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  • पुरानी गलियों से स्मार्ट रोड तक बदला लखनऊ! सीएम योगी बोले- विरासत और आधुनिकता का अनोखा संगम

    पुरानी गलियों से स्मार्ट रोड तक बदला लखनऊ! सीएम योगी बोले- विरासत और आधुनिकता का अनोखा संगम


    नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ को विकास की नई सौगात देते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और केंद्रीय रक्षा मंत्री एवं लखनऊ के सांसद राजनाथ सिंह ने रविवार को लखनऊ छावनी को मॉडल छावनी के रूप में विकसित करने की दिशा में 101 करोड़ रुपये की 12 विकास परियोजनाओं का भूमिपूजन और शिलान्यास किया। इस दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के मार्गदर्शन में उत्तर प्रदेश सुरक्षा सुशासन और विकास के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है। आज प्रदेश देश के ग्रोथ इंजन के रूप में अपनी मजबूत पहचान बना चुका है और लखनऊ इसका प्रमुख उदाहरण है।

    मुख्यमंत्री ने लखनऊ के बदलते स्वरूप का जिक्र करते हुए कहा कि करीब दो दशक पहले रेलवे स्टेशन पर मुस्कुराइए आप लखनऊ में हैं का संदेश दिखाई देता था लेकिन शहर की जाम से भरी सड़कों संकरी गलियों और अव्यवस्थित हालात के कारण लोगों के लिए मुस्कुराना मुश्किल होता था। आज वही लखनऊ अपनी ऐतिहासिक पहचान को सुरक्षित रखते हुए आधुनिक और स्मार्ट शहर के रूप में आगे बढ़ रहा है। शहर में पुरानी गलियों के साथ स्मार्ट रोड और सीएम ग्रिड की आधुनिक सड़कें हैं तो दूसरी ओर किसान पथ जैसे बड़े आउटर रिंग रोड भी यातायात को नई दिशा दे रहे हैं।

    सीएम योगी ने कहा कि लखनऊ की खासियत उसकी विरासत और आधुनिकता का अनोखा मेल है। एक ओर ऊदा देवी पासी और महाराजा बिजली पासी जैसी महान विभूतियों का इतिहास शहर की पहचान से जुड़ा है तो दूसरी ओर रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में ब्रह्मोस जैसी अत्याधुनिक मिसाइलों के निर्माण का केंद्र भी लखनऊ बन रहा है। उन्होंने कहा कि चिकनकारी हस्तशिल्प खानपान और सांस्कृतिक विरासत के लिए दुनियाभर में प्रसिद्ध लखनऊ अब आधुनिक बुनियादी ढांचे के कारण भी अपनी अलग पहचान बना रहा है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के प्रयासों से लखनऊ छावनी में भी आधुनिक सुविधाओं का तेजी से विस्तार हो रहा है। छावनी परिषद में ठोस कचरा प्रबंधन के लिए एआई आधारित व्यवस्था तैयार की जा रही है। इसके साथ ही छावनी क्षेत्र के स्कूलों में मुख्यमंत्री अभ्युदय कोचिंग जैसी पहल शुरू की जा रही है। इन प्रयासों का सीधा लाभ सैन्यकर्मियों पूर्व सैनिकों उनके परिवारों और छावनी क्षेत्र में रहने वाले आम नागरिकों को मिलेगा।

    गोमती नदी की सफाई का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि नदी को स्वच्छ बनाने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं और भरोसा जताया कि इस वर्ष के अंत तक गोमती को पूरी तरह स्वच्छ बनाने में सफलता मिलेगी। उन्होंने इस अभियान में सेंट्रल कमांड की ओर से मिल रहे सहयोग की भी सराहना की। मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2017 से पहले उत्तर प्रदेश के सामने पहचान का संकट था और प्रदेश अभाव अराजकता तथा उपद्रव की स्थिति से गुजर रहा था लेकिन आज हालात पूरी तरह बदल चुके हैं।

    उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश अब डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग कॉरिडोर एक्सप्रेसवे रेलवे मेट्रो और एयर कनेक्टिविटी के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है। लखनऊ मेट्रो के दूसरे चरण को केंद्र से मंजूरी मिलने के बाद इसके काम को भी जल्द गति दी जाएगी। प्रदेश में वर्तमान में 17 घरेलू और पांच अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट संचालित हैं। वहीं सैनिक स्कूलों के माध्यम से युवाओं को देश की सुरक्षा जरूरतों के अनुरूप तैयार किया जा रहा है।

    सीएम योगी ने कहा कि देश की सीमाओं की रक्षा में सैनिक चौबीसों घंटे डटे रहते हैं इसलिए सैनिकों पूर्व सैनिकों और उनके परिवारों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराना सरकार की जिम्मेदारी है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि छावनी परिषदों में विकास कार्यों के लिए धन की कमी नहीं होने दी जाएगी। लखनऊ छावनी को आदर्श और मॉडल छावनी बनाने के लिए सड़क स्वच्छता शिक्षा कचरा प्रबंधन और अन्य नागरिक सुविधाओं को लगातार बेहतर किया जाएगा। उन्होंने कहा कि लखनऊ आज अपनी ऐतिहासिक विरासत और आधुनिक विकास को साथ लेकर आगे बढ़ रहा है और बदलते उत्तर प्रदेश की नई तस्वीर पेश कर रहा है।

  • विकसित भारत सिर्फ ऊंची इमारतों का नाम नहीं, हर घर पानी और युवाओं को अवसर मिलना जरूरी: राजनाथ सिंह

