Tag: Operation Sindoor

  • तेज, सटीक और घातक कार्रवाई: 22 मिनट में खत्म हुआ आतंकियों का नेटवर्क

    तेज, सटीक और घातक कार्रवाई: 22 मिनट में खत्म हुआ आतंकियों का नेटवर्क

    नई दिल्ली । भारतीय सेना ने एक बार फिर यह स्पष्ट कर दिया है कि देश की सुरक्षा के साथ किसी भी तरह का समझौता नहीं किया जाएगा। हाल ही में ऑपरेशन सिंदूर को लेकर साझा किए गए नए वीडियो ने न केवल सैन्य क्षमता का प्रदर्शन किया है बल्कि आतंकवाद के खिलाफ भारत की दृढ़ नीति का भी संदेश दिया है। महज 22 मिनट में अंजाम दिए गए इस ऑपरेशन ने आतंकियों के पूरे कमांड ढांचे को हिलाकर रख दिया।

    सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर साझा किए गए आधिकारिक पोस्ट में सेना ने साफ शब्दों में कहा कि जब मानवता की सीमाएं पार होती हैं तो प्रतिक्रिया भी उतनी ही निर्णायक होती है। यह संदेश न केवल चेतावनी है बल्कि उन ताकतों के लिए संकेत भी है जो भारत की शांति और सुरक्षा को चुनौती देने की कोशिश करते हैं।

    सेना के अनुसार, इस ऑपरेशन की सबसे बड़ी खासियत इसकी गति और सटीकता रही। बेहद कम समय में कई लक्ष्यों को एक साथ निशाना बनाते हुए आतंकियों के नेटवर्क को गहरा नुकसान पहुंचाया गया। वीडियो में दिखाया गया है कि कैसे आधुनिक तकनीक और सटीक रणनीति के साथ अलग-अलग टारगेट्स पर समन्वित तरीके से कार्रवाई की गई। इससे यह साफ होता है कि ऑपरेशन की योजना बेहद बारीकी से बनाई गई थी और उसे उसी स्तर की दक्षता के साथ लागू किया गया।

    इस कार्रवाई का मुख्य उद्देश्य आतंकियों के नेतृत्व तंत्र को खत्म करना था, जिसे सेना ने सफलतापूर्वक पूरा किया। कमांड स्ट्रक्चर पर सीधे प्रहार से आतंकियों की गतिविधियों को गंभीर झटका लगा है। इस तरह की कार्रवाई यह दिखाती है कि भारतीय सेना न केवल रक्षात्मक बल्कि आक्रामक रणनीति में भी पूरी तरह सक्षम है।

    नए वीडियो के सामने आने के बाद लोगों में इस ऑपरेशन को लेकर उत्सुकता और बढ़ गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के ऑपरेशन भविष्य में आतंकवाद के खिलाफ भारत की रणनीति को और मजबूत करेंगे। यह भी संकेत मिलता है कि सेना अब तकनीकी रूप से और अधिक उन्नत हो चुकी है, जिससे कम समय में बड़े परिणाम हासिल किए जा सकते हैं।

    इस पूरे घटनाक्रम के जरिए भारतीय सेना ने एक बार फिर यह संदेश दिया है कि देश के खिलाफ किसी भी साजिश का जवाब तुरंत और प्रभावी तरीके से दिया जाएगा। ‘ऑपरेशन सिंदूर’ की सफलता न केवल सैन्य ताकत का प्रदर्शन है बल्कि यह भी दर्शाती है कि भारत आतंकवाद के खिलाफ अपनी लड़ाई में पूरी तरह अडिग है और हर चुनौती का सामना करने के लिए तैयार है।

  • पहलगाम फाइल्स: आतंकी साजिश से लेकर ऑपरेशन सिंदूर की सफलता तक, कैमरे में कैद होगा घाटी का सच।

    पहलगाम फाइल्स: आतंकी साजिश से लेकर ऑपरेशन सिंदूर की सफलता तक, कैमरे में कैद होगा घाटी का सच।

