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  • सीवान हिंसा पर राहुल गांधी का केंद्र पर हमला, छात्रों के साथ कार्रवाई को लेकर प्रधानमंत्री से पूछा बड़ा सवाल

    सीवान हिंसा पर राहुल गांधी का केंद्र पर हमला, छात्रों के साथ कार्रवाई को लेकर प्रधानमंत्री से पूछा बड़ा सवाल

    नई दिल्ली । बिहार के सीवान जिले में बिहार बंद के दौरान हुई हिंसा और फायरिंग की घटना को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने इस घटनाक्रम को लेकर केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधते हुए छात्रों के साथ की गई कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं। वहीं, पुलिस का कहना है कि पूरे मामले की जांच जारी है और सभी तथ्यों की पुष्टि के बाद ही घटना की वास्तविक तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी।

    राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पर जारी अपने बयान में आरोप लगाया कि छात्रों के खिलाफ कार्रवाई का तरीका चिंताजनक है। उन्होंने कहा कि बिहार में प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर गोली चलने और बड़ी संख्या में छात्रों की गिरफ्तारी तथा उनके खिलाफ मामले दर्ज किए जाने की खबरें सामने आई हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री से सवाल किया कि छात्रों के खिलाफ कार्रवाई नहीं करने और उन्हें रिहा करने संबंधी आश्वासन का क्या हुआ। राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि छात्रों की आवाज को दबाने का प्रयास किया जा रहा है और सरकार अपने वादों से पीछे हट रही है।

    कांग्रेस नेता ने दिल्ली और बिहार की घटनाओं का उल्लेख करते हुए दावा किया कि विभिन्न राज्यों में छात्रों के आंदोलनों के प्रति एक जैसी कार्यप्रणाली अपनाई जा रही है। उन्होंने कहा कि छात्रों के साथ सख्ती की घटनाएं लोकतांत्रिक मूल्यों के अनुरूप नहीं हैं और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए। साथ ही उन्होंने छात्रों से जुड़े मामलों में संवेदनशील दृष्टिकोण अपनाने की आवश्यकता पर भी जोर दिया।

    यह राजनीतिक प्रतिक्रिया उस समय सामने आई जब बिहार बंद के दौरान सीवान में प्रदर्शन हिंसक हो गया। प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच झड़प, पथराव और फायरिंग की घटनाओं के बाद इलाके में तनाव का माहौल बन गया। घटना में तीन प्रदर्शनकारी गोली लगने से घायल हुए, जबकि पथराव और झड़प के दौरान जिला पुलिस अधीक्षक सहित कई पुलिस अधिकारी और पुलिसकर्मी भी घायल हुए।

    घायल प्रदर्शनकारियों को प्राथमिक उपचार के बाद बेहतर इलाज के लिए पटना भेजा गया। प्रशासन ने कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया और स्थिति पर लगातार नजर रखी। घटना के बाद क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था भी कड़ी कर दी गई।

    फायरिंग को लेकर विपक्षी नेताओं ने आरोप लगाया कि प्रदर्शन के दौरान छात्रों पर एके-47 से गोलियां चलाई गईं। हालांकि पुलिस ने इस दावे की पुष्टि नहीं की है। जिला पुलिस अधीक्षक ने कहा कि फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि प्रदर्शनकारियों को गोली किसकी ओर से लगी। उन्होंने बताया कि पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच की जा रही है और सभी उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर तथ्य सामने लाए जाएंगे।

    पुलिस के अनुसार, हिंसा और उपद्रव के मामले में अब तक 65 लोगों को हिरासत में लिया गया है। अधिकारियों का कहना है कि वीडियो फुटेज, प्रत्यक्षदर्शियों के बयान और अन्य तकनीकी साक्ष्यों की मदद से घटना की जांच आगे बढ़ाई जा रही है। जांच पूरी होने के बाद ही जिम्मेदारी तय की जाएगी और आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

    सीवान की घटना ने एक बार फिर छात्र आंदोलनों, कानून-व्यवस्था और राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप को राष्ट्रीय चर्चा का विषय बना दिया है। एक ओर विपक्ष सरकार की भूमिका पर सवाल उठा रहा है, वहीं प्रशासन का कहना है कि जांच पूरी होने से पहले किसी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं होगा। अब सभी की नजर जांच के परिणाम और आगे की प्रशासनिक कार्रवाई पर टिकी हुई है।

  • बिजली संकट से उबल पड़ा शिवपुरी सरपंच सड़क पर लेटे ग्रामीणों ने तीन घंटे किया चक्काजाम अधिकारियों के आश्वासन के बाद खुला रास्ता

    बिजली संकट से उबल पड़ा शिवपुरी सरपंच सड़क पर लेटे ग्रामीणों ने तीन घंटे किया चक्काजाम अधिकारियों के आश्वासन के बाद खुला रास्ता


    शिवपुरी । शिवपुरी जिले के अमोला थाना क्षेत्र के सिरसौद गांव में लगातार हो रही बिजली कटौती के खिलाफ ग्रामीणों का गुस्सा आखिरकार सड़क पर फूट पड़ा। रविवार सुबह सरपंच अतर सिंह लोधी के नेतृत्व में सैकड़ों ग्रामीणों ने सिरसौद पिछोर मार्ग पर चक्काजाम कर जोरदार प्रदर्शन किया। आंदोलन के दौरान सरपंच खुद सड़क पर लेट गए और बिजली विभाग के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। करीब तीन घंटे तक चले इस प्रदर्शन के कारण सड़क के दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं। हालांकि प्रदर्शनकारियों ने मानवता का परिचय देते हुए एम्बुलेंस को बिना किसी बाधा के गुजरने दिया। सुबह करीब नौ बजे बिजली विभाग के अधिकारियों के मौके पर पहुंचकर समाधान का भरोसा देने के बाद चक्काजाम समाप्त हुआ।

