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  • राम मंदिर में चंदा चुराने वालों को दुनिया की कोई चीज नहीं कर सकती शर्मिंदा : HC

    राम मंदिर में चंदा चुराने वालों को दुनिया की कोई चीज नहीं कर सकती शर्मिंदा : HC


    प्रयागराज।
    अयोध्या के राम मंदिर (Ayodhya’s Ram Mandir) में चंदे की हेराफेरी के मामले पर सुनवाई करते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट (Allahabad High Court) ने बेहद सख्त टिप्पणी की है। जस्टिस अतुल श्रीधरन ने कहा है कि जो लोग राम मंदिर में चंदे की चोरी जैसी घटना से भी बेपरवाह और बेफिक्र हैं, उन्हें अब दुनिया की कोई चीज शर्मिंदा नहीं कर सकती। यही नहीं जस्टिस श्रीधरन ने भ्रष्टाचार के मामले में दोषी पाए जाने वालों को मौत की सजा देने का भी सुझाव दिया है।

    उत्तर प्रदेश सरकार (Uttar Pradesh Government) के बुलडोजर एक्शन पर अपनी राय रखते हुए जस्टिस श्रीधरन ने भारत के कई संस्थानों में गहराई तक फैले भ्रष्टाचार की कड़े शब्दों में आलोचना की। राम मंदिर में दान की चोरी के मामले का जिक्र करते हुए जस्टिस के. एस. श्रीधरन ने कहा, “राम मंदिर में दान की चोरी का मामला तो हद ही पार कर गया। अगर राम मंदिर जैसी पवित्र जगह पर हुई चोरी भी लोगों को शर्मिंदा नहीं कर सकती, तो फिर शायद कोई भी घटना उन्हें शर्मिंदा नहीं कर सकती। यह दिखाता है कि ईमानदारी का स्तर कितना गिर चुका है।”

    ‘भ्रष्टाचार हो गया है सामान्य’
    जस्टिस श्रीधरन ने कहा कि भारत के लोगों ने भ्रष्टाचार को सामान्य मान लिया है और जब तक कोई पकड़ा नहीं जाता, तब तक इसे गलत नहीं मानता। उन्होंने कहा कि ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल की 2025 रिपोर्ट में 182 देशों की सूची में भारत 91वें स्थान पर है लेकिन यह तथ्य भी हमें शर्मिंदा नहीं करता। समाज में भ्रष्टाचार को लेकर चिंता जताते हुए HC ने सुझाव दिया कि अगर राज्य सरकार सचमुच भ्रष्टाचार को खत्म करना चाहती है, तो उसे ‘भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988’ में संशोधन कर दोषियों के लिए फांसी की सजा का प्रावधान करने पर विचार करना चाहिए।

    जस्टिस श्रीधरन ने चेतावनी दी कि देश में बेलगाम भ्रष्टाचार से कुछ ही लोगों के हाथों में बेहिसाब पैसा होगा। इससे अमीर और गरीब के बीच की खाई चौड़ी होगी। यह स्थिति आने वाले दिनों में देश में अशांति और असंतोष की कहानी लिख रही है। जस्टिस श्रीधरन ने ये टिप्पणियां 51 पन्नों के अपने एक फैसले में की। यह मामला सरकार के बुलडोजर एक्शन से जुड़ा था। इस मामले में अदालत के दो जजों की राय अलग-अलग थी।

    बुलडोजर जस्टिस’ की आदत?
    जस्टिस श्रीधरन ने अपने फैसले में कहा कि किसी अपराध के तुरंत बाद मकान को ढहा देना ‘बुलडोजर जस्टिस’ की आदत से पकी समाज की ‘खून की प्यास’ को शांत करने के लिए किया जाता है। उन्होंने जोर दिया कि सुप्रीम कोर्ट के फैसलों के बावजूद बिना किसी डर के तोड़फोड़ जारी है। इससे ऐसा लगता है, मानो ये फैसले अस्तित्व में ही नहीं हैं या राज्य को यकीन है कि सुप्रीम कोर्ट के नियमों की अवहेलना का उन पर कोई असर नहीं पड़ेगा।

    अवैध निर्माणों पर राय देते हुए उन्होंने कहा कि कोई भी मकान रातों-रात खड़ा नहीं हो जाता। बिल्डर को संरक्षण मिलने और रिश्वतखोरी के कारण जिम्मेदार अधिकारी आंखें मूंद लेते हैं। इसका खामियाजा दशकों बाद उस आम खरीदार को भुगतना पड़ता है जिसे अचानक बेदखली का सामना करना पड़ता है। कोर्ट ने कहा कि ऐसी अवैध बिल्डिंगों को पानी और बिजली जैसी सरकारी सुविधाएं देकर सरकार भी इस अपराध में बराबर का भागीदार बन जाती है।

  • राम मंदिर दान चोरी प्रकरण: टिन्नू यादव और मनीष से 39 घंटे की पुलिस रिमांड में होगी पूछताछ, खुलेंगे अहम राज

    राम मंदिर दान चोरी प्रकरण: टिन्नू यादव और मनीष से 39 घंटे की पुलिस रिमांड में होगी पूछताछ, खुलेंगे अहम राज


    अयोध्या। श्रीराम जन्मभूमि मंदिर के दान प्रबंधन से जुड़े कथित गबन मामले में पुलिस ने आरोपी रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव और उसके भतीजे मनीष यादव से पूछताछ शुरू कर दी है। विशेष न्यायाधीश (एंटी करप्शन) की अदालत द्वारा मंजूर 39 घंटे की पुलिस कस्टडी रिमांड शनिवार सुबह से लागू हो गई, जिसके तहत दोनों आरोपी रविवार रात 11 बजे तक पुलिस हिरासत में रहेंगे।

