राजस्थान रबड़ी वाला शाही मालपुआ
बिहार केला मालपुआ
मथुरा पारंपरिक मालपुआ
ओडिशा अंपुआ
झारखंड होली पर घर घर में मालपुआ

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वायरल वीडियो की प्रामाणिकता की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है। नीलगिरी के उपमंडल पुलिस अधिकारी प्रमोद कुमार मलिक ने कहा, ‘बच्चे को चिमिनीभाटी क्षेत्र से बचाया गया और उसे बाल कल्याण समिति को सौंप दिया गया। आगे की जांच जारी है।’ उन्होंने बताया कि पुलिस ने इस संबंध में दो लोगों को हिरासत में लिया है। पुलिस ने पिता की पहचान पेशे से राजमिस्त्री राकेश कुमार बेहेरा उर्फ कुआ के रूप में की है जिसने कथित तौर पर पहली किस्त के रूप में 50,000 रुपये प्राप्त किए थे।
आरोपी ने क्या कहा
राकेश कुमार बेहेरा ने आर्थिक तंगी को इस कदम का कारण बताया। उसने पत्रकारों को बताया, ‘हमारे चार बच्चे हैं और हमें उनका पालन-पोषण करने में कठिनाई हो रही है। एक परिचित व्यक्ति ने खरीदार का इंतजाम किया और मैंने बच्चे को उसे सौंप दिया।’ पुलिस सूत्रों के अनुसार, बेहेरा ने दो बार शादी की थी और जिस बच्चे को कथित तौर पर बेचा गया था वह उससे अलग रह रही उसकी दूसरी पत्नी का है।
ओडिशा के गंजाम जिले में शनिवार को चोरी के संदेह में एक व्यक्ति की पीट-पीटकर हत्या किए जाने का मामला सामने आया है। पुलिस ने बताया कि यह घटना जिले के भंजनगर पुलिस थाना क्षेत्र के सरदुला गांव में हुई। मृतक की पहचान 37 वर्षीय बनधर प्रधान के रूप में हुई है, जो कंधमाल जिले के जी. उदयगिरि पुलिस थाना क्षेत्र के कुरुमिंगिया गांव का निवासी था। अपर पुलिस अधीक्षक रंजन कुमार डे ने बताया, ‘प्रधान को शनिवार तड़के बचाया गया और भंजनगर के उप-मंडल अस्पताल ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया।’ प्रधान और दो अन्य लोग सरदुला निवासी सुशांत गौड़ा के बंद घर में लूटपाट में शामिल थे। उसने बताया कि भागते समय प्रधान गिर गया और उसका पैर टूट गया, जिसके बाद ग्रामीणों ने उसकी बिजली के खंभे से बांधकर पिटाई की।

पुलिस के अनुसार, यह घटना बलांगीर जिले के एक इलाके में हुई। पीड़िता और आरोपी सभी एक ही स्कूल में 9वीं कक्षा में पढ़ते थे। बताया जा रहा है कि छात्रा को बहला-फुसलाकर एक सुनसान जगह पर ले जाया गया, जहां उसके साथ बारी-बारी से दुष्कर्म किया गया। इस दौरान एक अन्य युवक भी मौके पर मौजूद था, जिसने इस अपराध में सहयोग किया। घटना के बाद आरोपियों ने पूरी वारदात का वीडियो बनाया और छात्रा को गंभीर अंजाम भुगतने की धमकी दी। उन्होंने कहा कि अगर उसने किसी को भी इस बारे में बताया तो वीडियो को सार्वजनिक कर दिया जाएगा।
डर और मानसिक दबाव के चलते नाबालिग छात्रा कुछ समय तक चुप रही। लेकिन मामला तब सामने आया, जब आरोपियों में से एक ने वही वीडियो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर डाल दिया। वीडियो वायरल होते ही यह पीड़िता के परिवार तक पहुंच गया। वीडियो देखकर परिवार सदमे में आ गया और तुरंत बेटी से सच्चाई जानने की कोशिश की। पूछे जाने पर छात्रा फूट-फूटकर रो पड़ी और पूरी घटना के साथ-साथ धमकियों के बारे में भी बताया।
