सदानंद सरस्वती ने अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती का किया समर्थन
साध्वी ने आरोपों को बताया गलत

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साध्वी ने आरोपों को बताया गलत

तेजस्वी यादव ने पलटवार किया
आरजेडी के नेता और नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने शुक्रवार को इस बयान पर तीखा हमला बोला। सोशल मीडिया पर मैथिली का फोटो साझा करते हुए उन्होंने लिखा कि कुछ लोग विधायक बनते ही राजनीति का पूरा ज्ञान होने का भ्रम पाल लेते हैं। तेजस्वी ने कहा कि “विधानसभा का ए, बी, सी भी ठीक से समझे बिना कुछ लोग ‘जननायक’ पर कटाक्ष करने का दुस्साहस कर रहे हैं।”
उन्होंने मैथिली पर आरोप लगाया कि दरभंगा में हाल ही में हुई दलित लड़की के दुष्कर्म और हत्या पर वह चुप रही। साथ ही उन्होंने तंज कसा कि जो लोग आरजेडी शासनकाल को “जंगल राज” कहते हैं, उनके परिवार ने हाल ही में मधुबनी में चोरी की शिकायत दर्ज कराई, जबकि राज्य में उनकी ही पार्टी की सरकार है।
राजनीतिक गलियारों में गरमागरम बहस
मैथिली और तेजस्वी के बीच यह विवाद बिहार की राजनीति में नया मोड़ लेकर आया है। भाजपा की ओर से फिलहाल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। राजनीतिक विश्लेषक मान रहे हैं कि यह विवाद अगले कुछ दिनों में और गहराने वाला है।
विश्लेषकों का मानना है कि मैथिली के महाभारत के उदाहरण और तेजस्वी के तीखे पलटवार ने विधानसभा में नई बहस को जन्म दे दिया है। विपक्ष और सत्ता पक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज होने की संभावना है, और राजनीतिक दल इसे लोकप्रियता और मीडिया कवरेज बढ़ाने के लिए इस्तेमाल कर सकते हैं।
भविष्य की राजनीति पर असर
बिहार में इस तरह की बयानबाजी अगले विधानसभा सत्र और स्थानीय राजनीति में भी असर डाल सकती है। तेजस्वी का सोशल मीडिया तंज और मैथिली का विवादित बयान दोनों ही पार्टियों की रणनीतियों का हिस्सा बनते दिखाई दे रहे हैं।

दरअसल बजट सत्र के चौथे दिन भागीरथपुरा दूषित पानी और मौतों के मामले पर जब विपक्ष ने सरकार पर सवाल उठाए तो नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार और मंत्री के बीच तीखी नोकझोंक हो गई। इस बहस के दौरान विजयवर्गीय ने असंसदीय भाषा का उपयोग करते हुए उमंग सिंघार को औकात में रहो कह दिया जिससे सदन में हंगामा हो गया और कार्यवाही कुछ समय के लिए स्थगित करनी पड़ी।
हंगामे के बढ़ने पर विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर ने खेद जताया और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सदन से सार्वजनिक रूप से माफी मांगी जिससे सदन की गरिमा को बनाए रखने की अपील की गई। हालांकि विजयवर्गीय के तेवर इसके बावजूद नरम नहीं पड़े। मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा कि कभी-कभी गुस्सा आ जाता है यार सी प्रतिक्रिया भी दी।
इस मुद्दे पर नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने भी पलटवार किया और कहा कि वह अपनी औकात जनता की सेवा करने और उनके सवालों को उठाने में ही मानते हैं। उन्होंने कहा कि जब विपक्ष गंभीर मुद्दों जैसे भागीरथपुरा मौतों या अडानी ग्रुप के साथ समझौते पर चर्चा करता है तो इसका जवाब इस तरह के बयान से नहीं दिया जाना चाहिए।
वहीं युवा कांग्रेस ने दोषी मंत्री के बयान के खिलाफ प्रदर्शन का ऐलान किया है और आज उनके बंगले के बाहर घेराव कार्यक्रम होगा जिसे देखते हुए सुरक्षा कड़ी कर दी गई है। भारी पुलिस बल और बैरिकेडिंग की व्यवस्था की गई है ताकि किसी अप्रिय घटना से बचा जा सके।
बीजेपी शासन के नेताओं ने भी प्रतिक्रिया दी है। एक बीजेपी विधायक ने कहा कि विपक्ष के लोग मुट्ठी भर हैं और उनका मोर्चा छोटा है जबकि उनकी पार्टी का मोर्चा बड़ा है। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष ने पहले बदतमीजी की थी और इसलिए पूरा विपक्ष माफी मांगे।
इस पूरे विवाद ने विधानसभा सत्र को गर्मा‑गर्म बहस और सियासी टकराव का केंद्र बना दिया है। मुख्यमंत्री की माफी के बावजूद मंत्री का बयान सियासी कारवाई और विरोध प्रदर्शन का विषय बन गया है जिससे सदन और बाहर दोनों जगह राजनीति गरमाई हुई है।

