Tag: Rajya Sabha

  • Rajya Sabha: हरिवंश फिर बनाए जा सकते हैं उपसभापति… सरकार कर रही विचार… विपक्ष ने जताई आपत्ति

    Rajya Sabha: हरिवंश फिर बनाए जा सकते हैं उपसभापति… सरकार कर रही विचार… विपक्ष ने जताई आपत्ति


    नई दिल्ली।
    राज्यसभा (Rajya Sabha) के अपने पिछले कार्यकाल में उच्च सदन के उपसभापति (Deputy Speaker) रहे हरिवंश (Harivansh) को फिर से यह मौका मिल सकता है। सरकार की ओर से इस पर विचार चल रहा है। उनका पिछला कार्यकाल 9 अप्रैल को समाप्त हुआ था और 10 तारीख को उन्हें मनोनीत सांसद के तौर पर शपथ दिलाई गई थी। पहले वह जेडीयू (JDU) की ओर से लगातार दूसरी बार राज्यसभा के सांसद थे, लेकिन इस बार उन्हें मौका नहीं मिला था। वहीं सत्ता पक्ष की ओर से उन्हें मनोनीत सांसद के तौर पर सदन में भेजा गया है। अब उन्हें फिर से उपसभापति की भूमिका देने की तैयारी है और इस पर विपक्ष (Opposition) ने आपत्ति भी जाहिर कर दी है।

    केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने राज्यसभा के उपसभापति के चुनाव के लिए विपक्षी नेताओं से बात की थी। उनकी ओर से कहा गया था कि हरिवंश को फिर से उपसभापति बनाया जाए। इसी को लेकर नड्डा ने विपक्षी दलों से बात की थी, लेकिन उनकी ओर से इसे लेकर असहमति जाहिर की गई है। सूत्रों का कहना है कि कांग्रेस, टीएमसी और कुछ लेफ्ट दलों ने कहा है कि हम इस पर सहमत नहीं है। ऐसे में हरिवंश का सर्वसम्मति से सदन में पहुंचना मुश्किल दिख रहा है। विपक्षी दलों का कहना है कि लोकसभा में डिप्टी स्पीकर का पद लंबे समय से खाली है। सरकार उसे भरने पर विचार नहीं कर रही है। ऐसे में राज्यसभा के डिप्टी स्पीकर को लेकर इतनी जल्दी क्यों दिखा रही है।

    लोकसभा में डिप्टी स्पीकर का पद 2019 से ही रिक्त है। अब तक डिप्टी चेयरमैन का पद भरने के लिए कोई आधिकारिक नोटिफिकेशन जारी नहीं किया गया है। सूत्रों का कहना है कि यह प्रक्रिया सदन में तीन दिनों के विशेष सत्र के दौरान की जा सकती है। तब दोनों सदनों की बैठक होगी। इस सत्र का मुख्य उद्देश्य महिला आरक्षण संशोधन विधेयक को पारित कराना है। इसी दौरान राज्यसभा के डिप्टी स्पीकर का फैसला हो सकता है। सर्वसम्मति ना बनने की स्थिति में चुनाव भी कराया जा सकता है। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश का कहना है कि सरकार डिप्टी स्पीकर के पद के चुनाव को जबरदस्ती करना चाहती है।

    विपक्ष बोला- लोकसभा में तो यह पद 7 साल से खाली, यहां क्यों जल्दी
    उन्होंने कहा कि इस सरकार ने लोकसभा में डिप्टी स्पीकर के पद के लिए 7 सालों से कोई प्रयास नहीं किया है। यह पद खाली ही पड़ा है। लेकिन आखिर राज्यसभा में डिप्टी स्पीकर का पद 4 दिन के अंदर ही भरने की इतनी क्या जल्दी है। वहीं टीएमसी के नेता डेरेक ओ ब्रायन ने कहा कि सरकार चाहती है कि डिप्टी स्पीकर पद का चुनाव 17 अप्रैल को ही हो जाए। उन्होंने कहा कि यह तो संसद का मजाक बनाने की कोशिश है। डेरेक ने कहा कि लोकसभा में डिप्टी स्पीकर का पद 2019 से खाली है। फिर राज्यसभा को लेकर भाजपा इतनी जल्दबाजी में क्यों है।

  • 10 अप्रैल को राज्यसभा सदस्य की शपथ लेंगे नीतीश कुमार…. बिहार में नई सरकार गठन की कवायद तेज

    10 अप्रैल को राज्यसभा सदस्य की शपथ लेंगे नीतीश कुमार…. बिहार में नई सरकार गठन की कवायद तेज


    पटना।
    बिहार (Bihar) के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार (Chief Minister Nitish Kumar) 10 अप्रैल को राज्यसभा सदस्य के रूप में शपथ लेंगे। जदयू के विश्वस्त सूत्रों के मुताबिक मुख्यमंत्री तीन दिवसीय दौरे पर 9 अप्रैल की दोपहर दिल्ली रवाना होंगे। शुक्रवार को शपथ लेने के बाद शनिवार 11 अप्रैल को पटना वापस आएंगे। दिल्ली में प्रधानमंत्री और गृहमंत्री (Prime Minister and Home Minister) से भी उनकी मुलाकात हो सकती है।

