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  • प्रयागराज के दशहरी-लंगड़ा आम अब यूएई और ओमान को 50 हजार टन आम निर्यात की तैयारी, किसानों को मिलेगा बड़ा बाजार

    प्रयागराज के दशहरी-लंगड़ा आम अब यूएई और ओमान को 50 हजार टन आम निर्यात की तैयारी, किसानों को मिलेगा बड़ा बाजार



    प्रयागराज। प्रयागराज मंडल के मशहूर दशहरी, लंगड़ा और फजली आम की मिठास अब सिर्फ देश तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि यह अब विदेशों तक अपनी पहचान बनाएगी। इस बार प्रयागराज मंडल से करीब 50 हजार टन आम संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) और ओमान भेजने की तैयारी की जा रही है, जिससे किसानों और निर्यात कारोबार को बड़ा फायदा मिलने की उम्मीद है।

    प्रयागराज मंडल के प्रयागराज, प्रतापगढ़ और कौशांबी जिलों में लगभग 2400 से 2500 हेक्टेयर क्षेत्र में आम की बागवानी की जाती है। यहां से हर साल करीब डेढ़ लाख मीट्रिक टन आम का उत्पादन होता है, जिसमें से एक बड़ा हिस्सा निर्यात के लिए तैयार किया जाता है। खास बात यह है कि प्रयागराज जिले में अकेले ही 600 से 650 हेक्टेयर में आम की खेती होती है और यहां से लगभग 10 हजार टन से अधिक उत्पादन होता है।

    विदेशी बाजारों में यहां के आमों की मांग लगातार बढ़ रही है। दशहरी, लंगड़ा और फजली किस्मों को उनकी मिठास, सुगंध और गुणवत्ता के कारण खाड़ी देशों में काफी पसंद किया जा रहा है। इसी कारण हर साल लगभग 50 हजार टन आम यूएई और ओमान जैसे देशों में निर्यात किया जाता है।

    इसके साथ ही किसानों का रुझान अब नई प्रजातियों की ओर भी बढ़ रहा है। उद्यान विभाग के अनुसार अंबिका, अरुणिका, मल्लिका और बॉम्बे ग्रीन जैसी नई किस्में कम समय में तैयार होने और बेहतर उत्पादन के कारण तेजी से लोकप्रिय हो रही हैं। इन किस्मों की मांग न सिर्फ घरेलू बाजार में बल्कि विदेशों में भी बढ़ रही है।

    निर्यात को बढ़ावा देने के लिए पैकिंग, ग्रेडिंग और कोल्ड स्टोरेज व्यवस्था को मजबूत किया जा रहा है। किसानों को बेहतर गुणवत्ता बनाए रखने और सुरक्षित पैकिंग के लिए प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है, जो खुसरो बाग सहित विभिन्न केंद्रों पर आयोजित किया जाता है।

    कुल मिलाकर, प्रयागराज मंडल के आम अब अंतरराष्ट्रीय बाजार में अपनी पहचान मजबूत कर रहे हैं, जिससे किसानों की आय बढ़ने और क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को गति मिलने की उम्मीद है।

  • प्रयागराज में दिल दहला देने वाला हादसा: बच्चों को बचाते-बचाते जिंदा जल गई मां

    प्रयागराज में दिल दहला देने वाला हादसा: बच्चों को बचाते-बचाते जिंदा जल गई मां


    प्रयागराज। प्रयागराज में इंसानियत और मां की ममता की एक ऐसी दर्दनाक और साहसिक कहानी सामने आई है, जिसने हर किसी को भावुक कर दिया। यहां एक मां ने अपने चार बच्चों की जान बचाने के लिए अपनी जान कुर्बान कर दी। यह घटना 12 मई की रात नैनी बाजार के चैंपियन गली इलाके में हुई, जहां एक क्रॉकरी कारोबारी के घर में शॉर्ट सर्किट से भीषण आग लग गई।

    जानकारी के अनुसार, आग घर के फर्स्ट फ्लोर पर बने गोदाम से शुरू हुई और कुछ ही मिनटों में पूरे मकान में फैल गई। उस समय घर की महिलाएं और बच्चे ऊपर की मंजिल पर फंस गए थे। नीचे से निकलने का कोई रास्ता नहीं बचा और सभी लोग जान बचाने के लिए छत पर पहुंच गए। आग की लपटें और धुआं तेजी से बढ़ता जा रहा था, जिससे हालात बेहद भयावह हो गए।

