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  • Odisha में भीषण सड़क हादसा… बेकाबू ट्रेलर ने पुलिस की बोलेरो को टक्कर, 5 जवानों की मौत, 3 घायल

    Odisha में भीषण सड़क हादसा… बेकाबू ट्रेलर ने पुलिस की बोलेरो को टक्कर, 5 जवानों की मौत, 3 घायल


    झारसुगुड़ा।
    ओडिशा (Odisha) के झारसुगुड़ा जिले (Jharsuguda district) में रविवार तड़के एक बेहद दर्दनाक सड़क हादसा हुआ। एक तेज रफ्तार ट्रेलर (High Speed Trailer) ने पुलिस की बोलेरो गाड़ी को जोरदार टक्कर मार दी, जिससे पांच पुलिस कर्मियों (Five Police Personnel) की मौके पर ही मौत हो गई। तीन अन्य जवान गंभीर रूप से घायल हैं। यह दुर्घटना इतनी भीषण थी कि पुलिस वाहन के परखच्चे उड़ गए। अधिकारियों के अनुसार, यह घटना झारसुगुड़ा सदर पुलिस स्टेशन के पास सुबह के समय हुई।

    पुलिस की बोलेरो ड्यूटी पर थी, तभी विपरीत दिशा से आ रहे एक अनियंत्रित और तेज रफ्तार ट्रेलर ने उसे सामने से टक्कर मार दी। टक्कर इतनी जोरदार थी कि बोलेरो पूरी तरह पिचक गई, जिससे उसमें सवार पांच कर्मियों ने घटनास्थल पर ही दम तोड़ दिया। इस हादसे में अपनी जान गंवाने वाले जवानों की पहचान कर ली गई है। पुलिस विभाग ने मृतकों के नाम साझा करते हुए गहरा शोक व्यक्त किया है। इस दुर्घटना में ड्रिल सब-इंस्पेक्टर निरंजन कुजूर, एपीआर कर्मी काशीराम भोई, एपीआर कर्मी देबदत्त सा, एपीआर हवलदार लिंगराज धुरुआ और होमगार्ड भक्तबंधु मिर्धा का निधन हुआ है।

    दुर्घटना में घायल हुए तीन अन्य कर्मियों में आर्म्ड पुलिस रिजर्व (APR) के दो सदस्य और एक सार्जेंट शामिल हैं। स्थानीय पुलिस ने रेस्क्यू ऑपरेशन चलाकर उन्हें बाहर निकाला और तुरंत झारसुगुड़ा जिला मुख्यालय अस्पताल पहुंचाया। डॉक्टरों के अनुसार, तीनों की हालत काफी नाजुक बनी हुई है और उन्हें विशेषज्ञों की कड़ी निगरानी में रखा गया है। घटना की सूचना मिलते ही वरिष्ठ पुलिस अधिकारी मौके पर पहुंचे और स्थिति का जायजा लिया। पुलिस ने आरोपी ट्रेलर चालक को हिरासत में ले लिया है और उससे पूछताछ की जा रही है। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि क्या यह हादसा चालक की लापरवाही, नींद आने या किसी तकनीकी खराबी के कारण हुआ।

    ड्यूटी के दौरान जान गंवाने वाले जवानों को श्रद्धांजलि देने के लिए जिले भर में लोग एकत्र हो रहे हैं। वरिष्ठ अधिकारियों ने शहीदों के परिवारों के प्रति अपनी संवेदना व्यक्त की है और घायलों को सर्वोत्तम चिकित्सा सहायता प्रदान करने का आश्वासन दिया है।

  • ओडिशा में रिश्ते को शर्मसार करने वाला मामला… पिता ने ढाई साल के बेटे को 1 लाख रुपये में बेचा

    ओडिशा में रिश्ते को शर्मसार करने वाला मामला… पिता ने ढाई साल के बेटे को 1 लाख रुपये में बेचा


