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  • राम मंदिर चढ़ावा चोरी मुद्दे पर संसद परिसर में विपक्ष का अनोखा प्रदर्शन, साधु के वेश में दिखे पप्पू यादव और राहुल गांधी ने दिया चढ़ावा

    राम मंदिर चढ़ावा चोरी मुद्दे पर संसद परिसर में विपक्ष का अनोखा प्रदर्शन, साधु के वेश में दिखे पप्पू यादव और राहुल गांधी ने दिया चढ़ावा

    नई दिल्ली । अयोध्या राम मंदिर से जुड़े चढ़ावा चोरी के मुद्दे को लेकर संसद परिसर में विपक्षी दलों ने अनोखे अंदाज में विरोध प्रदर्शन किया। विपक्षी सांसदों ने नाटक के माध्यम से कथित चढ़ावा चोरी के मुद्दे को उठाते हुए सरकार से जवाब मांगा। इस दौरान पूर्णिया से सांसद पप्पू यादव साधु के वेश में दिखाई दिए, जबकि लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी समेत कई विपक्षी सांसद प्रदर्शन में शामिल हुए।

    प्रदर्शन के दौरान संसद परिसर में एक प्रतीकात्मक दान पेटी रखी गई थी। विपक्षी नेताओं ने नाटक के जरिए अपनी बात रखने की कोशिश की। इस दौरान राहुल गांधी सहित अन्य सांसद दान पेटी में चढ़ावा डालते हुए नजर आए। वहीं, प्रदर्शन के एक हिस्से में पप्पू यादव साधु के रूप में दान पेटी लेकर जाते हुए दिखाई दिए, जिसके बाद अन्य सांसदों ने उन्हें रोकने और विरोध जताने का अभिनय किया।

    विपक्षी सांसदों ने इस प्रदर्शन के जरिए सरकार पर निशाना साधने की कोशिश की। नेताओं का कहना था कि वे विभिन्न मुद्दों पर सरकार से जवाब मांग रहे हैं और संसद के भीतर तथा बाहर जनता से जुड़े मामलों को उठाते रहेंगे। प्रदर्शन के दौरान विपक्षी सांसदों ने सरकार और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के खिलाफ नारेबाजी भी की।

    प्रदर्शन में राम मंदिर चढ़ावा विवाद के साथ-साथ अन्य मुद्दों को भी जोड़ा गया। विपक्षी सांसदों ने पेपर लीक जैसे मामलों का भी जिक्र करते हुए सरकार से जवाब मांगने की बात कही। प्रदर्शन के दौरान लगाए गए नारों में चढ़ावा चोरी और पेपर चोरी जैसे मुद्दे प्रमुख रहे।

    इस पूरे घटनाक्रम पर लोकसभा अध्यक्ष ने नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि संसद और उसके परिसर की गरिमा बनाए रखना सभी सांसदों की जिम्मेदारी है। उन्होंने सदस्यों को सलाह दी कि संसद परिसर में ऐसे तरीके अपनाने से बचना चाहिए, जिससे सदन की मर्यादा प्रभावित हो।

    लोकसभा अध्यक्ष ने सांसदों से संसदीय परंपराओं और नियमों का पालन करने की अपील की। उन्होंने कहा कि संसद लोकतांत्रिक बहस और चर्चा का स्थान है, इसलिए विरोध दर्ज कराने के दौरान भी गरिमा और अनुशासन बनाए रखना जरूरी है।

    घटना के बाद संसद की कार्यवाही कुछ समय के लिए स्थगित भी हुई। हालांकि विपक्षी नेताओं ने अपने प्रदर्शन को लोकतांत्रिक अधिकार बताते हुए कहा कि वह जनता से जुड़े मुद्दों को उठाते रहेंगे।

    राजनीतिक जानकारों के अनुसार, संसद सत्र के दौरान विपक्ष अक्सर अलग-अलग मुद्दों को लेकर सरकार पर दबाव बनाने की रणनीति अपनाता है। इस बार राम मंदिर चढ़ावा विवाद को लेकर किए गए प्रतीकात्मक प्रदर्शन ने राजनीतिक माहौल को और गरमा दिया है।

    वहीं, सत्ता पक्ष की ओर से संसदीय गरिमा और विरोध के तरीकों को लेकर सवाल उठाए जा सकते हैं। आने वाले दिनों में यह मुद्दा संसद की बहस और राजनीतिक बयानबाजी में चर्चा का विषय बना रह सकता है।

  • लोक परीक्षा संशोधन बिल पर लोकसभा में गतिरोध, छात्रों के मुद्दे पर चर्चा की मांग से कार्यवाही बार-बार बाधित

    लोक परीक्षा संशोधन बिल पर लोकसभा में गतिरोध, छात्रों के मुद्दे पर चर्चा की मांग से कार्यवाही बार-बार बाधित

    नई दिल्ली । सार्वजनिक परीक्षाओं में पारदर्शिता और पेपर लीक जैसी घटनाओं पर अंकुश लगाने के उद्देश्य से लाए गए लोक परीक्षा संशोधन बिल पर सोमवार को लोकसभा में चर्चा शुरू नहीं हो सकी। विपक्षी दलों के लगातार हंगामे और छात्रों की कथित पिटाई के मुद्दे पर तत्काल चर्चा की मांग के कारण सदन की कार्यवाही कई बार बाधित हुई। स्थिति को सामान्य बनाने के लिए लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने सरकार और विपक्ष दोनों से आपसी सहमति बनाकर सदन की कार्यवाही सुचारु रूप से चलाने की अपील की।

