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  • बुड्ढा लड़का लोफर है…', RJD ने सोशल मीडिया पर नीतीश कुमार पर की अभद्र टिप्पणी

    बुड्ढा लड़का लोफर है…', RJD ने सोशल मीडिया पर नीतीश कुमार पर की अभद्र टिप्पणी


    नई दिल्ली । बिहार में विधान परिषद में सत्र की कार्यवाही के दौरान मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा पूर्व सीएम राबड़ी देवी को लड़की कहे जावने के मामले पर विवाद बढ़ता चला जा रहा है। पहले रोहिणी आचार्य ने इस मामले को लेकर सीएम नीतीश पर निशाना साधा था। इसके बाद तेजस्वी यादव ने सीएम नीतीश को डिमेंशिया और अल्जाइमर का शिकार बता दिया था। वहीं अब राजद ने सोशल मीडिया पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के खिलाफ अभद्र टिप्पणी की है। राजद ने सीएम नीतीश को लोफर और बुड्ढा तक कह दिया था।

    RJD ने क्या ट्वीट किया?
    राजद ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर अपने आधिकारिक हैंडल से ट्वीट किया और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर निशाना साधते हुए विवादित टिप्पणी की। राजद ने कहा संवैधानिक पद पर बैठ महिलाओं के लिए अश्लील बातें करने वाला बिहार का बुड्ढा लड़का लोफर है।
    आज विधान परिषद में मार्शल बुलाए गए
    मंगलवार को बिहार विधानसभा में लगातार हंगामा देखने को मिला। इसके बाद विपक्ष के लगातार हंगामे के बाद सभापति ने हंगामा कर रहे विपक्षी सदस्यों को मार्शल से दिन भर के लिए बाहर करवा दिया। सभापति ने बार बार कहा कि प्रश्नकाल को बाधित नहीं करें सदन की कार्यवाही में व्यवधान न डालें बावजूद विपक्ष के सदस्य बेल तक पहुंचकर नारेबाजी और हंगामा करते रहे। इसके बाद सभापति ने कड़ी कार्रवाई करते हुए विपक्षी सदस्यों को पूरे दिन के लिए सदन से बाहर करने का आदेश दे दिया। बाहर भी विपक्ष का हंगामा जारी रहा।
    सुनील सिंह और मंत्री अशोक चौधरी के बीच तीखी नोकझोंक
    सभापति के आदेश से मार्शल बुलाए गए जिन्होंने बीच-बचाव करते हुए सदस्यों को अलग किया। सुनील सिंह और मंत्री अशोक चौधरी के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिली। मंत्री अशोक चौधरी काफी गुस्से में दिखाई दिए वहीं विपक्ष के नेता भी आक्रोशित नजर आए। इस दौरान अशोक चौधरी ने सुनील सिंह से कहा तुम क्या हो जिस पर सुनील सिंह ने जवाब देते हुए उन्हें नौटंकीबाज तक कह दिया। पूरे घटनाक्रम के दौरान सदन में भारी शोर-शराबा और हंगामे का माहौल बना रहा।

  • हम दो-हमारे दो दर्जन, AIMIM यूपी अध्यक्ष शौकत अली बोले- ज्यादा जनसंख्या देश की ताकत

    हम दो-हमारे दो दर्जन, AIMIM यूपी अध्यक्ष शौकत अली बोले- ज्यादा जनसंख्या देश की ताकत


