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  • प्रयागराज में दिल दहला देने वाला हादसा: बच्चों को बचाते-बचाते जिंदा जल गई मां

    प्रयागराज में दिल दहला देने वाला हादसा: बच्चों को बचाते-बचाते जिंदा जल गई मां


    प्रयागराज। प्रयागराज में इंसानियत और मां की ममता की एक ऐसी दर्दनाक और साहसिक कहानी सामने आई है, जिसने हर किसी को भावुक कर दिया। यहां एक मां ने अपने चार बच्चों की जान बचाने के लिए अपनी जान कुर्बान कर दी। यह घटना 12 मई की रात नैनी बाजार के चैंपियन गली इलाके में हुई, जहां एक क्रॉकरी कारोबारी के घर में शॉर्ट सर्किट से भीषण आग लग गई।

    जानकारी के अनुसार, आग घर के फर्स्ट फ्लोर पर बने गोदाम से शुरू हुई और कुछ ही मिनटों में पूरे मकान में फैल गई। उस समय घर की महिलाएं और बच्चे ऊपर की मंजिल पर फंस गए थे। नीचे से निकलने का कोई रास्ता नहीं बचा और सभी लोग जान बचाने के लिए छत पर पहुंच गए। आग की लपटें और धुआं तेजी से बढ़ता जा रहा था, जिससे हालात बेहद भयावह हो गए।

    इसी दौरान मां ने असाधारण साहस दिखाते हुए अपने बच्चों को बचाने का फैसला किया। पहले उसने अपने एक साल के मासूम बच्चे को चादर में लपेटा और पड़ोसी की छत की ओर लगभग 12 फीट दूर उछाल दिया। पड़ोसियों ने किसी तरह बच्चे को सुरक्षित पकड़ लिया। इसके बाद छत पर रखी सीढ़ी का सहारा लेकर उसने अपनी दो बेटियों को भी पड़ोसी की छत पर सुरक्षित पहुंचा दिया।

    इसके बाद उसने अपने भतीजे को भी सीढ़ी के जरिए दूसरी छत पर भेजकर बचा लिया। इस तरह उसने चार बच्चों को सुरक्षित कर दिया, लेकिन इस दौरान आग और धुएं ने पूरी छत को घेर लिया था। लगातार बढ़ती लपटों और घने धुएं के कारण वह खुद बाहर नहीं निकल सकी और आग की चपेट में आ गई।

    कुछ ही देर में वह बुरी तरह झुलस गई और मौके पर ही गंभीर हालत में पहुंच गई। फायर ब्रिगेड की टीम बाद में मौके पर पहुंची, लेकिन तंग गली होने के कारण राहत कार्य में काफी देर लगी। किसी तरह महिला को अस्पताल पहुंचाया गया, जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।

    बताया गया कि महिला का नाम अर्चना था, जिन्होंने अपने बच्चों की जान बचाने के लिए अपनी जान तक की परवाह नहीं की। उनकी 13 साल की बेटी भी इस हादसे में झुलस गई और आईसीयू में भर्ती है, जबकि अन्य परिजन भी घायल हुए हैं।

    फायर ब्रिगेड की करीब 12 गाड़ियों ने घंटों की मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया। यह हादसा पूरे इलाके में शोक और सदमे का कारण बन गया है। लोगों का कहना है कि यह घटना मां के अद्भुत साहस और बलिदान की मिसाल है, जिसे कभी भुलाया नहीं जा सकता।

  • आगरा में यमुना हादसा: घाट पर नहाने उतरे छह युवक-युवतियां और किशोर डूबे, चार की मौत से मचा कोहराम

    आगरा में यमुना हादसा: घाट पर नहाने उतरे छह युवक-युवतियां और किशोर डूबे, चार की मौत से मचा कोहराम

    नई दिल्ली। आगरा के बल्केश्वर घाट पर मंगलवार सुबह यमुना नदी में नहाने के दौरान बड़ा हादसा हो गया, जिसमें छह युवक-युवतियां और एक किशोर डूब गए। स्थानीय लोगों और पुलिस की मदद से पांच लोगों को बाहर निकाला गया, लेकिन इलाज के दौरान तीन की मौत हो गई, जबकि दो घंटे की मशक्कत के बाद किशोर का शव भी बरामद हुआ।

