Tag: POCSO case

  • नाबालिग से कथित अभद्रता पर भाजपा मंडल अध्यक्ष पर केस, कमल चौहान ने वीडियो जारी कर मांगी निष्पक्ष जांच

    नाबालिग से कथित अभद्रता पर भाजपा मंडल अध्यक्ष पर केस, कमल चौहान ने वीडियो जारी कर मांगी निष्पक्ष जांच


    इंदौर । इंदौर के कनकेश्वरी गरबा पंडाल में 15 वर्षीय नाबालिग बालिका के साथ कथित अभद्रता और धक्का-मुक्की का मामला लगातार चर्चा में है। इस मामले में भाजपा मंडल अध्यक्ष कमल चौहान के खिलाफ हीरा नगर पुलिस द्वारा प्रकरण दर्ज किए जाने के बाद उनका वीडियो सामने आया है। वीडियो में कमल चौहान अपनी सफाई देते हुए निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि यदि वह दोषी साबित होते हैं तो उन्हें कड़ी सजा दी जाए। उनके इस बयान के बाद मामले को लेकर बहस और तेज हो गई है।
    जानकारी के मुताबिक कनकेश्वरी गरबा पंडाल में नाबालिग बालिका के साथ कथित अभद्रता और धक्का-मुक्की का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था। वीडियो सामने आने के बाद विवाद बढ़ा और मामले में कार्रवाई की मांग उठने लगी। इसके बाद हीरा नगर पुलिस ने कमल चौहान के खिलाफ प्रकरण दर्ज किया। मामले में पॉक्सो कानून के तहत कार्रवाई की बात सामने आने के बाद इसकी गंभीरता को लेकर भी चर्चा तेज हो गई है। हालांकि आरोपों की अंतिम पुष्टि जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगी।
    प्रकरण दर्ज होने के बाद कमल चौहान ने अपना पक्ष रखते हुए वीडियो जारी किया। उन्होंने दावा किया कि बालिका के पिता शराब के नशे में पंडाल पहुंचे थे और बालिका भी आयोजन स्थल के अंदर आने का प्रयास कर रही थी। कमल चौहान ने कहा कि वह कई वर्षों से गरबा आयोजन में सेवाएं देते आ रहे हैं। उन्होंने अपनी ओर से हुई गलती के लिए माफी मांगते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से मामले की निष्पक्ष जांच कराने की अपील की।
    अपने बयान में कमल चौहान ने यह भी कहा कि यदि जांच में वह दोषी पाए जाते हैं तो उन्हें राजवाड़ा चौराहे पर फांसी पर लटका दिया जाए। उनके इस बयान को लेकर सोशल मीडिया पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। एक ओर कमल चौहान अपनी सफाई और निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं तो दूसरी ओर लोग नाबालिग से जुड़े मामले में तथ्यों के आधार पर कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।
    इस मामले में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की आयोजन में मौजूदगी को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। खबर के अनुसार घटना के कुछ समय बाद मुख्यमंत्री इसी गरबा आयोजन में पहुंचे थे और उन्होंने कन्या पूजन किया था। इसके बाद यह सवाल उठ रहा है कि घटना की जानकारी मुख्यमंत्री तक समय पर पहुंची थी या नहीं और पुलिस कार्रवाई में देरी क्यों हुई। इन सवालों पर स्थिति जांच और संबंधित अधिकारियों के बयान के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
    मामले को लेकर सोशल मीडिया पर सरकार की कार्रवाई और कानून व्यवस्था को लेकर भी बहस हो रही है। कुछ लोग इस घटना की तुलना उत्तर प्रदेश की कानून व्यवस्था से कर रहे हैं। हालांकि किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले जांच के तथ्यों का सामने आना जरूरी है। नाबालिग से जुड़े इस संवेदनशील मामले में निष्पक्ष जांच और कानून के अनुसार कार्रवाई महत्वपूर्ण है। फिलहाल कमल चौहान के खिलाफ दर्ज प्रकरण में आरोपों की पुष्टि होना बाकी है और आगे की कार्रवाई पर सबकी नजर बनी हुई है।

  • दिल्ली में ट्यूशन टीचर की शर्मनाक करतूत, दो साल तक छात्रा का यौन शोषण करने का आरोप, गर्भवती होने पर खुला राज

    दिल्ली में ट्यूशन टीचर की शर्मनाक करतूत, दो साल तक छात्रा का यौन शोषण करने का आरोप, गर्भवती होने पर खुला राज


