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  • संसद में हंगामे पर किरेन रिजिजू ने राहुल गांधी को घेरा, कहा बहस छोड़कर राजनीतिक दबाव की रणनीति नहीं चलेगी

    संसद में हंगामे पर किरेन रिजिजू ने राहुल गांधी को घेरा, कहा बहस छोड़कर राजनीतिक दबाव की रणनीति नहीं चलेगी

    नई दिल्ली ।केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने संसद के मॉनसून सत्र में लगातार हुए हंगामे और सदन की कार्यवाही बाधित होने को लेकर विपक्ष पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि संसद किसी एक दल की नहीं, बल्कि देश की जनता की संस्था है और इसका इस्तेमाल राजनीतिक दबाव या ब्लैकमेल के लिए नहीं किया जाना चाहिए। रिजिजू ने विपक्ष से सदन में सार्थक बहस और संवाद के जरिए मुद्दे उठाने की अपील की।

    रिजिजू ने संसद की कार्यवाही बाधित किए जाने पर सवाल उठाते हुए कहा कि प्रश्नकाल को रोकना, मंत्रियों की बात नहीं सुनना और चर्चा के प्रस्तावों को स्वीकार नहीं करना लोकतांत्रिक प्रक्रिया के लिए उचित नहीं है। उनका कहना था कि एक तरफ विपक्ष सदन में चर्चा नहीं होने की शिकायत करता है और दूसरी तरफ जब विस्तृत बहस का अवसर दिया जाता है तो उसे स्वीकार नहीं करता।

    संसदीय कार्य मंत्री ने मॉनसून सत्र की कार्यवाही के आंकड़ों का भी उल्लेख किया। उनके मुताबिक लोकसभा निर्धारित समय का करीब 15 प्रतिशत और राज्यसभा लगभग 33 प्रतिशत ही चल सकी। बार-बार होने वाले व्यवधानों के कारण दोनों सदनों की कार्यवाही कई बार स्थगित करनी पड़ी। रिजिजू ने कहा कि संसद में जनता से जुड़े विषयों पर चर्चा होना जरूरी है और लगातार हंगामे से लोकतांत्रिक व्यवस्था को नुकसान पहुंचता है।

    रिजिजू ने जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन से जुड़े मुद्दे को लेकर भी राहुल गांधी पर निशाना साधा। उन्होंने दावा किया कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने संसद में इस विषय पर विस्तृत चर्चा के लिए पर्याप्त समय देने और सवालों के जवाब देने का प्रस्ताव रखा था। रिजिजू के अनुसार, राहुल गांधी ने इस प्रस्ताव को स्वीकार नहीं किया। उन्होंने कहा कि जब चर्चा का अवसर उपलब्ध कराया जा रहा हो तो उसे अस्वीकार करने के बाद संसद में पर्याप्त चर्चा नहीं होने की शिकायत करना उचित नहीं है।

    केंद्रीय मंत्री ने राहुल गांधी की संसदीय उपस्थिति को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने दावा किया कि 17वीं लोकसभा में राहुल गांधी की उपस्थिति 51 प्रतिशत रही। रिजिजू ने कहा कि संसद में लंबी बहस के प्रस्ताव को स्वीकार नहीं करने वाले नेता को सदन में पर्याप्त समय नहीं मिलने की शिकायत नहीं करनी चाहिए।

    उन्होंने राहुल गांधी के विदेश दौरों का उल्लेख करते हुए भी उन पर निशाना साधा। रिजिजू ने आरोप लगाया कि विदेशों में भारतीय लोकतंत्र को लेकर सवाल उठाने के बजाय संसद के भीतर जवाबदेही और चर्चा की प्रक्रिया में सक्रिय भागीदारी होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र को मजबूत करने का रास्ता हंगामा नहीं, बल्कि संवाद और तथ्य आधारित बहस है।

    रिजिजू ने राहुल गांधी के हालिया पितृसत्ता संबंधी बयान को लेकर भी सवाल उठाए। राहुल गांधी ने पुणे में एक कार्यक्रम के दौरान महिलाओं की स्वतंत्रता और पितृसत्तात्मक सोच पर बात की थी। उन्होंने मनुस्मृति का उल्लेख करते हुए महिलाओं को पिता, पति और बच्चों की संपत्ति मानने वाली सोच की आलोचना की थी।

    इसी बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए रिजिजू ने पूछा कि कांग्रेस और राहुल गांधी हिंदू परंपराओं को ही निशाना क्यों बनाते हैं। उन्होंने अल्पसंख्यक महिलाओं की स्थिति को लेकर भी सवाल उठाया और कहा कि समाज को बांटने के बजाय बेटियों को समान अवसर और सम्मान मिलना चाहिए। दोनों नेताओं के बयानों से संसद के भीतर और बाहर राजनीतिक बहस तेज होने के संकेत हैं।

  • पैलेट गन मामले में राहुल गांधी का धरना, घायल छात्र साहिल के साथ थाने पहुंचे, कांग्रेस ने FIR दर्ज करने की मांग दोहराई

    पैलेट गन मामले में राहुल गांधी का धरना, घायल छात्र साहिल के साथ थाने पहुंचे, कांग्रेस ने FIR दर्ज करने की मांग दोहराई


    नई दिल्ली । 
    दिल्ली में छात्रों के प्रदर्शन के दौरान पैलेट गन के इस्तेमाल का मामला शुक्रवार को उस समय और गरमा गया, जब लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी घायल छात्र साहिल लोचव के साथ संसद मार्ग पुलिस स्टेशन पहुंचे। कांग्रेस ने छात्र की शिकायत पर प्राथमिकी दर्ज करने और मामले में जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। पुलिस स्टेशन पहुंचने के बाद राहुल गांधी वहीं धरने पर बैठ गए और कहा कि जब तक FIR दर्ज नहीं होती, वे वहां से नहीं हटेंगे।

