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  • विटामिन D की कमी: जानिए किन लोगों को सप्लीमेंट, लेना है बेहद जरूरी

    विटामिन D की कमी: जानिए किन लोगों को सप्लीमेंट, लेना है बेहद जरूरी


    नई दिल्ली । आज की भागदौड़ भरी जीवनशैली, लंबे समय तक घर या ऑफिस के अंदर रहना और कम धूप के संपर्क में आना शरीर में विटामिन D की कमी का बड़ा कारण बन रहा है। हैरानी की बात यह है कि धूप से भरपूर देश में भी बड़ी संख्या में लोग इस समस्या से प्रभावित हैं। विटामिन D हड्डियों की मजबूती, इम्यूनिटी और मांसपेशियों के स्वास्थ्य के लिए बेहद जरूरी माना जाता है, लेकिन इसकी कमी गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं पैदा कर सकती है।

    विशेषज्ञों के अनुसार कुछ लोगों में विटामिन D की कमी का खतरा अधिक होता है और उन्हें सप्लीमेंट की जरूरत पड़ सकती है। सबसे पहले वे लोग जो ज्यादातर समय घर या ऑफिस के अंदर रहते हैं और जिनकी त्वचा पर पर्याप्त धूप नहीं पड़ती। इसके अलावा गहरी त्वचा (डार्क स्किन) वाले लोगों में भी यह कमी अधिक देखी जाती है क्योंकि उनकी त्वचा में मेलेनिन अधिक होने से विटामिन D बनने की प्रक्रिया धीमी हो जाती है।

    50 वर्ष से अधिक उम्र के बुजुर्गों में भी विटामिन D बनाने की क्षमता कम हो जाती है, जिससे हड्डियां कमजोर होने लगती हैं और जोड़ों में दर्द की समस्या बढ़ सकती है। वहीं मोटापे से ग्रस्त लोगों में यह विटामिन शरीर की फैट कोशिकाओं में फंस जाता है, जिससे इसकी उपलब्धता कम हो जाती है। गर्भवती और स्तनपान कराने वाली महिलाओं को भी इसकी अधिक आवश्यकता होती है क्योंकि इस दौरान शरीर की जरूरतें बढ़ जाती हैं।

    शाकाहारी या वीगन लोगों में भी विटामिन D की कमी आम है क्योंकि इसके प्रमुख प्राकृतिक स्रोत जैसे मछली और अंडे उनके आहार में शामिल नहीं होते। इसके अलावा किडनी या पाचन संबंधी रोगों से पीड़ित लोगों में भी शरीर विटामिन D को सही तरीके से अवशोषित नहीं कर पाता, जिससे कमी की संभावना बढ़ जाती है।

    विटामिन D की कमी के लक्षणों में लगातार थकान, हड्डियों और जोड़ों में दर्द, मांसपेशियों में कमजोरी, बाल झड़ना, बार-बार बीमार पड़ना और मूड स्विंग शामिल हैं। लंबे समय तक कमी रहने पर यह हड्डियों को कमजोर कर सकता है और इम्यून सिस्टम को प्रभावित कर सकता है।

    विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि सुबह या दिन के समय थोड़ी देर धूप लेना, आहार में मशरूम, फोर्टिफाइड दूध, अंडे की जर्दी और अन्य पोषक खाद्य पदार्थ शामिल करना फायदेमंद हो सकता है। हालांकि सप्लीमेंट लेने से पहले ब्लड टेस्ट और डॉक्टर की सलाह जरूरी है, क्योंकि अधिक मात्रा में विटामिन D शरीर के लिए नुकसानदायक भी हो सकता है। कुल मिलाकर, सही जीवनशैली, संतुलित आहार और समय-समय पर जांच के जरिए विटामिन D की कमी को आसानी से नियंत्रित किया जा सकता है।

  • सुबह उठते ही महसूस होती है कमजोरी? शरीर में हो सकती है इन पोषक तत्वों की कमी, डाइट में तुरंत करें बदलाव

    सुबह उठते ही महसूस होती है कमजोरी? शरीर में हो सकती है इन पोषक तत्वों की कमी, डाइट में तुरंत करें बदलाव


    नई दिल्ली । आज की भागदौड़ भरी जीवनशैली में कई लोग सुबह उठते ही थकान, कमजोरी और सुस्ती महसूस करते हैं। कई बार लोग इसे सामान्य समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार यह शरीर में जरूरी पोषक तत्वों की कमी का संकेत भी हो सकता है। खासतौर पर आयरन की कमी यानी एनीमिया इसके प्रमुख कारणों में से एक माना जाता है।

    डॉक्टरों के मुताबिक जब शरीर में आयरन की कमी हो जाती है तो खून में हीमोग्लोबिन का स्तर कम हो जाता है। हीमोग्लोबिन शरीर के विभिन्न अंगों तक ऑक्सीजन पहुंचाने का काम करता है। इसकी कमी होने पर शरीर के अंगों और मांसपेशियों को पर्याप्त ऊर्जा नहीं मिल पाती, जिससे व्यक्ति को सुबह उठते ही थकान, चक्कर और कमजोरी महसूस होने लगती है। यह समस्या विशेष रूप से महिलाओं और युवाओं में तेजी से बढ़ती देखी जा रही है।

