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  • आज सोम प्रदोष व्रत: भगवान शिव के अभिषेक का शुभ मुहूर्त शाम 6:29 से 8:53 बजे तक

    आज सोम प्रदोष व्रत: भगवान शिव के अभिषेक का शुभ मुहूर्त शाम 6:29 से 8:53 बजे तक

    नई दिल्ली । 16 मार्च को सोम प्रदोष व्रत मनाया जा रहा है। हिंदू धर्म में प्रदोष व्रत को भगवान शिव की कृपा प्राप्त करने के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। जब प्रदोष व्रत सोमवार को पड़ता है तो इसे सोम प्रदोष व्रत कहा जाता है और इसका महत्व और बढ़ जाता है। इस दिन सच्चे मन से पूजा करने पर जीवन में सुख-समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा आने की मान्यता है।

    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार प्रदोष काल में भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा विशेष फलदायी मानी जाती है। पंचांग के अनुसार आज प्रदोष काल में पूजा और अभिषेक का शुभ समय शाम 6:29 बजे से रात 8:53 बजे तक रहेगा। इस दौरान विधि-विधान से अभिषेक करने से भक्तों को विशेष आशीर्वाद मिलने की मान्यता है।

    अभिषेक करते समय कुछ बातों का विशेष ध्यान रखना जरूरी माना गया है। शिवलिंग पर बेलपत्र चढ़ाते समय उसका चिकना भाग ऊपर की ओर रखना चाहिए। भगवान शिव को कुमकुम और हल्दी अर्पित नहीं की जाती। पूजा के दौरान मन को शांत रखकर श्रद्धा और सकारात्मक भाव से भगवान शिव का स्मरण करना चाहिए।

    परंपरा के अनुसार इस दिन व्रत रखकर शिवलिंग पर दूध, दही, घी, शहद और जल से अभिषेक किया जाता है। मान्यता है कि ऐसा करने से व्यक्ति को दीर्घायु, आरोग्य, धन-धान्य और संतान सुख की प्राप्ति होती है।

  • 8 फरवरी महाकाल भस्म आरती: चंदन के त्रिपुंड और त्रिनेत्र से सजे बाबा महाकाल, अलौकिक श्रृंगार के हुए दर्शन

    8 फरवरी महाकाल भस्म आरती: चंदन के त्रिपुंड और त्रिनेत्र से सजे बाबा महाकाल, अलौकिक श्रृंगार के हुए दर्शन

    उज्जैन । उज्जैन स्थित विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में रविवार तड़के 8 फरवरी को फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष की सप्तमी तिथि पर भव्य भस्म आरती संपन्न हुई। सुबह करीब 4 बजे मंदिर के कपाट खोले गए, जिसके साथ ही श्रद्धा और आस्था का अद्भुत दृश्य देखने को मिला। कपाट खुलते ही गर्भगृह में वैदिक मंत्रोच्चार के बीच पुजारियों ने भगवान महाकाल सहित सभी देवी-देवताओं का विधिवत पूजन किया और जलाभिषेक से आरती की शुरुआत हुई ।

    इसके पश्चात भगवान महाकाल का दूध, दही, घी, शहद और फलों के रस से निर्मित पंचामृत से अभिषेक किया गया। अभिषेक के बाद बाबा महाकाल का अत्यंत मनोहारी और दिव्य श्रृंगार किया गया। भगवान को चंदन का त्रिपुंड लगाया गया, त्रिनेत्र से अलंकृत किया गया और भांग से राजा स्वरूप में सजाया गया। यह दृश्य भक्तों के लिए अत्यंत भावविभोर कर देने वाला रहा।

    भस्म अर्पण से पूर्व प्रथम घंटाल बजाकर हरिओम का जल अर्पित किया गया। मंत्रोच्चार के बीच भगवान महाकाल का ध्यान किया गया और कपूर आरती संपन्न हुई। इसके बाद ज्योतिर्लिंग को वस्त्र से आच्छादित कर भस्म रमाई गई, जो महाकाल की विशिष्ट पहचान और शिव तत्व का प्रतीक मानी जाती है। भस्म अर्पण के पश्चात भगवान को शेषनाग का रजत मुकुट, रजत की मुंडमाल, रुद्राक्ष की माला और सुगंधित पुष्पों की मालाएं अर्पित की गईं। आभूषणों और फूलों से बाबा महाकाल का भव्य अलंकरण किया गया, जिससे गर्भगृह दिव्यता से आलोकित हो उठा।

