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  • मिडिल ईस्ट में तनाव के बीच CBSE ने GCC देशों में 12वीं बोर्ड परीक्षाओं को रद्द किया

    मिडिल ईस्ट में तनाव के बीच CBSE ने GCC देशों में 12वीं बोर्ड परीक्षाओं को रद्द किया


    नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में ईरान और इजरायल अमेरिका के हालिया संघर्ष के चलते तनावपूर्ण स्थिति बढ़ने के बीच भारतीय दूतावासों ने छात्रों और अभिभावकों के लिए नई एडवाइजरी जारी की है। इस अपडेट में सेंट्रल बोर्ड ऑफ सेकेंडरी एजुकेशन (सीबीएसई) ने 12वीं कक्षा की बोर्ड परीक्षाओं को बहरीन ईरान कुवैत ओमान कतर सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) में रद्द करने की घोषणा की है। यह निर्णय छात्रों की सुरक्षा और शिक्षण गतिविधियों पर पड़ रहे प्रभावों को ध्यान में रखते हुए लिया गया है।

    ओमान में भारतीय दूतावास ने बताया कि यह एडवाइजरी पहले जारी 01.03.2026 03.03.2026 05.03.2026 07.03.2026 और 09.03.2026 के सर्कुलरों का अपडेशन है। इन सर्कुलरों के माध्यम से प्रभावित देशों में स्कूलों और संबंधित अधिकारियों से मिले इनपुट और अपील के आधार पर बोर्ड ने 12वीं क्लास की परीक्षाओं की समीक्षा की। बोर्ड ने स्पष्ट किया कि 16 मार्च से लेकर 10 मार्च तक निर्धारित सभी परीक्षाएं रद्द कर दी गई हैं। इसके साथ ही पहले स्थगित की गई परीक्षाओं की तारीखें भी पूरी तरह रद्द होंगी।

    इस निर्णय का उद्देश्य न केवल छात्रों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है बल्कि यह भी सुनिश्चित करना है कि उनके परिणाम सही समय पर घोषित किए जाएं। एडवाइजरी में यह भी कहा गया कि परीक्षा स्थगित होने के बाद रिजल्ट जारी करने की प्रक्रिया और तरीका बाद में अलग से बताया जाएगा। इससे पहले दूतावास ने कहा था कि सीबीएसई 10 मार्च को स्थिति की पुनः समीक्षा करेगा और 12 मार्च से होने वाली परीक्षाओं के लिए सही निर्णय लेगा।

    मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के कारण ओमान में भारतीय दूतावास ने पहले भी 9 10 और 11 मार्च को होने वाली 12वीं बोर्ड परीक्षाओं को फिलहाल टालने की जानकारी साझा की थी। यह कदम ईरान इजरायल युद्ध और वहां की सुरक्षा स्थिति के मद्देनजर छात्रों और उनके परिवारों के हित में उठाया गया। दूतावास ने यह भी बताया कि सभी संबंधित स्कूलों और अधिकारियों को बोर्ड ने सीधे निर्देश दिए हैं कि परीक्षा स्थगित होने की जानकारी तुरंत छात्रों तक पहुँचाई जाए।

    इस स्थिति से प्रभावित छात्रों और अभिभावकों के लिए राहत की बात यह है कि बोर्ड ने पहले से ही स्पष्ट कर दिया है कि परीक्षाओं के परिणामों को घोषित करने की प्रक्रिया सुरक्षित और पारदर्शी तरीके से की जाएगी। इस बीच छात्रों को आवश्यकतानुसार ऑनलाइन अध्ययन सामग्री और मार्गदर्शन उपलब्ध कराया जा सकता है ताकि उनका अकादमिक नुकसान कम से कम हो।

    इस निर्णय से यह भी साफ हो जाता है कि वैश्विक तनाव और सुरक्षा स्थिति सीधे तौर पर शिक्षा पर प्रभाव डाल सकती है। सीबीएसई का यह कदम छात्रों की सुरक्षा मानसिक शांति और शिक्षण गतिविधियों की निरंतरता को सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

  • ईरान ने अमेरिका को दिया बड़ा झटका, कतर में मिसाइल चेतावनी रडार सिस्टम को पहुंचाया नुकसान

    ईरान ने अमेरिका को दिया बड़ा झटका, कतर में मिसाइल चेतावनी रडार सिस्टम को पहुंचाया नुकसान



    नई दिल्ली। ईरान पर अमेरिका और इजरायल के हमलों के बाद मध्य पूर्व में चल रहा संघर्ष और ज्यादा गंभीर होता जा रहा है। हालात अब ऐसे मोड़ पर पहुंच गए हैं जहां दोनों पक्षों की ओर से लगातार सैन्य कार्रवाई हो रही है। एक तरफ ईरान खाड़ी क्षेत्र में हमले कर रहा है, वहीं दूसरी ओर अमेरिका ने हिंद महासागर में एक ईरानी पोत को डुबो दिया, जिसमें 80 से अधिक लोगों की मौत होने की खबर है। इसी बीच खबर सामने आई है कि ईरान के हमले में कतर में मौजूद अमेरिका की एक अहम मिसाइल चेतावनी प्रणाली को नुकसान पहुंचा है, जिसे इस क्षेत्र में अमेरिकी सुरक्षा तंत्र की “आंख” माना जाता था।

