Tag: Operation Sindoor

  • देवास में गणेश विसर्जन का भव्य नजारा देर रात तक उमड़ी भीड़ ऑपरेशन सिंदूर की झांकी रही खास आकर्षण

    देवास में गणेश विसर्जन का भव्य नजारा देर रात तक उमड़ी भीड़ ऑपरेशन सिंदूर की झांकी रही खास आकर्षण


    देवास । देवास में अनंत चतुर्दशी के अवसर पर शुक्रवार रात गणेश विसर्जन चल समारोह निकाला गया। शहर की सड़कों पर देर रात तक गणपति बप्पा की भक्ति और देशभक्ति का अनोखा संगम देखने को मिला। अलग अलग क्षेत्रों से निकली गणेश प्रतिमाओं और झांकियों ने पूरे वातावरण को उत्सवमय बना दिया। समारोह में धार्मिक और सामाजिक संदेशों के साथ देशभक्ति से जुड़ी झांकियां भी लोगों के आकर्षण का केंद्र रहीं।

    इस बार गणेश विसर्जन चल समारोह में ऑपरेशन सिंदूर और भारतीय सेना के शौर्य पर आधारित झांकी विशेष रूप से चर्चा में रही। झांकी के जरिए सेना के साहस और देश के प्रति समर्पण को दर्शाने का प्रयास किया गया। इसे देखने के लिए रास्ते के दोनों ओर बड़ी संख्या में लोग जमा हुए। जैसे ही झांकी जुलूस के बीच से गुजरी लोगों ने उत्सुकता के साथ इसे देखा।

    समारोह में 80 से ज्यादा गणेश प्रतिमाएं और झांकियां शामिल हुईं। इनमें अलग अलग सामाजिक धार्मिक और देशभक्ति से जुड़े विषयों को प्रदर्शित किया गया। कई प्रतिमाओं को आकर्षक रोशनी और विशेष सजावट से तैयार किया गया था। रंग बिरंगी लाइटों से सजी झांकियां रात के अंधेरे में और भी आकर्षक नजर आ रही थीं।

    गणेश विसर्जन चल समारोह को देखने के लिए शहर के विभिन्न हिस्सों से लोग पहुंचे। जुलूस जिस मार्ग से गुजर रहा था वहां श्रद्धालुओं की भीड़ दिखाई दी। परिवारों के साथ लोग प्रतिमाओं के दर्शन करने के लिए देर रात तक सड़कों पर मौजूद रहे। कई स्थानों पर स्थानीय लोगों ने जुलूस का स्वागत किया और गणेश प्रतिमाओं पर फूल बरसाए।

    धार्मिक आस्था के इस आयोजन में देशभक्ति से जुड़ी झांकियों ने समारोह को अलग पहचान दी। ऑपरेशन सिंदूर की झांकी में भारतीय सेना के शौर्य और पराक्रम को प्रदर्शित किया गया। बड़ी संख्या में लोगों ने रुककर झांकी को देखा और इसके जरिए दिए जा रहे संदेश को समझने की कोशिश की।

    गणेश विसर्जन के दौरान प्रशासन ने भी व्यवस्थाओं पर नजर बनाए रखी। कलेक्टर ऋतुराज सिंह और पुलिस अधीक्षक पुनीत गेहलोत ने जुलूस मार्ग का निरीक्षण किया। अधिकारियों ने सुरक्षा व्यवस्था के साथ यातायात और भीड़ नियंत्रण की स्थिति का जायजा लिया। जुलूस के दौरान पुलिस बल को अलग अलग स्थानों पर तैनात किया गया था।

    प्रशासन की ओर से श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा को प्राथमिकता देने की बात कही गई। भीड़ वाले स्थानों पर व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस और प्रशासनिक अमला सक्रिय रहा। जुलूस के दौरान लोगों को किसी तरह की परेशानी न हो इसके लिए मार्ग और यातायात व्यवस्था पर भी नजर रखी गई।

    देर रात तक देवास की सड़कों पर गणेश प्रतिमाओं और झांकियों का सिलसिला चलता रहा। श्रद्धालु गणपति बप्पा के दर्शन करते रहे और विसर्जन के लिए आगे बढ़ती प्रतिमाओं को देखते रहे। धार्मिक उत्साह के साथ सेना के शौर्य को दर्शाती झांकी ने इस बार के गणेश विसर्जन समारोह को खास बना दिया।

  • भारत के हमले का असर अब भी दिख रहा सरगोधा एयरबेस का रनवे महीनों बाद भी पूरी तरह तैयार नहीं

    भारत के हमले का असर अब भी दिख रहा सरगोधा एयरबेस का रनवे महीनों बाद भी पूरी तरह तैयार नहीं


    नई दिल्ली। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान के महत्वपूर्ण सैन्य ठिकानों पर हुए हमलों का असर लंबे समय बाद भी दिखाई देने का दावा किया जा रहा है। ताजा हाई रिजॉल्यूशन सैटेलाइट तस्वीरों के आधार पर पाकिस्तान के सरगोधा स्थित मुसहफ एयरबेस के रनवे पर अब भी मरम्मत और निर्माण का काम जारी बताया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक हमले के करीब 16 महीने बाद भी रनवे और टैक्सी ट्रैक के एक महत्वपूर्ण हिस्से पर दोबारा काम किया जा रहा है। तस्वीरों में रनवे के जंक्शन पर खुदाई और नई सतह तैयार करने की गतिविधियां नजर आने की बात कही गई है।

