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  • वैश्विक संकट के बीच भारत में पेट्रोल डीजल की कीमतें स्थिर कई देशों में 85 प्रतिशत तक उछाल के बावजूद उपभोक्ताओं को राहत

    वैश्विक संकट के बीच भारत में पेट्रोल डीजल की कीमतें स्थिर कई देशों में 85 प्रतिशत तक उछाल के बावजूद उपभोक्ताओं को राहत

    नई दिल्ली: वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में लगातार तेजी और पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच जहां कई देशों में ईंधन की कीमतों में भारी उछाल देखने को मिल रहा है वहीं भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतें स्थिर बनी हुई हैं यह स्थिति ऐसे समय में सामने आई है जब स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में आपूर्ति बाधित होने की आशंकाओं के कारण ब्रेंट क्रूड की कीमतों में वृद्धि दर्ज की जा रही है इसके बावजूद भारतीय उपभोक्ताओं को फिलहाल राहत मिलती नजर आ रही है

    दुनिया के कई हिस्सों में ईंधन की कीमतों में तेज बढ़ोतरी ने आम लोगों की जेब पर सीधा असर डाला है आंकड़ों के अनुसार यूएई में डीजल की कीमतों में लगभग 85 प्रतिशत तक की वृद्धि हुई है इसके अलावा ऑस्ट्रेलिया और अमेरिका में भी डीजल की कीमतें 60 प्रतिशत से अधिक बढ़ी हैं वहीं कनाडा पाकिस्तान फ्रांस श्रीलंका और ब्रिटेन जैसे देशों में यह वृद्धि 35 से 50 प्रतिशत के बीच दर्ज की गई है यह बढ़ोतरी मुख्य रूप से भू राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की आपूर्ति में अनिश्चितता के कारण मानी जा रही है

    पेट्रोल की कीमतों का रुझान भी इसी प्रकार का रहा है पाकिस्तान में पेट्रोल की कीमतों में सबसे अधिक लगभग 44 प्रतिशत की वृद्धि देखी गई है जबकि अमेरिका और यूएई में भी उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई है अन्य देशों जैसे कनाडा श्रीलंका और चीन में भी पेट्रोल की कीमतों में बढ़ोतरी हुई है हालांकि ब्राजील और रूस जैसे देशों में यह वृद्धि अपेक्षाकृत कम रही है

    इसके विपरीत भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतें वर्ष की शुरुआत के स्तर पर ही स्थिर बनी हुई हैं डीजल की कीमत लगभग 87 रुपए प्रति लीटर और पेट्रोल की कीमत करीब 94 रुपए प्रति लीटर के आसपास बनी हुई है यह स्थिरता ऐसे समय में महत्वपूर्ण मानी जा रही है जब वैश्विक बाजार में अस्थिरता अपने चरम पर है और कई देश महंगाई के दबाव से जूझ रहे हैं

    विशेषज्ञों का मानना है कि भारत में कीमतों को नियंत्रित रखने में सरकारी नीतियों और सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियों की रणनीति का महत्वपूर्ण योगदान है तेल कंपनियां अंतरराष्ट्रीय बाजार से ईंधन की खरीद इस तरह कर रही हैं जिससे खुदरा कीमतों को स्थिर रखा जा सके हालांकि इसके चलते कंपनियों पर आर्थिक दबाव भी बढ़ सकता है

    आर्थिक विश्लेषण यह भी संकेत देता है कि यदि कच्चे तेल की कीमतें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर और बढ़ती हैं तो भारतीय तेल कंपनियों को नुकसान उठाना पड़ सकता है अनुमान के अनुसार यदि कीमतें 135 से 165 डॉलर प्रति बैरल के बीच रहती हैं तो पेट्रोल पर प्रति लीटर लगभग 18 रुपए और डीजल पर लगभग 35 रुपए तक का नुकसान हो सकता है इसके अलावा कच्चे तेल की कीमत में हर 10 डॉलर प्रति बैरल की बढ़ोतरी से लागत में करीब 6 रुपए प्रति लीटर की वृद्धि हो सकती है

    कुल मिलाकर वर्तमान स्थिति यह दर्शाती है कि जहां वैश्विक बाजार में अस्थिरता और महंगाई का दबाव बढ़ रहा है वहीं भारत में संतुलित नीतियों और प्रबंधन के चलते ईंधन की कीमतों को स्थिर बनाए रखने में सफलता मिली है यह न केवल उपभोक्ताओं के लिए राहत की बात है बल्कि आर्थिक स्थिरता बनाए रखने में भी सहायक साबित हो रही है

  • आधी रात को सस्ता हुआ तेल! कच्चे तेल में 10% गिरावट, फिर भी देशभर में पेट्रोल-डीजल के दाम जस के तस

    आधी रात को सस्ता हुआ तेल! कच्चे तेल में 10% गिरावट, फिर भी देशभर में पेट्रोल-डीजल के दाम जस के तस