    साहिल लोचव का दावा है कि 20 जुलाई को जंतर-मंतर पर छात्रों के प्रदर्शन के दौरान उस पर पैलेट गन से हमला हुआ था। उसके अनुसार, घटना के बाद उसे लेडी हार्डिंग अस्पताल ले जाया गया, जहां से आगे एम्स रेफर किया गया। एम्स में उसकी सर्जरी हुई, लेकिन उसकी आंख की रोशनी अब भी स्पष्ट नहीं है। साहिल ने बताया कि उसने 14 अगस्त को सात पन्नों की शिकायत पुलिस को दी थी, लेकिन FIR दर्ज नहीं की गई।

    राहुल गांधी ने पुलिस स्टेशन के बाहर कहा कि चिकित्सा रिपोर्ट में साहिल के शरीर में 200 से अधिक छर्रे होने की बात सामने आई है और कुछ छर्रे उसकी आंख में भी हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि दिल्ली पुलिस पैलेट गन चलाने से इनकार कर रही है तो फिर छात्र को चोट कैसे लगी। राहुल गांधी ने कहा कि मामले में अपराध हुआ है और इसकी जांच के लिए FIR दर्ज होना जरूरी है।

    कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि शिकायत दर्ज कराने के लिए साहिल और उसके वकील को अलग-अलग पुलिस अधिकारियों के पास भेजा गया। साहिल की वकील के मुताबिक, पहले कनॉट प्लेस और फिर संसद मार्ग थाने से संबंधित क्षेत्र को लेकर उन्हें भेजा गया। वकील ने यह भी दावा किया कि उन्हें बताया गया कि शिकायत पर कार्रवाई नहीं की जा सकती क्योंकि ऊपर से निर्देश मिले हैं। कांग्रेस का कहना है कि लिखित शिकायत मिलने के बावजूद अब तक प्राथमिकी दर्ज नहीं की गई है।

    राहुल गांधी के धरने के दौरान कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा समेत कई नेता और कार्यकर्ता भी पुलिस स्टेशन के बाहर पहुंच गए। कार्यकर्ताओं ने नारेबाजी की और कुछ लोगों ने भजन गाते हुए तथा चरखे का इस्तेमाल करते हुए विरोध दर्ज कराया। सुरक्षा व्यवस्था को देखते हुए इलाके में अतिरिक्त बल तैनात किया गया और संसद मार्ग के दोनों ओर यातायात प्रभावित रहा।

    कांग्रेस सांसद जयराम रमेश ने कहा कि पार्टी की मांग स्पष्ट है कि शिकायत पर FIR दर्ज की जाए और उसका नंबर दिया जाए। उन्होंने कहा कि साहिल की शिकायत को लेकर राहुल गांधी उसके साथ खड़े हैं और प्राथमिकी दर्ज होने तक धरना जारी रखने का निर्णय लिया गया है। कांग्रेस नेताओं ने इसे छात्रों के अधिकार और पुलिस की जवाबदेही से जुड़ा मामला बताया।

    वहीं, भारतीय जनता पार्टी ने राहुल गांधी के विरोध प्रदर्शन पर सवाल उठाए। भाजपा नेताओं ने कहा कि 20 जुलाई की घटना को लेकर पहले से कानूनी प्रक्रिया चल रही है और सर्वोच्च न्यायालय ने भी मामले की जांच के लिए उच्चस्तरीय समिति गठित की है। भाजपा ने राहुल गांधी पर न्यायिक प्रक्रिया के समानांतर राजनीतिक प्रदर्शन करने का आरोप लगाया और कहा कि इस मुद्दे का इस्तेमाल राजनीतिक लाभ के लिए किया जा रहा है।

    केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने राहुल गांधी के धरने को लेकर कांग्रेस पर निशाना साधते हुए इसे राजनीतिक प्रदर्शन बताया। उन्होंने कहा कि जब सर्वोच्च न्यायालय मामले को देख रहा है, तब पुलिस स्टेशन के बाहर धरना देने का औचित्य क्या है। भाजपा सांसद रविशंकर प्रसाद ने भी कहा कि घटना की जांच चल रही है और कांग्रेस को कानून की प्रक्रिया का सम्मान करना चाहिए।

    इस बीच कांग्रेस का कहना है कि उसका उद्देश्य किसी जांच को प्रभावित करना नहीं, बल्कि घायल छात्र की शिकायत पर कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित कराना है। पैलेट गन के इस्तेमाल और साहिल की चोटों से जुड़े दावों की वास्तविक स्थिति जांच के बाद ही स्पष्ट होगी। फिलहाल विवाद का केंद्र यही है कि छात्र की शिकायत पर FIR दर्ज होती है या नहीं और इस मामले में आगे पुलिस तथा न्यायिक प्रक्रिया किस दिशा में बढ़ती है।

  • Bangladesh: राष्ट्रपति चुनाव के लिए आज हो रहा मतदान….35 साल बाद सीधे संसद में वोटिंग

    Bangladesh: राष्ट्रपति चुनाव के लिए आज हो रहा मतदान….35 साल बाद सीधे संसद में वोटिंग


    ढाका।
    बांग्लादेश (Bangladesh) में गुरुवार को नया राष्ट्रपति (New President) चुनने के लिए मतदान होने जा रहा है. 35 सालों के लंबे समय के बाद ये पहली बार है जब देश के राष्ट्रपति पद के लिए सीधे संसद में वोट डाले जाएंगे। राष्ट्रपति पद की रेस में मुख्य मुकाबला सत्ताधारी बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) के दिग्गज नेता मिर्जा फखरुल इस्लाम आलमगीर (Mirza Fakhrul Islam Alamgir) और 11 दलीय विपक्षी गठबंधन के प्रत्याशी कर्नल (रिटायर्ड) ओली अहमद (Oli Ahmed) के बीच है.

