Tag: protests

  • पश्चिम बंगाल में राष्ट्रपति शासन की आहट: चुनाव से पहले राजनीतिक तूफ़ान तेज, एसआईआर और दस्तावेज़ विवाद से बढ़ी चिंता

    पश्चिम बंगाल में राष्ट्रपति शासन की आहट: चुनाव से पहले राजनीतिक तूफ़ान तेज, एसआईआर और दस्तावेज़ विवाद से बढ़ी चिंता

    कोलकाता। पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव से पहले राष्ट्रपति शासन की अटकलों ने राजनीतिक हलकों में हलचल पैदा कर दी है। राज्यपाल के अचानक बदलाव, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के दौरे पर विवाद और चुनाव आयोग की टीम के दौरे के दौरान हुए विरोध प्रदर्शन ने इस संभावना को और गहरा कर दिया है।

    इतिहास और संवैधानिक पहलू
    पश्चिम बंगाल में राष्ट्रपति शासन लागू होने का इतिहास बहुत लंबा नहीं है। 30 अप्रैल 1977 को तत्कालीन मुख्यमंत्री सिद्धार्थ शंकर रे की सरकार को बर्खास्त कर राष्ट्रपति शासन लगाया गया था, जो वाममोर्चा सरकार के शपथ ग्रहण तक 52 दिनों तक जारी रहा। अब विधानसभा चुनाव से ठीक पहले राजनीतिक हलकों में सवाल उठ रहा है कि क्या बंगाल एक बार फिर राष्ट्रपति शासन की ओर बढ़ रहा है।

    चुनाव आयोग का दौरा और विरोध प्रदर्शन
    चुनाव आयोग की पूर्ण पीठ ने कोलकाता दौरे के दौरान सभी राजनीतिक दलों और पुलिस प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक कर चुनावी तैयारियों का जायजा लिया। हालांकि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में इस मुद्दे पर सीधे जवाब देने से परहेज किया और कहा कि कानून-व्यवस्था की समीक्षा के बाद चुनाव की तारीख और चरण तय किए जाएंगे।

    तृणमूल कांग्रेस समेत कई राजनीतिक दलों ने एक या दो चरणों में मतदान कराने की मांग की। आयोग को कोलकाता और आसपास बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन का सामना करना पड़ा। तृणमूल समर्थकों ने काले झंडे दिखाए और “लोकतंत्र का हत्यारा” जैसे पोस्टर भी लगाए।

    एसआईआर प्रक्रिया पर विवाद
    राज्य में नवंबर से चल रही एसआईआर (Special Summary Revision) प्रक्रिया के तहत लगभग 60 लाख मतदाताओं के दस्तावेज विचाराधीन हैं। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर दस्तावेजों की जांच में न्यायिक अधिकारियों को दो महीने का समय लगने की संभावना है। राजनीतिक दलों का कहना है कि इस स्थिति में चुनाव कराना चुनौतीपूर्ण होगा।

    मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने आरोप लगाया कि भाजपा और चुनाव आयोग की मिलीभगत से वैध वोटरों के नाम मतदाता सूची से हटाने की साजिश की जा रही है। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अचानक राज्यपाल सीवी आनंद बोस की जगह आर.एन. रवि को क्यों नियुक्त किया गया, जो तमिलनाडु में विवादित रहे हैं।

    राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का दौरा और विवाद
    राष्ट्रपति का दौरा सिलीगुड़ी में आदिवासी सम्मेलन के लिए था। हालांकि मुख्यमंत्री ने इसे लेकर असंतोष जताया और कहा कि उन्हें न्यूनतम प्रोटोकॉल तक नहीं मिला। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इस मुद्दे को उठाते हुए तृणमूल कांग्रेस पर राष्ट्रपति के अपमान का आरोप लगाया।

    राजनीतिक माहौल और भविष्य की चुनौतियां
    राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या एसआईआर के तहत विचाराधीन 60 लाख मतदाताओं के दस्तावेज समय पर जांच कर लिए जाएंगे। यदि यह कार्य पूरा नहीं हुआ, तो या तो चुनाव टालना पड़ सकता है या बिना पूरी सूची के चुनाव कराना पड़ सकता है। इससे राष्ट्रपति शासन की संभावना बढ़ सकती है।अगले कुछ दिनों में केंद्र और चुनाव आयोग की रिपोर्ट के आधार पर पश्चिम बंगाल की राजनीतिक दिशा साफ होगी।

