Tag: political controversy

  • कंगना रनौत ने फेक न्यूज पर जताई नाराजगी: राहुल गांधी संग शादी वाली अफवाह को बताया पूरी तरह झूठा दावा

    कंगना रनौत ने फेक न्यूज पर जताई नाराजगी: राहुल गांधी संग शादी वाली अफवाह को बताया पूरी तरह झूठा दावा



    नई दिल्ली। सोशल मीडिया पर वायरल एक फर्जी पोस्ट को लेकर अभिनेत्री और सांसद कंगना रनौत ने कड़ा रुख अपनाया है। इस पोस्ट में यह झूठा दावा किया गया था कि उनका नाम कांग्रेस नेता राहुल गांधी के साथ जोड़कर शादी से जुड़ी टिप्पणी की गई है, जो पूरी तरह असत्य और भ्रामक पाया गया।

    क्या था वायरल दावा?
    इंस्टाग्राम और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर एक पोस्ट तेजी से वायरल हुआ, जिसमें यह गलत दावा किया गया कि कंगना रनौत ने कहा है कि अगर राहुल गांधी किसी शर्त को पूरा करते हैं तो वह उनसे शादी कर सकती हैं। इस पोस्ट ने लोगों के बीच भ्रम फैलाया।

    कंगना ने दी सख्त प्रतिक्रिया
    कंगना रनौत ने इस खबर को पूरी तरह फर्जी बताते हुए सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि उन्होंने ऐसा कोई बयान नहीं दिया है और यह सिर्फ अफवाह है।कंगना ने फेक न्यूज फैलाने वालों की आलोचना करते हुए कहा कि इस तरह की झूठी खबरें न केवल गलत हैं बल्कि सार्वजनिक जीवन में महिलाओं की छवि को भी नुकसान पहुंचाती हैं।

    सोशल मीडिया पर बढ़ती फेक न्यूज की समस्या
    यह मामला एक बार फिर दिखाता है कि सोशल मीडिया पर बिना जांच के खबरें कितनी तेजी से फैल जाती हैं। कई यूजर्स ने भी इस पोस्ट को गलत बताया और कहा कि यह राजनीतिक और सार्वजनिक हस्तियों को बदनाम करने की कोशिश है।

    फिलहाल क्या स्थिति है?
    इस पूरे मामले पर राहुल गांधी की ओर से कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। वहीं, यह स्पष्ट हो चुका है कि वायरल दावा पूरी तरह फर्जी था।वर्क फ्रंट की बात करें तो कंगना रनौत हाल ही में फिल्म इमरजेंसी में नजर आई थीं और आने वाले समय में वे अपने नए प्रोजेक्ट्स को लेकर भी चर्चा में बनी हुई हैं।

  • AAP में बगावत पर सियासी संग्राम: 7 सांसदों के BJP में जाने पर बोले संजय सिंह, यह असंवैधानिक, सदस्यता रद्द हो

    AAP में बगावत पर सियासी संग्राम: 7 सांसदों के BJP में जाने पर बोले संजय सिंह, यह असंवैधानिक, सदस्यता रद्द हो


    नई दिल्ली। आम आदमी पार्टी के कई राज्यसभा सांसदों के भारतीय जनता पार्टी में शामिल होने की खबर के बाद सियासी हलचल तेज हो गई है। इस घटनाक्रम पर पार्टी के वरिष्ठ नेता और सांसद संजय सिंह ने कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए इसे अवैध और असंवैधानिक करार दिया है।  संजय सिंह ने कहा कि राघव चड्ढा समेत सात राज्यसभा सांसदों का यह कदम संसदीय नियमों के खिलाफ है। उन्होंने स्पष्ट किया कि वह राज्यसभा के सभापति और उपराष्ट्रपति को पत्र लिखकर इन सांसदों की सदस्यता समाप्त करने की मांग करेंगे।

    पार्टी के प्रति जिम्मेदारी पर उठाए सवाल

    संजय सिंह ने पार्टी छोड़ने वाले नेताओं पर निशाना साधते हुए कहा कि जिन्हें पार्टी ने अवसर और पहचान दी, उनसे अपेक्षा थी कि वे जनता और संगठन के हित में काम करेंगे। उन्होंने खासतौर पर पंजाब के संदर्भ में कहा कि इन नेताओं को राज्य और पार्टी के विस्तार में योगदान देना चाहिए था।