    चुनाव आयोग के मुताबिक, मतदान जातीय संसद (संसद भवन) में दोपहर 2 बजे से शाम 5 बजे तक चलेगा. निर्वाचन आयोग ने 16 अगस्त को ही दोनों उम्मीदवारों के नामांकन पत्रों को वैध करार दिया था।

    मिर्जा फखरुल इस्लाम आलमगीर बीएनपी का प्रमुख चेहरा हैं, जबकि लिबरल डेमोक्रेटिक पार्टी (LDP) के अध्यक्ष कर्नल (सेवानिवृत्त) ओली अहमद बीर बिक्रम जमात-ए-इस्लामी के नेतृत्व वाले 11 दलीय विपक्षी मोर्चे के उम्मीदवार हैं.


    BNP की बैठक में भावुक हुए फखरुल

    बुधवार को BNP संसदीय दल की बैठक के दौरान फखरुल ने अपनी ही पार्टी के सांसदों से समर्थन की अपील की. लंबे समय तक पार्टी के महासचिव रहे फखरुल बैठक में बेहद भावुक हो गए और उनकी आंखों में आंसू आ गए.

    उन्होंने सांसदों से कहा, ‘अगर मेरे कार्यकाल के दौरान मुझसे कोई भूल हुई हो या अनजाने में किसी का दिल दुखा हो, तो मैं माफी मांगता हूं. उन्होंने देश की स्वतंत्रता और संप्रभुता से कभी समझौता न करने का संकल्प भी लिया.


    शुक्रवार को नए राष्ट्रपति लेंगे शपथ

    चुनावी नतीजों के तुरंत बाद नए राष्ट्रपति शुक्रवार शाम बंगभवन के दरबार हॉल में बांग्लादेश के 23वें राष्ट्रपति के रूप में शपथ लेंगे.

    बता दें कि पूर्व राष्ट्रपति मोहम्मद शहाबुद्दीन के स्वास्थ्य कारणों से इस्तीफा देने के बाद ये पद खाली हुआ था. संविधान के तहत पद खाली होने के 90 दिनों के भीतर चुनाव कराना अनिवार्य है. फिलहाल सभपति (स्पीकर) हाफिज उद्दीन अहमद कार्यवाहक राष्ट्रपति पद पर हैं।


    BNP का पलड़ा भारी

    इस साल 12 फरवरी को हुए आम चुनावों में बीएनपी ने सत्ता में वापसी की थी. संसद में बीएनपी के पास दो-तिहाई से ज्यादा का बहुमत है. ऐसे में प्रधानमंत्री तारिक रहमान के घोषित उम्मीदवार मिर्जा फखरुल इस्लाम आलमगीर की जीत लगभग तय मानी जा रही है। पेशे से अर्थशास्त्री रहे फखरुल 1990 के दशक में बीएनपी में शामिल हुए थे. वो पहले कृषि राज्य मंत्री और स्थानीय सरकार मंत्री भी रह चुके हैं।

  • चीन के 60 किलोमीटर घुसने के दावे पर किरेन रिजिजू का पलटवार, बोले सेना को राजनीतिक विवादों से दूर रखें

    चीन के 60 किलोमीटर घुसने के दावे पर किरेन रिजिजू का पलटवार, बोले सेना को राजनीतिक विवादों से दूर रखें

    नई दिल्ली ।केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने चीन सीमा विवाद, सेना को लेकर राजनीतिक बयानबाजी और संसद में विपक्ष के हंगामे सहित कई मुद्दों पर सरकार का पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि सीमा से जुड़े वास्तविक मामलों को गंभीरता से लिया जाना चाहिए, लेकिन ऐसे दावे नहीं किए जाने चाहिए जिनसे देश में भ्रम की स्थिति पैदा हो। उन्होंने विशेष रूप से उस दावे को गलत बताया जिसमें चीन के भारत की सीमा में 60 किलोमीटर तक अंदर आने की बात कही गई थी।

    रिजिजू ने अरुणाचल प्रदेश में भारत और चीन के बीच सीमा संबंधी स्थिति को जटिल बताते हुए कहा कि कई इलाकों में अभी स्पष्ट सीमांकन नहीं हुआ है। कुछ स्थानों पर सीमा स्तंभ और जमीन पर सीमा की स्पष्ट पहचान भी नहीं है। उनके अनुसार स्थानीय लोगों की ओर से सीमा को लेकर जताई जाने वाली चिंताएं वास्तविक हैं, लेकिन इन परिस्थितियों को चीन के भारतीय क्षेत्र में 60 किलोमीटर तक घुस आने के दावे से जोड़ना सही नहीं है।

    केंद्रीय मंत्री ने कहा कि चीन ने सीमा के अपने हिस्से में सड़क और अन्य बुनियादी ढांचे का विकास पहले शुरू कर दिया था। भारत की ओर से भी वर्ष 2014 के बाद सीमावर्ती इलाकों में सड़क, संपर्क और अन्य सुविधाओं के निर्माण को गति दी गई। उन्होंने कहा कि लंबे समय तक सीमावर्ती क्षेत्रों में पर्याप्त सड़क संपर्क नहीं होने से सुरक्षा बलों और स्थानीय आबादी को कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था।

    रिजिजू ने सीमावर्ती इलाकों में अपने दौरे का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्होंने सुरक्षा बलों और सेना के जवानों से मुलाकात की है तथा वहां सड़क निर्माण की स्थिति भी देखी है। उन्होंने ताकसिंग तक सड़क संपर्क मजबूत होने का जिक्र करते हुए कहा कि सीमावर्ती क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे के विकास से सुरक्षा व्यवस्था को मजबूती मिली है।