    नीतीश कुमार के पटना वापसी के साथ ही बिहार में भाजपा के नेतृत्व में नई सरकार के गठन की कवायद तेज हो जाएगी। इसके बाद किसी भी दिन नीतीश मुख्यमंत्री की कुर्सी छोड़ सकते हैं। एनडीए के दलों में यह आपसी साझेदारी बन चुकी है कि अगला मुख्यमंत्री भाजपा का होगा। सरकार में जदयू की मौजूदगी भी दमदार रहेगी तथा इस पार्टी से राज्य को उप मुख्यमंत्री मिलेगा। यह दोनों बातें पहली बार होगी।

    नीतीश कुमार बतौर राज्यसभा सदस्य शपथ लेकर पटना वापसी पर किसी दिन एनडीए विधानमंडल दल की बैठक बुला सकते हैं और इस बैठक में वह सीएम पद छोड़ने की जानकारी आधिकारिक तौर पर विधायकों को देंगे। फिर राज्यपाल को इस्तीफा सौंपेंगे। नई सरकार के गठन को पहले एनडीए के सभी घटक दलों के विधायक दल की अलग-अलग बैठकों में नेता चुने जाएंगे।

    फिर एनडीए विधानमंडल दल के नेता की घोषणा संयुक्त बैठक में होगी। नए नेता सरकार गठन का प्रस्ताव राज्यपाल को सौंपेंगे। एनडीए के दलों में हो रही चर्चा के मुताबिक 15 अप्रैल के बाद ही नई सरकार अस्तित्व में आएगी। पद छोड़ने के पहले सीएम की अध्यक्षता में राज्य मंत्रिमंडल की बैठक होने के भी आसार हैं, जिसमें कई महत्वपूर्ण फैसले लिए जा सकते हैं।


    कौन बनेगा बिहार का सीएम?

    अब भले ही बिहार में नई सरकार बनने का प्रोग्राम सेट हो गया हो लेकर राज्य का अगला मुख्यमंत्री कौन होगा इसपर अभी सस्पेंस बरकरार है। सीएम की रेस में सम्राट चौधरी का नाम अभी सबसे आगे चल रहा है। मौजूदा डिप्टी सीएम विजय सिन्हा ने हाल ही में यह कर सम्राट चौधरी की राह और भी आसान कर दी थी कि वो सीएम की रेस में नहीं हैं बल्कि वो सेवक की रेस में हैं। हालांकि, बिहार के नए मुख्यमंत्री को लेकर अभी बीजेपी ने चुप्पी साध रखी है। पार्टी नेता लगातार यह कह रहे हैं कि एनडीए की बैठक में बिहार के नए सीएम का नाम तय किया जाएगा। इधऱ डिप्टी सीएम की रेस में नीतीश कुमार के बेटे निशांत का नाम है। हालांकि, सीएम और डिप्टी सीएम के नामों को लेकर यह सिर्फ कयासबाजी है अभी इसपर आधिकारिक तौर से कुछ भी साफ नहीं किया गया है।

  • क्या बीजेपी में जाएंगे राघव चड्ढा? राज्यसभा सीट पर भी उठे सवाल, जानें क्या कहते हैं नियम

    क्या बीजेपी में जाएंगे राघव चड्ढा? राज्यसभा सीट पर भी उठे सवाल, जानें क्या कहते हैं नियम

    नई दिल्ली। राघव चड्ढा और आम आदमी पार्टी के बीच बढ़ती खींचतान के बीच उनकी राजनीतिक भविष्य को लेकर अटकलें तेज हो गई हैं। पार्टी ने उन्हें राज्यसभा में उपनेता पद से हटा दिया है और आरोप लगाया है कि वह संसद में नरेंद्र मोदी सरकार के खिलाफ मुखर नहीं हो रहे। साथ ही पार्टी ने राज्यसभा सचिवालय से यह भी कहा है कि उन्हें पार्टी कोटे से बोलने का समय न दिया जाए।

    इसी बीच उनके भारतीय जनता पार्टी में जाने की चर्चाएं तेज हो गई हैं।

    मोदी विरोधी पोस्ट हटाने का दावा

    दिल्ली AAP प्रमुख सौरभ भारद्वाज ने दावा किया कि राघव चड्ढा ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट से प्रधानमंत्री मोदी और बीजेपी की आलोचना वाले पुराने पोस्ट हटा दिए हैं। इसके बाद उनके राजनीतिक रुख को लेकर सवाल और गहरे हो गए।

    क्या बीजेपी में शामिल होंगे?

    इस पूरे विवाद के बाद दो बड़े सवाल उठ रहे हैं—क्या राघव चड्ढा बीजेपी में जाएंगे और यदि ऐसा होता है तो उनकी राज्यसभा सदस्यता पर क्या असर पड़ेगा? फिलहाल दोनों सवालों पर कोई स्पष्ट जवाब सामने नहीं आया है।

    दिल्ली बीजेपी अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि अपना राजनीतिक भविष्य तय करना राघव चड्ढा के हाथ में है। इसे बीजेपी की ओर से “दरवाजे खुले” रखने के संकेत के रूप में देखा जा रहा है, हालांकि पार्टी ने औपचारिक तौर पर कोई प्रस्ताव नहीं दिया है।

    क्या सुरक्षित है राज्यसभा सीट?