    इसी दौरान मां ने असाधारण साहस दिखाते हुए अपने बच्चों को बचाने का फैसला किया। पहले उसने अपने एक साल के मासूम बच्चे को चादर में लपेटा और पड़ोसी की छत की ओर लगभग 12 फीट दूर उछाल दिया। पड़ोसियों ने किसी तरह बच्चे को सुरक्षित पकड़ लिया। इसके बाद छत पर रखी सीढ़ी का सहारा लेकर उसने अपनी दो बेटियों को भी पड़ोसी की छत पर सुरक्षित पहुंचा दिया।

    इसके बाद उसने अपने भतीजे को भी सीढ़ी के जरिए दूसरी छत पर भेजकर बचा लिया। इस तरह उसने चार बच्चों को सुरक्षित कर दिया, लेकिन इस दौरान आग और धुएं ने पूरी छत को घेर लिया था। लगातार बढ़ती लपटों और घने धुएं के कारण वह खुद बाहर नहीं निकल सकी और आग की चपेट में आ गई।

    कुछ ही देर में वह बुरी तरह झुलस गई और मौके पर ही गंभीर हालत में पहुंच गई। फायर ब्रिगेड की टीम बाद में मौके पर पहुंची, लेकिन तंग गली होने के कारण राहत कार्य में काफी देर लगी। किसी तरह महिला को अस्पताल पहुंचाया गया, जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।

    बताया गया कि महिला का नाम अर्चना था, जिन्होंने अपने बच्चों की जान बचाने के लिए अपनी जान तक की परवाह नहीं की। उनकी 13 साल की बेटी भी इस हादसे में झुलस गई और आईसीयू में भर्ती है, जबकि अन्य परिजन भी घायल हुए हैं।

    फायर ब्रिगेड की करीब 12 गाड़ियों ने घंटों की मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया। यह हादसा पूरे इलाके में शोक और सदमे का कारण बन गया है। लोगों का कहना है कि यह घटना मां के अद्भुत साहस और बलिदान की मिसाल है, जिसे कभी भुलाया नहीं जा सकता।

  • गंगा एक्सप्रेसवे बनेगा विकास की नई लाइफलाइन, कई तीर्थ स्थलों को मिलेगा सीधा लाभ

    नई दिल्ली । गंगा एक्सप्रेसवे (करीब 594 किमी) मेरठ से प्रयागराज तक बनने वाला एक बड़ा हाईवे प्रोजेक्ट है, जो उत्तर प्रदेश में धार्मिक और सांस्कृतिक पर्यटन को नई रफ्तार देगा। पहले जहां मेरठ से प्रयागराज तक पहुंचने में 10–12 घंटे लगते थे, अब यह सफर लगभग 5–6 घंटे में पूरा हो सकेगा।

    इस एक्सप्रेसवे का सबसे बड़ा फायदा धार्मिक पर्यटन को होगा, क्योंकि यह कई प्रमुख तीर्थ स्थलों जैसे गढ़मुक्तेश्वर, कल्कि धाम, बेल्हा देवी धाम, चंद्रिका देवी मंदिर और त्रिवेणी संगम को बेहतर कनेक्टिविटी देगा। इससे श्रद्धालुओं के लिए एक ही यात्रा में कई धार्मिक स्थलों के दर्शन करना आसान हो जाएगा।

    इसके अलावा यह एक्सप्रेसवे प्रयागराज को वाराणसी, विंध्याचल, अयोध्या, गोरखनाथ मंदिर, नैमिषारण्य, चित्रकूट, मथुरा और वृंदावन जैसे प्रमुख धार्मिक स्थलों से भी बेहतर रूप से जोड़ने में मदद करेगा। इससे पूरे राज्य में तीर्थ यात्राओं और टूरिज्म में तेजी आने की संभावना है।

    हस्तिनापुर जैसे ऐतिहासिक और धार्मिक स्थल भी इस विकास से लाभान्वित होंगे, जिससे जैन और महाभारत काल से जुड़े पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा। साथ ही संभल, बदायूं, शाहजहांपुर और रायबरेली जैसे छोटे शहरों में होटल, ट्रांसपोर्ट और स्थानीय व्यापार में भी तेजी आएगी।

