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  • मुझे राजनीति से दूर रहने दो', जंतर-मंतर प्रदर्शन पर दिलजीत दोसांझ की दोटूक प्रतिक्रिया, बोले- मैं कलाकार हूं, नेता नहीं

    मुझे राजनीति से दूर रहने दो', जंतर-मंतर प्रदर्शन पर दिलजीत दोसांझ की दोटूक प्रतिक्रिया, बोले- मैं कलाकार हूं, नेता नहीं

    नई दिल्ली। पंजाबी गायक और अभिनेता दिलजीत दोसांझ एक बार फिर अपने बयान को लेकर चर्चा में हैं। इस बार उन्होंने दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहे कथित ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ के प्रदर्शन पर टिप्पणी करने से साफ इनकार कर दिया। सोशल मीडिया पर लाइव बातचीत के दौरान जब उनसे इस प्रदर्शन को लेकर सवाल पूछा गया तो उन्होंने स्पष्ट कहा कि वह राजनीति से दूरी बनाए रखना चाहते हैं और खुद को केवल एक कलाकार मानते हैं।

    दिलजीत हाल ही में अपने प्रशंसकों के साथ इंस्टाग्राम लाइव के माध्यम से जुड़े थे। इस दौरान उन्होंने अपने आगामी प्रोजेक्ट्स, संगीत और फिल्मों से जुड़े कई सवालों के जवाब दिए। बातचीत के बीच जब एक दर्शक ने उनसे जंतर-मंतर पर चल रहे विरोध प्रदर्शन के बारे में प्रतिक्रिया मांगी, तो उन्होंने कहा कि उन्हें इस विषय की पूरी जानकारी नहीं है और वह किसी राजनीतिक विवाद का हिस्सा नहीं बनना चाहते।

    उन्होंने बातचीत में कहा कि उन्हें ऐसे मामलों से दूर ही रखा जाए क्योंकि वह किसी राजनीतिक भूमिका में नहीं हैं। उनका कहना था कि वह एक कलाकार हैं और उनका काम लोगों का मनोरंजन करना है। उन्होंने यह भी कहा कि दुनिया में हर व्यक्ति किसी न किसी समस्या से जूझ रहा है और जीवन में सभी परिस्थितियां कभी पूरी तरह अनुकूल नहीं हो सकतीं।

    दिलजीत ने अपने अंदाज में यह भी कहा कि जो लोग प्रदर्शन कर रहे हैं, वे भी अपनी बात रखने का अधिकार रखते हैं और जिनके खिलाफ प्रदर्शन हो रहा है, उनका भी अपना पक्ष हो सकता है। उन्होंने किसी भी पक्ष का समर्थन या विरोध करने से बचते हुए कहा कि बिना पूरी जानकारी के किसी मुद्दे पर टिप्पणी करना उचित नहीं होगा। इसी कारण उन्होंने पूरे विवाद पर तटस्थ रुख अपनाया।

    उनका यह बयान सोशल मीडिया पर तेजी से चर्चा का विषय बन गया। कई लोगों ने उनके इस रुख को एक कलाकार की पेशेवर सोच बताया, जबकि कुछ लोगों ने सार्वजनिक जीवन से जुड़े चर्चित चेहरों की सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों पर भूमिका को लेकर अलग-अलग राय भी व्यक्त की। हालांकि दिलजीत ने अपने बयान में किसी संगठन, व्यक्ति या प्रदर्शन की प्रकृति पर कोई टिप्पणी नहीं की और केवल राजनीति से दूरी बनाए रखने की बात दोहराई।

    दिलजीत दोसांझ पिछले कुछ समय से अपनी फिल्मों, अंतरराष्ट्रीय कॉन्सर्ट्स और संगीत परियोजनाओं को लेकर लगातार सुर्खियों में बने हुए हैं। देश और विदेश में उनकी बड़ी प्रशंसक संख्या है और सोशल मीडिया पर भी उनकी सक्रिय मौजूदगी रहती है। ऐसे में उनके किसी भी बयान पर लोगों की नजर रहती है।

    फिलहाल उनका यह वीडियो सोशल मीडिया पर व्यापक रूप से साझा किया जा रहा है। हालांकि उन्होंने स्पष्ट कर दिया है कि उनकी प्राथमिकता कला और मनोरंजन है तथा वह राजनीतिक या विवादित विषयों पर सार्वजनिक टिप्पणी करने से बचना पसंद करते हैं। इसी वजह से उन्होंने जंतर-मंतर पर चल रहे प्रदर्शन को लेकर कोई विस्तृत प्रतिक्रिया देने से इनकार कर दिया।

  • मणिपुर में महिलाओं का विशाल आंदोलन, सड़कें बनीं विरोध का केंद्र..

