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  • सीएम ने माफी मांगी तो क्या हो गया यार माफी के बाद भी नहीं बदला कैलाश विजयवर्गीय का तेवर, औकात बयान पर सियासी घमासान

    सीएम ने माफी मांगी तो क्या हो गया यार माफी के बाद भी नहीं बदला कैलाश विजयवर्गीय का तेवर, औकात बयान पर सियासी घमासान


    भोपाल। मध्यप्रदेश विधानसभा में बजट सत्र 2026 के दौरान आज फिर संसदीय कार्य मंत्री कैलाश विजयवर्गीय का विवादित बयान चर्चा में रहा। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा माफी मांगने के बाद भी विजयवर्गीय ने अपने तेवर में नरमी नहीं दिखाई और मीडिया से बातचीत में कहा कप्तान है वो तो यार माफी मांगी तो क्या हो गया। उनका यह बयान सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।

    दरअसल बजट सत्र के चौथे दिन भागीरथपुरा दूषित पानी और मौतों के मामले पर जब विपक्ष ने सरकार पर सवाल उठाए तो नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार और मंत्री के बीच तीखी नोकझोंक हो गई। इस बहस के दौरान विजयवर्गीय ने असंसदीय भाषा का उपयोग करते हुए उमंग सिंघार को औकात में रहो कह दिया जिससे सदन में हंगामा हो गया और कार्यवाही कुछ समय के लिए स्थगित करनी पड़ी।

    हंगामे के बढ़ने पर विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर ने खेद जताया और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सदन से सार्वजनिक रूप से माफी मांगी जिससे सदन की गरिमा को बनाए रखने की अपील की गई। हालांकि विजयवर्गीय के तेवर इसके बावजूद नरम नहीं पड़े। मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा कि कभी-कभी गुस्सा आ जाता है यार सी प्रतिक्रिया भी दी।

    इस मुद्दे पर नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने भी पलटवार किया और कहा कि वह अपनी औकात जनता की सेवा करने और उनके सवालों को उठाने में ही मानते हैं। उन्होंने कहा कि जब विपक्ष गंभीर मुद्दों जैसे भागीरथपुरा मौतों या अडानी ग्रुप के साथ समझौते पर चर्चा करता है तो इसका जवाब इस तरह के बयान से नहीं दिया जाना चाहिए।

    वहीं युवा कांग्रेस ने दोषी मंत्री के बयान के खिलाफ प्रदर्शन का ऐलान किया है और आज उनके बंगले के बाहर घेराव कार्यक्रम होगा जिसे देखते हुए सुरक्षा कड़ी कर दी गई है। भारी पुलिस बल और बैरिकेडिंग की व्यवस्था की गई है ताकि किसी अप्रिय घटना से बचा जा सके।

    बीजेपी शासन के नेताओं ने भी प्रतिक्रिया दी है। एक बीजेपी विधायक ने कहा कि विपक्ष के लोग मुट्ठी भर हैं और उनका मोर्चा छोटा है जबकि उनकी पार्टी का मोर्चा बड़ा है। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष ने पहले बदतमीजी की थी और इसलिए पूरा विपक्ष माफी मांगे।

    इस पूरे विवाद ने विधानसभा सत्र को गर्मा‑गर्म बहस और सियासी टकराव का केंद्र बना दिया है। मुख्यमंत्री की माफी के बावजूद मंत्री का बयान सियासी कारवाई और विरोध प्रदर्शन का विषय बन गया है जिससे सदन और बाहर दोनों जगह राजनीति गरमाई हुई है।

  • बंगाल में बाबरी मस्जिद बनाएंगे, रोक सको तो रोक लो” हुमायूं कबीर ने CM योगी को दी खुली चुनौती

    बंगाल में बाबरी मस्जिद बनाएंगे, रोक सको तो रोक लो” हुमायूं कबीर ने CM योगी को दी खुली चुनौती


