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  • FATF ने पाकिस्तान पर नहीं की सख्ती, आतंकी फंडिंग के मामलों की जांच अब 2030 तक टली..

    FATF ने पाकिस्तान पर नहीं की सख्ती, आतंकी फंडिंग के मामलों की जांच अब 2030 तक टली..

    नई दिल्ली । अंतरराष्ट्रीय स्तर पर धन शोधन और आतंकवादी गतिविधियों के वित्तपोषण पर निगरानी रखने वाली संस्था फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (FATF) की पाकिस्तान को लेकर अपनाई गई प्रक्रिया चर्चा में है। पाकिस्तान में सक्रिय आतंकी संगठनों की ओर से डिजिटल माध्यमों से कथित तौर पर धन जुटाए जाने के आरोपों के बावजूद संस्था ने फिलहाल कोई नई कार्रवाई नहीं की है। इसके बजाय पाकिस्तान से जुड़े मूल्यांकन की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने का निर्णय लिया गया है। इस प्रक्रिया के तहत संबंधित समूह को 31 मार्च 2029 तक अपना मूल्यांकन पूरा कर रिपोर्ट जमा करनी है। इसके बाद वर्ष 2030 में होने वाली पूर्ण बैठक में रिपोर्ट पर चर्चा की जाएगी और आगे के कदमों पर फैसला लिया जा सकता है।

    पेरिस में आयोजित चार दिवसीय पूर्ण बैठक के दौरान पाकिस्तान से जुड़े मुद्दे पर चर्चा हुई। इसमें पाकिस्तान में सक्रिय वैश्विक आतंकी संगठनों की डिजिटल माध्यमों से होने वाली फंडिंग का मुद्दा भी उठाया गया। हालांकि, इन आरोपों के बावजूद तत्काल किसी नई कार्रवाई की जानकारी सामने नहीं आई। मूल्यांकन और समीक्षा की मौजूदा प्रक्रिया को जारी रखने का फैसला किया गया है। इस समयसीमा के कारण पाकिस्तान के खिलाफ किसी संभावित नए कदम पर निर्णय आने में अभी कई वर्ष लग सकते हैं।

    पाकिस्तान में आतंकी संगठनों की ऑनलाइन फंडिंग को लेकर पहले भी गंभीर आरोप सामने आ चुके हैं। पिछले वर्ष सामने आई एक रिपोर्ट में दावा किया गया था कि आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद ने ऑनलाइन माध्यमों से पाकिस्तान में 391 करोड़ रुपये का चंदा जुटाया था। आरोप है कि इस रकम का इस्तेमाल संगठन की गतिविधियों और उसके ठिकानों के पुनर्निर्माण में किया गया।

    इसी मामले में दावा किया गया कि जैश-ए-मोहम्मद ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान ध्वस्त हुए अपने मुख्यालय का दोबारा निर्माण कराया है। बताया गया कि चंदे और पाकिस्तान सरकार से मिलने वाली कथित मदद के जरिए यह काम पूरा किया गया। हालांकि, इन आरोपों और दावों को लेकर अलग-अलग स्तर पर आधिकारिक पुष्टि तथा स्वतंत्र जांच के निष्कर्षों का विवरण सामने आना महत्वपूर्ण होगा।

    FATF के प्रमुख गिल्स थॉम्पसन ने पाकिस्तान की निगरानी और मूल्यांकन प्रक्रिया को लेकर स्थिति स्पष्ट की। उनके अनुसार, अक्टूबर 2022 में पाकिस्तान को FATF की ग्रे लिस्ट से बाहर कर दिया गया था। इसके बाद से पाकिस्तान के साथ एशिया-पैसिफिक ग्रुप (APG) के माध्यम से बातचीत और मूल्यांकन की प्रक्रिया जारी है।

    ग्रे लिस्ट से बाहर होने के बाद भी पाकिस्तान को वित्तीय निगरानी से पूरी तरह मुक्त नहीं माना जा सकता। FATF की व्यवस्था के तहत सदस्य देशों और संबंधित समूहों के माध्यम से वित्तीय पारदर्शिता, धन शोधन रोकने और आतंकवादी वित्तपोषण पर नियंत्रण से जुड़े मानकों का आकलन किया जाता है। इसी प्रक्रिया के अंतर्गत पाकिस्तान की स्थिति की समीक्षा की जा रही है।

    अब 31 मार्च 2029 तक मूल्यांकन रिपोर्ट तैयार कर जमा करने की समयसीमा निर्धारित की गई है। इसके बाद 2030 की पूर्ण बैठक में इस रिपोर्ट पर विचार किया जाएगा। ऐसे में पाकिस्तान से जुड़े मामलों में FATF की अगली महत्वपूर्ण कार्रवाई का समय मूल्यांकन के निष्कर्षों पर निर्भर करेगा। फिलहाल इस प्रक्रिया के पूरा होने तक पाकिस्तान को लेकर निगरानी और समीक्षा जारी रहेगी।

  • मक्का पैक्ट से बदल सकते हैं मध्य पूर्व के समीकरण, IMEC को लेकर भारत के सामने उभरी नई रणनीतिक चुनौती

    मक्का पैक्ट से बदल सकते हैं मध्य पूर्व के समीकरण, IMEC को लेकर भारत के सामने उभरी नई रणनीतिक चुनौती

    नई दिल्ली ।मध्य पूर्व में बदलते रणनीतिक समीकरणों के बीच तुर्की, पाकिस्तान और सऊदी अरब के बीच उभर रहा मक्का पैक्ट अंतरराष्ट्रीय चर्चा का विषय बन गया है। इस समझौते को क्षेत्रीय सुरक्षा और सहयोग की नई व्यवस्था के रूप में देखा जा रहा है। वहीं, इसके साथ भारत-मध्य पूर्व-यूरोप आर्थिक गलियारे यानी IMEC की भूमिका को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। कुछ रणनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मक्का पैक्ट और IMEC के पीछे क्षेत्रीय प्रभाव तथा संपर्क मार्गों को लेकर अलग-अलग दृष्टिकोण काम कर रहे हैं। हालांकि, इसे सीधे तौर पर IMEC को रोकने के लिए बनाया गया गठबंधन मानने के पर्याप्त आधार अभी स्पष्ट नहीं हैं।

    IMEC में भारत के साथ संयुक्त अरब अमीरात, सऊदी अरब, जॉर्डन, इजरायल और यूरोपीय देशों की भागीदारी की परिकल्पना है। इस आर्थिक गलियारे का उद्देश्य भारत को मध्य पूर्व के रास्ते यूरोप से जोड़ना है। इसके तहत समुद्री और रेल संपर्क के माध्यम से व्यापार तथा परिवहन को बेहतर बनाने की योजना है। दूसरी ओर, मक्का पैक्ट से जुड़े क्षेत्रीय संपर्क और सुरक्षा सहयोग को लेकर अलग तरह की रणनीतिक चर्चाएं सामने आ रही हैं।

