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  • संजय कपूर की संपत्ति विवाद मामले में कोर्ट ने करिश्मा कपूर से मांगे तलाक के दस्तावेज

    संजय कपूर की संपत्ति विवाद मामले में कोर्ट ने करिश्मा कपूर से मांगे तलाक के दस्तावेज


    मुम्बई।
    पिछले साल सितंबर में, करिश्मा कपूर (Karisma Kapoor) की दो संतान ने अपने दिवंगत पिता संजय कपूर (Sanjay Kapoor) की संपत्ति में हिस्सा पाने के लिए हाई कोर्ट (High Court) में याचिका दायर की और उनकी 21 मार्च 2025 की वसीयत को चुनौती दी। वसीयत में, संजय कपूर की कथित तौर पर पूरी संपत्ति प्रिया सचदेव कपूर (Priya Sachdev Kapoor) को कर दी गई है। जस्टिस ए.एस. चंदुरकर की पीठ ने शुक्रवार को प्रिया सचदेव कपूर की याचिका पर अपने कक्ष में सुनवाई की और सूत्रों के अनुसार, करिश्मा कपूर से दो सप्ताह के भीतर जवाब मांगा।

    सूत्रों ने बताया कि बॉलीवुड अभिनेत्री के वकील ने याचिका का विरोध किया और इसकी स्वीकार्यता पर आपत्ति जताते हुए कहा कि प्रिया सचदेव कपूर 2016 के समझौते में एक असंबद्ध तीसरी पक्षकार हैं और इस मामले में उनका कोई अधिकार नहीं बनता। करिश्मा कपूर की ओर से वकील रवि शर्मा और अपूर्व शुक्ला पेश हुए, जिन्होंने दलील दी कि सहमति की शर्तें और तलाकनामा पहले से ही प्रिया सचदेव कपूर के पास मौजूद हैं।

    प्रिया कपूर के वकील ने दलील दी कि ये दस्तावेज मौजूदा संपत्ति विवाद से सीधे तौर पर संबंधित हैं, जिसमें वित्तीय प्रावधान, बच्चों को सहायता और तलाक के बाद की जिम्मेदारियों से जुड़े मुद्दे दिल्ली उच्च न्यायालय के समक्ष बार-बार उठाए जा चुके हैं। पिछले साल 12 जून को इंग्लैंड में एक पोलो मैच के दौरान गिरने के बाद संजय कपूर का निधन हो गया था। खबरों के अनुसार, उन्हें अचानक दिल का दौरा पड़ा था।

  • भेड़ाघाट में नगर पंचायत अध्यक्ष के बेटे पर चाकू हमला, प्रॉपर्टी विवाद से बढ़ा तनाव, पुलिस ने शुरू की तलाश

    भेड़ाघाट में नगर पंचायत अध्यक्ष के बेटे पर चाकू हमला, प्रॉपर्टी विवाद से बढ़ा तनाव, पुलिस ने शुरू की तलाश



    नई दिल्ली। भेड़ाघाट नगर पंचायत अध्यक्ष के बेटे नीलेश लोधी पर देर रात आरोपियों ने चाकू से हमला कर दिया। घटना के तुरंत बाद घायल को इलाज के लिए मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया। नगर पंचायत अध्यक्ष चतुर सिंह की शिकायत पर पुलिस ने तीन आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर उनकी तलाश शुरू कर दी है।

    घटना तिलवारा थाना क्षेत्र के विशाल मेगा मार्ट के पास हुई। जानकारी के अनुसार, नीलेश लोधी अपने घर भेड़ाघाट लौट रहे थे, तभी तीन बदमाशों ने उन्हें रोककर ताबड़तोड़ चाकू मार दिया। हमलावरों में जीतू पटेल, अंकित और सचिन शामिल थे,

     उन्होंने कहा कि जीतू पटेल आदतन अपराधी है, जिसके खिलाफ अवैध वसूली और मारपीट के कई मामले पहले भी दर्ज हैं। हाल ही में जेल से छूटने के बाद वह अपने साथियों के साथ फिर से प्रॉपर्टी का काम करने लगा था।

    पुलिस की तीन टीमें आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए लगातार दबिश दे रही हैं।

    जीतू पटेल चौकी लाल का निवासी है और उसके घर एवं आस-पास भी पुलिस की निगरानी बढ़ा दी गई है। थाना प्रभारी ने आश्वासन दिया कि आरोपियों को जल्द ही गिरफ्तार कर लिया जाएगा और कानून के अनुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी।

    स्थानीय लोगों ने बताया कि नीलेश लोधी प्रॉपर्टी के काम में सक्रिय थे और उनके घायल होने की खबर से इलाके में तनाव है। पुलिस ने मौके पर सघन गश्त और सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी है।

    यह मामला भेड़ाघाट में प्रॉपर्टी विवाद से जुड़ा हुआ माना जा रहा है और प्रशासन इसे गंभीरता से ले रहा है। नीलेश की हालत स्थिर बताई जा रही है, जबकि पुलिस आरोपियों की सूत्रों और तफ्तीश के आधार पर तलाश में जुटी हुई है।