    विकसित भारत सिर्फ ऊंची इमारतों का नाम नहीं, हर घर पानी और युवाओं को अवसर मिलना जरूरी: राजनाथ सिंह


    नई दिल्ली। रक्षा मंत्री और लखनऊ के सांसद राजनाथ सिंह ने रविवार को कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत विकसित राष्ट्र बनने के लक्ष्य के साथ तेजी से आगे बढ़ रहा है और आज अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत की आवाज को पूरी दुनिया गंभीरता से सुनती है। उन्होंने कहा कि यह बदलाव भारत की बढ़ती वैश्विक हैसियत और मजबूत होते कद का स्पष्ट प्रमाण है। लखनऊ छावनी परिषद में करीब 101 करोड़ रुपये की लागत वाली 12 विकास परियोजनाओं के भूमिपूजन और शिलान्यास कार्यक्रम को संबोधित करते हुए राजनाथ सिंह ने कहा कि इन परियोजनाओं को केवल निर्माण कार्य के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए बल्कि ये लखनऊ छावनी के बेहतर भविष्य के लिए सरकार के 12 संकल्प हैं।

    राजनाथ सिंह ने कहा कि विकसित भारत का सपना केवल बड़े प्रोजेक्ट बनाने और आधुनिक इमारतें खड़ी करने से पूरा नहीं होगा। वास्तविक विकास तब माना जाएगा जब प्रत्येक परिवार तक स्वच्छ पेयजल पहुंचे बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिले युवाओं को आगे बढ़ने के पर्याप्त अवसर मिलें और समाज के प्रत्येक वर्ग को सम्मानजनक सुविधाएं हासिल हों। उन्होंने कहा कि विकास की रोशनी केवल बड़े शहरों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए बल्कि हर मोहल्ले हर बस्ती और हर परिवार तक इसका लाभ पहुंचना चाहिए।

    भारत की वैश्विक स्थिति में आए बदलाव का उल्लेख करते हुए रक्षा मंत्री ने कहा कि करीब 10 से 12 वर्ष पहले अंतरराष्ट्रीय मंचों पर जब भारत अपनी बात रखता था तो उसे उतनी गंभीरता से नहीं लिया जाता था जितनी भारत की क्षमता और भूमिका को मिलनी चाहिए थी। आज परिस्थितियां बदल चुकी हैं। अब जब भारत अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी बात रखता है तो पूरी दुनिया ध्यान से सुनती है कि भारत क्या कह रहा है। उन्होंने इसे देश की बढ़ती ताकत और वैश्विक प्रभाव का परिणाम बताया।

    उन्होंने कहा कि विकसित भारत का मतलब यह भी है कि बच्चों को बेहतर शिक्षा और युवाओं को अपनी प्रतिभा दिखाने के अवसर मिलें। खेलकूद के क्षेत्र में आगे बढ़ने की सुविधाएं हों और दिव्यांग बच्चों को भी समाज की मुख्यधारा में बराबरी का स्थान मिले। राजनाथ सिंह ने कहा कि समय के साथ शहरों की जरूरतें बदलती हैं इसलिए विकास की रफ्तार बनाए रखने के लिए नियमों में भी बदलाव आवश्यक है।

    इसी दिशा में लखनऊ छावनी क्षेत्र में नए बिल्डिंग बायलॉज लागू किए गए हैं। पहले यहां जी प्लस-2 तक निर्माण की अनुमति थी जिसे बढ़ाकर जी प्लस-3 किया गया है। पार्किंग को शामिल करने पर अब पांच मंजिल तक निर्माण की अनुमति दी गई है। उन्होंने कहा कि इसका उद्देश्य लखनऊ छावनी को उसकी ऐतिहासिक विरासत के साथ आधुनिक सुविधाओं से जोड़ना है ताकि क्षेत्र का विकास तेज गति से हो सके।

    रक्षा मंत्री ने छावनी क्षेत्र में कई बाजारों के नाम बदले जाने का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि नामों में बदलाव केवल औपचारिक प्रक्रिया नहीं है बल्कि इसके पीछे नई पीढ़ी को देश के इतिहास और महान विभूतियों से जोड़ने की भावना है। रॉयल आर्टिलरी बाजार का नाम एकता बाजार ब्रिटिश कैवलरी बाजार का नाम वीरांगना ऊदा देवी बाजार और ब्रिटिश इन्फैंट्री बाजार का नाम माता दीन वाल्मीकि बाजार किया गया है। एक अन्य बाजार का नाम मंगल पांडे बाजार जबकि कैनेडी मार्केट का नाम पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी मार्केट रखा गया है।

    राजनाथ सिंह ने कहा कि इन बदलावों के जरिए स्वतंत्रता संग्राम राष्ट्रसेवा और सामाजिक चेतना से जुड़े महान व्यक्तित्वों की स्मृतियों को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने लखनऊ और उत्तर प्रदेश में हो रहे विकास कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि बेहतर जलापूर्ति शिक्षा खेलकूद बाढ़ नियंत्रण और अन्य बुनियादी सुविधाओं पर लगातार काम किया जा रहा है। उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व की भी प्रशंसा की और कहा कि लखनऊ छावनी में सैन्यकर्मियों पूर्व सैनिकों और आम नागरिकों के लिए सुविधाओं का विस्तार करते हुए ऐतिहासिक पहचान को सुरक्षित रखने के साथ आधुनिक विकास को आगे बढ़ाया जा रहा है।

  • राजनाथ सिंह ने कोलकाता में 3500 करोड़ की लागत की पोत निर्माण फैक्ट्री की रखी आधारशिला