    ग्रामीणों का आरोप है कि पिछले कई दिनों से लोड सेटिंग के नाम पर रोजाना 10 से 12 घंटे तक बिजली की आपूर्ति बाधित की जा रही है। सबसे अधिक परेशानी रात के समय होने वाली कटौती से हो रही है। लगातार बिजली गुल रहने के कारण लोग भीषण गर्मी और उमस में रातभर जागने को मजबूर हैं। घरेलू कामकाज प्रभावित हो रहे हैं और बच्चों की पढ़ाई भी बाधित हो रही है। ग्रामीणों ने बताया कि अंधेरे के कारण हाल ही में एक महिला छत से गिरकर घायल भी हो गई थी जिससे लोगों में आक्रोश और बढ़ गया।

    चक्काजाम की सूचना मिलते ही अमोला थाना प्रभारी योगेंद्र सिंह सेंगर पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे और ग्रामीणों को समझाने का प्रयास किया। लेकिन प्रदर्शनकारी बिजली विभाग के अधिकारियों को मौके पर बुलाने की मांग पर अड़े रहे। इसके बाद विभाग के अधिकारी घटनास्थल पहुंचे और ग्रामीणों से चर्चा कर समस्या के समाधान का आश्वासन दिया।

    सरपंच अतर सिंह लोधी ने आरोप लगाया कि क्षेत्र में एक घंटे बिजली देने के बाद अगले घंटे फिर कटौती कर दी जाती है जिससे सिरसौद सहित आसपास के करीब 15 गांवों के लोग परेशान हैं। उन्होंने कहा कि इस संबंध में कई बार विभागीय अधिकारियों को शिकायत दी गई लेकिन आज तक कोई स्थायी समाधान नहीं निकाला गया। उनका कहना है कि करैरा कस्बे में लोड सेटिंग के नाम पर बिजली कटौती नहीं की जाती जबकि ग्रामीण इलाकों में घंटों बिजली बंद रखी जाती है जिससे लोगों में भेदभाव की भावना पैदा हो रही है।

    ग्रामीणों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही बिजली व्यवस्था में सुधार नहीं हुआ और लोड सेटिंग के नाम पर घंटों कटौती जारी रही तो वे दोबारा सड़क पर उतरकर बड़ा आंदोलन करेंगे। ग्रामीणों का कहना है कि यह पहली बार नहीं है बल्कि कुछ महीने पहले भी इसी समस्या को लेकर प्रदर्शन किया जा चुका है लेकिन हालात अब तक नहीं बदले। ऐसे में अब वे स्थायी समाधान मिलने तक अपनी आवाज बुलंद करते रहेंगे।

  • कॉन्स्टिट्यूशन क्लब की दो बैठकों ने बदली संवाद की तस्वीर, छात्र आंदोलन के बाद सरकार की रणनीति में दिखा बदलाव

    कॉन्स्टिट्यूशन क्लब की दो बैठकों ने बदली संवाद की तस्वीर, छात्र आंदोलन के बाद सरकार की रणनीति में दिखा बदलाव

    नई दिल्ली । राष्ट्रीय राजधानी में शिक्षा से जुड़े मुद्दों को लेकर हुए छात्र आंदोलन के बाद सरकार और प्रदर्शनकारी प्रतिनिधियों के बीच हुई दो बैठकों ने राजनीतिक हलकों में नई चर्चा को जन्म दिया है। कॉन्स्टिट्यूशन क्लब में आयोजित इन बैठकों की तस्वीरों और उनके माहौल को लेकर यह माना जा रहा है कि संवाद की शैली और प्रस्तुति में स्पष्ट बदलाव देखने को मिला। पहली बैठक और बाद की बैठक के दृश्य सोशल मीडिया तथा राजनीतिक विश्लेषण का विषय बने रहे, जहां दोनों पक्षों के बीच बातचीत के तौर-तरीकों में अंतर महसूस किया गया।

    पहली बैठक उस समय हुई थी जब छात्र आंदोलन अपने शुरुआती चरण में था। बैठक की तस्वीरों में सरकारी प्रतिनिधि और प्रदर्शनकारी अलग-अलग प्रकार की बैठकों की व्यवस्था में नजर आए, जिसे लेकर कई तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आईं। इसके बाद आंदोलन लगातार जारी रहा और प्रदर्शनकारियों ने अपनी मांगों को लेकर शांतिपूर्ण तरीके से दबाव बनाए रखा। समय के साथ सरकार और प्रदर्शनकारियों के बीच एक और दौर की बातचीत हुई, जिसमें बैठक की व्यवस्था और दोनों पक्षों के व्यवहार को लेकर अलग तस्वीर सामने आई।

    दूसरी बैठक में प्रतिनिधियों के बीच बातचीत अपेक्षाकृत अधिक सहज वातावरण में होती दिखाई दी। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि संवाद के इस बदले हुए स्वरूप ने यह संकेत दिया कि लंबे समय तक चले आंदोलन और सार्वजनिक दबाव के बाद वार्ता की प्रक्रिया अधिक संतुलित दिखाई देने लगी। हालांकि सरकार की ओर से इस बदलाव को लेकर कोई औपचारिक टिप्पणी नहीं की गई, लेकिन बैठक की तस्वीरों और माहौल को लेकर व्यापक चर्चा होती रही।

