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  • साध्वी रंजना विवाद ने पकड़ा तूल: मिसरोद में पाटीदार समाज का प्रदर्शन, ‘जिहादी’ कहने वालों पर कार्रवाई की मांग

    साध्वी रंजना विवाद ने पकड़ा तूल: मिसरोद में पाटीदार समाज का प्रदर्शन, ‘जिहादी’ कहने वालों पर कार्रवाई की मांग


    मिसरोद । मिसरोद में साध्वी रंजना दीदी से जुड़े कार विवाद ने अब सामाजिक और राजनीतिक रंग ले लिया है। मंगलवार को पाटीदार समाज, ओबीसी मोर्चा और सकल हिंदू समाज के बैनर तले बड़ी संख्या में लोग पाटीदार समाज के मांगलिक भवन में एकत्र हुए और विरोध प्रदर्शन किया। कार्यक्रम में महिलाओं की भी उल्लेखनीय भागीदारी रही। प्रदर्शन के दौरान “जय श्री राम” के नारे लगाए गए और बाद में एसीपी को कलेक्टर व कमिश्नर के नाम ज्ञापन सौंपा गया।

     उनका कहना है कि मिसरोद थाने में उनके खिलाफ झूठे प्रकरण दर्ज किए गए हैं। ज्ञापन में मांग की गई कि दर्ज मामलों को समाप्त किया जाए, समाज की ओर से भी एफआईआर दर्ज की जाए और दोषियों के खिलाफ निष्पक्ष व सख्त कार्रवाई हो।

    पाटीदार संगठन के सदस्य अजय पाटीदार ने कहा कि समाज को “जिहादी” या “अराजक” कहना बेहद आपत्तिजनक है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि समाज को हिंदू समाज का हिस्सा नहीं माना जाएगा तो वे सामूहिक रूप से धर्म परिवर्तन पर विचार करने को मजबूर होंगे। इस बयान के बाद सभा स्थल पर माहौल कुछ देर के लिए और गरमा गया।

    समाज के प्रतिनिधियों ने पुलिस पर एकपक्षीय कार्रवाई का आरोप भी लगाया। उनका कहना है कि 25-26 फरवरी को मुख्य मार्ग पर साध्वी रंजना दीदी के वाहन से जुड़ा ओवरटेक को लेकर सामान्य विवाद हुआ था, जिसे बाद में गंभीर धाराओं में बदल दिया गया। समाज का दावा है कि घटनास्थल के सीसीटीवी कैमरों की जांच से पूरी सच्चाई सामने आ सकती है।

    मामले की पृष्ठभूमि में साध्वी रंजना दीदी द्वारा दर्ज एफआईआर शामिल है, जिसमें मारपीट, तोड़फोड़, छेड़छाड़ और जान से मारने की कोशिश जैसे आरोप लगाए गए हैं। घटना का एक वीडियो भी सामने आया है, जिसकी पुलिस जांच कर रही है। इससे पहले विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने भी थाने के बाहर प्रदर्शन कर सख्त कार्रवाई की मांग की थी।

    फिलहाल पुलिस का कहना है कि जांच निष्पक्ष रूप से जारी है और तथ्य सामने आने के बाद ही आगे की कार्रवाई की जाएगी। दूसरी ओर, पाटीदार समाज ने स्पष्ट किया है कि यदि उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया तो आंदोलन को प्रदेश स्तर तक ले जाया जाएगा। यह मामला अब प्रशासन के लिए कानून-व्यवस्था और सामाजिक संतुलन, दोनों दृष्टि से संवेदनशील बन गया है। 

  • नर्मदापुरम में गोवंश तस्करी पर ग्रामीणों का आक्रोश, पिकअप में लगाई आग, ड्राइवर फरार

    नर्मदापुरम में गोवंश तस्करी पर ग्रामीणों का आक्रोश, पिकअप में लगाई आग, ड्राइवर फरार


    नर्मदापुरम /मध्यप्रदेश के नर्मदापुरम जिले में गोवंश तस्करी के खिलाफ ग्रामीणों का आक्रोश इस बार उग्र रूप में सामने आया। आरी ढोडई गांव के पास सोमवार और मंगलवार की रात करीब 1:30 बजे ग्रामीणों ने एक पिकअप वाहन को रोक लिया, जिसमें दो गायें लदी हुई थीं। ग्रामीणों को संदेह हुआ कि इन गोवंशों को कत्लखाने या अवैध तरीके से ले जाया जा रहा है।