    भुवनेश्वर।
    ओडिशा पुलिस (Odisha Police) ने शनिवार को ढाई साल के एक बच्चे को बचाया, जिसे उसके पिता ने एक व्यक्ति को 1 लाख रुपये में बेच दिया था। अधिकारियों ने यह जानकारी देते हुए कहा कि आरोपी पिता और खरीदने वाले व्यक्ति को हिरासत में लिया गया है। नीलगिरी अधिसूचित क्षेत्र परिषद (Nilgiri Notified Area Council) के अंतर्गत बारिसाही गांव की यह घटना तब सामने आई, जब एक वायरल वीडियो (Viral Video) में पिता को संभावित खरीदार के साथ सौदेबाजी करते हुए दिखाया गया है। इसके बाद एक स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ता ने नीलगिरी पुलिस थाने में शिकायत दर्ज कराई।

    वायरल वीडियो की प्रामाणिकता की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है। नीलगिरी के उपमंडल पुलिस अधिकारी प्रमोद कुमार मलिक ने कहा, ‘बच्चे को चिमिनीभाटी क्षेत्र से बचाया गया और उसे बाल कल्याण समिति को सौंप दिया गया। आगे की जांच जारी है।’ उन्होंने बताया कि पुलिस ने इस संबंध में दो लोगों को हिरासत में लिया है। पुलिस ने पिता की पहचान पेशे से राजमिस्त्री राकेश कुमार बेहेरा उर्फ ​​कुआ के रूप में की है जिसने कथित तौर पर पहली किस्त के रूप में 50,000 रुपये प्राप्त किए थे।


    आरोपी ने क्या कहा

    राकेश कुमार बेहेरा ने आर्थिक तंगी को इस कदम का कारण बताया। उसने पत्रकारों को बताया, ‘हमारे चार बच्चे हैं और हमें उनका पालन-पोषण करने में कठिनाई हो रही है। एक परिचित व्यक्ति ने खरीदार का इंतजाम किया और मैंने बच्चे को उसे सौंप दिया।’ पुलिस सूत्रों के अनुसार, बेहेरा ने दो बार शादी की थी और जिस बच्चे को कथित तौर पर बेचा गया था वह उससे अलग रह रही उसकी दूसरी पत्नी का है।

    ओडिशा के गंजाम जिले में शनिवार को चोरी के संदेह में एक व्यक्ति की पीट-पीटकर हत्या किए जाने का मामला सामने आया है। पुलिस ने बताया कि यह घटना जिले के भंजनगर पुलिस थाना क्षेत्र के सरदुला गांव में हुई। मृतक की पहचान 37 वर्षीय बनधर प्रधान के रूप में हुई है, जो कंधमाल जिले के जी. उदयगिरि पुलिस थाना क्षेत्र के कुरुमिंगिया गांव का निवासी था। अपर पुलिस अधीक्षक रंजन कुमार डे ने बताया, ‘प्रधान को शनिवार तड़के बचाया गया और भंजनगर के उप-मंडल अस्पताल ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया।’ प्रधान और दो अन्य लोग सरदुला निवासी सुशांत गौड़ा के बंद घर में लूटपाट में शामिल थे। उसने बताया कि भागते समय प्रधान गिर गया और उसका पैर टूट गया, जिसके बाद ग्रामीणों ने उसकी बिजली के खंभे से बांधकर पिटाई की।

  • ओडिशा में मानवता को शर्मसार, 9वीं की छात्रा से सहपाठियों ने किया गैंगरेप, वीडियो बनाकर दी धमकी

    ओडिशा में मानवता को शर्मसार, 9वीं की छात्रा से सहपाठियों ने किया गैंगरेप, वीडियो बनाकर दी धमकी


    भुवनेश्वर/बलांगीर । ओडिशा के बलांगीर जिले से एक बेहद शर्मनाक और दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है, जिसने पूरे राज्य को झकझोर कर रख दिया है। यहां 9वीं कक्षा में पढ़ने वाली एक नाबालिग छात्रा के साथ उसी की कक्षा में पढ़ने वाले पांच छात्रों और एक अन्य युवक ने सामूहिक दुष्कर्म किया। इस जघन्य अपराध की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि आरोपियों ने न सिर्फ इस घटना को अंजाम दिया, बल्कि इसे वीडियो में रिकॉर्ड कर पीड़िता को धमकाया भी, ताकि वह किसी को कुछ न बता सके। हालांकि, आरोपियों की एक बड़ी चूक के कारण यह मामला उजागर हो गया, जब उनमें से एक ने वीडियो सोशल मीडिया पर पोस्ट कर दिया, जो तेजी से वायरल हो गया।

