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  • चांदी में तेजी का अनुमान, अगली दिवाली तक 4 लाख रुपये किलो तक पहुंचने की संभावना

    चांदी में तेजी का अनुमान, अगली दिवाली तक 4 लाख रुपये किलो तक पहुंचने की संभावना

    नई दिल्ली ।चांदी की कीमतों को लेकर आने वाले समय के लिए एक बड़ा अनुमान सामने आया है। एक रिपोर्ट के मुताबिक, औद्योगिक मांग में लगातार बढ़ोतरी और खदानों से सीमित आपूर्ति के कारण वैश्विक बाजार में चांदी की कीमतों में आगे भी तेजी देखने को मिल सकती है। अनुमान के अनुसार अगले छह महीनों में अंतरराष्ट्रीय बाजार में चांदी की कीमत 85 से 90 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच सकती है, जबकि दिवाली 2027 तक यह 120 डॉलर प्रति औंस के स्तर तक जाने की संभावना जताई गई है।

    सितंबर 2026 में घरेलू बाजार में चांदी का बेंचमार्क भाव करीब 2.34 लाख रुपये प्रति किलोग्राम बताया गया है। रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया है कि रुपये-डॉलर की विनिमय दर, आयात शुल्क और प्रीमियम जैसे कारकों को ध्यान में रखते हुए घरेलू बाजार में चांदी की कीमत दिवाली 2027 तक करीब 4 लाख रुपये प्रति किलोग्राम के स्तर तक पहुंच सकती है। यह मौजूदा स्तर की तुलना में लगभग 71 फीसदी तक की संभावित बढ़ोतरी का संकेत देता है। हालांकि यह एक अनुमान है और वास्तविक कीमत बाजार की परिस्थितियों के अनुसार बदल सकती है।

    चांदी में संभावित तेजी के पीछे सबसे प्रमुख कारण औद्योगिक मांग को माना गया है। चांदी का इस्तेमाल इलेक्ट्रॉनिक्स, ऊर्जा, तकनीकी उपकरणों और कई औद्योगिक उत्पादों में होता है। तकनीकी क्षेत्र के विस्तार के साथ इसकी मांग बढ़ने की संभावना जताई जा रही है। दूसरी ओर, खदानों से चांदी की आपूर्ति उसी गति से बढ़ाना आसान नहीं है।

    वैश्विक बाजार में 2026 के दौरान चांदी की मांग और आपूर्ति के बीच करीब 4.63 करोड़ औंस का अंतर रहने का अनुमान लगाया गया है। यह लगातार छठा वर्ष हो सकता है जब चांदी की वैश्विक आपूर्ति मांग से कम रहेगी। मांग और आपूर्ति के इस अंतर को कीमतों पर दबाव बढ़ाने वाले प्रमुख कारकों में शामिल किया जा रहा है।

    चांदी के उत्पादन की संरचना भी इसकी आपूर्ति को प्रभावित करती है। अनुमान के अनुसार 2026 में वैश्विक चांदी उत्पादन करीब 84.41 करोड़ औंस रह सकता है। खास बात यह है कि कुल चांदी उत्पादन का केवल लगभग एक चौथाई हिस्सा प्राथमिक चांदी की खदानों से आता है। चांदी की बड़ी मात्रा तांबा, जस्ता और सीसा जैसी दूसरी धातुओं के खनन के दौरान उप-उत्पाद के रूप में प्राप्त होती है।

    इस वजह से चांदी की कीमत बढ़ने के बावजूद इसका उत्पादन उसी अनुपात में बढ़ाना चुनौतीपूर्ण रहता है। यदि औद्योगिक मांग आगे भी मजबूत बनी रहती है और खनन से मिलने वाली आपूर्ति सीमित रहती है, तो बाजार में मांग और उपलब्धता के बीच अंतर बढ़ सकता है।

    रिपोर्ट में अगले छह महीनों के लिए अंतरराष्ट्रीय चांदी की कीमत 85 से 90 डॉलर प्रति औंस और दिवाली 2027 तक 120 डॉलर प्रति औंस का अनुमान दिया गया है। घरेलू बाजार के लिए करीब 4 लाख रुपये प्रति किलोग्राम का संभावित स्तर बताया गया है। हालांकि चांदी की कीमतों पर वैश्विक बाजार, मुद्रा विनिमय दर, आयात शुल्क, औद्योगिक मांग, निवेश मांग और उपलब्ध आपूर्ति जैसे कई कारकों का असर पड़ता है। इसलिए ये आंकड़े बाजार का अनुमान हैं, निश्चित कीमत नहीं।

  • सरकारी बिक्री में 35 रुपये किलो प्याज, खुले बाजार में 60 से 70 रुपये तक पहुंची कीमत..

    सरकारी बिक्री में 35 रुपये किलो प्याज, खुले बाजार में 60 से 70 रुपये तक पहुंची कीमत..

    नई दिल्ली । प्याज की बढ़ती कीमतों ने एक बार फिर घरेलू बजट पर दबाव बढ़ा दिया है। देश के कई खुदरा बाजारों में प्याज 60 से 70 रुपये प्रति किलो तक बिक रही है। दूसरी ओर सरकारी बफर स्टॉक से प्याज 35 रुपये प्रति किलो की दर पर उपलब्ध कराने की कोशिश की जा रही है। दोनों कीमतों के बीच बड़ा अंतर होने के बावजूद सरकारी प्याज हर बाजार और हर उपभोक्ता तक पर्याप्त मात्रा में नहीं पहुंच पा रही है।

    16 सितंबर को देशभर में प्याज का औसत खुदरा भाव 53.84 रुपये प्रति किलो दर्ज किया गया। एक साल पहले इसी दिन औसत खुदरा कीमत 27.71 रुपये प्रति किलो थी। इस तरह एक साल के दौरान औसत खुदरा भाव में करीब 94 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। थोक बाजार में भी कीमतों पर दबाव बना हुआ है। 16 सितंबर को प्याज का औसत थोक भाव 45.65 रुपये प्रति किलो रहा।

