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  • राम मंदिर चढ़ावा मामले पर CM योगी का पलटवार, बोले- दोषी साधु-संत नहीं, विपक्ष का रवैया सनातन विरोधी

    राम मंदिर चढ़ावा मामले पर CM योगी का पलटवार, बोले- दोषी साधु-संत नहीं, विपक्ष का रवैया सनातन विरोधी


    लखनऊ। राम मंदिर चढ़ावा चोरी के मुद्दे पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने समाजवादी पार्टी और कांग्रेस पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि मामले की जांच के लिए गठित एसआईटी की पड़ताल में अब तक कोई साधु-संत दोषी नहीं पाया गया है। ऐसे में पूरे संत समाज और मंदिर से जुड़े कर्मचारियों पर आरोप लगाना अनुचित है।

    मुख्यमंत्री ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि सीसीटीवी फुटेज के आधार पर आरोपितों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने बताया कि जांच के दौरान न्यायालय के निर्देश पर एसआईटी का पुनर्गठन भी किया गया, लेकिन अब तक की जांच में किसी साधु-संत की संलिप्तता सामने नहीं आई।

    ‘सनातन और रामजन्मभूमि का हमेशा विरोध किया’
    योगी आदित्यनाथ ने कहा कि सपा और कांग्रेस लगातार रामजन्मभूमि, भगवान राम और सनातन परंपरा के प्रति विरोध का रुख अपनाती रही हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि संसद और सदन के भीतर विपक्ष की ओर से लगाए गए आरोप सनातन आस्था का अपमान हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि जिन लोगों पर कार्रवाई हो रही है, उनका भाजपा या संत समाज से कोई संबंध नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि रामलला की प्राण प्रतिष्ठा समारोह का निमंत्रण मिलने के बावजूद विपक्ष के कई नेताओं ने उसमें भाग नहीं लिया, जबकि अब वही लोग आस्था की बात कर रहे हैं।

    ‘यूपी की छवि खराब करने की कोशिश’
    मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि विपक्ष उत्तर प्रदेश की छवि धूमिल करने का प्रयास कर रहा है। उन्होंने कहा कि राज्य अब बीमारू प्रदेश की छवि से बाहर निकलकर देश की शीर्ष अर्थव्यवस्थाओं में अपनी जगह बना रहा है, लेकिन विपक्ष इसे स्वीकार नहीं कर पा रहा है। उन्होंने सदन में हुए हंगामे और मार्शलों के साथ धक्कामुक्की की भी निंदा करते हुए कहा कि यह लोकतांत्रिक परंपराओं और संवैधानिक मूल्यों के विपरीत है। उनके अनुसार, इस तरह का व्यवहार प्रदेश में धार्मिक पर्यटन और विकास की गति को प्रभावित करने का प्रयास है।

    विधानसभा में हंगामे पर भी जताई नाराजगी
    मुख्यमंत्री ने कहा कि विधानसभा में अनुपूरक बजट पर चर्चा का एजेंडा पहले से तय था, लेकिन विपक्ष ने बजट पर चर्चा करने के बजाय दूसरे मुद्दों को लेकर व्यवधान उत्पन्न किया। उन्होंने इसे लोकतांत्रिक प्रक्रिया के प्रति गैर-जिम्मेदाराना रवैया बताते हुए विपक्ष के आचरण को “शर्मनाक” करार दिया।

  • राम मंदिर की व्यवस्था में एक और बड़ा बदलाव…. पालक के तौर पर नियुक्त भैयाजी जोशी भी दायित्व से मुक्त

    राम मंदिर की व्यवस्था में एक और बड़ा बदलाव…. पालक के तौर पर नियुक्त भैयाजी जोशी भी दायित्व से मुक्त


    अयोध्या।
    अयोध्या (Ayodhya) के राम मंदिर (Ram Mandir) में दान चोरी की घटना के बाद से मची उथल-पुथल थम नहीं रही है। चंपतराय (Champat Rai), डॉ. अनिल मिश्र (Dr. Anil Mishra) और गोपाल राव (Gopal Rao) के हटने के बाद अब संगठन संरक्षक के तौर पर राम मंदिर के पालक नियुक्त राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय पदाधिकारी भैयाजी जोशी (Bhaiyaji Joshi) भी दायित्व से मुक्त कर दिए गए हैं। सूत्रों की मानें तो पालक की जिम्मेदारी के लिए दूसरे बड़े और कद्दावर चेहरे की तलाश शुरू हो चुकी है। इसमें दिल्ली के वरिष्ठ प्रचारक का नाम सबसे ऊपर चल रहा है।

    संघ का शीर्ष नेतृत्व इस मुद्दे पर अंतर्द्वंद्व में फंसा है। इस विषय पर संघ का थिंक टैंक दो खेमों में बंट गया है। एक खेमा राम मंदिर मामलों से संघ को दूर रखने का हिमायती है तो दूसरा वकालत कर रहा है कि मंदिर पर संगठन का अंकुश जरूरी है। इसके पीछे दोनों खेमों के अपने-अपने तर्क हैं। इस कारण पालक का नाम घोषित करने में देरी हो रही है।


    ट्रस्ट की बैठकों में हमेशा शामिल होते रहे

    श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के गठन और जमीन खरीद फरोख्त को लेकर हुए विवाद के बाद संघ नेतृत्व ने सर कार्यवाह पद से स्वास्थ्य कारणों से सेवामुक्त हुए भैयाजी जोशी को राम मंदिर का पालक नियुक्त कर उनका केंद्र लखनऊ तय किया था। इसके कारण वह प्रायः ट्रस्ट की बैठकों में शामिल होते थे।


