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  • पेट्रोल के निर्यात पर एक्सपोर्ट ड्यूटी शून्य, डीजल और ATF पर बढ़ाया टैक्स, घरेलू कीमतों पर असर नहीं

    पेट्रोल के निर्यात पर एक्सपोर्ट ड्यूटी शून्य, डीजल और ATF पर बढ़ाया टैक्स, घरेलू कीमतों पर असर नहीं


    नई दिल्ली। दिवाली से पहले केंद्र सरकार ने पेट्रोलियम उत्पादों के निर्यात पर लगने वाले टैक्स की दरों में बदलाव किया है। वित्त मंत्रालय ने पेट्रोल के निर्यात पर एक्सपोर्ट ड्यूटी 2.50 रुपये प्रति लीटर से घटाकर शून्य कर दी है। वहीं, डीजल और विमान ईंधन (ATF) के निर्यात पर विंडफॉल टैक्स बढ़ा दिया गया है। नए आदेश 31 अक्टूबर से लागू होकर अगले दो सप्ताह तक प्रभावी रहेंगे। सरकार ने स्पष्ट किया है कि इन बदलावों का घरेलू बाजार में पेट्रोल-डीजल की कीमतों या उन पर लगने वाली मौजूदा ड्यूटी पर कोई असर नहीं पड़ेगा।

    पेट्रोल पर एक्सपोर्ट ड्यूटी खत्म

    वित्त मंत्रालय ने शनिवार, 31 अक्टूबर को इस संबंध में अधिसूचना जारी की। इसके मुताबिक, पेट्रोल के निर्यात पर लगने वाली 2.50 रुपये प्रति लीटर की एक्सपोर्ट ड्यूटी को पूरी तरह समाप्त कर दिया गया है। अब पेट्रोल के निर्यात पर यह टैक्स शून्य रहेगा।

    दूसरी ओर, सरकार ने एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) के निर्यात पर स्पेशल एडिशनल एक्साइज ड्यूटी (SAED) को 10.50 रुपये से बढ़ाकर 11 रुपये प्रति लीटर कर दिया है। डीजल के निर्यात पर लगने वाली SAED और रोड एंड इंफ्रास्ट्रक्चर सेस की संयुक्त दर भी 8.50 रुपये से बढ़ाकर 11.50 रुपये प्रति लीटर कर दी गई है। यानी डीजल के निर्यात पर प्रति लीटर 3 रुपये टैक्स बढ़ा है।

    पश्चिम एशिया में तनाव के बीच फैसला

    सरकार ने ये बदलाव ऐसे समय किए हैं, जब वैश्विक ऊर्जा बाजार में उतार-चढ़ाव बना हुआ है और पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक तनाव के कारण कच्चे तेल तथा पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतों पर असर पड़ रहा है। वित्त मंत्रालय के मुताबिक, डीजल और ATF पर बढ़ाई गई दरें अगले दो सप्ताह के लिए लागू रहेंगी। इसके बाद बाजार की परिस्थितियों के अनुसार समीक्षा की जाएगी।

    घरेलू बाजार में नहीं होगा बदलाव

    पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक, वित्त मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि विंडफॉल टैक्स में किए गए ये बदलाव केवल पेट्रोलियम उत्पादों के निर्यात पर लागू होंगे। घरेलू इस्तेमाल के लिए पेट्रोल और डीजल पर मौजूदा ड्यूटी दरों में कोई बदलाव नहीं किया गया है। ऐसे में इस फैसले से देश में पेट्रोल-डीजल की खुदरा कीमतों पर सीधे असर की संभावना नहीं है।

    क्या होता है विंडफॉल टैक्स?

    विंडफॉल टैक्स वह अतिरिक्त कर है, जो कंपनियों को असाधारण बाजार परिस्थितियों में सामान्य से अधिक मुनाफा होने पर लगाया जाता है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में ईंधन की कीमतें बढ़ने पर रिफाइनरी कंपनियों को विदेशों में पेट्रोल और डीजल बेचकर ज्यादा कमाई हो सकती है। ऐसे में सरकार निर्यात पर टैक्स लगाकर इस अतिरिक्त मुनाफे का एक हिस्सा हासिल करती है।

    निर्यात पर शुल्क बढ़ाने का एक उद्देश्य विदेशों में ईंधन बेचना कम आकर्षक बनाना और घरेलू बाजार में इसकी उपलब्धता बनाए रखने के लिए रिफाइनरी कंपनियों को प्रोत्साहित करना भी है।

    2022 में पहली बार लगाया गया था टैक्स

    भारत ने जुलाई 2022 में पहली बार पेट्रोलियम उत्पादों के निर्यात पर विंडफॉल टैक्स लगाया था। करीब दो साल बाद दिसंबर 2024 में इसे हटा दिया गया। इसके बाद मार्च 2026 में अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार में उथल-पुथल और कच्चे तेल की कीमतों में तेजी के बीच सरकार ने इसे दोबारा लागू किया। तब से बाजार की स्थितियों के अनुसार इसकी दरों में बदलाव किया जा रहा है।

    सरकार आमतौर पर हर दो सप्ताह में इन टैक्स दरों की समीक्षा करती है। इस दौरान अंतरराष्ट्रीय बाजार में ईंधन की कीमतों और घरेलू रिफाइनरी कंपनियों को निर्यात से होने वाले मुनाफे को ध्यान में रखा जाता है।

  • सरकार ने पेट्रोल निर्यात शुल्क शून्य किया, डीजल और विमान ईंधन पर बढ़ाई एक्सपोर्ट ड्यूटी..

    सरकार ने पेट्रोल निर्यात शुल्क शून्य किया, डीजल और विमान ईंधन पर बढ़ाई एक्सपोर्ट ड्यूटी..

