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  • दिग्विजय बोले- 'मुझसे बड़ा सनातनी बताओ', राम मंदिर और EVM मुद्दे को लेकर BJP पर साधा निशाना

    दिग्विजय बोले- 'मुझसे बड़ा सनातनी बताओ', राम मंदिर और EVM मुद्दे को लेकर BJP पर साधा निशाना


    राजगढ़। मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह ने शनिवार को राजगढ़ में अपनी ‘सत्य सनातन स्वाभिमान यात्रा’ के दौरान भाजपा पर चंदा चोरी, वोट चोरी और धार्मिक स्थलों में कथित अनियमितताओं को लेकर निशाना साधा। उन्होंने राम मंदिर ट्रस्ट की जमीन की खरीद-फरोख्त पर सवाल उठाते हुए पारदर्शिता की मांग की। ईवीएम के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि चुनाव हारने से उन्हें फर्क नहीं पड़ता, लेकिन चुनाव बैलेट पेपर से कराए जाने चाहिए। आजम खान से अपनी मित्रता का जिक्र करते हुए उन्होंने उन्हें अच्छा राजनेता भी बताया।

    जिला मुख्यालय पर रात्रि विश्राम के बाद दिग्विजय सिंह ने मां जालपा देवी के दर्शन किए और नेवज नदी की पूजा की। इसके बाद उनकी यात्रा कालीपीठ मार्ग स्थित दंड जोड़ के भगवान बाबा रामदेव मंदिर पहुंची, जहां उन्होंने प्रेस वार्ता की। सिंह ने कहा कि यात्रा का उद्देश्य सनातन धर्म की मूल भावना, धार्मिक आस्था, सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक मूल्यों का संरक्षण करना है। उनके मुताबिक, चंदा चोरी और वोट चोरी के मुद्दे भी इसी लड़ाई का हिस्सा हैं।

    राम मंदिर ट्रस्ट की जमीन की खरीद पर उठाए सवाल

    दिग्विजय सिंह ने राम मंदिर के चंदे और ट्रस्ट की जमीन से जुड़े मामलों में कथित अनियमितताओं के आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि मंदिर के आसपास जमीनों की कीमतें बढ़ने के दौरान कुछ मामलों में भाजपा नेताओं ने सस्ती कीमत पर जमीन खरीदी और 24 घंटे के भीतर उसे राम मंदिर ट्रस्ट को बेच दिया।

    एक मामले का जिक्र करते हुए उन्होंने आरोप लगाया कि दो करोड़ रुपये में खरीदी गई जमीन अगले ही दिन ट्रस्ट को 18 करोड़ रुपये में बेच दी गई। सिंह ने कहा कि इस मामले में जांच की मांग की गई थी और एसआईटी को प्रमाण सौंपे जाने की बात भी सामने आई, लेकिन जांच नहीं हुई।

    उन्होंने चंदा संग्रह में गड़बड़ी की शिकायत करने वाले आरएसएस के पूर्व प्रचारक महिपाल सिंह का भी उल्लेख किया। वैष्णोदेवी ट्रस्ट, केदारनाथ, ओरछा और उज्जैन के धार्मिक स्थलों का जिक्र करते हुए उन्होंने दान की राशि के पारदर्शी इस्तेमाल की जरूरत बताई।

    EVM पर बोले- हार गए तो हार गए, बैलेट पेपर से चुनाव कराइए

    ईवीएम के विरोध और बैलेट पेपर से चुनाव कराने पर कांग्रेस की हार से जुड़े सवाल पर दिग्विजय सिंह ने कहा कि उनका मुद्दा चुनाव में जीत या हार नहीं, बल्कि मतदान प्रक्रिया में पारदर्शिता है। उन्होंने कहा कि भारत के नागरिक के रूप में मतदाता का नाम वोटर लिस्ट में होना और अपनी पसंद के उम्मीदवार को वोट देना उसका अधिकार है।

    उन्होंने वीवीपैट की पर्ची मतदाता को हाथ में नहीं दिए जाने पर सवाल उठाया और बैलेट पेपर से चुनाव कराने की चुनौती दी। सिंह ने कहा, “चुनाव हार गए तो हार गए, चलेगा, कोई बात नहीं। आप बैलेट पेपर से पूरा चुनाव करा दीजिए। जब आप कह रहे हैं कि बैलेट पेपर से कांग्रेस हार रही है, तो हराइए।”

    बोले- भाजपा में मुझसे बड़ा सनातनी बताओ

    भाजपा नेताओं के इस सवाल पर कि उनकी सरकार के समय उन्हें भगवान राम की याद क्यों नहीं आई, दिग्विजय सिंह ने कहा कि उन्होंने रामलीला पूजन में चंदा दिया था और गौ सेवा आयोग का गठन किया था। उन्होंने अपने गृह क्षेत्र राघौगढ़ के 400 साल पुराने राघवजी मंदिर का भी उल्लेख किया।

    इसके बाद उन्होंने भाजपा को चुनौती देते हुए कहा कि कोई ऐसा व्यक्ति बताया जाए, जो उनसे ज्यादा धार्मिक हो। उन्होंने आरएसएस और विश्व हिंदू परिषद में भी ऐसा व्यक्ति बताने की बात कही।

    सिंह ने दावा किया कि उनकी यात्रा में ऐसे लोग भी शामिल हो रहे हैं, जो किसी राजनीतिक दल से जुड़े नहीं हैं। उनके मुताबिक, कुछ भाजपा कार्यकर्ताओं और आरएसएस के लोगों के संदेश भी आए हैं। उन्होंने कहा कि वैचारिक मतभेद के बावजूद इन लोगों ने राम मंदिर में चंदे की कथित गड़बड़ी को लेकर उनके सवालों का समर्थन किया है।

    आजम खान को बताया मित्र, बोले- अच्छा राजनेता मानता हूं

    समाजवादी पार्टी के नेता आजम खान के कांग्रेस में आने की संभावना से जुड़े सवाल पर दिग्विजय सिंह ने कहा कि आजम खान से उनकी अच्छी मित्रता है और वह उन्हें अच्छा राजनेता मानते हैं।

    उन्होंने कहा कि आजम खान ने विश्वविद्यालय शुरू किया और अपनी संपत्ति उसमें लगा दी। यूपीए सरकार के दौरान विश्वविद्यालय को मंजूरी दिलाने में उन्होंने अपनी ओर से जितनी मदद संभव थी, की थी। सिंह ने कहा कि आजम खान जिस पार्टी में रहना चाहें, रह सकते हैं। समाजवादी पार्टी उनके गठबंधन का हिस्सा है और वे एक-दूसरे के मामलों में हस्तक्षेप नहीं करते।

    नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के बारे में पूछे गए सवाल पर भी दिग्विजय सिंह ने उन्हें अपना मित्र बताया। उन्होंने कहा कि वे विजयवर्गीय को काफी समय से जानते हैं।

    राहुल गांधी की महारैली पर भी रखी बात

    दिल्ली में एक नवंबर को प्रस्तावित राहुल गांधी की ‘वोट बचाओ-देश बचाओ’ महारैली को लेकर दिग्विजय सिंह ने कहा कि जो नेता दिल्ली जा सकते हैं, वे वहां जाएं और जो नहीं जा सकते, वे उनकी यात्रा में शामिल हों। उन्होंने बताया कि उनकी यात्रा पहले से निर्धारित थी, इसलिए वह दिल्ली नहीं जा रहे हैं। सिंह ने वोट चोरी को गंभीर मुद्दा बताते हुए कहा कि इसका असर नागरिकों के अधिकारों पर पड़ता है।

    राजगढ़ में भैंस चोरी का मुद्दा भी उठाया

    प्रेस वार्ता के दौरान दिग्विजय सिंह ने राजगढ़ जिले में भैंस चोरी की घटनाओं का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने दावा किया कि जिले में भैंस चोरी के मामले बढ़ रहे हैं और जिन लोगों की भैंस चोरी हुई हैं, उनमें अधिकतर कांग्रेसी हैं। इस पर तंज कसते हुए उन्होंने कहा कि चोरी हर जगह बढ़ रही है।

    सत्य सनातन स्वाभिमान यात्रा में दिग्विजय सिंह के साथ उनकी पत्नी अमृता सिंह, पूर्व ऊर्जा मंत्री एवं कांग्रेस जिला अध्यक्ष प्रियव्रत सिंह, पूर्व विधायक हेमराज कल्पोनी, बापू सिंह तंवर, यात्रा प्रभारी चंदर सिंह सौंधिया, रामचंद्र दांगी सहित अन्य कांग्रेस नेता मौजूद रहे। यात्रा का जगह-जगह फूलों से स्वागत किया गया।

  • राम मंदिर में अयोध्यावासियों के लिए अलग प्रवेश द्वार की तैयारी, आधार कार्ड से मिल सकता है सीधे दर्शन का लाभ

    राम मंदिर में अयोध्यावासियों के लिए अलग प्रवेश द्वार की तैयारी, आधार कार्ड से मिल सकता है सीधे दर्शन का लाभ

    अयोध्या। राम मंदिर में स्थानीय निवासियों को रामलला के सीधे दर्शन की सुविधा उपलब्ध कराने की योजना पर जल्द मंथन होगा। इसके तहत अयोध्यावासियों को आधार कार्ड के माध्यम से प्रवेश देने और संत-महंतों व गृहस्थों के लिए अलग प्रवेश व्यवस्था बनाने पर विचार किया जा रहा है। इस संबंध में पुलिस प्रशासन और खुफिया एजेंसियों की रिपोर्ट के आधार पर आगे की प्रक्रिया तय होगी।

    श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव गोविंद देव ने 15 अक्टूबर को धार्मिक न्यास समिति की बैठक बुलाई है। पहली बार भौतिक रूप से आयोजित होने वाली इस बैठक में अयोध्या के संत-महंतों और गृहस्थों को रामलला के दर्शन सुलभ कराने के विभिन्न विकल्पों पर चर्चा होगी। बैठक में तैयार रूपरेखा को दो दिसंबर को ट्रस्ट की कार्यकारिणी के समक्ष प्रस्ताव के रूप में रखा जाएगा। इसके बाद ट्रस्ट की सहमति और सुझावों के आधार पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा।

    पुलिस और खुफिया एजेंसियों की रिपोर्ट अहम

    स्थानीय निवासियों के लिए अलग प्रवेश व्यवस्था लागू करने से पहले पुलिस प्रशासन और खुफिया एजेंसियों की सकारात्मक रिपोर्ट जरूरी मानी जा रही है। 15 अक्टूबर को होने वाली बैठक में यह भी स्पष्ट होने की संभावना है कि संबंधित एजेंसियों की रिपोर्ट ट्रस्ट को मिली है या नहीं।

    यदि रिपोर्ट अनुकूल रही, तो स्थानीय लोगों के लिए सीधे दर्शन की सुविधा देने की योजना आगे बढ़ सकती है। इसके साथ ही संत-महंतों और गृहस्थों के लिए निर्धारित प्रवेश द्वार बनाने पर भी निर्णय लिया जा सकता है।

    यदि इस प्रस्ताव को मंजूरी नहीं मिलती है, तो स्थानीय दर्शनार्थियों के लिए पहले से लागू व्यवस्था जारी रह सकती है। इसके तहत अयोध्या के निवासियों को आधार कार्ड के माध्यम से छह महीने की अवधि वाला नियमित दर्शन पास उपलब्ध कराया जाता है।

    अलग-अलग लेन बनाने की मांग

    राम मंदिर में स्थानीय दर्शनार्थियों के लिए अलग प्रवेश लेन बनाने का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया जा रहा है। स्थानीय संत-महंतों का कहना है कि अलग लेन की व्यवस्था नहीं होने से दर्शन के दौरान दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। इसी समस्या के समाधान के लिए स्थानीय निवासियों, संत-महंतों और गृहस्थों के लिए अलग-अलग प्रवेश व्यवस्था बनाने की मांग की गई है।

    धार्मिक न्यास समिति की बैठक में इन समस्याओं और संभावित समाधानों पर विचार किया जाएगा। बैठक में बनने वाली रूपरेखा के आधार पर आगे की प्रक्रिया तय होगी।

    15 अक्टूबर से निर्माण समिति की तीन दिवसीय बैठक

    राम मंदिर की निर्माण समिति की तीन दिवसीय समीक्षा बैठक भी 15 अक्टूबर से शुरू होगी। निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्र अपने सहयोगियों के साथ अयोध्या पहुंचेंगे। संभावना जताई जा रही है कि धार्मिक न्यास समिति की बैठक में उन्हें भी आमंत्रित किया जा सकता है। स्थानीय श्रद्धालुओं के लिए प्रवेश व्यवस्था से जुड़े विषय पर उनका सुझाव भी महत्वपूर्ण हो सकता है।