    दोपहर दो बजे जैसे ही लोकसभा की कार्यवाही दोबारा शुरू हुई, विपक्षी सांसद सदन के वेल में पहुंच गए और छात्रों से जुड़े मामले पर चर्चा की मांग करते हुए नारेबाजी करने लगे। लगातार शोर-शराबे के बीच सदन में निर्धारित कार्यवाही आगे नहीं बढ़ सकी। इस दौरान लोकसभा अध्यक्ष ने विपक्ष से कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि वे विधेयक पर चर्चा नहीं करना चाहते। लगभग पांच मिनट तक गतिरोध बने रहने के बाद उन्होंने शाम पांच बजे तक सभी पक्षों को सहमति बनाने का समय देने की घोषणा की।

    इससे पहले भी दिन के दौरान लोकसभा की कार्यवाही दोपहर बारह बजे और उसके बाद दो बजे तक स्थगित करनी पड़ी थी। इसी तरह राज्यसभा में भी हंगामे के कारण कार्यवाही प्रभावित रही और वहां भी सदन को दो बार स्थगित करना पड़ा। संसद के दोनों सदनों में बने गतिरोध के कारण दिनभर निर्धारित विधायी कार्य प्रभावित रहा।

    सुबह केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने लोकसभा में लोक परीक्षा संशोधन बिल पेश किया। यह विधेयक सार्वजनिक परीक्षाओं में अनियमितताओं, पेपर लीक और परीक्षा प्रक्रिया की सुरक्षा को मजबूत बनाने के उद्देश्य से लाया गया है। सरकार का कहना है कि प्रस्तावित संशोधन परीक्षा प्रणाली को अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और विश्वसनीय बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित होगा।

    संसद की कार्यवाही के दौरान एक अन्य राजनीतिक घटनाक्रम भी चर्चा में रहा। पूर्व केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान अपने इस्तीफे के बाद पहली बार संसद पहुंचे, जहां राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन के सांसदों ने उनका स्वागत किया। उन्हें शॉल और मिथिला पाग पहनाकर सम्मानित किया गया तथा कई सांसद उनके साथ संसद भवन के भीतर तक गए। इस दौरान समर्थन में नारे भी लगाए गए। धर्मेंद्र प्रधान ने नीट पेपर लीक विवाद के बाद 25 जुलाई को अपने पद से इस्तीफा दिया था।

    संसद में जारी गतिरोध समाप्त करने के लिए राजनीतिक स्तर पर भी प्रयास तेज किए गए। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला और संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने विपक्षी नेताओं से मुलाकात कर सदन की कार्यवाही सामान्य बनाने पर चर्चा की। बैठक में विभिन्न दलों के वरिष्ठ नेताओं ने हिस्सा लिया और गतिरोध समाप्त करने के संभावित विकल्पों पर विचार-विमर्श किया गया।

    इसी बीच संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने विपक्ष से अपील की कि लोक परीक्षा संशोधन बिल देश के करोड़ों विद्यार्थियों और सार्वजनिक परीक्षा व्यवस्था से जुड़ा महत्वपूर्ण विधेयक है, इसलिए इसे सदन में चर्चा का अवसर मिलना चाहिए। दूसरी ओर विपक्ष का कहना है कि छात्रों से जुड़े हालिया घटनाक्रम पर पहले विस्तृत चर्चा कराई जाए। अब सभी की निगाहें आगामी संसदीय बैठकों पर हैं, जहां यह स्पष्ट होगा कि सहमति बनने के बाद विधेयक पर चर्चा आगे बढ़ पाती है या नहीं।

  • परिसीमन बिल पर बढ़ी सियासी हलचल, मानसून सत्र में सरकार और विपक्ष के बीच निर्णायक टकराव के आसार

    परिसीमन बिल पर बढ़ी सियासी हलचल, मानसून सत्र में सरकार और विपक्ष के बीच निर्णायक टकराव के आसार

    नई दिल्ली ।संसद के मानसून सत्र में अब राजनीतिक चर्चा का केंद्र संभावित परिसीमन बिल बनता दिखाई दे रहा है। शिक्षा और परीक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दों पर प्रारंभिक बहस के बाद अब लोकसभा सीटों के पुनर्निर्धारण को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच नए राजनीतिक समीकरण उभरते नजर आ रहे हैं। माना जा रहा है कि 27 जुलाई से 13 अगस्त तक चलने वाला सत्र इस विषय पर आगे की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

    परिसीमन प्रक्रिया का उद्देश्य जनसंख्या के आधार पर संसदीय क्षेत्रों की सीमाओं और लोकसभा सीटों का पुनर्गठन करना है। प्रस्तावित बदलावों के तहत लोकसभा की कुल सीटों में वृद्धि का रास्ता खुल सकता है। इसके साथ ही महिलाओं के लिए आरक्षण लागू करने की संवैधानिक प्रक्रिया को भी आगे बढ़ाने की संभावना जताई जा रही है। हालांकि इस विषय पर व्यापक राजनीतिक सहमति अभी तक बनती दिखाई नहीं दे रही है।

    संविधान संशोधन से जुड़े किसी भी विधेयक को पारित कराने के लिए संसद में विशेष बहुमत की आवश्यकता होती है। इसी कारण सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती पर्याप्त समर्थन सुनिश्चित करने की मानी जा रही है। राजनीतिक दलों के बीच लगातार संवाद और समर्थन जुटाने की कोशिशों को इसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। दूसरी ओर विपक्ष भी साझा रुख अपनाकर अपनी रणनीति तैयार करने में जुटा हुआ है।