    कोलकाता । पश्चिम बंगाल चुनाव से पहले बाबरी मस्जिद को लेकर सियासी तापमान बढ़ गया है। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के बाबरी मस्जिद संबंधी बयान के बाद पूर्व तृणमूल कांग्रेस नेता और जनता उन्नयन पार्टी प्रमुख हुमायूं कबीर ने पलटवार किया है। मंगलवार को हुमायूं कबीर ने कहा कि वे मुर्शिदाबाद में बाबरी मस्जिद की नकल वाली मस्जिद जरूर बनाएंगे। उन्होंने चुनौती देते हुए कहा मस्जिद बनाकर रहूंगा रोक सको तो रोक लो।

    मीडिया से बातचीत में हुमायूं ने कहा कि बंगाल में ममता बनर्जी का शासन है और भारतीय संविधान के अनुसार मुसलमानों को भी मस्जिद बनाने का पूरा अधिकार है जैसे अन्य लोग मंदिर या चर्च बनाते हैं। उन्होंने बताया कि 6 दिसंबर 2025 को बाबरी ढांचे के गिराए जाने की वर्षगांठ पर उन्होंने मस्जिद की नींव रखी थी और 11 फरवरी 2026 से निर्माण कार्य शुरू होगा। सुबह 10 बजे लगभग 1200 लोग कुरान पढ़ते हुए निर्माण कार्य में शामिल होंगे। हुमायूं ने दोहराया कि वे किसी दबाव में नहीं आएंगे और किसी से डरते नहीं।

    इससे पहले उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बाबरी ढांचे के पुनर्निर्माण को कयामत के दिन जैसा बताते हुए इसे कभी संभव न होने वाला कहा था। उन्होंने बाराबंकी में कहा था हमने कहा था कि रामलला हम आएंगे मंदिर वहीं बनाएंगे। मंदिर बन गया है। जो लोग कयामत के दिन के आने का सपना देख रहे हैं वे ऐसे ही सड़-गल जाएंगे।

    योगी ने आगे कहा कि अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण 500 वर्षों के बाद संभव हुआ और विपक्षी दल संकट के समय भगवान राम को याद करते हैं बाकि समय भूल जाते हैं। उनका कहना था कि बाबरी मस्जिद का निर्माण अब कभी नहीं होगा।

  • नरवणे की किताब पर विवाद जारी, बीजेपी ने राहुल गांधी से सार्वजनिक माफी की मांग की

    नरवणे की किताब पर विवाद जारी, बीजेपी ने राहुल गांधी से सार्वजनिक माफी की मांग की


    नई दिल्ली । पूर्व सेना प्रमुख जनरल एमएम नरवणे की किताब फोर स्टार्स ऑफ डेस्टिनी को लेकर सियासी तनातनी तेज हो गई है। भारतीय जनता पार्टी ने आरोप लगाया है कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने लोकसभा में तथ्यों को तोड़-मरोड़कर पेश किया और एक काल्पनिक कहानी गढ़ी। पार्टी ने मांग की है कि इस मामले पर राहुल गांधी सार्वजनिक रूप से माफी मांगें।

    बीजेपी प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि किताब के प्रकाशक पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया के स्पष्टीकरण के बाद राहुल गांधी के दावे पूरी तरह सवालों के घेरे में हैं। PRHI ने पहले ही स्पष्ट किया था कि उनके पास नरवणे की किताब के विशेष प्रकाशन अधिकार हैं और यह अभी तक प्रकाशित नहीं हुई है। त्रिवेदी ने इसे अक्षम्य अपराध बताया और कहा कि इससे यह साबित होता है कि कांग्रेस नेता लोकसभा का इस्तेमाल राजनीतिक लाभ के लिए कर रहे थे।

    भाजपा नेताओं का आरोप है कि राहुल गांधी की कार्रवाई से राष्ट्रीय सुरक्षा पर भ्रम फैलाने का प्रयास हुआ। वरिष्ठ नेता रविशंकर प्रसाद ने भी कहा कि लोकसभा में सदन को गुमराह करने के लिए फर्जी किताब का हवाला देना गंभीर मामला है और गांधी को देश व संसद के सामने माफी मांगनी चाहिए। भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से अनुरोध किया कि ऐसे मामलों पर सख्त कार्रवाई की जाए और लोकतंत्र की रक्षा के लिए विकल्पों पर विचार किया जाए।