    शनिवार सुबह पुलिस दोनों को जेल से अपनी अभिरक्षा में लेकर पुलिस लाइन पहुंची, जहां उनका मेडिकल परीक्षण कराया गया। इसके बाद दोनों से पूछताछ शुरू हुई। जांच अधिकारी इस दौरान मामले से जुड़े कई अहम पहलुओं और पहले गिरफ्तार आरोपियों से मिली जानकारियों का मिलान कर रहे हैं।

    दो स्तर पर चल रही है जांच
    मामले की जांच दो अलग-अलग स्तरों पर जारी है। एक ओर उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गठित विशेष जांच दल (एसआईटी) पूरे प्रकरण की पड़ताल कर रहा है, वहीं दूसरी ओर अयोध्या पुलिस आपराधिक पहलुओं की जांच में जुटी है।

    राज्य सरकार ने 13 जून को तीन सदस्यीय एसआईटी का गठन किया था, जिसमें लखनऊ मंडलायुक्त विजय विश्वास पंत, लखनऊ आईजी किरण एस. और विशेष सचिव (वित्त) नील रतन शामिल हैं। समिति को मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए गए नकद दान की गणना के दौरान कथित गबन के आरोपों की जांच की जिम्मेदारी सौंपी गई थी।

    एसआईटी ने 23 जून को प्रारंभिक रिपोर्ट प्रस्तुत की थी। मामले की गंभीरता को देखते हुए विस्तृत जांच के लिए उसका कार्यकाल 15 जुलाई तक बढ़ाया गया। जांच के दौरान समिति ने केवल कथित दान गबन ही नहीं, बल्कि मंदिर की प्रशासनिक और व्यवस्थागत प्रक्रियाओं की भी समीक्षा की।

    पुलिस जोड़ रही है सबूतों की कड़ियां
    अयोध्या पुलिस इससे पहले छह अन्य आरोपियों को भी पुलिस रिमांड पर लेकर पूछताछ कर चुकी है। जांच के दौरान कई नए तथ्य सामने आने का दावा किया गया है और कथित रूप से नकदी, सोना, वाहन, निवेश से जुड़े दस्तावेज भी बरामद किए गए हैं। जांच के क्रम में कई बैंक खातों को भी फ्रीज किया गया है।

    अब पुलिस टिन्नू यादव और मनीष यादव से आमने-सामने बैठाकर पूछताछ कर रही है, ताकि कथित धन के स्रोत, उसके उपयोग और पूरे मामले में अन्य लोगों की भूमिका को स्पष्ट किया जा सके। साथ ही जांच एजेंसी कथित गबन की कुल राशि और पूरे नेटवर्क के कथित मास्टरमाइंड तक पहुंचने का प्रयास कर रही है।

    एसआईटी रिपोर्ट पर टिकी नजर
    सूत्रों के अनुसार, एसआईटी अपनी अंतरिम रिपोर्ट जल्द सुप्रीम कोर्ट के समक्ष प्रस्तुत कर सकती है। यह भी चर्चा है कि अंतिम रिपोर्ट तैयार है और कुछ बिंदुओं के सत्यापन के बाद उसे औपचारिक रूप से सरकार को सौंपा जाएगा। बताया जा रहा है कि रिपोर्ट में कथित लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई, मंदिर में चढ़ावे के प्रबंधन और सुरक्षा व्यवस्था को अधिक पारदर्शी बनाने के सुझाव शामिल हो सकते हैं। हालांकि, इस संबंध में आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है।

    प्रारंभिक रिपोर्ट के बाद हुई थीं गिरफ्तारियां
    एसआईटी की प्रारंभिक रिपोर्ट के आधार पर अयोध्या पुलिस ने 25 जून को रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव, सुभाष चंद्र श्रीवास्तव, मनीष यादव, अविनाश शुक्ला, अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा, करुणेश पांडेय और रामाशंकर मिश्रा सहित आठ लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया था। बाद में सभी आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया था। फिलहाल मामले की जांच जारी है और अंतिम निष्कर्ष जांच एजेंसियों की रिपोर्ट तथा न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही सामने आएंगे।

  • राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामला: गणना टीम में शामिल होते ही मनीष बना गिरोह का सरगना, CCTV से खुल रहे राज

    राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामला: गणना टीम में शामिल होते ही मनीष बना गिरोह का सरगना, CCTV से खुल रहे राज


    अयोध्या। श्रीराम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले की जांच आगे बढ़ने के साथ ही आरोपियों की भूमिका को लेकर नए खुलासे सामने आ रहे हैं। जांच में सामने आया है कि रमाशंकर यादव उर्फ टिन्नू का भतीजा मनीष यादव गणना टीम में शामिल होने के बाद चोरी करने वाले गिरोह का अहम हिस्सा बन गया था।

    एसआईटी जांच के मुताबिक, सीसीटीवी फुटेज में चढ़ावे की नोटों की गड्डियां ले जाते हुए तीन लोगों की भूमिका स्पष्ट रूप से सामने आई है। इनमें अविनाश शुक्ला, मनीष यादव और रमाशंकर मिश्रा शामिल हैं। आरोप है कि ये लोग चढ़ावे की रकम बाहर ले जाते थे, जबकि तीन अन्य लोग घेरा बनाकर सीसीटीवी कैमरों की नजर से बचाने में मदद करते थे।

