Tag: Reliance Jio

  • शेयर बाजार में जियो का ऐतिहासिक धमाका! 1 करोड़ आवेदन का आंकड़ा पार कर दुनिया में बनाया नया रिकॉर्ड

    शेयर बाजार में जियो का ऐतिहासिक धमाका! 1 करोड़ आवेदन का आंकड़ा पार कर दुनिया में बनाया नया रिकॉर्ड


    नई दिल्ली । रिलायंस इंडस्ट्रीज की टेलीकॉम कंपनी जियो प्लेटफॉर्म्स के आईपीओ ने निवेशकों के बीच जबरदस्त लोकप्रियता हासिल करते हुए एक नया इतिहास रच दिया है। कंपनी के आईपीओ को 1.2 करोड़ से अधिक आवेदन मिलने का दावा किया गया है। यह आंकड़ा भारतीय शेयर बाजार के इतिहास में किसी आईपीओ के लिए सबसे अधिक बताया जा रहा है। इसके साथ ही जियो प्लेटफॉर्म्स का इश्यू दुनिया का पहला ऐसा आईपीओ बन गया है जिसे एक करोड़ से ज्यादा आवेदन मिले हैं। इस उपलब्धि के साथ कंपनी ने वारी एनर्जीज के पिछले रिकॉर्ड को भी पीछे छोड़ दिया है। वारी एनर्जीज के आईपीओ को लगभग 97 लाख आवेदन मिले थे। जियो के आईपीओ को मिले इस शानदार रिस्पॉन्स ने शेयर बाजार में कंपनी को लेकर निवेशकों के उत्साह को साफ तौर पर जाहिर किया है।

    जियो प्लेटफॉर्म्स के आईपीओ की शुरुआत से ही निवेशकों की दिलचस्पी देखने को मिली। 21 अक्टूबर को खुला यह इश्यू महज दो घंटे के भीतर पूरी तरह सब्सक्राइब हो गया था। पहले दिन कंपनी के आईपीओ के लिए लगभग 30.5 लाख आवेदन आए। इसके बाद दूसरे दिन के अंत तक आवेदनों की संख्या बढ़कर 75 लाख के पार पहुंच गई। तीसरे दिन निवेशकों की भागीदारी ने एक करोड़ का आंकड़ा पार कर लिया। आईपीओ के अंतिम दिन तक आवेदन 1.2 करोड़ से अधिक हो गए। सब्सक्रिप्शन के आंकड़ों के मुताबिक इश्यू को कुल मिलाकर 22 गुना से ज्यादा बोलियां मिलीं। कंपनी के 19.75 करोड़ शेयरों के मुकाबले करीब 438 करोड़ शेयरों के लिए बोलियां लगाई गईं। योग्य संस्थागत खरीदारों की श्रेणी में भी भारी मांग रही और यह हिस्सा लगभग 70 गुना सब्सक्राइब हुआ।

    जियो प्लेटफॉर्म्स के इस आईपीओ का प्राइस बैंड 1065 रुपये से 1119 रुपये प्रति शेयर निर्धारित किया गया था। निवेशकों के लिए एक लॉट में 12 शेयर रखे गए थे। कंपनी ने इश्यू के अपर प्राइस बैंड पर लगभग 30213 करोड़ रुपये जुटाने की योजना बनाई थी। इसके आधार पर कंपनी का मूल्यांकन करीब 108 अरब डॉलर आंका गया। आईपीओ की एक खास बात यह भी है कि इसमें रिलायंस इंडस्ट्रीज या अन्य मौजूदा शेयरधारक अपनी हिस्सेदारी नहीं बेच रहे हैं। उपलब्ध विवरण के अनुसार इश्यू में नए शेयर जारी किए गए हैं।

    आईपीओ खुलने से पहले ही बड़े संस्थागत निवेशकों ने जियो प्लेटफॉर्म्स पर भरोसा जताया था। कंपनी ने 19 अक्टूबर को 212 एंकर निवेशकों से लगभग 8110 करोड़ रुपये जुटाए थे। इन निवेशकों को 1119 रुपये प्रति शेयर की दर से शेयर आवंटित किए गए। एंकर निवेशकों की श्रेणी में 2.5 लाख करोड़ रुपये से अधिक की बोलियां मिलने की बात कही गई। इसमें ब्लैकरॉक फिडेलिटी इन्वेस्टमेंट्स जीआईसी और अबू धाबी इन्वेस्टमेंट अथॉरिटी जैसे बड़े वैश्विक निवेशक शामिल थे।

