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  • राहुल गांधी और प्रियंका गांधी को पत्र, कहा- क्रॉस वोटिंग का खतरा, फिर भी हो रही बड़ी भूल

    राहुल गांधी और प्रियंका गांधी को पत्र, कहा- क्रॉस वोटिंग का खतरा, फिर भी हो रही बड़ी भूल


    मध्य प्रदेश । मध्य प्रदेश से राज्यसभा चुनाव के लिए कांग्रेस द्वारा Meenakshi Natarajan को उम्मीदवार बनाए जाने के बाद पार्टी के भीतर असंतोष खुलकर सामने आने लगा है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और भोपाल की हुजूर विधानसभा सीट से दो बार प्रत्याशी रह चुके Naresh Gyanchandani ने इस फैसले पर सार्वजनिक रूप से सवाल उठाते हुए पार्टी नेतृत्व को बड़ी चेतावनी दी है। उन्होंने कांग्रेस के शीर्ष नेताओं Rahul Gandhi और Priyanka Gandhi Vadra को संबोधित करते हुए कहा कि राज्यसभा उम्मीदवार के चयन में पार्टी से गंभीर चूक हुई है और इससे क्रॉस वोटिंग का खतरा बढ़ सकता है।

    सोशल मीडिया पर जताई नाराजगी
    नरेश ज्ञानचंदानी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करते हुए कहा कि उन्होंने पहले भी पार्टी नेतृत्व को आगाह किया था कि मध्य प्रदेश में राज्यसभा उम्मीदवार का चयन बेहद सावधानी से किया जाए। उनका दावा है कि वर्तमान राजनीतिक परिस्थितियों में कांग्रेस के सामने क्रॉस वोटिंग की चुनौती बनी हुई है और ऐसे समय में उम्मीदवार चयन को लेकर व्यापक सहमति जरूरी थी। ज्ञानचंदानी ने लिखा कि यदि किसी ऐसे नेता को उम्मीदवार बनाया जाता, जिसकी संगठन और विधायकों पर मजबूत पकड़ हो, तो पार्टी की सीट अधिक सुरक्षित रहती।

    दिग्विजय सिंह के पक्ष में खुली पैरवी
    अपने बयान में ज्ञानचंदानी ने स्पष्ट रूप से Digvijaya Singh का नाम लेते हुए कहा कि अगर उन्हें दोबारा राज्यसभा उम्मीदवार बनाया जाता तो कांग्रेस की सीट पूरी तरह सुरक्षित रहती। उनके अनुसार दिग्विजय सिंह का प्रदेश के विधायकों और संगठन पर प्रभाव है, जिससे किसी भी प्रकार की क्रॉस वोटिंग की आशंका कम हो सकती थी। ज्ञानचंदानी का यह बयान इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि उन्हें लंबे समय से दिग्विजय सिंह समर्थक नेता के रूप में देखा जाता है। ऐसे में उनका खुला विरोध कांग्रेस की अंदरूनी राजनीति में नए संकेत दे रहा है।

    कांग्रेस के भीतर बढ़ी हलचल
    मीनाक्षी नटराजन के नाम की घोषणा के बाद पार्टी के कुछ नेताओं और कार्यकर्ताओं के बीच असहमति की चर्चाएं पहले से चल रही थीं, लेकिन अब पहली बार किसी वरिष्ठ नेता ने सार्वजनिक मंच पर फैसले का विरोध किया है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि राज्यसभा चुनाव में संख्या बल के लिहाज से कांग्रेस की स्थिति पहले ही चुनौतीपूर्ण है। ऐसे में पार्टी के भीतर असंतोष के सार्वजनिक होने से नेतृत्व की चिंता बढ़ सकती है।

    बीजेपी ने साधा निशाना
    कांग्रेस में उभरे इस विवाद पर बीजेपी ने भी तीखी प्रतिक्रिया दी है। भाजपा के प्रदेश मीडिया प्रभारी Ashish Agrawal ने कांग्रेस की अंदरूनी खींचतान पर तंज कसते हुए कहा कि अंतर्कलह और गुटबाजी कांग्रेस की पुरानी पहचान रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि जब पार्टी के अपने नेता ही शीर्ष नेतृत्व के फैसलों पर सवाल उठा रहे हैं और क्रॉस वोटिंग की आशंका जता रहे हैं, तो यह कांग्रेस के भीतर बढ़ती असहमति का संकेत है। भाजपा ने इसे संगठनात्मक कमजोरी बताते हुए कांग्रेस पर राजनीतिक हमला भी बोला।