    निर्माण समिति की बैठक में श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव गोविंद देव भी पहली बार हिस्सा लेंगे। इस दौरान निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्र के साथ अंतरराष्ट्रीय रामकथा संग्रहालय के निर्माण कार्यों का भी अवलोकन किया जाएगा।

    अब 15 अक्टूबर की बैठकों में स्थानीय निवासियों के लिए दर्शन व्यवस्था और मंदिर निर्माण से जुड़े विषयों पर होने वाली चर्चा के बाद आगे की तस्वीर स्पष्ट होने की उम्मीद है।

  • राम मंदिर केस: आरोप पत्र में जमीन से लेकर गाड़ियों तक… दान के पैसों से करोड़ों की संपत्तियां बनाने का जिक्र

    राम मंदिर केस: आरोप पत्र में जमीन से लेकर गाड़ियों तक… दान के पैसों से करोड़ों की संपत्तियां बनाने का जिक्र


    अयोध्या।
    अयोध्या (Ayodhya) के राम मंदिर (Ram Mandir) चढ़ावा चोरी के मामले में आरोपियों पर शिकंजा कस गया है। पुलिस की तरफ से बुधवार को अदालत में दाखिल किए गए आरोप पत्र के अनुसार दान चोरी (Theft Donation) से करोड़ों की संपत्तियां बनाई गईं। जमीन और गाड़ियां खरीदी गईं। आरोपियों के वित्तीय लेनदेन और संपत्तियों से जुड़े कई अहम तथ्य सामने आने की बात कही जा रही है। पुलिस सूत्रों के मुताबिक 25 जून 2026 को थाना राम जन्मभूमि (Ram Janmabhoomi) में मुकदमा दर्ज होने के बाद विवेचना के दौरान आरोपियों के बैंक खातों और अन्य वित्तीय गतिविधियों का गहन विश्लेषण किया गया। पुलिस ने अपनी 74 हजार पन्नों की विस्तृत रिपोर्ट में ब्योरा जुटाकर उसे चार्जशीट का हिस्सा बनाया है।

    पुलिस सूत्रों के अनुसार विवेचना में आरोपियों के खातों में बड़ी मात्रा में हुए नकद लेनदेन के साथ जमीन, मकान, वाहन और अन्य मूल्यवान संपत्तियों से जुड़े दस्तावेजों की भी पड़ताल की गई। पुलिस ने इन संपत्तियों और वित्तीय लेनदेन का क्रमवार विश्लेषण करते हुए चार्जशीट में उनका उल्लेख किया है। आरोप लगाया कि अभियुक्तों ने स्वयं और अपने सगे संबंधियों के माध्यम से करोड़ों रुपये की चल-अचल संपत्ति चढ़ावा चोरी से बनाई हैं।


    आरोप पत्र में दस्तावेजों के साथ गवाहों के बयान

    पुलिस ने अपने आरोप पत्र में इसे साबित करने के लिए पर्याप्त दस्तावेज व गवाहों के बयान दर्ज किए हैं। एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी के मुताबिक, विवेचना के दौरान ऐसे तथ्य सामने आए हैं जिनसे आरोपियों पर चढ़ावे की रकम के दुरुपयोग से करोड़ों रुपये की संपत्ति अर्जित करने का आरोप बनता है। इसमें जमीन और मकान के अलावा कई वाहन तथा अन्य मूल्यवान वस्तुएं शामिल हैं।


    सरकारी दस्तावेजों से पुष्टि का भी दावा

    पुलिस ने आरोपियों के बैंक खातों में हुए लेनदेन, संपत्ति की खरीद और अन्य आर्थिक गतिविधियों के बीच संबंधों की भी पड़ताल की है। जांच में सामने आए दस्तावेजों और वित्तीय विवरणों को साक्ष्य के रूप में चार्जशीट में शामिल किया गया है। पुलिस ने अयोध्या समेत एक दर्जन जिलों के सरकारी दस्तावेजों व मशीनरी से इसकी बकायदा पुष्टि कराते हुए आरोप लगाए हैं।


    चार्जशीट में संपत्तियों का क्रमवार विवरण

    विवेचना के दौरान पुलिस ने आरोपियों की ओर से अर्जित बताई जा रही चल और अचल संपत्तियों का अलग-अलग ब्योरा तैयार किया। इसमें संपत्ति की प्रकृति, खरीद से जुड़े दस्तावेज और उपलब्ध वित्तीय लेनदेन का विवरण शामिल किए जाने की बात सामने आई है। पुलिस का दावा है कि इन तथ्यों के आधार पर चढ़ावा चोरी से अर्जित रकम और उससे बनाई गई संपत्तियों के बीच कड़ियों की जांच की गई है। अदालत में चार्जशीट पर होने वाली सुनवाई के दौरान पुलिस की ओर से पेश किए गए वित्तीय दस्तावेज और संपत्तियों से जुड़े साक्ष्य महत्वपूर्ण होंगे।


    ये आठ हैं आरोपी

    राममंदिर दान चोरी के मामले में 25 जून 2026 को थाना रामजन्मभूमि में एफआईआर दर्ज करने के बाद अविनाश शुक्ला, अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा, मनीष कुमार यादव, करुणेश पाण्डेय, रमाशंकर मिश्रा, सुभाष श्रीवास्तव व रामशंकर यादव टिन्नू को गिरफ्तार कर आरोपी बनाया गया था। इन पर बीएनएस की धारा 305, 306, 3016 (5), 317(4), 317 (5) 61, 3 (5) के साथ भ्रष्टचार निवारण अधिनियम 13 (1) ए लगाए गए थे। यह सभी धाराएं चोरी और चोरी के माल से अवैध कार्यों को करने से संबंधित हैं।

    चार्जशीट में आरोपियों से हटाई गयी धाराएं
    चार्जशीट में बीएनएस की धारा 305 व 306 सभी आठों आरोपियों से हटा दी गई है। सुभाष के ऊपर लगी धारा 317 (2) को भी हटा दिया गया है। आरोपियों पर लगी धाराएं परिवर्तित होने के बाद अब फिर से आरोपियों के पास जमानत पत्र दूसरे तरीके से दाखिल करने का अवसर होगा। वहीं जानकारों के मुताबिक इसका लाभ आरोपी पक्ष को मिल सकता है।

  • चंपत राय से हुई पहचान की चूक? राम मंदिर ट्रस्ट के नए महासचिव ने बताई गलती, अब व्यवस्था में होगा बड़ा बदलाव