    राघव चड्ढा का राज्यसभा कार्यकाल 2028 तक है। ऐसे में पार्टी उन्हें सीधे तौर पर सांसद पद से नहीं हटा सकती। पार्टी केवल संगठनात्मक पदों से हटाने का अधिकार रखती है, जो किया जा चुका है।

    कब जा सकती है सदस्यता?

    संविधान की दसवीं अनुसूची (दल-बदल विरोधी कानून) के तहत किसी सांसद की सदस्यता दो स्थितियों में जा सकती है—

    यदि वह स्वेच्छा से पार्टी छोड़ दे।
    यदि वह सदन में पार्टी के व्हिप का उल्लंघन करे।

    अदालतों ने यह भी माना है कि केवल औपचारिक इस्तीफा जरूरी नहीं होता, बल्कि किसी दूसरी पार्टी के समर्थन में सार्वजनिक गतिविधियां भी “स्वेच्छा से पार्टी छोड़ने” का संकेत मानी जा सकती हैं।

    पहले भी हो चुका है ऐसा मामला

    2017 में शरद यादव और अली अनवर को राज्यसभा से अयोग्य घोषित किया गया था। जनता दल (यूनाइटेड) ने उनके विपक्षी कार्यक्रमों में शामिल होने को दल-बदल का आधार बनाया था।

    अंतिम फैसला किसके पास?

    किसी सांसद की सदस्यता खत्म करने का अधिकार राज्यसभा के सभापति के पास होता है, जो देश के उपराष्ट्रपति होते हैं। वर्तमान में यह पद सी.पी. राधाकृष्णन के पास है।

    सुप्रीम कोर्ट की समयसीमा

    सुप्रीम कोर्ट ने 2023 में कहा था कि दल-बदल से जुड़े मामलों का निपटारा आदर्श रूप से तीन महीने में होना चाहिए, हालांकि इसके लिए कोई कानूनी समयसीमा तय नहीं है।
    कुल मिलाकर, राघव चड्ढा की राज्यसभा सदस्यता फिलहाल सुरक्षित मानी जा रही है। लेकिन यदि वह पार्टी छोड़ते हैं या विरोधी दल के साथ सक्रिय भूमिका निभाते हैं, तो दल-बदल कानून के तहत उनकी सीट पर खतरा बन सकता है।

  • दिग्विजय सिंह ने रिटायरमेंट प्लान पर साझा किया मजाकिया वीडियो, किसानों के लिए उठाई बासमती चावल की जीआई टैग की मांग

    दिग्विजय सिंह ने रिटायरमेंट प्लान पर साझा किया मजाकिया वीडियो, किसानों के लिए उठाई बासमती चावल की जीआई टैग की मांग


    भोपाल। मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह ने महिला दिवस के मौके पर आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में किसानों के मुद्दों पर केंद्र और राज्य सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि प्रदेश के किसानों के साथ लंबे समय से भेदभाव होता रहा है और विशेष रूप से मध्यप्रदेश में उगाए जाने वाले बासमती चावल को एपीडा से जीआई टैग नहीं दिया जा रहा। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर केंद्र सरकार जीआई टैग नहीं दिलाती है तो वे अनशन पर बैठने को भी तैयार हैं।

    दिग्विजय सिंह ने किसानों के हित में केंद्र सरकार को पत्र लिखने और संसद में उठाने के बावजूद कोई ठोस कदम नहीं उठाए जाने पर असंतोष जताया। उन्होंने बताया कि ग्वालियर-चंबल अंचल से लेकर मालवा और महाकौशल क्षेत्र तक लगभग 14 जिलों में किसान उच्च गुणवत्ता वाले बासमती चावल का उत्पादन कर रहे हैं, लेकिन जीआई टैग न मिलने के कारण उनका उत्पाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में उचित मूल्य नहीं पा रहा।

    पूर्व मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि वर्ष 2013 में तत्कालीन प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह की सरकार ने मध्यप्रदेश के बासमती चावल को जीआई टैग प्रदान किया था, लेकिन 2016 में वर्तमान केंद्र सरकार ने इसे वापस ले लिया। अब जम्मू-कश्मीर, पंजाब, हरियाणा, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश और दिल्ली के बासमती चावल को जीआई टैग मिल चुका है, लेकिन मध्यप्रदेश के किसानों को वंचित रखा गया।

    इस अवसर पर दिग्विजय सिंह ने अपने रिटायरमेंट प्लान पर भी बात की। उन्होंने फेसबुक पर साझा किए गए एक वीडियो का जिक्र किया जिसमें 62 वर्षीय सिबानंद भंजा और उनकी पत्नी बसबी भंजा बैंक से रिटायरमेंट लेने के बाद कार को घर बनाकर पूरे भारत की यात्रा पर निकले हैं। दिग्विजय ने मजाकिया अंदाज में कहा कि यह देखकर प्रेरणा मिली और रिटायरमेंट के बाद की योजना पर भी सोचा।

