Tag: protest

  • इटली में सख्त कानून: नाबालिगों की लूटपाट पर माता-पिता भरेंगे हर्जाना, हिंसक प्रदर्शन में 5 साल तक जेल

    इटली में सख्त कानून: नाबालिगों की लूटपाट पर माता-पिता भरेंगे हर्जाना, हिंसक प्रदर्शन में 5 साल तक जेल


    नई दिल्ली। इटली में हिंसक प्रदर्शनों और तोड़फोड़ की घटनाओं पर लगाम लगाने के लिए प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी की सरकार ने सुरक्षा से जुड़े कई कड़े प्रावधानों को मंजूरी दी है। नए कानून के तहत प्रदर्शन के दौरान हिंसा करने वालों को पांच साल तक की जेल और 20 हजार यूरो तक का जुर्माना हो सकता है। वहीं, तोड़फोड़ और लूटपाट में शामिल नाबालिगों के माता-पिता को भी नुकसान की भरपाई करनी पड़ सकती है।

    रिपोर्ट के मुताबिक, उत्तरी इटली के कई शहरों में हुई हिंसा के बाद सरकार ने ये कदम उठाए हैं। इनमें देश की आर्थिक राजधानी मिलान भी शामिल है। यहां युवाओं के समूहों ने दुकानों के शीशे तोड़े, सामान लूटा और पुलिस पर हमले किए। प्रधानमंत्री मेलोनी ने सोशल मीडिया पर नए कानून की जानकारी देते हुए कहा कि तोड़फोड़ और चोरी कोई क्रांतिकारी काम नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि तोड़फोड़ और चोरी प्रदर्शन नहीं, बल्कि अपराध हैं।

    पांच साल तक जेल और 20 हजार यूरो जुर्माने का प्रावधान
    नए प्रावधान तत्काल प्रभाव से लागू हो गए हैं। इनके तहत पांच या उससे अधिक लोगों के समूह में प्रदर्शन के दौरान सार्वजनिक सुरक्षा के लिए खतरा पैदा करने वाले व्यक्ति को पांच साल तक की जेल हो सकती है। इसके अलावा अधिकतम 20 हजार यूरो का जुर्माना भी लगाया जा सकता है।

    यदि प्रदर्शन के दौरान किसी व्यक्ति ने अपना चेहरा ढका हो या किसी अन्य व्यक्ति को चोट पहुंची हो, तो सजा और बढ़ सकती है। नए नियमों के तहत अधिकारियों को सार्वजनिक संपत्ति या अन्य स्थानों को हुए नुकसान की भरपाई तत्काल सुनिश्चित करने के आदेश देने का अधिकार भी दिया गया है।

    नाबालिगों की तोड़फोड़ पर माता-पिता की भी जवाबदेही
    सरकार ने नाबालिगों की ओर से की जाने वाली तोड़फोड़ और लूटपाट को लेकर भी सख्ती बढ़ाई है। यदि ऐसी घटनाओं में नाबालिग शामिल पाए जाते हैं, तो उनके माता-पिता को नुकसान की भरपाई के लिए जिम्मेदार ठहराया जा सकता है।

    इसके अलावा पुलिस को 14 से 17 साल की उम्र के उन किशोरों को हिरासत में लेने की अनुमति भी दी गई है, जिन्होंने कोई अपराध नहीं किया है, लेकिन उनके खतरनाक होने के सबूत मौजूद हैं। इससे पहले यह अधिकार केवल वयस्कों के मामले में लागू होता था।

    मिलान में पुलिस के साथ तैनात होंगे 500 सैनिक
    सरकार को शनिवार को होने वाले प्रदर्शनों के दौरान फिर से हिंसा भड़कने की आशंका है। इसे देखते हुए मिलान में 2026 के अंत तक पुलिस की मदद के लिए 500 सैनिक तैनात किए जाएंगे।

    रक्षा मंत्रालय के मुताबिक, सेना महत्वपूर्ण स्थानों की सुरक्षा, संवेदनशील इलाकों की निगरानी और सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने में पुलिस की मदद करेगी।

    2022 से सुरक्षा के मुद्दे पर सख्त कदम उठा रही सरकार
    प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी की सरकार वर्ष 2022 में सत्ता में आने के बाद से सुरक्षा के मुद्दे पर कई सख्त फैसले ले चुकी है। हालांकि, आलोचकों का कहना है कि ऐसे कदम अपराध और हिंसा की मूल वजहों को दूर करने में पर्याप्त साबित नहीं होते। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, पिछले चार वर्षों में इटली की जेलों में कैदियों की संख्या 17 प्रतिशत से अधिक बढ़ी है।

    महंगाई और डीजल की कीमतों पर ट्रक ड्राइवरों का प्रदर्शन
    इटली के दक्षिणी हिस्से में बढ़ती महंगाई और डीजल की कीमतों को लेकर ट्रक ड्राइवरों के प्रदर्शन भी जारी हैं। सड़कें जाम किए जाने से सप्लाई चेन प्रभावित हुई है। कुछ पास्ता कंपनियों को उत्पादन रोकना पड़ा है, जबकि कृषि संगठनों ने फल और सब्जियों के खराब होने की आशंका जताई है।

    सरकार ने ट्रांसपोर्ट कंपनियों को नई सहायता देने का भरोसा दिया है। ऐसे में एक ओर सरकार हिंसक प्रदर्शनों पर सख्ती बढ़ा रही है, वहीं दूसरी ओर महंगाई और परिवहन से जुड़े विरोध प्रदर्शनों से भी निपटने की चुनौती बनी हुई है।

  • चुनाव आयोग के समर्थन में 27 देशों के 400 से अधिक भारतवंशी, विपक्षी प्रदर्शनों पर जताई चिंता

    चुनाव आयोग के समर्थन में 27 देशों के 400 से अधिक भारतवंशी, विपक्षी प्रदर्शनों पर जताई चिंता