    1.1 अरब डॉलर के रडार सिस्टम को नुकसान

    मिली जानकारी के अनुसार लगभग 1.1 अरब डॉलर की लागत से तैयार यह रडार सिस्टम अमेरिकी सेना के मिसाइल रक्षा नेटवर्क का बेहद महत्वपूर्ण हिस्सा था। इस पर हुए हमले से क्षेत्र में तैनात मिसाइल रक्षा तंत्र को बड़ा झटका लगा है। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इससे संभावित मिसाइल हमलों का समय रहते पता लगाने की क्षमता कमजोर हो सकती है, जिससे क्षेत्रीय सुरक्षा पर असर पड़ सकता है।

    सैटेलाइट तस्वीरों से हुई नुकसान की पुष्टि

    अमेरिकी सैन्य ढांचे को हुए नुकसान की पुष्टि सैटेलाइट तस्वीरों से भी हुई है। प्लैनेट लैब्स द्वारा जारी इमेज में अमेरिकी स्पेस फोर्स के AN/FPS-132 (ब्लॉक 5) बैलिस्टिक मिसाइल अर्ली वार्निंग रडार सिस्टम के आसपास क्षति और आग बुझाने की गतिविधियां दिखाई दे रही हैं। यह रडार सिस्टम मध्य पूर्व में अमेरिकी सेना द्वारा संचालित सबसे बड़े मिसाइल चेतावनी रडारों में से एक माना जाता है।

    ईरान ने कैसे किया हमला

    ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने इस हमले को सटीक मिसाइल स्ट्राइक बताया है। हालांकि कुछ सैन्य विशेषज्ञों का मानना है कि यह हमला कम लागत वाले हमलावर ड्रोन से भी किया गया हो सकता है, जो संभवतः शाहेद श्रेणी का था। रिपोर्ट्स के मुताबिक मिसाइलों और ड्रोन के संयुक्त बड़े हमले के दौरान यह ड्रोन रक्षा तंत्र को भेदने में सफल रहा और रडार सिस्टम को नुकसान पहुंचा गया।

    क्यों महत्वपूर्ण है यह रडार सिस्टम

    इस रडार सिस्टम को अमेरिकी रक्षा कंपनी रेथियॉन ने अपग्रेडेड अर्ली वार्निंग रडार (UEWR) कार्यक्रम के तहत विकसित किया था। यह प्रणाली लगभग 5000 किलोमीटर तक की दूरी पर बैलिस्टिक मिसाइलों और अन्य हवाई खतरों को ट्रैक करने में सक्षम है। साथ ही यह पूरे मध्य पूर्व क्षेत्र में मिसाइल लॉन्च का शुरुआती अलर्ट देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। कतर में इसकी लोकेशन रणनीतिक रूप से बेहद अहम मानी जाती है क्योंकि यहां से यह रडार ईरान, इराक, सीरिया, तुर्किये, मध्य एशिया के कुछ हिस्सों और हिंद महासागर तक की गतिविधियों पर नजर रख सकता है।

    रणनीतिक असर की आशंका

    विशेषज्ञों का मानना है कि इस हमले का असर केवल एक सैन्य ठिकाने को हुए नुकसान तक सीमित नहीं है। अमेरिका के पूर्व सैन्य अधिकारी और पेंटागन के पूर्व सलाहकार कर्नल डगलस मैकग्रेगर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कहा कि इस हमले में अमेरिका की “आंखें” निशाना बनी हैं। वहीं भू-राजनीति विशेषज्ञ ब्रायन एलन के अनुसार इस घटना के दूरगामी रणनीतिक प्रभाव भी हो सकते हैं।

    सिस्टम को बदलना आसान नहीं

    सैन्य विश्लेषकों के अनुसार अमेरिका के पास सैटेलाइट और अन्य रडार सहित वैश्विक सेंसर नेटवर्क मौजूद है, लेकिन AN/FPS-132 जैसे बड़े और स्थायी रडार सिस्टम को नुकसान पहुंचने से क्षेत्रीय निगरानी में अंतर आ सकता है। ऐसे बड़े सिस्टम को जल्दी बदलना या दोबारा स्थापित करना आसान नहीं होता। इसलिए कुछ समय के लिए मिसाइल निगरानी और ट्रैकिंग क्षमता कमजोर पड़ सकती है। यह स्थिति इसलिए भी संवेदनशील मानी जा रही है क्योंकि इस क्षेत्र में अमेरिका के कई अहम सैन्य ठिकाने मौजूद हैं और यहीं से दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति से जुड़े प्रमुख समुद्री मार्ग भी गुजरते हैं।