    इस पूरे घटनाक्रम में तुर्की की भूमिका महत्वपूर्ण मानी जा रही है। IMEC की प्रस्तावित रूपरेखा में तुर्की को शामिल नहीं किया गया है। इस कारण क्षेत्रीय संपर्क व्यवस्था में उसकी स्थिति को लेकर पहले भी चर्चा होती रही है। तुर्की के राष्ट्रपति रेचेप तैयप एर्दोगन की क्षेत्रीय नीतियों और मध्य पूर्व में प्रभाव बढ़ाने की कोशिशों को भी इस संदर्भ में देखा जा रहा है।

    अंतरराष्ट्रीय रणनीतिक मामलों के कुछ विशेषज्ञों ने मक्का पैक्ट और IMEC के बीच संभावित प्रतिस्पर्धा का विश्लेषण किया है। उनका कहना है कि इस क्षेत्र में बन रही नई व्यवस्था को केवल आर्थिक गलियारों या रक्षा सहयोग तक सीमित करके नहीं देखा जा सकता। इसके पीछे क्षेत्रीय नेतृत्व, व्यापारिक संपर्क और राजनीतिक प्रभाव जैसे कई मुद्दे जुड़े हुए हैं।

    मक्का रक्षा समझौते के तहत तीनों देशों ने सामूहिक रक्षा और सैन्य सहयोग को मजबूत करने पर सहमति जताई है। समझौते की एक प्रमुख शर्त के अनुसार, किसी एक सदस्य देश पर सशस्त्र हमला बाकी सदस्यों पर हमला माना जाएगा। इसमें खुफिया सूचनाओं के आदान-प्रदान, रक्षा उद्योग में सहयोग, संयुक्त हथियार निर्माण और सैन्य तकनीक के क्षेत्र में साझेदारी जैसे विषय भी शामिल हैं। हालांकि, इस व्यवस्था की वास्तविक भूमिका और प्रभाव को लेकर आगे के घटनाक्रम महत्वपूर्ण होंगे।

    इस रणनीतिक प्रतिस्पर्धा का एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम 15 अक्टूबर को अजरबैजान की राजधानी बाकू में देखने को मिला। एक क्षेत्रीय सम्मेलन के दौरान इजरायल के राष्ट्रपति इसाक हर्जोग ने संबोधन शुरू किया तो तुर्की के विदेश मंत्री हकन फिदान कार्यक्रम से बाहर चले गए। उनके साथ ईरान, पाकिस्तान, कुवैत, सऊदी अरब और फिलिस्तीनी प्राधिकरण के कुछ अधिकारी भी बाहर निकल गए। हालांकि, अजरबैजान के अधिकारी कार्यक्रम में मौजूद रहे।

    इस घटनाक्रम में मध्य एशिया के पांच देशों की भूमिका भी महत्वपूर्ण रही। उनके प्रतिनिधि सम्मेलन में मौजूद रहे और कजाकिस्तान के राष्ट्रपति कासिम-जोमार्ट टोकायेव ने इजरायली राष्ट्रपति के साथ द्विपक्षीय बैठक भी की। इससे संकेत मिला कि मध्य एशिया के देश तुर्की की क्षेत्रीय प्राथमिकताओं से अलग अपने कूटनीतिक और आर्थिक संबंधों को भी महत्व दे रहे हैं।

    मध्य पूर्व में अमेरिका की भूमिका को लेकर भी चर्चा हो रही है। कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि क्षेत्रीय देश अब अपनी सुरक्षा व्यवस्था को लेकर अधिक स्वतंत्र विकल्प तलाश रहे हैं। ब्रूकिंग्स इंस्टीट्यूशन से जुड़ी एसली आयदिनताशबाश ने मक्का पैक्ट को अमेरिका के बाद क्षेत्रीय सुरक्षा व्यवस्था विकसित करने की दिशा में एक शुरुआती प्रयोग के रूप में देखा है। वहीं, सोनार कागाप्टे ने समझौते में शामिल नहीं किए गए देशों के आधार पर इसके रणनीतिक उद्देश्य समझने की बात कही है।

    इस चर्चा में भारत, ईरान और इजरायल को तीन महत्वपूर्ण देशों के रूप में देखा जा रहा है। कुछ विश्लेषकों का तर्क है कि इन देशों को नई क्षेत्रीय सुरक्षा व्यवस्था से बाहर रखने की रणनीति हो सकती है। हालांकि, यह सभी विशेषज्ञों की एक समान राय नहीं है। मक्का पैक्ट को लेकर अलग-अलग आकलन मौजूद हैं और इसके वास्तविक प्रभाव का पता आगे के फैसलों तथा सदस्य देशों के आपसी सहयोग से ही चलेगा।

    भारत के लिए इस पूरे घटनाक्रम का महत्व इसलिए भी है क्योंकि IMEC में सऊदी अरब शामिल है, जबकि मक्का पैक्ट में भी उसकी प्रमुख भूमिका है। ऐसे में रियाद के सामने सुरक्षा सहयोग और आर्थिक संपर्क परियोजनाओं के बीच संतुलन बनाए रखने की चुनौती हो सकती है। फिलहाल दोनों व्यवस्थाओं के बीच सीधा टकराव तय नहीं है। आने वाले समय में मध्य एशिया, दक्षिण काकेशस और खाड़ी क्षेत्र के देशों के फैसले यह तय करने में महत्वपूर्ण होंगे कि क्षेत्रीय व्यापार और सुरक्षा का नया ढांचा किस दिशा में आगे बढ़ता है।

  • अफगानिस्तान सीमा बंद करने से पाकिस्तान के व्यापार को झटका, कारोबार 74 प्रतिशत गिरा, तालिबान ने तलाशे नए रास्ते

    अफगानिस्तान सीमा बंद करने से पाकिस्तान के व्यापार को झटका, कारोबार 74 प्रतिशत गिरा, तालिबान ने तलाशे नए रास्ते

    नई दिल्ली ।पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच सीमा बंद होने का असर दोनों देशों के व्यापार पर पड़ा है। पाकिस्तानी मूल के अमेरिकी पत्रकार और भू-राजनीतिक विश्लेषक जहांगीर खट्टक के मुताबिक, इस फैसले से पाकिस्तान को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है, जबकि अफगानिस्तान की तालिबान सरकार ने दूसरे देशों के साथ कारोबार के विकल्प तलाशने शुरू कर दिए हैं। उनके अनुसार, पाकिस्तान की रणनीति का उद्देश्य सीमा बंद करके तालिबान पर दबाव बनाना था, लेकिन इसके परिणाम उम्मीदों के विपरीत दिखाई दे रहे हैं।

