Tag: Pakistan

  • सिंधु जल विवाद पर पाकिस्तान के आरोपों की पड़ताल, जल संकट की जड़ में भारत नहीं बल्कि दशकों की नीतिगत लापरवाही?

    सिंधु जल विवाद पर पाकिस्तान के आरोपों की पड़ताल, जल संकट की जड़ में भारत नहीं बल्कि दशकों की नीतिगत लापरवाही?

    नई दिल्ली । पाकिस्तान में गहराते जल संकट को लेकर एक बार फिर भारत और सिंधु जल संधि चर्चा के केंद्र में हैं। पाकिस्तान की ओर से भारत पर पानी रोकने और जल संकट पैदा करने के आरोप लगाए जा रहे हैं, जबकि विशेषज्ञों का एक वर्ग मानता है कि मौजूदा स्थिति के पीछे सबसे बड़ी वजह पाकिस्तान की अपनी जल प्रबंधन प्रणाली, अधूरी परियोजनाएं और दशकों से चली आ रही नीतिगत कमियां हैं। इसी कारण यह बहस तेज हो गई है कि संकट का वास्तविक कारण सीमा पार की गतिविधियां हैं या घरेलू स्तर पर जल संसाधनों का कमजोर प्रबंधन।

    सिंधु जल संधि के तहत भारत और पाकिस्तान के बीच नदियों के जल बंटवारे की व्यवस्था पहले से निर्धारित है। भारत को आवंटित पूर्वी नदियों के जल का उपयोग करने का अधिकार प्राप्त है। हाल के वर्षों में भारत ने अपने हिस्से के पानी के बेहतर उपयोग के लिए कई सिंचाई और जल भंडारण परियोजनाओं पर काम तेज किया है। इन परियोजनाओं का उद्देश्य भारत को आवंटित जल संसाधनों का अधिकतम उपयोग करना है, न कि पाकिस्तान के हिस्से का पानी रोकना।

    विशेषज्ञों का कहना है कि पाकिस्तान लंबे समय से पर्याप्त जलाशयों और आधुनिक जल संरक्षण ढांचे के निर्माण में अपेक्षित निवेश नहीं कर पाया। परिणामस्वरूप मानसून के दौरान बड़ी मात्रा में पानी बिना उपयोग के समुद्र में बह जाता है। इसके अलावा कई बड़े बांधों में वर्षों से गाद जमा होने के कारण उनकी जल भंडारण क्षमता भी लगातार कम होती गई है, जिससे सूखे और जल संकट की स्थिति और गंभीर होती है।

    जल संसाधन प्रबंधन से जुड़े जानकारों का यह भी मानना है कि पाकिस्तान के कई क्षेत्रों में पुरानी सिंचाई प्रणाली, रिसाव, अवैध जल दोहन और वितरण व्यवस्था की कमजोर निगरानी के कारण बड़ी मात्रा में पानी बर्बाद होता है। कृषि क्षेत्र में भी पानी के उपयोग की दक्षता अपेक्षाकृत कम मानी जाती है, जिससे उपलब्ध संसाधनों पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है। कई शहरी क्षेत्रों में पाइपलाइन नेटवर्क की खराब स्थिति और अवैध जल आपूर्ति भी संकट को बढ़ाने वाले कारकों में शामिल हैं।

    हाल के वर्षों में भारत ने सीमावर्ती क्षेत्रों में जल संसाधनों के बेहतर उपयोग के उद्देश्य से कई परियोजनाओं को गति दी है। इनका उद्देश्य अपने हिस्से के जल का उपयोग बढ़ाना, सिंचाई सुविधाओं का विस्तार करना और जल संरक्षण को मजबूत बनाना है। विशेषज्ञों का कहना है कि इन परियोजनाओं को सिंधु जल संधि के प्रावधानों के अनुरूप तैयार किया गया है और इनका उद्देश्य जल प्रवाह को राजनीतिक हथियार बनाना नहीं बल्कि उपलब्ध अधिकारों का उपयोग करना है।

    दूसरी ओर पाकिस्तान में जल अवसंरचना से जुड़े निवेश में कमी, नए बांधों के निर्माण में देरी और जल संरक्षण योजनाओं के धीमे क्रियान्वयन को लेकर भी लगातार सवाल उठते रहे हैं। विभिन्न विश्लेषणों में यह बात सामने आई है कि यदि समय रहते जलाशयों का विस्तार, वितरण व्यवस्था का आधुनिकीकरण और जल संरक्षण पर प्रभावी निवेश किया जाता, तो वर्तमान संकट की गंभीरता काफी हद तक कम हो सकती थी।

    विशेषज्ञों का मानना है कि जल संकट जैसे जटिल मुद्दे का समाधान केवल राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप से संभव नहीं है। दीर्घकालिक समाधान के लिए प्रभावी जल प्रबंधन, आधुनिक अवसंरचना, जल संरक्षण तकनीकों का व्यापक उपयोग और संसाधनों के वैज्ञानिक प्रबंधन की आवश्यकता होगी। ऐसे कदम ही भविष्य में जल सुरक्षा सुनिश्चित करने और क्षेत्रीय स्तर पर स्थायी समाधान की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

  • विश्व धरोहर तक्षशिला पर मंडराया संकट, संरक्षण के नाम पर आधुनिक निर्माण से पाकिस्तान को यूनेस्को की सख्त फटकार

    विश्व धरोहर तक्षशिला पर मंडराया संकट, संरक्षण के नाम पर आधुनिक निर्माण से पाकिस्तान को यूनेस्को की सख्त फटकार