  • J&K: खामेनेई की मौत के बाद जारी प्रदर्शनों के बीच घाटी में तनावपूर्ण शांति, स्कूल-कॉलेज 7 मार्च तक बंद

    J&K: खामेनेई की मौत के बाद जारी प्रदर्शनों के बीच घाटी में तनावपूर्ण शांति, स्कूल-कॉलेज 7 मार्च तक बंद


    जम्मू।
    ईरान के सर्वोच्च नेता (Iran’s Supreme Leader) अयातुल्ला अली खामनेई (Ayatollah Ali Khamenei) की हमले में मौत के विरोध में कश्मीर (Kashmir) में जारी प्रदर्शनों के बीच मंगलवार को तनावपूर्ण शांति रही। पाबंदियां लागू रहीं तो शिक्षण संस्थान बंद रहे। घाटी में स्कूल-कॉलेज की दो दिन की बंदी को एहतियात के तौर पर बढ़ाकर सात मार्च तक कर दिया गया है। राजोरी और पुंछ में बंद शांतिपूर्ण रहा। लद्दाख के कारगिल के बाजार भी बंद रहे।

    मंगलवार को श्रीनगर के सिविल लाइन इलाके में कुछ दुकानें खुली दिखीं और सड़कों पर वाहन चलते नजर आए। डाउनटाउन और शिया बहुल इलाकों में प्रदर्शन हुए। लाल चौक पर घंटा घर को अभी सील ही रखा गया है। इसके चारों ओर बैरिकेड लगे हुए हैं। शहर में बड़ी संख्या में पुलिस और सीआरपीएफ के जवान तैनात हैं। पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों के मुताबिक बुधवार को भी प्रतिबंध जारी रहेंगे। इंटरनेट सेवाएं भी बाधित रहेंगी। पुलिस ने लोगों से हिंसा और उकसावे से बचने की अपील की है।

    राजोरी शहर व आसपास के इलाकों में मुस्लिम संगठनों ने दुकानें बंद रखीं। पहाड़ी इलाकों में भी मुस्लिम समुदाय की ही दुकानें बंद रहीं। पुलिस की हर गतिविधि पर कड़ी नजर रही। कहीं भी किसी अप्रिय घटना की सूचना नहीं है। पुंछ पूरी तरह से बंद रहा। इस दौरान हिंदू-सिख के धार्मिक, सामाजिक और व्यावसायिक संगठनों ने भी बंद को अपना समर्थन दिया।

    शांति बनाए रखना और समाज की तरक्की को बनाए रखना सभी की साझा जिम्मेदारी है। अफसर हाई अलर्ट पर रहें। शांति बनाए रखने के लिए हर जरूरी कदम उठाया जाए। -मनोज सिन्हा, उपराज्यपाल

    कुछ लोग माहौल खराब करने की कोशिश कर रहे हैं। जम्मू-कश्मीर के लोगों से गुजारिश है कि वे संयम रखें। गुस्सा-नाराजगी, दुख-दर्द का इजहार करें लेकिन कानून हाथ में न लें। -उमर अब्दुल्ला, मुख्यमंत्री

  • मिनियापोलिस में ICE फायरिंग: एक की मौत, ट्रंप और राज्य सरकार के बीच तनाव बढ़ा

    मिनियापोलिस में ICE फायरिंग: एक की मौत, ट्रंप और राज्य सरकार के बीच तनाव बढ़ा


    वॉशिंगटन। अमेरिका के मिनेसोटा राज्य के मिनियापोलिस में ICE एजेंट की गोलीबारी से एक शख्स की मौत हो गई, जिससे इलाके में तनाव बढ़ गया है। इस घटना के बाद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और मिनेसोटा के गवर्नर टिम वॉल्ज़ के बीच विवाद तेज हो गया।