    अल सुबह संपन्न हुई इस भस्म आरती में सैकड़ों श्रद्धालुओं ने भाग लेकर पुण्य लाभ अर्जित किया। दर्शन के बाद श्रद्धालुओं ने नंदी महाराज के दर्शन किए और उनके कान के समीप अपनी मनोकामनाएं पूर्ण होने की प्रार्थना की। इस दौरान पूरा मंदिर परिसर “जय श्री महाकाल” के गगनभेदी जयकारों से गूंज उठा। भक्तों की आस्था और भक्ति ने एक बार फिर यह सिद्ध कर दिया कि बाबा महाकाल के दरबार में आकर हर मनोकामना पूर्ण होने की आशा जाग उठती है। जो श्रद्धालु मंदिर नहीं पहुंच सके, वे घर बैठे ऑनलाइन माध्यम से भी भस्म आरती के दर्शन कर बाबा का आशीर्वाद प्राप्त कर सकते हैं।

  • उज्जैन महाकाल भस्म आरती: फाल्गुन कृष्ण द्वितीया पर 4 बजे खुले कपाट, दिव्य श्रृंगार और भस्म अर्पण से मंदिर गूंजा

    उज्जैन महाकाल भस्म आरती: फाल्गुन कृष्ण द्वितीया पर 4 बजे खुले कपाट, दिव्य श्रृंगार और भस्म अर्पण से मंदिर गूंजा


    उज्जैन। विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में फाल्गुन माह की कृष्ण पक्ष द्वितीया तिथि मंगलवार तड़के 4 बजे मंदिर के कपाट खुले और भस्म आरती का भव्य श्रृंगार आरंभ हुआ। इस विशेष अवसर पर महाकाल का दिव्य श्रृंगार मनोहारी रूप में किया गया, जिससे पूरे मंदिर परिसर में भक्तिमय माहौल छा गया।

    कपाट खुलते ही पुजारियों ने गर्भगृह में स्थापित सभी देवी-देवताओं का विधिवत पूजन किया और भगवान महाकाल का जलाभिषेक किया। इसके बाद पंचामृत से अभिषेक कर भव्य पूजा-अर्चना की गई। भगवान महाकाल का चंदन का त्रिपुंड, त्रिनेत्र और भांग से राजा स्वरूप में मनमोहक श्रृंगार किया गया, जिससे दर्शनार्थियों की श्रद्धा और बढ़ गई।

    भस्म अर्पण से पहले प्रथम घंटाल बजाकर हरिओम का जल अर्पित किया गया और मंत्रोच्चार के बीच भगवान का ध्यान किया गया। कपूर आरती के बाद ज्योतिर्लिंग को कपड़े से ढंककर भस्म रमाई गई। उसके बाद शेषनाग का रजत मुकुट, रजत की मुण्डमाल, रुद्राक्ष की माला और पुष्पों की माला अर्पित की गई। आभूषणों से सुगंधित पुष्पों से भगवान का अलंकरण किया गया, जिससे मंदिर में भक्तों का आस्था का रंग और भी गहरा हो गया।

    अल सुबह भस्म आरती में सैकड़ों श्रद्धालुओं ने दर्शन कर पुण्य लाभ कमाया। भक्तों ने नंदी महाराज का दर्शन कर उनके कान के समीप जाकर अपनी मनोकामनाएं पूर्ण होने का आशीर्वाद मांगा। इस दौरान श्रद्धालु बाबा महाकाल की जयकारे लगाते रहे और पूरा मंदिर “जय महाकाल” के नारे से गूंज उठा।

  • माघ पूर्णिमा पर आस्था का सैलाब: कड़ाके की ठंड में नर्मदापुरम के सेठानी घाट पर गूंजे 'नर्मदे हर' के जयकारे, हजारों श्रद्धालुओं ने किया स्नान

    माघ पूर्णिमा पर आस्था का सैलाब: कड़ाके की ठंड में नर्मदापुरम के सेठानी घाट पर गूंजे 'नर्मदे हर' के जयकारे, हजारों श्रद्धालुओं ने किया स्नान


    नर्मदापुरम । मध्य प्रदेश की संस्कारधानी और मां नर्मदा के पावन तट नर्मदापुरम में आज माघ पूर्णिमा का अद्भुत आध्यात्मिक नजारा देखने को मिला। माघ मास के इस अंतिम और पवित्र दिन पर प्रसिद्ध सेठानी घाट श्रद्धा के सागर में डूबा नजर आया। कड़ाके की ठंड और सुबह की सर्द हवाओं की परवाह न करते हुए, हजारों की संख्या में श्रद्धालु सूर्योदय से पहले ही मां नर्मदा की शरण में पहुँच गए और आस्था की डुबकी लगाई।