    नई दिल्ली । चुनाव आयोग के खिलाफ विपक्षी दलों की ओर से किए जा रहे प्रदर्शनों के बीच दुनिया के 27 देशों में रहने वाले 400 से अधिक भारतीय मूल के छात्रों, शोधकर्ताओं और पूर्व विद्यार्थियों ने आयोग के समर्थन में संयुक्त बयान जारी किया है। ‘भारत को अराजकता से बचाएं’ शीर्षक वाले इस बयान में प्रदर्शन के तरीकों पर चिंता जताते हुए कहा गया है कि ऐसे कदम संवैधानिक संस्थाओं के प्रति जनता के विश्वास को कमजोर कर सकते हैं। बयान पर हस्ताक्षर करने वालों ने लोकतांत्रिक व्यवस्था की रक्षा के लिए संवैधानिक प्रक्रियाओं और संस्थाओं का सम्मान करने की आवश्यकता बताई है।

    संयुक्त बयान में बाबासाहब आंबेडकर के विचारों का उल्लेख करते हुए कहा गया कि लोकतंत्र में मतभेदों का समाधान संवैधानिक तरीकों से किया जाना चाहिए। हस्ताक्षरकर्ताओं ने सड़कों पर होने वाले अराजकतापूर्ण प्रदर्शनों की आलोचना की और कहा कि लोकतंत्र को बचाने के नाम पर ऐसी गतिविधियां नहीं होनी चाहिए, जिनसे संवैधानिक लोकतांत्रिक व्यवस्था कमजोर पड़े। उनके मुताबिक, लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं और संस्थाओं पर भरोसा बनाए रखना देश के भविष्य के लिए महत्वपूर्ण है।

    बयान में आरोप लगाया गया है कि भारतीय लोकतंत्र को लेकर संदेह पैदा करने की अनुचित कोशिश की जा रही है। इसमें अदालतों में विचाराधीन मामलों को इस उद्देश्य के लिए इस्तेमाल किए जाने और फिर प्रदर्शनों के माध्यम से इस मुद्दे को आगे बढ़ाने पर आपत्ति जताई गई है। हस्ताक्षरकर्ताओं ने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था की रक्षा का दावा करने वालों को यह भी सुनिश्चित करना चाहिए कि उनके तरीके संवैधानिक शासन को नुकसान न पहुंचाएं। हालांकि, ये बातें बयान जारी करने वाले समूह के आरोप और विचार हैं।

    यह बयान ऐसे समय आया है, जब विपक्षी दल चुनाव आयोग के कामकाज और चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल उठा रहे हैं। विपक्षी नेताओं ने चुनावों में गड़बड़ी के आरोप लगाते हुए आयोग के खिलाफ प्रदर्शन किए हैं। इसी बीच कॉकरोच जनता पार्टी ने भी आयोग के विरोध में कई प्रदर्शन किए हैं। इन आंदोलनों की अगुवाई अभिजीत दीपके कर रहे हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, इस सिलसिले में उन्हें दो बार हिरासत में भी लिया गया है।

    संयुक्त बयान में हस्ताक्षरकर्ताओं ने मौजूदा राजनीतिक माहौल पर दुख और हैरानी जताई है। उनका कहना है कि कुछ हलकों में चुनाव परिणामों को स्वीकार नहीं करने, संवैधानिक संस्थाओं पर लगातार सवाल उठाने और संसद के बजाय सड़कों पर आंदोलन को प्राथमिकता देने की प्रवृत्ति दिखाई दे रही है। बयान में कहा गया कि दुनिया के अलग-अलग देशों में रहने वाले भारतीय मूल के लोगों के रूप में वे भारत की लोकतांत्रिक व्यवस्था और उसके भविष्य को लेकर चिंतित हैं।

    हस्ताक्षर करने वाले लोग अमेरिका, ब्रिटेन, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया, जर्मनी, फ्रांस, जापान और सिंगापुर समेत 27 देशों के विश्वविद्यालयों से जुड़े हैं। इनमें मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (एमआईटी), हार्वर्ड विश्वविद्यालय, ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय, कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय, स्टैनफोर्ड विश्वविद्यालय और लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स जैसे संस्थानों से जुड़े छात्र, शोधकर्ता और पूर्व विद्यार्थी शामिल हैं।

    बयान में एक महत्वपूर्ण स्पष्टीकरण भी दिया गया है कि हस्ताक्षरकर्ताओं का इन विश्वविद्यालयों से जुड़ा होना संबंधित संस्थानों की आधिकारिक सहमति या समर्थन का प्रमाण नहीं है। यानी यह बयान इसमें हस्ताक्षर करने वाले व्यक्तियों का सामूहिक रुख है, न कि इन विश्वविद्यालयों की ओर से जारी आधिकारिक वक्तव्य। इस तरह चुनाव आयोग के समर्थन में सामने आए इस बयान ने चुनाव प्रक्रिया, संवैधानिक संस्थाओं और विरोध प्रदर्शनों के तरीकों को लेकर जारी बहस में एक नया पक्ष सामने रखा है।

  • जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी का समर्थन करने वाली पूनम पांडे अब क्यों हुईं खिलाफ, पीएम मोदी के इस्तीफे की मांग पर उठाए सवाल

    जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी का समर्थन करने वाली पूनम पांडे अब क्यों हुईं खिलाफ, पीएम मोदी के इस्तीफे की मांग पर उठाए सवाल

    नई दिल्ली । नीट पेपर लीक के खिलाफ आंदोलन के दौरान जंतर-मंतर पहुंचकर कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) का समर्थन करने वाली अभिनेत्री और मॉडल पूनम पांडे अब पार्टी के नए आंदोलन के विरोध में नजर आ रही हैं। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इस्तीफे की मांग को लेकर चलाए जा रहे अभियान पर सवाल उठाए हैं। पूनम का कहना है कि किसी भी व्यक्ति का अपनी इच्छा से प्रधानमंत्री से इस्तीफा मांगना उचित नहीं है। उन्होंने मौजूदा विरोध प्रदर्शनों को देश के लिए नुकसानदायक बताते हुए कहा कि इस तरह की गतिविधियों से देश की छवि प्रभावित होती है।