परिवार ने बिना किसी देरी के बलांगीर पुलिस थाने में शिकायत दर्ज कराई। शिकायत मिलते ही पुलिस हरकत में आई और मामला दर्ज कर वीडियो को जब्त कर लिया गया। पुलिस ने पीड़िता का बयान दर्ज किया और मामले की गंभीरता को देखते हुए तत्काल जांच शुरू की। चूंकि पीड़िता नाबालिग है, इसलिए इस मामले में पॉक्सो एक्ट समेत भारतीय दंड संहिता की कड़ी धाराएं लगाई गई हैं।
बलांगीर पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि वीडियो में दिखाई दे रहे सभी छह आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया है। उन्होंने कहा, “हम वीडियो में नजर आ रहे छह अपराधियों को हिरासत में लेकर पूछताछ कर रहे हैं। वीडियो फुटेज और पीड़िता के परिवार द्वारा लगाए गए आरोप सही पाए गए हैं। पीड़िता का मेडिकल परीक्षण कराया गया है और आगे की जांच जारी है।” पुलिस ने यह भी कहा कि डिजिटल सबूतों की फॉरेंसिक जांच की जा रही है, ताकि अदालत में मजबूत केस पेश किया जा सके।
इस घटना के सामने आने के बाद इलाके में भारी आक्रोश देखा जा रहा है। स्थानीय लोगों, सामाजिक संगठनों और महिला अधिकार कार्यकर्ताओं ने आरोपियों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की मांग की है। लोगों का कहना है कि स्कूल में पढ़ने वाले छात्रों द्वारा इस तरह का अमानवीय कृत्य समाज के लिए बेहद चिंताजनक है और यह दर्शाता है कि बच्चों और किशोरों में नैतिक शिक्षा और संवेदनशीलता की कितनी कमी हो गई है।

2. दिल्ली – इतिहास, संस्कृति और आधुनिकता का संगम
फरवरी की हल्की ठंड दिल्ली को एक्सप्लोर करने के लिए परफेक्ट बना देती है। लाल किला, कुतुब मीनार, इंडिया गेट और लोधी गार्डन इस मौसम में बेहद खूबसूरत लगते हैं।
इंडिया आर्ट फेयर, म्यूजियम्स और कैफे कल्चर दिल्ली को सांस्कृतिक रूप से जीवंत बना देते हैं। पुरानी दिल्ली की गलियों में घूमना और स्ट्रीट फूड का मजा लेना फरवरी की खास पहचान है।
4. मुंबई – समुद्र, कला और संगीत
फरवरी में मुंबई की समुद्री हवा मौसम को बेहद खुशनुमा बना देती है। कला घोड़ा आर्ट्स फेस्टिवल और महिंद्रा ब्लूज़ फेस्टिवल शहर को रचनात्मक ऊर्जा से भर देते हैं।
आर्ट डेको इमारतें, गैलरी, ईरानी कैफे और मरीन ड्राइव की शामें मुंबई को घूमने के लिए खास बनाती हैं।
6. काजीरंगा – वाइल्डलाइफ का रोमांच
असम का काजीरंगा नेशनल पार्क फरवरी में घूमने के लिए सबसे अच्छा माना जाता है। यहां सफारी के दौरान एक-सींग वाला गैंडा, हाथी, हिरण और कभी-कभी बाघ भी देखने को मिल जाते हैं।ठंड कम होने के कारण जंगल सफारी आरामदायक और रोमांचक दोनों होती है।
फरवरी यात्रा के लिए ऐसा महीना है, जहां मौसम, संस्कृति और प्रकृति का परफेक्ट बैलेंस मिलता है। अगर आप सुकून, रोमांस या एडवेंचर की तलाश में हैं, तो ये 6 जगहें आपकी ट्रैवल बकेट लिस्ट में जरूर होनी चाहिए।

प्रदूषण को मानव निर्मित आपदा करार
सांसद मंगराज ने दिल्ली में प्रदूषण को “मानव निर्मित आपदा” बताया और इस पर गंभीर चिंता व्यक्त की। उन्होंने शून्यकाल के दौरान इस मुद्दे को उठाते हुए कहा कि दिल्ली के प्रदूषण को नियंत्रित करना अब एक बड़े संकट का रूप ले चुका है और इसके प्रभाव से न सिर्फ आम जनता बल्कि संसद के कार्य में लगे कर्मचारी भी प्रभावित हो रहे हैं। उन्होंने दिल्ली में वायु गुणवत्ता में सुधार होने तक संसद के सत्रों को अन्य शहरों में स्थानांतरित करने की मांग की।