    नई दिल्ली । विश्व धरोहर स्थलों के संरक्षण को लेकर पाकिस्तान एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सवालों के घेरे में आ गया है। प्राचीन तक्षशिला में संरक्षण कार्यों के दौरान आधुनिक निर्माण सामग्री और तकनीकों के उपयोग पर संयुक्त राष्ट्र की सांस्कृतिक संस्था यूनेस्को ने गंभीर आपत्ति जताई है। संस्था ने स्पष्ट किया है कि यदि विवादित निर्माण कार्यों को तत्काल नहीं रोका गया और पहले किए गए बदलावों को वापस नहीं लिया गया, तो तक्षशिला को विश्व धरोहर सूची से हटाने तक की कार्रवाई की जा सकती है।

    तक्षशिला भारतीय उपमहाद्वीप की सबसे महत्वपूर्ण प्राचीन ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहरों में गिनी जाती है। यह स्थल वैदिक, बौद्ध और प्राचीन भारतीय सभ्यता के विकास का महत्वपूर्ण केंद्र माना जाता है। यहां विभिन्न कालखंडों के नगरों, मठों, धार्मिक स्थलों और पुरातात्विक अवशेषों का विशाल समूह मौजूद है, जो सदियों पुराने शहरी विकास और सांस्कृतिक इतिहास की महत्वपूर्ण जानकारी प्रदान करता है।

    यूनेस्को की आपत्ति उन संरक्षण कार्यों को लेकर है जिनमें ऐतिहासिक संरचनाओं की मरम्मत के दौरान आधुनिक सीमेंट, नई चिनाई और अतिरिक्त निर्माण का उपयोग किया गया। संस्था का मानना है कि इस प्रकार के हस्तक्षेप से स्मारकों की मौलिकता और ऐतिहासिक स्वरूप प्रभावित होता है। अंतरराष्ट्रीय संरक्षण मानकों के अनुसार किसी भी विश्व धरोहर स्थल पर मरम्मत या संरक्षण का कार्य मूल निर्माण शैली और पारंपरिक तकनीकों के अनुरूप होना चाहिए।

    जानकारी के अनुसार तक्षशिला परिसर के दो प्रमुख पुरातात्विक स्थलों पर किए गए निर्माण कार्यों को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता व्यक्त की गई। निरीक्षण के दौरान ऐसे बदलाव सामने आए जिनमें पुरानी दीवारों के स्थान पर नई दीवारें तैयार करना, उनकी ऊंचाई बढ़ाना तथा आधुनिक सामग्री का उपयोग शामिल बताया गया। विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रकार के निर्माण से ऐतिहासिक संरचनाओं की प्रामाणिकता और सांस्कृतिक महत्व पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।

    यूनेस्को ने पाकिस्तान से स्पष्ट रूप से कहा है कि संबंधित निर्माण कार्यों को तुरंत रोका जाए और जिन हिस्सों में आधुनिक हस्तक्षेप किया गया है, उनकी समीक्षा कर आवश्यक सुधारात्मक कदम उठाए जाएं। संस्था ने यह भी संकेत दिया है कि यदि निर्धारित मानकों का पालन नहीं किया गया तो तक्षशिला को संकटग्रस्त विश्व धरोहर स्थलों की सूची में शामिल किया जा सकता है। स्थिति में सुधार नहीं होने पर विश्व धरोहर का दर्जा वापस लेने की प्रक्रिया भी शुरू की जा सकती है।

    विशेषज्ञों का कहना है कि विश्व धरोहर स्थलों का संरक्षण केवल संरचनाओं को बचाने तक सीमित नहीं होता, बल्कि उनके मूल स्वरूप, ऐतिहासिक संदर्भ और सांस्कृतिक पहचान को सुरक्षित रखना भी उतना ही आवश्यक होता है। आधुनिक निर्माण सामग्री का अनियंत्रित उपयोग किसी भी प्राचीन स्मारक की ऐतिहासिक विश्वसनीयता को प्रभावित कर सकता है, इसलिए अंतरराष्ट्रीय संरक्षण सिद्धांत अत्यंत सावधानी बरतने की सलाह देते हैं।

    तक्षशिला लंबे समय से इतिहास, पुरातत्व और सांस्कृतिक अध्ययन का महत्वपूर्ण केंद्र रहा है। यहां स्थित अवशेष भारतीय उपमहाद्वीप की प्राचीन शिक्षा, व्यापार, धर्म और नगर नियोजन की समृद्ध विरासत को दर्शाते हैं। ऐसे में संरक्षण कार्यों में अंतरराष्ट्रीय मानकों का पालन केवल औपचारिक आवश्यकता नहीं, बल्कि इस वैश्विक धरोहर की ऐतिहासिक पहचान और आने वाली पीढ़ियों के लिए इसके संरक्षण की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी भी है।

  • आतंकवाद पर भारत-जापान का सख्त संदेश: संयुक्त बयान में पाकिस्तान से सीमा पार आतंकवाद रोकने की अपील

    आतंकवाद पर भारत-जापान का सख्त संदेश: संयुक्त बयान में पाकिस्तान से सीमा पार आतंकवाद रोकने की अपील


    नई दिल्ली। भारत और जापान ने आतंकवाद के खिलाफ साझा और सख्त रुख अपनाते हुए पाकिस्तान से सीमा पार आतंकवाद पर प्रभावी कार्रवाई करने की अपील की है। नई दिल्ली में आयोजित भारत-जापान वार्षिक शिखर बैठक के बाद जारी संयुक्त बयान में दोनों देशों ने आतंकवाद के हर स्वरूप की कड़ी निंदा करते हुए इसे वैश्विक शांति और सुरक्षा के लिए गंभीर चुनौती बताया।

    पहलगाम और दिल्ली आतंकी हमलों की निंदा
    संयुक्त बयान में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और जापान की प्रधानमंत्री सना तकाइची ने 22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले की कड़ी निंदा की। इसके साथ ही 29 जुलाई 2025 को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की मॉनिटरिंग टीम की रिपोर्ट का उल्लेख किया गया, जिसमें द रेजिस्टेंस फ्रंट (TRF) का जिक्र किया गया था।