    ग्रामीणों ने तुरंत कार्रवाई करते हुए गायों को वाहन से उतारा और लगभग आधे घंटे तक घटनाक्रम चलता रहा। आक्रोशित ग्रामीणों ने तस्करी के प्रयास में इस्तेमाल पिकअप वाहन में आग लगा दी। वहीं, ड्राइवर मौके से फरार हो गया।

    सूचना मिलते ही माखन नगर थाना प्रभारी अनूप कुमार उइके और उनके बल ने घटनास्थल का दौरा किया, लेकिन तब तक पिकअप पूरी तरह जल चुकी थी। पुलिस ने मौके का मुआयना किया और मामला दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी है।

    ग्रामीणों ने कहा कि वे गौ-हत्या और गोवंश तस्करी के खिलाफ सतर्क हैं और ऐसी किसी भी कोशिश को बर्दाश्त नहीं करेंगे। पुलिस अब फरार ड्राइवर की तलाश में लगी हुई है और आसपास के इलाकों में निगरानी बढ़ा दी गई है।

    इस घटना ने नर्मदापुरम में गोवंश सुरक्षा और तस्करी के खिलाफ स्थानीय लोगों की गंभीर प्रतिक्रिया को उजागर किया है। पुलिस का कहना है कि दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी और ग्रामीणों को भी कानून के तहत कार्रवाई करने की हिदायत दी गई है।

  • लखनऊ में यूजीसी के नए नियमों के खिलाफ सवर्ण समाज का प्रदर्शन, कई कार्यकर्ता हिरासत में

    लखनऊ में यूजीसी के नए नियमों के खिलाफ सवर्ण समाज का प्रदर्शन, कई कार्यकर्ता हिरासत में

    नई दिल्ली । लखनऊ में शनिवार 21 फरवरी को परिवर्तन चौक पर सवर्ण मोर्चा के सदस्यों ने यूजीसी के नए नियमों के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया। सवर्ण समाज के कार्यकर्ता पहले शांतिपूर्वक धरने पर बैठे और नारेबाजी कर अपने विरोध की आवाज बुलंद की। उन्होंने शंखनाद करते हुए प्रशासन से मांग की कि यूजीसी के हालिया नियम सवर्ण समाज के हितों के खिलाफ हैं और इन्हें तुरंत वापस लिया जाए।

    प्रदर्शन में शामिल हुए कई कार्यकर्ता बदलाव की मांग कर रहे थे और उनका कहना था कि नए नियम उनके रोजगार और सामाजिक हितों पर प्रतिकूल प्रभाव डालेंगे। इसी दौरान हाल ही में सरकारी नौकरी से इस्तीफा देने वाले अधिकारी अलंकार अग्निहोत्री भी प्रदर्शन में पहुंचे। उनके आने के बाद प्रदर्शनकारियों ने परिवर्तन चौक से मार्च निकालने का प्रयास किया लेकिन पुलिस ने पहले से लगाए गए बैरिकेडिंग के जरिए उन्हें रोक दिया।

    कुछ कार्यकर्ता बैरिकेड पर चढ़कर नारेबाजी करने लगे जिससे माहौल तनावपूर्ण हो गया। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने हल्का बल प्रयोग किया और कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लेकर बसों के जरिए इको गार्डन भेज दिया। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि यह कार्रवाई कानून-व्यवस्था बनाए रखने के उद्देश्य से की गई।

    सवर्ण मोर्चा के नेताओं ने चेतावनी दी कि अगर उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया तो आंदोलन और तेज किया जाएगा। फिलहाल परिवर्तन चौक पर भारी पुलिस बल तैनात है और प्रशासन पूरी स्थिति पर नजर बनाए हुए है।

    इस प्रदर्शन के दौरान शहर में कुछ समय के लिए अफरातफरी का माहौल देखने को मिला लेकिन पुलिस की सतर्कता और नियंत्रण के कारण स्थिति अब सामान्य बताई जा रही है। प्रदर्शन में सवर्ण समाज की भारी उपस्थिति ने इस आंदोलन को और मजबूती दी है। प्रशासन ने भी पूरे मामले पर लगातार नजर बनाए रखी।

  • जबलपुर में अतिक्रमण कार्रवाई के दौरान दुकानदार की मौत, परिजन और व्यापारियों ने थाने के सामने शव रख कर किया प्रदर्शन