    स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि सही खान पान और संतुलित डाइट के जरिए इस समस्या को काफी हद तक दूर किया जा सकता है। इसके लिए कुछ पोषक तत्वों से भरपूर खाद्य पदार्थों को रोजाना के आहार में शामिल करना जरूरी है।

    गुड़ और मूंगफली

    गुड़ आयरन का एक सस्ता और प्रभावी स्रोत माना जाता है। रोजाना थोड़ा सा गुड़ चने या मूंगफली के साथ खाने से शरीर को तुरंत ऊर्जा मिलती है और खून की गुणवत्ता भी बेहतर होती है।

    हरी पत्तेदार सब्जियां

    पालक, मेथी और बथुआ जैसी हरी पत्तेदार सब्जियां आयरन और फाइबर से भरपूर होती हैं। इन्हें नियमित रूप से खाने से शरीर को जरूरी पोषक तत्व मिलते हैं और हीमोग्लोबिन का स्तर बढ़ाने में मदद मिलती है।

    दालें और चने
    काले चने, राजमा और उड़द की दाल प्रोटीन के साथ साथ आयरन का भी अच्छा स्रोत हैं। इन्हें अपनी रोजाना की डाइट में शामिल करने से शरीर को पर्याप्त ऊर्जा मिलती है और कमजोरी दूर होती है।

    तिल का सेवन

    काले और सफेद तिल दोनों ही आयरन से भरपूर होते हैं। तिल के लड्डू या चटनी का सेवन करने से शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है और खून की कमी को दूर करने में मदद मिलती है।

    विटामिन सी का महत्व

    विशेषज्ञों का कहना है कि केवल आयरन युक्त भोजन करना ही पर्याप्त नहीं होता। शरीर में आयरन के बेहतर अवशोषण के लिए विटामिन सी की भी जरूरत होती है। इसलिए आयरन युक्त भोजन के साथ नींबू, संतरा या आंवला जैसे विटामिन सी से भरपूर फल जरूर खाने चाहिए।

    यदि आपको लगातार सुबह उठते समय कमजोरी, चक्कर या थकान महसूस होती है तो इसे नजरअंदाज न करें। अपनी डाइट में पौष्टिक खाद्य पदार्थ शामिल करें और जरूरत पड़ने पर डॉक्टर की सलाह लेकर खून की जांच भी करवाएं। स्वस्थ शरीर ही बेहतर और सफल जीवन की नींव होता है।

  • सर्दियों में ड्राई फ्रूट्स का सेवन: लाभ तो हैं, लेकिन ज्यादा खाने से बढ़ सकता है वजन और शुगर

    सर्दियों में ड्राई फ्रूट्स का सेवन: लाभ तो हैं, लेकिन ज्यादा खाने से बढ़ सकता है वजन और शुगर

    नई दिल्ली । सर्दियों में ड्राई फ्रूट्स का क्रेज हर उम्र के लोगों में बढ़ जाता है। बाजार में बादाम, अखरोट, काजू, किशमिश और खजूर की मांग तेजी से बढ़ जाती है। लोग सोचते हैं कि रोजाना इन्हें खाने से शरीर को गर्माहट, ऊर्जा और स्वास्थ्य लाभ मिलेगा। लेकिन क्या यह आदत सभी के लिए सुरक्षित है? डॉक्टरों की राय इसे लेकर साफ है – मात्रा का ध्यान रखना जरूरी है।

    विशेषज्ञ बताते हैं कि ड्राई फ्रूट्स पोषक तत्वों से भरपूर होते हैं। इनमें मौजूद फाइबर पाचन को दुरुस्त रखता है, जबकि अखरोट और पिस्ता हृदय स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद हैं। सर्दियों में रोजाना थोड़ी मात्रा में मेवे खाने से शरीर को ऊर्जा मिलती है और इम्यूनिटी भी मजबूत रहती है।दिल्ली के लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज एंड एसोसिएट हॉस्पिटल्स के वरिष्ठ डॉक्टरों के अनुसार, आम व्यक्ति के लिए रोजाना लगभग 30 ग्राम ड्राई फ्रूट्स पर्याप्त हैं। इससे अधिक खाने पर वजन बढ़ने, ब्लड शुगर लेवल प्रभावित होने और लंबे समय में स्वास्थ्य समस्याओं का खतरा हो सकता है।