  • बुड्ढा लड़का लोफर है…', RJD ने सोशल मीडिया पर नीतीश कुमार पर की अभद्र टिप्पणी

    बुड्ढा लड़का लोफर है…', RJD ने सोशल मीडिया पर नीतीश कुमार पर की अभद्र टिप्पणी


    नई दिल्ली । बिहार में विधान परिषद में सत्र की कार्यवाही के दौरान मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा पूर्व सीएम राबड़ी देवी को लड़की कहे जावने के मामले पर विवाद बढ़ता चला जा रहा है। पहले रोहिणी आचार्य ने इस मामले को लेकर सीएम नीतीश पर निशाना साधा था। इसके बाद तेजस्वी यादव ने सीएम नीतीश को डिमेंशिया और अल्जाइमर का शिकार बता दिया था। वहीं अब राजद ने सोशल मीडिया पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के खिलाफ अभद्र टिप्पणी की है। राजद ने सीएम नीतीश को लोफर और बुड्ढा तक कह दिया था।

    RJD ने क्या ट्वीट किया?
    राजद ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर अपने आधिकारिक हैंडल से ट्वीट किया और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर निशाना साधते हुए विवादित टिप्पणी की। राजद ने कहा संवैधानिक पद पर बैठ महिलाओं के लिए अश्लील बातें करने वाला बिहार का बुड्ढा लड़का लोफर है।
    आज विधान परिषद में मार्शल बुलाए गए
    मंगलवार को बिहार विधानसभा में लगातार हंगामा देखने को मिला। इसके बाद विपक्ष के लगातार हंगामे के बाद सभापति ने हंगामा कर रहे विपक्षी सदस्यों को मार्शल से दिन भर के लिए बाहर करवा दिया। सभापति ने बार बार कहा कि प्रश्नकाल को बाधित नहीं करें सदन की कार्यवाही में व्यवधान न डालें बावजूद विपक्ष के सदस्य बेल तक पहुंचकर नारेबाजी और हंगामा करते रहे। इसके बाद सभापति ने कड़ी कार्रवाई करते हुए विपक्षी सदस्यों को पूरे दिन के लिए सदन से बाहर करने का आदेश दे दिया। बाहर भी विपक्ष का हंगामा जारी रहा।
    सुनील सिंह और मंत्री अशोक चौधरी के बीच तीखी नोकझोंक
    सभापति के आदेश से मार्शल बुलाए गए जिन्होंने बीच-बचाव करते हुए सदस्यों को अलग किया। सुनील सिंह और मंत्री अशोक चौधरी के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिली। मंत्री अशोक चौधरी काफी गुस्से में दिखाई दिए वहीं विपक्ष के नेता भी आक्रोशित नजर आए। इस दौरान अशोक चौधरी ने सुनील सिंह से कहा तुम क्या हो जिस पर सुनील सिंह ने जवाब देते हुए उन्हें नौटंकीबाज तक कह दिया। पूरे घटनाक्रम के दौरान सदन में भारी शोर-शराबा और हंगामे का माहौल बना रहा।

  • अमित शाह का ममता सरकार पर करारा हमला, आनंदपुर अग्निकांड को बताया भ्रष्टाचार का परिणाम, किया ये बड़ा दावा

    अमित शाह का ममता सरकार पर करारा हमला, आनंदपुर अग्निकांड को बताया भ्रष्टाचार का परिणाम, किया ये बड़ा दावा


    नई दिल्‍ली । पश्चिम बंगाल के उत्तर 24 परगना जिले में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने एक बड़े कार्यकर्ता सम्मेलन में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और उनकी सरकार पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने आनंदपुर वेयरहाउस में मोमोज फैक्ट्री में लगी आग को सिर्फ एक हादसा नहीं माना और इसे भ्रष्टाचार और लापरवाही का नतीजा बताया।