    चंपत राय के लेटर बम से चिंतित था नेतृत्व

    चढ़ावा चोरी की घटना के दौरान भी मंदिर पालक का नाम चर्चा में आया, लेकिन उनका कोई सार्वजनिक बयान नहीं आया। फिर भी 12 जून को लखनऊ में ट्रस्ट पदाधिकारियों के साथ हुई बैठक में वह शामिल रहे। इसके पहले छह जून को चढ़ावा चोरी की प्राथमिकी दर्ज कराने गए चंपतराय को रोकने में उनका हाथ होने की आशंका जताई गई मगर यह पुष्ट नहीं हो सका। अब पालक के पद से मुक्ति को उसी घटना से जोड़ा जा रहा है। खास बात यह भी है कि एफआईआर न कराने की वजह ही चंपत राय के त्यागपत्र का सबसे प्रमुख कारण थी।

    छह जुलाई को हुई ट्रस्ट की बैठक में चंपत राय का इस्तीफा स्वीकार करने के ऐलान के बाद सात जुलाई को चंपतराय ने लेटर बम फोड़ा था। इस लेटर के जरिए चंपतराय ने चढ़ावा गिनती के अनुबंध से सम्बन्धित जानकारी को सोशल मीडिया पर साझा किया था। उन्होंने उस पत्र में कहा था कि फिलहाल मैं मौन हूं लेकिन एसआईटी की जांच के बाद हर सवाल का उत्तर दूंगा। उन्होंने कहा कि कलंक लेकर नहीं जाऊंगा। उनके इस ऐलान से शीर्ष नेतृत्व चिंतित था कि कहीं कोई नया बखेड़ा न खड़ा हो जाए, इसीलिए उन्हें मनाने की कोशिशें हुईं। संतों को भी उनके समर्थन में कर उन्हें दिलासा दी गई।

  • केंद्र सरकार आज लोकसभा में पेश करेगी 3 विधेयक…. राम मंदिर चढ़ावा मामले में हंगामे के आसार….

    केंद्र सरकार आज लोकसभा में पेश करेगी 3 विधेयक…. राम मंदिर चढ़ावा मामले में हंगामे के आसार….


    नई दिल्ली
    । संसद (Parliament) के मानसून सत्र (Monsoon Session) में केंद्र सरकार (Central government) ने लोकसभा (Lok Sabha) में तीन विधेयकों को सूचीबद्ध किया है। सरकार की कोशिश बिलों को पारित कराने की होगी। वहीं, विपक्ष छात्रों पर पुलिस कार्रवाई, चढ़ावा चोरी समेत अन्य मुद्दों पर हमलावर रहेगा। केंद्र सरकार (Central government) जिन विधेयकों को पेश करेगा उनमें सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीशों की संख्या बढ़ाकर 37 करने संबंधी विधेयक भी शामिल है। इसके अलावा, सरकार भारतीय सांख्यिकी संस्थान (इंडियन स्टेटिस्टिकल इंस्टीट्यूट) के लिए व्यापक वैधानिक ढांचा उपलब्ध कराने तथा सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (एमएसएमई) विकास अधिनियम में संशोधन से जुड़े विधेयक भी संसद में पेश करने की तैयारी में है।


    चढ़ावा चोरी को मुद्दा बना रहा विपक्ष

    दूसरी ओर प्रमुख विपक्षी दल कांग्रेस ने चढ़ावा चोरी के मुद्दे को धार देना शुरू कर दिया है। विपक्ष चंदा चोरी का सांकेतिक नाट्य रुपांतरण कर प्रदर्शन कर चुका है। मानसून सत्र के पहले दो सप्ताह विपक्ष के हंगामे की भेंट चढ़े। नीट मुद्दे पर आंदोलन करने वाले छात्रों पर पुलिस कार्रवाई को लेकर संसद में चल रहे हंगामे के बीच कांग्रेस ने राम मंदिर में चढ़ावा चोरी के मुद्दे को धार देनी शुरू कर दी है। इससे पहले विपक्ष संसद भवन परिसर में चंदा चोरी का सांकेतिक नाट्य रुपांतरण कर प्रदर्शन कर चुका है।


    शिला पूजन से ही होने लगी चोरी- कांग्रेस

    कांग्रेस के वरिष्ठ नेता प्रमोद तिवारी ने पार्टी मुख्यालय में मीडिया से बातचीत में कहा कि भाजपा का हर नेता चंदा चोर नहीं है, पर सभी चंदा चोर सत्ताधारी दल में ही हैं। पार्टी ने दावा किया कि राम मंदिर में चोरी सिर्फ चढ़ावे तक सीमित नहीं है, बल्कि इस चोरी की शुरुआत शिला पूजन के वक्त से हो गई थी। उन्होंने कहा कि राम मंदिर में सिर्फ चढ़ावे की चोरी नहीं हुई, बल्कि शिला पूजन से चोरी शुरू हो गई थी। उन्होंने कहा कि वह खुद अवध के रहने वाले हैं। 1985 से 90 के बीच पर्यटन मंत्री रहे हैं और उन्होंने पूरे आंदोलन को करीब से देखा है।

    तिवारी ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी राजनीतिक लाभ के लिए लोकसभा चुनाव से पहले राम मंदिर चाहते थे। इसलिए उन्होंने एक अधूरे मंदिर का प्राण प्रतिष्ठा समारोह कर दिया, जो कि एक अशुभ कार्य था। वहीं, इस समारोह में धार्मिक अनुष्ठानों के लिए शंकराचार्यों को भी आमंत्रित नहीं किया गया था। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने पूरी प्रक्रिया की कमान खुद संभाली और मंदिर ट्रस्ट के प्रत्येक सदस्य की नियुक्ति उनकी व्यक्तिगत पसंद के आधार पर की गई। ऐसे में पीएम ने इसका श्रेय लिया है, तो उनकी पसंद से नियुक्त किए गए लोगों की चोरी से वह खुद को अलग नहीं कर सकते। क्योंकि, उन्होंने ही जिम्मेदारी सौंपी थी।

