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  • आधी रात RRCAT में मची अफरा तफरी बैरियर तोड़कर परिसर में घुसी कार चालक हिरासत में परिवार ने बताया मानसिक स्थिति ठीक नहीं

    आधी रात RRCAT में मची अफरा तफरी बैरियर तोड़कर परिसर में घुसी कार चालक हिरासत में परिवार ने बताया मानसिक स्थिति ठीक नहीं


    इंदौर । इंदौर के राजेंद्र नगर थाना क्षेत्र स्थित राजा रामन्ना सेंटर फॉर एडवांस्ड टेक्नोलॉजी यानी आरआरकैट परिसर में रविवार देर रात उस समय हड़कंप मच गया जब एक कार चालक मुख्य प्रवेश द्वार पर लगे इलेक्ट्रॉनिक बूम बैरियर को तोड़ते हुए जबरन अंदर घुस गया। घटना के चलते शासकीय संपत्ति को नुकसान पहुंचा और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी सवाल खड़े हो गए। सूचना मिलते ही पुलिस और सुरक्षा कर्मियों ने तुरंत कार्रवाई करते हुए चालक को हिरासत में ले लिया। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि आरोपी की मानसिक स्थिति सामान्य नहीं है और उसका इलाज चल रहा है।

    राजेंद्र नगर पुलिस के अनुसार आरआरकैट निवासी वसंत कुमार कुमरे की शिकायत पर कार क्रमांक एमपी 09 सीएस 8622 के चालक सारिम जफर मंसूरी निवासी ग्रीन पार्क कॉलोनी के खिलाफ शासकीय संपत्ति को नुकसान पहुंचाने लापरवाहीपूर्वक वाहन चलाने और अन्य संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है। पुलिस पूरे घटनाक्रम की जांच में जुटी हुई है।

    जानकारी के मुताबिक रविवार रात करीब साढ़े बारह बजे कैट चौराहे पर नियमित वाहन चेकिंग अभियान चलाया जा रहा था। इसी दौरान सारिम अपनी कार लेकर वहां पहुंचा। पुलिस जांच से बचने के प्रयास में उसने कार की रफ्तार बढ़ा दी और सीधे आरआरकैट के मुख्य प्रवेश द्वार की ओर निकल गया। वहां लगे इलेक्ट्रॉनिक बूम बैरियर को टक्कर मारते हुए वह परिसर के अंदर प्रवेश कर गया। टक्कर इतनी तेज थी कि बैरियर क्षतिग्रस्त हो गया और सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचा।

    घटना के तुरंत बाद आरआरकैट के सुरक्षा गार्ड सक्रिय हो गए और कार का पीछा किया। कुछ दूरी पर चालक ने वाहन रोक दिया जिसके बाद पुलिस ने उसे हिरासत में लेकर राजेंद्र नगर थाने पहुंचाया। पूछताछ के दौरान आरोपी पुलिस के सवालों का संतोषजनक जवाब नहीं दे पाया जिससे पुलिस को उसकी मानसिक स्थिति पर संदेह हुआ।

    इसके बाद पुलिस ने आरोपी के मोबाइल फोन से उसके परिजनों से संपर्क किया। परिवार के सदस्यों ने पुलिस को बताया कि सारिम पिछले कुछ समय से मानसिक बीमारी का उपचार करा रहा है और इसी कारण उसे किसी प्रकार की जिम्मेदारी या काम भी नहीं दिया जाता। परिजनों ने इलाज से जुड़े दस्तावेज भी पुलिस को उपलब्ध कराए जिनकी जांच की जा रही है।

    मामले को गंभीरता से लेते हुए राजेंद्र नगर थाना प्रभारी यशवंत बड़ोले ने परिजनों को भी फटकार लगाई। उन्होंने कहा कि यदि किसी व्यक्ति की मानसिक स्थिति ठीक नहीं है तो उसे देर रात वाहन चलाने के लिए अकेला नहीं छोड़ना चाहिए। इससे न केवल उसकी बल्कि आम लोगों की जान भी खतरे में पड़ सकती है। समय रहते घटना पर नियंत्रण पा लिया गया वरना बड़ा हादसा हो सकता था।

    फिलहाल पुलिस ने आरोपी के खिलाफ शासकीय संपत्ति को नुकसान पहुंचाने और लापरवाहीपूर्वक वाहन चलाने सहित विभिन्न धाराओं में एफआईआर दर्ज कर ली है। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि घटना के समय चालक की मानसिक स्थिति क्या थी और क्या किसी अन्य कारण से उसने सुरक्षा व्यवस्था तोड़कर परिसर में प्रवेश किया। जांच पूरी होने के बाद आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

  • इंदौर में छात्र आंदोलन पर सियासी तकरार NEET विरोधी छात्र नेताओं ने पुलिस पर लगाए अपशब्द मानसिक प्रताड़ना और परिवार से दूर रखने के आरोप

    इंदौर में छात्र आंदोलन पर सियासी तकरार NEET विरोधी छात्र नेताओं ने पुलिस पर लगाए अपशब्द मानसिक प्रताड़ना और परिवार से दूर रखने के आरोप


    इंदौर । नीट पेपर लीक के विरोध में इंदौर में प्रस्तावित न्याय यात्रा से पहले गिरफ्तार किए गए छह छात्र नेताओं ने रिहाई के बाद पुलिस की कार्रवाई पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। छात्र नेताओं का आरोप है कि उन्हें प्रशासन ने डीसीपी से चर्चा कराने का भरोसा देकर बुलाया लेकिन बातचीत कराने के बजाय सीधे थाने ले जाकर धारा 151 के तहत गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया। छात्रों का कहना है कि पूरी कार्रवाई के दौरान उनके साथ अपराधियों जैसा व्यवहार किया गया और मानसिक रूप से प्रताड़ित किया गया। इस मामले के सामने आने के बाद पुलिस की कार्रवाई और कानून व्यवस्था को लेकर नई बहस शुरू हो गई है।