    इस पूरे घटनाक्रम के दौरान छात्र आंदोलन लगातार अपने मूल मुद्दों पर केंद्रित रहा। प्रदर्शनकारियों ने परीक्षा व्यवस्था, जवाबदेही और शिक्षा प्रणाली से जुड़े विषयों को प्रमुखता से उठाया। आंदोलन से जुड़े प्रतिनिधियों का कहना था कि उनका उद्देश्य केवल निर्धारित मांगों पर समाधान प्राप्त करना है। दूसरी ओर, सरकार की ओर से भी समय-समय पर वार्ता के माध्यम से स्थिति को सामान्य बनाने का प्रयास किया गया।

    इस आंदोलन की एक विशेषता यह भी रही कि सोशल मीडिया ने इसकी पहुंच को काफी व्यापक बनाया। विभिन्न डिजिटल मंचों पर आंदोलन से जुड़े वीडियो, तस्वीरें और संदेश बड़ी संख्या में साझा किए गए। इससे बड़ी संख्या में युवाओं और छात्रों तक आंदोलन की जानकारी पहुंची। राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि डिजिटल माध्यमों ने इस बार जनसमर्थन जुटाने और मुद्दों को व्यापक स्तर पर पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

    राजनीतिक दलों की सक्रियता भी इस दौरान बढ़ती दिखाई दी। कई विपक्षी नेताओं ने छात्रों की मांगों का समर्थन किया, जबकि सरकार ने संवाद और प्रशासनिक कदमों के जरिए स्थिति संभालने का प्रयास किया। इस घटनाक्रम ने यह भी संकेत दिया कि शिक्षा और रोजगार जैसे विषय युवाओं के बीच महत्वपूर्ण मुद्दे बने हुए हैं और इनसे जुड़े आंदोलनों का प्रभाव राजनीतिक विमर्श पर भी पड़ सकता है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में संवाद, परामर्श और शांतिपूर्ण बातचीत किसी भी विवाद के समाधान का महत्वपूर्ण माध्यम होते हैं। कॉन्स्टिट्यूशन क्लब में हुई दोनों बैठकों ने यह दिखाया कि किसी भी लंबे आंदोलन के दौरान वार्ता की प्रक्रिया समय के साथ बदल सकती है। आने वाले समय में शिक्षा, परीक्षा व्यवस्था और युवाओं से जुड़े मुद्दों पर सरकार तथा संबंधित पक्षों के बीच होने वाले संवाद पर भी सभी की नजर बनी रहेगी।

  • मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के घर के बाहर प्रदर्शन करने वाले दंपती जेल भेजे गए, सोशल मीडिया पोस्ट से पुलिस तक पहुंची जानकारी

    मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के घर के बाहर प्रदर्शन करने वाले दंपती जेल भेजे गए, सोशल मीडिया पोस्ट से पुलिस तक पहुंची जानकारी


    इंदौर। मध्य प्रदेश के नगरीय विकास एवं आवास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के आवास के बाहर बिना अनुमति प्रदर्शन करने पहुंचे दंपती के खिलाफ पुलिस ने कार्रवाई करते हुए उन्हें जेल भेज दिया है। पुलिस जांच में यह भी सामने आया है कि दोनों ने सोशल मीडिया के जरिए लोगों से प्रदर्शन में शामिल होने की अपील की थी। साथ ही टंट्या भील चौराहे पर चल रहे छात्र आंदोलन के दौरान भी प्रदर्शनकारियों से मंत्री के घर तक चलने का आग्रह किया था।

    जानकारी के मुताबिक, बुधवार दोपहर प्रहलाद पांडेय और उनकी पत्नी संगीता हाथ में संविधान की प्रति लेकर मंत्री के आवास के बाहर पहुंचे थे। इससे पहले ही पुलिस को सोशल मीडिया के माध्यम से संभावित प्रदर्शन की सूचना मिल गई थी। सूचना मिलने के बाद पुलिस ने मंत्री के आवास के बाहर सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी थी।

    पुलिस पूछताछ में सामने आया कि दंपती ने कई लोगों से प्रदर्शन में शामिल होने का आग्रह किया था, लेकिन निर्धारित समय पर कोई भी उनके समर्थन में नहीं पहुंचा। जांच में यह भी पता चला कि उन्होंने टंट्या भील चौराहे पर चल रहे छात्र धरना-प्रदर्शन में मौजूद लोगों से भी मंत्री के आवास तक चलने की अपील की थी, लेकिन वहां से भी किसी ने उनका साथ नहीं दिया।

    जब दंपती मंत्री के आवास के बाहर पहुंचे तो पुलिस अधिकारियों ने उन्हें समझाने का प्रयास किया और बिना अनुमति प्रदर्शन न करने की सलाह दी। इसके बावजूद वे सड़क पर बैठकर प्रदर्शन करने लगे। इसके बाद पुलिस ने प्रहलाद पांडेय को उठाकर वाहन में बैठाया और उनकी पत्नी को भी हिरासत में लेकर थाने पहुंचाया, जहां दोनों से पूछताछ की गई।