    नई दिल्ली। दिल्ली के जहांगीरपुरी इलाके में दसवीं कक्षा की 16 वर्षीय छात्रा के साथ कथित यौन शोषण का गंभीर मामला सामने आया है। छात्रा ने अपने ट्यूशन टीचर पर करीब दो साल तक दुष्कर्म करने का आरोप लगाया है। पीड़िता के गर्भवती होने के बाद इस पूरे मामले का खुलासा हुआ। शिकायत के आधार पर पुलिस ने आरोपी के खिलाफ दुष्कर्म मारपीट और पॉक्सो अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस आरोपी की तलाश कर रही है। इस घटना ने एक बार फिर बच्चों की सुरक्षा और उनके भरोसे का फायदा उठाकर किए जाने वाले अपराधों को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
    पुलिस के मुताबिक पीड़िता अपने परिवार के साथ जहांगीरपुरी क्षेत्र में रहती है और स्थानीय सरकारी स्कूल में दसवीं कक्षा की पढ़ाई कर रही है। उसके पिता फैक्ट्री में काम करते हैं जबकि मां घरों में साफ सफाई का काम करके परिवार का सहयोग करती हैं। बेटी की पढ़ाई बेहतर तरीके से हो सके इसके लिए परिजनों ने पड़ोस में रहने वाले मंथन नाम के ट्यूशन टीचर से संपर्क किया था। आरोपी करीब तीन साल से छात्रा को पढ़ा रहा था। परिवार को उस पर भरोसा था लेकिन छात्रा की शिकायत के अनुसार इसी भरोसे का कथित तौर पर गलत फायदा उठाया गया।
    पीड़िता ने पुलिस को बताया कि करीब दो साल पहले आरोपी उसे प्रैक्टिकल की पढ़ाई कराने के बहाने जीटीबी नगर स्थित एक होटल में ले गया था। वहां उसके साथ कथित तौर पर दुष्कर्म किया गया और वीडियो भी बनाया गया। छात्रा का आरोप है कि आरोपी ने घटना के बारे में किसी को बताने पर वीडियो वायरल करने और परीक्षा में फेल कराने की धमकी दी थी। इस डर के कारण वह लंबे समय तक चुप रही। शिकायत के मुताबिक आरोपी उसे बार बार होटल ले जाता था और उसके साथ यौन शोषण करता था। छात्रा ने इस स्थिति से बाहर निकलने की कोशिश भी की लेकिन धमकियों के कारण वह अपने परिजनों को पूरी बात बताने का साहस नहीं जुटा सकी।
    इस दौरान छात्रा ने ट्यूशन जाने से इनकार करना शुरू कर दिया था। हालांकि परिजनों को शुरुआत में लगा कि वह पढ़ाई से बचने के लिए ऐसा कर रही है। उन्हें इस बात का अंदाजा नहीं था कि बेटी किसी गंभीर परेशानी से गुजर रही है। ऐसी परिस्थितियों में बच्चों के व्यवहार में अचानक बदलाव को गंभीरता से लेना और उनसे सहज तरीके से बात करना बेहद जरूरी हो जाता है ताकि वे बिना डर के अपनी परेशानी साझा कर सकें।
    पीड़िता के मुताबिक आरोपी उसे आखिरी बार 30 सितंबर को जीटीबी नगर स्थित होटल ले गया था। इसके कुछ दिन बाद 3 अक्टूबर को उसे पेट में दर्द होने लगा। परिजन उसे डॉक्टर के पास लेकर पहुंचे जहां जांच के दौरान उसके गर्भवती होने की जानकारी मिली। इसके बाद परिवार को मामले की गंभीरता का पता चला और उन्होंने पुलिस से संपर्क किया। गुरुवार को छात्रा ने मुखर्जी नगर थाने में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने शिकायत के आधार पर मामला दर्ज कर आरोपी की तलाश शुरू कर दी है। मामले में जांच के बाद आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
    इसी बीच दिल्ली के नेताजी सुभाष प्लेस इलाके में घरेलू सहायिका के साथ कथित दुष्कर्म का एक अलग मामला भी सामने आया है। पुलिस के अनुसार असम के शोणितपुर जिले की रहने वाली 22 वर्षीय युवती को प्लेसमेंट एजेंसी के माध्यम से करीब 20 दिन पहले संदेश विहार स्थित एक फ्लैट में घरेलू काम के लिए रखा गया था। युवती का आरोप है कि फ्लैट मालिक के 58 वर्षीय बेटे राजेश करनानी ने मंगलवार को उसके साथ दुष्कर्म किया और जान से मारने की धमकी दी। घटना के बाद युवती फ्लैट से निकलकर अपने परिचितों के पास पहुंची और बुधवार को पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। इस मामले में भी पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
    दिल्ली में सामने आए इन दोनों मामलों में पुलिस की जांच और कानूनी प्रक्रिया महत्वपूर्ण होगी। खासकर नाबालिगों से जुड़े मामलों में पीड़ित की पहचान और निजता की रक्षा करना जरूरी है। बच्चों को सुरक्षित माहौल देना परिवार और समाज दोनों की जिम्मेदारी है। किसी भी तरह की धमकी या शोषण की आशंका होने पर समय रहते पुलिस और संबंधित सहायता सेवाओं तक पहुंचना जरूरी है।

  • सिंगरौली में मासूम के साथ कथित अत्याचार का मामला, बिगड़ी बच्ची की तबीयत, अस्पताल में डॉक्टरों की निगरानी में उपचार जारी

    सिंगरौली में मासूम के साथ कथित अत्याचार का मामला, बिगड़ी बच्ची की तबीयत, अस्पताल में डॉक्टरों की निगरानी में उपचार जारी


    सिंगरौली । सिंगरौली में 8 साल की मासूम से कथित प्रताड़ना का मामला, गंभीर हालत में अस्पताल में इलाज जारी
    मध्यप्रदेश के सिंगरौली जिले के चितरंगी थाना क्षेत्र में आठ वर्षीय बालिका के साथ कथित दुष्कर्म और शारीरिक प्रताड़ना का गंभीर मामला सामने आया है। शिकायत में बालिका के पिता पर दुष्कर्म करने का आरोप लगाया गया है जबकि उसकी सौतेली मां पर मारपीट करने और गर्म चिमटे से प्रताड़ित करने के आरोप हैं। बालिका की तबीयत लगातार बिगड़ने के बाद उसे जिला चिकित्सालय सह ट्रामा सेंटर में भर्ती कराया गया है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक उसे गंभीर संक्रमण और दोनों किडनियों में पथरी की समस्या है। फिलहाल चिकित्सकों की निगरानी में उसका उपचार जारी है। मामले में बालिका की सुरक्षा और पुनर्वास को लेकर बाल कल्याण समिति तथा संबंधित अधिकारी भी निगरानी कर रहे हैं।

