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  • केन्द्र सरकार महत्वपूर्ण विधेयक लाने की तैयारी में…. इसी माह फिर बुलाया जाएगा संसद का विशेष सत्र

    केन्द्र सरकार महत्वपूर्ण विधेयक लाने की तैयारी में…. इसी माह फिर बुलाया जाएगा संसद का विशेष सत्र


    नई दिल्ली।
    संसद (Parliament) के मौजूदा बजट सत्र (Current Budget Session) के समापन पर चल रही अटकलों के बीच केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेण रिजिजू (Kiren Rijiju) ने स्पष्ट किया है कि बजट सत्र को अनिश्चित काल के लिए आज स्थगित नहीं किया जाएगा बल्कि इसे कुछ दिनों के लिए स्थगित किया जाएगा और बहुत जल्द ही संसद के सदस्य फिर से मिलेंगे। राज्यसभा में उन्होंने कहा, ”हमारे पास कुछ महत्वपूर्ण मुद्दे हैं, यह विपक्ष के साथ भी साझा किया गया है। अगले 2-3 हफ्तों में हम एक बहुत महत्वपूर्ण विधेयक (Very Important Bill) लाने वाले हैं। आज सरकार सदन को स्थगित करने का प्रस्ताव रखेगी और हम जल्द ही फिर मिलेंगे; उद्देश्य सदस्यों को ज्ञात है।”

    उनका यह बयान उन अटकलों और मीडिया रिपोर्ट्स के बीच आया, जिनमें कहा जा रहा था कि सरकार संसद के मौजूदा बजट सत्र को अनिश्चितकाल तक के लिए स्थगित नहीं करेगी और कुछ दिनों के अंतराल पर फिर से दोनों सदनों की कार्यवाही शुरू करेगी ताकि महिला आरक्षण में संशोधन करने वाले बिल को पेश और पारित कराया जा सके। संसद के बजट सत्र के निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, बजट सत्र के दूसरे चरण का आज अंतिम दिन है।


    हम जल्दी ही दो-तीन सप्ताह के अंदर फिर मिलेंगे

    यह मुद्दा राज्य सभा में अपराह्न दो बजे गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय के आंध प्रदेश पुनर्गठन (संशोधन) विधेयक 2026 को चर्चा और पारित कराने का प्रस्ताव रखने के लिए खड़े होते ही उठा। कांग्रेस के जयराम रमेश ने सभापति सीपी राधाकृष्णन के माध्यम से जानना चाहा कि सरकार सदन की कार्यवाही के विषयों के बारे में क्या सोचती है। क्या सदन को कल भी चलाया जाएया या इसे अनिश्चित काल के लिए स्थगित किया जाएगा। आसन के निर्देश पर संसदीय कार्य मंत्री किरण रिजिजू ने कहा कि हम जल्दी ही दो-तीन सप्ताह के अंदर फिर मिलेंगे। इसका एक विशेष उद्येश्य है।


    कांग्रेस को क्या आपत्ति, क्यों कर रही विरोध?

    इस पर कांग्रेस अध्यक्ष और सदन में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे और जयराम रमेश ने कहा कि सरकार विधान सभा चुनावों का लाभ लेने के लिए महिला आरक्षण विधेयक को लागू करने की यह चाल चल रही है। उन्होंने मांग की कि इस के बारे में अब कोई भी बैठक 29 अप्रैल को विधान सभा चुनावों के आखिरी चरण का मतदान हो जाने के बाद ही बुलाया जाना चाहिए। दरअसल, विपक्ष चाहता है कि इस मुद्दे पर काई कार्यवाही अब कुछ राज्यों और केंद्र शासित क्षेत्रों में चल रहे विधान सभा चुनाव के बाद ही की जानी ठीक रहेगी क्योंकि भाजपा इसका आगामी चुनावों में लाभ उठा सकती है।

    16 से 18 अप्रैल के बीच तीन दिनों का संसद का विशेष सत्र
    इस पर रिजिजू ने कहा कि उन्होंने इस बारे में कांग्रेस सहित विपक्ष के सभी दलों के साथ पत्र लिखा है और चर्चा की है। विपक्ष के नेता ने पत्र का जवाब दिया है। उन्होंने विपक्ष से राजनीति में न पड़ कर सहयोग करने की अपील करते हुए कहा कि ‘ सरकार ने देश और महिलाओं के प्रति एक प्रतिबद्धता व्यक्त कर रखी है। उन्होंने कोई व्याख्या प्रस्तुत किए बिना कहा कि -सरकार समय से बंधी हुई है। समय बहुत कम है। इसका चुनावी राजनीति से कोई संबंध नहीं है।’NDTV की रिपोर्ट के मुताबिक, सरकार 16 से 18 अप्रैल के बीच तीन दिनों का संसद का विशेष सत्र बुलाने की योजना बना रही है। इस दौरान संविधान संशोधन विधेयक पेश किये जाने की संभावना है जिसके जरिये नारी शक्ति वंदन अधिनियम में संशोधन किया जाएगा।

  • संसद में टी-शर्ट… रिजिजू ने राहुल गांधी के कपड़ों पर उठाए सवाल, बोले- सलाहकारों ने हाईजैक कर लिया उनका दिमाग

    संसद में टी-शर्ट… रिजिजू ने राहुल गांधी के कपड़ों पर उठाए सवाल, बोले- सलाहकारों ने हाईजैक कर लिया उनका दिमाग


    नई दिल्ली।
    केंद्रीय मंत्री किरण रिजिजू (Kiran Rijiju) ने गुरुवार को कहा कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी (Congress leader Rahul Gandhi) का दिमाग उनके एक्टिविस्ट सलाहकारों (Activist Advisors) ने ‘हाईजैक’ कर लिया है और वे संसद में वही बोलते हैं जो उनके सलाहकार उन्हें बताते हैं। साथ ही उन्होंने विपक्ष के नेता के सदन में टी-शर्ट जैसे कैजुअल कपड़ों में आने पर भी सवाल उठाया। संसदीय कार्य मंत्री ने कहा कि उन्हें ऐसे लोगों से बातचीत करना ज्यादा आसान लगता है, जिन्होंने संसद में अपनी बात रखते हुए कोई ठोस योगदान दिया हो।