    नई दिल्ली। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में बड़ी गिरावट के बावजूद भारत में आम लोगों को फिलहाल राहत नहीं मिली है। शुक्रवार को ग्लोबल मार्केट में क्रूड ऑयल 10% तक लुढ़ककर 90 डॉलर प्रति बैरल से नीचे आ गया, लेकिन ऑयल मार्केटिंग कंपनियों ने घरेलू कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया।

    देश की राजधानी दिल्ली में पेट्रोल 94.77 रुपये प्रति लीटर और डीजल 87.67 रुपये प्रति लीटर पर स्थिर बना हुआ है।

    सबसे सस्ता पेट्रोल-डीजल य
    हां
    अंडमान-निकोबार की राजधानी पोर्टब्लेयर में अब भी सबसे सस्ता ईंधन मिल रहा है।

    यहां पेट्रोल 78.05 रुपये और डीजल 82.64 रुपये प्रति लीटर बिक रहा है, जो बड़े शहरों की तुलना में काफी कम है।

    क्यों गिरे कच्चे तेल के दाम?
    ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से वैश्विक शिपिंग को फिर से सुचारू करने के संकेत दिए हैं। इस खबर के बाद सप्लाई को लेकर बनी चिंता कम हुई और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज गिरावट दर्ज की गई।

    देश के प्रमुख शहरों में पेट्रोल के रेट (₹/लीटर)

    मुंबई – 104.21
    कोलकाता – 103.94
    चेन्नई – 100.75
    अहमदाबाद – 94.49
    बेंगलुरु – 94.49
    हैदराबाद – 107.46
    जयपुर – 104.72
    लखनऊ – 94.69
    पुणे – 104.04
    चंडीगढ़ – 94.30
    इंदौर – 106.48
    सूरत – 95.00
    नाशिक – 95.50

    डीजल के ताजा रेट (₹/लीटर)

    मुंबई – 92.15
    कोलकाता – 90.76
    चेन्नई – 92.34
    अहमदाबाद – 90.17
    बेंगलुरु – 89.02
    हैदराबाद – 95.70
    जयपुर – 90.21
    लखनऊ – 87.80
    पुणे – 90.57
    चंडीगढ़ – 82.45
    इंदौर – 91.88
    पटना – 93.80
    सूरत – 89.00

    पहले बढ़ चुके हैं दाम
    हाल ही में प्राइवेट कंपनियों ने कीमतों में बढ़ोतरी की थी। शेल इंडिया ने 1 अप्रैल को पेट्रोल 7.41 रुपये और डीजल 25.01 रुपये प्रति लीटर महंगा किया था।

    वहीं, नायरा ने मार्च में पेट्रोल-डीजल के दाम करीब 5 रुपये तक बढ़ाए थे।

    प्रीमियम फ्यूल भी महंगा
    इंडियन ऑयल ने 1 अप्रैल को XP100 पेट्रोल की कीमत 11 रुपये बढ़ाकर 160 रुपये प्रति लीटर कर दी थी। इसके अलावा प्रीमियम डीजल ‘एक्स्ट्रा ग्रीन’ भी 91.49 रुपये से बढ़कर 92.99 रुपये प्रति लीटर हो गया।

    अंतरराष्ट्रीय बाजार में गिरावट के बावजूद घरेलू स्तर पर फिलहाल कोई राहत नहीं है। अब सबकी नजर ऑयल कंपनियों के अगले फैसले पर टिकी है—क्या आम आदमी को सस्ता पेट्रोल-डीजल मिलेगा या इंतजार लंबा चलेगा?

  • मप्र में एलपीजी, पेट्रोल और डीजल का पर्याप्त स्टॉक, खाद्य मंत्री बोले- अफवाहों पर न दें ध्यान

    मप्र में एलपीजी, पेट्रोल और डीजल का पर्याप्त स्टॉक, खाद्य मंत्री बोले- अफवाहों पर न दें ध्यान


    भोपाल।
    मध्य प्रदेश के खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने कहा कि प्रदेश में एलपीजी, पेट्रोल, डीजल, पीएनजी और सीएनजी का पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है। किसी प्रकार की कमी नहीं हैं। लोग अफवाहों पर ध्यान न दें।

    खाद्य मंत्री राजपूत ने सोमवार को एक बयान में कहा कि देश में कच्चे तेल (क्रूड ऑयल) का पर्याप्त भंडार उपलब्ध है और देश व प्रदेश की सभी रिफाइनरियां पूरी क्षमता के साथ कार्य कर रही हैं। इससे पेट्रोलियम पदार्थों की आपूर्ति निरंतर बनी हुई है और किसी प्रकार की रुकावट की स्थिति नहीं है। उन्होंने लोगों से अधिक से अधिक संख्या में पीएनजी कनेक्शन लेने का भी आग्रह किया, जिससे एलपीजी पर निर्भरता कम हो और स्वच्छ एवं सतत ऊर्जा की उपलब्धता सुनिश्चित हो सके।