    नेशनल एजुकेटेड यूथ यूनियन के सदस्य राधे जाट ने बताया कि 23 जुलाई को प्रस्तावित न्याय यात्रा के संबंध में पुलिस प्रशासन से पहले ही संपर्क किया गया था। उन्होंने दावा किया कि यात्रा की पूरी जानकारी एक दिन पहले पुलिस कमिश्नर कार्यालय में दी गई थी और अनुमति भी मांगी गई थी। इसके बावजूद पुलिस ने उन्हें यह कहकर बुलाया कि डीसीपी से चर्चा कराई जाएगी। छात्रों ने पुलिस पर भरोसा किया और उनके साथ चले गए लेकिन रास्ते में उनके मोबाइल फोन बंद करवा दिए गए। इसके बाद उन्हें पहले जिला अस्पताल चौकी और फिर चंदन नगर थाने ले जाया गया।

    छात्र नेताओं का कहना है कि अगले दिन मेडिकल परीक्षण कराने के बाद उन्हें एसीपी के सामने पेश किया गया और फिर जेल भेज दिया गया। उनका आरोप है कि पूरी प्रक्रिया के दौरान किसी भी स्तर पर उनकी बात सुनने की कोशिश नहीं की गई। उनका कहना है कि वे शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रखना चाहते थे लेकिन प्रशासन ने आंदोलन शुरू होने से पहले ही उन्हें हिरासत में लेकर जेल भेज दिया।

    रिहा हुए छात्र नेताओं ने आरोप लगाया कि पुलिसकर्मियों ने उनके साथ अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल किया और मानसिक रूप से परेशान किया। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्र सुरेंद्र यादव के साथ भी कथित रूप से अपशब्द कहे गए। इस मामले में विजय चौधरी चंद्रशेखर गुर्जर गौरव परिहार और हरिप्रपन्न गोस्वामी को भी गिरफ्तार किया गया था। सभी का कहना है कि उन्हें अपराधियों की तरह पेश किया गया जबकि उनका उद्देश्य केवल छात्रों की आवाज उठाना था।

    छात्र नेताओं का यह भी आरोप है कि गिरफ्तारी के बाद चार दिनों तक उनके परिवारों को यह तक नहीं बताया गया कि उन्हें कहां रखा गया है। इससे परिजन लगातार परेशान रहे और उन्हें अपने बच्चों की कोई जानकारी नहीं मिल सकी। रिहाई के समय उनसे बॉन्ड ओवर भी भरवाया गया। छात्रों का कहना है कि इससे पहले उन्होंने एमपीपीएससी पटवारी भर्ती घोटाले और अन्य छात्र आंदोलनों में भी हिस्सा लिया था लेकिन कभी इस तरह की कार्रवाई का सामना नहीं करना पड़ा।

    रिहाई के बाद छात्र नेताओं ने इंदौर में लागू कमिश्नरी व्यवस्था और धारा 151 के इस्तेमाल की समीक्षा की मांग की है। उनका कहना है कि लोकतांत्रिक तरीके से विरोध प्रदर्शन करना हर नागरिक का अधिकार है और छात्रों के साथ अपराधियों जैसा व्यवहार नहीं होना चाहिए। उन्होंने यह भी नाराजगी जताई कि गिरफ्तारी के दौरान किसी भी राजनीतिक दल के नेता ने उनकी सुध नहीं ली। अब यह मामला छात्र संगठनों और प्रशासन के बीच नए विवाद का कारण बनता दिखाई दे रहा है जबकि पुलिस की भूमिका को लेकर भी सवाल लगातार उठ रहे हैं।

  • संसद परिसर में विपक्ष का जोरदार प्रदर्शन, राहुल गांधी और प्रियंका गांधी समेत कई नेता काले वस्त्रों में पहुंचे, छात्रों के मुद्दों पर सरकार को घेरा

    संसद परिसर में विपक्ष का जोरदार प्रदर्शन, राहुल गांधी और प्रियंका गांधी समेत कई नेता काले वस्त्रों में पहुंचे, छात्रों के मुद्दों पर सरकार को घेरा

    नई दिल्ली । संसद के मानसून सत्र के दौरान छात्रों के विरोध प्रदर्शन और विपक्षी नेताओं के साथ कथित पुलिस कार्रवाई का मुद्दा राष्ट्रीय राजनीति के केंद्र में आ गया। कांग्रेस समेत कई विपक्षी दलों के सांसद काले कपड़े पहनकर संसद परिसर पहुंचे और केंद्र सरकार तथा दिल्ली पुलिस के खिलाफ शांतिपूर्ण विरोध दर्ज कराया। विपक्ष का कहना है कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में छात्रों और जनप्रतिनिधियों को अपनी बात रखने का पूरा अधिकार है तथा सरकार को टकराव के बजाय संवाद का रास्ता अपनाना चाहिए। इस प्रदर्शन में लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा सहित पार्टी के कई वरिष्ठ नेताओं की मौजूदगी ने इस विरोध को और अधिक राजनीतिक महत्व दे दिया।