    डॉक्टर यह भी कहते हैं कि ड्राई फ्रूट्स में प्रोटीन की मात्रा अपेक्षाकृत कम होती है। औसतन 100 ग्राम ड्राई फ्रूट्स में केवल 15-16 ग्राम प्रोटीन होता है। ऐसे में सामान्य व्यक्ति के लिए रोजाना 30 ग्राम मेवा खाने से प्रोटीन की मात्रा सीमित ही रहती है। हालांकि एथलीट या शारीरिक श्रम करने वाले लोग इसे 40-50 ग्राम तक बढ़ा सकते हैं।जहां तक वजन और शुगर की चिंता है, तो सभी ड्राई फ्रूट्स इसका कारण नहीं बनते। किशमिश और खजूर जैसे मीठे मेवे कैलोरी में अधिक होते हैं। अधिक मात्रा में सेवन करने से यह मोटापा और ब्लड शुगर लेवल बढ़ा सकते हैं। इसलिए डायबिटीज के मरीजों और वजन कम करने वाले लोगों को इनका सेवन बहुत सीमित मात्रा में करना चाहिए।

    सभी के लिए ड्राई फ्रूट्स सुरक्षित नहीं हैं। पाचन संबंधी समस्याओं, एलर्जी, अस्थमा या किडनी रोग वाले मरीजों को बिना डॉक्टर की सलाह के मेवे नहीं खाने चाहिए। खासकर काजू कुछ लोगों में एलर्जी और पाचन संबंधी दिक्कतें बढ़ा सकता है।निष्कर्ष यह है कि ड्राई फ्रूट्स सर्दियों में सेहत के लिए लाभकारी हो सकते हैं, लेकिन संतुलन और मात्रा का ध्यान रखना जरूरी है। सही चयन और सीमित मात्रा में सेवन करने पर ही ये शरीर के लिए फायदेमंद साबित होते हैं। वरना इन्हें ज्यादा खाने से वजन, शुगर और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं का खतरा बढ़ सकता है।

    डॉक्टरों का सुझाव है कि रोजाना 30 ग्राम मेवे पर्याप्त हैं। इसमें बादाम, अखरोट, पिस्ता और थोड़ा सा किशमिश शामिल किया जा सकता है। खजूर का सेवन भी सीमित मात्रा में करना चाहिए। इसके साथ ही, किसी भी प्रकार की एलर्जी या स्वास्थ्य समस्या होने पर हमेशा डॉक्टर की सलाह अवश्य लें।
    सर्दियों में ड्राई फ्रूट्स का सेवन तभी सुरक्षित और लाभकारी है जब इसे संतुलित मात्रा, सही चयन और अपनी स्वास्थ्य स्थिति को ध्यान में रखकर किया जाए।

  • रोजाना खाएं ये 1 चीज और पाएं शीशे जैसी चमक पड़ोस वाली भी पूछेगी ‘क्या लगाया

    रोजाना खाएं ये 1 चीज और पाएं शीशे जैसी चमक पड़ोस वाली भी पूछेगी ‘क्या लगाया


    नई दिल्ली । चेहरे की खूबसूरती बढ़ाने के लिए सिर्फ क्रीम और स्किन केयर प्रोडक्ट्स पर्याप्त नहीं होते। हर किसी की त्वचा अलग होती है और इसे पोषण देने वाले तत्वों की कमी के कारण स्किन प्रोडक्ट्स कभी-कभी असर नहीं दिखाते। इसलिए त्वचा की निखार और ग्लो के लिए आहार पर ध्यान देना बेहद जरूरी है। मिडल क्लास से लेकर उच्च वर्ग तक हर कोई महंगे प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल करता है लेकिन सही पोषण के बिना परिणाम सीमित ही रहते हैं।

    ब्लूबेरी: एंटी-ऑक्सीडेंट्स से भरपूर

    ब्लूबेरी में उच्च मात्रा में एंटी-ऑक्सीडेंट्स पाए जाते हैं जो त्वचा की नमी बनाए रखते हैं और कोलेजन बढ़ाते हैं। यह झुर्रियों काले धब्बों और सूजन को कम करने में मदद करता है जिससे त्वचा हमेशा युवा और ताजगी भरी नजर आती है।

    अखरोट: ओमेगा-3 और विटामिन ई का खजाना

    अखरोट में ओमेगा-3 फैटी एसिड विटामिन ई जिंक और एंटी-ऑक्सीडेंट्स पाए जाते हैं। ये त्वचा को गहराई से मॉइस्चराइज करते हैं झुर्रियों और दाग-धब्बों को कम करते हैं और मुंहासों की समस्या भी घटाते हैं। रोजाना अखरोट का सेवन त्वचा की नमी और इलास्टिसिटी बनाए रखने में मदद करता है।

    अखरोट: नेचुरल ग्लो के लिए

    अंगूर खाने से एजिंग के निशानों को कम किया जा सकता है और त्वचा में प्राकृतिक निखार आता है। वहीं संतरे में मौजूद विटामिन सी त्वचा को ग्लोइंग बनाता है और टैनिंग को कम करता है। इन फलों का नियमित सेवन त्वचा को भीतर से पोषण देता है और चेहरे की चमक बढ़ाता है।