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  • मूसलाधार बारिश के बाद इंदौर में दर्दनाक हादसा नाले में बहे युवक का शव बरामद अहीरखेड़ी का युवक अब भी लापता

    मूसलाधार बारिश के बाद इंदौर में दर्दनाक हादसा नाले में बहे युवक का शव बरामद अहीरखेड़ी का युवक अब भी लापता


    इंदौर । इंदौर में लगातार हो रही तेज बारिश के बीच हुए हादसों ने शहर को झकझोर दिया है। बुधवार शाम हुई मूसलाधार बारिश के दौरान अलग अलग स्थानों पर तेज बहाव में दो युवक बह गए थे। इनमें लसूड़िया क्षेत्र से लापता हुए युवक का शव गुरुवार सुबह बरामद कर लिया गया जबकि अहीरखेड़ी क्षेत्र से बहा युवक अब भी लापता है। पुलिस और एसडीईआरएफ की टीम लगातार राहत और बचाव अभियान चला रही है।

    पुलिस के अनुसार लसूड़िया मोरी निवासी 34 वर्षीय गोलू पंवार बुधवार रात करीब नौ बजे अपने पिता के लिए खाना लेकर जा रहा था। रास्ते में वह नाले के किनारे से गुजर रहा था तभी तेज बारिश के कारण बढ़े पानी के बहाव में उसका संतुलन बिगड़ गया और वह नाले में बह गया। घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस और स्थानीय लोगों ने रात में उसकी तलाश शुरू की लेकिन अंधेरा और तेज बहाव के कारण सफलता नहीं मिल सकी।

    गुरुवार सुबह एसडीईआरएफ की टीम ने दोबारा सर्च ऑपरेशन शुरू किया। करीब एक घंटे की मशक्कत के बाद गोलू का शव पुल के नीचे कचरे में फंसा मिला। टीम ने शव को बाहर निकालकर पुलिस को सौंप दिया जिसके बाद उसे पोस्टमार्टम के लिए एमवाय अस्पताल भेजा गया। गोलू ईंट निर्माण फैक्ट्री में काम करता था। उसके परिवार में माता पिता और छोटा भाई हैं। उसके पिता एक निजी कंपनी में सुरक्षा गार्ड के रूप में कार्यरत हैं। घटना के बाद परिवार में शोक का माहौल है।

    दूसरी ओर अहीरखेड़ी क्षेत्र में बुधवार को तेज बहाव में बहा युवक महेश चौहान अब भी लापता है। जानकारी के अनुसार महेश अपने दोस्त मनीष के साथ पुल की रपट पार कर रहा था। इसी दौरान दोनों पानी के तेज बहाव की चपेट में आ गए। मनीष किसी तरह खुद को बचाने में सफल रहा लेकिन महेश बह गया और तब से उसका कोई पता नहीं चल सका है।

    पुलिस और राहत दल ने बुधवार रात से ही आसपास के इलाकों में खोज अभियान शुरू कर दिया था। गुरुवार सुबह भी एसडीईआरएफ और पुलिस की संयुक्त टीम ने कई स्थानों पर तलाशी अभियान चलाया लेकिन समाचार लिखे जाने तक महेश का कोई सुराग नहीं मिला था। अधिकारियों का कहना है कि पानी का बहाव कम होने के साथ खोज अभियान लगातार जारी रहेगा।

    लगातार हो रही बारिश के कारण शहर के कई नाले और पुलिया उफान पर हैं। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि बारिश के दौरान जलभराव वाले क्षेत्रों नालों और रपटों को पार करने का प्रयास न करें तथा मौसम खराब होने पर सुरक्षित स्थानों पर ही रहें। विशेषज्ञों का कहना है कि थोड़ी सी लापरवाही भी ऐसे मौसम में बड़े हादसे का कारण बन सकती है।

  • कंटेनर के अचानक ब्रेक से बड़ा हादसा: ट्रक के केबिन में फंसा चालक, रस्सियों से गेट तोड़कर बचाई जान

    कंटेनर के अचानक ब्रेक से बड़ा हादसा: ट्रक के केबिन में फंसा चालक, रस्सियों से गेट तोड़कर बचाई जान


    देवास । देवास जिले के टोंककला क्षेत्र में शनिवार सुबह एक भीषण सड़क हादसा हो गया जिसमें ट्रक चालक की जान बाल बाल बच गई। कंटेनर के अचानक ब्रेक लगाने के कारण पीछे से आ रहा ट्रक उससे जा टकराया। टक्कर इतनी जोरदार थी कि ट्रक का अगला हिस्सा पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया और चालक केबिन के भीतर स्टेयरिंग और बॉडी के बीच बुरी तरह फंस गया। हादसे के बाद मौके पर अफरा तफरी मच गई और आसपास मौजूद ग्रामीणों तथा राहगीरों ने तुरंत राहत कार्य शुरू कर दिया।

