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  • कृषि को उत्पादन से प्रॉस्पेरिटी तक ले जाने की दिशा में उत्तर प्रदेश अग्रणी, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का जोर

    कृषि को उत्पादन से प्रॉस्पेरिटी तक ले जाने की दिशा में उत्तर प्रदेश अग्रणी, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का जोर


    नई दिल्ली।उत्तर प्रदेश की राजधानी में आयोजित छठी उत्तर प्रदेश कृषि विज्ञान कांग्रेस-2026 के शुभारंभ के अवसर पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कृषि क्षेत्र के समग्र और दूरदर्शी विकास के लिए स्पष्ट दृष्टिकोण प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है कि कृषि को केवल उत्पादन से आगे बढ़ाकर प्रोडक्टिविटी, प्रॉफिटेबिलिटी और अंततः प्रॉस्पेरिटी तक ले जाया जाए। उन्होंने जोर देकर कहा कि केवल उत्पादन बढ़ाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि इसे लाभप्रद, टिकाऊ और वैज्ञानिक दृष्टिकोण से संचालित करना आवश्यक है। इस दृष्टि से उत्तर प्रदेश राज्य किसानों के हित और समग्र कृषि विकास में अग्रणी भूमिका निभाने के लिए प्रतिबद्ध है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि तीन दिवसीय इस आयोजन में कृषि के विभिन्न आयामों पर गंभीर विचार-विमर्श होगा, जिसमें जमीनी स्तर के अनुभव, सफल प्रयोग और नवाचार साझा किए जाएंगे। यह मंच केवल चर्चा के लिए नहीं, बल्कि ठोस क्रियान्वयन योजना तैयार करने का माध्यम होना चाहिए, जिससे किसान सीधे लाभान्वित हों। उन्होंने राज्य के कृषि आंकड़ों का उल्लेख करते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश देश की लगभग 16-17 प्रतिशत आबादी का घर है, जबकि यहां केवल 11 प्रतिशत कृषि योग्य भूमि उपलब्ध है, फिर भी राज्य कुल खाद्यान्न उत्पादन में 21 प्रतिशत का योगदान देता है। योजनाबद्ध प्रयासों और प्रभावी नीतियों के माध्यम से कृषि विकास दर को 8 प्रतिशत से बढ़ाकर लगभग 18 प्रतिशत तक पहुंचाना उल्लेखनीय उपलब्धि है।

    मुख्यमंत्री ने भारत की ऐतिहासिक आर्थिक शक्ति का आधार कृषि बताया और कहा कि एक समय में भारत की वैश्विक अर्थव्यवस्था में हिस्सेदारी 44-45 प्रतिशत तक थी, जिसमें सशक्त कृषि तंत्र का योगदान महत्वपूर्ण था। उन्होंने बताया कि पहले किसान सिर्फ उत्पादक नहीं था, बल्कि कारीगर और उद्यमी भी था। समय के साथ यह व्यवस्था कमजोर हुई और किसान केवल कच्चा माल उत्पादक बन गया, जिससे आर्थिक असंतुलन उत्पन्न हुआ।

    उन्होंने आधुनिक तकनीक के उपयोग पर जोर देते हुए कहा कि इंटरनेट ऑफ थिंग्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, ड्रोन और सैटेलाइट तकनीक कृषि को नई दिशा दे सकते हैं। सेंसर आधारित तकनीक से मिट्टी की नमी और पोषण का डेटा प्राप्त कर किसान सटीक निर्णय ले सकते हैं। एआई के माध्यम से फसलों का वास्तविक समय विश्लेषण, रोग पहचान और उत्पादन का पूर्वानुमान संभव है। ड्रोन द्वारा उर्वरक और कीटनाशकों का सटीक छिड़काव तथा सैटेलाइट के माध्यम से मौसम और भूमि की निगरानी कृषि को अधिक वैज्ञानिक और प्रभावी बना रही है। बायोटेक्नोलॉजी का उपयोग बदलते मौसम के अनुकूल बीज विकसित करने और उत्पादन बढ़ाने में मदद करता है।

    मुख्यमंत्री ने प्राकृतिक खेती को दीर्घकालिक समाधान बताते हुए कहा कि यह लागत कम करने के साथ मिट्टी की गुणवत्ता और पर्यावरण संतुलन भी बनाए रखती है। डिजिटल एग्रीकल्चर प्लेटफॉर्म, वन नेशन-वन मंडी प्रणाली, मंडी शुल्क में कमी और डिजिटल सॉयल हेल्थ कार्ड किसानों को सीधे बाजार, मौसम और मूल्य की जानकारी उपलब्ध करा रहे हैं।

    उन्होंने पारंपरिक ‘लैब टू लैंड’ मॉडल की जगह ‘लैंड इज लैब’ पर जोर देते हुए कहा कि अब खेतों को ही प्रयोगशाला बनाना होगा, जहां किसान और वैज्ञानिक मिलकर नवाचार स्थापित करें। कृषि विज्ञान केंद्रों और कृषि विश्वविद्यालयों को इस दिशा में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया गया।

    मुख्यमंत्री ने गन्ना क्षेत्र में सुधारों का उल्लेख करते हुए कहा कि अब अधिकांश मिलें 6-7 दिनों में भुगतान करती हैं। प्रदेश गन्ना उत्पादन में 55 प्रतिशत का योगदान देता है और एथेनॉल उत्पादन में देश में नंबर वन है। सिंचाई के लिए नलकूप और सोलर पैनल आधारित व्यवस्था को बढ़ावा दिया जा रहा है। प्राकृतिक आपदाओं से निपटने के लिए मुख्यमंत्री कृषक दुर्घटना बीमा योजना और अर्ली वार्निंग सिस्टम जैसे उपाय सुनिश्चित किए गए हैं। 89 कृषि विज्ञान केंद्र किसानों और कृषि विश्वविद्यालयों के साथ मिलकर एक मजबूत पारिस्थितिकी तंत्र विकसित कर रहे हैं।