    पूर्व मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि वे राज्यसभा के सेकंड टर्म के बाद तीसरे टर्म के लिए नहीं जाएंगे, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि वे कांग्रेस के लिए काम नहीं करेंगे। उन्होंने कहा कि पार्टी का काम जीवन के अंतिम क्षण तक करेंगे, लेकिन आगे का निर्णय पार्टी नेतृत्व पर निर्भर करेगा।

    दिग्विजय सिंह ने यह भी कहा कि मध्यप्रदेश के बासमती किसानों को उचित मूल्य और अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने के लिए जीआई टैग बेहद जरूरी है, ताकि उनका उत्पाद पाकिस्तान और अन्य देशों के बासमती चावल के साथ प्रतिस्पर्धा कर सके।

    पूर्व मुख्यमंत्री ने जोर देकर कहा कि केंद्र और राज्य सरकार को अब तक किसानों के हित में ठोस कदम नहीं उठाना अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने सभी संबंधित अधिकारियों और मंत्री मंडल से अपील की कि मध्यप्रदेश के बासमती चावल को जल्द से जल्द जीआई टैग दिलवाया जाए और किसानों के आर्थिक नुकसान को रोका जाए।

  • दिग्विजय सिंह आज कर सकते हैं रिटायरमेंट का ऐलान: शाम 4 बजे भोपाल में प्रेस कॉन्फ्रेंस, राज्यसभा से पहले ही इनकार

    दिग्विजय सिंह आज कर सकते हैं रिटायरमेंट का ऐलान: शाम 4 बजे भोपाल में प्रेस कॉन्फ्रेंस, राज्यसभा से पहले ही इनकार



    भोपाल। मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह आज अपने रिटायरमेंट की घोषणा कर सकते हैं। दिग्विजय ने शाम 4 बजे भोपाल स्थित अपने सरकारी आवास पर प्रेस कॉन्फ्रेंस बुलाई है। तीन दिन पहले उन्होंने फेसबुक पर एक वीडियो शेयर किया था, जिसमें उन्होंने लिखा था, “मेरा रिटायरमेंट प्लान? शायद, क्यों नहीं…”।

    वीडियो में 62 वर्षीय सिबानंद भंजा और उनकी पत्नी बसबी भंजा को दिखाया गया है, जिन्होंने बैंक की नौकरी से रिटायर होने के बाद एक कार में यात्रा कर पूरे भारत का भ्रमण शुरू किया। दंपति ने अब तक 55 हजार किलोमीटर की यात्रा पूरी कर ली है और होटल के बजाय खुद भोजन बनाकर खाते हैं। दिग्विजय ने इस वीडियो के माध्यम से अपने रिटायरमेंट के अंदाज को दर्शाया।

    राज्यसभा चुनाव को लेकर भी दिग्विजय पहले ही साफ कर चुके हैं कि वे राज्यसभा की सीट लेने से इनकार कर चुके हैं। जून में उनका दूसरा कार्यकाल पूरा हो रहा है। उन्होंने कहा कि राज्यसभा जाने का विकल्प छोड़कर एमपी में कांग्रेस की स्थिति पर ध्यान केंद्रित करेंगे।

    इतिहास पर नजर डालें तो दिग्विजय सिंह 1993 से 2003 तक मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे, लेकिन 2003 में कांग्रेस की हार के बाद उन्होंने 10 साल तक चुनाव न लड़ने का संकल्प लिया। 2014 में वे राज्यसभा सदस्य बने और 2020 में दूसरी बार राज्यसभा सांसद चुने गए।

    आज की प्रेस कॉन्फ्रेंस में उनके रिटायरमेंट और भविष्य की योजनाओं का खुलासा होने की उम्मीद है, जिससे मध्य प्रदेश की राजनीति और कांग्रेस के रणनीतिक बदलाव पर नई बहस शुरू हो सकती है।

  • Elections : 10 राज्यों से राज्यसभा की 37 रिक्त सीटों के लिए 39 उम्मीदवार मैदान में…

    Elections : 10 राज्यों से राज्यसभा की 37 रिक्त सीटों के लिए 39 उम्मीदवार मैदान में…


    नई दिल्ली।
    देश के 10 राज्यों (10 States) से राज्यसभा (Rajya Sabha) की रिक्त 37 सीटों (37 Vacant Seats ) के लिए भारतीय जनता पार्टी (Bharatiya Janata Party- BJP) कांग्रेस समेत विभिन्न राजनीतिक दलों के 37 उम्मीदवारों ने गुरुवार को नामांकन दाखिल किए वहीं दो निर्दलीय उम्मीदवार ने भी अपनी नामांकन दाखिल कर अपनी दावेदारी पेश की है। दिलचस्प तथ्य यह भी है कि सीटों की संख्या के अनुरूप उम्मीदवारों के नामाकंन दाखिल होने से उनके निर्विरोध निर्वाचन तय माने जा रहे हैं।


