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  • वंदे मातरम् पर संसद में गरमाई बहस अमित शाह ने विपक्ष पर किए तीखे आरोप

    वंदे मातरम् पर संसद में गरमाई बहस अमित शाह ने विपक्ष पर किए तीखे आरोप

     
    नई दिल्ली । संसद के शीतकालीन सत्र के दौरान वंदे मातरम् पर जारी बहस ने मंगलवार को एक नया मोड़ लिया जब गृह मंत्री अमित शाह ने राज्यसभा में इस मुद्दे पर अपनी बात रखी। इस मुद्दे पर पहले रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने अपनी प्रतिक्रिया दी थी और अब अमित शाह ने विपक्ष पर तीखे आरोप लगाए। वंदे मातरम् पर संसद में चल रही यह बहस 9 दिसंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा लोकसभा में इसकी शुरुआत के बाद और भी तेज हो गई है।

    अमित शाह का बयान

    अमित शाह ने कहा कि वंदे मातरम् पर चर्चा की आवश्यकता तब भी थी जब यह रचना रची गई थी। उन्होंने जोर देकर कहा कि यह चर्चा आजादी के आंदोलन के दौरान भी जरूरी थी और आज भी यह जरूरी है। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि जब भारत 2047 में एक विकसित राष्ट्र बनेगा तब भी वंदे मातरम् पर चर्चा जारी रहेगी। शाह ने वंदे मातरम् के ऐतिहासिक पृष्ठभूमि पर बात करते हुए कहा कि यह रचना विदेशी आक्रमणों और सांस्कृतिक चुनौतियों के प्रतिकार के रूप में सामने आई थी।

    गृह मंत्री अमित शाह ने आगे कहा कि वंदे मातरम् को लेकर भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन के समय इसका एक बड़ा महत्व था। यह न केवल भारत के स्वतंत्रता संग्राम का प्रतीक बन चुका था बल्कि यह भारतीय संस्कृति और स्वाभिमान का भी प्रतीक था। उन्होंने विपक्ष को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि आज वंदे मातरम् को लेकर विवाद उठाना और इसके महत्व को कम करने की कोशिश करना भारतीयता और भारतीय संस्कृति को कमजोर करने जैसा है।

    नेहरू और इंदिरा गांधी पर बयान

    अमित शाह ने इस मुद्दे पर एक और ऐतिहासिक टिप्पणी करते हुए कहा नेहरू ने वंदे मातरम् के टुकड़े किए थे और इंदिरा गांधी ने इसके विरोध में खड़ा कर दिया था। उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी और उसके नेताओं ने हमेशा इस पर विवाद उठाया जबकि वंदे मातरम् ने भारतीय जनमानस को एकजुट किया और यह हर भारतीय का राष्ट्रीय गीत बन गया।

    शाह ने कांग्रेस पर आरोप लगाया कि वंदे मातरम् के खिलाफ राजनीति करना भारतीय संस्कृति और भारतीयता के खिलाफ है। उनका यह भी कहना था कि अगर कांग्रेस के नेताओं के विचार इस गीत के खिलाफ थे तो यह पार्टी की सोच का संकेत है कि वह भारतीय संस्कृति और राष्ट्रवाद को प्राथमिकता नहीं देती।

    विपक्ष पर अमित शाह के आरोप

    अमित शाह ने विपक्ष पर तीखा हमला करते हुए कहा कि जो लोग वंदे मातरम् के खिलाफ बोलते हैं वे दरअसल भारतीय संस्कृति और राष्ट्रवाद का अपमान कर रहे हैं। उनका कहना था कि यह गीत हर भारतीय के दिल में गूंजता है और यह केवल एक गीत नहीं बल्कि भारत की स्वतंत्रता एकता और अखंडता का प्रतीक है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल इस गीत का विरोध कर राजनीति कर रहे हैं और अपनी वोट बैंक की राजनीति के लिए इसे सांप्रदायिक रंग देने की कोशिश कर रहे हैं।

    राजनीतिक हलचल और संसद में गहमागहमी

    वंदे मातरम् पर संसद में चली यह बहस अब एक बड़े राजनीतिक विवाद का रूप ले चुकी है। यह मामला केवल एक गीत का नहीं बल्कि भारतीयता संस्कृति और राष्ट्रवाद से जुड़ा हुआ है। अमित शाह के बयान ने विपक्ष को चुप्प रहने की चुनौती दी है वहीं विपक्ष ने इस पर अपनी प्रतिक्रियाएं भी दी हैं। विपक्ष के नेताओं का कहना है कि वंदे मातरम् को लेकर किसी भी तरह की राजनीति नहीं की जानी चाहिए। उनका मानना है कि यह गीत सभी भारतीयों के लिए समान रूप से महत्वपूर्ण है और इसे किसी विशेष पार्टी या विचारधारा से जोड़कर नहीं देखना चाहिए।

    वंदे मातरम् पर यह बहस अब केवल एक गीत तक सीमित नहीं रही बल्कि यह भारतीय संस्कृति राष्ट्रीय एकता और राजनीति से जुड़ा हुआ मुद्दा बन गया है। जहां एक ओर अमित शाह और उनकी पार्टी इस मुद्दे को भारतीयता के प्रतीक के रूप में प्रस्तुत कर रहे हैं वहीं विपक्ष इसे राजनीति से जोड़ते हुए इसे विवादित बना रहे हैं। आने वाले दिनों में यह मुद्दा संसद के भीतर और बाहर भी चर्चा का विषय बना रहेगा और इस पर अधिक राजनीतिक बयानबाजी की संभावना है।