    दोनों नेताओं ने नवंबर 2025 में दिल्ली में हुए आतंकी हमले की भी निंदा करते हुए कहा कि इस हमले के दोषियों, साजिशकर्ताओं और आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने वालों को बिना किसी देरी के कानून के दायरे में लाया जाना चाहिए।

    प्रतिबंधित आतंकी संगठनों पर निर्णायक कार्रवाई की मांग
    संयुक्त बयान में कहा गया कि भारत और जापान आतंकवाद और हिंसक उग्रवाद के हर रूप की बिना किसी शर्त के निंदा करते हैं। दोनों देशों ने विशेष रूप से पाकिस्तान से होने वाले सीमा पार आतंकवाद को गंभीर चिंता का विषय बताया।

    साथ ही संयुक्त राष्ट्र द्वारा प्रतिबंधित आतंकी संगठनों के खिलाफ प्रभावी और निर्णायक कार्रवाई की आवश्यकता पर जोर दिया गया। बयान में अल-कायदा, आईएसआईएस (ISIS), लश्कर-ए-तैयबा (LeT), जैश-ए-मोहम्मद (JeM) और इनके सहयोगी संगठनों का भी उल्लेख किया गया।

    आतंक की फंडिंग और सुरक्षित ठिकानों पर सख्ती की अपील
    भारत और जापान ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से आतंकवाद के सुरक्षित ठिकानों को समाप्त करने, आतंकियों की वित्तीय मदद रोकने, अंतरराष्ट्रीय आपराधिक नेटवर्क से उनके संबंध तोड़ने और सीमा पार आतंकियों की आवाजाही पर प्रभावी रोक लगाने के लिए समन्वित कार्रवाई करने का आह्वान किया।

    रणनीतिक साझेदारी को मिला नया संदेश
    यह संयुक्त बयान ऐसे समय सामने आया है, जब भारत विभिन्न अंतरराष्ट्रीय मंचों पर सीमा पार आतंकवाद का मुद्दा लगातार उठा रहा है। विश्लेषकों के अनुसार, भारत और जापान का यह साझा रुख दोनों देशों की रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने के साथ-साथ आतंकवाद के खिलाफ वैश्विक सहयोग को बढ़ावा देने का संकेत भी माना जा रहा है।

  • 117 हस्तियों ने भारत-पाक वार्ता की उठाई मांग, संयुक्त राष्ट्र में भारत ने आतंकवाद पर पाकिस्तान को घेरा, वैश्विक कार्रवाई पर दिया जोर

    117 हस्तियों ने भारत-पाक वार्ता की उठाई मांग, संयुक्त राष्ट्र में भारत ने आतंकवाद पर पाकिस्तान को घेरा, वैश्विक कार्रवाई पर दिया जोर

    नई दिल्ली। भारत और पाकिस्तान के संबंधों में संवाद बहाल करने की मांग को लेकर दोनों देशों की 117 प्रमुख हस्तियों द्वारा खुला पत्र जारी किए जाने के बीच संयुक्त राष्ट्र महासभा में भारत ने आतंकवाद के मुद्दे पर अपना स्पष्ट और सख्त रुख दोहराया है। भारत ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से कहा कि आतंकवाद के खिलाफ प्रभावी लड़ाई तभी संभव है, जब सभी देश बिना किसी भेदभाव और दोहरे मानदंड के आतंकवाद तथा उसके समर्थकों के विरुद्ध समान रूप से कार्रवाई करें।

    संयुक्त राष्ट्र में भारत ने कहा कि आतंकवाद को किसी भी आधार पर अलग-अलग श्रेणियों में बांटने की सोच वैश्विक सुरक्षा के लिए गंभीर चुनौती बन चुकी है। भारत ने स्पष्ट किया कि आतंकवाद का कोई धर्म, सीमा या वैचारिक औचित्य नहीं होता और इससे निपटने के लिए एक समान वैश्विक दृष्टिकोण अपनाना आवश्यक है। केवल निंदा या औपचारिक बयान पर्याप्त नहीं हैं, बल्कि आतंकवादी गतिविधियों की योजना बनाने वालों, आर्थिक सहायता देने वालों और उन्हें संरक्षण प्रदान करने वालों तक कानून की पहुंच सुनिश्चित करनी होगी।

    भारत का यह रुख ऐसे समय सामने आया है, जब दुनिया के कई हिस्सों में सीमा पार आतंकवादी नेटवर्क और नई तकनीकों के दुरुपयोग को लेकर चिंता लगातार बढ़ रही है। भारत ने कहा कि आधुनिक तकनीक ने आतंकवादी संगठनों की कार्यप्रणाली को पहले की तुलना में अधिक जटिल और संगठित बना दिया है। इसलिए वैश्विक सुरक्षा तंत्र को भी बदलती चुनौतियों के अनुरूप मजबूत और तकनीकी रूप से सक्षम बनाना समय की आवश्यकता है।

    भारत ने विशेष रूप से ड्रोन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डीपफेक तकनीक, एन्क्रिप्टेड संचार, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म, मैपिंग एप्लिकेशन और डार्क वेब के बढ़ते दुरुपयोग पर चिंता व्यक्त की। भारत का कहना है कि इन तकनीकों का इस्तेमाल कट्टरपंथ फैलाने, भर्ती अभियान चलाने, वित्तीय लेन-देन छिपाने और आतंकी गतिविधियों के समन्वय के लिए किया जा रहा है। ऐसे में सुरक्षित और विश्वसनीय डिजिटल पारिस्थितिकी तंत्र विकसित करना सभी देशों की साझा जिम्मेदारी है।