    राज्यसभा चुनाव से पहले बढ़ा सियासी तापमान
    मध्य प्रदेश में राज्यसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। कांग्रेस जहां अपने उम्मीदवार के पक्ष में एकजुटता दिखाने की कोशिश कर रही है, वहीं पार्टी के भीतर से उठ रहे विरोध के स्वर नेतृत्व के लिए नई चुनौती बन सकते हैं। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि कांग्रेस इस असंतोष को किस तरह संभालती है और क्या पार्टी अपने विधायकों को एकजुट रखने में सफल हो पाती है।

  • कांग्रेस में बदलाव की सुगबुगाहट? डीके शिवकुमार की बढ़ती दावेदारी के बीच तेज हुआ मंथन

    कांग्रेस में बदलाव की सुगबुगाहट? डीके शिवकुमार की बढ़ती दावेदारी के बीच तेज हुआ मंथन

    नई दिल्ली । कर्नाटक की राजनीति एक बार फिर चर्चा के केंद्र में आ गई है। राज्य में नेतृत्व परिवर्तन को लेकर राजनीतिक गलियारों में लगातार अटकलें तेज होती दिखाई दे रही हैं। कांग्रेस के भीतर संभावित बदलाव और सत्ता की कमान को लेकर चल रहे मंथन ने सियासी हलचल बढ़ा दी है। हाल के घटनाक्रमों और दिल्ली में शीर्ष स्तर पर जारी बैठकों के बाद यह चर्चा और अधिक तेज हो गई है कि राज्य में नेतृत्व से जुड़ा कोई बड़ा फैसला आने वाले समय में सामने आ सकता है।

    सूत्रों के हवाले से सामने आ रही चर्चाओं के अनुसार, पार्टी के भीतर मुख्यमंत्री पद को लेकर नए समीकरणों पर विचार किया जा रहा है। ऐसी चर्चा है कि कुछ वरिष्ठ नेता मौजूदा नेतृत्व व्यवस्था में बदलाव के पक्ष में अपनी राय रख रहे हैं। इसी बीच उपमुख्यमंत्री पद संभाल रहे D. K. Shivakumar का नाम संभावित नेतृत्व विकल्प के रूप में तेजी से चर्चा में आया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पार्टी के भीतर उनकी सक्रियता और संगठनात्मक पकड़ उन्हें मजबूत दावेदार बना सकती है।

    बताया जा रहा है कि कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व ने इस विषय पर लगातार विचार-विमर्श शुरू कर दिया है। दिल्ली में पार्टी के वरिष्ठ नेताओं की एक के बाद एक बैठकों ने राजनीतिक अटकलों को और हवा दी है। इन बैठकों में पार्टी के कई बड़े नेताओं की मौजूदगी को बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हालांकि अब तक पार्टी की ओर से किसी आधिकारिक निर्णय या बयान की घोषणा नहीं की गई है।

    राजनीतिक चर्चाओं के बीच यह भी कहा जा रहा है कि कांग्रेस महासचिव Priyanka Gandhi इस पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए हैं और नेतृत्व से जुड़े मंथन में सक्रिय भूमिका निभा रही हैं। वहीं पार्टी के अन्य वरिष्ठ नेताओं की बैठकों और विचार-विमर्श को भी बेहद अहम माना जा रहा है। हालांकि इस संबंध में कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और राजनीतिक चर्चाएं अभी सूत्रों पर आधारित हैं।

    दिल्ली में हुई बैठकों ने पूरे मामले को और अधिक दिलचस्प बना दिया है। कांग्रेस अध्यक्ष Mallikarjun Kharge, Rahul Gandhi और अन्य वरिष्ठ नेताओं के बीच हुई चर्चाओं को कर्नाटक के राजनीतिक भविष्य से जोड़कर देखा जा रहा है। जानकारी के अनुसार अलग-अलग चरणों में कई बैठकें हुईं, जिनमें राज्य नेतृत्व और संगठनात्मक पहलुओं पर चर्चा किए जाने की संभावना जताई जा रही है।