  • वैशाख मास के दिव्य उपाय जो बदल दें आपकी किस्मत और भर दें जीवन में सुख समृद्धि

    वैशाख मास के दिव्य उपाय जो बदल दें आपकी किस्मत और भर दें जीवन में सुख समृद्धि


    नई दिल्ली । वैशाख मास सनातन परंपरा में अत्यंत पवित्र और पुण्यदायी माना जाता है। वर्ष 2026 में इस शुभ महीने की शुरुआत 3 अप्रैल से हो चुकी है और यह 1 मई तक चलेगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस महीने में भगवान विष्णु की पूजा जप और दान करने से अनेक गुना फल प्राप्त होता है। कहा जाता है कि इस दौरान किया गया साधना और सेवा का कार्य हजारों वर्षों की तपस्या के बराबर पुण्य देता है। यही कारण है कि इस माह को आध्यात्मिक उन्नति और जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने का श्रेष्ठ अवसर माना जाता है।

    ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार वैशाख मास में कुछ विशेष उपाय अपनाने से जीवन के कई क्षेत्रों में सुधार संभव है। यदि कोई व्यक्ति अपने घर में सुख समृद्धि बढ़ाना चाहता है तो उसे प्रतिदिन भगवान विष्णु को तुलसी पत्र के साथ शहद अर्पित करना चाहिए और उनके माधव अनंत और अच्युत स्वरूप का ध्यान करना चाहिए। ऐसा करने से घर का वातावरण शांत और समृद्ध बनता है और परिवार में खुशहाली बनी रहती है।

    अगर जीवन में शत्रुओं या विरोधियों की समस्या अधिक है तो इस मास में भगवान विष्णु के माधव के साथ केशव और दामोदर स्वरूप का ध्यान करना लाभकारी माना गया है। तुलसी दल से विधिपूर्वक पूजा करने से नकारात्मक ऊर्जा कम होती है और शत्रु स्वतः ही दूर होने लगते हैं। इसके साथ ही जीवन में सच्चे मित्रों का साथ भी मिलने लगता है।

    जो लोग प्रतियोगी परीक्षाओं या किसी भी प्रकार की प्रतिस्पर्धा में सफलता पाना चाहते हैं उन्हें वैशाख मास में भगवान विष्णु के माधव पद्मनाभ और हृषिकेष स्वरूप का ध्यान करना चाहिए। भगवान को गंध और तुलसी पत्र अर्पित करने से मन एकाग्र होता है और सफलता के मार्ग खुलते हैं। यह उपाय आत्मविश्वास बढ़ाने में भी सहायक माना जाता है।

    दाम्पत्य जीवन को सुखद और मधुर बनाने के लिए इस पवित्र महीने में माधव श्रीधर और पद्मनाभ स्वरूप का ध्यान करना चाहिए। तुलसी पत्र के साथ मिठाई या मिश्री अर्पित करने से पति पत्नी के बीच प्रेम और समझ मजबूत होती है और संबंधों में मधुरता आती है।

    आर्थिक स्थिति को बेहतर बनाने के लिए वैशाख मास में माधव गोविंद और नारायण स्वरूप की उपासना विशेष फलदायी मानी जाती है। भगवान को आटे की पंजीरी में तुलसी दल मिलाकर भोग लगाने से धीरे धीरे धन लाभ के योग बनते हैं और आर्थिक स्थिरता आती है।

    इस प्रकार वैशाख मास केवल धार्मिक दृष्टि से ही नहीं बल्कि जीवन को संतुलित और सफल बनाने के लिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण माना गया है। श्रद्धा और विश्वास के साथ किए गए ये छोटे छोटे उपाय जीवन में बड़े परिवर्तन ला सकते हैं और भगवान विष्णु की कृपा से हर क्षेत्र में उन्नति का मार्ग प्रशस्त कर सकते हैं।

  • आज रंग पंचमी पर लगाएं लड्डू गोपाल को ये प्रिय भोग, घर में बनी रहेगी सुख, समृद्धि और खुशहाली

    आज रंग पंचमी पर लगाएं लड्डू गोपाल को ये प्रिय भोग, घर में बनी रहेगी सुख, समृद्धि और खुशहाली


    नई दिल्ली । रंग पंचमी का त्योहार भगवान श्रीकृष्ण की भक्ति और उनकी लीलाओं से जुड़ा हुआ माना जाता है। होली के पांच दिन बाद आने वाला यह पर्व भक्तों के लिए विशेष महत्व रखता है और इस दिन कई घरों और मंदिरों में लड्डू गोपाल का श्रृंगार और पूजा होती है। माना जाता है कि जिस घर में लड्डू गोपाल की सेवा होती है वहां हमेशा सुख समृद्धि और खुशहाली बनी रहती है।

    भगवान श्रीकृष्ण के बाल स्वरूप लड्डू गोपाल को बच्चे की तरह ही समझा जाता है। उनकी देखभाल और पूजा भी उसी तरह की जाती है जैसे घर के छोटे बच्चों की। त्योहारों के समय उनके लिए विशेष मिठाइयाँ और व्यंजन बनाना एक परंपरा रही है। रंग पंचमी पर भी भक्त लड्डू गोपाल का श्रृंगार करते हैं और उन्हें स्वादिष्ट भोग अर्पित करते हैं।