    पाकिस्तान ने पिछले वर्ष तालिबान के साथ तनाव के बाद अफगानिस्तान से लगने वाली प्रमुख सीमा चौकियों को बंद कर दिया था। इनमें तोरखम, स्पिन बोल्डक, खरलाची, गुलाम खान और अंगूर अड्डा क्रॉसिंग शामिल हैं। पाकिस्तान की सरकार और सैन्य नेतृत्व को उम्मीद थी कि व्यापारिक आवाजाही रोकने से तालिबान पर दबाव बढ़ेगा और वह पाकिस्तान की शर्तें मानने के लिए तैयार होगा। हालांकि, सीमा बंद रहने से दोनों तरफ के व्यापारियों को नुकसान हुआ है।

    जहांगीर खट्टक ने कहा कि सीमा बंद होने के एक वर्ष से अधिक समय बाद भी पाकिस्तान को अपेक्षित लाभ नहीं मिला है। उनके मुताबिक, सीमा के दोनों ओर कारोबार करने वाले कई व्यापारी आर्थिक संकट का सामना कर रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि इस फैसले का प्रभाव केवल अफगानिस्तान के साथ होने वाले प्रत्यक्ष व्यापार तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके कारण पाकिस्तान के मध्य एशियाई बाजारों तक पहुंचने के अवसर भी प्रभावित हुए हैं।

    पाकिस्तान की दवा इंडस्ट्री को इस स्थिति से खास नुकसान होने की बात कही गई है। इसके अलावा सीमेंट और कृषि उत्पादों के निर्यात पर भी असर पड़ा है। अफगानिस्तान के रास्ते मध्य एशिया तक पहुंचने वाले पाकिस्तानी कारोबारियों के लिए सीमा बंद होने से व्यापारिक मार्ग सीमित हो गए हैं। निर्यातकों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है और पाकिस्तान के लिए इन बाजारों में अपनी पहुंच बनाए रखना चुनौतीपूर्ण हो गया है।

    दोनों देशों के बीच व्यापार के आंकड़े भी गिरावट की ओर संकेत करते हैं। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2024-25 में पाकिस्तान और अफगानिस्तान का द्विपक्षीय व्यापार करीब 1.3 अरब डॉलर से घटकर 358 मिलियन डॉलर रह गया। यह लगभग 74 प्रतिशत की गिरावट है। व्यापार में इस कमी से सीमा पार सामान भेजने वाले कारोबारियों और संबंधित उद्योगों पर दबाव बढ़ा है।

    दूसरी ओर, तालिबान प्रशासन पाकिस्तान पर निर्भरता कम करने के लिए वैकल्पिक रास्ते विकसित करने की कोशिश कर रहा है। अफगानिस्तान ने चीन के साथ वखान कॉरिडोर के जरिए संपर्क बढ़ाने की दिशा में कदम उठाए हैं। इस मार्ग के माध्यम से चीन और मध्य एशियाई देशों के साथ सीधे व्यापार की संभावनाएं बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है। इसके साथ ही अफगानिस्तान ने ईरान और तुर्की के रास्ते रेल परिवहन के जरिए कारोबार बढ़ाने के विकल्प भी अपनाए हैं। चीन के साथ व्यापारिक संपर्क बढ़ने से अफगानिस्तान को नए बाजारों तक पहुंच बनाने का अवसर मिला है।

    जहांगीर खट्टक का मानना है कि सीमा बंद करने की नीति का सबसे बड़ा असर पाकिस्तान के उद्योगों पर पड़ा है। उनके अनुसार, पाकिस्तान ने अफगानिस्तान के साथ व्यापार रोककर तालिबान पर दबाव बनाने की कोशिश की, लेकिन इससे खुद उसके निर्यातकों और उद्योगों को नुकसान पहुंचा। वहीं, अफगानिस्तान दूसरे व्यापारिक मार्गों की तलाश में जुटा है।

    पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच व्यापारिक संबंधों में आई गिरावट क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था और सीमा पार कारोबार के लिए महत्वपूर्ण घटनाक्रम है। आगे की स्थिति इस बात पर निर्भर करेगी कि दोनों पक्ष सीमा संबंधी प्रतिबंधों और व्यापारिक मतभेदों को लेकर क्या कदम उठाते हैं।

  • चीन ने पाकिस्तान को दरकिनार कर अफगानिस्तान के लिए शुरू किया नया रेल मार्ग, भारत के रणनीतिक हितों पर भी नजर

    चीन ने पाकिस्तान को दरकिनार कर अफगानिस्तान के लिए शुरू किया नया रेल मार्ग, भारत के रणनीतिक हितों पर भी नजर

    नई दिल्ली । चीन ने अफगानिस्तान के साथ व्यापारिक संपर्क बढ़ाने की दिशा में नया कदम उठाया है। चीन के शेडोंग प्रांत के लिनयी शहर से अफगानिस्तान के हैरातन के लिए पहली समर्पित मालगाड़ी रवाना की गई है। इस रेल सेवा को चीन और अफगानिस्तान के बीच जमीनी व्यापार बढ़ाने की पहल के तौर पर देखा जा रहा है। नया मार्ग पाकिस्तान, खासकर कराची बंदरगाह से होकर गुजरने वाले पारंपरिक ट्रांजिट रास्तों का विकल्प बन सकता है। इसके संभावित आर्थिक और रणनीतिक प्रभावों पर भी चर्चा हो रही है।

    रिपोर्ट के मुताबिक, मालगाड़ी में लगभग 80 लाख युआन यानी करीब 11 लाख अमेरिकी डॉलर मूल्य का सामान लदा है। इसके लगभग 20 दिनों में उत्तरी अफगानिस्तान के बल्ख प्रांत स्थित हैरातन ड्राई पोर्ट पहुंचने की उम्मीद है। यह शेडोंग से हैरातन तक शुरू की गई पहली समर्पित रेल माल-ढुलाई सेवा बताई जा रही है, जो दोनों क्षेत्रों को सीधे जोड़ने के उद्देश्य से संचालित की जा रही है।

    इस खेप में लिनयी में निर्मित कपड़े, रासायनिक कच्चा माल, औजार और निर्माण मशीनरी शामिल हैं। चीन से रवाना होने के बाद मालगाड़ी कजाकिस्तान और उज्बेकिस्तान से होकर गुजरेगी। इसके बाद तेरमेज सीमा चौकी के रास्ते अफगानिस्तान में प्रवेश करेगी और हैरातन पहुंचेगी। इस मार्ग के जरिए चीन को अफगानिस्तान तक सामान पहुंचाने के लिए एक वैकल्पिक जमीनी संपर्क उपलब्ध हो सकता है।