    सरगोधा का मुसहफ एयरबेस पाकिस्तान की वायुसेना के प्रमुख ठिकानों में शामिल माना जाता है। यह लाहौर से लगभग 172 किलोमीटर उत्तर पश्चिम दिशा में और भारत पाकिस्तान सीमा के पास अमृतसर से करीब 200 किलोमीटर पश्चिम में स्थित है। इसकी भौगोलिक स्थिति और सैन्य महत्व के कारण ऑपरेशन सिंदूर के दौरान यह भारत के निशाने पर रहे प्रमुख एयरबेस में शामिल था।

    रिपोर्ट के अनुसार 12 सितंबर 2026 की सैटेलाइट तस्वीरों में रनवे और टैक्सी ट्रैक के मिलन वाले हिस्से में अलग रंग का क्षेत्र दिखाई देता है। यह हिस्सा आसपास की डामर वाली सतह से अलग नजर आ रहा है। तस्वीरों के विश्लेषण के आधार पर यहां दोबारा खुदाई और रीसरफेसिंग का काम किए जाने की संभावना जताई गई है। एयरबेस के उत्तरी हिस्से में पहले हुए हमले से बने गड्ढे के क्षेत्र में भी जमीन की ऊपरी परत हटाकर नीचे के स्तर तक काम किए जाने की बात सामने आई है।

    विशेषज्ञों के अनुसार किसी रनवे की मरम्मत केवल ऊपर से नई परत बिछाने तक सीमित नहीं होती। यदि हमले के बाद की गई अस्थायी मरम्मत के नीचे की जमीन कमजोर हो गई हो या सतह में असमानता अथवा धंसने जैसी समस्या सामने आई हो तो पूरे प्रभावित हिस्से को दोबारा तैयार करना पड़ सकता है। यही वजह है कि सैटेलाइट तस्वीरों में अलग अलग हिस्सों में अलग स्तर का निर्माण कार्य दिखाई देने की बात कही गई है।

    ऑपरेशन सिंदूर के दौरान मुसहफ एयरबेस पर हुए हमले की पुरानी सैटेलाइट तस्वीरों में मुख्य रनवे पर नुकसान के निशान दिखाई देने का दावा किया गया था। रिपोर्ट के मुताबिक करीब 3200 मीटर लंबे रनवे पर दो स्थानों को निशाना बनाया गया था। इनमें एक जगह लगभग 8 से 9 मीटर चौड़ा और 4 से 5 मीटर गहरा गड्ढा बनने की बात सामने आई थी। दूसरा निशाना पहले स्थान से करीब 660 मीटर की दूरी पर था।

    10 मई 2025 को भारत और पाकिस्तान के बीच सैन्य तनाव के दौरान पाकिस्तान के कई सैन्य ठिकानों और वायु रक्षा से जुड़े प्रतिष्ठानों को निशाना बनाए जाने की जानकारी सामने आई थी। भारतीय पक्ष ने ऑपरेशन के दौरान पाकिस्तान के एयरबेस और अन्य सैन्य ढांचे को निशाना बनाने की बात कही थी। इसके बाद दोनों देशों के बीच सैन्य कार्रवाई रोकने को लेकर बातचीत हुई और युद्धविराम की स्थिति बनी।

    अब करीब 16 महीने बाद सामने आई सैटेलाइट तस्वीरों में सरगोधा एयरबेस के प्रभावित हिस्सों में निर्माण गतिविधियां दिखाई देने का दावा इस बात की ओर संकेत करता है कि हमले से प्रभावित बुनियादी ढांचे की बहाली में लंबा समय लग रहा है। हालांकि सैटेलाइट तस्वीरों से किसी सैन्य ठिकाने की पूरी परिचालन स्थिति का आकलन करना संभव नहीं होता। इसलिए यह कहना अलग विषय है कि एयरबेस पूरी तरह परिचालन में है या नहीं। इतना जरूर है कि रनवे के कुछ हिस्सों में निर्माण और सतह सुधार का काम अभी भी जारी दिखाई दे रहा है।

  • ओवैसी की चुनौती पर रामेश्वर शर्मा का जवाब काजी कैंप और UCC को लेकर फिर आमने सामने आए दोनों नेता

    ओवैसी की चुनौती पर रामेश्वर शर्मा का जवाब काजी कैंप और UCC को लेकर फिर आमने सामने आए दोनों नेता


    भोपाल । AIMIM प्रमुख और हैदराबाद सांसद असदुद्दीन ओवैसी के भोपाल में दिए गए बयान के बाद भाजपा विधायक रामेश्वर शर्मा ने पलटवार किया है। ओवैसी ने मंगलवार को भोपाल के सेंट्रल लाइब्रेरी ग्राउंड में आयोजित UCC विरोधी सभा के दौरान रामेश्वर शर्मा के काजी कैंप में मिसाइल लॉन्च करने वाले बयान का जिक्र किया था। उन्होंने विधायक को काजी कैंप आने की चुनौती दी थी। इसके बाद बुधवार को रामेश्वर शर्मा ने ओवैसी के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए अपने पुराने बयान पर कायम रहने की बात कही।