    नई दिल्ली । केंद्र सरकार ने पेट्रोल, डीजल और एविएशन टरबाइन फ्यूल (एटीएफ) के निर्यात पर लागू शुल्कों में बदलाव किया है। वित्त मंत्रालय की ओर से शनिवार, 31 अक्टूबर को जारी अधिसूचना के अनुसार, पेट्रोल के निर्यात पर विशेष अतिरिक्त उत्पाद शुल्क घटाकर शून्य कर दिया गया है। वहीं, डीजल और एटीएफ के निर्यात पर शुल्क में बढ़ोतरी की गई है। सरकार के इस फैसले के बाद पेट्रोल पर पहले लागू 2.50 रुपये प्रति लीटर का शुल्क समाप्त हो गया है।

    संशोधित दरों के तहत डीजल के निर्यात पर शुल्क 8.50 रुपये से बढ़ाकर 11.50 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है। इसमें तीन रुपये प्रति लीटर की वृद्धि हुई है। इसी तरह, एटीएफ के निर्यात पर शुल्क 10.50 रुपये से बढ़ाकर 11 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है। इस तरह विमान ईंधन पर निर्यात शुल्क में 50 पैसे प्रति लीटर की बढ़ोतरी की गई है। पेट्रोल पर शुल्क शून्य होने के साथ तीनों पेट्रोलियम उत्पादों के लिए अलग-अलग दरें लागू हो गई हैं।

    सरकार ने अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार में बने हालात के बीच इन शुल्कों की समीक्षा की है। मध्य पूर्व में जारी संघर्ष के कारण वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित होने और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आने के बाद मार्च के अंत में पेट्रोलियम उत्पादों के निर्यात पर शुल्क लागू किए गए थे। इन दरों की समीक्षा केंद्र सरकार हर 15 दिन में करती है, ताकि अंतरराष्ट्रीय बाजार की परिस्थितियों के अनुसार शुल्कों में बदलाव किया जा सके।

    निर्यात शुल्क लागू करने का प्रमुख उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि तेल रिफाइनरियां घरेलू बाजार में आपूर्ति करने के बजाय अधिक मुनाफे के लिए विदेशी बाजारों को प्राथमिकता न दें। जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतें घरेलू बाजार की तुलना में अधिक आकर्षक होती हैं, तब निर्यात से बेहतर कमाई की संभावना बढ़ जाती है। ऐसे हालात में निर्यात शुल्क के माध्यम से घरेलू खरीदारों के लिए पर्याप्त आपूर्ति बनाए रखने की कोशिश की जाती है।

    इस बीच, अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव तथा हॉर्मुज जलडमरूमध्य के बंद होने से अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों पर दबाव बना हुआ है। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, ब्रेंट क्रूड का भाव बढ़कर 113.10 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया है। बीते एक सप्ताह में इसकी कीमत में 1.55 प्रतिशत और एक महीने के दौरान 15.71 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। पिछले तीन महीनों में ब्रेंट क्रूड करीब 26 प्रतिशत महंगा हुआ है।

    भारत के लिए हॉर्मुज जलडमरूमध्य का महत्व भी काफी अधिक है। मध्य पूर्व में संघर्ष शुरू होने से पहले देश के कच्चे तेल के आयात का लगभग 45 प्रतिशत हिस्सा इसी समुद्री मार्ग से होकर आता था। यह मार्ग फारस की खाड़ी को वैश्विक बाजारों से जोड़ता है और तेल व्यापार के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। यहां जहाजों की आवाजाही प्रभावित होने के कारण भारत को कच्चे तेल की आपूर्ति के लिए दूसरे विकल्प तलाशने पड़े हैं।

    अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों और आपूर्ति से जुड़े इन घटनाक्रमों के बीच सरकार पेट्रोलियम उत्पादों पर निर्यात शुल्क की समीक्षा कर रही है। नई दरों के तहत पेट्रोल पर निर्यात शुल्क समाप्त हो गया है, जबकि डीजल और एटीएफ पर शुल्क बढ़ाया गया है। इन बदलावों का उद्देश्य घरेलू आपूर्ति और निर्यात से जुड़े आर्थिक हितों के बीच संतुलन बनाए रखना है।

  • कच्चे तेल की कीमत 116 डॉलर के पार, फिर भी 24 अक्टूबर को पेट्रोल-डीजल के दाम स्थिर..

    कच्चे तेल की कीमत 116 डॉलर के पार, फिर भी 24 अक्टूबर को पेट्रोल-डीजल के दाम स्थिर..

    नई दिल्ली । अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी का सिलसिला जारी है। शनिवार, 24 अक्टूबर 2026 की सुबह ब्रेंट क्रूड ऑयल का भाव बढ़कर 116.27 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। इससे एक दिन पहले इसकी कीमत 114.52 डॉलर प्रति बैरल थी। इस तरह एक दिन के भीतर कच्चे तेल के भाव में 1.75 डॉलर प्रति बैरल की बढ़ोतरी दर्ज की गई। हालांकि, अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेजी के बावजूद भारत में शनिवार को पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया गया।

    देश में पेट्रोल और डीजल के दैनिक खुदरा भाव तेल विपणन कंपनियों की ओर से जारी किए जाते हैं। 24 अक्टूबर को जारी दरों के अनुसार, प्रमुख शहरों में ईंधन की कीमतें पहले के स्तर पर बनी रहीं। हालांकि, अलग-अलग राज्यों में करों, स्थानीय निकाय कर और अन्य शुल्कों में अंतर होने के कारण पेट्रोल-डीजल के दाम शहर और राज्य के हिसाब से अलग-अलग हैं।