    राजनाथ सिंह ने कोलकाता में 3500 करोड़ की लागत की पोत निर्माण फैक्ट्री की रखी आधारशिला


    कोलकाता।
    रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह (Defence Minister Rajnath Singh) ने रविवार को कोलकाता (Kolkata) में पोत निर्माण (Shipbuilding) से जुड़ी पांच विस्तार परियोजनाओं की आधारशिला रखी। इन परियोजनाओं को 3500 करोड़ रुपये की लागत से विकसित किया जाएगा। रक्षा मंत्री ने इसे देश के लिए बड़ी उपलब्धि बताते हुए कहा कि भारत में पोत निर्माण का वैश्विक केंद्र बनने की क्षमता है।

    रक्षा मंत्री ने रविवार को पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी (Chief Minister Suvendu Adhikari) की मौजूदगी में ऑनलाइन माध्यम से ‘गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स’ (जीआरएसई) की तीन और ‘यंत्र इंडिया लिमिटेड’ की दो परियोजनाओं की आधारशिला रखी। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि वैश्विक पोत निर्माण उद्योग में एक शून्यता आ रही है। भारत इस स्थिति का लाभ उठा सकता है।

    उन्होंने पश्चिम बंगाल के लिए इन परियोजनाओं के महत्व को उजागर करते हुए कहा कि यह राज्य के विकास के लिए नए दौर की शुरुआत है। रक्षा मंत्री ने कहा, ‘पश्चिम बंगाल में कारखानों के बंद होने और तालाबंदी की खबरों की जगह अब नयी परियोजनाओं की शुरुआत ने ले ली है।’ मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि इन परियोजनाओं के विकास से राज्य में रोजगार के अवसर बढ़ने के साथ कोलकाता को पोत निर्माण क्षेत्र में वैश्विक पहचान भी मिलेगी। उन्होंने कहा, ‘ये परियोजनाएं सहायक उद्योगों, खासकर एमएसएमई के XXलिए अधिक अवसर पैदा करके पश्चिम बंगाल की औद्योगिक पारिस्थितिकी को फिर से खड़ा करने में मदद करेंगे।’


    युद्धपोत निर्माण और मरम्मत की क्षमता बढ़ेगी

    जीआरएसई के एक अधिकारी ने बताया कि कंपनी ने युद्धपोत बनाने और उनकी मरम्मत करने की अपनी क्षमता को बेहतर बनाने के उद्देश्य से श्यामा प्रसाद मुखर्जी बंदरगाह, कोलकाता (एसएमपीके) के साथ पट्टा समझौते किए हैं। इस समझौते के तहत हुगली नदी के दोनों किनारों पर दो छोटे शिपयार्ड और रायचक में नदी के किनारे 32 एकड़ जमीन ली गई है।

  • भारत के दो और सिल्वर पर देश को गर्व, उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन, राजनाथ और मांडविया ने खिलाड़ियों की सराहना की

    भारत के दो और सिल्वर पर देश को गर्व, उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन, राजनाथ और मांडविया ने खिलाड़ियों की सराहना की


    नई दिल्ली । कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारतीय खिलाड़ियों का शानदार प्रदर्शन लगातार जारी है। प्रतियोगिता के छठे दिन भारत की झोली में दो अहम रजत पदक आए। महिला वेटलिफ्टर हरजिंदर कौर ने 69 किलोग्राम वर्ग में बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए सिल्वर मेडल जीता, जबकि लंबी दूरी के धावक गुलवीर सिंह ने पुरुषों की 10 हजार मीटर दौड़ में इतिहास रचते हुए भारत को पहला कॉमनवेल्थ पदक दिलाया। दोनों खिलाड़ियों की इस उपलब्धि पर देशभर से उन्हें बधाइयां मिल रही हैं।

    उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर दोनों खिलाड़ियों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि हरजिंदर कौर और गुलवीर सिंह ने अपने शानदार प्रदर्शन से देश का गौरव बढ़ाया है। उन्होंने कहा कि हरजिंदर का दृढ़ संकल्प और गुलवीर की ऐतिहासिक उपलब्धि देश के लाखों युवा खिलाड़ियों को प्रेरित करेगी। उपराष्ट्रपति ने दोनों खिलाड़ियों के उज्ज्वल भविष्य और आगे भी इसी तरह सफलता हासिल करने की कामना की।

    रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी दोनों खिलाड़ियों की उपलब्धियों की सराहना की। उन्होंने गुलवीर सिंह को पुरुषों की 10 हजार मीटर दौड़ में सिल्वर मेडल जीतने और इस स्पर्धा में कॉमनवेल्थ गेम्स का पदक जीतने वाले पहले भारतीय बनने पर बधाई दी। उन्होंने कहा कि यह सफलता गुलवीर की कड़ी मेहनत, अनुशासन और अटूट संकल्प का परिणाम है, जिसने पूरे देश का सिर गर्व से ऊंचा कर दिया है।

    हरजिंदर कौर के प्रदर्शन की प्रशंसा करते हुए रक्षा मंत्री ने कहा कि वेटलिफ्टिंग में भारत के लिए एक और पदक जीतना देश के लिए गर्व की बात है। उन्होंने कहा कि हरजिंदर ने अपने समर्पण और संघर्ष से यह साबित कर दिया है कि भारतीय खिलाड़ी अंतरराष्ट्रीय मंच पर लगातार उत्कृष्ट प्रदर्शन कर सकते हैं। उन्होंने उनके भविष्य के लिए शुभकामनाएं भी दीं।