    मंत्री राजपूत ने बताया कि प्रदेश के बॉटलिंग प्लांट में घरेलू एवं कॉमर्शियल एलपीजी का पर्याप्त भंडार बनाए रखा गया है। घरेलू गैस उपभोक्ताओं द्वारा की गई बुकिंग के अनुरूप एलपीजी सिलेंडरों का निरंतर वितरण किया जा रहा है। कॉमर्शियल उपभोक्ताओं को शासन द्वारा निर्धारित प्राथमिकता क्रम और आवंटन प्रतिशत के आधार पर गैस सिलेंडरों की आपूर्ति सतत रूप से की जा रही है।

    उन्होंने कहा कि घरेलू और व्यावसायिक गैस सिलेंडरों की आपूर्ति में किसी प्रकार का अवरोध नहीं है। उपभोक्ताओं की मांग को पूरा करने के लिए सभी प्लांट अतिरिक्त समय तक कार्य कर रहे हैं तथा जिला स्तर तक बॉटलिंग प्लांट और वितरकों के पास उपलब्धता एवं वितरण की नियमित समीक्षा की जा रही है।

    उन्होंने बताया कि प्रदेश की सभी ऑयल कंपनियों के पास पेट्रोल और डीजल (एमएस/एचएसडी) का पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है। रिटेल आउटलेट्स (पेट्रोल पंपों) पर भी पेट्रोल और डीजल की किसी प्रकार की कमी की स्थिति नहीं है। कंपनियों के डिपो से पेट्रोल और डीजल की लगातार आपूर्ति की जा रही है और स्थिति पूरी तरह सामान्य है। बढ़ी हुई मांग को देखते हुए ऑयल कंपनियों के डिपो अतिरिक्त समय तक कार्य कर रहे हैं जिससे मांग के अनुरूप आपूर्ति सुनिश्चित की जा सके।

    खाद्य मंत्री ने बताया कि प्रदेश में आवश्यक वस्तु अधिनियम के अंतर्गत एलपीजी की कालाबाजारी रोकने के लिए निरंतर कार्रवाई की जा रही है। अब तक 2,110 स्थानों पर जांच की गई है, जिसमें 2,933 एलपीजी सिलेंडर जब्त किए गए तथा 9 प्रकरणों में एफआईआर दर्ज कराई गई है। इसके अतिरिक्त 391 पेट्रोल पंपों की जांच की गई, जिसमें एक प्रकरण दर्ज कर एफआईआर कराई गई है। प्रदेश के सभी जिला आपूर्ति नियंत्रकों और ऑयल कंपनियों के अधिकारियों को पेट्रोल पंपों की नियमित जांच करने के निर्देश दिए गए हैं।

    उन्होंने कहा कि प्रदेश में पीएनजी कनेक्शन को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन (सीजीडी) संस्थाओं द्वारा घरेलू और व्यावसायिक कनेक्शन से संबंधित मांग एवं शिकायतों के पंजीयन और उनके निराकरण के लिए कंट्रोल रूम स्थापित किए गए हैं। प्रदेश के जिन शहरों में पाइपलाइन नेटवर्क उपलब्ध है, वहां पाइपलाइन के आसपास के घरेलू और व्यावसायिक उपभोक्ता पीएनजी कनेक्शन के लिए आवेदन कर सकते हैं। अन्य जिलों में पाइपलाइन विस्तार के बाद पीएनजी कनेक्शन उपलब्ध कराए जाएंगे। साथ ही सीजीडी संस्थाओं को विभिन्न अनुमतियां प्राप्त करने के लिए सिंगल विंडो पोर्टल के माध्यम से आवेदन करने की सुविधा भी प्रदान की गई है। इन संस्थाओं द्वारा संबंधित शहरों के लिए दूरभाष नंबर भी जारी किए गए हैं, जिन पर उपभोक्ता संपर्क कर जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। इनमें अवंतिका गैस लिमिटेड द्वारा पीथमपुर, इंदौर, उज्जैन और ग्वालियर के लिए संपर्क नंबर उपलब्ध कराए गए हैं, जबकि गैल गैस लिमिटेड द्वारा देवास, रायसेन, शाजापुर और सीहोर के लिए संपर्क सुविधा दी गई है।

    इसी प्रकार नवेरिया गैस लिमिटेड द्वारा धार, थिंक गैस द्वारा भोपाल, राजगढ़ और शिवपुरी, आईओसीएल द्वारा गुना, मऊगंज, रीवा, अशोकनगर और मुरैना, बीपीसीएल द्वारा मैहर, सतना, शहडोल, सीधी और सिंगरौली तथा गुजरात गैस लिमिटेड द्वारा उज्जैन, देवास, इंदौर, रतलाम और झाबुआ क्षेत्रों के लिए दूरभाष नंबर जारी किए गए हैं, जिनके माध्यम से उपभोक्ता अपनी मांग या शिकायत दर्ज करा सकते हैं।

    उन्होंने आम नागरिकों से अपील की कि वे किसी भी प्रकार की अफवाहों पर ध्यान न दें और केवल आवश्यकता अनुसार ही पेट्रोल और डीजल की खरीद करें तथा अनावश्यक संग्रह से बचें। ऑयल कंपनियों ने भी यह स्पष्ट किया है कि एलपीजी, पेट्रोल, डीजल, पीएनजी और सीएनजी पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध हैं और प्रदेश में पेट्रोलियम पदार्थों की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं।