    जानकारी के अनुसार, तेज गर्मी के चलते सभी लोग यमुना में नहाने उतरे थे, तभी अचानक गहरे पानी में चले जाने से एक के बाद एक सभी डूबने लगे। घाट पर मौजूद लोगों ने शोर मचाकर पुलिस को सूचना दी, जिसके बाद राहत और बचाव कार्य शुरू किया गया।

    रेस्क्यू टीम ने कड़ी मेहनत के बाद पांच लोगों को बाहर निकाला और उन्हें एसएन अस्पताल भेजा गया, जहां कान्हा, महक और रिया की इलाज के दौरान मौत हो गई। वहीं 11 वर्षीय विक्की का शव बाद में यमुना से बरामद किया गया।

    घटना के बाद घाट पर अफरा-तफरी मच गई और परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। सबसे दर्दनाक दृश्य तब सामने आया जब विक्की का शव बाहर निकाला गया और उसके पिता बिलख पड़े। उन्होंने बताया कि चार बेटियों के बाद बड़ी मन्नत से मिला एक बेटा भी हादसे में खो दिया।

    डीसीपी सिटी सैय्यद अली अब्बास ने बताया कि मामले की जांच की जा रही है और सभी पहलुओं को ध्यान में रखा जा रहा है।

  • दिल्ली में तड़के लगी भीषण आग बनी मौत का मंजर: सोते हुए लोग लपटों में घिरे, दो परिवार पूरी तरह खत्म

    दिल्ली में तड़के लगी भीषण आग बनी मौत का मंजर: सोते हुए लोग लपटों में घिरे, दो परिवार पूरी तरह खत्म

    नई दिल्ली।  राजधानी के विवेक विहार क्षेत्र में तड़के सुबह घटी एक भयावह आग की घटना ने पूरे इलाके को शोक में डुबो दिया। एक बहुमंजिला रिहायशी इमारत में लगी इस भीषण आग ने नौ लोगों की जान ले ली, जिनमें एक ही परिवार की तीन पीढ़ियां भी शामिल थीं। डेढ़ साल का मासूम, उसके माता-पिता और दादा-दादी—सभी इस हादसे का शिकार हो गए। इस घटना ने यह दिखा दिया कि किस तरह कुछ ही पलों में एक पूरा परिवार और उसकी पीढ़ियां खत्म हो सकती हैं।
    बताया जाता है कि आग सुबह करीब 3:45 बजे के आसपास लगी, जब इमारत में रहने वाले अधिकांश लोग गहरी नींद में थे। शुरुआत में आग का पता नहीं चल सका, लेकिन थोड़ी ही देर में लपटों ने तेजी से दूसरी, तीसरी और ऊपरी मंजिलों को अपनी चपेट में ले लिया। धुएं और आग के फैलने की गति इतनी तेज थी कि कई लोग बाहर निकलने का रास्ता नहीं ढूंढ पाए और अंदर ही फंस गए।
    इस हादसे की सबसे मार्मिक तस्वीर एक ही परिवार की तबाही के रूप में सामने आई, जहां बुजुर्ग दंपति, उनका बेटा-बहू और छोटा पोता सभी इस आग में झुलस गए। आग की तीव्रता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि कई शवों की पहचान करना भी मुश्किल हो गया। इसके अलावा इमारत के अन्य हिस्सों में रहने वाले लोग भी इस त्रासदी का शिकार हुए, जिससे कुल मृतकों की संख्या नौ तक पहुंच गई।
    घटना की सूचना मिलते ही राहत और बचाव टीमें मौके पर पहुंचीं। हालात की गंभीरता को देखते हुए कई दमकल गाड़ियों को तैनात किया गया और करीब दो घंटे की मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया जा सका। इसके बाद भी तलाशी अभियान जारी रखा गया ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि कोई व्यक्ति अंदर फंसा न रह गया हो। बचाव कार्य के दौरान कुछ लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला गया, जबकि घायलों को तुरंत अस्पताल पहुंचाया गया।
    स्थानीय निवासियों ने बताया कि आग इतनी भयानक थी कि लोगों को संभलने का मौका ही नहीं मिला। कई लोग घबराकर बाहर की ओर भागे, लेकिन कुछ लोग धुएं और लपटों के बीच फंसकर अपनी जान नहीं बचा सके। इस घटना ने पूरे इलाके में दहशत और अफरा-तफरी का माहौल पैदा कर दिया।
    फिलहाल आग लगने के कारणों का स्पष्ट पता नहीं चल पाया है। शुरुआती तौर पर तकनीकी खराबी जैसी आशंकाएं जताई जा रही हैं, लेकिन जांच एजेंसियां हर पहलू से मामले की पड़ताल कर रही हैं।
    यह हादसा शहरी रिहायशी इलाकों में अग्नि सुरक्षा के इंतजामों पर गंभीर सवाल खड़े करता है। यदि समय रहते सुरक्षा उपायों को मजबूत किया जाए और जागरूकता बढ़ाई जाए, तो ऐसे हादसों को काफी हद तक टाला जा सकता है।
    कुल मिलाकर, विवेक विहार का यह अग्निकांड केवल एक दुर्घटना नहीं, बल्कि एक गहरी मानवीय त्रासदी है, जिसने कई जिंदगियों को एक साथ खत्म कर दिया और समाज को यह सोचने पर मजबूर कर दिया कि सुरक्षा के प्रति लापरवाही कितनी भारी पड़ सकती है।
  • जबलपुर क्रूज हादसा: पानी में फंसे यात्री को स्थानीय युवक ने जोखिम लेकर बचाया, मानवता की मिसाल कायम