    इस दिन लड्डू गोपाल को भोग लगाना बेहद शुभ माना जाता है। सबसे प्रिय माना जाने वाला भोग गुजिया है। होली के समय बनने वाली यह मिठाई भगवान को बहुत प्रिय मानी जाती है। कई घरों और मंदिरों में रंग पंचमी पर सबसे पहले गुजिया लड्डू गोपाल को अर्पित की जाती है। माना जाता है कि इससे भगवान प्रसन्न होते हैं और घर में सुख-समृद्धि बनी रहती है। गुजिया के अलावा चंद्रकला और अन्य पारंपरिक मिठाइयाँ भी भोग में लगाई जाती हैं।

    भगवान श्रीकृष्ण को दही बहुत प्रिय है इसलिए इस दिन लड्डू गोपाल को दही या मीठी दही का भोग लगाना भी शुभ माना जाता है। अगर घर में दही से कोई व्यंजन उपलब्ध हो तो उसे भी अर्पित किया जा सकता है। केवल दही और चीनी मिलाकर भोग लगाना भी भगवान को प्रिय होता है और इससे परिवार में प्रेम और आपसी सद्भाव बना रहता है।

    जलेबी और मालपुए का भोग भी इस दिन लगाना विशेष लाभकारी माना जाता है। कई मंदिरों में रंग पंचमी पर जलेबी और मालपुए का भोग विशेष रूप से लगाया जाता है। मान्यता है कि इससे घर में सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है और भगवान की कृपा से घर में खुशहाली आती है।

    धार्मिक मान्यता के अनुसार भगवान को भोग लगाने में सबसे महत्वपूर्ण तत्व श्रद्धा और भक्ति है। अगर भक्त सच्चे मन से भोग अर्पित करता है तो भगवान प्रसन्न होते हैं। इसलिए रंग पंचमी पर लड्डू गोपाल की सेवा करते समय प्रेम और श्रद्धा का विशेष ध्यान रखना चाहिए। भोग लगाने के बाद भगवान की आरती करना और प्रसाद को परिवार में बाँटना भी शुभ माना जाता है।

    रंग पंचमी का त्योहार ब्रज क्षेत्र की परंपराओं से जुड़ा है जहां इस दिन रंगों और गुलाल के साथ भगवान कृष्ण की पूजा होती है। मंदिरों में भजन-कीर्तन और उत्सव का आयोजन किया जाता है। यह पर्व प्रेम भक्ति और आनंद का प्रतीक है और भक्त इस दिन भगवान श्रीकृष्ण से सुख समृद्धि और शांति की कामना करते हैं।

    घर में लड्डू गोपाल की पूजा सुबह स्नान के बाद करें। सबसे पहले उनका श्रृंगार करें उन्हें नए वस्त्र पहनाएं और फूलों से सजाएं। इसके बाद मिठाइयाँ और दही का भोग लगाएं भगवान की आरती करें और परिवार की खुशहाली के लिए प्रार्थना करें। छोटे बच्चों को पूजा में शामिल करना भी शुभ माना जाता है क्योंकि इससे उनमें भगवान के प्रति श्रद्धा और भक्ति बढ़ती है।

  • भेदभाव-स्वार्थ त्यागकर देश के लिए समर्पित हों, तभी भारत संपूर्ण मानवता को शांति-समृद्धि का मार्ग दिखाएगाः मोहन भागवत

    भेदभाव-स्वार्थ त्यागकर देश के लिए समर्पित हों, तभी भारत संपूर्ण मानवता को शांति-समृद्धि का मार्ग दिखाएगाः मोहन भागवत


    जैसलमेर ।
    राजस्थान के जैसलमेर में दादा गुरुदेव आचार्य श्री जिनदत्त सूरी के 871वें चादर महोत्सव के अवसर पर सामाजिक समरसता का अनुपम दृश्य देखने को मिला। इस अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में जैन और सनातन परंपरा के संतों सहित समाज के सभी वर्गों के लोगों का संगम हुआ। कार्यक्रम में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत भी उपस्थित रहे। यह कार्यक्रम पूर्णतः समरसता और सामाजिक एकता के भाव पर आधारित था, जिसमें गच्छाधिपति जिनमणिप्रभ सागर के नेतृत्व में धर्म, तीर्थ एवं संस्कृति की रक्षा का संकल्प दोहराया गया।

    इस अवसर पर डॉ. भागवत ने समाज से केवल उपदेशों तक सीमित न रहकर आचरण में परिवर्तन लाने का आग्रह किया। उन्होंने लोगों से कहा कि अपने मित्रों और परिचितों के दायरे में विभिन्न जातियों, पंथों, भाषाओं और प्रदेशों के लोगों को शामिल करें। जब हम सुख-दुख, खान-पान और सामाजिक जीवन साझा करेंगे, तभी वास्तविक सामाजिक शक्ति प्रकट होगी।

    डॉ. भागवत ने भारतीय संस्कृति की चिरंतनता, विविधता में एकता और सामाजिक समरसता पर प्रकाश डाला। उन्होंने दादा गुरुदेव आचार्य जिन दत्त सूरी की 871 वर्ष पुरानी चादर को भारत की सनातन संस्कृति की जीवटता का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि यह चादर उस सत्य का प्रतीक है जिसे न अग्नि जला सकती है, न शस्त्र काट सकते हैं और न ही जल भिगो सकता है। यह हमारे पूर्वजों द्वारा पहचाने गए उस शाश्वत सत्य का प्रमाण है जो सर्वत्र विद्यमान है। उन्होंने सभी को यह संकल्प दिलाया कि यदि हम आपसी भेदभाव और स्वार्थ को त्यागकर देश के लिए समर्पित हो जाएं, तो भारत न केवल परम वैभव संपन्न राष्ट्र बनेगा बल्कि एक विश्वगुरु के रूप में संपूर्ण मानवता को शांति और समृद्धि का मार्ग दिखाएगा।