    पुलिस के अनुसार, यह घटना बलांगीर जिले के एक इलाके में हुई। पीड़िता और आरोपी सभी एक ही स्कूल में 9वीं कक्षा में पढ़ते थे। बताया जा रहा है कि छात्रा को बहला-फुसलाकर एक सुनसान जगह पर ले जाया गया, जहां उसके साथ बारी-बारी से दुष्कर्म किया गया। इस दौरान एक अन्य युवक भी मौके पर मौजूद था, जिसने इस अपराध में सहयोग किया। घटना के बाद आरोपियों ने पूरी वारदात का वीडियो बनाया और छात्रा को गंभीर अंजाम भुगतने की धमकी दी। उन्होंने कहा कि अगर उसने किसी को भी इस बारे में बताया तो वीडियो को सार्वजनिक कर दिया जाएगा।

    डर और मानसिक दबाव के चलते नाबालिग छात्रा कुछ समय तक चुप रही। लेकिन मामला तब सामने आया, जब आरोपियों में से एक ने वही वीडियो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर डाल दिया। वीडियो वायरल होते ही यह पीड़िता के परिवार तक पहुंच गया। वीडियो देखकर परिवार सदमे में आ गया और तुरंत बेटी से सच्चाई जानने की कोशिश की। पूछे जाने पर छात्रा फूट-फूटकर रो पड़ी और पूरी घटना के साथ-साथ धमकियों के बारे में भी बताया।

    परिवार ने बिना किसी देरी के बलांगीर पुलिस थाने में शिकायत दर्ज कराई। शिकायत मिलते ही पुलिस हरकत में आई और मामला दर्ज कर वीडियो को जब्त कर लिया गया। पुलिस ने पीड़िता का बयान दर्ज किया और मामले की गंभीरता को देखते हुए तत्काल जांच शुरू की। चूंकि पीड़िता नाबालिग है, इसलिए इस मामले में पॉक्सो एक्ट समेत भारतीय दंड संहिता की कड़ी धाराएं लगाई गई हैं।

    बलांगीर पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि वीडियो में दिखाई दे रहे सभी छह आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया है। उन्होंने कहा, “हम वीडियो में नजर आ रहे छह अपराधियों को हिरासत में लेकर पूछताछ कर रहे हैं। वीडियो फुटेज और पीड़िता के परिवार द्वारा लगाए गए आरोप सही पाए गए हैं। पीड़िता का मेडिकल परीक्षण कराया गया है और आगे की जांच जारी है।” पुलिस ने यह भी कहा कि डिजिटल सबूतों की फॉरेंसिक जांच की जा रही है, ताकि अदालत में मजबूत केस पेश किया जा सके।

    इस घटना के सामने आने के बाद इलाके में भारी आक्रोश देखा जा रहा है। स्थानीय लोगों, सामाजिक संगठनों और महिला अधिकार कार्यकर्ताओं ने आरोपियों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की मांग की है। लोगों का कहना है कि स्कूल में पढ़ने वाले छात्रों द्वारा इस तरह का अमानवीय कृत्य समाज के लिए बेहद चिंताजनक है और यह दर्शाता है कि बच्चों और किशोरों में नैतिक शिक्षा और संवेदनशीलता की कितनी कमी हो गई है।

  • फरवरी में घूमने की परफेक्ट लिस्ट: न ठंड की मार, न गर्मी की तपिश, ये 6 जगहें बना देंगी ट्रिप यादगार

    फरवरी में घूमने की परफेक्ट लिस्ट: न ठंड की मार, न गर्मी की तपिश, ये 6 जगहें बना देंगी ट्रिप यादगार



