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  • IMP ने कसी पाकिस्तान पर नकेल… 7 अरब डॉलर के बेलआउट कार्यक्रम के साथ जोड़ी 11 नई शर्तें

    IMP ने कसी पाकिस्तान पर नकेल… 7 अरब डॉलर के बेलआउट कार्यक्रम के साथ जोड़ी 11 नई शर्तें


    इस्लामाबाद।
    अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (International Monetary Fund- IMF) ने पाकिस्तान (Pakistan) के लिए अपने 7 अरब डॉलर के बेलआउट कार्यक्रम ($7 Billion Bailout program) के तहत 11 नई शर्तें जोड़ दी हैं। गुरुवार को जारी दूसरी समीक्षा की स्टाफ-लेवल रिपोर्ट में शामिल इन शर्तों के बाद पिछले 18 महीनों में लगाई गई कुल शर्तों की संख्या बढ़कर 64 हो गई है। नई शर्तें पाकिस्तान के सुशासन ढांचे की पुरानी खामियों, व्यापक भ्रष्टाचार जोखिमों और घाटे वाले क्षेत्रों में सुधार से जुड़ी हैं।


    उच्च अधिकारियों की संपत्ति का सार्वजनिक खुलासा अनिवार्य

    सबसे अहम शर्तों में से एक यह है कि दिसंबर 2026 तक सभी उच्च स्तरीय केंद्रीय सिविल सेवकों (ग्रेड-19 और ऊपर) की संपत्ति घोषणाएं आधिकारिक सरकारी वेबसाइट पर सार्वजनिक की जाएंगी। आईएमएफ का कहना है कि इससे आय और संपत्ति में विसंगतियों का पता लगाना आसान होगा। सरकार ने प्रांतीय स्तर के वरिष्ठ अधिकारियों पर भी यह नियम लागू करने का इरादा जाहिर किया है। बैंकिंग क्षेत्र को इन घोषणाओं की पूरी जानकारी दी जाएगी।


    भ्रष्टाचार पर बड़ा हमला

    आईएमएफ ने अक्टूबर 2026 तक 10 सबसे अधिक जोखिम वाले विभागों में भ्रष्टाचार के खतरे को कम करने के लिए विस्तृत कार्ययोजना जारी करने को कहा है। नेशनल अकाउंटेबिलिटी ब्यूरो (NAB) इन योजनाओं का समन्वय करेगा। प्रांतीय एंटी-करप्शन संस्थाओं को वित्तीय खुफिया जानकारी प्राप्त करने और वित्तीय अपराधों की जांच क्षमता बढ़ाने के लिए अतिरिक्त जिम्मेदारी दी गई है। ये कदम आईएमएफ-प्रायोजित गवर्नेंस एंड करप्शन डायग्नोस्टिक असेसमेंट की सिफारिशों पर आधारित हैं, जिसमें पाकिस्तान के कानूनी, प्रशासनिक और निगरानी ढांचे में व्यापक कमियां उजागर हुई थीं।


    सीमा-पार भुगतान और रेमिटेंस लागत की समीक्षा

    आईएमएफ ने पाकिस्तान को मई 2026 तक विदेशी रेमिटेंस भेजने की लागत और बाधाओं की व्यापक समीक्षा पूरी करने को कहा है। अनुमान है कि रेमिटेंस लागत आने वाले वर्षों में 1.5 अरब डॉलर तक बढ़ सकती है, जबकि यही राशि पाकिस्तान के सीमित आयातों के लिए सबसे बड़ा वित्तीय स्रोत है। सितंबर 2026 तक स्थानीय मुद्रा बॉन्ड मार्केट के विकास में बाधाओं की जांच कर सुधारों की रणनीतिक योजना प्रकाशित करनी होगी।


    चीनी उद्योग में एकाधिकार तोड़ने की कवायद

    जून 2026 तक कंद्र और प्रांतीय सरकारों को मिलकर राष्ट्रीय चीनी बाजार उदारीकरण नीति पर सहमति बनानी होगी। इस नीति में लाइसेंसिंग नियम, मूल्य नियंत्रण, आयात-निर्यात अनुमति, जोनिंग मानदंड और कार्यान्वयन की स्पष्ट समय-सीमा शामिल होगी। नीति को संघीय कैबिनेट से मंजूरी लेनी होगी। इसे लंबे समय से शक्तिशाली माने जाने वाले शुगर उद्योग में प्रभाव के केंद्रीकरण को खत्म करने का प्रयास माना जा रहा है।


    एफबीआर (FBR) की खराब कार्यक्षमता पर सख्ती

    दिसंबर 2025 के अंत तक एफबीआर सुधारों का पूरा रोडमैप तैयार करना होगा जिसमें प्राथमिकता वाले क्षेत्र, स्टाफिंग जरूरतें, समय-सारिणी, माइलस्टोन, अपेक्षित राजस्व परिणाम और KPI शामिल होंगे। इसके बाद कम-से-कम तीन प्राथमिकता वाले सुधारों को पूरी तरह लागू करना होगा। दिसंबर 2026 तक मध्यम अवधि की टैक्स सुधार रणनीति भी प्रकाशित करनी होगी।

