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  • भारत और कनाडा के बीच मजबूत होंगे व्यापारिक संबंध, व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते पर तेज हुई बातचीत

    भारत और कनाडा के बीच मजबूत होंगे व्यापारिक संबंध, व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते पर तेज हुई बातचीत


    नई दिल्ली । भारत और कनाडा के बीच आर्थिक और व्यापारिक संबंधों को नई दिशा देने की कोशिशों ने अब गति पकड़ ली है। दोनों देशों ने व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते को लेकर बातचीत तेज करने और वर्ष 2026 के अंत तक इसे अंतिम रूप देने की प्रतिबद्धता जताई है। इस पहल को दोनों देशों के आर्थिक रिश्तों के लिए एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। आने वाले समय में यह समझौता व्यापार, निवेश और रणनीतिक साझेदारी के नए अवसरों के द्वार खोल सकता है।

    भारत और कनाडा के बीच लंबे समय से व्यापारिक संबंध मौजूद रहे हैं, लेकिन अब दोनों देश इन्हें अधिक व्यापक और आधुनिक स्वरूप देने की दिशा में काम कर रहे हैं। इसी उद्देश्य से उच्चस्तरीय स्तर पर कई दौर की चर्चाएं आयोजित की गईं, जिनमें आर्थिक सहयोग के विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया। बातचीत के दौरान व्यापार, निवेश, तकनीक, कृषि और रणनीतिक क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर विशेष ध्यान दिया गया।

    दोनों देशों का मानना है कि बदलते वैश्विक आर्थिक परिदृश्य में मजबूत साझेदारी समय की आवश्यकता बन गई है। यही कारण है कि व्यापार समझौते को केवल आयात-निर्यात तक सीमित नहीं रखा जा रहा, बल्कि इसे बहुआयामी आर्थिक संबंधों के रूप में विकसित करने की रणनीति तैयार की जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह समझौता तय समयसीमा के भीतर पूरा होता है तो दोनों देशों की अर्थव्यवस्थाओं को दीर्घकालिक लाभ मिल सकता है।

    हाल के संवादों में दोनों पक्षों ने व्यापारिक प्रक्रियाओं को अधिक आसान बनाने और निवेश के नए अवसर तलाशने पर भी जोर दिया। आर्थिक मामलों के जानकारों का कहना है कि इस तरह के समझौते से व्यापारिक बाधाएं कम हो सकती हैं और कंपनियों को नए बाजारों तक पहुंचने में मदद मिल सकती है। भारत जैसे तेजी से बढ़ते बाजार और कनाडा की संसाधन क्षमता को देखते हुए दोनों देशों के बीच सहयोग की संभावनाएं काफी मजबूत मानी जा रही हैं।

    कृषि, प्रौद्योगिकी, विनिर्माण और रणनीतिक क्षेत्रों में सहयोग बढ़ने से उद्योग जगत को भी लाभ मिलने की संभावना जताई जा रही है। इसके अलावा दोनों देशों के व्यवसायों के लिए निवेश और विस्तार के नए अवसर भी तैयार हो सकते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि आर्थिक साझेदारी केवल व्यापार बढ़ाने का माध्यम नहीं होती, बल्कि यह दीर्घकालिक रणनीतिक संबंधों की नींव भी मजबूत करती है।

    वैश्विक स्तर पर कई देश नए आर्थिक गठजोड़ और व्यापारिक सहयोग की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। ऐसे समय में भारत और कनाडा का यह कदम अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक दृष्टिकोण से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। आने वाले महीनों में इस समझौते से जुड़ी बातचीत और उसकी प्रगति पर उद्योग जगत, निवेशकों और आर्थिक विशेषज्ञों की नजर बनी रह सकती है।

    फिलहाल दोनों देशों के बीच सकारात्मक संकेत दिखाई दे रहे हैं और यह माना जा रहा है कि यदि बातचीत इसी गति से आगे बढ़ती रही तो आने वाले समय में भारत और कनाडा के आर्थिक रिश्ते एक नए और मजबूत दौर में प्रवेश कर सकते हैं।

  • वैश्विक व्यापार में भरोसे के लिए पीयूष गोयल ने सदस्य देशों से सर्वसम्मति की अपील..

    वैश्विक व्यापार में भरोसे के लिए पीयूष गोयल ने सदस्य देशों से सर्वसम्मति की अपील..