    नई दिल्ली । एआईएमआईएम के प्रदेश अध्यक्ष शौकत अली ने एक बार फिर विवादित राग छेड़ा है। जनसंख्या नियंत्रण की सरकारी नीतियों और सामाजिक विमर्श के उलट, उन्होंने आबादी बढ़ाने को देश की मजबूती से जोड़कर एक नई राजनीतिक बहस को जन्म दे दिया है।ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन के उत्तर प्रदेश अध्यक्ष शौकत अली अपने बयानों के चलते एक बार फिर विवादों के घेरे में हैं। सोमवार को मुरादाबाद के रामपुर दोराहा क्षेत्र में आयोजित एक जनसभा को संबोधित करते हुए उन्होंने जनसंख्या वृद्धि को लेकर ऐसी टिप्पणी की, जिसने राजनीतिक गलियारों में खलबली मचा दी है। शौकत अली ने मुसलमानों से अधिक बच्चे पैदा करने की अपील करते हुए नारा दिया कि “हम दो, हमारे दो नहीं, बल्कि हमारे दो दर्जन होने चाहिए।
    शौकत अली ने अपने संबोधन में जनसंख्या नियंत्रण के वैश्विक और राष्ट्रीय तर्कों को दरकिनार करते हुए दावा किया कि किसी भी देश की असली मजबूती उसकी बड़ी आबादी में निहित होती है। उन्होंने धार्मिक भावनाओं को जोड़ते हुए कहा, “जब अल्लाह बच्चों की नेमत दे रहा है, तो उसे पूरी खुशी के साथ स्वीकार करना चाहिए। बच्चे ऊपर वाले की देन हैं और उन्हें रोकने की कोशिश नहीं होनी चाहिए।” उन्होंने तर्क दिया कि आबादी बढ़ने से देश कमजोर नहीं बल्कि और अधिक ताकतवर होकर उभरेगा।
    कुंवारे नेताओं पर कसा तंज
    जनसंख्या नियंत्रण की वकालत करने वाले नेताओं पर निशाना साधते हुए शौकत अली ने तीखी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि जो लोग खुद शादी नहीं करते या जिनका अपना परिवार नहीं है, वही दूसरों को जनसंख्या नियंत्रण का ज्ञान बांटते फिर रहे हैं। उनका यह इशारा सीधे तौर पर सत्ता पक्ष के वरिष्ठ नेताओं की ओर माना जा रहा है। साथ ही, उन्होंने मुरादाबाद के मदरसों का जिक्र करते हुए नाराजगी जताई कि यहाँ मदरसों का विस्तार शिक्षा के लिए किया गया है, लेकिन कुछ लोग इन्हें जानबूझकर ‘आतंकवाद का अड्डा’ बताकर बदनाम करने की कोशिश करते हैं।
    सपा और बी टीम के आरोपों पर पलटवार
    जनसभा के दौरान शौकत अली केवल जनसंख्या तक ही सीमित नहीं रहे, बल्कि उन्होंने समाजवादी पार्टी पर भी जमकर भड़ास निकाली। सपा के एक विधायक द्वारा एआईएमआईएम को भाजपा की बी टीम बताए जाने पर पलटवार करते हुए उन्होंने कहा कि सपा खुद अपनी जमीन खो रही है और अपनी विफलताओं को छिपाने के लिए मजलिस पर झूठे आरोप मढ़ रही है। उन्होंने कहा कि मुसलमानों का सच्चा रहनुमा वही है जो उनके हक की बात डंके की चोट पर करे, न कि वह जो केवल वोट बैंक की राजनीति करे।
    बयान पर छिड़ा सियासी घमासान
    शौकत अली के इस ‘दो दर्जन’ वाले बयान के बाद भाजपा और अन्य दलों ने उन पर कड़ा प्रहार किया है। जानकारों का मानना है कि इस तरह के बयान ध्रुवीकरण की राजनीति को बढ़ावा देते हैं और विकास के मुख्य मुद्दों से ध्यान भटकाते हैं। वहीं, सोशल मीडिया पर भी इस बयान को लेकर तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं।

  • देवेंद्र फडणवीस का आधी रात दिल्ली दौरा, महाराष्ट्र में सियासी हलचल तेज, बड़े बदलाव के आसार

    देवेंद्र फडणवीस का आधी रात दिल्ली दौरा, महाराष्ट्र में सियासी हलचल तेज, बड़े बदलाव के आसार


    नई दिल्ली । महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के देर रात अचानक दिल्ली दौरे ने राजनीतिक गलियारों में हलचल पैदा कर दी है। सोमवार, 9 फरवरी की रात बीजेपी के शीर्ष नेताओं से बंद कमरे में मुलाकात करने के बाद फडणवीस तड़के मुंबई लौट आए। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि इस दौरे से राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी NCP के विलय और सहयोगी दलों के साथ नई बातचीत की अटकलें तेज हो गई हैं।

    सुनेत्रा पवार का भी दिल्ली दौरा

    फडणवीस के बाद महाराष्ट्र की उप मुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार मंगलवार, 10 फरवरी को शाम 6:45 बजे दिल्ली के लिए रवाना होंगी। उनके साथ NCP प्रदेश अध्यक्ष सुनील तटकरे और राष्ट्रीय कार्याध्यक्ष प्रफुल्ल पटेल भी मौजूद रहेंगे। वे बुधवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात करेंगी। उनकी यह यात्रा शिष्टाचार भेंट के रूप में बताई जा रही है, लेकिन राजनीतिक संकेत भी इसे जोड़कर देखे जा रहे हैं।