    रामेश्वर शर्मा ने ओवैसी को संबोधित करते हुए कहा कि अगर वह बैरिस्टर हैं तो उन्हें बदतमीजी की भाषा छोड़ देनी चाहिए। इसके बाद विधायक ने बेहद आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल करते हुए ओवैसी पर व्यक्तिगत टिप्पणी की। उन्होंने ऑपरेशन सिंदूर का जिक्र करते हुए कहा कि भारत के वैज्ञानिकों की ओर से तैयार की गई मिसाइलों का इस्तेमाल भारतीय सेना ने किया और पाकिस्तान में आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया गया। शर्मा ने दावा किया कि आतंकवाद और भारत विरोधी गतिविधियों से जुड़े ठिकानों के खिलाफ भारत की मिसाइल कार्रवाई जारी रहेगी।

    विधायक ने कहा कि मिसाइल चलती थी और मिसाइल चलती रहेगी। उन्होंने कहा कि जहां आतंकवाद के कैंप होंगे और जहां भारत विरोधी गतिविधियों से जुड़े कैंप होंगे वहां भारत की मिसाइल तैयार है। शर्मा ने कहा कि वह अपने पहले दिए गए बयान पर कल भी कायम थे और आज भी कायम हैं। उन्होंने ओवैसी को पूरा भाषण सुनने की बात कहते हुए कहा कि अगर उन्हें आपत्ति है तो वह वकील होने के नाते इसे अदालत में ले जा सकते हैं।

    इसके बाद रामेश्वर शर्मा ने समान नागरिक संहिता यानी UCC को लेकर भी ओवैसी के बयान पर जवाब दिया। उन्होंने कहा कि राजनीतिक दल हिंदुओं से वोट मांगते हैं तो हिंदुओं से जुड़े कानूनों को लेकर सवाल क्यों उठाए जाते हैं। उन्होंने UCC को लेकर अपनी पार्टी के समर्थन की बात दोहराई और कहा कि मध्यप्रदेश में UCC लागू हो चुका है। शर्मा ने यह भी दावा किया कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने 2029 तक 21 राज्यों में UCC लागू होने की बात कही है।

    ओवैसी ने भोपाल में आयोजित अपनी सभा में UCC को लेकर अलग रुख रखा था। उन्होंने सवाल उठाया था कि यदि मध्यप्रदेश में आदिवासी समुदाय को उनकी संस्कृति परंपरा और धार्मिक पहचान के कारण UCC से बाहर रखा गया है तो मुसलमानों को इसके दायरे में क्यों शामिल किया गया। उन्होंने UCC के जरिए RSS का एजेंडा चलाने का आरोप लगाया था। ओवैसी ने धार्मिक स्वतंत्रता और संविधान में दिए गए अधिकारों का भी हवाला दिया था।

    इस तरह भोपाल में UCC को लेकर दोनों नेताओं के बीच राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। एक ओर ओवैसी UCC के प्रावधानों और इसके दायरे को लेकर सवाल उठा रहे हैं तो दूसरी ओर रामेश्वर शर्मा इसे लागू करने के समर्थन में अपना पक्ष रख रहे हैं। मिसाइल संबंधी पुराने बयान को लेकर ओवैसी की चुनौती के बाद शर्मा के जवाब ने इस राजनीतिक विवाद को और चर्चा में ला दिया है।

  • MP के 11 जिलों में आज हैवी रेन अलर्ट, सीधी-मऊगंज-डिंडौरी में अति भारी बारिश की चेतावनी

    MP के 11 जिलों में आज हैवी रेन अलर्ट, सीधी-मऊगंज-डिंडौरी में अति भारी बारिश की चेतावनी


    भोपाल। मध्य प्रदेश में मानसून ने एक बार फिर रफ्तार पकड़ ली है। बंगाल की खाड़ी से एक्टिव स्ट्रॉन्ग सिस्टम का असर अगले दो दिन प्रदेश के पूर्वी हिस्से यानी जबलपुर, शहडोल, रीवा और सागर संभाग में रहेगा। इसके बाद सिस्टम पश्चिमी हिस्से के भोपाल, इंदौर, उज्जैन, नर्मदापुरम और ग्वालियर-चंबल संभाग को प्रभावित करेगा।

    सोमवार को सीधी, मऊगंज और डिंडौरी में अति भारी बारिश का ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है। इन जिलों में अगले 24 घंटे में 4 से 8 इंच तक बारिश होने का अनुमान है। वहीं सतना, पन्ना, दमोह, कटनी, शहडोल, अनूपपुर, जबलपुर, नरसिंहपुर, सिवनी, मंडला और बालाघाट में भारी बारिश की चेतावनी है।

    इन जिलों में भी बारिश के आसार
    भोपाल, रायसेन, सीहोर, राजगढ़, विदिशा, इंदौर, धार, अलीराजपुर, बुरहानपुर, बड़वानी, खंडवा, खरगोन, झाबुआ, उज्जैन, नीमच, आगर-मालवा, मंदसौर, शाजापुर, देवास, रतलाम, नर्मदापुरम, बैतूल, हरदा, ग्वालियर, गुना, शिवपुरी, दतिया, अशोकनगर, मुरैना, भिंड, श्योपुर, छिंदवाड़ा, मंडला, पांढुर्णा, रीवा, सिंगरौली, मैहर, उमरिया, सागर, दमोह, छतरपुर, टीकमगढ़ और निवाड़ी में कहीं तेज तो कहीं हल्की बारिश हो सकती है।