    लोंगजू और आसपास के क्षेत्रों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि वहां भारत और चीन के बीच पुराना सीमा विवाद रहा है। उनके अनुसार कुछ क्षेत्रों में चीन की ओर से ढांचे और गांव जैसी इमारतें बनाई गई हैं। रिजिजू ने कहा कि इन परिस्थितियों को सीमा विवाद के व्यापक संदर्भ में देखा जाना चाहिए, लेकिन यह कहना सही नहीं है कि चीन ने भारतीय गांवों पर कब्जा कर लिया है।

    राहुल गांधी द्वारा चीन की कथित घुसपैठ को लेकर तस्वीरें दिखाए जाने के सवाल पर रिजिजू ने सेना को राजनीतिक विवादों से दूर रखने की अपील की। उन्होंने कहा कि सेना देश की रक्षा करती है और उसे राजनीतिक बहस का हिस्सा नहीं बनाया जाना चाहिए। उन्होंने सेना के अधिकारियों के लिए आपत्तिजनक भाषा के इस्तेमाल पर भी कांग्रेस नेताओं से गंभीरता से विचार करने को कहा।

    संसद में विपक्ष के हंगामे और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की मौजूदगी से जुड़े आरोपों पर रिजिजू ने कहा कि गृह मंत्री संसद में मौजूद रहते हैं और कार्यवाही के दौरान अपना समय देते हैं। उन्होंने विपक्ष की ओर से लगाए गए आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि हंगामे के बीच संसद की कार्यवाही प्रभावित होती है।

    परिसीमन और छात्रों से जुड़े मुद्दों पर रिजिजू ने कहा कि सरकार बातचीत के जरिए समाधान चाहती है। उन्होंने विपक्षी दलों से सहयोग की अपील की। राहुल गांधी की भूमिका पर उन्होंने कहा कि वह विपक्ष के नेता का सम्मान करते हैं, लेकिन कांग्रेस सांसदों की नारेबाजी और हंगामे को रोकने में उनकी भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है।

    वंदे मातरम को लेकर रिजिजू ने कहा कि यह राष्ट्रीय गीत है और सभी भारतीयों को इसका सम्मान करना चाहिए। उन्होंने विपक्ष की स्थिति पर कहा कि चुनावी असफलता के बाद संसद में हंगामा करना उचित नहीं है। उनके मुताबिक संसद को सुचारु रूप से चलाने के लिए सरकार और विपक्ष दोनों को संवाद और सहयोग की भावना के साथ आगे बढ़ना चाहिए।

  • संसद के मानसून सत्र में विपक्षी एकजुटता और छात्र आंदोलनों के कारण बैकफुट पर आई एनडीए सरकार।

    संसद के मानसून सत्र में विपक्षी एकजुटता और छात्र आंदोलनों के कारण बैकफुट पर आई एनडीए सरकार।

    नई दिल्ली । संसद के हाल ही में संपन्न हुए मानसून सत्र के दौरान देश की राजनीतिक फिजां में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। सत्र की शुरुआत से पहले जहां सत्तारूढ़ गठबंधन मजबूत स्थिति में नजर आ रहा था, वहीं सत्र के दौरान हुए घटनाक्रमों और छात्र आंदोलनों के कारण विपक्षी दल सरकार पर रणनीतिक दबाव बनाने में पूरी तरह सफल रहे।

    मानसून सत्र की शुरुआत से ठीक पहले राजनीतिक समीकरण एनडीए के पक्ष में दिखाई दे रहे थे। विभिन्न राज्यों के राजनीतिक घटनाक्रमों से विपक्षी दल मनोवैज्ञानिक दबाव महसूस कर रहे थे। हालांकि, सत्र के दौरान देश के कई हिस्सों में शुरू हुए छात्र आंदोलनों, पेपर लीक विवादों और पुलिस कार्रवाई के मुद्दों ने पूरे परिदृश्य को बदलकर रख दिया।

    संसद भवन के भीतर और बाहर कांग्रेस की अगुवाई में एकजुट हुए विपक्षी दलों ने इन संवेदनशील मुद्दों को प्रमुखता से उठाया। सरकार के खिलाफ बने इस माहौल को बांकीपुर और दतिया उप-चुनावों में सत्तारूढ़ दल को मिली शिकस्त ने और अधिक बल दिया। इन चुनावी नतीजों से विपक्षी सांसदों का उत्साह और आक्रामकता दोनों में बढ़ोतरी दर्ज की गई।

    विपक्ष के कड़े तेवरों और लगातार जारी हंगामे के कारण सरकार को कई महत्वपूर्ण विधायी प्रस्तावों पर अपने कदम पीछे खींचने पड़े। एफसीआरए संशोधन विधेयक को आगे की समीक्षा के लिए संसद की स्थायी समिति के पास भेजने का निर्णय लिया गया। इसके अलावा महिला आरक्षण और परिसीमन जैसे बड़े विधेयकों पर भी विस्तृत चर्चा संभव नहीं हो सकी।

    सत्र के दौरान विभिन्न क्षेत्रीय दलों के बीच अभूतपूर्व समन्वय देखने को मिला। तमिलनाडु की सत्तारूढ़ डीएमके, समाजवादी पार्टी और कांग्रेस ने अलग-अलग मुद्दों पर एक-दूसरे का पुरजोर समर्थन किया। नीट परीक्षा में अनियमितताओं और छात्रों पर हुई कार्रवाई के मुद्दे पर पूरा विपक्ष एक सुर में गृह मंत्री से जवाब मांगने पर अड़ा रहा, जिससे सदन की कार्यवाही बार-बार बाधित हुई।

    संसदीय गतिरोध का असर देश के विभिन्न राज्यों की राजनीति पर भी स्पष्ट रूप से देखा जा रहा है। मध्य प्रदेश के दतिया उप-चुनाव में आए नतीजों और राज्य के युवाओं से जुड़े रोजगार व परीक्षा संबंधी मुद्दों को लेकर स्थानीय स्तर पर भी राजनीतिक सरगर्मी बढ़ गई है। मध्य प्रदेश में भी छात्र संगठनों द्वारा इन मुद्दों को लेकर लगातार संवाद और प्रदर्शन किए जा रहे हैं।