    कुल मिलाकर, गंगा एक्सप्रेसवे सिर्फ एक सड़क परियोजना नहीं बल्कि उत्तर प्रदेश के धार्मिक पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था को जोड़ने वाली एक बड़ी विकास कड़ी साबित हो सकता है।

  • झांसी में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल: ADM वरुण कुमार पांडेय बने विधि विश्वविद्यालय के कुलसचिव, गौरव शुक्ला को मिला JDA सचिव का जिम्मा

    झांसी में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल: ADM वरुण कुमार पांडेय बने विधि विश्वविद्यालय के कुलसचिव, गौरव शुक्ला को मिला JDA सचिव का जिम्मा


    नई दिल्ली। झांसी में प्रशासनिक फेरबदल के तहत पीसीएस अधिकारी वरुण कुमार पांडेय का तबादला कर उन्हें प्रयागराज स्थित डॉक्टर राजेंद्र प्रसाद राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय का नया कुलसचिव नियुक्त किया गया है। वर्तमान में वह झांसी में एडीएम वित्त एवं राजस्व के पद पर तैनात थे।

    वरुण कुमार पांडेय अपने कार्यकाल के दौरान कई महत्वपूर्ण मामलों को लेकर चर्चा में रहे। सिटी मजिस्ट्रेट रहते हुए उन्होंने प्रशासनिक स्तर पर सक्रिय भूमिका निभाई थी, खासकर महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज के नवजात शिशु वार्ड में हुए भीषण अग्निकांड के दौरान उनकी संवेदनशीलता और त्वरित निर्णय लेने की क्षमता की काफी सराहना हुई थी। उस हादसे के दौरान एक मां अपने बच्चे को ढूंढते हुए उनके पास पहुंची थी, जहां उन्होंने न सिर्फ महिला को संभाला बल्कि अधिकारियों की मदद से बच्चे को सुरक्षित ढूंढकर मां से मिलवाया था, जिसे लोगों ने उनकी मानवीय कार्यशैली का उदाहरण माना।

    इसी बीच शासन ने एक और बड़ा प्रशासनिक बदलाव करते हुए सुल्तानपुर में एडीएम प्रशासन के पद पर तैनात गौरव शुक्ला को झांसी विकास प्राधिकरण (JDA) का नया सचिव नियुक्त किया है। वह जल्द ही अपना कार्यभार ग्रहण करेंगे।

    इस तबादले को प्रशासनिक स्तर पर महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जिससे दोनों जिलों में नई कार्यशैली और गति आने की उम्मीद जताई जा रही है।

  • लेंसकार्ट विवाद में धीरेंद्र शास्त्री की एंट्री, बोले- अपनी कंपनी लाहौर में खोल लो

    लेंसकार्ट विवाद में धीरेंद्र शास्त्री की एंट्री, बोले- अपनी कंपनी लाहौर में खोल लो