    बढ़ती कीमतों को नियंत्रित करने के लिए सरकार ने 24 अगस्त से बफर स्टॉक से प्याज बाजार में उतारना शुरू किया है। प्राइस स्टेबलाइजेशन फंड के तहत रखे गए इस स्टॉक की बिक्री 35 रुपये प्रति किलो की दर से की जा रही है। इसके लिए नेशनल कोऑपरेटिव कंज्यूमर फेडरेशन, नेशनल एग्रीकल्चरल कोऑपरेटिव मार्केटिंग फेडरेशन, केंद्रीय भंडार और मोबाइल वैन का इस्तेमाल किया जा रहा है।

    हालांकि, सरकारी बिक्री के बावजूद प्याज की उपलब्धता को लेकर चुनौती बनी हुई है। उत्पादक राज्यों से बड़े खपत केंद्रों तक बफर स्टॉक पहुंचाना आसान नहीं है। यही वजह है कि सरकारी बिक्री में प्याज अपेक्षाकृत कम कीमत पर उपलब्ध है, जबकि खुले बाजार में उपभोक्ताओं को काफी अधिक रकम चुकानी पड़ रही है।

    कीमतों पर नियंत्रण के लिए बफर स्टॉक की आपूर्ति को 19 शहरों तक बढ़ाया गया है। उत्पादक क्षेत्रों से बड़े शहरों तक प्याज पहुंचाने के लिए ‘कांदा एक्सप्रेस’, रेलवे रैक और 30 से अधिक ट्रकों का इस्तेमाल किया जा रहा है। सरकारी स्तर पर माना गया है कि कुछ बाजारों में बफर प्याज की बिक्री का असर दिखाई देने लगा है। हालांकि, खुदरा कीमतों में व्यापक राहत के लिए सरकारी स्टॉक की पहुंच और उपलब्धता महत्वपूर्ण बनी हुई है।

    प्याज की कीमतों में मौसमी उतार-चढ़ाव का भी असर पड़ता है। रबी सीजन की प्याज का स्टॉक धीरे-धीरे कम होने के बाद अगली खरीफ फसल की आवक का इंतजार रहता है। रबी और खरीफ फसल के बीच का समय प्याज के लिए अपेक्षाकृत कम आपूर्ति वाला दौर माना जाता है। इसी अवधि में बाजार में बफर स्टॉक से प्याज उतारकर आपूर्ति बढ़ाने की व्यवस्था की जाती है।

    इस बार खरीफ प्याज की बुआई में देरी ने भी चिंता बढ़ाई है। महाराष्ट्र के नासिक में बुआई करीब 15 दिन पीछे चलने की जानकारी सामने आई थी। कर्नाटक के चित्रदुर्गा-चलकेरे क्षेत्र में भी बुआई सामान्य स्तर की करीब 60 प्रतिशत बताई गई थी। इससे नई फसल की मंडियों में आवक प्रभावित होने की आशंका बनी हुई है।

    मौसम की स्थिति और बाजार की गतिविधियों का असर भी कीमतों पर पड़ता है। मॉनसून में देरी और उससे जुड़े हालात को प्याज की स्थिति से जोड़ा गया है। कुछ कारोबारियों की सट्टा खरीदारी का असर बाजार की धारणा पर पड़ने की बात भी सामने आई है। हालांकि, देश में कुल उत्पादन के स्तर पर बड़ी कमी नहीं बताई गई है।

    2025-26 में प्याज का उत्पादन 307.37 लाख टन रहने का अनुमान है, जबकि पिछले साल यह 307.67 लाख टन था। सरकार ने 2026-27 के लिए 2 लाख टन रबी प्याज बफर के रूप में खरीदने का लक्ष्य रखा है। इसमें करीब 1.21 लाख टन की खरीद हो चुकी थी। बफर खरीद का भाव भी बढ़ाकर 2,125 रुपये प्रति क्विंटल किया गया है। इसका उद्देश्य कम आपूर्ति वाले समय में बाजार में प्याज की उपलब्धता बढ़ाकर कीमतों पर नियंत्रण रखना है।

  • आगर-मालवा में दूध के दाम बढ़ाने की मांग पर अनिश्चितकालीन हड़ताल, विक्रेताओं ने सड़क पर बहाया कई लीटर दूध

    आगर-मालवा में दूध के दाम बढ़ाने की मांग पर अनिश्चितकालीन हड़ताल, विक्रेताओं ने सड़क पर बहाया कई लीटर दूध

    मध्य प्रदेश: के आगर-मालवा जिले के सुसनेर में दूध के दाम बढ़ाने की मांग को लेकर दूध विक्रेताओं ने अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू कर दी है। हड़ताल के कारण क्षेत्र में दूध की सप्लाई प्रभावित होने लगी है और कई डेयरियां बंद बताई जा रही हैं। दूध विक्रेता मौजूदा कीमतों को लेकर असंतोष जताते हुए भाव बढ़ाने की मांग पर अड़े हुए हैं।

    दूध विक्रेताओं की मुख्य मांग दूध का भाव बढ़ाकर 100 रुपये प्रति लीटर करने की है। इसके साथ ही फैट का दाम 12 रुपये करने की मांग भी रखी गई है। विक्रेताओं का कहना है कि मौजूदा कीमतों पर दूध का कारोबार करना उनके लिए मुश्किल हो रहा है। दूध उत्पादन और उसे बाजार तक पहुंचाने से जुड़ी लागत बढ़ने का हवाला देते हुए वे कीमतों में बढ़ोतरी की मांग कर रहे हैं।