    भाजपा बोली- राहुल गांधी और पप्पू यादव माफी मांगें
    राम मंदिर चढ़ावा प्रकरण को लेकर संसद परिसर में किए गए एक व्यंग्य-नाटक को लेकर सियासत तेज हो गई है। भाजपा और विश्व हिंदू परिषद (वीएचपी) ने रविवार को लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी और निर्दलीय सांसद पप्पू यादव पर हिंदू भावनाओं को आहत करने का आरोप लगाते हुए सार्वजनिक माफी की मांग की।

    भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव तरुण चुघ ने कहा कि इस प्रदर्शन से करोड़ों रामभक्तों की भावनाएं आहत हुई हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि यह केवल राजनीतिक विरोध नहीं, बल्कि सुनियोजित तरीके से हिंदू आस्था पर हमला है। चुघ ने कहा कि राहुल गांधी और इस प्रदर्शन में शामिल सभी नेताओं को देश और दुनिया भर के हिंदुओं से सार्वजनिक रूप से माफी मांगनी चाहिए। उन्होंने कहा कि जिन नेताओं ने राम जन्मभूमि आंदोलन का विरोध किया था और राम मंदिर के निर्माण का बहिष्कार किया था, वे अब मंदिर से जुड़े प्रतीकों का मजाक उड़ा रहे हैं।

    भाजपा नेता ने आरोप लगाया कि कांग्रेस और इंडिया गठबंधन की राजनीति अब केवल सनातन का विरोध करने तक सीमित रह गई है। चुघ ने कहा कि पहले सनातन को ‘डेंगू’ और ‘वायरस’ कहा गया और अब राम मंदिर से जुड़े आस्था के प्रतीकों का मजाक उड़ाया जा रहा है। वीएचपी नेता सुरेंद्र गुप्ता ने भी प्रदर्शन को अशोभनीय बताते हुए कहा कि इससे सनातन धर्म और संत समाज का अपमान हुआ है। उन्होंने विपक्ष से राजनीतिक विरोध के नाम पर भारत की संस्कृति, हिंदुओं, संतों और मंदिरों का अपमान बंद करने की अपील की। वहीं, पप्पू यादव ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि उनका विरोध प्रदर्शन सनातन और करोड़ों लोगों की आस्था की रक्षा के लिए था। उन्होंने कहा कि वे किसी भी प्राथमिकी या कार्रवाई से डरने वाले नहीं हैं।

  • Ayodhya: राम मंदिर चढ़ावे की निगरानी करेंगी 8 लोगों की टीम… 360 डिग्री वाले कैमरों से चप्पे-चप्पे पर नजर

    Ayodhya: राम मंदिर चढ़ावे की निगरानी करेंगी 8 लोगों की टीम… 360 डिग्री वाले कैमरों से चप्पे-चप्पे पर नजर


    अयोध्या।
    राम मंदिर (Ram Mandir) में कथित चढ़ावा चोरी के विवाद के बाद अब श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र (Shri Ram Janmabhoomi Teerth Kshetra) ने अपना सर्विलांस सिस्टम बेहद सख्त कर दिया है। राम मंदिर में श्रद्धालु बड़ी संख्या में आ रहे हैं और दान भी कर रहे हैं। 25 जुलाई से दान पेटियों की पूरी वीडियोग्राफी शुरू कर दी गई है। ट्रस्ट के एक सीनियर अधिकारी ने बताया कि दान पात्र के मैनेजमेंट से लेकर दान की गिनती तक की पूरी प्रक्रिया पर निगरानी रखने के लिए 8 सदस्यीय मॉनिटरिंग टीम बनाई गई है। इसके अलावा 360 डिग्री और एसएलआर कैमरे लगाए गए हैं जो कि चप्पे-चप्पे की पल-पल वीडियो रिकॉर्डिंग कर रहे हैं।


    दो फोटोग्राफर भी रखे गए

    दान पेटी में दान आने से लेकर उनकी गिनती तक पूरी नजर रखी जाएगी। अधिकारियों का कहना है कि इसका उद्देश्य दान में पारदर्शिता, विश्वसनीयता और जिम्मेदारी लाना है। ट्रस्ट ने कहा कि पहले 40 दान पेटियों में से कई पेटियां एक साथ भी खली जाती थीं। हालांकि अब ऐसा नहीं होगा। अब इसकी निगरानी की जाएगी और एक दिन में एक ही पेटी खोली जाएगी। इस सारी प्रक्रिया पर नजर रखने के लिए दो प्रोफेशनल फोटोग्राफर भी रखे गए हैं। इसके अलावा गिनती दो बैंक अधिकारियों की उपस्थिति में होगी।

    अधिकारी ने कहा कि जब एक बॉक्स की काउंटिंग हो जाएगी तभी दूसरा खोला जाएगा और इसे एसबीआई के अधिकारी सील कर देंगे। बता दें कि पुलिस ने चढ़ावा चोरी के आरोपों में कई लोगों को गिरफ्तार किया है। अब ट्रस्ट का कहना है कि बैंक के अधिकारियों की उपस्थिति, कई एजेंसियों की निगरानी और वीडियोग्राफी से आगे ऐसी कोई गुंजाइश ही नहीं रहेगी। न्यास के महंत दिनेन्द्र दास ने कहा, ‘एक दान पेटी खाली करने से पूर्व गणना कक्ष से एक खाली पेटी लाने, उसे रखने और सीलबंद बेटी को गणना कक्ष में ले जाने की संपूर्ण प्रक्रिया की वीडियोग्राफी कराई जाती है।’

