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  • जंतर-मंतर प्रदर्शन के बाद CJP ने तेज किया अभियान, अभिजीत दीपके बोले- छात्रों के भविष्य के सवाल पर अब राज्यों तक पहुंचेगा आंदोलन

    जंतर-मंतर प्रदर्शन के बाद CJP ने तेज किया अभियान, अभिजीत दीपके बोले- छात्रों के भविष्य के सवाल पर अब राज्यों तक पहुंचेगा आंदोलन

    नई दिल्ली । केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर सक्रिय कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने अपने आंदोलन को राष्ट्रीय स्तर पर विस्तार देने की घोषणा की है। संगठन के संस्थापक अभिजीत दीपके ने कहा है कि यदि 13 जून 2026 तक शिक्षा मंत्री अपने पद से इस्तीफा नहीं देते हैं तो वह स्वयं विभिन्न राज्यों और शहरों में जाकर विरोध प्रदर्शन करेंगे। उनका कहना है कि परीक्षाओं और भर्ती प्रक्रियाओं में सामने आई कथित अनियमितताओं ने लाखों छात्रों के भविष्य को प्रभावित किया है और इस मुद्दे पर जवाबदेही तय होना आवश्यक है।

    छत्रपति संभाजीनगर में आयोजित संवाददाता सम्मेलन और बाद में जारी एक वीडियो संदेश में दीपके ने कहा कि उनका आंदोलन पूरी तरह शांतिपूर्ण रहेगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि संगठन का उद्देश्य किसी प्रकार की अराजकता फैलाना नहीं बल्कि छात्रों और युवाओं की चिंताओं को लोकतांत्रिक तरीके से सामने लाना है। उन्होंने कहा कि यदि निर्धारित समय सीमा तक सरकार की ओर से कोई कदम नहीं उठाया जाता तो आंदोलन का अगला चरण देश के अलग-अलग हिस्सों में शुरू किया जाएगा।

    दीपके ने बताया कि हाल ही में राष्ट्रीय राजधानी के जंतर-मंतर पर आयोजित प्रदर्शन को व्यापक समर्थन मिला था। देश के विभिन्न राज्यों से बड़ी संख्या में छात्र और युवा इस कार्यक्रम में शामिल हुए थे। उनके अनुसार यह प्रदर्शन शांतिपूर्ण और व्यवस्थित रहा, जिसने युवाओं की नाराजगी और उनकी अपेक्षाओं को स्पष्ट रूप से सामने रखा। उन्होंने कहा कि आने वाले कार्यक्रम भी इसी प्रकार लोकतांत्रिक और अहिंसक तरीके से आयोजित किए जाएंगे।

    नेपाल और बांग्लादेश में हाल के वर्षों में युवाओं द्वारा किए गए आंदोलनों के संदर्भ में पूछे गए सवाल पर दीपके ने कहा कि भारत की परिस्थितियां अलग हैं और यहां के आंदोलन की तुलना पड़ोसी देशों की घटनाओं से नहीं की जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि कुछ लोग उनके अभियान को गलत तरीके से प्रस्तुत करने की कोशिश कर रहे हैं, जबकि वास्तविकता यह है कि उनका संगठन संवैधानिक और शांतिपूर्ण माध्यमों से अपनी मांगें रख रहा है। उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत में लोकतांत्रिक व्यवस्था मौजूद है और उसी व्यवस्था के भीतर रहकर आंदोलन संचालित किया जाएगा।

    CJP प्रमुख ने यह भी कहा कि यदि राज्यों में प्रस्तावित प्रदर्शन के बाद भी उनकी मांगों पर विचार नहीं किया जाता तो देशभर के छात्रों को एकजुट कर पुनः नई दिल्ली में बड़ा आंदोलन आयोजित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि संगठन शिक्षा और भर्ती प्रक्रियाओं में पारदर्शिता सुनिश्चित करने की मांग कर रहा है और जब तक इस दिशा में ठोस कार्रवाई नहीं होती, तब तक अभियान जारी रहेगा।

    मई महीने में एक ऑनलाइन पहल के रूप में शुरू हुआ CJP अभियान कम समय में युवाओं के बीच चर्चा का विषय बन गया है। सोशल मीडिया पर संगठन को व्यापक समर्थन मिला है और इसके डिजिटल प्लेटफॉर्म से बड़ी संख्या में लोग जुड़े हैं। इसी आधार पर संगठन ने हाल के दिनों में जमीनी स्तर पर भी अपनी सक्रियता बढ़ाई है।

    दीपके ने कहा कि यह आंदोलन किसी राजनीतिक दल से जुड़ा नहीं है और इसका केंद्र केवल छात्रों तथा युवाओं से जुड़े मुद्दे हैं। उन्होंने दोहराया कि शिक्षा व्यवस्था में विश्वास बहाल करने और कथित अनियमितताओं पर जवाबदेही तय करने की मांग को लेकर उनका अभियान आगे भी जारी रहेगा।

  • NEET-UG 2026 री-एग्जाम के लिए अभूतपूर्व सुरक्षा कवच, पेपर लीक रोकने को विशेषज्ञों का लॉकडाउन और डिजिटल निगरानी सख्त

    NEET-UG 2026 री-एग्जाम के लिए अभूतपूर्व सुरक्षा कवच, पेपर लीक रोकने को विशेषज्ञों का लॉकडाउन और डिजिटल निगरानी सख्त


    नई दिल्ली ।
    NEET-UG 2026 की दोबारा परीक्षा को लेकर राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी और शिक्षा मंत्रालय इस बार किसी भी प्रकार की चूक से बचने के लिए व्यापक सुरक्षा व्यवस्था लागू कर रहे हैं। पिछले वर्ष सामने आए पेपर लीक विवाद के बाद परीक्षा प्रक्रिया की विश्वसनीयता बनाए रखना सबसे बड़ी प्राथमिकता बन गया है। इसी को ध्यान में रखते हुए प्रश्नपत्र निर्माण से लेकर परीक्षा केंद्रों तक उसकी सुरक्षित पहुंच सुनिश्चित करने के लिए बहुस्तरीय सुरक्षा तंत्र तैयार किया गया है।