    महाराष्ट्र

    महाराष्ट्र में राज्यसभा की सात सीटों पर चुनाव होने जा रहे हैं। भाजपा के नेतृत्व वाली महायुति गठबंधन ने चार उम्मीदवारों रामदास अठावले, विनोद तावड़े, माया वाघमारे और रामराव वडकुटे को मैदान में उतारा तो वहीं, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) की ओर से उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार और दिवंगत नेता अजित पवार के बेटे पार्थ पवार ने अपना नामांकन पत्र दाखिल किया है। सत्तारूढ़ गठबंधन में शामिल मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना ने पार्टी प्रवक्ता ज्योति वाघमारे को अपना एकमात्र उम्मीदवार घोषित किया है। दूसरी ओर विपक्षी महा विकास अघाड़ी गठबंधन ने दिग्गज नेता शरद पवार को अपना उम्मीदवार बनाया है। स्वास्थ्य कारणों से पवार विधानसभा नहीं पहुंच सके, लेकिन अधिकारियों ने उनके आवास पर जाकर नामांकन की औपचारिकताएं पूरी कीं। चूंकि राज्य में उपलब्ध सीटों और उम्मीदवारों की कुल संख्या अब बराबर है, इसलिए मतदान की आवश्यकता नहीं पड़ेगी और यह पूरी प्रक्रिया निर्विरोध संपन्न होगी।


    हरियाणा

    हरियाणा से दो सीटों के लिए भाजपा उम्मीदवार संजय भाटिया ने अपना नामांकन पत्र दाखिल किया। कांग्रेस ने इस चुनाव के लिए कर्मवीर सिंह बौद्ध को अपना प्रत्याशी बनाया है और यह उनका पहला चुनाव होगा। इस बीच निर्दलीय उम्मीदवार रोहतक के बोहर गांव निवासी सतीश नांदल ने भी तीसरे उम्मीदवार के रूप में नामांकन दाखिल कर चुनाव को त्रिकोणीय बना दिया है।


    हिमाचल प्रदेश

    हिमाचल प्रदेश से राज्यसभा की एक सीट के लिए कांग्रेस उम्मीदवार अनुराग शर्मा ने नामांकन दाखिल किया है। 68 सदस्यीय हिमाचल प्रदेश विधानसभा में कांग्रेस के पास आरामदायक बहुमत होने के कारण राज्यसभा के लिए शर्मा का निर्वाचन औपचारिकता मात्र होने की उम्मीद है, जब तक कि कोई अप्रत्याशित मुकाबला सामने न आये।


    तमिलनाडु

    तमिलनाडु से राज्यसभा की छह सीटों के लिये नामांकन के अंतिम दिन सभी छह उम्मीदवारों ने अपने पर्चे दाखिल कर दिए। इनमें सत्तारूढ़ दल के चार और विपक्ष के दो उम्मीदवार शामिल हैं। सत्तारूढ़ मोर्चे की ओर से एन. शिवा, प्रो. जे. कॉन्स्टेंटाइन रविंद्रन, क्रिस्टोफर तिलक और एल.के. सुदीश ने नामांकन दाखिल किया। वहीं विपक्षी गठबंधन की ओर से वर्तमान सांसद एम. थंबीदुरई और पीएमके नेता अम्बुमणि रामदास ने नामांकन दाखिल किया। 234 सदस्यीय तमिलनाडु विधानसभा में संख्या बल के आधार पर द्रमुक चार और अन्नाद्रमुक दो सीटें आसानी से जीत सकती है, जिसके कारण सभी छह उम्मीदवारों के निर्विरोध निर्वाचित होने की संभावना है।


    पश्चिम बंगाल

    पश्चिम बंगाल से राज्यसभा की पांच सीटों के लिए सत्तारुढ़ तृणमूल कांग्रेस के उम्मीदवार अभिनेता से नेता बने पूर्व केंद्रीय मंत्री बाबुल सुप्रियो, अभिनेत्री कोयल मल्लिक, पूर्व पुलिस महानिदेशक राजीव कुमार और वरिष्ठ अधिवक्ता मेनका गुरुस्वामी ने अपने नामांकन दखिल किए है। भाजपा उम्मीदवार राहुल सिन्हा ने भी अपना नामांकन दाखिल किया है।


    ओडिशा

    ओडिशा से राज्यसभा की चार सीटों के लिए सत्तारूढ़ भाजपा ने मनमोहन सामल और वर्तमान राज्यसभा सदस्य सुजीत कुमार को मैदान में उतारा है, जबकि बीजू जनता दल (बीजद) ने संत्रुप्ता मिश्रा और प्रसिद्ध यूरोलॉजिस्ट डॉ. दत्तेश्वर होता को उम्मीदवार बनाया है। इसके अलावा दिलीप रे भाजपा के समर्थन से निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़ रहे हैं। इन सभी उम्मीदवारों ने आज नामाकंन के अंतिम दिन अपने नामांकनपत्र दाखिल किए। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार असली मुकाबला डॉ दत्तेश्वर होता और दिलीप रे के बीच माना जा रहा है। रे ने नामांकन दाखिल करने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और भाजपा नेतृत्व का समर्थन देने के लिए आभार व्यक्त किया तथा राज्यसभा चुनाव में जीत का विश्वास जताया