    चंपत राय से हुई पहचान की चूक? राम मंदिर ट्रस्ट के नए महासचिव ने बताई गलती, अब व्यवस्था में होगा बड़ा बदलाव


    उत्तर प्रदेश। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में नई जिम्मेदारी संभालने के बाद महासचिव गोविंद देव गिरि महाराज ने मंदिर की व्यवस्था और भविष्य की प्राथमिकताओं को लेकर खुलकर बात की है। उन्होंने पूर्व महासचिव चंपत राय के कामकाज और व्यक्तित्व पर भी अपनी राय रखी। गोविंद देव गिरि ने कहा कि उनके अनुभव के आधार पर चंपत राय बेदाग और निष्कलंक व्यक्ति हैं। हालांकि उन्होंने यह भी माना कि उनका भोलापन उनके लिए परेशानी का कारण बना और सब पर विश्वास करने की वजह से लोगों को पहचानने में उनसे चूक हुई। उनके मुताबिक ट्रस्ट की व्यवस्थाओं में कुछ कमियां रही हैं और इन्हीं कमियों को दूर करने की जरूरत है।

    चढ़ावे की कथित चोरी के मामले पर गोविंद देव गिरि ने साफ कहा कि यदि घटना हुई है तो इसकी जिम्मेदारी तय होनी चाहिए और चोरी करने वालों को सजा मिलनी चाहिए। साथ ही उन्होंने इस पूरे घटनाक्रम को जिस तरह सामने रखा गया उस पर भी गंभीरता से विचार करने की बात कही। उन्होंने संकेत दिया कि इस मामले में किसी संभावित षड्यंत्र की आशंका को भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। उनका कहना है कि भविष्य में ऐसी घटनाओं की गुंजाइश खत्म करने के लिए व्यवस्था को अधिक सुरक्षित और पारदर्शी बनाया जाएगा।

    महासचिव के रूप में अपनी प्राथमिकताओं को बताते हुए उन्होंने तीन प्रमुख बिंदुओं पर जोर दिया। पहला मंदिर को देव सेवा का ऐसा केंद्र बनाना है जिससे देश के दूसरे मंदिर भी प्रेरणा ले सकें। दूसरी प्राथमिकता मंदिर की पूरी व्यवस्था में पारदर्शिता लाना है। तीसरी चुनौती अयोध्या के लोगों और मंदिर के बीच संवाद को मजबूत करना है। उनका मानना है कि स्थानीय लोगों की भावनाओं और अपेक्षाओं को समझकर बेहतर संवाद व्यवस्था तैयार की जानी चाहिए।

    गोविंद देव गिरि इससे पहले ट्रस्ट में कोषाध्यक्ष की जिम्मेदारी संभाल रहे थे। महासचिव का पद संभालने के बाद उनकी भूमिका और समय दोनों बढ़ेंगे। उन्होंने कहा कि उनके लिए पद से ज्यादा महत्वपूर्ण रामलला की सेवा है। सालभर पहले से तय कार्यक्रमों के बीच अयोध्या के लिए समय निकालना चुनौती जरूर है लेकिन उन्होंने इसे अपनी जिम्मेदारी मानकर स्वीकार किया है।

    ट्रस्ट में पहली बार निर्मला यादव को महिला ट्रस्टी बनाए जाने पर भी उन्होंने सकारात्मक रुख जताया। उन्होंने कहा कि महिलाओं को साथ लेकर चलना जरूरी है और निर्मला यादव का शिक्षा क्षेत्र में अनुभव ट्रस्ट के काम आ सकता है। उनकी संस्कृत और हिंदी की शैक्षणिक पृष्ठभूमि और शिक्षा के क्षेत्र में किए गए काम को भी उन्होंने उपयोगी बताया।

    मंदिर में आने वाले चढ़ावे की निगरानी और पारदर्शिता के सवाल पर उन्होंने बताया कि कई बैंकों के प्रतिनिधियों ने ट्रस्ट को सुझाव दिए हैं। विचार-विमर्श के बाद नई व्यवस्था तय की जाएगी। उनकी योजना है कि श्रद्धालुओं की संख्या और मंदिर में आने वाले चढ़ावे की जानकारी रोजाना वेबसाइट पर उपलब्ध कराई जाए। इसके लिए काम चल रहा है और आने वाले समय में व्यवस्थाओं को लगातार अपडेट किया जाएगा।

    ट्रस्ट में पूर्व एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा को CEO बनाए जाने को लेकर भी उन्होंने भूमिका स्पष्ट की। उनके मुताबिक महासचिव और CEO की जिम्मेदारियां अलग होंगी लेकिन दोनों का लक्ष्य एक ही रहेगा। नीति और निर्णय ट्रस्ट लेगा जबकि उसे जमीन पर लागू कराने की जिम्मेदारी CEO की होगी। ऐसे में दोनों पदों के बीच बेहतर तालमेल को जरूरी माना गया है।

    गोविंद देव गिरि ने संकेत दिया कि आने वाले समय में राम मंदिर ट्रस्ट की व्यवस्थाएं अधिक पारदर्शी और व्यवस्थित दिखाई देंगी। चढ़ावे से लेकर श्रद्धालुओं की संख्या और खर्च से जुड़ी जानकारी को सार्वजनिक करने की दिशा में काम आगे बढ़ाया जाएगा। उनका जोर यही है कि राम मंदिर केवल आस्था का केंद्र ही नहीं बल्कि देशभर के मंदिरों के लिए व्यवस्था और पारदर्शिता का आदर्श भी बने।

  • अयोध्या: राम मंदिर ट्रस्ट के नए पदाधिकारियों की हुई पहली बैठक, जानिए क्‍या बोले सीईओ जितेंद्र मिश्रा ?

    अयोध्या: राम मंदिर ट्रस्ट के नए पदाधिकारियों की हुई पहली बैठक, जानिए क्‍या बोले सीईओ जितेंद्र मिश्रा ?