    21 जून को आयोजित होने वाली परीक्षा के लिए प्रश्नपत्र तैयार करने, उसकी समीक्षा करने और विभिन्न भाषाओं में अनुवाद करने वाले विशेषज्ञों को विशेष सुरक्षित परिसरों में रखा गया है। इन परिसरों में उनकी गतिविधियों और संचार पर कड़ी निगरानी रखी जा रही है। परीक्षा प्रक्रिया पूरी होने तक उन्हें बाहरी दुनिया से सीमित संपर्क की ही अनुमति होगी। अधिकारियों का मानना है कि इस व्यवस्था से गोपनीय सूचनाओं के बाहर जाने की संभावना को काफी हद तक रोका जा सकेगा।

    परीक्षा सुरक्षा के तहत इस बार डिजिटल नियंत्रण को भी विशेष महत्व दिया गया है। सुरक्षित परिसरों में मौजूद अधिकारियों और विशेषज्ञों के लिए मोबाइल फोन, लैपटॉप, टैबलेट, स्मार्टवॉच तथा अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के उपयोग पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाया गया है। इंटरनेट पहुंच भी नियंत्रित रखी गई है ताकि किसी भी स्तर पर प्रश्नपत्र से जुड़ी जानकारी साझा न हो सके। परिसर में प्रवेश करने वाले प्रत्येक व्यक्ति की विस्तृत जांच की जा रही है और उसकी गतिविधियों का रिकॉर्ड भी रखा जा रहा है।

    सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत बनाने के लिए पूरी परीक्षा प्रक्रिया को अलग-अलग चरणों में विभाजित किया गया है। प्रश्नपत्र निर्माण, मॉडरेशन, छपाई, पैकेजिंग, भंडारण और वितरण जैसी जिम्मेदारियों को स्वतंत्र इकाइयों में बांटा गया है। इस व्यवस्था का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी एक व्यक्ति या समूह के पास पूरी प्रक्रिया की जानकारी उपलब्ध न हो। इससे गोपनीय सूचनाओं के दुरुपयोग की आशंका कम होने की उम्मीद है।

    सूत्रों के अनुसार, प्रश्नपत्रों को परीक्षा केंद्रों तक सुरक्षित पहुंचाने के लिए विशेष परिवहन व्यवस्था पर भी विचार किया जा रहा है। इसके तहत वायुसेना के विमानों की सहायता लेने की संभावना पर चर्चा की जा रही है। यदि यह योजना लागू होती है तो प्रश्नपत्रों को निर्धारित स्थानों तक अधिक सुरक्षित और समयबद्ध तरीके से पहुंचाया जा सकेगा। इससे परिवहन के दौरान संभावित सुरक्षा जोखिमों को भी कम किया जा सकेगा।

    परीक्षा से पहले और परीक्षा के दिन डिजिटल प्लेटफॉर्म पर भी विशेष निगरानी रखी जाएगी। सोशल मीडिया, मैसेजिंग एप्स और विभिन्न ऑनलाइन मंचों पर चौबीसों घंटे नजर रखने के लिए विशेष टीमें तैनात की गई हैं। इनका उद्देश्य फर्जी प्रश्नपत्र, भ्रामक दावों और अफवाहों की पहचान कर उन्हें समय रहते रोकना है। अधिकारियों का कहना है कि छात्रों को भ्रमित करने या परीक्षा प्रक्रिया को प्रभावित करने वाले किसी भी प्रयास पर तत्काल कार्रवाई की जाएगी।

    शिक्षा मंत्रालय ने सभी संबंधित एजेंसियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि पिछली बार सामने आई कमियों को दोहराने की कोई गुंजाइश नहीं होनी चाहिए। इसी कारण हर स्तर पर अतिरिक्त निगरानी और जवाबदेही तय की गई है। अधिकारियों का मानना है कि पारदर्शी और सुरक्षित परीक्षा प्रक्रिया से अभ्यर्थियों का विश्वास मजबूत होगा और देश की सबसे महत्वपूर्ण मेडिकल प्रवेश परीक्षा की साख भी बरकरार रहेगी।

    21 जून को आयोजित होने वाली यह परीक्षा दोपहर 2 बजे से शाम 5:15 बजे तक ऑफलाइन मोड में होगी। इसके लिए भारत के सैकड़ों शहरों के साथ विदेशों में भी परीक्षा केंद्र बनाए गए हैं। लाखों अभ्यर्थियों की नजर इस परीक्षा पर टिकी हुई है और ऐसे में प्रशासन का पूरा फोकस निष्पक्ष, सुरक्षित और भरोसेमंद परीक्षा आयोजन सुनिश्चित करने पर है।

  • INDIA गठबंधन में बढ़ती दरारों पर भाजपा का हमला, शहजाद पूनावाला बोले- न साझा विजन बचा, न किसी मिशन पर सहमति

    INDIA गठबंधन में बढ़ती दरारों पर भाजपा का हमला, शहजाद पूनावाला बोले- न साझा विजन बचा, न किसी मिशन पर सहमति

    नई दिल्ली । विपक्षी दलों के गठबंधन INDIA को लेकर राजनीतिक बयानबाजी एक बार फिर तेज हो गई है। भारतीय जनता पार्टी ने गठबंधन की हालिया गतिविधियों और उसके घटक दलों के बीच उभर रहे मतभेदों को मुद्दा बनाते हुए कांग्रेस समेत विपक्षी दलों पर निशाना साधा है। भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने दावा किया कि गठबंधन अपने मूल उद्देश्य और राजनीतिक दिशा से भटक चुका है तथा अब उसके पास न तो कोई स्पष्ट विजन बचा है और न ही साझा मिशन।