    नई दिल्ली। अगर भारत में घूमने का सबसे परफेक्ट महीना कोई है, तो वह फरवरी है। इस दौरान सर्दी धीरे-धीरे विदा लेने लगती है, गर्मी आने में अभी समय होता है और मौसम एकदम सुहावना रहता है। यही वजह है कि फरवरी में नॉर्थ से साउथ तक भारत की कई जगहें घूमने के लिए बेस्ट बन जाती हैं। साथ ही इस महीने देशभर में कला, साहित्य, संगीत और संस्कृति से जुड़े बड़े आयोजन भी होते हैं, जो यात्रा को और खास बना देते हैं।
    1. जयपुर – इतिहास और रंगों की रॉयल झलक
    फरवरी में जयपुर की सुबहें हल्की ठंडक लिए होती हैं और दिन धूप से भरे रहते हैं। आमेर किला, सिटी पैलेस, हवा महल और जंतर-मंतर घूमने का यही सबसे अच्छा वक्त है।
    इसी महीने होने वाला जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल और जयपुर आर्ट वीक शहर को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाते हैं। हेरिटेज वॉक, लोक संगीत और हस्तशिल्प जयपुर को एक यादगार अनुभव बना देते हैं।

    2. दिल्ली – इतिहास, संस्कृति और आधुनिकता का संगम
    फरवरी की हल्की ठंड दिल्ली को एक्सप्लोर करने के लिए परफेक्ट बना देती है। लाल किला, कुतुब मीनार, इंडिया गेट और लोधी गार्डन इस मौसम में बेहद खूबसूरत लगते हैं।
    इंडिया आर्ट फेयर, म्यूजियम्स और कैफे कल्चर दिल्ली को सांस्कृतिक रूप से जीवंत बना देते हैं। पुरानी दिल्ली की गलियों में घूमना और स्ट्रीट फूड का मजा लेना फरवरी की खास पहचान है।

    3. अहमदाबाद – विरासत और स्वाद का शहर
    गुजरात का अहमदाबाद फरवरी में घूमने के लिए शानदार है। साबरमती रिवरफ्रंट, ऐतिहासिक पोल्स, बावड़ियां और साबरमती आश्रम शहर की ऐतिहासिक पहचान को दर्शाते हैं।
    उत्तरायण के बाद भी उत्सव का माहौल बना रहता है और उंधियू जैसे पारंपरिक गुजराती व्यंजन स्वाद को यादगार बना देते हैं।

    4. मुंबई – समुद्र, कला और संगीत
    फरवरी में मुंबई की समुद्री हवा मौसम को बेहद खुशनुमा बना देती है। कला घोड़ा आर्ट्स फेस्टिवल और महिंद्रा ब्लूज़ फेस्टिवल शहर को रचनात्मक ऊर्जा से भर देते हैं।
    आर्ट डेको इमारतें, गैलरी, ईरानी कैफे और मरीन ड्राइव की शामें मुंबई को घूमने के लिए खास बनाती हैं।

    5. ओडिशा – संस्कृति और प्रकृति का अनोखा मेल
    फरवरी में ओडिशा का मौसम बेहद सुखद रहता है। कोणार्क डांस एंड म्यूजिक फेस्टिवल सूर्य मंदिर की पृष्ठभूमि में शास्त्रीय नृत्य और संगीत का अद्भुत अनुभव देता है।
    चिलिका झील में हजारों प्रवासी पक्षी दिखाई देते हैं, जो नेचर और फोटोग्राफी लवर्स के लिए किसी जन्नत से कम नहीं।

    6. काजीरंगा – वाइल्डलाइफ का रोमांच
    असम का काजीरंगा नेशनल पार्क फरवरी में घूमने के लिए सबसे अच्छा माना जाता है। यहां सफारी के दौरान एक-सींग वाला गैंडा, हाथी, हिरण और कभी-कभी बाघ भी देखने को मिल जाते हैं।ठंड कम होने के कारण जंगल सफारी आरामदायक और रोमांचक दोनों होती है।
    फरवरी यात्रा के लिए ऐसा महीना है, जहां मौसम, संस्कृति और प्रकृति का परफेक्ट बैलेंस मिलता है। अगर आप सुकून, रोमांस या एडवेंचर की तलाश में हैं, तो ये 6 जगहें आपकी ट्रैवल बकेट लिस्ट में जरूर होनी चाहिए।