    नई दिल्ली:  Piyush Goyal ने कैमरून के Yaounde में आयोजित विश्व व्यापार संगठन की 14वीं मंत्रीस्तरीय बैठक (MC14) के दूसरे दिन भारत का नेतृत्व करते हुए सर्वसम्मति आधारित फैसलों पर जोर दिया उन्होंने कहा कि किसी भी देश पर ऐसे नियम नहीं थोपे जाने चाहिए जिनसे वह सहमत न हो

    गोयल ने मौजूदा गतिरोध को खत्म करने और सदस्य देशों के बीच भरोसा दोबारा बनाने की जरूरत बताई उन्होंने कहा कि डब्ल्यूटीओ में चर्चाएं पूरी तरह पारदर्शी, समावेशी और सदस्य देशों के नेतृत्व में होनी चाहिए और अगर संस्थागत ढांचे में बिखराव हुआ तो वैश्विक व्यापार प्रणाली कमजोर हो जाएगी

    भारत ने समान अवसर (level playing field) बनाए रखने की बात की और कहा कि उरुग्वे दौर से उत्पन्न असमानताओं को दूर करना जरूरी है साथ ही खाद्य सुरक्षा, पब्लिक स्टॉकहोल्डिंग (PSH), स्पेशल सेफगार्ड मैकेनिज्म (SSM) और कपास जैसे लंबित मुद्दों को प्राथमिकता देने की बात कही गई

    डब्ल्यूटीओ के विवाद निपटान तंत्र की कमजोर स्थिति पर भारत ने चिंता जताई और कहा कि सही तरीके से फैसले नहीं होंगे तो नियम लागू नहीं हो पाएंगे और इसका सबसे अधिक असर छोटे देशों पर पड़ेगा इसके अलावा पारदर्शिता के नाम पर व्यापारिक जवाबी कार्रवाई या घरेलू नीतियों को चुनौती देने के प्रयासों पर सावधानी बरतने को कहा गया

    बैठक में Rajesh Aggarwal ने डब्ल्यूटीओ सुधारों को समयबद्ध तरीके से आगे बढ़ाने और स्पष्ट लक्ष्य तय करने की आवश्यकता पर बल दिया

    पीयूष गोयल ने इस दौरान अमेरिका, चीन, दक्षिण कोरिया, स्विट्जरलैंड, न्यूजीलैंड, कनाडा, मोरक्को और ओमान के प्रतिनिधियों से अलग-अलग मुलाकात भी की जिसमें व्यापार संबंधों को मजबूत करने पर चर्चा हुई

    यह डब्ल्यूटीओ सम्मेलन 26 मार्च से शुरू होकर 29 मार्च तक चलेगा और इसमें वैश्विक व्यापार की दिशा तय करने वाले कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा की जाएगी

  • भारत-अमेरिका ट्रेड डील: तेल खरीदने की रणनीति पर गोयल ने दिया स्पष्टीकरण

    भारत-अमेरिका ट्रेड डील: तेल खरीदने की रणनीति पर गोयल ने दिया स्पष्टीकरण


    नई दिल्ली। केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने भारत और अमेरिका के बीच हाल ही में हुई ट्रेड डील पर अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि अमेरिका से तेल खरीदना भारत के रणनीतिक हित में है, क्योंकि इससे देश को स्रोत में विविधता मिलती है। वहीं, रूसी तेल को लेकर उन्होंने स्पष्ट जवाब देने से बचते हुए कहा कि इस मामले में विदेश मंत्रालय अधिक उपयुक्त जवाब दे सकता है।

    तेल खरीद निर्णय खरीददारों पर निर्भर

    गोयल ने कहा, अमेरिका से कच्चा तेल, एलएनजी या एलपीजी खरीदना रणनीतिक हित में है। लेकिन यह फैसला घरेलू खरीदार खुद ही लेते हैं। ट्रेड डील यह तय नहीं करती कि कौन किससे क्या खरीदेगा। उन्होंने बताया कि व्यापार समझौते का उद्देश्य दोनों देशों के बीच कारोबार को आसान बनाना और विशेष पहुंच प्रदान करना है। गोयल ने कहा, “एफ़टीए का मतलब ही होता है कि प्रतिस्पर्धियों की तुलना में विशेष पहुंच मिले। जब हम पर 18 प्रतिशत का पारस्परिक शुल्क है, तो हमें दूसरे विकासशील देशों पर बढ़त मिलती है।

    500 अरब डॉलर का व्यापार भी कोई चुनौती नहीं
    मीडिया से बातचीत में गोयल ने कहा कि भारत अगले पांच वर्षों में अमेरिका से 500 अरब डॉलर मूल्य के उत्पाद खरीदने में सक्षम है। उन्होंने इसे अत्यंत रूढ़िवादी आंकड़ा बताया। इसके अंतर्गत ऊर्जा उत्पाद, विमान और उनके पुर्जे, कीमती धातुएं, प्रौद्योगिकी उत्पाद और कोकिंग कोयला शामिल हैं। गोयल ने कहा, “तेल, एलएनजी, एलपीजी और कच्चे तेल के अलावा केवल विमानन क्षेत्र के लिए ही कम से कम 100 अरब डॉलर से अधिक की आवश्यकता होगी।

    डील का रणनीतिक महत्व
    साथ ही उन्होंने बताया कि वर्तमान में भारत अमेरिका से लगभग 300 अरब डॉलर मूल्य के ऐसे सामान आयात कर सकता है, जो अब तक अन्य देशों से खरीदे जा रहे थे। यह समझौता दोनों देशों के बीच व्यापारिक संबंधों को गति देने और प्रतिस्पर्धा में बढ़त दिलाने के लिए किया गया है।