    पूनावाला ने कहा कि INDIA गठबंधन का गठन केंद्र सरकार के खिलाफ साझा राजनीतिक रणनीति तैयार करने के उद्देश्य से किया गया था, लेकिन समय के साथ इसमें शामिल दलों के बीच मतभेद बढ़ते चले गए। उनके अनुसार गठबंधन के भीतर नेतृत्व, राजनीतिक प्राथमिकताओं और क्षेत्रीय हितों को लेकर एकरूपता का अभाव दिखाई दे रहा है। यही कारण है कि कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर विपक्षी दल एक मंच पर एकजुट नजर नहीं आते।

    उन्होंने आरोप लगाया कि गठबंधन के कई सहयोगी दल कांग्रेस की कार्यशैली और राजनीतिक दृष्टिकोण से संतुष्ट नहीं हैं। भाजपा प्रवक्ता का कहना था कि क्षेत्रीय दलों को लगने लगा है कि उनकी राजनीतिक चिंताओं और हितों को पर्याप्त महत्व नहीं दिया जा रहा है। इसी वजह से सहयोगी दलों के बीच विश्वास का स्तर कमजोर हुआ है और इसका असर सार्वजनिक रूप से भी दिखाई देने लगा है।

    पूनावाला ने हाल ही में आयोजित विपक्षी बैठकों का उल्लेख करते हुए कहा कि कुछ प्रमुख सहयोगी दलों की दूरी गठबंधन के भीतर मौजूद असंतोष का संकेत है। उन्होंने विशेष रूप से तमिलनाडु की राजनीति का जिक्र करते हुए कहा कि कुछ घटनाक्रम यह दर्शाते हैं कि सभी दल गठबंधन की दिशा और नेतृत्व को लेकर समान सोच नहीं रखते। भाजपा का दावा है कि ऐसे संकेत विपक्षी एकता की वास्तविक स्थिति को सामने लाते हैं।

    भाजपा प्रवक्ता ने आम आदमी पार्टी और कांग्रेस के संबंधों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि दोनों दलों के बीच लंबे समय से राजनीतिक मतभेद सार्वजनिक रूप से सामने आते रहे हैं। विभिन्न राज्यों में दोनों दलों के बीच प्रतिस्पर्धा और आरोप-प्रत्यारोप की राजनीति गठबंधन की मजबूती पर सवाल खड़े करती है। उनके अनुसार यदि गठबंधन के प्रमुख सहयोगी दल ही एक-दूसरे के प्रति भरोसा नहीं जता पा रहे हैं तो राष्ट्रीय स्तर पर साझा राजनीतिक एजेंडा तैयार करना कठिन हो जाता है।

    पूनावाला ने यह भी कहा कि विपक्षी दल जनता से जुड़े मुद्दों पर एकजुट होकर काम करने के बजाय अक्सर आंतरिक मतभेदों में उलझे दिखाई देते हैं। उनका आरोप था कि गठबंधन के भीतर नीति और नेतृत्व दोनों स्तरों पर स्पष्टता की कमी है। भाजपा का मानना है कि ऐसी परिस्थितियों में विपक्ष के लिए एक मजबूत और प्रभावी वैकल्पिक राजनीतिक मंच प्रस्तुत करना चुनौतीपूर्ण होगा।

    वहीं विपक्षी दल लगातार यह दावा करते रहे हैं कि INDIA गठबंधन लोकतांत्रिक मूल्यों, संवैधानिक संस्थाओं की मजबूती और जनहित के मुद्दों पर मिलकर काम करने के लिए प्रतिबद्ध है। हालांकि राजनीतिक बयानबाजी के बीच गठबंधन की एकजुटता और भविष्य की रणनीति को लेकर चर्चाएं लगातार जारी हैं। आने वाले समय में विभिन्न दलों के बीच तालमेल और राजनीतिक समन्वय किस दिशा में आगे बढ़ता है, इस पर राष्ट्रीय राजनीति की नजर बनी रहेगी।

  • कांग्रेस और राहुल गांधी पर पोस्टरों के जरिए निशाना, इंडिया गठबंधन की बैठक से पहले राजधानी में तेज हुई राजनीतिक बयानबाजी

    कांग्रेस और राहुल गांधी पर पोस्टरों के जरिए निशाना, इंडिया गठबंधन की बैठक से पहले राजधानी में तेज हुई राजनीतिक बयानबाजी

    नई दिल्ली । विपक्षी दलों के इंडिया ब्लॉक की महत्वपूर्ण बैठक से ठीक पहले राष्ट्रीय राजधानी में सामने आई पोस्टर राजनीति ने सियासी माहौल को गर्म कर दिया है। सोमवार को प्रस्तावित बैठक से पहले दिल्ली के कई प्रमुख इलाकों में कांग्रेस पार्टी और उसके वरिष्ठ नेता राहुल गांधी के खिलाफ लगाए गए पोस्टरों ने विपक्षी गठबंधन की एकजुटता को लेकर नई बहस छेड़ दी है।

    राजधानी के विभिन्न रणनीतिक और व्यस्त स्थानों पर लगाए गए इन पोस्टरों में इंडिया ब्लॉक के घटक दलों के कई प्रमुख नेताओं के पुराने बयानों को प्रमुखता से प्रदर्शित किया गया है। इन बयानों के माध्यम से कांग्रेस की राजनीतिक विश्वसनीयता और विपक्षी गठबंधन के भीतर आपसी संबंधों पर सवाल उठाने का प्रयास किया गया है। पोस्टरों के सामने आने के बाद राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज हो गई है कि महत्वपूर्ण बैठक से पहले इस तरह की गतिविधियों का क्या राजनीतिक संदेश है।