    भर्ती के कुछ ही दिनों बाद CCTV में कैद हुआ मनीष
    एसआईटी रिपोर्ट के अनुसार, मनीष यादव की गणनाकर्मी पद पर नियुक्ति उसके ताऊ रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू की सिफारिश पर हुई थी। बताया गया है कि टिन्नू ने मनीष की भर्ती के लिए दस्तावेज एसबीआई के रत्नेश चतुर्वेदी को उपलब्ध कराए थे। इसके बाद सैनिक सिक्योरिटी सर्विसेज के माध्यम से संविदा प्रक्रिया पूरी की गई। रिकॉर्ड के अनुसार, मनीष यादव की भर्ती 15 अप्रैल 2026 को हुई थी। इसके करीब 50 दिन के भीतर ही 11 मई 2026 की सीसीटीवी फुटेज में वह चढ़ावे की गड्डियां ले जाते हुए दिखाई दिया।

    50 दिन में मिली बड़ी भूमिका पर उठे सवाल
    जांच में यह भी सामने आया है कि रमाशंकर यादव उर्फ टिन्नू को सीधे तौर पर चोरी करते हुए नहीं पकड़ा गया है, लेकिन आशंका जताई जा रही है कि उसने अपने भतीजे मनीष को इस काम में आगे किया। जांच एजेंसियों का कहना है कि सामान्य तौर पर किसी नए कर्मचारी को किसी व्यवस्था को समझने में समय लगता है, लेकिन मनीष के मामले में भर्ती के कुछ ही दिनों बाद चोरी की गतिविधियों में शामिल होने के आरोप सामने आए हैं। इसी वजह से उसकी नियुक्ति को लेकर सवाल खड़े किए जा रहे हैं।

    अविनाश के पास मिली सबसे ज्यादा संपत्ति
    एसआईटी को 27 अप्रैल से 5 जून तक की सीसीटीवी फुटेज उपलब्ध हुई, जिसकी जांच के बाद चढ़ावा चोरी के कई पहलुओं का खुलासा हुआ। जांच के अनुसार, सबसे अधिक संपत्ति और नकदी अविनाश शुक्ला के पास से बरामद हुई।

    बताया गया है कि मनीष यादव अविनाश के सहयोगी के रूप में काम कर रहा था, जबकि अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा और करुणेश पांडेय पर भी मदद करने का आरोप है। एक पुलिस अधिकारी के अनुसार, जांच से संकेत मिलते हैं कि मनीष को गणना कक्ष की जिम्मेदारी मिलने के बाद गिरोह में शामिल किया गया और कुछ समय बाद उसने चोरी की गतिविधियों में सक्रिय भूमिका निभानी शुरू कर दी।

    टिन्नू की भूमिका भी जांच के दायरे में
    जांच के मुताबिक, श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट से जुड़ी कुछ महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां पहले रमाशंकर यादव उर्फ टिन्नू के पास थीं। परिवारिक संबंधों के कारण मनीष की गणना कक्ष में पहुंच आसान हुई और पहले से सक्रिय आरोपियों के संपर्क में आने के बाद वह कथित तौर पर गिरोह का हिस्सा बन गया।

    टिन्नू और मनीष की पुलिस रिमांड की मांग
    अब पुलिस ने रमाशंकर यादव उर्फ टिन्नू और मनीष यादव की सात दिन की पुलिस कस्टडी रिमांड मांगी है। मामले के विवेचक और अयोध्या क्षेत्राधिकारी आशुतोष तिवारी ने विशेष न्यायाधीश भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की अदालत में विशेष अभियोजन अधिकारी के माध्यम से आवेदन दिया है। पुलिस का कहना है कि दोनों आरोपियों से पूछताछ के दौरान मामले से जुड़े कई महत्वपूर्ण तथ्यों और संभावित बरामदगी की जानकारी मिल सकती है। अदालत ने इस आवेदन पर सुनवाई के लिए शुक्रवार की तारीख तय की है।

    79 लाख बरामदगी और 3 करोड़ की आशंका के बीच सवाल
    राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में बरामद रकम को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। शुरुआती जानकारी में करीब 79 लाख रुपये बरामद होने की बात सामने आई थी, जिसे पुलिस को सौंपा गया था। वहीं, राम मंदिर ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरी ने बाद में करीब 3 करोड़ रुपये की चोरी की आशंका जताई थी। अब जांच का एक अहम पहलू यह भी है कि तीन करोड़ रुपये के अनुमान का आधार क्या था।

    जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि यह आंकड़ा दानपात्र की गिनती, ऑडिट रिपोर्ट, सीसीटीवी फुटेज, आरोपियों से पूछताछ या किसी अन्य साक्ष्य के आधार पर सामने आया था। इस मामले में आगे की जांच के बाद ही पूरी तस्वीर साफ हो सकेगी।

  • राम मंदिर केस: घोटाले में लिप्त बैंककर्मी को बनाया चढ़ावे की रकम का गणना प्रभारी, बगैर जांच रखे कर्मचारी

    राम मंदिर केस: घोटाले में लिप्त बैंककर्मी को बनाया चढ़ावे की रकम का गणना प्रभारी, बगैर जांच रखे कर्मचारी


    लखनऊ।
    राम मंदिर चढ़ावा चोरी (Ram Mandir offerings theft) केस में जेल भेजे गए आरोपी सुभाष श्रीवास्तव (Subhash Srivastava) को लेकर एसआईटी की विस्तृत जांच में बड़ा खुलासा हुआ है। सुभाष जब बैंक में था, तब उसे घोटाले के आरोप में बर्खास्त किया गया था। हालांकि बाद में वह कोर्ट से बहाली का आदेश लेकर आया था। ऐसे में सवाल उठता है कि ट्रस्ट ने बिना किसी जांच-पड़ताल के सुभाष को नौकरी पर रखा। वह भी सबसे संवेदनशील कार्य गणना का इंचार्ज बना दिया। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि ट्रस्ट ने किस कदर आंखें मूंदकर काम किया।

