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  • राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले की जांच पर इमरान मसूद के सवाल, बोले- गंभीर आरोप हैं तो अब तक FIR क्यों नहीं..

    राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले की जांच पर इमरान मसूद के सवाल, बोले- गंभीर आरोप हैं तो अब तक FIR क्यों नहीं..

    नई दिल्ली । राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने इस मामले की जांच प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए कहा कि यदि आरोप इतने गंभीर हैं तो विशेष जांच दल (एसआईटी) ने अब तक अलग से प्राथमिकी क्यों दर्ज नहीं की। उन्होंने मामले की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच की मांग करते हुए कहा कि पूरे घटनाक्रम की सच्चाई सामने आनी चाहिए और कानून के अनुसार कार्रवाई होनी चाहिए।

    इमरान मसूद ने कहा कि इस मामले में प्रारंभिक शिकायत मंदिर ट्रस्ट की ओर से दर्ज कराई गई थी, जबकि आरोप भी ट्रस्ट से जुड़े कुछ लोगों पर लगाए जा रहे हैं। ऐसे में जांच एजेंसी की भूमिका पूरी तरह निष्पक्ष और पारदर्शी दिखाई देनी चाहिए। उनके अनुसार, यदि जांच में गंभीर अनियमितताओं के संकेत मिल रहे हैं तो संबंधित कानूनी प्रक्रिया के तहत आवश्यक कार्रवाई भी स्पष्ट रूप से सामने आनी चाहिए।

    उन्होंने कहा कि किसी भी धार्मिक या सार्वजनिक संस्था से जुड़े मामले में जांच एजेंसियों की जिम्मेदारी और बढ़ जाती है। ऐसे मामलों में पारदर्शिता बनाए रखना आवश्यक है, ताकि लोगों का भरोसा न्यायिक और प्रशासनिक व्यवस्था पर कायम रहे। उनका कहना था कि जांच तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर आगे बढ़नी चाहिए तथा किसी भी स्तर पर पक्षपात की गुंजाइश नहीं होनी चाहिए।

    उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के उस बयान पर भी इमरान मसूद ने प्रतिक्रिया दी, जिसमें मुख्यमंत्री ने कहा था कि जिन लोगों ने कभी रामलीला और कांवड़ यात्रा पर रोक लगाने का प्रयास किया, वही अब आस्था की बात कर रहे हैं। इस पर मसूद ने कहा कि उन्हें ऐसी किसी रोक की जानकारी नहीं है। उन्होंने कहा कि रामलीला लंबे समय से भारतीय संस्कृति और परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा रही है, जिसमें विभिन्न समुदायों के लोग सहभागिता करते आए हैं। उनके अनुसार, धार्मिक आयोजनों को राजनीतिक विवाद का विषय नहीं बनाया जाना चाहिए।

    कांग्रेस सांसद ने कहा कि समाज में धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का उद्देश्य लोगों को जोड़ना होना चाहिए। उन्होंने कहा कि किसी भी परंपरा या आयोजन को राजनीतिक दृष्टिकोण से देखने के बजाय सामाजिक और सांस्कृतिक महत्व के आधार पर समझा जाना चाहिए। उनका मानना है कि सभी धार्मिक आयोजनों के प्रति सम्मान का भाव बना रहना चाहिए।

    इमरान मसूद ने समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के बीच संभावित गठबंधन को लेकर चल रही चर्चाओं पर भी अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि गठबंधन को लेकर अंतिम निर्णय दोनों दलों का शीर्ष नेतृत्व करेगा। उनके अनुसार, यदि किसी राजनीतिक गठबंधन की चर्चा हो रही है तो उसका प्रभाव केवल बयानों तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि वह राजनीतिक स्तर पर भी स्पष्ट रूप से दिखाई देना चाहिए।

    उन्होंने यह भी कहा कि वह किसी गठबंधन के विरोधी नहीं हैं, लेकिन उनकी प्राथमिकता कांग्रेस संगठन को मजबूत करना है। उनके अनुसार, राजनीतिक दलों को अपने संगठनात्मक आधार को मजबूत करने के साथ-साथ जनता के मुद्दों पर भी समान रूप से ध्यान देना चाहिए। फिलहाल राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले की जांच जारी है और इस पर आए राजनीतिक बयानों के बीच अब सभी की नजर जांच एजेंसियों की आगे की कार्रवाई और संभावित निष्कर्षों पर बनी हुई है।

  • राम मंदिर के नए CEO को क्‍या मिलेंगी सुविधाएं? नियुक्ति प्रक्रिया हुई तेज, 18 जुलाई तक मांगे गए आवेदन