    हाल के दिनों में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी भी हुई थी। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, पेट्रोल के दाम में 2.61 रुपये प्रति लीटर और डीजल की कीमत में 2.71 रुपये प्रति लीटर का इजाफा किया गया था। इसके बाद अब 24 अक्टूबर को दोनों ईंधनों के भाव में कोई नया बदलाव नहीं हुआ है।

    राजधानी दिल्ली में शनिवार को पेट्रोल 102.12 रुपये प्रति लीटर और डीजल 95.20 रुपये प्रति लीटर की दर से उपलब्ध रहा। आर्थिक राजधानी मुंबई में पेट्रोल की कीमत 111.21 रुपये प्रति लीटर और डीजल का भाव 97.83 रुपये प्रति लीटर दर्ज किया गया।

    कोलकाता में एक लीटर पेट्रोल के लिए 113.47 रुपये चुकाने पड़ रहे हैं, जबकि डीजल 99.82 रुपये प्रति लीटर पर बिक रहा है। चेन्नई में पेट्रोल की कीमत 107.87 रुपये प्रति लीटर और डीजल का भाव 99.66 रुपये प्रति लीटर रहा। इन महानगरों में ईंधन की कीमतों में अंतर स्थानीय कर व्यवस्था और अन्य लागतों के कारण बना हुआ है।

    अन्य प्रमुख शहरों की बात करें तो लखनऊ में पेट्रोल 101.86 रुपये और डीजल 95.36 रुपये प्रति लीटर रहा। चंडीगढ़ में पेट्रोल 101.54 रुपये और डीजल 89.47 रुपये प्रति लीटर की दर से उपलब्ध था। पटना में पेट्रोल की कीमत 113.37 रुपये और डीजल का भाव 99.36 रुपये प्रति लीटर दर्ज किया गया।

    तिरुवनंतपुरम में पेट्रोल 115.49 रुपये और डीजल 104.40 रुपये प्रति लीटर रहा। बेंगलुरु में पेट्रोल की कीमत 111.68 रुपये और डीजल 99.56 रुपये प्रति लीटर दर्ज की गई। भुवनेश्वर में पेट्रोल 108.97 रुपये और डीजल 100.68 रुपये प्रति लीटर पर उपलब्ध रहा।

    वहीं, हैदराबाद में पेट्रोल 115.69 रुपये और डीजल 103.82 रुपये प्रति लीटर रहा। जयपुर में पेट्रोल की कीमत 113.19 रुपये और डीजल का भाव 98.25 रुपये प्रति लीटर दर्ज किया गया। इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि अलग-अलग शहरों में वाहन चालकों को ईंधन के लिए अलग-अलग राशि चुकानी पड़ रही है।

    कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी के बीच घरेलू बाजार में पेट्रोल-डीजल के भाव स्थिर रहने से वाहन चालकों को शनिवार को तत्काल कोई अतिरिक्त कीमत नहीं चुकानी पड़ी। हालांकि, अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के भाव में आगे होने वाले बदलावों पर नजर बनी हुई है। फिलहाल 24 अक्टूबर की जारी दरों के अनुसार, देश के प्रमुख शहरों में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कोई नया संशोधन नहीं किया गया है।

  • पेट्रोल पंप का नोजल टंकी फुल होते ही अपने आप कैसे बंद हो जाता है, जानिए पूरी तकनीक

    पेट्रोल पंप का नोजल टंकी फुल होते ही अपने आप कैसे बंद हो जाता है, जानिए पूरी तकनीक

    नई दिल्ली । कार या बाइक में पेट्रोल-डीजल भरवाते समय आपने अक्सर देखा होगा कि फ्यूल टंकी भरते ही पेट्रोल पंप का नोजल अपने आप बंद हो जाता है। इस दौरान कर्मचारी को न तो कोई बटन दबाना पड़ता है और न ही मशीन को अलग से बंद करने की जरूरत होती है। नोजल का ट्रिगर अपने आप रिलीज हो जाता है और ईंधन का प्रवाह रुक जाता है। यह प्रक्रिया सामान्य दिखाई देती है, लेकिन इसके पीछे एक खास तकनीक काम करती है। इसे ऑटोमैटिक शट-ऑफ या ऑटो कट-ऑफ सिस्टम कहा जाता है।

    आधुनिक पेट्रोल पंपों पर इस्तेमाल होने वाले अधिकांश नोजल में यह व्यवस्था मौजूद होती है। इसका मुख्य उद्देश्य फ्यूल टंकी भर जाने पर ईंधन की सप्लाई को अपने आप रोकना है। इस सिस्टम की खास बात यह है कि यह सामान्य तौर पर किसी इलेक्ट्रॉनिक सेंसर या बाहरी बिजली की मदद के बिना काम करता है। इसके बजाय इसमें हवा के दबाव और वैक्यूम के सिद्धांत का इस्तेमाल किया जाता है।

    नोजल की नोक के पास होता है छोटा छेद

    ऑटो कट-ऑफ सिस्टम को समझने के लिए नोजल की बनावट पर ध्यान देना जरूरी है। इसकी नोक के पास एक छोटा-सा छेद होता है, जो नोजल के भीतर मौजूद एक पतली ट्यूब से जुड़ा रहता है। ईंधन भरने के दौरान यह छेद हवा के प्रवाह में मदद करता है। नोजल के अंदर वेंचुरी प्रभाव के कारण दबाव में अंतर पैदा होता है, जो ऑटोमैटिक शट-ऑफ व्यवस्था को सक्रिय रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

    जब तक फ्यूल टंकी में पर्याप्त खाली जगह रहती है, तब तक नोजल की नोक के पास मौजूद छेद खुला रहता है। इस स्थिति में हवा का प्रवाह जारी रहता है और ईंधन लगातार टंकी में पहुंचता रहता है। जैसे-जैसे टंकी में पेट्रोल या डीजल का स्तर बढ़ता है, ईंधन नोजल की नोक के करीब आने लगता है। टंकी भरने पर ईंधन इस छोटे छेद को ढक देता है, जिससे हवा का रास्ता बंद हो जाता है।