    अफगानिस्तान चारों ओर से जमीन से घिरा देश है और वहां घरेलू रेल नेटवर्क का विस्तार सीमित है। ऐसे में क्षेत्रीय रेल संपर्क उसके लिए व्यापार और माल परिवहन के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जाता है। फिलहाल उज्बेकिस्तान की सीमा से मजार-ए-शरीफ तक रेल संपर्क उपलब्ध है। इसके अलावा ईरान के साथ खाफ-हेरात रेलवे के माध्यम से संपर्क विकसित करने के प्रयास भी चल रहे हैं। नए रेल मार्ग से अफगानिस्तान के लिए आयातित सामान की आपूर्ति के विकल्प बढ़ सकते हैं।

    चीन की इस पहल को पाकिस्तान के रास्ते होने वाले व्यापार पर निर्भरता कम करने के प्रयास के रूप में भी देखा जा रहा है। अब तक अफगानिस्तान के आयात का बड़ा हिस्सा कराची बंदरगाह से जुड़े पारंपरिक मार्गों के जरिए पहुंचता रहा है। नए गलियारे से चीन को वैकल्पिक परिवहन व्यवस्था मिल सकती है। विशेषज्ञों के अनुसार, पाकिस्तान में चीन की बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव से जुड़ी परियोजनाओं को स्थानीय विरोध और अपेक्षित लाभ से संबंधित चुनौतियों का सामना करना पड़ा है। ऐसे में अफगानिस्तान के साथ संपर्क बढ़ाना चीन की क्षेत्रीय व्यापार रणनीति का हिस्सा हो सकता है।

    इस घटनाक्रम का भारत के लिए भी रणनीतिक महत्व है। भारत लंबे समय से अफगानिस्तान में पुनर्निर्माण और विकास से जुड़ी गतिविधियों में सहयोग करता रहा है। चीन की अफगानिस्तान में बढ़ती आर्थिक मौजूदगी से क्षेत्रीय प्रभाव को लेकर प्रतिस्पर्धा बढ़ सकती है। हालांकि, नए रेल मार्ग के शुरू होने मात्र से भारत-अफगानिस्तान संबंधों पर किसी निश्चित प्रभाव का निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी। इसका वास्तविक असर व्यापार, निवेश और क्षेत्रीय सहयोग में होने वाले बदलावों से स्पष्ट होगा।

    इससे पहले भी चीन के जिआंगसू प्रांत के हैमेन से मालगाड़ी अफगानिस्तान के हैरातन पहुंच चुकी है। उस खेप में 2,000 टन से अधिक सामान था, जिसका मूल्य 2 करोड़ डॉलर से ज्यादा बताया गया था। कजाकिस्तान और उज्बेकिस्तान से होकर हुई उस यात्रा में 12 दिन लगे थे। इस मार्ग पर महीने में दो बार आने-जाने वाली सेवाएं शुरू करने की योजना भी बताई गई थी।

    नए गलियारे की व्यावसायिक सफलता परिवहन लागत, समय पर डिलीवरी और माल ढुलाई की गति पर निर्भर करेगी। चीनी अधिकारियों को उम्मीद है कि इससे व्यापार सुगम होगा और खर्च घटेगा। फिलहाल यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि नया मार्ग नियमित माल परिवहन में कितना उपयोगी साबित होता है और चीन-अफगानिस्तान व्यापार को किस हद तक विस्तार मिलता है।

  • शादाब खान और हारिस रऊफ ने आखिरी विकेट पर रचा इतिहास, इंग्लैंड को हराकर पाकिस्तान ने ट्राई सीरीज के फाइनल में बनाई जगह

    शादाब खान और हारिस रऊफ ने आखिरी विकेट पर रचा इतिहास, इंग्लैंड को हराकर पाकिस्तान ने ट्राई सीरीज के फाइनल में बनाई जगह

    नई दिल्ली ।पाकिस्तान और इंग्लैंड के बीच 25 अक्टूबर को लाहौर के गद्दाफी स्टेडियम में खेले गए वनडे ट्राई सीरीज के मुकाबले में रोमांचक नतीजा देखने को मिला। एक समय पाकिस्तान की टीम हार के बेहद करीब पहुंच गई थी, लेकिन शादाब खान और हारिस रऊफ ने आखिरी विकेट के लिए शानदार साझेदारी कर मैच का रुख बदल दिया। पाकिस्तान ने नौ विकेट गंवाने के बाद भी लक्ष्य हासिल करते हुए इंग्लैंड को एक विकेट से हरा दिया। इस जीत के साथ पाकिस्तानी टीम ने ट्राई सीरीज के फाइनल में अपनी जगह पक्की कर ली।

    लक्ष्य का पीछा करते हुए पाकिस्तान की पारी लड़खड़ा गई थी। टीम ने 154 रन तक अपने नौ विकेट गंवा दिए थे और जीत के लिए अभी 88 रन बनाने बाकी थे। इंग्लैंड को मुकाबला जीतने के लिए केवल एक विकेट की जरूरत थी। ऐसे मुश्किल समय में शादाब खान ने जिम्मेदारी संभाली और दूसरे छोर पर मौजूद हारिस रऊफ के साथ मिलकर इंग्लैंड की जीत की उम्मीदों को झटका दिया।

    शादाब खान ने 96 गेंदों पर नाबाद 113 रन की पारी खेली। उनकी इस पारी में 13 चौके और पांच छक्के शामिल रहे। यह शादाब का पहला वनडे शतक था। उन्होंने दबाव के बीच आक्रामक बल्लेबाजी करते हुए पाकिस्तान को लक्ष्य के करीब पहुंचाया। दूसरी ओर, 11वें नंबर पर बल्लेबाजी करने उतरे हारिस रऊफ ने सात रन बनाकर उनका साथ दिया। रऊफ ने विकेट बचाए रखा, जिससे शादाब को अपना स्वाभाविक खेल जारी रखने का मौका मिला।

    दोनों बल्लेबाजों ने दसवें विकेट के लिए नाबाद 89 रन जोड़े। उनकी साझेदारी ने पाकिस्तान को 17 गेंद शेष रहते जीत दिला दी। आखिरी समय तक इंग्लैंड की टीम विकेट हासिल करने की कोशिश करती रही, लेकिन पाकिस्तानी बल्लेबाजों ने संयम बनाए रखा। अंत में हारिस रऊफ ने चौका लगाकर टीम को यादगार जीत दिलाई।

