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  • ब्रांड इंडिया' को नई पहचान मिल रही, उद्यमियों से पीयूष गोयल ने कही बड़ी बात

    ब्रांड इंडिया' को नई पहचान मिल रही, उद्यमियों से पीयूष गोयल ने कही बड़ी बात


    नई दिल्ली। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा है कि किसी भी उत्पाद पर ‘मेड इन इंडिया’ लिखना केवल एक कारोबारी पहचान नहीं, बल्कि पूरे देश की प्रतिष्ठा और जिम्मेदारी का प्रतिनिधित्व करना है। उन्होंने भारतीय उद्यमियों से गुणवत्ता को सर्वोच्च प्राथमिकता देने की अपील करते हुए कहा कि आज दुनिया में ‘ब्रांड इंडिया’ तेजी से भरोसे और उत्कृष्टता का पर्याय बन रहा है।

    ‘मेड इन इंडिया’ का मतलब सिर्फ उत्पाद नहीं, देश की पहचान
    सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर साझा किए गए संदेश में पीयूष गोयल ने कहा कि भारतीय उद्यमियों के लिए गुणवत्ता केवल व्यावसायिक मानक नहीं, बल्कि राष्ट्र के प्रति उनकी जिम्मेदारी भी है। जब कोई उत्पाद ‘मेड इन इंडिया’ के नाम से वैश्विक बाजार में पहुंचता है, तो वह पूरे देश की छवि को दर्शाता है।

    अंबूर की कंपनी का दिया उदाहरण
    पीयूष गोयल ने तमिलनाडु के अंबूर स्थित फ्लोरेंस शू कंपनी के संस्थापक अकील पनारुना का उदाहरण साझा किया। उन्होंने बताया कि लंदन में आयोजित एक बिजनेस प्लेनरी सेशन के दौरान अकील ने उन्हें एक रोचक अनुभव सुनाया।

    अकील के अनुसार, एक अंतरराष्ट्रीय ग्राहक ने काहिरा हवाई अड्डे पर ह्यूगो बॉस ब्रांड का एक प्रीमियम जूता खरीदा। जब उसने जूते का लेबल देखा तो उस पर ‘Made in India’ लिखा था। यह जूता अंबूर स्थित उनकी कंपनी में तैयार किया गया था।

    रोजगार और महिला सशक्तिकरण पर भी जोर

    गोयल ने कहा कि अकील पनारुना जैसे उद्यमी केवल वैश्विक ब्रांडों के लिए उच्च गुणवत्ता वाले उत्पाद नहीं बना रहे, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर रोजगार भी सृजित कर रहे हैं। उन्होंने विनिर्माण क्षेत्र में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने और ‘जीरो लिक्विड डिस्चार्ज’ जैसी पर्यावरण अनुकूल तकनीकों को अपनाने की भी सराहना की।

    भारत-यूके व्यापार समझौते से बढ़ेंगे अवसर

    केंद्रीय मंत्री ने कहा कि भारत-यूके व्यापक आर्थिक एवं व्यापार समझौते (CETA) के माध्यम से दोनों देशों के व्यापारिक संबंध और मजबूत होंगे। इससे भारतीय उद्योगों को वैश्विक बाजार में नए अवसर मिलेंगे और ‘ब्रांड इंडिया’ को और मजबूती मिलेगी।

    उन्होंने कहा कि अकील जैसे उद्यमी दुनिया को यह दिखा रहे हैं कि भारतीय उत्पाद गुणवत्ता, विश्वसनीयता और उत्कृष्टता के मामले में किसी से कम नहीं हैं।

    निवेश और सहयोग बढ़ाने पर हुई चर्चा

    पीयूष गोयल ने बताया कि उन्होंने एशिया हाउस और कई वैश्विक कंपनियों के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ गोलमेज बैठक में हिस्सा लिया। बैठक में भारत के मजबूत विनिर्माण तंत्र, निवेश के नए अवसरों और आर्थिक साझेदारी को आगे बढ़ाने पर चर्चा हुई।

    इसके अलावा उन्होंने यूके इंडिया बिजनेस काउंसिल (UKIBC) के सदस्यों के साथ भी संवाद किया, जिसमें विभिन्न क्षेत्रों में निवेश, व्यापार विस्तार और साझा विकास की संभावनाओं पर विचार-विमर्श किया गया।

    गोयल ने विश्वास जताया कि भारतीय उद्यमियों की गुणवत्ता और नवाचार की बदौलत ‘मेड इन इंडिया’ आने वाले समय में वैश्विक बाजार में और मजबूत पहचान बनाएगा।

  • India UK Trade Deal से पहले बड़ा कदम पीयूष गोयल ने जारी किया CETA बिजनेस मैनुअल कारोबारियों को मिलेगा व्यापार बढ़ाने का पूरा रोडमैप

    India UK Trade Deal से पहले बड़ा कदम पीयूष गोयल ने जारी किया CETA बिजनेस मैनुअल कारोबारियों को मिलेगा व्यापार बढ़ाने का पूरा रोडमैप


    नई दिल्ली । भारत और ब्रिटेन के बीच आर्थिक संबंधों को नई मजबूती देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने लंदन में भारत यूके व्यापक आर्थिक एवं व्यापार समझौते यानी सीईटीए के लिए विशेष बिजनेस मैनुअल लॉन्च किया है। यह मैनुअल ऐसे समय जारी किया गया है जब दोनों देशों के बीच ऐतिहासिक व्यापार समझौता 15 जुलाई से लागू होने जा रहा है। इसका उद्देश्य भारतीय और ब्रिटिश कारोबारियों को समझौते के प्रावधानों को सरल तरीके से समझाना और उनके माध्यम से अधिकतम व्यावसायिक लाभ प्राप्त करने में सहायता देना है।

