प्रशासन ने जांच शुरू कर दी है। डीएम के निर्देश पर गठित तीन सदस्यीय समिति ने मामले में दोनों पक्षों से दावेदारी के समर्थन में दस्तावेज और साक्ष्य मांगे हैं। समिति के अध्यक्ष एवं एडीएम (न्यायिक) अरविंद द्विवेदी ने बाबा की छह पोतियों और श्री ठाकुर हनुमानजी ट्रस्ट के पदेन ट्रस्टी संजय गुप्ता को नोटिस जारी किए हैं।

    प्रशासन ने संबंधित पक्षों को अपनी-अपनी दावेदारी, साक्ष्य और दस्तावेज प्रस्तुत करने को कहा है, ताकि मामले की निष्पक्ष सुनवाई के बाद नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जा सके। हालांकि, विवाद में घरौनी में संशोधन की मांग को लेकर प्रशासन के सामने कानूनी पेच भी खड़ा हो गया है। प्रदेश स्तर पर राजस्व परिषद ने फिलहाल घरौनियों में किसी भी तरह के संशोधन पर रोक लगा रखी है।

    छह पोतियों ने डीएम से की थी शिकायत
    बाबा नीब करौरी यानी लक्ष्मी नारायण शर्मा के छोटे पुत्र स्वर्गीय धर्म नारायण शर्मा की छह पुत्रियों सुनीता, अर्चना, वंदना, भावना, रितु और रिचा ने अगस्त में कलेक्ट्रेट पहुंचकर डीएम को प्रार्थना पत्र दिया था।

    शिकायत में आरोप लगाया गया कि ग्राम पंचायत नगला स्थित मकान संख्या 154-व, जिसमें बाबा का ध्यान कक्ष, भोजनालय और शयन कक्ष शामिल हैं, पर श्री ठाकुर हनुमानजी ट्रस्ट के ट्रस्टी संजय गुप्ता ने एकाधिकार कर लिया है।

    मुंबई से आए शिकायतकर्ता पक्ष की ओर से भावना रावत के पति मनोज रावत ने भी डीएम से मुलाकात की थी। उन्होंने पैतृक संपत्ति को कब्जामुक्त कराने और विवाद के स्थायी समाधान के लिए डीएम की अध्यक्षता में शासकीय प्रशासनिक ट्रस्ट बनाने की मांग रखी थी।

    ट्रस्ट ने आरोपों को किया खारिज
    श्री ठाकुर हनुमान जी ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष मनोज अग्रवाल ने ट्रस्ट पर लगाए गए सभी आरोपों को सिरे से खारिज किया है। उनका कहना है कि ट्रस्ट का गठन वर्ष 1996 में बाबा की धर्मपत्नी स्वर्गीय रामबेटी शर्मा ने कराया था।

    मनोज अग्रवाल के मुताबिक, वर्तमान में ट्रस्ट में 18 सदस्य हैं और बाबा की आगरा निवासी बेटी गिरजा भटेले स्वयं इसकी अध्यक्ष हैं। इसके अलावा बाबा के बड़े बेटे स्वर्गीय अनेक सिंह शर्मा की बड़ी बेटी सुनीता शर्मा के पति त्रिलोकी चंद्र शर्मा, दूसरी बेटी अर्चना शर्मा और बेटे डॉ. धनंजय शर्मा भी ट्रस्ट के सदस्य हैं।

    उन्होंने कहा कि ट्रस्ट के सभी सदस्य सेवा भावना से काम कर रहे हैं और संपत्ति का कोई निजी उपयोग नहीं हो रहा है। उनका कहना है कि जो भी व्यक्ति निष्पक्ष भाव से सेवा करना चाहता है, उसका स्वागत है।

    शिकायतकर्ता पक्ष बोला- ट्रस्ट पर किसी का एकाधिकार नहीं होना चाहिए
    शिकायतकर्ता पोतियों में शामिल भावना रावत के पति मनोज रावत का कहना है कि उनका उद्देश्य ट्रस्ट पर किसी एक व्यक्ति के एकाधिकार को रोकना है। उन्होंने कहा कि इसी वजह से प्रशासन के सामने डीएम की अध्यक्षता वाली प्रशासनिक समिति बनाने का प्रस्ताव रखा गया है। उनका कहना है कि इससे बाबा की संपत्ति का दुरुपयोग रोकने और उसकी बेहतर व्यवस्था सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी।

    घरौनी संशोधन पर रोक ने बढ़ाई प्रशासन की मुश्किल
    प्रशासन ने विवाद की जांच शुरू कर दी है, लेकिन घरौनी में संशोधन की मांग के कारण मामले में कानूनी अड़चन सामने आ गई है। शिकायतकर्ता पक्ष ने घरौनी में संशोधन की मांग की है, जबकि प्रदेश स्तर पर बोर्ड ऑफ रेवेन्यू यानी राजस्व परिषद ने फिलहाल घरौनियों में किसी भी तरह के संशोधन पर रोक लगा रखी है।

