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  • रात में अचानक ढहा 100 साल पुराना मकान, मलबे में बुजुर्ग-बच्चों समेत 10 लोग फंसे, मचा हड़कंप

    रात में अचानक ढहा 100 साल पुराना मकान, मलबे में बुजुर्ग-बच्चों समेत 10 लोग फंसे, मचा हड़कंप


    जबलपुर । जबलपुर शहर के नया मोहल्ला स्थित तिलक वार्ड में सोमवार रात एक पुराने दो मंजिला मकान का अगला हिस्सा अचानक भरभराकर गिर गया। हादसे के समय मकान के अंदर चार परिवार मौजूद थे। मलबा गिरने के कारण बाहर निकलने का रास्ता बंद हो गया और बुजुर्गों महिलाओं तथा बच्चों समेत करीब 10 लोग अंदर फंस गए। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस और नगर निगम की टीम मौके पर पहुंची और रेस्क्यू अभियान शुरू किया गया। करीब दो घंटे की मशक्कत के बाद सभी 10 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। इसके बाद सभी को इलाज के लिए जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया। राहत की बात रही कि हादसे में किसी की जान नहीं गई।

    जानकारी के मुताबिक जिस मकान में यह हादसा हुआ वह करीब 80 से 100 साल पुराना बताया जा रहा है। मकान का अगला हिस्सा काफी समय से जर्जर हालत में था। सोमवार रात अचानक इसका एक बड़ा हिस्सा नीचे आ गिरा। मलबा गिरने के बाद मकान से बाहर निकलने का रास्ता पूरी तरह बंद हो गया। अंदर मौजूद लोगों के लिए स्थिति मुश्किल हो गई। स्थानीय लोगों ने तत्काल पुलिस को सूचना दी जिसके बाद बचाव दल मौके पर पहुंचा।

    रेस्क्यू टीम के सामने सबसे बड़ी चुनौती मकान तक पहुंचने का रास्ता था। मकान जिस गली में स्थित है वह काफी संकरी है। इसके कारण बचाव दल और मशीनों को अंदर ले जाने में परेशानी हुई। स्थिति को देखते हुए सबसे पहले आसपास की बिजली आपूर्ति बंद कराई गई ताकि टूटे हुए हिस्से और मलबे के बीच किसी तरह के शॉर्ट सर्किट का खतरा न रहे। इसके बाद नगर निगम की टीम ने स्थानीय लोगों की मदद से बचाव कार्य शुरू किया।

    संकरी गली के कारण जेसीबी मशीन को भी मौके तक पहुंचाने में काफी मुश्किल हुई। रेस्क्यू टीम ने मकान से बाहर निकलने के लिए वैकल्पिक रास्ता तैयार करने का फैसला किया। इसके लिए बाड़े की पिछली दीवार को तोड़ा गया। रास्ता बनने के बाद बचाव दल अंदर पहुंच सका और एक एक करके फंसे लोगों को बाहर निकाला गया। करीब दो घंटे तक चले इस अभियान के बाद बुजुर्गों महिलाओं और बच्चों समेत सभी 10 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया।

    मकान में रहने वाले चंदन सिंह ने बताया कि उनके अलावा लाल सिंह विक्रम सिंह और ईश्वर सिंह के परिवार भी इसी बाड़े में रहते हैं। मकान का अगला हिस्सा गिरने के बाद बाहर जाने का रास्ता बंद हो गया था। अंदर मौजूद परिवारों में बुजुर्गों और बच्चों के होने के कारण चिंता और बढ़ गई थी। राहत दल की मदद से सभी को बाहर निकाला गया।

    घटना की जानकारी मिलने पर नगर निगम के अपर आयुक्त सौरभ सिंह भी मौके पर पहुंचे और प्रभावित परिवारों से पूरे घटनाक्रम की जानकारी ली। देर रात तक मकान का मलबा हटाने का काम जारी रहा। प्रशासन की ओर से आसपास के हिस्से की स्थिति का भी जायजा लिया गया।

    स्थानीय लोगों के मुताबिक तिलक वार्ड में बड़ी संख्या में पुराने और जर्जर मकान मौजूद हैं। इनमें कई मकान 70 से 100 साल पुराने बताए जाते हैं। बारिश के बाद ऐसे मकानों की स्थिति और कमजोर होने की बात भी स्थानीय लोग कह रहे हैं। लोगों का कहना है कि जर्जर मकानों को लेकर पहले भी नगर निगम से शिकायतें की गई हैं।

    अपर आयुक्त सौरभ सिंह ने बताया कि नगर निगम अब अभियान चलाकर जर्जर मकानों को चिन्हित करेगा। जरूरत के अनुसार ऐसे मकानों को हटाने की कार्रवाई की जाएगी ताकि भविष्य में इस तरह के हादसों की आशंका को कम किया जा सके।

  • चीखें सुनकर रोकी गाड़ी फिर शुरू हुआ रेस्क्यू ऑपरेशन सिपाही ने राइफल से तोड़ा शीशा 5 लोगों की बची जान

    चीखें सुनकर रोकी गाड़ी फिर शुरू हुआ रेस्क्यू ऑपरेशन सिपाही ने राइफल से तोड़ा शीशा 5 लोगों की बची जान


    नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश के कन्नौज में लखनऊ आगरा एक्सप्रेसवे पर हुए सड़क हादसे के बाद पुलिस के एक सिपाही दंपति ने जिस तरह समय रहते पांच लोगों की जान बचाई उसकी चर्चा हो रही है। एक्सप्रेसवे पर एक कार अचानक अनियंत्रित होकर पलट गई थी। हादसे के बाद कार में सवार पांच लोग अंदर ही फंस गए। दुर्घटनाग्रस्त वाहन से मदद के लिए चीख पुकार सुनाई दे रही थी लेकिन कार का दरवाजा और शीशा आसानी से नहीं खुल रहा था। इसी दौरान वहां से गुजर रहे सिपाही अमित तेवतिया और उनकी पत्नी अर्चना सिंह की नजर हादसे पर पड़ी। दोनों ने बिना समय गंवाए अपनी गाड़ी रोकी और लोगों को बचाने के लिए मौके पर पहुंच गए।

    यह घटना लखनऊ आगरा एक्सप्रेसवे पर किलोमीटर 171 कट के पास की बताई जा रही है। जानकारी के अनुसार सिपाही अमित तेवतिया अपनी पत्नी अर्चना सिंह के साथ सौरिख से कन्नौज की तरफ जा रहे थे। इसी दौरान उन्होंने सड़क किनारे पलटी हुई कार देखी। कार के अंदर पांच लोग फंसे हुए थे और बाहर निकलने का रास्ता नहीं मिल पा रहा था। हादसे की गंभीर स्थिति को देखते हुए दोनों ने तुरंत रेस्क्यू शुरू किया।

    कार के भीतर फंसे लोगों को बाहर निकालने में सबसे बड़ी परेशानी शीशा नहीं खुलने की थी। स्थिति को देखते हुए सिपाही अमित तेवतिया ने अपनी सर्विस राइफल की मदद से कार का शीशा तोड़ा। इसके बाद बचाव का रास्ता बना और पति पत्नी ने मिलकर कार के अंदर फंसे लोगों को एक एक करके बाहर निकालना शुरू किया। दोनों की तत्परता के कारण पांचों लोगों को कार से सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया।

    हादसे में घायल सभी पांच लोगों को इलाज के लिए सौरिख सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र यानी CHC में भर्ती कराया गया है। वहां उनका उपचार चल रहा है। हादसे के बाद मौके पर कुछ समय के लिए अफरा तफरी का माहौल रहा लेकिन पुलिसकर्मी दंपति के तत्काल पहुंचने और रेस्क्यू शुरू करने से घायलों को समय पर कार से बाहर निकाला जा सका।

    इस पूरे रेस्क्यू का वीडियो भी सामने आया है जो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में सिपाही दंपति दुर्घटनाग्रस्त कार के पास पहुंचकर लोगों को बाहर निकालते दिखाई दे रहे हैं। हादसे के बीच दोनों की तत्परता और साहस की लोग तारीफ कर रहे हैं। खास बात यह रही कि सिपाही अमित तेवतिया और उनकी पत्नी अर्चना सिंह ने मौके की गंभीरता को समझते हुए किसी तरह की देरी नहीं की और तुरंत मदद के लिए आगे आए।

    सड़क हादसों में दुर्घटना के बाद शुरुआती कुछ मिनट बेहद महत्वपूर्ण माने जाते हैं। ऐसे समय पर समय पर मिलने वाली मदद घायल लोगों के लिए अहम साबित हो सकती है। कन्नौज की इस घटना में भी पुलिसकर्मी दंपति की त्वरित कार्रवाई ने पांच लोगों को सुरक्षित बाहर निकालने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। घटना का वीडियो सामने आने के बाद दोनों की बहादुरी और मानवीय संवेदना की चर्चा सोशल मीडिया पर हो रही है।

  • शिवपुरी में दर्दनाक हादसा दोस्तों के साथ नदी में नहा रहा था किशोर तभी बढ़ा पानी 500 मीटर दूर मिला शव

    शिवपुरी में दर्दनाक हादसा दोस्तों के साथ नदी में नहा रहा था किशोर तभी बढ़ा पानी 500 मीटर दूर मिला शव


    शिवपुरी। शिवपुरी जिले के सुरवाया थाना क्षेत्र में सिंध नदी में डूबे 15 वर्षीय किशोर का शव करीब 24 घंटे की तलाश के बाद बरामद कर लिया गया। रविवार दोपहर दोस्तों के साथ नदी में नहाने गया दिनेश अचानक बढ़े जलस्तर और तेज बहाव की चपेट में आ गया था। देखते ही देखते वह पानी में डूब गया। घटना के बाद पुलिस और रेस्क्यू टीम ने उसकी तलाश शुरू की लेकिन रविवार को उसका कोई पता नहीं चल सका। सोमवार को एसडीईआरएफ और होमगार्ड की टीम ने दोबारा सर्च ऑपरेशन चलाया जिसके बाद घटनास्थल से करीब 500 मीटर दूर किशोर का शव मिला।

    ग्राम डबिया निवासी दिनेश पुत्र स्वर्गीय प्रकाश आदिवासी रविवार दोपहर करीब एक बजे अपने दोस्तों के साथ सिंध नदी में नहाने गया था। उसके तीन साथी भी कुछ दूरी पर नदी में मौजूद थे। इसी दौरान अचानक नदी का जलस्तर बढ़ गया और पानी का बहाव तेज हो गया। दिनेश तेज बहाव की चपेट में आ गया और संभल नहीं सका। साथ मौजूद लोगों ने उसे बचाने की कोशिश की लेकिन कुछ ही देर में वह पानी में दिखाई देना बंद हो गया।