    जबलपुर में अतिक्रमण कार्रवाई के दौरान दुकानदार की मौत, परिजन और व्यापारियों ने थाने के सामने शव रख कर किया प्रदर्शन


    जबलपुर । शहर के बरगी क्षेत्र में अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के दौरान एक दुकानदार की मौत हो जाने से तनाव की स्थिति पैदा हो गई। परिजनों और व्यापारियों ने प्रशासन पर दबाव बढ़ाने का आरोप लगाया और विरोध स्वरूप थाने के सामने शव रखकर प्रदर्शन किया। घटना के बाद प्रशासन ने मामले की निष्पक्ष जांच का आश्वासन दिया तभी प्रदर्शन शांत हुआ।

    घटना बरगी थाना अंतर्गत पटेल चौराहे की बताई जा रही है। मंगलवार शाम को राजस्व और पुलिस की टीम कोर्ट के आदेश पर अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई कर रही थी। इसी दौरान दुकानदार को हार्ट अटैक आ गया और उसकी मौत हो गई। घटना के बाद परिजन और स्थानीय लोग भड़क उठे। परिजनों का आरोप था कि प्रशासन ने कार्रवाई के दौरान अत्यधिक दबाव बनाया जिससे दुकानदार की तबीयत बिगड़ गई और उसकी मौत हो गई।

    दुकानदार की मौत की खबर फैलते ही आसपास के व्यापारियों और स्थानीय लोगों ने बरगी थाने के बाहर इकट्ठा होकर जोरदार विरोध शुरू कर दिया। उन्होंने थाने के सामने शव रखकर नारेबाजी की और अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के दौरान प्रशासन का रवैया अत्यधिक कठोर था और इससे मौत हुई है।

    विरोध प्रदर्शन के बाद पुलिस प्रशासन ने स्थिति को नियंत्रण में लेने के प्रयास किए। बरगी थाना प्रभारी ने लोगों को आश्वासन दिया कि घटना की निष्पक्ष जांच की जाएगी और जांच रिपोर्ट आने के बाद दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। इस आश्वासन के बाद लोगों का गुस्सा कुछ हद तक शांत हुआ और प्रदर्शन समाप्त हुआ।

    इस मामले में सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के दौरान उचित सावधानियां बरती गईं या नहीं। प्रशासन का कहना है कि कार्रवाई कोर्ट के आदेश पर की जा रही थी लेकिन परिजनों का आरोप है कि दबाव और तनाव के कारण दुकानदार की तबीयत बिगड़ गई।

    अब इस मामले की जांच की जिम्मेदारी संबंधित अधिकारियों को सौंपी गई है। जांच में यह देखना होगा कि कार्रवाई के दौरान नियमों का पालन हुआ या नहीं और क्या प्रशासन की गलती से मौत हुई है। इसके साथ ही यह भी स्पष्ट किया जाएगा कि अतिक्रमण हटाने के दौरान सुरक्षा और चिकित्सा आपातकालीन इंतजाम थे या नहीं।

    अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई और उसके दौरान हुई मौत ने शहर में गर्मागरम बहस छेड़ दी है। लोग प्रशासन की कार्रवाई और जिम्मेदारी पर सवाल उठा रहे हैं जबकि प्रशासन मामले की जांच और निष्पक्षता की बात कर रहा है।

  • इस CM का राज्य के प्रबुद्धजन ही कर रहे विरोध… Ex IAS, डॉक्टरों और लेखकों ने चीफ जस्टिस से लगाई ये गुहार?

    इस CM का राज्य के प्रबुद्धजन ही कर रहे विरोध… Ex IAS, डॉक्टरों और लेखकों ने चीफ जस्टिस से लगाई ये गुहार?


    नई दिल्ली।
    असम के मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा (Assam Chief Minister Himanta Biswa Sarma) के खिलाफ राज्य के 40 से अधिक रिटायर्ड आईएएस अधिकारियों (Retired IAS officers), डॉक्टरों, शिक्षाविदों, लेखकों, पत्रकारों और अन्य प्रसिद्ध नागरिकों ने खुलकर विरोध जताया है। इन प्रबुद्ध नागरिकों ने गुवाहाटी उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश को पत्र लिखकर मुख्यमंत्री के कथित “नफरती भाषण” और एक विशेष समुदाय के खिलाफ दिए गए विवादित बयानों पर स्वतः संज्ञान लेने की अपील की है। उनका कहना है कि संवैधानिक उल्लंघनों के प्रति चुप्पी या निष्क्रियता संविधान की नैतिक शक्ति को कमजोर कर सकती है।