  • राहुल गांधी ने विदेशियों से मिलने की विपक्ष की परंपरा पर उठाया सवाल, कंगना रनौत ने जताई आपत्ति

    राहुल गांधी ने विदेशियों से मिलने की विपक्ष की परंपरा पर उठाया सवाल, कंगना रनौत ने जताई आपत्ति


    नई दिल्ली। कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने केंद्र सरकार पर आरोप लगाया है कि वह विदेशी मेहमानों को विपक्ष के नेता से नहीं मिलने देती, जबकि पहले यह परंपरा रही है कि किसी भी विदेशी गणमान्य व्यक्ति को विपक्ष के नेता से मिलने की अनुमति दी जाती थी। राहुल गांधी ने अटल बिहारी वाजपेयी और मनमोहन सिंह के कार्यकाल का उदाहरण देते हुए कहा कि उस समय विपक्ष के नेताओं को भी विदेशी मेहमानों से मिलने की इजाजत थी।

    राहुल गांधी ने संसद भवन परिसर में संवाददाताओं से बातचीत में कहा कि विपक्ष के नेता का दृष्टिकोण अलग होता है और विदेशी गणमान्य अतिथि से मिलने का अधिकार उन्हें होना चाहिए। उन्होंने बताया कि मोदी सरकार और विदेश मंत्रालय इस परंपरा का पालन नहीं करते हैं। राहुल गांधी ने यह भी कहा कि जब वे विदेश यात्रा पर जाते हैं तो उन्हें भी बताया जाता है कि विदेशी नेताओं से नहीं मिलना है, जो नीति के अनुसार होता है।

    रूस के राष्ट्रपति ब्लादिमिर पुतिन की भारत यात्रा के संदर्भ में पूछे गए सवाल पर राहुल गांधी ने कहा कि आम तौर पर यह परंपरा रही है कि विदेश से आने वाले मेहमान विपक्ष के नेता से भी मिलते हैं। उन्होंने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी और डॉ. मनमोहन सिंह के समय यही नियम रहा, लेकिन अब इस परंपरा का पालन नहीं किया जाता। उनका यह भी कहना था कि एलओपी (नेता विपक्ष) एक अलग दृष्टिकोण पेश करते हैं और वह भी भारत का प्रतिनिधित्व करते हैं। केवल सरकार ही देश का प्रतिनिधित्व नहीं करती।

    राहुल गांधी के इन आरोपों के बाद बॉलीवुड और राजनीति जगत की हस्ती कंगना रनौत ने प्रतिक्रिया दी। कंगना ने कहा कि राहुल गांधी की भावनाएं देश के प्रति संदिग्ध हैं। उन्होंने कहा कि अगर राहुल गांधी अटल बिहारी वाजपेयी के समान बनने की कोशिश कर रहे हैं, तो उन्हें भाजपा में शामिल होना चाहिए। कंगना ने ट्वीट या बयान में कहा कि भगवान ने उन्हें जन्म दिया है, जीवन दिया है, वे भी अटल जी बन सकते हैं, इसके लिए उन्हें भाजपा ज्वाइन कर लेना चाहिए।

    कंगना ने कहा, “सरकार के अपने फैसले होते हैं। अटल जी नेशनल असेट थे, पूरे देश को उन पर गर्व था। लेकिन राहुल गांधी की देश के प्रति भावनाएं संदिग्ध हैं। चाहे दंगे फैलाने की योजना हो या देश को टुकड़े करने की साजिश, उनकी नीयत पर संदेह है। अगर वह खुद को अटल जी से तुलना कर रहे हैं तो मैं यही सुझाव दूंगी कि आप भाजपा में शामिल हो जाइए।”

    राहुल गांधी की टिप्पणी पर कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि विपक्ष का अधिकार है कि वह सरकार की नीतियों पर सवाल उठाए और जनता के सामने अपनी राय रखे। थरूर ने यह भी कहा कि लोकतंत्र में विपक्ष को अपनी भूमिका निभाने का पूरा अधिकार है और विदेशी नेताओं से मिलने का उनका हक संविधान और परंपरा दोनों के तहत सुरक्षित है।

    विशेषज्ञों का कहना है कि राहुल गांधी का यह आरोप देश की राजनीतिक परंपरा और लोकतांत्रिक संस्थाओं की स्वतंत्रता को लेकर महत्वपूर्ण सवाल उठाता है। विपक्ष का यह अधिकार है कि वह विदेशी प्रतिनिधियों से मिले और अपने दृष्टिकोण को साझा करे। राजनीतिक विश्लेषकों का यह भी मानना है कि विदेश नीति केवल सरकार तक सीमित नहीं हो सकती, विपक्ष का दृष्टिकोण भी अंतरराष्ट्रीय संबंधों में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

    राहुल गांधी के बयान और कंगना रनौत की प्रतिक्रिया के बाद इस मुद्दे पर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। विपक्ष का मानना है कि लोकतंत्र में अलग-अलग दृष्टिकोण रखने वाले नेताओं को भी सम्मान दिया जाना चाहिए और परंपराओं का पालन होना चाहिए। वहीं, भाजपा समर्थक इसे केवल राजनीति के हिस्से के रूप में देख रहे हैं।

    इस घटना ने एक बार फिर देश में राजनीतिक संवाद और विपक्ष की भूमिका को लेकर चर्चा शुरू कर दी है। राहुल गांधी का आरोप और कंगना रनौत की प्रतिक्रिया यह दर्शाती है कि राजनीतिक बयानबाजी और आलोचना आज भी भारतीय राजनीति में उतनी ही तीव्र है जितनी पहले रही है।