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  • माघ मेला 2026: ‘मेला सेवा एप’ से श्रद्धालुओं को डिजिटल मार्गदर्शन, QR कोड से सीधे प्रशासन से जुड़ाव

    माघ मेला 2026: ‘मेला सेवा एप’ से श्रद्धालुओं को डिजिटल मार्गदर्शन, QR कोड से सीधे प्रशासन से जुड़ाव


    नई दिल्ली। प्रयागराज में आयोजित हो रहे माघ मेला 2026 में श्रद्धालुओं की सुविधा, सुरक्षा और सहज अनुभव को बढ़ाने के लिए मेला प्रशासन ने तकनीकी नवाचारों को लागू किया है। इसी कड़ी में इस वर्ष ‘माघ मेला सेवा एप’ को लॉन्च किया गया, जो मेले में आने वाले श्रद्धालुओं के लिए एक डिजिटल सहायक का काम करेगा।

    शनिवार को उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने माघ मेला क्षेत्र का निरीक्षण किया और इस एप का औपचारिक शुभारंभ किया।

    मुख्यमंत्री ने मेला के आगामी प्रमुख स्नान पर्वों की तैयारियों की समीक्षा की और अधिकारियों एवं जनप्रतिनिधियों के साथ बैठक में श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने पर विस्तार से चर्चा की। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने तीर्थयात्रियों को डिजिटल मार्गदर्शन प्रदान करने के उद्देश्य से ‘मेला सेवा एप’ का लोकार्पण किया।

    यह एप श्रद्धालुओं को मेला क्षेत्र से जुड़ी सभी महत्वपूर्ण सेवाएं एक ही मंच पर उपलब्ध कराएगा। मेला अधिकारी ऋषिराज ने बताया कि एप का डिज़ाइन इस प्रकार किया गया है कि मेला क्षेत्र के किसी भी हिस्से में मौजूद श्रद्धालु या पर्यटक सीधे अपनी समस्या या सुझाव मेला प्रशासन तक पहुंचा सकेंगे। इसके लिए मेला क्षेत्र में स्थापित सभी बिजली के खंभों पर QR कोड लगाए गए हैं। श्रद्धालु अपने मोबाइल फोन से इन QR कोड को स्कैन करके ऑनलाइन फॉर्म भरकर अपनी समस्या दर्ज कर सकते हैं।

    इस एप की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह डिजिटल शिकायत एवं मार्गदर्शन प्रणाली के जरिए प्रशासन और श्रद्धालुओं के बीच सीधे संवाद की सुविधा प्रदान करता है।

    समस्या दर्ज होते ही संबंधित विभागों की टीम सक्रिय होकर उसका त्वरित समाधान सुनिश्चित करेगी। इस प्रकार श्रद्धालुओं को अब पारंपरिक पद्धति की तुलना में अधिक तेज, सहज और प्रभावी सेवा प्राप्त होगी।

    माघ मेले में यह पहल पहली बार लागू की गई है और इसे सुरक्षित, सुव्यवस्थित और श्रद्धालु-अनुकूल मेला बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। एप के माध्यम से श्रद्धालु न केवल शिकायत दर्ज कर सकेंगे, बल्कि मेले में होने वाली विभिन्न सुविधाओं, मार्गदर्शन, स्वास्थ्य और सुरक्षा संबंधी जानकारी भी सीधे प्राप्त कर सकेंगे।

    इस डिजिटल नवाचार से माघ मेले में आने वाले लाखों श्रद्धालुओं के अनुभव को और सहज बनाने के साथ ही प्रशासन की कार्यकुशलता भी बढ़ेगी। QR कोड और मोबाइल एप के माध्यम से श्रद्धालुओं को स्थानिक मार्गदर्शन, हेल्पलाइन संपर्क और शिकायत निवारण जैसी सेवाएं तुरंत उपलब्ध होंगी।