    शिकायत के मुताबिक ग्राम गुलहरिया निवासी प्रेम सिंह गोड़ ने अपनी आठ वर्षीय भतीजी के लापता होने के बाद उसकी तलाश शुरू की थी। 22 अगस्त 2026 को उन्हें सूचना मिली कि बालिका झगरौहा स्कूल के पास मौजूद है। वहां पहुंचने के बाद बालिका ने घर से चले आने की वजह बताते हुए कथित प्रताड़ना की जानकारी दी। शिकायत में आरोप लगाया गया कि करीब दो महीने पहले उसकी सौतेली मां ने रात के समय गर्म चिमटे से उसे दागा था। इसके अलावा मारपीट करने पर्याप्त भोजन नहीं देने और घर से निकालने जैसे आरोप भी लगाए गए। बालिका के पिता पर भी गंभीर आरोप दर्ज कराए गए। इन आरोपों के संबंध में पुलिस की कार्रवाई और जांच की स्थिति महत्वपूर्ण है।

    मामले की जानकारी सामने आने के बाद बालिका को संरक्षण देने के लिए प्रशासन ने कदम उठाए। कलेक्टर गौरव बैनल के निर्देशन में उसे बाल कल्याण समिति सिंगरौली की देखरेख में जिला चिकित्सालय सह ट्रामा सेंटर में भर्ती कराया गया। बाद में देखभाल और सुरक्षा के लिए वन स्टॉप सेंटर में व्यवस्था की गई। अधिकारियों के मुताबिक बालिका को भोजन चिकित्सा सुविधा और सुरक्षित आश्रय उपलब्ध कराने के प्रयास किए गए। उसकी पढ़ाई जारी रखने के उद्देश्य से उसे डे केयर ओएसएच से भी जोड़ा गया। बाल कल्याण समिति के अध्यक्ष राम दयाल पाण्डेय और अन्य सदस्यों सहित बाल संरक्षण से जुड़े कर्मियों ने उसकी देखरेख में सहयोग किया।

    बालिका के स्वास्थ्य में कुछ सुधार होने पर 10 सितंबर 2026 को उसे वीरांगना रानी दुर्गावती कन्या आश्रयशाला बंजारी में दाखिल कराया गया था। हालांकि कुछ समय बाद तेज पेट दर्द की शिकायत के चलते उसे फिर अस्पताल लाना पड़ा। उपलब्ध जानकारी के अनुसार जांच में पित्ताशय में बड़ी पथरी होने का पता चला। जिला चिकित्सालय के सर्जन डॉ. बालेन्दु शाह ने ऑपरेशन कर पथरी निकाली। इसके बाद हालत में कुछ सुधार होने पर बालिका को दोबारा आश्रयशाला भेजा गया।

    लेकिन कुछ दिनों बाद उसकी तबीयत फिर बिगड़ गई। उसे यूरिन संक्रमण की शिकायत हुई और पेशाब में खून आने की जानकारी सामने आई। आगे की जांच में दोनों किडनियों में पथरी और निजी अंगों में गंभीर संक्रमण की बात बताई गई। इन स्वास्थ्य समस्याओं के चलते बालिका को दोबारा जिला चिकित्सालय सह ट्रामा सेंटर में भर्ती कराया गया है। फिलहाल उसका उपचार जारी है और स्वास्थ्य को लेकर चिकित्सकीय निगरानी रखी जा रही है।

    शिकायत के बाद पुलिस ने बालिका के पिता हीरा सिंह गोड़ और सौतेली मां सविता सिंह गोड़ की तलाश शुरू की थी। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक पिता की आत्महत्या से मौत हो गई जबकि सौतेली मां के फरार होने की बात सामने आई है। उनकी वर्तमान स्थिति और मामले में आगे की कार्रवाई के बारे में आधिकारिक जानकारी सामने आना बाकी है। फिलहाल प्राथमिकता बालिका को बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने उसकी सुरक्षा सुनिश्चित करने और शिक्षा सहित दीर्घकालीन पुनर्वास की व्यवस्था बनाए रखने की है। बालिका की पहचान गोपनीय रखना भी आवश्यक है।


  • इंदौर में इंस्टाग्राम की दोस्ती का खौफनाक अंजाम, शादी का वादा कर युवती को बुलाया और फिर नंबर कर दिया ब्लॉक

    इंदौर में इंस्टाग्राम की दोस्ती का खौफनाक अंजाम, शादी का वादा कर युवती को बुलाया और फिर नंबर कर दिया ब्लॉक


    इंदौर । इंदौर में इंस्टाग्राम के जरिए शुरू हुई दोस्ती के बाद शादी का भरोसा देकर मुंबई की 25 वर्षीय युवती को इंदौर बुलाने और उसके साथ दुष्कर्म करने का मामला सामने आया है। युवती ने आरोप लगाया है कि युवक ने शादी का वादा कर उसे इंदौर बुलाया और होटल में उसके साथ शारीरिक संबंध बनाए। इसके बाद कुछ समय तक शादी को लेकर बातचीत करता रहा लेकिन बाद में अचानक दूरी बना ली। आरोप है कि युवक ने पिछले कुछ दिनों से युवती से बातचीत बंद कर दी और उसका मोबाइल नंबर भी ब्लॉक कर दिया। इसके बाद युवती मुंबई से इंदौर पहुंची और पुलिस से शिकायत की। लसूड़िया पुलिस ने आरोपी नयन सिंह चंदेल के खिलाफ केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