    जिला परिषद और पंचायत चुनावों में बीजेपी का दबदबा
    महाराष्ट्र की हालिया जिला परिषद 12 और पंचायत समिति 125 चुनावों में बीजेपी ने सबसे मजबूत प्रदर्शन किया। जिला परिषद की 731 सीटों में से बीजेपी ने 233 और पंचायत समितियों की 1462 सीटों में सबसे ज्यादा कब्जा जमाया। अजित पवार गुट की NCP को जिला परिषद में 167 और शिंदे गुट की शिवसेना को 162 सीटें मिलीं। महायुति गठबंधन ने कुल 562 सीटें जीतकर अपनी पकड़ मजबूत की। दूसरी ओर, कांग्रेस 56, शरद पवार गुट 26 और उद्धव ठाकरे गुट 43 सीटें ही जीत सका। राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि फडणवीस का दिल्ली दौरा और सुनेत्रा पवार की यात्रा आगामी महीनों में महाराष्ट्र की राजनीति में बड़े बदलावों की शुरुआत हो सकती है।

  • राजपाल यादव के समर्थन में आए सोनू सूद, बढ़ाया मदद का हाथ, 9 करोड़ के कर्ज से दिलाएंगे मुक्ति

    राजपाल यादव के समर्थन में आए सोनू सूद, बढ़ाया मदद का हाथ, 9 करोड़ के कर्ज से दिलाएंगे मुक्ति


    नई दिल्ली। बॉलीवुड के चर्चित कॉमिक एक्टर राजपाल यादव इन दिनों गंभीर कानूनी और आर्थिक संकट से गुजर रहे हैं। चेक बाउंस और करीब 9 करोड़ रुपये के बकाया कर्ज के मामले में दिल्ली हाईकोर्ट ने 4 फरवरी को उनकी आखिरी याचिका खारिज कर दी। इसके बाद अदालत के आदेश पर उन्होंने तिहाड़ जेल में सरेंडर किया।इस मुश्किल घड़ी में अभिनेता सोनू सूद सामने आए और राजपाल यादव के समर्थन में खुलकर अपनी मदद का प्रस्ताव रखा। सोनू ने स्पष्ट किया कि यह मदद किसी चैरिटी के लिए नहीं, बल्कि एक कलाकार के लिए प्रोफेशनल सहयोग और सम्मान का प्रतीक है। उन्होंने इंडस्ट्री से भी अपील की कि वे आगे आएं और राजपाल को इस कठिन दौर से बाहर निकलने में मदद करें।

    सोनू सूद की अपील

    मंगलवार को राजपाल यादव का भावुक बयान सामने आने के बाद, सोनू सूद ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X और इंस्टाग्राम पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने न सिर्फ राजपाल यादव को अपनी आने वाली फिल्म में काम देने की बात कही, बल्कि फिल्म इंडस्ट्री से भी अपील की कि वे इस कठिन समय में कलाकार के साथ खड़े हों।सोनू ने लिखा कि राजपाल यादव बेहद प्रतिभाशाली अभिनेता हैं, जिन्होंने सालों तक इंडस्ट्री को यादगार किरदार दिए। उन्होंने यह भी साफ किया कि उनका सहयोग भविष्य के काम के साथ एडजस्ट होने वाला एक छोटा साइनिंग अमाउंट है, जो कलाकार के सम्मान का प्रतीक है। सोनू ने आगे कहा, जब कोई अपना मुश्किल हालात से गुजर रहा हो, तो इंडस्ट्री उसका सपोर्ट करे, ताकि वह महसूस करे कि वह अकेला नहीं है। यही एकता दिखाती है कि फिल्म जगत सिर्फ काम करने की जगह नहीं, बल्कि एक परिवार भी है।

    राजपाल यादव की आर्थिक तंगी
    रिपोर्ट्स के मुताबिक, तिहाड़ जेल में सरेंडर करने से कुछ समय पहले, राजपाल यादव ने अधिकारियों के सामने खुलकर अपनी आर्थिक बदहाली का दर्द साझा किया। उन्होंने कहा, सर, मेरे पास पैसे नहीं हैं कोई रास्ता नजर नहीं आ रहा।  राजपाल की कानूनी उलझनें लगभग एक दशक पुरानी हैं। साल 2010 में उन्होंने अपनी पहली निर्देशित फिल्म अता पता लापता के निर्माण के लिए 5 करोड़ रुपये का कर्ज लिया था। फिल्म फ्लॉप होने के बाद कर्ज की अदायगी नहीं हो पाई और मामला अदालत तक पहुंच गया।

    कोर्ट का रुख और जेल की सजा

    शिकायतकर्ता को दिए गए सातों चेक बाउंस होने के कारण अदालत ने राजपाल यादव को छह महीने की साधारण कैद की सजा सुनाई। हाई कोर्ट तक लंबी सुनवाई और रिवीजन याचिकाओं के बावजूद बकाया रकम बढ़कर करीब 9 करोड़ रुपये तक पहुंच गई। 4 फरवरी 2026 को उनकी अंतिम याचिका खारिज हो गई। अदालत ने कहा कि एक्टर पहले भी लगभग 20 बार भुगतान में असफल रहे हैं। 5 फरवरी 2026 को राजपाल यादव ने छह महीने की जेल की सजा काटने के लिए तिहाड़ में सरेंडर किया।