    बिजली क्षेत्र में निजीकरण की तैयारी
    अगले केंद्रीय बजट से पहले हैदराबाद इलेक्ट्रिक सप्लाई कंपनी (HESCO) और सुक्कूर इलेक्ट्रिक पावर कंपनी (SEPCO) में निजी क्षेत्र की भागीदारी के लिए आधार तैयार करने होंगे और सात सबसे बड़ी बिजली वितरण कंपनियों के साथ पब्लिक सर्विस ऑब्लिगेशन समझौते पूरे करने होंगे। कंपनीज एक्ट 2017 में संशोधन संसद में पेश करने होंगे ताकि गैर-सूचीबद्ध कंपनियों के लिए अनुपालन जरूरतें बढ़ाई जा सकें। विशेष आर्थिक क्षेत्र (SEZ) कानून में प्रस्तावित संशोधनों के लिए कॉन्सेप्ट नोट भी जारी करना होगा।


    राजस्व कम हुआ तो मिनी-बजट लाना होगा

    आईएमएफ रिपोर्ट में दर्ज है कि यदि दिसंबर 2025 के अंत तक राजस्व लक्ष्य से चूक हुई तो सरकार मिनी-बजट लाएगी। इसमें उर्वरक और कीटनाशकों पर फेडरल एक्साइज ड्यूटी 5% बढ़ाना, उच्च चीनी वाले उत्पादों पर नया एक्साइज ड्यूटी लगाना और कई वस्तुओं को स्टैंडर्ड सेल्स टैक्स दर में लाना शामिल होगा। आईएमएफ ने गवर्नेंस और भ्रष्टाचार डायग्नोस्टिक रिपोर्ट में चिह्नित कमियों को दूर करने की कार्ययोजना प्रकाशित करने की समय-सीमा भी बढ़ा दी है। पाकिस्तान पहले ही 7 अरब डॉलर के EFF कार्यक्रम के तहत कड़ी निगरानी में है और इन नई शर्तों से आर्थिक सुधारों की गति और तेज करने का दबाव बढ़ गया है।

  • पाकिस्तान सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई में पहुंचे नॉर्वे के राजदूत, शहबाज सरकार ने भेजा समन

    पाकिस्तान सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई में पहुंचे नॉर्वे के राजदूत, शहबाज सरकार ने भेजा समन


    नई दिल्‍ली । पाकिस्तान (Pakistan)के सुप्रीम कोर्ट(Supreme Court) की एक सुनवाई में नॉर्वे के राजदूत अल्बर्ट इलसास(Ambassador Albert Ilsas) भी पहुंच गए। इससे पाकिस्तानी सरकार इतना भड़क गई कि इलसास को समन भेज दिया गया। जानकारी के मुताबिक मानवाधिकार से जुड़े एक मामले की सुनवाई के दौरान नॉर्वे के राजदूत सुप्रीम कोर्ट में मौजूद थे। ऐक्टिविस्ट इणान जैनब मजारी और उनके पति हादी अली चत्ता की सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई चल रही थी।

    पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने इलसास को समन किया है और कहा है कि देश के आंतरिक मामलों में दखल देना उचित नहीं है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ताहिर अंदराबी ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई में उपस्थित होकर नॉर्वे के राजदूत ने अंतरराष्ट्रीय कानूनों और डिप्लोमैटिक प्रोटोकॉल का उल्लंघन किया है।

    अंदराबी ने कहा, उन्होंने जो कुछ भी किया है उसे देश के आंतरिक मामलों में दखल माना जा रहा है। किसी भी देश के राजदूत से उम्मीद की जाती है कि वह विएना कन्वेंशन के नियमों का पालन करे। वहीं इमान ने राजदूत का पक्ष लेते हुए कहा है कि राजदूत का सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई के दौरान उपस्थित रहना यह कतई नहीं दिखाता है कि वह किसी पक्ष में थे। यह एक आम बात है, हालांकि पाकिस्तान की सरकार एक राजदूत की छवि खराब करने की कोशिश कर रही है।

    बता दें कि इमान और उनके पति के खिलाफ पाकिस्तान के इलेक्ट्रॉनिक ऐक्ट 2016 के तहत केस दर्ज किया गया है। इस्लामाबाद हाई कोर्ट में उन्होंने अंतरिम राहत के लिए अपील की थी। उनकी याचिका खारिज हो गई। इसके बाद दंपती ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है।

  • अमेरिका ने पाकिस्तान के F-16 विमानों के अपग्रेड के लिए 686 मिलियन डॉलर के पैकेज को दी मंजूरी

    अमेरिका ने पाकिस्तान के F-16 विमानों के अपग्रेड के लिए 686 मिलियन डॉलर के पैकेज को दी मंजूरी