    पत्र में आरोप लगाया गया है कि मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा ( Chief Minister Himanta Biswa Sarma) ने कई सार्वजनिक मंचों पर ऐसे बयान दिए हैं जो प्रथम दृष्टया नफरती भाषण, सरकारी धमकी और एक खास समुदाय को बदनाम करने जैसे प्रतीत होते हैं। चिट्ठी में विशेष रूप से मुख्यमंत्री के ‘मियां’ (बांग्ला भाषी मुसलमानों) के खिलाफ दिए गए टिप्पणियों का उल्लेख किया गया है। इन लोगों ने चीफ जस्टिस से मांग की है कि वह इस मामले में संज्ञान लेकर आवश्यक कार्रवाई करें।


    CM के बयान को संविधान विरोधी बताया

    पत्र में कहा गया है कि बांग्ला भाषी मुसलमान असम के समाज का हिस्सा बन चुके हैं, और मुख्यमंत्री के बयान अमानवीय, सामूहिक बदनामी और राज्य प्रायोजित उत्पीड़न की धमकियों जैसे हैं। यह टिप्पणी संविधान की भावना के खिलाफ मानी जा रही है। यहाँ यह भी महत्वपूर्ण है कि ‘मियां’ शब्द असम में बांग्ला भाषी मुसलमानों के लिए अपमानजनक रूप से इस्तेमाल होता है। गैर-बांग्ला भाषी लोग इन्हें अक्सर बांग्लादेशी प्रवासी मानते हैं, जिससे समुदाय पर सामाजिक और राजनीतिक दबाव बढ़ता है।


    पत्र पर साइन करने वालों में कौन-कौन?

    गुवाहाटी हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस को लिखी इस चिट्ठी पर हस्ताक्षर करने वालों में कई प्रतिष्ठित नाम शामिल हैं। इनमें विद्वान डॉ. हिरेन गोहेन, असम के पूर्व DGP हरेकृष्ण डेका, गुवाहाटी के पूर्व आर्कबिशप थॉमस मेनमपारामपिल, राज्यसभा सांसद अजीत कुमार भुइयां, रिटायर्ड IAS अधिकारी, वरिष्ठ पत्रकार, शिक्षाविद, कलाकार और सामाजिक कार्यकर्ता शामिल हैं। ज्ञापन में हस्ताक्षर करने वालों ने कहा है कि वे मौलिक अधिकारों के संरक्षक के रूप में गुवाहाटी हाई कोर्ट की संवैधानिक भूमिका में पूर्ण विश्वास रखते हैं और इसी विश्वास के साथ अदालत से हस्तक्षेप की मांग कर रहे हैं।


    हाई कोर्ट से क्या मांग की गई?

    पत्र में हाई कोर्ट से कई महत्वपूर्ण निर्देशों की मांग की गई है, जिनमें शामिल हैं:
    उचित मामले दर्ज करने के निर्देश
    प्रभावित समुदाय की गरिमा और सुरक्षा सुनिश्चित करने के उपाय
    सार्वजनिक पद धारकों के लिए संवैधानिक अनुशासन की पुष्टि

    धर्मनिरपेक्षता को बनाए रखने का निर्देश
    विशेष रूप से, यह मांग की गई है कि गुवाहाटी हाई कोर्ट संविधान की मूल संरचना के हिस्से के रूप में धर्मनिरपेक्षता की रक्षा सुनिश्चित करने के लिए उचित कदम उठाए। यह ज्ञापन असम में बढ़ते सामाजिक तनाव और भाषणों के संभावित प्रभाव को लेकर गंभीर चिंता का संकेत है, और इससे राज्य में संवैधानिक मूल्यों और साम्प्रदायिक सौहार्द की रक्षा के मुद्दे फिर से सामने आए हैं।

  • जबलपुर–दमोह फोरलेन पर बस्ती का बवाल, NHAI कार्यालय घेरा, करणी सेना ने 15 दिन में फैसला मांगा

    जबलपुर–दमोह फोरलेन पर बस्ती का बवाल, NHAI कार्यालय घेरा, करणी सेना ने 15 दिन में फैसला मांगा