    भोपाल-ग्वालियर-चंबल में 17 से 19 अगस्त तक असर
    मौसम विभाग के मुताबिक मौजूदा सिस्टम का असर भोपाल, ग्वालियर और चंबल संभाग में भी रहेगा। 17, 18 और 19 अगस्त को इन संभागों के कुछ जिलों में तेज बारिश का अलर्ट है।

    मौसम विशेषज्ञ शैलेंद्र कुमार नायक ने बताया कि 15 से 21 अगस्त तक पूर्वी और पश्चिमी दोनों हिस्सों में बारिश का दौर जारी रहने की संभावना है। पूर्वी हिस्से में 15 से 19 अगस्त तक तेज बारिश होगी, जबकि इसके बाद पश्चिमी हिस्से में सिस्टम का असर बढ़ेगा।

    प्रदेश में अब तक 21.4 इंच बारिश
    मौसम केंद्र के अनुसार, प्रदेश में अब तक 544.4 मिमी यानी 21.4 इंच बारिश हो चुकी है। यह सामान्य बारिश 24.4 इंच (618.8 मिमी) से करीब 3 इंच कम है। प्रदेश में अब तक सामान्य से 12% कम बारिश हुई है। पूर्वी हिस्से में 18% और पश्चिमी हिस्से में 6% कम बारिश दर्ज की गई है।

    43 जिलों में 2% से 54% तक कम बारिश
    पूर्वी हिस्से के जबलपुर, रीवा, सागर और शहडोल संभाग में सामान्य से 19% तक कम बारिश हुई है। बालाघाट, छतरपुर, छिंदवाड़ा, दमोह, डिंडौरी, जबलपुर, कटनी, मैहर, मंडला, मऊगंज, नरसिंहपुर, निवाड़ी, पांढुर्णा, पन्ना, रीवा, सागर, सतना, सिवनी, शहडोल, सीधी, सिंगरौली, टीकमगढ़ और उमरिया में 2% से 54% तक कम बारिश दर्ज की गई है।

    पश्चिमी हिस्से के आगर-मालवा, अलीराजपुर, अशोकनगर, बैतूल, दतिया, धार, हरदा, इंदौर, झाबुआ, मुरैना, मंदसौर, नर्मदापुरम, नीमच, रायसेन, रतलाम, शाजापुर, श्योपुर, शिवपुरी, उज्जैन और विदिशा में सामान्य से 1% से 48% तक कम बारिश हुई है।

    12 जिलों में सामान्य से ज्यादा बारिश
    भोपाल, गुना, सीहोर, राजगढ़, ग्वालियर, अनूपपुर, भिंड, बुरहानपुर, देवास, बड़वानी, खंडवा और खरगोन में अब तक औसत से ज्यादा बारिश दर्ज की गई है।

  • जगद्गुरु रामभद्राचार्य बोले- दो दिन और चलता 'ऑपरेशन सिंदूर तो PoK भारत का हिस्सा बन गया होता

    जगद्गुरु रामभद्राचार्य बोले- दो दिन और चलता 'ऑपरेशन सिंदूर तो PoK भारत का हिस्सा बन गया होता


    लखनऊ ।
    उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के लखनऊ (Lucknow) में आयोजित श्रीराम कथा कार्यक्रम में जगद्गुरु रामभद्राचार्य (Jagadguru Rambhadracharya) ने ऑपरेशन सिंदूर (Operation Sindoor) को लेकर बड़ा बयान दिया. उन्होंने कहा कि अगर ऑपरेशन सिंदूर (Operation Sindoor) दो दिन और जारी रहता तो पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (Pakistan occupied Kashmir) यानी पीओके भारत का हिस्सा बन गया होता. उनके इस बयान के दौरान रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह (Defence Minister Rajnath Singh) भी मंच पर मौजूद थे।

    जगद्गुरु रामभद्राचार्य ने अपने संबोधन में कहा कि रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के कार्यकाल में ऑपरेशन सिंदूर के तहत पाकिस्तान में स्थित नौ आतंकी ठिकानों को नष्ट किया गया. उन्होंने दावा किया कि यदि यह अभियान कुछ और समय तक चलता तो पीओके का भारत में विलय संभव हो सकता था.

    रामभद्राचार्य ने भारतीय सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी का भी जिक्र किया. उन्होंने कहा कि जब सेना प्रमुख ने उनसे गुरु दक्षिणा देने की इच्छा जताई थी, तब उन्होंने पीओके को भारत में वापस लाने की इच्छा व्यक्त की थी. यह कार्यक्रम लखनऊ में आयोजित श्रीराम कथा के दौरान हुआ. कार्यक्रम में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह मुख्य रूप से मौजूद रहे. रामभद्राचार्य ने उनकी ओर इशारा करते हुए कहा कि वह क्षत्रिय हैं और राष्ट्र की रक्षा की जिम्मेदारी उनके कंधों पर है।


    राजनाथ सिंह की मौजूदगी में रामभद्राचार्य का बड़ा दावा

    उन्होंने यह भी कहा कि वर्ष 2029 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी फिर से सरकार बनाएंगे और राजनाथ सिंह एक बार फिर रक्षा मंत्री की जिम्मेदारी संभालेंगे. रामभद्राचार्य ने अपने संबोधन में ऑपरेशन सिंदूर का उल्लेख करते हुए कहा कि यह अभियान आतंकवाद के खिलाफ एक बड़ी कार्रवाई थी. बता दें, भारत ने साल 2025 में पहलगाम आतंकी हमले के बाद पाकिस्तान में मौजूद आतंकी ढांचे को निशाना बनाते हुए ऑपरेशन सिंदूर चलाया था.