    दिल्ली के अशोका रोड गोलचक्कर, रेल भवन गोलचक्कर, ली मेरिडियन क्षेत्र सहित कई महत्वपूर्ण स्थानों पर लगे पोस्टरों में विभिन्न क्षेत्रीय दलों के नेताओं के कथित पुराने बयान उद्धृत किए गए हैं। इनमें कांग्रेस नेतृत्व की कार्यशैली, गठबंधन राजनीति और विपक्षी दलों के बीच तालमेल को लेकर पूर्व में दिए गए विचारों का उल्लेख किया गया है। पोस्टरों का केंद्रीय संदेश यह दर्शाने का प्रयास करता है कि विपक्षी दलों के बीच विचारों की समानता और राजनीतिक विश्वास को लेकर चुनौतियां मौजूद हैं।

    पोस्टरों में तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल, केरल, महाराष्ट्र और दिल्ली की राजनीति से जुड़े प्रमुख नेताओं के बयानों को शामिल किया गया है। इन उद्धरणों के माध्यम से यह दिखाने की कोशिश की गई है कि अलग-अलग समय पर गठबंधन के सहयोगी दलों ने कांग्रेस और उसके नेतृत्व को लेकर आलोचनात्मक टिप्पणियां की थीं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ऐसे पोस्टरों का उद्देश्य विपक्षी दलों के बीच मतभेदों को सार्वजनिक विमर्श का हिस्सा बनाना हो सकता है।

    इंडिया ब्लॉक की बैठक ऐसे समय हो रही है जब विपक्ष आगामी राजनीतिक चुनौतियों और चुनावी रणनीतियों पर विचार-विमर्श करने की तैयारी में है। इस बैठक को विपक्षी एकता के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि विभिन्न दल राष्ट्रीय स्तर पर साझा मुद्दों और समन्वय को लेकर चर्चा करने वाले हैं। ऐसे समय में राजधानी में लगे पोस्टरों ने राजनीतिक चर्चा का नया विषय पैदा कर दिया है।

    हालांकि अभी तक यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि इन पोस्टरों को किस संगठन, समूह या राजनीतिक इकाई द्वारा लगाया गया है। पोस्टरों पर किसी जिम्मेदार व्यक्ति या संगठन का स्पष्ट उल्लेख सामने नहीं आया है। इसके कारण राजनीतिक हलकों में कई तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं, लेकिन आधिकारिक तौर पर किसी पक्ष ने इसकी जिम्मेदारी नहीं ली है।

    इस पूरे घटनाक्रम पर कांग्रेस की ओर से भी सतर्क प्रतिक्रिया देखने को मिली है। पार्टी नेताओं ने पोस्टरों को लेकर तत्काल कोई विस्तृत टिप्पणी करने से परहेज किया है। उनका कहना है कि पहले पूरे मामले की जानकारी प्राप्त करना आवश्यक है, जिसके बाद ही कोई औपचारिक प्रतिक्रिया दी जाएगी।

    राजनीतिक दृष्टि से देखा जाए तो यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब विपक्षी दल अपनी एकजुटता और साझा रणनीति का संदेश देने की कोशिश कर रहे हैं। वहीं दूसरी ओर पोस्टर विवाद ने यह संकेत दिया है कि गठबंधन राजनीति में पुराने मतभेद और राजनीतिक बयान आज भी चर्चा का विषय बन सकते हैं। अब सभी की नजरें इंडिया ब्लॉक की बैठक और उससे निकलने वाले राजनीतिक संदेश पर टिकी हुई हैं।

  • NFHS डेटा पर बढ़ा सियासी घमासान, नड्डा बोले- अधूरी जानकारी से नहीं, तथ्यों से होता है देश का भला

    NFHS डेटा पर बढ़ा सियासी घमासान, नड्डा बोले- अधूरी जानकारी से नहीं, तथ्यों से होता है देश का भला

    नई दिल्ली । राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (एनएफएचएस) के आंकड़ों को लेकर केंद्र सरकार और कांग्रेस के बीच राजनीतिक बहस तेज हो गई है। स्वास्थ्य क्षेत्र की उपलब्धियों और चुनौतियों को लेकर दोनों दलों ने एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगाए हैं। इस विवाद का केंद्र स्वास्थ्य संबंधी आंकड़ों की व्याख्या और उनके सार्वजनिक प्रस्तुतीकरण को लेकर उठे सवाल हैं।

    कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने हाल ही में सोशल मीडिया के माध्यम से केंद्र सरकार पर महिलाओं और बच्चों से जुड़े स्वास्थ्य तथा पोषण संबंधी आंकड़ों को सार्वजनिक न करने का आरोप लगाया। उन्होंने दावा किया कि संबंधित आंकड़े सरकार की नीतिगत विफलताओं को उजागर करते हैं और इसी कारण उन्हें सार्वजनिक रूप से सामने नहीं लाया जा रहा है। उनके बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में इस मुद्दे पर व्यापक चर्चा शुरू हो गई।

    खरगे के आरोपों के जवाब में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने कड़ा प्रतिवाद किया। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक स्वास्थ्य जैसे महत्वपूर्ण विषयों को केवल राजनीतिक बयानबाजी तक सीमित नहीं किया जाना चाहिए। नड्डा ने कहा कि अधूरी जानकारी या चुनिंदा तथ्यों के आधार पर निष्कर्ष निकालना उचित नहीं है और इससे वास्तविक स्थिति की सही तस्वीर सामने नहीं आती।

    स्वास्थ्य मंत्री ने अपने जवाब में राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण के विभिन्न आंकड़ों का उल्लेख करते हुए दावा किया कि पिछले वर्षों में देश के स्वास्थ्य ढांचे में उल्लेखनीय सुधार दर्ज किए गए हैं। उनके अनुसार मातृ स्वास्थ्य सेवाओं, संस्थागत प्रसव और प्रशिक्षित स्वास्थ्य कर्मियों की निगरानी में होने वाले प्रसव के मामलों में महत्वपूर्ण वृद्धि हुई है। उन्होंने इसे स्वास्थ्य क्षेत्र में हुए व्यापक बदलावों और सरकारी प्रयासों का परिणाम बताया।