    परिसीमन को लेकर सबसे अधिक चिंता दक्षिण भारत के कई राज्यों ने व्यक्त की है। इन राज्यों का तर्क है कि उन्होंने लंबे समय से जनसंख्या नियंत्रण की दिशा में प्रभावी प्रयास किए हैं। ऐसे में यदि भविष्य में केवल जनसंख्या के आधार पर सीटों का पुनर्वितरण किया जाता है तो उनका संसदीय प्रतिनिधित्व अपेक्षाकृत कम हो सकता है। इसी कारण कई क्षेत्रीय दल इस विषय पर विस्तृत चर्चा और संतुलित व्यवस्था की मांग कर रहे हैं।

    राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सरकार विभिन्न दलों से संवाद के जरिए व्यापक समर्थन जुटाने का प्रयास कर सकती है। वहीं कुछ क्षेत्रीय दलों ने संकेत दिए हैं कि यदि सभी राज्यों के हितों को संतुलित करने वाला समाधान सामने आता है तो वे अपने रुख पर विचार कर सकते हैं। हालांकि अभी तक किसी व्यापक सहमति की औपचारिक घोषणा नहीं हुई है।

    संसद के मौजूदा सत्र को लेकर राजनीतिक हलकों में कई संभावनाओं पर चर्चा हो रही है। पहली संभावना यह मानी जा रही है कि यदि पर्याप्त समर्थन सुनिश्चित नहीं होता तो सरकार विधेयक को फिलहाल पेश करने से बच सकती है। दूसरी संभावना यह है कि विधेयक सदन में प्रस्तुत हो, लेकिन पर्याप्त बहुमत नहीं मिलने के कारण पारित न हो सके। तीसरी संभावना यह मानी जा रही है कि आवश्यक समर्थन मिलने की स्थिति में विधेयक आगे बढ़े और संवैधानिक प्रक्रिया अगले चरण में प्रवेश करे।

    भारत में लोकसभा सीटों के परिसीमन का इतिहास कई दशकों पुराना है। पिछले लंबे समय से संसदीय सीटों की संख्या स्थिर बनी हुई है, जबकि इस अवधि में देश की जनसंख्या और जनसांख्यिकीय स्वरूप में उल्लेखनीय परिवर्तन हुआ है। इसी पृष्ठभूमि में नए परिसीमन की आवश्यकता पर चर्चा लगातार होती रही है। यदि भविष्य में इस दिशा में कोई संवैधानिक निर्णय लिया जाता है तो उसका प्रभाव देश की चुनावी राजनीति, राज्यों के प्रतिनिधित्व और संसदीय व्यवस्था पर व्यापक रूप से दिखाई दे सकता है। फिलहाल सभी की निगाहें संसद के मानसून सत्र और आगे बनने वाले राजनीतिक समीकरणों पर टिकी हुई हैं।

  • संसद परिसर में NDA और विपक्ष आमने-सामने, जमकर हुई नारेबाजी, दोनों सदनों की कार्यवाही कल तक स्थगित

    संसद परिसर में NDA और विपक्ष आमने-सामने, जमकर हुई नारेबाजी, दोनों सदनों की कार्यवाही कल तक स्थगित


    नई दिल्ली। संसद के मानसून सत्र के चौथे दिन गुरुवार को संसद भवन परिसर के बाहर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच राजनीतिक टकराव खुलकर सामने आया। एक ओर कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा, समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव सहित इंडिया ब्लॉक के नेताओं ने केंद्र सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया, तो दूसरी ओर एनडीए सांसद भी विरोध दर्ज कराने के लिए मैदान में उतर आए। दोनों पक्षों के बीच जमकर नारेबाजी हुई और माहौल काफी देर तक गर्म रहा।

    एनडीए सांसद 21 जुलाई को प्रधानमंत्री आवास के बाहर राहुल गांधी द्वारा दिए गए धरने का विरोध कर रहे थे, जबकि इंडिया ब्लॉक के सांसद NEET पेपर लीक मामले में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे थे।

    प्रदर्शन के दौरान प्रियंका गांधी वाड्रा नारे लगाते हुए एनडीए सांसदों के काफी करीब पहुंच गईं। स्थिति को देखते हुए सुरक्षाकर्मियों ने तत्काल बीच में आकर उन्हें आगे बढ़ने से रोक दिया, जिससे किसी तरह की टकराव की स्थिति नहीं बनने पाई।

    संसद के भीतर भी दोनों सदनों में विपक्ष के हंगामे के कारण कार्यवाही सुचारु रूप से नहीं चल सकी। लगातार शोर-शराबे के चलते पहले लोकसभा की कार्यवाही दोपहर 2 बजे तक स्थगित की गई। दोपहर बाद सदन की बैठक शुरू होते ही फिर से हंगामा शुरू हो गया, जिसके बाद लोकसभा की कार्यवाही शुक्रवार सुबह 11 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई।

    उधर, राज्यसभा की कार्यवाही भी पहले दोपहर 3 बजे तक रोकी गई थी। दोबारा बैठक शुरू होने पर विपक्षी सांसदों ने फिर विरोध प्रदर्शन किया, जिसके चलते सभापति ने राज्यसभा की कार्यवाही भी शुक्रवार, 24 जुलाई तक के लिए स्थगित कर दी।