    डॉ. भागवत ने जैन दर्शन के अनेकांतवाद सिद्धांत की सराहना करते हुए कहा कि सत्य इतना व्यापक है कि उस तक पहुंचने के मार्ग अलग-अलग होना स्वाभाविक है। उन्होंने कहा कि विविधता वास्तव में एकता का शृंगार और उत्सव है, न कि विभाजन का कारण।

    अपने भाषण में उन्होंने एक रेल यात्रा की मार्मिक घटना का उल्लेख करते हुए बताया कि समाज में झगड़े और संघर्ष इसलिए होते हैं क्योंकि लोग एक-दूसरे को पहचान नहीं पाते और अपने एकत्व के भाव को भूल जाते हैं। जब मनुष्य यह समझ जाता है कि हम सब एक ही चेतना के अंश हैं, तब स्वार्थ और भेदभाव स्वतः समाप्त हो जाते हैं। उन्होंने कहा कि लीग ऑफ नेशंस और संयुक्त राष्ट्र संघ जैसी वैश्विक संस्थाएं युद्धों को नहीं रोक सकतीं। इसके लिए मानव के भीतर करुणा और एकात्मता का भाव होना आवश्यक है।

    इस अवसर पर गच्छाधिपति जिन मणिप्रभसागर महाराज ने कहा कि समरसता ही राष्ट्र की वास्तविक शक्ति है। भारत का ध्वज पूरे विश्व में सम्मानपूर्वक लहराने के लिए सभी संप्रदायों के संतों को एकता और अहिंसा का मार्ग अपनाना होगा। उन्होंने भगवान महावीर और भगवान राम के जीवन का उदाहरण देते हुए कहा कि भारतीय संस्कृति में जातिवाद और छुआछूत का कोई स्थान नहीं है। उन्होंने युवाओं को सही दिशा देने और समाज के प्रत्येक वर्ग को साथ लेकर चलने का आह्वान किया।

    इस अवसर पर संघ और समाज के अनेक वरिष्ठ पदाधिकारी उपस्थित रहे। कार्यक्रम के दौरान चादर महोत्सव की स्मृति में डाक टिकट, विशेष सिक्के और दादा गुरुदेव पर आधारित पुस्तक का भी विमोचन किया गया। महोत्सव समिति के अध्यक्ष एवं महाराष्ट्र सरकार के मंत्री मंगल प्रभात लोढ़ा, संयोजक तेजराज गुलेचा तथा पद्म भूषण डॉ. डीआर मेहता सहित अनेक समाजसेवियों ने आयोजन को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

  • किसानों की समृद्धि के लिए समर्पित भाव से कार्य कर रही है सरकार : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

    किसानों की समृद्धि के लिए समर्पित भाव से कार्य कर रही है सरकार : मुख्यमंत्री डॉ. यादव


    भोपाल।
    मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि राज्य सरकार कृषि कल्याण वर्ष 2026 में किसानों की समृद्धि के लिए समर्पित भाव से कार्य कर रही है। किसानों की फसलों का उचित दाम मिले, इसके लिए उड़द खरीदी पर 600 रुपए प्रति क्विंटल बोनस की घोषणा की गई है। प्रदेश के किसान उड़द लगाएं, ताकि उन्हें इस बोनस का भरपूर लाभ मिल सके और अगली फसल की तैयारी भी हो जाए।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने शुक्रवार को भारतीय किसान संघ के प्रतिनिधियों के साथ समत्व भवन (मुख्यमंत्री निवास) में आयोजित बैठक को संबोधित कर रहे थे। बैठक में अपर मुख्य सचिव डॉ. राजेश राजौरा, नीरज मंडलोई सहित कृषि, राजस्व, सहकारिता, जल संसाधन, उद्यानिकी तथा अन्य विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राज्य सरकार ने गेहूं उत्पादक किसानों को भी गत वर्षों के तरह बोनस की सौगात दी है। इस वर्ष 2026-27 के लिए गेहूं के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर 40 रुपए प्रति क्विंटल बोनस दिया जाएगा। इससे किसानों को 2625 रुपए प्रति क्विंटल गेहूं का भुगतान प्राप्त होगा। राज्य सरकार ने किसानों के हित में अपने संकल्प-पत्र में वर्ष 2028 तक 2700 रुपए प्रति क्विंटल गेहूं खरीदने का संकल्प लिया है। आगामी वर्षों में हम इस लक्ष्य को पूरा कर उससे भी आगे निकलेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बिजली संबंधी शिकायतों का निराकरण स्थानीय स्तर पर करने की व्यवस्था स्थापित करने के निर्देश दिए।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश, देश का फूड बास्केट है, जहां दलहन, तिलहन और सब्जी उत्पादन अच्छी मात्रा में हो रहा है। हमारे राज्य के किसान आगे बढ़ें और समृद्ध हों, इसके लिए सरकार निरंतर किसान हितैषी निर्णय ले रही है। कुछ स्थानों पर गेहूं खरीदी के लिए पंजीयन में कठिनाई सामने आई है। इसे ध्यान में रखकर गेहूँ उपार्जन पंजीयन की अंतिम तिथि 7 मार्च से बढ़ाकर 10 मार्च की जा रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि किसानों को सिंचाई के लिए दिन में बिजली उपलब्ध कराई जाएगी, इससे रात के समय बिजली से सिंचाई के कारण होने वाले संकटों से बचा जा सकेगा। उन्होंने कहा कि भारतीय किसान संघ की ओर से किसानों के हित में प्राप्त सुझावों पर भी राज्य सरकार विचार करेगी।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव की अध्यक्षता में हुई बैठक में भूमि अधिग्रहण पर मुआवजा राशि बढ़ाने, जंगली जानवरों द्वारा फसल नुकसान पर मुआवजे, मंडी अधिनियम के प्रावधानों, फसल गिरदावरी, अविवादित नामांतरण, बंटवारा, सीमांकन के लिए समय-सीमा निर्धारित करने, विद्युत प्रदाय और सिंचाई व्यवस्था जैसे विषयों पर विचार-विमर्श हुआ।

