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  • हेमंत खंडेलवाल ने महाकाल मंदिर से शिव उपासना अभियान की शुरुआत, सोमनाथ मंदिर हमले के बाद उठाया कदम

    हेमंत खंडेलवाल ने महाकाल मंदिर से शिव उपासना अभियान की शुरुआत, सोमनाथ मंदिर हमले के बाद उठाया कदम


    उज्जैन । आज सुबह बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने उज्जैन के प्रसिद्ध महाकाल मंदिर में दर्शन कर एक विशेष अभियान की शुरुआत की। यह अभियान विशेष रूप से सोमनाथ मंदिर पर हुए हमले के बाद चलाया जा रहा है, जिसका उद्देश्य देशभर में भगवान शिव की उपासना के माध्यम से समाज में शांति समृद्धि और सौहार्द बनाए रखना है। इस अभियान को प्रधानमंत्री की ओर से पूरे देश में एकजुटता और सामूहिक शांति की भावना के तहत शुरू किया गया है।

    महाकाल मंदिर में दर्शन के बाद खंडेलवाल ने मीडिया से बात करते हुए बताया कि सोमनाथ मंदिर पर हुए हमले के खिलाफ पूरे देश में एक जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि नागरिकों को भगवान शिव की आराधना करनी चाहिए और उनके आशीर्वाद से देश में शांति और समृद्धि की स्थापना हो सकती है। खंडेलवाल ने इस अभियान के तहत महाकाल मंदिर में पार्टी के विधायकों जिला अध्यक्ष और अन्य पार्टी पदाधिकारियों के साथ पूजा अर्चना की और जयकारा लगाया।

    बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष ने अपील की कि देशभर के लोग शिव मंदिरों में जाकर ‘ॐ नमः शिवाय’ का जाप करें और देश के हर कोने में शांति समृद्धि और सामाजिक सौहार्द की स्थापना के लिए प्रार्थना करें। उन्होंने कहा कि भगवान महाकाल सभी के जीवन में शांति और समृद्धि प्रदान करें और हम सभी को मिलकर देश की सेवा करने की शक्ति दें।खंडेलवाल ने इस अभियान की शुरुआत महाकाल मंदिर से करने का कारण बताते हुए कहा कि भगवान महाकाल का आशीर्वाद हम सबके लिए बहुत महत्वपूर्ण है। यह मंदिर न केवल धार्मिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक दृष्टि से भी यह जगह पूरी दुनिया में श्रद्धा का केंद्र है।

    प्रदेश अध्यक्ष ने यह भी कहा कि इस अभियान के जरिए पार्टी का उद्देश्य केवल धार्मिक जागरूकता फैलाना नहीं है, बल्कि समाज में एकता और भाईचारे की भावना को मजबूत करना भी है। सोमनाथ मंदिर पर हुए हमले के बाद देशभर में इस अभियान को लेकर आक्रोश है और इससे जुड़े लोग इसे एकता की शक्ति के रूप में देख रहे हैं।महाकाल मंदिर से अभियान की शुरुआत के साथ ही बीजेपी ने यह संदेश दिया कि हम सभी को देश की सुरक्षा और समृद्धि के लिए सामूहिक प्रयास करने होंगे। यह कदम न केवल धार्मिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है बल्कि समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने के लिए भी यह एक प्रेरणास्त्रोत साबित हो सकता है।

  • प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी ने नव वर्ष 2026 के अवसर पर सभी को शुभकामनाएं दीं।

    प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी ने नव वर्ष 2026 के अवसर पर सभी को शुभकामनाएं दीं।


    नई दिल्ली:प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी ने नव वर्ष 2026 के अवसर पर देशवासियों को हार्दिक शुभकामनाएं दी हैं। प्रधानमंत्री ने इस अवसर पर सभी नागरिकों के लिए अच्छे स्वास्थ्य, समृद्धि और खुशहाली की कामना की है। उन्होंने कहा कि नया वर्ष न केवल व्यक्तिगत जीवन में प्रगति और सफलता लाए बल्कि समाज में शांति और सहयोग की भावना को भी बढ़ावा दे।