    अयोध्या। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में नई जिम्मेदारियां तय होने के बाद गुरुवार को नवनियुक्त पदाधिकारियों की पहली बैठक हुई। रामघाट स्थित कार्यशाला के श्रीराम जन्मभूमि क्षेत्र कार्यालय में हुई इस बैठक में ट्रस्ट की नई प्रशासनिक व्यवस्था और कामकाज को लेकर चर्चा की गई।

    बैठक के बाद बाहर आए नवनियुक्त सीईओ और पूर्व एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा ने कहा कि आज सभी ने एक-दूसरे से परिचय किया और कई मुद्दों पर चर्चा हुई। आगे भी कई बैठकें होंगी, ताकि वे यहां की पूरी कार्यप्रणाली को समझ सकें। इसके बाद वे अपना कार्यभार ग्रहण करेंगे। जितेंद्र मिश्रा ने कहा, “मैं बहुत सौभाग्यशाली हूं कि मुझे प्रभु श्रीराम और रामभक्तों की सेवा करने का अवसर मिला है।”

    बैठक में ये पदाधिकारी रहे मौजूद
    बैठक में नवनियुक्त सीईओ जितेंद्र मिश्रा के अलावा ट्रस्ट के महासचिव गोविंद देवगिरी, कोषाध्यक्ष महेश भागचंद, ट्रस्टी मदन मोहन पांडे सहित अकाउंटिंग व्यवस्था से जुड़े अधिकारी और कर्मचारी मौजूद रहे।

    नई जिम्मेदारियां तय होने के बाद हुई यह पहली बैठक इसलिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है, क्योंकि इसमें ट्रस्ट के कामकाज और वित्तीय व्यवस्था को लेकर आगे की कार्ययोजना पर चर्चा की गई। सभी पदाधिकारियों के एक-दूसरे से परिचय के बाद लेखा-जोखा, अकाउंटिंग सिस्टम और ट्रस्ट के प्रशासनिक कामकाज से जुड़े विषयों की जानकारी भी साझा की गई।

    कार्यभार संभालने से पहले व्यवस्था समझेंगे सीईओ
    नवनियुक्त सीईओ जितेंद्र मिश्रा के पदभार ग्रहण करने से पहले हुई इस बैठक को ट्रस्ट की नई प्रशासनिक व्यवस्था की शुरुआत के तौर पर देखा जा रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे आगे होने वाली बैठकों के जरिए ट्रस्ट और मंदिर से जुड़े कामकाज को विस्तार से समझेंगे, इसके बाद औपचारिक रूप से जिम्मेदारी संभालेंगे।

    माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में मंदिर और ट्रस्ट से जुड़े प्रशासनिक कार्यों, लेखा-जोखा और वित्तीय व्यवस्था को लेकर नई कार्ययोजना का खाका इन्हीं बैठकों के जरिए तैयार किया जाएगा।

  • पुजारी से अलग अफसर संभालते हैं प्रशासन जानिए बड़े मंदिरों में कैसे चलता है CEO सिस्टम

    पुजारी से अलग अफसर संभालते हैं प्रशासन जानिए बड़े मंदिरों में कैसे चलता है CEO सिस्टम


    नई दिल्ली। अयोध्या के राम मंदिर में मुख्य कार्यकारी अधिकारी यानी CEO की नियुक्ति के बाद मंदिर प्रशासन की व्यवस्था एक बार फिर चर्चा में आ गई है। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र की अहम बैठक में रिटायर्ड एयर मार्शल जीतेंद्र मिश्र को ट्रस्ट का पहला CEO नियुक्त करने को मंजूरी दी गई है। इसके साथ ही राम मंदिर उन प्रमुख धार्मिक संस्थानों की श्रेणी में शामिल हो गया है जहां धार्मिक गतिविधियों के साथ प्रशासनिक जिम्मेदारियों को अलग स्तर पर संभालने की व्यवस्था है।

    देश के कई बड़े और प्रसिद्ध मंदिरों में पहले से ही इसी तरह का प्रशासनिक ढांचा मौजूद है। कहीं एग्जीक्यूटिव ऑफिसर तो कहीं चीफ एडमिनिस्ट्रेटर जैसे पदों पर अधिकारी रोजमर्रा के कामकाज की जिम्मेदारी संभालते हैं। इसका उद्देश्य बड़े स्तर पर आने वाले श्रद्धालुओं की सुविधाओं से लेकर वित्तीय व्यवस्था सुरक्षा स्वच्छता और मंदिर की संपत्तियों के प्रबंधन तक सभी कामों को व्यवस्थित तरीके से संचालित करना होता है।

    आंध्र प्रदेश का तिरुमाला तिरुपति देवस्थानम इस व्यवस्था का बड़ा उदाहरण है। यहां मुख्य प्रशासनिक अधिकारी को CEO के बजाय एग्जीक्यूटिव ऑफिसर कहा जाता है। यही अधिकारी मंदिर प्रशासन के रोजमर्रा के संचालन की जिम्मेदारी संभालता है। उसके साथ ज्वाइंट एग्जीक्यूटिव ऑफिसर वित्त और लेखा से जुड़े अधिकारी मुख्य अभियंता तथा सुरक्षा से जुड़े वरिष्ठ अधिकारी काम करते हैं। इस पूरी व्यवस्था में बोर्ड नीतिगत फैसलों से जुड़ी भूमिका निभाता है जबकि अधिकारी उन फैसलों को जमीन पर लागू कराने का काम करते हैं।

    उत्तराखंड के बदरीनाथ और केदारनाथ धाम के प्रशासन में भी CEO की अहम भूमिका है। बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति के अंतर्गत दोनों प्रमुख धामों की व्यवस्थाएं संचालित होती हैं। समिति में अध्यक्ष और उपाध्यक्ष जैसे पदों के साथ CEO का प्रशासनिक ढांचा भी मौजूद है। CEO के अधीन अलग-अलग अधिकारी मंदिर व्यवस्था से जुड़े कार्यों को देखते हैं। यहां भी धार्मिक परंपराओं और प्रशासनिक कामकाज के बीच जिम्मेदारियों का स्पष्ट विभाजन देखने को मिलता है।

    ओडिशा के पुरी स्थित जगन्नाथ मंदिर में पद का नाम CEO नहीं बल्कि चीफ एडमिनिस्ट्रेटर है। यह अधिकारी मंदिर की प्रशासनिक व्यवस्था में केंद्रीय भूमिका निभाता है। उसके जिम्मे मंदिर की संपत्ति श्रद्धालुओं की सुविधाएं साफ-सफाई अनुशासन सुरक्षा और धन तथा आभूषणों की सुरक्षित देखरेख जैसे महत्वपूर्ण काम होते हैं। कानून के तहत चीफ एडमिनिस्ट्रेटर मंदिर प्रबंध समिति के सचिव और मुख्य कार्यकारी अधिकारी की भूमिका भी निभाता है।

    जम्मू स्थित माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड में भी CEO का पद मौजूद है। यहां बोर्ड नीतिगत स्तर पर फैसले करता है जबकि CEO और उनकी टीम श्रद्धालुओं की सुविधाओं यात्रा व्यवस्था सुरक्षा और रोजमर्रा के प्रशासन को संचालित करती है।