    रामचरितमानस को राष्ट्रीय ग्रंथ घोषित करने की मांग

    अपने संबोधन के दौरान रामभद्राचार्य ने जगद्गुरु रामभद्राचार्य दिव्यांग राज्य विश्वविद्यालय को केंद्रीय विश्वविद्यालय का दर्जा देने की मांग भी की. इसके साथ ही उन्होंने रामचरितमानस को राष्ट्रीय ग्रंथ घोषित करने की मांग रखी. उन्होंने कहा कि भगवान राम राष्ट्र के कल्याण और सांस्कृतिक चेतना के प्रतीक हैं. कार्यक्रम को संबोधित करते हुए रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि वह पिछले तीन दशकों से जगद्गुरु रामभद्राचार्य को जानते हैं. उन्होंने कहा कि इतनी अद्भुत स्मरण शक्ति और असाधारण प्रतिभा उन्होंने कहीं और नहीं देखी. राजनाथ सिंह ने रामभद्राचार्य के ज्ञान, साहित्य और आध्यात्मिक योगदान की सराहना करते हुए उन्हें समाज के लिए प्रेरणास्रोत बताया.

  • ऑपरेशन सिंदूर बना भारत की सैन्य ताकत का प्रतीक, आधुनिक युद्ध क्षमता और तीनों सेनाओं के तालमेल की मिसाल

    ऑपरेशन सिंदूर बना भारत की सैन्य ताकत का प्रतीक, आधुनिक युद्ध क्षमता और तीनों सेनाओं के तालमेल की मिसाल

    नई दिल्ली । रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा है कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत की सैन्य कार्रवाई इतनी प्रभावशाली रही कि पाकिस्तान मात्र चार दिनों के भीतर ही युद्धविराम की अपील करने पर मजबूर हो गया। उन्होंने इस अभियान को भारत की निर्णायक सैन्य इच्छाशक्ति, आधुनिक तकनीकी क्षमता और तीनों सेनाओं के उत्कृष्ट समन्वय का प्रतीक बताया। उनके अनुसार यह ऑपरेशन केवल एक सैन्य कार्रवाई नहीं था, बल्कि यह भारत की रणनीतिक मजबूती और बदलती रक्षा क्षमता का स्पष्ट प्रदर्शन था, जिसने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी देश की स्थिति को और सुदृढ़ किया।

    राजनाथ सिंह ने यह बात उस अवसर पर कही जब नई दिल्ली में ऑपरेशन सिंदूर पर आधारित एक स्मारक प्रकाशन का विमोचन किया गया। इस कार्यक्रम में भारतीय सेना के शीर्ष अधिकारी मौजूद रहे और पूरा वातावरण राष्ट्रीय भावना और गर्व से परिपूर्ण दिखाई दिया। रक्षा मंत्री ने कहा कि यह प्रकाशन केवल घटनाओं का संकलन नहीं है, बल्कि उन सैनिकों के अनुभवों, संघर्षों और साहस की कहानी भी प्रस्तुत करता है जिन्होंने कठिन परिस्थितियों में देश की सुरक्षा सुनिश्चित की। उन्होंने कहा कि आधुनिक युद्ध केवल हथियारों से नहीं जीते जाते, बल्कि इसमें नेतृत्व क्षमता, मानसिक दृढ़ता और सही निर्णय लेने की क्षमता निर्णायक भूमिका निभाती है।

    उन्होंने यह भी कहा कि ऑपरेशन सिंदूर ने यह साबित किया कि भारतीय सशस्त्र बल अब पारंपरिक युद्ध सीमाओं से आगे बढ़कर तेज, सटीक और बहुआयामी अभियानों को सफलतापूर्वक अंजाम देने में सक्षम हैं। उनके अनुसार यह अभियान भारत की सैन्य रणनीति में आए बड़े बदलाव का संकेत है, जिसमें तकनीक, समन्वय और त्वरित निर्णय क्षमता को केंद्र में रखा गया है। रक्षा मंत्री ने जोर देकर कहा कि ऐसे अभियानों से न केवल राष्ट्रीय सुरक्षा मजबूत होती है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय मंच पर भी भारत की स्थिति अधिक सशक्त होती है।

    इस अवसर पर चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल अनिल चौहान, वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह, नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश कुमार त्रिपाठी सहित सशस्त्र बलों के कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। कार्यक्रम में ऑपरेशन सिंदूर के रणनीतिक पहलुओं, संयुक्त सैन्य समन्वय और आधुनिक तकनीक के उपयोग पर भी चर्चा की गई। विशेषज्ञों के अनुसार यह अभियान भारतीय सैन्य इतिहास में एक महत्वपूर्ण उदाहरण के रूप में देखा जा रहा है, जिसने यह स्पष्ट किया है कि भारत अपनी सुरक्षा और संप्रभुता के मुद्दों पर किसी भी प्रकार का समझौता नहीं करेगा।