    भारत ने यह भी दोहराया कि आतंकवाद के वित्तपोषण पर प्रभावी रोक लगाए बिना इस समस्या का स्थायी समाधान संभव नहीं है। इसके लिए देशों के बीच खुफिया सूचनाओं के आदान-प्रदान, वित्तीय निगरानी व्यवस्था को मजबूत करने और अंतरराष्ट्रीय मानकों का पूरी तरह पालन करने की आवश्यकता बताई गई। भारत ने कहा कि किसी भी देश की भूमि का उपयोग आतंकवादी गतिविधियों के लिए सुरक्षित ठिकाने के रूप में नहीं होने दिया जाना चाहिए।

    इसी दौरान भारत और पाकिस्तान के बीच संबंधों में सुधार तथा संवाद बहाल करने की मांग को लेकर दोनों देशों की 117 हस्तियों द्वारा जारी खुले पत्र ने भी राजनीतिक और कूटनीतिक हलकों में चर्चा को गति दी है। हालांकि भारत ने संयुक्त राष्ट्र में अपने संबोधन के माध्यम से यह स्पष्ट संकेत दिया कि आतंकवाद के मुद्दे पर उसकी नीति में कोई बदलाव नहीं है और सीमा पार आतंकवाद के खिलाफ ठोस तथा निष्पक्ष वैश्विक कार्रवाई उसकी प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल रहेगी। भारत का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय सहयोग, तकनीकी सतर्कता और आतंकवाद के प्रति शून्य सहिष्णुता की नीति ही वैश्विक शांति और सुरक्षा सुनिश्चित करने का सबसे प्रभावी मार्ग है।

  • सिंधु जल संधि पर पाकिस्तान की फिर बढ़ी बयानबाजी, बिलावल भुट्टो ने परमाणु सिद्धांत का हवाला देकर भारत को दी चेतावनी

    सिंधु जल संधि पर पाकिस्तान की फिर बढ़ी बयानबाजी, बिलावल भुट्टो ने परमाणु सिद्धांत का हवाला देकर भारत को दी चेतावनी

    नई दिल्ली । भारत और पाकिस्तान के बीच सिंधु जल संधि को लेकर जारी तनाव के बीच पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (PPP) के चेयरमैन और पूर्व विदेश मंत्री बिलावल भुट्टो जरदारी ने भारत के खिलाफ कड़ा बयान दिया है। इस्लामाबाद में आयोजित एक अंतरराष्ट्रीय सेमिनार में उन्होंने सिंधु जल संधि के मुद्दे को पाकिस्तान के राष्ट्रीय अस्तित्व से जोड़ते हुए कहा कि जल संसाधनों को नुकसान पहुंचाने की किसी भी कोशिश को गंभीर सुरक्षा चुनौती माना जाएगा। उनके इस बयान के बाद दोनों देशों के बीच जल विवाद को लेकर राजनीतिक बयानबाजी और तेज होने के संकेत मिले हैं।

    अपने संबोधन में बिलावल भुट्टो ने भारत पर सिंधु जल संधि को कमजोर करने और पानी को रणनीतिक हथियार के रूप में इस्तेमाल करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि सिंधु नदी पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था, कृषि और करोड़ों लोगों के जीवन का आधार है। ऐसे में जल अधिकारों से जुड़े किसी भी कदम का असर केवल संसाधनों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यह राष्ट्रीय सुरक्षा और स्थिरता से भी जुड़ा विषय बन जाएगा।

    बिलावल ने पाकिस्तान की परमाणु नीति का उल्लेख करते हुए कहा कि देश के सुरक्षा सिद्धांत में कुछ ऐसी परिस्थितियों का उल्लेख है, जिनमें अर्थव्यवस्था या जल संसाधनों को गंभीर क्षति पहुंचाने की कोशिश राष्ट्रीय अस्तित्व के लिए खतरा मानी जाती है। हालांकि उन्होंने किसी प्रत्यक्ष सैन्य कार्रवाई की घोषणा नहीं की, लेकिन उनके बयान को भारत के प्रति कड़ी चेतावनी के रूप में देखा जा रहा है।

    इस्लामाबाद में आयोजित इस सम्मेलन में पाकिस्तान के कई मंत्री, सांसद, जल विशेषज्ञ और अंतरराष्ट्रीय कानून से जुड़े विशेषज्ञ भी मौजूद रहे। कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने सिंधु जल संधि के भविष्य, क्षेत्रीय जल सुरक्षा और दक्षिण एशिया में बढ़ते तनाव पर चर्चा की। सम्मेलन में भारत के हालिया रुख की आलोचना करते हुए संधि को बहाल करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया गया।

    भारत द्वारा सिंधु जल संधि को लेकर अपनाए गए रुख के बाद पाकिस्तान लगातार अंतरराष्ट्रीय मंचों पर इस मुद्दे को उठाने की कोशिश कर रहा है। पाकिस्तान का कहना है कि उसकी कृषि व्यवस्था का बड़ा हिस्सा सिंधु नदी और उसकी सहायक नदियों के जल पर निर्भर है। इसलिए इस संधि में किसी भी प्रकार का बदलाव उसके लिए गंभीर चिंता का विषय है।

    दूसरी ओर, भारत का कहना है कि उसने सिंधु नदी का जल प्रवाह पूरी तरह नहीं रोका है। पाकिस्तान की ओर जाने वाली नदियों का पानी अब भी अपनी प्राकृतिक दिशा में बह रहा है। भारत ने केवल संधि के तहत उपलब्ध कुछ सहयोगी व्यवस्थाओं और प्रक्रियाओं को निलंबित करने का निर्णय लिया है। भारतीय पक्ष का मानना है कि राष्ट्रीय हितों और सुरक्षा संबंधी परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए यह कदम उठाया गया है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि सिंधु जल संधि दशकों से भारत और पाकिस्तान के बीच सबसे महत्वपूर्ण जल समझौतों में शामिल रही है। दोनों देशों के बीच राजनीतिक और सुरक्षा संबंधी तनाव के बावजूद यह संधि लंबे समय तक लागू रही। ऐसे में हाल के तीखे राजनीतिक बयान और बढ़ती कूटनीतिक तल्खी इस संवेदनशील मुद्दे को फिर से अंतरराष्ट्रीय चर्चा के केंद्र में ला रहे हैं। आने वाले समय में दोनों देशों के रुख और संभावित कूटनीतिक प्रयासों पर क्षेत्रीय स्थिरता की दिशा काफी हद तक निर्भर करेगी।