    हड़ताल के बीच सुसनेर में विरोध-प्रदर्शन भी देखने को मिला। ग्रामीण क्षेत्रों से दूध लेकर सुसनेर की ओर आ रहे पिकअप वाहनों को रोककर प्रदर्शनकारियों ने दूध सड़क पर बहा दिया। विरोध के दौरान सड़क पर काफी मात्रा में दूध फैल गया। इस घटना के वीडियो भी सामने आए हैं, जिनमें वाहनों को रोककर दूध सड़क पर बहाते हुए लोग दिखाई दे रहे हैं।

    विरोध के दौरान दूध विक्रेताओं और दूध लेकर आने वाले वाहनों को रोकने की बात सामने आई है। प्रदर्शनकारियों ने अपनी मांगों के समर्थन में दूध सड़क पर बहाकर विरोध दर्ज कराया। हालांकि, इस दौरान किसी अप्रिय घटना की जानकारी सामने नहीं आई है।

    सुसनेर में एक होटल से पैकेट और अन्य दूध भी प्रदर्शनकारियों द्वारा सड़क पर बहाए जाने का दावा किया गया है। इस घटना से जुड़े वीडियो भी सामने आए हैं। दूध की बर्बादी के जरिए प्रदर्शनकारियों ने अपनी मांगों को लेकर नाराजगी जताई।

    दूध विक्रेताओं का कहना है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं, तब तक हड़ताल जारी रहेगी। अनिश्चितकालीन हड़ताल के कारण सुसनेर क्षेत्र के अलावा आगर-मालवा के ग्रामीण इलाकों में भी दूध की सप्लाई प्रभावित होने लगी है। कई डेयरियों के बंद रहने से स्थानीय स्तर पर दूध की उपलब्धता पर असर पड़ रहा है।

    विक्रेताओं की मांग में दो प्रमुख बिंदु शामिल हैं। पहला, दूध का भाव 100 रुपये प्रति लीटर किया जाए और दूसरा, फैट का दाम बढ़ाकर 12 रुपये किया जाए। उनका कहना है कि वर्तमान कीमतों पर दूध का कारोबार चलाना मुश्किल हो रहा है और बढ़ती लागत के कारण उन्हें आर्थिक दबाव का सामना करना पड़ रहा है।

    फिलहाल हड़ताल को समाप्त करने को लेकर कोई समाधान सामने नहीं आया है। दूध विक्रेताओं ने अपनी मांगें पूरी होने तक आंदोलन जारी रखने की बात कही है। ऐसे में हड़ताल कितने समय तक चलती है और प्रशासन तथा संबंधित पक्षों के स्तर पर इस मुद्दे को लेकर क्या बातचीत होती है, यह आगे महत्वपूर्ण रहेगा।

    यदि हड़ताल लंबी चलती है, तो सुसनेर और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में दूध की सप्लाई और उपलब्धता पर इसका प्रभाव बढ़ सकता है। फिलहाल दूध विक्रेता 100 रुपये प्रति लीटर कीमत और 12 रुपये फैट के दाम की मांग को लेकर अनिश्चितकालीन हड़ताल पर हैं।

  • सोने और चांदी की कीमतों में तेज उछाल, निवेशकों की नजर अमेरिकी फेड के ब्याज दर संबंधी फैसले पर टिकी

    सोने और चांदी की कीमतों में तेज उछाल, निवेशकों की नजर अमेरिकी फेड के ब्याज दर संबंधी फैसले पर टिकी

    नई दिल्ली ।सोने और चांदी की कीमतों में बुधवार को तेजी देखने को मिली। घरेलू वायदा बाजार में दोनों कीमती धातुओं के भाव में बढ़त दर्ज की गई। सोने की कीमत में करीब 0.85 प्रतिशत तक की तेजी रही, जबकि चांदी का भाव शुरुआती कारोबार में 1.57 प्रतिशत तक चढ़ गया। अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी सोने और चांदी की कीमतों में मजबूती बनी हुई है। इस बीच निवेशकों की नजर अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों को लेकर होने वाली बैठक के फैसले पर टिकी है।

    मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज पर 5 अक्टूबर 2026 का सोना वायदा अनुबंध बुधवार को 1,50,809 रुपये प्रति 10 ग्राम के पिछले बंद भाव की तुलना में 1,291 रुपये यानी 0.85 प्रतिशत की बढ़त के साथ 1,52,100 रुपये प्रति 10 ग्राम पर खुला। दोपहर 12 बजे तक सोना 953 रुपये यानी 0.63 प्रतिशत की तेजी के साथ 1,51,762 रुपये प्रति 10 ग्राम पर कारोबार कर रहा था।

    दिन के कारोबार में अब तक सोने ने 1,51,450 रुपये प्रति 10 ग्राम का निचला स्तर और 1,52,100 रुपये का ऊपरी स्तर छुआ। इससे संकेत मिलता है कि शुरुआती बढ़त के बाद सोने की कीमत सीमित दायरे में कारोबार करती रही।

    चांदी में भी मजबूत तेजी दर्ज की गई। एमसीएक्स पर 4 दिसंबर 2026 का चांदी वायदा अनुबंध पिछले बंद भाव 2,32,118 रुपये प्रति किलोग्राम की तुलना में 3,667 रुपये यानी 1.57 प्रतिशत की बढ़त के साथ 2,35,785 रुपये प्रति किलोग्राम पर खुला। दोपहर 12 बजे चांदी 3,250 रुपये यानी 1.40 प्रतिशत की तेजी के साथ 2,35,988 रुपये प्रति किलोग्राम पर कारोबार कर रही थी।