    नई दिल्ली । अमेरिकी(American) विदेश विभाग ने पाकिस्तान के एफ-16 लड़ाकू विमान बेड़े को आधुनिक बनाने के लिए 686 मिलियन डॉलर (68.6 करोड़ डॉलर) के पैकेज को मंजूरी दे दी है। यह पैकेज पाकिस्तान वायु सेना (Pakistan Air Force)की क्षमताओं को बढ़ाने, अंतरसंचालन(Interoperability) को मजबूत करने और विमानों की सर्विस लाइफ को 2040 तक विस्तारित करने के उद्देश्य से तैयार किया गया है। ट्रंप प्रशासन(Trump administration) ने इस प्रस्ताव को संसद के पास भेज दिया है, जहां इसे 30 दिनों की समीक्षा प्रक्रिया से गुजरना होगा।

    इस सौदे में लिंक-16 डेटा लिंक सिस्टम, क्रिप्टोग्राफिक उपकरण, एवियोनिक्स अपग्रेड, प्रशिक्षण मॉड्यूल और व्यापक रखरखाव समर्थन शामिल हैं। अमेरिकी रक्षा सुरक्षा सहयोग एजेंसी (डीएससीए) के अनुसार, यह अपग्रेड पाकिस्तान के एफ-16 बेड़े की विश्वसनीयता और रखरखाव क्षमता को बढ़ाएगा, साथ ही अमेरिकी और पाकिस्तानी वायु सेनाओं के बीच बेहतर समन्वय सुनिश्चित करेगा। डीएससीए ने एक बयान में कहा- यह प्रस्तावित बिक्री अमेरिकी विदेश नीति और राष्ट्रीय सुरक्षा उद्देश्यों का समर्थन करती है। पाकिस्तान एक प्रमुख गैर-नाटो सहयोगी देश है।

    पाकिस्तान के पास वर्तमान में लगभग 75 एफ-16 विमान हैं, जो 1980 के दशक से उसकी वायु सेना का मुख्य आधार हैं। यह अपग्रेड विशेष रूप से महत्वपूर्ण है क्योंकि पाकिस्तान के एफ-16 बेड़े को आधुनिक चुनौतियों का सामना करने के लिए अपग्रेडेड कम्युनिकेशन और सेंसर सिस्टम की आवश्यकता है।

    अमेरिका और पाकिस्तान के बीच सैन्य सहयोग का इतिहास लंबा रहा है, लेकिन हाल के वर्षों में यह उतार-चढ़ाव से गुजरा है। 2018 में ट्रंप प्रशासन ने पाकिस्तान को सैन्य सहायता निलंबित कर दी थी, लेकिन अब इस अपग्रेड पैकेज से संबंधों में सुधार के संकेत मिल रहे हैं। पाकिस्तानी अधिकारियों ने इस मंजूरी का स्वागत किया है, इसे अपनी रक्षा क्षमताओं को मजबूत करने के रूप में देखते हुए। दूसरी ओर, अमेरिकी कांग्रेस में कुछ सदस्यों ने पाकिस्तान की आतंकवाद विरोधी प्रतिबद्धताओं पर सवाल उठाए हैं, लेकिन डीएससीए ने स्पष्ट किया कि यह पैकेज केवल मौजूदा बेड़े के रखरखाव और अपग्रेड के लिए है, न कि नए विमानों की बिक्री के लिए।

    यह विकास ऐसे समय में आया है जब दक्षिण एशिया में भू-राजनीतिक तनाव बढ़ रहा है। पाकिस्तान ने हाल ही में अपनी वायु सेना को आधुनिक बनाने के लिए चीन से जे-10सी विमान भी प्राप्त किए हैं, लेकिन एफ-16 अमेरिकी तकनीक पर निर्भर उसकी मुख्य ताकत बनी हुई है। यदि कांग्रेस इस सौदे को मंजूरी देती है, तो यह पाकिस्तान की सैन्य आधुनिकीकरण की दिशा में एक बड़ा कदम होगा।

  • पाकिस्तानी सेना के प्रवक्ता ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में महिला पत्रकार को आंख मारी… भड़के लोग

    पाकिस्तानी सेना के प्रवक्ता ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में महिला पत्रकार को आंख मारी… भड़के लोग


    इस्लामाबाद।
    पड़ोसी देश पाकिस्तान (Pakistan) की सेना के जनरल का एक वीडियो सामने आने के बाद इंटरनेट पर लोगों का गुस्सा फूट पड़ा है। दरअसल इस वीडियो में पाकिस्तान के इंटर-सर्विसेज पब्लिक रिलेशंस (Inter-Services Public Relations of Pakistan) के डायरेक्टर जनरल (Director General) और सैन्य प्रवक्ता (Military spokesman) लेफ्टिनेंट जनरल अहमद शरीफ चौधरी (Lieutenant General Ahmed Sharif Chaudhry) एक महिला पत्रकार को आंख मारते नाराज आ रहे हैं। वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।

    रिपोर्ट्स के मुताबिक वायरल वीडियो कथित तौर पर एक प्रेस कॉन्फ्रेंस का है। इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में महिला पत्रकार अबसा कोमल जनरल चौधरी से पाक के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान को लेकर सवाल पूछ रही थीं। पत्रकार ने कहा, “आपने आज कहा कि वह (इमरान खान) राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा हैं, देश विरोधी हैं और दिल्ली के इशारों पर काम कर रहे हैं। यह पहले से कैसे अलग है या क्या हम आगे इस पर कोई डेवलपमेंट की उम्मीद करें?”