    ऐसे में राजस्व नियमों की इस बंदिश के बीच जिला प्रशासन स्वामित्व विवाद का क्या कानूनी रास्ता निकालता है, इस पर निगाहें टिकी हैं। फिलहाल प्रशासन ने दोनों पक्षों से दस्तावेज और साक्ष्य मांगे हैं।

    जन्मस्थली को पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने की तैयारी
    इधर, बाबा नीब करौरी की जन्मस्थली अकबरपुर को अंतरराष्ट्रीय पर्यटन मानचित्र पर स्थापित करने के लिए जिला प्रशासन विकास कार्यों को गति दे रहा है। डीएम संतोष कुमार शर्मा ने जन्मस्थली पहुंचकर विकास कार्यों और प्रस्तावित कॉरिडोर की समीक्षा की।

    डीएम के मुताबिक, उत्तर प्रदेश सरकार ने पर्यटन नीति-2022 में संशोधन कर नीब करौरी बाबा सर्किट को शामिल किया है। इसके तहत लखनऊ, फर्रुखाबाद, फिरोजाबाद और मथुरा/वृंदावन को आपस में जोड़ा जा रहा है। इससे देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं को सुविधाएं मिलने के साथ स्थानीय स्तर पर रोजगार और निवेश के नए अवसर पैदा होने की उम्मीद है।

    पहले चरण में 865.98 लाख के काम
    कॉरिडोर विकास के फेज-1 में 865.98 लाख रुपए की लागत से डॉरमेट्री, रेस्तरां, सभा स्थल, डिजिटल लाइब्रेरी, सीसी रोड, सेप्टिक टैंक, समरसेबुल पंप और साइट डेवलपमेंट के काम चल रहे हैं।

    वहीं फेज-2 में 222.47 लाख रुपए की लागत से टॉयलेट ब्लॉक, गार्ड रूम, सीसी रोड, नाली, पेवर, ट्यूबवेल, बाह्य विद्युत कार्य और म्यूरल वर्क स्वीकृत किए गए हैं।

    भूमि अधिग्रहण के बाद यहां भव्य प्रवेश द्वार, पर्यटन सुविधा केंद्र, ध्यान एवं वेलनेस सेंटर, फूड कोर्ट, म्यूजियम, ओपन एयर थिएटर, पार्किंग और प्रसाद मंडप जैसी सुविधाएं विकसित करने की योजना है।

    अब जन्मस्थली के स्वामित्व विवाद में प्रशासन की जांच और दोनों पक्षों की ओर से प्रस्तुत किए जाने वाले दस्तावेज अहम होंगे। इन्हीं के आधार पर आगे की वैधानिक कार्रवाई की दिशा तय होगी।

  • हनुमान अंश की टीम का भोपाल में खास अंदाज में स्वागत कलाकारों से मिलेंगे दर्शक रविवार को भी शहर में रहेगा फिल्मी रंग

    हनुमान अंश की टीम का भोपाल में खास अंदाज में स्वागत कलाकारों से मिलेंगे दर्शक रविवार को भी शहर में रहेगा फिल्मी रंग


    भोपाल । भोपाल में फिल्म हनुमान अंश को लेकर दर्शकों का उत्साह लगातार बढ़ता नजर आ रहा है। फिल्म की टीम शनिवार को भोपाल पहुंच रही है जहां कलाकार सिनेमाघरों में दर्शकों के बीच जाकर उनसे सीधा संवाद करेंगे। टीम में फिल्म में पार्वती माई गोपाल बहेलिया और चांद चोर जैसे किरदार निभाने वाले कलाकार शामिल हैं। इस दौरान दर्शकों को फिल्म के कलाकारों से सीधे मिलने और फिल्म से जुड़े अनुभव साझा करने का मौका मिलेगा। फिल्म की टीम शनिवार शाम अवधपुरी स्थित रीगल सिनेमा पहुंचेगी जहां ऑडियंस के साथ खास बातचीत का कार्यक्रम रखा गया है।

    फिल्म में गोपाल बहेलिया का किरदार अभिनेता भगवानदास पटेल ने निभाया है जबकि पार्वती माई की भूमिका नेहा परांजपे ने निभाई है। चांद चोर के किरदार में अभिषेम मिश्रा नजर आए हैं। टीम के भोपाल दौरे को लेकर दर्शकों में खास उत्सुकता है क्योंकि फिल्म धार्मिक और आध्यात्मिक भावनाओं से जुड़ी कहानी को पर्दे पर प्रस्तुत करती है। हाल ही में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भी भोपाल में हनुमान अंश फिल्म देखी थी। फिल्म देखने के बाद उन्होंने इसकी विषयवस्तु और कलाकारों के काम की सराहना की थी।