    जबलपुर। जबलपुर–दमोह NH-34 को टू-लेन से फोरलेन करने की योजना के विरोध में बोरिया बस्ती के ग्रामीणों ने शुक्रवार को सड़क पर उतरकर NHAI कार्यालय का घेराव किया। करणी सेना के कार्यकर्ताओं के साथ बड़ी संख्या में महिलाएं और स्थानीय नागरिक भी प्रदर्शन में शामिल रहे। ग्रामीणों का आरोप है कि बस्ती के 50 से अधिक घर फोरलेन के लिए ध्वस्त हो सकते हैं, जिससे 150 से अधिक लोग बेघर होने की कगार पर हैं।
    करणी सेना के प्रदेश अध्यक्ष अनुराग प्रताप राघव ने NHAI को 15 दिन का अल्टीमेटम देते हुए चेतावनी दी कि यदि इस अवधि में प्रभावितों के हितों की रक्षा के लिए ठोस कदम नहीं उठाए गए तो आंदोलन को और उग्र किया जाएगा। उन्होंने कहा, जरूरत पड़ी तो सड़क से लेकर प्रशासनिक दफ्तरों तक आंदोलन बढ़ाया जाएगा। क्षेत्रीय विधायक और स्थानीय मंत्री ग्रामीणों के समर्थन में नहीं खड़े हुए, इसलिए करणी सेना ने मोर्चा संभाला है।

    ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया में भेदभावपूर्ण रवैया अपनाया जा रहा है।

    उन्होंने कहा कि बिना किसी वैकल्पिक व्यवस्था के उन्हें उजाड़ा जा रहा है, जो पूरी तरह अन्याय है। महिलाओं ने प्रदर्शन के दौरान कहा कि वर्षों से बसे परिवारों को हटाने से पहले प्रशासन को पुनर्वास और वैकल्पिक इंतजामों की ठोस योजना प्रस्तुत करनी चाहिए।

    ग्रामीणों की मुख्य मांगें
    प्रभावित लोगों के लिए वैकल्पिक पुनर्वास की व्यवस्था हो
    जमीन अधिग्रहण पर तत्काल रोक
    प्रभावितों को साथ लेकर प्रोजेक्ट के विकल्पों पर चर्चा
    सड़क के सेंटर से दोनों तरफ बराबर भूमि अधिग्रहण किया जाए
    बोरिया गांव के सतिश पटेल ने कहा कि वर्तमान में 70 फीट की सड़क को 150 फीट करने की योजना है, लेकिन सड़क एक तरफ चौड़ी की जा रही है, जिससे 70 मकान प्रभावित हो रहे हैं।

    उन्होंने कहा कि रोड सेंटर से दोनों तरफ बराबर अधिग्रहण किया जाए या बस्ती वाले क्षेत्र में सड़क चौड़ाई को घटाकर 120 फीट किया जाए। साथ ही प्रभावितों को मुआवजे के साथ घर बनाने के लिए जमीन भी दी जाए।

    सुनीता बर्मन ने कहा कि यदि उनका घर टूटता है तो वे पूरी तरह से बर्बाद हो जाएँगी, क्योंकि परिवार में बुजुर्ग ही हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि सड़क के विरोध में नहीं हैं, लेकिन सरकार को यह देखना चाहिए कि किसी को बेघर न किया जाए।

    NHAI का जवाब
    NHAI प्रोजेक्ट डायरेक्टर अमृत लाल साहू ने कहा कि फोरलेन के लिए 150 फीट भूमि अधिग्रहण का नियम है। बोरिया और आसपास के गांवों में बायपास का प्रावधान नहीं है, इसलिए मुख्य मार्ग को चौड़ा किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इस मार्ग पर फ्लाईओवर भी बनाया जाएगा। साथ ही उन्होंने आश्वासन दिया कि जनता की मांग पर विचार किया जाएगा और वैकल्पिक विकल्पों पर काम किया जाएगा।
  • मध्यप्रदेश में शिक्षक भर्ती को लेकर अभ्यर्थियों का प्रदर्शन पदों की कमी से शिक्षा व्यवस्था पर असर

    मध्यप्रदेश में शिक्षक भर्ती को लेकर अभ्यर्थियों का प्रदर्शन पदों की कमी से शिक्षा व्यवस्था पर असर