    पुलिस के अनुसार करीब छह महीने पहले युवती की इंस्टाग्राम के जरिए नयन सिंह चंदेल से दोस्ती हुई थी। सोशल मीडिया पर बातचीत धीरे धीरे बढ़ी और दोनों के बीच मोबाइल नंबर भी साझा हुए। इसके बाद दोनों लगातार संपर्क में रहने लगे। युवती के मुताबिक बातचीत के दौरान नयन ने उससे शादी करने का भरोसा दिलाया था। इसी भरोसे के बाद वह 22 अगस्त को मुंबई से इंदौर आई।

    आरोप है कि इंदौर पहुंचने के बाद नयन उसे एम्ब्रोसिया होटल लेकर गया। यहां उसने शादी का भरोसा देकर युवती के साथ शारीरिक संबंध बनाए। युवती का कहना है कि उसे उम्मीद थी कि दोनों जल्द शादी करेंगे। घटना के बाद भी कुछ समय तक उनके बीच बातचीत जारी रही।

    पुलिस के मुताबिक सितंबर में नयन युवती से मिलने मुंबई भी गया था। वहां दोनों के बीच शादी को लेकर बातचीत हुई। इसके बाद नयन वापस इंदौर आ गया। युवती के अनुसार कुछ समय बाद उसके व्यवहार में बदलाव आने लगा। पिछले करीब 15 दिनों से उसने बातचीत करना बंद कर दिया और मोबाइल नंबर भी ब्लॉक कर दिया। संपर्क टूटने के बाद युवती खुद इंदौर पहुंची और लसूड़िया थाने में शिकायत दर्ज कराई।

    पुलिस ने युवती की शिकायत के आधार पर दुष्कर्म से संबंधित धाराओं में मामला दर्ज किया है। अब पुलिस आरोपी और युवती के बीच हुई बातचीत तथा घटनाक्रम से जुड़े अन्य तथ्यों की जांच कर रही है। पुलिस का कहना है कि जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

    इसी बीच इंदौर के परदेशीपुरा थाना क्षेत्र में नाबालिग छात्रा से छेड़छाड़ का एक अलग मामला भी सामने आया है। पुलिस ने 17 वर्षीय छात्रा की शिकायत पर किराना दुकान संचालक संजय तिवारी के खिलाफ पॉक्सो एक्ट और छेड़छाड़ की धाराओं में केस दर्ज किया है।

    पुलिस के अनुसार छात्रा अपनी भाभी के साथ किराना दुकान पर सामान लेने गई थी। आरोप है कि इसी दौरान दुकानदार ने उसे आई लव यू लिखा हुआ पेन दिया और फिर उसका हाथ दबाया। घटना से घबराई छात्रा घर पहुंची और भाभी को पूरी बात बताई। बाद में मां के घर लौटने पर छात्रा ने उन्हें भी घटना की जानकारी दी। इसके बाद परिजन छात्रा को लेकर थाने पहुंचे। पुलिस ने शिकायत के आधार पर मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

  • मासूम छात्रा की मौत ने भड़काया गुस्सा, शिक्षक और भाई सलाखों के पीछे; शिक्षा विभाग ने किया सस्पेंड

    मासूम छात्रा की मौत ने भड़काया गुस्सा, शिक्षक और भाई सलाखों के पीछे; शिक्षा विभाग ने किया सस्पेंड


    नई दिल्ली। जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ जिले में 14 वर्षीय नाबालिग छात्रा की मौत के बाद सनसनी फैल गई है। छात्रा की गर्भावस्था और उसकी मौत को लेकर एक सरकारी स्कूल के शिक्षक पर गंभीर आरोप लगे हैं। पुलिस ने मामले में शिक्षक खालिद हुसैन शेख और उसके भाई तारिक हुसैन को गिरफ्तार किया है। आरोपी शिक्षक किश्तवाड़ के बुमालपोरा मिडिल स्कूल में शिक्षक ग्रेड-द्वितीय के पद पर तैनात था और प्रभारी हेडमास्टर की जिम्मेदारी भी संभाल रहा था। शिक्षा विभाग ने गिरफ्तारी के बाद उसे निलंबित कर दिया है। मामले की जांच जारी है।

    पुलिस के अनुसार छात्रा को गर्भावस्था से जुड़ी चिकित्सीय प्रक्रिया के लिए किश्तवाड़ से बाहर ले जाया जा रहा था। रास्ते में उसकी हालत गंभीर हो गई और बाद में उसने दम तोड़ दिया। अलग-अलग रिपोर्टों में गर्भावस्था की अवधि को लेकर अलग जानकारी सामने आई है। पोस्टमार्टम से गर्भावस्था की पुष्टि हुई है। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि छात्रा गर्भवती कैसे हुई और उसकी मौत से पहले उसके साथ क्या परिस्थितियां बनीं।

    परिवार की शिकायत के आधार पर पुलिस ने शिक्षक के खिलाफ पॉक्सो समेत कई गंभीर धाराओं में मामला दर्ज किया है। पुलिस जांच में यौन शोषण और गर्भावस्था से जुड़े आरोपों की पड़ताल की जा रही है। आरोपी शिक्षक और उसके भाई को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि मामले के सभी पहलुओं की जांच की जा रही है और आगे की कार्रवाई उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर होगी।