    विपक्षी सांसदों ने संसद परिसर में एकजुट होकर छात्रों के समर्थन में अपनी आवाज बुलंद की। उनका कहना था कि देशभर के छात्र अपनी विभिन्न मांगों और समस्याओं को लेकर लगातार आवाज उठा रहे हैं, लेकिन उनकी चिंताओं का समाधान निकालने के बजाय प्रशासनिक स्तर पर सख्ती दिखाई जा रही है। विपक्ष ने इसे लोकतांत्रिक अधिकारों के प्रति असंवेदनशील रवैया बताते हुए सरकार से तत्काल बातचीत शुरू करने की मांग की।

    प्रियंका गांधी वाड्रा ने कहा कि छात्र अपने भविष्य और शिक्षा से जुड़े मुद्दों को लेकर संघर्ष कर रहे हैं और उनकी मांगों को गंभीरता से सुना जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि युवाओं की मेहनत, शिक्षा और भविष्य किसी भी सरकार की प्राथमिकता होनी चाहिए। उनके अनुसार, यदि छात्रों की बात को लगातार नजरअंदाज किया जाएगा तो इससे शिक्षा व्यवस्था के प्रति उनका विश्वास कमजोर हो सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि लोकतंत्र में शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखना प्रत्येक नागरिक का अधिकार है और सरकार को इस अधिकार का सम्मान करना चाहिए।

    कांग्रेस सांसद नसीर हुसैन ने भी छात्रों के साथ हुई कथित पुलिस कार्रवाई को लेकर सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदर्शन कर रहे छात्रों के खिलाफ बल प्रयोग किया गया, जिससे यह संदेश जाता है कि सरकार असहमति की आवाज सुनने के बजाय उसे दबाने का प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि छात्रों और युवाओं की समस्याओं का समाधान संवाद और संवेदनशीलता से किया जाना चाहिए, न कि कठोर कार्रवाई से। इसी विरोध को दर्ज कराने के लिए कांग्रेस सांसद काले कपड़े पहनकर संसद पहुंचे।

    कांग्रेस के वरिष्ठ सांसद के. सुरेश ने कहा कि काले वस्त्र पहनकर किया गया प्रदर्शन केवल छात्रों के समर्थन तक सीमित नहीं है, बल्कि विपक्षी नेताओं के साथ कथित दुर्व्यवहार के विरोध का भी प्रतीक है। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्षी सांसदों के साथ जिस प्रकार का व्यवहार किया गया, वह लोकतांत्रिक परंपराओं के अनुरूप नहीं माना जा सकता। इसी कारण कांग्रेस ने इस विरोध को प्रतीकात्मक रूप से ‘काला दिवस’ के रूप में मनाने का निर्णय लिया।

    कांग्रेस महासचिव और सांसद केसी वेणुगोपाल ने शिक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दों पर केंद्रीय शिक्षा मंत्री की जिम्मेदारी तय करते हुए सरकार से जवाब मांगा। उन्होंने कहा कि छात्रों की समस्याओं का समाधान सरकार की प्राथमिकता होना चाहिए और शिक्षा से जुड़े गंभीर सवालों पर स्पष्ट जवाब दिया जाना चाहिए। उन्होंने इस पूरे घटनाक्रम को शिक्षा व्यवस्था और युवाओं के भविष्य से जुड़ा महत्वपूर्ण विषय बताते हुए राजनीतिक जवाबदेही की आवश्यकता पर बल दिया।

    इस मुद्दे पर अन्य विपक्षी दलों ने भी कांग्रेस का समर्थन किया। तृणमूल कांग्रेस के सांसद कल्याण बनर्जी ने कहा कि छात्रों की समस्याओं को गंभीरता से सुनना सरकार का दायित्व है और उनकी मांगों पर संवेदनशीलता के साथ विचार किया जाना चाहिए। संसद परिसर में हुए इस विरोध प्रदर्शन के बाद छात्र आंदोलन, पुलिस कार्रवाई और लोकतांत्रिक अधिकारों को लेकर राजनीतिक बहस और तेज हो गई है। आने वाले दिनों में इस विषय पर संसद के भीतर और बाहर व्यापक चर्चा होने की संभावना जताई जा रही है।

  • दिल्ली में CJP प्रदर्शन के बाद बढ़ा राजनीतिक टकराव, कपिल सिब्बल का केंद्र पर तीखा हमला, पुलिस कार्रवाई और नड्डा के बयान पर उठाए सवाल

    दिल्ली में CJP प्रदर्शन के बाद बढ़ा राजनीतिक टकराव, कपिल सिब्बल का केंद्र पर तीखा हमला, पुलिस कार्रवाई और नड्डा के बयान पर उठाए सवाल

    नई दिल्ली । राजधानी दिल्ली में CJP के प्रदर्शन के दौरान हुई झड़प और उसके बाद की राजनीतिक प्रतिक्रिया ने राष्ट्रीय राजनीति में नया विवाद खड़ा कर दिया है। प्रदर्शन के बाद वरिष्ठ अधिवक्ता और सांसद कपिल सिब्बल ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा की टिप्पणी को अहंकारपूर्ण बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदर्शनकारियों की ओर से सरकार के सामने रखी गई मांगों की लंबे समय तक अनदेखी की गई और संवाद के बजाय बल प्रयोग का रास्ता अपनाया गया। इस पूरे घटनाक्रम के बाद सत्ता और विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर और तेज हो गया है।