    केंद्रीय खेल मंत्री मनसुख मांडविया ने भी दोनों खिलाड़ियों को बधाई देते हुए कहा कि गुलवीर सिंह ने एथलेटिक्स में शानदार प्रदर्शन कर भारत का सम्मान बढ़ाया है। वहीं हरजिंदर कौर ने दमदार खेल दिखाते हुए पोडियम पर जगह बनाकर भारतीय वेटलिफ्टिंग की मजबूत परंपरा को आगे बढ़ाया है। उन्होंने दोनों खिलाड़ियों की मेहनत और समर्पण की सराहना की।

    उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी गुलवीर सिंह को विशेष रूप से बधाई दी। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश के सपूत और भारतीय सेना के नायब सूबेदार गुलवीर सिंह ने कॉमनवेल्थ गेम्स में सिल्वर मेडल जीतकर प्रदेश और पूरे देश का गौरव बढ़ाया है। उन्होंने इस उपलब्धि को कड़ी मेहनत, अनुशासन और राष्ट्र के प्रति समर्पण का उत्कृष्ट उदाहरण बताया तथा गुलवीर के उज्ज्वल भविष्य की कामना की।

    ग्लासगो में आयोजित कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में हरजिंदर कौर ने कुल 227 किलोग्राम वजन उठाकर महिलाओं के 69 किलोग्राम वर्ग में रजत पदक जीता। वहीं गुलवीर सिंह ने 10 हजार मीटर दौड़ में शानदार प्रदर्शन करते हुए सिल्वर मेडल अपने नाम किया और इस स्पर्धा में पदक जीतने वाले पहले भारतीय बनकर इतिहास रच दिया। दोनों खिलाड़ियों की सफलता ने भारत के पदक अभियान को नई मजबूती दी है और खेल प्रेमियों में उत्साह का माहौल बना दिया है।

  • जसपाल राणा के निधन पर देश शोकाकुल, पीएम मोदी और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने जताया गहरा दुख

    जसपाल राणा के निधन पर देश शोकाकुल, पीएम मोदी और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने जताया गहरा दुख


    नई दिल्ली। भारतीय शूटिंग जगत के दिग्गज खिलाड़ी और कोच जसपाल राणा के निधन से पूरे देश में शोक की लहर है। 49 वर्ष की आयु में उनके निधन की खबर सामने आने के बाद खेल जगत, राजनीतिक नेतृत्व और उनके प्रशंसकों ने गहरा दुख व्यक्त किया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और भारतीय राष्ट्रीय राइफल संघ (एनआरएआई) के पदाधिकारियों ने उन्हें श्रद्धांजलि देते हुए भारतीय खेलों में उनके योगदान को याद किया।

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर शोक संदेश जारी करते हुए कहा कि जसपाल राणा का निधन भारतीय खेल जगत के लिए एक बड़ी क्षति है। प्रधानमंत्री ने लिखा कि राणा ने शूटिंग में अपनी असाधारण उपलब्धियों से देश का गौरव बढ़ाया और एक मार्गदर्शक के रूप में भी नई पीढ़ी के खिलाड़ियों को प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि जसपाल राणा का समर्पण, अनुशासन और खेलों के प्रति प्रतिबद्धता उन्हें हमेशा सम्मान दिलाती रहेगी। प्रधानमंत्री ने शोक संतप्त परिवार, मित्रों और खेल समुदाय के प्रति अपनी संवेदनाएं व्यक्त करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।

    रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी जसपाल राणा के निधन पर गहरा दुख जताया। उन्होंने अपने संदेश में कहा कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का नाम रोशन करने वाले इस महान खिलाड़ी का अचानक निधन बेहद दुखद है। राजनाथ सिंह ने कहा कि जसपाल राणा न केवल एक उत्कृष्ट शूटर और कोच थे, बल्कि बेहद सरल, सहज और नेकदिल इंसान भी थे। उन्होंने भारत में शूटिंग को लोकप्रिय बनाने और युवा खिलाड़ियों को इस खेल की ओर आकर्षित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

    रक्षा मंत्री ने अपने संदेश में यह भी कहा कि जसपाल राणा ने विश्व शूटिंग चैंपियनशिप और एशियाई खेलों जैसे बड़े मंचों पर भारत को स्वर्ण पदक दिलाकर देश का मान बढ़ाया। उनके अनुसार, राणा का जाना भारतीय खेल जगत के लिए एक अपूरणीय क्षति है, जिसकी भरपाई आसान नहीं होगी।

    भारतीय राष्ट्रीय राइफल संघ (एनआरएआई) के अध्यक्ष कलिकेश नारायण सिंह देव ने भी उनके निधन पर शोक व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि जसपाल राणा केवल एक चैंपियन खिलाड़ी ही नहीं, बल्कि एक उत्कृष्ट मेंटोर भी थे। उन्होंने कहा कि भारतीय शूटिंग समुदाय को उनकी कमी हमेशा महसूस होगी और उनका योगदान आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करता रहेगा।

    जसपाल राणा भारतीय शूटिंग के सबसे सफल खिलाड़ियों में गिने जाते हैं। उन्होंने अपने करियर के दौरान एशियाई खेलों, कॉमनवेल्थ गेम्स और अन्य अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भारत के लिए कई पदक जीते। खिलाड़ी के रूप में सफलता हासिल करने के बाद उन्होंने कोचिंग में भी उल्लेखनीय योगदान दिया और कई युवा निशानेबाजों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सफलता दिलाई।

    दो बार की ओलंपिक पदक विजेता भारतीय शूटर मनु भाकर सहित कई शीर्ष खिलाड़ियों के करियर को संवारने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही। वर्तमान में वह भारतीय पिस्टल निशानेबाजों के हाई-परफॉर्मेंस कोच के रूप में कार्यरत थे और भारतीय शूटिंग टीम को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में जुटे हुए थे।