मीडिया से बातचीत में हुमायूं ने कहा कि बंगाल में ममता बनर्जी का शासन है और भारतीय संविधान के अनुसार मुसलमानों को भी मस्जिद बनाने का पूरा अधिकार है जैसे अन्य लोग मंदिर या चर्च बनाते हैं। उन्होंने बताया कि 6 दिसंबर 2025 को बाबरी ढांचे के गिराए जाने की वर्षगांठ पर उन्होंने मस्जिद की नींव रखी थी और 11 फरवरी 2026 से निर्माण कार्य शुरू होगा। सुबह 10 बजे लगभग 1200 लोग कुरान पढ़ते हुए निर्माण कार्य में शामिल होंगे। हुमायूं ने दोहराया कि वे किसी दबाव में नहीं आएंगे और किसी से डरते नहीं।
इससे पहले उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बाबरी ढांचे के पुनर्निर्माण को कयामत के दिन जैसा बताते हुए इसे कभी संभव न होने वाला कहा था। उन्होंने बाराबंकी में कहा था हमने कहा था कि रामलला हम आएंगे मंदिर वहीं बनाएंगे। मंदिर बन गया है। जो लोग कयामत के दिन के आने का सपना देख रहे हैं वे ऐसे ही सड़-गल जाएंगे।
योगी ने आगे कहा कि अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण 500 वर्षों के बाद संभव हुआ और विपक्षी दल संकट के समय भगवान राम को याद करते हैं बाकि समय भूल जाते हैं। उनका कहना था कि बाबरी मस्जिद का निर्माण अब कभी नहीं होगा।

बीजेपी प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि किताब के प्रकाशक पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया के स्पष्टीकरण के बाद राहुल गांधी के दावे पूरी तरह सवालों के घेरे में हैं। PRHI ने पहले ही स्पष्ट किया था कि उनके पास नरवणे की किताब के विशेष प्रकाशन अधिकार हैं और यह अभी तक प्रकाशित नहीं हुई है। त्रिवेदी ने इसे अक्षम्य अपराध बताया और कहा कि इससे यह साबित होता है कि कांग्रेस नेता लोकसभा का इस्तेमाल राजनीतिक लाभ के लिए कर रहे थे।
भाजपा नेताओं का आरोप है कि राहुल गांधी की कार्रवाई से राष्ट्रीय सुरक्षा पर भ्रम फैलाने का प्रयास हुआ। वरिष्ठ नेता रविशंकर प्रसाद ने भी कहा कि लोकसभा में सदन को गुमराह करने के लिए फर्जी किताब का हवाला देना गंभीर मामला है और गांधी को देश व संसद के सामने माफी मांगनी चाहिए। भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से अनुरोध किया कि ऐसे मामलों पर सख्त कार्रवाई की जाए और लोकतंत्र की रक्षा के लिए विकल्पों पर विचार किया जाए।

