Tag: Rajya Sabha

  • महिला आरक्षण पर राहुल गांधी ने सरकार को घेरा, कहा- यह असली वुमन बिल नहीं, दादी इंदिरा का किया जिक्र

    महिला आरक्षण पर राहुल गांधी ने सरकार को घेरा, कहा- यह असली वुमन बिल नहीं, दादी इंदिरा का किया जिक्र

    नई दिल्ली। संसद के विशेष सत्र के दूसरे दिन लोकसभा में बोलते हुए कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने महिला आरक्षण मुद्दे पर अपनी बात रखते हुए एक निजी अनुभव साझा किया और सरकार पर सवाल उठाए। उन्होंने अपनी दादी और पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी को याद करते हुए कहा कि उन्होंने उन्हें बचपन में डर का सामना करना सिखाया था।

    सुनाया बचपन का किस्सा

    राहुल गांधी ने बताया कि बचपन में एक बार उनकी दादी उन्हें घर से बाहर ले गईं और कुछ समय के लिए अकेला छोड़ दिया। वहां मौजूद कुत्तों और लोगों के कारण वे डर गए थे। जब इंदिरा गांधी वापस आईं और उन्होंने अपनी परेशानी बताई तो उन्होंने समझाया कि डर असल में उनके मन में था। राहुल ने कहा कि इस अनुभव ने उन्हें जिंदगी में डर से लड़ना सिखाया।

    महिलाओं से हर कोई सीखता है

    अपने संबोधन में राहुल गांधी ने कहा कि हर व्यक्ति अपने जीवन में महिलाओं से सीखता है चाहे वह मां हो बहन हो या अन्य कोई भूमिका। उन्होंने यह भी कहा कि सच्चाई कड़वी होती है लेकिन उसका सामना करना जरूरी है। हालांकि उन्होंने मौजूदा महिला आरक्षण विधेयक पर सवाल उठाते हुए कहा कि यह वास्तव में महिलाओं के हितों का बिल नहीं है।

    विधेयक की मंशा पर उठाए सवाल

    राहुल गांधी ने कहा कि 2023 में पारित महिला आरक्षण बिल को लेकर सत्ता पक्ष के सहयोगियों ने संकेत दिया था कि इसे 10 साल बाद लागू किया जा सकता है। उनके अनुसार यह महिलाओं को तत्काल लाभ देने वाला कदम नहीं है।

    चुनावी नक्शा बदलने की कोशिश

    कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि देश के इलेक्टोरल मैप को बदलने की कोशिश की जा रही है जो महिला आरक्षण के मूल मुद्दे से अलग है। उन्होंने कहा कि यह एक बड़ा राजनीतिक सवाल है जिसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

    जाति जनगणना का भी उठाया मुद्दा

    लोकसभा में अपने भाषण के दौरान राहुल गांधी ने जाति जनगणना को लेकर भी सरकार से स्पष्ट जवाब मांगा। उन्होंने कहा कि गृह मंत्री ने इस पर बात तो की लेकिन यह स्पष्ट नहीं किया कि इसके आंकड़ों का उपयोग आरक्षण तय करने में होगा या नहीं। उन्होंने कहा कि अगर सरकार वास्तविक प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करती है तो कांग्रेस इसका पूरा समर्थन करेगी।

    सरकार पर डर की राजनीति का आरोप

    राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि सरकार डर की राजनीति कर रही है और देश की राजनीतिक संरचना को बदलने की कोशिश हो रही है। उन्होंने कहा कि छोटे राज्यों को उनकी राजनीतिक हिस्सेदारी कम होने का संकेत दिया जा रहा है जिसे विपक्ष स्वीकार नहीं करेगा। साथ ही उन्होंने कहा कि दलित और ओबीसी समुदायों को पर्याप्त राजनीतिक प्रतिनिधित्व नहीं मिल रहा है। राहुल गांधी ने अंत में कहा कि उनकी पार्टी देश के लोगों के प्रतिनिधित्व से कोई समझौता नहीं करेगी। उन्होंने भरोसा दिलाया कि किसी भी वर्ग के अधिकारों पर आंच नहीं आने दी जाएगी और हर हमले का मजबूती से विरोध किया जाएगा।

  • चंद्रशेखर जयंती के विशेष संयोग ने इस राजनीतिक घटनाक्रम को और अधिक महत्वपूर्ण बना दिया..

    चंद्रशेखर जयंती के विशेष संयोग ने इस राजनीतिक घटनाक्रम को और अधिक महत्वपूर्ण बना दिया..