    कारोबार के दौरान चांदी ने अब तक 2,34,540 रुपये प्रति किलोग्राम का न्यूनतम स्तर और 2,35,988 रुपये प्रति किलोग्राम का उच्चतम स्तर छुआ। इस तरह घरेलू वायदा बाजार में सोने के साथ चांदी में भी तेजी का रुख बना रहा।

    अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी कीमती धातुओं की कीमतों में बढ़त देखने को मिली। कॉमेक्स पर सोना 0.77 प्रतिशत की तेजी के साथ 4,366 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार कर रहा था। वहीं चांदी की कीमत 1.96 प्रतिशत बढ़कर 65 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गई।

    बाजार की नजर अब अमेरिकी फेडरल रिजर्व की दो दिवसीय बैठक के फैसले पर है। ब्याज दरों को लेकर बैठक के फैसलों की घोषणा बुधवार देर शाम की जाएगी। निवेशक इस फैसले का इंतजार कर रहे हैं, क्योंकि ब्याज दरों से जुड़ी जानकारी का असर सोने और चांदी समेत वैश्विक वित्तीय बाजारों पर पड़ सकता है।

    यह बैठक ऐसे समय हो रही है, जब मध्य पूर्व में तनाव के बीच कच्चे तेल की कीमत करीब चार महीनों के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई है। इसी अवधि में अमेरिकी बॉन्ड यील्ड भी 5 प्रतिशत से ऊपर जा चुकी है। इन परिस्थितियों के बीच फेड के फैसले पर निवेशकों की नजर बनी हुई है।

  • थोक महंगाई अगस्त में बढ़कर 9.92% पहुंची, पेट्रोलियम उत्पादों और खाद्य कीमतों ने बढ़ाया थोक बाजार का दबाव

    थोक महंगाई अगस्त में बढ़कर 9.92% पहुंची, पेट्रोलियम उत्पादों और खाद्य कीमतों ने बढ़ाया थोक बाजार का दबाव


    नई दिल्ली ।
    वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय ने 14 सितंबर को अगस्त 2026 के थोक मूल्य सूचकांक यानी WPI के आंकड़े जारी किए। आंकड़ों के मुताबिक अगस्त में थोक महंगाई दर बढ़कर 9.92 प्रतिशत हो गई, जबकि जुलाई 2026 में यह 9.78 प्रतिशत थी। इस तरह थोक महंगाई लगातार चौथे महीने करीब 10 प्रतिशत के स्तर पर बनी हुई है। हालांकि WPI का 9.92 प्रतिशत होना यह नहीं बताता कि बाजार में हर सामान की कीमत इतनी ही बढ़ गई है।

    WPI यानी थोक मूल्य सूचकांक उस कीमत में बदलाव को मापता है, जिस पर सामान थोक बाजार में कारोबार करता है। यह मुख्य रूप से वस्तुओं की कीमतों पर आधारित होता है। इसके विपरीत खुदरा स्तर पर उपभोक्ताओं द्वारा चुकाई जाने वाली कीमतों का आकलन CPI के जरिए किया जाता है। WPI में सेवाओं को शामिल नहीं किया जाता। स्कूल फीस, डॉक्टर की फीस, किराया और मोबाइल रिचार्ज जैसी सेवाएं इसके दायरे में नहीं आतीं।

    अगस्त में WPI महंगाई 9.92 प्रतिशत रही। इसका अर्थ यह है कि अगस्त 2025 की तुलना में अगस्त 2026 में WPI में शामिल वस्तुओं की कीमतों में औसतन 9.92 प्रतिशत की वृद्धि हुई। इसका मतलब यह नहीं है कि हर वस्तु की कीमत 9.92 प्रतिशत बढ़ी है। अलग-अलग वस्तुओं की कीमतों में वृद्धि अलग-अलग रही है और कुछ श्रेणियों में कीमतें कम भी हुई हैं।

    अगस्त की थोक महंगाई बढ़ाने में पेट्रोलियम से जुड़ी कीमतों की बड़ी भूमिका रही। पावर पेट्रोल श्रेणी में महंगाई जुलाई के 20.05 प्रतिशत से बढ़कर अगस्त में 22.93 प्रतिशत हो गई। पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतों में पिछले साल की तुलना में 38.48 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। वहीं कच्चे पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस की कीमतों में 34.41 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई।

    खाद्य वस्तुओं ने भी थोक महंगाई पर दबाव बढ़ाया। अगस्त में फूड इंडेक्स की महंगाई 7.05 प्रतिशत रही, जबकि जुलाई में यह 6.65 प्रतिशत थी। तैयार खाद्य उत्पादों की महंगाई भी अगस्त में 9.65 प्रतिशत रही। इससे खाद्य वस्तुओं के साथ-साथ पैक्ड और प्रोसेस्ड उत्पादों की कीमतों पर भी दबाव दिखाई दिया।

    हालांकि सभी श्रेणियों में कीमतें नहीं बढ़ीं। प्राइमरी आर्टिकल्स की महंगाई जुलाई के 8.52 प्रतिशत से घटकर अगस्त में 7.76 प्रतिशत हो गई। नॉन-फूड आर्टिकल की महंगाई 17.66 प्रतिशत से घटकर 14.79 प्रतिशत और खनिजों की महंगाई 13.28 प्रतिशत से घटकर 8.24 प्रतिशत रही। बिजली की महंगाई -1.73 प्रतिशत और कंप्यूटर एवं इलेक्ट्रॉनिक सामान की महंगाई -0.47 प्रतिशत रही।

    मार्च 2026 में WPI महंगाई 3.98 प्रतिशत थी। इसके बाद अप्रैल में 8.36 प्रतिशत, मई में 9.88 प्रतिशत, जून में 9.97 प्रतिशत और अगस्त में 9.92 प्रतिशत रही। इस बढ़ोतरी में बेस इफेक्ट की भी भूमिका बताई गई है। पिछले साल अप्रैल से अगस्त के बीच WPI महंगाई औसतन -0.20 प्रतिशत थी, जबकि इस साल इसी अवधि में औसत महंगाई करीब 9.56 प्रतिशत रही।