    रिपोर्ट्स के अनुसार, हाल ही में जर्मनी के म्यूनिख में आयोजित आईएसएसएफ वर्ल्ड कप से लौटते समय उनकी तबीयत बिगड़ गई थी, जिसके बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया था। उनके निधन से भारतीय खेल जगत ने एक ऐसे व्यक्तित्व को खो दिया है, जिसने अपने प्रदर्शन, नेतृत्व और मार्गदर्शन से भारतीय शूटिंग को वैश्विक पहचान दिलाने में अहम भूमिका निभाई।

  • भारत और दक्षिण कोरिया मिलकर विकसित करेंगे लेजर हथियार और एयर डिफेंस सिस्टम

    भारत और दक्षिण कोरिया मिलकर विकसित करेंगे लेजर हथियार और एयर डिफेंस सिस्टम

    नई दिल्ली। भारत और दक्षिण कोरिया ने रक्षा क्षेत्र में भविष्य की तकनीकों को लेकर बड़ा कदम उठाया है। दोनों देश अब मिलकर अगली पीढ़ी के आधुनिक हथियार सिस्टम विकसित और निर्मित करेंगे। इसमें लेजर आधारित हथियार, गाइडेड एनर्जी वेपन और अत्याधुनिक एयर डिफेंस प्लेटफॉर्म जैसी तकनीकें शामिल हैं, जिन्हें भविष्य की ‘स्टार वॉर्स’ तकनीक के रूप में देखा जा रहा है।

    यह महत्वपूर्ण पहल राजनाथ सिंह के सियोल दौरे के दौरान सामने आई। इस दौरान उन्होंने दक्षिण कोरिया के रक्षा मंत्री आन ग्यू-बैक के साथ द्विपक्षीय बैठक की। बैठक में रक्षा उत्पादन, समुद्री सुरक्षा, संयुक्त निर्माण और उभरती रक्षा तकनीकों पर सहयोग बढ़ाने को लेकर विस्तृत चर्चा हुई।

    राजनाथ सिंह ने कहा कि दक्षिण कोरिया की तकनीकी विशेषज्ञता और भारत की विशाल मैन्युफैक्चरिंग क्षमता मिलकर रक्षा क्षेत्र में नई संभावनाएं पैदा कर सकती हैं। उन्होंने कहा कि दोनों देश भविष्य के एडवांस रक्षा सिस्टम संयुक्त रूप से विकसित और उत्पादित करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ेंगे।

    सूत्रों के अनुसार, भारतीय कंपनी लार्सन एंड टुब्रो (L&T) और दक्षिण कोरिया की Hanwha Co. Ltd. के बीच दो महत्वपूर्ण समझौते हुए हैं। इन समझौतों के तहत गाइडेड एनर्जी वेपन, लेजर डिफेंस सिस्टम और ऑटोमेटिक एयर डिफेंस प्लेटफॉर्म को मिलकर विकसित और निर्मित किया जाएगा।

    विशेषज्ञों के मुताबिक, गाइडेड एनर्जी वेपन भविष्य की युद्ध तकनीक मानी जाती है। यह लेजर या उच्च ऊर्जा किरणों के जरिए दुश्मन के ड्रोन, मिसाइल और हवाई खतरों को पलभर में नष्ट करने में सक्षम होती है। दुनिया की बड़ी सैन्य शक्तियां पहले से ही इस दिशा में काम कर रही हैं और अब भारत भी इस तकनीक की दौड़ में तेजी से आगे बढ़ रहा है।

    राजनाथ सिंह ने दक्षिण कोरिया के रक्षा अधिग्रहण कार्यक्रम प्रशासन के मंत्री ली योंग-चुल से भी मुलाकात की। दोनों देशों ने रक्षा उपकरणों के संयुक्त विकास के साथ-साथ वैश्विक निर्यात बाजार में भी साझेदारी बढ़ाने पर सहमति जताई।

    इस दौरान भारत-कोरिया रक्षा उद्योग व्यापार गोलमेज सम्मेलन का आयोजन भी किया गया, जिसमें दोनों देशों के वरिष्ठ अधिकारी और रक्षा कंपनियों के प्रतिनिधि शामिल हुए। सम्मेलन में रक्षा निर्माण और टेक्नोलॉजी ट्रांसफर को लेकर कई अहम मुद्दों पर चर्चा हुई।

    इसी बीच भारत की रक्षा क्षमताओं को और मजबूत करने की दिशा में एक और बड़ी उपलब्धि सामने आई है। निबा लिमिटेड द्वारा विकसित ‘सूर्यास्त्र यूनिवर्सल रॉकेट लॉन्चर’ ने ओडिशा के चांदीपुर में सफल लाइव-फायरिंग ट्रायल किया। इस सिस्टम ने 150 और 300 किलोमीटर की दूरी तक रॉकेट दागकर सटीक निशाना साधा।

    रिपोर्ट्स के अनुसार, 300 किलोमीटर की दूरी से दागे गए रॉकेट ने लक्ष्य के मात्र 2 मीटर के दायरे में निशाना लगाकर अपनी उच्च सटीकता साबित की। इसे भारत की लंबी दूरी की मारक क्षमता में बड़ा कदम माना जा रहा है।

    भारत और दक्षिण कोरिया के बीच बढ़ता रक्षा सहयोग आने वाले समय में एशिया की रणनीतिक ताकतों के संतुलन पर भी असर डाल सकता है। आधुनिक तकनीक आधारित हथियार प्रणालियों का यह साझा विकास भारत की रक्षा आत्मनिर्भरता को नई मजबूती देने वाला माना जा रहा है।