    असम

    असम में तीन राज्यसभा सीटों के लिए विपक्ष की ओर से सर्वसम्मति से उम्मीदवार खड़ा करने में विफल रहने के कारण आगामी चुनावों में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) से तीनों नामांकित उम्मीदवारों का निर्विरोध चुना जाना तय है। कैबिनेट मंत्री जोगेन महान, भाजपा के पूर्व विधायक तेराश गोवाला और यूनाइटेड पीपुल्स पार्टी लिबरल (यूपीपीएल) के प्रमुख प्रमोद बोरो ने उच्च सदन के लिए अपना नामांकन दाखिल किया है। विपक्ष के किसी भी उम्मीदवार के मैदान में नहीं उतरने के कारण राजग के उम्मीदवारों के लिए चुनाव अब महज एक औपचारिकता बनकर रह गया है। उनकी निर्विरोध जीत से असम से राज्यसभा में राजग की मजबूत उपस्थिति एक बार फिर सुनिश्चित हो जाएगी।


    बिहार

    बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार समेत राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) की ओर से पांच उम्मीदवारों ने गुरुवार को राज्यसभा चुनाव के लिये नामांकन पत्र दाखिल किया। एनडीए की ओर से जनता दल यूनाईटेड (JDU) के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, मौजूदा राज्यसभा सदस्य रामनाथ ठाकुर, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन, शिवेश कुमार और राष्ट्रीय लोक मोर्चा (रालोमो) के राष्ट्रीय अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा ने नामांकन पत्र दाखिल किया।


    छत्तीसगढ़

    वहीं, छत्तीसगढ़ से राज्यसभा की दो सीटों के भाजपा उम्मीदवार लक्ष्मी वर्मा और कांग्रेस की मौजूदा राज्यसभा सदस्य फूलो देवी नेताम ने अपने नामांकन दाखिल किए हैं।

  • Maharashtra: सुनेत्रा पवार की जगह बेटे पार्थ को राज्यसभा भेजेगी NCP, आधी रात को लिया गया फैसला

    Maharashtra: सुनेत्रा पवार की जगह बेटे पार्थ को राज्यसभा भेजेगी NCP, आधी रात को लिया गया फैसला


    मुंबई।
    महाराष्ट्र (Maharashtra) की सात राज्यसभा सीटों पर होने वाले चुनाव (Rajya Sabha Election) से पहले राज्य की सियासत में हलचल तेज हो गई है। महायुति की सरकार में शामिल राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (Nationalist Congress Party- NCP) ने इस संबंध में अपने उम्मीदवार को लेकर बड़ा फैसला किया है। सूत्रों के अनुसार,सोमवार की रात प्रफुल्ल पटेल (Prafull Patel) के आवास पर पार्टी की कोर कमेटी की हुई बैठक में पार्थ पवार को राज्यसभा चुनाव में उम्मीदवार बनाने पर सहमति बनी है। इस अहम बैठक मुंबई में प्रफुल्ल पटेल के अलावा उप मुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार और प्रदेश अध्यक्ष सुनील तटकरे सहित कई वरिष्ठ नेता मौजूद थे।

    सूत्रों ने बताया कि बैठक में केवल राज्यसभा उम्मीदवार ही नहीं, बल्कि पार्टी की आगामी राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक की तैयारियों पर भी चर्चा हुई। 26 फरवरी को होने वाली इस बैठक में पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनाव पर मुहर लग सकती है, जहां सुनेत्रा पवार का नाम सबसे आगे माना जा रहा है। यह बैठक मुंबई के वर्ली डोम में आयोजित होने की संभावना है।


    बीजेपी कोर कमेटी की आज बैठक

    दूसरी ओर, भारतीय जनता पार्टी (BJP) भी अपने उम्मीदवारों को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया में जुटी हुई है। ABP माझा के मुताबिक, इसी सिलसिले में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के निवास पर मंगलवार की रात करीब 10 बजे कोर कमेटी की बैठक बुलाई गई है। पार्टी इस बार राज्यसभा की चार सीटों पर उम्मीदवार उतारने की तैयारी में है। इनमें रामदास अठावले का नाम लगभग तय माना जा रहा है, जबकि विनोद तावड़े, विजया रहाटकर और धैर्यशील पाटिल के नामों पर अंतिम निर्णय होना बाकी है।


    बीजेपी चार सांसद भेज सकती है

    महाराष्ट्र में इस बार राज्यसभा की 7 सीटें खाली हैं और 286 विधायकों के आधार पर एक उम्मीदवार को जीत के लिए 37 वोटों की जरूरत होगी। आंकड़ों के अनुसार, सत्तारूढ़ महायुति गठबंधन के पास स्पष्ट बढ़त है। अकेले BJP के पास एक निर्दलीय को मिलाकर कुल (131+1) यानी 132 विधायकों का समर्थन है, जिससे वह 3 से 4 सांसद आसानी से भेज सकती है। वहीं शिवसेना (शिंदे गुट) अपने 58 विधायकों के साथ एक सीट सुरक्षित कर सकती है, जबकि NCP (अजित पवार गुट) भी एक सीट जीतने की स्थिति में है क्योंकि अजित पवार की मौत के बाद उसके पास 40 विधायक हैं।