    आईपीओ से जुटाई जाने वाली राशि का इस्तेमाल कंपनी अपनी कारोबारी योजनाओं को आगे बढ़ाने और वित्तीय स्थिति मजबूत करने के लिए करेगी। जियो प्लेटफॉर्म्स की योजना 27500 करोड़ रुपये तक अपनी पूर्ण स्वामित्व वाली कंपनी रिलायंस जियो इन्फोकॉम का कर्ज चुकाने में लगाने की है। शेष राशि का उपयोग पूंजीगत खर्च और कार्यशील पूंजी की जरूरतों को पूरा करने के लिए किया जाएगा। कुल मिलाकर जियो प्लेटफॉर्म्स के आईपीओ को मिला यह ऐतिहासिक रिस्पॉन्स भारतीय शेयर बाजार में बड़े सार्वजनिक निर्गमों के प्रति निवेशकों की बढ़ती दिलचस्पी को दर्शाता है। हालांकि आईपीओ में भारी मांग मिलने का मतलब यह नहीं है कि लिस्टिंग के बाद शेयर से मुनाफा होना तय है।

  • डिजिटल दुनिया में नया धमाका करने की तैयारी, सैटेलाइट इंटरनेट सेक्टर में उतर सकती है रिलायंस

    डिजिटल दुनिया में नया धमाका करने की तैयारी, सैटेलाइट इंटरनेट सेक्टर में उतर सकती है रिलायंस

    नई दिल्ली। भारत में इंटरनेट सेवाओं के क्षेत्र में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। टेलीकॉम सेक्टर में मजबूत पकड़ बनाने के बाद अब रिलायंस सैटेलाइट इंटरनेट की दुनिया में भी बड़ी तैयारी करती दिखाई दे रही है। माना जा रहा है कि कंपनी लो अर्थ ऑर्बिट यानी LEO सैटेलाइट तकनीक के जरिए देशभर में हाई-स्पीड इंटरनेट पहुंचाने की दिशा में काम कर रही है।

    सैटेलाइट इंटरनेट ऐसी तकनीक है जिसमें इंटरनेट सेवा के लिए मोबाइल टावर या फाइबर केबल की जरूरत नहीं पड़ती। इंटरनेट सीधे अंतरिक्ष में मौजूद सैटेलाइट्स के जरिए यूजर्स तक पहुंचाया जाता है। इसका सबसे बड़ा फायदा यह है कि जिन इलाकों में नेटवर्क पहुंचाना मुश्किल होता है, वहां भी आसानी से इंटरनेट सेवा उपलब्ध कराई जा सकती है।

    पहाड़ी क्षेत्रों, गांवों, जंगलों और दूरदराज के इलाकों में रहने वाले लोगों के लिए यह तकनीक काफी उपयोगी साबित हो सकती है। जहां आज भी कमजोर नेटवर्क या इंटरनेट की समस्या बनी रहती है, वहां हाई-स्पीड कनेक्टिविटी पहुंचने की संभावना बढ़ जाएगी। इससे ऑनलाइन शिक्षा, डिजिटल पेमेंट, वीडियो कॉलिंग और छोटे कारोबारों को भी मजबूती मिलेगी।

    LEO सैटेलाइट धरती के अपेक्षाकृत करीब रहते हैं, जिससे इंटरनेट सिग्नल तेजी से ट्रांसफर होता है और नेटवर्क में देरी काफी कम हो जाती है। यही कारण है कि इसे भविष्य की इंटरनेट तकनीक माना जा रहा है। वीडियो स्ट्रीमिंग, गेमिंग और लाइव कम्युनिकेशन जैसी सेवाएं भी इससे ज्यादा बेहतर तरीके से काम कर सकती हैं।

    बताया जा रहा है कि इस प्रोजेक्ट के लिए कई स्तरों पर तैयारियां शुरू हो चुकी हैं और कंपनी इसे अपने डिजिटल कारोबार के अगले बड़े कदम के रूप में देख रही है। आने वाले समय में यह तकनीक भारत के इंटरनेट सेक्टर में नई प्रतिस्पर्धा भी पैदा कर सकती है।

    फिलहाल सैटेलाइट इंटरनेट सेवाएं शुरुआती चरण में हैं और इससे जुड़े कई नियम व प्रक्रियाएं अभी पूरी की जानी बाकी हैं। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि बाजार में प्रतिस्पर्धा बढ़ने के बाद इसकी कीमतें धीरे-धीरे आम लोगों की पहुंच में आ सकती हैं।