    मानसून सत्र के दौरान नीट परीक्षा विवाद, विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान विधेयक और जनहित से जुड़े कई महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तृत चर्चा अधूरी रह गई। लगातार होते स्थगन के कारण विभिन्न क्षेत्रों के सांसदों द्वारा उठाए जाने वाले शून्यकाल के मुद्दे भी सदन के पटल पर प्रस्तुत नहीं किए जा सके।

    राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मानसून सत्र में जिस तरह से विपक्षी दलों ने एकजुटता दिखाई है, उससे आने वाले राज्य विधानसभा चुनावों में मुकाबला दिलचस्प होने की संभावना है। छात्र आंदोलनों और जनहित के मुद्दों को आगे भी बरकरार रखना विपक्ष के लिए एक बड़ी चुनौती सिद्ध होगा।

  • संसद परिसर में विपक्षी सांसदों का अनोखा विरोध, पवन खेड़ा के नेतृत्व में सरकार से सदन में जवाब मांगा

    संसद परिसर में विपक्षी सांसदों का अनोखा विरोध, पवन खेड़ा के नेतृत्व में सरकार से सदन में जवाब मांगा

    नई दिल्ली । संसद का मॉनसून सत्र गुरुवार को दोनों सदनों की कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित होने के साथ समाप्त हो गया। सत्र के अंतिम दिन भी विपक्ष और सरकार के बीच विभिन्न मुद्दों को लेकर राजनीतिक टकराव देखने को मिला। कार्यवाही समाप्त होने से पहले विपक्षी सांसदों ने संसद परिसर में सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया।

    कांग्रेस सांसद पवन खेड़ा के नेतृत्व में विपक्षी सांसदों ने एक खिलौना बंदर को प्रदर्शन का हिस्सा बनाया। इस दौरान सांसदों ने नारे लगाते हुए सरकार पर सदन के भीतर विपक्ष के सवालों का जवाब नहीं देने का आरोप लगाया। प्रदर्शन के दौरान 56 इंच का छोटा बंदर, जल्दी आओ सदन के अंदर जैसे नारे लगाए गए।

    विपक्षी सांसदों का यह प्रदर्शन संसद के मॉनसून सत्र में लगातार बने रहे राजनीतिक तनाव के बीच हुआ। विपक्ष विभिन्न मुद्दों पर सरकार से चर्चा और जवाब की मांग करता रहा, जबकि सदन की कार्यवाही कई मौकों पर व्यवधान के कारण प्रभावित हुई।

    निर्दलीय सांसद पप्पू यादव ने सत्र के समापन के बाद सरकार पर विपक्ष और जनता से जुड़े महत्वपूर्ण सवालों पर चर्चा नहीं करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि सरकार की ओर से बड़ी-बड़ी बातें की गईं, लेकिन छात्रों के मुद्दों, चंदे से जुड़े सवालों और लोगों की आस्था से जुड़े विषयों पर सदन में अपेक्षित चर्चा नहीं हुई।

    पप्पू यादव ने बच्चों से जुड़े मामलों में लाठी और गोली चलने के आरोपों का भी उल्लेख किया और कहा कि सरकार को इन मुद्दों पर जवाब देना चाहिए था। उनके अनुसार, संसद में चर्चा की जिम्मेदारी सरकार की है और विपक्ष का काम सरकार से सवाल पूछना तथा जवाब मांगना है।

    उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि सरकार चर्चा से बचती रही। विपक्ष की ओर से लगातार मुद्दे उठाए जाने के बावजूद सदन में उन पर पर्याप्त चर्चा नहीं हो सकी। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में सरकार से सवाल पूछना विपक्ष का अधिकार है और सरकार की जिम्मेदारी है कि वह उनका जवाब दे।

    राजद सांसद मनोज झा ने भी संसद की कार्यवाही में बार-बार हो रहे व्यवधान को लेकर सरकार से जवाबदेही तय करने की मांग की। उन्होंने सवाल उठाया कि जिन घटनाओं को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं, उनकी जिम्मेदारी किसकी थी।

    मनोज झा ने पैलेट गन के इस्तेमाल को लेकर भी जवाबदेही का सवाल उठाया। उनका कहना था कि लोकतंत्र में किसी घटना की जिम्मेदारी तय किए बिना व्यवस्था का उद्देश्य पूरा नहीं हो सकता। उन्होंने इस मुद्दे को सीधा और स्पष्ट सवाल बताते हुए सरकार से जवाब की अपेक्षा जताई।

    मॉनसून सत्र के अंतिम दिन लोकसभा की कार्यवाही शुरू होने के कुछ ही समय बाद स्थगित हो गई, जबकि राज्यसभा की कार्यवाही भी बाद में अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दी गई। इसके साथ ही संसद का यह सत्र समाप्त हो गया।

    सत्र के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच कई मुद्दों पर मतभेद सामने आए। विपक्ष ने जहां विभिन्न मामलों पर तत्काल चर्चा और सरकार की जवाबदेही की मांग की, वहीं सरकार की ओर से भी विपक्ष पर सदन की कार्यवाही बाधित करने के आरोप लगाए गए।

    अंतिम दिन संसद परिसर में हुआ खिलौना बंदर वाला प्रदर्शन विपक्ष की सरकार के खिलाफ राजनीतिक रणनीति का एक प्रतीकात्मक हिस्सा रहा। प्रदर्शन के जरिए विपक्ष ने यह संदेश देने की कोशिश की कि सरकार को सदन के भीतर उठाए गए सवालों का जवाब देना चाहिए और महत्वपूर्ण सार्वजनिक मुद्दों पर चर्चा से बचना नहीं चाहिए।