    सोनू सूद ने की मदद की अपील
    सोनू ने यह स्पष्ट किया कि उनका सहयोग चैरिटी नहीं, बल्कि पेशेवर सम्मान और इंडस्ट्री में एकता का प्रतीक है। उन्होंने इंडस्ट्री से अपील की कि वे फिल्म प्रोड्यूसर, डायरेक्टर और सह-कलाकार मिलकर राजपाल यादव का सहयोग करें, ताकि वह इस कठिन दौर से बाहर निकल सकें।

  • मऊगंज से बीजेपी विधायक का लंबा सस्पेंस: एक माह से गायब प्रदीप पटेल, ‘गैंग से डर’ की बात पर सियासत गरम, विपक्ष ने कहा शर्मनाक

    मऊगंज से बीजेपी विधायक का लंबा सस्पेंस: एक माह से गायब प्रदीप पटेल, ‘गैंग से डर’ की बात पर सियासत गरम, विपक्ष ने कहा शर्मनाक


    भोपाल । मऊगंज से बीजेपी विधायक प्रदीप पटेल का एक माह से गायब रहना राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गया है। इस दौरान उनके न मिलने की वजह के रूप में एक गैंग से डर की बातें सामने आईं। मामले ने सियासी तूल पकड़ लिया है और कांग्रेस ने इसे राज्य की बिगड़ती कानून व्यवस्था और सत्ता की अक्षमता बताया है।

    कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री पीसी शर्मा ने इस मामले को गंभीर बताया और कहा कि प्रदेश में पहले लाडली बहन जैसी घटनाएँ हो रही थीं अब बीजेपी के विधायक भी गायब हो रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदीप पटेल मूसा गैंग से डरकर गायब हुए हैं। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि मध्य प्रदेश में कितनी गैंगें चल रही हैं और माफियाओं का राज है। कांग्रेस ने इसे नया माफिया कहकर सरकार पर हमला किया।

    पीसी शर्मा ने कहा कि सरकार अपने ही विधायक को ढूंढ नहीं पा रही जबकि कानून व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त हो चुकी है। आम जनता पहले से ही परेशान है और अब विधायक भी सुरक्षित नहीं हैं। उन्होंने यह भी कहा कि यह मामला विधानसभा में उठाया जाएगा और सड़कों पर भी आवाज़ उठेगी। उनका कहना था कि बीजेपी का विधायक गायब है और सरकार उसे खोज नहीं पा रही इससे शर्मनाक स्थिति और कुछ नहीं हो सकती।

    दूसरी ओर डिप्टी सीएम और विंध्य क्षेत्र के नेता राजेंद्र शुक्ल ने इस खबर को निराधार बताया। उन्होंने कहा कि प्रदीप पटेल सक्रिय विधायक हैं और जनता की समस्याओं के लिए संघर्ष करते रहते हैं। उन्होंने कहा कि उन्हें इस संबंध में किसी भी तरह की जानकारी नहीं है और गैंग की खबरों में कोई वास्तविकता नहीं है। राजेंद्र शुक्ल ने यह भी कहा कि किसी भी प्रकार की परेशानी नहीं है और यह सारी बातें अफवाहें हैं। उन्होंने यह स्पष्ट किया कि विधायक लगातार काम कर रहे हैं और उनकी स्थिति सामान्य है।

    मामले को लेकर सियासत और आरोप-प्रत्यारोप तेज होते जा रहे हैं। विपक्ष का कहना है कि प्रदेश में कानून व्यवस्था चरमरा गई है और सरकार को अपने ही विधायक की सुरक्षा सुनिश्चित करनी चाहिए। वहीं सरकार की ओर से इसे निराधार बताते हुए मामला शांतिपूर्ण रूप से टाला जा रहा है। अब यह देखना बाकी है कि विधायक की असल स्थिति क्या है और प्रशासन इस मामले में कब तक स्पष्टता देगा।

  • पूरे देश में हो रहा पंडितों का अपमान; ब्राह्मणों के सम्मान में, मायावती मैदान में, केंद्र सरकार से यह मांग

    पूरे देश में हो रहा पंडितों का अपमान; ब्राह्मणों के सम्मान में, मायावती मैदान में, केंद्र सरकार से यह मांग