    सोशल मीडिया पर भी उठाया मुद्दा

    संजय सिंह ने यह भी दावा किया कि पार्टी के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स इंस्टाग्राम और फेसबुक को निलंबित कर दिया गया है। उन्होंने समर्थकों से अपील की कि वे व्हाट्सऐप और अन्य माध्यमों के जरिए पार्टी का संदेश ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचाएं। इस पूरे घटनाक्रम के बाद अब राजनीतिक नजरें इस बात पर टिकी हैं कि राज्यसभा में इस मुद्दे पर क्या रुख अपनाया जाता है और क्या वाकई इन सांसदों की सदस्यता पर कोई कार्रवाई होती है। फिलहाल इतना तय है कि यह मामला आने वाले दिनों में और ज्यादा गरमाने वाला है।
  • लिकर लॉकडाउन से कारोबार को बड़ा झटका, 1400 करोड़ तक नुकसान का अनुमान, राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप बढ़े

    लिकर लॉकडाउन से कारोबार को बड़ा झटका, 1400 करोड़ तक नुकसान का अनुमान, राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप बढ़े

    नई दिल्ली।  पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव के चलते लागू की गई शराबबंदी ने राज्य की राजनीति में नया विवाद खड़ा कर दिया है। चुनाव प्रक्रिया के दौरान लगाए गए इस प्रतिबंध को लेकर सत्ताधारी दल और चुनावी व्यवस्था से जुड़े निर्णयों के बीच टकराव की स्थिति बन गई है। इस फैसले ने न केवल राजनीतिक बहस को तेज किया है बल्कि राज्य के कारोबारी वर्ग पर भी इसका सीधा असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।

    निर्णय के अनुसार राज्य में शराब की बिक्री और परोसने पर 20 अप्रैल से लेकर 29 अप्रैल तक अलग-अलग चरणों में प्रतिबंध लागू किया गया है। इस अवधि में कुल मिलाकर लगभग साढ़े नौ दिन तक शराब की बिक्री पर रोक रहेगी। मतदान के चरणों और मतगणना के आसपास के समय को देखते हुए यह प्रतिबंध लागू किया गया है, हालांकि बीच में कुछ दिनों के लिए सीमित राहत भी दी गई है।

    इस फैसले का असर राज्य के व्यापारिक ढांचे पर स्पष्ट रूप से देखने को मिल सकता है। अनुमान के अनुसार इस अवधि में सरकार को लगभग 1400 करोड़ रुपये तक के राजस्व नुकसान की संभावना है। इसमें सबसे बड़ा हिस्सा राज्य की राजधानी और आसपास के क्षेत्रों से आने वाला बताया जा रहा है। पूरे राज्य में हजारों की संख्या में शराब की दुकानें और बार संचालित होते हैं, जिनका दैनिक कारोबार करोड़ों रुपये में होता है। ऐसे में लंबे समय तक पाबंदी से कारोबार ठप होने की स्थिति बन गई है।

    इस निर्णय का असर केवल शराब उद्योग तक सीमित नहीं रहेगा बल्कि होटल और रेस्टोरेंट सेक्टर पर भी इसका व्यापक प्रभाव पड़ सकता है। खासकर वे व्यवसाय जो बार और खाद्य सेवाओं पर निर्भर हैं, उन्हें ग्राहकों की कमी और बिक्री में गिरावट का सामना करना पड़ सकता है।

    शराब कारोबार से जुड़े लोगों का कहना है कि पहले से ही स्टॉक और बिक्री को लेकर कई तरह की पाबंदियां लागू थीं और अब लंबे समय की बंदी से उनका व्यापार बुरी तरह प्रभावित होगा। उनका यह भी कहना है कि अलग-अलग चरणों में लागू नियमों के कारण स्थिति और अधिक जटिल हो गई है।

    वहीं इस पूरे मामले पर राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है। सत्ताधारी दल के नेताओं का आरोप है कि चुनावी प्रक्रिया के नाम पर ऐसे फैसले लिए जा रहे हैं जो आम जनता और छोटे कारोबारियों के लिए परेशानी का कारण बन रहे हैं। उनका कहना है कि यह निर्णय राजनीतिक रूप से प्रभावित प्रतीत होते हैं और इसका असर चुनावी माहौल पर भी पड़ सकता है।