    मणिपुर में महिलाओं का विशाल आंदोलन, सड़कें बनीं विरोध का केंद्र..

    नई दिल्ली।मणिपुर में हालात लगातार तनावपूर्ण बने हुए हैं, जहां रॉकेट हमले में दो बच्चों समेत तीन लोगों की मौत के बाद व्यापक स्तर पर विरोध-प्रदर्शन जारी है। इस घटना के बाद से राज्य में जनाक्रोश बढ़ता जा रहा है और कई इलाकों में बंद और प्रदर्शन की स्थिति बनी हुई है। आम जनजीवन प्रभावित है और सड़कों पर सामान्य गतिविधियां काफी हद तक ठप हो गई हैं।

    इस आंदोलन में सबसे आगे मणिपुर की महिलाएं दिखाई दे रही हैं, जो हजारों की संख्या में सड़कों पर उतरकर विरोध दर्ज करा रही हैं। ये महिलाएं दिन के समय रास्तों को रोककर धरना दे रही हैं और आवाजाही को नियंत्रित कर रही हैं। कई इलाकों में स्थिति ऐसी है कि वहां न तो आम नागरिकों को आने-जाने की अनुमति है और न ही सुरक्षा बलों की सामान्य आवाजाही हो पा रही है। रात के समय ये महिलाएं मशाल रैलियों के जरिए इलाकों में गश्त कर रही हैं, जिससे आंदोलन और अधिक संगठित और प्रभावी दिखाई दे रहा है।

    प्रदर्शन में शामिल महिलाओं का कहना है कि वे घर की जिम्मेदारियों के साथ-साथ आंदोलन में भी सक्रिय भूमिका निभा रही हैं। उनके अनुसार यह केवल भावनात्मक नहीं बल्कि नैतिक जिम्मेदारी का हिस्सा है, जिसे वे संतुलित तरीके से निभा रही हैं। इस आंदोलन के चलते स्थानीय बाजारों और आर्थिक गतिविधियों पर भी असर पड़ा है, जिससे कई परिवारों पर आर्थिक दबाव बढ़ गया है। इसके बावजूद कुछ महिलाएं अपने काम के साथ-साथ आंदोलन में भागीदारी भी जारी रखे हुए हैं।

    इस आंदोलन का नेतृत्व करने वाली सामुदायिक संरचनाएं लंबे समय से शांति और सामाजिक संतुलन की मांग करती रही हैं। यह संगठन संघर्ष प्रभावित क्षेत्रों में सामाजिक व्यवस्था बनाए रखने और मानवाधिकारों की रक्षा के लिए सक्रिय भूमिका निभाता रहा है। इतिहास में भी इस तरह के आंदोलन सामाजिक मुद्दों और कानून-व्यवस्था से जुड़े सवालों को लेकर सामने आते रहे हैं, जिन्होंने व्यापक जनसमर्थन हासिल किया है।

    यह पूरा विवाद एक रॉकेट हमले से शुरू हुआ था, जिसमें एक घर को निशाना बनाया गया था। इस हमले में एक छोटे बच्चे, एक बच्ची और उनकी मां की मौत हो गई थी। घटना के बाद पूरे क्षेत्र में गुस्सा फैल गया और धीरे-धीरे यह विरोध बड़े आंदोलन में बदल गया।

    फिलहाल राज्य में तनावपूर्ण स्थिति बनी हुई है और लोग शांति बहाली की मांग कर रहे हैं। महिलाओं के इस व्यापक आंदोलन ने स्थिति को और अधिक गंभीर बना दिया है, जिससे प्रशासन और समाज दोनों के सामने शांति बहाली की बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है।

  • LPG किल्लत को लेकर विरोध प्रदर्शन सड़क पर उतरे लोग मंत्री का काफिला घिरा

    LPG किल्लत को लेकर विरोध प्रदर्शन सड़क पर उतरे लोग मंत्री का काफिला घिरा


    सीधी । सीधी जिले में एलपीजी गैस सिलेंडर की कथित किल्लत को लेकर लोगों का गुस्सा उस समय खुलकर सामने आ गया जब महिलाओं ने सड़क पर सिलेंडर रखकर मंत्री राधा सिंह के काफिले का रास्ता रोक दिया। यह पूरा घटनाक्रम उस वक्त हुआ जब पंचायत एवं ग्रामीण विकास राज्य मंत्री राधा सिंह “नारी शक्ति वंदन रैली” में शामिल होने सीधी पहुंची थीं।