    कर्नाटक में सत्ता परिवर्तन और नेतृत्व बदलाव का विषय पहले भी राजनीतिक चर्चाओं का हिस्सा बनता रहा है। राज्य की राजनीति में क्षेत्रीय समीकरण, संगठनात्मक संतुलन और नेतृत्व की भूमिका हमेशा अहम रही है। ऐसे में यदि भविष्य में किसी तरह का निर्णय सामने आता है तो उसका असर केवल राज्य तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर भी उसके राजनीतिक मायने निकाले जाएंगे।

    फिलहाल पार्टी की ओर से किसी अंतिम निर्णय का संकेत नहीं दिया गया है, लेकिन लगातार हो रही बैठकों और बढ़ती राजनीतिक चर्चाओं ने कर्नाटक की राजनीति को फिर से राष्ट्रीय बहस के केंद्र में ला दिया है। आने वाले दिनों में इस विषय पर होने वाली गतिविधियों पर सभी की नजर बनी रहेगी।

  • महिला आरक्षण और परिसीमन विवाद पर प्रियंका गांधी का हमला, सरकार की मंशा पर उठाए गंभीर सवाल

    महिला आरक्षण और परिसीमन विवाद पर प्रियंका गांधी का हमला, सरकार की मंशा पर उठाए गंभीर सवाल

    नई दिल्ली:लोकसभा में महिला आरक्षण से जुड़े संविधान संशोधन विधेयक को लेकर राजनीतिक माहौल गरम हो गया है। इस मुद्दे पर कांग्रेस की महासचिव और सांसद प्रियंका गांधी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर केंद्र सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि जिस तरह इस पूरे मामले को आगे बढ़ाया गया, उससे सरकार की मंशा पर सवाल खड़े होते हैं और विपक्ष की एकजुटता ने इस रणनीति को विफल कर दिया।

    प्रियंका गांधी ने कहा कि यह केवल महिला आरक्षण का मुद्दा नहीं था, बल्कि इसके पीछे परिसीमन से जुड़ा एक बड़ा पहलू छिपा हुआ था। उनके अनुसार सरकार ने इस प्रक्रिया को जिस तरह आगे बढ़ाया, उसमें पारदर्शिता की कमी दिखाई दी। उन्होंने आरोप लगाया कि विधेयक पर पर्याप्त चर्चा का समय नहीं दिया गया और अंतिम समय में दस्तावेज साझा किए गए, जिससे विस्तृत विचार विमर्श संभव नहीं हो सका।

    उन्होंने यह भी कहा कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया में किसी भी बड़े संवैधानिक बदलाव से पहले सभी राजनीतिक दलों को विश्वास में लेना जरूरी होता है। लेकिन इस मामले में ऐसा नहीं किया गया, जिससे विपक्ष को अपनी स्थिति स्पष्ट करने में कठिनाई हुई। उनके अनुसार यह तरीका लोकतांत्रिक मूल्यों के अनुरूप नहीं है।

    प्रियंका गांधी ने परिसीमन के मुद्दे को इस बहस का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा बताया। उन्होंने कहा कि बिना व्यापक सामाजिक और जनसंख्या से जुड़े आंकड़ों को ध्यान में रखे परिसीमन करना उचित नहीं होगा। उनके अनुसार यह केवल सीटों के पुनर्वितरण का मामला नहीं है, बल्कि यह सामाजिक संतुलन और प्रतिनिधित्व से भी जुड़ा हुआ विषय है।

    उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि परिसीमन की प्रक्रिया को लेकर सरकार की योजना एकतरफा प्रतीत होती है। उनके अनुसार यदि इस प्रक्रिया में निष्पक्षता नहीं रखी गई तो यह लोकतांत्रिक व्यवस्था की विश्वसनीयता पर असर डाल सकता है। उन्होंने कहा कि देश के लोग अब पहले से अधिक जागरूक हैं और हर निर्णय को ध्यान से देख रहे हैं।

    महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी पर बात करते हुए प्रियंका गांधी ने कहा कि संसद और विधानसभाओं में महिलाओं की संख्या बढ़ाना एक सकारात्मक कदम होगा, लेकिन इसे केवल प्रतीकात्मक नहीं बल्कि वास्तविक भागीदारी के रूप में लागू किया जाना चाहिए। उनके अनुसार महिलाओं को निर्णय लेने की प्रक्रिया में प्रभावी भूमिका मिलनी चाहिए।

    उन्होंने यह भी कहा कि परिसीमन से पहले जातिगत और सामाजिक आंकड़ों पर आधारित स्पष्ट डेटा होना जरूरी है, ताकि किसी भी वर्ग के साथ अन्याय न हो। उनके अनुसार लोकतंत्र की मजबूती इसी में है कि सभी वर्गों को समान अवसर मिले और किसी भी प्रकार का पक्षपात न हो।

    इस पूरे बयान के बाद महिला आरक्षण और परिसीमन को लेकर राजनीतिक बहस और तेज हो गई है। यह मुद्दा अब केवल विधायी प्रक्रिया नहीं बल्कि व्यापक राजनीतिक चर्चा का विषय बन गया है।

  • निशिकांत दुबे ने राहुल गांधी पर विवादित टिप्पणी पर सफाई दी, कहा- ‘जब मैं संसद में खड़ा होता हूं तो कांग्रेस का पसीना छूट जाता है’

    निशिकांत दुबे ने राहुल गांधी पर विवादित टिप्पणी पर सफाई दी, कहा- ‘जब मैं संसद में खड़ा होता हूं तो कांग्रेस का पसीना छूट जाता है’


    नई दिल्ली । हाल ही में बजट सत्र के दौरान झारखंड के गोड्डा से भाजपा सांसद निशिकांत दुबे के भाषण ने राजनीतिक माहौल गरम कर दिया। विवादित किताबों और टिप्पणियों के कारण उनकी ओर से उठाए गए आरोपों ने विपक्षी दल कांग्रेस में हड़कंप मचा दिया। इंडिया टीवी के कार्यक्रम आप की अदालत में दुबे ने खुलकर अपने बयान की सफाई दी। दुबे ने कहा जब मैं संसद में खड़ा होता हूं तो कांग्रेस का पसीना छूट जाता है। प्रियंका गांधी कहीं भी होंगी तो सुनने आ जाएंगी। उन्होंने यह भी जोड़ा कि उन्हें किसी से डर नहीं है क्योंकि उनके साथ प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी हैं।

    नेहरू और इंदिरा गांधी पर विवादित टिप्पणियों के सवाल पर दुबे ने स्पष्ट किया कि उन्होंने संसद में वही पढ़ा जो प्रकाशित किताबों में था। पंडित जवाहरलाल नेहरू को अय्याश कहे जाने के आरोप पर उन्होंने कहा कि यह शब्द उन्होंने खुद नहीं जोड़ा बल्कि यह किताब में लिखा था। इसी तरह इंदिरा गांधी के बारे में अश्लील टिप्पणी के आरोप पर दुबे ने बताया कि यह एमओ मथाई की किताब का संदर्भ था जिसमें उन्होंने कुछ भी नया नहीं जोड़ा।

    राहुल गांधी को किताब न पढ़ने देने के आरोप पर दुबे ने कहा कि उन्होंने उन्हें एक्सपोज़ होने से बचाया। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि अगर राहुल गांधी बिना टोके बोलते तो वे पांच मिनट भी प्रभावी ढंग से नहीं बोल पाएंगे। उनके अनुसार राहुल गांधी संसद में सिर्फ किताब और संविधान लेकर आते हैं और वास्तविक बहस में उनका योगदान सीमित रहता है।

    दुबे के इस बयान के बाद कांग्रेस ने भी उनके खिलाफ कई आरोप लगाए लेकिन सांसद ने साफ किया कि विपक्ष उन्हें डरता है और वे केवल प्रकाशित सामग्री पढ़कर अपनी बात रखते हैं। संसद में उनके भाषण और विवादित टिप्पणियों ने राजनीतिक बहस को जोरदार मोड़ दिया है।

  • पप्पू यादव की गिरफ्तारी पर राहुल और प्रियंका गांधी बोले- राजनीतिक प्रतिशोध की भावना से की गई कार्रवाई