    सीईटीए बिजनेस यूटिलाइजेशन मैनुअल को एक व्यावहारिक मार्गदर्शिका के रूप में तैयार किया गया है। इसमें व्यापार से जुड़े नियमों प्रक्रियाओं और उपलब्ध अवसरों को आसान भाषा में समझाया गया है ताकि छोटे मध्यम और बड़े सभी प्रकार के उद्योग इस समझौते का प्रभावी उपयोग कर सकें। इस पहल से दोनों देशों के बीच व्यापारिक सहयोग को नई गति मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।

    इस मैनुअल का विमोचन एफआईसीसीआई द्वारा आयोजित कार्यक्रम में किया गया जिसमें यूके इंडिया बिजनेस काउंसिल और एचएसबीसी इंडिया ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। दोनों संस्थानों ने संयुक्त रूप से इस दस्तावेज को तैयार किया है। इसे एक लिविंग डॉक्यूमेंट के रूप में विकसित किया गया है जिसका अर्थ है कि समय समय पर बदलती व्यापारिक जरूरतों और नए नियमों के अनुसार इसमें संशोधन और अपडेट किए जाएंगे।

    विशेषज्ञों का मानना है कि सीईटीए लागू होने के बाद दोनों देशों के बीच बाजार तक पहुंच पहले से अधिक आसान होगी। व्यापारिक बाधाएं कम होंगी और निवेश के नए अवसर सामने आएंगे। इससे निर्यातकों आयातकों और विभिन्न औद्योगिक क्षेत्रों को प्रत्यक्ष लाभ मिलने की संभावना है। यह समझौता भारत और ब्रिटेन के आर्थिक संबंधों को नई ऊंचाई देने वाला माना जा रहा है।

    यूके इंडिया बिजनेस काउंसिल के ग्रुप मुख्य कार्यकारी अधिकारी डॉ किशोर जयरामन ने कहा कि यह मैनुअल केवल जानकारी देने वाला दस्तावेज नहीं बल्कि कारोबारियों के लिए एक व्यावहारिक रोडमैप है। इसके माध्यम से कंपनियां व्यापार समझौते के नियमों को बेहतर ढंग से समझ सकेंगी और उनका लाभ उठाकर अपने कारोबार का विस्तार कर सकेंगी।

    एचएसबीसी इंडिया के मुख्य कार्यकारी अधिकारी हितेंद्र दवे ने भी इस पहल को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि यह समझौता दोनों देशों के उद्योगों को अधिक भरोसा बेहतर बाजार पहुंच और मजबूत व्यावसायिक साझेदारी का अवसर देगा। उनका मानना है कि कंपनियों को इस मैनुअल का उपयोग करते हुए सीमा पार व्यापार और निवेश को नई दिशा देनी चाहिए।

    भारत और ब्रिटेन के बीच व्यापार लगातार मजबूत हो रहा है। हाल के वर्षों में दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। वर्ष 2025 की चौथी तिमाही तक दोनों देशों के बीच कुल व्यापार लगभग अड़तालीस अरब पाउंड के करीब पहुंच चुका है जो पिछले वर्षों की तुलना में उल्लेखनीय बढ़ोतरी को दर्शाता है। ऐसे में सीईटीए और इसके लिए तैयार किया गया यह बिजनेस मैनुअल भविष्य में व्यापार निवेश और आर्थिक सहयोग को नई गति देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

  • भारत-अमेरिका आर्थिक रिश्तों को मिलेगी नई उड़ान, ट्रेड एग्रीमेंट पर अंतिम चरण की बातचीत जारी

    भारत-अमेरिका आर्थिक रिश्तों को मिलेगी नई उड़ान, ट्रेड एग्रीमेंट पर अंतिम चरण की बातचीत जारी


    नई दिल्ली । भारत और अमेरिका के बीच बहुप्रतीक्षित द्विपक्षीय व्यापार समझौता अब अपने अंतिम चरण में पहुंचता दिखाई दे रहा है। भारत में अमेरिका के राजदूत सर्जियो गोर ने संकेत दिया है कि दोनों देशों के बीच अधिकांश महत्वपूर्ण मुद्दों पर सहमति बन चुकी है और अब केवल कुछ बिंदुओं को अंतिम रूप दिया जाना बाकी है। उनका कहना है कि कानूनी मसौदे की भाषा तय होते ही यह समझौता अगले कुछ सप्ताह या महीनों में औपचारिक रूप से पूरा हो सकता है।

    व्हाइट हाउस में दिए गए एक विशेष साक्षात्कार में सर्जियो गोर ने कहा कि हाल ही में नई दिल्ली में अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जैमीसन ग्रीर के साथ हुई बैठकों में उन्होंने केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल से विस्तृत चर्चा की। उन्होंने इन वार्ताओं को बेहद सकारात्मक और सार्थक बताते हुए कहा कि अब बातचीत अंतिम चरण में है और दोनों पक्ष समझौते की भाषा तथा शेष तकनीकी पहलुओं को अंतिम रूप देने में जुटे हैं।

    गोर ने इस प्रक्रिया की तुलना अन्य वैश्विक व्यापार समझौतों से करते हुए कहा कि भारत और अमेरिका के बीच यह वार्ता अपेक्षाकृत बहुत तेजी से आगे बढ़ी है। उन्होंने बताया कि इस समझौते पर करीब डेढ़ वर्ष से काम चल रहा है जबकि दुनिया के कई बड़े व्यापार समझौतों को पूरा होने में दो दशक तक का समय लग चुका है। उनके अनुसार दोनों देशों ने कम समय में उल्लेखनीय प्रगति हासिल की है और यह अपने आप में एक बड़ी उपलब्धि है।