    किशोर को डूबता देखकर एक ग्रामीण ने भी उसे बचाने के लिए नदी में छलांग लगाई लेकिन तेज बहाव के कारण वह दिनेश तक नहीं पहुंच सका। हादसे की सूचना रविवार शाम करीब 5:45 बजे सुरवाया थाना पुलिस को दी गई। पुलिस मौके पर पहुंची और नदी के आसपास तलाश शुरू कराई गई। स्थानीय लोगों की मदद से भी किशोर को खोजने का प्रयास किया गया लेकिन देर शाम तक कोई सफलता नहीं मिली।

    बताया गया कि ऊपरी हिस्से में हुई बारिश के कारण सिंध नदी का जलस्तर अचानक बढ़ा था। इसका असर मड़ीखेड़ा स्थित अटल सागर बांध पर भी पड़ा। पानी बढ़ने के बाद बांध के चार गेट खोलकर पानी छोड़ा गया। इसके चलते सिंध नदी का बहाव और तेज हो गया। इसी बढ़े हुए जलस्तर के दौरान दिनेश नदी में नहा रहा था और तेज धारा में फंस गया।

    सोमवार को एसडीईआरएफ और होमगार्ड की टीम ने घटनास्थल पर पहुंचकर फिर से तलाश अभियान शुरू किया। टीम ने नदी के अलग-अलग हिस्सों में खोजबीन की। करीब 24 घंटे तक चले प्रयास के बाद घटनास्थल से लगभग 500 मीटर दूर दिनेश का शव बरामद किया गया। शव मिलने की सूचना के बाद परिवार में मातम छा गया। जिस किशोर के सुरक्षित लौटने की उम्मीद में परिजन नदी किनारे तलाश अभियान का इंतजार कर रहे थे वहां उसकी मौत की खबर पहुंचते ही माहौल गमगीन हो गया।

    रेस्क्यू अभियान में एसडीईआरएफ प्रभारी अफाक के साथ मुकेश युवंजय देवेंद्र रवि बिलवार भैय्या साहब और कप्तान सेन सहित अन्य सदस्य शामिल रहे। टीम ने काफी देर तक नदी में तलाश जारी रखी और आखिरकार किशोर का शव बरामद करने में सफलता मिली।

    घटना के बाद पुलिस ने शव बरामद कर आवश्यक कार्रवाई शुरू कर दी है। सिंध नदी में अचानक बढ़े जलस्तर और तेज बहाव के बीच हुआ यह हादसा परिवार के लिए बेहद दुखद है। इस घटना ने एक बार फिर बारिश के दौरान नदियों और जलाशयों में बढ़ते जलस्तर के बीच सावधानी बरतने की जरूरत को सामने ला दिया है।

  • शिवपुरी में सिंध नदी का गहरा पानी बना काल 14 साल के सौरभ की तलाश 18 घंटे बाद हुई खत्म

    शिवपुरी में सिंध नदी का गहरा पानी बना काल 14 साल के सौरभ की तलाश 18 घंटे बाद हुई खत्म


    शिवपुरी । शिवपुरी जिले के इंदार थाना क्षेत्र के बिजरौनी गांव के पास सिंध नदी में मंगलवार दोपहर डूबे 14 साल के सौरभ कुशवाह का शव बुधवार सुबह बरामद कर लिया गया। बच्चे की तलाश के लिए करीब 18 घंटे तक रेस्क्यू अभियान चलाया गया। बुधवार सुबह करीब 8 बजे घटनास्थल से लगभग आधा किलोमीटर दूर नदी में शव उतराता हुआ दिखाई दिया। शव मिलने की खबर जैसे ही परिजनों तक पहुंची परिवार में चीख पुकार मच गई। परिजन बदहवास होकर मौके पर पहुंचे और बच्चे का शव देखते ही रोने लगे।

    जानकारी के मुताबिक मंगलवार को ऋषिपंचमी के अवसर पर बिजरौनी गांव की कुछ महिलाएं सिंध नदी के किनारे पूजा और स्नान करने पहुंची थीं। उनके साथ परिवार के बच्चे भी मौजूद थे। सौरभ भी अपनी मां के साथ नदी पर गया था। महिलाएं नदी किनारे पूजा की तैयारी में जुटी थीं इसी दौरान सौरभ नहाने के लिए नदी के पानी में उतर गया। देखते ही देखते वह गहरे पानी की तरफ चला गया और डूब गया। आसपास मौजूद लोगों ने उसे बचाने की कोशिश की लेकिन पानी की गहराई अधिक होने के कारण तत्काल उसका पता नहीं चल सका।

    घटना की सूचना मिलते ही इंदार थाना पुलिस मौके पर पहुंची। इसके बाद एसडीईआरएफ की टीम को भी बुलाया गया। टीम ने मंगलवार दोपहर से नदी में सौरभ की तलाश शुरू कर दी। गोताखोरों और रेस्क्यू टीम ने नदी के आसपास काफी देर तक तलाश की लेकिन बच्चे का कोई सुराग नहीं मिला। शाम होने के बाद अंधेरा बढ़ गया जिसके चलते रेस्क्यू अभियान रोकना पड़ा। इसके बाद बुधवार सुबह दोबारा तलाश शुरू करने का फैसला लिया गया।