    इस गंभीर सवाल का मजाकिया जवाब देते हुए जनरल ने कहा, “और एक चौथा पॉइंट जोड़ लें वह एक ‘जेहनी मरीज’ (मानसिक रोगी) भी हैं।” इसके बाद वह मुस्कुराए और पत्रकार को देख कर आंख मारी, जिसका वीडियो इंटरनेट पर वायरल हो गया। हालांकि लाइव हिन्दुस्तान स्वतंत्र रूप से वीडियो की प्रामाणिकता की पुष्टि नहीं करता है।

    भड़के लोग
    पाकिस्तानी जनरल का वीडियो वायरल होते ही यूजर्स का गुस्सा फूट पड़ा। लोगों ने इस पर आश्चर्य जताया है कि कोई वर्दी पहना हुआ शख्स, सार्वजनिक रूप से इस तरह की हरकत कैसे कर सकता है। एक यूजर ने लिखा, “ये कूल बनने की कोशिश कर रहे हैं। इनको ये नहीं पता कि इनको कोई सीरियसली नहीं लेता।”

    एक अन्य यूजर ने लिखा, “यह दिखाता है कि उनकी सेना कितनी गैर-पेशेवर है। वर्दी में कोई इस तरह सार्वजनिक रूप से किसी को आंख कैसे मार सकता है?” वहीं एक अन्य ने लिखा कि इस तरह के लोग पाकिस्तान सेना के जनरल हैं तो कोई आश्चर्य नहीं है कि उनका देश किस स्थिति में हैं।

  • Pakistan की संसद में ईमानदारी के इम्तिहान… एक दर्जन से ज्यादा सांसद हुए फेल

    Pakistan की संसद में ईमानदारी के इम्तिहान… एक दर्जन से ज्यादा सांसद हुए फेल


    इस्लामाबाद।
    पड़ोसी देश पाकिस्तान (Pakistan) की संसद में बैठे सांसद कितने ईमानदार (Honest MPs) हैं? इसकी जब परीक्षा हुई तो करीब एक दर्जन से ज्यादा सांसद उसमें फेल हो गए। यह सब हुआ ऑन कैमरा। अब उसका वीडियो फुटेज सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। दरअसल, हुआ यूं कि पाकिस्तान की नेशनल असेंबली (Pakistan National Assembly) के स्पीकर सरदार अयाज सादिक (Speaker Sardar Ayaz Sadiq) ने सांसदों की ईमानदारी का इम्तिहान लेने के लिए एक मजेदार तरकीब निकाला। उन्होंने कुछ कड़क-कड़क नोट लहराकर संसद में पूछा कि ये किसके हैं?

    वीडियो में दिख रहा है कि वह हाथों में नोट लहराते हुए पूछ रहे हैं कि ये किसी के पैसे गिर गए हैं, जिनके हैं हाथ खड़े करें। इसी बीच संसद में बैठे 12-13 सांसदों ने हाथ खड़े कर दिए। इस पर मुस्कुराते हुए स्पीकर ने कहा, “ये तो 10-12 हाथ खड़े हो गए हैं, पैसे उतने नहीं हैं, जितने लोगों के हाथ खड़े हुए हैं। ये तो सारे हाउस के हाथ खड़े हो गए हैं।” उसके बाद उन्होंने थैंक यू कहकर मामला समाप्त कर दिया। अब ये वीडियो क्लिप सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।


    रूपये असली मालिक को मिल गए

    पाकिस्तान के टीवी के मुताबिक, नेशनल असेंबली की ये घटना सोमवार की है। स्पीकर अयाज सादिक के हाथ में उस वक्त 5000 रुपये के कुल 10 नोट थे, जिन्हें वह लहरा रहे थे। यानी उनके हाथ में कुल 50,000 रुपये थे, जो किसी सांसद के संसद भवन में गिर गए थे। आखिरकार कैश अपने असली मालिक PTI के सांसद मुहम्मद इकबाल अफरीदी के पास पहुंच गया लेकिन पाक सोशल मीडिया पर इसको लेकर गरमागरम बहस छिड़ गई है।