    दरअसल बड़े मंदिरों में CEO जैसी व्यवस्था का मकसद धार्मिक परंपराओं को बदलना नहीं बल्कि विशाल स्तर पर होने वाले प्रशासनिक काम को पेशेवर तरीके से चलाना है। लाखों श्रद्धालुओं की आवाजाही दान और चढ़ावे का प्रबंधन सुरक्षा साफ-सफाई तकनीकी व्यवस्था और मंदिर की संपत्तियों की देखरेख जैसे कामों के लिए एक मजबूत प्रशासनिक ढांचा जरूरी होता है। अयोध्या के राम मंदिर में CEO की नियुक्ति के बाद अब इस व्यवस्था को लेकर देशभर में चर्चा तेज हो गई है।

  • राम मंदिर चढ़ावा मामले पर CM योगी का पलटवार, बोले- दोषी साधु-संत नहीं, विपक्ष का रवैया सनातन विरोधी

    राम मंदिर चढ़ावा मामले पर CM योगी का पलटवार, बोले- दोषी साधु-संत नहीं, विपक्ष का रवैया सनातन विरोधी


    लखनऊ। राम मंदिर चढ़ावा चोरी के मुद्दे पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने समाजवादी पार्टी और कांग्रेस पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि मामले की जांच के लिए गठित एसआईटी की पड़ताल में अब तक कोई साधु-संत दोषी नहीं पाया गया है। ऐसे में पूरे संत समाज और मंदिर से जुड़े कर्मचारियों पर आरोप लगाना अनुचित है।

    मुख्यमंत्री ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि सीसीटीवी फुटेज के आधार पर आरोपितों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने बताया कि जांच के दौरान न्यायालय के निर्देश पर एसआईटी का पुनर्गठन भी किया गया, लेकिन अब तक की जांच में किसी साधु-संत की संलिप्तता सामने नहीं आई।

    ‘सनातन और रामजन्मभूमि का हमेशा विरोध किया’
    योगी आदित्यनाथ ने कहा कि सपा और कांग्रेस लगातार रामजन्मभूमि, भगवान राम और सनातन परंपरा के प्रति विरोध का रुख अपनाती रही हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि संसद और सदन के भीतर विपक्ष की ओर से लगाए गए आरोप सनातन आस्था का अपमान हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि जिन लोगों पर कार्रवाई हो रही है, उनका भाजपा या संत समाज से कोई संबंध नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि रामलला की प्राण प्रतिष्ठा समारोह का निमंत्रण मिलने के बावजूद विपक्ष के कई नेताओं ने उसमें भाग नहीं लिया, जबकि अब वही लोग आस्था की बात कर रहे हैं।

    ‘यूपी की छवि खराब करने की कोशिश’
    मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि विपक्ष उत्तर प्रदेश की छवि धूमिल करने का प्रयास कर रहा है। उन्होंने कहा कि राज्य अब बीमारू प्रदेश की छवि से बाहर निकलकर देश की शीर्ष अर्थव्यवस्थाओं में अपनी जगह बना रहा है, लेकिन विपक्ष इसे स्वीकार नहीं कर पा रहा है। उन्होंने सदन में हुए हंगामे और मार्शलों के साथ धक्कामुक्की की भी निंदा करते हुए कहा कि यह लोकतांत्रिक परंपराओं और संवैधानिक मूल्यों के विपरीत है। उनके अनुसार, इस तरह का व्यवहार प्रदेश में धार्मिक पर्यटन और विकास की गति को प्रभावित करने का प्रयास है।

    विधानसभा में हंगामे पर भी जताई नाराजगी
    मुख्यमंत्री ने कहा कि विधानसभा में अनुपूरक बजट पर चर्चा का एजेंडा पहले से तय था, लेकिन विपक्ष ने बजट पर चर्चा करने के बजाय दूसरे मुद्दों को लेकर व्यवधान उत्पन्न किया। उन्होंने इसे लोकतांत्रिक प्रक्रिया के प्रति गैर-जिम्मेदाराना रवैया बताते हुए विपक्ष के आचरण को “शर्मनाक” करार दिया।

  • राम मंदिर की व्यवस्था में एक और बड़ा बदलाव…. पालक के तौर पर नियुक्त भैयाजी जोशी भी दायित्व से मुक्त

    राम मंदिर की व्यवस्था में एक और बड़ा बदलाव…. पालक के तौर पर नियुक्त भैयाजी जोशी भी दायित्व से मुक्त


    अयोध्या।
    अयोध्या (Ayodhya) के राम मंदिर (Ram Mandir) में दान चोरी की घटना के बाद से मची उथल-पुथल थम नहीं रही है। चंपतराय (Champat Rai), डॉ. अनिल मिश्र (Dr. Anil Mishra) और गोपाल राव (Gopal Rao) के हटने के बाद अब संगठन संरक्षक के तौर पर राम मंदिर के पालक नियुक्त राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय पदाधिकारी भैयाजी जोशी (Bhaiyaji Joshi) भी दायित्व से मुक्त कर दिए गए हैं। सूत्रों की मानें तो पालक की जिम्मेदारी के लिए दूसरे बड़े और कद्दावर चेहरे की तलाश शुरू हो चुकी है। इसमें दिल्ली के वरिष्ठ प्रचारक का नाम सबसे ऊपर चल रहा है।

    संघ का शीर्ष नेतृत्व इस मुद्दे पर अंतर्द्वंद्व में फंसा है। इस विषय पर संघ का थिंक टैंक दो खेमों में बंट गया है। एक खेमा राम मंदिर मामलों से संघ को दूर रखने का हिमायती है तो दूसरा वकालत कर रहा है कि मंदिर पर संगठन का अंकुश जरूरी है। इसके पीछे दोनों खेमों के अपने-अपने तर्क हैं। इस कारण पालक का नाम घोषित करने में देरी हो रही है।


    ट्रस्ट की बैठकों में हमेशा शामिल होते रहे

    श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के गठन और जमीन खरीद फरोख्त को लेकर हुए विवाद के बाद संघ नेतृत्व ने सर कार्यवाह पद से स्वास्थ्य कारणों से सेवामुक्त हुए भैयाजी जोशी को राम मंदिर का पालक नियुक्त कर उनका केंद्र लखनऊ तय किया था। इसके कारण वह प्रायः ट्रस्ट की बैठकों में शामिल होते थे।