    नड्डा ने कहा कि गर्भावस्था के शुरुआती चरण में पंजीकरण कराने वाली महिलाओं की संख्या में वृद्धि हुई है, जबकि अस्पतालों और स्वास्थ्य संस्थानों में होने वाले प्रसव का प्रतिशत भी काफी बढ़ा है। उनके अनुसार इन बदलावों ने मातृ और शिशु मृत्यु दर को कम करने तथा स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता को बेहतर बनाने में योगदान दिया है।

    केंद्रीय मंत्री ने यह भी कहा कि स्वास्थ्य क्षेत्र में हुए सुधारों का मूल्यांकन व्यापक आंकड़ों और दीर्घकालिक परिणामों के आधार पर किया जाना चाहिए। उनका कहना था कि देश की स्वास्थ्य यात्रा की वास्तविक कहानी प्रगति और सुधार की है, न कि केवल कमियों और चुनौतियों की। उन्होंने सरकार द्वारा स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार, टीकाकरण कार्यक्रमों और चिकित्सा सुविधाओं की पहुंच बढ़ाने के प्रयासों का भी उल्लेख किया।

    दूसरी ओर कांग्रेस का आरोप है कि स्वास्थ्य और पोषण से जुड़े कुछ महत्वपूर्ण संकेतकों में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ है और सरकार इन पहलुओं पर पर्याप्त पारदर्शिता नहीं बरत रही है। पार्टी का कहना है कि जनता को स्वास्थ्य संबंधी सभी आंकड़ों तक पूरी पहुंच मिलनी चाहिए ताकि नीतियों का वस्तुनिष्ठ मूल्यांकन किया जा सके।

    विशेषज्ञों का मानना है कि स्वास्थ्य संबंधी आंकड़े किसी भी देश की सामाजिक और आर्थिक प्रगति को मापने का महत्वपूर्ण आधार होते हैं। ऐसे में इन आंकड़ों की व्याख्या और प्रस्तुति को लेकर राजनीतिक दलों के बीच मतभेद होना स्वाभाविक है। हालांकि सार्वजनिक स्वास्थ्य से जुड़े विषयों पर तथ्यात्मक और संतुलित चर्चा को अधिक महत्वपूर्ण माना जाता है।

    फिलहाल एनएफएचएस के आंकड़ों को लेकर शुरू हुई यह बहस राजनीतिक स्तर पर जारी है। आने वाले समय में इस मुद्दे पर सरकार और विपक्ष के बीच और अधिक प्रतिक्रियाएं देखने को मिल सकती हैं, क्योंकि स्वास्थ्य और पोषण से जुड़े विषय सीधे तौर पर करोड़ों नागरिकों के जीवन से जुड़े हुए हैं।

  • वैश्विक संकटों के बीच आर्थिक मोर्चे पर सक्रिय सरकार, पीएम मोदी ने सलाहकार परिषद संग बनाई नई रणनीति

    वैश्विक संकटों के बीच आर्थिक मोर्चे पर सक्रिय सरकार, पीएम मोदी ने सलाहकार परिषद संग बनाई नई रणनीति


    नई दिल्ली ।
    वैश्विक स्तर पर बढ़ती भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं और आर्थिक चुनौतियों के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद के साथ महत्वपूर्ण बैठक की। इस बैठक में देश की आर्थिक प्रगति को गति देने, विकास दर को स्थिर बनाए रखने और अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों से उत्पन्न संभावित चुनौतियों का प्रभावी ढंग से सामना करने की रणनीतियों पर व्यापक चर्चा की गई। आर्थिक विशेषज्ञों और नीति निर्माताओं के साथ हुए इस विचार-विमर्श का केंद्र भारत की दीर्घकालिक आर्थिक मजबूती और विकास की निरंतरता सुनिश्चित करना रहा।

    बैठक ऐसे समय में आयोजित हुई जब दुनिया की कई प्रमुख अर्थव्यवस्थाएं कमजोर मांग, आपूर्ति शृंखला में बाधाओं, क्षेत्रीय संघर्षों और बढ़ती आर्थिक अनिश्चितताओं जैसी चुनौतियों का सामना कर रही हैं। इन परिस्थितियों के बावजूद भारत लगातार मजबूत आर्थिक प्रदर्शन दर्ज कर रहा है और दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में अपनी स्थिति बनाए हुए है। इसी पृष्ठभूमि में बैठक के दौरान आर्थिक गतिविधियों को और अधिक प्रोत्साहित करने के उपायों पर विशेष जोर दिया गया।

    चर्चा के दौरान व्यापक आर्थिक स्थिरता बनाए रखने के लिए आवश्यक नीतिगत कदमों की समीक्षा की गई। विशेषज्ञों ने विकास दर को मजबूत बनाए रखने, निवेश आकर्षित करने और उत्पादक क्षेत्रों को प्रोत्साहन देने से जुड़े विभिन्न सुझाव प्रस्तुत किए। प्रधानमंत्री ने भी बदलते वैश्विक आर्थिक परिदृश्य में भारत की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता को और मजबूत बनाने की आवश्यकता पर बल दिया।

    बैठक में शासन व्यवस्था को अधिक प्रभावी और नागरिक केंद्रित बनाने के प्रयासों पर भी चर्चा हुई। लोगों के दैनिक जीवन को सरल बनाने और कारोबार के लिए अनुकूल वातावरण तैयार करने से जुड़े सुधारों की समीक्षा की गई। अनुपालन संबंधी प्रक्रियाओं को आसान बनाने, प्रशासनिक दक्षता बढ़ाने और उद्यमिता को प्रोत्साहित करने के उपायों पर भी विचार किया गया। सरकार का मानना है कि बेहतर कारोबारी माहौल आर्थिक गतिविधियों को गति देने और रोजगार सृजन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