  • मकर संक्रांति  2026: मकर संक्रांति के दिन इन रंगों के कपड़े पहनना होता है शुभ यहां जानें कैसे

    मकर संक्रांति 2026: मकर संक्रांति के दिन इन रंगों के कपड़े पहनना होता है शुभ यहां जानें कैसे


    नई दिल्ली । मकर संक्रांति एक ऐसा त्योहार है जो न केवल भारत में बल्कि दुनिया भर में विशेष श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जाता है। यह त्योहार सूर्य देव के मकर राशि में प्रवेश का प्रतीक है और इसका महत्व बहुत गहरा है। मकर संक्रांति के दिन सूर्य की गति और उनके मकर राशि में प्रवेश के साथ नई ऊर्जा का संचार होता है और पुराने को छोड़कर नए का स्वागत किया जाता है। इस दिन का आध्यात्मिक और भौतिक रूप से बड़ा महत्व है और यह जीवन में शुभ परिवर्तन और समृद्धि का संकेत माना जाता है।इसके साथ ही मकर संक्रांति के दिन एक और परंपरा है जो विशेष रूप से ध्यान आकर्षित करती है और वह है इस दिन विशेष रंगों के कपड़े पहनने की मान्यता। माना जाता है कि सूर्य देव से जुड़े उज्ज्वल और ऊर्जावान रंग पहनने से सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और व्यक्ति का भाग्य और सौभाग्य में वृद्धि होती है। आइए जानते हैं कि इस दिन कौन से रंग शुभ माने जाते हैं और क्यों।

    पीला रंग सूर्य देव का प्रिय रंग

    मकर संक्रांति के दिन पीला रंग पहनने की परंपरा है। पीला रंग सूर्य देव का प्रिय रंग माना जाता है और यह ज्ञान समृद्धि और सकारात्मकता का प्रतीक है। इस दिन पीला रंग पहनने से घर में सुख-शांति और समृद्धि का वास होता है। पीला रंग ऊर्जा और उत्साह को बढ़ावा देता है और इसे शुभ और सौभाग्यवर्धक माना जाता है। इसलिए मकर संक्रांति के दिन पीला रंग पहनकर हम सूर्य देव को सम्मान देते हैं और उनकी कृपा प्राप्त करते हैं।

    नारंगी केसरिया रंग ऊर्जा और आध्यात्मिक शक्ति का प्रतीक

    नारंगी रंग जिसे केसरिया रंग भी कहा जाता है इस दिन एक और शुभ रंग है। नारंगी रंग ऊर्जा उत्साह और आध्यात्मिक शक्ति का संकेत देता है। यह रंग हमें जीवन में नयापन शक्ति और आत्मविश्वास का अहसास कराता है। मकर संक्रांति के दिन नारंगी रंग पहनने से न केवल हमारे भीतर ऊर्जा का संचार होता है बल्कि यह हमें मानसिक शांति और स्थिरता भी प्रदान करता है। इसके अलावा नारंगी रंग सूर्य के ऊर्जा से जुड़ा होता है और यही कारण है कि यह इस दिन विशेष रूप से शुभ माना जाता है।

    लाल रंग शक्ति और साहस का प्रतीक

    लाल रंग जो शक्ति और साहस का प्रतीक माना जाता है मकर संक्रांति पर पहनने के लिए एक और शुभ रंग है। यह रंग जीवन में उत्साह और नकारात्मकता से लड़ने की शक्ति को बढ़ाता है। लाल रंग पहनने से व्यक्ति के भीतर सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह होता है और यह उसे किसी भी विपरीत परिस्थिति से निपटने के लिए मानसिक और शारीरिक ताकत देता है। मकर संक्रांति के दिन लाल रंग पहनकर हम अपनी आंतरिक शक्ति को जागृत कर सकते हैं और जीवन में सफलता की ओर बढ़ सकते हैं।

    सुनहरा रंग वैभव और सफलता का प्रतीक

    सुनहरा रंग जो सूर्य देव के साथ जुड़ा हुआ है वैभव सफलता और तेज का प्रतीक है। मकर संक्रांति के दिन सुनहरा रंग पहनना शुभ माना जाता है क्योंकि यह न केवल सूर्य के उज्ज्वल प्रकाश से जुड़ा है बल्कि यह व्यक्ति को समृद्धि और सफलता की दिशा में प्रेरित करता है। सुनहरा रंग पहनने से व्यक्ति के जीवन में खुशहाली और सफलता आती है। इसके अलावा यह रंग किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत के लिए आदर्श माना जाता है।

    किन रंगों से बचें

    जहां मकर संक्रांति पर कुछ रंगों को पहनना शुभ माना जाता है वहीं कुछ रंगों से बचने की भी सलाह दी जाती है। काला और गहरा नीला रंग इस दिन पहनने से परहेज किया जाता है क्योंकि इन्हें नकारात्मक ऊर्जा से जोड़ा जाता है। इन रंगों का पहनना व्यक्ति की ऊर्जा को कमजोर कर सकता है और यह शुभता में कमी ला सकता है। इसलिए इस दिन काले और गहरे नीले रंग के कपड़े पहनने से बचना चाहिए।