    हालांकि उन्होंने समझौते के संभावित प्रावधानों या संवेदनशील विषयों पर विस्तार से टिप्पणी करने से परहेज किया लेकिन इतना जरूर कहा कि दोनों सरकारें ऐसे समाधान की दिशा में काम कर रही हैं जिससे भारत और अमेरिका दोनों को समान रूप से लाभ मिले। उन्होंने कहा कि जब साझा हितों पर सहमति बन जाती है तभी एक सफल व्यापार समझौता संभव हो पाता है।

    सर्जियो गोर ने दोनों देशों के राजनीतिक संबंधों पर भी विश्वास जताया। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच वर्षों से मजबूत व्यक्तिगत संबंध रहे हैं और यही रिश्ते भारत-अमेरिका रणनीतिक साझेदारी की सबसे मजबूत नींव हैं। उन्होंने बताया कि राष्ट्रपति ट्रंप भारत आने के लिए उत्सुक हैं और प्रधानमंत्री मोदी का निमंत्रण स्वीकार करने की इच्छा भी जता चुके हैं। हालांकि अमेरिकी मध्यावधि चुनावों के व्यस्त कार्यक्रम के कारण यात्रा की तारीख अभी तय नहीं हुई है लेकिन भारत उनकी प्राथमिकताओं में सबसे ऊपर बना हुआ है।

    उन्होंने यह भी कहा कि भारत और अमेरिका के बीच बढ़ते आर्थिक संबंध केवल व्यापार तक सीमित नहीं हैं बल्कि रक्षा, उन्नत प्रौद्योगिकी, ऊर्जा, शिक्षा, निवेश और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में रणनीतिक सहयोग जैसे अनेक क्षेत्रों में साझेदारी लगातार मजबूत हो रही है। दोनों देश आर्थिक सहयोग को नई ऊंचाई देने के साथ वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला और निवेश के अवसरों को भी विस्तार देने की दिशा में मिलकर काम कर रहे हैं।

    भारत और अमेरिका फिलहाल व्यापार समझौते के पहले चरण को अंतिम रूप देने में जुटे हैं। इस समझौते का उद्देश्य दोनों देशों के बीच बाजार तक पहुंच आसान बनाना, शुल्क संबंधी बाधाओं को कम करना, निवेश को प्रोत्साहित करना और द्विपक्षीय व्यापार को नई गति देना है। माना जा रहा है कि इस शुरुआती समझौते के बाद दोनों देश भविष्य में एक व्यापक व्यापार ढांचे की दिशा में भी आगे बढ़ेंगे, जिससे दुनिया की दो बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के बीच आर्थिक साझेदारी और मजबूत होगी।

  • भारत के मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम का दुनिया ने माना लोहा, लंदन में पीयूष गोयल ने गिनाए निवेश के बड़े अवसर

    भारत के मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम का दुनिया ने माना लोहा, लंदन में पीयूष गोयल ने गिनाए निवेश के बड़े अवसर


    नई दिल्ली । भारत वैश्विक निवेश और विनिर्माण के प्रमुख केंद्र के रूप में तेजी से अपनी पहचान मजबूत कर रहा है। इसी दिशा में केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने लंदन में आयोजित कई महत्वपूर्ण बैठकों के दौरान दुनिया की अग्रणी कंपनियों के वरिष्ठ अधिकारियों के सामने भारत की आर्थिक ताकत और मैन्युफैक्चरिंग क्षमता का विस्तृत खाका पेश किया। उन्होंने कहा कि भारत का मजबूत औद्योगिक आधार और तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था वैश्विक निवेशकों के लिए अभूतपूर्व अवसर प्रदान कर रही है।

    पीयूष गोयल ने एशिया हाउस और दुनिया की प्रमुख कंपनियों के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ आयोजित गोलमेज बैठक में आर्थिक सहयोग को नई दिशा देने पर चर्चा की। उन्होंने बताया कि बैठक में भारत के विकसित होते मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम, निवेश के अनुकूल माहौल और विभिन्न क्षेत्रों में मौजूद अपार संभावनाओं पर विस्तार से विचार-विमर्श हुआ। उन्होंने विश्वास जताया कि भारत-यूके व्यापक आर्थिक एवं व्यापार समझौता यानी सीईटीए दोनों देशों की रणनीतिक और आर्थिक साझेदारी को नई मजबूती देगा।

    उन्होंने यूके-इंडिया बिजनेस काउंसिल के सदस्यों और विभिन्न वैश्विक कंपनियों के शीर्ष अधिकारियों के साथ आयोजित इंटरैक्टिव लंच बैठक में भी भाग लिया। इस दौरान दोनों देशों के बीच निवेश बढ़ाने, नई कारोबारी संभावनाओं को विकसित करने और साझा आर्थिक विकास को गति देने पर व्यापक चर्चा हुई। उन्होंने कहा कि भारत की वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता लगातार मजबूत हो रही है और विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने से दोनों देशों को दीर्घकालिक लाभ मिलेगा।

    पीयूष गोयल ने लंदन बिजनेस स्कूल में फैकल्टी, छात्रों, पूर्व छात्रों और उद्योग जगत के प्रतिनिधियों को भी संबोधित किया। उन्होंने कहा कि शिक्षा, नवाचार और कौशल विकास भारत और ब्रिटेन के संबंधों को और मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उनके अनुसार छात्र, युवा पेशेवर और उद्यमी दोनों देशों के बीच ज्ञान, तकनीक और नवाचार आधारित साझेदारी को नई ऊंचाइयों तक ले जा सकते हैं।