    सर्द हवाओं पर भारी पड़ी शिव-भक्ति रविवार तड़के से ही सेठानी घाट और आसपास के अन्य घाटों पर भक्तों की लंबी कतारें लगने लगी थीं। जैसे ही भोर की पहली किरण ने नर्मदा के जल को छुआ, पूरा वातावरण ‘नर्मदे हर’ और ‘हर-हर महादेव’ के उद्घोष से गुंजायमान हो उठा। ठिठुरन के बावजूद क्या बच्चे, क्या बूढ़ेहर कोई मां नर्मदा के शीतल जल में पुण्य लाभ अर्जित करने के लिए लालायित दिखा। श्रद्धालुओं ने स्नान के पश्चात सूर्य को अर्घ्य दिया और तट पर स्थित प्राचीन शिवलिंगों का विधि-विधान से पूजन-अर्चन कर परिवार की सुख-समृद्धि की मंगल कामना की।

    दान-पुण्य और मोक्ष की मान्यता शास्त्रों के अनुसार माघ पूर्णिमा का दिन आध्यात्मिक शुद्धि के लिए सर्वश्रेष्ठ माना गया है। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन पवित्र नदियों में स्नान करने से व्यक्ति के समस्त ज्ञात-अज्ञात पापों का शमन होता है और मोक्ष का मार्ग प्रशस्त होता है। माताओं और बहनों ने घाट पर दीपदान किया और अन्न-वस्त्र का दान कर पुण्य लाभ कमाया। नर्मदापुरम की इस पावन धरा पर भक्तों का यह अटूट विश्वास दर्शाता है कि भारतीय संस्कृति में आस्था के आगे मौसम की कठोरता भी गौण हो जाती है।

    प्रशासन द्वारा घाटों पर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे। गोताखोरों की टीम और पुलिस बल मुस्तैद रहा ताकि उमड़ती भीड़ के बीच कोई अप्रिय घटना न हो। दान-पुण्य भजन-कीर्तन और जप-तप का यह सिलसिला देर शाम होने वाली महाआरती तक जारी रहने की उम्मीद है।

  • महाकाल भस्म आरती: भांग, चंदन और त्रिनेत्र से सजा बाबा का 'राजा स्वरूप', त्रयोदशी पर उज्जैन में उमड़ा आस्था का सैलाब

    महाकाल भस्म आरती: भांग, चंदन और त्रिनेत्र से सजा बाबा का 'राजा स्वरूप', त्रयोदशी पर उज्जैन में उमड़ा आस्था का सैलाब


    उज्जैन । विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में माघ माह के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि पर शनिवार को भक्ति और शक्ति का अद्भुत संगम देखने को मिला। तड़के 4 बजे जैसे ही मंदिर के रजत कपाट खुले, पूरा परिसर ‘जय महाकाल’ के उद्घोष से गुंजायमान हो उठा। बाबा महाकाल की विशेष भस्म आरती के दौरान भगवान का ऐसा दिव्य श्रृंगार किया गया कि श्रद्धालु मंत्रमुग्ध रह गए।

    पंचामृत अभिषेक और शाही श्रृंगार परंपरा के अनुसार, मंदिर के पट खुलने के बाद पुजारियों ने गर्भगृह में स्थापित सभी देवी-देवताओं का पूजन किया। इसके पश्चात भगवान महाकाल का जलाभिषेक कर उन्हें दूध, दही, घी, शहद और फलों के रसों से बने पंचामृत से स्नान कराया गया। स्नान के उपरांत बाबा का श्रृंगार शुरू हुआ, जिसमें चंदन का त्रिपुंड, मस्तक पर त्रिनेत्र और भांग के विशेष लेपन से उन्हें ‘राजा स्वरूप’ दिया गया। भगवान का यह रूप इतना मनमोहक था कि हर आँख बस उन्हें निहारती रह गई।

    भस्म रमाई और दिव्य आभूषण भस्म अर्पण की प्रक्रिया से पूर्व प्रथम घंटाल बजाकर ‘हरिओम’ का जल अर्पित किया गया। वैदिक मंत्रोच्चार के बीच कपूर आरती हुई और फिर ज्योतिर्लिंग को सूती कपड़े से ढांककर पवित्र भस्म रमाई गई। भस्म आरती के पश्चात बाबा को शेषनाग का रजत मुकुट, रजत की मुण्डमाल और रुद्राक्ष की मालाएं धारण कराई गईं। सुगंधित पुष्पों और आभूषणों से सुसज्जित होकर बाबा महाकाल अपने पूर्ण वैभव में नजर आए।

    नंदी के कान में मनोकामनाएं और गूंजते जयकारे इस अलौकिक आरती का गवाह बनने के लिए देशभर से सैकड़ों श्रद्धालु उज्जैन पहुँचे थे। भस्म आरती के दौरान श्रद्धालुओं ने नंदी महाराज के दर्शन किए और परंपरा के अनुसार उनके कान में अपनी मनोकामनाएं कहीं। मान्यता है कि नंदी जी के माध्यम से भक्तों की पुकार बाबा महाकाल तक शीघ्र पहुँचती है। आरती के अंत तक पूरा मंदिर परिसर शिव भक्ति के रंग में डूबा रहा और भक्तों ने इस पुण्य लाभ से स्वयं को धन्य महसूस किया।