    घटना के बाद शिक्षा विभाग ने भी तत्काल कार्रवाई की है। मुख्य शिक्षा अधिकारी किश्तवाड़ ने आरोपी शिक्षक को सेवा से निलंबित कर दिया है। निलंबन आदेश में दर्ज एफआईआर और शिक्षक के पुलिस हिरासत में होने का हवाला दिया गया है। विभागीय स्तर पर भी मामले की जांच की जा रही है। रिपोर्टों के अनुसार छात्रा कुछ समय से स्कूल नहीं आ रही थी। इस पहलू की भी जांच की जा रही है कि उसकी अनुपस्थिति के बावजूद स्कूल और संबंधित अधिकारियों की ओर से क्या कार्रवाई की गई थी।

    घटना सामने आने के बाद किश्तवाड़ और छात्रू क्षेत्र में लोगों का गुस्सा फूट पड़ा। स्थानीय लोगों ने प्रदर्शन कर मामले की निष्पक्ष और गहन जांच की मांग की। कई स्थानों पर बाजार बंद रहे और प्रदर्शनकारियों ने आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्र

    वाई की मांग उठाई। सामाजिक संगठनों और स्थानीय लोगों ने मामले की न्यायिक जांच तथा दोषियों को कड़ी सजा देने की मांग की है।

    इस घटना ने नाबालिगों की सुरक्षा और स्कूलों में बच्चों के संरक्षण को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े किए हैं। शिक्षक और छात्र के बीच भरोसे का रिश्ता होता है और इसी कारण शिक्षक पर लगे ऐसे आरोप बेहद गंभीर माने जा रहे हैं। हालांकि मामले की जांच अभी शुरुआती चरण में है और अदालत में आरोपों की पुष्टि होना बाकी है। इसलिए आरोपी के खिलाफ लगे आरोपों को जांच के निष्कर्ष और न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर ही देखा जाना चाहिए।

    फिलहाल पुलिस का मुख्य फोकस छात्रा की मौत की पूरी परिस्थितियों को सामने लाने और उसके साथ कथित यौन शोषण से जुड़े सभी पहलुओं की जांच करने पर है। पुलिस ने संबंधित साक्ष्य जुटाए हैं और आरोपियों से पूछताछ जारी है। किश्तवाड़ में इस घटना को लेकर आक्रोश बना हुआ है और लोग पीड़ित परिवार के लिए न्याय तथा दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।

  • हबीबगंज पुलिस की दो बड़ी चूक कोर्ट में उजागर, एक केस 5 साल गलत कोर्ट में चला, पॉक्सो में दो आरोपी बरी

    हबीबगंज पुलिस की दो बड़ी चूक कोर्ट में उजागर, एक केस 5 साल गलत कोर्ट में चला, पॉक्सो में दो आरोपी बरी


    मध्य प्रदेश। भोपाल की हबीबगंज थाना पुलिस की विवेचना में हुई गंभीर लापरवाहियां अदालत में उजागर हुई हैं। दो अलग-अलग मामलों में पुलिस की जांच प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए अदालत ने एक मामले में पांच वर्षों से चल रहे ट्रायल को निरस्त कर किशोर न्याय बोर्ड भेजने के निर्देश दिए, जबकि दूसरे पॉक्सो प्रकरण में विवेचना की गंभीर खामियों के चलते दोनों आरोपियों को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया। इन दोनों मामलों ने पुलिस की जांच प्रक्रिया और दस्तावेजी कार्रवाई की विश्वसनीयता पर गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं।

    पहला मामला वर्ष 2021 के एक मारपीट प्रकरण से जुड़ा है। पुलिस ने घटना के समय 17 वर्षीय किशोर को बालिग मानकर गिरफ्तार किया और उसके खिलाफ नियमित सत्र न्यायालय में चालान पेश कर दिया। इसके बाद करीब पांच वर्षों तक नियमित अदालत में ट्रायल चलता रहा। जब मामला अंतिम बहस के दौर में पहुंचा तो बचाव पक्ष ने अदालत के सामने किशोर की वास्तविक उम्र से जुड़े दस्तावेज पेश किए।

    सुनवाई के दौरान यह तथ्य सामने आया कि गिरफ्तारी से पहले ही किशोर के आधार कार्ड की प्रति थाने में जमा कराई जा चुकी थी, जिसमें उसकी जन्मतिथि 14 मार्च 2004 दर्ज थी। इसके बावजूद पुलिस ने उसे बालिग बताते हुए नियमित अदालत में चार्जशीट दाखिल कर दी, जबकि कानून के अनुसार मामला किशोर न्याय बोर्ड के समक्ष प्रस्तुत किया जाना चाहिए था।

    अदालत ने जन्मतिथि की पुष्टि के लिए माता-पिता और संबंधित ग्राम पंचायत सचिव के बयान दर्ज किए। मूल जन्म रजिस्टर के आधार पर यह प्रमाणित हुआ कि घटना के समय किशोर की उम्र 17 वर्ष से कुछ अधिक थी। इसके बाद अदालत ने नियमित न्यायालय में चल रही कार्यवाही समाप्त करते हुए थाना प्रभारी को सभी दस्तावेज किशोर न्याय बोर्ड में प्रस्तुत करने के निर्देश दिए। वहीं सह-आरोपी के खिलाफ मुकदमे की सुनवाई जारी रहेगी।

    दूसरा मामला 15 वर्षीय किशोरी से दुष्कर्म के आरोप से जुड़ा था। विशेष पॉक्सो अदालत में सुनवाई के दौरान पुलिस की जांच में कई गंभीर कमियां सामने आईं। विवेचना अधिकारी ने दावा किया कि पीड़िता को बेंगलुरु से बरामद किया गया था, लेकिन इस कार्रवाई से संबंधित कोई आधिकारिक रिकॉर्ड अदालत में प्रस्तुत नहीं किया गया। इतना ही नहीं, बेंगलुरु की स्थानीय पुलिस को भी बरामदगी की सूचना नहीं दी गई थी।