    नीट पेपर लीक के खिलाफ जून और जुलाई में हुए आंदोलन के दौरान सीजेपी को कई लोगों का समर्थन मिला था। छात्रों के हितों से जुड़े इस मुद्दे पर आम लोगों के साथ कुछ चर्चित हस्तियां भी प्रदर्शन में शामिल हुई थीं। 18 जुलाई को सोनम वांगचुक को अनशन स्थल से हटाए जाने के बाद जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारियों की संख्या बढ़ गई थी। इसी दौरान पूनम पांडे भी वहां पहुंची थीं। उन्होंने छात्रों की समस्याओं पर सरकार से जल्द ध्यान देने और उनकी मांगों को सुनने की अपील की थी।

    हालांकि, अब पार्टी की ओर से चलाए जा रहे नए आंदोलन को लेकर पूनम का रुख बदल गया है। सीजेपी इस समय मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग कर रही है। इसके साथ ही पार्टी की ओर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इस्तीफे और व्यवस्था में बड़े बदलाव की मांग भी उठाई जा रही है। पूनम पांडे ने इन मांगों पर आपत्ति जताते हुए कहा कि देश में विरोध के नाम पर जिस तरह की गतिविधियां हो रही हैं, वे उचित नहीं हैं।

    पूनम ने कहा कि किसी के भी प्रधानमंत्री से इस्तीफा मांगने का तरीका ऐसा नहीं हो सकता कि जब मन हुआ, सीधे पद छोड़ने की मांग कर दी। उन्होंने प्रधानमंत्री के पद की अहमियत का उल्लेख करते हुए सवाल किया कि आखिर इस तरह की मांगें किस आधार पर की जा रही हैं। उनके अनुसार, देश का संचालन इस तरीके से नहीं किया जा सकता। उन्होंने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री कोई पड़ोसी या निजी परिचित नहीं हैं, बल्कि देश के सर्वोच्च कार्यकारी पद पर आसीन व्यक्ति हैं।

    पूनम पांडे ने आंदोलन में शामिल युवाओं की समझ पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि प्रदर्शन में शामिल कई लोगों को यह तक स्पष्ट नहीं है कि वे किस उद्देश्य से आंदोलन कर रहे हैं। उनके मुताबिक, कुछ छात्र और युवा बिना पूरी जानकारी के प्रदर्शन का हिस्सा बन रहे हैं। उन्होंने इसे देश के लिए अस्वस्थ माहौल बताते हुए कहा कि इस तरह की गतिविधियां राष्ट्रीय हित में नहीं हैं।

    इसी बातचीत के दौरान पूनम ने इमरान खान को लेकर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि अमेरिकी नागरिक होने के कारण उन्हें देश के आंतरिक मामलों में दखल नहीं देना चाहिए था। इस टिप्पणी के साथ उन्होंने देश में चल रहे राजनीतिक घटनाक्रम और विरोध प्रदर्शनों को लेकर अपनी असहमति जाहिर की।

    इस बीच, कॉकरोच जनता पार्टी को दिल्ली में विरोध का भी सामना करना पड़ा। शुक्रवार को पार्टी ने कनॉट प्लेस के सेंट्रल पार्क में ‘लहरा दो तिरंगा’ कार्यक्रम आयोजित करने के लिए समर्थकों को बुलाया था। हालांकि, वहां बड़ी संख्या में विरोध करने वाले लोग भी जुट गए। कनॉट प्लेस के कई कारोबारियों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और दिल्ली पुलिस के समर्थन में नारे लगाए तथा सीजेपी के खिलाफ विरोध दर्ज कराया।

    कार्यक्रम से पहले पार्टी के युवा नेताओं अभिजीत दीपके और नेहा बोरा को हिरासत में लिए जाने की भी खबर सामने आई। इसके बाद कार्यक्रम में पार्टी समर्थकों की संख्या अपेक्षाकृत कम रही। इस घटनाक्रम के बीच सीजेपी को एक ओर राजनीतिक विरोध का सामना करना पड़ रहा है, वहीं पहले समर्थन कर चुकी पूनम पांडे की आलोचना भी उसके लिए चर्चा का विषय बन गई है।

  • कनॉट प्लेस में प्रदर्शन से पहले दिल्ली पुलिस की कार्रवाई, कॉक्रोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दिपके हिरासत में

    कनॉट प्लेस में प्रदर्शन से पहले दिल्ली पुलिस की कार्रवाई, कॉक्रोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दिपके हिरासत में

    नई दिल्ली । दिल्ली पुलिस ने शुक्रवार, 16 अक्टूबर 2026 को कॉक्रोच जनता पार्टी (सीजेपी) के संस्थापक अभिजीत दिपके को एहतियाती हिरासत में ले लिया। यह कार्रवाई कनॉट प्लेस के सेंट्रल पार्क में प्रस्तावित ‘लहरा दो तिरंगा’ विरोध प्रदर्शन से पहले की गई। दिपके ने इस प्रदर्शन का आह्वान किया था। पुलिस ने इससे पहले उन्हें नोटिस जारी कर कनॉट प्लेस में बिना कानूनी अनुमति लोगों को एकत्र करने पर आपत्ति जताई थी।

    अभिजीत दिपके को राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) के प्रवक्ता अनीश गवांडे के आवास से निकलने के बाद हिरासत में लिया गया। इस दौरान पुलिस अधिकारी ने उन्हें बताया कि कनॉट प्लेस में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 163 के तहत प्रतिबंधात्मक आदेश लागू हैं और इसी आधार पर उन्हें एहतियाती हिरासत में लिया जा रहा है।

    सीजेपी की ओर से शुक्रवार को कनॉट प्लेस के सेंट्रल पार्क में ‘लहरा दो तिरंगा’ प्रदर्शन आयोजित करने का आह्वान किया गया था। पुलिस के अनुसार, सोशल मीडिया के माध्यम से लोगों से शाम पांच बजे कनॉट प्लेस में जुटने की अपील की गई थी। हालांकि, प्रस्तावित प्रदर्शन के लिए आवश्यक कानूनी अनुमति नहीं ली गई थी। इसी वजह से पुलिस ने दिपके को नोटिस जारी किया था।