    जबलपुर क्रूज हादसा: पानी में फंसे यात्री को स्थानीय युवक ने जोखिम लेकर बचाया, मानवता की मिसाल कायम

    मध्‍य प्रदेश /जबलपुर के बरगी डैम में हुआ क्रूज हादसा एक ओर जहां दर्द और तबाही की तस्वीर छोड़ गया, वहीं दूसरी ओर इसने मानवता की एक ऐसी मिसाल भी पेश की, जिसने यह साबित कर दिया कि संकट की घड़ी में इंसानियत किसी धर्म या पहचान की मोहताज नहीं होती।
    घटना उस समय हुई जब एक डबल डेकर क्रूज अचानक तेज हवाओं और आंधी की चपेट में आ गया। मौसम में अचानक आए बदलाव ने स्थिति को इतना गंभीर बना दिया कि कुछ ही पलों में क्रूज पानी में डूबने लगा। उस समय क्रूज में 30 से अधिक लोग सवार थे, जिनमें से कई लोग घबराहट में पानी में गिर गए और अफरा-तफरी मच गई।
    इसी बीच एक यात्री अयाज हुसैन खुद को किसी तरह बचाते हुए क्रूज के ऊपरी हिस्से पर पहुंच गए। वह वहीं फंसे रहे और तीन घंटे तक जीवन और मौत के बीच संघर्ष करते रहे। पानी का स्तर और तेज लहरें उनकी स्थिति को और कठिन बना रही थीं, लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी।
    उसी समय स्थानीय निवासी कन्हैयालाल साहू वहां पहुंचे। स्थिति की गंभीरता को समझते हुए उन्होंने बिना किसी सुरक्षा उपकरण और अपनी जान की परवाह किए बिना पानी में उतरने का फैसला किया। उनके साथ कुछ अन्य लोग भी मदद के लिए आगे आए, लेकिन मुख्य भूमिका कन्हैयालाल की ही रही, जिन्होंने सीधे उस यात्री तक पहुंचने की कोशिश की।
    कन्हैयालाल ने बताया कि अयाज हुसैन जीवन रक्षक उपकरण पहने हुए थे और किसी तरह क्रूज के ऊपरी हिस्से पर टिके हुए थे। चारों ओर पानी और अंधेरा माहौल होने के बावजूद उन्होंने हिम्मत दिखाते हुए उन्हें सुरक्षित बाहर निकालने में सफलता हासिल की। यह पूरा प्रयास बेहद जोखिम भरा था, लेकिन मानवता की भावना ने हर डर पर जीत हासिल की।
    इस हादसे में कई अन्य लोग भी प्रभावित हुए हैं। बचाव दल लगातार राहत और खोज कार्य में जुटे हुए हैं। अब तक कई लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला गया है और उन्हें इलाज के लिए अस्पताल भेजा गया है, जबकि कुछ लोगों की तलाश अभी भी जारी है।
    स्थानीय लोगों की भूमिका इस घटना में बेहद अहम रही है। बिना किसी आधिकारिक संसाधन के उन्होंने जिस तरह से मदद की, वह इस बात का उदाहरण है कि आपदा के समय समाज खुद भी एक बड़ा सहारा बन सकता है।
    यह पूरी घटना सिर्फ एक हादसा नहीं बल्कि मानवता की ताकत की कहानी बन गई है, जहां एक अनजान व्यक्ति ने दूसरे की जान बचाने के लिए अपनी जान दांव पर लगा दी। इसने यह संदेश दिया है कि मुश्किल हालात में इंसानियत ही सबसे बड़ा धर्म होती है।
  • लखनऊ अग्निकांड: 1200 झोपड़ियां राख, 6 बच्चे अब भी लापता, CM योगी ने दिए जांच और राहत के निर्देश