    अमित शाह ने अपने भाषण की शुरुआत में इस घटना में मारे गए 25 श्रमिकों को श्रद्धांजलि दी। साथ ही पीड़ित परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त की। उन्होंने कहा कि अभी भी 27 लोग लापता हैं और यह घटना सिर्फ दुर्घटना नहीं, बल्कि ममता सरकार की जिम्मेदारी की कमी और भ्रष्टाचार का प्रतीक है। अमित शाह ने सवाल उठाया कि फैक्ट्री का मालिक कौन था और वह किस राजनीतिक संरक्षण में काम कर रहा था। उन्होंने यह भी पूछा कि फैक्ट्री के मालिक ने किसके निजी विमान से विदेश यात्रा की और अब तक उसकी गिरफ्तारी क्यों नहीं हुई। केंद्रीय गृह मंत्री ने न्यायिक जांच की मांग करते हुए दोषियों को सख्त सजा देने की भी बात कही।

    वंदे मातरम् पर अमित शाह का ममता सरकार पर हमला

    अमित शाह ने वंदे मातरम् को लेकर ममता बनर्जी और उनकी सरकार पर हमला बोला। उन्होंने कहा कि भारत के स्वतंत्रता संग्राम में शहीदों के अंतिम शब्द भी वंदे मातरम् रहे हैं। उन्‍होंने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में वंदे मातरम् के 150 साल पूरे होने पर इसे पूरे देश में मनाने का निर्णय लिया गया है। उन्होंने तृणमूल कांग्रेस और ममता बनर्जी के राष्ट्रीय प्रतीक का विरोध करने को तुष्टिकरण और वोट बैंक की राजनीति बताया। केंद्रीय मंत्री ने कहा “वंदे मातरम् का विरोध केवल प्रधानमंत्री का विरोध नहीं है, बल्कि यह बंगाल की अस्मिता और देश के स्वाभिमान का अपमान है।”

    अमित शाह का बंगाल चुनाव को लेकर बड़ा दावा

    अमित शाह ने 2026 विधानसभा चुनाव को लेकर बड़ा ऐलान किया। उन्होंने कहा कि अगले साल अप्रैल के बाद भाजपा की सरकार बनने पर आनंदपुर अग्निकांड जैसे सभी मामले में दोषियों को कानून के तहत सजा दी जाएगी। शाह ने दावा किया कि आगामी चुनाव में तृणमूल कांग्रेस सत्ता से बाहर हो जाएगी और भाजपा का वोट शेयर 50 प्रतिशत से अधिक रहने की संभावना है। उनका कहना था कि भाजपा प्रचंड बहुमत के साथ राज्य में सरकार बनाएगी और जनता के हितों के खिलाफ किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

    मां, माटी, मानुष नारे पर तंज
    मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के लोकप्रिय नारे मां, माटी, मानुष का जिक्र करते हुए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने राज्य में कानून-व्यवस्था और सुरक्षा की स्थिति पर तीखा सवाल उठाया। उन्‍होंने कहा कि आज बंगाल में तीनों ही असुरक्षित हैं। अमित शाह ने कहा, आज बंगाल में महिलाएं सुरक्षित नहीं हैं, आम लोग तृणमूल कांग्रेस की कथित सिंडिकेट गतिविधियों से परेशान हैं और अवैध घुसपैठ के कारण राज्य की जमीन और पहचान संकट में है। उन्‍होंने कहा कि जनता अब बदलाव चाहती है और आगामी विधानसभा चुनाव में जनता स्पष्ट जवाब देगी।

  • सपा सांसद वीरेंद्र सिंह का विवादित बयान: भगवान राम को बताया समाजवादी, BJP पर माता सीता को वनवास भेजने की चुगली का आरोप

    सपा सांसद वीरेंद्र सिंह का विवादित बयान: भगवान राम को बताया समाजवादी, BJP पर माता सीता को वनवास भेजने की चुगली का आरोप


    नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर सियासी घमासान पैदा हो गया है। चंदौली से समाजवादी पार्टी (सपा) के सांसद वीरेंद्र सिंह ने हाल ही में भगवान राम और माता सीता को लेकर ऐसा बयान दिया, जिसने सोशल मीडिया और राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है। सांसद का दावा है कि भगवान राम वनवास के दौरान समाजवादी विचारधारा अपनाते थे और उन्होंने आम लोगों और वनवासियों का समर्थन प्राप्त किया। इसके विपरीत, बीजेपी समर्थक राम को राजा के रूप में पूजते हैं।
    वीरेंद्र सिंह ने अपने बयान में कहा कि बीजेपी समर्थकों ने राम से चुगली कर माता सीता को वनवास भेजवाया। उन्होंने आगे कहा, “भगवान राम भिलनी के बेर खाना पसंद करते थे, झोपड़ी में रहना पसंद करते थे और निषाद समाज से मित्रता करते थे। ऐसे लोगों को सम्मान देना और मित्र बनाना ही समाजवाद की असली पहचान है। हम राम के उस रूप को मानते हैं जो वनवासी और समाजवादी विचारों वाले थे, जबकि भाजपा समर्थक राजा राम के रूप की पूजा करते हैं।”

    सांसद के इस बयान ने उत्तर प्रदेश की सियासत में नया विवाद पैदा कर दिया है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, उन्होंने केशव प्रसाद मौर्य के उस बयान का भी जवाब दिया जिसमें मौर्य ने कहा था कि सपा के कुछ विधायक बीजेपी के संपर्क में हैं। वीरेंद्र सिंह ने कहा कि मौर्य जैसे बयानों के कारण उन्हें पिछली बार चुनाव जीतने में कठिनाई हुई थी और इस बार भी उनका चुनाव वहीं से होने वाला है।

    राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि वीरेंद्र सिंह का बयान सपा और बीजेपी के बीच आगामी चुनावों से पहले राजनीतिक टकराव को और बढ़ा सकता है। सोशल मीडिया पर भी बयान को लेकर प्रतिक्रियाएं मिली-जुली हैं। कुछ लोग इसे आलोचना का विषय मान रहे हैं, जबकि कुछ इसे सपा के समाजवादी दृष्टिकोण के अनुरूप सही ठहराते हुए देख रहे हैं।

    विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह के बयान न केवल राजनीतिक बहस को तेज करते हैं, बल्कि आगामी चुनावों में मतदाताओं की राय पर भी असर डाल सकते हैं। चूंकि यह बयान धार्मिक प्रतीकों और राजनीतिक विचारधारा से जुड़ा है, इसलिए इसकी संवेदनशीलता और प्रभाव दोनों ही ज्यादा हैं।

    इस विवाद ने उत्तर प्रदेश की सियासत में एक बार फिर सपा और बीजेपी के बीच तनावपूर्ण माहौल पैदा कर दिया है। जनता और राजनीतिक विश्लेषक इसे आगामी चुनावों की रणनीति के रूप में भी देख रहे हैं। ऐसे बयान अक्सर चुनावी मोर्चों पर मतदाताओं की सोच को प्रभावित करते हैं और सियासी समीकरण बदल सकते हैं।

    कुल मिलाकर, वीरेंद्र सिंह का बयान यह दर्शाता है कि धार्मिक प्रतीकों और राजनीतिक विचारधारा का मिश्रण भारतीय राजनीति में कितनी तेजी से विवाद पैदा कर सकता है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि भाजपा और सपा इस बयान पर क्या प्रतिक्रिया देती हैं और चुनावी रणनीतियों पर इसका कितना असर पड़ता है।

  • गौरव गोगोई का हिमंता बिस्वा सरमा पर हमला: भ्रष्टाचार और मतदान अधिकारों

    गौरव गोगोई का हिमंता बिस्वा सरमा पर हमला: भ्रष्टाचार और मतदान अधिकारों

    नई दिल्ली| गौरव गोगोई का आरोपअसम कांग्रेस के अध्यक्ष गौरव गोगोई ने मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा पर गंभीर आरोप लगाते हुए उनके शासन में भ्रष्टाचार और कुशासन की बातें की हैं। उन्होंने कहा कि आदिवासी, अन्य पिछड़ा वर्ग, अनुसूचित जाति और अल्पसंख्यक समुदायों के मतदान अधिकारों का हनन किया जा रहा है।
    पत्रकारों से बातचीत करते हुए गोगोई ने कहा कि भाजपा के खिलाफ वोट देने वाले लोगों को दोबारा मतदान करने से रोका जा रहा है, जो उनकी डर का संकेत है।