    छेद बंद होते ही नोजल के अंदर दबाव की स्थिति बदल जाती है और वैक्यूम का प्रभाव बढ़ता है। यह बदलाव नोजल के भीतर मौजूद डायफ्राम को सक्रिय करता है। इसके बाद ट्रिगर को पकड़े रखने वाला मैकेनिज्म रिलीज हो जाता है। नतीजतन, नोजल का वाल्व बंद हो जाता है और पेट्रोल या डीजल की सप्लाई तुरंत रुक जाती है। इस तरह बिना किसी कर्मचारी के हस्तक्षेप के नोजल को पता चल जाता है कि टंकी भर चुकी है।

    ऑटो कट-ऑफ के बाद दोबारा न दबाएं ट्रिगर

    कई वाहन चालक नोजल के पहली बार अपने आप बंद होने के बाद भी उसमें से अतिरिक्त ईंधन भरने की कोशिश करते हैं। इसके लिए वे ट्रिगर को दोबारा दबाते हैं, ताकि टंकी में कुछ और पेट्रोल या डीजल भरा जा सके। हालांकि, ऐसा करने से बचना चाहिए। ऑटो कट-ऑफ सिस्टम का सक्रिय होना इस बात का संकेत है कि ईंधन टंकी भरने के स्तर तक पहुंच चुकी है।

    जरूरत से ज्यादा ईंधन भरने की कोशिश करने पर पेट्रोल या डीजल बाहर छलक सकता है। इससे ईंधन की बर्बादी के साथ सुरक्षा संबंधी जोखिम भी पैदा हो सकते हैं। इसलिए नोजल पहली बार अपने आप बंद हो जाए तो ईंधन भरना रोक देना बेहतर है।

    पेट्रोल पंप के नोजल में मौजूद यह व्यवस्था ईंधन भरने की प्रक्रिया को अधिक सुविधाजनक और सुरक्षित बनाने में मदद करती है। हवा के प्रवाह, दबाव में बदलाव और वैक्यूम के सिद्धांत से काम करने वाला यह मैकेनिज्म टंकी भरने पर सप्लाई रोक देता है। यही वजह है कि पेट्रोल पंप कर्मचारी को हर वाहन की टंकी भरने पर मशीन को हाथ से बंद करने की जरूरत नहीं पड़ती।

  • इथेनॉल पर सरकार का अहम फैसला… पेट्रोल में मिश्रण पर फिलहाल रोक !

    इथेनॉल पर सरकार का अहम फैसला… पेट्रोल में मिश्रण पर फिलहाल रोक !


    नई दिल्ली।
    सरकार (Government) ने घरेलू स्तर पर चीनी (Sugar) की उपलब्धता बनाए रखने के लिए गन्ने के उत्पादों से बने इथेनॉल के पेट्रोल में मिश्रण (Petrol Sugarcane-Ethanol Blending) पर फिलहाल रोक लगाने का फैसला किया है। इसके तहत, सार्वजनिक क्षेत्र की पेट्रोलियम विपणन कंपनियों ने पेट्रोल में इथेनॉल (Ethanol Blending) मिलाने के लिए 2026-27 आपूर्ति वर्ष की ताजा खरीद निविदा में गन्ने के रस, चीनी की चाशनी और बी-हेवी शीरे से बने इथेनॉल को शामिल नहीं किया है।


    कितना इथेनॉल खरीदने की तैयारी, क्या पेट्रोल में भी मिश्रण?

    भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड (बीपीसीएल) ने 16 अक्तूबर को पेट्रोलियम विपणन कंपनियों की ओर से जारी निविदा में नवंबर से शुरू होने वाले आपूर्ति वर्ष के लिए करीब 1,100 करोड़ लीटर इथेनॉल की खरीद के लिए बोलियां मांगी हैं। इसका उद्देश्य पेट्रोल में 20 प्रतिशत इथेनॉल मिलाने की जरूरत को पूरा करना है।


    मक्के से बने इथेनॉल पर क्या फैसला हुआ?

    निविदा के अनुसार, मक्का, टूटे चावल, भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) द्वारा खरीदे गए अधिशेष चावल और सी-हेवी शीरे से बने इथेनॉल की आपूर्ति के लिए बोलियां लगाई जा सकती हैं। निविदा में मक्के से बने इथेनॉल पर प्रोत्साहन राशि भी घटाकर 68.86 रुपये प्रति लीटर कर दी गई है, जो पहले 71.86 रुपये प्रति लीटर थी।


    कच्चे माल की खरीद की रणनीति में क्या बदलाव?

    गन्ने उत्पादों से बने इथेनॉल की खरीद पर पाबंदी से पेट्रोल मिश्रण कार्यक्रम के लिए कच्चे माल की खरीद की रणनीति में बदलाव होगा। इस कार्यक्रम में कच्चे तेल के आयात को कम करने व वाहनों से होने वाले उत्सर्जन में कटौती के लिए अनाज व गन्ने दोनों से बने इथेनॉल का इस्तेमाल किया जाता रहा है।


    क्या गन्ने का उत्पादन हो सकता है प्रभावित?