    हनुमान अंश की टीम केवल शनिवार को ही नहीं बल्कि रविवार को भी भोपाल में दर्शकों के बीच मौजूद रहेगी। रविवार सुबह 11.30 बजे टीम बंसल प्लाजा मल्टीप्लेक्स पहुंचेगी। इसके बाद दोपहर 2.30 बजे डीबी मॉल में दर्शकों से मुलाकात की जाएगी। इस दौरान फिल्म के कलाकार ऑडियंस के साथ बातचीत करेंगे और फिल्म से जुड़े अनुभव साझा करेंगे। श्री हनुमान भक्त मंडल भी इस पूरे कार्यक्रम में टीम के साथ मौजूद रहेगा। मंडल से जुड़े पदाधिकारियों ने बताया कि फिल्म के कलाकारों के साथ दर्शकों के संवाद को लेकर विशेष तैयारी की गई है।

    फिल्म की खास बात यह भी है कि इसमें मध्य प्रदेश की प्रतिभाओं को महत्वपूर्ण जगह मिली है। सागर जिले के दिव्यांग गायक सुनील लोधी ने फिल्म के लिए बुंदेली भजन गाया है। उनकी प्रतिभा पहले ही मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव तक पहुंच चुकी थी। मुख्यमंत्री ने उन्हें मुख्यमंत्री निवास बुलाकर सम्मानित किया था और एक लाख रुपये की सम्मान निधि भी दी थी। इसके साथ ही उनकी आंखों की रोशनी वापस लाने के उपचार में मदद का भरोसा दिया गया था। अब उनकी आवाज फिल्म का हिस्सा बनकर प्रदेश की लोक संस्कृति और बुंदेली संगीत को बड़े पर्दे तक पहुंचा रही है।

    फिल्म से जुड़े कलाकारों का भी मध्य प्रदेश से गहरा रिश्ता है। गोपाल का किरदार निभाने वाले भगवानदास पटेल जबलपुर के रहने वाले हैं। उन्होंने थिएटर में करीब छह साल काम करने के बाद टीवी और फिल्मों की दुनिया में कदम रखा। इसके बाद उन्हें कई फिल्मों और वेब सीरीज में काम करने का अवसर मिला। मुझसे फ्रेंडशिप करोगे प्रेम रतन धन पायो थार रंगबाज और फोटोग्राफ जैसे प्रोजेक्ट में वे नजर आ चुके हैं। वहीं फिल्म से जुड़े गायक साधु तिवारी का संबंध ग्वालियर से है।

    इस तरह हनुमान अंश की टीम का भोपाल दौरा केवल फिल्म के प्रचार तक सीमित नहीं है बल्कि यह मध्य प्रदेश की स्थानीय प्रतिभाओं और धार्मिक आस्था से जुड़े कलाकारों को दर्शकों के करीब लाने का भी अवसर बन रहा है। टीम के लगातार दो दिन भोपाल में रहने से फिल्म के प्रशंसकों के बीच उत्साह और बढ़ने की उम्मीद है।

  • रामायण के हजारों करोड़ के बजट के बीच हनुमान अंश का कमाल महज 2 करोड़ में बनी फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर रचा इतिहास

    रामायण के हजारों करोड़ के बजट के बीच हनुमान अंश का कमाल महज 2 करोड़ में बनी फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर रचा इतिहास


    नई दिल्ली। बॉलीवुड में बड़े बजट की फिल्मों को अक्सर बॉक्स ऑफिस पर बड़ी सफलता की गारंटी माना जाता है। करोड़ों रुपये का बजट बड़े सितारे भव्य सेट और जबरदस्त प्रचार किसी फिल्म को रिलीज से पहले ही चर्चा में ला देते हैं। लेकिन फिल्म हनुमान अंश ने इस सोच को काफी हद तक चुनौती दे दी है। करीब 2 करोड़ रुपये के बजट में बनी इस फिल्म ने अपनी कहानी और दर्शकों की पसंद के दम पर ऐसा प्रदर्शन किया है जिसने फिल्म इंडस्ट्री का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है।
    नीम करोली बाबा के जीवन और आध्यात्मिक विचारों से प्रेरित यह फिल्म शुरुआत में बेहद सीमित स्तर पर रिलीज हुई थी। शुरुआती दिनों में इसकी कमाई भी बहुत ज्यादा नहीं थी लेकिन धीरे धीरे दर्शकों के बीच फिल्म की चर्चा बढ़ती गई। पॉजिटिव वर्ड ऑफ माउथ ने इसकी रफ्तार बदल दी और सिनेमाघरों में दर्शकों की संख्या लगातार बढ़ने लगी।

    रिपोर्ट्स के मुताबिक फिल्म ने 35 दिनों में करीब 193 करोड़ रुपये का ग्रॉस कलेक्शन कर लिया था। इसके बाद 36वें दिन भी फिल्म की कमाई का सिलसिला जारी रहा और घरेलू बॉक्स ऑफिस पर यह 200 करोड़ रुपये से ज्यादा के ग्रॉस आंकड़े को पार कर गई। हालिया रिपोर्ट के मुताबिक फिल्म के 36वें दिन भी बड़ी संख्या में शो चल रहे थे।