    उज्जैन । विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में माघ माह के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि पर शनिवार को भक्ति और शक्ति का अद्भुत संगम देखने को मिला। तड़के 4 बजे जैसे ही मंदिर के रजत कपाट खुले, पूरा परिसर ‘जय महाकाल’ के उद्घोष से गुंजायमान हो उठा। बाबा महाकाल की विशेष भस्म आरती के दौरान भगवान का ऐसा दिव्य श्रृंगार किया गया कि श्रद्धालु मंत्रमुग्ध रह गए।

    पंचामृत अभिषेक और शाही श्रृंगार परंपरा के अनुसार, मंदिर के पट खुलने के बाद पुजारियों ने गर्भगृह में स्थापित सभी देवी-देवताओं का पूजन किया। इसके पश्चात भगवान महाकाल का जलाभिषेक कर उन्हें दूध, दही, घी, शहद और फलों के रसों से बने पंचामृत से स्नान कराया गया। स्नान के उपरांत बाबा का श्रृंगार शुरू हुआ, जिसमें चंदन का त्रिपुंड, मस्तक पर त्रिनेत्र और भांग के विशेष लेपन से उन्हें ‘राजा स्वरूप’ दिया गया। भगवान का यह रूप इतना मनमोहक था कि हर आँख बस उन्हें निहारती रह गई।

    भस्म रमाई और दिव्य आभूषण भस्म अर्पण की प्रक्रिया से पूर्व प्रथम घंटाल बजाकर ‘हरिओम’ का जल अर्पित किया गया। वैदिक मंत्रोच्चार के बीच कपूर आरती हुई और फिर ज्योतिर्लिंग को सूती कपड़े से ढांककर पवित्र भस्म रमाई गई। भस्म आरती के पश्चात बाबा को शेषनाग का रजत मुकुट, रजत की मुण्डमाल और रुद्राक्ष की मालाएं धारण कराई गईं। सुगंधित पुष्पों और आभूषणों से सुसज्जित होकर बाबा महाकाल अपने पूर्ण वैभव में नजर आए।

    नंदी के कान में मनोकामनाएं और गूंजते जयकारे इस अलौकिक आरती का गवाह बनने के लिए देशभर से सैकड़ों श्रद्धालु उज्जैन पहुँचे थे। भस्म आरती के दौरान श्रद्धालुओं ने नंदी महाराज के दर्शन किए और परंपरा के अनुसार उनके कान में अपनी मनोकामनाएं कहीं। मान्यता है कि नंदी जी के माध्यम से भक्तों की पुकार बाबा महाकाल तक शीघ्र पहुँचती है। आरती के अंत तक पूरा मंदिर परिसर शिव भक्ति के रंग में डूबा रहा और भक्तों ने इस पुण्य लाभ से स्वयं को धन्य महसूस किया।

  • 25 जनवरी महाकाल भस्म आरती: चंद्र अर्पण और चंदन से हुआ दिव्य श्रृंगार, अलसुबह उमड़े श्रद्धालु, घर बैठे करें बाबा महाकाल के दर्शन

    25 जनवरी महाकाल भस्म आरती: चंद्र अर्पण और चंदन से हुआ दिव्य श्रृंगार, अलसुबह उमड़े श्रद्धालु, घर बैठे करें बाबा महाकाल के दर्शन


    उज्जैन । विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर में माघ माह के शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि रविवार को अलसुबह भव्य और दिव्य भस्म आरती का आयोजन किया गया। तड़के ठीक 4 बजे मंदिर के कपाट खुलते ही बाबा महाकाल के जयकारों से संपूर्ण परिसर गूंज उठा। इस अवसर पर भगवान महाकाल का विशेष और मनोहारी श्रृंगार किया गया, जिसे देखकर श्रद्धालु भाव-विभोर हो उठे।

    मंदिर के कपाट खुलने के बाद पुजारियों द्वारा विधि-विधान से गर्भगृह में विराजित सभी देवी-देवताओं का पूजन किया गया। इसके पश्चात भगवान महाकाल का जलाभिषेक किया गया। अभिषेक क्रम में दूध, दही, घी, शहद और फलों के रस से निर्मित पंचामृत से भगवान का अभिषेक संपन्न हुआ। मंत्रोच्चार और वैदिक विधानों के बीच पूरा वातावरण आध्यात्मिक ऊर्जा से भर उठा।