    नई दिल्ली ।  देश के इतिहास में दर्ज पहलगाम आतंकी हमले की दर्दनाक घटना को लेकर एक बार फिर सिनेमाई जगत में गतिविधियां तेज हो गई हैं। इस घटना और इसके बाद हुए कथित ऑपरेशन सिंदूर को आधार बनाकर कई फिल्म और वेब सीरीज पर काम किया जा रहा है, जिनकी आधिकारिक घोषणाओं और शुरुआती झलकियों ने दर्शकों की रुचि बढ़ा दी है।
    हालांकि इन प्रोजेक्ट्स की रिलीज को लेकर अभी स्पष्ट समय सीमा सामने नहीं आई है, जिसके चलते दर्शकों को फिलहाल इंतजार करना पड़ सकता है। इस विषय पर आधारित सामग्री को लेकर फिल्म उद्योग में गंभीरता और संवेदनशीलता दोनों ही स्तर पर विचार किया जा रहा है ताकि वास्तविक घटनाओं को संतुलित और जिम्मेदार तरीके से प्रस्तुत किया जा सके।
    सूत्रों के अनुसार पहल ए नेशन यूनाइट्स नामक वेब सीरीज का ऐलान स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर किया गया था और इसकी पहली झलक भी जारी की जा चुकी है। यह सीरीज पहलगाम हमले के बाद की परिस्थितियों और सुरक्षा बलों की कार्रवाई को केंद्र में रखकर बनाई जा रही है। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार इसमें घटनाओं की पृष्ठभूमि और उसके सामाजिक प्रभावों को विस्तार से दिखाने का प्रयास किया जाएगा। टीजर में दिखाई गई प्रस्तुति से यह संकेत मिलता है कि कहानी को एक व्यापक राष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य में पेश किया जाएगा, जिसमें घटनाक्रम के साथ मानवीय पहलुओं पर भी ध्यान दिया गया है।
    इसके अलावा फिल्म निर्देशक विवेक अग्निहोत्री द्वारा एक फिल्म ऑपरेशन सिंदूर की घोषणा भी चर्चा में रही है। यह फिल्म एक पुस्तक पर आधारित बताई जा रही है, जिसमें भारत की सीमा पार की गई कथित सैन्य कार्रवाइयों और उनसे जुड़ी घटनाओं का वर्णन किया गया है। इस परियोजना को एक प्रमुख प्रोडक्शन हाउस के सहयोग से विकसित किया जा रहा है और इसमें मुख्य भूमिका को लेकर चर्चाएं जारी हैं। हालांकि फिल्म के निर्माण और रिलीज को लेकर आधिकारिक स्थिति अभी स्पष्ट नहीं है, जिससे इसकी प्रगति पर निगाहें बनी हुई हैं।
    निर्माता एकता कपूर भी इसी विषय पर आधारित द टेरर रिपोर्ट नामक फिल्म पर काम कर रही हैं। इसका टीजर पहले ही जारी किया जा चुका है, जिसमें पहलगाम क्षेत्र और उससे जुड़े घटनाक्रमों की झलक दिखाई गई थी। यह प्रोजेक्ट भी अभी प्रारंभिक या निर्माण चरण में माना जा रहा है और इसकी रिलीज को लेकर कोई निश्चित घोषणा नहीं हुई है। फिल्म उद्योग से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की संवेदनशील विषयवस्तु पर आधारित परियोजनाओं को तैयार करने में समय अधिक लगता है क्योंकि इसमें ऐतिहासिक और सामाजिक तथ्यों का संतुलन बनाए रखना आवश्यक होता है।
    इसी बीच इंडिया पाकिस्तान द फाइनल रेजोल्यूशन नामक एक क्षेत्रीय फिल्म भी निर्माणाधीन है, जो पहलगाम घटना के बाद भारत और पाकिस्तान के संबंधों और घाटी में रहने वाले लोगों के जीवन पर पड़ने वाले प्रभावों को दर्शाने का प्रयास करेगी। इस फिल्म की शूटिंग विभिन्न स्थानों पर जारी है और इसके कुछ हिस्से मुंबई में पूरे किए जा चुके हैं, जबकि कश्मीर में शेष हिस्सों की शूटिंग प्रस्तावित है।इन सभी परियोजनाओं के बीच दर्शकों में उत्सुकता तो है, लेकिन साथ ही यह अपेक्षा भी बनी हुई है कि इन विषयों को जिम्मेदारी और संवेदनशीलता के साथ प्रस्तुत किया जाए, ताकि वास्तविक घटनाओं की गंभीरता और उनके प्रभावों को सही रूप में समझा जा सके।
  • US का नया दावा… भारत-अमेरिका ट्रेड डील अटकने की वजह ऑपरेशन सिंदूर को बताया