    नई दिल्ली। वेब सीरीज घूसखोर पंडत पर अब सियासत भी गरमाने लगी है। बसपा सुप्रीमो मायावती ने सीरीज भी इस विवाद में कूद गई हैं। उन्होंने इसे ब्राह्मण समाज के अपमान से जोड़ते हुए फिल्मकारों पर तीखा हमला बोला है। मायावती ने आरोप लगाया कि सोची-समझी रणनीति के तहत फिल्मों में ‘पंडित’ को ‘घुसपैठिया’ बताकर पूरे समाज का अनादर किया जा रहा है। इसे लेकर मायावती ने एक्स पर पोस्ट लिखा है।
    केंद्र सरकार से तत्काल इस पर रोक लगाने की मांग की है।मायावती ने अपने आधिकारिक हैंडल से ट्वीट करते हुए लिखा कि यह बड़े दुख और चिंता की बात है कि पिछले कुछ समय से केवल उत्तर प्रदेश में ही नहीं, बल्कि अब फिल्मों में भी ब्राह्मण समाज को निशाना बनाया जा रहा है। उन्होंने कहा फिल्मों में ’पंडित’ को घुसपैठिया बताकर पूरे देश में जो इनका अपमान व अनादर किया जा रहा है, उससे समूचे ब्राह्मण समाज में जबरदस्त रोष व्याप्त है। हमारी पार्टी इसकी कड़े शब्दों में निंदा करती है।
    घुसपैठिया शब्द पर जताई कड़ी आपत्ति
    मायावती के बयान में सबसे अहम बिंदु ‘घुसपैठिया’ शब्द का इस्तेमाल रहा। दरअसल, विरोध कर रहे संगठनों का आरोप है कि इस वेब सीरीज में ब्राह्मण पात्रों के लिए अपमानजनक शब्दों का प्रयोग किया गया है और उन्हें व्यवस्था को नुकसान पहुxचाने वाले ‘घुसपैठियों’ की तरह पेश किया गया है। मायावती ने इसे ‘जातिसूचक’ करार देते हुए केंद्र सरकार से मांग की है कि ऐसी फिल्म पर तुरंत प्रतिबंध लगाया जाना चाहिए।

    वेब सीरीज में क्या दिखाया गया है?
    यह वेब सीरीज मुख्य रूप से सरकारी तंत्र में फैले भ्रष्टाचार और रिश्वतखोरी पर प्रहार करने का दावा करती है। इसमें दिखाया गया है कि कैसे एक सरकारी कर्मचारी, जो ब्राह्मण समुदाय से संबंध रखता है और ‘पंडत’ उपनाम का उपयोग करता है, अपने पद का दुरुपयोग कर लोगों से काम के बदले अवैध वसूली करता है। सीरीज में सिस्टम की खामियों और एक व्यक्ति के लालच को कहानी का आधार बनाया गया है। आरोप है कि इसमें कुछ ऐसे दृश्य और संवाद भी शामिल किए गए हैं जो सरकारी दफ्तरों में होने वाले ‘लेनदेन’ के काले खेल को दर्शाते हैं।

    विवाद और आपत्ति के मुख्य कारण

    वेब सीरीज को लेकर मुख्य रूप से ‘सनातन रक्षक दल’ और अन्य ब्राह्मण संगठनों ने मोर्चा खोल दिया है। उनकी मुख्य आपत्ति इसके नाम को लेकर ही है। विरोध करने वालों का कहना है कि सीरीज का नाम घूसखोर पंडत रखना सीधे तौर पर एक पूरी जाति और समुदाय को अपमानित करने की कोशिश है। उनका तर्क है कि पंडत शब्द ज्ञान और सम्मान का प्रतीक है, उसके साथ ‘घूसखोर’ विशेषण जोड़ना समाज में गलत संदेश फैलाता है।

    आपत्ति दर्ज कराने वाले लोगों का मानना है कि भ्रष्टाचार किसी भी जाति का व्यक्ति कर सकता है, लेकिन जानबूझकर एक विशिष्ट जाति (ब्राह्मण) को भ्रष्ट के रूप में पेश करना एक एजेंडा का हिस्सा लगता है। सीरीज के पोस्टर और ट्रेलर में कुछ ऐसे दृश्यों पर भी सवाल उठाए गए हैं जहां पात्र को धार्मिक वेशभूषा या प्रतीकों के साथ गलत काम करते दिखाया गया है। विरोधियों का कहना है कि यह धार्मिक भावनाओं को आहत करने वाला कृत्य है।

  • MP: BJP विधायक का छलका दर्द, 'कुछ साल पहले तक CM, आधी कैबिनेट हमारी होती थी, अब कुछ…'