    राम मंदिर के नए CEO को क्‍या मिलेंगी सुविधाएं? नियुक्ति प्रक्रिया हुई तेज, 18 जुलाई तक मांगे गए आवेदन


    अयोध्या। राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले के बाद श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) की नियुक्ति प्रक्रिया तेज कर दी है। ट्रस्ट की ओर से चयनित सीईओ को वेतन और आवास जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। यह पद पूरी तरह ट्रस्ट के अधीन होगा और नियुक्त अधिकारी वेतनभोगी कर्मचारी के रूप में मंदिर के प्रशासनिक कार्यों की जिम्मेदारी संभालेंगे।

    18 जुलाई तक किए जा सकेंगे आवेदन
    सीईओ चयन के लिए गठित तीन सदस्यीय समिति ने पात्रता के मानक तय कर दिए हैं। इच्छुक अभ्यर्थी 18 जुलाई तक आवेदन कर सकते हैं। इस पद के लिए उम्मीदवार का स्नातक (Graduation) होना अनिवार्य है। साथ ही प्रशासन या वित्तीय प्रबंधन के क्षेत्र में कम से कम 20 वर्ष का अनुभव होना चाहिए। आवेदन करने वाले व्यक्ति का हिंदू धर्म का अनुयायी होना भी आवश्यक शर्त रखी गई है। चयनित उम्मीदवार की नियुक्ति तीन वर्ष के लिए की जाएगी।

    22 जुलाई की बैठक से पहले हो सकता है चयन
    श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की अगली बैठक 22 जुलाई को प्रस्तावित है। संभावना जताई जा रही है कि इस बैठक से पहले ही नए सीईओ के नाम पर अंतिम निर्णय लिया जा सकता है। नई दिल्ली में आयोजित चयन समिति की बैठक में नियुक्ति प्रक्रिया पर विस्तार से चर्चा की गई। समिति में सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति प्रमोद कोहली, सेवानिवृत्त लेफ्टिनेंट जनरल विष्णुकांत चतुर्वेदी और श्री साईबाबा संस्थान ट्रस्ट, शिरडी के पूर्व अध्यक्ष सुरेश हावरे शामिल हैं।

    चढ़ावा चोरी मामले के बाद तेज हुई प्रक्रिया
    राम मंदिर में चढ़ावे की राशि की चोरी का मामला सामने आने के बाद विशेष जांच दल (SIT) ने जांच की थी। जांच के आधार पर अयोध्या पुलिस अब तक आठ आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज चुकी है। पुलिस के अनुसार, पूछताछ में आरोपियों ने स्वीकार किया कि वे चढ़ावे की रकम चुराकर पहले वॉशरूम में छिपाते थे और बाद में मौका मिलने पर उसे बाहर ले जाते थे।
    राम मंदिर में चढ़ावे की राशि की चोरी का मामला सामने आने के बाद विशेष जांच दल (SIT) ने जांच की थी। जांच के आधार पर अयोध्या पुलिस अब तक आठ आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज चुकी है। पुलिस के अनुसार, पूछताछ में आरोपियों ने स्वीकार किया कि वे चढ़ावे की रकम चुराकर पहले वॉशरूम में छिपाते थे और बाद में मौका मिलने पर उसे बाहर ले जाते थे।

    जांच में सामने आए नए खुलासे
    एसआईटी की जांच में यह भी सामने आया कि आरोपियों में शामिल अविनाश शुक्ला ने राम मंदिर में नौकरी के दौरान कथित तौर पर करीब 20 लाख रुपये खर्च कर मकान बनवाया। इसके अलावा उसने अपने भाई के नाम पर एक ब्रेज़ा कार खरीदी और अपनी गर्लफ्रेंड को एक आईफोन तथा दो लाख रुपये भी दिए। जांच एजेंसियों के अनुसार, प्रतापगढ़ निवासी अविनाश शुक्ला राम मंदिर में नौकरी मिलने से पहले पीने का पानी बेचने का काम करता था। मामले की जांच अभी जारी है।

  • अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा प्रकरण पर सुप्रीम कोर्ट सख्त कोर्ट की निगरानी में जांच की मांग पर ट्रस्ट और सरकारों को नोटिस

    अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा प्रकरण पर सुप्रीम कोर्ट सख्त कोर्ट की निगरानी में जांच की मांग पर ट्रस्ट और सरकारों को नोटिस