    फिल्म की सबसे खास बात इसका बेहद कम बजट है। जहां बड़े प्रोजेक्ट्स में हजारों करोड़ रुपये तक खर्च किए जा रहे हैं वहीं हनुमान अंश करीब 2 करोड़ रुपये में तैयार हुई। इसके बावजूद फिल्म का कलेक्शन उसके बजट से कई गुना ज्यादा पहुंच गया। यही वजह है कि अब इसकी तुलना बड़े बजट की आने वाली फिल्मों से भी की जा रही है।

    हनुमान अंश की सफलता सिर्फ कमाई तक सीमित नहीं है। फिल्म की शुरुआत धीमी होने के बावजूद दर्शकों ने इसे धीरे धीरे अपनाया। फिल्म को बड़े स्टार सिस्टम का सहारा नहीं मिला था और न ही शुरुआत में बड़े पैमाने पर प्रचार हुआ था। इसके बावजूद दर्शकों की प्रतिक्रिया ने फिल्म को आगे बढ़ाया।

    फिल्म की सफलता में इसकी आध्यात्मिक कहानी को भी अहम माना जा रहा है। नीम करोली बाबा से जुड़ी आस्था और उनके जीवन से प्रेरित प्रसंगों ने खासतौर पर श्रद्धालुओं और आध्यात्मिक विषयों में रुचि रखने वाले दर्शकों को आकर्षित किया। फिल्म की चर्चा सोशल मीडिया और दर्शकों के बीच बढ़ती गई और यही चर्चा इसके लिए सबसे बड़ा प्रचार बन गई।

    अब इस फिल्म की सफलता को बड़े बजट वाली फिल्मों के लिए एक संकेत के तौर पर देखा जा रहा है। खासकर 4000 करोड़ रुपये के भारी भरकम बजट वाली रामायण जैसे बड़े प्रोजेक्ट के सामने हनुमान अंश का उदाहरण यह सवाल जरूर खड़ा करता है कि क्या बॉक्स ऑफिस पर सिर्फ बजट ही सबसे बड़ा हथियार है। हालांकि दोनों फिल्मों का विषय पैमाना और निर्माण अलग है इसलिए सीधी तुलना करना सही नहीं होगा।

    फिर भी हनुमान अंश ने यह साबित कर दिया है कि कम बजट में बनी फिल्म भी मजबूत कहानी और दर्शकों के भरोसे के दम पर बड़ी व्यावसायिक सफलता हासिल कर सकती है। फिल्म की अंतरराष्ट्रीय रिलीज भी 11 सितंबर से शुरू हो चुकी है जिससे अब इसकी कमाई और आगे बढ़ने की उम्मीद की जा रही है।

  • नीम करौली बाबा की यादों ने भावुक किया भक्तों को पोते ने सुनाया बचपन का वो किस्सा जब बाबा के साथ बिताते थे वक्त

    नीम करौली बाबा की यादों ने भावुक किया भक्तों को पोते ने सुनाया बचपन का वो किस्सा जब बाबा के साथ बिताते थे वक्त


    भोपाल। नीम करोली बाबा पर बनी फिल्म हनुमान अंश इन दिनों चर्चा में है। फिल्म की सफलता के बीच बाबा से जुड़ी कई ऐसी बातें भी सामने आ रही हैं जो उनके भक्तों के लिए बेहद खास हैं। बाबा का भोपाल से भी पुराना पारिवारिक रिश्ता रहा है। उनके पोते डॉ. धनंजय शर्मा आज भी भोपाल में रहते हैं और उनके पास बाबा के साथ बिताए बचपन के कई ऐसे किस्से हैं जिन्हें याद करके वह आज भी भावुक हो जाते हैं। डॉ. धनंजय बताते हैं कि जब उनका जन्म भोपाल में हुआ था तब नीम करोली बाबा खुद यहां आए थे और उन्होंने ही उनका नामकरण किया था।

    डॉ. धनंजय के मुताबिक बचपन में गर्मी की छुट्टियों के दौरान वह करीब दो महीने के लिए आगरा जाते थे। उस समय बाबा से उनकी मुलाकात होती थी और उन्हें बाबा का भरपूर लाड़ प्यार मिला। करीब 13 साल तक उन्होंने बाबा को बेहद करीब से देखा। धनंजय कहते हैं कि उनके लिए नीम करोली बाबा पहले किसी बड़े संत या आध्यात्मिक गुरु से ज्यादा उनके अपने बाबा थे। घर में बाबा का व्यवहार भी बिल्कुल सामान्य रहता था। उन्होंने कभी बच्चों को यह महसूस नहीं होने दिया कि वह कोई बहुत बड़े संत हैं।