    ट्रंप ने मिनेसोटा के गवर्नर और मिनियापोलिस के मेयर जैकब फ्रे पर आरोप लगाया कि वे विद्रोह भड़का रहे हैं। ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर कहा कि नेता अपनी “घमंडी और अहंकारी बयानबाजी” से हिंसा बढ़ा रहे हैं और उन्हें लोगों के पैसे और सुरक्षा का ध्यान रखना चाहिए। ट्रंप ने ICE एजेंट पर हमला करने वाले व्यक्ति की फिंगर की तस्वीरें भी साझा कीं।राष्ट्रपति ने सवाल उठाया कि स्थानीय पुलिस को ICE अधिकारियों की सुरक्षा के लिए क्यों तैनात नहीं किया गया और दावा किया कि मृतक हथियारबंद था। ट्रंप ने कहा कि ICE एजेंट्स को आत्मरक्षा में कार्रवाई करनी पड़ी और उन्हें अपना काम करने दिया जाना चाहिए।

    वहीं, गवर्नर टिम वॉल्ज़ ने संघीय कार्रवाई की निंदा की और अधिकारियों को मिनेसोटा से तुरंत बाहर निकालने की मांग की। उन्होंने कहा कि यह अभियान गलत है और राष्ट्रपति को इसे तुरंत रोकना चाहिए।घटना मिनियापोलिस के दक्षिणी हिस्से में हुई, और स्थानीय अधिकारी जांच में जुटे हैं। लोगों से शांति बनाए रखने और प्रभावित इलाके से दूर रहने की अपील की गई है।

    यह घटना ICE के बड़े पैमाने पर चलाए जा रहे एंटी-इमिग्रेशन ऑपरेशन के दौरान हुई। इससे पहले 7 जनवरी को 37 वर्षीय रेनी गुड नामक महिला की ICE फायरिंग में मौत हो गई थी, जिससे अमेरिका में भारी विरोध हुआ था। रेनी गुड तीन बच्चों की मां थीं, और DHS का दावा था कि वह एजेंट पर हमला कर रही थी। उस समय राष्ट्रपति ट्रंप और उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने ICE एजेंट का बचाव किया था

  • एक क्लिक में जानिए आज भोपाल में क्या खास: आंदोलन से लेकर उत्सव, परीक्षा, फ्लाइट और बिजली कटौती तक

    एक क्लिक में जानिए आज भोपाल में क्या खास: आंदोलन से लेकर उत्सव, परीक्षा, फ्लाइट और बिजली कटौती तक


    भोपाल । आज राजधानी भोपाल में दिनभर हलचल भरा माहौल रहेगा। शिक्षा. संस्कृति. सामाजिक सरोकार और प्रशासनिक गतिविधियों के चलते शहर कई महत्वपूर्ण आयोजनों का गवाह बनेगा। अंतरराष्ट्रीय स्तर के कार्यक्रमों से लेकर स्थानीय मुद्दों पर होने वाले आंदोलनों तक. हर क्षेत्र में गतिविधियां देखने को मिलेंगी। शाम 5 बजे से जागरण लेक यूनिवर्सिटी में इंटरनेशनल स्टोरीटेलिंग फेस्टिवल का आयोजन किया जा रहा है. जिसमें देश और विदेश से आए स्टोरीटेलर्स हिस्सा लेंगे। इस दौरान कहानी कहने की कला. उसके सामाजिक प्रभाव और आधुनिक स्वरूप पर विशेष सत्र होंगे। साहित्य और संस्कृति से जुड़े लोगों के लिए यह कार्यक्रम खास आकर्षण का केंद्र रहेगा।वहीं सुबह 11 बजे से स्कूल ऑफ प्लानिंग एंड आर्किटेक्चर में सीपीटीईडी सम्मेलन आयोजित होगा। क्राइम प्रिवेंशन थ्रू एनवायरनमेंटल डिजाइन विषय पर विशेषज्ञ मंथन करेंगे और शहरी सुरक्षा को बेहतर बनाने के उपायों पर चर्चा होगी।