    अदालत ने यह भी पाया कि कथित बरामदगी पंचनामे पर मुख्य आरोपी के हस्ताक्षर तक नहीं कराए गए। इन परिस्थितियों में अदालत ने माना कि जांच प्रक्रिया में गंभीर खामियां हैं और बचाव पक्ष द्वारा लगाए गए आरोपों को पूरी तरह नकारा नहीं जा सकता। इसी आधार पर दोनों आरोपियों को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया गया।

    अदालत ने यह भी उल्लेख किया कि पीड़िता द्वारा आरोप लगाने के बावजूद मुख्य आरोपी की गिरफ्तारी तत्काल नहीं की गई। रिकॉर्ड के अनुसार पीड़िता की बरामदगी के तीन दिन बाद आरोपी को केवल नोटिस देकर गिरफ्तार किया गया, जबकि दूसरे आरोपी की गिरफ्तारी भी कई दिन बाद हुई। इस देरी और जांच प्रक्रिया की कमियों ने अभियोजन पक्ष के मामले को कमजोर कर दिया।

    इन दोनों मामलों ने स्पष्ट किया है कि विवेचना में छोटी-सी लापरवाही भी न्यायिक प्रक्रिया को वर्षों तक प्रभावित कर सकती है। अदालत के फैसलों ने यह संदेश दिया है कि जांच एजेंसियों के लिए कानूनी प्रक्रिया, दस्तावेजी साक्ष्य और निर्धारित नियमों का पालन करना अनिवार्य है, क्योंकि जांच में हुई त्रुटियों का सीधा असर न्याय मिलने की प्रक्रिया पर पड़ता है।

  • धमकी देकर नाबालिग से दुष्कर्म, रीवा में आरोपी गिरफ्तार कर जेल भेजा गया

    धमकी देकर नाबालिग से दुष्कर्म, रीवा में आरोपी गिरफ्तार कर जेल भेजा गया


    मध्यप्रदेश । रीवा शहर के अमहिया थाना क्षेत्र में नाबालिग से दुष्कर्म का गंभीर मामला सामने आया है। आरोप है कि एक युवक लंबे समय तक जान से मारने की धमकी देकर पीड़िता का शोषण करता रहा। लगातार डर और दबाव में रहने के बाद पीड़िता ने हिम्मत जुटाकर पुलिस से शिकायत की, जिसके बाद आरोपी को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया।

    पुलिस के अनुसार, पीड़िता ने 1 जून को अमहिया थाने में पहुंचकर शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में उसने बताया कि क्षेत्र निवासी सरताज अंसारी उसे लगातार धमकाता था और इसी डर का फायदा उठाकर उसके साथ दुष्कर्म करता रहा। पीड़िता के बयान के आधार पर पुलिस ने तुरंत मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी।

    मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने आरोपी की तलाश के लिए विशेष टीम गठित की और संभावित ठिकानों पर दबिश दी। कार्रवाई के दौरान पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ के बाद उसे न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उसे न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया गया।

    पुलिस ने आरोपी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धाराओं के साथ-साथ पॉक्सो एक्ट की धारा 5/6 के तहत प्रकरण दर्ज किया है। चूंकि पीड़िता नाबालिग है, इसलिए पूरे मामले की जांच पॉक्सो एक्ट के प्रावधानों के तहत की जा रही है।

    सूत्रों के अनुसार, पीड़िता लंबे समय से आरोपी की धमकियों के कारण चुप रही। बाद में परिवार को जानकारी मिलने पर मामला पुलिस तक पहुंचा। पुलिस अब घटना से जुड़े सभी पहलुओं की विस्तृत जांच कर रही है ताकि पूरी सच्चाई सामने लाई जा सके।

    पुलिस अधिकारियों का कहना है कि महिलाओं और बच्चों से जुड़े अपराधों में त्वरित कार्रवाई की जा रही है और पीड़ितों को समय पर न्याय दिलाने के लिए हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं।

  • 7 महीने तक किराए के कमरे में रखने का आरोप, आरोपी की तलाश जारी

    7 महीने तक किराए के कमरे में रखने का आरोप, आरोपी की तलाश जारी



    ग्वालियर। मध्य प्रदेश के ग्वालियर जिले से रिश्तों और भरोसे को शर्मसार करने वाली एक सनसनीखेज वारदात सामने आई है। यहां के महाराजपुरा थाना क्षेत्र में एक युवक द्वारा शादी का झांसा देकर नाबालिग लड़की के साथ लगातार दुष्कर्म किए जाने का मामला उजागर हुआ है। आरोपी ने न केवल नाबालिग को शादी का झूंठा दिलासा दिया, बल्कि समाज की नजरों से बचने के लिए उसे सात महीने तक एक किराए के कमरे में अपनी पत्नी बताकर रखा। जब पीड़िता ने शादी का दबाव बनाया, तो आरोपी अचानक उसे बेसहारा छोड़कर गायब हो गया और अपना मोबाइल फोन भी बंद कर लिया। पीड़िता की शिकायत पर पुलिस ने मुस्तैदी दिखाते हुए आरोपी के खिलाफ पॉक्सो एक्ट (POCSO Act) सहित विभिन्न गंभीर धाराओं में मामला दर्ज कर उसकी सरगर्मी से तलाश शुरू कर दी है।