    पप्पू यादव की गिरफ्तारी पर राहुल और प्रियंका गांधी बोले- राजनीतिक प्रतिशोध की भावना से की गई कार्रवाई


    नई दिल्ली।
    पप्पू यादव (Pappu Yadav) के समर्थन में राहुल गांधी (Rahul Gandhi) और प्रियंका गांधी (Priyanka Gandhi) भी उतर पड़े हैं। राहुल गांधी ने कहा कि उनकी गिरफ्तारी केवल राजनीतिक प्रतिशोध (Political vendetta) की भावना से की गई है। उन्होंने कहा कि NEET छात्रा की संदिग्ध मौत को लेकर ही उन्हें गिरफ्तार किया गया है और अब डराया धमकाया जा रहा है। शुक्रवार को देर रात पटना पुलिस ने 31 साल पुराने एक मामले में निर्दलीय सांसद पप्पू यादव को गिरफ्तार किया है।

    राहुल गांधी ने ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, ”पटना में नीट की आकांक्षी छात्रा की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत और उसके बाद की पूरी कार्रवाई ने एक बार फिर व्यवस्था की गहरी सड़ांध को उजागर कर दिया है।” उन्होंने दावा किया कि पीड़ित परिवार ने जब निष्पक्ष जांच और न्याय की मांग की, तो वही पुराना भाजपा-राजग मॉडल सामने आ गया कि मामले को भटकाओ, परिजनों को प्रताड़ित करो और अपराधियों को सत्ता का संरक्षण दो।

    राहुल ने कहा, ‘इस बेटी के लिए न्याय की आवाज़ बनकर साथी सांसद पप्पू यादव जी मजबूती से खड़े हुए। उनकी गिरफ़्तारी साफ़ तौर पर राजनीतिक प्रतिशोध है ताकि जवाबदेही मांगने वाली हर आवाज़ को डराया और दबाया जा सके।’

    उन्होंने कहा कि सबसे चिंताजनक तथ्य यह है कि यह घटना किसी एक मामले तक सीमित नहीं दिखती। कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष ने कहा, ”यह एक भयावह साजिश एवं खतरनाक चलन की ओर इशारा करती है, जहां और भी बेटियां शिकार बन रही हैं और सत्ता इस खौफ़नाक सच्चाई से आंखें मूंदकर बैठी है। यह राजनीति नहीं, इंसाफ़ का सवाल है। यह बिहार की बेटी की इज़्ज़त और सुरक्षा का सवाल है।”


    प्रियंका गांधी बोलीं- अत्याचार के साथ खड़ी बीजेपी

    पार्टी महासचिव प्रियंका गांधी वाद्रा ने भी पप्पू यादव के प्रति एकजुटता प्रकट की और आरोप लगाया कि भाजपा एवं उसके सहयोगी दल अत्याचार के साथ खड़े हुए हैं। उन्होंने ‘एक्स’ पर पोस्ट किया,”पटना के हॉस्टल में नीट की तैयारी कर रही छात्रा के साथ बलात्कार और हत्या का मामला झकझोर देने वाला है। यह मामला सामने आने के बाद सरकार का रवैया उससे भी ज्यादा खौफनाक है।’ प्रियंका ने कहा, ‘प्राथमिकी दर्ज होने से लेकर जांच और कार्रवाई तक सबकुछ संदिग्ध बना दिया गया है। यह सब किसे बचाने के लिए किया जा रहा है?’

    उन्होंने कहा कि हाथरस, उन्नाव से लेकर अंकिता भंडारी और पटना तक- जहां भी महिलाओं के साथ अत्याचार होता है, भाजपा की सरकारें पीड़िता को न्याय दिलाने की जगह आरोपियों के साथ खड़ी हो जाती हैं। प्रियंका ने आरोप लगाया कि इस मामले में आवाज उठा रहे सांसद पप्पू यादव की गिरफ्तारी इसी असंवेदनशील रवैये की एक और कड़ी है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा और उसके सहयोगियों का एजेंडा स्पष्ट है कि वे अन्याय और अत्याचार के साथ खड़े हैं।

  • हिमंत सरमा का खुलासा: “राहुल और प्रियंका गांधी की आपसी लड़ाई का शिकार रहा”