    जानकारी के अनुसार अनीश पाल नामक चालक ट्रक लेकर देवास से मक्सी की ओर जा रहा था। इसी दौरान आगे चल रहे कंटेनर के सामने अचानक मवेशी आ गए। मवेशियों को बचाने के प्रयास में कंटेनर चालक ने अचानक ब्रेक लगा दिए। पीछे चल रहा ट्रक समय पर नहीं रुक सका और तेज रफ्तार में कंटेनर से जा भिड़ा। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि ट्रक का केबिन बुरी तरह पिचक गया और चालक अंदर ही फंस गया।

    हादसे के तुरंत बाद आसपास के ग्रामीण और राहगीर मदद के लिए मौके पर पहुंचे। चालक को बाहर निकालने के कई प्रयास किए गए लेकिन केबिन पूरी तरह दब जाने के कारण सफलता नहीं मिली। इसके बाद लोगों ने सूझबूझ दिखाते हुए रस्सियों की मदद से केबिन और उसके गेट को बांधकर खींचने का प्रयास किया। करीब आधे घंटे तक चले रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद गेट खुल सका और चालक को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया।

    हादसे में चालक के पैर में गंभीर चोट आई है। प्राथमिक उपचार देने के बाद उसे बेहतर इलाज के लिए देवास जिला अस्पताल भेजा गया जहां उसका उपचार जारी है। समय पर राहत कार्य शुरू होने और स्थानीय लोगों की तत्परता के कारण चालक की जान बचाई जा सकी।

    टोंककला चौकी प्रभारी मलखान सिंह भाटी ने बताया कि कंटेनर और ट्रक दोनों देवास से मक्सी की ओर जा रहे थे। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि कंटेनर के सामने अचानक मवेशी आने के कारण ब्रेक लगाए गए जिससे पीछे से आ रहा ट्रक टकरा गया। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है और दुर्घटना के सभी पहलुओं की पड़ताल की जा रही है।

  • शोरूम में लगी आग, पड़ोसियों ने सीढ़ियां जोड़कर बचाई कई लोगों की जान

    शोरूम में लगी आग, पड़ोसियों ने सीढ़ियां जोड़कर बचाई कई लोगों की जान


    मध्य प्रदेश । मध्य प्रदेश के Indore में शुक्रवार सुबह एक इलेक्ट्रिक वाहन (EV) शोरूम में लगी भीषण आग ने बड़ा हादसा होते-होते टाल दिया। लसूड़िया क्षेत्र के खालसा चौक के पास स्थित एक बहुमंजिला इमारत के ग्राउंड फ्लोर पर बने शोरूम में आग लगने से ऊपरी मंजिलों में रहने वाले करीब 20 लोग फंस गए। स्थानीय लोगों, पुलिस और फायर ब्रिगेड की तत्परता से सभी को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। हालांकि इस हादसे में कोई जनहानि नहीं हुई, लेकिन शोरूम में खड़े सभी इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहन जलकर खाक हो गए। प्रारंभिक जांच में शॉर्ट सर्किट को आग लगने का संभावित कारण माना जा रहा है।

    सुबह-सुबह मची अफरा-तफरी
    घटना शुक्रवार सुबह करीब 7 बजे की है। ग्राउंड फ्लोर पर स्थित इलेक्ट्रिक वाहन शोरूम से अचानक धुआं और लपटें उठने लगीं। कुछ ही मिनटों में आग ने विकराल रूप ले लिया और धुआं पूरी इमारत में फैलने लगा। ऊपरी मंजिलों पर बने फ्लैट्स में रहने वाले परिवार उस समय सो रहे थे। धुएं के कारण सांस लेने में परेशानी होने पर लोगों की नींद खुली। जब उन्होंने नीचे देखा तो शोरूम आग की लपटों से घिरा हुआ था। सबसे बड़ी समस्या यह थी कि इमारत की सीढ़ियां शोरूम के ठीक बगल में थीं और आग तथा धुएं की वजह से वहां से नीचे उतरना असंभव हो गया था। ऐसे में लोग अपने-अपने फ्लैट और बालकनियों में फंस गए।