    घटनाक्रम की शुरुआत करीब दो साल पहले हुई थी। पीड़ित 17 वर्षीय नाबालिग लड़की ने हजीरा थाने में अपनी आपबीती सुनाते हुए शिकायत दर्ज कराई है। पीड़िता के मुताबिक, उसका भाई डीजे (DJ) संचालन का काम करता है। इसी काम के सिलसिले में हजीरा थाना क्षेत्र के यादव धर्मकांटा का रहने वाला राहुल राठौर नाम का युवक उसके भाई के साथ काम करता था। भाई के साथ दोस्ती होने के कारण राहुल का पीड़िता के घर पर अक्सर आना-जाना होने लगा। इसी दौरान दोनों के बीच बातचीत शुरू हुई, जो धीरे-धीरे गहरी पहचान और फिर दोस्ती में बदल गई। समय बीतने के साथ ही यह दोस्ती प्रेम संबंधों में तब्दील हो गई, जिसका फायदा उठाने की साजिश आरोपी ने पहले ही रच ली थी।

    पीड़िता ने पुलिस को बताया कि आरोपी राहुल राठौर ने उसे अपने प्रेम जाल में फंसाकर शादी करने का पक्का वादा किया। इसके बाद वह उसे बहला-फुसलाकर धर्मकांटा इलाके के पास एक किराए के मकान में ले गया। बीते 2 अक्टूबर 2025 से वह नाबालिग को उसी कमरे में रखकर उसका शारीरिक शोषण कर रहा था। शातिर आरोपी ने मकान मालिक को शक न हो, इसलिए नाबालिग का परिचय अपनी ‘पत्नी’ के रूप में कराया था। इस दौरान जब भी नाबालिग उस पर सामाजिक रीति-रिवाज से शादी करने का दबाव बनाती या शारीरिक संबंध बनाने का विरोध करती, तो आरोपी राहुल जल्द ही शादी का मंडप सजाने की बात कहकर उसे चुप करा देता था। इसी बीच आरोपी ने डीजे का काम छोड़कर टमटम (ई-रिक्शा) चलाना भी शुरू कर दिया था ताकि वह गुजारा कर सके।

    विश्वासघात की पराकाष्ठा तब हुई जब बीते दिनों आरोपी राहुल अचानक नाबालिग को कमरे पर ही छोड़कर लापता हो गया। पीड़िता ने जब उससे संपर्क करने की कोशिश की, तो आरोपी का मोबाइल फोन लगातार बंद आने लगा। खुद को ठगा और अकेला पाकर पीड़िता न्याय की गुहार लेकर पुलिस स्टेशन पहुंची। महाराजपुरा थाना पुलिस ने मामले की संवेदनशीलता और पीड़िता के नाबालिग होने के कारण तुरंत ऐक्शन लिया। पुलिस ने आरोपी राहुल राठौर के खिलाफ बलात्कार और पॉक्सो अधिनियम के तहत आपराधिक प्रकरण दर्ज कर लिया है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि आरोपी के संभावित ठिकानों पर दबिश दी जा रही है और जल्द ही उसे सलाखों के पीछे भेजा जाएगा।

  • हैदराबाद में कार्रवाई तेज: बंडी संजय के बेटे पर POCSO आरोप, पुलिस ने किया गिरफ्तार

    हैदराबाद में कार्रवाई तेज: बंडी संजय के बेटे पर POCSO आरोप, पुलिस ने किया गिरफ्तार

    नई दिल्ली । देश की राजनीति और प्रशासनिक हलकों में उस समय हलचल तेज हो गई जब केंद्रीय मंत्री बंडी संजय कुमार के बेटे भगीरथ से जुड़े एक गंभीर मामले में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए उन्हें गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया। यह मामला कथित रूप से POCSO कानून से संबंधित आरोपों से जुड़ा हुआ है, जिसमें एक नाबालिग से जुड़े प्रकरण की शिकायत के आधार पर जांच आगे बढ़ाई गई है। पुलिस के अनुसार यह कार्रवाई कई दिनों से चल रही जांच और तकनीकी व भौतिक साक्ष्यों के आधार पर की गई है, जिसमें आरोपी की गतिविधियों पर नजर रखी जा रही थी।

    सूत्रों के अनुसार, पुलिस ने इस मामले में अलग-अलग टीमों का गठन कर विभिन्न स्थानों पर तलाशी अभियान चलाया। आरोपित की लोकेशन का पता लगाने के लिए लगातार निगरानी की जा रही थी और अंततः एक विशेष सूचना के आधार पर उसे हिरासत में लिया गया। गिरफ्तारी के बाद आरोपी को प्रारंभिक पूछताछ के लिए संबंधित थाने ले जाया गया, जहां पंच गवाहों की मौजूदगी में बयान दर्ज किए गए। पुलिस का कहना है कि पूछताछ के दौरान आरोपी ने कुछ तथ्यों पर अपना पक्ष रखा, जिसके बाद कानूनी प्रक्रिया के तहत उसे गिरफ्तार कर आगे की कार्रवाई की गई।

    इसके बाद आरोपी को चिकित्सकीय परीक्षण के लिए ले जाया गया और फिर न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया गया, जहां से उसे न्यायिक हिरासत में भेजने का आदेश दिया गया। इस पूरे घटनाक्रम के दौरान सुरक्षा व्यवस्था को भी कड़ा रखा गया ताकि किसी प्रकार की अव्यवस्था न हो। पुलिस अधिकारियों ने यह भी बताया कि मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए जांच को बेहद सावधानी और कानूनी प्रक्रिया के अनुसार आगे बढ़ाया जा रहा है।