    जानकारी के अनुसार, मंत्री का काफिला पूजा पार्क से सम्राट चौक, सराफा बाजार और गांधी चौक होते हुए पैदल मार्च के रूप में आगे बढ़ रहा था। इस दौरान बड़ी संख्या में महिलाएं भी उनके साथ चल रही थीं और “नारी शक्ति, राष्ट्र शक्ति” के नारे लगाए जा रहे थे। लेकिन इसी बीच पढ़ैनिया गैस एजेंसी के पास कुछ महिलाओं ने सड़क पर सिलेंडर रखकर विरोध शुरू कर दिया और मंत्री के काफिले को रोक दिया।

    प्रदर्शन कर रही महिलाओं का आरोप था कि क्षेत्र में गैस सिलेंडर की भारी किल्लत है। कई उपभोक्ताओं ने बताया कि बुकिंग कराने के बाद भी समय पर सिलेंडर नहीं मिल रहा है, जिससे घरेलू कामकाज प्रभावित हो रहा है। कुछ महिलाओं ने कहा कि इंडेन कनेक्शन होने के बावजूद सप्लाई नियमित नहीं है, जबकि प्रताप गैस एजेंसी से भी समय पर सिलेंडर उपलब्ध नहीं हो पा रहा है।

    वहीं इस पूरे घटनाक्रम पर मंत्री राधा सिंह ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि प्रदेश में कहीं कोई किल्लत नहीं है और कुछ लोग जानबूझकर प्रदर्शन कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि देश में महिला आरक्षण लागू होने जा रहा है, जिसके लिए उन्होंने प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री को बधाई दी।

    घटना के दौरान स्थिति कुछ देर के लिए तनावपूर्ण रही, हालांकि कुछ ही मिनटों में मौके पर रखे गए सिलेंडर हट गए और प्रदर्शनकारी वहां से हट गए। बताया जा रहा है कि मंत्री अपने काफिले से बाहर नहीं उतरीं और स्थिति सामान्य होने के बाद कार्यक्रम आगे बढ़ाया गया। इस घटना ने एक बार फिर गैस आपूर्ति व्यवस्था और जमीनी स्तर पर उपभोक्ताओं की परेशानियों को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं।

  • शिमला के राम मंदिर में ‘निकाह’ को लेकर विवाद, हिंदू संगठनों का विरोध

    शिमला के राम मंदिर में ‘निकाह’ को लेकर विवाद, हिंदू संगठनों का विरोध


    शिमला। शिमला में राम मंदिर परिसर में प्रस्तावित एक निकाह समारोह को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। हिंदू संगठनों ने मंदिर के हॉल में मुस्लिम परिवार के विवाह समारोह की बुकिंग पर आपत्ति जताते हुए विरोध की चेतावनी दी है। यह मामला पहले से चर्चा में रहे संजौली मस्जिद विवाद के बाद सामने आया है, जिससे शहर में धार्मिक बहस तेज हो गई है।

    हॉल बुकिंग से शुरू हुआ विवाद

    राम बाजार स्थित मंदिर के हॉल में 11 अप्रैल को प्रस्तावित निकाह की जानकारी सामने आने के बाद हिंदू संघर्ष समिति ने विरोध दर्ज कराया।

    समिति का कहना है कि मंदिर परिसर में इस तरह का आयोजन धार्मिक परंपराओं के अनुरूप नहीं है। संगठन ने मंदिर प्रबंधन से कार्यक्रम रद्द करने की मांग करते हुए विरोध प्रदर्शन की चेतावनी दी है।

    सूद सभा की बैठक आज

    मंदिर परिसर का संचालन करने वाली सूद सभा के अध्यक्ष राजीव सूद ने बताया कि इस मुद्दे पर मंगलवार को आपात बैठक बुलाई गई है।

    उन्होंने कहा कि सभी समुदायों की भावनाओं का सम्मान करते हुए निर्णय लिया जाएगा। उनके अनुसार पिछले पांच वर्षों में 15 से अधिक मुस्लिम परिवारों के निकाह इसी हॉल में हो चुके हैं और परिसर में मांस, मछली व मदिरा पर पहले से प्रतिबंध है।

    पहले भी हो चुका है विवाद

    अक्टूबर 2024 में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने मंदिर परिसर में साईं बाबा की मूर्ति पर आपत्ति जताते हुए कार्यक्रम का बहिष्कार किया था। इसके बाद यह मुद्दा राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में रहा।

    शहर का प्रमुख धार्मिक केंद्र

    राम बाजार में स्थित यह मंदिर शिमला का प्रमुख धार्मिक और सामाजिक स्थल माना जाता है। मंदिर की बहुमंजिला इमारत के ऊपरी तल पर भगवान राम, सीता, लक्ष्मण और हनुमान की मूर्तियां स्थापित हैं, जबकि नीचे बने बड़े हॉल में वर्षों से सामाजिक कार्यक्रम आयोजित होते रहे हैं।
    अब सबकी नजर सूद सभा की बैठक पर है, जिसमें तय होगा कि प्रस्तावित निकाह समारोह को अनुमति दी जाएगी या नहीं।