    पुलिस ने अपने नोटिस में दिल्ली हाई कोर्ट के निर्देशों का हवाला देते हुए कहा था कि कनॉट प्लेस में बिना अनुमति भीड़ जुटने से यातायात व्यवस्था, कानून-व्यवस्था और सार्वजनिक सुरक्षा प्रभावित हो सकती है। इसके अलावा, क्षेत्र में होने वाली व्यावसायिक गतिविधियों पर भी असर पड़ने की आशंका जताई गई थी। पुलिस ने कहा कि कनॉट प्लेस राजधानी का प्रमुख व्यावसायिक इलाका है, जहां बड़ी संख्या में दुकानें, शोरूम, रेस्तरां, होटल, बैंक और कार्यालय संचालित होते हैं।

    नोटिस में यह भी कहा गया था कि प्रदर्शन के कारण कारोबारियों के साथ-साथ वहां काम करने वाले कर्मचारियों की आजीविका प्रभावित हो सकती है। कनॉट प्लेस में किसी भी बड़े जमावड़े से आम लोगों की आवाजाही और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के कामकाज में बाधा आने की आशंका को पुलिस ने अपनी कार्रवाई का एक प्रमुख आधार बताया।

    पुलिस ने राजीव चौक मेट्रो स्टेशन का उल्लेख करते हुए भीड़ जुटने से पैदा होने वाली संभावित समस्याओं पर चिंता जताई थी। यह स्टेशन ब्लू और येलो लाइन को जोड़ने वाला प्रमुख मेट्रो केंद्र है। पुलिस के अनुसार, यहां से प्रतिदिन करीब दो लाख यात्री सफर करते हैं। ऐसे में प्रदर्शन के दौरान लोगों की संख्या बढ़ने पर यातायात जाम, अव्यवस्था और भगदड़ जैसी स्थिति उत्पन्न होने का खतरा हो सकता है।

    दिल्ली पुलिस ने स्पष्ट किया था कि कनॉट प्लेस में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा 163 के तहत प्रतिबंधात्मक आदेश लागू हैं। इन आदेशों का उल्लंघन करने पर भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 223 और अन्य संबंधित कानूनी प्रावधानों के तहत कार्रवाई की जा सकती है।

    नोटिस के जरिए दिपके को कनॉट प्लेस और उसके आसपास किसी भी प्रकार का प्रदर्शन, जुलूस या रैली आयोजित नहीं करने तथा लाउडस्पीकर का इस्तेमाल नहीं करने का निर्देश दिया गया था। पुलिस ने यह भी कहा था कि कनॉट प्लेस अधिसूचित प्रदर्शन स्थल नहीं है। किसी अन्य निर्धारित स्थान पर प्रदर्शन करने के लिए भी पहले संबंधित अधिकारियों से कानूनी अनुमति लेना आवश्यक है।

    इस तरह, प्रस्तावित विरोध प्रदर्शन से पहले पुलिस ने प्रतिबंधात्मक आदेशों और सार्वजनिक व्यवस्था से जुड़ी आशंकाओं का हवाला देते हुए कार्रवाई की। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, दिपके को एहतियाती हिरासत में लिया गया; प्रदर्शन के आयोजन और आगे की कार्रवाई से संबंधित अतिरिक्त विवरण सामने नहीं आया है।

  • दिल्ली में तिरंगा यात्रा से पहले अभिजीत दीपके के घर पहुंची पुलिस, प्रदर्शन को लेकर दिया नोटिस

    दिल्ली में तिरंगा यात्रा से पहले अभिजीत दीपके के घर पहुंची पुलिस, प्रदर्शन को लेकर दिया नोटिस

    नई दिल्ली । दिल्ली में कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के प्रस्तावित प्रदर्शन और तिरंगा यात्रा से पहले पुलिस ने पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके के ठिकाने पर पहुंचकर उन्हें नोटिस दिया। पुलिस ने स्पष्ट किया कि कनॉट प्लेस में तिरंगा यात्रा निकालने की अनुमति नहीं है। अधिकारियों के अनुसार, इलाके में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 लागू होने के कारण मार्च निकालने से बचने के लिए कहा गया है।16 अक्टूबर 2026 को दिल्ली पुलिस की एक टीम अभिजीत दीपके के पास पहुंची। पुलिस ने उन्हें प्रस्तावित प्रदर्शन नहीं करने की हिदायत दी। बताया गया कि टीम में लगभग 15 से 20 पुलिसकर्मी शामिल थे। उस समय दीपके दिल्ली के झंडेवालान इलाके में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के शरदचंद्र पवार गुट के प्रवक्ता अनीश गवांडे के आवास पर ठहरे हुए थे।

    पुलिस ने अभिजीत दीपके को दिल्ली पुलिस अधिनियम, 1978 की धारा 29 के तहत नोटिस दिया। अधिकारियों ने बताया कि कनॉट प्लेस में किसी भी तरह की तिरंगा यात्रा के लिए अनुमति नहीं दी गई है। पुलिस की ओर से यह कदम सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने और शांति एवं सुरक्षा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से उठाया गया।पुलिस ने कहा कि संबंधित क्षेत्र में धारा 163 लागू होने और मार्च के लिए अनुमति नहीं मिलने के कारण यात्रा या प्रदर्शन आयोजित नहीं किया जाना चाहिए। यदि इसके बावजूद कोई मार्च निकाला जाता है, तो इसे लागू नियमों का उल्लंघन माना जा सकता है। ऐसी स्थिति में पुलिस कानून के अनुसार कार्रवाई कर सकती है।

    नोटिस देने के बाद दिल्ली पुलिस की टीम अभिजीत दीपके के ठिकाने से लौट गई। पुलिस अधिकारियों से मिली जानकारी के अनुसार, नोटिस सौंपने के बाद टीम वहां से रवाना हुई। इस कार्रवाई के दौरान पुलिस ने प्रस्तावित कार्यक्रम को लेकर लागू प्रतिबंधों और अनुमति संबंधी स्थिति स्पष्ट की।कनॉट प्लेस के सेंट्रल पार्क को लेकर भी जानकारी सामने आई। बताया गया कि नई दिल्ली नगरपालिका परिषद (एनडीएमसी) ने 16 और 17 अक्टूबर के लिए सेंट्रल पार्क बंद कर दिया है। इसी दौरान संबंधित क्षेत्र में धारा 163 लागू होने की बात कही गई। ऐसे में प्रस्तावित तिरंगा यात्रा के आयोजन को लेकर पुलिस ने आयोजकों को नियमों का पालन करने की हिदायत दी।