    मकर संक्रांति के दिन की अन्य परंपराएं

    मकर संक्रांति का त्योहार सिर्फ रंगों से जुड़ा नहीं है बल्कि इस दिन के साथ कई धार्मिक और सामाजिक परंपराएं जुड़ी हुई हैं। इस दिन सूर्य देव को अर्घ्य देकर दान-पुण्य और स्नान करने से सुख-समृद्धि स्वास्थ्य और सफलता की प्राप्ति होती है। मकर संक्रांति के दिन तिल और गुड़ के लड्डू भी बांटे जाते हैं जो एकता और मित्रता का प्रतीक होते हैं।मकर संक्रांति एक ऐसा पर्व है जो सूर्य देव के प्रति आस्था और विश्वास का प्रतीक है। इस दिन विशेष रंगों के कपड़े पहनकर हम अपनी जीवन शक्ति को सकारात्मक दिशा में मोड़ सकते हैं और सूर्य देव की कृपा प्राप्त कर सकते हैं। पीला नारंगी लाल और सुनहरा रंग पहनने से न केवल शुभता और समृद्धि मिलती है बल्कि यह ऊर्जा और उत्साह से भी भर देता है। तो इस मकर संक्रांति इन रंगों के कपड़े पहनें और सूर्य देव से शुभ आशीर्वाद प्राप्त करें!

  • हेमंत खंडेलवाल ने महाकाल मंदिर से शिव उपासना अभियान की शुरुआत, सोमनाथ मंदिर हमले के बाद उठाया कदम

    हेमंत खंडेलवाल ने महाकाल मंदिर से शिव उपासना अभियान की शुरुआत, सोमनाथ मंदिर हमले के बाद उठाया कदम


    उज्जैन । आज सुबह बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने उज्जैन के प्रसिद्ध महाकाल मंदिर में दर्शन कर एक विशेष अभियान की शुरुआत की। यह अभियान विशेष रूप से सोमनाथ मंदिर पर हुए हमले के बाद चलाया जा रहा है, जिसका उद्देश्य देशभर में भगवान शिव की उपासना के माध्यम से समाज में शांति समृद्धि और सौहार्द बनाए रखना है। इस अभियान को प्रधानमंत्री की ओर से पूरे देश में एकजुटता और सामूहिक शांति की भावना के तहत शुरू किया गया है।

    महाकाल मंदिर में दर्शन के बाद खंडेलवाल ने मीडिया से बात करते हुए बताया कि सोमनाथ मंदिर पर हुए हमले के खिलाफ पूरे देश में एक जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि नागरिकों को भगवान शिव की आराधना करनी चाहिए और उनके आशीर्वाद से देश में शांति और समृद्धि की स्थापना हो सकती है। खंडेलवाल ने इस अभियान के तहत महाकाल मंदिर में पार्टी के विधायकों जिला अध्यक्ष और अन्य पार्टी पदाधिकारियों के साथ पूजा अर्चना की और जयकारा लगाया।

    बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष ने अपील की कि देशभर के लोग शिव मंदिरों में जाकर ‘ॐ नमः शिवाय’ का जाप करें और देश के हर कोने में शांति समृद्धि और सामाजिक सौहार्द की स्थापना के लिए प्रार्थना करें। उन्होंने कहा कि भगवान महाकाल सभी के जीवन में शांति और समृद्धि प्रदान करें और हम सभी को मिलकर देश की सेवा करने की शक्ति दें।खंडेलवाल ने इस अभियान की शुरुआत महाकाल मंदिर से करने का कारण बताते हुए कहा कि भगवान महाकाल का आशीर्वाद हम सबके लिए बहुत महत्वपूर्ण है। यह मंदिर न केवल धार्मिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक दृष्टि से भी यह जगह पूरी दुनिया में श्रद्धा का केंद्र है।

    प्रदेश अध्यक्ष ने यह भी कहा कि इस अभियान के जरिए पार्टी का उद्देश्य केवल धार्मिक जागरूकता फैलाना नहीं है, बल्कि समाज में एकता और भाईचारे की भावना को मजबूत करना भी है। सोमनाथ मंदिर पर हुए हमले के बाद देशभर में इस अभियान को लेकर आक्रोश है और इससे जुड़े लोग इसे एकता की शक्ति के रूप में देख रहे हैं।महाकाल मंदिर से अभियान की शुरुआत के साथ ही बीजेपी ने यह संदेश दिया कि हम सभी को देश की सुरक्षा और समृद्धि के लिए सामूहिक प्रयास करने होंगे। यह कदम न केवल धार्मिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है बल्कि समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने के लिए भी यह एक प्रेरणास्त्रोत साबित हो सकता है।

  • प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी ने नव वर्ष 2026 के अवसर पर सभी को शुभकामनाएं दीं।

    प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी ने नव वर्ष 2026 के अवसर पर सभी को शुभकामनाएं दीं।


    नई दिल्ली:प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी ने नव वर्ष 2026 के अवसर पर देशवासियों को हार्दिक शुभकामनाएं दी हैं। प्रधानमंत्री ने इस अवसर पर सभी नागरिकों के लिए अच्छे स्वास्थ्य, समृद्धि और खुशहाली की कामना की है। उन्होंने कहा कि नया वर्ष न केवल व्यक्तिगत जीवन में प्रगति और सफलता लाए बल्कि समाज में शांति और सहयोग की भावना को भी बढ़ावा दे।