    उन्होंने कहा, “वहीं निगरानी टीम में दो बैंक कर्मचारी, न्यास के दो प्रतिनिधि, दो निजी सुरक्षा कर्मी और अन्य कर्मचारी शामिल हैं। दान से भरी पेटी जब गणना कक्ष में पहुंचाई जाती है तो भारतीय स्टेट बैंक के अधिकारी उस पर सील लगाते हैं जिससे यह प्रक्रिया अधिक विश्वसनीय बन जाती है।”

    उन्होंने कहा, ”दान की गणना वाले कक्ष में अतिरिक्त सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं। अब राम मंदिर में एक पैसा भी इधर से उधर नहीं जा सकता.. सबकुछ सुरक्षित है। न्यास आगे भी इस व्यवस्था में सुधार करना जारी रखेगा।” उन्होंने कहा कि यदि प्रशासन सख्त हो जाए तो चोरी अपने आप रुक जाएगी।

    न्यास में हाल ही में हुए बदलाव पर दास ने कहा कि न्यास की बैठक में लिए गए सभी निर्णय सभी को स्वीकार होंगे। उन्होंने कहा कि सावन मास में झूला उत्सव सहित धार्मिक परंपराएं पूर्व की तरह जारी रहेंगी। राम मंदिर में चढावे की कथित चोरी की घटना के बाद विशेष जांच टीम का गठन किया गया। पुलिस ने इस मामले में आरोपी कई लोगों को गिरफ्तार किया है और जांच जारी है।

  • राम मंदिर में चढ़ावा प्रबंधन का नया सिस्टम, हर चरण की वीडियोग्राफी और 8 सदस्यीय निगरानी टीम तैनात

    राम मंदिर में चढ़ावा प्रबंधन का नया सिस्टम, हर चरण की वीडियोग्राफी और 8 सदस्यीय निगरानी टीम तैनात


    अयोध्या  अयोध्या स्थित श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में हाल ही में सामने आए चढ़ावा चोरी प्रकरण के बाद श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने दान व्यवस्था को पूरी तरह पारदर्शी और सुरक्षित बनाने के लिए बड़े बदलाव लागू किए हैं। 25 जुलाई से प्रभावी नई व्यवस्था के तहत अब मंदिर में आने वाले श्रद्धालुओं के चढ़ावे की पूरी प्रक्रिया आठ सदस्यीय निगरानी टीम की देखरेख में संचालित की जा रही है। दानपात्रों को खाली करने से लेकर गणना कक्ष तक पहुंचाने और धनराशि को सीलबंद करने तक हर चरण की वीडियोग्राफी अनिवार्य कर दी गई है। ट्रस्ट का कहना है कि इस नई प्रणाली का उद्देश्य श्रद्धालुओं के विश्वास को और मजबूत करना तथा भविष्य में किसी भी तरह की अनियमितता की संभावना को समाप्त करना है।

    नई व्यवस्था के तहत मंदिर परिसर में स्थापित लगभग 40 दानपात्रों को अब एक साथ नहीं खोला जाएगा। प्रत्येक दानपात्र को अलग-अलग दिन निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार खाली किया जाएगा। सबसे पहले गणना कक्ष से खाली बक्सा निकाला जाएगा, जिसे निर्धारित सुरक्षा व्यवस्था के बीच संबंधित दानपात्र तक ले जाया जाएगा। इसके बाद दानराशि उस बक्से में रखी जाएगी और उसे पूरी तरह सीलबंद कर पुनः गणना कक्ष तक पहुंचाया जाएगा। इस दौरान पूरी प्रक्रिया 360 डिग्री कैमरों और एसएलआर कैमरों से रिकॉर्ड की जाएगी ताकि हर गतिविधि का स्पष्ट डिजिटल रिकॉर्ड उपलब्ध रहे।

    ट्रस्ट ने इस कार्य के लिए दो पेशेवर वीडियोग्राफरों की नियुक्ति की है। वहीं पूरी प्रक्रिया की निगरानी आठ सदस्यीय टीम करेगी, जिसमें दो बैंक कर्मचारी, दो ट्रस्ट प्रतिनिधि, दो एसआईएस सुरक्षा कर्मी और अन्य अधिकृत सदस्य शामिल रहेंगे। गणना कक्ष में पहुंचने के बाद स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के अधिकारी दान से भरे बक्सों को निर्धारित प्रक्रिया के तहत सीलबंद करेंगे। इसके बाद धनराशि की गणना और बैंकिंग प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी।

    इस बीच ट्रस्ट के कोष प्रबंधन एवं निगरानी समिति के सदस्य जगदीश आफले ने स्पष्ट किया है कि श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट और स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के बीच किसी प्रकार का कोई विवाद या गतिरोध नहीं है। उन्होंने कहा कि मंदिर के दान की जमा और निकासी की प्रक्रिया पहले की तरह सामान्य रूप से जारी है और मंदिर परिसर में कार्यरत कर्मचारियों को समय पर भुगतान भी किया जा रहा है। ट्रस्ट के सचिव पद को लेकर उन्होंने बताया कि दो सितंबर को प्रस्तावित ट्रस्ट की बैठक में नए सचिव के नाम पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा।