    नई दिल्ली:चंद्रशेखर जयंती पर हरिवंश नारायण सिंह का राज्यसभा उपसभापति के रूप में तीसरी बार चयन, प्रधानमंत्री ने अनुभव और संतुलन की भूमिका को बताया लोकतांत्रिक मजबूती का आधार
    राज्यसभा में शुक्रवार का दिन संसदीय कार्यवाही के लिहाज से महत्वपूर्ण रहा, जब हरिवंश नारायण सिंह को लगातार तीसरी बार उपसभापति के रूप में चुना गया। सदन में इस निर्णय को व्यापक समर्थन मिला और उनके चयन को अनुभव, संतुलन और संसदीय परंपराओं के प्रति भरोसे की निरंतरता के रूप में देखा गया। इस अवसर पर प्रधानमंत्री ने उन्हें बधाई देते हुए कहा कि यह उपलब्धि केवल एक पद का दोहराव नहीं है, बल्कि सदन के प्रति उनके लंबे अनुभव और प्रभावी कार्यशैली की स्वीकृति है।

    प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि हरिवंश नारायण सिंह ने बीते वर्षों में राज्यसभा की कार्यवाही को सुचारु और संतुलित बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उन्होंने कहा कि विभिन्न राजनीतिक विचारधाराओं के बीच संतुलन स्थापित करना और सदन की गरिमा को बनाए रखना एक कठिन कार्य है, जिसे उन्होंने अपने धैर्य और समझदारी से निभाया है। उनके अनुसार, उनकी कार्यशैली ने सदन में संवाद और अनुशासन दोनों को मजबूत किया है।

    प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि हरिवंश नारायण सिंह का जीवन अनुभव और सामाजिक जुड़ाव सदन की कार्यवाही को अधिक समृद्ध बनाता है। उन्होंने ग्रामीण पृष्ठभूमि से निकलकर शिक्षा और पत्रकारिता के क्षेत्र में कार्य किया और बाद में संसदीय जिम्मेदारी संभालते हुए लोकतांत्रिक प्रक्रिया में महत्वपूर्ण योगदान दिया। उनका अनुभव सदन की चर्चाओं को अधिक गहराई और संतुलन प्रदान करता है।

    इस अवसर पर प्रधानमंत्री ने एक विशेष संयोग का उल्लेख करते हुए कहा कि जिस दिन हरिवंश नारायण सिंह को तीसरी बार यह जिम्मेदारी मिली, उसी दिन देश के पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर की जयंती भी है। उन्होंने बताया कि हरिवंश का चंद्रशेखर के साथ गहरा संबंध रहा है और वे उनके विचारों और कार्यों से जुड़े रहे हैं। यह संयोग इस अवसर को और भी महत्वपूर्ण बना देता है।

    प्रधानमंत्री ने आगे कहा कि हरिवंश नारायण सिंह का जीवन सामाजिक चेतना और जनसेवा से प्रेरित रहा है। शिक्षा के दौरान काशी में उनका अध्ययन उनके व्यक्तित्व निर्माण में महत्वपूर्ण रहा। ग्रामीण परिवेश से आने के कारण उन्होंने समाज की वास्तविकताओं को करीब से समझा, जिसका प्रभाव उनके सार्वजनिक जीवन में स्पष्ट रूप से दिखाई देता है।

    उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि पिछले कुछ वर्षों में हरिवंश ने देशभर के शैक्षणिक संस्थानों में संवाद कार्यक्रमों में सक्रिय भागीदारी निभाई है। यह प्रयास युवाओं और नीति निर्माण की दुनिया के बीच एक सेतु का कार्य करता है और लोकतांत्रिक संवाद को और मजबूत बनाता है।

    राज्यसभा में उनके पुनर्निर्वाचन को लेकर विभिन्न सदस्यों ने भी सकारात्मक प्रतिक्रिया व्यक्त की। सदन में यह माना गया कि अनुभवी नेतृत्व संसदीय कार्यवाही को अधिक प्रभावी और संतुलित बनाता है। उनके चयन को निरंतरता और स्थिरता के प्रतीक के रूप में देखा जा रहा है।

  • राज्यसभा डिप्टी लीडर बने Ashok Mittal पर ED की कार्रवाई

    राज्यसभा डिप्टी लीडर बने Ashok Mittal पर ED की कार्रवाई


    नई दिल्ली।  आम आदमी पार्टी (AAP) के राज्यसभा सांसद Ashok Mittal के घर पर प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने छापेमारी की है। यह कार्रवाई पंजाब के जालंधर स्थित उनके आवास पर की जा रही है, जहां जांच एजेंसी की टीम सुबह से ही मौजूद है।

    दस्तावेज और इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस खंगाले जा रहे
    सूत्रों के मुताबिक, ED की टीम मित्तल के घर पर दस्तावेजों और इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस की जांच कर रही है। हालांकि अभी तक यह साफ नहीं हुआ है कि यह कार्रवाई किस मामले में की जा रही है। Ashok Mittal हाल ही में चर्चा में आए थे, जब AAP ने Raghav Chadha की जगह उन्हें राज्यसभा में डिप्टी लीडर बनाया था। ऐसे में उनकी नियुक्ति के तुरंत बाद हुई यह कार्रवाई राजनीतिक रूप से अहम मानी जा रही है।

    व्यवसाय से शिक्षा तक का सफर
    अशोक मित्तल का जन्म जालंधर में हुआ था। उनके परिवार ने ‘लवली स्वीट्स’ नाम से मिठाई का कारोबार शुरू किया था, जिसे उन्होंने आगे बढ़ाया। बाद में उन्होंने 2005 में Lovely Professional University की स्थापना की, जो आज देश की बड़ी निजी यूनिवर्सिटीज में शामिल है। इस छापेमारी के बाद राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है। हालांकि AAP की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है, लेकिन पार्टी पहले भी केंद्रीय एजेंसियों के दुरुपयोग के आरोप लगाती रही है। फिलहाल ED की कार्रवाई जारी है और आने वाले समय में इस मामले में और जानकारी सामने आने की संभावना है।