    दसवें विकेट की साझेदारी में बनाया रिकॉर्ड

    शादाब खान और हारिस रऊफ की नाबाद 89 रन की साझेदारी सफल वनडे रनचेज में दसवें विकेट के लिए सबसे बड़ी साझेदारी बन गई। इससे पहले यह रिकॉर्ड डेरिक मरे और एंडी रॉबर्ट्स के नाम था। दोनों ने 1975 के विश्व कप में पाकिस्तान के खिलाफ नाबाद 64 रन जोड़े थे। शादाब और रऊफ ने इस उपलब्धि को पीछे छोड़ते हुए वनडे क्रिकेट में नया रिकॉर्ड कायम किया।

    शाहीन आफरीदी की गेंदबाजी ने भी निभाई अहम भूमिका

    इससे पहले पाकिस्तान के कप्तान शाहीन शाह आफरीदी ने गेंदबाजी में प्रभावशाली प्रदर्शन किया। उन्होंने 46 रन देकर चार विकेट हासिल किए और इंग्लैंड की पारी को 241 रन पर समेटने में महत्वपूर्ण योगदान दिया। वनडे क्रिकेट में पदार्पण करने वाले रजाउल्लाह ने भी दो विकेट लिए।

    इंग्लैंड की शुरुआत अच्छी नहीं रही और टीम ने केवल 19 रन के स्कोर तक तीन विकेट गंवा दिए। इसके बाद बेन डकेट ने 111 गेंदों पर 105 रन बनाकर पारी को संभाला। सैम करन ने 42 रन बनाए। दोनों के बीच पांचवें विकेट के लिए 93 रन की साझेदारी हुई, जिसने इंग्लैंड को शुरुआती झटकों से उबरने में मदद की। अंत में गस एटकिंसन ने नाबाद 36 रन बनाकर टीम का स्कोर 241 रन तक पहुंचाया।

    हालांकि, इंग्लैंड का यह स्कोर जीत के लिए पर्याप्त साबित नहीं हुआ। पाकिस्तान ने शुरुआती विकेट गंवाने के बावजूद आखिरी जोड़ी के दम पर मुकाबला अपने नाम कर लिया। शादाब खान के शतक और हारिस रऊफ के सहयोग ने न केवल पाकिस्तान को जीत दिलाई, बल्कि टीम को ट्राई सीरीज के फाइनल में पहुंचाने में भी निर्णायक भूमिका निभाई।

  • पाकिस्तान में LPG सिलेंडर 8,200 रुपये तक पहुंचा, भारत में घरेलू गैस के दाम स्थिर

    पाकिस्तान में LPG सिलेंडर 8,200 रुपये तक पहुंचा, भारत में घरेलू गैस के दाम स्थिर

    नई दिल्ली। पाकिस्तान में ईरान से गैस की आपूर्ति प्रभावित होने के बीच एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में तेजी आने की खबर है। वहां 12 किलोग्राम के सिलेंडर की कीमत कुछ ही दिनों में 4,500 पाकिस्तानी रुपये से बढ़कर लाहौर में करीब 7,500 रुपये और स्कर्दू में 8,200 रुपये तक पहुंच गई है। दूसरी ओर, भारत में 26 अक्टूबर को घरेलू रसोई गैस सिलेंडर के दाम स्थिर हैं। दिल्ली में 14.2 किलोग्राम का घरेलू एलपीजी सिलेंडर 942 रुपये में मिल रहा है।

    दिए गए विनिमय दर के अनुसार, एक भारतीय रुपया करीब 2.91 पाकिस्तानी रुपये के बराबर है। इस हिसाब से दिल्ली में घरेलू सिलेंडर की कीमत लगभग 2,740 पाकिस्तानी रुपये होती है। हालांकि, दोनों देशों में सिलेंडर का वजन, मूल्य निर्धारण और बाजार की परिस्थितियां अलग-अलग हैं।

    ईरान से आपूर्ति प्रभावित होने के बीच पाकिस्तान में गैस संकट

    रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान में एलपीजी की कीमतों में बढ़ोतरी की एक प्रमुख वजह ईरान से होने वाली गैस आपूर्ति में रुकावट है। रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान और ईरान के बीच दो अहम सीमा चौकियां 17 अक्टूबर से बंद हैं।

    सीमा चौकियां बंद होने के कारणों को लेकर दोनों देशों ने अलग-अलग स्पष्टीकरण दिए हैं। पाकिस्तान ने सुरक्षा चिंताओं और तस्करी पर रोक लगाने को इसकी वजह बताया है, जबकि ईरान ने तकनीकी कारणों का हवाला दिया है।

    आपूर्ति प्रभावित होने के बीच पाकिस्तान के कुछ इलाकों में एलपीजी सिलेंडर महंगे हो गए हैं। इससे घरेलू उपभोक्ताओं पर खर्च का दबाव बढ़ने की आशंका है।

    सरकारी कीमत 3,296 रुपये, बाजार में इससे ज्यादा दाम

    पाकिस्तान के तेल एवं गैस नियामक प्राधिकरण (OGRA) ने 11.8 किलोग्राम के घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमत 3,296 पाकिस्तानी रुपये निर्धारित की है। इसके बावजूद बाजार में सिलेंडर इससे काफी अधिक कीमत पर बेचे जाने की खबरें हैं।

    लाहौर में 12 किलोग्राम के सिलेंडर का दाम करीब 7,500 पाकिस्तानी रुपये और स्कर्दू में लगभग 8,200 रुपये बताया गया है। इस तरह कुछ क्षेत्रों में उपभोक्ताओं को निर्धारित कीमत से दोगुने से भी अधिक भुगतान करना पड़ रहा है।

    भारत के चार शहरों में LPG सिलेंडर के रेट

    26 अक्टूबर को उपलब्ध जानकारी के अनुसार, प्रमुख शहरों में घरेलू और व्यावसायिक एलपीजी सिलेंडर की कीमतें इस प्रकार हैं।

    शहर घरेलू सिलेंडर (14.2 किलो) कमर्शियल सिलेंडर (19 किलो)
    दिल्ली ₹942 ₹2,810
    मुंबई ₹941.50 ₹2,764
    चेन्नई ₹957.50 ₹2,983
    अहमदाबाद ₹949 ₹2,831.50

    ये कीमतें उपलब्ध जानकारी पर आधारित हैं। उपभोक्ता अपने शहर में लागू दर की पुष्टि संबंधित गैस वितरक से कर सकते हैं।

    घरेलू सिलेंडर के दाम 7 जून से स्थिर

    इंडियन ऑयल के मुताबिक, एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में आखिरी बदलाव 1 अक्टूबर को हुआ था। उस समय दिल्ली में 19 किलोग्राम वाले कमर्शियल सिलेंडर की कीमत 62.50 रुपये बढ़ाई गई थी।