    नीम करोली बाबा करीब 40 साल तक गांव के प्रधान भी रहे थे। उनके व्यक्तित्व का यह पहलू भी उनके पोते की यादों में दर्ज है। धनंजय बताते हैं कि बाबा से जुड़े भक्त जब अपने अनुभव सुनाते हैं तो उन्हें कई बार हैरानी होती है। भक्तों का मानना है कि बाबा की कृपा से उनके जीवन की मुश्किल परिस्थितियां आसान हुईं और कई कठिन काम पूरे हुए।

    साल 1973 में जब नीम करोली बाबा का निधन हुआ तब धनंजय का परिवार भोपाल में ही था। उन्हें सुबह करीब आठ बजे ऑल इंडिया रेडियो के समाचार से बाबा के निधन की जानकारी मिली। उनके मुताबिक बाबा के निधन के बाद भी भक्तों की आस्था कम नहीं हुई। इसी संदर्भ में वह देवरहा बाबा से जुड़ा एक प्रसंग भी बताते हैं। उनके अनुसार जब कुछ भक्त देवरहा बाबा के पास पहुंचे और उन्हें बताया कि नीम करोली बाबा अब नहीं रहे तो वह भावुक होकर रोने लगे। उन्होंने भक्तों से कहा था कि नीम करोली बाबा कहीं नहीं गए और वह अपने भक्तों के साथ बने रहेंगे।

    डॉ. धनंजय शर्मा ने भोपाल में डॉक्टर के रूप में सेवाएं दीं। उन्होंने हमीदिया समेत कई अस्पतालों में काम किया और बाद में सेवानिवृत्त हुए। फिल्म हनुमान अंश की रिलीज से पहले इसके निर्देशक भी भोपाल पहुंचे थे और उन्होंने धनंजय को फिल्म दिखाई थी। शुरुआत में भोपाल में फिल्म को पर्याप्त शो नहीं मिल रहे थे और टिकटों की बिक्री भी कम थी। इसके बाद कुछ भक्तों ने पहल की। उन्होंने करीब 50 से 100 लोगों के टिकट खुद बुक किए और उन्हें फिल्म मुफ्त में दिखाई। धीरे धीरे दर्शकों की संख्या बढ़ने लगी और फिल्म ने रफ्तार पकड़ ली। धनंजय इसे बाबा का चमत्कार मानते हैं।

    धनंजय की पत्नी शैलजा भी शादी के बाद बाबा से जुड़ीं। उनकी शादी 1987 में हुई थी। परिवार और भक्तों से बाबा के बारे में जानने के बाद उन्होंने कई किताबें पढ़ीं और धीरे धीरे उनकी भी बाबा के प्रति आस्था बढ़ती चली गई।

    वहीं नीम करोली बाबा के पुश्तैनी घर को लेकर भी विवाद सामने आया है। बताया जाता है कि बाबा का बचपन उत्तर प्रदेश के अकबरपुर गांव में बीता था। उनके पुश्तैनी घर और उससे जुड़े परिसर के रखरखाव को लेकर परिवार और ट्रस्ट के बीच विवाद की स्थिति है। परिवार की ओर से ट्रस्ट के पदाधिकारी पर कब्जे का आरोप लगाए जाने की बात भी सामने आई है। दूसरी ओर डॉ. धनंजय का कहना है कि उत्तराखंड के कैंची धाम और उत्तर प्रदेश के नीम करोली को लेकर लोगों में भ्रम है। उनके अनुसार दोनों अलग स्थान हैं और इनकी सही पहचान स्पष्ट होना जरूरी है।

    नीम करोली बाबा से जुड़ी इन पारिवारिक यादों ने एक बार फिर उनके जीवन और व्यक्तित्व को चर्चा में ला दिया है। फिल्म हनुमान अंश के जरिए बाबा की कहानी बड़े पर्दे तक पहुंची है और अब उनके परिवार की यादें लोगों को उनके जीवन का एक अलग और निजी पहलू दिखा रही हैं।

  • हनुमान अंश फिल्म को लेकर खास चर्चा में MP के कलाकार सीएम मोहन यादव से मिले 8 वर्षीय सात्विक शर्मा सुनील लोधी को भी मिला सम्मान

    हनुमान अंश फिल्म को लेकर खास चर्चा में MP के कलाकार सीएम मोहन यादव से मिले 8 वर्षीय सात्विक शर्मा सुनील लोधी को भी मिला सम्मान


    भोपाल। मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से गुरुवार को फिल्म हनुमान अंश के बाल कलाकार मास्टरHanuman Ansh Movie, Mohan Yadav News, Neem Karoli Baba, Satvik Sharma, Sunil Lodhi सात्विक शर्मा ने मुख्यमंत्री निवास में सौजन्य भेंट की। महज 8 वर्ष की उम्र में फिल्म का हिस्सा बने सात्विक शर्मा की मुख्यमंत्री से मुलाकात को लेकर खासा उत्साह देखने को मिला। नीम करोली बाबा के जीवन और आध्यात्मिक संदेश से जुड़ी इस फिल्म में प्रदेश के कलाकारों की प्रतिभा को भी जगह दी गई है। इसी सिलसिले में मुख्यमंत्री ने फिल्म के बाल कलाकार से मुलाकात कर उनका उत्साह बढ़ाया।