    राजनाथ सिंह ने नागरिकों से भी अपील की कि वे इस प्रकार के प्रकाशनों और अनुभवों से प्रेरणा लें और राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखने वाले जिम्मेदार नागरिक बनें। उन्होंने कहा कि जब सैनिक सीमाओं पर अपने प्राणों की आहुति देने को तैयार रहते हैं, तब समाज का भी कर्तव्य बनता है कि वह देश की एकता, सुरक्षा और संप्रभुता के प्रति सजग और समर्पित रहे।

  • तुर्की-पाकिस्तान समीकरण के बीच भारत की बढ़ती रक्षा ताकत, साइप्रस ने दिखाई रणनीतिक हथियारों में गहरी रुचि

    तुर्की-पाकिस्तान समीकरण के बीच भारत की बढ़ती रक्षा ताकत, साइप्रस ने दिखाई रणनीतिक हथियारों में गहरी रुचि


    नई दिल्ली । वैश्विक भू-राजनीति के बदलते परिदृश्य में रक्षा सहयोग और रणनीतिक साझेदारियां लगातार नई दिशा ले रही हैं। ऐसे समय में भारत की रक्षा क्षमताओं को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ती रुचि एक महत्वपूर्ण संकेत माना जा रहा है। हाल के घटनाक्रमों ने यह संकेत दिया है कि भारतीय रक्षा तकनीक अब केवल घरेलू सुरक्षा तक सीमित नहीं रह गई, बल्कि अंतरराष्ट्रीय रणनीतिक समीकरणों में भी उसकी भूमिका तेजी से मजबूत हो रही है। इसी कड़ी में साइप्रस की ओर से भारतीय रक्षा प्रणालियों में बढ़ती दिलचस्पी ने नई चर्चाओं को जन्म दिया है।

    हाल ही में साइप्रस के राष्ट्रपति Nikos Christodoulides की भारत यात्रा के बाद दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। इस दौरान कई उच्चस्तरीय मुलाकातें हुईं, जिनमें द्विपक्षीय संबंधों और रणनीतिक सहयोग पर विचार-विमर्श किया गया। माना जा रहा है कि इस यात्रा ने दोनों देशों के बीच रक्षा क्षेत्र में संभावित साझेदारी के लिए नई संभावनाएं खोल दी हैं।

    सूत्रों के अनुसार साइप्रस विशेष रूप से भारत की उन रक्षा प्रणालियों में रुचि दिखा रहा है, जिन्होंने हाल के सैन्य अभियानों के दौरान अपनी क्षमताओं का प्रदर्शन किया था। चर्चा है कि भारत की उन्नत मिसाइल तकनीक और स्वदेशी ड्रोन प्रणालियां साइप्रस के रणनीतिक हितों के केंद्र में हैं। हालांकि अभी तक किसी औपचारिक समझौते की घोषणा नहीं हुई है, लेकिन दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग को लेकर संभावनाएं लगातार मजबूत होती दिखाई दे रही हैं।

    भारत की रक्षा क्षमता में सबसे अधिक चर्चा जिस प्रणाली को लेकर हो रही है, वह है BrahMos मिसाइल। अपनी सटीकता और तेज मारक क्षमता के कारण यह प्रणाली अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चर्चा का विषय बनी हुई है। इसके अलावा स्वदेशी ड्रोन और आधुनिक रक्षा तकनीकों ने भी कई देशों का ध्यान आकर्षित किया है। रक्षा विशेषज्ञ मानते हैं कि भारतीय प्रणालियां अब विश्व बाजार में एक भरोसेमंद और प्रभावी विकल्प के रूप में उभर रही हैं।

    क्षेत्रीय समीकरणों को देखते हुए इस संभावित सहयोग को रणनीतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। पश्चिम एशिया और यूरोप क्षेत्र में कई देशों के बीच बदलते रक्षा संबंधों के कारण ऐसे सहयोगों को व्यापक भू-राजनीतिक परिप्रेक्ष्य में देखा जा रहा है। विश्लेषकों का मानना है कि यदि रक्षा सहयोग आगे बढ़ता है तो इसका असर केवल सैन्य स्तर पर नहीं बल्कि क्षेत्रीय रणनीतिक संतुलन पर भी पड़ सकता है।

    भारत पिछले कुछ वर्षों में रक्षा निर्यात को बढ़ावा देने पर लगातार जोर दे रहा है। स्वदेशी तकनीक और आत्मनिर्भरता पर आधारित रक्षा मॉडल ने कई देशों का ध्यान आकर्षित किया है। फिलहाल साइप्रस की बढ़ती दिलचस्पी इस बात का संकेत मानी जा रही है कि भारतीय रक्षा उद्योग अब वैश्विक मंच पर तेजी से अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज करा रहा है। आने वाले समय में यह सहयोग किस दिशा में आगे बढ़ता है, इस पर अंतरराष्ट्रीय रणनीतिक हलकों की नजर बनी रहेगी।

  • भारत के खतरे को लेकर पाकिस्तान में चिंता: विशेषज्ञों ने डिफेंस मजबूत करने की दी सलाह

    भारत के खतरे को लेकर पाकिस्तान में चिंता: विशेषज्ञों ने डिफेंस मजबूत करने की दी सलाह



    नई दिल्ली। भारत और पाकिस्तान के बीच तनावपूर्ण रिश्तों के बीच पाकिस्तान में एक बार फिर भारत की सैन्य क्षमता को लेकर चिंता बढ़ गई है। “ऑपरेशन सिंदूर” के बाद से वहां के सुरक्षा विशेषज्ञ और रणनीतिक विश्लेषक भारत से संभावित भविष्य के सैन्य अभियानों को लेकर सतर्कता बरतने की सलाह दे रहे हैं।