    MP: BJP विधायक का छलका दर्द, 'कुछ साल पहले तक CM, आधी कैबिनेट हमारी होती थी, अब कुछ…'


    मध्य प्रदेश ।मध्य प्रदेश की राजनीति में लंबे समय से सक्रिय भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता, विधायक और पूर्व मंत्री गोपाल भार्गव ने सागर में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान ऐसा बयान दिया, जिसने सियासी गलियारों में हलचल मचा दी है। प्रदेश के सबसे वरिष्ठ विधायकों में शुमार गोपाल भार्गव ने मंच से ब्राह्मण समाज और मौजूदा हालात को लेकर अपनी पीड़ा खुलकर जाहिर की। उनका कहना था कि आज कई संगठनों का एक ही एजेंडा रह गया है ब्राह्मणों को दबाना, उन्हें हाशिए पर ले जाना और उनके खिलाफ माहौल बनाना।

    आज ब्राह्मण समाज आंखों में खटक रहा है

    कार्यक्रम को संबोधित करते हुए गोपाल भार्गव ने कहा कि ब्राह्मण समाज आज कई लोगों की आंखों में खटक रहा है। उन्होंने चिंता जताते हुए सवाल किया कि आखिर नियम-कानून बनाते समय हमेशा ब्राह्मण समाज को ही क्यों निशाना बनाया जाता है। भार्गव ने कहा कि अब समय आ गया है कि ब्राह्मण समाज एकजुट होकर अपनी सामाजिक और धार्मिक पहचान की रक्षा के लिए आगे आए।

    कुछ साल पहले तक सीएम और आधी कैबिनेट हमारी होती थी

    अपने संबोधन में वरिष्ठ विधायक ने राजनीतिक परिदृश्य में आए बदलावों की ओर भी इशारा किया। उन्होंने कहा कि कुछ वर्ष पहले तक मुख्यमंत्री हमारे होते थे, प्रशासन में अधिकारी हमारे होते थे और यहां तक कि आधी से ज्यादा कैबिनेट भी ब्राह्मण समाज से आती थी। लेकिन आज हालात ऐसे हैं कि गिने-चुने लोग ही बचे हैं। भार्गव का यह बयान न केवल समाज की स्थिति पर सवाल उठाता है, बल्कि सत्ता और प्रतिनिधित्व में आए बदलाव की ओर भी संकेत करता है।

    यूजीसी और नियमों पर उठाए सवाल

    गोपाल भार्गव ने यूजीसी विश्वविद्यालय अनुदान आयोग और अन्य संस्थाओं के नियमों को लेकर भी नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि अधिकतर नियम और नीतियां ब्राह्मण समाज के खिलाफ ही बनाई जा रही हैं। उन्होंने इसे चिंताजनक बताते हुए समाज से जागरूक होने और संगठित रहने की अपील की।

    पहले भी आ चुके हैं संवेदनशील बयान

    यह मामला इसलिए और गंभीर माना जा रहा है क्योंकि हाल के दिनों में कुछ आईएएस अधिकारियों के बयान भी चर्चा में रहे हैं। पहले आईएएस संतोष वर्मा का ब्राह्मण बेटियों को लेकर दिया गया विवादित बयान सामने आया, फिर आईएएस नियाज खान ने सोशल मीडिया पर ब्राह्मण समाज के समर्थन में टिप्पणी की। अब एक वरिष्ठ राजनीतिक नेता का ऐसा बयान पूरे मुद्दे को और संवेदनशील बना रहा है।

    सम्मान समारोह में दिया गया बयान

    गौरतलब है कि विधायक गोपाल भार्गव रविवार 1 फरवरी 2026 को सागर शहर के रविंद्र भवन में आयोजित ब्राह्मण समाज की पत्रिका के विमोचन एवं मेधावी छात्रों के सम्मान समारोह में शामिल होने पहुंचे थे। इसी मंच से उन्होंने यह बयान दिया, जो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है और प्रदेश की राजनीति में नई बहस को जन्म दे चुका है।
  • भारतीय लुटेरे बयान पर सियासत गरमाई: BJP ने पूर्व उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी पर किया हमला, कांग्रेस पर इतिहास तोड़ने का आरोप

    भारतीय लुटेरे बयान पर सियासत गरमाई: BJP ने पूर्व उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी पर किया हमला, कांग्रेस पर इतिहास तोड़ने का आरोप


    नई दिल्ली। पूर्व उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी के एक बयान ने राजनीतिक गलियारे में हलचल पैदा कर दी है। अंसारी ने एक इंटरव्यू में कहा था कि इतिहास में जिन “विदेशी आक्रांताओं” को लाया जाता है, उन्हें असल में भारतीय लुटेरे माना जाना चाहिए। उन्होंने इस संदर्भ में महमूद गजनवी और लोदी वंश जैसे आक्रमणकारियों का उदाहरण भी दिया, जिससे विवाद और बढ़ गया।