    फिल्म हनुमान अंश में सागर जिले के दिव्यांग गायक सुनील लोधी की आवाज भी सुनाई देगी। सुनील लोधी ने फिल्म के लिए बुंदेली भजन गाया है। उनकी प्रतिभा की जानकारी जब मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव तक पहुंची तो उन्होंने सुनील लोधी को मुख्यमंत्री निवास बुलाया था। मुलाकात के दौरान मुख्यमंत्री ने उनकी प्रतिभा की सराहना करते हुए उन्हें एक लाख रुपए की सम्मान निधि देकर सम्मानित किया था।

    सुनील लोधी की कहानी भी काफी प्रेरणादायक है। दिव्यांग होने के बावजूद उन्होंने संगीत के क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बनाई है। बुंदेली भाषा में उनकी गायकी और भजनों ने लोगों का ध्यान खींचा है। मुख्यमंत्री ने उनकी प्रतिभा को प्रोत्साहित करने के साथ उनकी आंखों की रोशनी लौटाने के लिए उपचार में मदद का आश्वासन भी दिया था। अब उनकी आवाज फिल्म हनुमान अंश के माध्यम से दर्शकों तक पहुंचेगी।

    नीम करोली बाबा पर आधारित फिल्म हनुमान अंश को लेकर मध्यप्रदेश से जुड़े कलाकारों की भागीदारी इसे और खास बना रही है। फिल्म में सुनील लोधी का बुंदेली भजन क्षेत्रीय संस्कृति और भक्ति की भावना को सामने लाने का काम करेगा। वहीं फिल्म के बाल कलाकार मास्टर सात्विक शर्मा की मुख्यमंत्री से मुलाकात ने भी इस प्रोजेक्ट को लेकर उत्सुकता बढ़ाई है।

    मुख्यमंत्री निवास में हुई मुलाकात के दौरान सात्विक शर्मा ने फिल्म में अपने अनुभव और भूमिका को लेकर भी चर्चा की। कम उम्र में फिल्मी दुनिया में कदम रखने वाले सात्विक के लिए मुख्यमंत्री से मुलाकात एक यादगार अनुभव रही। मुख्यमंत्री ने बाल कलाकार का उत्साह बढ़ाया और फिल्म के लिए शुभकामनाएं दीं।

    फिल्म हनुमान अंश में आध्यात्मिकता भक्ति और नीम करोली बाबा से जुड़े प्रसंगों को केंद्र में रखा गया है। फिल्म में बुंदेली भजन का शामिल होना मध्यप्रदेश की लोक संस्कृति और स्थानीय प्रतिभाओं को मंच देने की दिशा में भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। खास तौर पर सागर के दिव्यांग गायक सुनील लोधी को फिल्म में अपनी आवाज देने का अवसर मिलना उनके लिए बड़ी उपलब्धि है।

    इस मुलाकात के बाद फिल्म से जुड़े कलाकारों और प्रदेश की प्रतिभाओं को लेकर चर्चा और बढ़ गई है। एक तरफ 8 वर्षीय बाल कलाकार सात्विक शर्मा फिल्म का हिस्सा बनकर अपनी पहचान बनाने की ओर बढ़ रहे हैं तो दूसरी तरफ सुनील लोधी अपनी आवाज के जरिए बुंदेली लोक संस्कृति को बड़े पर्दे तक पहुंचाने जा रहे हैं। मुख्यमंत्री मोहन यादव द्वारा दोनों कलाकारों से मुलाकात और प्रतिभाओं को प्रोत्साहन दिए जाने से फिल्म हनुमान अंश को लेकर दर्शकों की दिलचस्पी और बढ़ने की उम्मीद है।

  • हनुमान भक्ति, सादगी और रहस्यमयी किस्से… क्यों दुनिया भर में प्रसिद्ध हुए बाबा नीम करौली, जानिए उनकी पूरी कहानी

    हनुमान भक्ति, सादगी और रहस्यमयी किस्से… क्यों दुनिया भर में प्रसिद्ध हुए बाबा नीम करौली, जानिए उनकी पूरी कहानी


    नई दिल्ली । बाबा नीम करौली का नाम आज सिर्फ एक संत के रूप में नहीं बल्कि गहरी आस्था और आध्यात्मिक प्रेरणा के प्रतीक के तौर पर लिया जाता है। उत्तराखंड के कैंची धाम से लेकर देश विदेश तक उनके अनुयायियों की बड़ी संख्या है। कंबल ओढ़े रहने वाले बाबा को भक्त प्यार से महाराजजी कहकर बुलाते थे। उनकी सादगी हनुमान भक्ति और मानव सेवा से जुड़ी शिक्षाओं ने उन्हें दूसरे संतों से अलग पहचान दी। हाल के समय में फिल्म हनुमान अंश की चर्चा के बीच एक बार फिर बाबा नीम करौली के जीवन और उनकी आध्यात्मिक यात्रा को जानने में लोगों की दिलचस्पी बढ़ी है।