    पाकिस्तानी सांसदों की हो रही खिंचाई

    जैसे ही वीडियो सोशल मीडिया पर पॉपुलर हुआ, पाकिस्तानियों ने अपने सांसदों की खिंचाई शुरू कर दी। कुछ लोगों का कहना है कि जिन 12 MPs ने हाथ उठाए थे, उन्हें संसद का अपमान करने का दोषी मानकर सदन से निकाल देना चाहिए। एक मज़ाकिया यूज़र, महनूर आसिफ ने ट्वीट किया, “स्पीकर ने शरीफ भाइयों के 25 कॉल मिस कर दिए।” हालांकि, कुछ लोग इस घटना से हैरान नहीं हैं। एक और ने ट्वीट किया, “वे लाखों में सैलरी और भत्ते लेते हैं, फिर भी यह उनका हाल है।”

  • भारी कर्ज और कुप्रबंधन में डूबा पाकिस्तान… IMF-ADB ने खोली अर्थव्यवस्था की पोल

    भारी कर्ज और कुप्रबंधन में डूबा पाकिस्तान… IMF-ADB ने खोली अर्थव्यवस्था की पोल


    इस्लामाबाद।
    पाकिस्तान (Pakistan) के लिए बुधवार को आई दो रिपोर्टें बेहद चौंकाने वाली और उसकी अर्थव्यवस्था (Economy) की कलई खोलने वाली हैं। पहली रिपोर्ट अंतरराष्ट्रीय मुद्राकोष (आईएमएफ) (International Monetary Fund – IMF) की है जिसके नवीनतम अनुमानों से पता चलता है कि यह देश अब भी भारी कर्ज, कमजोर निवेश और धीमी रोजगार वृद्धि से जूझ रहा है। दूसरी रिपोर्ट एशियाई विकास बैंक (एडीबी) (Asian Development Bank -ADB) की है जिसमें चेताया गया है कि पाकिस्तान कुप्रबंधन में डूबा है और जल संकट गंभीरतम हालत में है।

    आईएमएफ ने पाकिस्तान को 1.2 अरब डॉलर की नई राशि देने के बीच चेताया कि देश की आर्थिक वृद्धि दर वित्त वर्ष 2025 में 2.6% से बढ़कर 2026 तक 3.2% हो जाएगी, जो 24 करोड़ की आबादी वृद्धि की दर से लगभग मेल नहीं खाती। मुद्रास्फीति भी घटकर 4.5% रह गई है जो अस्थिरता का संकेत देती है। उधर, एडीबी ने कहा- पाकिस्तान में 80% से अधिक आबादी स्वच्छ पेयजल से वंचित है। देश अनियंत्रित आबादी व कुप्रबंधन से भारी दबाव में है।

    कमजोर रोजगार सृजन क्षमता का शिकार
    आईएमएफ की रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान की जनसंख्या मध्य 2025 के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार 2.55% है, जबकि विश्व बैंक के आंकड़े 1.8-1.9% दर्शाते हैं। बेरोजगारी दर वित्त वर्ष 2026 में मामूली रूप से 7.5% रहने का अनुमान है, जो वर्तमान विकास पथ की कमजोर रोजगार सृजन क्षमता को दर्शाता है। राजकोषीय मोर्चे पर, सरकारी राजस्व और अनुदान 2026 तक 16.3% होने का अनुमान है, जबकि व्यय जीडीपी के करीब 20% के आसपास ही रह सकेगा।

    सार्वजनिक ऋण के बोझ तले दबा है पाकिस्तान
    अंतरराष्ट्रीय मुद्राकोष के मुताबिक, पाकिस्तान सार्वजनिक ऋण के बोझ तले बुरी तरह से दबा हुआ है। आईएमएफ दायित्वों सहित कुल सामान्य सरकारी ऋण जीडीपी के लगभग 72-73% तक रहने का अनुमान है, जबकि सरकारी व गारंटीकृत ऋण करीब 76% रहने की उम्मीद है। घरेलू ऋण जीडीपी का लगभग आधा हिस्सा है, जिससे घरेलू उधार दरों में वृद्धि के कारण ब्याज लागत अधिक बनी हुई है। ये हालात अर्थव्यवस्था के बेहद संकट में रहने का संकेत देते हैं।

    पाकिस्तानी नीतियों पर चेतावनी
    पाकिस्तान में प्रति व्यक्ति पानी की उपलब्धता 1972 में 3,500 घन मीटर से गिरकर 2020 में मात्र 1,100 घन मीटर रह गई है, जिससे यह पूर्ण कमी की दहलीज के खतरनाक रूप से करीब पहुंच गया है। एडीबी ने कहा कि पाकिस्तान की राष्ट्रीय जल नीति योजना और कार्यान्वयन के बीच गंभीर अंतर से ग्रस्त है। इसे लेकर एडीबी ने पाकिस्तानी नीतियों पर चेतावनी भी जारी की।