  • पेट्रोल-डीजल और LPG की कोई कमी नहीं… सरकार का दावा- भारत के पास 2 माह का ईंधन भंडार

    पेट्रोल-डीजल और LPG की कोई कमी नहीं… सरकार का दावा- भारत के पास 2 माह का ईंधन भंडार


    नई दिल्ली।
    देश के कई हिस्सों में पेट्रोल, डीजल ( Petrol-Diesel Crisis) और एलपीजी गैस (LPG gas) को लेकर फैल रही अफवाहों के बीच सरकार ने दावा किया है कि पेट्रोलियम पदार्थों की कोई कमी नहीं है। सरकार ने बयान जारी कर कहा कि भारत के पास करीब 60 दिन का ईंधन भंडार है। ऐसे में लोगों को घबराने और दहशत में खरीदारी करने की जरूरत नहीं है। पेट्रोलियम मंत्रालय की तरफ से जारी बयान में कहा गया है कि दुनिया के कई देश जहां मूल्य वृद्धि, सीमित आपूर्ति, ऑड-इवेन प्रतिबंध और जबरन स्टेशन बंद करने जैसी चुनौतियों का सामना कर रहे हैं। कुछ देशों ने राष्ट्रीय ऊर्जा आपातकाल घोषित किया है, पर भारत में ऐसे किसी भी उपाय की जरूरत नहीं है।

    मंत्रालय ने कहा, भारत की कुल भंडार क्षमता 74 दिनों की है। पश्चिम एशिया संकट के 27वें दिन भी वास्तविक भंडार करीब 60 दिनों का है। इसमें कच्चे तेल का भंडार, उत्पाद भंडार और भूमिगत गुफाओं में रणनीतिक भंडारण शामिल है। भारत के भंडार के खत्म या अपर्याप्त होने के किसी भी दावे को पूरी तरह से गलत बताया।

    सरकार का दावा है देश में एलपीजी की कोई कमी नहीं है। घरेलू एलपीजी उत्पादन में 40% की वृद्धि हुई है, जिससे रोज एलपीजी उत्पादन 50 टीएमटी हो गई है। यह हमारी जरूरत का करीब 60% है, क्योंकि देश में गैस की कुल जरूरत 80 टीएमटी है। इससे आयात की जरूरत 30 टीएमटी रह गई है। अमेरिका, रूस समेत कई देशों से 800 टीएमटी एलपीजी कार्गो पहले से सुरक्षित हैं और भारत के कई टर्मिनलों पर पहुंच रहे हैं।

    सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियों प्रतिदिन 50 लाख से अधिक एलपीजी सिलेंडर की सफलतापूर्वक आपूर्ति कर रही हैं। सरकार का कहना है कि उपभोक्ताओं के घबराहट में एलपीजी सिलेंडर बुकिंग की मांग 89 लाख सिलेंडर से घटकर 50 लाख के आसपास रह गई है। तेल कंपनियां गैस सिलेंडर की आपूर्ति कर रही है।

    पीएनजी कनेक्शन 25 लाख से बढ़कर 1.5 करोड़ हुए
    सरकार का कहना है, पाइपलाइन प्राकृतिक गैस (पीएनजी) को देश में बढ़ावा दिया जा रहा है। घरेलू पीएनजी कनेक्शन 25 लाख से बढ़कर 1.5 करोड़ से ज्यादा हो गए हैं। भारत अपनी प्रतिदिन 191 मिलियन मीट्रिक मानक घन मीटर की दैनिक जरूरत में से रोज 92 मिलियन मीट्रिक मानक घन मीटर प्राकृतिक गैस का घरेलू उत्पादन करता है। ऐसे में एलपीजी के मुकाबले पीएनजी के आयात के मामले में कम निर्भर है। नए घरेलू पीएनजी कनेक्शन भी दिए जा रहे हैं।


    भ्रम फैलाने पर कार्रवाई

    कुछ शरारती तत्वों द्वारा गलत सूचना फैलाई जा रही है और कुछ स्वार्थी तत्व इसे बढ़ावा दे रहे हैं, जिससे लोगों में चिंता पैदा हो रही है। मंत्रालय सभी से आग्रह करता है कि वे ईंधन और गैस की उपलब्धता संबंधी जानकारी के लिए केवल सरकारी सूचनाओं पर भरोसा करें। सरकार जानबूझकर दहशत फैलाने वालों पर कार्रवाई करेगी।

  • पश्चिम एशिया तनाव में भी चीन में पेट्रोल-LPG की हो रही भरपूर सप्लाई…. जिनपिंग ने ढूंढा नया रास्ता!

    पश्चिम एशिया तनाव में भी चीन में पेट्रोल-LPG की हो रही भरपूर सप्लाई…. जिनपिंग ने ढूंढा नया रास्ता!