  • मॉनसून सत्र का समापन, हंगामे के बीच अनिश्चितकाल के लिए स्थगित संसद; लोकसभा एक मिनट, राज्यसभा एक घंटे चली

    मॉनसून सत्र का समापन, हंगामे के बीच अनिश्चितकाल के लिए स्थगित संसद; लोकसभा एक मिनट, राज्यसभा एक घंटे चली


    नई दिल्ली । 
    संसद का मॉनसून सत्र गुरुवार को हंगामे और नारेबाजी के बीच समाप्त हो गया। लोकसभा और राज्यसभा की कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित किए जाने के साथ ही सत्र का औपचारिक समापन हो गया। सत्र के आखिरी दिन दोनों सदनों में राजनीतिक गतिरोध का असर साफ दिखाई दिया।

    लोकसभा की कार्यवाही सुबह 11 बजे शुरू होने के कुछ ही देर बाद भारी हंगामे के कारण अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दी गई। अंतिम दिन सदन की कार्यवाही लगभग एक मिनट ही चल सकी। इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी सहित कई प्रमुख नेता सदन में मौजूद रहे।

    राज्यसभा में हालांकि लोकसभा की तुलना में अधिक समय तक कार्यवाही चली। उच्च सदन में करीब एक घंटे तक विभिन्न मुद्दों पर चर्चा और विधायी कामकाज हुआ। केंद्रीय कोयला एवं खान मंत्री जी. किशन रेड्डी ने खान और खनिज संबंधी संशोधन विधेयक, 2026 को विचार और पारित करने के लिए सदन में पेश किया।

    विधेयक पर चर्चा के बाद राज्यसभा ने खान और खनिज (विकास और विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026 को पारित कर दिया। इसके बाद सदन में हंगामा बढ़ गया और कार्यवाही को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया गया। इसी के साथ मॉनसून सत्र का समापन हो गया।

    सत्र के अंतिम दिन राज्यसभा में विपक्ष के नेता और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने एक कार्यक्रम के बाद कथित तौर पर किए गए शुद्धिकरण को लेकर गंभीर आपत्ति जताई। खड़गे ने कहा कि वह इस विषय को राजनीतिक मुद्दा नहीं बनाना चाहते, लेकिन उन्हें अपने साथ अछूत जैसा व्यवहार किए जाने और अपमानित महसूस होने की बात कही।

    खड़गे ने कहा कि वह लंबे समय से संसद के सदस्य हैं और अनुसूचित जाति से आते हैं। उन्होंने कहा कि उन्होंने अपने राजनीतिक जीवन में किसी के सामने मदद या सुरक्षा के लिए इस तरह की गुहार नहीं लगाई और उनमें परिस्थितियों का सामना करने की ताकत है।

    खड़गे के आरोपों पर राज्यसभा में सदन के नेता और केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने जवाब दिया। नड्डा ने कहा कि यदि ऐसी घटना हुई है तो यह बेहद दुखद है और भारतीय जनता पार्टी ऐसी गतिविधियों का समर्थन नहीं करती। उन्होंने मामले की जांच कराने का भरोसा भी दिया।

    नड्डा ने कहा कि इस तरह की गतिविधि पूरे देश के लिए अफसोस की बात है और पार्टी इसकी निंदा करती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि संबंधित घटना की जांच की जाएगी और पार्टी स्तर पर भी मामले को देखा जाएगा।

    मॉनसून सत्र के अंतिम दिन सदनों की कार्यवाही का सीमित रहना विपक्ष और सत्तापक्ष के बीच जारी टकराव को भी दर्शाता है। लोकसभा में कार्यवाही शुरू होते ही स्थगन और राज्यसभा में विधायी कामकाज के बाद हंगामे के कारण कार्यवाही रोकना सत्र के अंतिम दिन की प्रमुख घटनाएं रहीं।

    दोनों सदनों के अनिश्चितकाल के लिए स्थगित होने के साथ ही संसद का मॉनसून सत्र समाप्त हो गया। अंतिम दिन हुए घटनाक्रम में विधायी कामकाज के साथ राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप भी प्रमुखता से सामने आए।

  • मॉनसून सत्र के आखिरी दिन गृहमंत्री अमित शाह के बयान पर विपक्ष हमलावर, पत्र लिखने के समय को लेकर उठाए सवाल

    मॉनसून सत्र के आखिरी दिन गृहमंत्री अमित शाह के बयान पर विपक्ष हमलावर, पत्र लिखने के समय को लेकर उठाए सवाल

    नई दिल्ली । मॉनसून सत्र के आखिरी दिन केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के सदन में बयान को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच सियासी खींचतान तेज हो गई है। विपक्ष लगातार मांग करता रहा है कि गृहमंत्री सदन में आकर संबंधित मुद्दों पर अपना पक्ष रखें। इसी बीच अमित शाह की ओर से चर्चा के लिए तैयार होने की बात सामने आने के बाद भी विपक्ष का रुख नरम नहीं हुआ है।

    समाजवादी पार्टी के नेताओं ने गृहमंत्री के रुख और सदन में बयान देने की प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाए। सपा सांसद अवधेश प्रसाद ने कहा कि विपक्ष लगातार अमित शाह के सदन में आने की मांग करता रहा है, लेकिन अब तक वह सदन में नहीं आए। उन्होंने कहा कि सत्र का अंतिम दिन है और सदन की कार्यवाही भी बार-बार स्थगित हो रही है।

    अवधेश प्रसाद ने सवाल उठाया कि यदि गृहमंत्री को बयान देना था तो उन्हें सदन में आने में क्या परेशानी थी। उनके मुताबिक विपक्ष की मांग लगातार बनी रही, लेकिन सरकार की ओर से इस दिशा में अपेक्षित पहल नहीं हुई।