  • अफगानिस्तान एयरस्ट्राइक पर भारत-पाकिस्तान आमने-सामने, इस्लामाबाद ने कार्रवाई को बताया जायज़, नई दिल्ली ने कहा- संप्रभुता पर हमला

    अफगानिस्तान एयरस्ट्राइक पर भारत-पाकिस्तान आमने-सामने, इस्लामाबाद ने कार्रवाई को बताया जायज़, नई दिल्ली ने कहा- संप्रभुता पर हमला

    नई दिल्ली । अफगानिस्तान में हाल ही में हुई एयरस्ट्राइक को लेकर भारत और पाकिस्तान के बीच कूटनीतिक तनाव और बढ़ गया है। भारत द्वारा इस कार्रवाई की आलोचना किए जाने के बाद पाकिस्तान ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए अपनी सैन्य कार्रवाई को उचित और आवश्यक बताया है। दोनों देशों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का यह दौर ऐसे समय सामने आया है, जब क्षेत्रीय सुरक्षा और आतंकवाद के मुद्दे पहले से ही संवेदनशील बने हुए हैं।

    पाकिस्तान ने अपने आधिकारिक रुख में कहा कि सीमा पार मौजूद आतंकवादी ढांचे के खिलाफ की गई कार्रवाई उसके राष्ट्रीय सुरक्षा हितों के अनुरूप थी। इस्लामाबाद का दावा है कि उसने अंतरराष्ट्रीय कानून के दायरे में रहते हुए अपने नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से यह कदम उठाया। साथ ही पाकिस्तान ने भारत पर आरोप लगाया कि वह अफगानिस्तान की भूमि का इस्तेमाल पाकिस्तान विरोधी गतिविधियों के लिए किए जाने का समर्थन करता है तथा आतंकवादी संगठनों को सहायता उपलब्ध कराता रहा है।

    भारत ने इन आरोपों को पहले भी निराधार बताया है और अफगानिस्तान में हुई एयरस्ट्राइक पर कड़ी आपत्ति जताई थी। भारतीय पक्ष का कहना है कि किसी भी संप्रभु देश की सीमा के भीतर इस प्रकार की सैन्य कार्रवाई क्षेत्रीय शांति और स्थिरता के लिए गंभीर चिंता का विषय है। भारत ने इसे अफगानिस्तान की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का उल्लंघन बताते हुए नागरिकों की मौत पर भी गहरी संवेदना व्यक्त की थी।

    भारत का यह भी कहना है कि क्षेत्र में बढ़ती अस्थिरता का समाधान सैन्य कार्रवाई नहीं बल्कि संवाद और सहयोग के माध्यम से निकाला जाना चाहिए। नई दिल्ली ने दोहराया कि वह अफगानिस्तान की संप्रभुता, स्वतंत्रता और क्षेत्रीय अखंडता के समर्थन के अपने रुख पर कायम है।

    दूसरी ओर अफगानिस्तान ने भी पाकिस्तान की कार्रवाई पर गंभीर आपत्ति दर्ज कराई है। अफगान प्रशासन का दावा है कि हवाई हमलों में आतंकवादी नहीं बल्कि बड़ी संख्या में आम नागरिक प्रभावित हुए हैं। उसके अनुसार महिलाओं और बच्चों सहित कई लोगों की मौत हुई तथा अनेक नागरिक घायल हुए। अफगानिस्तान ने इस घटना को अंतरराष्ट्रीय मानवीय सिद्धांतों और अपनी संप्रभुता का उल्लंघन बताया है।

    हालांकि पाकिस्तान का दावा इससे अलग है। उसका कहना है कि सीमा क्षेत्र में मौजूद आतंकवादी ठिकानों को निशाना बनाया गया और कार्रवाई पूरी तरह लक्षित थी। इस्लामाबाद का कहना है कि उसका उद्देश्य केवल सुरक्षा खतरों को समाप्त करना था और नागरिकों को नुकसान पहुंचाना उसकी नीति नहीं है।

    इस पूरे घटनाक्रम ने दक्षिण एशिया और आसपास के क्षेत्र में सुरक्षा संबंधी चिंताओं को एक बार फिर बढ़ा दिया है। भारत, पाकिस्तान और अफगानिस्तान के अलग-अलग दावों के बीच घटनाओं की वास्तविक स्थिति को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी नजर बनी हुई है। विशेषज्ञों का मानना है कि लगातार बढ़ती बयानबाज़ी और सीमा पार सैन्य कार्रवाइयों से क्षेत्रीय स्थिरता प्रभावित हो सकती है। ऐसे में आने वाले समय में कूटनीतिक संवाद, संयम और पारदर्शिता ही तनाव कम करने की दिशा में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

  • भारत पर पाकिस्तान की पूर्व विदेश मंत्री का हमला, सिंधु जल संधि को लेकर हिना रब्बानी खार बोलीं— आक्रामक रुख से बढ़ सकता है तनाव

    भारत पर पाकिस्तान की पूर्व विदेश मंत्री का हमला, सिंधु जल संधि को लेकर हिना रब्बानी खार बोलीं— आक्रामक रुख से बढ़ सकता है तनाव