    बीजिंग।
    मिडल ईस्ट (Middle East) में छिड़ी भीषण जंग और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) की तालाबंदी ने दुनिया के कई देशों में हाहाकार मचा दिया है. तेल संकट से जूझ रहे देशों में चीन (China) भी शामिल होता लेकिन मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि शी जिनपिंग (Xi Jinping) ने एक रास्ता ढूंढ़ लिया है. ऊर्जा सुरक्षा पर खतरा देखते हुए बीजिंग (Beijing) ने पुराने ट्रे़ड रास्तों का विकल्प ढूंढना शुरू कर दिया है. ऐसे में म्यांमार चीन के लिए सिर्फ एक पड़ोसी नहीं, बल्कि हिंद महासागर में उतरने का सबसे सुरक्षित ‘बैकडोर’ बन गया है. चीन-म्यांमार आर्थिक गलियारा (CMEC) अब केवल व्यापार का जरिया नहीं, बल्कि एक रणनीतिक ढाल बन चुका है।

    बड़ी-बड़ी पाइपलाइनें: चीन ने म्यांमार के क्यायुकफ्यू बंदरगाह से लेकर चीन के कुनमिंग शहर तक दो बड़ी-बड़ी पाइपलाइनें बिछाई हैं. इनका सबसे बड़ा मकसद ‘मलक्का डिलेमा’ से बचना है.

    कच्चा तेल: यह पाइपलाइन सालाना 2.2 करोड़ टन यानी लगभग 2,40,000 बैरल प्रतिदिन कच्चा तेल ले जाने की क्षमता रखती है. खाड़ी देशों और अफ्रीका से आने वाले बड़े टैंकर म्यांमार के तट पर तेल उतारते हैं, जो पाइपलाइन के जरिए सीधे चीन पहुंचता है.

    नैचुरल गैस: इसके साथ ही एक गैस पाइपलाइन भी है जो सालाना 12 अरब क्यूबिक मीटर गैस सप्लाई करती है. इसमें म्यांमार के अपने अपतटीय क्षेत्रों की गैस भी शामिल है.


    हिंद महासागर में चीन की बिसात

    चीन अपनी मौजूदगी दर्ज कराने के लिए ‘मोतियों की माला’ (String of Pearls) की नीति को और मजबूत कर रहा है. मालदीव में चीन ने इंफ्रास्ट्रक्चर और ‘फ्रेंडशिप ब्रिज’ जैसे प्रोजेक्ट्स में भारी निवेश किया है ताकि भारत के प्रभाव को कम किया जा सके।

    भारत ने ग्रेट निकोबार द्वीप पर नया एयरपोर्ट और मिलिट्री बेस बनाकर चीन की घेराबंदी तेज कर दी है. यह बेस बंगाल की खाड़ी और मलक्का जलडमरूमध्य के बीच एक ‘नेचुरल बैरियर’ की तरह काम करेगा.

    म्यांमार: चीन का ‘ट्रम्प कार्ड’
    सारे रास्तों के बंद होने पर म्यांमार ही वो एकमात्र रास्ता है जो चीन को सीधे बंगाल की खाड़ी से जोड़ता है. चीन ने इसके लिए कई तरह की चालें चली हैं, जिसमें से एक म्यांमार के आंतरिक संघर्षों में एक ‘मध्यस्थ’ की भूमिका भी है, ताकि CMEC के प्रोजेक्ट्स सुरक्षित रहें. चीन के बढ़ते प्रभाव को देखते हुए वाशिंगटन में भी अब चर्चा शुरू हो गई है कि क्या म्यांमार पर लगाए गए प्रतिबंध उसे पूरी तरह चीन की गोद में धकेल रहे हैं?

  • PAN, पेट्रोल से लेकर HRA तक….. एक अप्रैल से बदलेंगे ये नियम, आम आदमी पर होगा सीधा असर

    PAN, पेट्रोल से लेकर HRA तक….. एक अप्रैल से बदलेंगे ये नियम, आम आदमी पर होगा सीधा असर


    नई दिल्ली।
    नया वित्त वर्ष 2026-27 (New Financial Year 2026-27) शुरू होते ही 1 अप्रैल से कई बड़े नियम लागू होने जा रहे हैं, जिनका सीधा असर आम लोगों, खासकर सैलरीड कर्मचारियों (Salaried Employees) और टैक्सपेयर्स (Taxpayers) पर पड़ेगा। पैन कार्ड, HRA, क्रेडिट कार्ड (Credit Card) और पेट्रोल से जुड़े नियमों में भी बदलाव किए जा रहे हैं, जो आपकी जेब और टैक्स प्लानिंग दोनों को प्रभावित करेंगे।


    PAN कार्ड के नियम सख्त, अब सिर्फ आधार से काम नहीं चलेगा

    अब तक पैन कार्ड बनवाने के लिए सिर्फ आधार पर्याप्त था, लेकिन 1 अप्रैल 2026 से यह सुविधा खत्म हो जाएगी। नए नियमों के तहत पैन बनवाने या उसमें सुधार करने के लिए अतिरिक्त दस्तावेज देना अनिवार्य होगा। इससे पैन प्रक्रिया पहले से ज्यादा सख्त और सुरक्षित हो जाएगी।