    इस पहल से यह सुनिश्चित होगा कि माघ मेले में पहली बार तकनीक का प्रयोग करते हुए श्रद्धालुओं की समस्याओं का त्वरित समाधान हो और उन्हें एक सुरक्षित और सुव्यवस्थित मेला अनुभव प्राप्त हो। यह कदम मेला प्रशासन को अधिक पारदर्शी, त्वरित और श्रद्धालु-केंद्रित बनाएगा। माघ मेला सेवा एप श्रद्धालुओं के लिए डिजिटल मार्गदर्शन, शिकायत समाधान, और त्वरित प्रशासनिक संपर्क का एक नया आयाम खोल रहा है। QR कोड आधारित इस नवाचार से माघ मेला 2026 और अधिक सुरक्षित, सुव्यवस्थित और तकनीकी रूप से आधुनिक बन रहा है।
  • Makar Sankranti 2026: गुजरात से प्रयागराज तक, मकर संक्रांति की 5 सबसे रंगीन जगह

    Makar Sankranti 2026: गुजरात से प्रयागराज तक, मकर संक्रांति की 5 सबसे रंगीन जगह

    नई दिल्ली। Makar Sankranti 2026 Places to Visit: सूर्य के उत्तरायण होते ही उत्सवों का मौसम शुरू हो जाता है। शुरुआत मकर संक्रांति के पावन पर्व से होती है जो 14 या 15 जनवरी 2026 को ंमनाई जाएगी। मकर संक्रांति पूरे देश में मनाई जाती है, लेकिन अलग-अलग नामों और तरीकों से। मकर संक्रांति का पर्व अंधकार से प्रकाश की ओर और शीत से ऊर्जा की ओर बढ़ने का समय है।

    यह वही दिन है जब सूर्य देव मकर राशि में प्रवेश करते हैं और दक्षिणायन से उत्तरायण की यात्रा शुरू होती है। भारतीय परंपरा में इसे अत्यंत शुभ माना गया है। खेतों में नई फसल की खुशी, घरों में तिल-गुड़ की मिठास और आसमान में रंग-बिरंगी पतंगें, मकर संक्रांति हर रूप में उल्लास रचती है।

    लेकिन यह पर्व पूरे भारत में एक जैसा नहीं मनाया जाता। हर क्षेत्र इसे अपने रंग, नाम और संस्कार के साथ जीता है। आइए जानते हैं उन जगहों के बारे में, जहां मकर संक्रांति की धूम देखते ही बनती है।

    गुजरात
    गुजरात में मकर संक्रांति केवल त्योहार नहीं, बल्कि जन-उत्सव है। अहमदाबाद, सूरत और वडोदरा में अंतर्राष्ट्रीय पतंग फेस्टिवल का आयोजन होता है। छतों पर लोग “काई पो चे” के नारों के साथ पतंगबाजी करते हैं। ऊंधियू, जलेबी और चिक्की यहां की पहचान हैं। रात में टुक्कल (लैंप पतंग) आसमान को जादुई बना देते हैं।

    प्रयागराज
    उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में संगम में आस्था की डुबकी लगाकर मकर संक्रांति का पर्व मनाया जाता है। यूपी में मकर संक्रांति का अर्थ है पवित्र स्नान। प्रयागराज के संगम पर लाखों श्रद्धालु गंगा, यमुना और सरस्वती के संगम में डुबकी लगाते हैं। दान-पुण्य, खिचड़ी, तिल और वस्त्र दान का विशेष महत्व है। यह दिन आध्यात्मिक शुद्धि का प्रतीक माना जाता है।

    तमिलनाडु
    तमिलनाडु में पोंगल के रूप में चार दिन का उत्सव मनाया जाता है। दक्षिण भारत में मकर संक्रांति को पोंगल कहा जाता है। यह चार दिन तक चलने वाला पर्व है, भोगी, थाई पोंगल, मट्टू पोंगल और कानुम पोंगल। नई फसल से बना मीठा पोंगल, गाय-बैलों की पूजा और घरों के सामने रंगोली, यह त्योहार किसानों के सम्मान का उत्सव है।