    प्रधानमंत्री ने अपनी शुभकामना संदेश में कहा, सभी को नव वर्ष 2026 की हार्दिक शुभकामनाएं! आने वाला वर्ष आपके लिए अच्छे स्वास्थ्य और समृद्धि लेकर आए, आपके प्रयासों में सफलता और आपके सभी कार्यों में पूर्णता प्रदान करे। मैं हमारे समाज में शांति और सुख की कामना करता हूं।
    श्री मोदी ने इस संदेश के माध्यम से नागरिकों को प्रेरित किया कि वे नए वर्ष में न केवल अपने व्यक्तिगत जीवन में उन्नति करें, बल्कि समाज और राष्ट्र के विकास में भी योगदान दें। उन्होंने कहा कि नए साल का आगमन नये अवसर, नए संकल्प और नई ऊर्जा लेकर आता है। यह समय है अपने जीवन के लक्ष्यों को पुनः निर्धारित करने, सकारात्मक सोच अपनाने और अपने प्रयासों में सुधार करने का।

    प्रधानमंत्री ने लोगों से आग्रह किया कि वे जीवन में संतुलन बनाए रखें और सभी कार्यों में ईमानदारी, धैर्य और समर्पण के साथ सफलता प्राप्त करें। उन्होंने कहा कि अच्छे स्वास्थ्य और समृद्धि के साथ-साथ मन में शांति और आत्मविश्वास होना भी अत्यंत आवश्यक है। जीवन में कठिनाइयों और चुनौतियों का सामना धैर्य और सकारात्मक दृष्टिकोण के साथ करना चाहिए।प्रधानमंत्री ने यह भी उल्लेख किया कि हर नया वर्ष व्यक्ति के जीवन में नयी उम्मीदों और प्रेरणा का स्रोत होता है। नए साल में हम न केवल अपने व्यक्तिगत विकास पर ध्यान दें, बल्कि अपने समाज के कल्याण के लिए भी योगदान करें। उन्होंने बताया कि व्यक्तिगत प्रयासों और समाजिक जिम्मेदारियों के संतुलन से ही एक संतुलित और सफल जीवन संभव है।

    इस अवसर पर प्रधानमंत्री ने देशवासियों को यह संदेश दिया कि नव वर्ष केवल उत्सव का समय नहीं है, बल्कि यह अपने जीवन को बेहतर बनाने, नई उपलब्धियां हासिल करने और समाज में सकारात्मक बदलाव लाने का समय है। उन्होंने उम्मीद जताई कि 2026 का वर्ष सभी के लिए खुशहाली, सफलता और शांति लेकर आए।प्रधानमंत्री के इस संदेश ने देशवासियों में नए वर्ष 2026 को उत्साह, सकारात्मक ऊर्जा और आशाओं के साथ करने की भावना पैदा की है। उनके शब्दों ने सभी को प्रेरित किया कि वे जीवन के हर क्षेत्र में बेहतर परिणाम प्राप्त करने के लिए मेहनत करें और समाज में सहयोग और शांति फैलाने के लिए प्रयासरत रहें।नव वर्ष 2026 पर प्रधानमंत्री के इस संदेश ने देशवासियों में नई आशाओं और संकल्पों की भावना जगाई है, और सभी को अपने जीवन और समाज के लिए सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाने की प्रेरणा दी है।

  • शनिवार को शनि पूजा और दान: जानें 5 महत्वपूर्ण उपाय जो लाएंगे समृद्धि और खुशहाली

    शनिवार को शनि पूजा और दान: जानें 5 महत्वपूर्ण उपाय जो लाएंगे समृद्धि और खुशहाली


    नई दिल्ली । शनि देव को न्याय का देवता माना जाता है जो हर व्यक्ति को उसके कर्मों के आधार पर फल देते हैं। शनि के प्रभाव से बचने के लिए शनिवार का दिन अत्यंत महत्वपूर्ण होता है। अगर किसी व्यक्ति की कुंडली में शनि की साढ़ेसाती या ढैय्या चल रही हो तो शनि देव की पूजा और दान से उन अशुभ प्रभावों को कम किया जा सकता है। इस दिन किए गए कुछ विशेष दान जीवन में सुख समृद्धि और मानसिक शांति का संचार करते हैं। आइए जानते हैं शनिवार को किए जाने वाले 5 प्रभावी दान के उपायों के बारे में:

    काली उड़द का दान

    शनिवार के दिन काली उड़द का दान करना अत्यंत लाभकारी माना गया है। इसे किसी गरीब ब्राह्मण या मजदूर को दान में देने से नौकरी या व्यापार संबंधी परेशानियों का समाधान होता है। यह शनि देव को प्रसन्न करने और उनकी कृपा प्राप्त करने का एक प्रभावशाली उपाय है। काली उड़द का दान शनि के प्रभाव को कम कर जीवन में खुशहाली और समृद्धि लाता है।

    काले तिल का दान

    काले तिल को शनि ग्रह से जोड़ा गया है। शनिवार के दिन काले तिल का दान करने से शनि के अशुभ प्रभाव कम होते हैं और मानसिक शांति मिलती है। शनि दोष से राहत पाने के लिए काले तिल का दान विशेष रूप से प्रभावशाली माना जाता है। यह उपाय शनि के प्रकोप को कम करने और सुख-समृद्धि की प्राप्ति के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।

     लोहे का दान

    शनि देव का धातु तत्व लोहा है। इसलिए शनिवार को लोहे की किसी भी उपयोगी वस्तु जैसे कटोरी कढ़ाई तवा या लोहे का सिक्का दान करना लाभकारी माना जाता है। ऐसा दान करने से शनि दोष शांत होता है और शनि देव की विशेष कृपा प्राप्त होती है। यह उपाय जीवन में आर्थिक स्थिति सुधारने और शनि के कुप्रभाव को कम करने में सहायक है।

    काले जूते-चप्पल का दान

    काले जूते या चप्पल का दान शनि देव की कृपा को आकर्षित करने का एक और प्रभावशाली उपाय है। इससे न केवल शनि का प्रभाव कम होता है बल्कि आर्थिक उन्नति भी होती है। काले जूते या चप्पल का दान करने से जीवन के संघर्ष और नौकरी या यात्रा में आने वाली बाधाओं से राहत मिलती है। यह दान शनि प्रकोप को शांत करने और जीवन को आसान बनाने में मदद करता है।