    सरकार की तरफ से यह कदम घरेलू स्तर पर चीनी की उपलब्धता को लेकर बढ़ती चिंताओं के बीच उठाया गया है। महाराष्ट्र और कर्नाटक सहित प्रमुख चीनी उत्पादक राज्यों में कम बारिश के कारण उत्पादन घटने और कीमतें बढ़ने का जोखिम पैदा हुआ है।

  • सरकार ने देर रात पेट्रोल पर दो रुपये बढ़ाया विंडफॉल टैक्स… डीजल पर 16 रुपये घटाया, नई दरें आज से लागू

    सरकार ने देर रात पेट्रोल पर दो रुपये बढ़ाया विंडफॉल टैक्स… डीजल पर 16 रुपये घटाया, नई दरें आज से लागू


    नई दिल्ली।
    पेट्रोल-डीजल (Petrol and Diesel) पर विंडफॉल टैक्स (Windfall Tax) को लेकर सरकार ने गुरुवार को देर रात एक बड़ा फैसला किया। केंद्र सरकार ने पेट्रोल के निर्यात पर टैक्स 2 रुपये बढ़ाकर 2.50 रुपये प्रति लीटर कर दिया है, जबकि डीजल पर लगने वाला शुल्क 16 रुपये से घटाकर 8.50 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है। रॉयटर्स के मुताबक नई दरें 16 अक्टूबर 2026 यानी आज से लागू हो गई हैं।


    पेट्रोल-डीजल पर नई टैक्स दरें

    सरकार के फैसले के मुताबिक, पेट्रोल के निर्यात पर अब 2.50 रुपये प्रति लीटर की दर से विंडफॉल टैक्स लगेगा। वहीं, डीजल के निर्यात पर टैक्स में 7.50 रुपये प्रति लीटर की कटौती की गई है। एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) के निर्यात पर लगने वाले शुल्क में कोई बदलाव नहीं किया गया है।

    क्या इससे देश में पेट्रोल-डीजल महंगा होगा?
    इस फैसले का सीधा असर घरेलू पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर नहीं पड़ेगा। सरकार ने घरेलू खपत के लिए जारी किए जाने वाले पेट्रोल और डीजल पर लागू मौजूदा शुल्क में कोई बदलाव नहीं किया है। इसलिए केवल निर्यात टैक्स में बदलाव के आधार पर यह कहना सही नहीं होगा कि आम उपभोक्ताओं के लिए पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ेंगे या घटेंगे।


    पेट्रोल-डीजल के दाम कब बदलते हैं?

    जिन देशों में पेट्रोल-डीजल की कीमतें पूरी तरह बाजार तय करता है, वहां कच्चे तेल की कीमत बदलने का असर बहुत जल्दी दिखता है। जबकि, भारत में फ्यूल की कीमत जारी तो ऑयल मार्केटिंग कंपनियां करती हैं, लेकिन नियंत्रण सरकार का होता है। क्योंकि, भारत में 90 प्रतिशत से अधिक पेट्रोल पंपों पर सरकारी कंपनियों का नियंत्रण है। प्राइवेट कंपनियां जैसे नायरा और रिलायंस-बीपी दाम खुद बढ़ाती या घटती हैं। इसके अलावा ईंधन के दाम टैक्स पर भी निर्भर करता है। ईंधन पर एक्साइज ड्यूटी ज्यादा होगी तो कच्चे तेल की कीमत बदलने का असर अपेक्षाकृत कम होता है।


    पेट्रोल-डीजल के रेट जारी

    रात को विंडफॉल टैक्स में हुए बदलाव के बाद आज शुक्रवार सुबह HPCL, IOCL और BPCL ने पेट्रोल-डीजल के रेट जारी कर दी हैं। आज दिल्ली में 1 लीटर पेट्रोल की कीमत 102.12 रुपये और डीजल की 95.20 पर स्थिर है। यानी पेट्रोल-डीजल के रेट में कोई बदलाव नहीं हुआ है।


    विंडफॉल टैक्स की हर 15 दिन में होती है समीक्षा

    सरकार अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल और पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतों में होने वाले उतार-चढ़ाव को देखते हुए विंडफॉल टैक्स के रेट की समीक्षा हर 15 दिन में करती है। इस तरह के टैक्स का उद्देश्य ईंधन के निर्यात और घरेलू उपलब्धता के बीच संतुलन बनाए रखना है।

    बता दें भारत ने पहली बार जुलाई 2022 में फ्यूल के एक्सपोर्ट पर विंडफॉल टैक्स, जिसे अप्रत्याशित कर भी कहा जाता है, लगाया और दो साल बाद उन्हें वापस ले लिया।इसके बाद ईरान पर अमेरिका-इजरायल युद्ध के दौरान कच्चे तेल की कीमतों में उछाल के बाद सरकार ने मार्च 2026 में विंडफॉल टैक्स को फिर से लागू किया।

  • 11 अक्टूबर को पेट्रोल-डीजल के दाम में राहत या बदलाव, दिल्ली, मुंबई, नोएडा, पटना और लखनऊ समेत 10 शहरों के ताजा रेट

    11 अक्टूबर को पेट्रोल-डीजल के दाम में राहत या बदलाव, दिल्ली, मुंबई, नोएडा, पटना और लखनऊ समेत 10 शहरों के ताजा रेट

    नई दिल्ली ।रविवार, 11 अक्टूबर 2026 को पेट्रोल और डीजल की कीमतों को लेकर वाहन चालकों की नजर अपने शहर के ताजा भाव पर है। रोजाना वाहन से सफर करने वाले लोगों से लेकर लंबी दूरी की यात्रा की तैयारी कर रहे लोगों के लिए ईंधन की कीमतें खर्च का अहम हिस्सा होती हैं। उपलब्ध दरों के अनुसार, अलग-अलग शहरों में पेट्रोल और डीजल के भाव में अंतर बना हुआ है। दिल्ली में पेट्रोल 102.12 रुपये प्रति लीटर और डीजल 95.20 रुपये प्रति लीटर दर्ज किया गया है।