    घरेलू एलपीजी सिलेंडर के दाम 7 जून से स्थिर बताए गए हैं। इस वजह से फिलहाल घरेलू उपभोक्ताओं को कीमतों में तत्काल बढ़ोतरी का सामना नहीं करना पड़ा है।

    गैस वितरकों के कमीशन में बढ़ोतरी की उम्मीद

    इस बीच, एलपीजी वितरकों के लिए कमीशन में बढ़ोतरी की उम्मीद जगी है। इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन (IOCL), भारत पेट्रोलियम (BPCL) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम (HPCL) ने वितरकों के कमीशन में अंतरिम बढ़ोतरी की संयुक्त सिफारिश करने पर सहमति जताई है। यह फैसला 21 अक्टूबर को मुंबई में हुई बैठक में लिया गया।

    वितरकों के कमीशन में नियमित बढ़ोतरी के प्रस्ताव पहले ही पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय को भेजे जा चुके हैं, लेकिन अभी तक मंजूरी नहीं मिली है।

    पाकिस्तान में एलपीजी की कीमतों में उछाल के बीच भारत में घरेलू सिलेंडर के दाम फिलहाल स्थिर हैं। हालांकि, पाकिस्तान में आपूर्ति संबंधी व्यवधान और वहां के बाजार में कीमतों में बढ़ोतरी की खबरों पर नजर बनी हुई है।

  • ऑपरेशन सिंदूर से भारत की हवाई ताकत का प्रदर्शन, वायुसेना प्रमुख एपी सिंह ने बताया कैसे दुश्मन तक पहुंच सकते हैं सटीक हमले

    ऑपरेशन सिंदूर से भारत की हवाई ताकत का प्रदर्शन, वायुसेना प्रमुख एपी सिंह ने बताया कैसे दुश्मन तक पहुंच सकते हैं सटीक हमले

    नई दिल्ली ।भारतीय वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने ऑपरेशन सिंदूर का उल्लेख करते हुए कहा कि इस सैन्य अभियान ने साबित किया कि भारतीय वायुसेना की पहुंच से कोई भी लक्ष्य बाहर नहीं है। उनके मुताबिक, पश्चिमी मोर्चे पर लगभग 1,200 किलोमीटर लंबे क्षेत्र में और दुश्मन के इलाके के भीतर 200 किलोमीटर तक सटीक हमले करने की क्षमता ने वायुसेना की परिचालन ताकत को प्रदर्शित किया। उनके इस बयान को पाकिस्तान के संदर्भ में भारत की सैन्य क्षमता के स्पष्ट संदेश के तौर पर देखा जा रहा है।

    एपी सिंह ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर ने भारतीय वायुसेना के क्षमता-केंद्रित दृष्टिकोण की पुष्टि की। इस रणनीति में किसी एक विमान या हथियार प्रणाली पर निर्भर रहने के बजाय विभिन्न विमानों, सेंसर, हथियारों और संचार नेटवर्क को एकीकृत करके इस्तेमाल किया जाता है। इससे परिस्थितियों के अनुसार अलग-अलग संसाधनों का उपयोग करते हुए प्रभावी सैन्य कार्रवाई करना संभव होता है।

    वायुसेना प्रमुख के अनुसार, इस अभियान ने संकट के समय तेजी से कार्रवाई करने वाली शक्ति के रूप में वायुसेना की भूमिका को भी रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि सैन्य अभियानों में कई विकल्प उपलब्ध रखना और दुश्मन की रणनीति में बदलाव के अनुसार तेजी से प्रतिक्रिया देना बेहद जरूरी है। उनके मुताबिक, क्षमता-केंद्रित व्यवस्था ने भारतीय वायुसेना को परिस्थितियों के अनुरूप जवाबी कार्रवाई करने और संघर्ष को बढ़ने से रोकने में मदद की।

    पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले के जवाब में भारत ने मई 2025 में ऑपरेशन सिंदूर शुरू किया था। इस अभियान के तहत पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले क्षेत्रों में मौजूद आतंकवादी ढांचे को निशाना बनाया गया। एपी सिंह ने कहा कि अभियान के दौरान भारतीय वायुसेना ने लंबी दूरी तक सटीक हमले करने की अपनी क्षमता का इस्तेमाल किया। उन्होंने स्वदेश में विकसित हथियार प्रणालियों के प्रदर्शन को भी प्रभावी बताया।

    वायुसेना प्रमुख ने स्पष्ट किया कि अभियान की सफलता किसी एक हथियार या विमान के कारण नहीं थी। इसके पीछे सटीक खुफिया जानकारी, नेटवर्क आधारित अभियान, दूर से हमला करने वाले हथियार, सटीक निशाना लगाने वाली प्रणालियां और इलेक्ट्रॉनिक युद्ध क्षमताओं का संयुक्त योगदान था। इसके साथ ही बहुस्तरीय वायु रक्षा व्यवस्था और मानवरहित हवाई प्रणालियों का मुकाबला करने की क्षमता ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

    उन्होंने बताया कि भारतीय वायुसेना की स्वदेशी नेटवर्क आधारित वायु रक्षा प्रणाली ने पाकिस्तानी सेना की ओर से दागे गए ड्रोन और दूर से हमला करने वाले हथियारों का मुकाबला करने में भूमिका निभाई। उनके अनुसार, इस तरह की क्षमताओं ने भारतीय पक्ष को प्रभावी ढंग से कार्रवाई करने में मदद की। उन्होंने यह भी कहा कि अभियान के दौरान नागरिकों और असैन्य संपत्ति को नुकसान से बचाने की प्रतिबद्धता का पालन किया गया।

    एपी सिंह ने आगाह किया कि ऑपरेशन सिंदूर की सफलता के बावजूद वायुसेना को अपनी क्षमताओं का लगातार विस्तार करना होगा। इसके लिए खुफिया जानकारी, निगरानी और टोही प्रणालियों, इलेक्ट्रॉनिक युद्ध, ड्रोन रोधी तकनीक, मजबूत नेटवर्क तथा कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित निर्णय सहायता प्रणाली को बेहतर बनाने की जरूरत है। उन्होंने रसद, रखरखाव और बुनियादी ढांचे को मजबूत करने पर भी जोर दिया।