    परदेशीपुरा थाना प्रभारी आर.डी. कानवा ने बताया कि पूछताछ के दौरान दोनों ने स्वीकार किया कि उन्होंने लोगों को प्रदर्शन के लिए बुलाया था। उन्होंने यह भी माना कि बिना अनुमति प्रदर्शन करना उनकी गलती थी। इसके बाद पुलिस ने शांति भंग की आशंका और बिना अनुमति प्रदर्शन करने के आरोप में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 151 सहित अन्य प्रासंगिक प्रावधानों के तहत कार्रवाई करते हुए दोनों को न्यायालय में पेश किया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया।

    इससे पहले भी दंपती ने मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के हालिया बयानों से आहत होने की बात कहते हुए उनके आवास के बाहर प्रदर्शन करने का प्रयास किया था। उस दौरान भी पुलिस ने उन्हें समझाने की कोशिश की थी, लेकिन वे प्रदर्शन पर अड़े रहे थे।

  • एनएसए हिरासत से 26 दिन के अनशन तक, सोनम वांगचुक के आंदोलन ने बदली सियासी तस्वीर, अस्पताल पहुंचकर केंद्रीय मंत्रियों ने तुड़वाया उपवास

    एनएसए हिरासत से 26 दिन के अनशन तक, सोनम वांगचुक के आंदोलन ने बदली सियासी तस्वीर, अस्पताल पहुंचकर केंद्रीय मंत्रियों ने तुड़वाया उपवास

    नई दिल्ली । करीब 26 दिनों तक चले आमरण अनशन के बाद सामाजिक कार्यकर्ता और शिक्षा सुधारक सोनम वांगचुक ने अपना उपवास समाप्त कर दिया। देर रात अस्पताल में केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और डॉ. जितेंद्र सिंह की मौजूदगी में उन्होंने अनशन तोड़ा। वांगचुक ने बताया कि यह फैसला लंबी बातचीत, विभिन्न पक्षों से मिले आग्रह और देश में किसी भी प्रकार की संभावित हिंसा से बचने की आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए लिया गया है। उन्होंने कहा कि आंदोलन से जुड़े आगे के निर्णय और बातचीत की शर्तों की जानकारी जल्द साझा की जाएगी तथा समर्थकों से पूरी तरह शांतिपूर्ण व्यवहार बनाए रखने की अपील की।

    सोनम वांगचुक पिछले कई सप्ताह से पेपर लीक और शिक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दों को लेकर जंतर-मंतर पर भूख हड़ताल कर रहे थे। स्वास्थ्य बिगड़ने पर उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां से भी उनका अनशन जारी रहा। इस दौरान देश के विभिन्न राज्यों से छात्र, सामाजिक संगठन और कई सार्वजनिक हस्तियां उनके समर्थन में सामने आईं। आंदोलन के बढ़ते प्रभाव ने इसे राष्ट्रीय स्तर की बहस का विषय बना दिया और सरकार तथा आंदोलनकारी पक्ष के बीच संवाद की संभावनाएं भी तेज हुईं।

    वांगचुक की हालिया भूमिका इसलिए भी चर्चा में रही क्योंकि कुछ महीने पहले तक वे राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के तहत हिरासत में थे। लद्दाख में हुए हिंसक प्रदर्शनों के बाद उन्हें एहतियाती कार्रवाई के तहत गिरफ्तार किया गया था और कई महीनों तक जेल में रखा गया। बाद में सरकार ने उनकी हिरासत समाप्त करने का निर्णय लिया और मार्च 2026 में उन्हें रिहा कर दिया गया। रिहाई के बाद उन्होंने फिर से सार्वजनिक जीवन में सक्रिय होकर शिक्षा और युवाओं से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाना शुरू किया।

    सोनम वांगचुक का नाम देश में शिक्षा सुधार और वैकल्पिक शिक्षण मॉडल के लिए लंबे समय से जाना जाता है। उन्होंने लद्दाख में विद्यार्थियों के लिए वैकल्पिक शिक्षा व्यवस्था विकसित करने के उद्देश्य से एसईसीएमओएल संस्थान की स्थापना की। उनके प्रयासों से स्थानीय शिक्षा व्यवस्था में कई बदलाव आए और स्कूलों के परीक्षा परिणामों में उल्लेखनीय सुधार दर्ज किया गया। शिक्षा के क्षेत्र में उनके योगदान को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सराहना मिली तथा उन्हें प्रतिष्ठित रेमन मैग्सेसे पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया।

    शिक्षा के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण और लद्दाख के संवेदनशील पारिस्थितिकी तंत्र को बचाने के लिए भी वांगचुक लगातार काम करते रहे हैं। पानी की कमी से निपटने के लिए विकसित किए गए उनके ‘आइस स्तूप’ मॉडल को वैश्विक पहचान मिली। इसके अलावा उन्होंने सौर ऊर्जा, टिकाऊ विकास और स्थानीय संसाधनों के बेहतर उपयोग से जुड़े कई नवाचारों पर भी काम किया है। यही वजह है कि वे केवल एक सामाजिक कार्यकर्ता नहीं बल्कि नवाचार और सामुदायिक विकास के प्रतीक के रूप में भी पहचाने जाते हैं।

    वांगचुक स्वयं को गांधीवादी विचारधारा से प्रेरित बताते हैं और विरोध दर्ज कराने के लिए अहिंसक तरीकों को प्राथमिकता देते हैं। लंबे उपवास, शांतिपूर्ण मार्च और संवाद आधारित आंदोलन उनकी कार्यशैली का हिस्सा रहे हैं। हालिया अनशन समाप्त होने के बाद भी उन्होंने स्पष्ट किया कि उनकी मांगों और मुद्दों पर बातचीत जारी रहेगी, लेकिन किसी भी परिस्थिति में आंदोलन का रास्ता शांतिपूर्ण ही रहेगा। उनके इस कदम ने एक बार फिर यह संकेत दिया है कि लोकतांत्रिक संवाद और शांतिपूर्ण विरोध आज भी सार्वजनिक जीवन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