    WPI का असर उपभोक्ता की जेब पर सीधे नहीं पड़ता, लेकिन थोक लागत बढ़ने से कंपनियों पर लागत का दबाव बढ़ सकता है। पेट्रोल, स्टील, केमिकल और अन्य कच्चे माल की कीमतें बढ़ने पर कंपनियां कुछ समय तक लागत खुद वहन कर सकती हैं। लगातार दबाव रहने पर कुछ उत्पादों की खुदरा कीमतों में भी बढ़ोतरी हो सकती है।

    अगस्त का WPI आंकड़ा अभी अस्थायी है और 84.4 प्रतिशत महत्व-आधारित उत्तर के आधार पर तैयार हुआ है। आगे मिलने वाले आंकड़ों के साथ इसमें बदलाव हो सकता है। सितंबर के WPI आंकड़े 14 अक्टूबर 2026 को जारी होंगे, जिससे पता चलेगा कि पेट्रोलियम और अन्य कच्चे माल से बना कीमतों का दबाव आगे भी बना रहता है या इसमें कमी आती है।

  • Crude $100 पार: पेट्रोल-डीजल महंगे होने का बढ़ा खतरा, तेल कंपनियों पर बढ़ रहा घाटे का बोझ

    Crude $100 पार: पेट्रोल-डीजल महंगे होने का बढ़ा खतरा, तेल कंपनियों पर बढ़ रहा घाटे का बोझ


    नई दिल्ली। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में एक बार फिर तेज उछाल ने भारत की चिंता बढ़ा दी है। बेंचमार्क Brent Crude 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया है। भारतीय बास्केट में भी बुधवार को कच्चे तेल की कीमत 108 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर रही। सितंबर का औसत भाव भी 100 डॉलर के पार निकल गया है। हालांकि इसका तत्काल असर घरेलू बाजार में पेट्रोल और डीजल की कीमतों पर नहीं दिखा है, लेकिन सरकारी तेल कंपनियों पर लागत का दबाव लगातार बढ़ रहा है।

    पेट्रोल-डीजल बेचने में कंपनियों को घाटा

    महंगे अंतरराष्ट्रीय क्रूड के बावजूद सरकारी तेल कंपनियां यानी OMCs घरेलू बाजार में पेट्रोल-डीजल की सप्लाई जारी रखे हुए हैं। ICRA के मुताबिक सितंबर में अब तक के औसत क्रूड भाव के आधार पर कंपनियों को पेट्रोल पर करीब ₹5 प्रति लीटर और डीजल पर करीब ₹23 प्रति लीटर का नुकसान हो रहा है।

    यानी अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की लागत बढ़ने के बावजूद घरेलू बाजार में ईंधन अपेक्षाकृत कम कीमत पर बिक रहा है। इससे कंपनियों के मार्जिन पर सीधा दबाव पड़ रहा है।

    LPG पर भी करीब ₹200 की अंडर रिकवरी

    OMCs के लिए सिर्फ पेट्रोल-डीजल ही चुनौती नहीं हैं। घरेलू LPG पर भी कंपनियों को नुकसान उठाना पड़ रहा है। ICRA के अनुसार एक LPG सिलिंडर पर करीब ₹200 की अंडर रिकवरी हो रही है।

    अगर कच्चे तेल की कीमतें लंबे समय तक 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बनी रहती हैं तो कंपनियों की कमाई और प्रॉफिटेबिलिटी पर दबाव और बढ़ सकता है। ऐसे में भविष्य में ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी का रास्ता खुल सकता है।

    अभी तुरंत दाम बढ़ने की गारंटी नहीं

    फिलहाल पेट्रोल-डीजल के दाम तुरंत बढ़ेंगे, यह कहना जल्दबाजी होगी। घरेलू ईंधन की कीमतें केवल अंतरराष्ट्रीय क्रूड के भाव से तय नहीं होतीं। सरकार की प्राइसिंग पॉलिसी, टैक्स और तेल कंपनियों के मार्केटिंग मार्जिन की भी इसमें अहम भूमिका होती है।

    मई में सरकार ने चार किस्तों में पेट्रोल की कीमत कुल ₹7.35 प्रति लीटर और डीजल की कीमत ₹7.53 प्रति लीटर बढ़ाई थी। इसके बाद भी अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड की कीमतों में लगातार उतार-चढ़ाव रहा है और कंपनियों ने तत्काल उसी अनुपात में घरेलू कीमतों में बदलाव नहीं किया।

    हालांकि, अगर कच्चा तेल लंबे समय तक 100 डॉलर के ऊपर रहता है और OMCs का घाटा लगातार बढ़ता है, तो पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ाने का दबाव बन सकता है।

    भारत पर क्यों बढ़ेगा दबाव?

    भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरत का करीब 90% हिस्सा आयात करता है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमत बढ़ने का सीधा असर देश के आयात बिल पर पड़ता है।

    आंकड़ों के मुताबिक वित्त वर्ष 2026-27 में अप्रैल से जुलाई के दौरान भारत का क्रूड आयात बिल 56.5% बढ़कर 63.4 अरब डॉलर पहुंच गया। खास बात यह रही कि इस दौरान कच्चे तेल के आयात की मात्रा लगभग स्थिर रही। यानी आयात बिल में हुई बड़ी बढ़ोतरी का प्रमुख कारण तेल की ऊंची कीमतें रहीं।

    अगर क्रूड की कीमतें आगे भी ऊंची बनी रहती हैं तो भारत का ट्रेड डेफिसिट बढ़ सकता है। इससे रुपए पर दबाव आने की आशंका रहेगी और आगे चलकर महंगाई का जोखिम भी बढ़ सकता है।