  • पेट्रोल डीजल की कमी की अफवाह पर बवाल कांग्रेस ने सरकार से सख्त कार्रवाई की मांग की

    पेट्रोल डीजल की कमी की अफवाह पर बवाल कांग्रेस ने सरकार से सख्त कार्रवाई की मांग की


    मध्यप्रदेश । मध्यप्रदेश में मंगलवार को पेट्रोल और डीजल की कमी को लेकर फैली अफवाह ने आम लोगों के बीच भारी असमंजस और घबराहट की स्थिति पैदा कर दी प्रदेश के कई शहरों में अचानक पेट्रोल पंपों पर लंबी कतारें लग गईं और लोग बड़ी संख्या में ईंधन भरवाने के लिए उमड़ पड़े हालांकि कई स्थानों पर वास्तविक कमी की स्थिति नहीं थी लेकिन सोशल मीडिया पर तेजी से फैली खबरों ने हालात को गंभीर बना दिया

    इस पूरे घटनाक्रम ने प्रशासन और सरकार के लिए नई चुनौती खड़ी कर दी है क्योंकि अफवाहों के कारण बनी इस स्थिति ने आम जनजीवन को प्रभावित किया वहीं विपक्ष को भी सरकार पर हमला करने का मौका मिल गया प्रदेश कांग्रेस ने इस मामले को गंभीरता से उठाते हुए मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव से मांग की है कि अफवाह फैलाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए ताकि भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा न बने

    प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने देर रात सोशल मीडिया के माध्यम से अपनी प्रतिक्रिया देते हुए केंद्र सरकार को भी इस पूरे मामले के लिए जिम्मेदार ठहराया उन्होंने तंज भरे अंदाज में कहा कि ऐसा लग रहा है जैसे प्रदेश में पेट्रोल-डीजल का आपातकाल लागू हो गया हो उन्होंने यह भी कहा कि नए भारत की तस्वीर अब ऐसी हो गई है जहां लोगों को पेट्रोल पंपों पर लंबी कतारों में खड़ा रहना पड़ रहा है और कई जगह उन्हें ईंधन तक नहीं मिल पा रहा

    पटवारी ने अपने बयान में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर भी निशाना साधते हुए कहा कि यह स्थिति सरकार की नीतियों और व्यवस्थाओं की विफलता को दर्शाती है उनका यह बयान राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गया है और इस पर सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच आरोप प्रत्यारोप का दौर तेज होने की संभावना है

    दूसरी ओर प्रशासनिक स्तर पर यह स्पष्ट किया जा रहा है कि प्रदेश में पेट्रोल और डीजल की आपूर्ति सामान्य है और किसी प्रकार की वास्तविक कमी नहीं है अधिकारियों का कहना है कि यह स्थिति पूरी तरह से अफवाहों के कारण उत्पन्न हुई है और लोगों से अपील की जा रही है कि वे सोशल मीडिया पर प्रसारित अपुष्ट खबरों पर विश्वास न करें

    विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की अफवाहें न केवल बाजार व्यवस्था को प्रभावित करती हैं बल्कि आम जनता में अनावश्यक भय भी उत्पन्न करती हैं जिसके चलते लोग जरूरत से ज्यादा ईंधन खरीदने लगते हैं और कृत्रिम संकट की स्थिति बन जाती है यही कारण है कि प्रशासन अब इस मामले में सख्ती बरतने की तैयारी कर रहा है ताकि गलत जानकारी फैलाने वालों पर नियंत्रण किया जा सके

    कुल मिलाकर यह घटना एक बार फिर यह साबित करती है कि डिजिटल युग में सूचना का सही और जिम्मेदार उपयोग कितना महत्वपूर्ण है एक छोटी सी अफवाह भी बड़े स्तर पर प्रभाव डाल सकती है ऐसे में जरूरी है कि लोग सतर्क रहें और केवल आधिकारिक स्रोतों से प्राप्त जानकारी पर ही भरोसा करें ताकि समाज में अनावश्यक तनाव और अव्यवस्था की स्थिति उत्पन्न न हो

  • भोपाल में जूनियर डॉक्टरों का प्रदर्शन, स्टाइपेंड बढ़ोतरी न होने पर अनिश्चितकालीन हड़ताल की चेतावनी

    भोपाल में जूनियर डॉक्टरों का प्रदर्शन, स्टाइपेंड बढ़ोतरी न होने पर अनिश्चितकालीन हड़ताल की चेतावनी