    उन्होंने कहा कि 15 जुलाई 2026 से लागू होने वाला भारत-यूके व्यापक आर्थिक एवं व्यापार समझौता दोनों देशों के लिए नए व्यापारिक अवसरों का द्वार खोलेगा। इससे निवेश, व्यापार, प्रौद्योगिकी, विनिर्माण और सेवा क्षेत्र में सहयोग को नई गति मिलेगी। उन्होंने उद्योग जगत से इस समझौते का अधिकतम लाभ उठाने और दीर्घकालिक साझेदारी विकसित करने का आह्वान किया।

    इस दौरे की एक और विशेषता यह रही कि पीयूष गोयल भारत के अब तक के सबसे बड़े कारोबारी प्रतिनिधिमंडलों में से एक के साथ ब्रिटेन पहुंचे हैं। इस प्रतिनिधिमंडल में 160 से अधिक अग्रणी भारतीय कंपनियां शामिल हैं, जिनका उद्देश्य दोनों देशों के बीच आर्थिक संबंधों को जमीनी स्तर पर और अधिक मजबूत बनाना है।

    बिजनेस प्लेनरी सत्र को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि भारत और ब्रिटेन के संबंध लगातार नई ऊंचाइयों को छू रहे हैं। उन्होंने दोनों देशों के उद्योगपतियों से सहयोग बढ़ाने, नवाचार को प्रोत्साहित करने और साझा समृद्धि के लिए अधिक निवेश करने की अपील की। उनके अनुसार भारत आज वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला, विनिर्माण और तकनीकी नवाचार का विश्वसनीय साझेदार बनकर उभर रहा है।

    लंदन दौरे के दौरान पीयूष गोयल ने भारतीय महिला क्रिकेट टीम के सम्मान समारोह में भी हिस्सा लिया। उन्होंने खिलाड़ियों के शानदार प्रदर्शन और उनके संघर्ष की सराहना करते हुए कहा कि भारतीय महिला क्रिकेट टीम देश की लाखों बेटियों और युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत है। उन्होंने आगामी महिला टी20 विश्व कप के लिए पूरी टीम को शुभकामनाएं देते हुए विश्वास जताया कि भारतीय टीम विश्व कप जीतकर देश का गौरव बढ़ाएगी।

  • भारत-अमेरिका आर्थिक साझेदारी नए दौर में प्रवेश करने को तैयार, ट्रेड एग्रीमेंट पर तेज हुई बातचीत

    भारत-अमेरिका आर्थिक साझेदारी नए दौर में प्रवेश करने को तैयार, ट्रेड एग्रीमेंट पर तेज हुई बातचीत


    नई दिल्ली । भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित व्यापार समझौते को लेकर कूटनीतिक और आर्थिक स्तर पर गतिविधियां तेज हो गई हैं। हाल ही में फ्रांस में आयोजित जी7 शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की मुलाकात के बाद दोनों देशों के बीच व्यापारिक सहयोग को नई गति मिली है। अब इस दिशा में अगला महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए अमेरिका के व्यापार प्रतिनिधि जैमीसन ग्रीर इस सप्ताह नई दिल्ली पहुंच रहे हैं जहां वे केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल और अन्य वरिष्ठ भारतीय अधिकारियों के साथ कई दौर की महत्वपूर्ण बैठकें करेंगे।

    भारत में अमेरिका के राजदूत सर्जियो गोर ने बताया कि जी7 सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप के बीच व्यापार क्षेत्रीय सुरक्षा और गहरी आर्थिक साझेदारी जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर व्यापक चर्चा हुई थी। उनके अनुसार दोनों नेताओं ने इस बात पर जोर दिया कि भारत और अमेरिका के बीच आर्थिक संबंधों को और अधिक मजबूत बनाया जाए तथा व्यापारिक सहयोग के नए अवसरों को बढ़ावा दिया जाए।

    इसी कड़ी में अब दोनों देशों के बीच प्रस्तावित द्विपक्षीय व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने की दिशा में बातचीत तेज हो गई है। लंबे समय से चल रही वार्ताओं के बाद दोनों पक्षों का मानना है कि समझौता लगभग तैयार है और अब केवल कुछ महत्वपूर्ण बिंदुओं पर अंतिम सहमति बनना बाकी है। अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर कहा कि वे नई दिल्ली में जैमीसन ग्रीर के स्वागत के लिए उत्साहित हैं और व्यापार समझौते को आगे बढ़ाने के लिए पीयूष गोयल के साथ कई महत्वपूर्ण बैठकें निर्धारित की गई हैं।

    अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि कार्यालय के अनुसार जैमीसन ग्रीर भारत दौरे के दौरान केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों से मुलाकात करेंगे। इन बैठकों में ऐतिहासिक भारत-अमेरिका संयुक्त बयान और अंतरिम व्यापार समझौते से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर चर्चा होगी। यह दौरा फरवरी 2025 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा शुरू की गई व्यापक व्यापार वार्ता प्रक्रिया का हिस्सा माना जा रहा है।

    हाल ही में राष्ट्रपति ट्रंप ने भी संकेत दिया था कि भारत और अमेरिका व्यापार समझौते पर सहमति बनने के बेहद करीब पहुंच चुके हैं। जी7 सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री मोदी से मुलाकात के बाद उन्होंने कहा था कि दोनों देशों के बीच चल रही बातचीत सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ रही है और जल्द ही महत्वपूर्ण परिणाम सामने आ सकते हैं।