    नई दिल्ली । अयोध्या स्थित श्री राम जन्मभूमि मंदिर में श्रद्धालुओं के दान और चढ़ावे के कथित दुरुपयोग से जुड़े मामले ने अब देश की सबसे बड़ी अदालत का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। सुप्रीम कोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट केंद्र सरकार और उत्तर प्रदेश सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। इसके साथ ही अदालत ने उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से गठित विशेष जांच दल यानी एसआईटी को अब तक की जांच की विस्तृत स्टेटस रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया है। अदालत का यह कदम इस मामले में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    सुप्रीम कोर्ट में दायर कई जनहित याचिकाओं में आरोप लगाया गया है कि राम मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा दिए गए नकद दान और बहुमूल्य चढ़ावे के प्रबंधन में वित्तीय अनियमितताएं हुई हैं। याचिकाओं में मांग की गई है कि पूरे मामले की जांच अदालत की निगरानी में कराई जाए ताकि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़े इस संवेदनशील विषय में किसी तरह का संदेह न रहे। इन याचिकाओं को राष्ट्रीय जनता दल के सांसद सुधाकर सिंह अधिवक्ता नरेंद्र कुमार गोस्वामी अधिवक्ता अजय कुमार राय अधिवक्ता दिनेश कुमार यादव तथा हिन्दू धर्म परिषद की ओर से दायर किया गया है।

    मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ जिसमें न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी मोहना भी शामिल हैं इस मामले की सुनवाई कर रही है। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं की ओर से अदालत को बताया गया कि राम मंदिर निर्माण के लिए देश ने 123 वर्षों का लंबा संघर्ष देखा लेकिन अब मंदिर में आए दान और चढ़ावे को लेकर नए विवाद खड़े हो गए हैं। अदालत को यह भी बताया गया कि जांच के लिए गठित एसआईटी के पास मौजूद इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों को सुरक्षित रखना बेहद जरूरी है ताकि किसी भी तरह के प्रमाण नष्ट न हो सकें।

    सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत में पक्ष रखा। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार उत्तर प्रदेश सरकार और श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को नोटिस जारी करते हुए जवाब तलब किया। अदालत ने एसआईटी को निर्देश दिया कि वह जांच की प्रगति से संबंधित स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करे। इस पर सॉलिसिटर जनरल ने अदालत को बताया कि रिपोर्ट सीलबंद लिफाफे में प्रस्तुत की जाएगी। अदालत ने मामले की अगली सुनवाई अगले सोमवार को तय कर दी है।

    यह पूरा मामला राम मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा दिए गए दान और बहुमूल्य चढ़ावे के कथित दुरुपयोग से जुड़ा है। आरोप सामने आने के बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने 13 जून को विशेष जांच दल का गठन किया था। अब तक इस मामले में आठ लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है। वहीं जांच के बीच ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा अपने पदों से इस्तीफा दे चुके हैं।

    सुप्रीम कोर्ट की सक्रियता के बाद इस मामले पर पूरे देश की नजरें टिक गई हैं। अब जांच रिपोर्ट और अगली सुनवाई यह तय करेगी कि आरोपों में कितना दम है और आगे कानूनी प्रक्रिया किस दिशा में बढ़ेगी। करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़े इस मामले में अदालत का हर कदम बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

  • राम मंदिर टिप्पणी के बीच युगों की चर्चा पर छिड़ा नया राजनीतिक विवाद, अनुपम खेर के बयान पर कांग्रेस ने साधा निशाना

    राम मंदिर टिप्पणी के बीच युगों की चर्चा पर छिड़ा नया राजनीतिक विवाद, अनुपम खेर के बयान पर कांग्रेस ने साधा निशाना

    नई दिल्ली । राम मंदिर को लेकर अभिनेता अनुपम खेर की एक टिप्पणी के बाद धार्मिक संदर्भों और सनातन काल गणना को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। कांग्रेस की राष्ट्रीय प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने सोशल मीडिया पर अभिनेता के एक वीडियो का उल्लेख करते हुए उनके बयान की आलोचना की और कहा कि सनातन परंपरा में वर्णित युगों के क्रम को सही ढंग से समझना आवश्यक है। इस टिप्पणी के बाद सोशल मीडिया और राजनीतिक गलियारों में इस मुद्दे पर व्यापक चर्चा शुरू हो गई।

    विवाद की शुरुआत उस बयान से हुई जिसमें अनुपम खेर राम मंदिर से जुड़े एक मामले पर अपनी प्रतिक्रिया दे रहे थे। इसी दौरान उन्होंने भगवान राम और द्वापर युग का उल्लेख किया। उनके इस कथन को लेकर कांग्रेस ने आपत्ति जताई और कहा कि सनातन परंपरा के अनुसार भगवान राम का अवतार त्रेता युग में माना जाता है, जबकि द्वापर युग भगवान श्रीकृष्ण से जुड़ा हुआ है। इसी आधार पर कांग्रेस ने अभिनेता के बयान को तथ्यात्मक रूप से गलत बताते हुए उनकी आलोचना की।