  • मोदी-मेलोनी मुलाकात का असर? भारत की चेतावनी के बाद क्या पाकिस्तान को हथियार बेचना रोकेगा इटली

    मोदी-मेलोनी मुलाकात का असर? भारत की चेतावनी के बाद क्या पाकिस्तान को हथियार बेचना रोकेगा इटली




    नई दिल्ली। रोम में प्रधानमंत्री Narendra Modi और इटली की पीएम Giorgia Meloni की मुलाकात के बाद भारत-इटली रक्षा संबंधों को लेकर नई चर्चा शुरू हो गई है। दोनों देशों ने अपने रिश्तों को “विशेष रणनीतिक साझेदारी” का दर्जा देने की बात कही है। इसी बीच सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि क्या इटली अब पाकिस्तान को हथियारों की सप्लाई सीमित करेगा या उस पर रोक लगाएगा।

    भारत ने हाल के महीनों में इटली के सामने अपनी सुरक्षा चिंताओं को मजबूती से रखा है। रक्षा मंत्री Rajnath Singh ने अपने इतालवी समकक्ष Guido Crosetto से साफ कहा था कि पाकिस्तान को दी जाने वाली उन्नत रक्षा तकनीक भारत की सुरक्षा के लिए खतरा बन सकती है। भारत ने यह भी दोहराया कि पाकिस्तान लंबे समय से सीमा-पार आतंकवाद को समर्थन देता रहा है, इसलिए संवेदनशील सैन्य तकनीक उसके हाथों तक नहीं पहुंचनी चाहिए।

    सूत्रों के मुताबिक दोनों देशों के बीच हुई रक्षा वार्ता में भारत ने पाकिस्तान को इटली द्वारा की गई पूर्व हथियार आपूर्ति का मुद्दा भी उठाया। भारत ने खासतौर पर नौसेना प्रणालियों, हेलीकॉप्टर, ड्रोन, मिसाइल सिस्टम और रडार तकनीक को लेकर चिंता जताई। इसके जवाब में इतालवी अधिकारियों ने भरोसा दिलाया कि भारत को मिलने वाली अत्याधुनिक रक्षा तकनीक किसी तीसरे देश के साथ साझा नहीं की जाएगी।

    दरअसल पाकिस्तान और इटली के बीच रक्षा कारोबार काफी पुराना और मजबूत रहा है। अंतरराष्ट्रीय रिपोर्ट्स के अनुसार चीन के बाद इटली पाकिस्तान को हथियार देने वाले बड़े देशों में शामिल रहा है। पाकिस्तान अपनी सेना के आधुनिकीकरण के लिए इटली से नौसैनिक उपकरण, रडार, सैन्य हेलीकॉप्टर, आर्टिलरी सिस्टम और गोला-बारूद खरीदता रहा है।

    रिपोर्ट्स के मुताबिक साल 2018 में इटली ने पाकिस्तान को करीब 762 मिलियन डॉलर के रक्षा निर्यात की मंजूरी दी थी। वहीं हालिया आंकड़ों में इटली से पाकिस्तान को हथियार और सैन्य उपकरणों के निर्यात का आंकड़ा 541 मिलियन डॉलर से ज्यादा बताया गया है। पाकिस्तानी सेना में इतालवी हथियारों और उपकरणों का इस्तेमाल लंबे समय से होता रहा है, जिसमें Beretta 92FS पिस्तौल भी शामिल है।

    अब स्थिति इसलिए भी महत्वपूर्ण हो गई है क्योंकि इटली की बड़ी रक्षा कंपनी Leonardo भारत में रक्षा और नौसेना परियोजनाओं में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाना चाहती है। भारत ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि भविष्य की रक्षा साझेदारी तभी मजबूत होगी, जब इटली भारत की सुरक्षा चिंताओं का सम्मान करेगा।

    प्रधानमंत्री मोदी के इटली दौरे को इसी नजरिए से बेहद अहम माना जा रहा है। माना जा रहा है कि आने वाले समय में भारत-इटली रक्षा सहयोग और गहरा हो सकता है, लेकिन पाकिस्तान को हथियार सप्लाई का मुद्दा दोनों देशों के रिश्तों की सबसे बड़ी परीक्षा बना रहेगा।

  • भारत–कोरिया रणनीतिक साझेदारी को नई मजबूती, राजनाथ सिंह की यात्रा से बढ़ा सहयोग का दायरा

    भारत–कोरिया रणनीतिक साझेदारी को नई मजबूती, राजनाथ सिंह की यात्रा से बढ़ा सहयोग का दायरा


    नई दिल्ली । भारत और दक्षिण कोरिया के बीच बढ़ते रणनीतिक संबंधों को नई दिशा देने के उद्देश्य से रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की हालिया दक्षिण कोरिया यात्रा को अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इस यात्रा के दौरान उन्होंने सियोल स्थित राष्ट्रीय समाधि स्थल पर पहुंचकर देश के वीर सैनिकों को श्रद्धांजलि अर्पित की, जिन्होंने राष्ट्र की सुरक्षा और सम्मान के लिए अपने प्राणों की आहुति दी। इस अवसर पर उनका संदेश केवल औपचारिकता तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसमें दोनों देशों के बीच साझा मूल्यों, आपसी सम्मान और वैश्विक शांति के प्रति गहरी प्रतिबद्धता भी झलकती दिखाई दी। उन्होंने कहा कि सैनिकों का साहस, त्याग और देशभक्ति आने वाली पीढ़ियों के लिए हमेशा प्रेरणास्रोत रहेगा और किसी भी राष्ट्र की सुरक्षा उसकी सेना के बलिदान पर ही आधारित होती है।