  • Rajya Sabha: हरिवंश फिर बनाए जा सकते हैं उपसभापति… सरकार कर रही विचार… विपक्ष ने जताई आपत्ति

    Rajya Sabha: हरिवंश फिर बनाए जा सकते हैं उपसभापति… सरकार कर रही विचार… विपक्ष ने जताई आपत्ति


    नई दिल्ली।
    राज्यसभा (Rajya Sabha) के अपने पिछले कार्यकाल में उच्च सदन के उपसभापति (Deputy Speaker) रहे हरिवंश (Harivansh) को फिर से यह मौका मिल सकता है। सरकार की ओर से इस पर विचार चल रहा है। उनका पिछला कार्यकाल 9 अप्रैल को समाप्त हुआ था और 10 तारीख को उन्हें मनोनीत सांसद के तौर पर शपथ दिलाई गई थी। पहले वह जेडीयू (JDU) की ओर से लगातार दूसरी बार राज्यसभा के सांसद थे, लेकिन इस बार उन्हें मौका नहीं मिला था। वहीं सत्ता पक्ष की ओर से उन्हें मनोनीत सांसद के तौर पर सदन में भेजा गया है। अब उन्हें फिर से उपसभापति की भूमिका देने की तैयारी है और इस पर विपक्ष (Opposition) ने आपत्ति भी जाहिर कर दी है।

    केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने राज्यसभा के उपसभापति के चुनाव के लिए विपक्षी नेताओं से बात की थी। उनकी ओर से कहा गया था कि हरिवंश को फिर से उपसभापति बनाया जाए। इसी को लेकर नड्डा ने विपक्षी दलों से बात की थी, लेकिन उनकी ओर से इसे लेकर असहमति जाहिर की गई है। सूत्रों का कहना है कि कांग्रेस, टीएमसी और कुछ लेफ्ट दलों ने कहा है कि हम इस पर सहमत नहीं है। ऐसे में हरिवंश का सर्वसम्मति से सदन में पहुंचना मुश्किल दिख रहा है। विपक्षी दलों का कहना है कि लोकसभा में डिप्टी स्पीकर का पद लंबे समय से खाली है। सरकार उसे भरने पर विचार नहीं कर रही है। ऐसे में राज्यसभा के डिप्टी स्पीकर को लेकर इतनी जल्दी क्यों दिखा रही है।

    लोकसभा में डिप्टी स्पीकर का पद 2019 से ही रिक्त है। अब तक डिप्टी चेयरमैन का पद भरने के लिए कोई आधिकारिक नोटिफिकेशन जारी नहीं किया गया है। सूत्रों का कहना है कि यह प्रक्रिया सदन में तीन दिनों के विशेष सत्र के दौरान की जा सकती है। तब दोनों सदनों की बैठक होगी। इस सत्र का मुख्य उद्देश्य महिला आरक्षण संशोधन विधेयक को पारित कराना है। इसी दौरान राज्यसभा के डिप्टी स्पीकर का फैसला हो सकता है। सर्वसम्मति ना बनने की स्थिति में चुनाव भी कराया जा सकता है। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश का कहना है कि सरकार डिप्टी स्पीकर के पद के चुनाव को जबरदस्ती करना चाहती है।

    विपक्ष बोला- लोकसभा में तो यह पद 7 साल से खाली, यहां क्यों जल्दी
    उन्होंने कहा कि इस सरकार ने लोकसभा में डिप्टी स्पीकर के पद के लिए 7 सालों से कोई प्रयास नहीं किया है। यह पद खाली ही पड़ा है। लेकिन आखिर राज्यसभा में डिप्टी स्पीकर का पद 4 दिन के अंदर ही भरने की इतनी क्या जल्दी है। वहीं टीएमसी के नेता डेरेक ओ ब्रायन ने कहा कि सरकार चाहती है कि डिप्टी स्पीकर पद का चुनाव 17 अप्रैल को ही हो जाए। उन्होंने कहा कि यह तो संसद का मजाक बनाने की कोशिश है। डेरेक ने कहा कि लोकसभा में डिप्टी स्पीकर का पद 2019 से खाली है। फिर राज्यसभा को लेकर भाजपा इतनी जल्दबाजी में क्यों है।

  • 10 अप्रैल को राज्यसभा सदस्य की शपथ लेंगे नीतीश कुमार…. बिहार में नई सरकार गठन की कवायद तेज

    10 अप्रैल को राज्यसभा सदस्य की शपथ लेंगे नीतीश कुमार…. बिहार में नई सरकार गठन की कवायद तेज


    पटना।
    बिहार (Bihar) के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार (Chief Minister Nitish Kumar) 10 अप्रैल को राज्यसभा सदस्य के रूप में शपथ लेंगे। जदयू के विश्वस्त सूत्रों के मुताबिक मुख्यमंत्री तीन दिवसीय दौरे पर 9 अप्रैल की दोपहर दिल्ली रवाना होंगे। शुक्रवार को शपथ लेने के बाद शनिवार 11 अप्रैल को पटना वापस आएंगे। दिल्ली में प्रधानमंत्री और गृहमंत्री (Prime Minister and Home Minister) से भी उनकी मुलाकात हो सकती है।