    सुप्रिया श्रीनेत ने अपने बयान में सनातन धर्म की पारंपरिक काल गणना का उल्लेख करते हुए चारों युगों का क्रम बताया। उन्होंने कहा कि हिंदू धर्मग्रंथों के अनुसार सतयुग, त्रेतायुग, द्वापरयुग और कलियुग क्रमशः चार युग हैं। उन्होंने यह भी कहा कि भगवान श्रीराम का अवतार त्रेतायुग में और भगवान श्रीकृष्ण का अवतार द्वापरयुग में माना जाता है। इसी संदर्भ में उन्होंने अभिनेता पर तंज कसते हुए कहा कि सार्वजनिक रूप से धार्मिक विषयों पर टिप्पणी करने से पहले तथ्यों की जानकारी होना आवश्यक है।

    दूसरी ओर, अनुपम खेर का मूल बयान राम मंदिर से जुड़े एक कथित चोरी के मामले पर था। उन्होंने अपने वक्तव्य में कहा था कि किसी संस्था या आस्था से जुड़े स्थान पर यदि कोई गलत घटना होती है तो उसके आधार पर पूरे संस्थान या परंपरा पर प्रश्न नहीं उठाया जाना चाहिए। इसी दौरान युगों का उल्लेख करते हुए हुई कथित तथ्यात्मक त्रुटि विवाद का कारण बन गई। इसके बाद सोशल मीडिया पर उनके बयान का वीडियो तेजी से साझा किया जाने लगा और विभिन्न राजनीतिक प्रतिक्रियाएं सामने आने लगीं।

    यह मामला केवल एक बयान तक सीमित नहीं रहा, बल्कि धार्मिक परंपराओं की जानकारी और सार्वजनिक जीवन में तथ्यों की शुद्धता को लेकर भी चर्चा का विषय बन गया। राजनीतिक दलों के नेताओं और सोशल मीडिया उपयोगकर्ताओं ने अपने-अपने दृष्टिकोण से इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया दी। कुछ लोगों ने इसे सामान्य भाषाई चूक बताया, जबकि अन्य ने धार्मिक विषयों पर बोलते समय अधिक सावधानी बरतने की आवश्यकता पर जोर दिया।

    वर्तमान विवाद ऐसे समय सामने आया है जब राम मंदिर और उससे जुड़े विषय लगातार सार्वजनिक और राजनीतिक विमर्श का हिस्सा बने हुए हैं। धार्मिक आस्था, सांस्कृतिक विरासत और राजनीतिक प्रतिक्रियाओं के बीच यह घटनाक्रम एक बार फिर चर्चा में है। हालांकि इस पूरे मामले में दोनों पक्ष अपने-अपने तर्कों पर कायम हैं, लेकिन इस बहस ने यह स्पष्ट कर दिया है कि धार्मिक और ऐतिहासिक संदर्भों से जुड़े विषयों पर सार्वजनिक बयान देते समय तथ्यात्मक सटीकता और संतुलित भाषा का विशेष महत्व होता है।

  • राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामला गरमाया, कर्मचारियों ने छोड़ी नौकरी; CBI जांच की मांग पर सुप्रीम कोर्ट करेगा सुनवाई

    राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामला गरमाया, कर्मचारियों ने छोड़ी नौकरी; CBI जांच की मांग पर सुप्रीम कोर्ट करेगा सुनवाई

    अयोध्या । अयोध्या स्थित श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में चढ़ावे से जुड़ी कथित अनियमितताओं का मामला अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। शीर्ष अदालत 13 जुलाई को इस प्रकरण से संबंधित तीन याचिकाओं पर सुनवाई करेगी। इन याचिकाओं में मामले की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को सौंपने, विशेष जांच दल (SIT) गठित करने और मंदिर में दान प्रबंधन की समीक्षा के लिए विशेषज्ञ समिति बनाने की मांग की गई है।

    इस बीच चढ़ावा गिनने वाले 23 कर्मचारियों ने सामूहिक रूप से इस्तीफा देकर नया विवाद खड़ा कर दिया है। कर्मचारियों का कहना है कि पहले जहां चढ़ावे में बड़ी संख्या में 500 रुपये के नोट आते थे, वहीं अब 10 और 20 रुपये के नोटों की संख्या काफी बढ़ गई है। इससे नकदी की गिनती में अधिक समय लग रहा है और कार्यभार कई गुना बढ़ गया है।