  • दिल्ली के प्रदूषण से त्रस्त BJD सांसद का बड़ा बयान संसद सत्र को अन्य शहरों में शिफ्ट करने की अपील

    दिल्ली के प्रदूषण से त्रस्त BJD सांसद का बड़ा बयान संसद सत्र को अन्य शहरों में शिफ्ट करने की अपील


    नई दिल्ली । दिल्ली में प्रदूषण की समस्या दिन-ब-दिन बढ़ती जा रही है जिससे न केवल आम लोग बल्कि संसद के सदस्य भी प्रभावित हो रहे हैं। इस मुद्दे पर बीजू जनता दल राज्यसभा सदस्य मानस रंजन मंगराज ने सरकार से संसद के शीतकालीन और बजट सत्र को दिल्ली से बाहर अन्य शहरों में शिफ्ट करने की अपील की है। उनका कहना है कि प्रदूषण के स्तर के कारण संसद के सत्रों को दिल्ली से बाहर शिफ्ट करना आवश्यक है ताकि संसद के सदस्य और कर्मचारी स्वच्छ वायु में काम कर सकें और उनकी सेहत पर कोई प्रतिकूल प्रभाव न पड़े।

    प्रदूषण को मानव निर्मित आपदा करार

    सांसद मंगराज ने दिल्ली में प्रदूषण को “मानव निर्मित आपदा” बताया और इस पर गंभीर चिंता व्यक्त की। उन्होंने शून्यकाल के दौरान इस मुद्दे को उठाते हुए कहा कि दिल्ली के प्रदूषण को नियंत्रित करना अब एक बड़े संकट का रूप ले चुका है और इसके प्रभाव से न सिर्फ आम जनता बल्कि संसद के कार्य में लगे कर्मचारी भी प्रभावित हो रहे हैं। उन्होंने दिल्ली में वायु गुणवत्ता में सुधार होने तक संसद के सत्रों को अन्य शहरों में स्थानांतरित करने की मांग की।

    ओडिशा से तुलना संकटों से निपटने की क्षमता

    मानस रंजन मंगराज ने ओडिशा राज्य का उदाहरण देते हुए कहा कि उनका राज्य चक्रवात बाढ़ और अन्य प्राकृतिक आपदाओं से लड़ने में हमेशा तत्पर रहता है। उन्होंने बताया कि ओडिशा सरकार ने कितनी प्रभावी ढंग से इन संकटों से निपटने के लिए लोगों को सुरक्षित स्थानों पर शिफ्ट किया और हजारों लोगों की जान बचाई। मंगराज का कहना था कि जब ओडिशा जैसी जगह अपने नागरिकों को संकट से बाहर निकालने में सक्षम है तो दिल्ली में प्रदूषण के संकट को देखते हुए संसद के सत्र को कहीं और स्थानांतरित करने के लिए भारत सरकार को भी तत्पर होना चाहिए।

    सांसदों और कर्मचारियों की सुरक्षा की चिंता

    सांसद ने संसद के सदस्यों कर्मचारियों ड्राइवरों सफाई कर्मचारियों और सुरक्षा कर्मियों की सेहत को लेकर चिंता जताई। उनका कहना था कि प्रदूषण के बढ़ते स्तर के कारण ये सभी लोग रोजाना जहरीली हवा के संपर्क में आ रहे हैं और यह उनकी सेहत के लिए खतरनाक हो सकता है। मंगराज ने कहा “हम इन कर्मचारियों की तकलीफ को नजरअंदाज नहीं कर सकते। प्रदूषण के चरम स्तर पर संसद सत्र आयोजित करना अनावश्यक रूप से लोगों की जान को खतरे में डालता है।”

    वैकल्पिक शहरों का सुझाव

    बीजेडी सांसद ने दिल्ली की जगह कुछ अन्य शहरों का सुझाव भी दिया जहां प्रदूषण कम है और जो बेहतर वायु गुणवत्ता और बुनियादी ढांचे के साथ सत्र आयोजित करने के लिए उपयुक्त हो सकते हैं। इनमें ओडिशा की राजधानी भुवनेश्वर हैदराबाद बेंगलुरु गांधीनगर गोवा और देहरादून शामिल हैं। मंगराज ने इन शहरों को संसद सत्र के लिए आदर्श स्थान बताया और सरकार से अनुरोध किया कि बिना देरी किए इन शहरों में सत्र आयोजित करने की संभावना पर विचार करें।