  • NEET मुद्दे पर जंतर-मंतर बना देशभर के छात्रों का मंच, भोजन-पानी से लेकर समर्थन तक कई हाथ आए साथ

    NEET मुद्दे पर जंतर-मंतर बना देशभर के छात्रों का मंच, भोजन-पानी से लेकर समर्थन तक कई हाथ आए साथ

    नई दिल्ली । राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (NEET) से जुड़े मुद्दों को लेकर राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्रों का विरोध प्रदर्शन लगातार जारी है। आंदोलन में देश के विभिन्न राज्यों से पहुंचे छात्र शामिल हैं, जो परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता, पेपर लीक की घटनाओं पर सख्त कार्रवाई और शिक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार की मांग कर रहे हैं। प्रदर्शन स्थल पर अलग-अलग राज्यों से आए युवाओं की मौजूदगी ने इसे विविधता और सहभागिता का प्रतीक बना दिया है।

    धरनास्थल पर मौजूद छात्रों का कहना है कि उनका आंदोलन केवल एक परीक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि देश की पूरी भर्ती और परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता सुनिश्चित करने की मांग से जुड़ा है। उनका मानना है कि यदि परीक्षा प्रक्रिया निष्पक्ष और भरोसेमंद होगी तो लाखों युवाओं का भविष्य अधिक सुरक्षित होगा। इसी उद्देश्य से वे कठिन परिस्थितियों के बावजूद लगातार प्रदर्शन में शामिल हैं।

    गर्मी और उमस के बीच जंतर-मंतर पर बने अस्थायी शिविरों में बड़ी संख्या में छात्र दिन-रात डटे हुए हैं। प्रदर्शन में शामिल कई छात्र विभिन्न राज्यों से लंबी यात्रा कर दिल्ली पहुंचे हैं। उनका कहना है कि सीमित संसाधनों और चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों के बावजूद वे अपनी मांगों को लेकर पीछे हटने के लिए तैयार नहीं हैं। प्रदर्शनकारियों के अनुसार, यह संघर्ष शिक्षा व्यवस्था में सुधार और युवाओं के अधिकारों से जुड़ा हुआ है।

    धरने के दौरान स्थानीय नागरिकों, सामाजिक संगठनों और स्वयंसेवकों की ओर से भी लगातार सहयोग किया जा रहा है। कई लोग प्रदर्शनकारियों के लिए भोजन, पेयजल और अन्य आवश्यक सामग्री उपलब्ध करा रहे हैं। छात्रों का कहना है कि इस सहयोग से उन्हें आंदोलन जारी रखने का मनोबल मिलता है और यह दर्शाता है कि समाज के विभिन्न वर्ग भी उनकी मांगों के प्रति संवेदनशील हैं।

    प्रदर्शन स्थल पर अपनी बात रखने के लिए विशेष बोर्ड भी लगाए गए हैं, जहां छात्र अपनी मांगों और सुझावों को लिखकर साझा कर रहे हैं। इनमें परीक्षा प्रणाली में सुधार, पारदर्शी चयन प्रक्रिया, तकनीकी प्रशिक्षण और शिक्षा क्षेत्र में संरचनात्मक बदलाव जैसी मांगें प्रमुख रूप से सामने आ रही हैं। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि उनका उद्देश्य केवल विरोध दर्ज कराना नहीं, बल्कि सुधार के लिए ठोस सुझाव देना भी है।

    आंदोलन में शामिल कई छात्रों ने बताया कि उनके परिवारों की राय अलग-अलग रही, लेकिन उन्होंने अपने स्तर पर इस अभियान का हिस्सा बनने का निर्णय लिया। उनका कहना है कि यह केवल व्यक्तिगत भविष्य का नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए बेहतर शिक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने का प्रयास है। इसी भावना के साथ देश के विभिन्न हिस्सों से छात्र जंतर-मंतर पहुंच रहे हैं।

    इसी बीच कुछ स्थानीय परिवार भी प्रदर्शनकारियों की सहायता के लिए आगे आए हैं। कई लोग अपने घरों से भोजन तैयार कर छात्रों तक पहुंचा रहे हैं। स्वयंसेवकों का कहना है कि कठिन परिस्थितियों में बैठे छात्रों की सहायता करना सामाजिक जिम्मेदारी का हिस्सा है। इस सहयोग को प्रदर्शनकारी भी आंदोलन की बड़ी ताकत मान रहे हैं।

    जंतर-मंतर पर जारी आंदोलन के समानांतर सरकार और CJP के बीच बातचीत की प्रक्रिया भी चल रही है। हालांकि अब तक किसी अंतिम सहमति की घोषणा नहीं हुई है। प्रदर्शनकारी अपनी मांगों पर कायम हैं, जबकि बातचीत के माध्यम से समाधान तलाशने की कोशिश जारी है। फिलहाल धरना शांतिपूर्ण ढंग से जारी है और छात्र अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन स्थल पर डटे हुए हैं।

  • स्वास्थ्य खराब होने के बावजूद आंदोलन में सक्रिय अभिजीत दीपके, जंतर-मंतर को लेकर समर्थकों से की भावुक अपील