    लखनऊ अग्निकांड: 1200 झोपड़ियां राख, 6 बच्चे अब भी लापता, CM योगी ने दिए जांच और राहत के निर्देश

    लखनऊ। विकासनगर सेक्टर-12 में रिंग रोड किनारे स्थित अवैध बस्ती में बुधवार शाम भीषण आग लग गई। कुछ ही समय में आग ने विकराल रूप लेते हुए करीब 1200 झोपड़ियों को अपनी चपेट में ले लिया। झोपड़ियों में रखे लगभग 100 गैस सिलिंडर फटने से पूरे इलाके में जोरदार धमाके हुए और भगदड़ मच गई।

    घटना के बाद 22 दमकल गाड़ियों ने देर रात तक आग बुझाने का प्रयास किया। इस दौरान आग की तीव्रता इतनी अधिक थी कि इलाके में दहशत फैल गई। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार लगभग 50 मवेशियों के जलने की आशंका जताई जा रही है, हालांकि प्रशासन ने इसकी पुष्टि नहीं की है।

    सूचना में देरी का आरोप, आग ने मिनटों में लिया विकराल रूप
    स्थानीय लोगों का आरोप है कि आग लगने के बाद समय पर पुलिस और दमकल विभाग को सूचना दी गई, लेकिन मदद देर से पहुंची। इस बीच आग तेजी से फैलती गई और एक के बाद एक झोपड़ियां जलने लगीं। बताया गया कि आग एक झोपड़ी से शुरू हुई और कुछ ही देर में पूरी बस्ती को अपनी चपेट में ले लिया। लोगों ने पुलिस कंट्रोल रूम पर कॉल लगाने में भी देरी और तकनीकी दिक्कतों की बात कही है।

    भगदड़ में 6 बच्चे लापता, सर्च ऑपरेशन जारी
    भीषण हादसे के दौरान मची अफरा-तफरी में दो परिवारों के छह बच्चे लापता हो गए हैं, जिनमें एक परिवार के चार और दूसरे के दो बच्चे शामिल हैं। पुलिस और प्रशासन की टीमें देर रात तक बच्चों की तलाश में जुटी रहीं और आसपास के इलाकों में सर्च ऑपरेशन चलाया जा रहा है।

    पथराव और हंगामा, प्लॉट मालिक पर आग लगाने के आरोप
    घटना के बाद गुस्साए लोगों ने प्लॉट मालिक के घर का घेराव कर हंगामा किया और उस पर आग लगवाने का आरोप लगाया। इस दौरान कुछ लोगों ने पथराव भी किया, जिसे रोकने के लिए पुलिस को हस्तक्षेप करना पड़ा। आरोप है कि प्लॉट मालिक कुछ दिन से झोपड़ियां हटाने के लिए दबाव बना रहा था।

    वीडियो बनाने और ट्रैफिक जाम से बिगड़े हालात
    घटना स्थल पर भीड़ द्वारा वीडियो बनाने और रास्ता बाधित करने से राहत कार्य प्रभावित हुआ। दमकल की गाड़ियां भी जाम में फंस गईं, जिसके बाद पुलिस को लाठीचार्ज करना पड़ा। इसी दौरान कुछ लोगों ने पुलिस पर पथराव किया, जिसमें सिविल डिफेंस के वार्डन समेत कई लोग घायल हो गए। इसके कारण इलाके में करीब दो किलोमीटर लंबा जाम लग गया और यातायात पूरी तरह बाधित हो गया।

    आग पर काबू, राहत और पुनर्वास की तैयारी
    दमकल विभाग ने रात करीब 10 बजे तक आग पर आंशिक नियंत्रण पा लिया। प्रशासन ने आसपास के लगभग 30 घरों को खाली कराया और कई सिलिंडर सुरक्षित बाहर निकाले। घटना की गंभीरता को देखते हुए उच्च स्तरीय जांच के आदेश दिए गए हैं। डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया और पीड़ितों के लिए भोजन व आवास की व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