  • दिल्ली छात्र प्रदर्शन के बीच सीएम योगी का विपक्ष पर तीखा हमला, बोले- दलितों, किसानों के बाद अब छात्रों को बनाया जा रहा निशाना

    दिल्ली छात्र प्रदर्शन के बीच सीएम योगी का विपक्ष पर तीखा हमला, बोले- दलितों, किसानों के बाद अब छात्रों को बनाया जा रहा निशाना

    नई दिल्ली । उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने दिल्ली में छात्रों के प्रदर्शन के बीच विपक्षी दलों पर तीखा हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि राजनीतिक लाभ के लिए लगातार अलग-अलग वर्गों को भड़काने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा कि पहले दलितों, वंचितों और किसानों के बीच भ्रम फैलाने का प्रयास किया गया और अब छात्रों को आंदोलन के माध्यम से निशाना बनाया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि झूठे नैरेटिव के जरिए जनता को गुमराह करने की रणनीति लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए उचित नहीं है।

    एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने वर्ष 2024 के आम चुनावों का उल्लेख करते हुए कहा कि चुनाव के दौरान विपक्ष ने कई ऐसे मुद्दों को प्रमुखता से उठाया, जिनका उद्देश्य जनता के बीच भ्रम पैदा करना था। उन्होंने आरोप लगाया कि संविधान और आरक्षण को लेकर भी भ्रामक प्रचार किया गया। उनके अनुसार लंबे समय से सत्ता में रहने के बावजूद भारतीय जनता पार्टी ने संविधान और आरक्षण व्यवस्था को और अधिक मजबूत करने का काम किया है तथा समाज के जरूरतमंद वर्गों तक सरकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाने का प्रयास किया है।

    मुख्यमंत्री ने नागरिकता संशोधन कानून के विरोध में हुए आंदोलन का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि उस समय भी विभिन्न राजनीतिक दलों और संगठनों ने व्यापक विरोध प्रदर्शन किए थे। उनका दावा था कि उस दौरान भी लोगों के बीच भ्रम की स्थिति पैदा करने की कोशिश की गई। उन्होंने कहा कि देश के बाहर धार्मिक और सामाजिक उत्पीड़न का सामना कर रहे लोगों के मुद्दों पर विपक्ष उतनी मुखरता नहीं दिखा पाया, जितनी घरेलू राजनीतिक विरोध के दौरान दिखाई गई।

    योगी आदित्यनाथ ने कहा कि राजनीतिक दलों को लोकतांत्रिक व्यवस्था में अपनी बात रखने का पूरा अधिकार है, लेकिन समाज के विभिन्न वर्गों के बीच गलत जानकारी फैलाकर माहौल बिगाड़ने का प्रयास उचित नहीं माना जा सकता। उन्होंने कहा कि युवाओं और छात्रों को सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ाने की आवश्यकता है, क्योंकि वही देश के भविष्य की सबसे बड़ी ताकत हैं। उनके अनुसार शिक्षा, रोजगार और विकास जैसे मुद्दों पर रचनात्मक संवाद होना चाहिए, न कि भ्रम और टकराव का वातावरण बनाया जाना चाहिए।

    मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि सरकार का उद्देश्य समाज के प्रत्येक वर्ग तक विकास योजनाओं का लाभ पहुंचाना है। उन्होंने दावा किया कि अनुसूचित जाति, पिछड़े वर्ग, किसानों और युवाओं के लिए कई कल्याणकारी योजनाएं प्रभावी ढंग से लागू की गई हैं। उनका कहना था कि सामाजिक न्याय और विकास को लेकर सरकार की प्रतिबद्धता स्पष्ट है और इसी दिशा में लगातार कार्य किए जा रहे हैं।

    दिल्ली में छात्रों के प्रदर्शन को लेकर मुख्यमंत्री की टिप्पणी ऐसे समय आई है जब शिक्षा और परीक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दों पर राजनीतिक बयानबाजी तेज बनी हुई है। विपक्ष सरकार से विभिन्न मांगों को लेकर लगातार सवाल उठा रहा है, जबकि सरकार चर्चा और संवाद के माध्यम से समाधान की बात कह रही है। इसी राजनीतिक माहौल के बीच मुख्यमंत्री ने विपक्ष पर छात्रों को राजनीतिक एजेंडे का हिस्सा बनाने का आरोप लगाया।

    मुख्यमंत्री के इन बयानों के बाद राजनीतिक प्रतिक्रिया तेज होने की संभावना है। एक ओर सत्तारूढ़ दल इसे विपक्ष की राजनीति पर सीधा जवाब बता रहा है, वहीं विपक्ष सरकार के आरोपों को खारिज करते हुए छात्र और युवा हितों से जुड़े मुद्दों पर अपनी आवाज उठाने की बात कह रहा है। आने वाले दिनों में इस विषय पर राजनीतिक बहस और तेज होने के संकेत हैं।

  • संसद की मर्यादा पर जेपी नड्डा का विपक्ष पर निशाना, कहा- लोकतांत्रिक परंपराओं का हो रहा उल्लंघन, चर्चा से नहीं भाग रही सरकार

    संसद की मर्यादा पर जेपी नड्डा का विपक्ष पर निशाना, कहा- लोकतांत्रिक परंपराओं का हो रहा उल्लंघन, चर्चा से नहीं भाग रही सरकार