    नीतीश कुमार के पटना वापसी के साथ ही बिहार में भाजपा के नेतृत्व में नई सरकार के गठन की कवायद तेज हो जाएगी। इसके बाद किसी भी दिन नीतीश मुख्यमंत्री की कुर्सी छोड़ सकते हैं। एनडीए के दलों में यह आपसी साझेदारी बन चुकी है कि अगला मुख्यमंत्री भाजपा का होगा। सरकार में जदयू की मौजूदगी भी दमदार रहेगी तथा इस पार्टी से राज्य को उप मुख्यमंत्री मिलेगा। यह दोनों बातें पहली बार होगी।

    नीतीश कुमार बतौर राज्यसभा सदस्य शपथ लेकर पटना वापसी पर किसी दिन एनडीए विधानमंडल दल की बैठक बुला सकते हैं और इस बैठक में वह सीएम पद छोड़ने की जानकारी आधिकारिक तौर पर विधायकों को देंगे। फिर राज्यपाल को इस्तीफा सौंपेंगे। नई सरकार के गठन को पहले एनडीए के सभी घटक दलों के विधायक दल की अलग-अलग बैठकों में नेता चुने जाएंगे।

    फिर एनडीए विधानमंडल दल के नेता की घोषणा संयुक्त बैठक में होगी। नए नेता सरकार गठन का प्रस्ताव राज्यपाल को सौंपेंगे। एनडीए के दलों में हो रही चर्चा के मुताबिक 15 अप्रैल के बाद ही नई सरकार अस्तित्व में आएगी। पद छोड़ने के पहले सीएम की अध्यक्षता में राज्य मंत्रिमंडल की बैठक होने के भी आसार हैं, जिसमें कई महत्वपूर्ण फैसले लिए जा सकते हैं।


    कौन बनेगा बिहार का सीएम?

    अब भले ही बिहार में नई सरकार बनने का प्रोग्राम सेट हो गया हो लेकर राज्य का अगला मुख्यमंत्री कौन होगा इसपर अभी सस्पेंस बरकरार है। सीएम की रेस में सम्राट चौधरी का नाम अभी सबसे आगे चल रहा है। मौजूदा डिप्टी सीएम विजय सिन्हा ने हाल ही में यह कर सम्राट चौधरी की राह और भी आसान कर दी थी कि वो सीएम की रेस में नहीं हैं बल्कि वो सेवक की रेस में हैं। हालांकि, बिहार के नए मुख्यमंत्री को लेकर अभी बीजेपी ने चुप्पी साध रखी है। पार्टी नेता लगातार यह कह रहे हैं कि एनडीए की बैठक में बिहार के नए सीएम का नाम तय किया जाएगा। इधऱ डिप्टी सीएम की रेस में नीतीश कुमार के बेटे निशांत का नाम है। हालांकि, सीएम और डिप्टी सीएम के नामों को लेकर यह सिर्फ कयासबाजी है अभी इसपर आधिकारिक तौर से कुछ भी साफ नहीं किया गया है।

  • क्या बीजेपी में जाएंगे राघव चड्ढा? राज्यसभा सीट पर भी उठे सवाल, जानें क्या कहते हैं नियम

    क्या बीजेपी में जाएंगे राघव चड्ढा? राज्यसभा सीट पर भी उठे सवाल, जानें क्या कहते हैं नियम

    नई दिल्ली। राघव चड्ढा और आम आदमी पार्टी के बीच बढ़ती खींचतान के बीच उनकी राजनीतिक भविष्य को लेकर अटकलें तेज हो गई हैं। पार्टी ने उन्हें राज्यसभा में उपनेता पद से हटा दिया है और आरोप लगाया है कि वह संसद में नरेंद्र मोदी सरकार के खिलाफ मुखर नहीं हो रहे। साथ ही पार्टी ने राज्यसभा सचिवालय से यह भी कहा है कि उन्हें पार्टी कोटे से बोलने का समय न दिया जाए।

    इसी बीच उनके भारतीय जनता पार्टी में जाने की चर्चाएं तेज हो गई हैं।

    मोदी विरोधी पोस्ट हटाने का दावा

    दिल्ली AAP प्रमुख सौरभ भारद्वाज ने दावा किया कि राघव चड्ढा ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट से प्रधानमंत्री मोदी और बीजेपी की आलोचना वाले पुराने पोस्ट हटा दिए हैं। इसके बाद उनके राजनीतिक रुख को लेकर सवाल और गहरे हो गए।

    क्या बीजेपी में शामिल होंगे?

    इस पूरे विवाद के बाद दो बड़े सवाल उठ रहे हैं—क्या राघव चड्ढा बीजेपी में जाएंगे और यदि ऐसा होता है तो उनकी राज्यसभा सदस्यता पर क्या असर पड़ेगा? फिलहाल दोनों सवालों पर कोई स्पष्ट जवाब सामने नहीं आया है।

    दिल्ली बीजेपी अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि अपना राजनीतिक भविष्य तय करना राघव चड्ढा के हाथ में है। इसे बीजेपी की ओर से “दरवाजे खुले” रखने के संकेत के रूप में देखा जा रहा है, हालांकि पार्टी ने औपचारिक तौर पर कोई प्रस्ताव नहीं दिया है।

    क्या सुरक्षित है राज्यसभा सीट?