    बुधवार सुबह करीब 4 बजे सौरभ के परिजन और गांव के लोग फिर नदी के किनारे पहुंच गए। ग्रामीणों ने भी अपने स्तर पर नदी में बच्चे की तलाश शुरू कर दी। कई घंटे की कोशिश के बाद सुबह करीब 8 बजे घटनास्थल से लगभग आधा किलोमीटर दूर नदी के पानी में सौरभ का शव दिखाई दिया। शव को बाहर निकाला गया और पुलिस ने आवश्यक कार्रवाई शुरू कर दी।

    सौरभ की मौत के बाद ग्रामीणों में सिंध नदी में कथित अवैध रेत खनन को लेकर भी नाराजगी देखने को मिल रही है। ग्रामीणों का आरोप है कि नदी से रेत निकालने के लिए कई जगह गहरे गड्ढे बनाए गए हैं। बारिश के मौसम में इन गड्ढों में पानी भर जाता है और वे सामान्य नदी के तल से अलग नजर नहीं आते। ऐसे में नदी में नहाने वाले लोगों को पानी की वास्तविक गहराई का अंदाजा नहीं हो पाता। ग्रामीणों का कहना है कि इस तरह के गहरे गड्ढे हादसों का खतरा बढ़ा रहे हैं।

    पुलिस ने शव बरामद करने के बाद मामले में आगे की कार्रवाई शुरू कर दी है। सौरभ की मौत से उसके परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। वहीं बिजरौनी गांव में भी शोक का माहौल है। ऋषिपंचमी के दिन मां के साथ पूजा के लिए नदी पर गया सौरभ वापस घर नहीं लौट सका। करीब 18 घंटे की तलाश के बाद उसका शव मिलने से परिवार की उम्मीदें भी टूट गईं।

  • नेपाल में कुदरत का कहर और 10 सेकेंड की जिंदगी की जंग! सैकड़ों मौतों के बीच लापता लोगों की तलाश जारी

    नेपाल में कुदरत का कहर और 10 सेकेंड की जिंदगी की जंग! सैकड़ों मौतों के बीच लापता लोगों की तलाश जारी


    नई दिल्ली। नेपाल में आई भीषण बाढ़ ने पूरे देश को गहरे संकट में डाल दिया है। 26 अगस्त को आई अचानक बाढ़ ने कई इलाकों में भारी तबाही मचाई और बड़ी संख्या में लोगों की जान चली गई। इस आपदा के बीच कुछ सेकेंड की सतर्कता कई लोगों के लिए जिंदगी और मौत के बीच का अंतर साबित हुई। रसुवा कस्टम ऑफिस के अधिकारी करबीर गैरे ने जब भोटेकोशी नदी में तेजी से बढ़ता बाढ़ का पानी देखा तो उन्होंने आसपास मौजूद लोगों को तुरंत ऊंचाई की तरफ भागने की चेतावनी दी। बताया गया कि चेतावनी के करीब 10 सेकेंड बाद ही तेज बहाव ने आसपास के ढांचों को अपनी चपेट में ले लिया। समय रहते लोगों को सुरक्षित स्थान की ओर भेजने से कई जानें बच सकीं।

    नेपाल के फ्लड फोरकास्टिंग डिविजन के अनुसार सुबह करीब 9 बजे तिब्बत की तरफ से भोटेकोशी में बाढ़ की सूचना मिली थी। इसके कुछ ही मिनट बाद रसुवा नुवाकोट धादिंग और चितवन समेत प्रभावित क्षेत्रों में करीब 6 लाख एसएमएस अलर्ट भेजे गए। आपदा के दौरान समय पर चेतावनी और लोगों की सतर्कता ने राहत और बचाव के प्रयासों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इसके बावजूद बाढ़ की भयावहता इतनी ज्यादा थी कि बड़ी संख्या में लोग इसकी चपेट में आ गए।

    अब तक नेपाल और तिब्बत में बाढ़ से 919 लोगों की मौत की जानकारी सामने आई है। इनमें अकेले नेपाल में 903 लोगों की जान गई है जबकि तिब्बत में 16 मौतें दर्ज की गई हैं। इसके अलावा 4200 से ज्यादा लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं। लापता लोगों की तलाश के साथ उनकी पहचान सुनिश्चित करने की चुनौती भी प्रशासन के सामने है। नेपाल पुलिस ने लापता लोगों के परिजनों से डीएनए सैंपल देने की अपील की है। माता पिता और बच्चों से डीएनए प्रोफाइलिंग के लिए नमूने मांगे जा रहे हैं ताकि बरामद शवों की पहचान लापता लोगों के परिवारों से मिलान करके की जा सके।

    बाढ़ का असर नेपाल की सीमाओं से बाहर भी दिखाई दिया है। उत्तर प्रदेश के महाराजगंज जिले में नारायणी गंडक नदी से चार अज्ञात शव बरामद किए गए जिन्हें नेपाल प्रशासन को सौंप दिया गया। इनमें तीन महिलाएं और एक पुरुष शामिल हैं। पहचान सुनिश्चित करने के लिए पोस्टमॉर्टम के दौरान डीएनए सैंपल लिए गए हैं जिन्हें नेपाल प्रशासन के साथ साझा किया जाएगा।