    स्वास्थ्य खराब होने के बावजूद आंदोलन में सक्रिय अभिजीत दीपके, जंतर-मंतर को लेकर समर्थकों से की भावुक अपील


    नई दिल्ली ।
    जंतर-मंतर पर जारी विरोध प्रदर्शन के बीच कॉकरोच जनता पार्टी के प्रमुख अभिजीत दीपके ने अपने समर्थकों और प्रदर्शनकारियों से एक भावुक अपील की है। उन्होंने बताया कि पिछले कुछ दिनों से वह तेज बुखार और शरीर में दर्द से जूझ रहे हैं। इसी कारण उन्होंने कहा कि यदि वह निर्धारित समय पर प्रदर्शन स्थल पर दिखाई न दें तो इसे उनकी मजबूरी समझा जाए। उन्होंने आश्वासन दिया कि कुछ घंटे आराम करने के बाद वह फिर से आंदोलन में शामिल होंगे।

    अभिजीत दीपके ने सोशल मीडिया पर साझा किए गए संदेश में बताया कि स्वास्थ्य ठीक नहीं होने के बावजूद वह लगातार पेनकिलर की मदद से काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि लगातार चल रहे बुखार और बॉडी पेन के कारण चिकित्सकीय सलाह के अनुसार कुछ समय आराम करना जरूरी हो गया है। उन्होंने प्रदर्शनकारियों से अपील की कि यदि वह कुछ समय के लिए जंतर-मंतर पर मौजूद न रहें तो इसे आंदोलन से दूरी के रूप में न देखा जाए।

    उन्होंने अपने संदेश में यह भी कहा कि स्वास्थ्य में सुधार होते ही वह शाम तक दोबारा प्रदर्शन स्थल पर लौटने का प्रयास करेंगे। उनके इस संदेश के बाद समर्थकों ने उनके शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की और आंदोलन जारी रखने का भरोसा भी जताया। पार्टी के नेताओं का कहना है कि आंदोलन अपनी निर्धारित रणनीति के अनुसार चलता रहेगा और कार्यक्रमों में कोई बदलाव नहीं किया गया है।

    इसी बीच कॉकरोच जनता पार्टी ने जंतर-मंतर क्षेत्र में इंटरनेट सेवाएं प्रभावित किए जाने का आरोप भी लगाया है। पार्टी का दावा है कि प्रदर्शन स्थल के आसपास इंटरनेट सेवाएं बाधित की गई हैं, जिससे आंदोलन से जुड़े लोगों को संवाद और समन्वय में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। पार्टी ने इस कदम पर सवाल उठाते हुए आशंका जताई कि कहीं प्रशासन किसी नई कार्रवाई की तैयारी तो नहीं कर रहा। हालांकि इस संबंध में प्रशासन या सरकार की ओर से कोई आधिकारिक पुष्टि या बयान सामने नहीं आया है।

    जानकारी के अनुसार अभिजीत दीपके पिछले कई सप्ताह से लगातार जंतर-मंतर पर चल रहे विरोध प्रदर्शन में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। आंदोलन की तैयारियों, समर्थकों से मुलाकात, विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधियों से चर्चा और लगातार व्यस्त कार्यक्रम के कारण उन्हें पर्याप्त आराम नहीं मिल सका। पार्टी का कहना है कि लगातार व्यस्त रहने और शारीरिक थकान के कारण उनकी तबीयत बिगड़ी है।

    इससे पहले भी अभिजीत दीपके ने प्रदर्शन स्थल पर तैनात पुलिस और अर्द्धसैनिक बलों से शांतिपूर्ण व्यवहार बनाए रखने की अपील की थी। उन्होंने कहा था कि प्रदर्शन पूरी तरह शांतिपूर्ण और अहिंसक तरीके से चलाया जा रहा है तथा किसी भी प्रकार के टकराव से बचना सभी पक्षों की जिम्मेदारी है। उन्होंने सुरक्षा बलों से प्रदर्शनकारियों के प्रति संयम बरतने का अनुरोध भी किया था।

    राजधानी में जारी इस आंदोलन पर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर लगातार नजर बनी हुई है। विभिन्न संगठनों और समर्थकों की मौजूदगी के बीच प्रदर्शन जारी है, जबकि प्रशासन भी स्थिति पर निगरानी रखे हुए है। अभिजीत दीपके के स्वास्थ्य संबंधी संदेश के बाद यह स्पष्ट किया गया है कि उनकी अस्थायी अनुपस्थिति केवल चिकित्सकीय कारणों से हो सकती है और स्वास्थ्य में सुधार होने पर वह फिर से आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाएंगे।

  • मेदांता में वांगचुक से मिलने पहुंचे 15 सांसद, पुलिस ने रोका तो धरने पर बैठे

    मेदांता में वांगचुक से मिलने पहुंचे 15 सांसद, पुलिस ने रोका तो धरने पर बैठे


    गुरुग्राम।
    देश की राजधानी दिल्ली में छात्रों के समर्थन में पिछले 25 दिनों से अनशन कर रहे सोनम वांगचुक से मिलने बुधवार शाम को आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद संजय सिंह के साथ 15 विपक्षी सांसद वांगचुक से मिलने मेदांता पहुंचे। पुलिस ने उन्हें अस्पताल गेट पर ही रोक लिया।