    उन्होंने आगे कहा, “निजी तौर पर, मुझे राहुल गांधी से कोई दिक्कत नहीं है। हम मिलते हैं, बाहर और मीटिंग रूम में भी एक-दूसरे से बात करते हैं, क्योंकि वे विपक्ष के नेता हैं। यह ठीक है। कोई दिक्कत नहीं है। लेकिन जब आप औपचारिक रूप से सदन के पटल पर बोल रहे होते हैं, तो आपको परंपराओं, नियमों और शिष्टाचार का पालन करना चाहिए। ये संसदीय लोकतंत्र के बहुत जरूरी हिस्से हैं।”

    उन्होंने आगे कहा, “लेकिन राहुल गांधी का दिमाग उनके एक्टिविस्ट सलाहकारों ने हाईजैक कर लिया है। वे वही बोलते हैं जो उनके सलाहकार उन्हें बताते हैं।” उन्होंने जोर देकर कहा कि जब भाजपा विपक्ष में थी, तो उसने कुछ मानकों का पालन किया था और जोरदार तरीके से विरोध प्रदर्शन किए थे, लेकिन उसने कभी अपनी सीमाएं पार नहीं की थीं।

    संसद में राहुल गांधी के अक्सर कैजुअल कपड़ों में आने के बारे में पूछे जाने पर मंत्री ने कहा कि विपक्ष के नेता (LoP) के तौर पर, किसी को भी उचित तरीके से व्यवहार करना चाहिए, और कपड़े पहनना भी इसी का एक हिस्सा है। मंत्री ने कहा कि उन्हें नियमों और शिष्टाचार को समझने में दिक्कत होती है। जब आप नेता विपक्ष होते हैं, तो आपको एक खास तरीके से व्यवहार करना होता है। शालीन कपड़े पहनना भी इसी का एक हिस्सा है।

    रिजिजू ने कहा कि अनुभवी कम्युनिस्ट नेता सोमनाथ चटर्जी लोकसभा स्पीकर बनने से पहले ढीली शर्ट और सैंडल पहना करते थे। उन्होंने कहा, “लेकिन जब वे स्पीकर चुने गए, तो वे काफी शालीन तरीके से आने लगे, ताकि वे कुर्सी पर बैठे हुए अच्छे दिखें। इसी तरह, नेता विपक्ष पूरे विपक्ष के नेता होते हैं और इसलिए उन्हें ऐसे कपड़े पहनने चाहिए जो उनके पद की गरिमा के अनुरूप हों। हो सकता है कि मैं उस व्यक्ति का सम्मान न करता होऊं, लेकिन मुझे उस पद का सम्मान करना ही होगा। इसीलिए बहुत से लोगों को लगता है कि वे (राहुल गांधी) और भी बेहतर तरीके से व्यवहार कर सकते थे, जिसमें बेहतर कपड़ों का चुनाव भी शामिल है। मैं टी-शर्ट पहनने पर कोई आपत्ति नहीं जता रहा हूं, लेकिन यह अच्छा नहीं लगता।”

  • बदलेगा संसद का स्वरूप…! लोकसभा में महिलाओं के लिए 273 सीटें बढ़ाने की तैयारी… 409 होगा बहुमत का आंकड़ा?

    बदलेगा संसद का स्वरूप…! लोकसभा में महिलाओं के लिए 273 सीटें बढ़ाने की तैयारी… 409 होगा बहुमत का आंकड़ा?


    नई दिल्ली।
    सरकार (Government) संसद (Parliament) के मौजूदा सत्र में महिला आरक्षण (Women’s Reservation) को लागू करने के लिए कम से कम दो विधेयक (Bills) (संविधान संशोधन सहित) पेश करने की तैयारी कर रही है। इसके तहत अगले लोकसभा (Lok Sabha) और उसके बाद होने वाले विधानसभा चुनावों में महिलाओं के लिए एक-तिहाई (33%) सीटें आरक्षित की जाएंगी। इस कदम से देश का राजनीतिक परिदृश्य पूरी तरह से बदलने की उम्मीद है।


    लोकसभा की सीटों में 50% का इजाफा

    एक रिपोर्ट के मुताबिक, सरकार की योजना के अनुसार लोकसभा की कुल सीटें मौजूदा 543 से बढ़ाकर 816 की जा सकती हैं। यानी 273 नई सीटें जोड़ी जाएंगी, जिनमें से अधिकांश महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी। इससे संसद में बहुमत का आंकड़ा भी बढ़कर 409 हो जाएगा।

    यह वृद्धि पिछले पांच दशकों में पहली बार होगी। इससे मौजूदा पुरुष सांसदों की राजनीतिक स्थिति पर कोई खतरा नहीं मंडराएगा। राज्यसभा और राज्यों की विधान परिषदों की सदस्य संख्या पर इसका कोई असर नहीं पड़ेगा।


    परिसीमन और 2011 की जनगणना का इस्तेमाल

    2023 में पारित ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ में महिला आरक्षण को नई जनगणना के बाद होने वाले परिसीमन से जोड़ा गया था। अब सरकार इस प्रावधान को अलग कर रही है। नई जनगणना के आंकड़ों में समय लग सकता है, इसलिए सरकार 2011 की जनगणना के आधार पर ही नया परिसीमन कराने पर विचार कर रही है ताकि 31 मार्च 2029 के बाद होने वाले चुनावों में यह कोटा लागू किया जा सके।