ओडिशा से तुलना संकटों से निपटने की क्षमता
मानस रंजन मंगराज ने ओडिशा राज्य का उदाहरण देते हुए कहा कि उनका राज्य चक्रवात बाढ़ और अन्य प्राकृतिक आपदाओं से लड़ने में हमेशा तत्पर रहता है। उन्होंने बताया कि ओडिशा सरकार ने कितनी प्रभावी ढंग से इन संकटों से निपटने के लिए लोगों को सुरक्षित स्थानों पर शिफ्ट किया और हजारों लोगों की जान बचाई। मंगराज का कहना था कि जब ओडिशा जैसी जगह अपने नागरिकों को संकट से बाहर निकालने में सक्षम है तो दिल्ली में प्रदूषण के संकट को देखते हुए संसद के सत्र को कहीं और स्थानांतरित करने के लिए भारत सरकार को भी तत्पर होना चाहिए।
सांसदों और कर्मचारियों की सुरक्षा की चिंता
सांसद ने संसद के सदस्यों कर्मचारियों ड्राइवरों सफाई कर्मचारियों और सुरक्षा कर्मियों की सेहत को लेकर चिंता जताई। उनका कहना था कि प्रदूषण के बढ़ते स्तर के कारण ये सभी लोग रोजाना जहरीली हवा के संपर्क में आ रहे हैं और यह उनकी सेहत के लिए खतरनाक हो सकता है। मंगराज ने कहा “हम इन कर्मचारियों की तकलीफ को नजरअंदाज नहीं कर सकते। प्रदूषण के चरम स्तर पर संसद सत्र आयोजित करना अनावश्यक रूप से लोगों की जान को खतरे में डालता है।”
वैकल्पिक शहरों का सुझाव
बीजेडी सांसद ने दिल्ली की जगह कुछ अन्य शहरों का सुझाव भी दिया जहां प्रदूषण कम है और जो बेहतर वायु गुणवत्ता और बुनियादी ढांचे के साथ सत्र आयोजित करने के लिए उपयुक्त हो सकते हैं। इनमें ओडिशा की राजधानी भुवनेश्वर हैदराबाद बेंगलुरु गांधीनगर गोवा और देहरादून शामिल हैं। मंगराज ने इन शहरों को संसद सत्र के लिए आदर्श स्थान बताया और सरकार से अनुरोध किया कि बिना देरी किए इन शहरों में सत्र आयोजित करने की संभावना पर विचार करें।
राजनीति से प्रेरित नहीं जीवन और सेहत की सुरक्षा
सांसद ने यह भी स्पष्ट किया कि उनकी इस मांग का उद्देश्य राजनीति नहीं है बल्कि यह लोगों की जिंदगी और सम्मान से जुड़ा हुआ मुद्दा है। उन्होंने कहा “यह राजनीति की चीज नहीं है। यह जीवन और सम्मान की बात है। संसद को नेतृत्व दिखाना होगा और यह दिखाना होगा कि जीवन का अधिकार किसी भी राजनीतिक विवाद से पहले आता है।”
प्रदूषण का असर
दिल्ली में प्रदूषण की समस्या मुख्य रूप से अक्टूबर से जनवरी तक ज्यादा गंभीर हो जाती है। इस दौरान पराली जलाने वाहनों के उत्सर्जन और निर्माण कार्य से धूल के कारण वायु गुणवत्ता बहुत खराब हो जाती है। यही समय होता है जब संसद का शीतकालीन और बजट सत्र आयोजित किया जाता है। ऐसे में प्रदूषण के कारण सांस की बीमारी आंखों में जलन और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं का खतरा बढ़ जाता है।
दिल्ली में प्रदूषण के बढ़ते संकट ने अब संसद के सत्रों को भी प्रभावित करना शुरू कर दिया है। बीजेडी सांसद मानस रंजन मंगराज का यह बयान संसद के सत्रों को सुरक्षित और स्वस्थ वातावरण में आयोजित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हो सकता है। उनकी मांग से यह स्पष्ट है कि जब तक दिल्ली में वायु गुणवत्ता में सुधार नहीं होता तब तक सत्र को अन्य शहरों में स्थानांतरित करने का विचार किया जाना चाहिए। यह केवल संसद के सदस्यों की सेहत के लिए जरूरी नहीं बल्कि पूरे देश के नागरिकों के लिए एक उदाहरण प्रस्तुत करने का समय है।