    कर्मचारियों के मुताबिक पहले 500 रुपये के नोटों की 70 से 80 गड्डियां तैयार हो जाती थीं, जबकि अब मुश्किल से 15 गड्डियां बन पाती हैं। इसके अलावा पहले दो शिफ्टों में होने वाला काम अब सुबह 9 बजे से शाम 6 बजे तक एक ही शिफ्ट में कराया जा रहा है, जबकि वेतन में कोई बढ़ोतरी नहीं हुई। इस्तीफों के बाद बैंक के पास अब केवल 13 गणना कर्मी ही बचे हैं।

    चढ़ावा विवाद का असर अयोध्या से बाहर भी देखने को मिला है। नेपाल के जनकपुर स्थित जानकी मंदिर के महंत रोशन दास ने इस घटना पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए कहा कि भगवान श्रीराम के किसी मंदिर में इस तरह की घटना न पहले कभी सुनी और न देखी। उन्होंने दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। महंत ने बताया कि सावन माह में जनकपुर से 5 से 7 श्रद्धालुओं का प्रतिनिधिमंडल अयोध्या पहुंचकर दर्शन करेगा और अपनी संवेदना प्रकट करेगा।

    इधर, विवाद के बीच श्रीराम जन्मभूमि मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्र अयोध्या पहुंचे। उन्होंने हनुमानगढ़ी में पूजा-अर्चना करने के बाद मंदिर निर्माण कार्यों की समीक्षा की और इंजीनियरों व ट्रस्ट से जुड़े अधिकारियों के साथ बैठक कर निर्माण की प्रगति की जानकारी ली।

    मामले को लेकर राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि रामभक्तों पर गोली चलाने वाले आज आस्था की बात कर रहे हैं। वहीं कांग्रेस नेताओं ने निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए सरकार पर सवाल उठाए हैं। विपक्षी नेताओं का कहना है कि पूरे मामले की स्वतंत्र एजेंसी से जांच होनी चाहिए ताकि सच्चाई सामने आ सके।

    अब इस बहुचर्चित मामले पर सभी की निगाहें 13 जुलाई को होने वाली सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई पर टिकी हैं, जहां जांच की दिशा और आगे की प्रक्रिया को लेकर महत्वपूर्ण फैसला सामने आ सकता है।

  • अयोध्या में क्या होने वाला है बड़ा फैसला? चंपत राय के लेटर से मची हलचल संतों की महाबैठक की तैयारी

    अयोध्या में क्या होने वाला है बड़ा फैसला? चंपत राय के लेटर से मची हलचल संतों की महाबैठक की तैयारी


    नई दिल्ली । अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को लेकर एक बार फिर चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय के दो दिनों के भीतर सामने आए पत्रों ने न केवल संगठन के भीतर हलचल बढ़ा दी है बल्कि संत समाज और रामभक्तों के बीच भी नई चर्चाओं को जन्म दे दिया है। लगातार हो रही बैठकों और वरिष्ठ पदाधिकारियों की सक्रियता ने इस बात के संकेत दिए हैं कि आने वाले दिनों में ट्रस्ट की व्यवस्था और कार्यप्रणाली को लेकर कोई बड़ा फैसला सामने आ सकता है। हालांकि अब तक किसी भी स्तर पर आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।

    सूत्रों के अनुसार चंपत राय के पत्र सार्वजनिक होने के बाद ट्रस्ट के नए महासचिव कृष्ण मोहन और कोषाध्यक्ष महंत गोविंद देवगिरी ने उनसे मुलाकात की। इसके बाद कई प्रमुख संत महंत और ट्रस्ट से जुड़े वरिष्ठ लोगों ने भी अलग अलग बैठकों में हिस्सा लिया। इन मुलाकातों को सामान्य प्रक्रिया से अलग माना जा रहा है क्योंकि इनका उद्देश्य ट्रस्ट में बने मौजूदा हालात पर चर्चा और आगे की रणनीति तय करना बताया जा रहा है।

    बताया जा रहा है कि महासचिव पद से हटाए जाने के बाद चंपत राय खुद को उपेक्षित महसूस कर रहे हैं। हाल ही में जारी उनके पत्रों में भी उनकी पीड़ा झलकने की बात कही जा रही है। पत्रों के सार्वजनिक होने के बाद संगठन के भीतर यह कोशिश तेज हो गई है कि किसी तरह विवाद और अधिक न बढ़े तथा स्थिति को सामान्य बनाया जाए। इसी कारण लगातार संवाद और बैठकों का सिलसिला जारी है।