    राज्यों और SC/ST सीटों पर असर

    दक्षिण भारतीय राज्यों की यह चिंता थी कि जनसंख्या नियंत्रण में बेहतर प्रदर्शन के कारण संसद में उनका प्रतिनिधित्व घट सकता है। सरकार ने यह सुनिश्चित किया है कि हर राज्य की सीटों में 50% की वृद्धि होगी, जिससे उनका आनुपातिक प्रतिनिधित्व बरकरार रहेगा।
    उत्तर प्रदेश: सीटें 80 से बढ़कर 120 हो जाएंगी।
    बिहार: सीटें 40 से बढ़कर 60 हो जाएंगी।
    केरल: सीटें 20 से बढ़कर 30 हो जाएंगी।

    इसी अनुपात में अनुसूचित जाति (SC) की सीटें 84 से बढ़कर 126 और अनुसूचित जनजाति (ST) की सीटें 47 से बढ़कर 70 हो जाने का अनुमान है। छोटे राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों (जहां केवल 1 या 2 सीटें हैं) में हर तीसरे चुनाव में महिलाओं के लिए रोटेशन के आधार पर सीट आरक्षित की जाएगी।


    राजनीतिक सरगर्मी और आगे की राह

    सरकार 4 अप्रैल को समाप्त हो रहे बजट सत्र में ही इन विधेयकों को पारित कराने की इच्छुक है। यदि सहमति बनाने में कुछ और दिन लगते हैं, तो बजट सत्र को बढ़ाया जा सकता है या महिलाओं के कोटे के लिए एक विशेष छोटा सत्र भी बुलाया जा सकता है।


    अमित शाह की बैठकें

    संविधान संशोधन के लिए दोनों सदनों में दो-तिहाई बहुमत की आवश्यकता होती है, जो NDA के पास अकेले नहीं है। इसलिए गृह मंत्री अमित शाह समर्थन जुटाने के लिए बैठकें कर रहे हैं। उन्होंने NDA के सहयोगियों के साथ-साथ सपा, शिवसेना (UBT), बीजेडी और YSR कांग्रेस जैसे विपक्षी और गैर-गठबंधन दलों के साथ भी चर्चा की है।

    कांग्रेस और वामपंथी दलों ने इस मुद्दे पर सर्वदलीय बैठक बुलाने की मांग की है। तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने अमित शाह की बैठक से किनारा कर लिया। वहीं, कांग्रेस और सपा जैसी पार्टियां महिला कोटे के भीतर अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के लिए अलग से आरक्षण की मांग कर रही हैं।

  • संसद में आज मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव का नोटिस देने की तैयारी

    संसद में आज मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव का नोटिस देने की तैयारी


    नई दिल्ली।
    संसद (Parliament) में लोकसभा स्पीकर पद (Lok Sabha Speaker’s post) से हटाने संबंधी प्रस्ताव पर चर्चा के बाद मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार (Chief Election Commissioner (CEC) Gyanesh Kumar) के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव पर चर्चा हो सकती है। संभावना है कि तृणमूल कांग्रेस की अगुवाई में एकजुट विपक्ष (Opposition) गुरुवार को सीईसी के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव का नोटिस देगा। नोटिस पर लोकसभा के 120 और राज्यसभा के 60 सदस्यों के हस्ताक्षर हैं। तृणमूल की रणनीति मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को प. बंगाल विधानसभा चुनाव में बड़ा मुद्दा बनाने की है।


    सीईसी के खिलाफ टीएमसी को मिला कांग्रेस-सपा का साथ

    पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की इस मुहिम पर बुधवार को कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के चैंबर में हुई बैठक में सहमति बनी। बैठक में राहुल गांधी और सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने तृणमूल के प्रस्ताव का समर्थन किया। इसके बाद नोटिस देने के लिए जरूरी सांसदों के हस्ताक्षर कराए गए। योजना दोनों सदनों में नोटिस देने की है। दरअसल, महाभियोग की प्रक्रिया के लिए लोकसभा में 100 और राज्यसभा में 50 सांसदों के हस्ताक्षर की जरूरत पड़ती है। सीईसी को हटाने के लिए भी सुप्रीम कोर्ट-हाईकोर्ट के जजों को हटाने की तरह ही प्रक्रियाओं का पालन करना पड़ता है।


    जल्दबाजी में क्यों हैं तृणमूल

    दरअसल पार्टी चाहती है कि अप्रैल-मई में बंगाल विधानसभा चुनाव में एसआईआर को बड़ा मुद्दा बनाने के लिए इसी सत्र में महाभियोग प्रस्ताव पर चर्चा हो। प्रक्रिया शुरू करने और मुख्य रूप से चर्चा के लिए 14 दिन पहले नोटिस देना जरूरी है। यदि बृहस्पतिवार को नोटिस दिया गया तो इसी सत्र में प्रस्ताव पर चर्चा हो जाएगी। नोटिस में सीईसी पर सरकार के इशारे पर एसआईआर के बहाने जानबूझकर उचित मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाने का आरोप लगाया गया है।


    क्या है महाभियोग की प्रक्रिया?

    मुख्य चुनाव आयुक्त को पद से हटाने की प्रक्रिया सुप्रीम कोर्ट के जज की तरह ही होती है। इसके लिए ‘साबित दुर्व्यवहार’ या ‘अक्षमता’ को आधार बनाना होता है। यह प्रस्ताव संसद के किसी भी सदन में लाया जा सकता है। इसे पास कराने के लिए सदन के कुल सदस्यों के बहुमत और मौजूद व वोट देने वाले सदस्यों के दो-तिहाई बहुमत की जरूरत होती है।

  • केन्द्र की नई पहल, संसद से लेकर विधानसभाओं में महिलाओं को जल्द 33% आरक्षण देने की तैयारी

    केन्द्र की नई पहल, संसद से लेकर विधानसभाओं में महिलाओं को जल्द 33% आरक्षण देने की तैयारी


    नई दिल्ली।
    संसद और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण (33 Percent Reservation Women) देने को लेकर केंद्र सरकार (Central Government) नई पहल की तैयारी में है। लंबे समय से चर्चा में रहे महिला आरक्षण के मुद्दे पर सरकार अब ऐसा रास्ता तलाश रही है, जिससे इसका लाभ वर्ष 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले ही लागू किया जा सके। इसके लिए कानून में संशोधन किया जा सकता है।