    पड़ोसियों ने दिखाई सूझबूझ, छतों के बीच बनाया रास्ता
    इमारत से उठती चीख-पुकार सुनकर आसपास के लोग तुरंत मौके पर पहुंचे। पड़ोस की बहुमंजिला इमारत में रहने वालों ने राहत कार्य शुरू कर दिया। लोगों ने पहले फंसे हुए परिवारों को छत पर पहुंचने के लिए कहा। इसके बाद दोनों इमारतों की छतों के बीच सीढ़ियां लगाकर अस्थायी रास्ता तैयार किया गया। खिड़कियों और लोहे के एंगल से रस्सियां बांधकर दूसरी इमारत तक पहुंचाई गईं। कुछ लोग सीढ़ियों के सहारे दूसरी बिल्डिंग की छत तक पहुंचे, जबकि कई लोगों को रस्सियों के सहारे सुरक्षित नीचे उतारा गया। इस दौरान पुलिस और फायर ब्रिगेड की टीम भी मौके पर पहुंच गई और बचाव अभियान में शामिल हो गई।

    एक घंटे में पाया आग पर काबू
    फायर ब्रिगेड अधिकारी शोभाराम मालवीय ने बताया कि सूचना मिलते ही दमकल दल मौके पर पहुंच गया था। आग पर काबू पाने के लिए दो पानी के टैंकर लगाए गए। करीब एक घंटे की मशक्कत के बाद आग को पूरी तरह नियंत्रित कर लिया गया। राहत की बात यह रही कि आग फ्लैट्स तक नहीं पहुंच सकी, जिससे लोगों का घरेलू सामान सुरक्षित बच गया। हालांकि शोरूम में रखे सभी इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहन आग की चपेट में आकर नष्ट हो गए।

    पत्थर मारकर जगाए गए लोग
    इमारत में रहने वाले भानु सिंह और निशा सिंह ने बताया कि वे गहरी नींद में थे। अचानक बाहर शोर-शराबा सुनाई दिया। जब लोगों ने खिड़कियों पर पत्थर फेंककर उन्हें जगाया, तब उन्हें आग की जानकारी मिली। भानु सिंह के अनुसार, बिल्डिंग में कुल नौ फ्लैट हैं, जिनमें कुछ परिवार ही रह रहे थे। अधिकांश लोग किसी तरह बाहर निकल आए, लेकिन उनके परिवार सहित कुछ लोगों को विशेष रेस्क्यू ऑपरेशन के जरिए निकाला गया। वहीं बेंगलुरु निवासी चेतन, जो इंदौर में किराए के फ्लैट में रहते हैं, ने बताया कि वे भी लोगों के शोर सुनकर जागे और तब उन्हें स्थिति की गंभीरता का पता चला।

    चौकीदार की सतर्कता बनी मददगार
    पड़ोस की इमारत के चौकीदार प्रवीण ने बताया कि एक परिवार, जो हाल ही में दुबई से आया था, सुबह बारिश का नजारा देखने के लिए जागा हुआ था। सबसे पहले उसी परिवार ने धुआं देखा और अन्य लोगों को इसकी सूचना दी। समय रहते चेतावनी मिलने से लोगों को छत तक पहुंचने और बचाव अभियान शुरू करने का मौका मिल गया, जिससे बड़ा हादसा टल गया।

    EV सुरक्षा पर फिर उठे सवाल
    यह घटना ऐसे समय हुई है जब इंदौर पहले भी इलेक्ट्रिक वाहनों से जुड़ी आग की घटनाओं का सामना कर चुका है। कुछ समय पहले चार्जिंग के दौरान एक इलेक्ट्रिक कार में लगी आग ने कई लोगों की जान ले ली थी। ताजा घटना के बाद एक बार फिर इलेक्ट्रिक वाहन शोरूम और बैटरी सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े होने लगे हैं। फिलहाल पुलिस और फायर विभाग आग लगने के वास्तविक कारणों की जांच कर रहे हैं।

  • नहर हादसे के बाद लापता जवान की तलाश तेज, आज एक महिला को डूबने से बचाया गया

    नहर हादसे के बाद लापता जवान की तलाश तेज, आज एक महिला को डूबने से बचाया गया


    रीवा: जिले के सिलपरा डैम में बुधवार सुबह डूबे सेना के जवान गौरव द्विवेदी (28) की तलाश दूसरे दिन भी जारी रही, लेकिन गुरुवार शाम तक उनका कोई सुराग नहीं मिल सका। घटना के बाद से इलाके में चिंता का माहौल बना हुआ है और एसडीईआरएफ की टीम लगातार सर्च ऑपरेशन में जुटी हुई है।

    जानकारी के अनुसार, बघवार गांव निवासी गौरव द्विवेदी अपने परिवार के साथ डैम घूमने गए थे। इस दौरान नहाते समय उनका संतुलन बिगड़ गया और वे गहरे पानी में चले गए। देखते ही देखते वे पानी में लापता हो गए, जिसके बाद स्थानीय लोगों ने तुरंत पुलिस को सूचना दी।