    राजस्थान
    यहां पतंगबाजी और लोक-संस्कृति का संगम है। जयपुर और अन्य शहरों में मकर संक्रांति पर पतंगबाजी प्रतियोगिताएं, लोकगीत और पारंपरिक व्यंजन त्योहार को खास बना देते हैं। महिलाएं पारंपरिक परिधान पहनकर सूर्य को अर्घ्य देती हैं।

    महाराष्ट्र
    महाराष्ट्र में मकर संक्रांति सामाजिक सौहार्द का पर्व है। लोग एक-दूसरे को तिलगुल देकर कहते हैं, “तिलगुल घ्या, गोड गोड बोला।” यह संदेश है कि जैसे तिल और गुड़ मिलकर मिठास देते हैं, वैसे ही जीवन में भी कटुता छोड़कर मधुरता अपनाई जाए।

  • कड़ाके की सर्दी और शीतलहर का असर4 राज्यों में ऑरेंज अलर्ट17 राज्यों में येलो अलर्ट

    कड़ाके की सर्दी और शीतलहर का असर4 राज्यों में ऑरेंज अलर्ट17 राज्यों में येलो अलर्ट


    नई दिल्ली । भारत के कई हिस्सों में इस समय कड़ाके की सर्दी और शीतलहर का सामना हो रहा है। मौसम विभाग ने देश के 4 राज्यों में शीतलहर के कारण ऑरेंज अलर्ट जारी किया हैजबकि 17 राज्यों में येलो अलर्ट लागू किया गया है। इस कड़ी सर्दी और घने कोहरे ने सामान्य जनजीवन को प्रभावित किया हैखासकर उत्तर-पश्चिममध्यपूर्वी और उत्तर-पूर्वी भारत में।

    ऑरेंज और येलो अलर्ट

    मौसम विभाग ने बताया कि अगले 4-5 दिनों तक देश के कई हिस्सों में शीतलहर और घने से बहुत घने कोहरे की स्थिति बनी रह सकती है। उत्तर-पश्चिम भारतमध्य भारत और पूर्वी भारत के कई राज्य शीतलहर और घने कोहरे की चपेट में आ सकते हैं। जिन चार राज्यों में ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया हैवहां तापमान और कोहरे की स्थिति बेहद खतरनाक हो सकती है। इसके अलावा17 अन्य राज्यों में येलो अलर्ट जारी किया गया हैजो घने कोहरे और शीतलहर की चेतावनी देता हैजिससे दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ सकता है।

    प्रयागराज में श्रद्धालुओं की भीड़

    इस बीचउत्तर भारत में शीतलहर और कोहरे के बीच लाखों श्रद्धालु माघ मेले में शामिल होने के लिए प्रयागराज पहुंच रहे हैं। रेलवे और पुलिस विभाग ने इस भीड़-भाड़ को देखते हुए उच्च सुरक्षा और अलर्ट जारी कर दिया है। घने कोहरे के कारण रेलवे ट्रेनों के समय में बदलाव आ सकता हैऔर यात्रियों को अतिरिक्त सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।

    सर्दी से बचाव के उपाय

    मौसम विभाग ने सभी नागरिकों को कड़ाके की सर्दी से बचने के लिए उचित गर्म कपड़े पहन नेधू प में रहने और शरीर को गर्म रखने के उपायों की सलाह दी है। खासकर उन इलाकों में जहां घना कोहरा हैवहां विजिबिलिटी बहुत कम हो सकती हैजिससे सड़क और रेलवे दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ सकता है।