    इस बीच हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स की सुरंगों में फंसे लोगों को निकालने के लिए रेस्क्यू अभियान लगातार जारी है। त्रिशूली-3A समेत कई परियोजनाओं की सुरंगों के मुहानों पर जमा मलबा और कीचड़ हटाकर अंदर पहुंचने की कोशिश की जा रही है। नेपाल के सुरक्षा बलों के साथ भारत और चीन के विशेषज्ञ भी बचाव अभियान में सहयोग कर रहे हैं। भारी मशीनों और विशेष उपकरणों की मदद से सुरंगों के रास्ते खोलने का प्रयास किया जा रहा है।

    नेपाल की इस भीषण आपदा के बाद कई देशों ने मदद का हाथ बढ़ाया है। भारत ने मानवीय सहायता के साथ मेडिकल और टनल रेस्क्यू टीम भेजी है। ब्रिटेन यूरोपीय संघ कनाडा अमेरिका और चीन की ओर से भी आर्थिक और मानवीय सहायता की घोषणा की गई है। ऐसे समय में राहत और बचाव अभियान के साथ लापता लोगों की तलाश सबसे बड़ी प्राथमिकता बनी हुई है। नेपाल अब इस त्रासदी से उबरने की कठिन चुनौती के बीच प्रभावित परिवारों को राहत पहुंचाने और बाढ़ से तबाह हुए क्षेत्रों को दोबारा खड़ा करने की कोशिश में जुटा है।

  • मूसलाधार बारिश के बाद इंदौर में दर्दनाक हादसा नाले में बहे युवक का शव बरामद अहीरखेड़ी का युवक अब भी लापता

    मूसलाधार बारिश के बाद इंदौर में दर्दनाक हादसा नाले में बहे युवक का शव बरामद अहीरखेड़ी का युवक अब भी लापता


    इंदौर । इंदौर में लगातार हो रही तेज बारिश के बीच हुए हादसों ने शहर को झकझोर दिया है। बुधवार शाम हुई मूसलाधार बारिश के दौरान अलग अलग स्थानों पर तेज बहाव में दो युवक बह गए थे। इनमें लसूड़िया क्षेत्र से लापता हुए युवक का शव गुरुवार सुबह बरामद कर लिया गया जबकि अहीरखेड़ी क्षेत्र से बहा युवक अब भी लापता है। पुलिस और एसडीईआरएफ की टीम लगातार राहत और बचाव अभियान चला रही है।

    पुलिस के अनुसार लसूड़िया मोरी निवासी 34 वर्षीय गोलू पंवार बुधवार रात करीब नौ बजे अपने पिता के लिए खाना लेकर जा रहा था। रास्ते में वह नाले के किनारे से गुजर रहा था तभी तेज बारिश के कारण बढ़े पानी के बहाव में उसका संतुलन बिगड़ गया और वह नाले में बह गया। घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस और स्थानीय लोगों ने रात में उसकी तलाश शुरू की लेकिन अंधेरा और तेज बहाव के कारण सफलता नहीं मिल सकी।

    गुरुवार सुबह एसडीईआरएफ की टीम ने दोबारा सर्च ऑपरेशन शुरू किया। करीब एक घंटे की मशक्कत के बाद गोलू का शव पुल के नीचे कचरे में फंसा मिला। टीम ने शव को बाहर निकालकर पुलिस को सौंप दिया जिसके बाद उसे पोस्टमार्टम के लिए एमवाय अस्पताल भेजा गया। गोलू ईंट निर्माण फैक्ट्री में काम करता था। उसके परिवार में माता पिता और छोटा भाई हैं। उसके पिता एक निजी कंपनी में सुरक्षा गार्ड के रूप में कार्यरत हैं। घटना के बाद परिवार में शोक का माहौल है।

    दूसरी ओर अहीरखेड़ी क्षेत्र में बुधवार को तेज बहाव में बहा युवक महेश चौहान अब भी लापता है। जानकारी के अनुसार महेश अपने दोस्त मनीष के साथ पुल की रपट पार कर रहा था। इसी दौरान दोनों पानी के तेज बहाव की चपेट में आ गए। मनीष किसी तरह खुद को बचाने में सफल रहा लेकिन महेश बह गया और तब से उसका कोई पता नहीं चल सका है।

    पुलिस और राहत दल ने बुधवार रात से ही आसपास के इलाकों में खोज अभियान शुरू कर दिया था। गुरुवार सुबह भी एसडीईआरएफ और पुलिस की संयुक्त टीम ने कई स्थानों पर तलाशी अभियान चलाया लेकिन समाचार लिखे जाने तक महेश का कोई सुराग नहीं मिला था। अधिकारियों का कहना है कि पानी का बहाव कम होने के साथ खोज अभियान लगातार जारी रहेगा।

    लगातार हो रही बारिश के कारण शहर के कई नाले और पुलिया उफान पर हैं। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि बारिश के दौरान जलभराव वाले क्षेत्रों नालों और रपटों को पार करने का प्रयास न करें तथा मौसम खराब होने पर सुरक्षित स्थानों पर ही रहें। विशेषज्ञों का कहना है कि थोड़ी सी लापरवाही भी ऐसे मौसम में बड़े हादसे का कारण बन सकती है।

  • कंटेनर के अचानक ब्रेक से बड़ा हादसा: ट्रक के केबिन में फंसा चालक, रस्सियों से गेट तोड़कर बचाई जान

    कंटेनर के अचानक ब्रेक से बड़ा हादसा: ट्रक के केबिन में फंसा चालक, रस्सियों से गेट तोड़कर बचाई जान