    महाविकास अघाड़ी के पास एक को भेजने की क्षमता

    इसके मुकाबले महाविकास अघाड़ी (MVA), जिसमें कांग्रेस, NCP (शरद पवार गुट) और शिवसेना (ठाकरे गुट) शामिल हैं, के पास कुल मिलाकर लगभग 49 विधायकों का समर्थन है। इस संख्या के आधार पर MVA केवल एक सीट ही सुरक्षित कर सकती है। राजनीतिक समीकरणों के हिसाब से महायुति गठबंधन 6 सीटों पर मजबूत स्थिति में नजर आ रहा है, जबकि विपक्षी गठबंधन को सीमित सफलता मिलने की संभावना है। ऐसे में राज्यसभा चुनाव 2026 में सत्ता पक्ष का पलड़ा भारी दिखाई दे रहा है, लेकिन उम्मीदवारों के चयन और अंतिम रणनीति पर सबकी नजरें टिकी हैं।

  • रूसी सेना में 200 से अधिक भारतीय नागरिक 26 की युद्ध में मौत विदेश मंत्रालय ने संसद में किया खुलासा

    रूसी सेना में 200 से अधिक भारतीय नागरिक 26 की युद्ध में मौत विदेश मंत्रालय ने संसद में किया खुलासा


    नई दिल्ली । रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध में एक चौंकाने वाला खुलासा हुआ है जिसमें भारत सरकार ने बताया कि 202 भारतीय नागरिकों को फरवरी 2022 में शुरू हुए इस युद्ध के दौरान रूसी सशस्त्र बलों में भर्ती किया गया था। विदेश मंत्रालय ने शुक्रवार को राज्यसभा में सांसदों के सवालों के जवाब में यह आंकड़ा प्रस्तुत किया।विदेश मंत्रालय के मुताबिक इस समय तक कुल 202 भारतीय नागरिकों ने रूसी सेना में शामिल होने के लिए आवेदन किया और उन्हें भर्ती किया गया। हालांकि भारतीय सरकार ने अपनी कूटनीतिक कार्रवाई के तहत 119 नागरिकों को समय से पहले छुट्टी दिलवाने में सफलता हासिल की है। यह जानकारी विदेश मंत्रालय ने राज्यसभा में सांसदों साकेत गोखले और रणदीप सिंह सुरजेवाला द्वारा पूछे गए प्रश्नों के लिखित उत्तर में दी।

    वहीं इस बयान में मंत्रालय ने यह भी बताया कि अब तक इस युद्ध में 26 भारतीय नागरिकों की मौत हो चुकी है। साथ ही सात भारतीय नागरिकों को रूस की सीमा क्षेत्र में लापता बताया गया है। इसके अलावा 50 भारतीय नागरिकों को रूस की सेना से रिहा कराने की कोशिशें जारी हैं। सरकार ने यह भी कहा कि 10 मृतकों के शवों को वापस लाने के प्रयास किए जा रहे हैं।विदेश मंत्रालय ने इस मुद्दे पर भारतीय नागरिकों की सुरक्षा और कल्याण को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए कहा कि भारतीय सरकार लगातार रूस के अधिकारियों के साथ संपर्क बनाए हुए है। दोनों देशों के नेताओं और मंत्रियों के स्तर पर इस मामले को लेकर बातचीत जारी है।

    वहीं मंत्रालय ने यह भी बताया कि जिन 18 भारतीयों की मौत या लापता होने की खबरें आई हैं उनके डीएनए नमूने रूस के अधिकारियों के साथ साझा किए गए हैं ताकि शवों की पहचान की जा सके और परिवारों तक सही जानकारी पहुंचाई जा सके।यह खुलासा उस समय हुआ है जब रूस ने 2022 में युद्ध की शुरुआत के बाद से 128 देशों में भर्ती अभियान तेज कर दिया था। रूस ने अपनी सेना को मजबूत करने के लिए दुनिया भर से सैनिकों की भर्ती शुरू की जिसमें भारतीय नागरिकों का भी शामिल होना बड़ा मुद्दा बना है। यूक्रेन-रूस युद्ध के परिणामस्वरूप अब तक अनुमानित 10 लाख से अधिक लोग मारे गए हैं या घायल हुए हैं।

    रूस के करीब 7 लाख 90 हजार सैनिकों के हताहत होने का अनुमान है जबकि लगभग 85 हजार सैनिक लापता बताए जा रहे हैं। इस युद्ध ने पूरी दुनिया में भारी संकट पैदा कर दिया है और रूस ने लगभग चार वर्षों में यूक्रेन के 12 प्रतिशत हिस्से पर कब्जा कर लिया है।भारत सरकार ने अपनी कूटनीतिक पहल जारी रखते हुए इस संघर्ष में फंसे भारतीय नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए रूस के साथ लगातार संपर्क बनाए रखा है। इसके अलावा सरकार ने नागरिकों को इस युद्ध के बारे में सतर्क रहने और ऐसे संघर्षों में न फंसे रहने की सलाह दी है। भारत सरकार की कोशिशें यह सुनिश्चित करने की हैं कि इस युद्ध में कोई भारतीय नागरिक अनावश्यक रूप से जोखिम में न पड़े और उनके परिवारों को पूरी जानकारी और सहायता समय पर मिल सके। 
  • वंदे मातरम् पर संसद में गरमाई बहस अमित शाह ने विपक्ष पर किए तीखे आरोप