    जल प्रबंधन अक्षमता और संस्थागत विखंडन से ग्रस्त
    एशियाई विकास बैंक (एडीबी) ने अपनी नवीनतम एशियाई जल विकास आउटलुक (एडब्ल्यूडीओ) रिपोर्ट में चेतया है कि पाकिस्तान में जल संकट गंभीर बना हुआ है। इसके पीछे देश में कुप्रबंधन की सबसे बड़ी भूमिका है। इस कारण पाकिस्तान के जल संसाधन अत्यधिक दबाव में हैं। रिपोर्ट में असुरक्षित पानी और कृषि में भूजल के अत्यधिक उपयोग से होने वाली व्यापक जलजनित बीमारियों का भी जिक्र है। इसी के चलते भूजल का क्षरण व आर्सेनिक प्रदूषण हुआ है। एडीबी ने कहा, पाकिस्तानी जल प्रबंधन अभी भी अक्षमता, संस्थागत विखंडन और अपर्याप्त निधि से ग्रस्त है।

  • जज साहब के घर से 2 सेब चोरी, पड़ोसी मुल्क में अजब-गजब मामला; पुलिस महकमा जांच में जुटा

    जज साहब के घर से 2 सेब चोरी, पड़ोसी मुल्क में अजब-गजब मामला; पुलिस महकमा जांच में जुटा


    नई दिल्ली। पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान से हाल ही में एक ऐसी खबर सामने आई है जिसे सुन कर आप भी अपना सिर पकड़ लेंगे। हाल ही में यहां की पुलिस ने 2 सेब चोरी होने पर FIR दर्ज कर लिया और पूरा महकमा इस मामले की जांच में भी जुट गया है। मामला पाकिस्तान के पंजाब प्रांत का है। पाक के एक मानवाधिकार कार्यकर्ता ने मामले पर तंज कसते हुए इसे पाकिस्तान के इतिहास का सबसे बड़ा चोरी का मामला कहा है।
    जानकारी के मुताबिक लाहौर में एक सेशंस जज के चेंबर से 2 सेब और एक हैंडवाश की बोतल की चोरी हो गई। इसके बाद पंजाब प्रांत की पुलिस एक्शन में आ गई। पुलिस ने मंगलवार को बताया है कि FIR लाहौर के इस्लामपुरा पुलिस स्टेशन में जज के रीडर की शिकायत पर दर्ज की गई है। वहीं रीडर ने कहा है कि जज ने खुद उसे शिकायत दर्ज कराने का निर्देश दिया था।
    FIR के मुताबिक 5 दिसंबर को एडिशनल सेशंस जज नूर मुहम्मद बसमल के चैंबर से दो सेब और एक हैंडवॉश की बोतल चोरी हो गई थी। इसमें कहा गया है कि चोरी हुए सामान की कुल कीमत 1,000 पाकिस्तानी रुपए हैं। लाहौर पुलिस ने पाकिस्तान दंड संहिता की धारा 380 के तहत मामला दर्ज किया है। इस धारा के तहत, दोषी को सात साल तक की जेल, जुर्माना या दोनों हो सकते हैं।

  • आतंकियों को पालने-पोषने के पर्याप्त सबूत… फिर भी PAK के लिए IMF ने खोला खजाना

    आतंकियों को पालने-पोषने के पर्याप्त सबूत… फिर भी PAK के लिए IMF ने खोला खजाना


    इस्लामाबाद।
    पाकिस्तान (Pakistan) में किस तरह से आतंकी अड्डे चल रहे हैं, ये पूरी दुनिया जानती है. हाल ही में इजरायल (Israel) ने लश्कर ए तैयबा (Lashkar-e-Taiba) को लेकर भारत के हाथ मिलाने का भी ऑफर दिया है, उधर भारत (India) यूनाइटेड नेशंस में पर्याप्त सबूत दे चुका है कि पाकिस्तान का पैसा कहां जा रहा है. बावजूद इसके अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (International Monetary Fund.- IMF) ने एक बार फिर पाकिस्तान के लिए अपना खजाना खोल दिया है. राहत के नाम पर उसने पाकिस्तान के लिए 1.2 अरब डॉलर के लोन की किस्त को मंजूरी दी है।

    इस फैसले के साथ पाकिस्तान का IMF कार्यक्रम फिलहाल ट्रैक पर बना रहेगा और उसे अपने विदेशी मुद्रा भंडार को मजबूत करने में मदद मिलेगी. IMF बोर्ड की मंजूरी के बाद यह फंड अगले कुछ दिनों में पाकिस्तान को जारी किया जाएगा. इस लोन से पाकिस्तान खस्ताहाल आर्थिक हालात को थोड़ी राहत मिलेगी. पाकिस्तान के लिए यह राशि बेहद महत्वपूर्ण है क्योंकि सब जानते हैं कि उसका ध्यान हालात सुधारने पर कम और हथियारों का जखीरा बढ़ाने पर ज्यादा है।

    IMF ने क्या रखी हैं शर्तें?