    विचार-विमर्श का एक महत्वपूर्ण हिस्सा पश्चिम एशिया में जारी तनाव और उसके वैश्विक अर्थव्यवस्था पर संभावित प्रभावों को लेकर रहा। विशेषज्ञों ने ऊर्जा बाजारों, अंतरराष्ट्रीय व्यापार मार्गों और वैश्विक वित्तीय स्थिरता पर पड़ने वाले असर का आकलन प्रस्तुत किया। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है, इसलिए क्षेत्रीय अस्थिरता का असर ऊर्जा कीमतों और व्यापारिक लागतों पर पड़ सकता है। इसी कारण सरकार स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है।

    बैठक में इस बात पर भी चर्चा हुई कि वैश्विक संकटों के बावजूद भारत की आर्थिक बुनियाद अपेक्षाकृत मजबूत बनी हुई है। कृषि, निर्माण और सेवा क्षेत्रों के बेहतर प्रदर्शन ने आर्थिक वृद्धि को समर्थन दिया है। हाल के आर्थिक संकेतक भी यह दर्शाते हैं कि घरेलू मांग और निवेश गतिविधियां अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान कर रही हैं। विशेषज्ञों ने माना कि संरचनात्मक सुधारों और बुनियादी ढांचे में निवेश के कारण भारत की विकास संभावनाएं अन्य कई देशों की तुलना में अधिक सकारात्मक बनी हुई हैं।

    प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद देश के प्रमुख अर्थशास्त्रियों और नीति विशेषज्ञों का समूह है, जो सरकार को आर्थिक और विकास संबंधी विषयों पर स्वतंत्र सुझाव प्रदान करता है। बैठक में भविष्य की विकास प्राथमिकताओं, वैश्विक आर्थिक रुझानों और बदलती चुनौतियों के अनुरूप नीतिगत तैयारियों पर भी विस्तार से चर्चा की गई।

    बढ़ती वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच आयोजित यह बैठक इस बात का संकेत है कि सरकार आर्थिक स्थिरता, विकास और निवेश को लेकर सतर्क दृष्टिकोण अपनाए हुए है। आने वाले समय में वैश्विक परिस्थितियों के अनुरूप नीतिगत निर्णयों के माध्यम से भारत की आर्थिक गति को बनाए रखने पर विशेष ध्यान केंद्रित किया जाएगा।

  • आयुष्मान भारत वय वंदना योजना से 1.20 करोड़ वरिष्ठ नागरिक जुड़े, 13.84 लाख उपचारों पर 3,000 करोड़ रुपये खर्च

    आयुष्मान भारत वय वंदना योजना से 1.20 करोड़ वरिष्ठ नागरिक जुड़े, 13.84 लाख उपचारों पर 3,000 करोड़ रुपये खर्च


    नई दिल्ली ।
    देश में स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच और कवरेज बढ़ाने के उद्देश्य से संचालित विभिन्न सरकारी योजनाओं के प्रभाव को लेकर जारी ताजा आंकड़ों में वरिष्ठ नागरिकों, गर्भवती महिलाओं, बच्चों और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों तक स्वास्थ्य सुविधाओं के व्यापक विस्तार का दावा किया गया है। सरकार के अनुसार आयुष्मान भारत वय वंदना योजना के तहत अब तक 1.20 करोड़ से अधिक वरिष्ठ नागरिकों का पंजीकरण किया जा चुका है, जबकि इस योजना के अंतर्गत 13.84 लाख से अधिक उपचार किए गए हैं। इन उपचारों पर लगभग 3,000 करोड़ रुपये की लागत आई है।

    सरकार का कहना है कि वरिष्ठ नागरिकों के लिए शुरू की गई इस पहल का उद्देश्य बढ़ती उम्र के साथ उत्पन्न होने वाली स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों का समाधान करना और गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा सेवाओं तक उनकी पहुंच सुनिश्चित करना है। योजना के माध्यम से लाखों बुजुर्गों को अस्पतालों में उपचार और स्वास्थ्य सुरक्षा का लाभ मिला है।

    स्वास्थ्य क्षेत्र में चलाए जा रहे टीकाकरण अभियानों को लेकर भी महत्वपूर्ण उपलब्धियां सामने आई हैं। मिशन इंद्रधनुष के तहत उन बच्चों और गर्भवती महिलाओं तक टीकाकरण सेवाएं पहुंचाई गईं, जो पहले नियमित टीकाकरण से वंचित रह गए थे। अभियान के अंतर्गत 5.46 करोड़ बच्चों और 1.32 करोड़ गर्भवती महिलाओं का टीकाकरण किया गया। इससे देश में पूर्ण टीकाकरण कवरेज को मजबूत करने में मदद मिली है।

    सरकार के अनुसार बिना किसी टीके वाले बच्चों की संख्या में भी उल्लेखनीय कमी दर्ज की गई है। वर्ष 2023 में ऐसे बच्चों की हिस्सेदारी कुल आबादी का 0.11 प्रतिशत थी, जो वर्ष 2024 में घटकर 0.06 प्रतिशत रह गई। इसे सार्वजनिक स्वास्थ्य क्षेत्र में सकारात्मक प्रगति का संकेत माना जा रहा है।

    सार्वभौमिक टीकाकरण कार्यक्रम के तहत प्रत्येक वर्ष करोड़ों नवजात शिशुओं और गर्भवती महिलाओं को विभिन्न संक्रामक बीमारियों से बचाव के लिए निःशुल्क टीके उपलब्ध कराए जा रहे हैं। सरकार का कहना है कि इस कार्यक्रम ने देश में मातृ और शिशु स्वास्थ्य संकेतकों को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।