    बाबा नीम करौली का मूल नाम लक्ष्मी नारायण शर्मा बताया जाता है। उनका जन्म उत्तर प्रदेश के फिरोजाबाद जिले के टुंडला क्षेत्र के अकबरपुर गांव में एक ब्राह्मण परिवार में हुआ था। बाद में उनका संबंध फर्रुखाबाद जिले के नीब करोरी गांव से जुड़ा और इसी वजह से उन्हें बाबा नीब करोरी के नाम से जाना जाने लगा। समय के साथ नीब करोरी का प्रचलित रूप नीम करौली हो गया और आज दोनों नाम इसी संत के लिए इस्तेमाल किए जाते हैं। कहा जाता है कि उन्होंने नीब करोरी में गुफा के भीतर कठिन साधना की थी और बाद में उसी स्थान पर हनुमान मंदिर का निर्माण हुआ।

    बाबा के जीवन से जुड़ी ट्रेन वाली कहानी भी बेहद प्रसिद्ध है। भक्तों के बीच प्रचलित कथा के अनुसार बाबा बिना टिकट ट्रेन के फर्स्ट क्लास डिब्बे में यात्रा कर रहे थे। टिकट जांच के दौरान उन्हें नीब करोरी के पास ट्रेन से उतार दिया गया। बाबा पास ही एक नीम के पेड़ के नीचे जाकर बैठ गए। मान्यता है कि इसके बाद ट्रेन आगे नहीं बढ़ी। कई कोशिशों के बाद भी इंजन नहीं चला तो अधिकारियों और यात्रियों ने बाबा से क्षमा मांगी और उन्हें वापस ट्रेन में बैठाया गया। बाबा के ट्रेन में बैठने के बाद ट्रेन चल पड़ी। इस घटना को लेकर कई तरह की मान्यताएं हैं और इसे बाबा से जुड़े चमत्कारों में गिना जाता है।

    बाबा का बचपन और गृहस्थ जीवन भी उनकी कहानी का अहम हिस्सा है। बताया जाता है कि कम उम्र में ही उनका विवाह हुआ था और आध्यात्म के प्रति गहरा आकर्षण होने के कारण उन्होंने घर छोड़ दिया था। इसके बाद उन्होंने अलग अलग स्थानों पर साधना की। गुजरात के बावनिया गांव में तालाब के पास साधना करने के कारण उन्हें तलैया बाबा भी कहा गया। बाद में वे परिवार के पास लौटे और गृहस्थ जीवन की जिम्मेदारियां निभाईं। उनके दो बेटे और एक बेटी होने की जानकारी मिलती है।

    बाबा नीम करौली की सबसे बड़ी पहचान उनकी हनुमान भक्ति रही। उनके भक्त उन्हें हनुमान जी का अंश या अवतार तक मानते हैं। हालांकि यह आस्था और धार्मिक मान्यता का विषय है इसका कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। बाबा की शिक्षाओं में प्रेम सेवा सादगी और सभी को समान दृष्टि से देखने का भाव प्रमुख था। वे लोगों को ईश्वर का स्मरण करने दूसरों की सेवा करने और सत्य के रास्ते पर चलने की प्रेरणा देते थे। उनका संदेश सब एक यानी सभी में एक ही ईश्वर का अंश देखने की भावना से जुड़ा माना जाता है।

    बाबा से जुड़े अनेक चमत्कारिक किस्से भी भक्तों के बीच प्रचलित रहे हैं। उनके बारे में कहा जाता है कि वे लोगों की परेशानियों को बिना बताए समझ लेते थे और कई बार अलग अलग स्थानों पर एक साथ दिखाई देने जैसी घटनाओं का भी उल्लेख मिलता है। इन कथाओं की स्वतंत्र पुष्टि नहीं है लेकिन उनके अनुयायियों की आस्था में इनका विशेष स्थान है। अमीर हो या गरीब अलग धर्म का हो या अलग सामाजिक वर्ग का बाबा के पास आने वाले लोगों के साथ समान व्यवहार की बातें उनके संस्मरणों में मिलती हैं।

    यही वजह है कि बाबा नीम करौली की लोकप्रियता केवल भारत तक सीमित नहीं रही। कैंची धाम आज उनकी सबसे प्रसिद्ध पहचान बन चुका है जहां हर साल बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। उनकी सादगी हनुमान भक्ति और प्रेम सेवा का संदेश आज भी लोगों को आकर्षित करता है। बाबा का जीवन इस बात का उदाहरण माना जाता है कि किसी संत की पहचान केवल उसके चमत्कारों की कहानियों से नहीं बल्कि उसकी शिक्षाओं और लोगों के जीवन पर पड़े प्रभाव से भी बनती है।