    सामाजिक सरोकार से जुड़ा निःशुल्क कृत्रिम अंग माप शिविर मानस भवन. पॉलिटेक्निक चौराहे पर सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक चलेगा। इस शिविर में जरूरतमंद लोगों को लाभ मिलेगा। इसके अलावा दोपहर 3 बजे मिंटो हॉल में ‘दिल की बात’ पुस्तक का विमोचन होगा. जिसमें साहित्य प्रेमियों की उपस्थिति रहेगी।
    इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मानव संग्रहालय में दोपहर 12 बजे से माह की विशेष प्रदर्शनी शुरू होगी. जो टिबरिल मेस्लांग पर आधारित है। कला और संस्कृति में रुचि रखने वालों के लिए यह प्रदर्शनी खास रहेगी। उधर. कोहेफिजा स्थित बीसीसीआई भवन में सुबह 11 बजे से चैंबर चुनाव से जुड़ी नाम वापसी की प्रक्रिया होगी।

    प्रशासनिक मोर्चे पर मंत्रालय के सामने मंत्रालयीन कर्मचारियों का प्रदर्शन प्रस्तावित है। कर्मचारी चौथा समयमान वेतनमान. 3 प्रतिशत महंगाई भत्ता और आउटसोर्स कर्मचारियों को डाइंग कैडर घोषित किए जाने के विरोध में आंदोलन करेंगे. जिससे क्षेत्र में यातायात और कामकाज प्रभावित हो सकता हैयात्रियों के लिए अहम सूचना यह है कि गणतंत्र दिवस की रिहर्सल के चलते 19 से 26 जनवरी तक दिल्ली की दो फ्लाइट कैंसिल रहेंगी। इससे भोपाल-दिल्ली रूट पर 396 सीटें कम हो गई हैं और विजिटर पास की सुविधा भी बंद कर दी गई है।शिक्षा के क्षेत्र में 16 और 17 जनवरी को होने वाले एजुकेशनल ओलम्पियाड में करीब 2 लाख विद्यार्थी हिस्सा लेंगे। कक्षा 2 से 8 तक के छात्र सभी विकासखंड मुख्यालयों पर परीक्षा देंगे।

    आज कई इलाकों में बिजली कटौती भी रहेगी। टीटी नगर. जवाहर चौक. टैगोर नगर. इंद्रा नगर. गोविंदपुरा इंडस्ट्रियल एरिया समेत 35 से अधिक क्षेत्रों में 2 से 7 घंटे तक अलग-अलग समय पर बिजली बंद रहेगी।इसी बीच. नर्मदापुरम जिले के माखन नगर बाबई में राज्यस्तरीय लाड़ली बहना सम्मेलन आयोजित होगा. जहां मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव लाड़ली बहना योजना की 32वीं किस्त का अंतरण करेंगे। प्रदेश की 1.25 करोड़ से अधिक बहनों के खातों में सीधे 1500 रुपये ट्रांसफर किए जाएंगे। इस किस्त के तहत कुल 1836 करोड़ रुपये से अधिक की राशि डीबीटी के माध्यम से भेजी जाएगी। कुल मिलाकर आज भोपाल में हर वर्ग के लिए कुछ न कुछ खास होने जा रहा है।

  • ईरान में विरोध पर कड़ा रुख: सजा-ए-मौत की चेतावनी, मरने वालों की संख्या 72 पहुंची

    ईरान में विरोध पर कड़ा रुख: सजा-ए-मौत की चेतावनी, मरने वालों की संख्या 72 पहुंची

    नई दिल्ली| ईरान में सरकार विरोधी प्रदर्शन दूसरे सप्ताह में प्रवेश कर चुके हैं और हालात तेजी से विस्फोटक होते जा रहे हैं। हालात की गंभीरता को देखते हुए ईरानी सरकार ने बाहरी दुनिया से संपर्क तोड़ने के लिए इंटरनेट और अंतरराष्ट्रीय फोन लाइनों को पूरी तरह बंद कर दिया है। इसके बावजूद मानवाधिकार संगठनों से आ रही सूचनाएं बेहद चिंताजनक तस्वीर पेश कर रही हैं। देशभर में आर्थिक तंगी, महंगाई और दमनकारी नीतियों के खिलाफ सड़कों पर उतरे लोग अब सीधे धार्मिक सत्ता और शासन व्यवस्था को चुनौती दे रहे हैं।