    दूसरी ओर विपक्षी दलों का कहना है कि यह प्रतिबंध निष्पक्ष और शांतिपूर्ण चुनाव सुनिश्चित करने के लिए जरूरी है ताकि किसी भी प्रकार की अनियमितता को रोका जा सके।

     पश्चिम बंगाल में लागू यह शराबबंदी अब केवल एक प्रशासनिक निर्णय नहीं रह गई है बल्कि यह एक बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन चुकी है। इससे जहां एक ओर राज्य का राजस्व प्रभावित होने की आशंका है, वहीं दूसरी ओर चुनावी माहौल और भी अधिक गर्म हो गया है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर और अधिक तीखी राजनीतिक बहस देखने को मिल सकती नई दिल्ली।

  • विधायक का बेटे के लिए खुला ऐलान ,SDPO को चुनौती करेरा किसी के बाप का नहीं सियासत गरमाई

    विधायक का बेटे के लिए खुला ऐलान ,SDPO को चुनौती करेरा किसी के बाप का नहीं सियासत गरमाई

    शिवपुरी । शिवपुरी जिले की सियासत उस वक्त गरमा गई जब पिछोर से बीजेपी विधायक प्रीतम लोधी का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया वीडियो में विधायक का आक्रामक अंदाज और पुलिस अधिकारी को दी गई खुली चुनौती चर्चा का केंद्र बन गई है इस पूरे मामले ने न सिर्फ प्रशासनिक हलकों में हलचल पैदा की है बल्कि राजनीतिक गलियारों में भी नई बहस छेड़ दी है

    वीडियो में विधायक प्रीतम लोधी करेरा के एसडीओपी आयुष जाखड़ को सीधे तौर पर चुनौती देते नजर आ रहे हैं उनका कहना है कि करेरा किसी के बाप का नहीं है और उनका बेटा दिनेश लोधी वहां जाएगा और चुनाव भी लड़ेगा विधायक के इस बयान ने यह साफ कर दिया कि वे अपने बेटे के पक्ष में खुलकर खड़े हैं और किसी भी तरह के दबाव को स्वीकार करने के मूड में नहीं हैं

    दरअसल पूरा मामला 16 अप्रैल को हुए एक सड़क हादसे से जुड़ा है जब विधायक के छोटे बेटे दिनेश लोधी ने अपनी थार गाड़ी से कथित रूप से पांच लोगों को टक्कर मार दी थी इस घटना के बाद इलाके में तनाव का माहौल बन गया था और पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए कार्रवाई शुरू की थी शुरुआत में विधायक ने खुद सोशल मीडिया के जरिए यह कहा था कि उनके लिए जनता सबसे ऊपर है और कानून अपना काम करेगा लेकिन घटनाक्रम तेजी से बदलता नजर आया

    बताया जा रहा है कि हादसे के दो दिन बाद जब दिनेश लोधी को करेरा एसडीओपी के सामने पेश किया गया तब एसडीओपी आयुष जाखड़ ने सख्त लहजे में चेतावनी दी कि वह भविष्य में करेरा क्षेत्र में नजर न आएं इसी बात ने विवाद को और हवा दे दी और विधायक का रुख अचानक बदल गया

    वीडियो में विधायक का गुस्सा साफ झलकता है वे कहते हैं कि उनके बेटे के साथ हुए मामूली एक्सीडेंट को बेवजह बढ़ा चढ़ाकर पेश किया गया और पुलिस अनावश्यक रूप से सख्ती दिखा रही है उनका यह भी कहना है कि उनका बेटा न केवल करेरा जाएगा बल्कि वहां से चुनाव भी लड़ेगा यह बयान स्थानीय राजनीति में हलचल पैदा करने के लिए काफी है क्योंकि इसे सीधे तौर पर एक राजनीतिक संकेत के रूप में देखा जा रहा है