    HRA क्लेम में बड़ा बदलाव, बताना होगा मकान मालिक से रिश्ता

    सैलरीड कर्मचारियों के लिए HRA से जुड़ा नियम और सख्त किया गया है। अब अगर आप सालाना 1 लाख रुपये से ज्यादा किराया देते हैं, तो आपको मकान मालिक का PAN देना होगा और साथ ही यह भी बताना होगा कि वह आपके परिवार का सदस्य है या नहीं। यह जानकारी नए फॉर्म 124 में देनी होगी। इसका उद्देश्य फर्जी HRA क्लेम पर रोक लगाना है।


    क्रेडिट कार्ड पर सख्ती, बड़े ट्रांजैक्शन सीधे आयकर विभाग की नजर में

    1 अप्रैल से क्रेडिट कार्ड से जुड़े नियमों में बड़ा बदलाव प्रस्तावित है। अब बड़े ट्रांजैक्शन और भुगतान की जानकारी इनकम टैक्स डिपॉर्टमेंट को दी जाएगी। अगर कोई व्यक्ति साल में 10 लाख रुपये से ज्यादा का क्रेडिट कार्ड बिल डिजिटल माध्यम से चुकाता है या 1 लाख रुपये से ज्यादा का भुगतान कैश में करता है, तो इसकी रिपोर्टिंग अनिवार्य होगी। इससे हर बड़ा खर्च सीधे आपके PAN रिकॉर्ड से जुड़ जाएगा।


    अब क्रेडिट कार्ड से भी भर सकेंगे टैक्स

    सरकार ने करदाताओं को राहत देते हुए अब टैक्स भुगतान के लिए क्रेडिट कार्ड को भी मान्य कर दिया है। पहले यह सुविधा केवल नेट बैंकिंग या डेबिट कार्ड तक सीमित थी। हालांकि, भुगतान करते समय अतिरिक्त चार्ज या प्रोसेसिंग फीस का ध्यान रखना जरूरी होगा।


    कंपनी के क्रेडिट कार्ड पर खर्च पर टैक्स नियम स्पष्ट

    अगर किसी कर्मचारी को कंपनी की ओर से क्रेडिट कार्ड दिया जाता है और उसका पेमेंट कंपनी करती है, तो यह एक प्रकार का लाभ माना जाएगा और उस पर टैक्स लग सकता है। हालांकि, यदि खर्च पूरी तरह आधिकारिक काम के लिए है और उसका सही रिकॉर्ड मौजूद है, तो उस पर टैक्स नहीं लगेगा।


    नया आयकर अधिनियम 2025 लागू

    1 अप्रैल 2026 से नया आयकर अधिनियम 2025 लागू किया जाएगा, जो पुराने 1961 कानून की जगह लेगा। यह टैक्स सिस्टम को सरल और पारदर्शी बनाने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।


    सख्त नियम
    पेट्रोल में 20% एथेनॉल अनिवार्य, गुणवत्ता भी बदलेगी

    अब पूरे देश में पेट्रोल में 20% एथेनॉल मिलाना अनिवार्य होगा। इसके साथ ही पेट्रोल की गुणवत्ता को लेकर भी नए मानक लागू होंगे, जिससे प्रदूषण कम करने और ऊर्जा आत्मनिर्भरता बढ़ाने में मदद मिलेगी।


    क्या है इसका सीधा असर?

    इन सभी बदलावों का सीधा असर आपकी टैक्स प्लानिंग, खर्च और रोजमर्रा की जिंदगी पर पड़ेगा। खासतौर पर सैलरीड लोगों और ज्यादा खर्च करने वालों को अब ज्यादा सतर्क रहने की जरूरत होगी, क्योंकि हर बड़ा ट्रांजैक्शन अब टैक्स सिस्टम की नजर में होगा।

  • नेपाल में पेट्रोल-डीजल और रसोई गैस के दामों में भारी वृद्धि, जानें कितनी बढ़ी कीमतें

    नेपाल में पेट्रोल-डीजल और रसोई गैस के दामों में भारी वृद्धि, जानें कितनी बढ़ी कीमतें


    काठमांडू।
    ईरान और अमेरिका-इजरायल युद्ध (Iran and US-Israeli War) के साथ खाड़ी देशों की वर्तमान स्थिति का हवाला देते हुए नेपाल (Nepal) में पेट्रोलियम पदार्थों की कीमतों में भारी वृद्धि (Increase Petroleum Products Prices) की घोषणा की गई है.