    राघव चड्ढा का राज्यसभा कार्यकाल 2028 तक है। ऐसे में पार्टी उन्हें सीधे तौर पर सांसद पद से नहीं हटा सकती। पार्टी केवल संगठनात्मक पदों से हटाने का अधिकार रखती है, जो किया जा चुका है।

    कब जा सकती है सदस्यता?

    संविधान की दसवीं अनुसूची (दल-बदल विरोधी कानून) के तहत किसी सांसद की सदस्यता दो स्थितियों में जा सकती है—

    यदि वह स्वेच्छा से पार्टी छोड़ दे।
    यदि वह सदन में पार्टी के व्हिप का उल्लंघन करे।

    अदालतों ने यह भी माना है कि केवल औपचारिक इस्तीफा जरूरी नहीं होता, बल्कि किसी दूसरी पार्टी के समर्थन में सार्वजनिक गतिविधियां भी “स्वेच्छा से पार्टी छोड़ने” का संकेत मानी जा सकती हैं।

    पहले भी हो चुका है ऐसा मामला

    2017 में शरद यादव और अली अनवर को राज्यसभा से अयोग्य घोषित किया गया था। जनता दल (यूनाइटेड) ने उनके विपक्षी कार्यक्रमों में शामिल होने को दल-बदल का आधार बनाया था।

    अंतिम फैसला किसके पास?

    किसी सांसद की सदस्यता खत्म करने का अधिकार राज्यसभा के सभापति के पास होता है, जो देश के उपराष्ट्रपति होते हैं। वर्तमान में यह पद सी.पी. राधाकृष्णन के पास है।

    सुप्रीम कोर्ट की समयसीमा

    सुप्रीम कोर्ट ने 2023 में कहा था कि दल-बदल से जुड़े मामलों का निपटारा आदर्श रूप से तीन महीने में होना चाहिए, हालांकि इसके लिए कोई कानूनी समयसीमा तय नहीं है।
    कुल मिलाकर, राघव चड्ढा की राज्यसभा सदस्यता फिलहाल सुरक्षित मानी जा रही है। लेकिन यदि वह पार्टी छोड़ते हैं या विरोधी दल के साथ सक्रिय भूमिका निभाते हैं, तो दल-बदल कानून के तहत उनकी सीट पर खतरा बन सकता है।

  • दिग्विजय सिंह ने रिटायरमेंट प्लान पर साझा किया मजाकिया वीडियो, किसानों के लिए उठाई बासमती चावल की जीआई टैग की मांग

    दिग्विजय सिंह ने रिटायरमेंट प्लान पर साझा किया मजाकिया वीडियो, किसानों के लिए उठाई बासमती चावल की जीआई टैग की मांग


    भोपाल। मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह ने महिला दिवस के मौके पर आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में किसानों के मुद्दों पर केंद्र और राज्य सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि प्रदेश के किसानों के साथ लंबे समय से भेदभाव होता रहा है और विशेष रूप से मध्यप्रदेश में उगाए जाने वाले बासमती चावल को एपीडा से जीआई टैग नहीं दिया जा रहा। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर केंद्र सरकार जीआई टैग नहीं दिलाती है तो वे अनशन पर बैठने को भी तैयार हैं।

    दिग्विजय सिंह ने किसानों के हित में केंद्र सरकार को पत्र लिखने और संसद में उठाने के बावजूद कोई ठोस कदम नहीं उठाए जाने पर असंतोष जताया। उन्होंने बताया कि ग्वालियर-चंबल अंचल से लेकर मालवा और महाकौशल क्षेत्र तक लगभग 14 जिलों में किसान उच्च गुणवत्ता वाले बासमती चावल का उत्पादन कर रहे हैं, लेकिन जीआई टैग न मिलने के कारण उनका उत्पाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में उचित मूल्य नहीं पा रहा।

    पूर्व मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि वर्ष 2013 में तत्कालीन प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह की सरकार ने मध्यप्रदेश के बासमती चावल को जीआई टैग प्रदान किया था, लेकिन 2016 में वर्तमान केंद्र सरकार ने इसे वापस ले लिया। अब जम्मू-कश्मीर, पंजाब, हरियाणा, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश और दिल्ली के बासमती चावल को जीआई टैग मिल चुका है, लेकिन मध्यप्रदेश के किसानों को वंचित रखा गया।

    इस अवसर पर दिग्विजय सिंह ने अपने रिटायरमेंट प्लान पर भी बात की। उन्होंने फेसबुक पर साझा किए गए एक वीडियो का जिक्र किया जिसमें 62 वर्षीय सिबानंद भंजा और उनकी पत्नी बसबी भंजा बैंक से रिटायरमेंट लेने के बाद कार को घर बनाकर पूरे भारत की यात्रा पर निकले हैं। दिग्विजय ने मजाकिया अंदाज में कहा कि यह देखकर प्रेरणा मिली और रिटायरमेंट के बाद की योजना पर भी सोचा।

    पूर्व मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि वे राज्यसभा के सेकंड टर्म के बाद तीसरे टर्म के लिए नहीं जाएंगे, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि वे कांग्रेस के लिए काम नहीं करेंगे। उन्होंने कहा कि पार्टी का काम जीवन के अंतिम क्षण तक करेंगे, लेकिन आगे का निर्णय पार्टी नेतृत्व पर निर्भर करेगा।