    इस बीच, आरोपी पक्ष की ओर से यह दावा किया गया है कि मामला पूरी तरह से गलत समझ और व्यक्तिगत विवाद का परिणाम है। उनके अनुसार, आरोपों के पीछे कुछ पारिवारिक और वित्तीय विवाद भी हो सकते हैं, जिनकी जांच आवश्यक है। वहीं शिकायतकर्ता पक्ष का कहना है कि मामले में गंभीर आरोप हैं और निष्पक्ष जांच की आवश्यकता है ताकि सच्चाई सामने आ सके।

    घटना के बाद राजनीतिक गलियारों में भी प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं, जहां कुछ नेताओं ने निष्पक्ष जांच की मांग की है। वहीं प्रशासनिक स्तर पर यह स्पष्ट किया गया है कि कानून सभी के लिए समान है और जांच प्रक्रिया बिना किसी दबाव के पूरी की जाएगी।

    इस मामले में आगे की सुनवाई और जांच रिपोर्ट पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं। पुलिस का कहना है कि डिजिटल साक्ष्यों, बयान और अन्य पहलुओं की गहन जांच की जा रही है ताकि मामले की सच्चाई को पूरी तरह स्पष्ट किया जा सके। फिलहाल आरोपी न्यायिक हिरासत में है और मामला न्यायालय की निगरानी में आगे बढ़ रहा है।

  • फिल्म निर्देशक और विहिप नेता समेत चार पर पॉक्सो के तहत मुकदमा दर्ज..

    फिल्म निर्देशक और विहिप नेता समेत चार पर पॉक्सो के तहत मुकदमा दर्ज..

    नई दिल्ली। प्रयागराज कुंभ मेले के दौरान अपनी विशिष्ट आंखों की सुंदरता से रातों-रात इंटरनेट सनसनी बनी मध्य प्रदेश के खरगोन की एक युवती का मामला अब एक जटिल कानूनी मोड़ ले चुका है। हाल ही में केरल के कोच्चि में इस युवती ने एक सनसनीखेज कदम उठाते हुए फिल्म जगत के एक निर्देशक और एक प्रमुख सामाजिक संगठन के नेता सहित चार व्यक्तियों के खिलाफ गंभीर आपराधिक धाराओं में मुकदमा दर्ज कराया है। इस मामले ने तब और तूल पकड़ लिया जब युवती ने सार्वजनिक रूप से आकर अपनी आपबीती सुनाई और न्याय की गुहार लगाई। पुलिस प्रशासन ने मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए एर्नाकुलम सेंट्रल पुलिस स्टेशन में ‘जीरो एफआईआर’ दर्ज कर ली है, जिसे बाद में जांच के लिए संबंधित राज्य को हस्तांतरित किए जाने की संभावना है।

    युवती द्वारा लगाए गए आरोपों की फेहरिस्त काफी लंबी और गंभीर है। शिकायत में मुख्य रूप से एक फिल्म निर्देशक पर निशाना साधा गया है, जिन्होंने युवती को अपनी फिल्म में अभिनय का अवसर दिया था। पीड़िता का आरोप है कि फिल्म की शूटिंग के दौरान निर्देशक ने उसके साथ कई बार अमर्यादित और गलत व्यवहार किया। एक भावुक प्रेस वार्ता के दौरान युवती ने साझा किया कि कार्यस्थल पर सुरक्षा की कमी और निर्देशक के अनुचित व्यवहार ने उसे मानसिक रूप से काफी आहत किया है। इसके साथ ही, युवती ने एक वकील और संगठन से जुड़े नेता पर आरोप लगाया है कि उन्होंने सोशल मीडिया मंचों का उपयोग कर उसकी छवि को धूमिल करने और उसे बदनाम करने का सुनियोजित प्रयास किया है।

    इस पूरे घटनाक्रम के पीछे उम्र और वैवाहिक स्थिति को लेकर चल रहा विवाद भी एक मुख्य कड़ी है। एक ओर युवती का दावा है कि वह बालिग है और उसने अपनी मर्जी से केरल के एक मंदिर में अपने मित्र से विवाह किया है, वहीं दूसरी ओर मध्य प्रदेश में रह रहे उसके माता-पिता उसे नाबालिग बता रहे हैं। माता-पिता के दावों के आधार पर पूर्व में युवती के पति के खिलाफ अपहरण और अन्य धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया था। इस कानूनी खींचतान के बीच केरल उच्च न्यायालय ने युवती के पति को अस्थायी राहत प्रदान की है, लेकिन नए आरोपों ने इस विवाद को एक बिल्कुल नया आयाम दे दिया है।

    प्रशासनिक स्तर पर इस मामले की जांच अब दो राज्यों के बीच उलझती नजर आ रही है। चूंकि कथित घटनाओं का केंद्र मध्य प्रदेश बताया जा रहा है, इसलिए केरल पुलिस इस मामले के दस्तावेजों को मध्य प्रदेश पुलिस को सौंपने की प्रक्रिया पर विचार कर रही है। युवती ने अपनी सुरक्षा को लेकर भी चिंता जताई है और उच्चाधिकारियों से संरक्षण की मांग की है। यह मामला अब केवल एक व्यक्तिगत विवाद नहीं रह गया है, बल्कि इसमें कार्यस्थल पर सुरक्षा, सोशल मीडिया पर निजता का हनन और कानूनी उम्र के दस्तावेजों की वैधता जैसे कई महत्वपूर्ण सवाल जुड़ गए हैं, जिनका समाधान अब गहन अदालती जांच के बाद ही संभव हो पाएगा।