    इस महत्वपूर्ण दौरे के दौरान रक्षा मंत्री ने दक्षिण कोरिया के अपने समकक्ष के साथ व्यापक स्तर पर द्विपक्षीय वार्ता की योजना भी साझा की, जिसमें रक्षा सहयोग, सैन्य तकनीक, समुद्री सुरक्षा, और रक्षा उत्पादन जैसे क्षेत्रों में नए अवसरों की तलाश पर विशेष ध्यान दिया गया। दोनों देशों के बीच पिछले कुछ वर्षों में रक्षा संबंधों में उल्लेखनीय प्रगति देखी गई है और अब इसे एक अधिक संरचित और दीर्घकालिक रणनीतिक साझेदारी में बदलने पर जोर दिया जा रहा है। बैठक में क्षेत्रीय स्थिरता और हिंद-प्रशांत क्षेत्र की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी विचारों का आदान-प्रदान किया जाना प्रस्तावित है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि यह यात्रा केवल औपचारिक नहीं बल्कि दूरगामी रणनीतिक महत्व रखती है।

    राजनाथ सिंह की यह यात्रा ऐसे समय में हो रही है जब वैश्विक भू-राजनीतिक परिस्थितियाँ तेजी से बदल रही हैं और देशों के बीच रक्षा सहयोग अधिक महत्वपूर्ण होता जा रहा है। भारत और दक्षिण कोरिया दोनों ही लोकतांत्रिक मूल्य, शांति और नियम-आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था के पक्षधर माने जाते हैं, और यही समानता दोनों देशों को और अधिक करीब ला रही है। समुद्री सुरक्षा, तकनीकी सहयोग और रक्षा निर्माण के क्षेत्र में दोनों देशों की साझेदारी भविष्य में नई ऊंचाइयों को छू सकती है।

    सियोल स्थित राष्ट्रीय समाधि स्थल पर दी गई श्रद्धांजलि को एक प्रतीकात्मक लेकिन महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, जो यह दर्शाता है कि भारत न केवल अपने ही सैनिकों के बलिदान का सम्मान करता है, बल्कि अन्य देशों के वीरों के प्रति भी समान सम्मान की भावना रखता है। यह दृष्टिकोण दोनों देशों के बीच मानवीय और सांस्कृतिक संबंधों को भी मजबूत करता है।

    इस यात्रा से यह संकेत मिलता है कि भारत और दक्षिण कोरिया अब केवल व्यापारिक या औपचारिक संबंधों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे एक व्यापक रणनीतिक साझेदारी की ओर बढ़ रहे हैं, जिसमें रक्षा, तकनीक और क्षेत्रीय सुरक्षा जैसे महत्वपूर्ण पहलू शामिल हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में यह साझेदारी एशिया-प्रशांत क्षेत्र में स्थिरता और सहयोग का एक मजबूत आधार बन सकती है।

  • राजनाथ सिंह वियतनाम दौरे पर, रक्षा सहयोग को नई दिशा; भारत-वियतनाम रिश्तों में बढ़ी रणनीतिक गहराई

    राजनाथ सिंह वियतनाम दौरे पर, रक्षा सहयोग को नई दिशा; भारत-वियतनाम रिश्तों में बढ़ी रणनीतिक गहराई

    नई दिल्ली। रक्षा मंत्री Rajnath Singh के वियतनाम दौरे ने भारत-वियतनाम संबंधों को एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय सुर्खियों में ला दिया है। दोनों देशों ने रक्षा सहयोग, समुद्री सुरक्षा और इंडो-पैसिफिक स्थिरता पर अपनी रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने की प्रतिबद्धता दोहराई है।
    हनोई/नई दिल्ली। भारत और वियतनाम के बीच रणनीतिक संबंधों को नई मजबूती देने के उद्देश्य से रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने अपने वियतनाम दौरे के दौरान वहां के शीर्ष नेतृत्व से अहम बातचीत की। इस बैठक में रक्षा सहयोग, सुरक्षा साझेदारी और क्षेत्रीय स्थिरता जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई। दोनों देशों ने इस बात पर सहमति जताई कि इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में शांति और संतुलन बनाए रखने में भारत और वियतनाम की साझेदारी बेहद अहम भूमिका निभा सकती है।

    राजनाथ सिंह ने इस दौरान भारत की ओर से वियतनाम के साथ रक्षा सहयोग को और गहरा करने की प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच साझेदारी केवल रक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि यह आपसी विश्वास, तकनीकी सहयोग और सामरिक समझ पर आधारित एक व्यापक संबंध है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से भी शुभकामनाएं वियतनाम नेतृत्व को दीं।

    इसी बीच भारत के ऐतिहासिक विदेश नीति दृष्टिकोण की चर्चा भी एक बार फिर सामने आई है। कहा जाता है कि भारत के पहले प्रधानमंत्री Jawaharlal Nehru ने 1960 के दशक में अमेरिका के वियतनाम युद्ध में गहराई से शामिल होने पर सावधानी बरतने की सलाह दी थी। हालांकि ऐतिहासिक दस्तावेजों में उनके विचार सीधे और औपचारिक रूप में स्पष्ट रूप से दर्ज नहीं हैं, लेकिन कई समकालीन लेखों और स्मृतियों में उनके इस रुख का उल्लेख मिलता है कि वियतनाम में सैन्य हस्तक्षेप से बचना चाहिए।