    इस पूरे घटनाक्रम ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं एक ओर जहां कानून व्यवस्था और पुलिस की भूमिका पर चर्चा हो रही है वहीं दूसरी ओर जनप्रतिनिधियों के आचरण और उनके बयानों को लेकर भी बहस तेज हो गई है विधायक का यह बयान क्या सिर्फ एक भावनात्मक प्रतिक्रिया है या इसके पीछे कोई राजनीतिक रणनीति छिपी है यह आने वाले समय में साफ होगा फिलहाल यह मामला सोशल मीडिया से लेकर राजनीतिक मंचों तक चर्चा का विषय बना हुआ है और लोग यह देख रहे हैं कि प्रशासन और सरकार इस पूरे विवाद पर क्या रुख अपनाती है

  • महिला आरक्षण बिल पर असफलता से बढ़ा सियासी तनाव, रूपाली गांगुली का तीखा बयान..

    महिला आरक्षण बिल पर असफलता से बढ़ा सियासी तनाव, रूपाली गांगुली का तीखा बयान..


    नई दिल्ली। संसद में महिला आरक्षण संशोधन बिल को आवश्यक दो तिहाई बहुमत न मिलने के बाद राजनीतिक माहौल तेजी से गरमा गया है। बिल के समर्थन में पर्याप्त संख्या में वोट न जुट पाने के कारण यह प्रस्ताव पारित नहीं हो सका। प्रस्ताव के लिए जहां 352 वोटों की आवश्यकता थी, वहीं 298 वोट ही पक्ष में पड़ सके। इस परिणाम के बाद राजनीतिक दलों के बीच आरोप प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है और महिला प्रतिनिधित्व से जुड़ा यह मुद्दा फिर से राष्ट्रीय बहस के केंद्र में आ गया है।

    इस घटनाक्रम पर टीवी अभिनेत्री और राजनीतिक रूप से सक्रिय रूपाली गांगुली ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उन्होंने इस फैसले को लेकर गहरा आक्रोश जताते हुए कहा कि जिस देश में महिलाओं को देवी का दर्जा दिया जाता है, वहां वास्तविक जीवन में उनके अधिकारों को लेकर अभी भी संघर्ष जारी है। उन्होंने इसे केवल राजनीतिक विफलता नहीं बल्कि सामाजिक असमानता का संकेत बताया।

    अपने संदेश में रूपाली गांगुली ने कहा कि महिला आरक्षण का उद्देश्य संसद और अन्य संस्थानों में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाना था ताकि निर्णय लेने की प्रक्रिया में समानता सुनिश्चित की जा सके। उन्होंने यह भी कहा कि लंबे समय से इस विषय पर चर्चा होती रही है लेकिन ठोस परिणाम सामने नहीं आए हैं। उनके अनुसार यह स्थिति महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी को सीमित करने वाली सोच को दर्शाती है।

    उन्होंने आगे कहा कि महिलाओं को आगे बढ़ाने की बात तो अक्सर की जाती है लेकिन जब वास्तविक अवसर देने की बात आती है तो बाधाएं सामने आ जाती हैं। उनके अनुसार यह केवल एक कानून का मामला नहीं बल्कि सोच और व्यवस्था से जुड़ा मुद्दा है। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि महिलाओं की भागीदारी किसी एक वर्ग या समूह का विषय नहीं बल्कि पूरे समाज के विकास से जुड़ा हुआ प्रश्न है।

    रूपाली गांगुली ने अपने संदेश में अपने लोकप्रिय धारावाहिक का संदर्भ देते हुए कहा कि समाज में महिलाओं को अक्सर सीमित भूमिकाओं में देखने की प्रवृत्ति रही है। उन्होंने कहा कि वास्तविक जीवन में भी कई बार महिलाओं को यही संदेश दिया जाता है कि उनकी भूमिका सीमित है, जो बदलने की आवश्यकता है।

    इस पूरे मुद्दे पर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर बहस तेज हो गई है। कई लोग इसे महिलाओं के अधिकारों की दिशा में एक बड़ा अवसर मानते हैं, जबकि कुछ इसे संसदीय प्रक्रिया का हिस्सा बताते हैं। हालांकि यह स्पष्ट है कि महिला आरक्षण जैसे विषय पर देश में व्यापक सहमति अभी भी एक चुनौती बनी हुई है।

  • मल्लिकार्जुन खरगे के विवादित बयान पर BJP ने कांग्रेस को आड़े हाथों लिया..