    प्रदर्शनकारियों पर मौत की धमकी, ‘अल्लाह का शत्रु’ करार

    शनिवार को ईरान के अटॉर्नी जनरल मोहम्मद मोवहेदी आजाद ने सरकारी टेलीविजन पर सख्त बयान देते हुए प्रदर्शनकारियों को ‘मोहारेबेह’ यानी ‘अल्लाह के खिलाफ युद्ध’ का दोषी बताया। उन्होंने कहा कि जो भी इन प्रदर्शनों में शामिल है या प्रदर्शनकारियों की मदद कर रहा है, उसे ईरानी कानून के तहत मौत की सजा दी जाएगी। अटॉर्नी जनरल ने न्यायिक अधिकारियों को निर्देश दिए कि बिना किसी देरी और नरमी के ऐसे लोगों के खिलाफ मुकदमे चलाए जाएं। सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई के संकेतों के बाद माना जा रहा है कि देशभर में अब बड़ा और व्यापक क्रैकडाउन शुरू होने वाला है।

    मानवाधिकार संगठनों का दावा: 72 की मौत, 2300 से ज्यादा गिरफ्तार

    मानवाधिकार कार्यकर्ता समाचार एजेंसी (HRANA) के मुताबिक, अब तक कम से कम 72 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 2,300 से अधिक लोगों को हिरासत में लिया गया है। वहीं, ईरानी मीडिया का दावा है कि गचसरन में बासिज बल के तीन सदस्य मारे गए हैं। इसके अलावा हमदान, बंदर अब्बास, गिलान और मशहद में भी सुरक्षा बलों के जवानों की मौत की खबरें सामने आई हैं। इन घटनाओं ने हालात को और तनावपूर्ण बना दिया है।

    अमेरिका का खुला समर्थन, ट्रंप प्रशासन की चेतावनी

    ईरान में जारी विरोध प्रदर्शनों को अमेरिका का खुला समर्थन मिल रहा है। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा कि अमेरिका ईरान के “बहादुर लोगों” के साथ खड़ा है। वहीं, अमेरिकी विदेश विभाग ने कड़ा संदेश देते हुए ईरान को चेतावनी दी है कि वह राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ ‘खेल’ न करे। विभाग ने कहा कि ट्रंप जो कहते हैं, उसका मतलब होता है और उसके नतीजे भी होते हैं।

    आर्थिक बदहाली से शुरू हुआ विद्रोह

    इन प्रदर्शनों की शुरुआत 28 दिसंबर 2025 को ईरान की चरमराती अर्थव्यवस्था के खिलाफ हुई थी। ईरानी मुद्रा रियाल गिरकर अब तक के सबसे निचले स्तर 14 लाख प्रति डॉलर तक पहुंच गई है। अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों और परमाणु कार्यक्रम को लेकर जारी तनाव ने आम जनता की जिंदगी मुश्किल कर दी है। महंगाई और बेरोजगारी से त्रस्त जनता का गुस्सा अब खुलकर सड़कों पर है, जो धीरे-धीरे धार्मिक सत्ता के खिलाफ राजनीतिक विद्रोह का रूप ले चुका है।

  • इंदौर में ई-रिक्शा संचालन में बदलाव: सात सेक्टर में बांटकर शुरू होगी नई व्यवस्था

    इंदौर में ई-रिक्शा संचालन में बदलाव: सात सेक्टर में बांटकर शुरू होगी नई व्यवस्था


    इंदौर । शहर में ई-रिक्शा के बढ़ते संचालन को नियंत्रित करने के लिए अब नई व्यवस्था लागू की जा रही है। शहर को सात सेक्टरों में बांटा जाएगा, और हर ई-रिक्शा के लिए एक सीमित क्षेत्र निर्धारित मार्ग और रंग आधारित पहचान लागू की जाएगी। इस बदलाव का उद्देश्य ई-रिक्शा के संचालन को व्यवस्थित सुरक्षित और सुगम बनाना है।