अमित शाह ने अपने भाषण की शुरुआत में इस घटना में मारे गए 25 श्रमिकों को श्रद्धांजलि दी। साथ ही पीड़ित परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त की। उन्होंने कहा कि अभी भी 27 लोग लापता हैं और यह घटना सिर्फ दुर्घटना नहीं, बल्कि ममता सरकार की जिम्मेदारी की कमी और भ्रष्टाचार का प्रतीक है। अमित शाह ने सवाल उठाया कि फैक्ट्री का मालिक कौन था और वह किस राजनीतिक संरक्षण में काम कर रहा था। उन्होंने यह भी पूछा कि फैक्ट्री के मालिक ने किसके निजी विमान से विदेश यात्रा की और अब तक उसकी गिरफ्तारी क्यों नहीं हुई। केंद्रीय गृह मंत्री ने न्यायिक जांच की मांग करते हुए दोषियों को सख्त सजा देने की भी बात कही।
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जुबीन गर्ग हत्याकांड पर सवाल
गोगोई ने यह भी कहा कि मुख्यमंत्री सरमा जुबीन गर्ग हत्या मामले में न्याय दिलाने में असफल रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सरमा अक्सर झूठे और भ्रामक बयान देते हैं, और उनके शब्दों में कोई विश्वसनीयता नहीं है। गोगोई ने कहा कि जुबीन गर्ग मामले में कमजोर चार्जशीट पेश की गई है, और इसमें शामिल लोगों के नाम इसलिए नहीं हैं क्योंकि वे मुख्यमंत्री के करीबी हैं।
जाति बचाओ, मति बचाओ अभियान
गौरव गोगोई ने ‘जाति बचाओ, मति बचाओ’ अभियान के तहत गुवाहाटी में एक बड़ा कार्यक्रम आयोजित किया। इस कार्यक्रम में कई सामुदायिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने कांग्रेस में शामिल होने की घोषणा की। शामिल होने वालों में प्रमुख आदिवासी नेता रुकमा कुमार मेडोक और पूर्व अल्पसंख्यक छात्र संघ के अध्यक्ष रेजाउल करीम सरकार शामिल थे।
तरुण गोगोई की याद
गोगोई ने अपने दिवंगत पिता और पूर्व मुख्यमंत्री तरुण गोगोई को याद करते हुए कहा कि उन्होंने एक बार असम के राजनीतिक माहौल को बदल दिया था। उन्होंने कहा कि आज असम के लोग फिर से सत्ता पर सवाल उठा रहे हैं। गोगोई ने चेतावनी दी कि वर्तमान सरकार ने भय का माहौल बनाया है और इसे समाप्त करना आवश्यक है।

पहले हाई कोर्ट, अब सुप्रीम कोर्ट
इससे पहले ईडी ने शुक्रवार (9 जनवरी 2026) को कोलकाता हाई कोर्ट में याचिका दाखिल की थी, जिस पर बुधवार (14 जनवरी 2026) को सुनवाई प्रस्तावित है। हाई कोर्ट में ईडी ने कहा कि जांच में जानबूझकर रुकावट डाली गई, जिससे एजेंसी का काम प्रभावित हुआ।
याचिका में ईडी ने मामले की सीबीआई जांच कराने और केस दर्ज करने की अनुमति भी मांगी है।
ED से टकराव के बीच ममता सरकार का जवाब
ईडी की कार्रवाई के जवाब में ममता बनर्जी सरकार ने भी सुप्रीम कोर्ट में कैविएट एप्लीकेशन दाखिल कर दी है। राज्य सरकार ने अदालत से आग्रह किया है कि इस मामले में कोई भी आदेश पारित करने से पहले उसका पक्ष जरूर सुना जाए, ताकि कोई एकतरफा फैसला न हो।
क्या है पूरा विवाद?
पूरा मामला गुरुवार (8 जनवरी 2026) को शुरू हुआ, जब ईडी ने कोयला घोटाला मामले में राजनीतिक कंसलटेंसी फर्म I-PAC के डायरेक्टर प्रतीक जैन के घर और ऑफिस पर छापेमारी की।
ईडी की कार्रवाई के दौरान मुख्यमंत्री ममता बनर्जी राज्य प्रशासन और पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ मौके पर पहुंचीं। आरोप है कि इस दौरान कुछ अहम फाइलें और इलेक्ट्रॉनिक दस्तावेज निकालकर मुख्यमंत्री की गाड़ी में रखवाए गए, जिसके बाद यह मामला कानूनी और राजनीतिक दोनों स्तरों पर गरमा गया।