    जानकारी के मुताबिक राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और विश्व हिंदू परिषद के कुछ वरिष्ठ पदाधिकारियों ने भी चंपत राय से संपर्क किया है। उनसे संगठनात्मक मर्यादा बनाए रखने और पूरे मामले को शांतिपूर्वक सुलझाने का आग्रह किया गया है। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में सभी पक्षों के बीच समन्वय स्थापित करने का प्रयास और तेज होगा।

    इधर ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष महंत गोविंद देवगिरी से कई प्रमुख संतों ने विस्तृत चर्चा की। बैठक के बाद संतों ने संकेत दिए कि निकट भविष्य में ऐसा परिवर्तन देखने को मिल सकता है जिसकी व्यापक स्तर पर सराहना होगी। संत समाज का कहना है कि राम मंदिर आंदोलन में संतों की भूमिका हमेशा महत्वपूर्ण रही है इसलिए ट्रस्ट की व्यवस्था में भी उनका प्रभावी प्रतिनिधित्व सुनिश्चित किया जाना चाहिए। उनका मानना है कि भविष्य में निर्णय प्रक्रिया में संतों की अधिक भागीदारी से संगठन और अधिक मजबूत होगा।

    सूत्रों के अनुसार 22 जुलाई को प्रस्तावित ट्रस्ट की बैठक से पहले संतों की एक बड़ी बैठक आयोजित की जा सकती है जिसमें देशभर से सैकड़ों संत और महंत शामिल हो सकते हैं। इस बैठक का उद्देश्य हाल के विवादों के बाद समाज में बने भ्रम को दूर करना और राम मंदिर ट्रस्ट के प्रति सकारात्मक संदेश देना बताया जा रहा है। साथ ही यह भी स्पष्ट किया जाएगा कि कथित अनियमितताओं में पूरे ट्रस्ट की भूमिका नहीं बल्कि केवल कुछ व्यक्तियों पर कार्रवाई की गई है।

    फिलहाल अयोध्या में लगातार हो रही बैठकों और बढ़ी गतिविधियों ने यह साफ कर दिया है कि राम मंदिर ट्रस्ट आने वाले दिनों में संगठनात्मक स्तर पर कुछ अहम फैसले ले सकता है। हालांकि इन बैठकों का अंतिम परिणाम क्या होगा और संभावित बदलाव किस रूप में सामने आएंगे इसका जवाब आने वाले समय में ही मिल सकेगा।

  • राम मंदिर और सनातन मुद्दे पर आम आदमी पार्टी का भाजपा पर तीखा प्रहार, केजरीवाल बोले— भगवान राम के नाम पर राजनीति नहीं, आस्था जरूरी

    राम मंदिर और सनातन मुद्दे पर आम आदमी पार्टी का भाजपा पर तीखा प्रहार, केजरीवाल बोले— भगवान राम के नाम पर राजनीति नहीं, आस्था जरूरी

    नई दिल्ली । आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने बुधवार को भाजपा पर भगवान राम और राम मंदिर के मुद्दे को लेकर तीखा राजनीतिक हमला बोला। उन्होंने दावा किया कि उनकी पार्टी सनातन मूल्यों के प्रति वास्तविक प्रतिबद्धता के साथ कार्य करती है, जबकि भाजपा भगवान राम के नाम का उपयोग केवल चुनावी राजनीति के लिए करती है। उनके बयान के बाद राजनीतिक माहौल एक बार फिर गरमा गया है।

    प्रेस वार्ता के दौरान केजरीवाल ने कहा कि भाजपा चुनावी सभाओं और राजनीतिक अभियानों में भगवान राम तथा राम मंदिर का उल्लेख प्रमुखता से करती है, लेकिन आस्था के अनुरूप व्यवहार नहीं करती। उन्होंने आरोप लगाया कि पार्टी धार्मिक भावनाओं को राजनीतिक लाभ के लिए इस्तेमाल करती है। उनके अनुसार, आस्था केवल भाषणों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि उसका व्यवहार में भी प्रतिबिंब दिखाई देना चाहिए।

    उन्होंने राम मंदिर से जुड़े हालिया विवाद का उल्लेख करते हुए कहा कि इस पूरे घटनाक्रम से देशभर के श्रद्धालुओं की भावनाएं प्रभावित हुई हैं। उनका कहना था कि ऐसे मामलों में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित होना आवश्यक है, ताकि धार्मिक संस्थाओं के प्रति लोगों का विश्वास बना रहे। उन्होंने आरोप लगाया कि संबंधित मामलों में जिम्मेदारी तय करने के बजाय वास्तविक तथ्यों को सामने लाने में अपेक्षित गंभीरता नहीं दिखाई गई।