    प्रयागराज. प्रयागराज में एक कार्यक्रम के दौरान धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने लेंसकार्ट कंपनी के मालिक पर जमकर भड़के और उन्हें लाहौर जाने की सलाह दे डाली. कार्यक्रम के दौरान श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए उन्होंने ने कहा कि ‘एक कंपनी है उसका नाम लेंसकार्ट है. उसने अपने वर्करों को बोला है कि हमारे यहां कोई तिलक लगा के नहीं आ सकता, मंगलसूत्र पहन के नहीं आ सकता, सिंदूर लगा के नहीं आ सकता. अरे… नकटा, तू अपनी कंपनी लाहौर में खोल ले, भारत में काहे को मर रहा है.
    धीरेंद्र शास्त्री यहीं नहीं रुके, उन्होंने कहा कि लेंसकार्ट जैसी कंपनियां हिंदू समाज की भावनाओं और विचारधारा को आहत करती हैं, इनका बहिष्कार होना चाहिए. उन्हें लाहौर जाना चाहिए. इन्हें भारत में व्यापार करने का अधिकार नहीं है. ऐसे शुरू हुआ था विवाद यह पूरा विवाद कुछ दिनों पहले सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक कथित पॉलिसी डॉक्यूमेंट से शुरू हुआ था. इस दस्तावेज़ में दावा किया गया था कि कंपनी ने अपने कर्मचारियों के लिए कुछ धार्मिक प्रतीकों- जैसे बिंदी, तिलक और कलावा- पर रोक लगाई है.
    विवाद बढ़ने के बाद कंपनी के सह-संस्थापक पीयूष बंसल ने सार्वजनिक रूप से सफाई दी. उन्होंने कहा कि वायरल हो रहा दस्तावेज़ पुराना और भ्रामक है, जिसे पहले ही हटा दिया गया था. उन्होंने स्पष्ट किया कि लेंसकार्ट अपने कर्मचारियों के साथ किसी भी प्रकार का धार्मिक भेदभाव नहीं करता और सभी को अपनी आस्था के अनुसार पहनावे की पूरी स्वतंत्रता है. लेंसकार्ट के बहिष्कार की मांग कर रहे हैं लोग इसके बावजूद यह मुद्दा थमता नजर नहीं आ रहा है. सोशल मीडिया पर बड़ी संख्या में लोग कंपनी के खिलाफ नाराजगी जाहिर कर रहे हैं और बहिष्कार की मांग कर रहे हैं. कई जगहों पर विरोध प्रदर्शन भी देखने को मिले हैं. भोपाल में कुछ संगठनों ने लेंसकार्ट के स्टोर्स के बाहर प्रदर्शन किया और कंपनी के खिलाफ नारेबाजी की. फिलहाल यह मामला धार्मिक भावनाओं, कॉर्पोरेट नीतियों और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के बीच असंतुलन का एक बड़ा उदाहरण बनता जा रहा है. अब देखना यह होगा कि कंपनी और संबंधित पक्ष इस विवाद को शांत करने के लिए आगे क्या कदम उठाते हैं?
  • प्रयागराज में अविमुक्तेश्वरानंद पर बाल यौन शोषण FIR, पुलिस ने शुरू की गहन जांच

    प्रयागराज में अविमुक्तेश्वरानंद पर बाल यौन शोषण FIR, पुलिस ने शुरू की गहन जांच


    प्रयागराज। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती और उनके शिष्य मुकुंदानंद ब्रह्मचारी के खिलाफ बाल यौन शोषण के गंभीर आरोपों पर FIR दर्ज होने के बाद पुलिस ने गहन जांच शुरू कर दी है। मामला POCSO कोर्ट के आदेश पर दर्ज किया गया है। शिकायतकर्ता आशुतोष ब्रह्मचारी महाराज और पीड़ित शिष्यों ने अदालत में बच्चों के कथित शोषण के बयानों को दर्ज कराया था, जिनके आधार पर पुलिस ने देर रात FIR को औपचारिक रूप दिया।

    पुलिस की पांच सदस्यीय टीम, जिसका नेतृत्व डीसीपी मनीष कुमार शांडिल्य कर रहे हैं, ने घटना स्थल का नक्शा तैयार कर लिया है और पीड़ितों के मेडिकल परीक्षण के बाद साक्ष्य जुटाने की प्रक्रिया तेज़ कर दी है। टीम ने माघ मेला शिविर और अन्य कथित घटनास्थलों का निरीक्षण भी किया है। पुलिस का मुख्य फोकस अब उन पीड़ितों और शिकायतकर्ता तक पहुंचकर कलम बंद बयान और सबूत दर्ज करना है, ताकि आगे की कानूनी कार्रवाई और संभावित गिरफ्तारी सुनिश्चित हो सके।

    अविमुक्तेश्वरानंद ने FIR दर्ज होने के बाद कहा कि वे जांच से भागेंगे नहीं और उनके मठ के दरवाजे पुलिस के लिए हमेशा खुले हैं। उन्होंने बताया कि कई वकीलों ने उनका केस मुफ्त में लड़ने का प्रस्ताव दिया है और उनकी लीगल टीम अब अग्रिम कानूनी कार्रवाई पर विचार कर रही है। वहीं, उन्होंने शिकायतकर्ता आशुतोष ब्रह्मचारी के आपराधिक इतिहास पर सवाल उठाया और दावा किया कि वह कांधला थाना क्षेत्र का हिस्ट्रीशीटर है, जिस पर 25 हजार रुपये का इनाम भी रह चुका है।

    इस हाई‑प्रोफाइल मामले में पुलिस ने स्पेशल टीम बनाई है जिसमें एसीपी और इंस्पेक्टर झूंसी समेत पांच वरिष्ठ अधिकारी शामिल हैं। टीम निष्पक्ष और तेज़ जांच सुनिश्चित कर रही है। POCSO Act के तहत यह मामला तीव्र और संवेदनशील माना जा रहा है, इसलिए पुलिस मेडिकल, फोरेंसिक और गवाह सबूत के आधार पर अगली कानूनी कार्रवाई तय करेगी।