    भारत और अमेरिका के बीच व्यापारिक संबंध लगातार मजबूत होते रहे हैं। तकनीक मैन्युफैक्चरिंग ऊर्जा फार्मास्यूटिकल्स रक्षा और सप्लाई चेन जैसे क्षेत्रों में दोनों देशों का सहयोग लगातार बढ़ रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि प्रस्तावित व्यापार समझौता लागू होने के बाद निवेश बढ़ेगा व्यापारिक बाधाएं कम होंगी और दोनों देशों के उद्योगों को नए अवसर मिलेंगे।

    भारत दौरे के बाद जैमीसन ग्रीर उज्बेकिस्तान की राजधानी ताशकंद जाएंगे जहां वे वहां के वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों से मुलाकात करेंगे। हालांकि फिलहाल सबसे अधिक ध्यान नई दिल्ली में होने वाली उन बैठकों पर है जिनसे भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौते को अंतिम रूप मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।

    दोनों देशों की सरकारें इस समझौते को केवल व्यापार तक सीमित नहीं मानतीं बल्कि इसे रणनीतिक और आर्थिक साझेदारी को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने वाले कदम के रूप में देख रही हैं। यही कारण है कि नई दिल्ली में होने वाली ये बैठकें वैश्विक आर्थिक और कूटनीतिक हलकों में भी विशेष महत्व रखती हैं।

  • भारत-अमेरिका आर्थिक रिश्तों को मिलेगी नई रफ्तार, व्यापार समझौते पर अंतिम सहमति की ओर बढ़ीं दोनों सरकारें

    भारत-अमेरिका आर्थिक रिश्तों को मिलेगी नई रफ्तार, व्यापार समझौते पर अंतिम सहमति की ओर बढ़ीं दोनों सरकारें


    नई दिल्ली । भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित द्विपक्षीय व्यापार समझौते को लेकर गतिविधियां तेज हो गई हैं। अगले महीने लागू होने वाली महत्वपूर्ण टैरिफ समयसीमा से पहले दोनों देश व्यापार वार्ताओं को निर्णायक दिशा देने में जुट गए हैं। इसी क्रम में अमेरिका के व्यापार प्रतिनिधि जैमीसन ग्रीर इस सप्ताह नई दिल्ली पहुंच रहे हैं जहां वह केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल और अन्य वरिष्ठ भारतीय अधिकारियों के साथ कई दौर की महत्वपूर्ण बैठकें करेंगे।

    भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने इस दौरे की पुष्टि करते हुए कहा कि अमेरिका और भारत के बीच व्यापार समझौते को आगे बढ़ाने के लिए कई बैठकों का कार्यक्रम तय किया गया है। उन्होंने सोशल मीडिया मंच एक्स पर कहा कि नई दिल्ली में जैमीसन ग्रीर का स्वागत करने के लिए वह उत्साहित हैं और दोनों देशों के बीच व्यापार समझौते को आगे बढ़ाने के लिए मंत्री पीयूष गोयल के साथ कई महत्वपूर्ण बैठकें निर्धारित की गई हैं।

    ग्रीर और गोयल के बीच होने वाली यह बातचीत ऐसे समय में हो रही है जब भारत और अमेरिका प्रस्तावित द्विपक्षीय व्यापार समझौते के पहले चरण को अंतिम रूप देने की दिशा में तेजी से काम कर रहे हैं। दोनों देशों की कोशिश है कि अगले महीने लागू होने वाली अहम टैरिफ समयसीमा से पहले समझौते के प्रारंभिक ढांचे पर सहमति बना ली जाए। माना जा रहा है कि यह अंतरिम समझौता भविष्य में एक व्यापक और दीर्घकालिक व्यापार समझौते का आधार तैयार करेगा।

    केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने भी हाल ही में संकेत दिया था कि अमेरिका के उनके समकक्ष व्यापार समझौते पर चर्चा के लिए नई दिल्ली आने वाले हैं। उन्होंने कहा था कि दोनों देशों के बीच बातचीत सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ रही है और लंबित मुद्दों को तेजी से सुलझाने के प्रयास किए जा रहे हैं। वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने भी स्पष्ट किया था कि आगामी वार्ता का प्रमुख उद्देश्य ढांचा समझौते को अंतिम रूप देना और व्यापक व्यापार समझौते के लिए रास्ता तैयार करना है।

    यह वार्ता इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि अमेरिका द्वारा अपने व्यापारिक साझेदार देशों पर लगाया गया 10 प्रतिशत का अस्थायी टैरिफ 24 जुलाई को समाप्त होने वाला है। अमेरिकी प्रशासन ने यह अतिरिक्त शुल्क इस वर्ष की शुरुआत में लागू किया था। अब इसकी अवधि समाप्त होने के बाद नई टैरिफ व्यवस्था लागू हो सकती है। ऐसे में भारत और अमेरिका दोनों इस समयसीमा से पहले व्यापारिक मुद्दों पर स्पष्टता लाने के इच्छुक हैं।

    इससे पहले 2 जून से 4 जून के बीच नई दिल्ली में दोनों देशों के मुख्य वार्ताकारों के बीच विस्तृत चर्चा हुई थी। उन बैठकों में भी बाजार पहुंच निवेश व्यापारिक नियमों और शुल्क संबंधी कई विषयों पर विचार-विमर्श किया गया था। अब मंत्रिस्तरीय स्तर पर होने वाली यह बैठक उन चर्चाओं को आगे बढ़ाने और महत्वपूर्ण निर्णय लेने का अवसर मानी जा रही है।