    SDERF की टीम का लगातार सर्च ऑपरेशन
    घटना की जानकारी मिलते ही बिछिया थाना पुलिस और एसडीईआरएफ की टीम मौके पर पहुंची और तलाशी अभियान शुरू किया गया। गोताखोरों की मदद से डैम में लगातार सर्चिंग की जा रही है, लेकिन अब तक जवान का कोई पता नहीं चल पाया है। प्रशासन ने रेस्क्यू ऑपरेशन को तेज कर दिया है।

    सर्चिंग के दौरान बड़ा हादसा टला, महिला को बचाया गया
    सर्च ऑपरेशन के दौरान गुरुवार को एक और हादसा होते-होते टल गया। भटलो गांव निवासी पार्वती देवी चिराहुला कॉलोनी से अपने गांव लौट रही थीं, तभी सिलपरा नहर के पास अचानक उन्हें चक्कर आ गया और वे नहर में गिर गईं। तेज बहाव के बीच स्थिति गंभीर हो सकती थी, लेकिन मौके पर मौजूद SDERF टीम ने तुरंत प्रतिक्रिया देते हुए महिला को सुरक्षित बाहर निकाल लिया। समय रहते बचाव होने से एक बड़ी अनहोनी टल गई।

    अस्पताल में भर्ती, जवान की तलाश जारी
    रेस्क्यू के बाद महिला को प्राथमिक उपचार दिया गया और डायल-112 की मदद से अस्पताल भेजा गया, जहां उसका स्वास्थ्य परीक्षण जारी है। वहीं डूबे हुए जवान की तलाश में टीमें लगातार जुटी हुई हैं। डीएसपी उदित मिश्रा ने बताया कि सर्च ऑपरेशन बिना रुके जारी है और हर संभव प्रयास किया जा रहा है कि जवान को जल्द से जल्द ढूंढा जा सके।

    रीवा का सिलपरा डैम हादसा एक तरफ दुखद स्थिति पैदा कर रहा है, वहीं रेस्क्यू टीम की तत्परता ने एक और जान बचाकर बड़ी अनहोनी को टाल दिया है। फिलहाल पूरे इलाके की नजरें जवान की तलाश पर टिकी हैं।

  • गुलमर्ग रोपवे में बड़ा संकट: एशिया के सबसे ऊंचे केबल सिस्टम पर हवा में फंसे 300 पर्यटक, सेना और प्रशासन का युद्धस्तर पर रेस्क्यू अभियान जारी

    गुलमर्ग रोपवे में बड़ा संकट: एशिया के सबसे ऊंचे केबल सिस्टम पर हवा में फंसे 300 पर्यटक, सेना और प्रशासन का युद्धस्तर पर रेस्क्यू अभियान जारी


    नई दिल्ली। जम्मू-कश्मीर के प्रसिद्ध पर्यटन स्थल गुलमर्ग में सोमवार को उस समय अफरा-तफरी का माहौल बन गया जब एशिया के सबसे ऊंचे और चर्चित रोपवे सिस्टम में अचानक तकनीकी खराबी आ गई। खराबी के चलते गोंडोला सेवा बीच संचालन में ही रुक गई और केबल कार के कई डिब्बे हवा में ठहर गए। इस घटना के बाद करीब 300 पर्यटक बीच आसमान में फंस गए, जिससे मौके पर मौजूद लोगों और पर्यटकों के बीच डर और बेचैनी का माहौल बन गया। घटना ने कुछ समय के लिए पूरे इलाके में तनाव जैसी स्थिति पैदा कर दी।

    घटना के बाद पर्यटकों के बीच घबराहट तेजी से बढ़ती दिखाई दी। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार अचानक रोपवे रुकने के कारण कई लोग घबरा गए। महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों में सबसे ज्यादा डर का माहौल देखा गया। कई यात्रियों ने मदद के लिए आवाज लगाई, जबकि कुछ लोग मानसिक रूप से काफी परेशान नजर आए। अचानक हुई इस तकनीकी बाधा ने पर्यटकों के रोमांच को कुछ ही मिनटों में चिंता और भय में बदल दिया।

    मामले की जानकारी मिलते ही प्रशासन ने तत्काल सक्रियता दिखाई और बचाव अभियान शुरू कर दिया गया। सुरक्षा एजेंसियों और स्थानीय प्रशासन की टीमें तुरंत घटनास्थल पर पहुंचीं। सेना, पुलिस और प्रशासन ने संयुक्त रूप से बड़े स्तर पर रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया, ताकि हवा में फंसे सभी लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला जा सके। बचाव कार्य के दौरान विशेषज्ञ टीमों की मदद ली जा रही है और पूरे ऑपरेशन पर लगातार निगरानी रखी जा रही है। अधिकारियों द्वारा मौके की स्थिति पर नजर बनाए रखी गई है ताकि किसी भी तरह की अप्रिय स्थिति से बचा जा सके।