    नई दिल्ली । राज्यसभा में बुधवार को विपक्ष के हंगामे और नीट परीक्षा से जुड़े मुद्दे पर जारी गतिरोध के बीच नेता सदन जेपी नड्डा ने विपक्ष के रवैये पर कड़ी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि संसद लोकतांत्रिक संवाद का सर्वोच्च मंच है, लेकिन जिस तरह से सदन की कार्यवाही बाधित की जा रही है, उससे संसदीय मर्यादाओं और लोकतांत्रिक परंपराओं को नुकसान पहुंच रहा है। उन्होंने दोहराया कि सरकार हर महत्वपूर्ण विषय पर चर्चा के लिए पूरी तरह तैयार है।

    सदन की कार्यवाही दोबारा शुरू होने पर जेपी नड्डा ने कहा कि सरकार ने पहले ही स्पष्ट कर दिया है कि नीट परीक्षा और कथित प्रश्नपत्र लीक सहित सभी संबंधित मुद्दों पर विस्तृत चर्चा कराने में उसे कोई आपत्ति नहीं है। उनका कहना था कि सरकार पारदर्शी तरीके से काम करने में विश्वास रखती है और हर सवाल का जवाब देने के लिए तैयार है, लेकिन इसके लिए सदन का सुचारु रूप से चलना भी आवश्यक है।

    इससे पहले संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने भी विपक्ष से हंगामे के बजाय चर्चा में भाग लेने की अपील की। उन्होंने कहा कि सरकार मानसून सत्र की शुरुआत से ही इस विषय पर चर्चा के पक्ष में रही है। चर्चा किस नियम और प्रक्रिया के तहत होगी, इस पर सभी दलों के साथ सहमति बनाई जा सकती है, लेकिन पहले सदन की कार्यवाही सामान्य रूप से चलनी चाहिए।

    सरकार का कहना है कि युवाओं और छात्रों के भविष्य से जुड़े मुद्दों पर खुलकर चर्चा होना लोकतांत्रिक व्यवस्था की आवश्यकता है। इसी उद्देश्य से सरकार अपनी ओर से उठाए गए कदमों और निर्णयों की जानकारी सदन के माध्यम से देश के सामने रखना चाहती है। इसके लिए सभी दलों का सहयोग आवश्यक बताया गया।

    जेपी नड्डा ने अपने संबोधन में विपक्ष पर आरोप लगाया कि वह सार्थक चर्चा से बचने का प्रयास कर रहा है और लगातार नारेबाजी के माध्यम से सदन की कार्यवाही बाधित कर रहा है। उन्होंने कहा कि संसद में बहस, तर्क और संवाद लोकतंत्र की मूल भावना हैं। यदि चर्चा की बजाय व्यवधान को प्राथमिकता दी जाएगी तो महत्वपूर्ण राष्ट्रीय विषयों पर प्रभावी विमर्श संभव नहीं हो पाएगा।

    उन्होंने यह भी कहा कि संसद की गरिमा और लोकतांत्रिक संस्थाओं की प्रतिष्ठा बनाए रखना सभी राजनीतिक दलों की साझा जिम्मेदारी है। किसी भी विषय पर मतभेद होना स्वाभाविक है, लेकिन उसका समाधान संसदीय प्रक्रिया और संवाद के माध्यम से ही निकाला जाना चाहिए। उनका मानना था कि जनता की अपेक्षा भी यही है कि संसद में मुद्दों पर गंभीर चर्चा हो और समाधान की दिशा में आगे बढ़ा जाए।

    संसद के मानसून सत्र के दौरान नीट परीक्षा और कथित प्रश्नपत्र लीक का मुद्दा प्रमुख राजनीतिक विषय बना हुआ है। विपक्ष इस मामले पर तत्काल चर्चा और सरकार से जवाब की मांग कर रहा है, जबकि सरकार का कहना है कि वह सभी नियमों और संसदीय प्रक्रियाओं के तहत विस्तृत चर्चा के लिए पूरी तरह तैयार है।

    फिलहाल दोनों पक्षों के बीच चर्चा की प्रक्रिया और सदन की कार्यवाही को लेकर गतिरोध बना हुआ है। हालांकि सरकार ने एक बार फिर स्पष्ट किया है कि वह संवाद और बहस के माध्यम से सभी मुद्दों पर अपनी बात रखने तथा विपक्ष के प्रश्नों का उत्तर देने के लिए प्रतिबद्ध है।

  • संसद मार्च के दौरान प्रदर्शन पर बवाल, लाठीचार्ज के बाद सरकार पर बरसे शशि थरूर, विपक्ष ने संसद में चर्चा की उठाई मांग

    संसद मार्च के दौरान प्रदर्शन पर बवाल, लाठीचार्ज के बाद सरकार पर बरसे शशि थरूर, विपक्ष ने संसद में चर्चा की उठाई मांग


    नई दिल्ली ।
    संसद के मानसून सत्र के पहले दिन राजधानी में हुए प्रदर्शन और उसके दौरान पुलिस कार्रवाई को लेकर राजनीतिक माहौल गर्म हो गया। जंतर-मंतर से संसद की ओर बढ़ रहे प्रदर्शनकारियों को रोकने के दौरान हुई झड़प और पुलिस द्वारा भीड़ को नियंत्रित करने के लिए बल प्रयोग किए जाने के बाद विपक्ष ने केंद्र सरकार पर तीखे सवाल उठाए। इस घटनाक्रम को लेकर संसद के भीतर और बाहर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है।