    US का नया दावा… भारत-अमेरिका ट्रेड डील अटकने की वजह ऑपरेशन सिंदूर को बताया


    वाशिंगटन।
    अमेरिकी वाणिज्य सचिव हॉवर्ड लुटनिक (US Commerce Secretary Howard Lutnick) ने भारत-अमेरिका व्यापार समझौते (India-US trade agreement) के सिरे न चढ़ पाने के पीछे एक नया दावा पेश किया है। लुटनिक के अनुसार, यह समझौता मई और जुलाई 2025 के बीच हस्ताक्षर के लिए लगभग तैयार था, लेकिन यह इसलिए विफल रहा क्योंकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (President Donald Trump) को व्यक्तिगत रूप से फोन कर सौदे को अंतिम रूप देने में असहजता दिखाई। हालांकि, इस घटनाक्रम के पीछे की असल वजह ऑपरेशन सिंदूर और उसके बाद पैदा हुई कूटनीतिक तल्खी बताई जा रही है।

    रिपोर्ट्स के अनुसार, जिस समय यह समझौता होना था, उसी दौरान भारत और पाकिस्तान के बीच भारी तनाव था। 7 मई को भारत ने पहलगाम हत्याओं के जवाब में पाकिस्तान में आतंकी ठिकानों को नष्ट करने के लिए ‘ऑपरेशन सिंदूर’ शुरू किया। 10 मई को दोनों देशों के बीच युद्ध विराम की घोषणा से ठीक पहले, राष्ट्रपति ट्रंप ने सोशल मीडिया पर दावा कर दिया कि उन्होंने इस युद्ध विराम में मध्यस्थता की है।

    भारत ने इस दावे को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि युद्ध विराम पाकिस्तान के अनुरोध पर द्विपक्षीय रूप से हुआ था। ट्रंप के बार-बार मध्यस्थता का श्रेय लेने की कोशिशों ने द्विपक्षीय संबंधों में तनाव पैदा कर दिया था। लुटनिक के अनुसार, इसी पृष्ठभूमि में अमेरिका उम्मीद कर रहा था कि पीएम मोदी ट्रंप को फोन करें, जिसके लिए भारत तैयार नहीं था।


    क्या भारत ने वाकई ‘ट्रेन मिस’ कर दी?

    लुटनिक ने दावा किया कि भारत ने समझौते पर हस्ताक्षर करने में तीन हफ्ते की देरी कर दी और तब तक वह “ट्रेन मिस” कर चुका था। उन्होंने ट्रंप की ‘सीढ़ी’ नीति का हवाला दिया, जिसके तहत पहले आने वाले देश को सबसे कम टैरिफ मिलता है और बाद में आने वालों के लिए यह बढ़ता जाता है। हालांकि, व्यापारिक आंकड़े लुटनिक के दावों के विपरीत हैं। अमेरिका ने ब्रिटेन के साथ 10% और वियतनाम के साथ 20% टैरिफ पर समझौता किया। लेकिन वियतनाम के बाद हुए कई समझौतों (दक्षिण कोरिया, जापान, यूरोपीय संघ) में वाशिंगटन ने कम टैरिफ लगाए, जबकि भारत पर 50% का सबसे ऊंचा टैरिफ बरकरार रखा गया।


    रूस के साथ संबंध बने ‘कांटा’
    भारत और अमेरिका के बीच व्यापार वार्ता में रूस के साथ भारत के ऊर्जा और रक्षा संबंध भी एक बड़ी बाधा बने। जुलाई 2025 तक भारत के कुल तेल आयात में रूस की हिस्सेदारी 37% थी। अगस्त की शुरुआत में, रूस से कच्चा तेल खरीदने के कारण ट्रंप ने भारत पर 25% अतिरिक्त दंडात्मक शुल्क लगा दिया। लुटनिक ने पहले भी कहा था कि भारत का रूस से सैन्य उपकरण खरीदना और BRICS के माध्यम से डॉलर पर निर्भरता कम करना अमेरिका को नागवार गुजरा है।