  • न प्रमोशन न बड़ी स्टारकास्ट फिर भी बॉक्स ऑफिस पर छा गई ‘हनुमान अंश’! 2 करोड़ की फिल्म ने 27 करोड़ से ज्यादा कमाए

    न प्रमोशन न बड़ी स्टारकास्ट फिर भी बॉक्स ऑफिस पर छा गई ‘हनुमान अंश’! 2 करोड़ की फिल्म ने 27 करोड़ से ज्यादा कमाए


    नई दिल्ली। बॉक्स ऑफिस पर किसी फिल्म की किस्मत कब पलट जाए यह कहना मुश्किल होता है। हाल ही में रिलीज हुई हनुमान अंश इसकी सबसे दिलचस्प मिसाल बनकर सामने आई है। 7 अगस्त 2026 को सिनेमाघरों में रिलीज हुई यह फिल्म शुरुआत में दर्शकों और बॉक्स ऑफिस दोनों की नजरों से लगभग गायब रही। रिलीज से पहले फिल्म को लेकर कोई खास प्रमोशन या बड़ी चर्चा नहीं थी और पहले दिन भी इसकी कमाई महज 10 लाख रुपये रही। इसके बाद शुरुआती दो हफ्तों में फिल्म का प्रदर्शन इतना कमजोर रहा कि इसे फ्लॉप मानने की चर्चाएं शुरू हो गईं। पहले दो हफ्तों के बाद फिल्म की कुल कमाई सिर्फ 1.48 करोड़ रुपये तक पहुंच पाई थी।
    हालांकि इसके बाद कहानी ने ऐसा मोड़ लिया जिसकी शायद मेकर्स ने भी उम्मीद नहीं की होगी। तीसरे हफ्ते में फिल्म की कमाई अचानक तेज हो गई और दर्शकों का रुझान लगातार बढ़ता गया। रिपोर्ट के मुताबिक तीसरे हफ्ते में हनुमान अंश ने 10.40 करोड़ रुपये का कारोबार किया। इसके बाद चौथे हफ्ते में भी फिल्म की रफ्तार थमने के बजाय और बढ़ती दिखाई दी। शुक्रवार को फिल्म ने 6.25 करोड़ रुपये कमाए जबकि शनिवार को कलेक्शन बढ़कर 9.25 करोड़ रुपये तक पहुंच गया। इस तरह रिलीज के 23 दिनों में फिल्म का भारत में कुल बॉक्स ऑफिस कलेक्शन 27.38 करोड़ रुपये हो गया।

    सबसे खास बात यह है कि फिल्म को बेहद कम बजट में तैयार किया गया है। खबरों के मुताबिक हनुमान अंश को बनाने में करीब 2 करोड़ रुपये खर्च हुए हैं। ऐसे में 27 करोड़ रुपये से ज्यादा की कमाई फिल्म के निर्माताओं के लिए बड़ी कामयाबी मानी जा रही है। शुरुआती सुस्ती के बावजूद फिल्म का इस तरह तेजी से आगे बढ़ना बॉक्स ऑफिस पर दर्शकों की पसंद और मजबूत वर्ड ऑफ माउथ की अहमियत को भी दिखाता है।

    फिल्म की कहानी नीम करोली बाबा के जीवन से जुड़ी बताई जा रही है। नीम करोली बाबा का निधन सितंबर 1973 में हुआ था और उनके जीवन तथा आध्यात्मिक विचारों को लेकर देश और विदेश में भी काफी चर्चा रही है। फिल्म में महाराज जी का किरदार शोभिनाव सत्या ने निभाया है। इसके अलावा विहान शेज चंदन के आनंद पूर्णिमा तिवारी अनिल रास्तोगी गुलशन पांडे भगवानदास पटेल और राजीव मिश्रा समेत कई कलाकार नजर आ रहे हैं। फिल्म का निर्देशन विशाल चतुर्वेदी ने किया है।

    फिल्म की असाधारण कमाई को लेकर सोशल मीडिया पर भी चर्चा तेज है। कुछ पोस्ट में इसकी टिकट बिक्री की तुलना दूसरी बड़ी फिल्मों से की जा रही है। हालांकि इन सोशल मीडिया दावों को अलग से आधिकारिक आंकड़ों से परखना जरूरी है। फिलहाल इतना जरूर है कि जिस फिल्म को रिलीज के शुरुआती दिनों में कमजोर प्रदर्शन के कारण फ्लॉप माना जा रहा था वही अब कम बजट में बड़ी कमाई करने वाली फिल्मों की चर्चा में शामिल हो गई है। हनुमान अंश की यह बॉक्स ऑफिस यात्रा दिखाती है कि कभी कभी शुरुआती कमाई फिल्म का अंतिम परिणाम तय नहीं करती और दर्शकों का समर्थन मिलने पर एक छोटी फिल्म भी अचानक बड़ी सफलता हासिल कर सकती है।