    सपा सांसद राम गोपाल यादव ने भी गृहमंत्री के बयान को लेकर अपनाई गई प्रक्रिया पर आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि गृहमंत्री बयान देने के लिए तैयार हैं, लेकिन विपक्ष से पहले सवाल लिखित रूप में देने को कहा गया है। उनके अनुसार संसद में सामान्य परंपरा यह रही है कि मंत्री सदन में बयान देते हैं और इसके बाद सांसद उनसे संबंधित विषयों पर स्पष्टीकरण मांगते हैं।

    कांग्रेस सांसद सुखदेव भगत ने भी गृहमंत्री के पत्र लिखने के समय पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि जब मॉनसून सत्र समाप्त होने की स्थिति में पहुंच चुका है, तब 17वें दिन पत्र लिखे जाने का क्या उद्देश्य है। उन्होंने सवाल किया कि क्या गृहमंत्री सदन में आने के बजाय घर से ही जवाब देना चाहते हैं।

    भगत ने कहा कि 19 दिन के सत्र में 17वें दिन पत्र लिखना अपने आप में सवाल खड़े करता है। उन्होंने आरोप लगाया कि इस तरह की प्रक्रिया के जरिए जनता और विपक्ष को भ्रमित करने की कोशिश की जा रही है। हालांकि इन आरोपों पर सत्ता पक्ष की ओर से सदन में आगे क्या रुख अपनाया जाता है, यह कार्यवाही के दौरान स्पष्ट होगा।

    सपा नेता हरेंद्र सिंह मलिक ने इस दौरान राम मंदिर से जुड़े चंदा और चोरी के आरोपों का मुद्दा उठाने की बात कही। उन्होंने कहा कि पार्टी इस मामले को लेकर प्रदर्शन करेगी और इसे लोगों की आस्था तथा भावनाओं से जुड़ा विषय बताया।

    मॉनसून सत्र के अंतिम दिन अब सभी की नजर सदन की कार्यवाही पर है। विपक्ष गृहमंत्री के बयान और विभिन्न मुद्दों पर चर्चा की मांग को लेकर लगातार दबाव बना रहा है। दूसरी ओर गृहमंत्री की ओर से चर्चा के लिए तैयार होने की बात कही गई है। ऐसे में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि आखिरी दिन सदन में दोनों पक्षों के बीच सहमति बनती है या राजनीतिक गतिरोध आगे भी जारी रहता है।

  • 12 राज्यों के युवाओं ने संसद यूथ पार्लियामेंट 2026 में लिया हिस्सा, सीएम यादव बोले लोकतंत्र मजबूत करें युवा

    12 राज्यों के युवाओं ने संसद यूथ पार्लियामेंट 2026 में लिया हिस्सा, सीएम यादव बोले लोकतंत्र मजबूत करें युवा

    मध्य प्रदेश। विधानसभा में गुरुवार को संसद यूथ पार्लियामेंट 2026 का आयोजन किया गया, जिसमें 12 राज्यों के 52 से अधिक युवाओं ने हिस्सा लिया। कार्यक्रम का उद्घाटन मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने किया। इस दौरान उन्होंने युवाओं से लोकतंत्र को मजबूत बनाने के लिए राजनीति में सक्रिय भागीदारी निभाने का आह्वान किया।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि मध्य प्रदेश देश का दिल है और भारत दुनिया का सबसे युवा देश है। उन्होंने कहा कि देश 80वां स्वतंत्रता दिवस मनाने की तैयारी कर रहा है और ऐसे समय में विधानसभा भवन में आयोजित युवा संसद ने इसे मिनी इंडिया का स्वरूप दे दिया है। उनके अनुसार सदन कल्याणकारी नीतियों के निर्माण का महत्वपूर्ण स्थान है और युवाओं को इसकी कार्यप्रणाली को समझना चाहिए।

    डॉ. यादव ने युवा संसद में बेटियों की भागीदारी का उल्लेख करते हुए कहा कि इससे लोकतांत्रिक संस्थाओं में महिलाओं की बढ़ती भूमिका दिखाई देती है। उन्होंने महिलाओं के लिए लोकसभा और विधानसभा में 33 प्रतिशत आरक्षण के प्रावधान का भी उल्लेख किया। उन्होंने भारतीय संस्कृति में माताओं और बहनों के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि समाज की प्रगति में महिलाओं की भूमिका महत्वपूर्ण है।

    मुख्यमंत्री ने वसुधैव कुटुम्बकम की भावना का उल्लेख करते हुए कहा कि भारतीय संस्कृति पूरी दुनिया को एक परिवार के रूप में देखने की सीख देती है। उन्होंने कहा कि देश को अनेकता में एकता, सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास की भावना के साथ आगे बढ़ाने के लिए केवल विचार पर्याप्त नहीं हैं, बल्कि उन्हें जमीन पर लागू करने के लिए संकल्प और सक्रिय भागीदारी जरूरी है।

    कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने समान कानून के मुद्दे पर भी अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि सरकार की नजर में सभी नागरिकों के लिए कानून समान होना चाहिए। उन्होंने मध्य प्रदेश में समान नागरिक संहिता से जुड़े विधायी प्रयासों और सुझाव प्रक्रिया का उल्लेख किया। उनके अनुसार विभिन्न जिलों और धर्मों के लोगों से इस विषय पर सुझाव लिए गए हैं।

    डॉ. यादव ने युवाओं से राजनीति को केवल चुनावी गतिविधि के रूप में नहीं देखने की अपील की। उन्होंने कहा कि युवा पढ़ाई पूरी करने के बाद डॉक्टर, इंजीनियर और अन्य पेशेवर बनने के साथ राजनीति में भी सक्रिय भूमिका निभा सकते हैं। उनके अनुसार लोकतंत्र को मजबूत बनाने के लिए शिक्षित और जागरूक युवाओं की भागीदारी आवश्यक है।