    वर्ष 2023 में संसद द्वारा पारित ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ (‘Women’s Empowerment Act’) के तहत महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान किया गया था। लेकिन इस कानून के अनुसार आरक्षण तभी लागू होना था जब अगली जनगणना पूरी हो जाए और उसके बाद नई परिसीमन प्रक्रिया लागू की जाए। चूंकि जनगणना और परिसीमन दोनों प्रक्रियाओं में काफी समय लग सकता है, इसलिए आशंका जताई जा रही थी कि महिलाओं को आरक्षण का वास्तविक लाभ मिलने में कई वर्ष लग सकते हैं।


    अनौपचारिक बातचीत शुरू

    सूत्रों का कहना है कि इस विषय पर विपक्षी दलों के साथ अनौपचारिक बातचीत भी शुरू कर दी गई है। सरकार का प्रयास है कि संसद में आवश्यक समर्थन जुटाकर महिला आरक्षण को जल्द लागू करने का रास्ता साफ किया जाए। राजनीतिक हलकों में यह भी चर्चा है कि यदि इस मुद्दे पर व्यापक सहमति बनती है, तो मौजूदा संसद सत्र में ही संविधान संशोधन विधेयक लाने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।


    वरिष्ठजनों को रेल किराये में छूट दें, संसद में मांग

    संसदीय समिति ने एक बार फिर वरिष्ठ नागरिकों को रेल किराये में छूट देने की पुरजोर वकालत की है। समिति ने रेलवे के पहले से सभी यात्रियों को छूट देने से होने वाले घाटे के तर्क को दरकिनार करते हुए कहा कि उक्त मद की धनराशि को रेलवे विज्ञापन अथवा अन्य तरीके से पूरा कर सकता है।

    विदित हो कि वरिष्ठ नागरिक सहित अन्य रेल किराये में छूट से रेलवे को सालाना 2,000 करोड़ से अधिक राजस्व का नुकसान होता है। रेलवे संबंधी स्थायी समिति मंगलवार को संसद में पेश अपनी आठवीं रिपोर्ट में भारतीय रेलवे के सामाजिक दायित्व और वित्तीय अनुशासन के बीच तालमेल बिठाने की सलाह दी है। सांसद डा. सीएम रमेश की अध्यक्षता वाली समिति ने कहा कि वरिष्ठ नागरिकों के लिए रियायत को फिर से शुरू किया जाता है, तो रेलवे पर सालाना लगभग 2,000 करोड़ का अतिरिक्त वित्तीय भार पड़ेगा।

    समिति ने मंत्रालय को सुझाव दिया है कि इसे केवल स्लीपर और थर्ड एसी (एसी-3) जैसी श्रेणियों तक सीमित रखकर इस बोझ को कम किया जा सकता है, ताकि जरूरतमंद बुजुर्गों को लाभ मिले और रेलवे की आर्थिक स्थिति भी न बिगड़े। वरिष्ठ नागरिक को रियायत देना केवल एक वित्तीय मुद्दा नहीं, बल्कि एक सामाजिक कर्तव्य है। इसलिए मंत्रालय को मानवीय आधार पर रियायतें बहाल करने पर गंभीरता से विचार करना चाहिए।

  • संसद में ईरान जंग पर विपक्ष का हंगामा, सरकार बहस के लिए तैयार

    संसद में ईरान जंग पर विपक्ष का हंगामा, सरकार बहस के लिए तैयार


    नई दिल्ली। संसद के बजट सत्र के दूसरे फेज के पहले दिन लोकसभा और राज्यसभा में ईरान और अमेरिकी-इजराइल संघर्ष को लेकर विपक्ष ने जमकर हंगामा किया। विपक्षी दलों ने पश्चिम एशिया में युद्ध के हालात और भारत पर असर पर चर्चा की मांग की।

    लोकसभा में स्थिति:
    विपक्ष ने “We want discussion” के नारे लगाए और विदेश नीति पर सवाल उठाए। चेयर के बार-बार निर्देश देने के बावजूद विपक्ष शांत नहीं हुआ। केंद्रीय मंत्री प्रल्हाद जोशी ने कहा कि विपक्ष प्रस्ताव लाने के नियम का पालन नहीं कर रहा और सदन का समय बेबुनियाद हंगामे में बर्बाद कर रहा है।

    राज्यसभा में हंगामा:
    विदेश मंत्री जयशंकर जब खाड़ी देशों से भारतीयों की वापसी और एनर्जी संकट पर संबोधन दे रहे थे, विपक्ष ने वॉक आउट किया। मंत्री ने बताया कि 67,000 भारतीय नागरिक अंतरराष्ट्रीय सीमा पार कर चुके हैं और भारतीयों की सुरक्षा को लेकर सरकार पूरी तरह सक्रिय है।

    सरकार का पक्ष:
    केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल और गिरिराज सिंह ने कहा कि कांग्रेस बहस से भाग रही है और स्पीकर ओम बिड़ला के खिलाफ नो-कॉन्फिडेंस मोशन पर नियमों का पालन किया गया। उन्होंने विपक्ष पर संसद के नियमों और प्रक्रिया का उल्लंघन करने का आरोप लगाया।

    विपक्ष की प्रतिक्रिया:
    कांग्रेस सांसद डॉ. सैयद नसीर हुसैन और केसी वेणुगोपल ने कहा कि वे पश्चिम एशिया संकट, फ्यूल की बढ़ती कीमत और भारतीयों की सुरक्षा पर चर्चा चाहते हैं। उनका आरोप है कि सरकार गंभीर विषयों पर चर्चा से भाग रही है।

    विदेश मंत्री का अपडेट:

    ईरान में स्थिति अस्थिर

    खाड़ी देशों में एक करोड़ भारतीय नागरिक

    दो भारतीय नाविकों की मृत्यु, एक अभी लापता

    भारत शांति और बातचीत के पक्ष मेंलोकसभा और राज्यसभा की कार्यवाही मंगलवार सुबह 11 बजे तक स्थगित। विपक्ष और सरकार के बीच बहस जारी है।