    कपिल सिब्बल ने सोशल मीडिया पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह दावा करना कि पहली बार प्रदर्शनकारियों की ओर से बातचीत का प्रस्ताव आया, वास्तविक स्थिति से मेल नहीं खाता। उन्होंने कहा कि आंदोलन कर रहे लोगों की मांगें पहले से सार्वजनिक थीं और सरकार को उनकी पूरी जानकारी थी। उनके अनुसार यदि समय रहते सकारात्मक बातचीत की पहल की जाती तो हालात इस स्तर तक नहीं पहुंचते। उन्होंने सरकार पर संवेदनशील मुद्दों पर देर से प्रतिक्रिया देने और प्रदर्शनकारियों के साथ कठोर रवैया अपनाने का आरोप लगाया।

    सिब्बल ने यह भी कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में किसी भी आंदोलन का समाधान संवाद और विश्वास के जरिए निकाला जाना चाहिए। उनका मानना है कि यदि शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे लोगों की बात समय पर सुनी जाती तो टकराव की स्थिति से बचा जा सकता था। उन्होंने सरकार से लोकतांत्रिक मूल्यों के अनुरूप व्यवहार करने और जनभावनाओं का सम्मान करने की अपील भी की।

    इस बीच कांग्रेस ने भी पूरे घटनाक्रम को लेकर केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस की भूमिका पर सवाल उठाए हैं। पार्टी नेताओं का कहना है कि लोकतंत्र में अपनी मांगों को लेकर शांतिपूर्ण प्रदर्शन करना नागरिकों का संवैधानिक अधिकार है। कांग्रेस का आरोप है कि प्रदर्शनकारियों के साथ जिस प्रकार का व्यवहार किया गया, उससे लोकतांत्रिक संस्थाओं की गरिमा प्रभावित हुई है। पार्टी ने कहा कि युवाओं और आंदोलनकारियों के प्रति कठोर कार्रवाई किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए उचित संकेत नहीं मानी जा सकती।

    प्रदर्शन के दौरान हुई झड़प के बाद दिल्ली पुलिस ने मामले में अज्ञात लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस का कहना है कि घटनास्थल पर कानून-व्यवस्था बनाए रखना उसकी प्राथमिक जिम्मेदारी थी और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की जा रही है। अधिकारियों के अनुसार उपलब्ध साक्ष्यों, वीडियो फुटेज और अन्य जानकारियों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

    दूसरी ओर प्रदर्शनकारियों के प्रतिनिधियों ने केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा से मुलाकात कर अपनी मांगों से संबंधित ज्ञापन भी सौंपा। इस मुलाकात के बाद सरकार की ओर से संवाद की पहल की बात कही गई, लेकिन विपक्ष का आरोप है कि यह पहल काफी देर से हुई और इससे पहले हालात अनावश्यक रूप से बिगड़ चुके थे। इसी मुद्दे को लेकर राजनीतिक दलों के बीच बयानबाजी लगातार जारी है।

    पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर यह बहस तेज कर दी है कि लोकतांत्रिक आंदोलनों से जुड़े मामलों में सरकार और प्रशासन की भूमिका कैसी होनी चाहिए। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ऐसे संवेदनशील मामलों में समय पर संवाद, पारदर्शिता और संयमित प्रशासनिक कार्रवाई से विवादों को बढ़ने से रोका जा सकता है। फिलहाल इस मामले में पुलिस जांच जारी है, जबकि राजनीतिक स्तर पर आरोप-प्रत्यारोप का सिलसिला थमने के संकेत नहीं दिख रहे हैं।

  • शादी का झांसा देकर दो साल तक करता रहा दुष्कर्म शादीशुदा होने का राज खुलते ही आरोपी गिरफ्तार

    शादी का झांसा देकर दो साल तक करता रहा दुष्कर्म शादीशुदा होने का राज खुलते ही आरोपी गिरफ्तार


    सतना । सतना जिले में शादी का झांसा देकर एक युवती के साथ लंबे समय तक दैहिक शोषण करने का मामला सामने आया है। सभापुर थाना पुलिस ने कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया जहां से उसे जेल भेज दिया गया। पुलिस के अनुसार आरोपी ने अपनी शादीशुदा होने की सच्चाई छिपाकर युवती को प्रेमजाल में फंसाया और विवाह का भरोसा देकर करीब दो वर्षों तक उसका शारीरिक शोषण करता रहा। जब पीड़िता को उसकी असलियत का पता चला और उसने शादी की बात कही तो आरोपी ने रिश्ता स्वीकार करने से इनकार कर दिया और उसे धमकाने लगा। इसके बाद युवती ने पुलिस का दरवाजा खटखटाया।

    पुलिस के मुताबिक गिरफ्तार आरोपी की पहचान 27 वर्षीय बृजेश प्रजापति निवासी देवरा थाना कोटर के रूप में हुई है। थाना प्रभारी शंखधर द्विवेदी ने बताया कि 23 वर्षीय युवती की मुलाकात करीब दो वर्ष पहले आरोपी से हुई थी। बातचीत के दौरान दोनों के बीच नजदीकियां बढ़ीं। इसी दौरान आरोपी ने खुद को अविवाहित बताते हुए युवती को शादी का भरोसा दिया। विश्वास में लेकर उसने कई बार शारीरिक संबंध बनाए। पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी युवती के घर भी आता-जाता था और कई बार उसे अपने गांव भी लेकर गया।

    समय बीतने के साथ युवती को पता चला कि जिस व्यक्ति से वह शादी की उम्मीद लगाए बैठी थी वह पहले से ही शादीशुदा है। यह सच्चाई सामने आने के बाद उसने आरोपी से जवाब मांगा लेकिन उसने शादी करने से साफ इनकार कर दिया। इतना ही नहीं आरोपी ने युवती को डराने और धमकाने की भी कोशिश की ताकि वह किसी से शिकायत न करे। मानसिक रूप से परेशान युवती ने आखिरकार सभापुर थाने पहुंचकर पूरे घटनाक्रम की लिखित शिकायत दर्ज कराई।

    शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच शुरू की। प्रारंभिक जांच और पीड़िता के बयान के आधार पर आरोपी के खिलाफ संबंधित धाराओं में प्रकरण दर्ज किया गया। इसके बाद पुलिस ने कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। रविवार को उसे न्यायालय में पेश किया गया जहां से न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया गया।

    पुलिस अधिकारियों का कहना है कि शादी का झूठा वादा कर किसी महिला की सहमति प्राप्त कर बनाए गए शारीरिक संबंध कानून की नजर में गंभीर अपराध हो सकते हैं। ऐसे मामलों में पीड़िता की शिकायत और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर सख्त कार्रवाई की जाती है। पुलिस ने लोगों से भी अपील की है कि यदि किसी के साथ इस तरह की धोखाधड़ी या शोषण होता है तो बिना डर के तत्काल पुलिस से संपर्क करें ताकि समय रहते कानूनी कार्रवाई की जा सके।

  • पटना कोचिंग विवाद: खान सर को लेकर पुलिस का बड़ा बयान, कानून व्यवस्था बिगाड़ने वालों पर होगी सख्त कार्रवाई

    पटना कोचिंग विवाद: खान सर को लेकर पुलिस का बड़ा बयान, कानून व्यवस्था बिगाड़ने वालों पर होगी सख्त कार्रवाई

    नई दिल्ली । पटना कोचिंग विवाद में खान सर के कोचिंग सेंटर को लेकर लगातार खबरों का दौर जारी है। हाल ही में एफआईआर दर्ज होने के बाद सोशल मीडिया और स्थानीय मीडिया में इस बात को लेकर चर्चा गर्म है कि क्या खान सर को गिरफ्तार किया जाएगा। इस मामले में पटना के एसएसपी कार्तिकेय शर्मा ने मीडिया के सामने स्पष्ट बयान दिया है।

    एसएसपी ने कहा कि कानून व्यवस्था को बिगाड़ने वाले किसी भी व्यक्ति या समूह के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने यह भी बताया कि मामले में गिरफ्तार किए गए सुरक्षा गार्ड्स के बयानों की जांच जारी है और उनके बयान पूरे केस की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। पुलिस ने स्पष्ट किया कि मामले की गंभीरता को देखते हुए सभी कानूनी विकल्पों पर विचार किया जा रहा है।

    पटना कोचिंग विवाद तब शुरू हुआ जब स्थानीय प्रशासन ने खान सर के कोचिंग सेंटर में कुछ अनियमितताएं पाई। इसके बाद एफआईआर दर्ज की गई और सुरक्षा गार्ड्स को गिरफ्तार किया गया। इस मामले में संगीन धाराओं को शामिल किया गया है, जिससे यह मामला और गंभीर रूप ले चुका है। स्थानीय प्रशासन ने यह सुनिश्चित करने की कोशिश की कि किसी भी तरह का उग्र प्रदर्शन या कानून व्यवस्था का उल्लंघन न हो।

    एसएसपी कार्तिकेय शर्मा ने मीडिया को बताया कि पुलिस मामले की जांच में पूरी पारदर्शिता बनाए रखेगी। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि गिरफ्तार किए गए सुरक्षा गार्ड्स के बयान जांच का अहम हिस्सा हैं और इनके आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी। उन्होंने कहा कि कानून के अनुसार किसी भी व्यक्ति के खिलाफ कदम उठाने से पहले सभी तथ्यों और सबूतों की जांच की जाएगी।

    इस पूरे मामले ने पटना में छात्रों और अभिभावकों के बीच भी चर्चा का विषय बना दिया है। कोचिंग सेंटर के बंद होने और कानूनी कार्रवाई के बाद कई अभिभावक चिंतित हैं कि उनके बच्चों की पढ़ाई प्रभावित न हो। प्रशासन ने आश्वासन दिया है कि छात्रों की पढ़ाई और भविष्य को ध्यान में रखते हुए उचित कदम उठाए जाएंगे।

    इस विवाद ने सोशल मीडिया पर भी बहस को जन्म दिया है। कई लोग इस मामले में खान सर के समर्थन में हैं, जबकि कुछ लोग प्रशासन और पुलिस की कार्रवाई को उचित मान रहे हैं। इस पूरे घटनाक्रम ने स्थानीय और राष्ट्रीय स्तर पर भी ध्यान खींचा है।

    पुलिस ने स्पष्ट किया है कि अगली रणनीति पर काम जारी है और गिरफ्तार सुरक्षा गार्ड्स के बयान जांच का मुख्य आधार होंगे। एसएसपी ने कहा कि किसी भी कानून तोड़ने वाले के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी और सभी कानूनी प्रावधानों का पालन किया जाएगा।

    पटना कोचिंग विवाद अब एक संवेदनशील मामला बन चुका है और इसके हर अपडेट पर जनता और मीडिया की नजरें बनी हुई हैं। प्रशासन और पुलिस का ध्यान इस बात पर है कि कानून व्यवस्था को बनाए रखते हुए मामले का निष्पक्ष समाधान निकाला जाए।