    प्रधानमंत्री ने अपनी शुभकामना संदेश में कहा, सभी को नव वर्ष 2026 की हार्दिक शुभकामनाएं! आने वाला वर्ष आपके लिए अच्छे स्वास्थ्य और समृद्धि लेकर आए, आपके प्रयासों में सफलता और आपके सभी कार्यों में पूर्णता प्रदान करे। मैं हमारे समाज में शांति और सुख की कामना करता हूं।
    श्री मोदी ने इस संदेश के माध्यम से नागरिकों को प्रेरित किया कि वे नए वर्ष में न केवल अपने व्यक्तिगत जीवन में उन्नति करें, बल्कि समाज और राष्ट्र के विकास में भी योगदान दें। उन्होंने कहा कि नए साल का आगमन नये अवसर, नए संकल्प और नई ऊर्जा लेकर आता है। यह समय है अपने जीवन के लक्ष्यों को पुनः निर्धारित करने, सकारात्मक सोच अपनाने और अपने प्रयासों में सुधार करने का।

    प्रधानमंत्री ने लोगों से आग्रह किया कि वे जीवन में संतुलन बनाए रखें और सभी कार्यों में ईमानदारी, धैर्य और समर्पण के साथ सफलता प्राप्त करें। उन्होंने कहा कि अच्छे स्वास्थ्य और समृद्धि के साथ-साथ मन में शांति और आत्मविश्वास होना भी अत्यंत आवश्यक है। जीवन में कठिनाइयों और चुनौतियों का सामना धैर्य और सकारात्मक दृष्टिकोण के साथ करना चाहिए।प्रधानमंत्री ने यह भी उल्लेख किया कि हर नया वर्ष व्यक्ति के जीवन में नयी उम्मीदों और प्रेरणा का स्रोत होता है। नए साल में हम न केवल अपने व्यक्तिगत विकास पर ध्यान दें, बल्कि अपने समाज के कल्याण के लिए भी योगदान करें। उन्होंने बताया कि व्यक्तिगत प्रयासों और समाजिक जिम्मेदारियों के संतुलन से ही एक संतुलित और सफल जीवन संभव है।

    इस अवसर पर प्रधानमंत्री ने देशवासियों को यह संदेश दिया कि नव वर्ष केवल उत्सव का समय नहीं है, बल्कि यह अपने जीवन को बेहतर बनाने, नई उपलब्धियां हासिल करने और समाज में सकारात्मक बदलाव लाने का समय है। उन्होंने उम्मीद जताई कि 2026 का वर्ष सभी के लिए खुशहाली, सफलता और शांति लेकर आए।प्रधानमंत्री के इस संदेश ने देशवासियों में नए वर्ष 2026 को उत्साह, सकारात्मक ऊर्जा और आशाओं के साथ करने की भावना पैदा की है। उनके शब्दों ने सभी को प्रेरित किया कि वे जीवन के हर क्षेत्र में बेहतर परिणाम प्राप्त करने के लिए मेहनत करें और समाज में सहयोग और शांति फैलाने के लिए प्रयासरत रहें।नव वर्ष 2026 पर प्रधानमंत्री के इस संदेश ने देशवासियों में नई आशाओं और संकल्पों की भावना जगाई है, और सभी को अपने जीवन और समाज के लिए सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाने की प्रेरणा दी है।

  • शनिवार को शनि पूजा और दान: जानें 5 महत्वपूर्ण उपाय जो लाएंगे समृद्धि और खुशहाली

    शनिवार को शनि पूजा और दान: जानें 5 महत्वपूर्ण उपाय जो लाएंगे समृद्धि और खुशहाली


    नई दिल्ली । शनि देव को न्याय का देवता माना जाता है जो हर व्यक्ति को उसके कर्मों के आधार पर फल देते हैं। शनि के प्रभाव से बचने के लिए शनिवार का दिन अत्यंत महत्वपूर्ण होता है। अगर किसी व्यक्ति की कुंडली में शनि की साढ़ेसाती या ढैय्या चल रही हो तो शनि देव की पूजा और दान से उन अशुभ प्रभावों को कम किया जा सकता है। इस दिन किए गए कुछ विशेष दान जीवन में सुख समृद्धि और मानसिक शांति का संचार करते हैं। आइए जानते हैं शनिवार को किए जाने वाले 5 प्रभावी दान के उपायों के बारे में:

    काली उड़द का दान

    शनिवार के दिन काली उड़द का दान करना अत्यंत लाभकारी माना गया है। इसे किसी गरीब ब्राह्मण या मजदूर को दान में देने से नौकरी या व्यापार संबंधी परेशानियों का समाधान होता है। यह शनि देव को प्रसन्न करने और उनकी कृपा प्राप्त करने का एक प्रभावशाली उपाय है। काली उड़द का दान शनि के प्रभाव को कम कर जीवन में खुशहाली और समृद्धि लाता है।

    काले तिल का दान

    काले तिल को शनि ग्रह से जोड़ा गया है। शनिवार के दिन काले तिल का दान करने से शनि के अशुभ प्रभाव कम होते हैं और मानसिक शांति मिलती है। शनि दोष से राहत पाने के लिए काले तिल का दान विशेष रूप से प्रभावशाली माना जाता है। यह उपाय शनि के प्रकोप को कम करने और सुख-समृद्धि की प्राप्ति के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।

     लोहे का दान

    शनि देव का धातु तत्व लोहा है। इसलिए शनिवार को लोहे की किसी भी उपयोगी वस्तु जैसे कटोरी कढ़ाई तवा या लोहे का सिक्का दान करना लाभकारी माना जाता है। ऐसा दान करने से शनि दोष शांत होता है और शनि देव की विशेष कृपा प्राप्त होती है। यह उपाय जीवन में आर्थिक स्थिति सुधारने और शनि के कुप्रभाव को कम करने में सहायक है।

    काले जूते-चप्पल का दान

    काले जूते या चप्पल का दान शनि देव की कृपा को आकर्षित करने का एक और प्रभावशाली उपाय है। इससे न केवल शनि का प्रभाव कम होता है बल्कि आर्थिक उन्नति भी होती है। काले जूते या चप्पल का दान करने से जीवन के संघर्ष और नौकरी या यात्रा में आने वाली बाधाओं से राहत मिलती है। यह दान शनि प्रकोप को शांत करने और जीवन को आसान बनाने में मदद करता है।

    सरसों के तेल का दान

    शनिवार को लोहे की कटोरी में सरसों का तेल भरकर उसे किसी जरूरतमंद को दान करना या पीपल के पेड़ के नीचे दीपक जलाना भी अत्यंत लाभकारी है। यह दान जीवन में आर्थिक स्थिरता सम्मान और प्रतिष्ठा प्राप्त करने का एक महत्वपूर्ण उपाय है। शनि देव को प्रसन्न करने के लिए यह एक प्रमुख उपाय माना जाता है जो विशेष रूप से शनिदोष और आर्थिक संकट से उबरने में मदद करता है।

    यदि आप शनिवार को ऊपर बताए गए पांच उपायों को नियमित रूप से करते हैं तो शनि देव का प्रभाव आपके जीवन में सकारात्मक दिशा में बदल सकता है। शनि की पूजा और दान से न केवल शनि दोष कम होते हैं बल्कि व्यक्ति के घर स्वास्थ्य और व्यवसाय में सुख और समृद्धि का प्रवाह भी सुनिश्चित होता है। इसलिए शनि देव के प्रति श्रद्धा और समर्पण से जीवन में खुशहाली और समृद्धि आएगी।

  • वास्तु से बढ़ाएं धन और समृद्धि: घर में रखें ये 4 चीजें, लक्ष्मी का कृपालु वरदान मिलेगा

    वास्तु से बढ़ाएं धन और समृद्धि: घर में रखें ये 4 चीजें, लक्ष्मी का कृपालु वरदान मिलेगा

    भारत,। सभी गृहस्थ स्थान  में  जीवन में  धन-संपत्ति का घर में स्थायित्व बनाए रखना हर किसी की इच्छा होती है। लेकिन कभी-कभी जेब में पैसा टिकता नहीं और तिजोरी भी खाली रहती है। वास्तु शास्त्र के अनुसार, घर में सकारात्मक ऊर्जा का संतुलन और सही दिशा में रखी गई विशेष वस्तुएं आपके जीवन में समृद्धि ला सकती हैं। कई सफल और धनवान लोगों के घरों में यही चीजें पाई जाती हैं, जो केवल सजावट नहीं बल्कि आर्थिक और मानसिक स्थिरता का प्रतीक भी हैं।आइए जानते हैं वास्तु शास्त्र के अनुसार वो 4 शक्तिशाली वस्तुएं, जो धन और सकारात्मक ऊर्जा को आकर्षित करती हैं।