    मुख्यमंत्री ने स्वतंत्रता आंदोलन और स्वतंत्रता सेनानियों के योगदान का भी उल्लेख किया। उन्होंने नेताजी सुभाषचंद्र बोस का उदाहरण देते हुए कहा कि उन्होंने आईसीएस परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद नौकरी छोड़कर देश की स्वतंत्रता के आंदोलन में भाग लिया। उन्होंने युवाओं से देश और समाज के प्रति जिम्मेदारी की भावना विकसित करने का आह्वान किया।

    कार्यक्रम में उद्योग जगत से जुड़े वक्ताओं ने भी युवाओं की भूमिका और मध्य प्रदेश के औद्योगिक विकास पर विचार रखे। उन्होंने कहा कि प्रदेश में बड़े उद्योगों के साथ छोटी औद्योगिक इकाइयों में भी निवेश के अवसर बढ़ रहे हैं। राजनीति और समाज सेवा को समर्पण और जिम्मेदारी वाला क्षेत्र बताते हुए युवाओं को समाज के लिए काम करने की प्रेरणा दी गई।

    युवा संसद में युवा सांसद की भूमिका निभाने वाले प्रतिभागियों ने भी प्रदेश में युवाओं से जुड़ी योजनाओं और शिक्षा के महत्व पर विचार रखे। कार्यक्रम में बताया गया कि वित्त वर्ष 2026-27 में खेल और युवा कल्याण के लिए 800 करोड़ रुपये से अधिक का बजट रखा गया है। प्रदेश में 274 सांदीपनि विद्यालय संचालित किए जा रहे हैं और 200 नए विद्यालय स्थापित करने की योजना है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि विकसित भारत और विकसित मध्य प्रदेश के लक्ष्य को हासिल करने के लिए शिक्षित, जागरूक और आत्मनिर्भर युवाओं की आवश्यकता है। युवा संसद जैसे कार्यक्रमों के जरिए युवाओं को लोकतांत्रिक संस्थाओं की कार्यप्रणाली समझने और सार्वजनिक जीवन में अपनी भूमिका तय करने का अवसर मिलता है।

  • मॉनसून सत्र में शाह पर संजय राउत का हमला, बोले बयान से मत भागिए, भविष्य में इस्तीफा देना होगा

    मॉनसून सत्र में शाह पर संजय राउत का हमला, बोले बयान से मत भागिए, भविष्य में इस्तीफा देना होगा

    नई दिल्ली । मॉनसून सत्र के दौरान संसद में छात्रों के प्रदर्शन पर हुई कार्रवाई और अयोध्या में राम मंदिर के चंदे से जुड़े आरोपों को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच टकराव लगातार बढ़ता जा रहा है। विपक्ष इन दोनों मुद्दों पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के सदन में आने और स्पष्ट बयान देने की मांग कर रहा है। इसी बीच शिवसेना यूबीटी के सांसद संजय राउत ने शाह पर तीखा हमला बोला है।

    संजय राउत ने कहा कि विपक्ष पिछले कई दिनों से दो प्रमुख मुद्दों को लेकर सदन में चर्चा की मांग कर रहा है। उनके अनुसार पहला मामला राम मंदिर के चंदे से जुड़ा है, जबकि दूसरा छात्रों के खिलाफ कथित तौर पर पैलेट गन और हिंसा के इस्तेमाल के निर्देश से संबंधित है। राउत का कहना है कि इन दोनों विषयों पर संसद में गंभीर चर्चा होनी चाहिए।

    राउत ने गृह मंत्री अमित शाह के संभावित बयान को लेकर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि बयान से बचने की कोशिश नहीं होनी चाहिए और सवालों का सामना सदन में किया जाना चाहिए। उन्होंने भविष्य को लेकर दावा करते हुए कहा कि आने वाले समय में शाह को इस्तीफा देना होगा। हालांकि, यह राउत का राजनीतिक बयान है और इस पर सरकार या गृह मंत्री की ओर से संबंधित प्रतिक्रिया का उल्लेख सामने नहीं आया है।

    विपक्षी दलों का कहना है कि मॉनसून सत्र की शुरुआत से ही उनकी मांग स्पष्ट रही है। तृणमूल कांग्रेस की सांसद महुआ मोइत्रा ने कहा कि विपक्ष केवल एक स्पष्ट बयान चाहता है। उनका सवाल है कि छात्रों के खिलाफ पैलेट गोली और हिंसा का निर्देश किस स्तर से दिया गया था। उन्होंने यह भी पूछा कि यदि गृह मंत्री ने ऐसा कोई निर्देश नहीं दिया था, तो फिर उनके मंत्रालय में यह आदेश किसने दिया।

    महुआ मोइत्रा ने राम मंदिर के चंदे से जुड़े मामले को भी महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि सरकार इस विषय पर चर्चा नहीं कर रही है। उनका तर्क था कि विपक्ष गृह मंत्री को सदन में आने से नहीं रोक रहा, बल्कि वह खुद सदन में आकर जवाब देने की मांग कर रहा है।

    कांग्रेस सांसद प्रमोद तिवारी ने भी गृह मंत्री के सदन में आने की मांग की। उन्होंने कहा कि छात्रों पर हुई कार्रवाई और राम मंदिर के चंदे से जुड़े सवालों पर सरकार को जवाब देना चाहिए। विपक्ष का कहना है कि इन मुद्दों पर चर्चा और स्पष्टीकरण संसद के भीतर होना जरूरी है।

    मॉनसून सत्र में इन मुद्दों को लेकर लगातार राजनीतिक बयानबाजी और विरोध प्रदर्शन देखने को मिल रहा है। विपक्ष जहां गृह मंत्री के जवाब को लेकर दबाव बना रहा है, वहीं इन मांगों के कारण सदन की कार्यवाही भी राजनीतिक तनाव के बीच आगे बढ़ रही है। अब सबकी नजर इस बात पर है कि सरकार इन आरोपों और विपक्ष की मांगों पर सदन में किस तरह प्रतिक्रिया देती है।