    नोएडा में पेट्रोल की कीमत 101.96 रुपये प्रति लीटर और डीजल की कीमत 95.44 रुपये प्रति लीटर है। मुंबई में पेट्रोल 111.31 रुपये और डीजल 97.97 रुपये प्रति लीटर की दर से मिल रहा है। वहीं, कोलकाता में पेट्रोल का भाव 113.51 रुपये प्रति लीटर और डीजल का दाम 99.82 रुपये प्रति लीटर दर्ज किया गया है। इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि प्रमुख शहरों में दोनों ईंधनों की कीमतें एक समान नहीं हैं।

    चेन्नई में पेट्रोल की कीमत 107.77 रुपये प्रति लीटर और डीजल की दर 99.55 रुपये प्रति लीटर है। गुरुग्राम में पेट्रोल 102.97 रुपये और डीजल 95.64 रुपये प्रति लीटर दर्ज किया गया है। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में पेट्रोल का भाव 101.86 रुपये प्रति लीटर और डीजल की कीमत 95.36 रुपये प्रति लीटर है। इन शहरों में ईंधन खरीदने वाले वाहन चालकों को अपने स्थानीय पंप पर लागू दर के अनुसार भुगतान करना होता है।

    बिहार की राजधानी पटना में पेट्रोल 113.37 रुपये प्रति लीटर और डीजल 99.36 रुपये प्रति लीटर की दर से मिल रहा है। जयपुर में पेट्रोल का भाव 112.66 रुपये और डीजल का दाम 98.25 रुपये प्रति लीटर है। बेंगलुरु में पेट्रोल 111.68 रुपये प्रति लीटर और डीजल 99.56 रुपये प्रति लीटर दर्ज किया गया है। इस तरह दिल्ली, नोएडा, मुंबई, कोलकाता, चेन्नई, गुरुग्राम, लखनऊ, पटना, जयपुर और बेंगलुरु में ईंधन के अलग-अलग भाव सामने आए हैं।

    पेट्रोल और डीजल की कीमतों में अंतर के पीछे कई कारण होते हैं। केंद्र और राज्य सरकारों की ओर से लगाए जाने वाले कर अंतिम खुदरा कीमत को प्रभावित करते हैं। इसके अलावा डीलर का कमीशन और ईंधन की आपूर्ति से जुड़ी लागत भी कीमत तय करने में शामिल होती है। यही वजह है कि अलग-अलग राज्यों और शहरों में एक ही ईंधन के लिए ग्राहकों को अलग-अलग रकम चुकानी पड़ सकती है।

    अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों का भी पेट्रोल और डीजल की लागत पर असर पड़ता है। हालांकि, कच्चे तेल के भाव में बदलाव का घरेलू खुदरा कीमतों पर कितना और कब असर होगा, यह कई कारकों पर निर्भर करता है। इसलिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में होने वाले बदलाव और पेट्रोल पंप पर मिलने वाली कीमतों के बीच सीधा और तत्काल संबंध होना जरूरी नहीं है।

    ईंधन की कीमतें बढ़ने पर आम लोगों के परिवहन खर्च पर असर पड़ सकता है। पेट्रोल महंगा होने से बाइक और कार चलाने वालों का बजट प्रभावित होता है, जबकि डीजल की कीमतें ट्रक, बस और माल ढुलाई की लागत को प्रभावित कर सकती हैं। ईंधन की खपत कम रखने के लिए वाहन की नियमित सर्विस कराना, टायरों में उचित हवा बनाए रखना और लंबे समय तक इंजन चालू रखकर वाहन खड़ा करने से बचना उपयोगी हो सकता है।

  • कच्चा तेल 94 डॉलर के पार, फिर भी आज पेट्रोल-डीजल के दाम स्थिर; जानें दिल्ली समेत प्रमुख शहरों के रेट

    कच्चा तेल 94 डॉलर के पार, फिर भी आज पेट्रोल-डीजल के दाम स्थिर; जानें दिल्ली समेत प्रमुख शहरों के रेट

    नई दिल्ली । अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी और पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में रविवार को कोई बदलाव नहीं किया गया। तेल विपणन कंपनियों ने 23 अगस्त के लिए घरेलू बाजार में ईंधन के दाम पहले के स्तर पर ही बनाए रखे हैं। हालांकि, वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी भारतीय अर्थव्यवस्था और आने वाले समय में ईंधन लागत को लेकर चिंता बढ़ा रही है।

    अमेरिका और ईरान के बीच संघर्ष के कारण वैश्विक ऊर्जा बाजार में अनिश्चितता बनी हुई है। पश्चिम एशिया दुनिया के प्रमुख तेल उत्पादक क्षेत्रों में शामिल है और यहां तनाव बढ़ने पर कच्चे तेल की आपूर्ति तथा समुद्री परिवहन पर असर पड़ने की आशंका रहती है। इसी वजह से अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड की कीमतें ऊंचे स्तर पर बनी हुई हैं।

    23 अगस्त को अंतरराष्ट्रीय कमोडिटी बाजार में रविवार होने के कारण कारोबार बंद है। इसलिए कच्चे तेल की कीमतें शुक्रवार के बंद भाव के आसपास ही बनी हुई हैं। ब्रेंट क्रूड 94.39 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर रहा, जबकि शुक्रवार को इसमें 0.65 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई थी। दूसरी ओर, अमेरिकी WTI क्रूड 87.06 डॉलर प्रति बैरल पर रहा और इसमें शुक्रवार को 0.26 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई थी।

    घरेलू बाजार की बात करें तो दिल्ली में पेट्रोल 102.12 रुपये प्रति लीटर और डीजल 95.20 रुपये प्रति लीटर पर बना हुआ है। मुंबई में पेट्रोल 111.12 रुपये और डीजल 97.78 रुपये प्रति लीटर है। कोलकाता में पेट्रोल की कीमत 113.43 रुपये और डीजल 99.78 रुपये प्रति लीटर है।