    नेपाल ऑयल निगम की रविवार देर रात तक चली बैठक में पेट्रोलियम पदार्थों की कीमतों में बढ़ोतरी करने का फैसला लिया गया. निगम द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार अंतरराष्ट्रीय बाजार में बढ़ती कीमतों और आपूर्ति प्रबंधन में आ रही चुनौतियों के कारण यह निर्णय लिया गया है. नई दरें आज रात 12 बजे से लागू कर दी गई हैं।

    नए मूल्य समायोजन के अनुसार पेट्रोल की कीमत में 31 रुपये प्रति लीटर, डीजल में 54 रुपये प्रति लीटर तथा एलपीजी गैस में 296 रुपये प्रति सिलेंडर की बढ़ोतरी की गई है।

    मूल्य वृद्धि के बाद अब पेट्रोल की कीमत 188 रुपये प्रति लीटर, डीजल की कीमत 196 रुपये प्रति लीटर और एलपीजी गैस का मूल्य 2,126 रुपये प्रति सिलेंडर तय किया गया है। निगम ने कहा है कि हाल के समय में मध्य पूर्व और पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में पेट्रोलियम पदार्थों की कीमतों में तेज वृद्धि हुई है, जिससे आपूर्ति व्यवस्था पर दबाव बढ़ा है।

    प्रेस विज्ञप्ति में यह भी बताया गया है कि नेपाल जैसे पेट्रोलियम उत्पादन न करने वाले देश के लिए अंतरराष्ट्रीय मूल्य वृद्धि का सीधा असर पड़ता है. इससे पहले भी वैश्विक परिस्थितियों के कारण आपूर्ति प्रणाली प्रभावित हुई थी और निगम को इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन को भुगतान करने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ा था.

    निगम ने मौजूदा समय में भी नेपाल को निरंतर पेट्रोलियम पदार्थों की आपूर्ति जारी रखने के लिए इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन का आभार व्यक्त किया है। नेपाल ऑयल निगम ने कहा है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार की स्थिति को देखते हुए पेट्रोलियम पदार्थों की कीमतों में यह समायोजन किया गया है, ताकि आपूर्ति व्यवस्था को सुचारु रखा जा सके।

  • देश में पेट्रोल व डीजल और कच्चे तेल का कोई संकट नहीं… सरकार उठा रही ऐहतियाती कदम

    देश में पेट्रोल व डीजल और कच्चे तेल का कोई संकट नहीं… सरकार उठा रही ऐहतियाती कदम

    पश्चिम एशिया संकट (West Asian Crisis) के चलते अंतरराष्ट्रीय बाजार (International Market) में कच्चे तेल व एलपीजी की कीमतों (Crude Oil and LPG Prices) में उछाल के बीच सरकार (Government) ने एहतियाती कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। सरकार का दावा है कि भारत में पेट्रोल व डीजल और कच्चे तेल का कोई संकट नहीं है। पर रसोई गैस (LPG) और पीएनजी की घरेलू सप्लाई को तरजीह देने के लिए कुछ एहतियाती उपाय किए हैं। इनमें कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की सप्लाई में कमी और घरेलू गैस का बुकिंग टाइम बढ़ाना शामिल है।


    बुकिंग अवधि बढ़ाई

    सरकार ने घरेलू एलपीजी गैस सिलेंडर की बुकिंग अवधि भी 15 दिन से बढ़ाकर 25 दिन कर दी है। मतलब यह कि गैस सिलेंडर सप्लाई के अगले 25 दिन तक उपभोक्ता दूसरा सिलेंडर बुक नहीं कर पाएंगे। हालांकि, सरकार की दलील है कि आम उपभोक्ता एक वर्ष में औसतन सात सिलेंडर इस्तेमाल करता है। ऐसे में वह एक सिलेंडर को तकरीबन 50 दिन इस्तेमाल करता है। ऐसे में 25 दिन की बुकिंग अवधि से कोई मुश्किल नहीं आएगी।


    फिलहाल दाम नहीं बढ़ेंगे

    सरकार ने एक बार फिर दोहराया है कि फिलहाल पेट्रोल और डीजल की कीमतों में वृद्धि की कोई संभावना नहीं है। मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि कच्चे तेल के दाम बढ़े हैं, पर अभी वह स्थिति नहीं आई है कि कीमतों में इजाफा किया जाए। उनके मुताबिक कच्चे तेल की कीमत 120 -125 डॉलर के आसपास रहती है, तो तेल कंपनियों पर खास दबाव नहीं पड़ेगा। पर कीमत ऊपर चली जाती है, तो वह अलग स्थिति होगी।


    घरेलू पीएनजी को तरजीह

    सरकार का कहना है कि घरेलू पीएनजी उपभोक्ताओं को भी गैस की कोई मुश्किल नहीं आएगी। गैस का ज्यादातर हिस्सा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरता है। ऐसे में सरकार ने कुछ उद्योगों को उपलब्धता के आधार पर गैस मुहैया कराने का निर्णय लिया है। सरकार का कहना है कि यह कदम उठाना जरूरी है, क्योंकि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज ज्यादा दिन तक बंद रहता है, तो एलएनजी को लेकर दबाव की स्थिति बन सकती है।