    मल्लिकार्जुन खरगे के विवादित बयान पर BJP ने कांग्रेस को आड़े हाथों लिया..


    नई दिल्ली:कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के हालिया ‘सांप’ बयान ने राजनीतिक गलियारों में नई हलचल पैदा कर दी है। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन ने इस बयान को कांग्रेस की हताशा और राजनीतिक रणनीति का हिस्सा बताया। नबीन ने स्पष्ट किया कि खरगे के शब्द दरअसल गांधी परिवार के निर्देशों के तहत आ रहे हैं और वे रिमोट कंट्रोल की तरह चल रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह बयान पूरी तरह से लोगों को सांप्रदायिक रूप से भड़काने और राजनीतिक माहौल को तनावपूर्ण बनाने की कोशिश है।

    नितिन नबीन ने सीधे तौर पर सोनिया गांधी और राहुल गांधी को घेरते हुए कहा कि कांग्रेस हमेशा मर्यादा लांघती रही है और जब भी इस तरह के विवादास्पद बयान दिए जाते हैं, जनता भाजपा को मजबूत समर्थन देती है। उन्होंने दावा किया कि पहले ये शब्द सीधे गांधी परिवार से आते थे और अब मल्लिकार्जुन खरगे के माध्यम से जनता तक पहुँच रहे हैं। नबीन ने कहा कि कांग्रेस के इस तरह के बयान इतिहास में हमेशा जनता के दृष्टिकोण को प्रभावित करने में असफल रहे हैं।

    भाजपा अध्यक्ष ने पश्चिम बंगाल और केरल की आगामी विधानसभा चुनावों पर भी प्रकाश डाला। बंगाल में भाजपा के वोट शेयर में लगातार वृद्धि हुई है और पार्टी इस बार राज्य में सरकार बनाने के लिए पूरी तरह तैयार है। केरल में उन्होंने एलडीएफ और यूडीएफ के बीच ‘मैच फिक्सिंग’ का आरोप लगाया और कहा कि जनता इस फिक्सिंग से तंग आ चुकी है। नबीन ने कहा कि भाजपा का वोट बैंक लगातार बढ़ रहा है और लोग पार्टी को एक सशक्त विकल्प के रूप में देख रहे हैं।

    राहुल गांधी द्वारा बीजेपी और एलडीएफ के बीच ‘सेटिंग’ के आरोपों पर नबीन ने पलटवार किया। उन्होंने राहुल गांधी को कमजोर ज्ञान वाला नेता करार देते हुए सवाल उठाया कि अगर सेटिंग होती, तो पड़ोसी राज्य तमिलनाडु में कांग्रेस और कम्युनिस्ट गठबंधन क्यों हैं। उन्होंने सबरीमाला मुद्दे पर भी कांग्रेस को घेरा और पूछा कि क्यों इस संवेदनशील विषय पर राहुल गांधी चुप्पी साध लेते हैं। नबीन ने स्पष्ट किया कि भाजपा का लक्ष्य ‘कांग्रेस मुक्त भारत’ है और पार्टी देश में कम्युनिस्ट सिस्टम को पूरी तरह उखाड़ फेंकने के लिए प्रतिबद्ध है।

    असम चुनाव को लेकर भी भाजपा अध्यक्ष ने टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि कांग्रेस पूरी तरह निराश और हताश स्थिति में है, जबकि भाजपा पिछले प्रदर्शन से भी बेहतर परिणाम लाने के लिए तैयार है। दक्षिण भारत में सुपरस्टार और टीवीके प्रमुख विजय की राजनीति में एंट्री पर नबीन ने कहा कि राजनीति में पूर्ण समय और समर्पण जरूरी है, पार्ट-टाइम से कोई काम नहीं चलता। उन्होंने तमिलनाडु में भाजपा के AIADMK के साथ गठबंधन का उल्लेख करते हुए पार्टी की रणनीति का स्पष्ट संकेत दिया।