    स्वास्थ्य सुरक्षा के क्षेत्र में आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना भी प्रमुख भूमिका निभा रही है। योजना के तहत आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को प्रति वर्ष पांच लाख रुपये तक का स्वास्थ्य बीमा कवर प्रदान किया जाता है। सरकार के अनुसार अब तक 44.14 करोड़ आयुष्मान कार्ड जारी किए जा चुके हैं और 12.03 करोड़ अस्पताल भर्ती मामलों का लाभार्थियों को फायदा मिला है। इन उपचारों का कुल मूल्य लगभग 1.80 लाख करोड़ रुपये से अधिक बताया गया है।

    देशभर में स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता बढ़ाने के लिए अस्पताल नेटवर्क का भी विस्तार किया गया है। वर्तमान में 36 हजार से अधिक अस्पताल इस योजना से जुड़े हुए हैं, जिनमें सरकारी और निजी दोनों संस्थान शामिल हैं। इससे लाभार्थियों को अपने क्षेत्र के निकट उपचार सुविधाएं प्राप्त करने में सहायता मिली है।

    सरकार ने यह भी बताया कि 18 हजार से अधिक जन औषधि केंद्रों के माध्यम से सस्ती जेनेरिक दवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। इसके अलावा टेलीमेडिसिन सेवाओं का दायरा तेजी से बढ़ा है और अब तक 47 करोड़ से अधिक डिजिटल परामर्श सेवाएं प्रदान की जा चुकी हैं। स्वास्थ्य शिक्षा और चिकित्सा अवसंरचना को मजबूत करने के लिए मेडिकल कॉलेजों, एम्स संस्थानों तथा डॉक्टरों और नर्सों के प्रशिक्षण की क्षमता में भी उल्लेखनीय वृद्धि की गई है। सरकार का दावा है कि इन पहलों के माध्यम से देश में स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक सुलभ, किफायती और व्यापक बनाया जा रहा है।

  • भोपाल से प्रमुख शहरों के लिए रेल किराए में वृद्धि, यात्रियों की जेब होगी हल्की

    भोपाल से प्रमुख शहरों के लिए रेल किराए में वृद्धि, यात्रियों की जेब होगी हल्की


    भोपाल । भारतीय रेलवे ने यात्रियों के लिए रेल किराए में वृद्धि का ऐलान किया है जिसका असर भोपाल से देश के प्रमुख शहरों की यात्रा पर पड़ेगा। यह वृद्धि 2 पैसे प्रति किलोमीटर के हिसाब से की गई है और इसमें 5 प्रतिशत जीएसटी और राउंड-ऑफ का असर भी देखा जाएगा। इस बदलाव के चलते यात्रियों को अब पहले से अधिक किराया चुकाना पड़ेगा।
    यदि आप भोपाल से नई दिल्ली की यात्रा करते हैं तो आपको लगभग 15 रुपये अतिरिक्त खर्च करने होंगे। मुंबई जाने पर किराए में करीब 18 रुपये की वृद्धि होगी। पुणे के लिए यह वृद्धि लगभग 19 रुपये नागपुर के लिए 8 रुपये और इंदौर तथा जबलपुर के लिए यह वृद्धि लगभग 6-6 रुपये होगी। लखनऊ जाने वाले यात्रियों को करीब 12 रुपये अतिरिक्त देना होगा।

    इस बदलाव से रेल यात्रा के खर्च में थोड़ा सा इजाफा होगा लेकिन यह वृद्धि यात्रा की सुविधाओं और रेलवे के रख-रखाव में हो रहे सुधारों को ध्यान में रखते हुए की गई है। यात्री अब इन बदलावों के साथ यात्रा की योजना बनाते हुए अतिरिक्त खर्च के बारे में सोच सकते हैं।इस नई वृद्धि से जहां एक ओर यात्रियों की जेब पर असर पड़ेगा वहीं दूसरी ओर रेलवे की विभिन्न परियोजनाओं और सुविधाओं के विकास के लिए यह कदम उठाया गया है।

  • कनाडा में भारतीय मूल का युवक गिरफ्तार, महिला डॉक्टरों के सामने अश्लील हरकतों के आरोप में हुई कार्रवाई

    कनाडा में भारतीय मूल का युवक गिरफ्तार, महिला डॉक्टरों के सामने अश्लील हरकतों के आरोप में हुई कार्रवाई


    नई दिल्ली । कनाडा (Canada)के मिसिसॉगा शहर(Mississauga City) में एक 25 वर्षीय भारतीय मूल के युवक को गिरफ्तार किया गया है। उस पर कई मेडिकल क्लीनिकों (Medical clinics)में महिला स्टाफ, विशेषकर महिला डॉक्टरों के सामने खुद को अश्लील रूप से प्रदर्शित करने के आरोप लगे हैं। इस मामले की पुष्टि पील रीजनल पुलिस (PRP) ने की है।

    पुलिस के अनुसार, आरोपी की पहचान वैभव के रूप में हुई है। जांचकर्ताओं का कहना है कि वैभव बीते कई महीनों से मिसिसॉगा के अलग-अलग मेडिकल सेंटर और क्लीनिकों में बार-बार पहुंचता था। वह नकली मेडिकल समस्याएं बताकर महिला डॉक्टरों से अनुचित शारीरिक संपर्क करवाने की कोशिश करता था।

    PRP ने एक आधिकारिक बयान में कहा कि 12 डिवीजन क्रिमिनल इन्वेस्टिगेशंस ब्यूरो (CIB) ने इंडीसेंट एक्ट जांच के सिलसिले में ब्रैम्पटन निवासी एक व्यक्ति को गिरफ्तार और चार्ज किया है।

    झूठी पहचान भी करता था इस्तेमाल
    पुलिस ने आरोप लगाया है कि वैभव ने कई बार महिला मेडिकल स्टाफ के सामने खुद को नंगा कर दिया और कई मौकों पर नकली पहचान भी अपनाई। जांच में सामने आया है कि वह कभी-कभी आकाशदीप सिंह नाम का इस्तेमाल करता था, ताकि डॉक्टरों को धोखे में रख सके।