    मामले में अब तक कुल आठ आरोपी जेल भेजे गए हैं। इसमें गणना इंचार्ज सुभाष श्रीवास्तव भी शामिल है। गणना प्रक्रिया की देखरेख करने से लेकर नकदी आदि बैंक भिजवाने तक की जिम्मेदारी सुभाष की थी। जांच में सामने आया था कि उसकी मिलीभगत की वजह से आरोपी रकम पार करते रहे थे। वहीं, जब एसआईटी प्रकरण की विस्तृत जांच कर रही है, तो उसमें एक और चौंकाने वाला तथ्य उजागर हुआ। पता चला कि सुभाष सिंडिकेट बैंक में काम करता था। उसी दौरान गबन व घोटाले का एक मामला हुआ था। विभागीय जांच के बाद सुभाष श्रीवास्तव को बैंक से बर्खास्त कर दिया गया था। कार्रवाई के खिलाफ वह कोर्ट पहुंचा था, जहां से उसे बहाली का आदेश मिला था। बहाल होने के बाद उसने नौकरी ज्वाइन की थी। रिटायर होने के बाद वह राम मंदिर में काम करने लगा था।


    प्रमुखता से जांच में शामिल किया

    सूत्रों के अनुसार मंदिर में नौकरी पर लोगों को रखने की प्रक्रिया को एसआईटी ने बेहद अहम माना है। मनचाहे तरीके से तमाम कर्मचारियों को रखा गया था। इसी में सुभाष को भी रखने का मामला सामने आया है। सूत्रों का कहना है कि सुभाष ट्रस्ट के पदाधिकारियों के संपर्क में था। लिहाजा, जब वह रिटायर हुआ तो बिना जांच के उसे नौकरी पर रख लिया गया था। लोग बताते हैं, उसका दावा था कि वह सेवा करता है, इसलिए सैलरी नहीं लेता है। टिन्नू की शह पर सुभाष ही तय करता था कि गणना में किसकी ड्यूटी लगाई जाएगी।

  • राम मंदिर में 40 दिन में 70 बार हुई चढ़ावे की चोरी, 50 बार अविनाश ने उड़ाई नकदी, अनुकल्प-लवकुश करते थे प्लानिंग

    राम मंदिर में 40 दिन में 70 बार हुई चढ़ावे की चोरी, 50 बार अविनाश ने उड़ाई नकदी, अनुकल्प-लवकुश करते थे प्लानिंग


    लखनऊ। राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले की जांच में एक और बड़ा खुलासा हुआ है। जांच एजेंसियों के अनुसार, पूरे गिरोह में चोरी की मुख्य जिम्मेदारी अविनाश शुक्ला को सौंपी गई थी। सीसीटीवी फुटेज में वह सबसे अधिक बार चढ़ावे की रकम निकालते हुए दिखाई दिया, जबकि अन्य आरोपी उसे कवर देने के लिए आसपास मौजूद रहते थे।

    एसआईटी की जांच में सामने आया था कि 40 दिनों के दौरान चढ़ावे की रकम करीब 70 बार चोरी की गई। इनमें लगभग 50 बार अविनाश शुक्ला को नकदी निकालते हुए कैमरों में देखा गया। पुलिस ने भी अपनी विवेचना में सीसीटीवी फुटेज को अहम साक्ष्य के रूप में शामिल किया है। फुटेज के विश्लेषण में एसआईटी की रिपोर्ट की पुष्टि हुई कि अधिकांश मामलों में रकम अविनाश ने ही पार की।

    पुलिस रिमांड के दौरान पूछताछ में अविनाश शुक्ला ने स्वीकार किया था कि अधिकतर मौकों पर चोरी की जिम्मेदारी उसी को दी जाती थी। हालांकि एसआईटी की विस्तृत जांच अंतिम चरण में है, जबकि पुलिस की विवेचना अभी जारी रहेगी।

    अनुकल्प और लवकुश बनाते थे पूरी रणनीति
    जांच में यह भी सामने आया कि टिन्नू यादव और गणनाकर्मी सुभाष श्रीवास्तव की मिलीभगत से यह पूरा खेल चलता था। दोनों का काम यह सुनिश्चित करना था कि किसी अन्य कर्मचारी या व्यक्ति की नजर आरोपियों की गतिविधियों पर न पड़े। कब और किस तरह रकम निकालनी है, इसकी पूरी योजना अनुकल्प मिश्रा और लवकुश मिश्रा तैयार करते थे। योजना के अनुसार सबसे पहले अविनाश शुक्ला रकम निकालता था, जबकि कई मौकों पर मनीष और रमाशंकर ने भी नकदी चोरी की। बाद में सभी आरोपियों के बीच रकम का बंटवारा कर दिया जाता था।

    लगभग हर दिन दो बार की जाती थी चोरी
    सीसीटीवी फुटेज और पूछताछ से यह भी स्पष्ट हुआ है कि आरोपी लगभग हर दिन दो बार चढ़ावे की रकम पार करते थे। रिमांड के दौरान अविनाश, अनुकल्प और लवकुश ने बताया था कि अधिकांश दिनों में दो बार चोरी की जाती थी, जबकि अवसर मिलने पर तीन बार भी नकदी निकाल ली जाती थी। कभी-कभी परिस्थितियां अनुकूल नहीं होने पर चोरी करना संभव नहीं हो पाता था। जांच के अनुसार, यह पूरा खेल आरोपियों के काम पर लगाए जाने के समय से ही लगातार चल रहा था।