    देवास । देवास जिले के टोंककला क्षेत्र में शनिवार सुबह एक भीषण सड़क हादसा हो गया जिसमें ट्रक चालक की जान बाल बाल बच गई। कंटेनर के अचानक ब्रेक लगाने के कारण पीछे से आ रहा ट्रक उससे जा टकराया। टक्कर इतनी जोरदार थी कि ट्रक का अगला हिस्सा पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया और चालक केबिन के भीतर स्टेयरिंग और बॉडी के बीच बुरी तरह फंस गया। हादसे के बाद मौके पर अफरा तफरी मच गई और आसपास मौजूद ग्रामीणों तथा राहगीरों ने तुरंत राहत कार्य शुरू कर दिया।

    जानकारी के अनुसार अनीश पाल नामक चालक ट्रक लेकर देवास से मक्सी की ओर जा रहा था। इसी दौरान आगे चल रहे कंटेनर के सामने अचानक मवेशी आ गए। मवेशियों को बचाने के प्रयास में कंटेनर चालक ने अचानक ब्रेक लगा दिए। पीछे चल रहा ट्रक समय पर नहीं रुक सका और तेज रफ्तार में कंटेनर से जा भिड़ा। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि ट्रक का केबिन बुरी तरह पिचक गया और चालक अंदर ही फंस गया।

    हादसे के तुरंत बाद आसपास के ग्रामीण और राहगीर मदद के लिए मौके पर पहुंचे। चालक को बाहर निकालने के कई प्रयास किए गए लेकिन केबिन पूरी तरह दब जाने के कारण सफलता नहीं मिली। इसके बाद लोगों ने सूझबूझ दिखाते हुए रस्सियों की मदद से केबिन और उसके गेट को बांधकर खींचने का प्रयास किया। करीब आधे घंटे तक चले रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद गेट खुल सका और चालक को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया।

    हादसे में चालक के पैर में गंभीर चोट आई है। प्राथमिक उपचार देने के बाद उसे बेहतर इलाज के लिए देवास जिला अस्पताल भेजा गया जहां उसका उपचार जारी है। समय पर राहत कार्य शुरू होने और स्थानीय लोगों की तत्परता के कारण चालक की जान बचाई जा सकी।

    टोंककला चौकी प्रभारी मलखान सिंह भाटी ने बताया कि कंटेनर और ट्रक दोनों देवास से मक्सी की ओर जा रहे थे। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि कंटेनर के सामने अचानक मवेशी आने के कारण ब्रेक लगाए गए जिससे पीछे से आ रहा ट्रक टकरा गया। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है और दुर्घटना के सभी पहलुओं की पड़ताल की जा रही है।

  • शोरूम में लगी आग, पड़ोसियों ने सीढ़ियां जोड़कर बचाई कई लोगों की जान

    शोरूम में लगी आग, पड़ोसियों ने सीढ़ियां जोड़कर बचाई कई लोगों की जान


    मध्य प्रदेश । मध्य प्रदेश के Indore में शुक्रवार सुबह एक इलेक्ट्रिक वाहन (EV) शोरूम में लगी भीषण आग ने बड़ा हादसा होते-होते टाल दिया। लसूड़िया क्षेत्र के खालसा चौक के पास स्थित एक बहुमंजिला इमारत के ग्राउंड फ्लोर पर बने शोरूम में आग लगने से ऊपरी मंजिलों में रहने वाले करीब 20 लोग फंस गए। स्थानीय लोगों, पुलिस और फायर ब्रिगेड की तत्परता से सभी को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। हालांकि इस हादसे में कोई जनहानि नहीं हुई, लेकिन शोरूम में खड़े सभी इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहन जलकर खाक हो गए। प्रारंभिक जांच में शॉर्ट सर्किट को आग लगने का संभावित कारण माना जा रहा है।

    सुबह-सुबह मची अफरा-तफरी
    घटना शुक्रवार सुबह करीब 7 बजे की है। ग्राउंड फ्लोर पर स्थित इलेक्ट्रिक वाहन शोरूम से अचानक धुआं और लपटें उठने लगीं। कुछ ही मिनटों में आग ने विकराल रूप ले लिया और धुआं पूरी इमारत में फैलने लगा। ऊपरी मंजिलों पर बने फ्लैट्स में रहने वाले परिवार उस समय सो रहे थे। धुएं के कारण सांस लेने में परेशानी होने पर लोगों की नींद खुली। जब उन्होंने नीचे देखा तो शोरूम आग की लपटों से घिरा हुआ था। सबसे बड़ी समस्या यह थी कि इमारत की सीढ़ियां शोरूम के ठीक बगल में थीं और आग तथा धुएं की वजह से वहां से नीचे उतरना असंभव हो गया था। ऐसे में लोग अपने-अपने फ्लैट और बालकनियों में फंस गए।

    पड़ोसियों ने दिखाई सूझबूझ, छतों के बीच बनाया रास्ता
    इमारत से उठती चीख-पुकार सुनकर आसपास के लोग तुरंत मौके पर पहुंचे। पड़ोस की बहुमंजिला इमारत में रहने वालों ने राहत कार्य शुरू कर दिया। लोगों ने पहले फंसे हुए परिवारों को छत पर पहुंचने के लिए कहा। इसके बाद दोनों इमारतों की छतों के बीच सीढ़ियां लगाकर अस्थायी रास्ता तैयार किया गया। खिड़कियों और लोहे के एंगल से रस्सियां बांधकर दूसरी इमारत तक पहुंचाई गईं। कुछ लोग सीढ़ियों के सहारे दूसरी बिल्डिंग की छत तक पहुंचे, जबकि कई लोगों को रस्सियों के सहारे सुरक्षित नीचे उतारा गया। इस दौरान पुलिस और फायर ब्रिगेड की टीम भी मौके पर पहुंच गई और बचाव अभियान में शामिल हो गई।