    वंदे मातरम् पर संसद में गरमाई बहस अमित शाह ने विपक्ष पर किए तीखे आरोप

     
    नई दिल्ली । संसद के शीतकालीन सत्र के दौरान वंदे मातरम् पर जारी बहस ने मंगलवार को एक नया मोड़ लिया जब गृह मंत्री अमित शाह ने राज्यसभा में इस मुद्दे पर अपनी बात रखी। इस मुद्दे पर पहले रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने अपनी प्रतिक्रिया दी थी और अब अमित शाह ने विपक्ष पर तीखे आरोप लगाए। वंदे मातरम् पर संसद में चल रही यह बहस 9 दिसंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा लोकसभा में इसकी शुरुआत के बाद और भी तेज हो गई है।

    अमित शाह का बयान

    अमित शाह ने कहा कि वंदे मातरम् पर चर्चा की आवश्यकता तब भी थी जब यह रचना रची गई थी। उन्होंने जोर देकर कहा कि यह चर्चा आजादी के आंदोलन के दौरान भी जरूरी थी और आज भी यह जरूरी है। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि जब भारत 2047 में एक विकसित राष्ट्र बनेगा तब भी वंदे मातरम् पर चर्चा जारी रहेगी। शाह ने वंदे मातरम् के ऐतिहासिक पृष्ठभूमि पर बात करते हुए कहा कि यह रचना विदेशी आक्रमणों और सांस्कृतिक चुनौतियों के प्रतिकार के रूप में सामने आई थी।

    गृह मंत्री अमित शाह ने आगे कहा कि वंदे मातरम् को लेकर भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन के समय इसका एक बड़ा महत्व था। यह न केवल भारत के स्वतंत्रता संग्राम का प्रतीक बन चुका था बल्कि यह भारतीय संस्कृति और स्वाभिमान का भी प्रतीक था। उन्होंने विपक्ष को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि आज वंदे मातरम् को लेकर विवाद उठाना और इसके महत्व को कम करने की कोशिश करना भारतीयता और भारतीय संस्कृति को कमजोर करने जैसा है।

    नेहरू और इंदिरा गांधी पर बयान

    अमित शाह ने इस मुद्दे पर एक और ऐतिहासिक टिप्पणी करते हुए कहा नेहरू ने वंदे मातरम् के टुकड़े किए थे और इंदिरा गांधी ने इसके विरोध में खड़ा कर दिया था। उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी और उसके नेताओं ने हमेशा इस पर विवाद उठाया जबकि वंदे मातरम् ने भारतीय जनमानस को एकजुट किया और यह हर भारतीय का राष्ट्रीय गीत बन गया।

    शाह ने कांग्रेस पर आरोप लगाया कि वंदे मातरम् के खिलाफ राजनीति करना भारतीय संस्कृति और भारतीयता के खिलाफ है। उनका यह भी कहना था कि अगर कांग्रेस के नेताओं के विचार इस गीत के खिलाफ थे तो यह पार्टी की सोच का संकेत है कि वह भारतीय संस्कृति और राष्ट्रवाद को प्राथमिकता नहीं देती।

    विपक्ष पर अमित शाह के आरोप

    अमित शाह ने विपक्ष पर तीखा हमला करते हुए कहा कि जो लोग वंदे मातरम् के खिलाफ बोलते हैं वे दरअसल भारतीय संस्कृति और राष्ट्रवाद का अपमान कर रहे हैं। उनका कहना था कि यह गीत हर भारतीय के दिल में गूंजता है और यह केवल एक गीत नहीं बल्कि भारत की स्वतंत्रता एकता और अखंडता का प्रतीक है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल इस गीत का विरोध कर राजनीति कर रहे हैं और अपनी वोट बैंक की राजनीति के लिए इसे सांप्रदायिक रंग देने की कोशिश कर रहे हैं।

    राजनीतिक हलचल और संसद में गहमागहमी

    वंदे मातरम् पर संसद में चली यह बहस अब एक बड़े राजनीतिक विवाद का रूप ले चुकी है। यह मामला केवल एक गीत का नहीं बल्कि भारतीयता संस्कृति और राष्ट्रवाद से जुड़ा हुआ है। अमित शाह के बयान ने विपक्ष को चुप्प रहने की चुनौती दी है वहीं विपक्ष ने इस पर अपनी प्रतिक्रियाएं भी दी हैं। विपक्ष के नेताओं का कहना है कि वंदे मातरम् को लेकर किसी भी तरह की राजनीति नहीं की जानी चाहिए। उनका मानना है कि यह गीत सभी भारतीयों के लिए समान रूप से महत्वपूर्ण है और इसे किसी विशेष पार्टी या विचारधारा से जोड़कर नहीं देखना चाहिए।

    वंदे मातरम् पर यह बहस अब केवल एक गीत तक सीमित नहीं रही बल्कि यह भारतीय संस्कृति राष्ट्रीय एकता और राजनीति से जुड़ा हुआ मुद्दा बन गया है। जहां एक ओर अमित शाह और उनकी पार्टी इस मुद्दे को भारतीयता के प्रतीक के रूप में प्रस्तुत कर रहे हैं वहीं विपक्ष इसे राजनीति से जोड़ते हुए इसे विवादित बना रहे हैं। आने वाले दिनों में यह मुद्दा संसद के भीतर और बाहर भी चर्चा का विषय बना रहेगा और इस पर अधिक राजनीतिक बयानबाजी की संभावना है।