    मौके पर मौजूद अधिकारियों ने स्थिति को नियंत्रित रखने के लिए अतिरिक्त संसाधन भी तैनात किए हैं। बचाव अभियान की निगरानी वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी कर रहे हैं और पर्यटकों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है। राहत की बात यह रही कि शुरुआती जानकारी के अनुसार सभी केबिन सुरक्षित बताए गए और फंसे लोगों को सुरक्षित निकालने के प्रयास तेजी से जारी हैं। प्रशासन ने लोगों से घबराने की बजाय संयम बनाए रखने की अपील भी की है।

    गुलमर्ग का यह रोपवे देश ही नहीं बल्कि एशिया के सबसे ऊंचे और लंबे केबल कार प्रोजेक्ट्स में शामिल माना जाता है। यह पर्यटकों के बीच बेहद लोकप्रिय आकर्षण का केंद्र रहा है और हर साल बड़ी संख्या में लोग यहां पहुंचते हैं। दो चरणों में संचालित यह रोपवे ऊंचाई वाले क्षेत्रों तक पर्यटकों को पहुंचाता है। हालांकि इस तकनीकी खराबी ने सुरक्षा व्यवस्था और संचालन प्रणाली को लेकर कई सवाल भी खड़े कर दिए हैं। फिलहाल सभी की निगाहें रेस्क्यू ऑपरेशन पर टिकी हुई हैं और लोगों को सुरक्षित बाहर निकालने के प्रयास लगातार जारी हैं।

  • प्रयागराज में दिल दहला देने वाला हादसा: बच्चों को बचाते-बचाते जिंदा जल गई मां

    प्रयागराज में दिल दहला देने वाला हादसा: बच्चों को बचाते-बचाते जिंदा जल गई मां


    प्रयागराज। प्रयागराज में इंसानियत और मां की ममता की एक ऐसी दर्दनाक और साहसिक कहानी सामने आई है, जिसने हर किसी को भावुक कर दिया। यहां एक मां ने अपने चार बच्चों की जान बचाने के लिए अपनी जान कुर्बान कर दी। यह घटना 12 मई की रात नैनी बाजार के चैंपियन गली इलाके में हुई, जहां एक क्रॉकरी कारोबारी के घर में शॉर्ट सर्किट से भीषण आग लग गई।

    जानकारी के अनुसार, आग घर के फर्स्ट फ्लोर पर बने गोदाम से शुरू हुई और कुछ ही मिनटों में पूरे मकान में फैल गई। उस समय घर की महिलाएं और बच्चे ऊपर की मंजिल पर फंस गए थे। नीचे से निकलने का कोई रास्ता नहीं बचा और सभी लोग जान बचाने के लिए छत पर पहुंच गए। आग की लपटें और धुआं तेजी से बढ़ता जा रहा था, जिससे हालात बेहद भयावह हो गए।

    इसी दौरान मां ने असाधारण साहस दिखाते हुए अपने बच्चों को बचाने का फैसला किया। पहले उसने अपने एक साल के मासूम बच्चे को चादर में लपेटा और पड़ोसी की छत की ओर लगभग 12 फीट दूर उछाल दिया। पड़ोसियों ने किसी तरह बच्चे को सुरक्षित पकड़ लिया। इसके बाद छत पर रखी सीढ़ी का सहारा लेकर उसने अपनी दो बेटियों को भी पड़ोसी की छत पर सुरक्षित पहुंचा दिया।

    इसके बाद उसने अपने भतीजे को भी सीढ़ी के जरिए दूसरी छत पर भेजकर बचा लिया। इस तरह उसने चार बच्चों को सुरक्षित कर दिया, लेकिन इस दौरान आग और धुएं ने पूरी छत को घेर लिया था। लगातार बढ़ती लपटों और घने धुएं के कारण वह खुद बाहर नहीं निकल सकी और आग की चपेट में आ गई।

    कुछ ही देर में वह बुरी तरह झुलस गई और मौके पर ही गंभीर हालत में पहुंच गई। फायर ब्रिगेड की टीम बाद में मौके पर पहुंची, लेकिन तंग गली होने के कारण राहत कार्य में काफी देर लगी। किसी तरह महिला को अस्पताल पहुंचाया गया, जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।

    बताया गया कि महिला का नाम अर्चना था, जिन्होंने अपने बच्चों की जान बचाने के लिए अपनी जान तक की परवाह नहीं की। उनकी 13 साल की बेटी भी इस हादसे में झुलस गई और आईसीयू में भर्ती है, जबकि अन्य परिजन भी घायल हुए हैं।

    फायर ब्रिगेड की करीब 12 गाड़ियों ने घंटों की मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया। यह हादसा पूरे इलाके में शोक और सदमे का कारण बन गया है। लोगों का कहना है कि यह घटना मां के अद्भुत साहस और बलिदान की मिसाल है, जिसे कभी भुलाया नहीं जा सकता।