    केजरीवाल ने यह भी दावा किया कि उन्होंने सार्वजनिक रूप से उपलब्ध जानकारियों का अध्ययन करने के बाद यह निष्कर्ष निकाला कि भाजपा के कई वरिष्ठ नेताओं की ओर से राम मंदिर में दर्शन और पूजा-अर्चना को लेकर अपेक्षित सक्रियता दिखाई नहीं दी। उन्होंने कहा कि यह विषय केवल राजनीतिक बहस का नहीं, बल्कि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़ा हुआ है और इसी कारण लोग इस पर जवाब चाहते हैं।

    आम आदमी पार्टी के प्रमुख ने अपनी पार्टी की धार्मिक और सामाजिक पहलों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि विभिन्न राज्यों में धार्मिक आयोजनों, भजन संध्याओं, मंदिरों के विकास और श्रद्धालुओं की सुविधा से जुड़े कई कार्यक्रमों को प्राथमिकता दी गई है। उनका कहना था कि इन प्रयासों का उद्देश्य किसी राजनीतिक लाभ के बजाय समाज की धार्मिक और सांस्कृतिक आवश्यकताओं का सम्मान करना है।

    उन्होंने यह भी कहा कि उनकी पार्टी ने शासन के दौरान धार्मिक यात्राओं को सुविधाजनक बनाने और विभिन्न आस्था स्थलों से जुड़े कार्यक्रमों को बढ़ावा देने की दिशा में कई कदम उठाए। उनके अनुसार, सनातन परंपराओं के संरक्षण और धार्मिक मूल्यों के सम्मान को उनकी पार्टी सामाजिक जिम्मेदारी के रूप में देखती है।

    केजरीवाल के बयान के बाद राजनीतिक हलकों में इस मुद्दे पर नई बहस शुरू हो गई है। एक ओर आम आदमी पार्टी इसे आस्था और जवाबदेही का विषय बता रही है, वहीं दूसरी ओर यह बयान आगामी राजनीतिक विमर्श में भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। धार्मिक मुद्दों पर राजनीतिक दलों के बीच बढ़ती बयानबाजी के बीच यह स्पष्ट है कि आने वाले समय में राम मंदिर और सनातन से जुड़े विषय सार्वजनिक और राजनीतिक चर्चा के केंद्र में बने रह सकते हैं।

  • अयोध्या में राम दरबार की पहली वर्षगांठ पर भक्ति का महासागर, मंगला आरती से गूंजा मंदिर परिसर

    अयोध्या में राम दरबार की पहली वर्षगांठ पर भक्ति का महासागर, मंगला आरती से गूंजा मंदिर परिसर

    नई दिल्ली। अयोध्या में राम मंदिर परिसर स्थित राम दरबार की प्राण प्रतिष्ठा की पहली वर्षगांठ मंगलवार को श्रद्धा और भक्ति के माहौल में मनाई जा रही है। सुबह मंगला आरती के साथ शुरू हुए कार्यक्रमों का सिलसिला देर रात तक जारी रहेगा। पूरे मंदिर परिसर को विशेष रूप से सजाया गया है और देशभर से पहुंचे श्रद्धालुओं, संतों और धर्माचार्यों की मौजूदगी से अयोध्या पूरी तरह राममय नजर आ रही है।

    सुबह 4 बजे वैदिक मंत्रोच्चार के बीच भगवान श्रीराम, माता सीता, लक्ष्मण, भरत, शत्रुघ्न और हनुमान जी का विशेष अभिषेक किया गया। शंख, घंटों और घड़ियाल की गूंज के बीच मंदिर परिसर “जय श्रीराम” के उद्घोष से गूंज उठा। संत-महंत और श्रद्धालु हाथ जोड़कर पूजा-अर्चना में शामिल हुए और पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया।

    अभिषेक के बाद भगवान को पीतांबर वस्त्र धारण कराए गए और विशेष श्रृंगार किया गया। मंदिर परिसर में भजन-कीर्तन और राम नाम संकीर्तन का दौर लगातार जारी है। श्रद्धालु भजनों पर झूमते नजर आए। दोपहर में भगवान श्रीराम को 56 भोग अर्पित किया जाएगा, जिसमें देशभर के पारंपरिक व्यंजन शामिल रहेंगे।

    कार्यक्रम के दौरान कथा व्यास सत्यनारायण दास और शिवम पांडेय भगवान श्रीराम की लीलाओं का वर्णन करेंगे। वहीं दक्षिण भारत से आए कलाकार सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के जरिए रामभक्ति का रंग और गहरा करेंगे।