    चेन्नई में पेट्रोल 107.75 रुपये और डीजल 99.57 रुपये प्रति लीटर बिक रहा है। बेंगलुरु में पेट्रोल का भाव 110.93 रुपये और डीजल का 98.79 रुपये प्रति लीटर है। हैदराबाद में पेट्रोल 115.69 रुपये और डीजल 103.82 रुपये प्रति लीटर पर है।

    अन्य प्रमुख शहरों में गुरुग्राम में पेट्रोल 102.97 रुपये प्रति लीटर है, जबकि गाजियाबाद में इसका भाव 101.80 रुपये है। पटना में पेट्रोल और डीजल दोनों की कीमत 113.35 रुपये प्रति लीटर दर्ज की गई है। गाजियाबाद में डीजल 95.29 रुपये और चंडीगढ़ में डीजल 99.36 रुपये प्रति लीटर है।

    भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात के जरिए पूरा करता है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड की कीमत बढ़ने का असर देश की ऊर्जा लागत पर पड़ सकता है। यदि ऊंची कीमतें लंबे समय तक बनी रहती हैं तो तेल विपणन कंपनियों की लागत और उनकी अंडर-रिकवरी पर दबाव बढ़ सकता है।

    पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतें केवल अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल के दाम से तय नहीं होतीं। इनमें केंद्र और राज्य स्तर के कर, वैट, डीलर कमीशन तथा परिवहन लागत जैसे कई घटक शामिल होते हैं। इसी कारण अलग-अलग राज्यों और शहरों में पेट्रोल-डीजल के दाम अलग रहते हैं।

    देश में तेल कंपनियां रोजाना सुबह छह बजे पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बदलाव लागू करती हैं। कीमतों की समीक्षा अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल के भाव और रुपये-डॉलर विनिमय दर सहित विभिन्न बाजार परिस्थितियों को ध्यान में रखकर की जाती है। फिलहाल 23 अगस्त को घरेलू उपभोक्ताओं के लिए राहत यह है कि वैश्विक स्तर पर क्रूड महंगा होने के बावजूद पेट्रोल और डीजल के खुदरा दामों में कोई वृद्धि नहीं हुई है। हालांकि, पश्चिम एशिया का तनाव और कच्चे तेल की ऊंची कीमतें आगे भी बाजार के लिए महत्वपूर्ण कारक बनी रहेंगी।

  • पेट्रोल पर विंडफॉल टैक्स हुआ शून्य ….., डीजल और एटीएफ पर भी राहत…. आमजन को No Relief

    पेट्रोल पर विंडफॉल टैक्स हुआ शून्य ….., डीजल और एटीएफ पर भी राहत…. आमजन को No Relief


    नई दिल्ली।
    भारत सरकार (Government of India) ने शनिवार से पेट्रोल, डीजल (Petrol, Diesel) और हवाई जहाजों में इस्तेमाल होने वाले तेल एविएशन टर्बाइन फ्यूल (Aviation Turbine Fuel) यानी ATF के निर्यात पर लगने वाले विंडफॉल टैक्स (Windfall tax) को कम कर दिया है। यह जानकारी सरकार के एक आधिकारिक आदेश से मिली है। इस आदेश के अनुसार, डीजल निर्यात पर शुल्क को घटाकर 25.5 रुपये प्रति लीटर से 24 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है। वहीं, पेट्रोल निर्यात पर पहले 3.5 रुपये प्रति लीटर शुल्क लगता था, अब इसे पूरी तरह से शून्य कर दिया गया है। एटीएफ के निर्यात पर भी शुल्क में कमी की गई है, जो 22 रुपये से घटकर 19.5 रुपये प्रति लीटर हो गया है।


    आपकी जेब पर क्या पड़ेगा असर

    टैक्स में इस कमी से आम जनता पर कोई असर नहीं पड़ेगा। इस कटौती से निर्यातक कंपनियों को थोड़ी राहत मिलने की उम्मीद है, हालांकि सरकार अंतरराष्ट्रीय बाजार की स्थितियों पर नजर बनाए हुए है और आने वाले दिनों में भी संशोधन जारी रह सकते हैं।

    गौरतलब है कि भारत ने जुलाई 2022 में पहली बार विंडफॉल टैक्स लागू किया था, ताकि तेल की बढ़ती कीमतों से होने वाले असाधारण मुनाफे पर नियंत्रण पाया जा सके। दो साल बाद इसे समाप्त कर दिया गया था, लेकिन मार्च 2026 में अमेरिका-इजराइल युद्ध के कारण ईरान पर हमले के बाद तेल की कीमतें फिर से बढ़ गईं, जिसके चलते इस कर को दोबारा लागू करना पड़ा।

    अभी भारत हर दो सप्ताह में कच्चे तेल और पेट्रोलियम उत्पादों की अंतरराष्ट्रीय कीमतों के आधार पर इन निर्यात शुल्कों में संशोधन करता है। लेटेस्ट रेट के अनुसार, 1 अमेरिकी डॉलर लगभग 95.44 भारतीय रुपये के बराबर है।


    पिछली बार बढ़ा था विंडफॉल टैक्स

    पिछली बार 3 अगस्त को पेट्रोल निर्यात पर शुल्क 2.5 रुपये से बढ़ाकर 3.5 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया था। डीजल निर्यात पर विंडफॉल टैक्स 15.5 रुपये से बढ़कर 25.5 रुपये प्रति लीटर हो गया था। इसमें लगभग 10 रुपये की भारी बढ़ोतरी की गई। वहीं, एटीएफ के निर्यात पर शुल्क 14.5 रुपये से बढ़ाकर 22 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया था।