    नई दिल्ली । पाकिस्तान की पूर्व विदेश मंत्री हिना रब्बानी खार ने सिंधु जल संधि को लेकर भारत के रुख पर सवाल उठाते हुए कहा कि दोनों देशों के बीच दशकों से लागू यह समझौता क्षेत्रीय स्थिरता का महत्वपूर्ण आधार रहा है। इस्लामाबाद में आयोजित एक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में उन्होंने भारत की नीतियों पर टिप्पणी करते हुए दावा किया कि हालिया घटनाक्रम दोनों देशों के संबंधों में तनाव बढ़ा सकते हैं।

    अपने संबोधन में हिना रब्बानी खार ने कहा कि सिंधु जल संधि लंबे समय से भारत और पाकिस्तान के बीच जल बंटवारे की एक प्रभावी व्यवस्था के रूप में कार्य करती रही है। उनके अनुसार, यह समझौता कठिन परिस्थितियों और द्विपक्षीय तनाव के बावजूद कायम रहा तथा दोनों देशों के बीच सहयोग का एक महत्वपूर्ण माध्यम बना रहा है। उन्होंने कहा कि ऐसे समझौतों की स्थिरता क्षेत्रीय शांति और विश्वास बनाए रखने के लिए आवश्यक है।

    पूर्व विदेश मंत्री ने आरोप लगाया कि यदि किसी भी स्तर पर इस संधि को कमजोर करने या उसके क्रियान्वयन में अनिश्चितता पैदा करने का प्रयास किया जाता है, तो उसके दूरगामी प्रभाव पड़ सकते हैं। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय समझौतों का सम्मान और उनका निरंतर पालन वैश्विक कूटनीतिक व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है। उनके अनुसार, ऐसे विषयों पर सभी पक्षों को जिम्मेदारी और संतुलन के साथ आगे बढ़ना चाहिए।

    हिना रब्बानी खार ने अपने वक्तव्य में यह भी कहा कि सिंधु जल संधि केवल जल बंटवारे का दस्तावेज नहीं है, बल्कि दोनों देशों के बीच लंबे समय से बने एक संस्थागत ढांचे का प्रतीक भी है। उन्होंने क्षेत्रीय सहयोग और संवाद को मजबूत बनाए रखने की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि विवादों का समाधान बातचीत और स्थापित प्रक्रियाओं के माध्यम से ही संभव है।

    सिंधु जल संधि वर्ष 1960 में भारत और पाकिस्तान के बीच संपन्न एक महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय समझौता है। इसके तहत सिंधु नदी प्रणाली से संबंधित जल संसाधनों के उपयोग और बंटवारे के लिए विस्तृत प्रावधान निर्धारित किए गए थे। पिछले कई दशकों में दोनों देशों के बीच राजनीतिक और सुरक्षा संबंधी मतभेदों के बावजूद यह संधि प्रभावी बनी रही है और समय-समय पर विभिन्न स्तरों पर इसकी समीक्षा और व्याख्या को लेकर चर्चा होती रही है।

    हिना रब्बानी खार का यह बयान ऐसे समय सामने आया है जब भारत और पाकिस्तान के बीच कई द्विपक्षीय मुद्दों को लेकर पहले से ही तनाव बना हुआ है। ऐसे माहौल में उनके वक्तव्य ने एक बार फिर सिंधु जल संधि, क्षेत्रीय कूटनीति और जल सहयोग को लेकर नई बहस को जन्म दिया है। राजनीतिक और कूटनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस तरह के सार्वजनिक बयान दोनों देशों के बीच चल रहे संवाद और भविष्य की रणनीतियों पर भी प्रभाव डाल सकते हैं।

    विशेषज्ञों का कहना है कि जल संसाधनों से जुड़े अंतरराष्ट्रीय समझौते केवल तकनीकी विषय नहीं होते, बल्कि उनका सीधा संबंध क्षेत्रीय स्थिरता, विकास और द्विपक्षीय विश्वास से भी होता है। ऐसे में इस प्रकार के मुद्दों पर दोनों देशों के लिए संवाद, कानूनी प्रावधानों और स्थापित कूटनीतिक प्रक्रियाओं के दायरे में आगे बढ़ना महत्वपूर्ण माना जाता है। फिलहाल हिना रब्बानी खार के बयान के बाद सिंधु जल संधि और भारत-पाकिस्तान संबंधों को लेकर राजनीतिक एवं कूटनीतिक चर्चाएं फिर तेज हो गई हैं।

  • Pakistan: लाहौर में ट्यूशन सेंटर में पढ़ रहे थे बच्चे, अचानक भरभराकर गिरी छत …. 14 की मौत. 20 घायल

    Pakistan: लाहौर में ट्यूशन सेंटर में पढ़ रहे थे बच्चे, अचानक भरभराकर गिरी छत …. 14 की मौत. 20 घायल


    लाहौर।
    पाकिस्तान (Pakistan) के लाहौर (Lahore) शहर में मंगलवार को दर्दनाक हादसा हुआ है। घनी आबादी वाले काहना नौ क्षेत्र के बस्ती ईदगाह इलाके (Basti Eidgah area) में एक निजी ट्यूशन सेंटर (Tuition Center) की छत अचानक ढह गई, जिसमें 14 स्कूली बच्चों की मौत हो गई और कम से कम 20 अन्य बच्चे घायल हो गए। हादसे के समय सात से तेरह वर्ष की आयु के बच्चे कक्षाओं में बैठे हुए थे, जो मलबे के नीचे दब गए। पुलिस और बचाव टीमों के अनुसार, यह ट्यूशन सेंटर एक निर्माणाधीन इमारत के अंदर संचालित हो रहा था।

    बताया गया कि इमारत का एक हिस्सा अभी बन रहा था और मजदूर काम में व्यस्त थे, तभी छत का बड़ा हिस्सा अचानक गिर पड़ा। मलबे में दबे बच्चों को निकालने के लिए स्थानीय पुलिस, एधी फाउंडेशन की टीम और रेस्क्यू 1122 के कर्मी पिछले कई घंटों से अथक प्रयास कर रहे हैं।