    फोन कॉल नहीं, नीतियां थीं वजह
    थिंक टैंक GTRI के प्रमुख अजय श्रीवास्तव ने लुटनिक के दावों पर सवाल उठाते हुए कहा, “इतने बड़े स्तर के व्यापारिक समझौते महज एक नेता के फोन कॉल न करने से नहीं रुकते। यह दावा वास्तविक कारण के बजाय एक ‘तर्क’ जैसा लगता है।” उन्होंने कहा कि टैरिफ, कृषि, डिजिटल व्यापार और नियामक स्वायत्तता जैसे अनसुलझे नीतिगत मतभेद ही इस सौदे के न हो पाने की असली वजह थे।

  • अमेरिकी दस्तावेजों से खुलासा: ऑपरेशन सिंदूर को रोकने के लिए पाकिस्तान ने अमेरिका में की 60 बार लॉबिंग

    अमेरिकी दस्तावेजों से खुलासा: ऑपरेशन सिंदूर को रोकने के लिए पाकिस्तान ने अमेरिका में की 60 बार लॉबिंग


    नई दिल्ली । पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत की संभावित सैन्य कार्रवाई ऑपरेशन सिंदूर से पाकिस्तान की बेचैनी अमेरिकी दस्तावेजों में उजागर हुई है। FARA के तहत दाखिल रिकॉर्ड बताते हैं कि पाकिस्तान ने भारत के सैन्य अभियान को रोकने के लिए अमेरिका में बड़े स्तर पर कूटनीतिक और राजनीतिक लॉबिंग की। इस दौरान पाकिस्तानी राजनयिकों और लॉबिंग फर्मों ने अमेरिकी प्रशासन सांसदों पेंटागन और विदेश विभाग के अधिकारियों से करीब 60 बार संपर्क किया।दस्तावेजों के मुताबिक यह अभियान अप्रैल के अंतिम सप्ताह से शुरू होकर भारत के चार दिवसीय सैन्य अभियान के बाद तक जारी रहा। पाकिस्तान का उद्देश्य स्पष्ट था-वॉशिंगटन के जरिए भारत पर दबाव बनाना ताकि किसी भी तरह की सैन्य कार्रवाई को रोका जा सके। इसके लिए ईमेल फोन कॉल और आमने-सामने की बैठकों का सहारा लिया गया।

    लॉबिंग पर करोड़ों का खर्च

    FARA रिकॉर्ड के अनुसार पाकिस्तान ने अमेरिका में छह लॉबिंग फर्मों की सेवाएं लीं और इस पर करीब 45 करोड़ रुपये खर्च किए। रिपोर्ट में कहा गया है कि अप्रैल और मई के दौरान पाकिस्तान का लॉबिंग खर्च भारत की तुलना में कहीं अधिक रहा। पाकिस्तान ने अमेरिकी प्रशासन तक अपनी पहुंच बढ़ाने और व्यापार एवं कूटनीतिक फैसलों को प्रभावित करने की कोशिश की।सूत्रों के अनुसार पाकिस्तान ने भारत की सैन्य तैयारी को क्षेत्रीय अस्थिरता के रूप में पेश किया और अमेरिका से हस्तक्षेप की मांग की। हालांकि इन लॉबिंग प्रयासों का भारत की रणनीति पर कोई असर नहीं पड़ा। भारत ने अपने राष्ट्रीय सुरक्षा हितों को प्राथमिकता देते हुए कदम उठाए।

    भारत का रुख स्पष्ट

    भारतीय विदेश मंत्रालय ने कहा कि अमेरिका में लॉबिंग एक कानूनी और स्थापित प्रक्रिया है। विदेशी सरकारें दूतावास निजी कंपनियां और व्यावसायिक संगठन लॉबिंग फर्मों के माध्यम से अपनी बात रखते हैं। भारत का दूतावास भी दशकों से जरूरत के अनुसार ऐसी सेवाओं का इस्तेमाल करता रहा है। मंत्रालय ने यह भी बताया कि FARA के तहत सभी लॉबिंग गतिविधियों का रिकॉर्ड सार्वजनिक रूप से उपलब्ध है और इसे गुप्त या असामान्य गतिविधि नहीं माना जाना चाहिए।

    रणनीतिक संदेश और आगे की तस्वीर

    विशेषज्ञों के अनुसार पाकिस्तान की आक्रामक लॉबिंग यह दर्शाती है कि वह भारत की सैन्य क्षमता और राजनीतिक इच्छाशक्ति को लेकर गंभीर दबाव में था। इसके बावजूद भारत ने किसी भी दबाव में समझौता नहीं किया। अमेरिकी दस्तावेजों से यह भी स्पष्ट हुआ कि आतंकवाद और सुरक्षा मामलों में भारत का रुख अब पहले से अधिक सख्त और निर्णायक है।