  • बकरीद से पहले खंडवा में पुलिस का बड़ा एक्शन , 200 बदमाश गिरफ्तार, दो जिला बदर

    बकरीद से पहले खंडवा में पुलिस का बड़ा एक्शन , 200 बदमाश गिरफ्तार, दो जिला बदर


    खंडवा । खंडवा में ईद-उल-अजहा यानी बकरीद से पहले पुलिस ने कानून व्यवस्था को लेकर बड़ा और सख्त अभियान चलाया है। जिले में शांति और सुरक्षा बनाए रखने के उद्देश्य से पुलिस पूरी तरह अलर्ट मोड पर नजर आ रही है। इसी के तहत व्यापक कॉम्बिंग गश्त और विशेष कार्रवाई करते हुए करीब 200 बदमाशों को गिरफ्तार किया गया है, जबकि दो लोगों को जिला बदर भी किया गया है।

    पुलिस ने त्योहार के दौरान किसी भी तरह की अप्रिय स्थिति से बचने के लिए पहले से ही तैयारी तेज कर दी है। इसके तहत थानों पर गुंडा परेड कराई जा रही है, जिसमें आपराधिक प्रवृत्ति के लोगों को पुलिस के सामने लाकर सख्त संदेश दिया जा रहा है कि किसी भी तरह की गड़बड़ी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

    सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए शहर में करीब 450 से 500 पुलिसकर्मियों की तैनाती की जा रही है। इसमें पुलिस बल के साथ होमगार्ड और वन विभाग की टीमें भी सहयोग कर रही हैं। इसके अलावा मोबाइल वैन लगातार गश्त कर रही हैं ताकि हर क्षेत्र में नजर रखी जा सके।

    पुलिस ने संवेदनशील इलाकों, धार्मिक स्थलों और भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों में विशेष निगरानी बढ़ा दी है। गली मोहल्लों में लगातार पेट्रोलिंग की जा रही है, जबकि ड्रोन और सीसीटीवी कैमरों के जरिए पूरे शहर पर नजर रखी जा रही है। किसी भी स्थिति में तुरंत कार्रवाई के लिए टीमों को अलर्ट पर रखा गया है।

    इसके साथ ही साइबर सेल सोशल मीडिया पर भी नजर बनाए हुए है, ताकि किसी भी तरह की भड़काऊ पोस्ट या अफवाह फैलाने वालों पर तुरंत कार्रवाई की जा सके। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि त्योहार के दौरान माहौल बिगाड़ने वालों पर कड़ी निगरानी रखी जा रही है।

    खंडवा एसपी अगम जैन ने बताया कि पुलिस लगातार लोगों से संवाद कर रही है और शांति समिति की बैठक भी आयोजित की गई है, ताकि त्योहार सौहार्दपूर्ण माहौल में संपन्न हो सके। उन्होंने कहा कि कानून व्यवस्था से खिलवाड़ करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।

  • कोतवाली क्षेत्र में पुलिस कमिश्नर की सख्ती रॉन्ग साइड एंट्री बंद करने के निर्देश

    कोतवाली क्षेत्र में पुलिस कमिश्नर की सख्ती रॉन्ग साइड एंट्री बंद करने के निर्देश


    भोपाल । मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में कानून व्यवस्था और यातायात सुधार को लेकर पुलिस प्रशासन ने सख्ती बढ़ा दी है। इसी क्रम में पुलिस कमिश्नर संजय कुमार इमामी ने कोतवाली थाना क्षेत्र में नागरिकों के साथ सीधा संवाद स्थापित किया और उनकी समस्याएं सुनीं। इस जनसंवाद कार्यक्रम का उद्देश्य शहर में सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करना और जनता की भागीदारी बढ़ाना रहा।

    जनसंवाद के दौरान पुलिस कमिश्नर ने साफ तौर पर निर्देश दिए कि दुकानों के सामने होने वाली अवैध पार्किंग को तत्काल हटाया जाए क्योंकि इससे न केवल ट्रैफिक बाधित होता है बल्कि दुर्घटनाओं का खतरा भी बढ़ जाता है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि इस तरह की गतिविधियों पर सख्त निगरानी रखी जाए और नियमों का उल्लंघन करने वालों पर कार्रवाई की जाए।

    इसके साथ ही हमीदिया अस्पताल के आसपास रॉन्ग साइड एंट्री को लेकर भी सख्त रुख अपनाया गया। कमिश्नर ने स्पष्ट निर्देश दिए कि इस क्षेत्र में गलत दिशा से आने वाले वाहनों पर पूरी तरह रोक लगाई जाए ताकि यातायात व्यवस्था सुचारु बनी रहे और किसी भी प्रकार की दुर्घटना से बचा जा सके।

    कार्यक्रम के दौरान नागरिकों को सुरक्षा के प्रति जागरूक करते हुए कहा गया कि यदि कहीं भी कोई संदिग्ध या अवैध गतिविधि नजर आए तो तुरंत डायल 112 पर सूचना दें। पुलिस ने भरोसा दिलाया कि हर सूचना पर त्वरित कार्रवाई की जाएगी और शिकायतों का जल्द समाधान सुनिश्चित किया जाएगा।

    जनसंवाद में ट्रैफिक नियमों को लेकर भी लोगों को जागरूक किया गया और उन्हें नियमों का पालन करने की शपथ दिलाई गई। साथ ही साइबर अपराधों के बढ़ते मामलों को देखते हुए साइबर सुरक्षा के प्रति भी लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी गई।

    पुलिस कमिश्नर ने मादक पदार्थों और अवैध हथियारों के खिलाफ भी लोगों से सहयोग मांगा और अपील की कि ऐसी किसी भी जानकारी को तुरंत पुलिस तक पहुंचाएं ताकि समय रहते कार्रवाई की जा सके।