  • ज्योतिरादित्य सिंधिया और बुआओं के बीच संपत्ति विवाद में बॉम्बे हाईकोर्ट से अतिरिक्त समय

    ज्योतिरादित्य सिंधिया और बुआओं के बीच संपत्ति विवाद में बॉम्बे हाईकोर्ट से अतिरिक्त समय


    ग्वालियर। केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया और उनकी बुआओं वसुंधरा राजे, ऊषा राजे और यशोधरा राजे के बीच चल रहे संपत्ति विवाद में अब राजीनामा दाखिल करने की समय सीमा बढ़ा दी गई है। यह मामला लंबे समय से न्यायालयों में विचाराधीन है और इसके समाधान के लिए दोनों पक्ष समझौते की प्रक्रिया में हैं। ग्वालियर खंडपीठ में बुआओं की ओर से दायर आवेदन में बताया गया कि बॉम्बे हाईकोर्ट में लंबित मामले की अगली सुनवाई 10 फरवरी 2026 को निर्धारित है।
    बुआओं की ओर से कोर्ट से अनुरोध किया गया कि पहले से तय 90 दिनों की अवधि को बढ़ाकर अतिरिक्त 30 दिन दिया जाए, ताकि समझौते की सभी औपचारिकताएं पूरी की जा सकें। कोर्ट ने इस आवेदन को मंजूरी दे दी है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि दोनों पक्ष बिना किसी बाधा के विवाद का समाधान कर सकें और समझौते को विधिक रूप से अंतिम रूप दिया जा सके।

    यह संपत्ति विवाद मूल रूप से 2010 में जिला न्यायालय, ग्वालियर में दर्ज हुआ था। तब से लेकर अब तक यह मामला लंबित है और 2017 में इसे हाईकोर्ट में स्थानांतरित किया गया। विवाद मुख्य रूप से सिंधिया और उनकी बुआओं के बीच पारिवारिक संपत्ति के बंटवारे को लेकर है। बुआओं और भतीजे दोनों पक्ष चाहते हैं कि यह विवाद समझौते के माध्यम से समाप्त हो जाए, ताकि लंबित कानूनी प्रक्रियाओं का बोझ खत्म हो सके।

    सितंबर 2025 में जिला न्यायालय ने याचिका का निस्तारण करते हुए दोनों पक्षों को 90 दिनों में समझौता पेश करने का निर्देश दिया था। लेकिन बॉम्बे हाईकोर्ट में लंबित केस के कारण यह समय पूरा नहीं हो पाया। अब हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि लंबित मामले के निस्तारण के बाद दोनों पक्षों को समझौता दाखिल करने के लिए अतिरिक्त 30 दिन का समय मिलेगा।

    इससे यह सुनिश्चित होगा कि सभी औपचारिकताएं और कानूनी प्रक्रियाएं पूरी हों और किसी भी तरह का विवाद भविष्य में न उभरे।

    विशेषज्ञों के अनुसार, यह कदम पारिवारिक विवादों के शीघ्र समाधान के लिए अहम है। अक्सर लंबित कानूनी मामले सालों तक अटके रहते हैं और दोनों पक्षों के बीच मतभेद बढ़ते हैं। ज्योतिरादित्य सिंधिया और उनकी बुआओं के मामले में भी यह समय वृद्धि पारिवारिक समझौते को सुरक्षित और न्यायसंगत तरीके से पूरा करने की दिशा में महत्वपूर्ण है।

    इस मामले से जुड़े जानकार बताते हैं कि समझौते की प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखना आवश्यक है।

    इसमें संपत्ति के बंटवारे, कानूनी अधिकारों की पुष्टि और किसी भी वित्तीय या प्रशासनिक बाधा का समाधान शामिल है। अतिरिक्त 30 दिन की अवधि दोनों पक्षों को ये सुनिश्चित करने का अवसर देती है कि समझौते में सभी औपचारिकताएं और दस्तावेज़ सही तरीके से तैयार किए जाएं।

    कुल मिलाकर, यह कदम ज्योतिरादित्य सिंधिया और उनकी बुआओं के बीच लंबित संपत्ति विवाद को शांतिपूर्ण और कानूनी ढंग से समाप्त करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास है। कोर्ट की अनुमति से दोनों पक्ष बिना किसी दबाव के समझौता अंतिम रूप दे सकेंगे। इससे परिवार के बीच तनाव कम होगा और लंबित न्यायिक प्रक्रियाओं का बोझ भी घटेगा।

    इस मामले की अगली सुनवाई 10 फरवरी 2026 को बॉम्बे हाईकोर्ट में होगी, जिसके बाद अतिरिक्त 30 दिनों में समझौते की औपचारिकताएं पूरी की जाएंगी। इस प्रक्रिया के सफलतापूर्वक पूर्ण होने से परिवार के सभी सदस्यों के बीच संपत्ति विवाद का स्थायी समाधान निकलने की संभावना है।