  • Ram Mandir में बढ़ी सख्ती…. 13 नए कैमरों से चढ़ावे की निगरानी, 27 अतिरिक्त सुरक्षाकर्मी तैनात

    Ram Mandir में बढ़ी सख्ती…. 13 नए कैमरों से चढ़ावे की निगरानी, 27 अतिरिक्त सुरक्षाकर्मी तैनात


    अयोध्या।
    श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट (Shri Ram Janmabhoomi Teerth Kshetra Trust) ने चढ़ावे की सुरक्षा और गणना प्रक्रिया को पहले से अधिक सख्त बना दिया है। नई व्यवस्था के तहत गणनास्थल की निगरानी बढ़ाने के लिए 13 अतिरिक्त सीसीटीवी कैमरे (13 Additional CCTV Cameras) लगाए गए हैं, जबकि दान पेटियों को मंदिर परिसर से गणना केंद्र तक सुरक्षित पहुंचाने के लिए 27 अतिरिक्त सुरक्षा कर्मियों ( 27 Additional Security Personnel ) की तैनाती की गई है।

    नई व्यवस्था के अनुसार अब गणनास्थल पर कुल 43 अधिकृत लोग मौजूद रहेंगे। जिन स्थानों पर पहले कैमरों का कवरेज नहीं था, वहां अतिरिक्त सीसीटीवी लगाए गए हैं, ताकि पूरी गणना प्रक्रिया लगातार निगरानी में रहे। दान पेटियों को मंदिर से गणनास्थल तक ले जाने के लिए 27 सुरक्षा कर्मियों की ड्यूटी लगाई गई है। ये सभी सुरक्षाकर्मी एसआईएस के हैं।

    इसके अलावा पुलिस बल की तैनाती भी दान पेटी और गणनास्थल के बीच विभिन्न पिलरों पर कर दी गई। विशेष रूप से पिलर नंबर-34 पर तीन अतिरिक्त पुलिसकर्मी तैनात किए गए हैं, क्योंकि इसी स्थान पर गुप्त दान पेटी रखी गई है। पहले पुलिस कर्मियों को सुरक्षा में नहीं लगाया गया था। पूरी जिम्मेदारी ट्रस्ट व बैंक के कर्मी ही संभालते थे। ट्रस्ट ने वित्तीय लेन-देन की व्यवस्था भी बदल दी है।

    अब किसी भी बैंक ट्रांजैक्शन के लिए राम मंदिर ट्रस्ट के अंतरिम महासचिव डॉ. कृष्ण मोहन, मुख्य अभियंता जगदीश आफले और चार्टर्ड अकाउंटेंट चंदन राय के हस्ताक्षर अनिवार्य होंगे। इससे पहले यह व्यवस्था डॉ. अनिल मिश्रा देखते थे और बैंक संबंधी दस्तावेजों पर उनके हस्ताक्षर होते थे, जबकि कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंद देव गिरी के डिजिटल हस्ताक्षरों का उपयोग किया जाता था।


    अभी भी हाउसकीपिंग कर्मी कर रहे दान राशि की गणना

    राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में जेल भेजे गए गणनाकर्मियों को छोड़कर अन्य सभी पुराने गणनाकर्मी ही दान राशि का हिसाब-किताब कर रहे हैं। ये सभी वही कर्मचारी हैं, जिनको सैनिक सिक्योरिटी कंपनी की तरफ से हाउसकीपिंग के काम के लिए नियुक्त किया गया था। सवाल है कि आखिर इतनी बड़ी घटना होने के बावजूद इन सभी को क्यों नहीं बदला गया।

    दरअसल, ट्रस्ट की सिफारिश पर 46 कर्मियों को आउटसोर्सिंग कंपनी के जरिए नियुक्त करने के लिए बैंक ने कंपनी को पत्र भेजा था। सैनिक सिक्योरिटी कंपनी ने सभी की नियुक्ति कर दी थी। नियुक्त किए गए कर्मियों को बतौर हाउसकीपिंग के काम के लिए रखा गया था। लेकिन, वहां पर इन सभी को गणना जैसे संवेदनशील काम में लगा दिया गया।

    सूत्रों के मुताबिक, घटना का खुलासा होने और आरोपियों के जेल जाने के बाद अन्य किसी गणनाकर्मी को नहीं हटाया गया। वह जस का तस गणना के कार्य में लगे हैं। सवाल है कि आखिर इन सभी को क्यों नहीं बदला गया, जिससे गणना प्रक्रिया में और पारदर्शिता लाई जा सके।


    केवल ये कदम उठाए

    अब तक नियमों को ताक पर रखकर गणना होती थी। अब बाकायदा तय ड्रेस में गणनाकर्मी गणना कर रहे हैं। सभी बिना जेब वाले कपड़े पहन रहे हैं। वीडियोग्राफी भी हो रही है। वहीं, निगरानी बढ़ाई गई है। लेकिन, पूरा स्टाफ नहीं बदला गया है। सूत्र बताते हैं कि एसओपी की कुछ शर्तों को पूरा कर मामला दुरुस्त करने का दावा किया जा रहा है। सवाल है कि कंपनी से करार खत्म कर मानक के अनुरूप गणनाकर्मियों की तैनाती क्यों नहीं की जा रही है।