    पुलिस उपायुक्त यातायात, आनंद कलादगी की अध्यक्षता में बुधवार को पलासिया स्थित पुलिस कंट्रोल रूम में एक बैठक हुई जिसमें इस योजना के बारे में जानकारी दी गई। अधिकारियों ने बताया कि सेक्टरों में ई-रिक्शा के संचालन के लिए 30 दिन की तैयारी अवधि होगी जिसके बाद एक महीने का ट्रायल रन शुरू होगा। ट्रायल के दौरान यदि किसी भी तरह की समस्या उत्पन्न होती है तो आवश्यक सुधार किए जाएंगे।

    ई-रिक्शा चालकों को अपनी गाड़ी से संबंधित वैध दस्तावेज प्रस्तुत कर, सेक्टर रजिस्ट्रेशन कराना होगा। इसके लिए अगले दो दिनों में विशेष शिविर आयोजित किए जाएंगे। शिविर में पंजीकरण प्रक्रिया पहले आएं पहले पाएं नीति के तहत होगी और इसमें चालकों को उनके इलाके के अनुसार सेक्टर का चयन करने का अवसर मिलेगा। पंजीकरण के बाद चालकों को सीरियल नंबर वाला स्टीकर दिया जाएगा जिस पर सेक्टर का नाम वाहन का रजिस्ट्रेशन नंबर और सीरियल नंबर अंकित होगा।

    नई व्यवस्था के तहत प्रत्येक सेक्टर में 20 से 25 किमी तक के रूट निर्धारित किए जाएंगे और स्टैंड भी तय किए जाएंगे। ई-रिक्शा की पहचान को और सरल बनाने के लिए प्रत्येक वाहन के आगे-पीछे एक विशेष स्टीकर लगाया जाएगा जो सवारी और निगरानी के लिए मददगार होगा। साथ ही हर सेक्टर के लिए सात अलग-अलग रंगों का कोड होगा जिससे पहचान में आसानी होगी।

    इस योजना के बारे में इंदौर बैटरी रिक्शा चालक महासंघ के संस्थापक राजेश बिड़कर ने असंतोष व्यक्त किया है। उनका कहना है कि कुछ कार्यकर्ता इस निर्णय से संतुष्ट नहीं हैं और 12 जनवरी को ई-रिक्शा बंद करने की घोषणा की है। वे सुबह 11 बजे गांधी हाल परिसर में एकत्र होकर विरोध प्रदर्शन करेंगे।आगामी 15 दिनों में रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया पूरी की जाएगी, और फिर अगले 10 दिनों में सेक्टर और स्टीकर वितरण की प्रक्रिया की जाएगी। अधिकारियों का कहना है कि यदि जरूरत पड़ी तो भविष्य में सेक्टर व्यवस्था में सुधार किए जा सकते हैं।

  • कर्नाटक में कांग्रेस का बुलडोज़र अभियान: 400 से ज्यादा मुस्लिमों के घर ढहाए, सियासत में गरमा गए पारे

    कर्नाटक में कांग्रेस का बुलडोज़र अभियान: 400 से ज्यादा मुस्लिमों के घर ढहाए, सियासत में गरमा गए पारे




    बेंगलुरु।
    कर्नाटक कांग्रेस सरकार का बुलडोज़र अभियान अब राजनीति का नया विवाद बन गया है। 22 दिसंबर को सुबह 4 बजे कोगिलु गांव के फकीर कॉलोनी और वसीम लेआउट में 400 से ज्यादा घरों को गिराया गया। अधिकांश प्रभावित परिवार मुस्लिम समुदाय से हैं। इस कार्रवाई से सैकड़ों लोग बेघर हो गए और ठंड में सड़कों पर या अस्थायी शेल्टरों में रात गुजारने को मजबूर हैं।कर्नाटक सरकार का कहना है कि ये घर उर्दू गवर्नमेंट स्कूल के पास झील किनारे सरकारी ज़मीन पर अवैध रूप से बने थे।
    निवासियों की आपत्ति
    स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया कि उन्हें कोई नोटिस नहीं दिया गया और पुलिस ने जबरदस्ती उन्हें बेदखल किया। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार कई लोग 25 सालों से इलाके में रह रहे हैं और उनके पास वैध आधार कार्ड व वोटर आईडी हैं। निकाले गए ज्यादातर लोग प्रवासी और मजदूरी कर जीवनयापन करते हैं।