    भोपाल। मध्य प्रदेश की राजधानी में जूनियर डॉक्टरों ने सोमवार को जोरदार प्रदर्शन किया। जूनियर डॉक्टर्स एसोसिएशन जूडा ने राजधानी में मार्च निकालकर अपनी मांगों को लेकर प्रशासन का ध्यान आकर्षित किया। जूडा के प्रतिनिधियों का कहना है कि प्रदेश सरकार ने अन्य डॉक्टरों का स्टाइपेंड बढ़ा दिया है लेकिन जूनियर डॉक्टरों के स्टाइपेंड में कोई वृद्धि नहीं की गई। अधिकारियों की तरफ से अब तक कोई ठोस जवाब नहीं आया है जिसके चलते जूडा ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगें पूरी नहीं हुईं तो वे अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाएंगे।

    जूनियर डॉक्टरों का कहना है कि एमपी के सरकारी मेडिकल कॉलेजों में पढ़ने और काम करने वाले डॉक्टर्स लंबे समय से स्टाइपेंड बढ़ोतरी और लंबित भुगतान के इंतजार में हैं। जूडा ने बताया कि प्रदेश सरकार के 7 जून 2021 के आदेश के अनुसार 1 अप्रैल 2025 से CPE आधारित स्टाइपेंड बढ़ोतरी और लंबित एरियर का भुगतान होना था लेकिन यह अब तक लागू नहीं हुआ है। डॉक्टरों का मानना है कि यह सिर्फ आर्थिक मसला नहीं है बल्कि उनके मानसिक और पेशेवर मनोबल पर भी असर डाल रहा है।

    जूडा ने अपनी विरोध की रणनीति चरणबद्ध तरीके से तैयार की है। सबसे पहले डॉक्टर काली पट्टी बांधकर अपनी नाराजगी जताएंगे इसके बाद मार्च निकाला गया। यदि सरकार ने मांगों पर ध्यान नहीं दिया तो जूनियर डॉक्टर नॉन-इमरजेंसी सेवाओं जैसे कि OPD रूटीन चेकअप आदि का बहिष्कार करेंगे। जूडा ने स्पष्ट किया कि इमरजेंसी सेवाएं जारी रहेंगी लेकिन अन्य सेवाओं में रुकावट आने से प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित हो सकती हैं।

    जूनियर डॉक्टरों ने कहा कि स्टाइपेंड बढ़ोतरी और लंबित एरियर का भुगतान उनके लिए बेहद जरूरी है। इसके बिना न केवल उनकी आर्थिक स्थिति प्रभावित होती है बल्कि काम के प्रति मनोबल और पेशेवर जिम्मेदारी निभाने की क्षमता पर भी असर पड़ता है। डॉक्टरों ने प्रशासन से आग्रह किया है कि उनकी मांगों को गंभीरता से लें और शीघ्र कार्रवाई करें।

    इस प्रदर्शन में जूनियर डॉक्टरों के साथ मेडिकल कॉलेज के अन्य स्टाफ ने भी सहभागिता की। जूडा का कहना है कि यह आंदोलन केवल अपनी मांगों तक सीमित नहीं है बल्कि यह पूरे स्वास्थ्य क्षेत्र में कर्मचारियों के हक और सम्मान की लड़ाई भी है। प्रदर्शन के दौरान जूडा ने कहा कि यदि सरकार ने शीघ्र कार्रवाई नहीं की तो सोमवार से वे नॉन-इमरजेंसी सेवाओं का बहिष्कार शुरू करेंगे।

    यह आंदोलन भोपाल के कई अस्पतालों में मरीजों और आम जनता के लिए चुनौती बन सकता है। जूडा का कहना है कि उनका उद्देश्य केवल आर्थिक न्याय हासिल करना है और इसके लिए वे शांतिपूर्ण तरीके से विरोध कर रहे हैं।

  • पश्चिम बंगाल: चुनाव से पहले TMC और EC में बढ़ा टकराव, धरने पर बैठी CM ममता…टेंट में गुजारी रात

    पश्चिम बंगाल: चुनाव से पहले TMC और EC में बढ़ा टकराव, धरने पर बैठी CM ममता…टेंट में गुजारी रात


    नई दिल्ली।
    पश्चिम बंगाल (West Bengal) की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी (Chief Minister Mamata Banerjee) ने शुक्रवार को एसआईआर (SIR) के बाद राज्य की मतदाता सूचियों में बड़े पैमाने पर नाम हटाए जाने के विरोध में सेंट्रल कोलकाता में धरना शुरू कर दिया. जिससे विधानसभा चुनावों (Assembly Elections) से कुछ सप्ताह पहले टीएमसी और चुनाव आयोग के बीच टकराव और बढ़ गया है. उन्होंने नाटकीय रूप से सड़क की राजनीति में वापसी की है, इस स्ट्रीट पॉलिटिक्स के दम पर ही ममता ने राजनीति में अपनी पहचान बनाई थी।