  • लोकसभा अध्यक्ष बिरला के खिलाफ आज अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में चर्चा…

    लोकसभा अध्यक्ष बिरला के खिलाफ आज अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में चर्चा…


    नई दिल्ली।
    पूरे 39 वर्षों के बाद सोमवार को फिर संसद में लोकसभा अध्यक्ष (Lok Sabha Speaker) के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा हो सकती है। प्रस्ताव पर करीब दस घंटे तक चर्चा होने की उम्मीद है। बहस के लिए सत्तापक्ष और विपक्ष दोनों ने पूरी तैयारी की है। केंद्रीय संसदीय मंत्री किरेन रिजिजू (Kiren Rijiju) ने जहां सत्तापक्ष की तरफ से चर्चा में हिस्सा लेने वाली सदस्यों के साथ बैठक की, वहीं कांग्रेस (Congress) ने भी बैठक कर रणनीति पर चर्चा की है।

    संसद के बजट सत्र के दूसरे हिस्से की शुरुआत लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला (Lok Sabha Speaker Om Birla) के खिलाफ विपक्ष की तरफ से लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा के साथ होगी। लोकसभा में सबसे पहले शिलांग से सांसद डॉ. रिकी एजे सिंगकॉन को श्रद्धांजलि दी जाएगी। इसके बाद सदन कुछ देर के लिए स्थगित हो सकता है। कार्यसूची में प्रस्ताव पर चर्चा को शामिल किया है, हालांकि सदन में हंगामे के पूरे आसार हैं।

    सूत्रों का कहना है कि सत्तापक्ष पूरी मजबूती के साथ विपक्ष के आरोपों का खंडन करेगा। सरकार की ओर से भी उन घटनाओं का हवाला दिए जाने की संभावना है जिनमें विपक्षी नेताओं ने कथित तौर पर राष्ट्रपति, राज्यपालों, प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति जैसे संवैधानिक अधिकारियों के प्रति अनादर दिखाया है। वहीं, विपक्षी पार्टियां भी सरकार को घेरने में कोई कसर बाकी नहीं रखेंगी।


    TMC ने भी किया समर्थन

    संसदीय सूत्रों के अनुसार, विपक्ष के 118 सांसदों ने प्रस्ताव के समर्थन में नोटिस पर हस्ताक्षर किए हैं। नोटिस पर तृणमूल कांग्रेस ने हस्ताक्षर नहीं किए थे, पर नए घटनाक्रम में टीएमसी ने भी प्रस्ताव का समर्थन करने का निर्णय लिया है। एनसीपी (शरद पवार) ने भी अभी तक अपना रुख साफ नहीं किया है, पर माना जा रहा है कि एनसीपी (एसपी) विपक्षी दलों के खिलाफ नहीं जाएगी।


    वैश्विक संघर्ष और उसके प्रभावों को लेकर भी बढ़ सकता है गतिरोध

    लोकसभा अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा के साथ दूसरे चरण में वैश्विक संघर्ष और उसके प्रभावों को लेकर भी गतिरोध बढ़ सकता है। कांग्रेस पहले ही विदेश नीति पर चर्चा की मांग कर चुकी है। अमेरिका-इजरायल के ईरान पर हमले के बाद कच्चे तेल की कीमतों में उछाल और अमेरिका के रूस से तेल खरीदनों को लेकर बयानों पर भी विपक्ष सरकार को घेर सकता है।


    अब तक तीन बार आए प्रस्ताव

    लोकसभा अध्यक्ष को पद से हटाने के लिए अब तक तीन औपचारिक प्रस्ताव पेश किए गए हैं, पर कोई भी प्रस्ताव पारित नहीं हुआ। सबसे पहले 1954 में तत्कालीन अध्यक्ष जीवी मावलंकर के खिलाफ समाजवादी नेता विग्नेश्वर मिश्रा ने पेश किया, पर इस पर सदन में पर्याप्त समर्थन नहीं मिला और प्रस्ताव अस्वीकार कर दिया है। इसके बाद 1966 में सरदार हुकुम सिंह के खिलाफ समाजवादी नेता मधु लिमये ने पेश किया। इस पर चर्चा हुई और प्रस्ताव गिर गया।

    तीसरी बार 1987 में तत्कालीन लोकसभा अध्यक्ष बलराम जाखड़ के खिलाफ वामपंथी नेता सोमनाथ चटर्जी ने अविश्वास प्रस्ताव पेश किया। इसको भी जरूरी बहुमत नहीं मिला और यह भी पारित नहीं हो सका। इसके बाद पूर्व लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार के खिलाफ भी अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस देने की बात हुई थी, पर बाद में विपक्ष ने नोटिस देने का फैसला छोड़ दिया था।


    बिरला नहीं रहेंगे सदन में मौजूद

    लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला पहले ही ऐलान कर चुके हैं कि जब तक उनके खिलाफ लाए गए अविश्वास प्रस्ताव का निपटारा नहीं हो जाता तब तक वे सदन में मौजूद नहीं रहेंगे।

  • राज्यसभा की 37 सीटें दांव पर… BJP-कांग्रेस को फायदा तो घाटे में कौन?

    राज्यसभा की 37 सीटें दांव पर… BJP-कांग्रेस को फायदा तो घाटे में कौन?


    नई दिल्ली । देश के 10 राज्यों की 37 राज्यसभा सीटों के लिए चुनाव का ऐलान हो गया है. निर्वाचन आयोग के मुताबिक 26 फरवरी से 5 मार्च तक नामांकन दाखिल किए जाएंगे. 16 मार्च को सुबह 9 बजे से शाम पांच बजे तक मतदान होगा और उसी दिन देर शाम तक नतीजे घोषित कर दिए जाएंगे. बीजेपी और कांग्रेस दोनों सियासी की ताकत राज्यसभा में बढ़ जाएगी तो फिर किसके सियासी घाटा होगा?