    हिमंत सरमा का खुलासा: “राहुल और प्रियंका गांधी की आपसी लड़ाई का शिकार रहा”


    नई दिल्ली। असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने कांग्रेस नेतृत्व, खासकर राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा पर तीखा हमला बोला है। दावोस में वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम (WEF) के दौरान मीडिया से बातचीत में सरमा ने दावा किया कि भाजपा में शामिल होने से पहले वे राहुल और प्रियंका की अंदरूनी लड़ाई के शिकार रहे।

    सरमा ने कहा, “गांधी परिवार के भीतर सब कुछ ठीक नहीं है। हाल के राजनीतिक फैसलों से यह साफ दिखता है कि राहुल गांधी नहीं चाहते कि प्रियंका गांधी केरल में अपनी राजनीतिक पकड़ मजबूत करें।

    उन्हें असम में भेजा गया, इसका यही मतलब है।”

    उन्होंने आगे आरोप लगाया कि कांग्रेस में राहुल गांधी अपने करीबी नेताओं और गुट के जरिए सत्ता बनाए रखना चाहते हैं, जबकि प्रियंका उस गुट का हिस्सा नहीं हैं। सरमा ने बताया, “मैं 22 साल तक कांग्रेस में रहा हूं, मुझे अंदर की पूरी जानकारी है। यही वजह है कि प्रियंका को केरल की बजाय असम में जिम्मेदारी दी गई।”

    हिमंत सरमा बीजेपी में शामिल होने के बाद से लगातार कांग्रेस और गांधी परिवार पर हमलावर रहे हैं। उनके इस बयान ने राजनीतिक गलियारों में नई बहस छेड़ दी है। सियासी जानकार अब इस सवाल पर चर्चा कर रहे हैं कि क्या वाकई राहुल और प्रियंका के बीच अंदरूनी मतभेद हैं, या यह विपक्ष की रणनीति का हिस्सा है। फिलहाल कांग्रेस की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।

  • प्रियंका गांधी के बेटे रेहान वाड्रा की सगाई की अटकलें, वायरल फोटो से सोशल मीडिया में हलचल

    प्रियंका गांधी के बेटे रेहान वाड्रा की सगाई की अटकलें, वायरल फोटो से सोशल मीडिया में हलचल


    नई दिल्ली। कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी और उद्योगपति रॉबर्ट वाड्रा के बेटे रेहान वाड्रा को लेकर इन दिनों सोशल मीडिया और राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का दौर तेज है। वजह है एक वायरल तस्वीर जिसके सामने आने के बाद यह कयास लगाए जा रहे हैं कि रेहान वाड्रा ने अपनी लंबे समय से गर्लफ्रेंड मानी जा रही अविवा बेग से सगाई कर ली है। हालांकि गांधी या वाड्रा परिवार की ओर से अब तक इस खबर को लेकर कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।

    मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार रेहान वाड्रा और अविवा बेग पिछले करीब सात वर्षों से एक-दूसरे को जानते हैं और उनके बीच करीबी रिश्ता बताया जाता है। सोशल मीडिया पर वायरल हो रही तस्वीर में दोनों एक साथ नजर आ रहे हैं जिसके बाद सगाई की चर्चाओं ने जोर पकड़ लिया। बताया जा रहा है कि यह तस्वीर किसी निजी पारिवारिक कार्यक्रम के दौरान ली गई थी जिसमें सीमित लोग ही मौजूद थे।सूत्रों के मुताबिक यदि सगाई हुई भी है तो उसे बेहद निजी रखा गया और इसमें गांधी-वाड्रा परिवार तथा बेग परिवार के कुछ करीबी सदस्य ही शामिल हुए। तस्वीर के सार्वजनिक होते ही सोशल मीडिया पर तरह-तरह की अटकलें लगाई जाने लगीं लेकिन किसी भी पक्ष की ओर से इसकी पुष्टि नहीं की गई है।