    इस बीच समाज और धार्मिक जगत में भी इस मामले पर बहस जारी है। स्वामी ने आरोपों को झूठा और साजिशपूर्ण बताया है और कहा कि न्याय जल्द ही दोनों न्यायालयों में सही रूप से होगा। समाजवादी पार्टी के नेता अखिलेश यादव के बयानों का उन्होंने समर्थन करते हुए उन्हें जनता की आवाज बताया।

  • Holi Special Train: जबलपुर से अयोध्या, दिल्ली, मथुरा, प्रयागराज और वाराणसी के लिए दौड़ेंगी स्पेशल ट्रेनें, यात्रियों को बड़ी राहत

    Holi Special Train: जबलपुर से अयोध्या, दिल्ली, मथुरा, प्रयागराज और वाराणसी के लिए दौड़ेंगी स्पेशल ट्रेनें, यात्रियों को बड़ी राहत


    जबलपुर। रंगों के महापर्व होली पर घर लौटने और धार्मिक स्थलों पर रंगोत्सव मनाने वाले यात्रियों के लिए राहत भरी खबर है। पश्चिम मध्य रेल ने जबलपुर से दो प्रमुख दिशाओंअयोध्या और दिल्लीके लिए विशेष ट्रेनों के संचालन का निर्णय लिया है। ये दोनों स्पेशल ट्रेनें 2 से 11 मार्च के बीच सप्ताह में एक दिन संचालित होंगी और दो-दो फेरे लगाएंगी। इनके लिए आरक्षण भी शुरू कर दिया गया है, जिससे यात्रियों को कन्फर्म सीट मिलने की संभावना बढ़ गई है।

    पहली स्पेशल ट्रेन जबलपुर-अयोध्या धाम के बीच चलेगी। ट्रेन क्रमांक 01705 तीन और 10 मार्च को शाम 7.40 बजे जबलपुर जंक्शन से रवाना होगी। यह सिहोरा रोड, कटनी जंक्शन, मैहर, सतना, मानिकपुर, मिर्जापुर और जौनपुर जैसे प्रमुख स्टेशनों पर ठहरते हुए मध्यरात्रि 2.15 बजे प्रयागराज छिवकी, सुबह 7.05 बजे वाराणसी और सुबह 11.25 बजे अयोध्या धाम पहुंचेगी। वापसी में ट्रेन क्रमांक 01706 चार और 11 मार्च को दोपहर 1.30 बजे अयोध्या धाम से चलकर अगले दिन सुबह 6.45 बजे जबलपुर पहुंचेगी। इस ट्रेन में दो सेकेंड एसी, पांच थर्ड एसी, आठ स्लीपर और दो एसएलआरडी कोच रहेंगे।

    दूसरी स्पेशल ट्रेन जबलपुर से हजरत निजामुद्दीन दिल्ली के लिए चलाई जाएगी। ट्रेन क्रमांक 01701 दो और नौ मार्च को रात 8.20 बजे जबलपुर से रवाना होगी। यह कटनी मुड़वारा, दमोह, सागर, झांसी, ग्वालियर, आगरा, मथुरा और कोशी कला होते हुए दिल्ली पहुंचेगी। वापसी में ट्रेन क्रमांक 01702 तीन और 10 मार्च को अपराह्न 3.45 बजे निजामुद्दीन से चलकर अगले दिन सुबह 9.30 बजे जबलपुर पहुंचेगी। 24 कोच वाली इस ट्रेन में चार जनरल, नौ स्लीपर, छह थर्ड एसी, दो सेकेंड एसी और एक फर्स्ट एसी कोच शामिल होगा।

    होली के दौरान मथुरा और काशी जाने वाले श्रद्धालुओं के लिए भी यह ट्रेनें बड़ी सुविधा साबित होंगी। नियमित ट्रेनों में सीटों की कमी के कारण यात्रियों को काफी परेशानी होती है, ऐसे में इन स्पेशल ट्रेनों से भीड़ का दबाव कम होगा। अयोध्या स्पेशल ट्रेन के मिर्जापुर ठहराव से विंध्याचल धाम जाने वाले श्रद्धालुओं को भी लाभ मिलेगा।