    एक घंटे में पाया आग पर काबू
    फायर ब्रिगेड अधिकारी शोभाराम मालवीय ने बताया कि सूचना मिलते ही दमकल दल मौके पर पहुंच गया था। आग पर काबू पाने के लिए दो पानी के टैंकर लगाए गए। करीब एक घंटे की मशक्कत के बाद आग को पूरी तरह नियंत्रित कर लिया गया। राहत की बात यह रही कि आग फ्लैट्स तक नहीं पहुंच सकी, जिससे लोगों का घरेलू सामान सुरक्षित बच गया। हालांकि शोरूम में रखे सभी इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहन आग की चपेट में आकर नष्ट हो गए।

    पत्थर मारकर जगाए गए लोग
    इमारत में रहने वाले भानु सिंह और निशा सिंह ने बताया कि वे गहरी नींद में थे। अचानक बाहर शोर-शराबा सुनाई दिया। जब लोगों ने खिड़कियों पर पत्थर फेंककर उन्हें जगाया, तब उन्हें आग की जानकारी मिली। भानु सिंह के अनुसार, बिल्डिंग में कुल नौ फ्लैट हैं, जिनमें कुछ परिवार ही रह रहे थे। अधिकांश लोग किसी तरह बाहर निकल आए, लेकिन उनके परिवार सहित कुछ लोगों को विशेष रेस्क्यू ऑपरेशन के जरिए निकाला गया। वहीं बेंगलुरु निवासी चेतन, जो इंदौर में किराए के फ्लैट में रहते हैं, ने बताया कि वे भी लोगों के शोर सुनकर जागे और तब उन्हें स्थिति की गंभीरता का पता चला।

    चौकीदार की सतर्कता बनी मददगार
    पड़ोस की इमारत के चौकीदार प्रवीण ने बताया कि एक परिवार, जो हाल ही में दुबई से आया था, सुबह बारिश का नजारा देखने के लिए जागा हुआ था। सबसे पहले उसी परिवार ने धुआं देखा और अन्य लोगों को इसकी सूचना दी। समय रहते चेतावनी मिलने से लोगों को छत तक पहुंचने और बचाव अभियान शुरू करने का मौका मिल गया, जिससे बड़ा हादसा टल गया।

    EV सुरक्षा पर फिर उठे सवाल
    यह घटना ऐसे समय हुई है जब इंदौर पहले भी इलेक्ट्रिक वाहनों से जुड़ी आग की घटनाओं का सामना कर चुका है। कुछ समय पहले चार्जिंग के दौरान एक इलेक्ट्रिक कार में लगी आग ने कई लोगों की जान ले ली थी। ताजा घटना के बाद एक बार फिर इलेक्ट्रिक वाहन शोरूम और बैटरी सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े होने लगे हैं। फिलहाल पुलिस और फायर विभाग आग लगने के वास्तविक कारणों की जांच कर रहे हैं।

  • नहर हादसे के बाद लापता जवान की तलाश तेज, आज एक महिला को डूबने से बचाया गया

    नहर हादसे के बाद लापता जवान की तलाश तेज, आज एक महिला को डूबने से बचाया गया


    रीवा: जिले के सिलपरा डैम में बुधवार सुबह डूबे सेना के जवान गौरव द्विवेदी (28) की तलाश दूसरे दिन भी जारी रही, लेकिन गुरुवार शाम तक उनका कोई सुराग नहीं मिल सका। घटना के बाद से इलाके में चिंता का माहौल बना हुआ है और एसडीईआरएफ की टीम लगातार सर्च ऑपरेशन में जुटी हुई है।

    जानकारी के अनुसार, बघवार गांव निवासी गौरव द्विवेदी अपने परिवार के साथ डैम घूमने गए थे। इस दौरान नहाते समय उनका संतुलन बिगड़ गया और वे गहरे पानी में चले गए। देखते ही देखते वे पानी में लापता हो गए, जिसके बाद स्थानीय लोगों ने तुरंत पुलिस को सूचना दी।

    SDERF की टीम का लगातार सर्च ऑपरेशन
    घटना की जानकारी मिलते ही बिछिया थाना पुलिस और एसडीईआरएफ की टीम मौके पर पहुंची और तलाशी अभियान शुरू किया गया। गोताखोरों की मदद से डैम में लगातार सर्चिंग की जा रही है, लेकिन अब तक जवान का कोई पता नहीं चल पाया है। प्रशासन ने रेस्क्यू ऑपरेशन को तेज कर दिया है।

    सर्चिंग के दौरान बड़ा हादसा टला, महिला को बचाया गया
    सर्च ऑपरेशन के दौरान गुरुवार को एक और हादसा होते-होते टल गया। भटलो गांव निवासी पार्वती देवी चिराहुला कॉलोनी से अपने गांव लौट रही थीं, तभी सिलपरा नहर के पास अचानक उन्हें चक्कर आ गया और वे नहर में गिर गईं। तेज बहाव के बीच स्थिति गंभीर हो सकती थी, लेकिन मौके पर मौजूद SDERF टीम ने तुरंत प्रतिक्रिया देते हुए महिला को सुरक्षित बाहर निकाल लिया। समय रहते बचाव होने से एक बड़ी अनहोनी टल गई।