    उधर चढ़ावा चोरी प्रकरण की जांच भी लगातार आगे बढ़ रही है। इस मामले में एसआईटी की जांच का सामना कर रहे ट्रस्ट सदस्य डॉ. अनिल मिश्रा करीब एक महीने तक सार्वजनिक गतिविधियों से दूर रहने के बाद फिर सक्रिय नजर आने लगे हैं। पिछले कुछ दिनों में उन्होंने कई धार्मिक और सामाजिक कार्यक्रमों में भाग लिया है तथा रामनगरी के संतों और धर्माचार्यों से मुलाकातें भी की हैं। जांच एजेंसियां उनसे पूछताछ कर चुकी हैं और मंदिर निर्माण कार्यों में कथित अनियमितताओं को लेकर भी जांच जारी है।

    ट्रस्ट का मानना है कि नई निगरानी व्यवस्था से दान प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी बनेगी और श्रद्धालुओं का भरोसा पहले से अधिक मजबूत होगा। आधुनिक तकनीक, बहुस्तरीय निगरानी और बैंकिंग प्रक्रिया की सीधी भागीदारी के जरिए अब चढ़ावे की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है।

  • राम मंदिर चढ़ावा विवाद पर संसद में सपा का प्रदर्शन: दानपेटी लेकर पहुंचीं डिंपल, छात्र आंदोलन पर भी घेरा

    राम मंदिर चढ़ावा विवाद पर संसद में सपा का प्रदर्शन: दानपेटी लेकर पहुंचीं डिंपल, छात्र आंदोलन पर भी घेरा


    लखनऊ। राम मंदिर चढ़ावा चोरी के मुद्दे को लेकर समाजवादी पार्टी ने बुधवार को संसद भवन परिसर में जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। सपा सांसदों ने दानपेटी के साथ प्रदर्शन करते हुए सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। इस दौरान सपा सांसद डिंपल यादव दानपेटी लेकर संसद पहुंचीं और सांसदों के साथ-साथ मीडिया कर्मियों से भी उसमें प्रतीकात्मक रूप से धनराशि डालने की अपील की। इसके बाद कई सांसदों ने दानपेटी में नोट डाले, जबकि पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भी इसमें सहयोग राशि डाली। प्रदर्शन के दौरान सांसदों ने “चढ़ावा चोर, गद्दी छोड़” के नारे लगाए।

    डिंपल यादव ने आरोप लगाया कि चढ़ावे के पैसे का दुरुपयोग हुआ है और मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि इतनी बड़ी घटना के बाद राज्य सरकार को जवाब देना चाहिए कि यह कैसे हुआ। उनका आरोप था कि विशेष जांच दल (SIT) का गठन केवल लोगों का ध्यान भटकाने के लिए किया गया।

    अखिलेश यादव ने कहा कि यदि दानपात्र तक सुरक्षित नहीं रह सके तो व्यवस्था पर सवाल उठना स्वाभाविक है। उन्होंने कहा कि जो लोग आस्था से जुड़े मामलों की रक्षा नहीं कर पाए, उनसे युवाओं के भविष्य की सुरक्षा की भी उम्मीद नहीं की जा सकती।

    इसी दौरान अखिलेश यादव ने छात्र आंदोलन के मुद्दे पर भी राहुल गांधी का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि छात्रों पर पैलेट गन चलाए जाने की घटना गंभीर है और इसकी जिम्मेदारी केंद्रीय गृह मंत्री को लेनी चाहिए।

    उधर, लोकसभा की कार्यवाही बुधवार सुबह 11 बजे शुरू होते ही विपक्ष के हंगामे की भेंट चढ़ गई। लगातार नारेबाजी के कारण सदन की कार्यवाही पहले दोपहर 12 बजे तक और बाद में कई बार स्थगित करनी पड़ी। दोपहर तीन बजे कार्यवाही दोबारा शुरू हुई, लेकिन करीब 22 मिनट ही चल सकी। इस दौरान ‘पब्लिक एग्जामिनेशन (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026’ पारित किया गया। इसके बाद सदन की कार्यवाही गुरुवार सुबह 11 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई।

    पेपर लीक से जुड़े इस संशोधन विधेयक पर लगातार दूसरे दिन चर्चा हुई। इससे पहले मंगलवार को इस विषय पर करीब नौ घंटे तक बहस चली थी।

    इस बीच फैजाबाद (अयोध्या) से सपा सांसद अवधेश प्रसाद ने भी सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार इस मामले में “बड़ी मछलियों” को बचाने का प्रयास कर रही है। उन्होंने दावा किया कि जनता सब देख रही है और आगामी चुनाव में इसका असर दिखाई देगा।

  • राम मंदिर चढ़ावा मामला: इस्तीफे में चंपत राय का बड़ा खुलासा, 81 लाख रुपये लौटाने की बात स्वीकारी

    राम मंदिर चढ़ावा मामला: इस्तीफे में चंपत राय का बड़ा खुलासा, 81 लाख रुपये लौटाने की बात स्वीकारी


    अयोध्या। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्रा के संयुक्त इस्तीफा पत्र से चढ़ावा चोरी मामले में अहम जानकारी सामने आई है। पहली बार सार्वजनिक हुए इस पत्र में दोनों ने स्वीकार किया है कि चोरी की घटना के बाद संबंधित लोगों से 81 लाख रुपये ट्रस्ट को वापस मिले थे। साथ ही, उन्होंने एसआईटी जांच की सिफारिश करने और निष्पक्ष जांच पूरी होने तक ट्रस्ट के कामकाज से स्वयं को अलग करने का भी उल्लेख किया है।

    इस्तीफा पत्र के मुताबिक, 8 जून से दानपात्र की राशि को लेकर मीडिया में लगातार खबरें प्रकाशित होने लगीं, जिससे श्रद्धालुओं में भ्रम और असंतोष की स्थिति पैदा हो गई। पत्र में कहा गया है कि 4 जून की रात दानराशि की गणना के दौरान कुछ युवकों द्वारा कथित चोरी किए जाने की जानकारी एक ट्रस्टी को मिली थी।