    इसके अलावा रीवा-भोपाल-दानापुर रूट पर भी विशेष ट्रेनों का संचालन किया जाएगा। रानी कमलापति से रीवा और दानापुर के लिए सुपरफास्ट एवं स्पेशल ट्रेनों की तिथियां घोषित कर दी गई हैं, जिससे मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश-बिहार के बीच यात्रा करने वालों को अतिरिक्त विकल्प मिलेंगे।

    रेल प्रशासन का मानना है कि इन स्पेशल ट्रेनों से न केवल त्योहार के दौरान घर लौटने वाले यात्रियों को राहत मिलेगी, बल्कि धार्मिक पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा। होली के रंगों के बीच सुरक्षित और सुगम यात्रा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से यह पहल की गई है। यात्रियों से समय पर आरक्षण कराने और निर्धारित समय-सारिणी की जानकारी प्राप्त करने की अपील की गई है।

  • माघ मेला 2026: ‘मेला सेवा एप’ से श्रद्धालुओं को डिजिटल मार्गदर्शन, QR कोड से सीधे प्रशासन से जुड़ाव

    माघ मेला 2026: ‘मेला सेवा एप’ से श्रद्धालुओं को डिजिटल मार्गदर्शन, QR कोड से सीधे प्रशासन से जुड़ाव


    नई दिल्ली। प्रयागराज में आयोजित हो रहे माघ मेला 2026 में श्रद्धालुओं की सुविधा, सुरक्षा और सहज अनुभव को बढ़ाने के लिए मेला प्रशासन ने तकनीकी नवाचारों को लागू किया है। इसी कड़ी में इस वर्ष ‘माघ मेला सेवा एप’ को लॉन्च किया गया, जो मेले में आने वाले श्रद्धालुओं के लिए एक डिजिटल सहायक का काम करेगा।

    शनिवार को उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने माघ मेला क्षेत्र का निरीक्षण किया और इस एप का औपचारिक शुभारंभ किया।

    मुख्यमंत्री ने मेला के आगामी प्रमुख स्नान पर्वों की तैयारियों की समीक्षा की और अधिकारियों एवं जनप्रतिनिधियों के साथ बैठक में श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने पर विस्तार से चर्चा की। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने तीर्थयात्रियों को डिजिटल मार्गदर्शन प्रदान करने के उद्देश्य से ‘मेला सेवा एप’ का लोकार्पण किया।

    यह एप श्रद्धालुओं को मेला क्षेत्र से जुड़ी सभी महत्वपूर्ण सेवाएं एक ही मंच पर उपलब्ध कराएगा। मेला अधिकारी ऋषिराज ने बताया कि एप का डिज़ाइन इस प्रकार किया गया है कि मेला क्षेत्र के किसी भी हिस्से में मौजूद श्रद्धालु या पर्यटक सीधे अपनी समस्या या सुझाव मेला प्रशासन तक पहुंचा सकेंगे। इसके लिए मेला क्षेत्र में स्थापित सभी बिजली के खंभों पर QR कोड लगाए गए हैं। श्रद्धालु अपने मोबाइल फोन से इन QR कोड को स्कैन करके ऑनलाइन फॉर्म भरकर अपनी समस्या दर्ज कर सकते हैं।

    इस एप की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह डिजिटल शिकायत एवं मार्गदर्शन प्रणाली के जरिए प्रशासन और श्रद्धालुओं के बीच सीधे संवाद की सुविधा प्रदान करता है।

    समस्या दर्ज होते ही संबंधित विभागों की टीम सक्रिय होकर उसका त्वरित समाधान सुनिश्चित करेगी। इस प्रकार श्रद्धालुओं को अब पारंपरिक पद्धति की तुलना में अधिक तेज, सहज और प्रभावी सेवा प्राप्त होगी।

    माघ मेले में यह पहल पहली बार लागू की गई है और इसे सुरक्षित, सुव्यवस्थित और श्रद्धालु-अनुकूल मेला बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। एप के माध्यम से श्रद्धालु न केवल शिकायत दर्ज कर सकेंगे, बल्कि मेले में होने वाली विभिन्न सुविधाओं, मार्गदर्शन, स्वास्थ्य और सुरक्षा संबंधी जानकारी भी सीधे प्राप्त कर सकेंगे।