    पाकिस्तान के रक्षा और रणनीतिक मामलों से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि भारत की बदलती सैन्य रणनीति और तकनीकी बढ़त को देखते हुए देश को अपनी रक्षा क्षमताओं को और मजबूत करने की जरूरत है। उनका मानना है कि आधुनिक युद्ध तकनीक और नई रणनीतियां क्षेत्रीय संतुलन को प्रभावित कर रही हैं।

    भारत की सैन्य रणनीति पर पाकिस्तान की नजर
    कायदे-आज़म विश्वविद्यालय और अन्य संस्थानों के विशेषज्ञों ने कहा कि दक्षिण एशिया में रणनीतिक स्थिरता बनाए रखने के लिए भारत और पाकिस्तान के बीच संवाद जरूरी है। लेकिन साथ ही उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि भारत के सैन्य सिद्धांतों में बदलाव आ रहा है, जिसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

    विशेषज्ञों के अनुसार, भारत की ओर से सर्जिकल स्ट्राइक और अन्य सीमित सैन्य कार्रवाइयों की रणनीति ने पाकिस्तान की सुरक्षा सोच को प्रभावित किया है।

    आधुनिक युद्ध तकनीक पर जोर
    पाकिस्तानी रक्षा विश्लेषकों ने कहा कि भविष्य के युद्धों में ड्रोन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, हाइपरसोनिक मिसाइलें और उन्नत निगरानी प्रणाली अहम भूमिका निभाएंगी। ऐसे में पाकिस्तान को भी अपनी सैन्य तकनीक को आधुनिक बनाने की जरूरत है।

    एयर कमोडोर (सेवानिवृत्त) खालिद बनूरी के अनुसार, युद्ध का स्वरूप तेजी से बदल रहा है और निर्णय लेने की गति अब पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण हो गई है।

    निष्कर्ष
    कुल मिलाकर, पाकिस्तान में सुरक्षा विशेषज्ञ भारत की बढ़ती सैन्य क्षमता को एक रणनीतिक चुनौती के रूप में देख रहे हैं और सरकार को रक्षा सुधारों की सलाह दे रहे हैं। हालांकि, साथ ही यह भी माना जा रहा है कि क्षेत्रीय स्थिरता के लिए दोनों देशों के बीच संवाद और कूटनीति जरूरी है।

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  • भारत के ऑपरेशन सिंदूर से हिल गया पाकिस्तान! परमाणु नीति बदलने की तैयारी में जुटा इस्लामाबाद

    भारत के ऑपरेशन सिंदूर से हिल गया पाकिस्तान! परमाणु नीति बदलने की तैयारी में जुटा इस्लामाबाद




    नई दिल्ली। पाकिस्तान में भारत के ऑपरेशन सिंदूर की पहली वर्षगांठ पर हुई एक बड़ी रणनीतिक बैठक ने इस्लामाबाद की बढ़ती चिंता को उजागर कर दिया है। राजधानी इस्लामाबाद में आयोजित इस हाई-लेवल चर्चा में पाकिस्तान के पूर्व सैन्य अधिकारियों, परमाणु रणनीतिकारों और सुरक्षा विशेषज्ञों ने खुलकर माना कि दक्षिण एशिया का सुरक्षा संतुलन तेजी से बदल रहा है और भारत की सैन्य, तकनीकी और साइबर क्षमता पाकिस्तान के लिए नई चुनौती बनती जा रही है।

    यह बैठक Centre for International Strategic Studies की ओर से आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान हुई, जिसमें पाकिस्तान के कई बड़े रक्षा विशेषज्ञ शामिल हुए। चर्चा का मुख्य मुद्दा भारत की बदलती सैन्य रणनीति और भविष्य के युद्धों का नया स्वरूप रहा। विशेषज्ञों ने कहा कि आने वाले समय में युद्ध केवल सीमा पर टैंकों और मिसाइलों तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि साइबर अटैक, हाइब्रिड वॉरफेयर, सूचना युद्ध और मानसिक दबाव जैसी रणनीतियां निर्णायक भूमिका निभाएंगी।

    पाकिस्तान के पूर्व ज्वाइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ कमेटी चेयरमैन जनरल जुबैर हयात ने कहा कि आधुनिक युद्ध का स्वरूप पूरी तरह बदल चुका है और देशों को अब सिर्फ पारंपरिक हथियारों पर निर्भर नहीं रहना चाहिए। वहीं पाकिस्तान के परमाणु कार्यक्रम से जुड़े वरिष्ठ रणनीतिकार लेफ्टिनेंट जनरल (रिटायर्ड) खालिद अहमद किदवई ने कहा कि हालिया घटनाओं ने पाकिस्तान की “डिटरेंस पॉलिसी” की ताकत और कमजोरियों दोनों को सामने ला दिया है। उन्होंने संकेत दिए कि मई 2025 में भारत-पाक तनाव के बाद पाकिस्तान अपनी सुरक्षा रणनीति की समीक्षा कर रहा है।