    मध्यप्रदेश । मध्यप्रदेश के सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की भारी कमी और शिक्षक चयन परीक्षाओं में घोषित किए गए पदों की संख्या पर बढ़ते विरोध के चलते मंगलवार को भोपाल में एक बड़ा आंदोलन हुआ। प्रदेशभर से लगभग 2000 भावी शिक्षक राजधानी पहुंचे और लोक शिक्षण संचालनालय DPI तथा जनजातीय कार्य विभाग का घेराव करते हुए हनुमान चालीसा का पाठ किया। अभ्यर्थियों का आरोप है कि हजारों खाली पदों के बावजूद भर्ती प्रक्रिया में पदों की संख्या बहुत कम घोषित की गई है जिससे न सिर्फ योग्य अभ्यर्थियों को मौका नहीं मिल रहा बल्कि इससे स्कूलों में पढ़ाई की गुणवत्ता पर भी गहरा असर पड़ रहा है।

    आंदोलनकारी अभ्यर्थियों ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने उनकी मांगों पर शीघ्र निर्णय नहीं लिया तो वे अपने आंदोलन को अनिश्चितकालीन और भूख हड़ताल जैसे कठोर चरणों में बदल देंगे। यह प्रदर्शन शिक्षा व्यवस्था में सुधार और युवाओं को न्याय दिलाने की दिशा में किया जा रहा है।

    प्रदेश में शिक्षक भर्ती की प्रक्रिया को लेकर असंतोष लगातार बढ़ रहा है। मध्यप्रदेश स्कूल शिक्षा विभाग और जनजातीय कार्य विभाग द्वारा आयोजित माध्यमिक और प्राथमिक शिक्षक चयन परीक्षा में पदों की संख्या बढ़ाने की मांग को लेकर अभ्यर्थियों का आक्रोश चरम पर है। वर्तमान में माध्यमिक शिक्षक के लिए लगभग 99197 और प्राथमिक शिक्षक के लिए 131152 पद रिक्त हैं लेकिन भर्ती प्रक्रिया में केवल 10800 और 13089 पदों पर ही नियुक्तियां की जा रही हैं जो खाली पदों के मुकाबले बेहद कम हैं।

    अभ्यर्थियों का कहना है कि इन कम पदों के कारण लाखों योग्य उम्मीदवार अपनी योग्यताएं साबित नहीं कर पा रहे हैं। इसके अलावा उन्होंने ईडब्ल्यूएस और ओबीसी वर्ग के लिए कई विषयों में शून्य पद घोषित करने का भी आरोप लगाया है जिससे इन वर्गों के युवाओं में गहरी निराशा और आक्रोश है। उनका कहना है कि यह स्थिति सामाजिक न्याय की भावना के खिलाफ है और इससे आरक्षण व्यवस्था पर भी सवाल खड़े होते हैं।

    शिक्षक संगठनों ने भी इस समस्या को गंभीरता से उठाया है क्योंकि यह स्थिति छात्रों की पढ़ाई पर प्रतिकूल असर डाल रही है। कई स्कूलों में एक ही शिक्षक को कई विषय पढ़ाने पड़ रहे हैं जिससे न केवल शिक्षा की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है बल्कि परीक्षा परिणामों पर भी नकारात्मक असर पड़ रहा है। नई शिक्षा नीति-2020 में शिक्षक-विद्यार्थी अनुपात को सुधारने की बात की गई है लेकिन पर्याप्त नियुक्तियां किए बिना इसे लागू करना संभव नहीं है।

    अभ्यर्थियों की प्रमुख मांगों में शिक्षक भर्ती के सभी विषयों में कम से कम 3000 पदों की वृद्धि प्राथमिक शिक्षक भर्ती में पदों की संख्या बढ़ाकर 25000 करना और द्वितीय काउंसलिंग जल्द शुरू करना शामिल है। इसके अलावा उन्होंने यह भी मांग की है कि जब तक शिक्षक भर्ती 2025 पदों के साथ पूरी नहीं हो जाती तब तक नई पात्रता परीक्षा आयोजित न की जाए।

    यह आंदोलन केवल पदों की संख्या बढ़ाने का सवाल नहीं है बल्कि यह मध्यप्रदेश की शिक्षा व्यवस्था को सुधारने और हजारों युवा उम्मीदवारों को रोजगार देने का एक संघर्ष बन चुका है। अब देखना यह है कि राज्य सरकार इन मांगों पर क्या कदम उठाती है और क्या यह आंदोलन अपने उद्देश्य में सफल हो पाता है