    अभिषेक के बाद बाबा महाकाल का दिव्य श्रृंगार किया गया। भगवान के मस्तक पर चंद्र अर्पित किया गया, वहीं चंदन से त्रिपुंड और त्रिनेत्र अंकित कर भांग से मनोहारी श्रृंगार रचा गया। श्रृंगार के इस अलौकिक स्वरूप ने श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। इसके पश्चात प्रथम घंटाल बजाकर हरिओम के जल का अर्पण किया गया और ध्यान मंत्रों के साथ भगवान का आवाहन किया गया।

    भस्म अर्पण की परंपरा के तहत कपूर आरती की गई। इसके बाद ज्योतिर्लिंग को वस्त्र से ढांककर विधि-विधान से भस्म रमाई गई। भस्म आरती के इस दुर्लभ दृश्य को देखने के लिए सैकड़ों श्रद्धालु अलसुबह ही मंदिर परिसर में उपस्थित रहे। भस्म रमाने के बाद बाबा महाकाल को शेषनाग का रजत मुकुट, रजत की मुंडमाल, रुद्राक्ष की मालाएं और सुगंधित पुष्प अर्पित किए गए। फूलों और आभूषणों से भगवान का भव्य अलंकरण किया गया।

    भस्म आरती के दौरान श्रद्धालुओं ने नंदी महाराज के दर्शन भी किए। परंपरा अनुसार श्रद्धालु नंदी महाराज के कान के समीप जाकर अपनी मनोकामनाएं व्यक्त करते नजर आए। श्रद्धालुओं का मानना है कि नंदी के माध्यम से कही गई प्रार्थना सीधे बाबा महाकाल तक पहुंचती है और शीघ्र फलित होती है।

    पूरे भस्म आरती आयोजन के दौरान जय श्री महाकाल हर-हर महादेव और बाबा महाकाल की जय के जयकारों से मंदिर परिसर गूंजता रहा। अलसुबह की ठंड के बावजूद श्रद्धालुओं की आस्था और उत्साह में कोई कमी नहीं दिखी। देश-विदेश से आए भक्तों ने बाबा महाकाल के दर्शन कर पुण्य लाभ अर्जित किया।

    जो श्रद्धालु मंदिर पहुंचकर दर्शन नहीं कर सके, वे मंदिर समिति द्वारा उपलब्ध कराए गए लाइव दर्शन के माध्यम से घर बैठे बाबा महाकाल के दिव्य स्वरूप के दर्शन कर पुण्य लाभ प्राप्त कर सके। महाकाल की भस्म आरती न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र है, बल्कि यह भारत की सबसे प्राचीन और अद्वितीय धार्मिक परंपराओं में से एक मानी जाती है।

  • बसंत पंचमी 2026: माँ सरस्वती को प्रसन्न करने के लिए घर लाएं ये 5 शुभ चीजें, करियर और बुद्धि में होगी उन्नति

    बसंत पंचमी 2026: माँ सरस्वती को प्रसन्न करने के लिए घर लाएं ये 5 शुभ चीजें, करियर और बुद्धि में होगी उन्नति


    नई दिल्ली । बसंत पंचमी का दिन ‘अबूझ मुहूर्त’ माना जाता है, यानी इस दिन किसी भी शुभ कार्य को करने के लिए पंचांग देखने की आवश्यकता नहीं होती। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यदि इस दिन कुछ विशेष वस्तुएं घर लाकर माँ सरस्वती को अर्पित की जाएं, तो साधक को ज्ञान, एकाग्रता और सुख-समृद्धि का आशीर्वाद प्राप्त होता है।

    बसंत पंचमी 2026: तिथि और शुभ मुहूर्त वर्ष 2026 में बसंत पंचमी का पर्व 22 जनवरी को मनाया जाएगा। पंचमी तिथि प्रारंभ: 22 जनवरी 2026 को सुबह से। पूजा का शुभ समय: सुबह 07:13 बजे से दोपहर 12:33 बजे तक लगभग 5 घंटे 20 मिनट। शेष योग इस दिन रवि योग और अमृत सिद्धि योग का निर्माण हो रहा है, जो खरीदारी और नई शुरुआत के लिए अत्यंत श्रेष्ठ है।

    इन वस्तुओं को घर लाना माना जाता है अत्यंत शुभ

    माँ सरस्वती की मूर्ति या तस्वीर यदि आप घर में नई ऊर्जा का संचार करना चाहते हैं, तो इस दिन माँ सरस्वती की प्रतिमा घर लाएं। ध्यान रहे कि माँ सरस्वती शांत मुद्रा में हों और हंस या कमल पर विराजमान हों। इसे घर के ईशान कोण उत्तर-पूर्व में स्थापित करना करियर के लिए शुभ होता है।वीणा संगीत यंत्र वीणा माँ सरस्वती का सबसे प्रिय वाद्य यंत्र है। संगीत और कला से जुड़े लोगों के लिए बसंत पंचमी पर वीणा या कोई भी छोटा वाद्य यंत्र घर लाना सौभाग्य बढ़ाता है। इससे घर का वास्तु दोष दूर होता है और मानसिक शांति मिलती है।