    नबीन ने यह भी कहा कि राष्ट्रीय हित के मुद्दों पर शब्दों की मर्यादा के साथ कड़ा रुख अपनाना भाजपा का कर्तव्य है और पार्टी जनता के विश्वास और समर्थन को बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कांग्रेस पर आरोप लगाया कि उसकी रणनीतियों और बयानबाजी का लक्ष्य केवल भ्रम और विवाद फैलाना है, जबकि जनता भाजपा को एक सशक्त विकल्प के रूप में देख रही है।

  • स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती मामले में ओपी राजभर का बड़ा बयान, कहा फिर चोला छोड़कर

    स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती मामले में ओपी राजभर का बड़ा बयान, कहा फिर चोला छोड़कर


    नई दिल्ली । उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री और सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के नेता ओमप्रकाश राजभर ने बड़ा राजनीतिक बयान दिया है. एबीपी न्यूज़ से खास बातचीत में उन्होंने शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद पर तीखा प्रहार करते हुए कहा कि अगर किसी को राजनीति करनी है और राजनीतिक नेताओं पर आरोप लगाने हैं तो फिर चोला छोड़कर कुर्ता-पायजामा पहनकर सीधे राजनीति के मैदान में आना चाहिए. मेरठ पहुंचे राजभर ने कहा कि बटुकों के साथ हुई मारपीट गलत थी लेकिन उस घटना के पीछे की सच्चाई भी समझनी चाहिए.

    सदानंद सरस्वती ने अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती का किया समर्थन

    इस बीच मध्य प्रदेश के नरसिंहपुर जिले के सूखाखैरी ग्राम में आयोजित श्री रामचरितमानस एवं विष्णु यज्ञ कार्यक्रम के दौरान शंकराचार्य सदानंद सरस्वती ने बिना नाम लिए अपने गुरुभाई अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती का समर्थन किया. उन्होंने कहा कि हमारे आचार्यों के प्रति ऐसा कोई कार्य नहीं होना चाहिए जिससे सनातन धर्म को ठेस पहुंचे. उन्होंने यह भी कहा कि देश के अनेक हिंदू मंदिर सरकार के अधीन हैं जबकि अन्य धर्मों के धार्मिक स्थलों पर ऐसा नियंत्रण नहीं है क्या यह अन्याय नहीं है.  गो रक्षा के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि इस विषय पर होने वाले आंदोलनों को कुचलना या किसी प्रकार का षड्यंत्र करना उचित नहीं है. अपने संबोधन में उन्होंने यह भी कहा कि कल्पना कभी सिद्ध नहीं होती सत्य को प्रताड़ित किया जा सकता है पराजित नहीं किया जा सकता.

    साध्वी ने आरोपों को बताया गलत

    इन सबके बीच शंकराचार्य के मठ में रहने वाली साध्वी श्री अम्बा ने शंकराचार्य पर लगाए गए सभी आरोपों को पूरी तरह निराधार बताया है. उन्होंने कहा कि जिन व्यक्ति ने आरोप लगाए हैं वही स्वयं दोषी हैं और सच्चाई को तोड़-मरोड़ कर पेश किया जा रहा है. साध्वी ने कहा कि इन आरोपों से मठ से जुड़े सभी लोग बेहद दुखी और आहत हैं. मठ परिसर की ओर इशारा करते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि यहां किसी भी प्रकार का स्विमिंग पूल नहीं है और झूठे तथ्यों के आधार पर भ्रम फैलाया जा रहा है.

  • पहली बार विधायक बनीं मैथिली ठाकुर ने कहा ये बात, तेजस्वी यादव ने पलटवार कर विधानसभा में मचाया हंगामा

    पहली बार विधायक बनीं मैथिली ठाकुर ने कहा ये बात, तेजस्वी यादव ने पलटवार कर विधानसभा में मचाया हंगामा



    नई दिल्ली। बिहार विधानसभा में गुरुवार को अलीनगर से पहली बार विधायक बनीं मैथिली ठाकुर के विवादित बयान ने राजनीति में भूचाल ला दिया है। उन्होंने आरजेडी अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव के छोटे बेटे के प्रति स्नेह की तुलना महाभारत के धृतराष्ट्र और दुर्योधन से की। हालांकि मैथिली ने किसी का नाम नहीं लिया, लेकिन उनके बयान से 2005 से पहले के आरजेडी शासन की ओर इशारा साफ नजर आया।