    धरना शुरू करते हुए, बनर्जी ने बीजेपी और चुनाव आयोग पर ‘बंगाली मतदाताओं को मताधिकार से वंचित करने’ की साजिश रचने का आरोप लगाया। टीएमसी सुप्रीमो ने विरोध प्रदर्शन की शुरुआत में कहा, ‘मैं बंगाली मतदाताओं को मताधिकार से वंचित करने के बीजेपी-चुनाव आयोग के षड्यंत्र का पर्दाफाश करूंगी।

    पहले दिन का धरना दोपहर करीब 2.15 बजे शुरू हुआ था. शुक्रवार रात को भी ममता बनर्जी टेंट में ही रहीं. उन्होंने बाकी नेताओं को घर भेज दिया था. प्रोटेस्ट शनिवार को दोबारा शुरू होगा। ममता के इस धरने की अपडेट्स देते हुए डेरेक ओ ब्रायन (TMC के राज्यसभा सांसद) ने लिखा, ‘ममता बनर्जी के नेतृत्व में चल रहे धरने का पहला दिन (शुक्रवार) खत्म हो गया है. हमारी नेता ने हम सभी को घर पर जाकर आराम करने के लिए कहा है. रात में, वह सेंट्रल कोलकाता में धरना स्थल पर सड़क पर एक टेंट में रहेंगी. दीदी तो दीदी हैं.’


    बंगाल SIR में कितने नाम कटे

    28 फरवरी को जारी आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, पिछले साल नवंबर में एसआईआर प्रक्रिया शुरू होने के बाद से लगभग 63.66 लाख नाम, यानी मतदाताओं का लगभग 8.3 प्रतिशत, हटा दिए गए हैं, जिससे मतदाता आधार लगभग 7.66 करोड़ से घटकर 7.04 करोड़ से थोड़ा अधिक रह गया है. इसके अतिरिक्त, 60.06 लाख से अधिक मतदाताओं को ‘न्यायिक जांच के अधीन’ श्रेणी में रखा गया है, जिसका मतलब है कि आने वाले हफ्तों में कानूनी जांच के माध्यम से उनकी पात्रता का फैसला किया जाएगा.

    टीएमसी ने आरोप लगाया है कि यह प्रक्रिया राजनीतिक रूप से प्रेरित है और इससे 1.2 करोड़ से अधिक मतदाता प्रभावित हो सकते हैं, इस आरोप को चुनाव आयोग ने खारिज कर दिया है. धरने के दौरान बनर्जी ने दावा किया, ‘कई लोगों को मृत घोषित कर दिया गया है, लेकिन वे जिंदा हैं. मैं उन्हें मंच पर लाऊंगी। हालांकि, उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि विरोध प्रदर्शन कब तक चलेगा, जबकि यह चुनाव आयोग की पूर्ण पीठ के राज्य के प्रस्तावित दौरे से ठीक दो दिन पहले हो रहा है।


    ममता की जन-योद्धा वाली छवि

    कोलकाता के मेट्रो चैनल एरिया में हो रहा ये धरना ममता बनर्जी की आंदोलनकारी राजनीति के लिए गहरा राजनीतिक प्रतीक है. मुख्यमंत्री बनने से बहुत पहले, सेंट्रल कोलकाता के फुटपाथ वे मंच थे जहां उन्होंने तत्कालीन प्रभावशाली वाम मोर्चे के खिलाफ एक जन-योद्धा के रूप में अपनी छवि बनाई थी।

    फिर 4 दिसंबर, 2006 को उन्होंने टाटा मोटर्स परियोजना के लिए सिंगूर में कृषि भूमि अधिग्रहण के विरोध में उसी स्थान पर 26 दिनों की भूख हड़ताल शुरू की, जिससे आंदोलन एक राष्ट्रीय राजनीतिक मुद्दा बन गया जिसने आखिरकार टीएमसी को 2011 के विधानसभा चुनावों में वाम मोर्चा को सत्ता से बेदखल करने में मदद की, जिससे उसका 34 साल का शासन समाप्त हो गया।

    मुख्यमंत्री बनने के बाद भी, बनर्जी समय-समय पर आंदोलन की राजनीति में लौटती रही हैं, विशेष रूप से फरवरी 2019 में, जब उन्होंने केंद्र पर संघवाद को कमजोर करने का आरोप लगाते हुए धरना दिया था, जब सीबीआई ने शारदा चिट फंड जांच में तत्कालीन कोलकाता पुलिस आयुक्त राजीव कुमार से पूछताछ करने की कोशिश की थी।