  • सोने के भाव में लगातार दूसरे दिन बड़ी गिरावट, 2150 रुपये टूटा रेट, चांदी 600 रुपये महंगी

    सोने के भाव में लगातार दूसरे दिन बड़ी गिरावट, 2150 रुपये टूटा रेट, चांदी 600 रुपये महंगी

    नई दिल्ली । सोने की कीमतों में गिरावट का सिलसिला लगातार दूसरे दिन भी जारी रहा। मंगलवार को राष्ट्रीय राजधानी के सर्राफा बाजार में सोने के भाव में 2,150 रुपये की बड़ी कमी दर्ज की गई। कमजोर वैश्विक रुख के बीच 99.9 फीसदी शुद्धता वाला सोना घटकर 1,58,100 रुपये प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया। दूसरी ओर, दो कारोबारी सत्र तक स्थिर रहने के बाद चांदी के भाव में एक बार फिर तेजी देखने को मिली। चांदी 600 रुपये महंगी होकर 2,41,100 रुपये प्रति किलोग्राम पर पहुंच गई।

    सोने की कीमत में आई इस गिरावट के बाद 99.9 फीसदी शुद्धता वाले सोने का भाव 2,150 रुपये घट गया। ऑल इंडिया सर्राफा एसोसिएशन के मुताबिक, सोना अब 1,58,100 रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर आ गया है। इससे पिछले कारोबारी सत्र में 99.9 फीसदी शुद्धता वाले सोने की कीमत 1,60,250 रुपये प्रति 10 ग्राम पर बंद हुई थी। इस तरह लगातार दूसरे कारोबारी दिन सोने के दाम में गिरावट दर्ज की गई है।

    वहीं, चांदी की कीमतों ने सोने के मुकाबले अलग रुख दिखाया। पिछले दो कारोबारी सत्रों में चांदी का भाव स्थिर रहने के बाद मंगलवार को इसमें 600 रुपये की बढ़ोतरी हुई। इसके साथ ही चांदी की कीमत बढ़कर 2,41,100 रुपये प्रति किलोग्राम हो गई। इस तरह एक तरफ सोने की कीमत लगातार दूसरे दिन नीचे आई, तो दूसरी तरफ चांदी ने दो सत्र की स्थिरता के बाद फिर तेजी दर्ज की।

    सोने और चांदी की कीमतों में हुए इस बदलाव के पीछे अंतरराष्ट्रीय बाजारों के रुख को प्रमुख वजह बताया गया है। वैश्विक बाजारों में कमजोर रुख का असर सोने की कीमतों पर पड़ा है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की चाल का प्रभाव घरेलू बाजार में भी दिखाई देता है। इसी के चलते मंगलवार को दिल्ली के सर्राफा बाजार में सोने के भाव में तेज गिरावट देखने को मिली।

    हालांकि, चांदी ने इस दौरान अलग दिशा में कारोबार किया। दो कारोबारी सत्र तक कीमत स्थिर रहने के बाद मंगलवार को चांदी के भाव में 600 रुपये की तेजी आई। इससे इसकी कीमत 2,41,100 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच गई। यानी मंगलवार के कारोबार में सोने और चांदी के दाम में विपरीत रुख देखने को मिला।

    अगर आज सोना और चांदी खरीदने की योजना है, तो सोने की कीमत में लगातार दूसरे दिन आई गिरावट खरीदारों के लिए राहत वाली खबर है। हालांकि, सोने का भाव अभी भी 1.58 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के ऊंचे स्तर पर बना हुआ है। ऐसे में शादी या तीज-त्योहार के लिए सोना खरीदने वाले लोग अपने बजट और मौजूदा रेट को ध्यान में रखते हुए खरीदारी का फैसला कर सकते हैं। दूसरी ओर, चांदी के भाव में 600 रुपये की बढ़ोतरी हुई है, जिससे दोनों कीमती धातुओं के आज के रेट में अलग-अलग बदलाव देखने को मिला है।

  • इस हफ्ते सोने के भाव में 4,694 रुपये और चांदी में 8,436 रुपये की बड़ी गिरावट, निवेशकों को राहत

    इस हफ्ते सोने के भाव में 4,694 रुपये और चांदी में 8,436 रुपये की बड़ी गिरावट, निवेशकों को राहत

    नई दिल्ली । सोने और चांदी की कीमतों में इस सप्ताह बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। घरेलू सर्राफा बाजार में 24 कैरेट सोने का भाव 4,694 रुपये घटकर 1,54,884 रुपये प्रति 10 ग्राम रह गया। सप्ताह की शुरुआत में इसकी कीमत 1,59,578 रुपये प्रति 10 ग्राम थी। इस तरह कुछ ही कारोबारी सत्रों में सोने के भाव में करीब 4,700 रुपये की कमी दर्ज की गई है।

    इसी तरह 22 कैरेट सोने की कीमत भी कम हुई है। सप्ताह की शुरुआत में 1,46,173 रुपये प्रति 10 ग्राम के मुकाबले इसका भाव घटकर 1,41,874 रुपये प्रति 10 ग्राम रह गया। वहीं 18 कैरेट सोने की कीमत 1,19,684 रुपये से घटकर 1,16,163 रुपये प्रति 10 ग्राम हो गई। यानी अलग-अलग शुद्धता वाले सोने के भाव में भी उल्लेखनीय गिरावट देखने को मिली है।

    सप्ताह के दौरान 24 कैरेट सोने का सबसे ऊंचा भाव 31 अगस्त को शाम के सत्र में दर्ज किया गया। उस समय कीमत 1,55,835 रुपये प्रति 10 ग्राम थी। इसके बाद बाजार में गिरावट का दौर देखने को मिला। 2 सितंबर को शाम के सत्र में सोने का भाव इस सप्ताह के निचले स्तर 1,51,184 रुपये प्रति 10 ग्राम तक पहुंच गया।