    इस घटनाक्रम से पहले अभिजीत दीपके ने सोशल मीडिया पर एक संदेश साझा किया था। इसमें उन्होंने महात्मा गांधी का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत के पास महात्मा गांधी हैं और देश के युवा हमेशा उनके दिखाए रास्ते पर चलेंगे। उन्होंने शांति और अहिंसा के मार्ग पर चलने की बात कही।दिल्ली पुलिस की कार्रवाई का मुख्य उद्देश्य प्रस्तावित कार्यक्रम के दौरान सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखना बताया गया है। पुलिस ने अनुमति नहीं मिलने और धारा 163 लागू होने का हवाला देते हुए तिरंगा यात्रा नहीं निकालने को कहा। फिलहाल, उपलब्ध जानकारी के अनुसार, दीपके को नोटिस दिए जाने के बाद पुलिस टीम वहां से लौट चुकी है।

  • भोपाल में आदिवासी छात्रों के ‘जय जोहार’ नारे पर कथित गाली-गलौज का वीडियो वायरल, मिसरोद थाना प्रभारी निलंबित, उमंग सिंघार ने मांगी एफआईआर

    भोपाल में आदिवासी छात्रों के ‘जय जोहार’ नारे पर कथित गाली-गलौज का वीडियो वायरल, मिसरोद थाना प्रभारी निलंबित, उमंग सिंघार ने मांगी एफआईआर


    मध्य प्रदेश। की राजधानी भोपाल में अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रहे आदिवासी छात्रों के साथ कथित अभद्र व्यवहार का मामला सामने आया है। छात्रों के ‘जय जोहार’ के नारे लगाने के दौरान मिसरोद थाना प्रभारी रतन सिंह परिहार पर गाली-गलौज करने का आरोप लगा है। घटना का वीडियो वायरल होने के बाद भोपाल पुलिस कमिश्नर संजय कुमार ने कार्रवाई करते हुए थाना प्रभारी को निलंबित कर दिया। वहीं, मध्य प्रदेश विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने संबंधित पुलिसकर्मी के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग की है।

    जानकारी के अनुसार, आदिवासी छात्र अपनी विभिन्न मांगों को लेकर भोपाल में प्रदर्शन कर रहे थे। इसी दौरान वे मुख्यमंत्री निवास की ओर बढ़ने लगे, लेकिन पुलिस ने उन्हें रास्ते में रोक लिया। आरोप है कि छात्रों को जबरन पुलिस वाहन में बैठाया गया। जब छात्र वाहन में बैठ रहे थे, तब वे ‘जय जोहार’ के नारे लगा रहे थे।

    इसी दौरान वाहन के बाहर मौजूद मिसरोद थाना प्रभारी रतन सिंह परिहार पर छात्रों के प्रति अभद्र भाषा का इस्तेमाल करने और गालियां देने का आरोप लगा।घटनास्थल पर मौजूद किसी व्यक्ति ने पूरे घटनाक्रम का वीडियो रिकॉर्ड कर लिया। बाद में यह वीडियो सोशल मीडिया पर साझा किया गया और वायरल हो गया। वीडियो सामने आने के बाद पुलिस के व्यवहार को लेकर सवाल उठने लगे। मामला अधिकारियों तक पहुंचने के बाद संबंधित थाना प्रभारी के खिलाफ कार्रवाई की गई।

    भोपाल पुलिस कमिश्नर संजय कुमार ने रतन सिंह परिहार को निलंबित कर दिया। पुलिस विभाग के एडीसीपी अनिल कुमार शर्मा ने भी कार्रवाई की पुष्टि करते हुए बताया कि सोशल मीडिया पर एक वीडियो सामने आया था, जिसमें निरीक्षक रतन सिंह परिहार आदिवासी छात्रों के संबंध में टिप्पणी करते दिखाई दे रहे थे। वीडियो का संज्ञान लेने के बाद उन्हें तत्काल निलंबित कर दिया गया। एडीसीपी के अनुसार, मामले की जांच की जा रही है।

    इस घटना पर मध्य प्रदेश विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने नाराजगी जताई है। उन्होंने आदिवासी छात्रों के साथ कथित अभद्र व्यवहार को गंभीर और निंदनीय बताते हुए संबंधित पुलिसकर्मी के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग की। सिंघार का कहना है कि आदिवासी छात्रों का अपमान करने के आरोपों की जांच के साथ कानूनी कार्रवाई भी होनी चाहिए।उन्होंने मांग उठाई कि मामले में कार्रवाई केवल निलंबन तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि संबंधित पुलिसकर्मी के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर आगे की कानूनी प्रक्रिया शुरू की जानी चाहिए। इस तरह उन्होंने घटना को आदिवासी समाज के सम्मान से जुड़ा मुद्दा बताया है।

    फिलहाल पुलिस ने थाना प्रभारी को निलंबित करने और मामले की जांच शुरू करने की जानकारी दी है। जांच के दौरान यह पता लगाया जाएगा कि प्रदर्शन के समय वास्तव में क्या हुआ था और वायरल वीडियो में दिखाई देने वाले घटनाक्रम में संबंधित अधिकारी की क्या भूमिका रही। मामले में एफआईआर दर्ज होने और जांच के अंतिम निष्कर्षों को लेकर स्थिति अभी स्पष्ट नहीं है।

    भोपाल में आदिवासी छात्रों के प्रदर्शन के दौरान सामने आया यह मामला अब पुलिस विभाग की कार्रवाई और एफआईआर की मांग को लेकर चर्चा में है। एक ओर थाना प्रभारी को निलंबित कर जांच शुरू की गई है, वहीं दूसरी ओर उमंग सिंघार ने कानूनी कार्रवाई की मांग उठाई है। अब जांच में सामने आने वाले तथ्यों और पुलिस की आगे की कार्रवाई पर नजर रहेगी।
  • सोनू निगम के बंगलूरू कॉन्सर्ट पर विवाद गहराया, कर्नाटक रक्षणा वेदिके ने पुलिस से अनुमति रोकने की मांग की, राज्यव्यापी आंदोलन की चेतावनी