    चंपत राय के लेटर बम से चिंतित था नेतृत्व

    चढ़ावा चोरी की घटना के दौरान भी मंदिर पालक का नाम चर्चा में आया, लेकिन उनका कोई सार्वजनिक बयान नहीं आया। फिर भी 12 जून को लखनऊ में ट्रस्ट पदाधिकारियों के साथ हुई बैठक में वह शामिल रहे। इसके पहले छह जून को चढ़ावा चोरी की प्राथमिकी दर्ज कराने गए चंपतराय को रोकने में उनका हाथ होने की आशंका जताई गई मगर यह पुष्ट नहीं हो सका। अब पालक के पद से मुक्ति को उसी घटना से जोड़ा जा रहा है। खास बात यह भी है कि एफआईआर न कराने की वजह ही चंपत राय के त्यागपत्र का सबसे प्रमुख कारण थी।

    छह जुलाई को हुई ट्रस्ट की बैठक में चंपत राय का इस्तीफा स्वीकार करने के ऐलान के बाद सात जुलाई को चंपतराय ने लेटर बम फोड़ा था। इस लेटर के जरिए चंपतराय ने चढ़ावा गिनती के अनुबंध से सम्बन्धित जानकारी को सोशल मीडिया पर साझा किया था। उन्होंने उस पत्र में कहा था कि फिलहाल मैं मौन हूं लेकिन एसआईटी की जांच के बाद हर सवाल का उत्तर दूंगा। उन्होंने कहा कि कलंक लेकर नहीं जाऊंगा। उनके इस ऐलान से शीर्ष नेतृत्व चिंतित था कि कहीं कोई नया बखेड़ा न खड़ा हो जाए, इसीलिए उन्हें मनाने की कोशिशें हुईं। संतों को भी उनके समर्थन में कर उन्हें दिलासा दी गई।

  • केंद्र सरकार आज लोकसभा में पेश करेगी 3 विधेयक…. राम मंदिर चढ़ावा मामले में हंगामे के आसार….

    केंद्र सरकार आज लोकसभा में पेश करेगी 3 विधेयक…. राम मंदिर चढ़ावा मामले में हंगामे के आसार….


    नई दिल्ली
    । संसद (Parliament) के मानसून सत्र (Monsoon Session) में केंद्र सरकार (Central government) ने लोकसभा (Lok Sabha) में तीन विधेयकों को सूचीबद्ध किया है। सरकार की कोशिश बिलों को पारित कराने की होगी। वहीं, विपक्ष छात्रों पर पुलिस कार्रवाई, चढ़ावा चोरी समेत अन्य मुद्दों पर हमलावर रहेगा। केंद्र सरकार (Central government) जिन विधेयकों को पेश करेगा उनमें सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीशों की संख्या बढ़ाकर 37 करने संबंधी विधेयक भी शामिल है। इसके अलावा, सरकार भारतीय सांख्यिकी संस्थान (इंडियन स्टेटिस्टिकल इंस्टीट्यूट) के लिए व्यापक वैधानिक ढांचा उपलब्ध कराने तथा सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (एमएसएमई) विकास अधिनियम में संशोधन से जुड़े विधेयक भी संसद में पेश करने की तैयारी में है।


    चढ़ावा चोरी को मुद्दा बना रहा विपक्ष

    दूसरी ओर प्रमुख विपक्षी दल कांग्रेस ने चढ़ावा चोरी के मुद्दे को धार देना शुरू कर दिया है। विपक्ष चंदा चोरी का सांकेतिक नाट्य रुपांतरण कर प्रदर्शन कर चुका है। मानसून सत्र के पहले दो सप्ताह विपक्ष के हंगामे की भेंट चढ़े। नीट मुद्दे पर आंदोलन करने वाले छात्रों पर पुलिस कार्रवाई को लेकर संसद में चल रहे हंगामे के बीच कांग्रेस ने राम मंदिर में चढ़ावा चोरी के मुद्दे को धार देनी शुरू कर दी है। इससे पहले विपक्ष संसद भवन परिसर में चंदा चोरी का सांकेतिक नाट्य रुपांतरण कर प्रदर्शन कर चुका है।


    शिला पूजन से ही होने लगी चोरी- कांग्रेस

    कांग्रेस के वरिष्ठ नेता प्रमोद तिवारी ने पार्टी मुख्यालय में मीडिया से बातचीत में कहा कि भाजपा का हर नेता चंदा चोर नहीं है, पर सभी चंदा चोर सत्ताधारी दल में ही हैं। पार्टी ने दावा किया कि राम मंदिर में चोरी सिर्फ चढ़ावे तक सीमित नहीं है, बल्कि इस चोरी की शुरुआत शिला पूजन के वक्त से हो गई थी। उन्होंने कहा कि राम मंदिर में सिर्फ चढ़ावे की चोरी नहीं हुई, बल्कि शिला पूजन से चोरी शुरू हो गई थी। उन्होंने कहा कि वह खुद अवध के रहने वाले हैं। 1985 से 90 के बीच पर्यटन मंत्री रहे हैं और उन्होंने पूरे आंदोलन को करीब से देखा है।

    तिवारी ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी राजनीतिक लाभ के लिए लोकसभा चुनाव से पहले राम मंदिर चाहते थे। इसलिए उन्होंने एक अधूरे मंदिर का प्राण प्रतिष्ठा समारोह कर दिया, जो कि एक अशुभ कार्य था। वहीं, इस समारोह में धार्मिक अनुष्ठानों के लिए शंकराचार्यों को भी आमंत्रित नहीं किया गया था। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने पूरी प्रक्रिया की कमान खुद संभाली और मंदिर ट्रस्ट के प्रत्येक सदस्य की नियुक्ति उनकी व्यक्तिगत पसंद के आधार पर की गई। ऐसे में पीएम ने इसका श्रेय लिया है, तो उनकी पसंद से नियुक्त किए गए लोगों की चोरी से वह खुद को अलग नहीं कर सकते। क्योंकि, उन्होंने ही जिम्मेदारी सौंपी थी।

    भाजपा बोली- राहुल गांधी और पप्पू यादव माफी मांगें
    राम मंदिर चढ़ावा प्रकरण को लेकर संसद परिसर में किए गए एक व्यंग्य-नाटक को लेकर सियासत तेज हो गई है। भाजपा और विश्व हिंदू परिषद (वीएचपी) ने रविवार को लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी और निर्दलीय सांसद पप्पू यादव पर हिंदू भावनाओं को आहत करने का आरोप लगाते हुए सार्वजनिक माफी की मांग की।

    भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव तरुण चुघ ने कहा कि इस प्रदर्शन से करोड़ों रामभक्तों की भावनाएं आहत हुई हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि यह केवल राजनीतिक विरोध नहीं, बल्कि सुनियोजित तरीके से हिंदू आस्था पर हमला है। चुघ ने कहा कि राहुल गांधी और इस प्रदर्शन में शामिल सभी नेताओं को देश और दुनिया भर के हिंदुओं से सार्वजनिक रूप से माफी मांगनी चाहिए। उन्होंने कहा कि जिन नेताओं ने राम जन्मभूमि आंदोलन का विरोध किया था और राम मंदिर के निर्माण का बहिष्कार किया था, वे अब मंदिर से जुड़े प्रतीकों का मजाक उड़ा रहे हैं।

    भाजपा नेता ने आरोप लगाया कि कांग्रेस और इंडिया गठबंधन की राजनीति अब केवल सनातन का विरोध करने तक सीमित रह गई है। चुघ ने कहा कि पहले सनातन को ‘डेंगू’ और ‘वायरस’ कहा गया और अब राम मंदिर से जुड़े आस्था के प्रतीकों का मजाक उड़ाया जा रहा है। वीएचपी नेता सुरेंद्र गुप्ता ने भी प्रदर्शन को अशोभनीय बताते हुए कहा कि इससे सनातन धर्म और संत समाज का अपमान हुआ है। उन्होंने विपक्ष से राजनीतिक विरोध के नाम पर भारत की संस्कृति, हिंदुओं, संतों और मंदिरों का अपमान बंद करने की अपील की। वहीं, पप्पू यादव ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि उनका विरोध प्रदर्शन सनातन और करोड़ों लोगों की आस्था की रक्षा के लिए था। उन्होंने कहा कि वे किसी भी प्राथमिकी या कार्रवाई से डरने वाले नहीं हैं।

  • Ayodhya: राम मंदिर चढ़ावे की निगरानी करेंगी 8 लोगों की टीम… 360 डिग्री वाले कैमरों से चप्पे-चप्पे पर नजर

    Ayodhya: राम मंदिर चढ़ावे की निगरानी करेंगी 8 लोगों की टीम… 360 डिग्री वाले कैमरों से चप्पे-चप्पे पर नजर


    अयोध्या।
    राम मंदिर (Ram Mandir) में कथित चढ़ावा चोरी के विवाद के बाद अब श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र (Shri Ram Janmabhoomi Teerth Kshetra) ने अपना सर्विलांस सिस्टम बेहद सख्त कर दिया है। राम मंदिर में श्रद्धालु बड़ी संख्या में आ रहे हैं और दान भी कर रहे हैं। 25 जुलाई से दान पेटियों की पूरी वीडियोग्राफी शुरू कर दी गई है। ट्रस्ट के एक सीनियर अधिकारी ने बताया कि दान पात्र के मैनेजमेंट से लेकर दान की गिनती तक की पूरी प्रक्रिया पर निगरानी रखने के लिए 8 सदस्यीय मॉनिटरिंग टीम बनाई गई है। इसके अलावा 360 डिग्री और एसएलआर कैमरे लगाए गए हैं जो कि चप्पे-चप्पे की पल-पल वीडियो रिकॉर्डिंग कर रहे हैं।


    दो फोटोग्राफर भी रखे गए

    दान पेटी में दान आने से लेकर उनकी गिनती तक पूरी नजर रखी जाएगी। अधिकारियों का कहना है कि इसका उद्देश्य दान में पारदर्शिता, विश्वसनीयता और जिम्मेदारी लाना है। ट्रस्ट ने कहा कि पहले 40 दान पेटियों में से कई पेटियां एक साथ भी खली जाती थीं। हालांकि अब ऐसा नहीं होगा। अब इसकी निगरानी की जाएगी और एक दिन में एक ही पेटी खोली जाएगी। इस सारी प्रक्रिया पर नजर रखने के लिए दो प्रोफेशनल फोटोग्राफर भी रखे गए हैं। इसके अलावा गिनती दो बैंक अधिकारियों की उपस्थिति में होगी।

    अधिकारी ने कहा कि जब एक बॉक्स की काउंटिंग हो जाएगी तभी दूसरा खोला जाएगा और इसे एसबीआई के अधिकारी सील कर देंगे। बता दें कि पुलिस ने चढ़ावा चोरी के आरोपों में कई लोगों को गिरफ्तार किया है। अब ट्रस्ट का कहना है कि बैंक के अधिकारियों की उपस्थिति, कई एजेंसियों की निगरानी और वीडियोग्राफी से आगे ऐसी कोई गुंजाइश ही नहीं रहेगी। न्यास के महंत दिनेन्द्र दास ने कहा, ‘एक दान पेटी खाली करने से पूर्व गणना कक्ष से एक खाली पेटी लाने, उसे रखने और सीलबंद बेटी को गणना कक्ष में ले जाने की संपूर्ण प्रक्रिया की वीडियोग्राफी कराई जाती है।’

    उन्होंने कहा, “वहीं निगरानी टीम में दो बैंक कर्मचारी, न्यास के दो प्रतिनिधि, दो निजी सुरक्षा कर्मी और अन्य कर्मचारी शामिल हैं। दान से भरी पेटी जब गणना कक्ष में पहुंचाई जाती है तो भारतीय स्टेट बैंक के अधिकारी उस पर सील लगाते हैं जिससे यह प्रक्रिया अधिक विश्वसनीय बन जाती है।”

    उन्होंने कहा, ”दान की गणना वाले कक्ष में अतिरिक्त सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं। अब राम मंदिर में एक पैसा भी इधर से उधर नहीं जा सकता.. सबकुछ सुरक्षित है। न्यास आगे भी इस व्यवस्था में सुधार करना जारी रखेगा।” उन्होंने कहा कि यदि प्रशासन सख्त हो जाए तो चोरी अपने आप रुक जाएगी।

    न्यास में हाल ही में हुए बदलाव पर दास ने कहा कि न्यास की बैठक में लिए गए सभी निर्णय सभी को स्वीकार होंगे। उन्होंने कहा कि सावन मास में झूला उत्सव सहित धार्मिक परंपराएं पूर्व की तरह जारी रहेंगी। राम मंदिर में चढावे की कथित चोरी की घटना के बाद विशेष जांच टीम का गठन किया गया। पुलिस ने इस मामले में आरोपी कई लोगों को गिरफ्तार किया है और जांच जारी है।