  • आगरा में यमुना हादसा: घाट पर नहाने उतरे छह युवक-युवतियां और किशोर डूबे, चार की मौत से मचा कोहराम

    आगरा में यमुना हादसा: घाट पर नहाने उतरे छह युवक-युवतियां और किशोर डूबे, चार की मौत से मचा कोहराम

    नई दिल्ली। आगरा के बल्केश्वर घाट पर मंगलवार सुबह यमुना नदी में नहाने के दौरान बड़ा हादसा हो गया, जिसमें छह युवक-युवतियां और एक किशोर डूब गए। स्थानीय लोगों और पुलिस की मदद से पांच लोगों को बाहर निकाला गया, लेकिन इलाज के दौरान तीन की मौत हो गई, जबकि दो घंटे की मशक्कत के बाद किशोर का शव भी बरामद हुआ।

    जानकारी के अनुसार, तेज गर्मी के चलते सभी लोग यमुना में नहाने उतरे थे, तभी अचानक गहरे पानी में चले जाने से एक के बाद एक सभी डूबने लगे। घाट पर मौजूद लोगों ने शोर मचाकर पुलिस को सूचना दी, जिसके बाद राहत और बचाव कार्य शुरू किया गया।

    रेस्क्यू टीम ने कड़ी मेहनत के बाद पांच लोगों को बाहर निकाला और उन्हें एसएन अस्पताल भेजा गया, जहां कान्हा, महक और रिया की इलाज के दौरान मौत हो गई। वहीं 11 वर्षीय विक्की का शव बाद में यमुना से बरामद किया गया।

    घटना के बाद घाट पर अफरा-तफरी मच गई और परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। सबसे दर्दनाक दृश्य तब सामने आया जब विक्की का शव बाहर निकाला गया और उसके पिता बिलख पड़े। उन्होंने बताया कि चार बेटियों के बाद बड़ी मन्नत से मिला एक बेटा भी हादसे में खो दिया।

    डीसीपी सिटी सैय्यद अली अब्बास ने बताया कि मामले की जांच की जा रही है और सभी पहलुओं को ध्यान में रखा जा रहा है।

  • दिल्ली में तड़के लगी भीषण आग बनी मौत का मंजर: सोते हुए लोग लपटों में घिरे, दो परिवार पूरी तरह खत्म

    दिल्ली में तड़के लगी भीषण आग बनी मौत का मंजर: सोते हुए लोग लपटों में घिरे, दो परिवार पूरी तरह खत्म

    नई दिल्ली।  राजधानी के विवेक विहार क्षेत्र में तड़के सुबह घटी एक भयावह आग की घटना ने पूरे इलाके को शोक में डुबो दिया। एक बहुमंजिला रिहायशी इमारत में लगी इस भीषण आग ने नौ लोगों की जान ले ली, जिनमें एक ही परिवार की तीन पीढ़ियां भी शामिल थीं। डेढ़ साल का मासूम, उसके माता-पिता और दादा-दादी—सभी इस हादसे का शिकार हो गए। इस घटना ने यह दिखा दिया कि किस तरह कुछ ही पलों में एक पूरा परिवार और उसकी पीढ़ियां खत्म हो सकती हैं।
    बताया जाता है कि आग सुबह करीब 3:45 बजे के आसपास लगी, जब इमारत में रहने वाले अधिकांश लोग गहरी नींद में थे। शुरुआत में आग का पता नहीं चल सका, लेकिन थोड़ी ही देर में लपटों ने तेजी से दूसरी, तीसरी और ऊपरी मंजिलों को अपनी चपेट में ले लिया। धुएं और आग के फैलने की गति इतनी तेज थी कि कई लोग बाहर निकलने का रास्ता नहीं ढूंढ पाए और अंदर ही फंस गए।
    इस हादसे की सबसे मार्मिक तस्वीर एक ही परिवार की तबाही के रूप में सामने आई, जहां बुजुर्ग दंपति, उनका बेटा-बहू और छोटा पोता सभी इस आग में झुलस गए। आग की तीव्रता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि कई शवों की पहचान करना भी मुश्किल हो गया। इसके अलावा इमारत के अन्य हिस्सों में रहने वाले लोग भी इस त्रासदी का शिकार हुए, जिससे कुल मृतकों की संख्या नौ तक पहुंच गई।
    घटना की सूचना मिलते ही राहत और बचाव टीमें मौके पर पहुंचीं। हालात की गंभीरता को देखते हुए कई दमकल गाड़ियों को तैनात किया गया और करीब दो घंटे की मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया जा सका। इसके बाद भी तलाशी अभियान जारी रखा गया ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि कोई व्यक्ति अंदर फंसा न रह गया हो। बचाव कार्य के दौरान कुछ लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला गया, जबकि घायलों को तुरंत अस्पताल पहुंचाया गया।
    स्थानीय निवासियों ने बताया कि आग इतनी भयानक थी कि लोगों को संभलने का मौका ही नहीं मिला। कई लोग घबराकर बाहर की ओर भागे, लेकिन कुछ लोग धुएं और लपटों के बीच फंसकर अपनी जान नहीं बचा सके। इस घटना ने पूरे इलाके में दहशत और अफरा-तफरी का माहौल पैदा कर दिया।
    फिलहाल आग लगने के कारणों का स्पष्ट पता नहीं चल पाया है। शुरुआती तौर पर तकनीकी खराबी जैसी आशंकाएं जताई जा रही हैं, लेकिन जांच एजेंसियां हर पहलू से मामले की पड़ताल कर रही हैं।
    यह हादसा शहरी रिहायशी इलाकों में अग्नि सुरक्षा के इंतजामों पर गंभीर सवाल खड़े करता है। यदि समय रहते सुरक्षा उपायों को मजबूत किया जाए और जागरूकता बढ़ाई जाए, तो ऐसे हादसों को काफी हद तक टाला जा सकता है।
    कुल मिलाकर, विवेक विहार का यह अग्निकांड केवल एक दुर्घटना नहीं, बल्कि एक गहरी मानवीय त्रासदी है, जिसने कई जिंदगियों को एक साथ खत्म कर दिया और समाज को यह सोचने पर मजबूर कर दिया कि सुरक्षा के प्रति लापरवाही कितनी भारी पड़ सकती है।
  • जबलपुर क्रूज हादसा: पानी में फंसे यात्री को स्थानीय युवक ने जोखिम लेकर बचाया, मानवता की मिसाल कायम