  • भोपाल में होली के दिन युवक की चाकू मारकर हत्या, शव ऑटो से फेंककर बदमाश फरार

    भोपाल में होली के दिन युवक की चाकू मारकर हत्या, शव ऑटो से फेंककर बदमाश फरार



    भोपाल  भोपाल के निशातपुरा थाना क्षेत्र में होली के दिन एक युवक की दर्दनाक हत्या ने पूरे इलाके को दहला दिया। 19 वर्षीय अरविंद मीणा, जो प्रताप नगर में रहता था और गारमेंट्स शॉप में सेल्समैन के रूप में काम करता था, बुधवार रात अपने दोस्तों के साथ होली खेलने के बाद घूमने निकला था। सूत्रों के अनुसार, वह अपने दोस्तों विशाल ठाकुर उर्फ भूरा और सचिन के साथ आखिरी बार देखा गया। रात के अज्ञात समय में अज्ञात बदमाशों ने उसे घेरकर चार चाकू वार किए और उसके बाद उसका शव बेस्ट प्राइस के पास 80 फीट रोड पर ऑटो से फेंककर फरार हो गए। शव अर्धनग्न हालत में मिला, जिसमें उसके ऊपरी हिस्से के कपड़े नहीं थे।

    घटना की जानकारी लगते ही मृतक के पिता हल्केराम मीणा मौके पर पहुंचे। उन्होंने बताया कि उन्होंने सड़क किनारे भीड़ देखकर रुके और पास जाकर अपने बेटे का शव देखा। इस दर्दनाक दृश्य ने पूरे मोहल्ले के लोगों को स्तब्ध कर दिया। निशातपुरा थाना प्रभारी मनोज पटवा ने बताया कि हत्या का मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है और आरोपियों की पहचान के लिए तेजी से काम किया जा रहा है। पुलिस सीसीटीवी फुटेज और आसपास के लोगों से पूछताछ कर संदिग्धों तक पहुंचने की कोशिश कर रही है।

    मृतक के मोहल्ले के लोग और परिचितों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं हुई तो वे सड़क पर शव रखकर विरोध प्रदर्शन करेंगे। उन्होंने कहा कि जांच में देरी से समुदाय में असंतोष और आक्रोश बढ़ रहा है। मोहल्ले के लोग बताते हैं कि अरविंद मीणा एक मेहनती और शांत स्वभाव का युवक था, जिसने अपने परिवार का सहारा बनने के लिए मेहनत की थी।

    घटना ने इलाके में सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं, खासकर होली जैसे बड़े त्योहार के मौके पर। पुलिस ने आसपास के इलाकों में अतिरिक्त गश्त बढ़ा दी है और युवाओं को अशांति फैलाने से रोकने के लिए सतर्क रहने का निर्देश दिया है।

    परिजन और मोहल्ले वाले पुलिस से लगातार संपर्क में हैं और दोषियों के खिलाफ त्वरित कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। पुलिस की प्राथमिक जांच से पता चला है कि हत्या की घटना व्यक्तिगत विवाद या आपराधिक मंशा के चलते हो सकती है, लेकिन सटीक कारण पोस्टमार्टम और जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगा।

    यह घटना न केवल भोपाल के निशातपुरा इलाके में तनाव बढ़ा रही है, बल्कि होली जैसे खुशियों के त्योहार पर सुरक्षा और कानून व्यवस्था की चुनौती को भी उजागर करती है। पुलिस ने लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की है और आश्वासन दिया है कि जल्द ही आरोपियों को गिरफ्तार किया जाएगा।

  • साध्वी रंजना विवाद ने पकड़ा तूल: मिसरोद में पाटीदार समाज का प्रदर्शन, ‘जिहादी’ कहने वालों पर कार्रवाई की मांग

    साध्वी रंजना विवाद ने पकड़ा तूल: मिसरोद में पाटीदार समाज का प्रदर्शन, ‘जिहादी’ कहने वालों पर कार्रवाई की मांग


    मिसरोद । मिसरोद में साध्वी रंजना दीदी से जुड़े कार विवाद ने अब सामाजिक और राजनीतिक रंग ले लिया है। मंगलवार को पाटीदार समाज, ओबीसी मोर्चा और सकल हिंदू समाज के बैनर तले बड़ी संख्या में लोग पाटीदार समाज के मांगलिक भवन में एकत्र हुए और विरोध प्रदर्शन किया। कार्यक्रम में महिलाओं की भी उल्लेखनीय भागीदारी रही। प्रदर्शन के दौरान “जय श्री राम” के नारे लगाए गए और बाद में एसीपी को कलेक्टर व कमिश्नर के नाम ज्ञापन सौंपा गया।