    सरसों के तेल का दान

    शनिवार को लोहे की कटोरी में सरसों का तेल भरकर उसे किसी जरूरतमंद को दान करना या पीपल के पेड़ के नीचे दीपक जलाना भी अत्यंत लाभकारी है। यह दान जीवन में आर्थिक स्थिरता सम्मान और प्रतिष्ठा प्राप्त करने का एक महत्वपूर्ण उपाय है। शनि देव को प्रसन्न करने के लिए यह एक प्रमुख उपाय माना जाता है जो विशेष रूप से शनिदोष और आर्थिक संकट से उबरने में मदद करता है।

    यदि आप शनिवार को ऊपर बताए गए पांच उपायों को नियमित रूप से करते हैं तो शनि देव का प्रभाव आपके जीवन में सकारात्मक दिशा में बदल सकता है। शनि की पूजा और दान से न केवल शनि दोष कम होते हैं बल्कि व्यक्ति के घर स्वास्थ्य और व्यवसाय में सुख और समृद्धि का प्रवाह भी सुनिश्चित होता है। इसलिए शनि देव के प्रति श्रद्धा और समर्पण से जीवन में खुशहाली और समृद्धि आएगी।

  • वास्तु से बढ़ाएं धन और समृद्धि: घर में रखें ये 4 चीजें, लक्ष्मी का कृपालु वरदान मिलेगा

    वास्तु से बढ़ाएं धन और समृद्धि: घर में रखें ये 4 चीजें, लक्ष्मी का कृपालु वरदान मिलेगा

    भारत,। सभी गृहस्थ स्थान  में  जीवन में  धन-संपत्ति का घर में स्थायित्व बनाए रखना हर किसी की इच्छा होती है। लेकिन कभी-कभी जेब में पैसा टिकता नहीं और तिजोरी भी खाली रहती है। वास्तु शास्त्र के अनुसार, घर में सकारात्मक ऊर्जा का संतुलन और सही दिशा में रखी गई विशेष वस्तुएं आपके जीवन में समृद्धि ला सकती हैं। कई सफल और धनवान लोगों के घरों में यही चीजें पाई जाती हैं, जो केवल सजावट नहीं बल्कि आर्थिक और मानसिक स्थिरता का प्रतीक भी हैं।आइए जानते हैं वास्तु शास्त्र के अनुसार वो 4 शक्तिशाली वस्तुएं, जो धन और सकारात्मक ऊर्जा को आकर्षित करती हैं।

    1. फेंगशुई मेंढक

    फेंगशुई मेंढक को धन, सौभाग्य और आर्थिक अवसर लाने वाला प्रतीक माना जाता है। इसे चीन का धन का मेंढक भी कहा जाता है। वास्तु के अनुसार, इसे घर के मुख्य द्वार की ओर मुख करके रखना चाहिए। हंसते हुए मेंढक की मुद्रा और उसकी मुद्रा में रखा सिक्का घर में धन का प्रवाह बढ़ाता है। यह उपाय घर में नई आर्थिक संभावनाओं और व्यापारिक अवसरों को आकर्षित करता है।

    2. मुस्कुराते हुए बुद्ध

    मुस्कुराते हुए बुद्ध की मूर्ति घर में सुख-शांति और सकारात्मक ऊर्जा लाती है। उनकी मुस्कान तनाव को दूर करती है और घर का वातावरण खुशहाल बनाती है। वास्तु में इसे मुख्य द्वार की ओर मुख करके रखने की सलाह दी जाती है। ऐसा करने से परिवार के सदस्यों के बीच सामंजस्य बढ़ता है और घर में सुख और सौभाग्य का प्रवेश होता है।

    3. मनी प्लांट

    मनी प्लांट वास्तु शास्त्र में अत्यंत पवित्र पौधा माना जाता है। इसके हरे-भरे पत्ते जीवन में प्रगति, सफलता और वित्तीय समृद्धि का प्रतीक हैं। इसे घर की दक्षिण-पूर्व दिशा में रखना शुभ माना जाता है। मनी प्लांट घर के अंदर या गलियों में उत्तर-पूर्व दिशा में रखने से धन हानि या बाधाएं आ सकती हैं। नियमित देखभाल और साफ-सुथरा पानी देने से इसका प्रभाव और अधिक मजबूत होता है।

    4. बहता पानी

    वास्तु में बहता पानी जीवन में धन और ऊर्जा के निरंतर प्रवाह का प्रतीक है। घर के मुख्य द्वार या उत्तर-उत्तरपूर्व दिशा में छोटा फव्वारा या पानी की व्यवस्था रखने से घर में सुख और सकारात्मकता बढ़ती है। पानी का बहाव जीवन में स्थिरता और तरक्की को बढ़ाता है। ध्यान रहे कि पानी साफ और लगातार बहता रहे, यह आर्थिक स्थिरता और सौभाग्य के लिए महत्वपूर्ण है।वास्तु शास्त्र कहता है कि इन चार वस्तुओं को सही दिशा में रखने से केवल घर में धन-संपत्ति बढ़ती ही नहीं, बल्कि मानसिक स्थिरता और सकारात्मक सोच भी आती है। ये उपाय घर के वातावरण को आनंदमय बनाते हैं और लक्ष्मी जी की कृपा बनाए रखते हैं।यदि आप भी चाहते हैं कि आपकी तिजोरी हमेशा भरी रहे और जीवन में धन का स्थायी प्रवाह बना रहे, तो आज ही इन उपायों को अपने घर में अपनाएं।