    जबलपुर क्रूज हादसा: पानी में फंसे यात्री को स्थानीय युवक ने जोखिम लेकर बचाया, मानवता की मिसाल कायम

    मध्‍य प्रदेश /जबलपुर के बरगी डैम में हुआ क्रूज हादसा एक ओर जहां दर्द और तबाही की तस्वीर छोड़ गया, वहीं दूसरी ओर इसने मानवता की एक ऐसी मिसाल भी पेश की, जिसने यह साबित कर दिया कि संकट की घड़ी में इंसानियत किसी धर्म या पहचान की मोहताज नहीं होती।
    घटना उस समय हुई जब एक डबल डेकर क्रूज अचानक तेज हवाओं और आंधी की चपेट में आ गया। मौसम में अचानक आए बदलाव ने स्थिति को इतना गंभीर बना दिया कि कुछ ही पलों में क्रूज पानी में डूबने लगा। उस समय क्रूज में 30 से अधिक लोग सवार थे, जिनमें से कई लोग घबराहट में पानी में गिर गए और अफरा-तफरी मच गई।
    इसी बीच एक यात्री अयाज हुसैन खुद को किसी तरह बचाते हुए क्रूज के ऊपरी हिस्से पर पहुंच गए। वह वहीं फंसे रहे और तीन घंटे तक जीवन और मौत के बीच संघर्ष करते रहे। पानी का स्तर और तेज लहरें उनकी स्थिति को और कठिन बना रही थीं, लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी।
    उसी समय स्थानीय निवासी कन्हैयालाल साहू वहां पहुंचे। स्थिति की गंभीरता को समझते हुए उन्होंने बिना किसी सुरक्षा उपकरण और अपनी जान की परवाह किए बिना पानी में उतरने का फैसला किया। उनके साथ कुछ अन्य लोग भी मदद के लिए आगे आए, लेकिन मुख्य भूमिका कन्हैयालाल की ही रही, जिन्होंने सीधे उस यात्री तक पहुंचने की कोशिश की।
    कन्हैयालाल ने बताया कि अयाज हुसैन जीवन रक्षक उपकरण पहने हुए थे और किसी तरह क्रूज के ऊपरी हिस्से पर टिके हुए थे। चारों ओर पानी और अंधेरा माहौल होने के बावजूद उन्होंने हिम्मत दिखाते हुए उन्हें सुरक्षित बाहर निकालने में सफलता हासिल की। यह पूरा प्रयास बेहद जोखिम भरा था, लेकिन मानवता की भावना ने हर डर पर जीत हासिल की।
    इस हादसे में कई अन्य लोग भी प्रभावित हुए हैं। बचाव दल लगातार राहत और खोज कार्य में जुटे हुए हैं। अब तक कई लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला गया है और उन्हें इलाज के लिए अस्पताल भेजा गया है, जबकि कुछ लोगों की तलाश अभी भी जारी है।
    स्थानीय लोगों की भूमिका इस घटना में बेहद अहम रही है। बिना किसी आधिकारिक संसाधन के उन्होंने जिस तरह से मदद की, वह इस बात का उदाहरण है कि आपदा के समय समाज खुद भी एक बड़ा सहारा बन सकता है।
    यह पूरी घटना सिर्फ एक हादसा नहीं बल्कि मानवता की ताकत की कहानी बन गई है, जहां एक अनजान व्यक्ति ने दूसरे की जान बचाने के लिए अपनी जान दांव पर लगा दी। इसने यह संदेश दिया है कि मुश्किल हालात में इंसानियत ही सबसे बड़ा धर्म होती है।
  • लखनऊ अग्निकांड: 1200 झोपड़ियां राख, 6 बच्चे अब भी लापता, CM योगी ने दिए जांच और राहत के निर्देश