    दिग्विजय सिंह ने यह भी कहा कि मध्यप्रदेश के बासमती किसानों को उचित मूल्य और अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने के लिए जीआई टैग बेहद जरूरी है, ताकि उनका उत्पाद पाकिस्तान और अन्य देशों के बासमती चावल के साथ प्रतिस्पर्धा कर सके।

    पूर्व मुख्यमंत्री ने जोर देकर कहा कि केंद्र और राज्य सरकार को अब तक किसानों के हित में ठोस कदम नहीं उठाना अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने सभी संबंधित अधिकारियों और मंत्री मंडल से अपील की कि मध्यप्रदेश के बासमती चावल को जल्द से जल्द जीआई टैग दिलवाया जाए और किसानों के आर्थिक नुकसान को रोका जाए।

  • दिग्विजय सिंह आज कर सकते हैं रिटायरमेंट का ऐलान: शाम 4 बजे भोपाल में प्रेस कॉन्फ्रेंस, राज्यसभा से पहले ही इनकार

    दिग्विजय सिंह आज कर सकते हैं रिटायरमेंट का ऐलान: शाम 4 बजे भोपाल में प्रेस कॉन्फ्रेंस, राज्यसभा से पहले ही इनकार



    भोपाल। मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह आज अपने रिटायरमेंट की घोषणा कर सकते हैं। दिग्विजय ने शाम 4 बजे भोपाल स्थित अपने सरकारी आवास पर प्रेस कॉन्फ्रेंस बुलाई है। तीन दिन पहले उन्होंने फेसबुक पर एक वीडियो शेयर किया था, जिसमें उन्होंने लिखा था, “मेरा रिटायरमेंट प्लान? शायद, क्यों नहीं…”।

    वीडियो में 62 वर्षीय सिबानंद भंजा और उनकी पत्नी बसबी भंजा को दिखाया गया है, जिन्होंने बैंक की नौकरी से रिटायर होने के बाद एक कार में यात्रा कर पूरे भारत का भ्रमण शुरू किया। दंपति ने अब तक 55 हजार किलोमीटर की यात्रा पूरी कर ली है और होटल के बजाय खुद भोजन बनाकर खाते हैं। दिग्विजय ने इस वीडियो के माध्यम से अपने रिटायरमेंट के अंदाज को दर्शाया।

    राज्यसभा चुनाव को लेकर भी दिग्विजय पहले ही साफ कर चुके हैं कि वे राज्यसभा की सीट लेने से इनकार कर चुके हैं। जून में उनका दूसरा कार्यकाल पूरा हो रहा है। उन्होंने कहा कि राज्यसभा जाने का विकल्प छोड़कर एमपी में कांग्रेस की स्थिति पर ध्यान केंद्रित करेंगे।

    इतिहास पर नजर डालें तो दिग्विजय सिंह 1993 से 2003 तक मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे, लेकिन 2003 में कांग्रेस की हार के बाद उन्होंने 10 साल तक चुनाव न लड़ने का संकल्प लिया। 2014 में वे राज्यसभा सदस्य बने और 2020 में दूसरी बार राज्यसभा सांसद चुने गए।

    आज की प्रेस कॉन्फ्रेंस में उनके रिटायरमेंट और भविष्य की योजनाओं का खुलासा होने की उम्मीद है, जिससे मध्य प्रदेश की राजनीति और कांग्रेस के रणनीतिक बदलाव पर नई बहस शुरू हो सकती है।

  • Elections : 10 राज्यों से राज्यसभा की 37 रिक्त सीटों के लिए 39 उम्मीदवार मैदान में…

    Elections : 10 राज्यों से राज्यसभा की 37 रिक्त सीटों के लिए 39 उम्मीदवार मैदान में…


    नई दिल्ली।
    देश के 10 राज्यों (10 States) से राज्यसभा (Rajya Sabha) की रिक्त 37 सीटों (37 Vacant Seats ) के लिए भारतीय जनता पार्टी (Bharatiya Janata Party- BJP) कांग्रेस समेत विभिन्न राजनीतिक दलों के 37 उम्मीदवारों ने गुरुवार को नामांकन दाखिल किए वहीं दो निर्दलीय उम्मीदवार ने भी अपनी नामांकन दाखिल कर अपनी दावेदारी पेश की है। दिलचस्प तथ्य यह भी है कि सीटों की संख्या के अनुरूप उम्मीदवारों के नामाकंन दाखिल होने से उनके निर्विरोध निर्वाचन तय माने जा रहे हैं।


    महाराष्ट्र

    महाराष्ट्र में राज्यसभा की सात सीटों पर चुनाव होने जा रहे हैं। भाजपा के नेतृत्व वाली महायुति गठबंधन ने चार उम्मीदवारों रामदास अठावले, विनोद तावड़े, माया वाघमारे और रामराव वडकुटे को मैदान में उतारा तो वहीं, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) की ओर से उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार और दिवंगत नेता अजित पवार के बेटे पार्थ पवार ने अपना नामांकन पत्र दाखिल किया है। सत्तारूढ़ गठबंधन में शामिल मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना ने पार्टी प्रवक्ता ज्योति वाघमारे को अपना एकमात्र उम्मीदवार घोषित किया है। दूसरी ओर विपक्षी महा विकास अघाड़ी गठबंधन ने दिग्गज नेता शरद पवार को अपना उम्मीदवार बनाया है। स्वास्थ्य कारणों से पवार विधानसभा नहीं पहुंच सके, लेकिन अधिकारियों ने उनके आवास पर जाकर नामांकन की औपचारिकताएं पूरी कीं। चूंकि राज्य में उपलब्ध सीटों और उम्मीदवारों की कुल संख्या अब बराबर है, इसलिए मतदान की आवश्यकता नहीं पड़ेगी और यह पूरी प्रक्रिया निर्विरोध संपन्न होगी।