    मोरपंख मोरपंख को विद्या और बुद्धि का प्रतीक माना जाता है। इसे बसंत पंचमी के दिन लाकर बच्चों के स्टडी रूम या उनकी किताबों में रखना चाहिए। माना जाता है कि इससे छात्रों की एकाग्रता बढ़ती है और पढ़ाई में मन लगता है।नई किताबें और पेन कलम पेन को माँ सरस्वती का रूप माना जाता है। इस दिन नया पेन या नई किताबें खरीदकर उनकी पूजा करना और उन पर तिलक लगाना बहुत लाभकारी होता है। यह कार्य विशेष रूप से नई शिक्षा शुरू करने वाले बच्चों अक्षरारंभ के लिए श्रेष्ठ है। पीले वस्त्र या फूल पीला रंग माँ सरस्वती को अत्यंत प्रिय है क्योंकि यह शुद्धता और नई चेतना का प्रतीक है। इस दिन पीले वस्त्र खरीदना या गेंदे के पीले फूलों से घर को सजाना सुख-समृद्धि लेकर आता है।

    माँ सरस्वती की पूजा के लिए विशेष टिप

    पूजा के समय माँ सरस्वती को पीले रंग की मिठाई बेसन के लड्डू या केसरिया भात का भोग लगाएं और ‘ॐ ऐं सरस्वत्यै नमः’ मंत्र का जाप करें।
  • मौनी अमावस्या पर माघ मेले का तीसरा शाही स्नान, संगम में उमड़ेगा आस्था का सैलाब

    मौनी अमावस्या पर माघ मेले का तीसरा शाही स्नान, संगम में उमड़ेगा आस्था का सैलाब


    नई दिल्ली/ प्रयागराज। माघ मेले का तीसरा और सबसे महत्वपूर्ण शाही स्नान मौनी अमावस्या के अवसर पर 18 जनवरी को संगम तट पर संपन्न होगा। इस पावन अवसर पर देशभर से लाखों श्रद्धालुओं साधु-संतों और कल्पवासियों के प्रयागराज पहुंचने की संभावना है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मौनी अमावस्या के दिन संगम में स्नान करने से जन्म-जन्मांतर के पापों से मुक्ति मिलती है और मोक्ष की प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त होता है। इसी कारण इस स्नान पर्व को माघ मेले का सबसे पवित्र और प्रभावशाली स्नान माना जाता है।

    मौनी अमावस्या का धार्मिक महत्व
    हिंदू पंचांग के अनुसार मौनी अमावस्या माघ मास के कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि को आती है। वर्ष 2026 में यह तिथि 18 जनवरी की रात 12:03 बजे से 19 जनवरी की रात 1:21 बजे तक रहेगी। हालांकि धार्मिक परंपराओं के अनुसार पर्व 18 जनवरी को ही मनाया जाएगा। इस दिन मौन व्रत रखने गंगा-यमुना और अदृश्य सरस्वती के संगम में स्नान करने तथा दान-पुण्य करने का विशेष महत्व बताया गया है।

    शुभ मुहूर्त और विशेष योग
    ज्योतिषाचार्यों के अनुसार मौनी अमावस्या पर ब्रह्म मुहूर्त में सुबह 5:27 से 6:21 बजे तक संगम स्नान को अमृत स्नान माना गया है। इस दिन पंचग्रही योग पूरे समय प्रभावी रहेगा जबकि सर्वार्थ सिद्धि योग सुबह 10:14 बजे से अगले दिन तक रहेगा। वृंदावन के ज्योतिषाचार्य राधाकांत वत्स के अनुसार इन शुभ योगों में किया गया स्नान जप और दान अक्षय पुण्य प्रदान करता है।

    अखाड़ों का शाही स्नान
    परंपरा के अनुसार मौनी अमावस्या के दिन सबसे पहले अखाड़ों के साधु-संत नागा साधु और ऋषि-मुनि गाजे-बाजे और शाही ठाठ-बाट के साथ संगम में डुबकी लगाएंगे। इसके बाद कल्पवासी और आम श्रद्धालु संगम स्नान करेंगे। मान्यता है कि अखाड़ों के स्नान के बाद संगम जल में विशेष आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार होता है।

    प्रशासन की कड़ी तैयारियां
    श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए मेला प्रशासन और जिला प्रशासन ने सुरक्षा यातायात और स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर व्यापक इंतजाम किए हैं। संगम क्षेत्र में अतिरिक्त पुलिस बल ड्रोन निगरानी मेडिकल कैंप अस्थायी पुल स्वच्छता कर्मी और दिशा-सूचक बोर्ड लगाए गए हैं। प्रशासन ने श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे निर्धारित घाटों पर ही स्नान करें भीड़ प्रबंधन के नियमों का पालन करें और अफवाहों से बचें।