    इस पहल के जरिए पुलिस और जनता के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने की कोशिश की जा रही है जिससे शहर को सुरक्षित और व्यवस्थित बनाया जा सके। पुलिस का मानना है कि आम नागरिकों की भागीदारी के बिना सुरक्षा व्यवस्था को पूरी तरह प्रभावी बनाना संभव नहीं है।

  • मरीज बनकर आता और स्कूटी लेकर फरार शहडोल में एंबुलेंस प्रेमी चोर का खुलासा

    मरीज बनकर आता और स्कूटी लेकर फरार शहडोल में एंबुलेंस प्रेमी चोर का खुलासा


    शहडोल । मध्यप्रदेश के शहडोल जिले में एक ऐसा अजीबोगरीब मामला सामने आया है जिसने पुलिस को भी हैरान कर दिया। यहां एक शातिर चोर को गिरफ्तार किया गया है जो न सिर्फ गाड़ियां चोरी करता था बल्कि एंबुलेंस को भी फ्री टैक्सी की तरह इस्तेमाल करता था। आरोपी की करतूतें किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं लगतीं लेकिन यह हकीकत है।

    मामला धनपुरी क्षेत्र का है जहां 22 अप्रैल को आरोपी रामानंद तिवारी ने एक सुनियोजित साजिश के तहत खुद को घायल बताकर 108 एंबुलेंस को कॉल किया। उसने दावा किया कि उसका एक्सीडेंट हो गया है और उसे तुरंत अस्पताल ले जाने की जरूरत है। खास बात यह रही कि उसने एंबुलेंस कर्मियों से जिद कर उसे धनपुरी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ही पहुंचाने को कहा।

    अस्पताल पहुंचते ही आरोपी ने अपनी एक्टिंग शुरू कर दी। वह लंगड़ाते हुए अंदर गया ताकि किसी को उस पर शक न हो लेकिन उसका असली मकसद इलाज नहीं बल्कि चोरी करना था। अस्पताल में मौजूद अफरा तफरी का फायदा उठाकर उसने वहां तैनात एएनएम संगीता सिंह की स्कूटी की चाबी पार कर दी और कुछ ही पलों में वाहन लेकर फरार हो गया।

    घटना का खुलासा तब हुआ जब अस्पताल में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज देखी गई। फुटेज में आरोपी की पूरी हरकत कैद हो गई थी जिससे पुलिस को उसके हुलिए का सुराग मिला। इसके बाद पुलिस ने मुखबिर तंत्र को सक्रिय किया और जाल बिछाकर आरोपी को उस समय गिरफ्तार कर लिया जब वह चोरी की स्कूटी बेचने की कोशिश कर रहा था।

    पूछताछ में आरोपी ने जो खुलासे किए वे और भी चौंकाने वाले थे। पुलिस के अनुसार वह अक्सर चोरी के मोबाइल फोन से 108 एंबुलेंस को कॉल करता था और खुद को बीमार या घायल बताकर मुफ्त में एक जगह से दूसरी जगह यात्रा करता था। उसने बताया कि वह डायल 112 से इसलिए बचता था क्योंकि उसमें पुलिस की मौजूदगी होती है।

    आरोपी का मकसद सिर्फ घूमना फिरना था। वह गाड़ियां चोरी करता और जब तक पेट्रोल रहता तब तक उनका इस्तेमाल करता फिर जहां पेट्रोल खत्म होता वहीं गाड़ी छोड़ देता। पुलिस ने यह भी बताया कि आरोपी पहले भी कई मामलों में शामिल रहा है और उस पर धोखाधड़ी और वाहन चोरी के कई केस दर्ज हैं।

    थाना प्रभारी खेम सिंह पेंद्रो ने बताया कि आरोपी को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया गया है और उससे जुड़े अन्य मामलों की भी जांच की जा रही है। साथ ही जिले के अन्य थानों को भी उसकी गतिविधियों की जानकारी दे दी गई है।

    यह मामला न केवल पुलिस के लिए चुनौतीपूर्ण रहा बल्कि यह भी दिखाता है कि किस तरह कुछ लोग सिस्टम का गलत इस्तेमाल कर अपराध को अंजाम देते हैं। फिलहाल आरोपी सलाखों के पीछे है और पुलिस आगे की कार्रवाई में जुटी हुई है।

  • शादी में विवाद से दोहरी हत्या नर्मदापुरम पुलिस का बड़ा एक्शन 6 दिन में इनामी आरोपी पकड़ा

    शादी में विवाद से दोहरी हत्या नर्मदापुरम पुलिस का बड़ा एक्शन 6 दिन में इनामी आरोपी पकड़ा


    नर्मदापुरम । मध्यप्रदेश के नर्मदापुरम जिले में एक शादी समारोह के दौरान हुई खौफनाक वारदात ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया था जहां खुशियों का माहौल अचानक मातम में बदल गया। मामूली विवाद ने देखते ही देखते दोहरे हत्याकांड का रूप ले लिया लेकिन पुलिस की सतर्कता और लगातार प्रयासों के चलते आखिरकार मुख्य आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया है।

    घटना 19 अप्रैल की बताई जा रही है जब एक गांव में सीताराम कीर के घर शादी का समारोह चल रहा था। इसी दौरान पुरानी रंजिश और खाने को लेकर हुए विवाद ने हिंसक रूप ले लिया। आरोप है कि अमर सिंह और उसके बेटे लोकेश कीर ने डंडों और धारदार चाकू से जयनारायण कीर और उनके परिजनों पर हमला कर दिया। इस हमले में कुल सात लोग गंभीर रूप से घायल हो गए।