  • राष्ट्रपति ने ऑपरेशन सिंदूर के सबसे छोटे नायक सरवन को राष्ट्रीय बाल पुरस्कार से किया सम्मानित

    राष्ट्रपति ने ऑपरेशन सिंदूर के सबसे छोटे नायक सरवन को राष्ट्रीय बाल पुरस्कार से किया सम्मानित


    नई दिल्ली।
    ऑपरेशन सिंदूर (Operation Sindoor) के सबसे छोटे नायक पंजाब के फिरोजपुर के रहने वाले सरवन सिंह (Sarwan Singh) को राष्ट्रीय बाल पुरस्कार (National Children’s Award) से सम्मानित किया गया। दिल्ली में आयोजित समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू (President Draupadi Murmu) ने यह पुरस्कार दिया।

    फिरोजपुर जिले के सीमावर्ती गांव तारावाली के रहने वाले 10 वर्षीय सरवन सिंह ने मोर्चे पर तैनात जवानों के लिए बिना डरे पानी, चाय और लस्सी पहुंचाई और उनका हौसला बढ़ाया। मई 2025 में जब भारत-पाकिस्तान सीमा पर हालात बेहद तनावपूर्ण थे। दुश्मन देश के ड्रोन लगातार सीमा में घुसपैठ कर रहे थे और हर वक्त खतरा बना हुआ था। ऐसे माहौल में लोग घरों से बाहर निकलने से डर रहे थे, लेकिन उस समय यह छोटा बच्चा अपनी जान की परवाह किए बिना सीमा की अग्रिम चौकियों की ओर निकल पड़ता था। वह रोज अपनी छोटी साइकिल से या पैदल ही भारतीय सेना के जवानों तक ठंडा पानी, बर्फ, दूध, लस्सी, चाय और जरूरी राशन पहुंचाता था। चिलचिलाती धूप, दुश्मन की निगरानी और हमले के खतरे के बीच भी वह पीछे नहीं हटा। यह पुरस्कार उन्हें उनकी अद्वितीय बहादुरी और भारतीय सेना के प्रति निष्ठा के लिए दिया गया।


    अवाॅर्ड मिलने पर बहुत खुश हूं: सरवन

    सम्मान पाने के बाद सरवन ने कहा कि जब पाकिस्तान के खिलाफ ऑपरेशन सिंदूर शुरू हुआ, तो सेना के जवान हमारे गांव आए। मैंने सोचा कि मुझे उनकी सेवा करनी चाहिए। मैं उनके लिए रोज दूध, चाय, छाछ और बर्फ ले जाता था। मुझे पुरस्कार पाकर बहुत अच्छा लग रहा है। मैंने कभी इसके बारे में सपने में भी नहीं सोचा था।


    पंजाब के सीएम ने दी बधाई

    पंजाब के सीएम भगवंत मान ने सरवन को बधाई देते हुए एक्स पर लिखा कि पंजाबियों के लिए यह बड़े गर्व की बात है कि आज राष्ट्रपति द्वारा हमारे फिरोजपुर के निवासी 10 वर्षीय सरवन सिंह को राष्ट्रीय बाल पुरस्कार से सम्मानित किया गया। हमारे गुरुओं द्वारा दी गई शिक्षाओं पर चलते हुए ऑपरेशन सिंदूर के दौरान सरवन सिंह ने घर से चाय-पानी और भोजन लाकर सैनिकों की जो सेवा की, वह काबिल-ए-तारीफ है। बच्चे के देश के प्रति हौसले और जज्बे को सलाम।


    सेना ने उठाया पढ़ाई का सारा खर्च

    सरवन के इस जज्बे को भारतीय सेना भी सलाम कर चुकी है। फिरोजपुर छावनी में एक समारोह के दौरान पश्चिमी कमान के जनरल ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ लेफ्टिनेंट जनरल मनोज कुमार कटियार ने बच्चे को सम्मानित भी किया था। साथ ही सेना ने उसकी पढ़ाई का पूरा खर्च उठाने का जिम्मा उठाया है। सरवन ने पहले कहा था कि वह भी बड़ा होकर सेना में भर्ती होना चाहता है। उसने कहा कि मैं बड़ा होकर फौजी बनना चाहता हूं और देश की सेवा करना चाहता हूं।