    PRP के अनुसार- आरोपी ने कई बार मेडिकल कंडीशन का नाटक किया ताकि महिला डॉक्टर उसकी शरीर की अनुचित तरीके से जांच करें। कुछ मामलों में उसने झूठी पहचान का भी इस्तेमाल किया। वैभव को 4 दिसंबर को गिरफ्तार किया गया और वह फिलहाल हिरासत में है। उसकी बेल (जमानत) हियरिंग अभी पेंडिंग है।

    कई गंभीर आरोप दर्ज
    सार्वजनिक स्थान पर अशोभनीय हरकत
    किसी लाभ के उद्देश्य से पहचान धोखाधड़ी
    पहचान दस्तावेज का अवैध कब्जा
    पहचान चोरी

    पुलिस को अन्य पीड़ितों की तलाश
    जांचकर्ताओं का मानना है कि ऐसी और भी महिलाएं हो सकती हैं जो इस आरोपी की हरकतों का शिकार हुई हों, लेकिन अब तक आगे नहीं आईं। पुलिस ने कहा- जो भी व्यक्ति इस मामले से जुड़ी कोई भी जानकारी रखता है, वह 12 डिवीजन CIB से 905-453-2121, एक्सटेंशन 1233 पर संपर्क करे। पील रीजनल पुलिस लोगों से अपील कर रही है कि इस तरह की घटनाओं की रिपोर्ट करने में हिचकिचाएं नहीं, ताकि जांच आगे बढ़ सके और पीड़ितों को न्याय मिल सके।

  • अमेरिका ने पाकिस्तान के F-16 विमानों के अपग्रेड के लिए 686 मिलियन डॉलर के पैकेज को दी मंजूरी

    अमेरिका ने पाकिस्तान के F-16 विमानों के अपग्रेड के लिए 686 मिलियन डॉलर के पैकेज को दी मंजूरी


    नई दिल्ली । अमेरिकी(American) विदेश विभाग ने पाकिस्तान के एफ-16 लड़ाकू विमान बेड़े को आधुनिक बनाने के लिए 686 मिलियन डॉलर (68.6 करोड़ डॉलर) के पैकेज को मंजूरी दे दी है। यह पैकेज पाकिस्तान वायु सेना (Pakistan Air Force)की क्षमताओं को बढ़ाने, अंतरसंचालन(Interoperability) को मजबूत करने और विमानों की सर्विस लाइफ को 2040 तक विस्तारित करने के उद्देश्य से तैयार किया गया है। ट्रंप प्रशासन(Trump administration) ने इस प्रस्ताव को संसद के पास भेज दिया है, जहां इसे 30 दिनों की समीक्षा प्रक्रिया से गुजरना होगा।

    इस सौदे में लिंक-16 डेटा लिंक सिस्टम, क्रिप्टोग्राफिक उपकरण, एवियोनिक्स अपग्रेड, प्रशिक्षण मॉड्यूल और व्यापक रखरखाव समर्थन शामिल हैं। अमेरिकी रक्षा सुरक्षा सहयोग एजेंसी (डीएससीए) के अनुसार, यह अपग्रेड पाकिस्तान के एफ-16 बेड़े की विश्वसनीयता और रखरखाव क्षमता को बढ़ाएगा, साथ ही अमेरिकी और पाकिस्तानी वायु सेनाओं के बीच बेहतर समन्वय सुनिश्चित करेगा। डीएससीए ने एक बयान में कहा- यह प्रस्तावित बिक्री अमेरिकी विदेश नीति और राष्ट्रीय सुरक्षा उद्देश्यों का समर्थन करती है। पाकिस्तान एक प्रमुख गैर-नाटो सहयोगी देश है।

    पाकिस्तान के पास वर्तमान में लगभग 75 एफ-16 विमान हैं, जो 1980 के दशक से उसकी वायु सेना का मुख्य आधार हैं। यह अपग्रेड विशेष रूप से महत्वपूर्ण है क्योंकि पाकिस्तान के एफ-16 बेड़े को आधुनिक चुनौतियों का सामना करने के लिए अपग्रेडेड कम्युनिकेशन और सेंसर सिस्टम की आवश्यकता है।

    अमेरिका और पाकिस्तान के बीच सैन्य सहयोग का इतिहास लंबा रहा है, लेकिन हाल के वर्षों में यह उतार-चढ़ाव से गुजरा है। 2018 में ट्रंप प्रशासन ने पाकिस्तान को सैन्य सहायता निलंबित कर दी थी, लेकिन अब इस अपग्रेड पैकेज से संबंधों में सुधार के संकेत मिल रहे हैं। पाकिस्तानी अधिकारियों ने इस मंजूरी का स्वागत किया है, इसे अपनी रक्षा क्षमताओं को मजबूत करने के रूप में देखते हुए। दूसरी ओर, अमेरिकी कांग्रेस में कुछ सदस्यों ने पाकिस्तान की आतंकवाद विरोधी प्रतिबद्धताओं पर सवाल उठाए हैं, लेकिन डीएससीए ने स्पष्ट किया कि यह पैकेज केवल मौजूदा बेड़े के रखरखाव और अपग्रेड के लिए है, न कि नए विमानों की बिक्री के लिए।

    यह विकास ऐसे समय में आया है जब दक्षिण एशिया में भू-राजनीतिक तनाव बढ़ रहा है। पाकिस्तान ने हाल ही में अपनी वायु सेना को आधुनिक बनाने के लिए चीन से जे-10सी विमान भी प्राप्त किए हैं, लेकिन एफ-16 अमेरिकी तकनीक पर निर्भर उसकी मुख्य ताकत बनी हुई है। यदि कांग्रेस इस सौदे को मंजूरी देती है, तो यह पाकिस्तान की सैन्य आधुनिकीकरण की दिशा में एक बड़ा कदम होगा।