    प्रदर्शनकारियों ने अपनी विभिन्न मांगों को लेकर संसद की ओर मार्च करने का प्रयास किया। सुरक्षा व्यवस्था को देखते हुए पुलिस ने उन्हें आगे बढ़ने से रोका। इस दौरान स्थिति तनावपूर्ण हो गई और भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने लाठीचार्ज तथा आंसू गैस का इस्तेमाल किया। घटना के बाद कई प्रदर्शनकारी मौके से हट गए, जबकि पूरे घटनाक्रम को लेकर राजनीतिक प्रतिक्रियाओं का सिलसिला शुरू हो गया।

    कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने इस कार्रवाई पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में विरोध प्रदर्शन करने वालों की बात सुनी जानी चाहिए। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि सरकार के पास पर्याप्त बहुमत है तो फिर चर्चा से परहेज क्यों किया जा रहा है। थरूर ने कहा कि संसद का उद्देश्य जनहित के मुद्दों पर विचार-विमर्श करना है और लोकतांत्रिक संस्थाओं का महत्व संवाद से ही मजबूत होता है। उन्होंने प्रदर्शनकारियों पर बल प्रयोग को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए शांतिपूर्ण तरीके से समाधान निकालने की आवश्यकता पर बल दिया।

    कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने भी इस घटनाक्रम पर सरकार की आलोचना की। उन्होंने कहा कि छात्रों और युवाओं से जुड़े मुद्दों पर सरकार को अधिक संवेदनशील रवैया अपनाना चाहिए। उनका कहना था कि यदि परीक्षा व्यवस्था और उससे जुड़े मामलों में लगातार विवाद सामने आ रहे हैं तो सरकार को इसकी जिम्मेदारी स्वीकार करनी चाहिए। उन्होंने प्रदर्शनकारियों पर हुई कार्रवाई को लोकतांत्रिक मूल्यों के विपरीत बताते हुए इस पूरे मामले पर जवाबदेही तय करने की मांग की।

    इधर, संसद के मानसून सत्र के दौरान भी विपक्ष ने इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाया। विपक्षी दलों ने शिक्षा व्यवस्था, परीक्षा संबंधी विवादों और युवाओं से जुड़े विषयों पर विस्तृत चर्चा कराने की मांग दोहराई। उनका कहना है कि ऐसे विषय सीधे लाखों छात्रों और उनके भविष्य से जुड़े हैं, इसलिए सरकार को इन पर स्पष्ट जवाब देना चाहिए।

    इस बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की। मुलाकात को लेकर विभिन्न तरह की राजनीतिक चर्चाएं शुरू हुईं, हालांकि आधिकारिक तौर पर बैठक के एजेंडे या किसी संभावित निर्णय की जानकारी सामने नहीं आई। वहीं, प्रदर्शन से जुड़े कुछ प्रमुख प्रतिनिधियों ने अपने आंदोलन की आगामी रणनीति पर भी विचार किया। आंदोलन से जुड़े अभिजीत दीपके ने अपनी भूख हड़ताल समाप्त करने की घोषणा की, जबकि पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने भी अपनी ओर से आंदोलन को लेकर आगे की रूपरेखा साझा की और सरकार के सामने रखी गई मांगों का उल्लेख किया।

    संसद सत्र के साथ ही यह मुद्दा अब राजनीतिक बहस का प्रमुख विषय बन गया है। आने वाले दिनों में संसद के भीतर इस पर तीखी चर्चा होने की संभावना जताई जा रही है। विपक्ष सरकार से इस पूरे घटनाक्रम पर विस्तृत जवाब और संबंधित मुद्दों पर चर्चा की मांग कर रहा है, जबकि सरकार की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार किया जा रहा है।

  • सीएम योगी का विपक्ष पर हमला, बोले- 'उन्हें जिन्ना पसंद, हमें गन्ना'; विकास परियोजनाओं की दी सौगात

    सीएम योगी का विपक्ष पर हमला, बोले- 'उन्हें जिन्ना पसंद, हमें गन्ना'; विकास परियोजनाओं की दी सौगात


    बिजनौर/शामली। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शुक्रवार को शामली और बिजनौर का दौरा कर कई विकास परियोजनाओं की सौगात दी। शामली में उन्होंने 617.70 करोड़ रुपये की लागत वाली 90 विकास परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास किया, जबकि बिजनौर में जनसभा को संबोधित करते हुए विपक्ष पर तीखा राजनीतिक हमला बोला और प्रदेश सरकार की विकास योजनाओं का उल्लेख किया।

    ‘समाज को बांटने वालों से रहें सतर्क’
    मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि कुछ राजनीतिक दल जाति और वर्ग के आधार पर समाज को बांटने का प्रयास करते हैं। उन्होंने लोगों से ऐसे तत्वों से सावधान रहने की अपील करते हुए कहा कि सरकार की प्राथमिकता समाज को जोड़ना, सामाजिक समरसता को मजबूत करना और सभी वर्गों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ना है।

    बिजनौर-चांदपुर के लिए करीब 1000 करोड़ की परियोजनाएं
    सीएम योगी ने कहा कि महात्मा विदुर की धरती बिजनौर लगातार विकास की नई ऊंचाइयों की ओर बढ़ रही है। उन्होंने बताया कि बिजनौर और चांदपुर विधानसभा क्षेत्रों के लिए करीब 1000 करोड़ रुपये की विकास परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास किया जा रहा है।