  • कांग्रेसी पूर्व मुख्यमंत्री ने ऑपरेशन सिंदूर पर विवादित बयान दिया कहा 'पहले दिन हम बुरी तरह हार गए थे'

    कांग्रेसी पूर्व मुख्यमंत्री ने ऑपरेशन सिंदूर पर विवादित बयान दिया कहा 'पहले दिन हम बुरी तरह हार गए थे'


    नई दिल्ली । कांग्रेसी नेता और महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण ने ऑपरेशन सिंदूर पर एक विवादित बयान दिया है जिसके बाद राजनीति में हलचल मच गई है। चव्हाण का कहना है कि ऑपरेशन सिंदूर के पहले दिन भारतीय वायु सेना ने अपनी पूरी ताकत का इस्तेमाल नहीं किया क्योंकि उस दिन भारतीय विमानों के पाकिस्तान द्वारा मार गिराए जाने की संभावना बहुत अधिक थी।

    पृथ्वीराज चव्हाण ने एक इंटरव्यू में कहा ऑपरेशन सिंदूर के पहले दिन अगर ग्वालियर बठिंडा या सिरसा से कोई विमान उड़ान भरता तो उसे पाकिस्तान द्वारा बहुत आसानी से मार गिराया जा सकता था। यही कारण था कि एयर फोर्स को पूरी तरह से ग्राउंडेड रखा गया था। चव्हाण ने आगे कहा कि पहले दिन हम बुरी तरह हार गए थे लेकिन ऑपरेशन के अगले चरणों में स्थिति में सुधार हुआ और भारतीय सेना ने अपनी ताकत दिखाई।

    यह बयान ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय वायु सेना के एक्शन को लेकर उठाए गए सवालों का जवाब देने के प्रयास के रूप में देखा जा सकता है। ऑपरेशन सिंदूर जो कि 1999 में कारगिल युद्ध के बाद भारतीय सेना द्वारा पाकिस्तान के खिलाफ किया गया था एक बड़ा सैन्य अभियान था जिसमें भारतीय वायु सेना और सेना ने एकजुट होकर पाकिस्तान की अग्रिम चौकियों को निशाना बनाया था। चव्हाण के बयान के बाद विपक्षी दलों और रक्षा विशेषज्ञों ने उनकी टिप्पणी पर तीखी प्रतिक्रिया दी है।

    चव्हाण का यह बयान एक ऐसे समय में आया है जब भारतीय वायु सेना और सेना के संचालन पर लगातार चर्चा हो रही है। कुछ रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के बयान भारतीय सेना और वायु सेना की कार्यप्रणाली को गलत तरीके से प्रस्तुत कर सकते हैं। वहीं कुछ लोगों का कहना है कि चव्हाण ने अपनी बात तथ्यों पर आधारित रखते हुए रखी है और ऑपरेशन सिंदूर के पहले दिन भारतीय विमानों की सुरक्षा को लेकर पर्याप्त उपाय किए गए थे।

    इससे पहले भारतीय वायु सेना और सेना के कई अधिकारियों ने भी माना था कि ऑपरेशन सिंदूर के पहले दिन कुछ फैसले धीमे थे क्योंकि पाकिस्तान द्वारा भारतीय विमानों को निशाना बनाने का खतरा बहुत ज्यादा था। हालांकि बाद में स्थिति में सुधार हुआ और भारतीय सेना ने दुश्मन के ठिकानों को सफलतापूर्वक निशाना बनाया।

    चव्हाण के बयान ने यह भी सवाल खड़ा किया है कि क्या भारतीय वायु सेना के लिए ऐसे ऑपरेशनों में निर्णय लेने की प्रक्रिया में कोई कमजोरी रही थी। कुछ रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह के बयानों से भारतीय सेना की रणनीतिक क्षमता पर सवाल उठते हैं जो एक संवेदनशील मामला हो सकता है।