    जुबीन गर्ग हत्याकांड पर सवाल

    गोगोई ने यह भी कहा कि मुख्यमंत्री सरमा जुबीन गर्ग हत्या मामले में न्याय दिलाने में असफल रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सरमा अक्सर झूठे और भ्रामक बयान देते हैं, और उनके शब्दों में कोई विश्वसनीयता नहीं है। गोगोई ने कहा कि जुबीन गर्ग मामले में कमजोर चार्जशीट पेश की गई है, और इसमें शामिल लोगों के नाम इसलिए नहीं हैं क्योंकि वे मुख्यमंत्री के करीबी हैं।

    जाति बचाओ, मति बचाओ अभियान

    गौरव गोगोई ने ‘जाति बचाओ, मति बचाओ’ अभियान के तहत गुवाहाटी में एक बड़ा कार्यक्रम आयोजित किया। इस कार्यक्रम में कई सामुदायिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने कांग्रेस में शामिल होने की घोषणा की। शामिल होने वालों में प्रमुख आदिवासी नेता रुकमा कुमार मेडोक और पूर्व अल्पसंख्यक छात्र संघ के अध्यक्ष रेजाउल करीम सरकार शामिल थे।

    तरुण गोगोई की याद

    गोगोई ने अपने दिवंगत पिता और पूर्व मुख्यमंत्री तरुण गोगोई को याद करते हुए कहा कि उन्होंने एक बार असम के राजनीतिक माहौल को बदल दिया था। उन्होंने कहा कि आज असम के लोग फिर से सत्ता पर सवाल उठा रहे हैं। गोगोई ने चेतावनी दी कि वर्तमान सरकार ने भय का माहौल बनाया है और इसे समाप्त करना आवश्यक है।

  • ED बनाम ममता बनर्जी: I-PAC रेड को लेकर गंभीर आरोप, सुप्रीम कोर्ट में याचिका

    ED बनाम ममता बनर्जी: I-PAC रेड को लेकर गंभीर आरोप, सुप्रीम कोर्ट में याचिका

    नई दिल्ली। ईडी का दावा है कि कोलकाता में I-PAC के डायरेक्टर प्रतीक जैन के आवास और ऑफिस पर छापेमारी के दौरान मुख्यमंत्री ममता बनर्जी मौके पर पहुंचीं और ईडी अधिकारियों से अहम फाइलें, हार्ड डिस्क और मोबाइल फोन छीन लिए गए। एजेंसी का कहना है कि इस कदम से जांच प्रक्रिया गंभीर रूप से बाधित हुई।

    पहले हाई कोर्ट, अब सुप्रीम कोर्ट

    इससे पहले ईडी ने शुक्रवार (9 जनवरी 2026) को कोलकाता हाई कोर्ट में याचिका दाखिल की थी, जिस पर बुधवार (14 जनवरी 2026) को सुनवाई प्रस्तावित है। हाई कोर्ट में ईडी ने कहा कि जांच में जानबूझकर रुकावट डाली गई, जिससे एजेंसी का काम प्रभावित हुआ।
    याचिका में ईडी ने मामले की सीबीआई जांच कराने और केस दर्ज करने की अनुमति भी मांगी है।

    ED से टकराव के बीच ममता सरकार का जवाब

    ईडी की कार्रवाई के जवाब में ममता बनर्जी सरकार ने भी सुप्रीम कोर्ट में कैविएट एप्लीकेशन दाखिल कर दी है। राज्य सरकार ने अदालत से आग्रह किया है कि इस मामले में कोई भी आदेश पारित करने से पहले उसका पक्ष जरूर सुना जाए, ताकि कोई एकतरफा फैसला न हो।

    क्या है पूरा विवाद?