    आगे चलकर वियतनाम युद्ध ने वैश्विक राजनीति पर गहरा असर डाला, जिसमें भारी जनहानि और लंबे संघर्ष के बाद अंततः अमेरिका को पीछे हटना पड़ा। युद्ध के बाद वियतनाम एकीकृत राष्ट्र के रूप में उभरा।

    भारत और वियतनाम के संबंध केवल रणनीतिक ही नहीं बल्कि ऐतिहासिक और सांस्कृतिक रूप से भी गहरे हैं। 1959 में तत्कालीन राष्ट्रपति Rajendra Prasad ने हो ची मिन्ह को बोधि वृक्ष भेंट किया था, जो आज भी दोनों देशों की मित्रता का प्रतीक माना जाता है। यह प्रतीक समय-समय पर भारत-वियतनाम रिश्तों की मजबूती को दर्शाता रहा है।

  • सुरक्षा सहयोग और समुद्री स्थिरता पर सहमति, वियतनाम दौरे में राजनाथ सिंह की अहम कूटनीतिक पहल

    सुरक्षा सहयोग और समुद्री स्थिरता पर सहमति, वियतनाम दौरे में राजनाथ सिंह की अहम कूटनीतिक पहल


    नई दिल्ली । भारत की विदेश और रक्षा नीति को नई दिशा देने वाले प्रयासों के तहत रक्षा मंत्री Rajnath Singh के वियतनाम दौरे को महत्वपूर्ण कूटनीतिक कदम के रूप में देखा जा रहा है। इस यात्रा के दौरान उन्होंने वियतनाम के शीर्ष नेतृत्व से मुलाकात कर दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग, क्षेत्रीय सुरक्षा और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में स्थिरता को लेकर व्यापक चर्चा की। इस मुलाकात में आपसी विश्वास और रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने पर विशेष जोर दिया गया।

    राजधानी हनोई में हुई इस उच्चस्तरीय बैठक में राजनाथ सिंह ने वियतनाम के जनरल सेक्रेटरी और राष्ट्रपति To Lam से शिष्टाचार मुलाकात की। बातचीत के दौरान दोनों पक्षों ने इस बात पर सहमति जताई कि भारत और वियतनाम के संबंध केवल पारंपरिक मित्रता तक सीमित नहीं हैं, बल्कि अब यह रक्षा और रणनीतिक सहयोग के एक मजबूत ढांचे में विकसित हो चुके हैं। रक्षा मंत्री ने इस अवसर पर भारत की ओर से शुभकामनाएं भी प्रेषित कीं और दोनों देशों के बीच साझेदारी को भविष्य की जरूरतों के अनुरूप और गहरा करने की प्रतिबद्धता दोहराई।

    इस दौरान समुद्री सुरक्षा और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में स्वतंत्र नौवहन जैसे विषय प्रमुख रहे। दोनों देशों ने इस बात पर जोर दिया कि क्षेत्र में शांति, स्थिरता और नियम आधारित व्यवस्था बनाए रखना अत्यंत आवश्यक है। बदलते वैश्विक भू-राजनीतिक परिदृश्य में भारत और वियतनाम की साझेदारी को संतुलन और सहयोग की दिशा में एक महत्वपूर्ण स्तंभ माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह सहयोग क्षेत्रीय तनावों के बीच एक स्थिर शक्ति के रूप में उभर रहा है।

    इसके साथ ही रक्षा मंत्री ने वियतनाम के रक्षा मंत्री सीनियर लेफ्टिनेंट जनरल Phan Van Giang के साथ भी द्विपक्षीय वार्ता की, जिसमें रक्षा उद्योग, सैन्य प्रशिक्षण, क्षमता निर्माण और समुद्री सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर विस्तार से चर्चा हुई। दोनों देशों ने यह स्वीकार किया कि आधुनिक सुरक्षा चुनौतियों का सामना करने के लिए संयुक्त प्रयास और तकनीकी सहयोग बेहद आवश्यक हैं।

    बैठक के बाद राजनाथ सिंह ने कहा कि भारत और वियतनाम के बीच रक्षा साझेदारी लगातार मजबूत हो रही है और यह साझेदारी अब व्यापक रणनीतिक सहयोग के नए चरण में प्रवेश कर चुकी है। दोनों देशों ने रक्षा उत्पादन और प्रशिक्षण के क्षेत्र में संयुक्त प्रयासों को आगे बढ़ाने पर सहमति जताई, जिससे भविष्य में रक्षा क्षमताओं को और मजबूती मिलने की उम्मीद है।

    इस यात्रा का एक और महत्वपूर्ण पहलू उन्नत तकनीकी सहयोग से जुड़ा रहा, जहां आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और क्वांटम तकनीक जैसे क्षेत्रों में दोनों देशों के बीच समझौता हुआ। इसे भविष्य की रक्षा और तकनीकी रणनीति के लिए एक निर्णायक कदम माना जा रहा है। यह पहल इस बात का संकेत देती है कि भारत और वियतनाम केवल वर्तमान सुरक्षा चुनौतियों पर ही नहीं, बल्कि भविष्य की तकनीकी जरूरतों पर भी मिलकर काम करने के लिए तैयार हैं।

    कुल मिलाकर यह यात्रा भारत और वियतनाम के बीच बढ़ते रणनीतिक विश्वास और सहयोग का प्रतीक मानी जा रही है। इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में स्थिरता, समुद्री सुरक्षा और तकनीकी साझेदारी के माध्यम से दोनों देश एक मजबूत और संतुलित क्षेत्रीय व्यवस्था की दिशा में आगे बढ़ते दिखाई दे रहे हैं।