    1. फेंगशुई मेंढक

    फेंगशुई मेंढक को धन, सौभाग्य और आर्थिक अवसर लाने वाला प्रतीक माना जाता है। इसे चीन का धन का मेंढक भी कहा जाता है। वास्तु के अनुसार, इसे घर के मुख्य द्वार की ओर मुख करके रखना चाहिए। हंसते हुए मेंढक की मुद्रा और उसकी मुद्रा में रखा सिक्का घर में धन का प्रवाह बढ़ाता है। यह उपाय घर में नई आर्थिक संभावनाओं और व्यापारिक अवसरों को आकर्षित करता है।

    2. मुस्कुराते हुए बुद्ध

    मुस्कुराते हुए बुद्ध की मूर्ति घर में सुख-शांति और सकारात्मक ऊर्जा लाती है। उनकी मुस्कान तनाव को दूर करती है और घर का वातावरण खुशहाल बनाती है। वास्तु में इसे मुख्य द्वार की ओर मुख करके रखने की सलाह दी जाती है। ऐसा करने से परिवार के सदस्यों के बीच सामंजस्य बढ़ता है और घर में सुख और सौभाग्य का प्रवेश होता है।

    3. मनी प्लांट

    मनी प्लांट वास्तु शास्त्र में अत्यंत पवित्र पौधा माना जाता है। इसके हरे-भरे पत्ते जीवन में प्रगति, सफलता और वित्तीय समृद्धि का प्रतीक हैं। इसे घर की दक्षिण-पूर्व दिशा में रखना शुभ माना जाता है। मनी प्लांट घर के अंदर या गलियों में उत्तर-पूर्व दिशा में रखने से धन हानि या बाधाएं आ सकती हैं। नियमित देखभाल और साफ-सुथरा पानी देने से इसका प्रभाव और अधिक मजबूत होता है।

    4. बहता पानी

    वास्तु में बहता पानी जीवन में धन और ऊर्जा के निरंतर प्रवाह का प्रतीक है। घर के मुख्य द्वार या उत्तर-उत्तरपूर्व दिशा में छोटा फव्वारा या पानी की व्यवस्था रखने से घर में सुख और सकारात्मकता बढ़ती है। पानी का बहाव जीवन में स्थिरता और तरक्की को बढ़ाता है। ध्यान रहे कि पानी साफ और लगातार बहता रहे, यह आर्थिक स्थिरता और सौभाग्य के लिए महत्वपूर्ण है।वास्तु शास्त्र कहता है कि इन चार वस्तुओं को सही दिशा में रखने से केवल घर में धन-संपत्ति बढ़ती ही नहीं, बल्कि मानसिक स्थिरता और सकारात्मक सोच भी आती है। ये उपाय घर के वातावरण को आनंदमय बनाते हैं और लक्ष्मी जी की कृपा बनाए रखते हैं।यदि आप भी चाहते हैं कि आपकी तिजोरी हमेशा भरी रहे और जीवन में धन का स्थायी प्रवाह बना रहे, तो आज ही इन उपायों को अपने घर में अपनाएं।

  • चैत्र नवरात्रि की शुरुआत 19 मार्च से मां दुर्गा की पूजा से मिलेगा जीवन में सुख और समृद्धि चैत्रनवरात्रि2026

    चैत्र नवरात्रि की शुरुआत 19 मार्च से मां दुर्गा की पूजा से मिलेगा जीवन में सुख और समृद्धि चैत्रनवरात्रि2026



    नई दिल्‍ली ।
    हिंदू कैलेंडर के अनुसार चैत्र माह का अत्यधिक धार्मिक महत्व है। इसी माह से हिंदू नववर्ष की शुरुआत मानी जाती है। अंग्रेजी कैलेंडर के हिसाब से जहां नववर्ष 1 जनवरी को आता है वहीं हिंदू नववर्ष चैत्र माह की शुक्ल प्रतिपदा से शुरू होता है। इसी दिन से चैत्र नवरात्रि की शुरुआत भी होती है। यह एक प्रमुख धार्मिक पर्व है जिसमें मां दुर्गा के नौ रूपों की पूजा-अर्चना की जाती है। चैत्र नवरात्रि का आयोजन विशेष रूप से शांति समृद्धि और सुख-शांति की प्राप्ति के लिए किया जाता है। इस दौरान भक्त मां दुर्गा की उपासना के साथ-साथ व्रत भी रखते हैं ताकि उनका जीवन खुशहाल और समृद्ध हो सके।