    विरोध प्रदर्शन और सियासी हलचल
    इस कार्रवाई के खिलाफ स्थानीय लोगों ने विरोध प्रदर्शन शुरू किया। राजस्व मंत्री कृष्णा बायरे गौड़ा के घर के पास भी प्रदर्शन हुआ।

    दलित संघर्ष समिति और कई अन्य संगठन भी इस कार्रवाई का विरोध कर रहे हैं।

    केरल सरकार की निंदा
    पड़ोसी राज्य के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन ने इसे “अल्पसंख्यक विरोधी राजनीति” करार दिया। उन्होंने कहा कि डर और ज़बरदस्ती से शासन करने वाली सरकारें संवैधानिक मूल्यों और मानवीय गरिमा का उल्लंघन करती हैं। केरल के मंत्री वी शिवनकुट्टी ने इसे “अमानवीय कार्रवाई” बताया और कहा कि यह इमरजेंसी के दौर की याद दिलाती है।

    कर्नाटक उपमुख्यमंत्री का जवाब
    कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने कहा कि यह इलाका अवैध कब्ज़े और कचरा फेंकने की जगह था, जिसे लैंड माफिया झुग्गी बस्ती में बदलने की कोशिश कर रहे थे। उन्होंने कहा कि लोगों को नई जगह शिफ्ट करने का समय पहले ही दिया गया था। शिवकुमार ने पिनाराई विजयन पर तंज कसते हुए कहा कि नेताओं को ज़मीनी हकीकत जाने बिना टिप्पणी नहीं करनी चाहिए।

    यह मामला न केवल बेंगलुरु बल्कि पूरे कर्नाटक की राजनीति में गर्मागरम बहस का केंद्र बन गया है। कांग्रेस सरकार के बुलडोज़र अभियान ने शहर के गरीब और अल्पसंख्यक समुदायों को सीधे प्रभावित किया है, जबकि विपक्ष और पड़ोसी राज्यों ने इसे लोकतांत्रिक और मानवाधिकारों के दृष्टिकोण से सवालों के घेरे में खड़ा कर दिया है।

  • मप्र विधानसभाः हंगामेदार रहा शीतकालीन सत्र का दूसरा दिन, वीआईटी हिंसा पर विपक्ष का हंगामा

    मप्र विधानसभाः हंगामेदार रहा शीतकालीन सत्र का दूसरा दिन, वीआईटी हिंसा पर विपक्ष का हंगामा


    भोपाल।
    मध्य प्रदेश विधानसभा के शीतकालीन सत्र का दूसरा दिन मंगलवार को हंगामेदार रहा। सत्र के दौरान अतिवृष्टि और वीआईटी विश्वविद्यालय में विद्यार्थियों द्वारा अनियमितताओं को लेकर की गई तोड़-फोड़ के मामले में विपक्षी विधायकों ने जमकर हंगामा किया। इससे पहले कांग्रेस विधायक खेतों में फसलों की स्थिति को दर्शाती तख्तियां लेकर विधानसभा पहुंचे। शून्यकाल की सूचनाएं पढ़ी जाने के बाद विधानसभा की कार्यवाही गुरुवार तक स्थगित कर दी गई।

    दरअसल, लंच के बाद विधानसभा की कार्यवाही शुरू होते ही सीहोर जिले के वीआईटी विश्वविद्यालय में हुई मारपीट और आगजनी की घटना को लेकर विधायक दिनेश जैन ‘बोस’ ने ध्यानाकर्षण प्रस्ताव पेश किया। उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार ने बताया कि विश्वविद्यालय को कारण बताओ नोटिस देकर जवाब मांगा गया है, इसके बाद आगे की कार्रवाई होगी। विधायक जैन ने मजिस्ट्रेट जांच कराने और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की, साथ ही छात्रों पर दर्ज प्रकरण वापस लेने की भी बात कही। मंत्री परमार ने कहा कि 4 हजार छात्रों का सड़क पर आना गंभीर मामला है, सरकार इसे गंभीरता से ले रही है और आगे सख्त कदम उठाए जाएंगे।