    लाहौर के उप महानिरीक्षक (ऑपरेशंस) फैसल कामरान ने घटनास्थल पर पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि अब तक मलबे से 14 बच्चों के शव बरामद किए जा चुके हैं। 20 घायल बच्चों और एक महिला शिक्षिका को विभिन्न अस्पतालों में भर्ती कराया गया है। हमने तुरंत ठेकेदार को गिरफ्तार कर लिया है। जांच चल रही है कि इमारत की सुरक्षा मानकों का पालन किया गया था या नहीं।

    उन्होंने आगे बताया कि इमारत पूरी तरह से निर्माणाधीन अवस्था में थी और उसमें ट्यूशन सेंटर चलाने की अनुमति भी संदिग्ध है। पुलिस ने पूरे इलाके को घेर लिया है और मलबा हटाने के लिए भारी मशीनरी का इस्तेमाल किया जा रहा है।

    क्या बोला एधी फाउंडेशन?
    एधी फाउंडेशन ने एक आधिकारिक बयान में बताया कि काहना नौ क्षेत्र के आवासीय भवन में स्थित अकादमी की छत अचानक गिर गई। फाउंडेशन की टीम तुरंत मौके पर पहुंची और बचाव कार्य में सहयोग कर रही है। बयान में कहा गया है कि मृतकों के शवों को लाहौर जनरल अस्पताल के मुर्दाघर में भेज दिया गया है। कुछ बच्चे अभी भी मलबे के नीचे फंसे हो सकते हैं, इसलिए मृतकों की संख्या बढ़ने की आशंका है। एधी फाउंडेशन ने यह भी बताया कि सभी घायलों को अस्पताल पहुंचाया गया है और उनकी हालत स्थिर बताई जा रही है।

    वहीं, लाहौर जिला शिक्षा प्राधिकरण के मुख्य कार्यकारी अधिकारी तारिक महमूद ने बताया कि यह निजी ट्यूशन सेंटर स्थानीय एक महिला निवासी द्वारा चलाया जा रहा था। उन्होंने कहा कि शिक्षा विभाग इस मामले की भी जांच करेगा कि ऐसे संवेदनशील इलाके में अनधिकृत तरीके से ट्यूशन सेंटर चलाने की अनुमति किसने दी

    क्या बोलीं सीएममरियम नवाज?
    पंजाब की मुख्यमंत्री मरियम नवाज ने इस हादसे पर गहरा दुख व्यक्त किया है। उन्होंने पुलिस और जिला प्रशासन को सख्त निर्देश दिए हैं कि इमारत ढहने के लिए जिम्मेदार ठेकेदार, मालिक और संबंधित अधिकारियों की तुरंत पहचान की जाए तथा उनके खिलाफ आपराधिक मुकदमा दर्ज कर कार्रवाई शुरू की जाए। सीएम ने कहा कि लापरवाही बरतने वालों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा।

  • अफगानिस्तान का पाकिस्तान में ड्रोन हमला, ISIS-K ठिकानों को बनाया निशाना

    अफगानिस्तान का पाकिस्तान में ड्रोन हमला, ISIS-K ठिकानों को बनाया निशाना


    नई दिल्ली। पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच सीमा पार तनाव एक बार फिर गंभीर रूप लेता दिखाई दे रहा है। अफगानिस्तान की तालिबान सरकार ने दावा किया है कि उसने पाकिस्तान की सीमा के भीतर घुसकर आतंकी संगठन ISIS-K के ठिकानों पर एयरस्ट्राइक की है। तालिबान के अनुसार, यह कार्रवाई उन ठिकानों के खिलाफ की गई है जहां से अफगानिस्तान में नागरिकों पर हमलों की साजिश रची जा रही थी।

    यह घटनाक्रम पाकिस्तान द्वारा हाल ही में किए गए हवाई हमलों के दो दिन बाद सामने आया है, जिससे दोनों देशों के बीच तनाव और बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।

    बलूचिस्तान और खैबर पख्तूनख्वा में हमले का दावा
    तालिबान का कहना है कि यह सैन्य कार्रवाई पाकिस्तान के बलूचिस्तान और खैबर पख्तूनख्वा प्रांतों में की गई। अफगानिस्तान के मीडिया संस्थान ‘टोलो न्यूज’ ने भी इस दावे की पुष्टि की है। रिपोर्ट के अनुसार, ड्रोन हमलों के जरिए उन ठिकानों को निशाना बनाया गया जहां ISIS-K के आतंकी छिपे हुए थे।

    खैबर पख्तूनख्वा के सरान क्षेत्र में एक स्कूल को भी निशाना बनाए जाने की बात सामने आई है, जिसे कथित तौर पर आतंकियों द्वारा गुप्त ठिकाने के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा था। तालिबान ने दावा किया है कि इस कार्रवाई में कई आतंकी मारे गए हैं, जबकि किसी भी आम नागरिक के हताहत होने की सूचना नहीं है।

    पाकिस्तान के हमलों के बाद जवाबी कार्रवाई का दावा
    तालिबान के इस हमले को पाकिस्तान की हालिया सैन्य कार्रवाई के जवाब के रूप में देखा जा रहा है। दो दिन पहले पाकिस्तान ने अफगानिस्तान सीमा के भीतर हवाई हमले किए थे।

    संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट (UNAMA) के अनुसार, उस कार्रवाई में कम से कम 28 नागरिकों की मौत हुई थी, जबकि कई लोग घायल हुए थे। वहीं, अफगानिस्तान सरकार के प्रवक्ता हमदुल्लाह फितरत ने मृतकों की संख्या 38 बताई थी, जिनमें महिलाएं और बच्चे भी शामिल थे।