    चांदी की कीमत में भी इस सप्ताह सोने की तरह बड़ी गिरावट रही। चांदी का भाव 8,436 रुपये घटकर 2,35,456 रुपये प्रति किलोग्राम रह गया। सप्ताह की शुरुआत में इसकी कीमत 2,43,892 रुपये प्रति किलोग्राम थी। इस तरह एक सप्ताह के भीतर चांदी के भाव में 8,000 रुपये से अधिक की कमी आई है।

    चांदी का सप्ताह का उच्चतम भाव 31 अगस्त को शाम के सत्र में 2,37,199 रुपये प्रति किलोग्राम दर्ज किया गया। इसके बाद कीमतों में उतार-चढ़ाव रहा और 3 सितंबर को सुबह के सत्र में चांदी का भाव 2,28,360 रुपये प्रति किलोग्राम के निचले स्तर तक पहुंच गया। बाद में इसमें कुछ सुधार देखने को मिला।

    घरेलू बाजार में सोने और चांदी की कीमतों में उतार-चढ़ाव को कई अंतरराष्ट्रीय कारक प्रभावित करते हैं। सप्ताह के दौरान वैश्विक बाजार में भी कीमती धातुओं की कीमतों पर दबाव देखने को मिला। अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने का भाव करीब 4,500 डॉलर प्रति औंस और चांदी करीब 66 डॉलर प्रति औंस के स्तर पर रही।

    बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक, अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव का असर वैश्विक वित्तीय बाजारों पर पड़ा है। तनाव बढ़ने के बीच डॉलर, बॉन्ड यील्ड और कच्चे तेल की कीमतों में मजबूती आई, जिसका असर सोने और चांदी जैसी कीमती धातुओं पर पड़ा। आम तौर पर डॉलर और बॉन्ड यील्ड में मजबूती आने पर सोने की मांग और कीमतों पर दबाव बन सकता है।

    सर्राफा बाजार में कीमतों की निगरानी करने वाले इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन की ओर से सोने और चांदी के भाव दिन में दो बार जारी किए जाते हैं। सुबह और शाम के सत्र में जारी होने वाली कीमतों से बाजार में चल रहे उतार-चढ़ाव का पता चलता है। हालांकि आभूषण खरीदने वाले ग्राहकों के लिए वास्तविक कीमत शुद्धता, मेकिंग चार्ज, टैक्स और अन्य शुल्क के कारण अलग हो सकती है।

  • ईरान-अमेरिका जंग में तेजी के बीच कच्चे तेल के दामों में भारी इजाफा

    ईरान-अमेरिका जंग में तेजी के बीच कच्चे तेल के दामों में भारी इजाफा


    तेहरान।
    पेट्रोल-डीजल (Petrol and Diesel) के सस्ता होने की उम्मीद कर रहे लोगों के लिए बुरी खबर है। ईरान और अमेरिका में जंग (Iran -America War) तेज हो गई है। मिसाइलों की बारिश ने क्रूड की कीमतों (Crude oil Prices) में आग लगा दी है। अब इंटरनेशन बेंचमार्क (International benchmark) ब्रेंट क्रूड तेजी से 100 डॉलर प्रति बैरल की ओर भाग रहा है। ऐसे में दुनिया भर में एक बार फिर ऊर्जा संकट के और बढ़ने के खतरे बढ़ गए हैं।

    बुधवार सुबह कारोबार शुरू होते ही कच्चे तेल की कीमतों में करीब 1.5% से अधिक की बढ़ोतरी हुई। यह उछाल मंगलवार के तेज उछाल के बाद आया है, जब दोनों तरह के तेल 4 डॉलर से ज्यादा महंगे हो गए थे। ब्लूमबर्ग के अनुसार वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) क्रूड का दाम सुबह 7 बजे के 1.61 डॉलर प्रति बैरल चढ़कर 91.83 डॉलर पर कारोबार कर रहा था और अंतरराष्ट्रीय बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड 1.91 डॉलर प्रति बैरल चढ़कर 96.56 डॉलर पर था।


    अमेरिका-ईरान के बीच रातभर मिसाइलों की बारिश

    अमेरिका ने ईरान के ठिकानों पर हवाई हमले किए, जिसके जवाब में ईरान ने पलटवार किया। दोनों देशों के बीच हफ्तों में यह सबसे गंभीर झड़प है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड के मुताबिक, ये हमले ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) की उन हालिया हरकतों के जवाब में किए गए, जिसमें उन्होंने होर्मुज स्ट्रेट में व्यापारिक जहाजों और अमेरिकी सैनिकों पर हमले की कोशिश की थी।


    होर्मुज पर संकट गहरा

    ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने चेतावनी दी है कि अमेरिकी हमलों से होर्मुज के रास्ते और भी ज्यादा बंद हो जाएंगे। गौरतलब है कि इसी रास्ते से दुनिया की कुल पांचवीं तेल खपत गुजरती थी, लेकिन अब ईरान ने इसे व्यावसायिक जहाजों के लिए प्रभावी रूप से बंद कर दिया है।


    ईरान की जवाबी कार्रवाई और नए हमले

    IRGC ने जॉर्डन में अमेरिकी सैन्य अड्डे पर बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं और दावा किया कि बड़ी संख्या में अमेरिकी सैनिक मारे गए। ईरानी मीडिया के मुताबिक, बहरीन में अमेरिकी बेस पर बड़े पैमाने पर ड्रोन हमला किया गया। जॉर्डन की सेना ने 13 में से 10 मिसाइलें हवा में ही नष्ट कर दीं। अमेरिकी अधिकारियों ने अभी तक किसी भी नुकसान की पुष्टि नहीं की है। कुवैत ने भी दुश्मन ड्रोन गतिविधि के खिलाफ अपनी सेना तैनात कर दी है।