    सांसद संजय सिंह की पुलिस से इसको लेकर तीखी बहस हुई। अंदर प्रवेश न मिलने पर सभी सांसद अस्पताल के गेट पर धरने पर बैठ गए। इस दौरान वांगचुक की पत्नी गीतांजलि भी वहां पहुंचीं। गीतांजलि ने कहा कि सोनम ने सरकार को चिट्ठी लिखी है, जिसमें अपनी शर्तें और मांगें बताई हैं। सरकार को ये मांगें मान लेनी चाहिए।

    करीब एक घंटे तक हंगामा चलने के बाद वांगचुक की निगरानी कर रही मेडिकल टीम मौके पर पहुंची। टीम ने हेल्थ अपडेट दिया और मेडिकल कारणों का हवाला देते हुए कहा कि सिर्फ ब्लड रिलेशन वाले ही मरीज से मिल सकते हैं। इसके बाद सांसद वहां से चले गए। संजय सिंह ने आरोप लगाया कि सरकार वांगचुक को अनशन तोड़ने नहीं देना चाहती, उन्हें मारना चाहती है।

    वांगचुक ने सरकार के सामने रखीं ये शर्तें

    वांगचुक ने केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह को चिट्ठी लिखी है। चिट्ठी में उन्होंने सरकार की पहल का आभार जताया और कहा कि उनकी तीन मुख्य मांगें हैं। पहली यह कि पेपर लीक के बाद आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों को उचित मुआवजा दिया जाए। दूसरी मांग जवाबदेही तय करने के लिए संसद में सार्थक चर्चा हो। तीसरी मांग है कि शिक्षा मंत्री के इस्तीफे पर विचार किया जाए।

    वांगचुक ने अनशन तोड़ने की शर्त भी रखी। उन्होंने कहा कि 20 जुलाई 2026 को हुआ ‘चलो संसद’ मार्च पुलिस की कार्रवाई के बावजूद शांतिपूर्ण रहा। प्रदर्शनकारियों पर कोई कानूनी केस या उत्पीड़न जैसी दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जाएगी, इस आश्वासन के बाद वे अनशन खत्म कर देंगे।

    मेदांता ने जारी किया हेल्थ बुलेटिन

    मेदांता अस्पताल प्रबंधन ने बुधवार शाम हेल्थ बुलेटिन जारी किया। इसमें बताया गया कि वांगचुक को आईसीयू में रखा गया है।
    उनका इलाज मल्टी-डिसिप्लिनरी विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम कर रही है। फिलहाल उनकी स्थिति स्थिर है और वे पूरी तरह होश में हैं। उनका हर इलाज उनकी सहमति से किया जा रहा है।

  • छात्रों के मुद्दे पर लोकसभा में बढ़ा राजनीतिक टकराव, अखिलेश यादव ने उठाए सवाल, स्पीकर ओम बिरला ने नियमों का दिया हवाला

    छात्रों के मुद्दे पर लोकसभा में बढ़ा राजनीतिक टकराव, अखिलेश यादव ने उठाए सवाल, स्पीकर ओम बिरला ने नियमों का दिया हवाला

    नई दिल्ली । लोकसभा के मानसून सत्र के दौरान छात्रों से जुड़े मुद्दों और विरोध प्रदर्शनों पर चर्चा को लेकर सदन में राजनीतिक माहौल गर्म हो गया। समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष और सांसद अखिलेश यादव ने आरोप लगाया कि चर्चा के दौरान केवल कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी को बोलने का अवसर दिया गया, जबकि अन्य विपक्षी दलों को अपनी बात रखने का पर्याप्त मौका नहीं मिला। इस मुद्दे को लेकर उन्होंने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के समक्ष कड़ी आपत्ति दर्ज कराई, जिसके बाद सदन में कुछ समय के लिए तीखी बहस देखने को मिली।

    अखिलेश यादव ने सदन में कहा कि छात्रों और युवाओं से जुड़े मुद्दे किसी एक राजनीतिक दल तक सीमित नहीं हैं। उनके अनुसार यह पूरे देश के युवाओं का विषय है और सभी राजनीतिक दलों को इस पर अपनी बात रखने का समान अवसर मिलना चाहिए। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि कांग्रेस और भाजपा को बोलने का मौका दिया गया तो अन्य विपक्षी दलों को क्यों नहीं सुना गया। उन्होंने इसे संसदीय प्रक्रिया में समान अवसर के सिद्धांत से जुड़ा मुद्दा बताया।

    सपा प्रमुख ने छात्रों के विरोध प्रदर्शनों के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई पर भी सरकार को घेरा। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदर्शन कर रहे छात्रों के साथ अत्यधिक बल प्रयोग किया गया और उनकी आवाज दबाने का प्रयास हुआ। उन्होंने कहा कि यदि छात्रों की समस्याओं को गंभीरता से नहीं सुना गया तो विपक्ष लोकतांत्रिक तरीके से उनके समर्थन में सड़क से लेकर संसद तक संघर्ष जारी रखेगा। उन्होंने यह भी कहा कि युवाओं के भविष्य से जुड़े विषयों पर सरकार को संवेदनशील रवैया अपनाना चाहिए।

    अखिलेश यादव ने कहा कि छात्रों की मांगों को लेकर सरकार को सदन के भीतर विस्तृत चर्चा करनी चाहिए। उनके अनुसार यदि संसद में सभी पक्षों को अपनी बात रखने का अवसर मिलता और सरकार खुलकर जवाब देती तो विपक्ष को अलग से विरोध प्रदर्शन करने की आवश्यकता नहीं पड़ती। उन्होंने यह भी कहा कि विपक्ष का उद्देश्य केवल छात्रों की समस्याओं को सरकार के सामने प्रभावी ढंग से रखना है।