    हरियाणा

    हरियाणा से दो सीटों के लिए भाजपा उम्मीदवार संजय भाटिया ने अपना नामांकन पत्र दाखिल किया। कांग्रेस ने इस चुनाव के लिए कर्मवीर सिंह बौद्ध को अपना प्रत्याशी बनाया है और यह उनका पहला चुनाव होगा। इस बीच निर्दलीय उम्मीदवार रोहतक के बोहर गांव निवासी सतीश नांदल ने भी तीसरे उम्मीदवार के रूप में नामांकन दाखिल कर चुनाव को त्रिकोणीय बना दिया है।


    हिमाचल प्रदेश

    हिमाचल प्रदेश से राज्यसभा की एक सीट के लिए कांग्रेस उम्मीदवार अनुराग शर्मा ने नामांकन दाखिल किया है। 68 सदस्यीय हिमाचल प्रदेश विधानसभा में कांग्रेस के पास आरामदायक बहुमत होने के कारण राज्यसभा के लिए शर्मा का निर्वाचन औपचारिकता मात्र होने की उम्मीद है, जब तक कि कोई अप्रत्याशित मुकाबला सामने न आये।


    तमिलनाडु

    तमिलनाडु से राज्यसभा की छह सीटों के लिये नामांकन के अंतिम दिन सभी छह उम्मीदवारों ने अपने पर्चे दाखिल कर दिए। इनमें सत्तारूढ़ दल के चार और विपक्ष के दो उम्मीदवार शामिल हैं। सत्तारूढ़ मोर्चे की ओर से एन. शिवा, प्रो. जे. कॉन्स्टेंटाइन रविंद्रन, क्रिस्टोफर तिलक और एल.के. सुदीश ने नामांकन दाखिल किया। वहीं विपक्षी गठबंधन की ओर से वर्तमान सांसद एम. थंबीदुरई और पीएमके नेता अम्बुमणि रामदास ने नामांकन दाखिल किया। 234 सदस्यीय तमिलनाडु विधानसभा में संख्या बल के आधार पर द्रमुक चार और अन्नाद्रमुक दो सीटें आसानी से जीत सकती है, जिसके कारण सभी छह उम्मीदवारों के निर्विरोध निर्वाचित होने की संभावना है।


    पश्चिम बंगाल

    पश्चिम बंगाल से राज्यसभा की पांच सीटों के लिए सत्तारुढ़ तृणमूल कांग्रेस के उम्मीदवार अभिनेता से नेता बने पूर्व केंद्रीय मंत्री बाबुल सुप्रियो, अभिनेत्री कोयल मल्लिक, पूर्व पुलिस महानिदेशक राजीव कुमार और वरिष्ठ अधिवक्ता मेनका गुरुस्वामी ने अपने नामांकन दखिल किए है। भाजपा उम्मीदवार राहुल सिन्हा ने भी अपना नामांकन दाखिल किया है।


    ओडिशा

    ओडिशा से राज्यसभा की चार सीटों के लिए सत्तारूढ़ भाजपा ने मनमोहन सामल और वर्तमान राज्यसभा सदस्य सुजीत कुमार को मैदान में उतारा है, जबकि बीजू जनता दल (बीजद) ने संत्रुप्ता मिश्रा और प्रसिद्ध यूरोलॉजिस्ट डॉ. दत्तेश्वर होता को उम्मीदवार बनाया है। इसके अलावा दिलीप रे भाजपा के समर्थन से निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़ रहे हैं। इन सभी उम्मीदवारों ने आज नामाकंन के अंतिम दिन अपने नामांकनपत्र दाखिल किए। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार असली मुकाबला डॉ दत्तेश्वर होता और दिलीप रे के बीच माना जा रहा है। रे ने नामांकन दाखिल करने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और भाजपा नेतृत्व का समर्थन देने के लिए आभार व्यक्त किया तथा राज्यसभा चुनाव में जीत का विश्वास जताया


    असम

    असम में तीन राज्यसभा सीटों के लिए विपक्ष की ओर से सर्वसम्मति से उम्मीदवार खड़ा करने में विफल रहने के कारण आगामी चुनावों में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) से तीनों नामांकित उम्मीदवारों का निर्विरोध चुना जाना तय है। कैबिनेट मंत्री जोगेन महान, भाजपा के पूर्व विधायक तेराश गोवाला और यूनाइटेड पीपुल्स पार्टी लिबरल (यूपीपीएल) के प्रमुख प्रमोद बोरो ने उच्च सदन के लिए अपना नामांकन दाखिल किया है। विपक्ष के किसी भी उम्मीदवार के मैदान में नहीं उतरने के कारण राजग के उम्मीदवारों के लिए चुनाव अब महज एक औपचारिकता बनकर रह गया है। उनकी निर्विरोध जीत से असम से राज्यसभा में राजग की मजबूत उपस्थिति एक बार फिर सुनिश्चित हो जाएगी।