    इस डिजिटल नवाचार से माघ मेले में आने वाले लाखों श्रद्धालुओं के अनुभव को और सहज बनाने के साथ ही प्रशासन की कार्यकुशलता भी बढ़ेगी। QR कोड और मोबाइल एप के माध्यम से श्रद्धालुओं को स्थानिक मार्गदर्शन, हेल्पलाइन संपर्क और शिकायत निवारण जैसी सेवाएं तुरंत उपलब्ध होंगी।

    इस पहल से यह सुनिश्चित होगा कि माघ मेले में पहली बार तकनीक का प्रयोग करते हुए श्रद्धालुओं की समस्याओं का त्वरित समाधान हो और उन्हें एक सुरक्षित और सुव्यवस्थित मेला अनुभव प्राप्त हो। यह कदम मेला प्रशासन को अधिक पारदर्शी, त्वरित और श्रद्धालु-केंद्रित बनाएगा। माघ मेला सेवा एप श्रद्धालुओं के लिए डिजिटल मार्गदर्शन, शिकायत समाधान, और त्वरित प्रशासनिक संपर्क का एक नया आयाम खोल रहा है। QR कोड आधारित इस नवाचार से माघ मेला 2026 और अधिक सुरक्षित, सुव्यवस्थित और तकनीकी रूप से आधुनिक बन रहा है।
  • Makar Sankranti 2026: गुजरात से प्रयागराज तक, मकर संक्रांति की 5 सबसे रंगीन जगह

    Makar Sankranti 2026: गुजरात से प्रयागराज तक, मकर संक्रांति की 5 सबसे रंगीन जगह

    नई दिल्ली। Makar Sankranti 2026 Places to Visit: सूर्य के उत्तरायण होते ही उत्सवों का मौसम शुरू हो जाता है। शुरुआत मकर संक्रांति के पावन पर्व से होती है जो 14 या 15 जनवरी 2026 को ंमनाई जाएगी। मकर संक्रांति पूरे देश में मनाई जाती है, लेकिन अलग-अलग नामों और तरीकों से। मकर संक्रांति का पर्व अंधकार से प्रकाश की ओर और शीत से ऊर्जा की ओर बढ़ने का समय है।

    यह वही दिन है जब सूर्य देव मकर राशि में प्रवेश करते हैं और दक्षिणायन से उत्तरायण की यात्रा शुरू होती है। भारतीय परंपरा में इसे अत्यंत शुभ माना गया है। खेतों में नई फसल की खुशी, घरों में तिल-गुड़ की मिठास और आसमान में रंग-बिरंगी पतंगें, मकर संक्रांति हर रूप में उल्लास रचती है।

    लेकिन यह पर्व पूरे भारत में एक जैसा नहीं मनाया जाता। हर क्षेत्र इसे अपने रंग, नाम और संस्कार के साथ जीता है। आइए जानते हैं उन जगहों के बारे में, जहां मकर संक्रांति की धूम देखते ही बनती है।

    गुजरात
    गुजरात में मकर संक्रांति केवल त्योहार नहीं, बल्कि जन-उत्सव है। अहमदाबाद, सूरत और वडोदरा में अंतर्राष्ट्रीय पतंग फेस्टिवल का आयोजन होता है। छतों पर लोग “काई पो चे” के नारों के साथ पतंगबाजी करते हैं। ऊंधियू, जलेबी और चिक्की यहां की पहचान हैं। रात में टुक्कल (लैंप पतंग) आसमान को जादुई बना देते हैं।

    प्रयागराज
    उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में संगम में आस्था की डुबकी लगाकर मकर संक्रांति का पर्व मनाया जाता है। यूपी में मकर संक्रांति का अर्थ है पवित्र स्नान। प्रयागराज के संगम पर लाखों श्रद्धालु गंगा, यमुना और सरस्वती के संगम में डुबकी लगाते हैं। दान-पुण्य, खिचड़ी, तिल और वस्त्र दान का विशेष महत्व है। यह दिन आध्यात्मिक शुद्धि का प्रतीक माना जाता है।

    तमिलनाडु
    तमिलनाडु में पोंगल के रूप में चार दिन का उत्सव मनाया जाता है। दक्षिण भारत में मकर संक्रांति को पोंगल कहा जाता है। यह चार दिन तक चलने वाला पर्व है, भोगी, थाई पोंगल, मट्टू पोंगल और कानुम पोंगल। नई फसल से बना मीठा पोंगल, गाय-बैलों की पूजा और घरों के सामने रंगोली, यह त्योहार किसानों के सम्मान का उत्सव है।