    शाम को मां सरयू की 5051 बत्तियों से भव्य महाआरती होगी, जिसे देखने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है। सरयू तट पर फूल बंगला झांकी भी सजाई जाएगी, जो आकर्षण का केंद्र रहेगी। शाम 5 बजे से 7 बजे तक भजन संध्या का आयोजन भी किया जाएगा।

    इसके अलावा राम मंदिर परिसर स्थित मां दुर्गा मंदिर के शिखर पर 29 मई को ध्वजारोहण कार्यक्रम आयोजित होगा। इस कार्यक्रम में साध्वी ऋतम्भरा मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगी। दुर्गा वाहिनी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी से जुड़ी पदाधिकारी भी आयोजन में मौजूद रहेंगी।

    राम दरबार की पहली वर्षगांठ पर अयोध्या में श्रद्धा, संस्कृति और सनातन परंपरा का अद्भुत संगम देखने को मिल रहा है।

  • राम मंदिर आंदोलन की सफलता का आधार 'हृदय की गूँज' और 'अटूट संकल्प' था: साध्वी ऋतंभरा

    राम मंदिर आंदोलन की सफलता का आधार 'हृदय की गूँज' और 'अटूट संकल्प' था: साध्वी ऋतंभरा


    पुणे/अयोध्या। प्रसिद्ध ओजस्वी वक्ता साध्वी ऋतंभरा ने अयोध्या राम मंदिर आंदोलन की ऐतिहासिक सफलता पर बड़ा बयान दिया है। पुणे में आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि राम जन्मभूमि का संघर्ष एक ऐसे संकल्प की परिणति थी जिसका कोई विकल्प नहीं था। उन्होंने जोर देकर कहा कि आज के दौर में सूचना क्रांति और सोशल मीडिया का बोलबाला है लेकिन राम मंदिर आंदोलन उस समय सफल हुआ जब ये आधुनिक साधन मौजूद नहीं थे।इसका कारण यह था कि आंदोलन का संदेश सीधे लोगों के दिलों में गूँज रहा था।साध्वी ऋतंभरा ने मानवीय इच्छाशक्ति पर प्रकाश डालते हुए कहा हमारा काम राम जी के कार्य के लिए समर्पित है। मानवीय संकल्प में पर्वतों को उखाड़ फेंकने और पत्थर को पानी में बदल देने की शक्ति होती है बशर्ते वह आत्मसंयम और चरित्र की प्रमाणिकता पर आधारित हो।

    राष्ट्र की मजबूती चरित्र और एकजुटता में

    साध्वी ने समाज को एकजुट होने का संदेश देते हुए कहा कि मंदिर का निर्माण इस बात का जीवंत प्रमाण है कि एक दृढ़ संकल्पित समाज क्या हासिल कर सकता है। उनके अनुसार किसी भी राष्ट्र की वास्तविक शक्ति केवल उसकी भौतिक संपदा में नहीं बल्कि उसके नागरिकों के चरित्र और आंतरिक विभाजनों को दूर करने की क्षमता में निहित होती है। उन्होंने दमितों और वंचितों की रक्षा के लिए समाज से आगे आने का आह्वान भी किया। अयोध्या में ‘प्रतिष्ठा द्वादशी’ का उल्लास: 29 दिसंबर से शुरू होंगे कार्यक्रम एक ओर जहाँ साध्वी ऋतंभरा ने आंदोलन की वैचारिक विजय को रेखांकित किया वहीं दूसरी ओर अयोध्या में ‘प्रतिष्ठा द्वादशी’ के पांच दिवसीय भव्य आयोजन की रूपरेखा जारी कर दी गई है।

    आयोजन की मुख्य विशेषताएं

    प्रारंभ: राम मंदिर ट्रस्टी डॉ अनिल मिश्र के अनुसार समारोह की शुरुआत 29 दिसंबर से होगी।मुख्य अतिथि: 31 दिसंबर को होने वाले मुख्य कार्यक्रम में केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह शिरकत करेंगे।सांस्कृतिक प्रस्तुतियां: पांच दिनों तक चलने वाले इस महोत्सव में नियमित रामचरितमानस पाठ और कथा का आयोजन होगा।समय: सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रतिदिन शाम से शुरू होकर रात 9 बजे तक चलेंगे।यह आयोजन राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा के बाद के महत्वपूर्ण धार्मिक उत्सवों में से एक है जिसमें देश भर से श्रद्धालुओं के जुटने की उम्मीद है।