  • MP: ग्वालियर में BJP पार्षद ने गंदे पानी की आपूर्ति के विरोध में निकाली दंडवत यात्रा, दी ये चेतावनी

    MP: ग्वालियर में BJP पार्षद ने गंदे पानी की आपूर्ति के विरोध में निकाली दंडवत यात्रा, दी ये चेतावनी


    ग्वालियर।
    मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के ग्वालियर शहर (Gwalior City) में गंदे पानी की आपूर्ति (Contaminated Water Supply) और विभिन्न अव्यवस्थाओं के विरोध में भाजपा पार्षद बृजेश श्रीवास (BJP councilor Brijesh Shriwas) ने सोमवार को दंडवत यात्रा निकालकर प्रतीकात्मक विरोध दर्ज कराया। इस यात्रा का उद्देश्य महापौर और नगर निगम प्रशासन का ध्यान नागरिकों की समस्याओं की ओर आकर्षित करना था।

    दंडवत यात्रा श्यामा प्रसाद मुखर्जी की प्रतिमा से शुरू होकर परिषद कार्यालय तक पहुंची। इसमें बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिक शामिल हुए। प्रदर्शनकारियों के हाथों में “स्वच्छ पानी दो”, “गंदे पानी से परेशान जनता” और “जल समस्या का समाधान करो” जैसे नारे लिखी तख्तियां थीं।

    प्रदर्शनकारियों का कहना था कि क्षेत्र में पीने योग्य पानी की आपूर्ति नहीं हो रही है। गंदे और बदबूदार पानी के कारण लोगों को गंभीर बीमारियों का खतरा बना हुआ है, लेकिन बार-बार शिकायतों के बावजूद समस्या का समाधान नहीं किया जा रहा है। यात्रा के दौरान लगाए गए बैनरों में केवल जल संकट ही नहीं, बल्कि शहर की बदहाल स्थिति को भी दर्शाया गया। इनमें टूटी सड़कें, खराब सफाई व्यवस्था, उफनते सीवर और कॉलोनियों में अंधेरे जैसी समस्याओं का उल्लेख किया गया। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि यह मार्च नगर सरकार और महापौर को “जगाने” के लिए किया गया है।

    इस मौके पर पार्षद बृजेश श्रीवास ने कहा कि यह आंदोलन जनता की पीड़ा और नाराजगी को दर्शाता है। उन्होंने चेतावनी दी कि जब तक नागरिकों को शुद्ध पेयजल उपलब्ध नहीं कराया जाता, तब तक उनका संघर्ष जारी रहेगा। उन्होंने नगर निगम प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से जल्द ठोस कार्रवाई की मांग की। प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहा, हालांकि लोगों में गहरी नाराजगी साफ नजर आई।

    महापौर शोभा सिकरवार का कहना था कि यह सब सिर्फ मीडिया में आने की स्टंटबाजी है। इंदौर में जो घटनाक्रम हुआ वहां बीजेपी के महापौर हैं, जो खुद कह रहे हैं कि अधिकारी उनकी सुनते नहीं हैं। जब सत्ता सरकार में होने के बाद भी बीजेपी महापौर की बात नहीं सुनी जाती तो यहां गलती महापौर की कैसे हो सकती है। इस तरह के स्टंट से विपक्ष के पार्षद सिर्फ ध्यान भटकाने का प्रयास करते हैं। यहां सब मिलकर काम कर रहे हैं और समस्या का समाधान करने का प्रयास कर रहे हैं।

  • इंदौर भागीरथपुरा कांड के खिलाफ कांग्रेस की न्याय यात्रा 11 जनवरी को जुटेंगे सभी विधायक

    इंदौर भागीरथपुरा कांड के खिलाफ कांग्रेस की न्याय यात्रा 11 जनवरी को जुटेंगे सभी विधायक


    इंदौर । इंदौर के भागीरथपुरा क्षेत्र में दूषित पानी के कारण हुई मौतों के खिलाफ कांग्रेस ने अब एक निरंतर आंदोलन का ऐलान किया है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने स्पष्ट रूप से कहा है कि जब तक नगरीय विकास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय का इस्तीफा नहीं होता कांग्रेस का यह आंदोलन जारी रहेगा। पटवारी ने विजयवर्गीय को घटनाओं का सरगना बताते हुए यह भी कहा कि कांग्रेस उन्हें जवाबदेह ठहराने के लिए हर संभव कदम उठाएगी।