    भारत और अमेरिका के बीच पिछले कुछ वर्षों में आर्थिक और रणनीतिक संबंध लगातार मजबूत हुए हैं। तकनीक मैन्युफैक्चरिंग ऊर्जा रक्षा फार्मास्यूटिकल्स और सप्लाई चेन जैसे क्षेत्रों में सहयोग तेजी से बढ़ा है। दोनों देश व्यापार को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने और आर्थिक साझेदारी को मजबूत बनाने के लिए चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि व्यापार समझौते का पहला चरण सफलतापूर्वक पूरा हो जाता है तो यह दोनों देशों के कारोबारी संबंधों को नई गति देने के साथ वैश्विक अर्थव्यवस्था में भी सकारात्मक संदेश देगा।

  • भारत और अमेरिका के बीच मेगा ट्रेड एग्रीमेंट की तैयारी तेज, बातचीत को अंतिम रूप देने भारत पहुंचे जैमीसन ग्रीर

    भारत और अमेरिका के बीच मेगा ट्रेड एग्रीमेंट की तैयारी तेज, बातचीत को अंतिम रूप देने भारत पहुंचे जैमीसन ग्रीर


    नई दिल्ली । भारत और अमेरिका के बीच बहुप्रतीक्षित व्यापार समझौते को लेकर कूटनीतिक और आर्थिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। इसी क्रम में अमेरिका के 20वें व्यापार प्रतिनिधि जैमीसन ग्रीर इस सप्ताह भारत पहुंच रहे हैं। उनका यह दौरा ऐसे समय में हो रहा है जब दोनों देश लंबे समय से चल रही व्यापार वार्ताओं को अंतिम रूप देने के करीब बताए जा रहे हैं। नई दिल्ली में ग्रीर केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल सहित कई वरिष्ठ अधिकारियों से मुलाकात करेंगे और द्विपक्षीय व्यापार समझौते से जुड़े अहम मुद्दों पर चर्चा करेंगे।

    भारत में अमेरिका के राजदूत सर्जियो गोर ने ग्रीर के दौरे को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा है कि दोनों देशों के बीच व्यापार समझौते को आगे बढ़ाने के लिए कई बैठकों का कार्यक्रम तय किया गया है। उन्होंने सोशल मीडिया के माध्यम से यह संकेत भी दिया कि आने वाले दिनों में व्यापार संबंधों को नई दिशा देने वाले फैसले सामने आ सकते हैं। अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि कार्यालय के अनुसार ग्रीर भारत दौरे के बाद उज्बेकिस्तान जाएंगे लेकिन उससे पहले उनका पूरा ध्यान भारत के साथ व्यापारिक बातचीत को आगे बढ़ाने पर रहेगा।

    अमेरिकी प्रशासन का कहना है कि यह दौरा राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा फरवरी 2025 में शुरू की गई व्यापक व्यापार वार्ता प्रक्रिया का हिस्सा है। दोनों नेताओं ने उस समय आर्थिक सहयोग को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने का संकल्प लिया था। इसके बाद से दोनों देशों के अधिकारी विभिन्न स्तरों पर लगातार बातचीत कर रहे हैं। हाल ही में फ्रांस में आयोजित जी7 शिखर सम्मेलन के दौरान भी दोनों देशों के प्रतिनिधियों के बीच इस विषय पर गहन चर्चा हुई थी। अमेरिकी अधिकारियों ने तब संकेत दिया था कि समझौते से जुड़े कई अहम मुद्दों पर सहमति बन चुकी है और शेष विषयों पर तेजी से काम किया जा रहा है।

    राष्ट्रपति ट्रंप ने भी हाल में प्रधानमंत्री मोदी से मुलाकात के बाद कहा था कि भारत और अमेरिका व्यापार समझौते के बेहद करीब पहुंच चुके हैं। माना जा रहा है कि नई दिल्ली में होने वाली यह बैठक कई लंबित मुद्दों को सुलझाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। बाजार पहुंच शुल्क व्यवस्था निवेश सहयोग और व्यापारिक नियमों से जुड़े विषय वार्ता के केंद्र में रहने वाले हैं।

    भारत और अमेरिका के बीच पिछले एक दशक में व्यापारिक संबंध लगातार मजबूत हुए हैं। दोनों देशों के बीच वस्तुओं और सेवाओं का व्यापार रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच चुका है। तकनीक मैन्युफैक्चरिंग ऊर्जा फार्मास्यूटिकल्स सेमीकंडक्टर और महत्वपूर्ण सप्लाई चेन जैसे क्षेत्रों में सहयोग तेजी से बढ़ा है। इसके साथ ही रक्षा नई तकनीक महत्वपूर्ण खनिज शिक्षा और लोगों के बीच संपर्क जैसे क्षेत्रों में भी साझेदारी मजबूत हुई है।

    हालांकि कुछ मुद्दों पर दोनों देशों के बीच मतभेद भी बने हुए हैं। अमेरिका लंबे समय से भारतीय बाजार में अधिक पहुंच की मांग करता रहा है जबकि भारत घरेलू उद्योगों के हितों को ध्यान में रखते हुए संतुलित नीति अपनाने पर जोर देता है। इसके बावजूद दोनों पक्ष इस बात पर सहमत हैं कि एक व्यापक और संतुलित व्यापार समझौता न केवल आर्थिक संबंधों को नई मजबूती देगा बल्कि रणनीतिक साझेदारी को भी नई ऊर्जा प्रदान करेगा।

    विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह समझौता अंतिम रूप लेता है तो इससे दोनों देशों के कारोबारियों निवेशकों और उद्योग जगत को बड़ा लाभ मिलेगा। साथ ही वैश्विक आर्थिक चुनौतियों के बीच भारत और अमेरिका की साझेदारी और अधिक मजबूत होकर उभर सकती है।