    तेजस्वी यादव ने पलटवार किया
    आरजेडी के नेता और नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने शुक्रवार को इस बयान पर तीखा हमला बोला। सोशल मीडिया पर मैथिली का फोटो साझा करते हुए उन्होंने लिखा कि कुछ लोग विधायक बनते ही राजनीति का पूरा ज्ञान होने का भ्रम पाल लेते हैं। तेजस्वी ने कहा कि “विधानसभा का ए, बी, सी भी ठीक से समझे बिना कुछ लोग ‘जननायक’ पर कटाक्ष करने का दुस्साहस कर रहे हैं।”

    उन्होंने मैथिली पर आरोप लगाया कि दरभंगा में हाल ही में हुई दलित लड़की के दुष्कर्म और हत्या पर वह चुप रही। साथ ही उन्होंने तंज कसा कि जो लोग आरजेडी शासनकाल को “जंगल राज” कहते हैं, उनके परिवार ने हाल ही में मधुबनी में चोरी की शिकायत दर्ज कराई, जबकि राज्य में उनकी ही पार्टी की सरकार है।

    राजनीतिक गलियारों में गरमागरम बहस
    मैथिली और तेजस्वी के बीच यह विवाद बिहार की राजनीति में नया मोड़ लेकर आया है। भाजपा की ओर से फिलहाल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। राजनीतिक विश्लेषक मान रहे हैं कि यह विवाद अगले कुछ दिनों में और गहराने वाला है।

    विश्लेषकों का मानना है कि मैथिली के महाभारत के उदाहरण और तेजस्वी के तीखे पलटवार ने विधानसभा में नई बहस को जन्म दे दिया है। विपक्ष और सत्ता पक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज होने की संभावना है, और राजनीतिक दल इसे लोकप्रियता और मीडिया कवरेज बढ़ाने के लिए इस्तेमाल कर सकते हैं।

    भविष्य की राजनीति पर असर
    बिहार में इस तरह की बयानबाजी अगले विधानसभा सत्र और स्थानीय राजनीति में भी असर डाल सकती है। तेजस्वी का सोशल मीडिया तंज और मैथिली का विवादित बयान दोनों ही पार्टियों की रणनीतियों का हिस्सा बनते दिखाई दे रहे हैं।

  • सीएम ने माफी मांगी तो क्या हो गया यार माफी के बाद भी नहीं बदला कैलाश विजयवर्गीय का तेवर, औकात बयान पर सियासी घमासान

    सीएम ने माफी मांगी तो क्या हो गया यार माफी के बाद भी नहीं बदला कैलाश विजयवर्गीय का तेवर, औकात बयान पर सियासी घमासान


    भोपाल। मध्यप्रदेश विधानसभा में बजट सत्र 2026 के दौरान आज फिर संसदीय कार्य मंत्री कैलाश विजयवर्गीय का विवादित बयान चर्चा में रहा। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा माफी मांगने के बाद भी विजयवर्गीय ने अपने तेवर में नरमी नहीं दिखाई और मीडिया से बातचीत में कहा कप्तान है वो तो यार माफी मांगी तो क्या हो गया। उनका यह बयान सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।

    दरअसल बजट सत्र के चौथे दिन भागीरथपुरा दूषित पानी और मौतों के मामले पर जब विपक्ष ने सरकार पर सवाल उठाए तो नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार और मंत्री के बीच तीखी नोकझोंक हो गई। इस बहस के दौरान विजयवर्गीय ने असंसदीय भाषा का उपयोग करते हुए उमंग सिंघार को औकात में रहो कह दिया जिससे सदन में हंगामा हो गया और कार्यवाही कुछ समय के लिए स्थगित करनी पड़ी।

    हंगामे के बढ़ने पर विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर ने खेद जताया और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सदन से सार्वजनिक रूप से माफी मांगी जिससे सदन की गरिमा को बनाए रखने की अपील की गई। हालांकि विजयवर्गीय के तेवर इसके बावजूद नरम नहीं पड़े। मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा कि कभी-कभी गुस्सा आ जाता है यार सी प्रतिक्रिया भी दी।