    उन्होंने कहा कि लंबे समय तक उच्च तीव्रता वाले सैन्य अभियानों को जारी रखने के लिए स्वदेशी उत्पादन क्षमता का विस्तार जरूरी है। यह लक्ष्य विकसित भारत 2047 की व्यापक राष्ट्रीय परिकल्पना से भी जुड़ा है। एपी सिंह के मुताबिक, भारतीय वायुसेना का उद्देश्य ऐसी बहु-क्षेत्रीय सैन्य शक्ति बनना है, जो भारत के आर्थिक, तकनीकी और रणनीतिक हितों की रक्षा कर सके। वर्ष 2047 तक दुनिया की सक्षम, नवोन्मेषी और तकनीकी रूप से आत्मनिर्भर वायु सेनाओं में शामिल होना इस दिशा में उसका प्रमुख लक्ष्य है।

  • टी20 अंतरराष्ट्रीय में सबसे ज्यादा मैच खेलने वाली टीम पाकिस्तान, भारत 300 मुकाबलों के साथ दूसरे स्थान पर पहुंचा

    टी20 अंतरराष्ट्रीय में सबसे ज्यादा मैच खेलने वाली टीम पाकिस्तान, भारत 300 मुकाबलों के साथ दूसरे स्थान पर पहुंचा

    नई दिल्ली ।टी20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में भारत ने एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। न्यूजीलैंड के खिलाफ दूसरे टी20 मुकाबले में मैदान पर उतरते ही भारतीय टीम ने इस प्रारूप में अपने 300 मैच पूरे कर लिए। इसके साथ ही भारत, पाकिस्तान के बाद टी20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में 300 या उससे अधिक मुकाबले खेलने वाली दुनिया की दूसरी टीम बन गया। हालांकि, सर्वाधिक टी20 अंतरराष्ट्रीय मैच खेलने के मामले में पाकिस्तान अब भी शीर्ष स्थान पर बना हुआ है। भारत ने तीन बार टी20 विश्व कप का खिताब जीता है, लेकिन मैचों की संख्या के लिहाज से वह पाकिस्तान से पीछे है।

    क्राइस्टचर्च के हेग्ले ओवल मैदान पर न्यूजीलैंड के खिलाफ खेला गया दूसरा टी20 मुकाबला भारतीय टीम के लिए इस लिहाज से खास रहा। इस मैच के साथ भारत ने टी20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में 300 मुकाबले खेलने का आंकड़ा छुआ। पिछले वर्षों में द्विपक्षीय सीरीज, टी20 विश्व कप और अन्य अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं के कारण इस प्रारूप में भारत के मैचों की संख्या लगातार बढ़ी है। टी20 क्रिकेट की लोकप्रियता बढ़ने के साथ ही अंतरराष्ट्रीय टीमें भी इस प्रारूप में अधिक मुकाबले खेल रही हैं।

    उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, पाकिस्तान ने अब तक 304 टी20 अंतरराष्ट्रीय मैच खेले हैं और वह इस सूची में पहले स्थान पर है। भारत 300 मुकाबलों के साथ दूसरे नंबर पर पहुंच गया है। न्यूजीलैंड 269 मैचों के साथ तीसरे स्थान पर है। इसके बाद वेस्टइंडीज का नंबर आता है, जिसने 260 टी20 अंतरराष्ट्रीय मुकाबले खेले हैं। श्रीलंका 243 मैचों के साथ इस सूची में पांचवें स्थान पर है। इन आंकड़ों से पता चलता है कि टी20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में एशियाई टीमों के साथ-साथ अन्य प्रमुख क्रिकेट देशों की भी लंबी भागीदारी रही है।

    मैचों की कुल संख्या के अलावा भारत का जीत का रिकॉर्ड भी उल्लेखनीय है। 300 टी20 अंतरराष्ट्रीय मुकाबलों में भारतीय टीम ने 200 मैच जीते हैं। उसे 83 मैचों में हार का सामना करना पड़ा, जबकि सात मुकाबले टाई रहे और 10 मैचों का कोई परिणाम नहीं निकल सका। इस तरह भारत ने इस प्रारूप में जीत का दोहरा शतक पूरा कर लिया है। टीम के प्रदर्शन में बल्लेबाजी और गेंदबाजी के योगदान के साथ लंबे समय तक निरंतरता बनाए रखना भी अहम रहा है।

    दूसरी ओर, पाकिस्तान ने अपने 304 टी20 अंतरराष्ट्रीय मैचों में से 176 में जीत दर्ज की है। उसे 116 मुकाबलों में हार मिली, जबकि चार मैच टाई रहे और आठ मुकाबलों का कोई नतीजा नहीं निकला। भारत और पाकिस्तान के आंकड़ों की तुलना करने पर जीत की संख्या में भारतीय टीम आगे दिखाई देती है। भारत ने पाकिस्तान से चार मैच कम खेले हैं, लेकिन उसकी जीत की संख्या 200 है, जबकि पाकिस्तान की जीत 176 है।

    टी20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट के विस्तार में द्विपक्षीय सीरीज और आईसीसी टूर्नामेंट की अहम भूमिका रही है। इस प्रारूप में कम समय में परिणाम मिलने के कारण दर्शकों की दिलचस्पी बढ़ी है। भारत ने भी लगातार अंतरराष्ट्रीय मुकाबलों में हिस्सा लेकर अपने मैचों की संख्या 300 तक पहुंचाई है। टी20 विश्व कप में टीम की सफलता ने इस प्रारूप में भारतीय क्रिकेट की पहचान को और मजबूत किया है।

    भारत का 300 टी20 अंतरराष्ट्रीय मैचों तक पहुंचना उसके क्रिकेट कार्यक्रम में इस प्रारूप की अहमियत को दर्शाता है। पाकिस्तान फिलहाल सर्वाधिक मुकाबले खेलने वाली टीम है, लेकिन भारत ने जीत की संख्या के मामले में मजबूत रिकॉर्ड बनाया है। आने वाले समय में दोनों टीमों के मैचों की संख्या में बदलाव हो सकता है, क्योंकि अंतरराष्ट्रीय कैलेंडर में टी20 मुकाबले लगातार खेले जा रहे हैं।

  • पाकिस्तान में LPG संकट गहराया, 12 किलो सिलेंडर की कीमत 8200 रुपये तक पहुंची..

    पाकिस्तान में LPG संकट गहराया, 12 किलो सिलेंडर की कीमत 8200 रुपये तक पहुंची..