    भारत की प्रतिक्रिया भी सामने आई
    इस घटनाक्रम पर भारत ने भी प्रतिक्रिया दी है। भारतीय विदेश मंत्रालय ने अफगानिस्तान पर हुए पाकिस्तानी हवाई हमलों की निंदा करते हुए कहा कि किसी भी देश की सीमा में घुसकर हमला करना उसकी संप्रभुता का उल्लंघन है और इससे क्षेत्रीय शांति प्रभावित होती है।

    भारत ने यह भी कहा कि पाकिस्तान अपनी आंतरिक असफलताओं से ध्यान भटकाने के लिए अक्सर ऐसे कदम उठाता है, जिससे पड़ोसी देशों में अस्थिरता बढ़ती है।

    दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ा
    फिलहाल पाकिस्तान लगातार यह आरोप लगाता रहा है कि अफगानिस्तान आतंकवादी संगठनों को पनाह देता है, जबकि तालिबान का कहना है कि पाकिस्तान में आतंकवाद उसकी अपनी आंतरिक नीतिगत विफलताओं का परिणाम है। ताजा एयरस्ट्राइक के बाद दोनों देशों के बीच तनाव और बढ़ गया है तथा हालात आगे और गंभीर रूप लेने की आशंका जताई जा रही है।

  • सिंधु जल संधि पर बढ़ी पाकिस्तान की चिंता, दुनिया से मदद की गुहार, समर्थन जुटाने की कोशिश तेज

    सिंधु जल संधि पर बढ़ी पाकिस्तान की चिंता, दुनिया से मदद की गुहार, समर्थन जुटाने की कोशिश तेज


    नई दिल्ली। सिंधु जल संधि को लेकर पाकिस्तान की चिंता लगातार बढ़ती नजर आ रही है। पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत द्वारा संधि को स्थगित किए जाने के फैसले के बाद पाकिस्तान इस मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर प्रमुखता से उठा रहा है। हालात ऐसे हैं कि पाकिस्तान के मंत्री, सांसद और वरिष्ठ नेता लगातार वैश्विक समुदाय से इस संधि को बनाए रखने की अपील कर रहे हैं।

    इसी क्रम में पाकिस्तान ने इस्लामाबाद में सिंधु जल संधि पर एक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित किया। सम्मेलन में पाकिस्तान के कई मंत्री, सांसदों के साथ अंतरराष्ट्रीय कानून और जल प्रबंधन से जुड़े विशेषज्ञों ने भाग लिया। सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य भारत के फैसले के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय समर्थन हासिल करना बताया गया।

    इशाक डार बोले- संधि क्षेत्रीय शांति की आधारशिला
    पाकिस्तान के उप प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री इशाक डार ने सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि सिंधु जल संधि केवल जल बंटवारे का समझौता नहीं, बल्कि दक्षिण एशिया में शांति, स्थिरता और सहयोग की मजबूत नींव है। उन्होंने कहा कि साझा जल संसाधनों को कभी भी राजनीतिक या रणनीतिक हथियार के रूप में इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए। डार ने कहा कि यदि पाकिस्तान के अधिकारों से समझौता किया गया तो इसका असर पूरे क्षेत्र की स्थिरता और करीब दो अरब लोगों के हितों पर पड़ सकता है।

    बिलावल भुट्टो ने भी उठाई संधि बहाल करने की मांग
    पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी के नेता बिलावल भुट्टो जरदारी ने कहा कि सिंधु जल संधि किसी एक देश का दूसरे पर एहसान नहीं, बल्कि दोनों देशों के बीच हुआ एक अंतरराष्ट्रीय समझौता है। उन्होंने कहा कि इस संधि का सम्मान किया जाना चाहिए और इसके प्रावधानों का पालन होना चाहिए।

    सीनेटर मुसद्दिक मलिक ने जताई चिंता
    सम्मेलन में पाकिस्तान के सीनेटर मुसद्दिक मलिक ने भी भारत के फैसले की आलोचना की। उन्होंने कहा कि यदि कोई शक्तिशाली देश किसी अंतरराष्ट्रीय संधि को एकतरफा निलंबित कर सकता है, तो इससे दुनिया भर के अंतरराष्ट्रीय समझौतों की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े हो सकते हैं। उनके अनुसार, सिंधु जल संधि विश्व के सबसे मजबूत अंतरराष्ट्रीय समझौतों में से एक मानी जाती है।

    पहलगाम हमले के बाद भारत ने लिया था फैसला
    अप्रैल 2025 में जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले में 26 लोगों की मौत के बाद भारत ने सिंधु जल संधि को स्थगित करने का निर्णय लिया था। उस समय भारत ने स्पष्ट किया था कि “खून और पानी साथ-साथ नहीं बह सकते।” इसके साथ ही पश्चिमी नदियों पर जलविद्युत और जल प्रबंधन से जुड़ी परियोजनाओं को भी तेज गति से आगे बढ़ाया गया।

    पानी और आंकड़ों की अनिश्चितता से बढ़ी पाकिस्तान की चिंता
    सिंधु नदी प्रणाली का पानी पाकिस्तान की कृषि, पेयजल आपूर्ति और बिजली उत्पादन के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। संधि स्थगित होने के बाद पाकिस्तान को जल प्रवाह की अनिश्चितता के साथ-साथ भारत से मिलने वाली हाइड्रोलॉजिकल जानकारी भी उपलब्ध नहीं हो रही है। इसी कारण पाकिस्तान लगातार अंतरराष्ट्रीय मंचों पर इस मुद्दे को उठाकर भारत पर दबाव बनाने की कोशिश कर रहा है। वहीं, भारत का रुख स्पष्ट है कि सीमा पार आतंकवाद पर प्रभावी कार्रवाई होने तक सिंधु जल संधि को लेकर पहले जैसी स्थिति बहाल नहीं की जाएगी।