    विस्थापित परिवारों का भी किया जिक्र
    मुख्यमंत्री ने अपने पिछले दौरे को याद करते हुए कहा कि पड़ापुर क्षेत्र में पाकिस्तान और बांग्लादेश से आए करीब 3000 विस्थापित लोगों को जमीन के पट्टे दिए गए थे। उन्होंने कहा कि वर्षों से न्याय की प्रतीक्षा कर रहे इन परिवारों को सरकार ने अधिकार दिलाने का काम किया है।

    2017 से पहले की कानून-व्यवस्था पर साधा निशाना
    मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2017 से पहले बिजनौर में कानून-व्यवस्था की स्थिति खराब थी और अपराधियों व माफिया का प्रभाव था। उन्होंने दावा किया कि सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति के चलते अब जिले में कानून का राज स्थापित हुआ है और विकास कार्यों को गति मिली है।

    इसी दौरान उन्होंने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा, “कुछ लोग ऐसा बिजनौर चाहते थे, जहां गुंडों और माफियाओं का कब्जा हो। वे समाज को बांटने की राजनीति करते हैं। उन्हें जिन्ना पसंद है, लेकिन हमें गन्ना पसंद है। हमारी सरकार की प्राथमिकता गन्ना किसानों का हित और गन्ने का बेहतर मूल्य सुनिश्चित करना है।”

    गंगा एक्सप्रेसवे हरिद्वार तक बढ़ाने की घोषणा
    मुख्यमंत्री ने कहा कि डबल इंजन सरकार प्रदेश में बेहतर कनेक्टिविटी पर लगातार काम कर रही है। उन्होंने घोषणा की कि गंगा एक्सप्रेसवे का विस्तार हरिद्वार तक किया जाएगा, जिससे बिजनौर सहित आसपास के क्षेत्रों को बेहतर सड़क संपर्क का लाभ मिलेगा।

    बिजनौर में बनेगा नर्सिंग कॉलेज
    योगी आदित्यनाथ ने कहा कि मेडिकल कॉलेज के बाद अब बिजनौर में नर्सिंग कॉलेज का निर्माण भी तेजी से कराया जा रहा है। इससे जिले की बेटियों को नर्सिंग की पढ़ाई के लिए दूसरे शहरों का रुख नहीं करना पड़ेगा और स्थानीय स्तर पर शिक्षा के साथ रोजगार के नए अवसर भी उपलब्ध होंगे।

  • जौहर विश्वविद्यालय की 38 इमारतें गिराने के आदेश पर सियासत तेज, विपक्ष ने सरकार की कार्रवाई पर उठाए सवाल

    जौहर विश्वविद्यालय की 38 इमारतें गिराने के आदेश पर सियासत तेज, विपक्ष ने सरकार की कार्रवाई पर उठाए सवाल

    नई दिल्ली । उत्तर प्रदेश के रामपुर स्थित जौहर विश्वविद्यालय की 38 इमारतों को अवैध निर्माण मानते हुए उन्हें गिराने के प्रशासनिक आदेश के बाद राज्य की राजनीति में नया विवाद खड़ा हो गया है। इस कार्रवाई को लेकर सरकार और विपक्ष आमने-सामने आ गए हैं। एक ओर सरकार इसे कानून के दायरे में की जा रही कार्रवाई बता रही है, वहीं विपक्ष ने इसे राजनीतिक दुर्भावना से प्रेरित कदम बताते हुए सरकार पर तीखे सवाल उठाए हैं।

    जिला प्रशासन ने विश्वविद्यालय परिसर की 40 में से 38 इमारतों को अवैध निर्माण की श्रेणी में रखते हुए उनके विध्वंस के आदेश जारी किए हैं। यह विश्वविद्यालय समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री मोहम्मद आजम खान का महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट माना जाता है। प्रशासन का कहना है कि संबंधित निर्माणों को लेकर कानूनी प्रक्रिया के तहत कार्रवाई की जा रही है और सभी निर्णय नियमों के अनुरूप लिए गए हैं।

    मामले पर उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने कहा कि राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता कानून व्यवस्था बनाए रखना है। उनके अनुसार, सरकार किसी भी मामले में कानून से समझौता नहीं करेगी और जहां भी नियमों का उल्लंघन पाया जाएगा, वहां निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि प्रशासन पूरी पारदर्शिता के साथ अपने दायित्वों का निर्वहन कर रहा है।

    वहीं विपक्ष ने इस कार्रवाई को लेकर सरकार पर निशाना साधा है। आरजेडी नेता मनोज कुमार झा ने विश्वविद्यालय को लेकर जारी विध्वंस नोटिस पर सवाल उठाते हुए कहा कि शैक्षणिक संस्थानों के प्रति इस तरह का रवैया उचित नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार बुलडोजर की कार्रवाई का चयनात्मक इस्तेमाल कर रही है और गंभीर अपराधों के मामलों में ऐसी सख्ती दिखाई नहीं देती। उन्होंने यह भी कहा कि शिक्षा संस्थानों का सम्मान होना चाहिए और कानून का समान रूप से पालन कराया जाना चाहिए।

    जौहर विश्वविद्यालय की स्थापना वर्ष 2006 में की गई थी, जबकि इसका औपचारिक उद्घाटन वर्ष 2012 में हुआ था। विश्वविद्यालय लगभग 1500 बीघा भूमि में फैला हुआ है। परिसर के लिए खरीदी गई जमीन और निर्माण कार्य को लेकर लंबे समय से कानूनी विवाद जारी हैं। प्रशासन और जांच एजेंसियां पिछले कई वर्षों से विश्वविद्यालय से जुड़े विभिन्न मामलों की जांच कर रही हैं।