    राजस्थान
    यहां पतंगबाजी और लोक-संस्कृति का संगम है। जयपुर और अन्य शहरों में मकर संक्रांति पर पतंगबाजी प्रतियोगिताएं, लोकगीत और पारंपरिक व्यंजन त्योहार को खास बना देते हैं। महिलाएं पारंपरिक परिधान पहनकर सूर्य को अर्घ्य देती हैं।

    महाराष्ट्र
    महाराष्ट्र में मकर संक्रांति सामाजिक सौहार्द का पर्व है। लोग एक-दूसरे को तिलगुल देकर कहते हैं, “तिलगुल घ्या, गोड गोड बोला।” यह संदेश है कि जैसे तिल और गुड़ मिलकर मिठास देते हैं, वैसे ही जीवन में भी कटुता छोड़कर मधुरता अपनाई जाए।

  • कड़ाके की सर्दी और शीतलहर का असर4 राज्यों में ऑरेंज अलर्ट17 राज्यों में येलो अलर्ट

    कड़ाके की सर्दी और शीतलहर का असर4 राज्यों में ऑरेंज अलर्ट17 राज्यों में येलो अलर्ट


    नई दिल्ली । भारत के कई हिस्सों में इस समय कड़ाके की सर्दी और शीतलहर का सामना हो रहा है। मौसम विभाग ने देश के 4 राज्यों में शीतलहर के कारण ऑरेंज अलर्ट जारी किया हैजबकि 17 राज्यों में येलो अलर्ट लागू किया गया है। इस कड़ी सर्दी और घने कोहरे ने सामान्य जनजीवन को प्रभावित किया हैखासकर उत्तर-पश्चिममध्यपूर्वी और उत्तर-पूर्वी भारत में।

    ऑरेंज और येलो अलर्ट

    मौसम विभाग ने बताया कि अगले 4-5 दिनों तक देश के कई हिस्सों में शीतलहर और घने से बहुत घने कोहरे की स्थिति बनी रह सकती है। उत्तर-पश्चिम भारतमध्य भारत और पूर्वी भारत के कई राज्य शीतलहर और घने कोहरे की चपेट में आ सकते हैं। जिन चार राज्यों में ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया हैवहां तापमान और कोहरे की स्थिति बेहद खतरनाक हो सकती है। इसके अलावा17 अन्य राज्यों में येलो अलर्ट जारी किया गया हैजो घने कोहरे और शीतलहर की चेतावनी देता हैजिससे दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ सकता है।

    प्रयागराज में श्रद्धालुओं की भीड़

    इस बीचउत्तर भारत में शीतलहर और कोहरे के बीच लाखों श्रद्धालु माघ मेले में शामिल होने के लिए प्रयागराज पहुंच रहे हैं। रेलवे और पुलिस विभाग ने इस भीड़-भाड़ को देखते हुए उच्च सुरक्षा और अलर्ट जारी कर दिया है। घने कोहरे के कारण रेलवे ट्रेनों के समय में बदलाव आ सकता हैऔर यात्रियों को अतिरिक्त सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।

    सर्दी से बचाव के उपाय

    मौसम विभाग ने सभी नागरिकों को कड़ाके की सर्दी से बचने के लिए उचित गर्म कपड़े पहन नेधू प में रहने और शरीर को गर्म रखने के उपायों की सलाह दी है। खासकर उन इलाकों में जहां घना कोहरा हैवहां विजिबिलिटी बहुत कम हो सकती हैजिससे सड़क और रेलवे दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ सकता है।

    अधिकारियों की तैयारी

    रेलवे और पुलिस विभाग ने शीतलहर और कोहरे के प्रभाव को कम करने के लिए सभी तैयारियां पूरी कर ली हैं। खासकर ट्रेनों की निगरानी और ट्रैफिक मैनेजमेंट में विशेष ध्यान दिया जा रहा है। इसके अलावास्थानीय प्रशासन ने नागरिकों से आग्रह किया है कि वे मौसम की स्थिति को देखते हुए सुरक्षित यात्रा करें और जरूरत न होने पर घरों से बाहर न निकलें। देश के विभिन्न हिस्सों में सर्दी और कोहरे के कारण मुश्किलें बढ़ रही हैंऔर सरकार और स्थानीय प्रशासन की तरफ से यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि नागरिकों को हर संभव सहायता मिल सके।