    महाराष्ट्र से लेकर बिहार, पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु सहित 10 राज्यों की 37 सीटों पर राज्यसभा चुनाव हो रहे हैं. यह सीटें अप्रैल में खाली हो रही है, जिसके चलते निर्वाचन आयोग ने 16 मार्च को चुनाव कराने का ऐलान किया है. राज्यसभा चुनाव में बीजेपी के नेतृत्व वाले एनडीए की सीटें बढ़ने तो विपक्ष इंडिया ब्लॉक की सीटें घटनी है, लेकिन कांग्रेस की सीटों में इजाफा हो सकता है?

    एनसीपी (एसपी) के प्रमुख शरद पवार, अभिषेक मनु सिंघवी और प्रियंका चतुर्वेदी का कार्यकाल खत्म हो रहा है. इसके अलावा राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश सिंह के लेकर उपेंद्र कुशवाहा का भी टर्म पूरा हो रहा है. ऐसे में देखना है कि इन दिग्गज नेताओं में से किसकी वापसी होती है, इसके अलावा किस दल को किसे फायदा और किसे नुकसान होगा?

    देश के किस राज्य में कितनी सीटों पर चुनाव

    राज्यसभा की इन 37 सीटों में सबसे ज्यादा महाराष्ट्र से सात सीटें खाली हो रही हैं, जिन पर चुनाव है. महाराष्ट्र की सात राज्यसभा सीटों में से बीजेपी के पास दो और शरद पवार की एनसीपी के पास 2 राज्यसभा सीटें है. इसके अलावा कांग्रेस, शिवसेना (यूबीटी) और आरपीआई के पास एक-एक सीटें है.

    तमिलनाडु की जिन छह राज्यसभा सीटों पर चुनाव हो रहे हैं, उसमें से 4 राज्यसभा सीट डीएमके के पास है. इसके अलावा एक सीट AIADMK और एक सीट टीएमसी के पास है. पश्चिम बंगाल और बिहार पांच-पांच सीटों पर चुनाव हो रहे हैं. बंगाल की 5 राज्यसभा सीटों में से टीएमसी के पास 4 और एक सीट सीपीआई(एम) के कब्जे है. बिहार की पांच राज्यसभ सीटों में से जेडीयू और आरजेडी के पास 2-2 सीटें और एक सीट आरएलएम के पास है.

    ओडिशा से चार और असम से तीन सीटों पर चुनाव हो रहे हैं. ओडिशा की चार राज्यसभा सीटों में से बीजेपी के पास दो और बीजेडी के पास दो राज्यसभा सीट है. असम की तीन राज्यसभा सीटों में से बीजेपी के पास 2 और असम गढ़ परिषद के पास एक सीट है. हरियाणा, छत्तीसगढ़ और तेलंगाना से दो-दो सीटों, जबकि हिमाचल प्रदेश से एक सीट पर मतदान होगा.

    हरियाणा की दो राज्यसभा सीटों में से दोनों ही बीजेपी के पास है तो तेलंगाना की दोनों सीटों में एक कांग्रेस और बीआरएस के पास है. छत्तीसगढ़ की दोनों सीटें कांग्रेस के कब्जे में है. हिमाचल की जिस एक सीट पर राज्यसभा चुनाव हो रहे हैं, वह सीट बीजेपी के कब्जे में है.

    राज्यसभा चुनाव किसे नफा और किसे नुकसान

    देश के 10 राज्यों की 37 राज्यसभा सीटों के आंकड़े फिलहाल देखें तो बीजेपी के नेतृत्व वाले एनडीए के पास करीब 15 सीटें है, जिसमें बीजेपी के पास 9 सीटें, जेडीयू के पास 2 सीटें, AIADM के पास एक सीट, आरएलएम के पास एक और एक सीट आरपीआई के पास है.

    वहीं, विपक्षी गठबंधन इंडिया ब्लॉक की बात करें तो 18 राज्यसभा सीटें उसके कब्जे में है, जिसमें से 4 सीटें कांग्रेस के पास, 4 सीटें टीएमसी के पास, 4 सीटें डीएमके के पास और आरजेडी के पास 2 सीटें है.साथ ही एक सीट शिवसेना (यूबीटी) और एक सीट सीपीआईएम के पास है. इसके अलावा चार सीटें अन्य दलों के पास है, जिसमें दो सीटें बीजेडी, एक सीट बीआरएस और एक सीट तमिलनाडु के क्षेत्रीय दल के कब्जे में है.

    विधानसभा की स्थिति कई राज्यों में बदल गई है. इस लिहाज से एनडीए को 2 से 3 सीट का फायदा मिल सकता है तो इंडिया ब्लॉक की सीटें 3 से 4 घट सकती है. इसके अलावा क्षेत्रीय दलों को सबसे बड़ा झटका लगने जा रहा है. बीजेपी की सीटें बढ़ने और कांग्रेस को भी मामूली सीट की बढ़त मिलने की उम्मीद है.

    कांग्रेस की सीटें 4 से बढ़कर पांच हो सकती है तो बीजेपी की सीटें 9 से बढ़कर 12 हो सकती है. लेकिन आरजेडी से लेकर शरद पवार की एनसीपी और उद्धव ठाकरे की शिवसेना (यूबीटी) के हाथ से सीटें निकल सकती हैं. इसके अलावा आरएलएम को भी नुकसान उठाना पड़ सकता है. किस राज्य में क्या होगा राज्यसभा का चुनावी सीन

    महाराष्ट्र में किसे होगा नुकसान

    महाराष्ट्र में 7 राज्यसभा सीटों पर चुनाव है, जिसमें से एनडीए के 6 सीटें मिल सकती है तो विपक्षी गठबंधन महायुति के सिर्फ एक सीट मिलने की संभावना है. राज्य में कुल 286 विधानसभा सीटें है, जिसमें से 2 सीटें खाली हैं. इस लिहाज से एक राज्यसभ सीट के लिए 37 विधायकों के समर्थन की जरूरत है. मौजूदा समय में बीजेपी के पास 131, शिंदे की शिवसेना के पास 57 और अजित पवार की एनसीपी के पास 40 विधायक हैं.