    नए एसपी सुरक्षा को पूरी तरह मिली कमान

    अयोध्या में तैनात रहे एसपी सुरक्षा बलरामाचारी का 25 मई को यूपी-112 तबादला हुआ था। लेकिन, तब से वह रिलीव नहीं हुए थे। तीन जुलाई को नवागत एसपी सुरक्षा विजय शंकर मिश्रा ने बतौर एसपी सुरक्षा ज्वॉइन कर लिया था। चूंकि ट्रस्ट की बैठक थी, इसलिए बलरामाचारी को रिलीव नहीं किया गया था। मंगलवार को वह रिलीव हो गए। अब सुरक्षा व्यवस्था की पूरी कमान विजय शंकर मिश्रा के पास है।

  • राम मंदिर चढ़ावा चोरी केस…. आरोपियों ने उगले राज…. पूछताछ में बताया हेराफेरी का तरीका

    राम मंदिर चढ़ावा चोरी केस…. आरोपियों ने उगले राज…. पूछताछ में बताया हेराफेरी का तरीका


    लखनऊ/अयोध्या।
    राम मंदिर चढ़ावा चोरी (Ram Mandir Offering Theft) मामले में रिमांड पर लिए गए तीनों आरोपियों ने पूछताछ में खुलासा किया कि चोरी के रुपये वह अपने करीबियों और रिश्तेदारों को भेजते थे और फिर उनसे अपने खातों में रकम ट्रांसफर करवाते थे, ताकि रकम का स्रोत छिपा रहे और शक न हो। बैंक डिटेल से इसकी पुष्टि भी हुई है। पूछताछ में तीनों आरोपियों अनुकल्प मिश्रा (Anukalp Mishra), लवकुश मिश्रा (Lav-Kush Mishra) और करुणेश पांडेय (Karunesh Pandey) ने कई और राज उगले हैं। बृहस्पतिवार को रकम, जेवर की बरामदगी हो सकती है।

    कोर्ट की अनुमति के बाद पुलिस ने बुधवार सुबह करीब सात बजे जिला जेल से आरोपियों को कस्टडी रिमांड पर लिया। आरोपियों ने चोरी स्वीकारते हुए बताया कि टिन्नू व गणना इंचार्ज सुभाष श्रीवास्तव की मिलीभगत होने से रकम पार करने में दिक्कत नहीं होती थी। आरोपियों ने बताया है कि नकदी व जेवर छिपाकर रखे हैं।

    पुलिस तीनों आरोपियों को 14 कोसी परिक्रमा मार्ग स्थित उसी बाग में लेकर गई जहां चोरी की रकम का बंटवारा किया जाता था। इस स्थान का खुलासा पहले रिमांड पर रहे आरोपी अविनाश शुक्ला ने किया था। तीनों आरोपियों से मौके पर ले जाकर इसका सत्यापन कराया गया। पुलिस ने आरोपियों के बयानों का मिलान भी किया।

    फर्जी रसीदें छपवाई थीं
    आरोपियों ने एक दान राशि संबंधी पर्ची बरामद कराई है। आरोपियों ने बताया कि जब दान लेकर पर्ची दी जाती थी, तो उन्होंने फर्जी रसीदें छपवाई थीं। लोगों से चंदे के नाम पर रकम लेकर फर्जी रसीदें पकड़ा देते थे और रकम अपनी जेब में रख लेते थे।

  • राम मंदिर दान विवाद पर उद्धव ठाकरे का हिंदुत्व दांव, 'राम रक्षा आंदोलन' से BJP पर साधा निशाना

    राम मंदिर दान विवाद पर उद्धव ठाकरे का हिंदुत्व दांव, 'राम रक्षा आंदोलन' से BJP पर साधा निशाना


    नई दिल्ली । अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी के मामले को लेकर महाराष्ट्र की राजनीति में नया मोड़ आ गया है। शिवसेना उद्धव बालासाहेब ठाकरे के प्रमुख उद्धव ठाकरे ने इस मुद्दे पर राम रक्षा आंदोलन की शुरुआत करते हुए भारतीय जनता पार्टी पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि हिंदुत्व के नाम पर सत्ता हासिल करने वालों ने अब मंदिरों और आस्था का भी राजनीतिक इस्तेमाल शुरू कर दिया है। साथ ही उन्होंने कहा कि हिंदुओं को जागरूक करने की जरूरत है क्योंकि उनका वशीकरण किया गया है।

    मुंबई के दादर स्थित हनुमान मंदिर में उद्धव ठाकरे ने हनुमान चालीसा हनुमान स्तोत्र और राम रक्षा स्तोत्र का पाठ किया। इसके बाद आयोजित सभा में उन्होंने राम मंदिर चढ़ावा मामले की निष्पक्ष जांच की मांग उठाई। उन्होंने कहा कि यदि किसी मंदिर में श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़ा धन सुरक्षित नहीं है तो इसकी जांच पूरी पारदर्शिता से होनी चाहिए। उनका कहना था कि जिस पर आरोप लगे हों उसी से जांच नहीं कराई जा सकती क्योंकि इससे निष्पक्ष परिणाम की उम्मीद नहीं की जा सकती।

    उद्धव ठाकरे ने भाजपा पर हिंदुत्व के राजनीतिक उपयोग का आरोप लगाते हुए कहा कि भगवान राम किसी एक दल के नहीं बल्कि पूरे देश के हैं। उन्होंने कहा कि यदि हिंदुत्व के नाम पर मंदिरों और धार्मिक आस्था का दुरुपयोग किया जाएगा तो समाज इसे स्वीकार नहीं करेगा। उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं से राम रक्षा आंदोलन को गांव गांव तक ले जाने का आह्वान करते हुए कहा कि यह केवल राजनीतिक नहीं बल्कि आस्था और जवाबदेही का विषय है।