     उनका कहना है कि मिसरोद थाने में उनके खिलाफ झूठे प्रकरण दर्ज किए गए हैं। ज्ञापन में मांग की गई कि दर्ज मामलों को समाप्त किया जाए, समाज की ओर से भी एफआईआर दर्ज की जाए और दोषियों के खिलाफ निष्पक्ष व सख्त कार्रवाई हो।

    पाटीदार संगठन के सदस्य अजय पाटीदार ने कहा कि समाज को “जिहादी” या “अराजक” कहना बेहद आपत्तिजनक है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि समाज को हिंदू समाज का हिस्सा नहीं माना जाएगा तो वे सामूहिक रूप से धर्म परिवर्तन पर विचार करने को मजबूर होंगे। इस बयान के बाद सभा स्थल पर माहौल कुछ देर के लिए और गरमा गया।

    समाज के प्रतिनिधियों ने पुलिस पर एकपक्षीय कार्रवाई का आरोप भी लगाया। उनका कहना है कि 25-26 फरवरी को मुख्य मार्ग पर साध्वी रंजना दीदी के वाहन से जुड़ा ओवरटेक को लेकर सामान्य विवाद हुआ था, जिसे बाद में गंभीर धाराओं में बदल दिया गया। समाज का दावा है कि घटनास्थल के सीसीटीवी कैमरों की जांच से पूरी सच्चाई सामने आ सकती है।

    मामले की पृष्ठभूमि में साध्वी रंजना दीदी द्वारा दर्ज एफआईआर शामिल है, जिसमें मारपीट, तोड़फोड़, छेड़छाड़ और जान से मारने की कोशिश जैसे आरोप लगाए गए हैं। घटना का एक वीडियो भी सामने आया है, जिसकी पुलिस जांच कर रही है। इससे पहले विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने भी थाने के बाहर प्रदर्शन कर सख्त कार्रवाई की मांग की थी।

    फिलहाल पुलिस का कहना है कि जांच निष्पक्ष रूप से जारी है और तथ्य सामने आने के बाद ही आगे की कार्रवाई की जाएगी। दूसरी ओर, पाटीदार समाज ने स्पष्ट किया है कि यदि उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया तो आंदोलन को प्रदेश स्तर तक ले जाया जाएगा। यह मामला अब प्रशासन के लिए कानून-व्यवस्था और सामाजिक संतुलन, दोनों दृष्टि से संवेदनशील बन गया है। 

  • नर्मदापुरम में गोवंश तस्करी पर ग्रामीणों का आक्रोश, पिकअप में लगाई आग, ड्राइवर फरार

    नर्मदापुरम में गोवंश तस्करी पर ग्रामीणों का आक्रोश, पिकअप में लगाई आग, ड्राइवर फरार


    नर्मदापुरम /मध्यप्रदेश के नर्मदापुरम जिले में गोवंश तस्करी के खिलाफ ग्रामीणों का आक्रोश इस बार उग्र रूप में सामने आया। आरी ढोडई गांव के पास सोमवार और मंगलवार की रात करीब 1:30 बजे ग्रामीणों ने एक पिकअप वाहन को रोक लिया, जिसमें दो गायें लदी हुई थीं। ग्रामीणों को संदेह हुआ कि इन गोवंशों को कत्लखाने या अवैध तरीके से ले जाया जा रहा है।

    ग्रामीणों ने तुरंत कार्रवाई करते हुए गायों को वाहन से उतारा और लगभग आधे घंटे तक घटनाक्रम चलता रहा। आक्रोशित ग्रामीणों ने तस्करी के प्रयास में इस्तेमाल पिकअप वाहन में आग लगा दी। वहीं, ड्राइवर मौके से फरार हो गया।

    सूचना मिलते ही माखन नगर थाना प्रभारी अनूप कुमार उइके और उनके बल ने घटनास्थल का दौरा किया, लेकिन तब तक पिकअप पूरी तरह जल चुकी थी। पुलिस ने मौके का मुआयना किया और मामला दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी है।

    ग्रामीणों ने कहा कि वे गौ-हत्या और गोवंश तस्करी के खिलाफ सतर्क हैं और ऐसी किसी भी कोशिश को बर्दाश्त नहीं करेंगे। पुलिस अब फरार ड्राइवर की तलाश में लगी हुई है और आसपास के इलाकों में निगरानी बढ़ा दी गई है।

    इस घटना ने नर्मदापुरम में गोवंश सुरक्षा और तस्करी के खिलाफ स्थानीय लोगों की गंभीर प्रतिक्रिया को उजागर किया है। पुलिस का कहना है कि दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी और ग्रामीणों को भी कानून के तहत कार्रवाई करने की हिदायत दी गई है।