    सीसीटीवी फुटेज से हुई पहचान
    पत्र के अनुसार, 5 जून की सुबह सीसीटीवी फुटेज की जांच की गई, जिसमें कुछ युवकों की पहचान हुई। ट्रस्ट ने तत्काल पुलिस में शिकायत दर्ज कराने के बजाय पहले संबंधित युवकों से पूछताछ करने का फैसला किया। इस्तीफा पत्र में दावा किया गया है कि 5 जून की रात से 8 जून के बीच संबंधित युवकों और उनके परिजनों ने कुल 81 लाख रुपये ट्रस्ट को लौटा दिए। साथ ही उन्होंने लिखित रूप में चोरी स्वीकार करते हुए स्वीकृति पत्र भी सौंपे।

    विवाद बढ़ने पर कराई गई एसआईटी जांच
    चंपत राय और अनिल मिश्रा ने पत्र में बताया कि जब यह मामला सार्वजनिक चर्चा का विषय बनने लगा, तब ट्रस्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार से विशेष जांच दल (SIT) गठित कर निष्पक्ष जांच कराने का अनुरोध किया, ताकि पूरे मामले की सच्चाई सामने आ सके और संबंधित सभी लोगों की प्रतिष्ठा बनी रहे। पत्र के अनुसार, राज्य सरकार ने ट्रस्ट के अनुरोध को स्वीकार करते हुए 15 जून से एसआईटी जांच शुरू करा दी।

    जांच पूरी होने तक खुद को किया अलग
    इस्तीफे के अंतिम हिस्से में दोनों पदाधिकारियों ने लिखा कि जब तक पूरे मामले में सत्य स्पष्ट नहीं हो जाता, तब तक वे ट्रस्ट के सभी दायित्वों से स्वयं को अलग रखना उचित समझते हैं। इसी उद्देश्य से उन्होंने अपना त्यागपत्र सौंपा, जिसे ट्रस्ट की 6 जुलाई को आयोजित बैठक में स्वीकार कर लिया गया।

  • राम मंदिर चढ़ावा मामला: SC ने SIT में CA और फोरेंसिक ऑडिटर जोड़ने के दिए निर्देश, दो हफ्ते में मांगी प्रगति रिपोर्ट

    राम मंदिर चढ़ावा मामला: SC ने SIT में CA और फोरेंसिक ऑडिटर जोड़ने के दिए निर्देश, दो हफ्ते में मांगी प्रगति रिपोर्ट


    लखनऊ। अयोध्या के श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी और वित्तीय अनियमितताओं से जुड़े मामले में सोमवार को सुप्रीम कोर्ट ने जांच को लेकर अहम निर्देश जारी किए। मुख्य न्यायाधीश (CJI) की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि जांच को अधिक निष्पक्ष और पारदर्शी बनाने के लिए विशेष जांच दल (SIT) में एक चार्टर्ड अकाउंटेंट (CA) और एक फोरेंसिक ऑडिटर को भी शामिल किया जाए।

    सुनवाई के दौरान अदालत ने स्पष्ट किया कि उसकी प्राथमिकता फिलहाल मामले की निष्पक्ष और प्रभावी जांच सुनिश्चित करना है। CJI ने कहा कि अभी ध्यान केवल जांच की गुणवत्ता पर है और अन्य मुद्दों पर बाद में विचार किया जाएगा।

    सुप्रीम कोर्ट ने विस्तारित SIT को जांच जारी रखने का निर्देश देते हुए तय समय सीमा के भीतर अपनी रिपोर्ट अदालत में पेश करने को कहा। अदालत का मानना है कि वित्तीय विशेषज्ञों के जुड़ने से चढ़ावे और उससे संबंधित लेनदेन की बारीकी से जांच हो सकेगी और यदि किसी प्रकार की वित्तीय गड़बड़ी हुई है तो उसके तथ्य स्पष्ट रूप से सामने आएंगे।

    कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई दो सप्ताह बाद तय की है। साथ ही निर्देश दिया है कि तब तक SIT जांच की प्रगति रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट में प्रस्तुत करे।

  • राम मंदिर चढ़ावा मामले में नई SIT की तैयारी, सुप्रीम कोर्ट में 3 IPS अधिकारियों का पैनल पेश करेगी यूपी सरकार

    राम मंदिर चढ़ावा मामले में नई SIT की तैयारी, सुप्रीम कोर्ट में 3 IPS अधिकारियों का पैनल पेश करेगी यूपी सरकार


    लखनऊ। अयोध्या स्थित श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी और गबन मामले की सुनवाई सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में होगी। इस दौरान उत्तर प्रदेश सरकार नई विशेष जांच टीम (SIT) के गठन के लिए तीन वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों के नाम अदालत के समक्ष प्रस्तुत कर सकती है।

    सूत्रों के अनुसार, प्रस्तावित एसआईटी में लखनऊ रेंज की आईजी किरण एस, अयोध्या के डीआईजी सोमेन वर्मा और अयोध्या के एसएसपी गौरव ग्रोवर को शामिल करने का प्रस्ताव है। इन नामों पर अंतिम निर्णय सुप्रीम कोर्ट करेगा।

    इससे पहले गठित एसआईटी में लखनऊ मंडल के तत्कालीन कमिश्नर विजय विश्वास पंत और वित्त विभाग के विशेष सचिव नील रतन कुमार शामिल थे। अब उनकी जगह दो आईपीएस अधिकारियों को शामिल करने की तैयारी की गई है।