    राजनीति से प्रेरित नहीं जीवन और सेहत की सुरक्षा

    सांसद ने यह भी स्पष्ट किया कि उनकी इस मांग का उद्देश्य राजनीति नहीं है बल्कि यह लोगों की जिंदगी और सम्मान से जुड़ा हुआ मुद्दा है। उन्होंने कहा “यह राजनीति की चीज नहीं है। यह जीवन और सम्मान की बात है। संसद को नेतृत्व दिखाना होगा और यह दिखाना होगा कि जीवन का अधिकार किसी भी राजनीतिक विवाद से पहले आता है।”

    प्रदूषण का असर

    दिल्ली में प्रदूषण की समस्या मुख्य रूप से अक्टूबर से जनवरी तक ज्यादा गंभीर हो जाती है। इस दौरान पराली जलाने वाहनों के उत्सर्जन और निर्माण कार्य से धूल के कारण वायु गुणवत्ता बहुत खराब हो जाती है। यही समय होता है जब संसद का शीतकालीन और बजट सत्र आयोजित किया जाता है। ऐसे में प्रदूषण के कारण सांस की बीमारी आंखों में जलन और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं का खतरा बढ़ जाता है।

    दिल्ली में प्रदूषण के बढ़ते संकट ने अब संसद के सत्रों को भी प्रभावित करना शुरू कर दिया है। बीजेडी सांसद मानस रंजन मंगराज का यह बयान संसद के सत्रों को सुरक्षित और स्वस्थ वातावरण में आयोजित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हो सकता है। उनकी मांग से यह स्पष्ट है कि जब तक दिल्ली में वायु गुणवत्ता में सुधार नहीं होता तब तक सत्र को अन्य शहरों में स्थानांतरित करने का विचार किया जाना चाहिए। यह केवल संसद के सदस्यों की सेहत के लिए जरूरी नहीं बल्कि पूरे देश के नागरिकों के लिए एक उदाहरण प्रस्तुत करने का समय है।

  • ओडिशा: मलकानगिरी में महिला की सिर कटी लाश से भड़की हिंसा, दो समुदायों में झड़प, सोशल मीडिया बैन

    ओडिशा: मलकानगिरी में महिला की सिर कटी लाश से भड़की हिंसा, दो समुदायों में झड़प, सोशल मीडिया बैन


    नई दिल्‍ली । ओडिशा सरकार ने मलकानगिरी जिले में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स और इंटरनेट सेवाओं पर लगी रोक एक बार फिर 18 घंटे के लिए बढ़ा दी है। अब यह प्रतिबंध 10 दिसंबर को दोपहर 12 बजे तक लागू रहेगा। जिले में एक महिला की सिर कटी लाश मिलने के बाद दो समुदायों के बीच हुई हिंसक झड़पों के बाद यह कदम उठाया गया है। हिंसा में 163 मकान क्षतिग्रस्त हो गए तथा बड़े पैमाने पर संपत्ति का नुकसान हुआ।

    अफवाहें और भड़काऊ मैसेज रोकने के लिए राज्य सरकार ने पहले 8 दिसंबर शाम 6 बजे से 9 दिसंबर शाम 6 बजे तक 24 घंटे का पूर्ण इंटरनेट शटडाउन लागू किया था। अब इसे आगे बढ़ाया गया है। गृह विभाग की अधिसूचना में कहा गया है कि कुछ असामाजिक तत्व व्हाट्सएप, फेसबुक और X जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर झूठे, भड़काऊ और उत्तेजक मैसेज प्रसारित कर रहे थे, जिससे सार्वजनिक शांति और कानून-व्यवस्था को गंभीर खतरा पैदा हो गया था।