    पूरा मामला गुरुवार (8 जनवरी 2026) को शुरू हुआ, जब ईडी ने कोयला घोटाला मामले में राजनीतिक कंसलटेंसी फर्म I-PAC के डायरेक्टर प्रतीक जैन के घर और ऑफिस पर छापेमारी की।
    ईडी की कार्रवाई के दौरान मुख्यमंत्री ममता बनर्जी राज्य प्रशासन और पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ मौके पर पहुंचीं। आरोप है कि इस दौरान कुछ अहम फाइलें और इलेक्ट्रॉनिक दस्तावेज निकालकर मुख्यमंत्री की गाड़ी में रखवाए गए, जिसके बाद यह मामला कानूनी और राजनीतिक दोनों स्तरों पर गरमा गया।

  • मेरे पिता का नाम नहीं मिटाया जा सकता, रितेश देशमुख ने रवींद्र चव्हाण की विवादित टिप्पणी पर किया करारा पलटवार

    मेरे पिता का नाम नहीं मिटाया जा सकता, रितेश देशमुख ने रवींद्र चव्हाण की विवादित टिप्पणी पर किया करारा पलटवार


    मुंबई। महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर सियासी तूफान उठ खड़ा हुआ है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) के महाराष्ट्र इकाई अध्यक्ष रवींद्र चव्हाण की दिवंगत पूर्व मुख्यमंत्री विलासराव देशमुख के बारे में विवादित टिप्पणी ने राजनीतिक गलियारों में गर्माहट बढ़ा दी है। चव्हाण ने सोमवार को कहा था कि विलासराव देशमुख की यादें उनके गृह नगर लातूर से मिटा दी जाएंगी। इस बयान के बाद कांग्रेस और एनसीपी समेत कई दलों ने कड़ी आपत्ति जताई।

    इस विवाद पर रितेश देशमुख, जो कि विलासराव देशमुख के बेटे और बॉलीवुड अभिनेता हैं, ने मंगलवार को भावुक लेकिन स्पष्ट प्रतिक्रिया दी। उन्होंने एक वीडियो बयान जारी करते हुए कहा, मैं हाथ जोड़कर कहना चाहता हूं कि जो लोग जनता के लिए जीते हैं, उनके नाम लोगों के दिलों में गहरी छाप छोड़ जाते हैं। लिखे हुए को मिटाया जा सकता है, लेकिन दिलों पर पड़ी गहरी छाप को नहीं मिटाया जा सकता।

    रितेश का यह बयान सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया और उनके समर्थन में लोग सामने आए।

    विलासराव देशमुख महाराष्ट्र के कद्दावर नेताओं में से एक थे। उन्होंने लातूर से कई बार विधायक का चुनाव जीता, दो बार राज्य के मुख्यमंत्री पद पर कार्य किया और केंद्र सरकार में भी मंत्री रहे। उनके योगदान को महाराष्ट्र के विकास और प्रशासनिक स्थिरता के लिए याद किया जाता है। ऐसे में उनके नाम और विरासत को लेकर की गई टिप्पणी ने स्वाभाविक रूप से लोगों की भावनाओं को आहत किया।

    कांग्रेस ने रवींद्र चव्हाण के बयान की तीखी आलोचना करते हुए कहा कि यह सत्ता के अहंकार और दिवंगत नेता के योगदान को कमतर आंकने का प्रयास है। पार्टी ने कहा कि इस तरह के बयान राजनीतिक मर्यादाओं और देशमुख की विरासत के प्रति अज्ञानता को दर्शाते हैं।

    इसी विवाद में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (अजित पवार गुट) भी कूद पड़ी। पार्टी के वरिष्ठ नेता नवाब मलिक ने कहा कि दिवंगत नेताओं को लेकर नैतिक मर्यादा का पालन होना चाहिए। उन्होंने कहा, “विलासराव देशमुख लातूर से कई बार चुनाव जीत चुके हैं, महाराष्ट्र के कई बार मुख्यमंत्री रहे और केंद्र में मंत्री भी। दिवंगत आत्माओं के बारे में बोलते समय मर्यादा बनाए रखना सभी के लिए जरूरी है।