    बताया जाता है कि मोहम्मद आजम खान के खिलाफ दर्ज कई मामलों का संबंध भी जौहर विश्वविद्यालय से जुड़े भूमि और निर्माण विवादों से है। इन्हीं मामलों के आधार पर समय-समय पर प्रशासनिक और कानूनी कार्रवाई की जाती रही है। राज्य में वर्ष 2017 के बाद विश्वविद्यालय से जुड़े मामलों में जांच और प्रशासनिक कार्रवाई की गति तेज हुई, जिसके बाद कई कानूनी प्रक्रियाएं आगे बढ़ाई गईं।

    फिलहाल जौहर विश्वविद्यालय को लेकर जारी विध्वंस आदेश राजनीतिक बहस का विषय बन गया है। सरकार इसे पूरी तरह कानूनी प्रक्रिया का हिस्सा बता रही है, जबकि विपक्ष निष्पक्षता और कार्रवाई के तरीके पर सवाल उठा रहा है। अब सभी की नजर इस मामले में आगे होने वाली प्रशासनिक कार्रवाई और न्यायिक प्रक्रिया पर टिकी हुई है, क्योंकि इसका असर केवल एक संस्थान तक सीमित नहीं बल्कि राज्य की राजनीतिक और कानूनी बहस पर भी पड़ सकता है।

  • कम सीटों के बावजूद संसद में सरकार को घेरने की तैयारी, INDIA गठबंधन ने बनाई आक्रामक रणनीति

    कम सीटों के बावजूद संसद में सरकार को घेरने की तैयारी, INDIA गठबंधन ने बनाई आक्रामक रणनीति


    नई दिल्ली। संसद में विपक्ष की संख्या भले ही पहले के मुकाबले कम हो गई हो, लेकिन मॉनसून सत्र में INDIA गठबंधन सरकार को घेरने के लिए ज्यादा आक्रामक रणनीति के साथ उतरने की तैयारी कर रहा है। पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस और महाराष्ट्र में शिवसेना (यूबीटी) में हुई टूट के साथ ही डीएमके की नाराजगी के बीच विपक्षी गठबंधन ने अपनी आगे की रणनीति पर मंथन शुरू कर दिया है।

    कांग्रेस के रणनीतिकारों का मानना है कि हाल के राजनीतिक घटनाक्रमों से विपक्षी एकजुटता पर असर पड़ा है, लेकिन गठबंधन अपनी उपलब्ध ताकत के साथ सरकार की नीतियों का विरोध करेगा। विपक्ष का फोकस आम जनता से जुड़े मुद्दों को उठाने और सरकार से जवाब मांगने पर रहेगा।

    खरगे की अध्यक्षता में हुई अहम बैठक
    मॉनसून सत्र की रणनीति तय करने के लिए कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की अध्यक्षता में पार्टी के वरिष्ठ नेताओं की बैठक हुई। इसमें लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी और कांग्रेस संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल समेत कई प्रमुख नेता शामिल हुए। सूत्रों के अनुसार, बैठक में संसद सत्र की तैयारियों, विपक्षी दलों के बीच तालमेल और संगठन से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की गई।

    बैठक के बाद केसी वेणुगोपाल ने राम मंदिर में कथित चढ़ावा चोरी के मुद्दे को उठाते हुए इसे भ्रष्टाचार का बड़ा मामला बताया। उन्होंने कहा कि यह सिर्फ आर्थिक अनियमितता का मामला नहीं है, बल्कि लोगों की आस्था से जुड़ा विषय भी है। उन्होंने आरोप लगाया कि इस मामले में संघ और विश्व हिंदू परिषद की भूमिका है। विपक्ष इस मुद्दे को संसद में प्रमुखता से उठाने की तैयारी कर रहा है।

    डीएमके की नाराजगी के बावजूद एकजुटता की उम्मीद
    कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता के मुताबिक, INDIA गठबंधन के कई सहयोगी दल लगातार डीएमके के संपर्क में हैं। पार्टी को उम्मीद है कि तमिलनाडु की राजनीतिक नाराजगी के बावजूद डीएमके गठबंधन के सामूहिक फैसलों के खिलाफ नहीं जाएगी। विपक्षी नेताओं का मानना है कि संसद सत्र के दौरान सरकार को घेरने के लिए सभी दलों के बीच समन्वय बनाए रखना जरूरी होगा।

    एक समय में एक मुद्दे पर रहेगा विपक्ष का फोकस
    मॉनसून सत्र में विपक्ष सभी मुद्दों को एक साथ उठाने के बजाय चरणबद्ध तरीके से सरकार को घेरने की रणनीति अपना सकता है। विपक्ष के एक वरिष्ठ नेता ने बताया कि संसद में कई महत्वपूर्ण विषय उठाए जाने हैं, लेकिन उन्हें क्रमवार तरीके से रखा जाएगा। इससे पूरे सत्र के दौरान सरकार पर लगातार दबाव बनाए रखने में मदद मिलेगी।

    इसके अलावा विपक्ष कई मुद्दों पर सदन में विस्तृत चर्चा की मांग भी करेगा। रणनीति यह है कि जनता से जुड़े विषयों को प्रमुखता देकर सरकार से जवाब मांगा जाए और संसद में विपक्ष की भूमिका को प्रभावी बनाया जाए।