    मलकांगिरी कलेक्टर ने सोमवार शाम संवाददाताओं को बताया- दोनों समुदायों के बीच बातचीत के बाद स्थिति अब शांतिपूर्ण है। दोनों पक्षों ने अपने-अपने प्रतिनिधि नामित कर दिए हैं। शांति समिति की बैठक होगी। हमें उम्मीद है कि जल्द ही पूर्ण सामान्य स्थिति बहाल हो जाएगी। प्रारंभिक आकलन के अनुसार हिंसा में 163 मकान क्षतिग्रस्त हुए हैं। मुख्यमंत्री मोहन चरण मांझी ने मृतका के परिजनों को 4 लाख रुपये की अनुग्रह राशि मंजूर की है। मृतका के बेटे को तत्काल राहत के रूप में पहले ही 30 हजार रुपये दे दिए गए हैं। पोस्टमार्टम के बाद सोमवार को ही अंतिम संस्कार कर दिया गया।

    अभी तक नहीं मिला कटा सिर
    महिला का कटा सिर अभी तक नहीं मिला है। वैज्ञानिक टीम, स्निफर डॉग दस्ता और ओडिशा डिजास्टर रैपिड एक्शन फोर्स (ODRAF) की टीम मौके पर पहुंच चुकी है और सिर की तलाश एवं सबूत जुटाने का काम जारी है। हिंसा प्रभावित इलाकों में भारी संख्या में सुरक्षा बल तैनात कर दिए गए हैं। जिला प्रशासन का कहना है कि स्थिति नियंत्रण में है और शांति समिति की बैठक के बाद सामान्य जनजीवन जल्द बहाल करने की कोशिश की जाएगी।

    किसकी है लाश और कैसे शुरू हुआ बवाल?
    चार दिसंबर को राखेलगुडा गांव के पास नदी के किनारे से 51 वर्षीय विधवा लेक पदियामी का धड़ बरामद होने के बाद क्षेत्र में तनाव व्याप्त हो गया था। यह झड़प रविवार दोपहर को हुई जब राखेलगुडा गांव के आदिवासियों ने कोरकुंडा सदर थाना क्षेत्र के अंतर्गत बंगाली आबादी के इलाके एमवी-26 गांव पर कथित तौर पर हमला किया।

    पुलिस ने बताया कि भीड़ ने कम से कम एक दर्जन घरों को क्षतिग्रस्त कर दिया, कुछ वाहनों को नष्ट कर दिया तथा कम से कम चार घरों को आग लगा दी। अधिकारियों ने बताया कि दो गांवों में निषेधाज्ञा लागू कर दी गई है, जबकि समूचे मलकानगिरी में इंटरनेट सेवाएं निलंबित कर दी गई हैं।

    मलकानगिरी बंगाली समाज के अध्यक्ष गौरांग कर्मकार के नेतृत्व में हजारों लोगों ने जिला कलेक्टर कार्यालय के बाहर प्रदर्शन किया और एमवी-26 गांव पर हमला करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। संगठन ने प्रशासन को दी गई याचिका में कहा कि हमले के दौरान एमवी-26 गांव के अधिकांश निवासी भाग गए हैं।

    बड़ी संख्या में घुसपैठिये जिले में घुस आए
    एक अलग याचिका में जिला आदिवासी समाज महासंघ ने आरोप लगाया कि 1978 से 1980 के बीच बड़ी संख्या में घुसपैठिये जिले में घुस आए थे। उन्होंने सरकारी जमीन पर अतिक्रमण किया और स्थानीय आदिवासियों का शोषण किया। इसमें मांग की गई कि पुलिस हत्या के आरोपियों को तुरंत गिरफ्तार करे और महिला का गायब सिर बरामद करे।

    जिला आदिवासी समाज महासंघ, मलकानगिरी के बैनर तले आदिवासियों ने एक याचिका में अवैध घुसपैठियों और महिला की हत्या करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, भारत सरकार ने 1964 में मलकानगिरी जिले के 215 गांवों और नवरंगपुर जिले के उमरकोट और रायगढ़ के 65 गांवों में प्रवासी बंगाली परिवारों को बसाया था। ये बंगाली पूर्वी पाकिस्तान (अब बांग्लादेश) से आए थे।