    IMF ने साफ किया है कि पाकिस्तान को आगे भी राजस्व बढ़ाने के लिए ठोस कदम उठाने होंगे. इसके लिए सरकार को टैक्स वसूली में सुधार, घाटा कम करने और आर्थिक सुधारों की रफ्तार बढ़ाने पर जोर देना होगा. इसके साथ ही IMF ने पाकिस्तान को सरकारी कंपनियों के निजीकरण को तेज करने की भी सलाह दी है. संस्था का कहना है कि घाटे में चल रही सरकारी इकाइयां पाकिस्तान की आर्थिक स्थिरता में बड़ा रोड़ा बनी हुई हैं. हालांकि पाकिस्तान को इससे वाकई राहत तभी मिलेगी, जब वो देश में संरचनात्मक सुधारों को गंभीरता से लागू करे न कि इस पैसे को आतंकवाद को स्पॉन्सर करने और हथियारों का भंडार भरने में लगाए।

    आपको जानकर हैरानी होगी कि साल 2024 में IMF ने पाकिस्तान के लिए एक नया 37 महीने का एक्सटेंडेड फंड फैसिलिटी प्रोग्राम मंजूर किया था, जिसकी कुल राशि करीब US$ 7 बिलियन थी. इसमें से करीब 3 बिलियन की रकम पाकिस्तान को दी जा चुकी है लेकिन आज भी पाकिस्तान में जनता को मूलभूत चीजों के लिए सोचना पड़ता है. खाने-पीने की चीजों के दाम इतने हैं कि आम लोगों की थाली से पोषण गायब होता जा रहा है. बावजूद इसके पाकिस्तान के हथियारों के भंडार भर रहे हैं, ऐसे में साफ समझ में आता है कि पाकिस्तान के इन राहत पैकेजों की प्राथमिकता में सिर्फ और सिर्फ लड़ाई की तैयारी है।

  • 44 अमेरिकी सांसदों ने विदेश मंत्री को लिखी चिट्ठी, पाकिस्तान में लोकतंत्र पर चिंता जताई

    44 अमेरिकी सांसदों ने विदेश मंत्री को लिखी चिट्ठी, पाकिस्तान में लोकतंत्र पर चिंता जताई

    नई दिल्ली। अमेरिकी संसद के 44 सांसदों ने विदेश मंत्री मार्को रुबियो को पत्र लिखकर पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और आर्मी चीफ आसिम मुनीर पर तुरंत प्रतिबंध लगाने का आग्रह किया है। सांसदों का आरोप है कि पाकिस्तान में सेना सरकार चला रही है और आम नागरिकों के अधिकारों का बड़े पैमाने पर हनन हो रहा है। विदेश में रहने वाले पाकिस्तानी मूल के अमेरिकी नागरिकों को भी सरकार के खिलाफ आवाज उठाने पर धमकियां मिल रही हैं। पत्र का नेतृत्व डेमोक्रेटिक सांसद प्रमिला जयपाल और ग्रेग कासर ने किया। उन्होंने लिखा कि पाकिस्तान में तानाशाही बढ़ रही है। पत्रकारों को धमकाया जा रहा है, अगवा किया जा रहा है या देश छोड़ने पर मजबूर किया जा रहा है।

    प्रमुख घटनाएँ

    वर्जीनिया के जर्नलिस्ट अहमद नूरानी के दोनों भाइयों को पाकिस्तान में एक महीने से अधिक समय तक अगवा रखा गया। मशहूर संगीतकार सलमान अहमद के जीजा का अपहरण हुआ, जिन्हें अमेरिकी हस्तक्षेप के बाद छोड़ा गया। विपक्षी नेताओं को बिना आरोप जेल में डाला जा रहा है। आम नागरिकों को सिर्फ सोशल मीडिया पोस्ट पर गिरफ्तार किया जा रहा है। महिलाओं, धार्मिक अल्पसंख्यकों और बलूचिस्तान के लोगों पर सबसे ज्यादा अत्याचार हो रहे हैं।

    2024 के चुनाव और धांधली

    सांसदों ने 2024 के आम चुनावों में भारी धांधली का जिक्र किया। स्वतंत्र संस्था की ‘पट्टन रिपोर्ट’ और अमेरिकी विदेश विभाग ने गड़बड़ी की पुष्टि की थी। पत्र में कहा गया कि चुनावों के जरिए सिर्फ एक कठपुतली सरकार बनाई गई है, जिसे वास्तव में सेना चलाती है। सेना के दबाव में पाकिस्तान की सुप्रीम कोर्ट ने यह फैसला सुनाया कि आम नागरिकों के केस भी सैन्य अदालतों में चल सकते हैं।

    संभावित अमेरिकी प्रतिबंध

    वीजा बैन: अमेरिका में यात्रा पर पूर्ण रोक। संपत्ति जब्ती: अमेरिका या अमेरिकी प्रभाव वाले देशों में बैंक खाते और लेन-देन रोक ग्लोबल मैग्निट्सकी एक्ट के तहत। अमेरिकी–पाकिस्तानी उच्चस्तरीय बैठकें  आसिम मुनीर 2025 में दो बार अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प से मिले। सितंबर में शहबाज और मुनीर ने ट्रम्प से लगभग 1 घंटा 20 मिनट की बैठक की।