    यह बयान ऐसे समय में आया है जब भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव हमेशा बना रहता है और ऐसे बयान से दोनों देशों के सैन्य इतिहास और रणनीति पर चर्चा और विवाद दोनों का सामना करना पड़ सकता है। चव्हाण के बयान को लेकर भारतीय रक्षा मंत्रालय और वायु सेना से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है लेकिन इस बयान ने राजनीतिक और रक्षा हलकों में हंगामा मचा दिया है। ऑपरेशन सिंदूर के बारे में चव्हाण का यह बयान भारतीय राजनीति में एक नई बहस का कारण बन सकता है और अब यह देखना होगा कि पार्टी नेतृत्व इस मुद्दे पर क्या प्रतिक्रिया देता है।

  • PAK के पहले CDF बनने पर आसिम मुनीर ने दी भारत को चेतावनी: अगला जवाब और भी सख्त होगा

    PAK के पहले CDF बनने पर आसिम मुनीर ने दी भारत को चेतावनी: अगला जवाब और भी सख्त होगा


    नई दिल्‍ली । पाकिस्तान (Pakistan) के पहले CDF यानी चीफ ऑफ डिफेंस फोर्सेज (Chief of Defence Forces) नियुक्त होने के बाद फील्ड मार्शल आसिम मुनीर (Field Marshal Asim Munir) ने भारत (India) का जिक्र कर दिया। अपने पहले ही संबोधन में उन्होंने कहा कि पाकिस्तान का अगला जवाब और भी सख्त होगा। मई में हुए ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय सेना ने पाकिस्तानी क्षेत्र में प्रवेश कर कार्रवाई की थी, जिसके बाद दोनों मुल्कों के बीच करीब 4 दिन संघर्ष चला। हालांकि, बाद में पाकिस्तान की ओर से अनुरोध किए जाने के बाद सीजफायर का ऐलान किया गया था।

    मुनीर ने कहा, ‘भारत को किसी भी गलतफहमी में नहीं रहना चाहिए, क्योंकि पाकिस्तान का जवाब और भी तेज और ज्यादा सख्त होगा।’ ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय सेना की कार्रवाई में पाकिस्तान को भारी सैन्य नुकसान उठाना पड़ा था। भारत ने जम्मू और कश्मीर के पहलगाम में अप्रैल में हुए आतंकवादी हमले के जवाब में ऐक्शन लिया था।

    मिला गार्ड ऑफ ऑनर
    देश के पहले सीडीएफ के रूप में नियुक्त होने पर मुनीर को सम्मानित करने के लिए जीएचक्यू (मुख्यालय) में ‘गार्ड ऑफ ऑनर’ दिया गया। ‘गार्ड ऑफ ऑनर’ का निरीक्षण करने के बाद मुनीर ने सशस्त्र बलों के अधिकारियों को संबोधित करते हुए यह भी कहा कि किसी भी आक्रमण की स्थिति में पाकिस्तान की प्रतिक्रिया ‘बहुत अधिक तीव्र और गंभीर’ होगी।

    मुनीर ने सोमवार को कहा कि पाकिस्तान शांतिपूर्ण राष्ट्र है, लेकिन आगाह किया कि किसी को भी इस्लामाबाद की क्षेत्रीय अखंडता या संप्रभुता को परखने की अनुमति नहीं दी जाएगी।

    अफगानिस्तान से तनाव पर क्या कहा
    पाकिस्तान-अफगानिस्तान तनाव पर मुनीर ने कहा कि काबुल में अफगान तालिबान शासन को एक स्पष्ट संदेश दिया गया है। उन्होंने कहा, ‘(अफगान) तालिबान के पास फितना अल-खवारिज (TTP) और पाकिस्तान में से किसी एक को चुनने के अलावा कोई विकल्प नहीं है।’ सरकार ने पिछले वर्ष प्रतिबंधित तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान को ‘फितना अल-खवारिज’ के रूप में अधिसूचित किया था, जो कि इस्लामी इतिहास के एक ऐसे समूह का संदर्भ है जो हिंसा में शामिल था।

    फील्ड मार्शल मुनीर ने पहले सीडीएफ के रूप में कार्यभार संभाला है। सरकार ने मुनीर की नई भूमिका में नियुक्ति के लिए पांच साल के कार्यकाल को लेकर पिछले सप्ताह अधिसूचना जारी की। इसके साथ ही वह सेना प्रमुख के रूप में भी कार्य करेंगे। सीडीएफ का गठन पिछले महीने 27वें संविधान संशोधन और उसके बाद पाकिस्तान सेना, वायुसेना और नौसेना (संशोधन) विधेयक 2025 में किए गए बदलावों के बाद किया गया।