    बताया जा रहा है कि वायरल फोटो प्रियंका गांधी और रॉबर्ट वाड्रा की बेटी मिराया वाड्रा की वर्ष 2025 की ग्रेजुएशन सेरेमनी के दौरान की है। इसी कार्यक्रम से जुड़ी तस्वीर सामने आने के बाद रेहान और अविवा की सगाई को लेकर चर्चाएं तेज हो गईं। फिलहाल आधिकारिक पुष्टि के अभाव में इसे केवल अटकलों के तौर पर देखा जा रहा है।अविवा बेग दिल्ली की रहने वाली हैं और उनका परिवार लंबे समय से राजधानी में निवास कर रहा है। जानकारी के अनुसार गांधी-वाड्रा और बेग परिवार एक-दूसरे को पहले से जानते हैं। अविवा पेशे से फोटोग्राफर और आर्ट क्यूरेटर हैं। वहएटेलियर-11 की को-फाउंडर हैं जो एक फोटोग्राफी स्टूडियो और प्रोडक्शन कंपनी के रूप में जानी जाती है।

    अविवा बेग कला और डिजाइन की दुनिया में एक जाना-पहचाना नाम हैं। वह इंडिया आर्ट फेयर के यंग कलेक्टर प्रोग्राम और इंडिया डिजाइन आईडी जैसी प्रतिष्ठित प्रदर्शनियों में अपनी उपस्थिति दर्ज करा चुकी हैं। उनकी क्रिएटिव प्रोफाइल और अंतरराष्ट्रीय कला मंचों से जुड़ाव की भी काफी चर्चा रहती है।वहीं रेहान वाड्रा भी फोटोग्राफी के शौकीन माने जाते हैं खासतौर पर वाइल्डलाइफ फोटोग्राफी में उनकी गहरी रुचि है। एक इंटरव्यू में उन्होंने बताया था कि आठ साल की उम्र से ही उन्हें कैमरे से लगाव हो गया था। उनके सोशल मीडिया अकाउंट पर प्रकृति और वन्यजीवों से जुड़ी कई तस्वीरें देखी जा सकती हैं। इसी साझा रुचि को रेहान और अविवा के रिश्ते की मजबूत नींव माना जाता है।

    राजनीतिक दृष्टि से रेहान वाड्रा अब तक सक्रिय भूमिका में नजर नहीं आए हैं लेकिन जनवरी 2023 में राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा में उनकी मौजूदगी ने लोगों का ध्यान जरूर खींचा था। मध्य प्रदेश में यात्रा के दौरान वे करीब तीन दिन तक राहुल गांधी के साथ पदयात्रा करते दिखे थे। इसके बाद से उनके भविष्य को लेकर राजनीतिक हलकों में भी चर्चाएं होती रही हैं।फिलहाल रेहान वाड्रा और अविवा बेग की सगाई को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है। परिवार की ओर से आधिकारिक पुष्टि या खंडन का इंतजार किया जा रहा है। तब तक यह मामला सोशल मीडिया और राजनीतिक चर्चाओं में बना हुआ है।

  • राहुल–प्रियंका के बीच तकरार के दावे: विदेश दौरे पर गए राहुल गांधी को लेकर केंद्रीय मंत्री बिट्टू का बड़ा हमला

    राहुल–प्रियंका के बीच तकरार के दावे: विदेश दौरे पर गए राहुल गांधी को लेकर केंद्रीय मंत्री बिट्टू का बड़ा हमला


    नई दिल्ली/कांग्रेस पार्टी की आंतरिक राजनीति को लेकर एक बार फिर सियासी हलचल तेज हो गई है। भारतीय जनता पार्टी के नेताओं के बाद अब केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू ने कांग्रेस सांसद और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी तथा उनकी बहन प्रियंका गांधी वाड्रा के बीच कथित विवाद का दावा किया है। बिट्टू का कहना है कि दोनों के बीच गंभीर मतभेद चल रहे हैं और इसी वजह से राहुल गांधी परिवार और पार्टी से नाराज होकर विदेश चले गए हैं। रवनीत सिंह बिट्टू ने यह बयान एनडीटीवी से बातचीत के दौरान दिया। उनसे कांग्रेस द्वारा वीबी जी राम जी बिल को लेकर प्रस्तावित प्रदर्शन पर सवाल किया गया था। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए बिट्टू ने कांग्रेस नेतृत्व और गांधी परिवार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के पास अब न तो विचारधारा बची है और न ही जमीन पर प्रदर्शन करने के लिए लोग।