    अधिकारियों की तैयारी

    रेलवे और पुलिस विभाग ने शीतलहर और कोहरे के प्रभाव को कम करने के लिए सभी तैयारियां पूरी कर ली हैं। खासकर ट्रेनों की निगरानी और ट्रैफिक मैनेजमेंट में विशेष ध्यान दिया जा रहा है। इसके अलावास्थानीय प्रशासन ने नागरिकों से आग्रह किया है कि वे मौसम की स्थिति को देखते हुए सुरक्षित यात्रा करें और जरूरत न होने पर घरों से बाहर न निकलें। देश के विभिन्न हिस्सों में सर्दी और कोहरे के कारण मुश्किलें बढ़ रही हैंऔर सरकार और स्थानीय प्रशासन की तरफ से यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि नागरिकों को हर संभव सहायता मिल सके।

  • प्रयागराज माघ मेला 2026 त्रिवेणी संगम पर श्रद्धालुओं का तांता साधु-संतों ने भी किया पवित्र स्नान

    प्रयागराज माघ मेला 2026 त्रिवेणी संगम पर श्रद्धालुओं का तांता साधु-संतों ने भी किया पवित्र स्नान


    नई दिल्ली । प्रयागराज में माघ मेले के पहले दिन त्रिवेणी संगम पर श्रद्धालुओं का तांता लग गया। पौष पूर्णिमा के अवसर पर लाखों भक्त अपनी आस्था के साथ पवित्र नदियों में स्नान करने पहुंचे। माघ मेला एक धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजन है जो देशभर से लोगों को अपनी ओर आकर्षित करता है।

    श्रद्धालुओं की भारी भीड़
    साधु-संतों और आम श्रद्धालुओं के अलावा माघ मेला के पहले दिन त्रिवेणी संगम में किन्नर अखाड़ा की महामंडलेश्वर स्वामी कल्याणी नंदगिरी भी पहुंची। उन्होंने इस मौके पर कहा यह लघु कुंभ का आशीर्वाद प्राप्त हुआ है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में श्रद्धालुओं के लिए बेहतरीन व्यवस्थाएं की गई हैं। स्वामी कल्याणी ने मां गंगा से सभी श्रद्धालुओं के लिए प्रार्थना की और कहा कि गंगा उन्हें कष्टों से मुक्त करें।

    मेला अधिकारी और सुरक्षा व्यवस्था

    माघ मेला के आयोजन को लेकर मेला अधिकारी ऋषि राज ने बताया कि श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या के मद्देनज़र सभी व्यवस्थाएं पूरी कर ली गई हैं। पौष पूर्णिमा के अवसर पर माघ मेला शुरू हो चुका है। सुबह 8 बजे तक लगभग 65 लाख श्रद्धालु स्नान कर चुके थे उन्होंने कहा।प्रयागराज के डीएम मनीष कुमार वर्मा ने माघ मेला के दौरान सुरक्षा व्यवस्था की जानकारी दी और बताया कि पुलिसकर्मी जल पुलिस एनडीआरएफ और जीआरएफ की टीमें पूरी तत्परता से तैनात हैं। उन्होंने कहा स्नान के बाद श्रद्धालु सुरक्षित रूप से अपने-अपने गंतव्यों की ओर प्रस्थान कर रहे हैं।

    श्रद्धालुओं के अनुभव

    एक श्रद्धालु ने स्नान के बाद कहा यह मेरी तीसरी यात्रा है। मैं पहले भी आया हूं और 144 वर्षों बाद हुए कुंभ में भी था। यहां की व्यवस्था बहुत अच्छी है सब कुछ सुव्यवस्थित है। स्वास्थ्य की दृष्टि से भी प्रशासन ने सारी तैयारियां कर रखी हैं। अगर किसी को तबियत खराब होती है तो डॉक्टर भी उपलब्ध हैं। इस साल के माघ मेले में आने वाले दिनों में और भी बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के आने की संभावना है। प्रशासन और सुरक्षा बल पूरी तत्परता से उनका स्वागत करने के लिए तैयार हैं।