    पहले भी हुई थी कार्रवाई
    राम मंदिर में चढ़ावे के आभूषणों के कथित गबन की शिकायत के बाद यूपी सरकार ने एसआईटी से जांच कराई थी। जांच के आधार पर एफआईआर दर्ज हुई और मामले में कई आरोपियों को गिरफ्तार भी किया गया। इसी विवाद के बीच श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के तत्कालीन महासचिव चंपत राय और ट्रस्ट के एक अन्य पदाधिकारी अनिल मिश्रा ने अपने-अपने पदों से इस्तीफा दे दिया था।

    पुराने पहचान पत्रों से फिर मिलेगी एंट्री
    इस बीच मंदिर प्रशासन ने निर्माण कार्य प्रभावित न हो, इसके लिए एक अंतरिम फैसला लिया है। हाल ही में अमान्य किए गए चंपत राय के हस्ताक्षर वाले पुराने पहचान पत्र और प्रवेश पास फिलहाल दोबारा मान्य कर दिए गए हैं। नई पास व्यवस्था लागू होने तक अधिकृत कर्मचारी, इंजीनियर और तकनीकी अधिकारी इन्हीं पहचान पत्रों के आधार पर मंदिर परिसर में प्रवेश कर सकेंगे।

    निर्माण कार्य प्रभावित होने के बाद लिया गया फैसला
    ट्रस्ट के नेतृत्व में बदलाव के बाद पुराने पहचान पत्रों पर रोक लगा दी गई थी, जिससे मंदिर निर्माण से जुड़ी एजेंसियों के कर्मचारियों को परिसर में प्रवेश में दिक्कतें आने लगी थीं। एलएंडटी, टाटा, इंडिया इंजीनियर्स लिमिटेड और उत्तर प्रदेश राजकीय निर्माण निगम जैसी संस्थाओं के इंजीनियरों और कर्मचारियों के काम पर भी इसका असर पड़ा। मंदिर परिसर में चारदीवारी, संग्रहालय, ट्रस्ट कार्यालय और विश्राम गृह सहित कई परियोजनाओं का कार्य बाधित होने की आशंका को देखते हुए प्रशासन ने फिलहाल पुराने पासों को अस्थायी रूप से फिर से वैध करने का निर्णय लिया है।

  • Ayodhya: चढ़ावा चोरी प्रकरण के बाद राम मंदिर की व्यवस्था में बदलाव… संत समाज को सौंपी बड़ी जिम्मेदारी

    Ayodhya: चढ़ावा चोरी प्रकरण के बाद राम मंदिर की व्यवस्था में बदलाव… संत समाज को सौंपी बड़ी जिम्मेदारी


    अयोध्या।
    श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट (Shri Ram Janmabhoomi Teerth Kshetra Trust) ने राम मंदिर (Ram Temple) की धार्मिक व्यवस्था में बड़ा बदलाव करते हुए पूजा-अर्चना और धार्मिक गतिविधियों की पूरी निगरानी अब अयोध्या के संत समाज को सौंप दी है। ट्रस्ट ने धार्मिक समिति का पुनर्गठन करते हुए स्पष्ट किया है कि अब राम मंदिर (Ram Temple ) की सभी धार्मिक गतिविधियां वैदिक रामानंदी परंपरा के अनुरूप संचालित होंगी और इस संबंध में समिति का निर्णय सर्वोपरि माना जाएगा।

    समिति के अध्यक्ष ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंद देव गिरि (Swami Govind Dev Giri) होंगे, जबकि इसमें अयोध्या के पांच प्रमुख संत राम मंदिर के ट्रस्टी महंत दिनेंद्र दास (निर्मोही अखाड़ा), महंत कमलनयन दास (मणिराम दास छावनी), महंत डॉक्टर रामानंद दास (रामकथा कुंज), अधिकारी राजकुमार दास (रामबल्लबा कुंज) और महंत मिथिलेशनंदिनी शरणको शामिल किया गया है। इनके अलावा जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी वासुदेवानंद सरस्वती, जगद्गुरु स्वामी विश्वप्रसन्नतीर्थ और राम मंदिर ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंद देव गिरि समिति में रहेंगे। नौ सदस्यीय समिति में अयोध्या के संतों का बहुमत रहेगा।

    स्वामी गोविंद देव गिरि ने बताया कि यह भगवान श्रीराम की जन्मभूमि है और यहां सेवा-पूजा रामानंदी वैदिक परंपरा के अनुसार ही होती रहे, यह सुनिश्चित करना समिति का सबसे बड़ा दायित्व होगा। अब मंदिर अयोध्या के संतों की निगरानी में चलेगा और वैदिक रामानंदी परंपरा के अनुसार ही संचालित होगा। ट्रस्ट के इस फैसले को राम मंदिर की धार्मिक व्यवस्था में अब तक का सबसे बड़ा संस्थागत बदलाव माना जा रहा है।


    समिति को मिले पांच बड़े अधिकार

    – मंदिर में नित्य पूजा और सभी धार्मिक अनुष्ठान वैदिक रामानंदी परंपरा के अनुरूप हो रहे हैं या नहीं, इसकी निगरानी।
    -रामनवमी, विवाह पंचमी, सीता नवमी जैसे सभी वार्षिक पर्वों की तिथि का अंतिम निर्धारण और आयोजन।
    – विशेष वैदिक अनुष्ठानों, यज्ञ, रामार्चा और वेद पारायण जैसे धार्मिक आयोजनों की योजना और संचालन।
    – अर्चकों (पुजारियों) के प्रशिक्षण, नियुक्ति, आचरण, ड्रेस कोड और पूजा-पद्धति की निगरानी तथा स्थायी अर्चक प्रशिक्षण संस्थान की स्थापना।
    – अयोध्या के मठों, मंदिरों, संत समाज और गुरुकुलों के साथ नियमित संवाद और समन्वय स्थापित करना।