    इस दौरान लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने सदन में व्यवस्था बनाए रखने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि विभिन्न दलों ने चर्चा की इच्छा जताई है और सरकार भी इस विषय पर चर्चा के लिए तैयार है। हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि संसदीय नियमों के तहत व्यवस्थित तरीके से ही चर्चा कराई जा सकती है और सदन की कार्यवाही निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार ही चलेगी। उन्होंने यह भी कहा कि राजनीतिक दलों के आपसी मतभेदों का समाधान अध्यक्ष के स्तर पर नहीं किया जा सकता।

    सदन में जारी बहस के बीच कुछ समय के लिए हंगामे जैसी स्थिति भी बनी। इसके बाद कार्यवाही को स्थगित कर दिया गया। संसदीय कार्यवाही के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों ने अपने-अपने तर्क रखे। सरकार की ओर से यह दोहराया गया कि वह छात्रों से जुड़े मुद्दों पर चर्चा के लिए तैयार है, जबकि विपक्ष ने मांग की कि चर्चा सभी दलों की भागीदारी के साथ कराई जाए।

    संसद के बाहर मीडिया से बातचीत के दौरान भी अखिलेश यादव ने अपने रुख को दोहराया। उन्होंने कहा कि यदि सरकार संसद के भीतर छात्रों की समस्याओं पर गंभीर चर्चा करती तो विपक्ष को अलग से प्रदर्शन करने की आवश्यकता नहीं पड़ती। उन्होंने युवाओं और छात्रों से जुड़े विषयों को राष्ट्रीय महत्व का बताते हुए कहा कि इन मुद्दों पर राजनीतिक मतभेदों से ऊपर उठकर समाधान खोजा जाना चाहिए।

    लोकसभा में हुई इस बहस के बाद छात्रों के मुद्दे, संसदीय प्रक्रिया और विपक्ष की भूमिका को लेकर राजनीतिक चर्चाएं और तेज हो गई हैं। आने वाले दिनों में मानसून सत्र के दौरान इस विषय पर सरकार और विपक्ष के बीच विस्तृत बहस होने की संभावना बनी हुई है, क्योंकि दोनों पक्ष इस मुद्दे को महत्वपूर्ण बताते हुए अपने-अपने पक्ष पर कायम हैं।

  • लखनऊ में BJP-कांग्रेस आमने-सामने, कांग्रेस कार्यालय घेरने पहुंचे कार्यकर्ताओं को पुलिस ने रोका

    लखनऊ में BJP-कांग्रेस आमने-सामने, कांग्रेस कार्यालय घेरने पहुंचे कार्यकर्ताओं को पुलिस ने रोका


    उत्तर प्रदेश । उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में बुधवार को भाजपा और कांग्रेस के बीच राजनीतिक तनाव उस समय बढ़ गया, जब भाजपा कार्यकर्ता कांग्रेस प्रदेश कार्यालय का घेराव करने के लिए निकले। पुलिस ने सुरक्षा व्यवस्था के तहत बैरिकेडिंग लगाकर उन्हें आगे बढ़ने से रोक दिया। इसके बाद भाजपा कार्यकर्ताओं और पुलिस के बीच धक्का-मुक्की की स्थिति बन गई। कई कार्यकर्ता बैरिकेडिंग पर चढ़ गए और नारेबाजी करते हुए आगे बढ़ने की कोशिश करने लगे।

    स्थिति को देखते हुए पुलिस ने अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात किया और काफी मशक्कत के बाद प्रदर्शनकारियों को कांग्रेस कार्यालय तक पहुंचने से रोक दिया। मौके पर कुछ समय तक तनावपूर्ण माहौल बना रहा, हालांकि बाद में स्थिति नियंत्रण में आ गई।

    दूसरी ओर कांग्रेस प्रदेश कार्यालय के बाहर भी सुरक्षा और सतर्कता बढ़ा दी गई थी। कांग्रेस की महिला कार्यकर्ता लाठी लेकर परिसर में तैनात नजर आईं। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अजय राय ने भाजपा को चेतावनी देते हुए कहा कि कांग्रेस का प्रत्येक कार्यकर्ता शांतिप्रिय है, लेकिन यदि जरूरत पड़ी तो जवाब देने के लिए पूरी तरह तैयार है।

    भाजपा कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन के दौरान राहुल गांधी के खिलाफ नारे लगाए और उनके पोस्टरों पर जूते-चप्पल भी बरसाए। दोनों दलों के समर्थकों के बीच राजनीतिक बयानबाजी भी तेज रही।

    यह प्रदर्शन 21 जुलाई को प्रधानमंत्री आवास के बाहर विपक्षी नेताओं के प्रदर्शन की प्रतिक्रिया के रूप में आयोजित किया गया। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी के नेतृत्व में कांग्रेस कार्यालय के घेराव का ऐलान किया गया था। विपक्ष के उस प्रदर्शन में राहुल गांधी, अखिलेश यादव सहित कई नेताओं ने हिस्सा लिया था, जिसके बाद प्रदेश की राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप का दौर लगातार जारी है।

    पुलिस ने पूरे घटनाक्रम के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए बैरिकेडिंग, अतिरिक्त पुलिस बल और निगरानी की व्यवस्था की। अधिकारियों ने बताया कि स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है और किसी अप्रिय घटना की सूचना नहीं है।