    महाशिवरात्रि तक चलेगा माघ मेला
    माघ मेला महाशिवरात्रि के दिन संपन्न होगा। धार्मिक मान्यता है कि माघ माह में सभी देवी-देवता संगम तट पर वास करते हैं। ऐसे में मौनी अमावस्या का शाही स्नान पूरे माघ मेले का सबसे महत्वपूर्ण और फलदायी स्नान पर्व माना जाता है। आस्था श्रद्धा और अध्यात्म का यह महासंगम एक बार फिर संगम नगरी को दिव्य स्वरूप प्रदान करेगा।

  • उज्जैन में आस्था का महासैलाब: साल के आखिरी रविवार महाकाल दरबार पहुंचे डेढ़ लाख से अधिक श्रद्धालु

    उज्जैन में आस्था का महासैलाब: साल के आखिरी रविवार महाकाल दरबार पहुंचे डेढ़ लाख से अधिक श्रद्धालु


    उज्जैन।साल के अंतिम रविवार को धार्मिक नगरी उज्जैन में आस्था का अद्भुत दृश्य देखने को मिला। ज्योतिर्लिंग श्री महाकालेश्वर मंदिर में दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की रिकॉर्ड भीड़ उमड़ पड़ी। सर्दियों की छुट्टियां शुरू होते ही देशभर से भक्त उज्जैन पहुंचने लगे हैं। इसी क्रम में रविवार को करीब डेढ़ लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने बाबा महाकाल के दर्शन कर साल के अंतिम दिनों को आध्यात्मिक रूप से सार्थक बनाया। सुबह तड़के भस्म आरती के बाद से ही मंदिर परिसर और आसपास के क्षेत्रों में भक्तों की लंबी कतारें लग गई थीं। श्रद्धालुओं की संख्या को देखते हुए मंदिर प्रशासन को दर्शन व्यवस्था में कई बदलाव करने पड़े। सामान्य दर्शनार्थियों को चारधाम मंदिर पार्किंग से शक्तिपथ होते हुए त्रिवेणी संग्रहालय द्वार से मंदिर में प्रवेश दिया गया।

    शीघ्र दर्शन के लिए खोला गया सम्राट अशोक सेतु

    शनिवार को सुरक्षा कारणों से बंद किया गया सम्राट अशोक सेतु रविवार को पुनः खोला गया, लेकिन इसे केवल 250 रुपये के शीघ्र दर्शन टिकट वाले श्रद्धालुओं के लिए आरक्षित रखा गया। इसके चलते सामान्य और शीघ्र दर्शन करने वाले श्रद्धालुओं की अलग-अलग व्यवस्थाएं बनाई गईं, ताकि भीड़ को नियंत्रित किया जा सके।महाकाल मंदिर में श्री महाकाल लोक के निर्माण के बाद से सप्ताहांत और विशेष अवसरों पर श्रद्धालुओं की संख्या में लगातार वृद्धि देखी जा रही है। साल का आखिरी रविवार भी इसका साक्षी बना, जब सुबह से देर रात तक मंदिर परिसर में भक्तों का सैलाब उमड़ता रहा।

    प्रशासन को करना पड़ा इंतजामों में बदलाव

    शनिवार से ही श्रद्धालुओं का उज्जैन पहुंचना शुरू हो गया था। जनदबाव बढ़ने के कारण जिला प्रशासन और मंदिर समिति को अपनी व्यवस्थाओं में बदलाव करना पड़ा। रविवार को उत्तर और पूर्व दिशा के सभी द्वार बंद रखे गए जबकि केवल पश्चिम दिशा से श्री महाकाल लोक और सम्राट अशोक सेतु के माध्यम से श्रद्धालुओं को प्रवेश दिया गया।भीड़ को देखते हुए 31 दिसंबर और 1 जनवरी के लिए भी प्रशासन ने अतिरिक्त तैयारियां शुरू कर दी हैं। चारधाम पार्किंग में जिगजैग बैरिकेडिंग की व्यवस्था की जा रही है, ताकि कतारों को सुव्यवस्थित रखा जा सके। इसके अलावा, पेयजल, चिकित्सा और सुरक्षा से जुड़े अतिरिक्त इंतजाम भी किए जा रहे हैं।