    चैत्र नवरात्रि 2026: तिथि और अवधि

    चैत्र नवरात्रि 2026 का आरंभ 19 मार्च को होगा जो कि चैत्र शुक्ल प्रतिपदा तिथि से शुरू होता है। यह दिन विशेष रूप से कलश स्थापना के लिए महत्वपूर्ण होता है। इसके बाद नवरात्रि के नौ दिन मां दुर्गा की उपासना का सिलसिला चलता है। नवमी तिथि 27 मार्च को आएगी और इसी दिन राम नवमी का पर्व भी मनाया जाएगा। इस दिन विशेष रूप से राम भक्तों द्वारा श्रीराम के जन्मोत्सव की पूजा की जाती है। चैत्र नवरात्रि की समाप्ति 27 मार्च को होगी। इस दिन विशेष रूप से दिनभर देवी पूजा की जाती है और उपवासी भक्तों द्वारा व्रत का पारण किया जाता है।

    चैत्र नवरात्रि 2026: कलश स्थापना मुहूर्त

    चैत्र नवरात्रि के पहले दिन कलश स्थापना की जाती है जिसे घटस्थापना भी कहा जाता है। इस दिन विशेष रूप से एक पवित्र मिट्टी के कलश को घर के पूजा स्थान पर स्थापित किया जाता है और फिर देवी दुर्गा के नौ रूपों की पूजा शुरू होती है।

    19 मार्च 2026 को कलश स्थापना का मुहूर्त इस प्रकार है

    सुबह का मुहूर्त 06:00 AM – 06:45 AM
    दोपहर का मुहूर्त 11:30 AM – 12:15 PM
    सांयकाल का मुहूर्त 06:00 PM – 06:45 PM

    इन मुहूर्तों में से जो भी समय आपके लिए सुविधाजनक हो उस समय कलश स्थापना कीजिए। विशेष रूप से शुद्धि और पवित्रता का ध्यान रखें। पूजा के दौरान श्रद्धा और भक्ति के साथ देवी दुर्गा की उपासना करें और व्रत का संकल्प लें।

    देवी पूजा और विशेष अनुष्ठान

    चैत्र नवरात्रि के दौरान प्रत्येक दिन देवी दुर्गा के एक अलग रूप की पूजा की जाती है। इस प्रकार के अनुष्ठानों से मनुष्य को न केवल मानसिक शांति मिलती है बल्कि उसके जीवन में आने वाली समस्याओं का समाधान भी संभव होता है।

    प्रथम दिन 19 मार्च मां शैलपुत्री की पूजा होती है। दूसरे दिन 20 मार्च मां ब्रह्मचारिणी की पूजा होती है। तीसरे दिन 21 मार्च मां चंद्रघंटा की पूजा होती है। चौथे दिन 22 मार्च मां कूष्मांडा की पूजा होती है पांचवे दिन 23 मार्च मां स्कंदमाता की पूजा होती है। छठे दिन 24 मार्च मां कात्यायनी की पूजा होती है। सातवे दिन 25 मार्च मां कालरात्रि की पूजा होती है। आठवे दिन 26 मार्च मां महागौरी की पूजा होती है नौवे दिन 27 मार्च मां सिद्धिदात्री की पूजा होती है साथ ही साथ राम नवमी का पर्व मनाया जाता है। इन नौ दिनों में व्रति पूजा और उपासना से भक्तों को मानसिक शारीरिक और आत्मिक शांति प्राप्त होती है।

    चैत्र नवरात्रि 2026 का आरंभ 19 मार्च से हो रहा है और इसके साथ ही हिंदू नववर्ष की शुरुआत भी होती है। यह समय देवी दुर्गा की उपासना व्रत और पूजा का होता है जिससे भक्त अपने जीवन में सुख शांति और समृद्धि की कामना करते हैं। कलश स्थापना के दौरान विशेष मुहूर्त का पालन करें और नवरात्रि के दौरान देवी दुर्गा के नौ रूपों की पूजा कर अपने जीवन को सकारात्मक दिशा में ले जाएं। इस अवसर पर घर में मां दुर्गा का व्रत करना और उनकी पूजा करना निश्चित रूप से जीवन में सुख और शांति लेकर आता है।इस अवसर पर घर में मां दुर्गा का व्रत करना और उनकी पूजा करना निश्चित रूप से जीवन में सुख और शांति लेकर आता है।