    उधर महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने उद्धव ठाकरे के आरोपों का जवाब देते हुए कहा कि उन्हें खुशी है कि आखिरकार उद्धव ठाकरे को भगवान राम की याद आ गई। उन्होंने कहा कि यदि वे भगवान राम के बताए मार्ग पर चलेंगे तो यह उनके लिए भी अच्छा होगा। फडणवीस ने यह भी कहा कि उन्हें उम्मीद है कि उद्धव केवल एक दिन नहीं बल्कि नियमित रूप से राम रक्षा का पाठ करेंगे।

    राम मंदिर चढ़ावा विवाद का मामला जून में सामने आया था। राज्य सरकार द्वारा गठित विशेष जांच दल की शुरुआती जांच के बाद एफआईआर दर्ज की गई और चढ़ावे की सुरक्षा तथा गिनती से जुड़े आठ लोगों को गिरफ्तार किया गया। मामले की जांच अभी जारी है और प्रशासन का कहना है कि सभी तथ्यों की निष्पक्ष जांच की जाएगी।

    उद्धव ठाकरे ने अपने संबोधन में यह भी कहा कि मंदिरों से जुड़े अन्य मामलों में भी पारदर्शिता जरूरी है। उन्होंने दावा किया कि यदि धार्मिक संस्थानों की गरिमा बनाए रखनी है तो किसी भी तरह की अनियमितता पर कठोर कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि शिवसेना ने हमेशा हिंदुत्व को सांस्कृतिक और सामाजिक मूल्यों से जोड़ा है और आगे भी उसी विचार के साथ काम करती रहेगी।

    राम मंदिर चढ़ावा विवाद के बीच शुरू हुआ राम रक्षा आंदोलन अब महाराष्ट्र की राजनीति में नया मुद्दा बनता दिखाई दे रहा है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर राजनीतिक बयानबाजी और तेज होने की संभावना है जबकि जांच एजेंसियों की रिपोर्ट पर भी सभी की नजरें टिकी रहेंगी।

  • MP: राम मंदिर चढ़ावा चोरी के मुद्दे पर उज्जैन से अयोध्या तक पदयात्रा करेंगे दिग्विजय सिंह

    MP: राम मंदिर चढ़ावा चोरी के मुद्दे पर उज्जैन से अयोध्या तक पदयात्रा करेंगे दिग्विजय सिंह


    भोपाल।
    कांग्रेस के वरिष्ठ नेता (Senior Congress leader) दिग्विजय सिंह (Digvijaya Singh) ने शुक्रवार को घोषणा की कि वह राम मंदिर में चढ़ावे और दान की चोरी के मुद्दे को लेकर दो अक्टूबर (गांधी जयंती) से उज्जैन के महाकाल मंदिर (Mahakal Temple) से अयोध्या (Ayodhya) तक ‘गैर-राजनीतिक’ पदयात्रा करेंगे। सिंह ने इस बात की घोषणा भोपाल में अपने सरकारी आवास के बाहर एक बैनर लगाने के दौरान कही। उन्होंने कहा कि मैंने अपने घर के बाहर एक बैनर लगाया है, जिस पर लिखा है चंदा चोरों का प्रवेश वर्जित है। आगे उन्होंने कहा कि अब यह बैनर सभी मंदिरों के बाहर लगना चाहिए कि चंदा चोरों से सावधान।

    दरअसल सिंह ने अपने घर के बार जो बैनर लगाया उस पर लिखा है, ‘जय सिया राम। हमारी आस्था के प्रतीक भगवान श्री राम जन्मभूमि मंदिर निर्माण के लिए समूचे देश के द्वारा दिए गए चंदा के चोरों एवं चढ़ावा चोरों का मेरे निवास पर प्रवेश निषेध है।’ इस मौके पर उन्होंने यह भी कहा कि वह अदालत में वाद दायर कर राम मंदिर के लिए दिया गया अपना चंदा वापस मांगेंगे क्योंकि उनके धन का दुरुपयोग हुआ है।


    ‘पदयात्रा में हर दिन चलूंगा 10 से 15 किमी पैदल’

    कांग्रेस नेता ने कहा, ‘राम मंदिर में हुई चढ़ावा चोरी के विरोध में मैं दो अक्टूबर से उज्जैन से अयोध्या तक पदयात्रा शुरू करूंगा। यह पूरी तरह गैर-राजनीतिक होगी। इसमें किसी दल का झंडा नहीं रहेगा। भगवान राम में आस्था रखने वाले और राम मंदिर में दान देने वाले सभी लोग इसमें शामिल हो सकते हैं।’ एक प्रश्न के उत्तर में सिंह ने कहा कि यात्रा की दूरी करीब एक हजार किलोमीटर है और वह प्रतिदिन 10 से 15 किलोमीटर पैदल चलेंगे।


    ‘आडवाणी की रथयात्रा के दौरान दिया था चंदा’

    पूर्व मुख्यमंत्री सिंह ने कहा, ‘मैंने लालकृष्ण आडवाणी (वरिष्ठ भाजपा नेता) की रथयात्रा के दौरान चंदा दिया था क्योंकि मुझे भगवान राम और मंदिर पर आस्था है। उस पहले अभियान में एकत्र किए गए चंदे का आज तक कोई हिसाब नहीं दिया गया। उच्चतम न्यायालय के फैसले (जिससे मंदिर निर्माण का मार्ग प्रशस्त हुआ) के बाद फिर से चंदा अभियान चलाया गया।’


    ‘मुकदमा दायर करते हुए वापस मांगूंगा चंदा’