    लखनऊ अग्निकांड: 1200 झोपड़ियां राख, 6 बच्चे अब भी लापता, CM योगी ने दिए जांच और राहत के निर्देश

    लखनऊ। विकासनगर सेक्टर-12 में रिंग रोड किनारे स्थित अवैध बस्ती में बुधवार शाम भीषण आग लग गई। कुछ ही समय में आग ने विकराल रूप लेते हुए करीब 1200 झोपड़ियों को अपनी चपेट में ले लिया। झोपड़ियों में रखे लगभग 100 गैस सिलिंडर फटने से पूरे इलाके में जोरदार धमाके हुए और भगदड़ मच गई।

    घटना के बाद 22 दमकल गाड़ियों ने देर रात तक आग बुझाने का प्रयास किया। इस दौरान आग की तीव्रता इतनी अधिक थी कि इलाके में दहशत फैल गई। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार लगभग 50 मवेशियों के जलने की आशंका जताई जा रही है, हालांकि प्रशासन ने इसकी पुष्टि नहीं की है।

    सूचना में देरी का आरोप, आग ने मिनटों में लिया विकराल रूप
    स्थानीय लोगों का आरोप है कि आग लगने के बाद समय पर पुलिस और दमकल विभाग को सूचना दी गई, लेकिन मदद देर से पहुंची। इस बीच आग तेजी से फैलती गई और एक के बाद एक झोपड़ियां जलने लगीं। बताया गया कि आग एक झोपड़ी से शुरू हुई और कुछ ही देर में पूरी बस्ती को अपनी चपेट में ले लिया। लोगों ने पुलिस कंट्रोल रूम पर कॉल लगाने में भी देरी और तकनीकी दिक्कतों की बात कही है।

    भगदड़ में 6 बच्चे लापता, सर्च ऑपरेशन जारी
    भीषण हादसे के दौरान मची अफरा-तफरी में दो परिवारों के छह बच्चे लापता हो गए हैं, जिनमें एक परिवार के चार और दूसरे के दो बच्चे शामिल हैं। पुलिस और प्रशासन की टीमें देर रात तक बच्चों की तलाश में जुटी रहीं और आसपास के इलाकों में सर्च ऑपरेशन चलाया जा रहा है।

    पथराव और हंगामा, प्लॉट मालिक पर आग लगाने के आरोप
    घटना के बाद गुस्साए लोगों ने प्लॉट मालिक के घर का घेराव कर हंगामा किया और उस पर आग लगवाने का आरोप लगाया। इस दौरान कुछ लोगों ने पथराव भी किया, जिसे रोकने के लिए पुलिस को हस्तक्षेप करना पड़ा। आरोप है कि प्लॉट मालिक कुछ दिन से झोपड़ियां हटाने के लिए दबाव बना रहा था।

    वीडियो बनाने और ट्रैफिक जाम से बिगड़े हालात
    घटना स्थल पर भीड़ द्वारा वीडियो बनाने और रास्ता बाधित करने से राहत कार्य प्रभावित हुआ। दमकल की गाड़ियां भी जाम में फंस गईं, जिसके बाद पुलिस को लाठीचार्ज करना पड़ा। इसी दौरान कुछ लोगों ने पुलिस पर पथराव किया, जिसमें सिविल डिफेंस के वार्डन समेत कई लोग घायल हो गए। इसके कारण इलाके में करीब दो किलोमीटर लंबा जाम लग गया और यातायात पूरी तरह बाधित हो गया।

    आग पर काबू, राहत और पुनर्वास की तैयारी
    दमकल विभाग ने रात करीब 10 बजे तक आग पर आंशिक नियंत्रण पा लिया। प्रशासन ने आसपास के लगभग 30 घरों को खाली कराया और कई सिलिंडर सुरक्षित बाहर निकाले। घटना की गंभीरता को देखते हुए उच्च स्तरीय जांच के आदेश दिए गए हैं। डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया और पीड़ितों के लिए भोजन व आवास की व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।