    जुलाई में डीजल-एटीएफ पर टैक्स बढ़ा, पेट्रोल का घटा

    गौरतलब है कि इससे पहले 16 जुलाई को हुई समीक्षा में सरकार ने डीजल और एटीएफ के शुल्क बढ़ाए थे, जबकि पेट्रोल पर शुल्क घटाया था। उस समय डीजल 8.5 से बढ़कर 15.5 रुपये, एटीएफ 7.5 से बढ़कर 14.5 रुपये, और पेट्रोल 4 रुपये से घटकर 2.5 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया था। इससे पहले की समीक्षा में पेट्रोल पर शुल्क 1.5 से बढ़ाकर 4 रुपये, डीजल 14 से घटाकर 8.5 रुपये और एटीएफ 12.5 से घटाकर 7.5 रुपये किया गया था।


    अप्रैल का क्या रहा हाल

    अगर हालिया बदलावों पर नजर डालें तो 30 अप्रैल को डीजल पर 23 रुपये और एटीएफ पर 33 रुपये का शुल्क लगाया गया था, जबकि पेट्रोल पर शून्य था। वहीं, 30 जून को पेट्रोल पर 4 रुपये, डीजल पर 8.5 रुपये और एटीएफ पर 7.5 रुपये का शुल्क निर्धारित किया गया था।

  • पाकिस्तान के 79वें स्वतंत्रता दिवस पर महंगा हुआ पेट्रोल-डीजल, जानें नई कीमतों से आम लोगों पर कितना बढ़ा बोझ

    पाकिस्तान के 79वें स्वतंत्रता दिवस पर महंगा हुआ पेट्रोल-डीजल, जानें नई कीमतों से आम लोगों पर कितना बढ़ा बोझ


    नई दिल्ली । 
    पाकिस्तान अपने 79वें स्वतंत्रता दिवस के मौके पर महंगाई की एक और चुनौती का सामना कर रहा है। देश में 14 अगस्त से पेट्रोल और हाई-स्पीड डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी लागू कर दी गई है। ईंधन के दाम बढ़ने का सीधा असर आम उपभोक्ताओं के साथ-साथ परिवहन और कारोबार की लागत पर पड़ने की संभावना है।

    नई व्यवस्था के तहत पेट्रोल की कीमत में 0.45 पाकिस्तानी रुपये प्रति लीटर की वृद्धि की गई है। इसके बाद पेट्रोल का दाम 324.98 रुपये से बढ़कर 325.43 रुपये प्रति लीटर हो गया है। इस बढ़ोतरी के बाद देश में पेट्रोल की कीमत 325 रुपये प्रति लीटर के स्तर को पार कर गई है।

    हाई-स्पीड डीजल के दाम में इससे अधिक वृद्धि की गई है। इसकी कीमत 1.16 रुपये प्रति लीटर बढ़कर 382.79 रुपये से 383.95 रुपये प्रति लीटर हो गई है। नई दरें 14 अगस्त से प्रभावी मानी जा रही हैं। डीजल की कीमत में यह वृद्धि विशेष रूप से परिवहन क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि माल ढुलाई और सार्वजनिक परिवहन में डीजल की बड़ी भूमिका होती है।

    ईंधन की नई कीमतें पाकिस्तान के बदले हुए पेट्रोलियम मूल्य निर्धारण तंत्र के तहत तय की गई हैं। इस व्यवस्था में अंतरराष्ट्रीय बाजार की परिस्थितियों और तेल की कीमतों में होने वाले उतार-चढ़ाव का प्रभाव घरेलू ईंधन दरों पर तेजी से पड़ सकता है।

    पाकिस्तान में ईंधन कीमतों से जुड़ी व्यवस्था में हाल के महीनों में बदलाव किया गया है। जुलाई से लागू नई प्रणाली का उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार में होने वाले बदलावों के अनुरूप घरेलू कीमतों को समायोजित करना बताया गया है। पश्चिम एशिया में तनाव और वैश्विक ऊर्जा बाजार में अस्थिरता के बीच ईंधन कीमतों पर दबाव बना हुआ है।

    अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल और पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतों में बदलाव का असर उन देशों पर ज्यादा पड़ता है जो अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए आयात पर निर्भर हैं। पाकिस्तान भी अपनी ईंधन जरूरतों का एक महत्वपूर्ण हिस्सा आयात के जरिए पूरा करता है। ऐसे में वैश्विक कीमतों और विनिमय दर में बदलाव घरेलू बाजार में ईंधन की लागत को प्रभावित कर सकते हैं।

    पेट्रोल और डीजल की कीमतों में वृद्धि का असर केवल वाहन चालकों तक सीमित नहीं रहता। परिवहन लागत बढ़ने पर माल की ढुलाई महंगी हो सकती है, जिसका प्रभाव खाद्य पदार्थों और रोजमर्रा की आवश्यक वस्तुओं की कीमतों पर भी पड़ सकता है। पहले से महंगाई का सामना कर रही आबादी के लिए ईंधन की कीमत में मामूली वृद्धि भी घरेलू बजट पर अतिरिक्त दबाव डाल सकती है।

    पाकिस्तान में इस वर्ष पहले भी ईंधन कीमतों में बदलाव देखने को मिले हैं। वैश्विक ऊर्जा बाजार में अस्थिरता, क्षेत्रीय तनाव और आयात लागत में बदलाव के कारण वहां ईंधन मूल्य निर्धारण लगातार चर्चा में रहा है।

    14 अगस्त को लागू हुई नई दरें ऐसे समय में आई हैं जब पाकिस्तान अपना स्वतंत्रता दिवस मना रहा है। राष्ट्रीय उत्सव के बीच पेट्रोल और डीजल महंगा होने से महंगाई का मुद्दा एक बार फिर लोगों के बीच चर्चा में है। आने वाले समय में अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार की दिशा और क्षेत्रीय परिस्थितियां यह तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी कि पाकिस्तान में ईंधन की कीमतों पर आगे कितना दबाव बना रहता है।