    हमले की भयावहता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि दौलतराम कीर की मौके पर ही मौत हो गई जबकि एक अन्य घायल ने इलाज के दौरान तीन दिन बाद दम तोड़ दिया। इस दोहरे हत्याकांड के बाद पूरे गांव में दहशत का माहौल फैल गया और आरोपी फरार हो गए।

    मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने तत्काल कार्रवाई शुरू की और आरोपियों की तलाश में दबिश दी। इसी दौरान जब पुलिस टीम मुख्य आरोपी लोकेश कीर को पकड़ने पहुंची तो उसने आरक्षक ओमप्रकाश जाट पर चाकू से ताबड़तोड़ हमला कर दिया। बताया जा रहा है कि आरोपी ने उन पर करीब नौ बार वार किए जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गए। इसके बाद आरोपी जंगल की ओर भाग निकला जिससे मामला और चुनौतीपूर्ण हो गया।

    पुलिस अधीक्षक साई कृष्णा के नेतृत्व में टीमों का गठन किया गया और व्यापक सर्च ऑपरेशन शुरू किया गया। करीब छह दिनों तक पुलिस ने गांवों और गंजाल नदी के बीहड़ जंगलों में लगातार तलाशी अभियान चलाया। पुलिस ने तकनीकी साधनों और मुखबिरों की मदद से आरोपी की लोकेशन ट्रैक की।

    आखिरकार पुलिस को सफलता मिली और मुख्य आरोपी लोकेश कीर को गंजाल नदी के किनारे से गिरफ्तार कर लिया गया। इससे पहले उसके पिता अमर सिंह को भी पुलिस गिरफ्तार कर जेल भेज चुकी थी। इस पूरे ऑपरेशन में थाना प्रभारी के एन रजक साइबर सेल और पुलिस टीम की अहम भूमिका रही जिन्होंने जोखिम उठाकर इस आरोपी को पकड़ने में सफलता हासिल की।

    इस कार्रवाई के बाद क्षेत्र में राहत की सांस ली जा रही है और पुलिस की त्वरित कार्रवाई की सराहना हो रही है। यह मामला एक बार फिर यह दिखाता है कि छोटी सी बात भी किस तरह बड़ा अपराध बन सकती है और कानून से बच पाना आसान नहीं है।

    मध्यप्रदेश के नर्मदापुरम जिले में एक शादी समारोह के दौरान हुई खौफनाक वारदात ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया था जहां खुशियों का माहौल अचानक मातम में बदल गया। मामूली विवाद ने देखते ही देखते दोहरे हत्याकांड का रूप ले लिया लेकिन पुलिस की सतर्कता और लगातार प्रयासों के चलते आखिरकार मुख्य आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया है।

    घटना 19 अप्रैल की बताई जा रही है जब एक गांव में सीताराम कीर के घर शादी का समारोह चल रहा था। इसी दौरान पुरानी रंजिश और खाने को लेकर हुए विवाद ने हिंसक रूप ले लिया। आरोप है कि अमर सिंह और उसके बेटे लोकेश कीर ने डंडों और धारदार चाकू से जयनारायण कीर और उनके परिजनों पर हमला कर दिया। इस हमले में कुल सात लोग गंभीर रूप से घायल हो गए।

    हमले की भयावहता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि दौलतराम कीर की मौके पर ही मौत हो गई जबकि एक अन्य घायल ने इलाज के दौरान तीन दिन बाद दम तोड़ दिया। इस दोहरे हत्याकांड के बाद पूरे गांव में दहशत का माहौल फैल गया और आरोपी फरार हो गए।

    मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने तत्काल कार्रवाई शुरू की और आरोपियों की तलाश में दबिश दी। इसी दौरान जब पुलिस टीम मुख्य आरोपी लोकेश कीर को पकड़ने पहुंची तो उसने आरक्षक ओमप्रकाश जाट पर चाकू से ताबड़तोड़ हमला कर दिया। बताया जा रहा है कि आरोपी ने उन पर करीब नौ बार वार किए जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गए। इसके बाद आरोपी जंगल की ओर भाग निकला जिससे मामला और चुनौतीपूर्ण हो गया।

    पुलिस अधीक्षक साई कृष्णा के नेतृत्व में टीमों का गठन किया गया और व्यापक सर्च ऑपरेशन शुरू किया गया। करीब छह दिनों तक पुलिस ने गांवों और गंजाल नदी के बीहड़ जंगलों में लगातार तलाशी अभियान चलाया। पुलिस ने तकनीकी साधनों और मुखबिरों की मदद से आरोपी की लोकेशन ट्रैक की।

    आखिरकार पुलिस को सफलता मिली और मुख्य आरोपी लोकेश कीर को गंजाल नदी के किनारे से गिरफ्तार कर लिया गया। इससे पहले उसके पिता अमर सिंह को भी पुलिस गिरफ्तार कर जेल भेज चुकी थी। इस पूरे ऑपरेशन में थाना प्रभारी के एन रजक साइबर सेल और पुलिस टीम की अहम भूमिका रही जिन्होंने जोखिम उठाकर इस आरोपी को पकड़ने में सफलता हासिल की।

    इस कार्रवाई के बाद क्षेत्र में राहत की सांस ली जा रही है और पुलिस की त्वरित कार्रवाई की सराहना हो रही है। यह मामला एक बार फिर यह दिखाता है कि छोटी सी बात भी किस तरह बड़ा अपराध बन सकती है और कानून से बच पाना आसान नहीं है।