    नई दिल्ली ।
    पाकिस्तान में महंगाई के बीच रसोई गैस की कमी ने आम लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। देश के कई हिस्सों में घरेलू इस्तेमाल वाले LPG सिलेंडरों की कीमतों में तेजी से उछाल आया है। करीब 12 किलो गैस वाला सिलेंडर, जो कुछ दिन पहले लगभग 4,500 पाकिस्तानी रुपये में मिल रहा था, अब 7,000 रुपये से अधिक कीमत पर बिक रहा है। कुछ क्षेत्रों में उपभोक्ताओं को इसके लिए 8,200 रुपये तक खर्च करने पड़ रहे हैं। गैस की बढ़ती कीमतों और सीमित उपलब्धता ने घरेलू बजट पर अतिरिक्त दबाव डाल दिया है।

    इस संकट की प्रमुख वजह ईरान से होने वाली LPG आपूर्ति का बाधित होना है। पाकिस्तान और ईरान के बीच स्थित दो प्रमुख सीमा चौकियां 17 अक्टूबर से बंद हैं। सीमा बंद होने के कारणों को लेकर दोनों देशों के अलग-अलग दावे हैं। पाकिस्तान सरकार ने सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने और अवैध तस्करी रोकने को इसकी वजह बताया है, जबकि ईरान ने इसे तकनीकी समस्या से जुड़ा मामला कहा है।

    पाकिस्तान अपनी LPG जरूरत का लगभग आधा हिस्सा ईरान से प्राप्त करता है। ऐसे में सीमा पर आवाजाही बंद होने से गैस की आपूर्ति प्रभावित हुई है। घरेलू उत्पादन सीमित होने के कारण बाजार में मांग और उपलब्धता के बीच अंतर बढ़ गया है। इसका असर सीधे सिलेंडरों की कीमतों पर दिखाई दे रहा है।

    पाकिस्तान की LPG जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात के जरिए पूरा किया जाता है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, देश अपनी कुल आवश्यकता का करीब 70 प्रतिशत हिस्सा विदेशों से खरीदता है। ईरान के अलावा ओमान और इराक भी गैस आपूर्ति के प्रमुख स्रोत हैं। इन देशों से आने वाली खेप प्रभावित होने से संकट और गंभीर हो गया है।

    पाकिस्तान में प्रतिदिन लगभग 6,500 से 7,000 टन LPG की खपत होती है। इसके मुकाबले घरेलू उत्पादन करीब 2,000 से 2,500 टन प्रतिदिन है। शेष जरूरत पूरी करने के लिए आयात पर निर्भर रहना पड़ता है। पेट्रोलियम मंत्री अली परवेज मलिक के अनुसार, खपत और उत्पादन के बीच का यह अंतर देश को बाहरी आपूर्ति में आने वाली बाधाओं के प्रति संवेदनशील बनाता है।

    होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास बढ़े तनाव और युद्ध जैसी परिस्थितियों ने समुद्री परिवहन को भी प्रभावित किया है। इसके कारण इराक और ओमान से आने वाली गैस की आपूर्ति बाधित होने की जानकारी सामने आई है। इस तरह पाकिस्तान को एक साथ सीमा पार आपूर्ति और समुद्री मार्गों से जुड़ी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।

    गैस की कमी के बीच कालाबाजारी की समस्या भी सामने आई है। पाकिस्तान के तेल एवं गैस नियामक प्राधिकरण ने 11.8 किलो के घरेलू LPG सिलेंडर की आधिकारिक कीमत 3,296 पाकिस्तानी रुपये निर्धारित की है। इसके बावजूद कई बाजारों में सिलेंडर इससे दोगुने से भी अधिक दाम पर बेचे जा रहे हैं। आधिकारिक दर और बाजार में वसूली जा रही कीमत के बीच बड़ा अंतर उपभोक्ताओं की परेशानी बढ़ा रहा है।

    कीमतों की स्थिति अलग-अलग क्षेत्रों में और गंभीर है। बलूचिस्तान में 12 किलो का सिलेंडर लगभग 7,000 रुपये में मिल रहा है, जबकि लाहौर में इसकी कीमत 7,500 रुपये तक बताई गई है। दूरदराज के पहाड़ी क्षेत्र स्कर्दू में उपभोक्ताओं को एक सिलेंडर के लिए 8,200 रुपये तक चुकाने पड़ रहे हैं।

    आपूर्ति सामान्य होने में देरी से घरेलू उपभोक्ताओं के सामने परेशानी बनी रह सकती है। फिलहाल सीमा चौकियों के बंद रहने, समुद्री मार्गों पर तनाव और आयात पर निर्भरता के कारण पाकिस्तान के LPG बाजार पर दबाव है। गैस की उपलब्धता में सुधार और कीमतों में स्थिरता इस बात पर निर्भर करेगी कि बाधित आपूर्ति कितनी जल्दी बहाल होती है।

  • दुनिया का सबसे प्रदूषित शहर रहा पाकिस्तान का लाहौर…. खतरनाक स्तर पर पहुंची वायु गुणवत्ता

    दुनिया का सबसे प्रदूषित शहर रहा पाकिस्तान का लाहौर…. खतरनाक स्तर पर पहुंची वायु गुणवत्ता


    लाहौर।
    पाकिस्तान (Pakistan) का लाहौर (Lahore) शुक्रवार को दुनिया का सर्वाधिक प्रदूषित शहर (Most Polluted City) रहा। एक वायु गुणवत्ता निगरानी मंच के अनुसार, शहर में वायु गुणवत्ता खतरनाक स्तर पर पहुंच गई और वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) लेवल 410 दर्ज किया गया। एक्यूआई वायु प्रदूषण मापने का संख्यात्मक पैमाना है। इसका स्तर जितना अधिक होता है, हवा की गुणवत्ता उतनी ही खराब होती है और स्वास्थ्य संबंधी जोखिम बढ़ जाते हैं।

    स्विट्जरलैंड के निगरानी मंच आईक्यूएयर के पैमाने के अनुसार, 300 से अधिक एक्यूआई को ‘खतरनाक’ श्रेणी में रखा जाता है। आईक्यूएयर की रिपोर्ट के अनुसार, लाहौर में पीएम2.5 प्रदूषकों की सांद्रता विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के वार्षिक दिशानिर्देश मूल्य से 45.2 गुना अधिक थी।

    पीएम2.5 का मतलब 2.5 माइक्रोमीटर या उससे कम व्यास वाले बारीक कणों से है। ये कण फेफड़ों में गहराई तक पहुंच सकते हैं और रक्तप्रवाह में प्रवेश कर सकते हैं। इनके लंबे समय तक संपर्क में रहने से स्वास्थ्य संबंधी गंभीर समस्याएं हो सकती हैं।

    पंजाब प्रांत की सरकार के अनुसार, पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के लाहौर और अन्य हिस्सों में हर साल अक्टूबर से फरवरी के बीच धुंध छाने की समस्या रहती है। हाल के वर्षों में वायु प्रदूषण का बढ़ता स्तर इस प्रांत में सार्वजनिक स्वास्थ्य और पर्यावरण के लिए बड़ी चिंता बनकर उभरा है।