    सोनू निगम के बंगलूरू कॉन्सर्ट पर विवाद गहराया, कर्नाटक रक्षणा वेदिके ने पुलिस से अनुमति रोकने की मांग की, राज्यव्यापी आंदोलन की चेतावनी

    नई दिल्ली । गायक सोनू निगम के बंगलूरू में होने वाले कॉन्सर्ट को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। कर्नाटक रक्षणा वेदिके ने पुलिस से 24 अक्तूबर को प्रस्तावित कार्यक्रम की अनुमति नहीं देने की मांग की है। संगठन का आरोप है कि अप्रैल 2025 में एक कॉलेज में आयोजित संगीत कार्यक्रम के दौरान सोनू निगम की टिप्पणी से कन्नड़ भाषियों की भावनाएं आहत हुई थीं। संगठन ने इस मुद्दे को उठाते हुए चेतावनी दी है कि यदि कॉन्सर्ट को अनुमति दी गई, तो राज्यभर में विरोध प्रदर्शन किया जा सकता है।

    कर्नाटक रक्षणा वेदिके के संयोजक टीए नारायण गौड़ा ने 14 अक्तूबर को बंगलूरू के पुलिस आयुक्त को पत्र लिखकर कार्यक्रम पर आपत्ति जताई। पत्र में उन्होंने पुलिस से अनुरोध किया कि सोनू निगम के प्रस्तावित कॉन्सर्ट को आयोजित करने की अनुमति न दी जाए। संगठन ने आशंका जताई कि कार्यक्रम को मंजूरी मिलने से लोगों में नाराजगी बढ़ सकती है और बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन की स्थिति पैदा हो सकती है।

    सोनू निगम का यह कार्यक्रम 24 अक्तूबर को शाम सात बजे बंगलूरू के थानिसंद्रा मेन रोड स्थित भारतीय मॉल में प्रस्तावित है। यह आयोजन ‘द रिवोल्यूशन इंडिया टूर’ के तहत किया जाना है। संगठन ने पुलिस से सार्वजनिक शांति और कानून-व्यवस्था पर संभावित प्रभाव को ध्यान में रखते हुए मामले में जल्द निर्णय लेने की अपील की है।

    विवाद की वजह अप्रैल 2025 में बंगलूरू के एक कॉलेज में आयोजित संगीत कार्यक्रम के दौरान हुई कथित टिप्पणी बताई जा रही है। कर्नाटक रक्षणा वेदिके के अनुसार, कार्यक्रम में मौजूद दर्शकों ने सोनू निगम से कन्नड़ भाषा में गाना गाने का अनुरोध किया था। संगठन का आरोप है कि इस अनुरोध के दौरान गायक ने ऐसी टिप्पणी की, जिससे कन्नड़ भाषियों की भाषाई अस्मिता और भावनाओं को ठेस पहुंची।

    टीए नारायण गौड़ा ने पुलिस आयुक्त को लिखे पत्र में कहा कि किसी कलाकार से कन्नड़ भाषा में गाना गाने का अनुरोध करना कोई अपराध नहीं है। संगठन ने इसी आधार पर आगामी कॉन्सर्ट की अनुमति रोकने की मांग की है। हालांकि, इस मामले में सोनू निगम की ओर से कोई प्रतिक्रिया दिए जाने की जानकारी उपलब्ध नहीं है।

    इस विवाद को लेकर पहले भी पुलिस में शिकायत दर्ज कराई गई थी। पत्र में उल्लेख किया गया है कि कर्नाटक रक्षणा वेदिके की बंगलूरू शहरी जिला इकाई के अध्यक्ष टीए धर्मराज ने 2 मई 2025 को अवलाहल्ली पुलिस थाने में शिकायत दी थी। शिकायत में सोनू निगम की कथित टिप्पणी के संबंध में कानूनी कार्रवाई करने की मांग की गई थी।

    अब संगठन ने आगामी कॉन्सर्ट को लेकर अपना विरोध दोबारा सामने रखा है। नारायण गौड़ा ने चेतावनी दी है कि यदि पुलिस कार्यक्रम को अनुमति देती है, तो संगठन राज्यभर में प्रदर्शन करने के लिए मजबूर होगा। उन्होंने पत्र में कहा कि कन्नड़ भाषियों के आत्मसम्मान से बढ़कर किसी कलाकार का कार्यक्रम नहीं है।
    ‌
    संगठन ने अधिकारियों से अपनी मांग पर जल्द फैसला लेने और इस संबंध में की गई कार्रवाई की जानकारी लिखित रूप में देने का भी अनुरोध किया है। फिलहाल, सोनू निगम के 24 अक्तूबर को प्रस्तावित बंगलूरू कॉन्सर्ट को अनुमति देने या रोकने के संबंध में पुलिस के निर्णय की जानकारी सामने नहीं आई है।

  • जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की कोशिश के बाद CJP के तीन नेता गिरफ्तार, बिना अनुमति कर रहे थे प्रवेश

    जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की कोशिश के बाद CJP के तीन नेता गिरफ्तार, बिना अनुमति कर रहे थे प्रवेश


    नई दिल्ली। दिल्ली में जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करने पहुंचे कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेताओं के खिलाफ पुलिस ने कार्रवाई की है। सौरव दास, आशुतोष रांका और अजिंक्य शिंदे को एहतियातन गिरफ्तार किया गया है। तीनों को एसईएम कोर्ट में पेश किया गया। इससे पहले पुलिस ने कथित तौर पर बिना अनुमति जंतर-मंतर क्षेत्र में प्रवेश करने के मामले में सौरव दास, आशुतोष रांका और संगठन के अन्य सदस्यों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की थी।

    CJP की लीगल हेड रत्ना सिंह ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर बताया था कि तीनों नेताओं को अदालत में पेश किया जाएगा। पुलिस के मुताबिक, प्राथमिकी में शांति बनाए रखने के लिए पहले दिए गए पीस बॉन्ड की शर्तों के उल्लंघन से संबंधित धाराएं भी शामिल की गई हैं।

    यह कार्रवाई उस समय हुई, जब CJP के कार्यकर्ता भारी बैरिकेडिंग के बीच जंतर-मंतर क्षेत्र में दाखिल हुए और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर नारेबाजी की। हाल ही में जंतर-मंतर को धरना-प्रदर्शन के लिए निर्धारित स्थलों की सूची से हटा दिया गया है।