  • बांग्लादेश में बड़ा हादसा: अनियंत्रित बस नदी में गिरी, 18 लोगों की मौत

    बांग्लादेश में बड़ा हादसा: अनियंत्रित बस नदी में गिरी, 18 लोगों की मौत

    नई दिल्ली।  बांग्लादेश में एक दिल दहला देने वाला सड़क हादसा सामने आया है, जहां एक यात्री बस अनियंत्रित होकर पद्मा नदी में गिर गई। इस भीषण दुर्घटना में अब तक 18 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि कई यात्री अब भी लापता बताए जा रहे हैं। हादसा राजबारी जिले के गोवालैंड उपजिला स्थित दौलतदिया फेरी टर्मिनल पर बुधवार शाम करीब 5:15 बजे हुआ। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, बस नदी पार करने के लिए अपनी बारी का इंतजार कर रही थी, तभी अचानक नियंत्रण खो बैठी और सीधे नदी में जा गिरी।

    स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, बस कुश्तिया के कुमारखाली से ढाका जा रही थी और रास्ते में अलग-अलग स्थानों से यात्रियों को बैठाया गया था। बताया जा रहा है कि बस में कुल करीब 50 लोग सवार थे, जबकि बस की क्षमता 40 सीटों की थी। हादसे के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई और तुरंत राहत एवं बचाव कार्य शुरू किया गया।

    बचाव अभियान के तहत ‘हमजा’ नामक रेस्क्यू शिप को लगाया गया, जिसने करीब छह घंटे की मशक्कत के बाद डूबी हुई बस को नदी से बाहर निकाला। देर रात करीब 11:30 बजे क्रेन की मदद से बस को पानी से बाहर निकाला गया। इसके बाद बस के अंदर से 16 शव बरामद किए गए, जिनमें महिलाएं, पुरुष और बच्चे शामिल थे। इससे पहले दो घायलों को अस्पताल ले जाया गया, जहां उन्हें मृत घोषित कर दिया गया, जिससे कुल मृतकों की संख्या 18 हो गई।

    फरीदपुर फायर सर्विस के कमांडर मोहम्मद बेलाल उद्दीन ने बताया कि हादसे के बाद बड़ी संख्या में लोग लापता हो गए थे। राहत दल लगातार नदी में सर्च ऑपरेशन चला रहे हैं और गोताखोरों की मदद से बस के आसपास तलाशी ली जा रही है। हालांकि बस के दरवाजे और खिड़कियां टूट जाने के कारण अंदर पहुंचना काफी मुश्किल हो गया था।

    हादसे की वजह अभी साफ नहीं हो पाई है, लेकिन शुरुआती जांच में ड्राइवर द्वारा नियंत्रण खोने की आशंका जताई जा रही है। प्रशासन ने पूरे मामले की जांच के आदेश दे दिए हैं और मृतकों के परिजनों को हर संभव सहायता देने का आश्वासन दिया है।

    इस दर्दनाक हादसे के बाद पीड़ित परिवारों का रो-रोकर बुरा हाल है। वहीं स्थानीय प्रशासन और बचाव दल पूरी मुस्तैदी से लापता लोगों की तलाश में जुटे हुए हैं।

  • मुरैना में रिश्तों की त्रासदी: शादी से नाखुश युवती ने पति और ससुर के सामने नहर में लगाई छलांग, 12 घंटे से रेस्क्यू जारी

    मुरैना में रिश्तों की त्रासदी: शादी से नाखुश युवती ने पति और ससुर के सामने नहर में लगाई छलांग, 12 घंटे से रेस्क्यू जारी

    मुरैना । मुरैना मध्य प्रदेश चंबल अंचल के मुरैना जिले में एक विवाहिता द्वारा अपनी जीवनलीला समाप्त करने के प्रयास का सनसनीखेज मामला प्रकाश में आया है। मिली जानकारी के अनुसार, एक युवती अपनी शादी से खुश नहीं थी और इसी मानसिक तनाव के चलते उसने खौफनाक कदम उठा लिया। हृदयविदारक बात यह है कि जिस वक्त युवती ने नहर में छलांग लगाई, उस समय उसके पति और ससुर भी मौके पर मौजूद थे, लेकिन जब तक वे कुछ समझ पाते या उसे रोक पाते, युवती गहरे पानी में ओझल हो गई।

    घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस और प्रशासन मौके पर पहुंचा। मामले की गंभीरता को देखते हुए तत्काल SDRF (राज्य आपदा आपातकालीन प्रतिक्रिया बल की टीम को बुलाया गया। पिछले 12 घंटों से भी अधिक समय से रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया जा रहा है, लेकिन नहर का बहाव तेज होने के कारण अभी तक युवती का कोई सुराग नहीं मिल पाया है। गोताखोर लगातार पानी की गहराई में उसकी तलाश कर रहे हैं, वहीं किनारे पर खड़े परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है।

    शादी के फैसले से थी असंतुष्ट
    प्रारंभिक जांच और परिजनों से मिली जानकारी के मुताबिक, युवती अपनी इस शादी को लेकर मानसिक रूप से तैयार नहीं थी। बताया जा रहा है कि विवाह के बाद से ही वह गुमसुम रहती थी और अक्सर अपनी नाखुशी जाहिर करती थी। पुलिस अब इस बिंदु पर भी जांच कर रही है कि क्या उस पर शादी के लिए किसी प्रकार का दबाव था या ससुराल पक्ष में कोई अन्य विवाद चल रहा था। पति और ससुर से भी पूछताछ की जा रही है ताकि घटना के समय की वास्तविक परिस्थितियों का पता लगाया जा सके।

    यह घटना एक बार फिर समाज को सोचने पर मजबूर करती है कि किसी भी व्यक्ति की इच्छा के विरुद्ध लिए गए जीवन के बड़े फैसले किस कदर आत्मघाती साबित हो सकते हैं। फिलहाल, पूरा ध्यान रेस्क्यू ऑपरेशन पर केंद्रित है और प्रशासन को उम्मीद है कि जल्द ही युवती को ढूंढ लिया जाएगा। घटना के बाद से ही क्षेत्र में मातम पसरा हुआ है और लोग इस दुखद अंत से स्तब्ध हैं।

  • जन्मदिन की पार्टी बनी जानलेवा: नशे में युवक ने चढ़ा हाईटेंशन लाइन टावर, घंटों तक चला रेस्क्यू ऑपरेशन

    जन्मदिन की पार्टी बनी जानलेवा: नशे में युवक ने चढ़ा हाईटेंशन लाइन टावर, घंटों तक चला रेस्क्यू ऑपरेशन


    अनूपपुर । मध्य प्रदेश के अनूपपुर जिले के राजेन्द्रग्राम थाना क्षेत्र स्थित ग्राम दूधमनिया में एक युवक के जन्मदिन की पार्टी ने जानलेवा मोड़ ले लिया। शराब के नशे में धुत होकर युवक हाईटेंशन लाइन के टावर पर चढ़ गया, जिससे पूरे गांव में हड़कंप मच गया। यह घटना उस वक्त हुई जब युवक अपने रिश्तेदार के यहां जन्मदिन मनाने गया था और अत्यधिक शराब सेवन के बाद उसने पास ही गुजर रही हाईटेंशन लाइन के टावर पर चढ़ने की साहसिक, लेकिन खतरनाक हरकत कर दी।

    युवक इतनी ऊंचाई तक पहुंच गया कि नीचे उतरने से इंकार कर दिया। इस घटना को देखकर गांववाले घबराए और तुरंत डायल 112 पर सूचना दी। जैसे ही पुलिस को खबर मिली, राजेन्द्रग्राम थाना पुलिस मौके पर पहुंची और युवक को समझाने की कोशिश की, लेकिन वह नहीं उतरा। स्थिति गंभीर होते देख पुलिस ने विद्युत विभाग से संपर्क किया और हाईटेंशन लाइन की सप्लाई बंद कराई। इसके बाद रेस्क्यू टीम को बुलाया गया।

    घंटों की कड़ी मशक्कत और रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद युवक को सुरक्षित नीचे उतारा गया। अंत में युवक को समझाइश देने के बाद उसके परिजनों के हवाले कर दिया गया।घटना में किसी तरह की जनहानि नहीं हुई, लेकिन यह एक बड़ा हादसा होते-होते टल गया। पुलिस और प्रशासन की तत्परता से जान बचाई जा सकी, लेकिन इस घटना ने यह साबित कर दिया कि नशे में युवकों को किसी भी तरह की जोखिम से बचाना कितना जरूरी है।