    केंद्रीय मंत्री ने कहाकांग्रेस का महात्मा गांधी से कोई लेना-देना नहीं है। इनके लिए गांधी का मतलब सिर्फ प्रियंका गांधीराहुल गांधीइंदिरा गांधीराजीव गांधी और संजय गांधी तक सीमित रह गया है। उन्हें उस गांधी से समस्या है जो देश और समाज के लिए खड़ा था। बिट्टू ने दावा किया कि जनता अब उस नाम वाले गांधी को नकार चुकी हैजबकि महात्मा गांधी का सम्मान देश में हमेशा बना रहेगा।राहुल गांधी के विदेश दौरे को लेकर बिट्टू ने तंज कसते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देश का नाम रोशन करने के लिए विदेश जाते हैंजबकि राहुल गांधी सैर-सपाटे के लिए विदेश रवाना हो जाते हैं। उन्होंने कहा मैंने अभी राहुल गांधी की तस्वीरें जर्मनी से देखीं। सवाल यह है कि राहुल गांधी हैं कहां? देश के अहम मुद्दों पर चर्चा होनी चाहिएलेकिन वो विदेश में घूमते नजर आते हैं।

    इसके बाद बिट्टू ने राहुल और प्रियंका गांधी के बीच कथित टकराव को लेकर बड़ा दावा किया। उन्होंने कहा कि संसद में हाल के दिनों में दिए गए भाषणों को लेकर दोनों के बीच तुलना होने लगी है। बिट्टू के मुताबिककई लोगों ने प्रियंका गांधी के भाषणों की तुलना राहुल गांधी से कीजिससे राहुल नाराज हो गए। उन्होंने कहादोनों गांधी के बीच बड़ी भारी लड़ाई चल रही है। राहुल गांधी इसी नाराजगी में परिवार और पार्टी से झगड़ा कर विदेश चले गए हैं।केंद्रीय मंत्री ने यह भी दावा किया कि कांग्रेस के भीतर नेतृत्व और दिशा को लेकर गंभीर समस्याएं हैं। उनके अनुसारराहुल गांधी का विदेश जाना केवल व्यक्तिगत दौरा नहींबल्कि पार्टी और परिवार के अंदरूनी तनाव का नतीजा है। हालांकिइन आरोपों पर कांग्रेस की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

    यह पहला मौका नहीं है जब भाजपा नेताओं ने कांग्रेस में अंदरूनी कलह का दावा किया हो। इससे पहले भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता शहजाद पूनावाला भी सोशल मीडिया पर कांग्रेस को लेकर ऐसे ही आरोप लगा चुके हैं। उन्होंने लिखा था किटीम प्रियंका बनाम टीम राहुल अब खुलकर सामने आ गई है और कांग्रेस की आंतरिक कलह सार्वजनिक हो चुकी है।शहजाद पूनावाला ने ओडिशा से कांग्रेस के पूर्व नेता मोहम्मद मुकीम के पत्र का हवाला देते हुए कहा था कि पार्टी में नेतृत्व संकट गहराता जा रहा है। उन्होंने दावा किया था कि मुकीम ने सोनिया गांधी को पत्र लिखकर मल्लिकार्जुन खरगे को हटाने और प्रियंका गांधी को आगे लाने की मांग की थी। साथ ही उन्होंने प्रदेश और केंद्रीय नेतृत्व पर भी गंभीर सवाल उठाए थे।

    भाजपा का कहना है कि कांग्रेस इस समय संगठनात्मक और वैचारिक संकट से गुजर रही है। पार्टी के भीतर नेतृत्व को लेकर असमंजस और आपसी खींचतान खुलकर सामने आ रही है। दूसरी ओरकांग्रेस की चुप्पी ने इन आरोपों को और हवा दे दी है।राजनीतिक जानकारों का मानना है कि आने वाले दिनों में कांग्रेस की ओर से इन दावों पर सफाई आ सकती हैलेकिन फिलहाल भाजपा इन बयानों के जरिए विपक्ष को घेरने की रणनीति पर काम कर रही है। राहुल गांधी और प्रियंका गांधी के रिश्तों को लेकर लगाए गए ये आरोप सियासी बयानबाजी का हिस्सा हैं या वास्तव में पार्टी के भीतर किसी बड़े बदलाव का संकेतयह आने वाला समय ही बताएगा।