    CJP का दावा- करीब 11 कार्यकर्ता हिरासत में लिए गए

    मंगलवार सुबह सौरव दास, आशुतोष रांका और संगठन के कुछ अन्य सदस्यों को निषेधाज्ञा का कथित उल्लंघन कर प्रतिबंधित क्षेत्र में प्रवेश करने के बाद हिरासत में लिया गया था। CJP का दावा है कि उसके करीब 11 सदस्यों को पुलिस ने हिरासत में लिया है।

    पुलिस के एक अधिकारी के अनुसार, हिरासत में लिए गए प्रदर्शनकारियों को द्वारका जिले के जाफरपुर कलां थाने ले जाया गया। इस दौरान कुछ CJP कार्यकर्ता थाने के बाहर जमा हो गए, जिसके बाद थाने और आसपास के इलाके में सुरक्षा बढ़ा दी गई।

    CJP के संस्थापक दीपके ने संगठन की कार्रवाई को जंतर-मंतर पर दोबारा अपना अधिकार जताने की कोशिश बताया। उनका कहना है कि प्रदर्शन स्थल को निर्धारित स्थानों की सूची से हटाए जाने के बावजूद संगठन का आंदोलन जारी रहेगा।

    एक साल तक शांति बनाए रखने की शर्त पर मिली थी रिहाई

    इससे पहले शनिवार को भी दीपके, सौरव दास और आशुतोष रांका को दिल्ली पहुंचने के बाद हिरासत में लिया गया था। उस समय कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के चलते ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर CJP का प्रस्तावित प्रदर्शन नहीं हो सका था।

    तीनों को एक दिन बाद इस शर्त पर रिहा किया गया था कि वे एक साल तक शांति भंग नहीं करेंगे। पुलिस के अनुसार, मौजूदा मामले में पीस बॉन्ड की शर्तों के उल्लंघन से जुड़ी धाराएं भी जोड़ी गई हैं।

    प्रदर्शन के लिए नए स्थान तय किए जाने पर विवाद

    दिल्ली पुलिस आयुक्त अनुराग कुमार ने 11 अक्टूबर को एक स्थायी आदेश जारी किया था। इसमें रामलीला मैदान, बुराड़ी मैदान और सीबीडी मैदान को धरना-प्रदर्शन के लिए नए निर्धारित स्थलों के रूप में सूचीबद्ध किया गया था।

    CJP का कहना है कि जंतर-मंतर को निर्धारित प्रदर्शन स्थलों की सूची से हटाए जाने की घोषणा 12 अक्टूबर को हुई। संगठन के मुताबिक, इसी दिन उसके प्रतिनिधि शांतिपूर्ण प्रदर्शन के लिए तारीख और समय तय कराने के उद्देश्य से संसद मार्ग थाने पहुंचे थे।

    जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की कोशिश के बाद पुलिस की कार्रवाई से CJP और दिल्ली पुलिस के बीच टकराव की स्थिति बन गई है। संगठन ने आंदोलन जारी रखने की बात कही है, जबकि पुलिस ने निषेधाज्ञा के कथित उल्लंघन और शांति बनाए रखने की शर्तों से जुड़े प्रावधानों के तहत कार्रवाई की है।

  • Protest: बैटमैन के अवतार में दिखे राहुल गांधी, खरगे ने भी मास्क पहनकर दिया पोज

    Protest: बैटमैन के अवतार में दिखे राहुल गांधी, खरगे ने भी मास्क पहनकर दिया पोज


    नई दिल्ली।
    दिल्ली (Delhi) में चुनाव आयोग (Election Commission) के खिलाफ विपक्ष के प्रदर्शन के दौरान सोमवार को एक दिलचस्प तस्वीर सामने आई। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी (Rahul Gandhi) बैटमैन (Batman) के मास्क के साथ नजर आए, वहीं कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे (President Mallikarjun Kharge) ने भी बैटमैन वाला मास्क पहनकर पोज दिया। विपक्ष का यह मार्च मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ चल रहे विरोध प्रदर्शन के तहत सुप्रीम कोर्ट की ओर निकाला गया था। यह पूरा मामला मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) से जुड़ा है।


    राहुल गांधी की बैटमैन वाली तस्वीर हुई चर्चा में

    राहुल गांधी की बैटमैन मास्क के साथ तस्वीर ने लोगों का ध्यान खींचा। नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ इंडिया (NSUI) ने भी इस तस्वीर को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर शेयर किया। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे भी सोमवार को विरोध मार्च के दौरान बैटमैन के मास्क के साथ पोज देते नजर आए। राजनीतिक रूप से अहम इस प्रदर्शन के बीच दोनों नेताओं का यह अंदाज चर्चा का विषय बना।


    जब राहुल गांधी से पूछा गया था- क्या आप बैटमैन हैं?

    बैटमैन के साथ राहुल गांधी का यह जुड़ाव पहले भी चर्चा में आ चुका है। इससे पहले इंस्टाग्राम पर आयोजित ‘आस्क मी एनीथिंग’ सत्र के दौरान एक यूजर ने उनसे पूछा था कि क्या वह बैटमैन हैं? इस सवाल के जवाब में राहुल गांधी ने मजाकिया अंदाज में कहा था, “बस इतना कह सकते हैं कि किसी ने मुझे और बैटमैन को कभी एक ही कमरे में साथ नहीं देखा है।” अब विपक्ष के मार्च के दौरान बैटमैन मास्क के साथ उनकी तस्वीर सामने आने से यह पुराना जवाब एक बार फिर प्रासंगिक हो गया।


    SIR के मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट पहुंचा INDIA गठबंधन

    बैटमैन मास्क के बीच इस प्रदर्शन की भी खूब चर्चा है। राहुल गांधी ने INDIA गठबंधन के 10 अन्य नेताओं के साथ भारतीय निर्वाचन आयोग (ECI) के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है। यह याचिका विशेष गहन पुनरीक्षण से जुड़े मुद्दों पर दाखिल की गई है। इस याचिका पर मंगलवार यानी आज सुनवाई होने की संभावना है।


    याचिका दाखिल करने वाले नेताओं में शामिल हैं:

    राहुल गांधी और कांग्रेस अध्यक्ष
    मल्लिकार्जुन खरगे
    तृणमूल कांग्रेस के सांसद सौगत रॉय
    समाजवादी पार्टी के प्रमुख और सांसद
    अखिलेश यादव
    राष्ट्रीय जनता दल के नेता तेजस्वी प्रसाद यादव
    शिवसेना
    (UBT) के सांसद
    संजय राउत
    माकपा महासचिव एमए बेबी
    भाकपा महासचिव डी. राजा
    झारखंड मुक्ति मोर्चा की सांसद महुआ माझी
    एनसीपी (शरद पवार) की सांसद सुप्रिया सुले
    इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (IUML) के सांसद ईटी मोहम्मद बशीर


    दिल्ली में जारी है विरोध प्रदर्शन

    दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर व्यापक विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। इसी बीच सोमवार को दिल्ली पुलिस के एक सर्कुलर के अनुसार, जंतर-मंतर को निर्धारित प्रदर्शन स्थल की सूची से हटा दिया गया है।

    यह घटनाक्रम जून और जुलाई में हुए CJP के प्रदर्शनों के बाद सामने आया है। उस दौरान संगठन ने कथित पेपर लीक के मुद्दे पर तत्कालीन केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग की थी और उन्हें इस्तीफा देना पड़ा था।

  • जंतर-मंतर को प्रदर्शन स्थलों की सूची से हटाने पर CJP प्रवक्ता सौरव दास ने उठाए सवाल, शांतिपूर्ण विरोध के अधिकार पर जताई चिंता

    जंतर-मंतर को प्रदर्शन स्थलों की सूची से हटाने पर CJP प्रवक्ता सौरव दास ने उठाए सवाल, शांतिपूर्ण विरोध के अधिकार पर जताई चिंता

    नई दिल्ली ।दिल्ली में धरना-प्रदर्शन के लिए निर्धारित स्थानों को लेकर किए गए बदलाव के बाद जंतर-मंतर को आधिकारिक प्रदर्शन स्थलों की सूची से हटा दिया गया है। इस फैसले पर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रवक्ता सौरव दास ने सवाल उठाए हैं। उन्होंने इस निर्णय पर अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए पूछा कि आखिर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जंतर-मंतर से क्यों डरते हैं। दास ने कहा कि जंतर-मंतर भारत के लोगों का है और इस तरह के फैसले से शांतिपूर्ण विरोध करने के अधिकार को लेकर सवाल खड़े होते हैं।

    सौरव दास ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर एक पोस्ट साझा कर इस बदलाव पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने सवाल किया कि क्या गृह मंत्रालय ने जंतर-मंतर को प्रदर्शन स्थलों की सूची से हटाने का निर्णय लेने से पहले देश के लोगों से सलाह ली थी। उन्होंने यह भी पूछा कि क्या इस फैसले से जुड़े किसी हितधारक या संगठन से विचार-विमर्श किया गया। दास ने अपने बयान में निर्णय लेने की प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाते हुए कहा कि इस तरह का कदम उठाने से पहले संबंधित पक्षों की राय जानना जरूरी है।

    अपने पोस्ट में दास ने केंद्र सरकार के फैसले को लेकर कड़ी टिप्पणी भी की। उन्होंने लिखा कि जिस तरह जंतर-मंतर को प्रदर्शन स्थल के रूप में अधिसूचित सूची से हटाया जा रहा है, उसी तरह प्रधानमंत्री जल्द ही भारत में लोकतंत्र को भी अधिसूचित सूची से बाहर कर देंगे। उन्होंने इस कार्रवाई को उस दिशा में शुरुआत बताया। दास ने कहा कि उनकी पार्टी इस फैसले को स्वीकार नहीं करती और इसे मनमाना निर्णय मानती है। हालांकि, लोकतंत्र को लेकर की गई उनकी टिप्पणी उनके राजनीतिक विरोध और फैसले पर व्यक्त की गई प्रतिक्रिया का हिस्सा है।

    सौरव दास ने अपने बयान में विरोध करने और शांतिपूर्ण ढंग से एकत्र होने के अधिकार का भी उल्लेख किया। उनका कहना है कि जंतर-मंतर को प्रदर्शन स्थलों की सूची से हटाना लोगों के मौलिक अधिकारों पर हमला है। उन्होंने इस फैसले के विरोध में कहा कि अब पूरा देश ही जंतर-मंतर बन रहा है। उनकी इस टिप्पणी के जरिए उन्होंने यह संदेश देने की कोशिश की कि किसी एक स्थान पर प्रदर्शन की व्यवस्था में बदलाव होने के बावजूद विरोध की भावना समाप्त नहीं होगी।

    दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शन आयोजित करने के लिए तीन वैकल्पिक स्थान निर्धारित किए हैं। इनमें रामलीला मैदान, बुराड़ी मैदान और पूर्वी दिल्ली का सीबीडी मैदान शामिल हैं। इन स्थानों पर प्रदर्शन करने वाले लोगों को संबंधित नियमों और अनुमति की शर्तों का पालन करना होगा। इस तरह जंतर-मंतर को सूची से हटाए जाने के बाद राजधानी में प्रदर्शन के लिए इन तीन जगहों का विकल्प उपलब्ध कराया गया है।

    जंतर-मंतर लंबे समय से दिल्ली में धरना-प्रदर्शन और विरोध दर्ज कराने का प्रमुख केंद्र रहा है। विभिन्न मुद्दों पर अपनी मांगें रखने के लिए लोग यहां जुटते रहे हैं। ऐसे में इसे आधिकारिक प्रदर्शन स्थलों की सूची से हटाने के फैसले पर सौरव दास की प्रतिक्रिया सामने आई है। उन्होंने निर्णय की प्रक्रिया, संबंधित पक्षों से परामर्श और शांतिपूर्ण विरोध के अधिकार को लेकर सवाल उठाए हैं। वहीं, प्रदर्शन के लिए रामलीला मैदान, बुराड़ी मैदान और सीबीडी मैदान को वैकल्पिक स्थान के रूप में निर्धारित किया गया है, जहां नियमों और अनुमति संबंधी शर्तों के अनुसार प्रदर्शन किए जा सकेंगे।