    टैंकरों पर हमले

    पिछले सप्ताहांत (जुलाई के बाद पहली बार) झड़पें तेज हुईं। सोमवार को होर्मुज से निकलते दो टैंकरों पर भी हमले हुए, जिससे तेल आपूर्ति बुरी तरह प्रभावित हुई है और कारोबारी वैकल्पिक रास्ते तलाशने पर मजबूर हैं।

  • अंडे की कीमतों में 35 से 40 प्रतिशत बढ़ोतरी, पोल्ट्री फीड महंगा होने से मक्का और इथेनॉल की बढ़ती मांग बनी अहम वजह

    अंडे की कीमतों में 35 से 40 प्रतिशत बढ़ोतरी, पोल्ट्री फीड महंगा होने से मक्का और इथेनॉल की बढ़ती मांग बनी अहम वजह

    नई दिल्ली ।अंडों की कीमतों में पिछले एक साल के दौरान तेज बढ़ोतरी देखने को मिली है। पोल्ट्री फार्म से निकलने वाले एक अंडे की कीमत करीब 7 रुपये तक पहुंच गई है, जबकि कई खुदरा बाजारों में उपभोक्ताओं को इसके लिए 8.50 से 9 रुपये तक भुगतान करना पड़ रहा है। कीमतों में करीब 35 से 40 प्रतिशत की बढ़ोतरी ने रोजमर्रा के खाद्य खर्च पर दबाव बढ़ाया है।

    अंडों की कीमत बढ़ने के पीछे पोल्ट्री फीड की बढ़ती लागत को एक महत्वपूर्ण कारण माना जा रहा है। मुर्गियों के चारे में मक्का प्रमुख कच्चे माल के रूप में इस्तेमाल होता है। इसके अलावा सोयाबीन और दूसरे फीड इनपुट की कीमतों में बदलाव भी पोल्ट्री उत्पादन की कुल लागत को प्रभावित करता है।

    मक्के की मांग इस समय केवल पोल्ट्री उद्योग तक सीमित नहीं है। भारत में पेट्रोल में इथेनॉल मिश्रण बढ़ाने की नीति के तहत अनाज आधारित इथेनॉल उत्पादन का महत्व लगातार बढ़ा है। इस प्रक्रिया में मक्का प्रमुख फीडस्टॉक के रूप में तेजी से इस्तेमाल किया जा रहा है।

    इथेनॉल क्षेत्र में मक्के की बढ़ती मांग का सीधा असर इसकी उपलब्धता और कीमतों पर पड़ सकता है। जब एक ही कृषि उत्पाद की मांग अलग-अलग क्षेत्रों से बढ़ती है, तो बाजार में उसकी कीमत पर दबाव बनने की संभावना रहती है। इसका असर उन उद्योगों पर भी पड़ता है जो उसी कच्चे माल पर निर्भर हैं।

    पोल्ट्री उद्योग के लिए मक्का फीड का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसलिए मक्के की कीमत में बढ़ोतरी होने पर चारे की लागत बढ़ सकती है। चारे की लागत बढ़ने के बाद उसका प्रभाव मुर्गियों के पालन, उत्पादन लागत और अंततः अंडों के बाजार मूल्य पर दिखाई देता है।

    हालांकि अंडों की मौजूदा महंगाई को केवल इथेनॉल की बढ़ती मांग से जोड़ना पूरी तस्वीर नहीं होगी। मक्के की कीमत पर पोल्ट्री फीड की मांग, मौसम, उत्पादन में बदलाव और दूसरे कृषि इनपुट की लागत का भी प्रभाव पड़ता है। मुर्गियों की उत्पादकता और बाजार में अंडों की उपलब्धता भी कीमत तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

    आने वाले महीनों में मांग का मौसमी असर भी महत्वपूर्ण हो सकता है। सर्दियों के दौरान अंडों की खपत आम तौर पर बढ़ जाती है। ऐसे में यदि पोल्ट्री फीड की लागत ऊंची बनी रहती है और बाजार में आपूर्ति मांग के अनुरूप नहीं रहती, तो अंडों की कीमतों पर अतिरिक्त दबाव बन सकता है।

    सरकार की ओर से इथेनॉल उत्पादन के लिए मक्के की उपलब्धता बढ़ाने और उत्पादन को प्रोत्साहित करने पर जोर दिया जा रहा है। इथेनॉल उत्पादन के लिए मक्के के इस्तेमाल में हुई वृद्धि से इस फसल की औद्योगिक मांग का महत्व बढ़ा है। ESY 2025-26 में इथेनॉल उत्पादन के लिए करीब 125.78 लाख टन मक्के के इस्तेमाल का अनुमान इसी बढ़ती मांग को दर्शाता है।

    मक्के की बढ़ती औद्योगिक मांग और पोल्ट्री क्षेत्र की जरूरतों के बीच संतुलन महत्वपूर्ण हो गया है। यदि मक्के की उपलब्धता बढ़ती है और उत्पादन लागत नियंत्रित रहती है, तो पोल्ट्री उद्योग पर दबाव कम हो सकता है। वहीं, फीड लागत ऊंची रहने पर इसका असर अंडों की कीमतों में आगे भी दिखाई दे सकता है।

    फिलहाल अंडों की कीमतों में हुई बढ़ोतरी उपभोक्ताओं के साथ पोल्ट्री कारोबार के लिए भी चुनौती बनी हुई है। आने वाले समय में मक्का उत्पादन, फीड लागत, इथेनॉल की मांग, अंडों की आपूर्ति और मौसमी खपत जैसे कारक मिलकर बाजार की दिशा तय करेंगे।