फिल्म निर्देशक और विहिप नेता समेत चार पर पॉक्सो के तहत मुकदमा दर्ज..

नई दिल्ली। प्रयागराज कुंभ मेले के दौरान अपनी विशिष्ट आंखों की सुंदरता से रातों-रात इंटरनेट सनसनी बनी मध्य प्रदेश के खरगोन की एक युवती का मामला अब एक जटिल कानूनी मोड़ ले चुका है। हाल ही में केरल के कोच्चि में इस युवती ने एक सनसनीखेज कदम उठाते हुए फिल्म जगत के एक निर्देशक और एक प्रमुख सामाजिक संगठन के नेता सहित चार व्यक्तियों के खिलाफ गंभीर आपराधिक धाराओं में मुकदमा दर्ज कराया है। इस मामले ने तब और तूल पकड़ लिया जब युवती ने सार्वजनिक रूप से आकर अपनी आपबीती सुनाई और न्याय की गुहार लगाई। पुलिस प्रशासन ने मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए एर्नाकुलम सेंट्रल पुलिस स्टेशन में ‘जीरो एफआईआर’ दर्ज कर ली है, जिसे बाद में जांच के लिए संबंधित राज्य को हस्तांतरित किए जाने की संभावना है।

युवती द्वारा लगाए गए आरोपों की फेहरिस्त काफी लंबी और गंभीर है। शिकायत में मुख्य रूप से एक फिल्म निर्देशक पर निशाना साधा गया है, जिन्होंने युवती को अपनी फिल्म में अभिनय का अवसर दिया था। पीड़िता का आरोप है कि फिल्म की शूटिंग के दौरान निर्देशक ने उसके साथ कई बार अमर्यादित और गलत व्यवहार किया। एक भावुक प्रेस वार्ता के दौरान युवती ने साझा किया कि कार्यस्थल पर सुरक्षा की कमी और निर्देशक के अनुचित व्यवहार ने उसे मानसिक रूप से काफी आहत किया है। इसके साथ ही, युवती ने एक वकील और संगठन से जुड़े नेता पर आरोप लगाया है कि उन्होंने सोशल मीडिया मंचों का उपयोग कर उसकी छवि को धूमिल करने और उसे बदनाम करने का सुनियोजित प्रयास किया है।

इस पूरे घटनाक्रम के पीछे उम्र और वैवाहिक स्थिति को लेकर चल रहा विवाद भी एक मुख्य कड़ी है। एक ओर युवती का दावा है कि वह बालिग है और उसने अपनी मर्जी से केरल के एक मंदिर में अपने मित्र से विवाह किया है, वहीं दूसरी ओर मध्य प्रदेश में रह रहे उसके माता-पिता उसे नाबालिग बता रहे हैं। माता-पिता के दावों के आधार पर पूर्व में युवती के पति के खिलाफ अपहरण और अन्य धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया था। इस कानूनी खींचतान के बीच केरल उच्च न्यायालय ने युवती के पति को अस्थायी राहत प्रदान की है, लेकिन नए आरोपों ने इस विवाद को एक बिल्कुल नया आयाम दे दिया है।

प्रशासनिक स्तर पर इस मामले की जांच अब दो राज्यों के बीच उलझती नजर आ रही है। चूंकि कथित घटनाओं का केंद्र मध्य प्रदेश बताया जा रहा है, इसलिए केरल पुलिस इस मामले के दस्तावेजों को मध्य प्रदेश पुलिस को सौंपने की प्रक्रिया पर विचार कर रही है। युवती ने अपनी सुरक्षा को लेकर भी चिंता जताई है और उच्चाधिकारियों से संरक्षण की मांग की है। यह मामला अब केवल एक व्यक्तिगत विवाद नहीं रह गया है, बल्कि इसमें कार्यस्थल पर सुरक्षा, सोशल मीडिया पर निजता का हनन और कानूनी उम्र के दस्तावेजों की वैधता जैसे कई महत्वपूर्ण सवाल जुड़ गए हैं, जिनका समाधान अब गहन अदालती जांच के बाद ही संभव हो पाएगा।