    कांग्रेस विधायक महेश परमार ने हनुमान चालीसा का पाठ करने पर सजा देने के मामले में सख्त कार्रवाई की मांग की। उन्होंने कहा कि मामले की निष्पक्ष जांच के लिए विश्वविद्यालय में प्रशासक नियुक्त कर उच्च स्तरीय जांच कराई जाए। साथ ही उन्होंने विधानसभा अध्यक्ष से विधायकों की एक कमेटी गठित करने का भी आग्रह किया। इस पर उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार ने कहा कि विश्वविद्यालय को जो कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है, उसका उद्देश्य ही यह है कि सरकार आवश्यक होने पर विश्वविद्यालय को अपने नियंत्रण में लेकर कठोर कार्रवाई करे। मंत्री परमार ने स्पष्ट किया कि अब तक किसी विश्वविद्यालय के खिलाफ इतनी सख्त कार्रवाई नहीं हुई होगी, जैसी इस मामले में की जाएगी।

    उप नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस विधायक हेमंत कटारे ने आरोप लगाया कि वीआईटी विश्वविद्यालय में हनुमान जी का नाम लेने पर छात्रों से 5 हजार रुपये का जुर्माना वसूला जा रहा है। उन्होंने कहा कि ऐसी कार्रवाई उन्होंने पहले कभी नहीं देखी। कटारे ने सवाल उठाया कि जब सीएमएचओ को विश्वविद्यालय परिसर में प्रवेश नहीं करने दिया गया, तो शासकीय कार्य में बाधा का मामला अब तक दर्ज क्यों नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि अगर कलेक्टर और सीएमएचओ चाहें तो धार्मिक भावनाएं भड़काने और शासकीय कार्य में बाधा समेत अन्य धाराओं में विश्वविद्यालय प्रबंधन पर केस दर्ज कराया जा सकता है। उन्होंने वीआईटी कॉलेज में हिंसा को छोटा जेन-जेड आंदोलन बताया।

    इससे पहले मंगलवार को शीतकालीन सत्र के दूसरे दिन सदन में मध्य प्रदेश नगर पालिका संशोधन अध्यादेश- 2025 सर्वसम्मति से पारित हो गया। नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि यह संशोधन राजीव गांधी के सपनों को पूरा करने की दिशा में एक कदम है। उन्होंने कहा कि पहले राइट टू रिकॉल ढाई साल में लागू होता था, जिसे अब 3 साल कर दिया गया है ताकि लोकतंत्र और मजबूत हो। वहीं, नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने कहा कि इस बिल से जनता को कोई सीधा फायदा नहीं होगा। यह केवल टिकट बेचने का माध्यम बनेगा और 3 साल बाद फिर खुलेआम हॉर्स ट्रेडिंग होगी।

    मध्य प्रदेश दुकान एवं स्थापना संशोधन विधेयक 2025 पारित

    इसके साथ ही विधानसभा में मंगलवार को मध्य प्रदेश दुकान एवं स्थापना संशोधन विधेयक 2025 भी पारित हो गया। श्रम मंत्री प्रहलाद पटेल ने कहा कि 20 से कम दुकानों या स्थानों में लेबर इंस्पेक्टर केवल कमिश्नर की अनुमति से ही जाएगा। महिलाओं को समान वेतन और 24 घंटे खुली दुकानों में सुरक्षा देने की जिम्मेदारी सरकार की होगी। उन्होंने बताया कि दुकान रजिस्ट्रेशन शुल्क 250 रुपये से अधिकतम 2500 रुपये तय किया गया है, जिसका अर्थ यह नहीं कि सभी दुकानों पर 2500 रुपये लगेगा। यह राशि भविष्य में संभावित बढ़ोतरी के लिए निर्धारित की गई है।

    दूसरा अनुपूरक बजट सदन में पेश

    वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा ने दूसरा अनुपूरक बजट सदन में पेश किया। इस पर 4 दिसंबर को 3:30 घंटे चर्चा होगी। दूसरा अनुपूरक बजट 13476 करोड़ 94 लाख रुपये का है।