    एनडीए के 235 विधायक बन रहे हैं, जिसके दम पर 6 सीटें आसानी से जीत सकती है. बीजेपी चार सीटें तो शिंदे और अजित पवार की पार्टी को एक-एक सीट जीत सकती है. शरद पवार की एनसीपी के 10, उद्धव ठाकरे की 16 और कांग्रेस के 20 विधायक हैं. इस तरह से तीनों दलों के कुल 46 विधायक. सीपीआई (एम) और एसके (एम) का एक-एक विधायक है. अन्य छोटे दलों और निर्दलीयों का समर्थन मिलने पर यह संख्या कुछ बढ़ सकती है. ऐसे में एक सीट विपक्ष मिलकर सकती है. शरद पवार, उद्धव ठाकरे और कांग्रेस में से किसी एक दल को की यह सीट मिल सकती है, जिसके चलते शरद पवार की सीटें और उद्धव ठाकरे के लिए सियासी नुकसान होगा.

    बिहार में आरजेडी को लगेगा झटका

    बिहार की पांच राज्यसभा सीट पर चुनाव होने हैं, जिसमें एनडीए आसानी से 4 सीटें जीत सकती है और एक सीट विपक्ष को मिल सकती है. बिहार में राज्यसभा चुनाव में 1 सीट के लिए इस बार कम से कम 41 विधायकों के समर्थन की जरूरत पड़ेगी. बीजेपी और जेडीयू आसानी से 2-2 सीटें जीत सकती है, लेकिन विपक्ष संयुक्त रूप से मिलकर ही एक सीट जीतने की स्थित में है. ऐसे में आरजेडी को कम से कम एक सीट का नुकसान उठाना पड़ेगा और उसे एक सीट जीतने के लिए ओवैसी की पार्टी का भी समर्थन हासिल करना होगा.

    तमिलनाडु और बंगाल में यथावत

    तमिलनाडु में की मौजूदा विधानसभा की स्थिति के लिहाज से डीएमके आसानी से चार सीटें जीत लेगा और एक सीट AIADMK भी बचा ले जाएगा, लेकिन एक सीट पर मुकाबला हो सकता है. ऐसे ही पश्चिम बंगाल की पांच सीटों में से टीएमसी अपनी चारों सीटें बचा लेगा, लेकिन यहां पर एक सीट सीपीएम को खोनी पड़ सकती है, जो बीजेपी के खाते में जा सकती है. ओडिशा में चार सीटों में से बीजेपी 3 सीटें आसानी से जीत लेगी और एक सीट से बीजेडी को संतोष करना पड़ सकता है.

    असम से हरियाणा तक कांग्रेस को फायदा

    असम की तीन राज्यसभ सीटों में से बीजेपी आसानी से दो सीटें जीत लेगी और एक सीट कांग्रेस-AIUDF के साथ मिलकर जीत सकती है. इस तरह से असम में एक सीट का नुकसान एजीपी को हो सकता है. तेलंगाना की दोनों राज्यसभा सीटें कांग्रेस के खाते में जा सकती है और यहां पर बीआरएस को अपनी एक सीट गंवानी पड़ सकती है.

    छत्तीसगढ़ की दो सीटों में से एक सीट बीजेपी और एक सीट कांग्रेस के खाते में जा सकती है. इस तरह कांग्रेस को एक सीट का नुकसान उठाना पड़ सकता. ऐसे ही हरियाणा की दो सीटें बीजेपी के पास हैं, लेकिन मौजूदा विधानसभा सीट के लिहाज से एक सीट बीजेपी और एक सीट कांग्रेस आसानी से जीत लेगी. ऐसे में बीजेपी को एक सीट का नुकसान होगा. हिमाचल की एक सीट पर हो रहे चुनाव में बीजेपी को अपनी यह सीट गंवानी पड़ सकती है और यह सीट कांग्रेस जीत सकती है.

  • लोक सभा अध्यक्ष श्री ओम बिरला ने श्रीमती सरोजिनी नायडू की जयंती पर दी भावपूर्ण श्रद्धांजलि संसद भवन के केंद्रीय कक्ष में सम्मान और स्मरण

    लोक सभा अध्यक्ष श्री ओम बिरला ने श्रीमती सरोजिनी नायडू की जयंती पर दी भावपूर्ण श्रद्धांजलि संसद भवन के केंद्रीय कक्ष में सम्मान और स्मरण


    नई दिल्ली । आज 13 फरवरी 2026 को संविधान सदन के केंद्रीय कक्ष में लोक सभा अध्यक्ष श्री ओम बिरला ने हमारे देश की महान स्वतंत्रता सेनानी कवयित्री तथा समाज सुधारक श्रीमती सरोजिनी नायडू की जयंती के अवसर पर उन्हें पुष्पांजलि अर्पित कर गहरी श्रद्धा व्यक्त की। इस भावपूर्ण कार्यक्रम में राज्य सभा के उपसभापति श्री हरिवंश कई संसद सदस्य पूर्व सदस्य और अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे और उन्होंने भी सरोजिनी नायडू को याद करते हुए उनके योगदान को सम्मान दिया।

    लोक सभा अध्यक्ष ने कहा कि सरोजिनी नायडू ने न केवल स्वतंत्रता संग्राम में एक प्रखर भूमिका निभाई बल्कि उन्होंने अपनी कविताओं वक्तृत्व और महिला सशक्तिकरण के लिए निरंतर कार्य किया। उन्हें भारत कोकिला के नाम से भी संबोधित किया जाता है जो उनकी साहित्यिक प्रतिभा और देशभक्ति की भावना का प्रतीक है।