    कमर्शियल एलपीजी कम

    पश्चिम एशिया में बढ़ते संकट के बीच सरकार ने घरेलू एलपीजी सप्लाई को बरकरार रखने के लिए होटल और उद्योगों में एलपीजी की सप्लाई में कमी लाने का फैसला किया है। मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि जरूरत पड़ी तो कमर्शियल सिलेंडर की सप्लाई पूरी तरह बंद कर दी जाएगी क्योंकि, इस वक्त घरेलू उपभोक्ताओं को वक्त पर रसोई गैस उपलब्ध कराना सरकार और तेल कंपनियों की पहली प्राथमिकता है।


    कमर्शियल एलएनजी के दामों में बढ़ोतरी

    पेट्रोलियम मंत्रालय का कहना है कि सरकार की प्राथमिकता घरेलू उपभोक्ता है। मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि कमर्शियल एलएनजी की कीमतों में इजाफा उनकी प्राथमिकताओं में शामिल नहीं है। ऐसे में कमर्शियल एलएनजी के दामों में वृद्धि पर सरकार कोई हस्तक्षेप नहीं करेगी। यह सवाल किए जाने पर कि क्या इसका असर सीएनजी की कीमतों पर भी होगा, उन्होंने कहा कि सीएनजी प्राथमिकता वाला क्षेत्र है। उस पर प्रभाव की संभावना कम है।


    रिफाइनरी एलपीजी उत्पादन बढ़ाए

    पश्चिम एशिया संकट को देखते हुए सरकार ने एक बार फिर सभी रिफाइनरी को दूसरे पेट्रोलियम उत्पाद का उत्पादन कम कर एलपीजी का उत्पादन बढ़ाने के निर्देश दिए हैं। मंत्रालय की तरफ से कहा गया है कि ज्यादा से ज्यादा एलपीजी का उत्पादन किया जाए। इसके साथ सरकार अमेरिका, कनाडा और अल्जीरिया से भी एलपीजी खरीद रही है। सरकार का कहना है कि इन देशों से गैस के आयात को और तेज किया गया है।


    अमेरिका का रुख करेगा तय

    पेट्रोलियम मंत्रालय का मानना है कि कच्चे तेल की कीमतों में उछाल का ज्यादा असर अमेरिका के बाजार और उपभोक्ताओं पर पड़ेगा। एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि अमेरिका में पेट्रोल डीजल के दाम अंतरराष्ट्रीय बाजार से तय होते हैं। ऐसे में अमेरिकी उपभोक्ताओं पर इसका असर पड़ना लाजिमी है। ऐसे में अमेरिका युद्ध को लंबा खींचने का निर्णय करता है, तो उसके उपभोक्ताओं को इसकी ज्यादा कीमत चुकानी होगी।

  • युवक के साथ बेरहमी से मारपीट कर प्राइवेट पार्ट में पेट्रोल डाला

    युवक के साथ बेरहमी से मारपीट कर प्राइवेट पार्ट में पेट्रोल डाला


    समस्तीपुर । बिहार के एक थाने में युवक के साथ हैवानियत की हदें पार करने का आरोप लगा है। समस्तीपुर जिले के ताजपुर थाना कस्टडी में एक युवक के साथ बेरहमी से मारपीट और अमानवीय व्यवहार किए जाने का गंभीर आरोप सामने आया है। जख्मी युवक मनीष कुमार की हालत बिगड़ने पर परिजनों ने उसे ताजपुर अस्पताल में भर्ती कराया, जहां से बेहतर इलाज के लिए समस्तीपुर सदर अस्पताल रेफर कर दिया गया।
    मनीष भेरोखड़ा गांव निवासी संजय पोद्दार का पुत्र है। पीड़ित मनीष ने बताया कि वह ताजपुर बाजार स्थित सोनी ज्वेलर्स में काम करता था। कुछ दिन पूर्व दुकान में हुई चोरी के बाद संदेह के आधार पर दुकानदार ने उसे बुलाकर बंधक बनाया, पिटाई की और पुलिस के हवाले कर दिया।

    मनीष का आरोप है कि पुलिस ने उसे चार दिनों तक हिरासत में रखकर शारीरिक व मानसिक रूप से प्रताड़ित किया। उसने दावा किया कि कस्टडी में उसकी बेरहमी से पिटाई की गई, यहां तक कि एक पुलिसकर्मी ने उसके शरीर के संवेदनशील हिस्से में सुई चुभोई और प्राइवेट पार्ट में पेट्रोल डाल दिया।

    पीड़ित ने यह भी आरोप लगाया कि पुलिस ने उसकी पत्नी के साथ मारपीट कर पूरे परिवार को धमकाया।

    चार जनवरी को निजी मुचलके पर रिहा होने के बाद उसकी तबीयत और बिगड़ गई। पिता संजय पोद्दार ने निष्पक्ष जांच और दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है। इधर, थानाध्यक्ष शंकर शरण दास ने आरोपों से इनकार किया है। वहीं, एसपी अरविंद प्रताप सिंह ने बताया कि वायरल वीडियो के आधार पर जांच के लिए एसडीपीओ-1 के नेतृत्व में टीम गठित की गई है।