    BJP का कड़ा रुख
    बीजेपी ने इस बयान को देश की भावनाओं के खिलाफ करार दिया और इसे “बीमार मानसिकता” बताया।

    पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता सुदांशु त्रिवेदी ने कहा कि यह वक्तव्य इतिहास और देश की स्वाभिमान को ठेस पहुंचाने वाला है।

    उन्होंने कहा कि विदेशी आक्रांताओं को भारत की मिट्टी में जन्मा लुटेरा बताना देश की बदनामी का कारण बनता है और ऐसे बयान से भ्रम फैलता है।

    कांग्रेस पर आरोपों की झड़ी
    बीजेपी के नेताओं ने सीधे कांग्रेस को निशाना बनाया।

    शहजाद पूनावाला ने सोशल मीडिया पर वीडियो शेयर कर दावा किया कि कांग्रेस और उसके समर्थक उन आक्रांताओं की महिमा मंडित करते हैं जिन्होंने मंदिरों को नष्ट किया।

    प्रदीप भंडारी ने कांग्रेस पर आरोप लगाया कि वह इतिहास को तोड़-मरोड़ कर पेश करती है और आक्रांताओं के कृत्यों को नजरअंदाज करती है। उन्होंने कांग्रेस को ‘आधुनिक मुस्लिम लीग’ भी कहा।

    BJP का तर्क: इतिहास तोड़ा जा रहा है
    BJP प्रवक्ता सुदांशु त्रिवेदी ने कहा कि मुगल शासक बगदाद के खलीफा के नाम पर शासन करते थे, जैसे ब्रिटिश वायसराय ब्रिटिश राजाओं के प्रतिनिधि होते थे।
    उनका कहना है कि अंसारी का यह बयान देश की भावना के खिलाफ और भ्रम फैलाने वाला है।
    इस मामले ने बीजेपी और कांग्रेस के बीच राजनीतिक घमासान बढ़ा दिया है। दोनों पक्षों के बीच आरोप-प्रत्यारोप जारी हैं और यह विवाद अभी भी जारी है।

  • चारधाम में नो एंट्री पर इमाम की दो टूक: मक्का-मदीना की तरह ,गंगोत्री के भी अपने नियम मुस्लिमों का वहां क्या काम?

    चारधाम में नो एंट्री पर इमाम की दो टूक: मक्का-मदीना की तरह ,गंगोत्री के भी अपने नियम मुस्लिमों का वहां क्या काम?

    नई दिल्ली । देवभूमि उत्तराखंड के विश्वप्रसिद्ध तीर्थस्थलों बद्रीनाथ केदारनाथ और गंगोत्री धाम में गैर-हिंदुओं के प्रवेश को वर्जित करने की सुगबुगाहट ने देश के धार्मिक और राजनीतिक गलियारों में एक नई बहस छेड़ दी है। जहां एक ओर इसे लेकर सियासी पारा चढ़ा हुआ है वहीं दूसरी ओर ऑल इंडिया इमाम ऑर्गनाइजेशन के चीफ इमाम डॉ. इमाम उमर अहमद इलियासी ने इस संभावित फैसले का पुरजोर समर्थन कर सबको चौंका दिया है। इमाम इलियासी ने इसे पूरी तरह आस्था का विषय करार देते हुए तर्क दिया है कि जिस प्रकार इस्लाम के सबसे पवित्र स्थल मक्का और मदीना में गैर-मुस्लिमों का प्रवेश वर्जित है उसी तरह हिंदू धर्मस्थलों को भी अपने नियम तय करने का पूरा अधिकार है।

    आस्था और मर्यादा की दलील इमाम उमर अहमद इलियासी ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि हर धर्मस्थल की अपनी गरिमा और मर्यादा होती है। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर एक मुसलमान का गंगोत्री या केदारनाथ जैसे पवित्र सनातनी केंद्रों में क्या काम? उनके अनुसार यदि कोई मुस्लिम ऐसी जगहों पर जाता है जहां सदियों पुरानी सनातनी परंपराएं जुड़ी हैं तो वहां वैचारिक या शारीरिक टकराव की स्थिति बन सकती है। उन्होंने नसीहत दी कि मुसलमानों को दूसरे धर्मों की अत्यंत पवित्र जगहों पर जाने से परहेज करना चाहिए। इमाम ने तिरुपति बालाजी मंदिर का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां भी इसी प्रकार के कड़े नियम लागू हैं और सभी समुदायों को एक-दूसरे के धार्मिक नियमों और सीमाओं का सम्मान करना चाहिए। उनके मुताबिक इस मुद्दे पर राजनीति करना व्यर्थ है क्योंकि यह सीधे तौर पर किसी समुदाय की धार्मिक भावनाओं से जुड़ा है।