  • भारत-ओमान ट्रेड डील से किसानों और व्यापारियों को बड़ा फायदा, गोयल का बयान

    भारत-ओमान ट्रेड डील से किसानों और व्यापारियों को बड़ा फायदा, गोयल का बयान


    नई दिल्ली। भारत और ओमान के बीच बहुप्रतीक्षित व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौता (CEPA) सोमवार से लागू हो गया है, जिससे दोनों देशों के बीच व्यापारिक रिश्तों में एक नया अध्याय शुरू हो गया है। इस समझौते को भारत की वैश्विक व्यापार रणनीति के लिए एक बड़ा कदम माना जा रहा है, जिसका सीधा लाभ किसानों, छोटे व्यापारियों, कारीगरों और लघु एवं मध्यम उद्योगों (MSME) को मिलने की उम्मीद है।

    वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने इस समझौते को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आर्थिक विज़न की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया है। उन्होंने कहा कि यह समझौता भारत के निर्यात को नए बाजार उपलब्ध कराएगा, विदेशी निवेश को आकर्षित करेगा और देश में रोजगार सृजन को गति देगा।

    CEPA लागू होने के बाद ओमान में भारत के लगभग 99.38 प्रतिशत निर्यात को 98 प्रतिशत टैरिफ लाइनों पर तुरंत शून्य शुल्क (Zero Duty) का लाभ मिल जाएगा। इससे भारतीय उत्पाद ओमान के बाजार में पहले की तुलना में अधिक प्रतिस्पर्धी हो जाएंगे। पहले जहां केवल 15.3 प्रतिशत निर्यात पर ही शुल्क-मुक्त पहुंच थी, अब यह दायरा बेहद व्यापक हो गया है।

    सरकारी आंकड़ों के अनुसार, इस समझौते से ओमान को भारत का निर्यात 4.06 अरब डॉलर से बढ़कर आने वाले वर्षों में 6 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है, जबकि मध्य अवधि में यह 10 अरब डॉलर तक जाने की संभावना जताई जा रही है। इसके चलते कपड़ा, चमड़ा, जूते, रत्न-आभूषण, कृषि उत्पाद, इंजीनियरिंग, ऑटो कंपोनेंट्स और फार्मा जैसे क्षेत्रों में बड़ा विस्तार देखने को मिल सकता है।

    विशेष रूप से श्रम-प्रधान क्षेत्रों जैसे टेक्सटाइल और हैंडीक्राफ्ट सेक्टर को बड़ा लाभ मिलने की उम्मीद है। तिरुपुर, सूरत, लुधियाना, पानीपत, कोयंबटूर, जयपुर और अहमदाबाद जैसे औद्योगिक केंद्रों में उत्पादन और रोजगार दोनों बढ़ सकते हैं।

    इस समझौते के तहत भारत ने भी 77.79 प्रतिशत टैरिफ लाइनों पर उदारीकरण की पेशकश की है, जो ओमान से आने वाले 94.81 प्रतिशत आयात को कवर करता है। हालांकि, भारत ने अपने संवेदनशील क्षेत्रों—जैसे डेयरी, चाय, कॉफी, रबर और तंबाकू—को किसी भी रियायत से बाहर रखा है ताकि घरेलू उद्योगों और किसानों के हित सुरक्षित रह सकें।

    इसके अलावा सोना-चांदी, आभूषण और कुछ श्रम-प्रधान उत्पादों पर भी सीमित या कोटा आधारित व्यवस्था लागू की गई है। सरकार का मानना है कि यह संतुलित समझौता भारत के हितों की रक्षा करते हुए वैश्विक व्यापार को मजबूती देगा।

    विशेषज्ञों के अनुसार, इस समझौते से भारत की सेवाक्षेत्र अर्थव्यवस्था को भी फायदा मिलेगा, क्योंकि ओमान का आयात बाजार बड़ा और विविध है, जो भारतीय कंपनियों के लिए नए अवसर खोल सकता है।

  • भारत ने दिखाई आर्थिक मजबूती की मिसाल: संकट के समय भी लगातार आगे बढ़ रही अर्थव्यवस्था, बोले पीयूष गोयल

    भारत ने दिखाई आर्थिक मजबूती की मिसाल: संकट के समय भी लगातार आगे बढ़ रही अर्थव्यवस्था, बोले पीयूष गोयल


    नई दिल्ली। वैश्विक स्तर पर चल रहे आर्थिक और भू-राजनीतिक संकटों के बीच भारत की अर्थव्यवस्था लगातार मजबूती दिखा रही है। इसी संदर्भ में केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि भारत ने हर चुनौती के समय खुद को पहले से अधिक मजबूत बनाकर दुनिया के सामने एक भरोसेमंद अर्थव्यवस्था के रूप में स्थापित किया है।

    नई दिल्ली में आयोजित एक बड़े बिजनेस समिट को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों में भारत की आर्थिक नींव स्थिर और मजबूत बनी हुई है। उन्होंने यह भी कहा कि दुनिया के विभिन्न देश अब भारत की क्षमता और स्थिरता पर अधिक विश्वास जता रहे हैं, जो देश की बढ़ती आर्थिक ताकत का संकेत है।

    उन्होंने अपने संबोधन में यह स्पष्ट किया कि केवल सरकार के प्रयासों से आर्थिक प्रगति संभव नहीं है, बल्कि इसके लिए उद्योग जगत, व्यापार क्षेत्र और आम नागरिकों के बीच मजबूत सहयोग आवश्यक है। उनका मानना है कि जब सभी हिस्से मिलकर काम करते हैं, तभी देश की आर्थिक गति और अधिक मजबूत होती है।