    बिहार

    बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार समेत राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) की ओर से पांच उम्मीदवारों ने गुरुवार को राज्यसभा चुनाव के लिये नामांकन पत्र दाखिल किया। एनडीए की ओर से जनता दल यूनाईटेड (JDU) के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, मौजूदा राज्यसभा सदस्य रामनाथ ठाकुर, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन, शिवेश कुमार और राष्ट्रीय लोक मोर्चा (रालोमो) के राष्ट्रीय अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा ने नामांकन पत्र दाखिल किया।


    छत्तीसगढ़

    वहीं, छत्तीसगढ़ से राज्यसभा की दो सीटों के भाजपा उम्मीदवार लक्ष्मी वर्मा और कांग्रेस की मौजूदा राज्यसभा सदस्य फूलो देवी नेताम ने अपने नामांकन दाखिल किए हैं।

  • Maharashtra: सुनेत्रा पवार की जगह बेटे पार्थ को राज्यसभा भेजेगी NCP, आधी रात को लिया गया फैसला

    Maharashtra: सुनेत्रा पवार की जगह बेटे पार्थ को राज्यसभा भेजेगी NCP, आधी रात को लिया गया फैसला


    मुंबई।
    महाराष्ट्र (Maharashtra) की सात राज्यसभा सीटों पर होने वाले चुनाव (Rajya Sabha Election) से पहले राज्य की सियासत में हलचल तेज हो गई है। महायुति की सरकार में शामिल राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (Nationalist Congress Party- NCP) ने इस संबंध में अपने उम्मीदवार को लेकर बड़ा फैसला किया है। सूत्रों के अनुसार,सोमवार की रात प्रफुल्ल पटेल (Prafull Patel) के आवास पर पार्टी की कोर कमेटी की हुई बैठक में पार्थ पवार को राज्यसभा चुनाव में उम्मीदवार बनाने पर सहमति बनी है। इस अहम बैठक मुंबई में प्रफुल्ल पटेल के अलावा उप मुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार और प्रदेश अध्यक्ष सुनील तटकरे सहित कई वरिष्ठ नेता मौजूद थे।

    सूत्रों ने बताया कि बैठक में केवल राज्यसभा उम्मीदवार ही नहीं, बल्कि पार्टी की आगामी राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक की तैयारियों पर भी चर्चा हुई। 26 फरवरी को होने वाली इस बैठक में पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनाव पर मुहर लग सकती है, जहां सुनेत्रा पवार का नाम सबसे आगे माना जा रहा है। यह बैठक मुंबई के वर्ली डोम में आयोजित होने की संभावना है।


    बीजेपी कोर कमेटी की आज बैठक

    दूसरी ओर, भारतीय जनता पार्टी (BJP) भी अपने उम्मीदवारों को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया में जुटी हुई है। ABP माझा के मुताबिक, इसी सिलसिले में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के निवास पर मंगलवार की रात करीब 10 बजे कोर कमेटी की बैठक बुलाई गई है। पार्टी इस बार राज्यसभा की चार सीटों पर उम्मीदवार उतारने की तैयारी में है। इनमें रामदास अठावले का नाम लगभग तय माना जा रहा है, जबकि विनोद तावड़े, विजया रहाटकर और धैर्यशील पाटिल के नामों पर अंतिम निर्णय होना बाकी है।


    बीजेपी चार सांसद भेज सकती है

    महाराष्ट्र में इस बार राज्यसभा की 7 सीटें खाली हैं और 286 विधायकों के आधार पर एक उम्मीदवार को जीत के लिए 37 वोटों की जरूरत होगी। आंकड़ों के अनुसार, सत्तारूढ़ महायुति गठबंधन के पास स्पष्ट बढ़त है। अकेले BJP के पास एक निर्दलीय को मिलाकर कुल (131+1) यानी 132 विधायकों का समर्थन है, जिससे वह 3 से 4 सांसद आसानी से भेज सकती है। वहीं शिवसेना (शिंदे गुट) अपने 58 विधायकों के साथ एक सीट सुरक्षित कर सकती है, जबकि NCP (अजित पवार गुट) भी एक सीट जीतने की स्थिति में है क्योंकि अजित पवार की मौत के बाद उसके पास 40 विधायक हैं।


    महाविकास अघाड़ी के पास एक को भेजने की क्षमता

    इसके मुकाबले महाविकास अघाड़ी (MVA), जिसमें कांग्रेस, NCP (शरद पवार गुट) और शिवसेना (ठाकरे गुट) शामिल हैं, के पास कुल मिलाकर लगभग 49 विधायकों का समर्थन है। इस संख्या के आधार पर MVA केवल एक सीट ही सुरक्षित कर सकती है। राजनीतिक समीकरणों के हिसाब से महायुति गठबंधन 6 सीटों पर मजबूत स्थिति में नजर आ रहा है, जबकि विपक्षी गठबंधन को सीमित सफलता मिलने की संभावना है। ऐसे में राज्यसभा चुनाव 2026 में सत्ता पक्ष का पलड़ा भारी दिखाई दे रहा है, लेकिन उम्मीदवारों के चयन और अंतिम रणनीति पर सबकी नजरें टिकी हैं।