    शनिवार को भागीरथपुरा में कांग्रेस नेताओं को पुलिस द्वारा रोके जाने के मामले में पटवारी ने मुख्यमंत्री और मंत्री के रवैये की आलोचना की। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रशासन का रवैया पूरी तरह से पक्षपाती और अव्यवस्थित है। इसके अलावा कांग्रेस ने 11 जनवरी को न्याय यात्रा निकालने का निर्णय लिया है जो बड़ा गणपति मंदिर से शुरू होकर राजवाड़ा तक जाएगी। इस यात्रा में प्रदेश भर के प्रमुख कांग्रेस नेता और सभी विधायक शामिल होंगे।

    कांग्रेस की बैठक रविवार को गांधी भवन में आयोजित की गई जिसमें आंदोलन की रूपरेखा तय की गई। इस बैठक में प्रदेश कांग्रेस की इंदौर प्रभारी उषा नायडू पूर्व महिला कांग्रेस अध्यक्ष शोभा ओझा पूर्व मंत्री सज्जनसिंह वर्मा और जिला कांग्रेस अध्यक्ष विपिन वानखेड़े सहित कई अन्य पदाधिकारी मौजूद थे।

    आंदोलन को और तेज करने के लिए कांग्रेस ने 6 जनवरी को इंदौर के सभी 85 वार्डों में प्रमुख चौराहों पर मोमबत्तियां जलाकर मृतकों को श्रद्धांजलि अर्पित करने का निर्णय लिया है। इसके बाद 7 जनवरी को महिला कांग्रेस की प्रदेश अध्यक्ष रीना बौरासी के नेतृत्व में महिला कार्यकर्ता मंत्री विजयवर्गीय का इस्तीफा मांगते हुए विरोध प्रदर्शन करेंगी।कांग्रेस ने साफ कर दिया है कि यह आंदोलन तब तक जारी रहेगा जब तक पीड़ितों को न्याय नहीं मिल जाता और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं होती।

  • रायगढ़ में महिला कॉन्स्टेबल के साथ हैवानियत वर्दी फाड़कर अर्धनग्न कर खेत में पीटा

    रायगढ़ में महिला कॉन्स्टेबल के साथ हैवानियत वर्दी फाड़कर अर्धनग्न कर खेत में पीटा

    रायगढ़ । छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले में एक हैरान करने वाली घटना सामने आई है जिसमें प्रदर्शनकारियों ने एक महिला पुलिस कांस्टेबल के साथ बर्बरता की। यह घटना 27 दिसंबर को तमनार तहसील के गारे पेलमा-1 कोयला खदान के लिए आयोजित जनसुनवाई के विरोध में धरना प्रदर्शन के दौरान हुई। पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प के दौरान महिला कांस्टेबल को भीड़ ने घेर लिया और उनके साथ अमानवीय व्यवहार किया।

    विरोध प्रदर्शन के बीच अचानक स्थिति नियंत्रण से बाहर हो गई और प्रदर्शनकारी उग्र हो गए। इस दौरान कुछ प्रदर्शनकारियों ने महिला कांस्टेबल की वर्दी फाड़ दी और उन्हें अर्धनग्न कर खेत में मारपीट की। यह घटना पूरी तरह से पुलिस की सुरक्षा और कानून-व्यवस्था को चुनौती देने वाली साबित हुई। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद पूरे रायगढ़ जिले में हड़कंप मच गया।

    पुलिस ने इस शर्मनाक कृत्य को लेकर कार्रवाई की और दो आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। इस घटना ने न सिर्फ पुलिस बल की सुरक्षा को लेकर सवाल उठाए हैं बल्कि यह भी दर्शाया है कि कुछ लोगों के बीच कानून का उल्लंघन किस हद तक हो सकता है।इस घटना के बाद स्थानीय प्रशासन और पुलिस विभाग ने यह आश्वासन दिया कि ऐसे कृत्यों को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और आरोपी व्यक्तियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
    आंदोलन के कारण यह घटना रायगढ़ जिले में गहरे विरोध और घृणा का कारण बनी है। पुलिस अधिकारियों ने जनता से अपील की है कि वे कानून और व्यवस्था का सम्मान करें और किसी भी प्रकार की हिंसा से बचें। छत्तीसगढ़ पुलिस और राज्य सरकार अब इस तरह के घटनाक्रमों को रोकने के लिए नए कदम उठाने की योजना बना रहे हैं।