    दिनेंद्र दास की भूमिका हुई और मजबूत

    धार्मिक समिति में ट्रस्टी महंत दिनेंद्र दास को शामिल किया जाना भी अहम माना जा रहा है। पिछले कई महीनों से वह लगातार राम मंदिर की पूजा व्यवस्था को पूरी तरह शास्त्रोक्त और परंपरागत बनाए जाने की मांग उठा रहे थे। हाल के दिनों में वह लगभग प्रतिदिन मंदिर पहुंचकर पूजा-अर्चना की व्यवस्था का निरीक्षण भी कर रहे थे और धार्मिक परंपराओं के पालन पर जोर देते रहे। ऐसे में उन्हें समिति में प्रमुख भूमिका मिलना इस बात का संकेत माना जा रहा है कि ट्रस्ट ने पूजा व्यवस्था से जुड़े मामलों में उनके सुझावों और संत समाज की भूमिका को औपचारिक मान्यता दे दी है।

    बनेगी अर्चकों की स्थायी पाठशाला, तैयार होंगे प्रशिक्षित पुजारी
    श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने राम मंदिर के लिए प्रशिक्षित अर्चकों (पुजारियों) की स्थायी व्यवस्था करने का फैसला किया है। धार्मिक समिति को अर्चकों के प्रशिक्षण, नियुक्ति और उनके आचरण की निगरानी की जिम्मेदारी सौंपी गई है। स्वामी गोविंद देव गिरि ने बताया कि राम मंदिर परिसर में वर्तमान में 14 मंदिर हैं, जिनके लिए बड़ी संख्या में प्रशिक्षित अर्चकों की आवश्यकता है। पहले ट्रस्ट ने एक वर्ष का अर्चक प्रशिक्षण केंद्र संचालित किया था, जिसमें करीब 30 प्रशिक्षित अर्चक तैयार किए गए थे। बाद में यह व्यवस्था बाधित हो गई। अब ट्रस्ट स्थायी अर्चक प्रशिक्षण पाठशाला स्थापित करेगा, जहां पूजा-पद्धति, वैदिक मंत्रों का शुद्ध उच्चारण, कर्मकांड, मंदिर प्रबंधन और रामानंदी परंपरा के अनुरूप सेवा-पूजा का प्रशिक्षण दिया जाएगा।


    राम मंदिर की पूजन व्यवस्था : पहले क्या था, अब क्या बदलेगा

    – पूजा व्यवस्था की निगरानी ट्रस्ट और प्रशासनिक स्तर पर होती थी। अब धार्मिक समिति सीधे पूजा-पद्धति और धार्मिक कार्यों की निगरानी करेगी।
    – पूजा शास्त्रोक्त परंपरा के अनुसार होती थी, लेकिन निगरानी के लिए अलग धार्मिक समिति सक्रिय नहीं थी। अब वैदिक रामानंदी परंपरा के पालन की जिम्मेदारी नौ सदस्यीय धार्मिक समिति को दी गई है।
    – पर्व-उत्सवों की तिथि और आयोजन ट्रस्ट तय करता था। अब रामनवमी, सीता नवमी, विवाह पंचमी जैसे सभी पर्वों की तिथि और आयोजन धार्मिक समिति तय करेगी।
    – विशेष धार्मिक अनुष्ठानों पर अलग-अलग निर्णय लिए जाते थे। अब वेद पारायण, रामार्चा, यज्ञ और अन्य नित्य-अनुष्ठानों की रूपरेखा समिति तय करेगी।
    – पुजारियों की कार्यप्रणाली पर सामान्य निगरानी थी। अब अर्चकों के ड्रेस कोड, पूजा-विधि, आचरण और शास्त्रीय नियमों के पालन की नियमित समीक्षा होगी।
    – अयोध्या के संतों की भूमिका परामर्श तक सीमित मानी जाती थी। अब अयोध्या के पांच संत समिति में बहुमत के साथ धर्म व्यवस्था का नेतृत्व करेंगे।
    – धार्मिक निर्णय ट्रस्ट स्तर पर लिए जाते थे। अब पूजा-पद्धति और धार्मिक विषयों पर समिति का निर्णय सर्वोपरि माना जाएगा।


    चोरी में किसी ट्रस्टी का हाथ नहीं, बैंक कर्मी थे जिम्मेदार : दिनेंद्र दास

    श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की बैठक के बाद निर्मोही अखाड़े के महंत एवं ट्रस्ट सदस्य महंत दिनेंद्र दास ने राम मंदिर में हुई चढ़ावा चोरी के मामले पर बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि इस मामले में किसी भी ट्रस्टी की संलिप्तता नहीं थी, बल्कि बैंक कर्मियों की भूमिका सामने आई है।

    मणिराम दास छावनी में मंगलवार को ट्रस्ट की बैठक के बाद पत्रकारों से बातचीत में महंत दिनेंद्र दास ने कहा कि चोरी की घटना के बाद मंदिर की व्यवस्थाओं में आवश्यक सुधार कर दिए गए हैं। अब मंदिर में सभी व्यवस्थाएं सुचारु रूप से संचालित हो रही हैं। उन्होंने कहा कि चोरी की घटना का श्रद्धालुओं की आस्था पर कोई नकारात्मक असर नहीं पड़ा है। रामलला के दर्शन के लिए आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या में कोई कमी नहीं आई है और बड़ी संख्या में श्रद्धालु लगातार दर्शन-पूजन के लिए पहुंच रहे हैं।