    अस्पताल में भर्ती, जवान की तलाश जारी
    रेस्क्यू के बाद महिला को प्राथमिक उपचार दिया गया और डायल-112 की मदद से अस्पताल भेजा गया, जहां उसका स्वास्थ्य परीक्षण जारी है। वहीं डूबे हुए जवान की तलाश में टीमें लगातार जुटी हुई हैं। डीएसपी उदित मिश्रा ने बताया कि सर्च ऑपरेशन बिना रुके जारी है और हर संभव प्रयास किया जा रहा है कि जवान को जल्द से जल्द ढूंढा जा सके।

    रीवा का सिलपरा डैम हादसा एक तरफ दुखद स्थिति पैदा कर रहा है, वहीं रेस्क्यू टीम की तत्परता ने एक और जान बचाकर बड़ी अनहोनी को टाल दिया है। फिलहाल पूरे इलाके की नजरें जवान की तलाश पर टिकी हैं।

  • गुलमर्ग रोपवे में बड़ा संकट: एशिया के सबसे ऊंचे केबल सिस्टम पर हवा में फंसे 300 पर्यटक, सेना और प्रशासन का युद्धस्तर पर रेस्क्यू अभियान जारी

    गुलमर्ग रोपवे में बड़ा संकट: एशिया के सबसे ऊंचे केबल सिस्टम पर हवा में फंसे 300 पर्यटक, सेना और प्रशासन का युद्धस्तर पर रेस्क्यू अभियान जारी


    नई दिल्ली। जम्मू-कश्मीर के प्रसिद्ध पर्यटन स्थल गुलमर्ग में सोमवार को उस समय अफरा-तफरी का माहौल बन गया जब एशिया के सबसे ऊंचे और चर्चित रोपवे सिस्टम में अचानक तकनीकी खराबी आ गई। खराबी के चलते गोंडोला सेवा बीच संचालन में ही रुक गई और केबल कार के कई डिब्बे हवा में ठहर गए। इस घटना के बाद करीब 300 पर्यटक बीच आसमान में फंस गए, जिससे मौके पर मौजूद लोगों और पर्यटकों के बीच डर और बेचैनी का माहौल बन गया। घटना ने कुछ समय के लिए पूरे इलाके में तनाव जैसी स्थिति पैदा कर दी।

    घटना के बाद पर्यटकों के बीच घबराहट तेजी से बढ़ती दिखाई दी। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार अचानक रोपवे रुकने के कारण कई लोग घबरा गए। महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों में सबसे ज्यादा डर का माहौल देखा गया। कई यात्रियों ने मदद के लिए आवाज लगाई, जबकि कुछ लोग मानसिक रूप से काफी परेशान नजर आए। अचानक हुई इस तकनीकी बाधा ने पर्यटकों के रोमांच को कुछ ही मिनटों में चिंता और भय में बदल दिया।

    मामले की जानकारी मिलते ही प्रशासन ने तत्काल सक्रियता दिखाई और बचाव अभियान शुरू कर दिया गया। सुरक्षा एजेंसियों और स्थानीय प्रशासन की टीमें तुरंत घटनास्थल पर पहुंचीं। सेना, पुलिस और प्रशासन ने संयुक्त रूप से बड़े स्तर पर रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया, ताकि हवा में फंसे सभी लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला जा सके। बचाव कार्य के दौरान विशेषज्ञ टीमों की मदद ली जा रही है और पूरे ऑपरेशन पर लगातार निगरानी रखी जा रही है। अधिकारियों द्वारा मौके की स्थिति पर नजर बनाए रखी गई है ताकि किसी भी तरह की अप्रिय स्थिति से बचा जा सके।

    मौके पर मौजूद अधिकारियों ने स्थिति को नियंत्रित रखने के लिए अतिरिक्त संसाधन भी तैनात किए हैं। बचाव अभियान की निगरानी वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी कर रहे हैं और पर्यटकों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है। राहत की बात यह रही कि शुरुआती जानकारी के अनुसार सभी केबिन सुरक्षित बताए गए और फंसे लोगों को सुरक्षित निकालने के प्रयास तेजी से जारी हैं। प्रशासन ने लोगों से घबराने की बजाय संयम बनाए रखने की अपील भी की है।

    गुलमर्ग का यह रोपवे देश ही नहीं बल्कि एशिया के सबसे ऊंचे और लंबे केबल कार प्रोजेक्ट्स में शामिल माना जाता है। यह पर्यटकों के बीच बेहद लोकप्रिय आकर्षण का केंद्र रहा है और हर साल बड़ी संख्या में लोग यहां पहुंचते हैं। दो चरणों में संचालित यह रोपवे ऊंचाई वाले क्षेत्रों तक पर्यटकों को पहुंचाता है। हालांकि इस तकनीकी खराबी ने सुरक्षा व्यवस्था और संचालन प्रणाली को लेकर कई सवाल भी खड़े कर दिए हैं। फिलहाल सभी की निगाहें रेस्क्यू ऑपरेशन पर टिकी हुई हैं और लोगों को सुरक्षित बाहर निकालने के प्रयास लगातार जारी हैं।