    मंदिर समितियों की एकजुटता वर्तमान स्थिति यह है कि गंगोत्री मंदिर समिति ने पहले ही गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर रोक लगाने का निर्णय ले लिया है। वहीं बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति ने सभी संबंधित हितधारकों और तीर्थ पुरोहितों के साथ इस विषय पर आम सहमति बना ली है। अब बस बोर्ड की बैठक में इसे औपचारिक रूप दिया जाना बाकी है। हालांकि समितियों ने यह स्पष्ट किया है कि सनातन धर्म में सच्ची आस्था रखने वाले किसी भी व्यक्ति का स्वागत किया जाएगा चाहे वह किसी भी पृष्ठभूमि का हो। दूसरी ओर हरिद्वार की गंगा सभा ने भी हर की पौड़ी पर इसी तरह की पाबंदी लगाने की मांग तेज कर दी है जिससे यह अभियान पूरे उत्तराखंड में फैलता दिख रहा है।

    सियासी घमासान और विरोध के स्वर जैसे-जैसे यह मामला चर्चा में आ रहा है उत्तराखंड से लेकर दिल्ली तक राजनीति गरमा गई है। कांग्रेस ने इस कदम की कड़ी निंदा करते हुए इसे भारतीय जनता पार्टी की सोची-समझी रणनीति बताया है। उत्तराखंड कांग्रेस का आरोप है कि सरकार बेरोजगारी और महंगाई जैसे बुनियादी मुद्दों से ध्यान भटकाने के लिए इस तरह के भावनात्मक विवाद पैदा कर रही है। वहीं कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि गंगोत्री जैसे ऊंचे और पवित्र स्थानों पर पहले से ही कोई मुसलमान नहीं जाता लेकिन वहां पहचान साबित करने जैसी अनिवार्य शर्तें लगाना समाज में नफरत का जहर घोलने जैसा है। फिलहाल उत्तराखंड सरकार ने इस संवेदनशील विषय पर फूंक-फूंक कर कदम रखने का संकेत दिया है और कहा है कि सभी मंदिर समितियों का पक्ष सुनने के बाद ही कोई अंतिम फैसला लिया जाएगा।

  • BJP का कांग्रेस पर हमला: थरूर की गंभीर की तारीफ पर फिर उठे ‘फतवे’ के सवाल

    BJP का कांग्रेस पर हमला: थरूर की गंभीर की तारीफ पर फिर उठे ‘फतवे’ के सवाल



    नई दिल्ली। नागपुर में न्यूजीलैंड के खिलाफ पहले टी20 से पहले कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने भारतीय क्रिकेट कोच गौतम गंभीर के साथ सेल्फी शेयर की और उनकी तारीफ की, जिसके बाद भाजपा ने कांग्रेस पर सवाल खड़े कर दिए हैं। BJP का आरोप है कि थरूर की यह प्रतिक्रिया कांग्रेस की राजनीति के खिलाफ है और अब उन्हें पार्टी से ‘फतवा’ मिल सकता है।

    भाजपा प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने कहा कि कांग्रेस को थरूर की नागपुर यात्रा, गंभीर से मुलाकात या उनकी प्रशंसा में से कौन सी बात ज्यादा खलती है। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या थरूर के खिलाफ एक और “कांग्रेस फतवा” जारी होने वाला है।

    थरूर ने गंभीर को “प्रधानमंत्री मोदी के बाद सबसे कठिन काम करने वाला इंसान” बताया और कहा कि लाखों लोग उनके फैसलों पर सवाल उठाते हैं, फिर भी वह शांत रहते हैं और आगे बढ़ते हैं। उन्होंने गंभीर की नेतृत्व क्षमता की तारीफ करते हुए उन्हें सफलता के लिए शुभकामनाएं दीं।

    गंभीर ने भी इस पर प्रतिक्रिया दी और कहा कि जब समय आएगा, तब कोच के कथित ‘असीमित अधिकार’ पर सच्चाई सामने आएगी। उन्होंने लिखा कि खुद के खिलाफ खड़ा देखकर उन्हें हंसी आ रही है।

    यह विवाद राजनीतिक स्तर पर बढ़ता जा रहा है, क्योंकि थरूर की आलोचना और प्रशंसा दोनों ही पक्षों के बीच नई बहस का कारण बन गई है।