    अन्य मंदिरों में भी उमड़ी श्रद्धा

    महाकाल मंदिर के अलावा उज्जैन के अन्य प्रमुख मंदिरों में भी श्रद्धालुओं की भारी भीड़ देखने को मिली। काल भैरव मंदिर में रविवार को 75 हजार से अधिक भक्तों ने दर्शन किए। भीड़ के चलते काल भैरव मंदिर में प्रोटोकॉल दर्शन व्यवस्था अस्थायी रूप से स्थगित रही और जिला प्रशासन द्वारा जारी सूची के अनुसार ही दर्शन कराए गए।इसके अलावा मंगलनाथ मंदिर, अंगारेश्वर महादेव मंदिर और चिंतामन गणेश मंदिर में भी दिनभर श्रद्धालुओं का आना-जाना बना रहा। सभी मंदिरों में अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात किया गया।

    अव्यवस्थाओं पर उठे सवाल

    भारी भीड़ के बावजूद महाकाल मंदिर के बाहर अव्यवस्थाएं देखने को मिलीं। आसपास की गलियों और शहनाई गेट के सामने अवैध पार्किंग से यातायात बाधित रहा। वहीं, मुख्य द्वार के पास फूल-माला और पूजन सामग्री की दुकानों के अतिक्रमण के कारण श्रद्धालुओं को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। भीड़ के बीच इस अव्यवस्था पर नियंत्रण को लेकर प्रशासन की भूमिका पर भी सवाल उठने लगे हैं।

    आगे और बढ़ सकती है भीड़
    प्रशासन का अनुमान है कि नववर्ष के अवसर पर उज्जैन में श्रद्धालुओं की संख्या और बढ़ सकती है। होटल, धर्मशालाएं और गेस्ट हाउस लगभग पूरी तरह भर चुके हैं। श्रद्धालुओं से अपील की गई है कि वे प्रशासन के निर्देशों का पालन करें और धैर्य बनाए रखें, ताकि सभी को सुगम दर्शन का अवसर मिल सके।

  • महाकाल मंदिर को 111 किलो पीतल के नंदी का दान, जयपुर के भक्त ने अर्पित की श्रद्धा

    महाकाल मंदिर को 111 किलो पीतल के नंदी का दान, जयपुर के भक्त ने अर्पित की श्रद्धा


    उज्जैन स्थित विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में श्रद्धा और आस्था का एक और अनुपम उदाहरण देखने को मिला। जयपुर निवासी भक्त विपिन बंसल ने अपनी मनोकामना पूर्ण होने पर भगवान महाकाल को 111 किलोग्राम वजन के पीतल के नंदी दान स्वरूप अर्पित किए। इस अवसर पर मंदिर समिति द्वारा दानदाता का विधिवत सम्मान किया गया।

    मंदिर प्रशासन से प्राप्त जानकारी के अनुसार, जयपुर निवासी विपिन बंसल ने पुजारी राजेश शर्मा की प्रेरणा से भगवान महाकाल के चरणों में यह विशेष दान अर्पित किया। पीतल से निर्मित इन नंदी प्रतिमाओं का कुल वजन 111 किलोग्राम है, जो अपनी कलात्मकता और भव्यता के कारण विशेष आकर्षण का केंद्र बनी हुई हैं।दान स्वीकार किए जाने के बाद श्री महाकालेश्वर मंदिर समिति ने दानदाता विपिन बंसल को भगवान महाकाल का प्रसाद और दुपट्टा भेंट कर सम्मानित किया। मंदिर समिति के सहायक प्रशासक मूलचंद जूनवाल ने बताया कि दान में प्राप्त इन सुंदर पीतल के नंदी को मंदिर परिसर में उचित और सुरक्षित स्थान पर विधिवत स्थापित किया जाएगा, ताकि श्रद्धालु इनके दर्शन कर सकें।

    मंदिर समिति के अधिकारियों ने कहा कि महाकालेश्वर मंदिर में देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालु अपनी आस्था और विश्वास के अनुसार दान करते हैं। कोई सोने-चांदी के आभूषण अर्पित करता है, तो कोई नकद राशि या धार्मिक सामग्री भेंट करता है। भक्तों का मानना है कि भगवान महाकाल अपने भक्तों की सच्ची मनोकामनाएं अवश्य पूरी करते हैं, और उसी कृतज्ञता स्वरूप वे इस तरह के दान अर्पित करते हैं।जयपुर के भक्त द्वारा किया गया यह दान भी उसी अटूट श्रद्धा और विश्वास का प्रतीक है। मंदिर में दर्शन के लिए पहुंचे श्रद्धालुओं ने भी पीतल के नंदी के दान को सराहा और इसे भगवान महाकाल के प्रति भक्त की गहरी आस्था बताया।

    श्री महाकालेश्वर मंदिर, जो बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक है, न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र है, बल्कि यहां भक्तों द्वारा किए जाने वाले दान और सेवा कार्य भी इसकी महिमा को और बढ़ाते हैं। इस प्रकार के दान मंदिर की परंपराओं और आध्यात्मिक गरिमा को सशक्त बनाते हैं।