    इस मुद्दे पर नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने भी पलटवार किया और कहा कि वह अपनी औकात जनता की सेवा करने और उनके सवालों को उठाने में ही मानते हैं। उन्होंने कहा कि जब विपक्ष गंभीर मुद्दों जैसे भागीरथपुरा मौतों या अडानी ग्रुप के साथ समझौते पर चर्चा करता है तो इसका जवाब इस तरह के बयान से नहीं दिया जाना चाहिए।

    वहीं युवा कांग्रेस ने दोषी मंत्री के बयान के खिलाफ प्रदर्शन का ऐलान किया है और आज उनके बंगले के बाहर घेराव कार्यक्रम होगा जिसे देखते हुए सुरक्षा कड़ी कर दी गई है। भारी पुलिस बल और बैरिकेडिंग की व्यवस्था की गई है ताकि किसी अप्रिय घटना से बचा जा सके।

    बीजेपी शासन के नेताओं ने भी प्रतिक्रिया दी है। एक बीजेपी विधायक ने कहा कि विपक्ष के लोग मुट्ठी भर हैं और उनका मोर्चा छोटा है जबकि उनकी पार्टी का मोर्चा बड़ा है। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष ने पहले बदतमीजी की थी और इसलिए पूरा विपक्ष माफी मांगे।

    इस पूरे विवाद ने विधानसभा सत्र को गर्मा‑गर्म बहस और सियासी टकराव का केंद्र बना दिया है। मुख्यमंत्री की माफी के बावजूद मंत्री का बयान सियासी कारवाई और विरोध प्रदर्शन का विषय बन गया है जिससे सदन और बाहर दोनों जगह राजनीति गरमाई हुई है।

  • बंगाल में बाबरी मस्जिद बनाएंगे, रोक सको तो रोक लो” हुमायूं कबीर ने CM योगी को दी खुली चुनौती

    बंगाल में बाबरी मस्जिद बनाएंगे, रोक सको तो रोक लो” हुमायूं कबीर ने CM योगी को दी खुली चुनौती


    कोलकाता । पश्चिम बंगाल चुनाव से पहले बाबरी मस्जिद को लेकर सियासी तापमान बढ़ गया है। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के बाबरी मस्जिद संबंधी बयान के बाद पूर्व तृणमूल कांग्रेस नेता और जनता उन्नयन पार्टी प्रमुख हुमायूं कबीर ने पलटवार किया है। मंगलवार को हुमायूं कबीर ने कहा कि वे मुर्शिदाबाद में बाबरी मस्जिद की नकल वाली मस्जिद जरूर बनाएंगे। उन्होंने चुनौती देते हुए कहा मस्जिद बनाकर रहूंगा रोक सको तो रोक लो।

    मीडिया से बातचीत में हुमायूं ने कहा कि बंगाल में ममता बनर्जी का शासन है और भारतीय संविधान के अनुसार मुसलमानों को भी मस्जिद बनाने का पूरा अधिकार है जैसे अन्य लोग मंदिर या चर्च बनाते हैं। उन्होंने बताया कि 6 दिसंबर 2025 को बाबरी ढांचे के गिराए जाने की वर्षगांठ पर उन्होंने मस्जिद की नींव रखी थी और 11 फरवरी 2026 से निर्माण कार्य शुरू होगा। सुबह 10 बजे लगभग 1200 लोग कुरान पढ़ते हुए निर्माण कार्य में शामिल होंगे। हुमायूं ने दोहराया कि वे किसी दबाव में नहीं आएंगे और किसी से डरते नहीं।

    इससे पहले उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बाबरी ढांचे के पुनर्निर्माण को कयामत के दिन जैसा बताते हुए इसे कभी संभव न होने वाला कहा था। उन्होंने बाराबंकी में कहा था हमने कहा था कि रामलला हम आएंगे मंदिर वहीं बनाएंगे। मंदिर बन गया है। जो लोग कयामत के दिन के आने का सपना देख रहे हैं वे ऐसे ही सड़-गल जाएंगे।

    योगी ने आगे कहा कि अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण 500 वर्षों के बाद संभव हुआ और विपक्षी दल संकट के समय भगवान राम को याद करते हैं बाकि समय भूल जाते हैं। उनका कहना था कि बाबरी मस्जिद का निर्माण अब कभी नहीं होगा।