    उपस्थित गणमान्य लोगों की मौजूदगी से सजी संविधान सदन की केंद्रीय कक्ष में पुष्पांजलि अर्पण की यह रस्म बेहद गंभीर और सम्मानपूर्वक संपन्न हुई। लोक सभा महासचिव श्री उत्पल कुमार सिंह ने भी श्रीमती सरोजिनी नायडू के चित्र पर श्रद्धांजलि दी जबकि कई सांसदों ने उनके जीवन विचारों और सामाजिक योगदान पर प्रकाश डाला।

    सरोजिनी नायडू का जन्म 13 फरवरी 1879 को हैदराबाद में हुआ था। वे एक प्रतिभाशाली वक्ता सुप्रसिद्ध कवयित्री और प्रमुख स्वतंत्रता सेनानी थीं जिन्होंने भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन में सक्रिय भागीदारी की। उनके नेतृत्व लेखन और देशप्रेम ने महिलाओं के शिक्षा और सशक्तिकरण को एक नई दिशा प्रदान की। उन्होंने दिल्ली में लेडी इरविन कॉलेज फॉर विमेन की स्थापना की जिससे उच्च शिक्षा में महिलाओं की भागीदारी को बढ़ावा मिला।

    स्वतंत्रता के बाद श्रीमती सरोजिनी नायडू ने संयुक्त प्रांत अब उत्तर प्रदेश की पहली महिला राज्यपाल के रूप में भी सेवा की। उनका जीवन देश की सेवा के प्रति समर्पण और समाज की भलाई के लिए निरंतर प्रयास का आदर्श रहा है। वे महिलाओं के अधिकारों और समानता की प्रबल समर्थक थीं जिनके विचार आज भी लाखों लोगों के लिए प्रेरणा का स्रोत हैं।

    विशेष रूप से यह भी उल्लेखनीय है कि पहले भारत के तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने 16 दिसंबर 1959 को संसद भवन के केंद्रीय कक्ष में सरोजिनी नायडू के चित्र का अनावरण किया था जो उनके योगदान और स्मरण को स्थायी रूप से सम्मानित करता है।

    इस अनुष्ठान में सदन के नेताओं ने उनके साहित्यिक सामाजिक और राजनीतिक योगदान को याद करते हुए कहा कि सरोजिनी नायडू का जीवन और कार्य भारतीय जनता के लिए आज भी प्रेरणा का स्रोत हैं। इस कार्यक्रम ने न केवल उनके स्मरण को सम्मान दिया बल्कि यह याद दिलाया कि स्वतंत्रता और सामाजिक समानता के प्रति उनके आदर्श आज भी उतने ही प्रासंगिक और प्रेरणादायी हैं।

  • राघव चड्ढा का संसद में ‘राइट टू रिकॉल’ पर जोर, बोले- मतदाता को नेता हटाने का अधिकार मिले

    राघव चड्ढा का संसद में ‘राइट टू रिकॉल’ पर जोर, बोले- मतदाता को नेता हटाने का अधिकार मिले


    नई दिल्ली। आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने बुधवार को संसद में ‘राइट टू रिकॉल’ यानी जनप्रतिनिधि को वापस बुलाने का अधिकार पर चर्चा कर सुर्खियां बटोरीं। उन्होंने कहा कि अगर चुने हुए नेता जनता की उम्मीदों पर खरे नहीं उतरते, तो मतदाताओं को उनका कार्यकाल पूरा होने से पहले उन्हें हटाने का अधिकार होना चाहिए।

    शून्यकाल के दौरान बोलते हुए चड्ढा ने कहा, “जैसे मतदाता को चुनाव में हिस्सा लेने का अधिकार है, उसी तरह अगर नेता काम नहीं करता तो उसे हटाने का अधिकार भी होना चाहिए। ‘राइट टू रिकॉल’ मतदाताओं को सशक्त बनाएगी और नेताओं को जवाबदेह बनाएगी।”

    ‘राइट टू रिकॉल’ क्या है?
    राघव चड्ढा ने इसे एक ऐसी प्रक्रिया बताया है जिसमें वोटर किसी चुने हुए नेता को उनके कार्यकाल पूरा होने से पहले हटाने का अधिकार रखते हैं। आसान शब्दों में, अगर जनता अपने नेता के काम से संतुष्ट नहीं है, तो वह उसे जल्दी हटाने का विकल्प रख सकती है।

    राष्ट्रपति और जज हैं हटाए जा सकते हैं, नेताओं को क्यों नहीं?
    चड्ढा ने तर्क दिया कि भारत में पहले ही राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति और न्यायाधीशों के लिए महाभियोग की व्यवस्था है। सरकारों के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव भी लाया जा सकता है। ऐसे में निर्वाचित नेताओं के लिए भी सुरक्षित और कानूनी प्रक्रिया के जरिए हटाने की सुविधा होना चाहिए।

    दुरुपयोग रोकने के लिए सुरक्षा उपाय
    सांसद ने कहा कि ‘राइट टू रिकॉल’ लोकतंत्र को मजबूत करेगा, इसे नेताओं के खिलाफ हथियार नहीं बनाया जाना चाहिए। उन्होंने सुझाव दिया कि हटाने की प्रक्रिया शुरू करने के लिए कम से कम 35-40% मतदाताओं के हस्ताक्षर जरूरी हों। नेता को 18 महीने का ‘परफॉर्मेंस पीरियड’ दिया जाए, ताकि वह सुधार कर सके। इस तरह काम करने वाले नेताओं को पार्टी टिकट देंगी और लोकतंत्र मजबूत होगा।

    किन देशों में लागू है?
    राघव चड्ढा के अनुसार, दुनिया के 20 से अधिक लोकतांत्रिक देशों में यह व्यवस्था मौजूद है। उदाहरण- अमेरिका, स्विट्जरलैंड, कनाडा, ब्रिटेन, वेनेज़ुएला, पेरू, इक्वाडोर, जापान, ताइवान। इसके अलावा भारत में यह व्यवस्था कर्नाटक, मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र और राजस्थान की ग्राम पंचायतों में लागू है।