    उन्होंने कहा, ‘मैंने तय किया है कि अयोध्या में मुकदमा दायर करूंगा कि मेरे द्वारा दिया गया चंदा गलत तरीके से इस्तेमाल किया गया। मैं अपना चंदा वापस चाहता हूं।’ सिंह का यह बयान राम मंदिर में चढ़ावे और कीमती सामान की कथित चोरी के आरोपों के संदर्भ में आया, जिनकी जांच विशेष जांच दल (एसआईटी) कर रहा है।


    ‘महाकाल मंदिर के पास की जमीन RSS को दी गई थी’

    सिंह ने दावा किया कि जब दूसरी बार विश्व हिंदू परिषद (विहिप) ने चंदा अभियान चलाया तो उन्होंने संगठन पर भरोसा नहीं होने के कारण उसमें योगदान नहीं दिया और सीधे 1 लाख 11 हजार रुपए का दान किया। उन्होंने आरोप लगाया कि जिस तरह राम मंदिर में चढ़ावे और कीमती सामान की चोरी हुई है, उसी तरह उज्जैन में भी महाकाल मंदिर के पास की एक बहुमूल्य भूमि भाजपा की सुंदरलाल पटवा सरकार ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ को दे दी थी।


    ‘होटल के लिए अब उस स्कूल को गिराया जा रहा’
    सिंह ने आगे कहा, ‘मेरी सरकार आने के बाद मैंने इस पर आपत्ति जताई थी।’ उन्होंने आरोप लगाया कि अब वहां संचालित एक स्कूल को होटल बनाने के लिए गिराया जा रहा है। उन्होंने कहा कि वहां ठहरने वाले लोगों को स्वत: वीआईपी दर्शन की सुविधा मिल जाती है और संबंधित संगठन वहां से मिले दान का उपयोग कर रहा है। उन्होंने कहा कि इसकी भी जांच की मांग की जाएगी।

  • राम मंदिर चढ़ावा चोरी विवाद पर सियासत तेज, अखिलेश यादव ने AI वीडियो शेयर कर BJP पर साधा निशाना

    राम मंदिर चढ़ावा चोरी विवाद पर सियासत तेज, अखिलेश यादव ने AI वीडियो शेयर कर BJP पर साधा निशाना


    नई दिल्‍ली । अयोध्या राम मंदिर में चढ़ावे की चोरी के मामले को लेकर समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने एक बार फिर बीजेपी सरकार पर निशाना साधा है. इस बार उन्होंने सोशल मीडिया पर भगवान श्रीराम का 4 मिनट 40 सेकेंड का AI वीडियो शेयर किया और सवाल किया, “क्या फिर चले गए वनवास?” इस वीडियो के जरिए मंदिर में हुई चोरी और उससे जुड़े घटनाक्रम को प्रतीकात्मक अंदाज में दिखाया गया है.

    अखिलेश यादव ने जो वीडियो शेयर किया है, वह सिर्फ एक गाना नहीं बल्कि एक सिनेमैटिक प्रस्तुति है. इसकी शुरुआत सूनी और शांत अयोध्या से होती है. इसके बाद मंदिर के अंदर भगवान श्रीराम की AI से बनाई गई आकृति दिखाई देती है. पूरे वीडियो में माहौल गंभीर रखा गया है, जिससे यह संदेश देने की कोशिश की गई है कि मंदिर में हुई घटना से अयोध्या का वातावरण बदल गया है.

    वीडियो के अगले हिस्से में मंदिर का वो कोना दिखता है जहां चोरी हुई. विजुअल्स में एक बड़ा दानपात्र और आसपास का सामान नजर आता है. गाना आगे बढ़ने पर अयोध्या के लोग और साधु-संत हाथ जोड़े खड़े दिखाई देते हैं, और प्रभु राम नगरी की सीमा की तरफ बढ़ते हैं. कुल मिलाकर अखिलेश यादव ने इस पूरे वीडियो और भजन के माध्यम से धर्म के नाम पर सरकार को आड़े हाथों लिया है.

    बता दें कि अबतक इस पूरे मामले में पुलिस और प्रशासन की टीमों ने अनुकल्प मिश्रा समेत सभी सात आरोपियों के घरों पर एक साथ छापेमारी की. करीब डेढ़ से ढाई घंटे चली इस कार्रवाई में अलमारियों और बक्सों का कोना-कोना छाना गया. जांच में सामने आया है कि आरोपी अनुकल्प मिश्रा ने अपने घर पर सात दिनों की भव्य रामकथा का आयोजन कराया था, जिस पर 50 लाख रुपये से अधिक खर्च किए गए थे. इस आयोजन के एक वीडियो में चंपत राय भी मौजूद दिख रहे हैं.

    यह पूरा मामला 5 जून 2026 को तब सामने आया था, जब राम मंदिर परिसर में रूटीन चेकिंग के दौरान सुरक्षाकर्मियों ने कुछ कर्मचारियों की जेब से नकदी बरामद की. इसके बाद 7 जून को जब यह बात पब्लिक हुई, तो अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया पर इस गबन का मुद्दा उठाकर जांच की मांग की. विपक्ष के दबाव और लोगों के गुस्से को देखते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 13 जून 2026 को इस पूरे मामले की जांच के लिए तीन सदस्यीय एसआईटी (SIT) का गठन कर दिया.

    फिलहाल मामले की जांच तेज है. प्रशासन लगातार सभी आरोपियों की अवैध संपत्तियों और सबूतों को जुटाने में लगा है, ताकि इस पूरे नेटवर्क का पर्दाफाश किया जा सके.