    किसी के नाम या विरासत को मिटाने की बात करना उचित नहीं।

    इस पूरे विवाद ने महाराष्ट्र की राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है। सोशल मीडिया पर लोग रितेश देशमुख के समर्थन में आए और दिवंगत नेता के योगदान की सराहना कर रहे हैं। राजनीतिक विशेषज्ञों का कहना है कि यह घटना यह दर्शाती है कि नेता चाहे चले जाएं, लेकिन उनकी विरासत और कार्य आज भी लोगों के दिलों में जिंदा रहती है।

    रितेश देशमुख का यह बयान केवल एक बेटे की भावनात्मक प्रतिक्रिया नहीं, बल्कि उन लाखों लोगों की भावना का प्रतिनिधित्व करता है, जिन्होंने विलासराव देशमुख के नेतृत्व और कार्यों को नज़दीक से देखा और अनुभव किया। इस विवाद ने एक बार फिर यह सवाल उठाया है कि राजनीति में बयान देते समय भाषा और मर्यादा का ध्यान रखना कितना आवश्यक है।

    फिलहाल, रवींद्र चव्हाण या बीजेपी की महाराष्ट्र इकाई की तरफ से कोई औपचारिक सफाई नहीं आई है, लेकिन राजनीतिक गलियारे इस मामले पर लगातार चर्चा कर रहे हैं। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि इस विवाद का राजनीतिक नतीजा क्या होता है और मर्यादा के विषय में कोई पहल की जाती है या नहीं।
  • प्रियंका चतुर्वेदी का चुनाव आयोग पर हमला: अब आयोग को BJP ऑफिस से काम करना चाहिए

    प्रियंका चतुर्वेदी का चुनाव आयोग पर हमला: अब आयोग को BJP ऑफिस से काम करना चाहिए



    नई दिल्ली।
    महाराष्ट्र नगर निगम और निकाय चुनावों को लेकर प्रदेश में सियासी पारा चरम पर है। इसी बीच शिवसेना (उद्धव ठाकरे गुट) की वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने चुनाव आयोग पर तीखा हमला बोला और उसकी निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।

    प्रियंका ने आरोप लगाया कि महाराष्ट्र में निकाय चुनाव के दौरान खुलेआम धांधली हो रही है, लेकिन राज्य चुनाव आयोग जानबूझकर आंखें मूंदकर बैठा है। उन्होंने कहा, “महाराष्ट्र में चुनाव चोरी हो रहा है।

    राज्य चुनाव आयोग अंधा बन चुका है। ऐसी स्थिति में चुनाव आयोग को बंद कर देना चाहिए और अब उसे बीजेपी ऑफिस से ही काम करना चाहिए।”

    प्रियंका ने यह भी कहा कि महाराष्ट्र विधानसभा अध्यक्ष राहुल नार्वेकर चुनाव के दौरान खुलेआम धमकियां दे रहे हैं, लेकिन चुनाव आयोग इस पर कोई कार्रवाई नहीं कर रहा। उनके अनुसार, इस वजह से आयोग की निष्पक्षता और विश्वसनीयता पूरी तरह सवालों के घेरे में आ गई है।

    इंदौर दूषित पानी मामले पर भी सरकार को घेरा
    प्रियंका चतुर्वेदी ने मध्य प्रदेश सरकार को भी निशाने पर लिया। उन्होंने इंदौर में दूषित पानी पीने से हुई मौतों को देश को शर्मसार करने वाली घटना बताया और कहा कि इस मामले में सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। प्रियंका ने आरोप लगाया कि इससे पहले मध्य प्रदेश में कफ सिरप से हुई मौतों के मामले को दबाने की कोशिश की गई थी, और अब इंदौर की घटना में भी सरकार जवाबदेही से बच रही है।

    प्रियंका के इन बयानों के बाद महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश दोनों राज्यों की राजनीति में हलचल बढ़ गई है। उनके आरोप-प्रत्यारोप ने चुनाव आयोग और राज्य सरकारों की निष्पक्षता पर बहस को तेज कर दिया है।