    इमरान खान और राजनीतिक कैदी

    अमेरिकी सांसदों ने पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान और अन्य राजनीतिक कैदियों की रिहाई की मांग की। इमरान के परिवार को 27 दिन तक उनसे मिलने की अनुमति नहीं मिली; 2 दिसंबर को मिलने की इजाजत मिली। 27वां संवैधानिक संशोधन और सेना का प्रभाव 12 नवंबर को पास हुए 27वें संशोधन से सेना की ताकत बढ़ी और कोर्ट के अधिकार कम हुए।  फील्ड मार्शल आसिम मुनीर को CDF बनाए जाने की योजना थी लेकिन अभी तक पद खाली है।पीएम शहबाज शरीफ ने नोटिफिकेशन पर साइन नहीं किया; इस बीच वे बहरीन और लंदन यात्रा पर गए।

  • कंगाल पाकिस्तान पर IMF की शिकंजा, सरकारी एयरलाइन PIA की लाइव नीलामी 23 दिसंबर को

    कंगाल पाकिस्तान पर IMF की शिकंजा, सरकारी एयरलाइन PIA की लाइव नीलामी 23 दिसंबर को


    नई दिल्‍ली ।
    पाकिस्तान की आर्थिक हालत अब इतनी बिगड़ चुकी है कि उसे अपनी सरकारी एयरलाइन Pakistan International Airlines (PIA) तक बेचनी पड़ रही है. प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ़ ने घोषणा की है कि 23 दिसंबर 2025 को इस एयरलाइन की नीलामी लाइव दिखायी जाएगी. यह फैसला IMF के कड़े दबाव और बेलआउट पैकेज की कठिन शर्तों को देखते हुए लिया गया है.

    PIA को खरीदने की दौड़ में चार बड़े नाम शामिल हैं. इन चारों में सबसे ज़्यादा चर्चा फौजी फर्टिलाइज़र कंपनी की है, जो सीधे पाकिस्तानी सेना के प्रभाव में चलने वाली फौजी फाउंडेशन से जुड़ी है. पाकिस्तान की राजनीति और अर्थव्यवस्था में सेना की गहरी पकड़ को देखते हुए माना जा रहा है कि अंततः यह एयरलाइन उसी समूह के हाथों जा सकती है. बाकी दावेदारों में लकी सीमेंट समूह, आरिफ हबीब कॉर्प और एयर ब्लू लिमिटेड भी शामिल हैं. यह पहली बार है जब पाकिस्तान किसी सरकारी एयरलाइन की बोली को सार्वजनिक तौर पर लाइव दिखाएगा.

    IMF की शर्तों पर ही बची अर्थव्यवस्था
    पाकिस्तान पिछले कई वर्षों से कर्ज पर कर्ज लेकर चल रहा है. 2023 में देश लगभग दिवालिया होने के कगार पर था. रक्षा खर्च लगातार बढ़ता गया और राजस्व घटता रहा. IMF से लिए गए कर्ज़ों की संख्या 20 से भी अधिक हो चुकी है, जबकि देश की अपनी आर्थिक क्षमता बहुत कम है. IMF ने 7 अरब डॉलर के बेलआउट पैकेज को मंजूरी तो दी, लेकिन शर्त रखी कि पाकिस्तान सरकारी कंपनियों में सुधार करे, घाटा कम करे और PIA जैसी डूबती कंपनियों का निजीकरण करे.

    PIA की तबाही कैसे हुई?
    कभी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित मानी जाने वाली PIA अपनी ही गलतियों के कारण बर्बादी की गहराई में चली गई. 2020 में सामने आया कि लगभग एक-तिहाई पाकिस्तानी पायलटों के लाइसेंस फर्जी या संदिग्ध थे. इस खुलासे के बाद यूरोप, ब्रिटेन और अमेरिका ने PIA की उड़ानों पर रोक लगा दी. इसके साथ भ्रष्टाचार, राजनीतिक दखल, रिश्तेदारी आधारित भर्तियां और गैर-जरूरी कर्मचारियों की भीड़ ने एयरलाइन को पूरी तरह खोखला कर दिया. हर साल अरबों का घाटा लिखने वाली यह कंपनी पाकिस्तान की सबसे बड़ी आर्थिक बीमारी बन गई.

    कर्ज में डूबे देश
    पाकिस्तान अब वहां पहुंच चुका है, जहां पुराने कर्ज़ चुकाने के लिए भी नया कर्ज़ लेना पड़ रहा है. ऐसे में PIA का निजीकरण उसके लिए मजबूरी बन गया है. IMF की शर्तें पूरी करने के अलावा पाकिस्तान के पास कोई और रास्ता दिखाई नहीं दे रहा. आने वाले वर्षों में यह देखा जाएगा कि क्या PIA को बेचने के बाद देश अपने आर्थिक गिरावट के सिलसिले को रोक पाता है या नहीं.