    पीयूष गोयल ने भारतीय उद्योगों से यह भी अपील की कि वे घरेलू आपूर्तिकर्ताओं और स्थानीय उत्पादन को प्राथमिकता दें। उनके अनुसार, बदलते वैश्विक माहौल में आत्मनिर्भरता केवल एक नीति नहीं बल्कि आवश्यकता बन चुकी है। उन्होंने कहा कि भारत को अपनी औद्योगिक क्षमता को भीतर से मजबूत करना होगा, ताकि बाहरी निर्भरता कम हो सके।

    उन्होंने अंतरराष्ट्रीय उदाहरणों का उल्लेख करते हुए कहा कि कई विकसित देश अपने घरेलू उद्योगों को प्राथमिकता देकर मजबूत औद्योगिक नेटवर्क तैयार कर चुके हैं। भारत को भी इसी दिशा में आगे बढ़ने की जरूरत है, जहां उद्योग एक-दूसरे का समर्थन करें और देश के भीतर मजबूत सप्लाई चेन विकसित हो।

    मंत्री ने यह भी कहा कि आज की परिस्थितियों में सामान्य व्यापारिक सोच से आगे बढ़ने की जरूरत है। वैश्विक अनिश्चितताओं को देखते हुए भारत को अपनी रणनीति को और अधिक मजबूत और आत्मनिर्भर बनाना होगा। उनका कहना था कि यह केवल एक विकल्प नहीं बल्कि भविष्य की जरूरत है।

    उन्होंने यह भी दोहराया कि भारत की आर्थिक मजबूती केवल आंकड़ों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उस विश्वास का परिणाम है जो दुनिया अब भारत पर जता रही है। विभिन्न वैश्विक चुनौतियों के बावजूद देश ने उत्पादन, निवेश और विकास के क्षेत्र में लगातार प्रगति दिखाई है।

  • भारत की ताकत उसकी संस्कृति और संकल्प में है: सोमनाथ उदाहरण से पीयूष गोयल का संदेश

    भारत की ताकत उसकी संस्कृति और संकल्प में है: सोमनाथ उदाहरण से पीयूष गोयल का संदेश

    नई दिल्ली ।सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण और उसकी ऐतिहासिक यात्रा का उल्लेख करते हुए केंद्रीय मंत्री Piyush Goyal ने भारत की मजबूती, आत्मविश्वास और सांस्कृतिक चेतना को देश की सबसे बड़ी शक्ति बताया है। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार सोमनाथ मंदिर ने बार-बार कठिन दौर और आक्रमणों के बावजूद खुद को पुनः स्थापित किया, उसी तरह भारत भी हर चुनौती के बाद और अधिक सशक्त होकर उभरा है।

    उन्होंने अपने संदेश में कहा कि सोमनाथ केवल एक मंदिर नहीं, बल्कि भारत की सभ्यतागत शक्ति और आत्मसम्मान का प्रतीक है। सदियों के संघर्ष और कई बार हुए हमलों के बाद भी इस मंदिर का अस्तित्व और उसकी पुनर्स्थापना यह दर्शाती है कि भारत की सांस्कृतिक जड़ें कितनी मजबूत हैं।

    Piyush Goyal ने कहा कि स्वतंत्रता के बाद सोमनाथ मंदिर का पुनर्निर्माण देश के लिए केवल धार्मिक महत्व की घटना नहीं थी, बल्कि यह एक नए भारत के आत्मविश्वास का प्रतीक भी बना। यह वह समय था जब देश अपनी सांस्कृतिक पहचान को फिर से स्थापित करने और अपनी विरासत पर गर्व करने की दिशा में आगे बढ़ रहा था।

    उन्होंने भारत की वर्तमान स्थिति का जिक्र करते हुए कहा कि आज देश तेजी से विकास की ओर अग्रसर है और दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में अपनी मजबूत पहचान बना रहा है। उनके अनुसार भारत की खासियत यह है कि यहां आधुनिकता और परंपरा दोनों साथ-साथ आगे बढ़ रहे हैं। एक ओर देश तकनीक, उद्योग और आर्थिक विकास में नई ऊंचाइयों को छू रहा है, वहीं दूसरी ओर अपनी सांस्कृतिक विरासत और मूल्यों को भी मजबूती से संजोए हुए है।

    उन्होंने यह भी कहा कि भारत का इतिहास संघर्षों से भरा रहा है, लेकिन हर कठिन परिस्थिति के बाद देश ने नई ऊर्जा के साथ वापसी की है। यही क्षमता भारत को दुनिया के अन्य देशों से अलग बनाती है। उनके अनुसार भारत की सभ्यता और संस्कृति ने हमेशा लोगों को जोड़ने और आगे बढ़ने की प्रेरणा दी है।

    अपने विचारों में उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि आने वाले वर्षों में भारत अपने विकास के लक्ष्यों को हासिल करने के साथ-साथ अपनी सांस्कृतिक पहचान को भी और मजबूत करेगा। उन्होंने कहा कि देश का भविष्य केवल आर्थिक ताकत से नहीं, बल्कि उसके मूल्यों, विरासत और आत्मविश्वास से तय होगा।

    उन्होंने विश्वास जताया कि भारत आने वाले समय में एक विकसित और आत्मनिर्भर राष्ट्र के रूप में दुनिया के सामने और अधिक मजबूती से उभरेगा। साथ ही उन्होंने कहा कि देश की प्रगति का आधार उसकी सांस्कृतिक चेतना और ऐतिहासिक विरासत ही बनी रहेगी, जो हर पीढ़ी को आगे बढ़ने की प्रेरणा देती है।