    बैठक में शामिल विशेषज्ञों ने माना कि भारत तेजी से रक्षा आधुनिकीकरण, साइबर क्षमता और हाई-प्रिसिजन हथियारों पर काम कर रहा है। यही कारण है कि पाकिस्तान अब अपने “डिटरेंस मॉडल” को नए खतरों के हिसाब से ढालने की कोशिश कर रहा है। पाकिस्तान के रणनीतिक योजनाकारों का मानना है कि भविष्य में सीमित सैन्य कार्रवाई, साइबर हमले और सूचना युद्ध किसी भी संकट को तेजी से बड़े टकराव में बदल सकते हैं।

    इस दौरान पाकिस्तान के पूर्व राजनयिक जमीर अकरम ने दावा किया कि भारत की मौजूदा रणनीति से क्षेत्र में असुरक्षा बढ़ रही है। हालांकि भारत लगातार यह कहता रहा है कि उसकी सैन्य कार्रवाई केवल आतंकवाद और सीमा पार खतरों के खिलाफ जवाबी सुरक्षा नीति का हिस्सा है। भारत का साफ कहना है कि क्षेत्रीय शांति तभी संभव है जब आतंकवाद के खिलाफ ठोस कदम उठाए जाएं।

    गौरतलब है कि पिछले वर्ष पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत ने ऑपरेशन सिंदूर के तहत पाकिस्तान और पीओके में मौजूद 9 आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया था। इसके बाद पाकिस्तान की ओर से भारतीय सैन्य ठिकानों को टारगेट करने की कोशिश हुई, जिसके जवाब में भारतीय सेना ने ब्रह्मोस मिसाइलों से पाकिस्तान के 11 एयरबेस पर हमला किया था। भारत द्वारा जारी सैटेलाइट तस्वीरों ने इन हमलों की पुष्टि भी की थी।

    अब पाकिस्तान में हो रही रणनीतिक बैठकों और बदलते बयानों से साफ संकेत मिल रहे हैं कि भारत की सैन्य और तकनीकी ताकत ने इस्लामाबाद की चिंता बढ़ा दी है। यही वजह है कि पाकिस्तान अब भविष्य के युद्धों के लिए अपनी परमाणु और रक्षा नीति को नए सिरे से तैयार करने में जुटा हुआ है।

  • ऑपरेशन सिंदूर पर बड़ा विवाद: लश्कर कमांडर के दावों से पाकिस्तान में मचा हड़कंप, सैन्य ठिकानों पर हमले के आरोप

    ऑपरेशन सिंदूर पर बड़ा विवाद: लश्कर कमांडर के दावों से पाकिस्तान में मचा हड़कंप, सैन्य ठिकानों पर हमले के आरोप



    नई दिल्ली। भारत और पाकिस्तान के बीच कथित “ऑपरेशन सिंदूर” को लेकर सामने आए दावों के बाद एक बार फिर सोशल मीडिया और क्षेत्रीय मीडिया में अलग-अलग तरह की चर्चाएं तेज हो गई हैं। कई वायरल वीडियो और बयानों में यह दावा किया जा रहा है कि मई 2025 में हुए इस कथित ऑपरेशन के दौरान पाकिस्तान के मुरीदके और कुछ अन्य इलाकों में लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े ठिकानों को भारी नुकसान पहुंचा था, हालांकि इन दावों की स्वतंत्र और आधिकारिक पुष्टि अब तक नहीं हुई है।

    वायरल दावों में यह भी कहा जा रहा है कि हमलों के बाद स्थिति काफी गंभीर हो गई थी और कुछ आतंकी ढांचों को बड़ा नुकसान हुआ था, यहां तक कि मलबे से शवों के टुकड़े इकट्ठा करने जैसे दावे भी सामने आए हैं। लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे विवरण अक्सर अपुष्ट स्रोतों और प्रचार वीडियो पर आधारित होते हैं, जिनकी सत्यता की पुष्टि जरूरी होती है।

    इसी तरह कुछ वीडियो क्लिप्स में यह भी दावा किया गया है कि पाकिस्तान के कई सैन्य ठिकानों और एयरबेस को निशाना बनाया गया, और हमले के बाद वहां सुरक्षा और प्रतिक्रिया व्यवस्था पर सवाल उठे। साथ ही यह भी कहा जा रहा है कि पाकिस्तान के शीर्ष सैन्य नेतृत्व ने धार्मिक दुआओं और धार्मिक आयतों का सहारा लिया, लेकिन इन सभी बातों पर किसी भी सरकारी स्तर से आधिकारिक पुष्टि उपलब्ध नहीं है।

    भारत सरकार या भारतीय सेना की ओर से भी इस नाम से किसी बड़े “ऑपरेशन सिंदूर” की विस्तृत आधिकारिक जानकारी सार्वजनिक रूप से साझा नहीं की गई है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि कई रिपोर्ट्स अभी तक अपुष्ट और दावे आधारित हैं।

    रक्षा मामलों के जानकारों का कहना है कि ऐसे संवेदनशील मुद्दों पर अक्सर सूचना युद्ध (information warfare) की भूमिका बढ़ जाती है, जहां दोनों पक्ष अपने-अपने दावे और नैरेटिव पेश करते हैं। इसलिए किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले केवल विश्वसनीय और आधिकारिक स्रोतों पर भरोसा करना जरूरी होता है।

    फिलहाल यह पूरा मामला सोशल मीडिया दावों, वीडियो क्लिप्स और अनौपचारिक बयानों के बीच उलझा हुआ है और इसकी सच्चाई को लेकर स्पष्ट स्थिति सामने आना बाकी है।