  • माघ मेला 2026 के लिए रोडवेज की स्पेशल बसें, 1 जनवरी से प्रयागराज पहुंचना होगा और आसान

    माघ मेला 2026 के लिए रोडवेज की स्पेशल बसें, 1 जनवरी से प्रयागराज पहुंचना होगा और आसान




    प्रयागराज।
    प्रयागराज में 1 जनवरी से शुरू हो रहे माघ मेला 2026 को लेकर उत्तर प्रदेश परिवहन निगम ने श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए व्यापक तैयारियां पूरी कर ली हैं। संगम स्नान के लिए देश-प्रदेश से आने वाले लाखों श्रद्धालुओं को सुगम, सुरक्षित और सस्ती परिवहन सुविधा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से विशेष रोडवेज बस सेवाएं शुरू की जा रही हैं। इससे माघ मेले के दौरान प्रयागराज पहुंचना और वहां से संगम घाट तक जाना बेहद आसान हो जाएगा।

    परिवहन निगम के अनुसार, गाजीपुर डिपो से प्रयागराज के लिए कुल 15 बसों का नियमित संचालन किया जाएगा।

    इनमें से 1 जनवरी से 13 जनवरी तक गाजीपुर डिपो की 10 बसें सीधे प्रयागराज के लिए चलाई जाएंगी, जबकि जनपद की पांच बसें वाराणसी मार्ग होते हुए झूसी तक संचालित होंगी। झूसी पहुंचने के बाद श्रद्धालुओं को संगम घाट तक पहुंचाने के लिए विशेष व्यवस्था की गई है।

    श्रद्धालुओं की भीड़ और पैदल चलने की परेशानी को देखते हुए झूसी से संगम घाट तक चार बसों की शटल सेवा चलाई जाएगी। ये बसें लगातार फेरे लगाती रहेंगी, ताकि श्रद्धालुओं को जाम और भीड़ से राहत मिल सके।

    यह विशेष परिवहन व्यवस्था 1 जनवरी से 17 फरवरी तक, यानी पूरे माघ मेला काल में जारी रहेगी।

    माघ मेले के दौरान संगम स्नान के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु प्रयागराज पहुंचते हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए परिवहन निगम ने बसों की संख्या में इजाफा किया है। विभाग के अधिकारियों के अनुसार, वर्तमान में गाजीपुर डिपो से 94 बसों का संचालन किया जा रहा है और माघ मेले के दौरान ग्रामीण रूटों पर भी अतिरिक्त बसें लगाई जाएंगी, ताकि दूर-दराज के गांवों से आने वाले श्रद्धालुओं को भी सुविधा मिल सके।

    इसके अलावा, प्रमुख बस अड्डों पर अतिरिक्त कर्मचारियों की तैनाती, टिकट काउंटरों की संख्या बढ़ाने, समय-सारिणी में लचीलापन और जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त फेरे लगाने की व्यवस्था की गई है।

    विशेष स्नान पर्वों के दौरान यात्रियों की संख्या में भारी बढ़ोतरी को देखते हुए परिवहन निगम ने सतर्कता बढ़ाने और बसों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।

    माघ मेले की प्रमुख स्नान तिथियों पर विशेष भीड़ रहने की संभावना है। इनमें पौष पूर्णिमा (13 जनवरी), मकर संक्रांति (14 जनवरी), मौनी अमावस्या (29 जनवरी), बसंत पंचमी (3 फरवरी) और माघी पूर्णिमा (12 फरवरी) शामिल हैं। इन तिथियों पर अतिरिक्त बसें और शटल सेवाएं चलाई जाएंगी।

    परिवहन निगम का कहना है कि श्रद्धालुओं को सुरक्षित, व्यवस्थित और सुगम यात्रा उपलब्ध कराना उनकी प्राथमिकता है। माघ मेला 2026 के दौरान यह विशेष बस सेवा श्रद्धालुओं के लिए बड़ी राहत साबित होगी।