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  • मध्य प्रदेश में बारिश के बीच मुख्यमंत्री ने लिया आपदा प्रबंधन का जायजा, एसडीआरएफ एनडीआरएफ की मुस्तैदी पर जताया संतोष

    मध्य प्रदेश में बारिश के बीच मुख्यमंत्री ने लिया आपदा प्रबंधन का जायजा, एसडीआरएफ एनडीआरएफ की मुस्तैदी पर जताया संतोष

    मध्य प्रदेश: में लगातार हो रही बारिश और कई क्षेत्रों में अतिवृष्टि की स्थिति के बीच मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने शनिवार को भोपाल स्थित होमगार्ड कार्यालय के एसडीआरएफ स्टेट कमांड सेंटर का दौरा किया। मुख्यमंत्री ने यहां प्रदेश में बारिश से उत्पन्न परिस्थितियों, संभावित बाढ़ और राहत एवं बचाव अभियानों की विस्तृत समीक्षा की। इस दौरान उन्होंने प्रभावित क्षेत्रों में प्रशासन और बचाव दलों की ओर से किए जा रहे कार्यों की जानकारी ली और आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।

    मुख्यमंत्री ने कमांड सेंटर से प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में आपदा प्रबंधन की स्थिति का अवलोकन किया। उन्होंने अधिकारियों और संबंधित टीमों से प्रभावित इलाकों की जानकारी ली तथा राहत कार्यों की लगातार निगरानी सुनिश्चित करने पर जोर दिया। इस दौरान उन्होंने बचाव एवं राहत अभियान में जुटे personnel से संवाद भी किया और उनके कार्यों की जानकारी प्राप्त की।

    डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में फिलहाल बारिश का दौर जारी है। पश्चिमी मध्य प्रदेश को छोड़कर राज्य के अधिकांश हिस्सों में बारिश की आवश्यकता पूरी हो चुकी है। उन्होंने कहा कि लगातार वर्षा के कारण निचले इलाकों में पानी भरने जैसी परिस्थितियां सामने आती हैं, जिससे नागरिकों के साथ-साथ पशुधन के लिए भी चुनौती उत्पन्न हो सकती है।

    मुख्यमंत्री ने बताया कि पिछले एक महीने के दौरान एसडीआरएफ और एनडीआरएफ की टीमों ने मिलकर 2783 से अधिक लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाया है। अचानक आई बाढ़ और जलभराव जैसी परिस्थितियों में इन टीमों की तत्परता से कई लोगों और मवेशियों को बचाने में मदद मिली है।

    उन्होंने कहा कि पिछले दो से चार दिनों में प्रदेश में ऐसी कोई गंभीर आपात स्थिति सामने नहीं आई है, लेकिन बचाव दलों को लगातार सतर्क रखा गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि आपदा की स्थिति में कुछ ही समय के भीतर पानी का स्तर बढ़ने से निचले इलाकों में परेशानी पैदा हो सकती है। ऐसे में प्रशासन, पुलिस और बचाव दलों की त्वरित कार्रवाई महत्वपूर्ण हो जाती है।

    डॉ. यादव ने आपदा प्रबंधन में पुलिस और बचाव दलों के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि जवानों ने अचानक आई बाढ़ जैसी परिस्थितियों का प्रभावी ढंग से सामना करते हुए नागरिकों और पशुधन की सुरक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। राज्य सरकार का प्रयास है कि संकट की स्थिति में प्रभावित लोगों तक समय पर सहायता पहुंचाई जाए।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि बारिश का मौसम अभी पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है और आने वाले कुछ दिनों में भी वर्षा की संभावना बनी हुई है। ऐसे में लोगों को सावधानी बरतने की जरूरत है। उन्होंने प्रशासन को संवेदनशील क्षेत्रों पर विशेष नजर रखने और आवश्यकता पड़ने पर तत्काल राहत एवं बचाव अभियान शुरू करने के निर्देश दिए।

    इस दौरान मुख्यमंत्री ने प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों के लोगों से सीधा संवाद भी किया और वहां की परिस्थितियों की जानकारी ली। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि स्थानीय स्तर पर सामने आने वाली समस्याओं पर तत्काल प्रतिक्रिया सुनिश्चित की जाए। सरकार और प्रशासन की प्राथमिकता प्रभावित नागरिकों की सुरक्षा तथा किसी भी संभावित आपदा में जान-माल के नुकसान को न्यूनतम रखना है।

  • एमपी में बारिश के बीच NDRF-SDRF तैनात, अचानक बाढ़ की स्थिति से निपटने के लिए प्रशासन ने बढ़ाई निगरानी

    एमपी में बारिश के बीच NDRF-SDRF तैनात, अचानक बाढ़ की स्थिति से निपटने के लिए प्रशासन ने बढ़ाई निगरानी

    मध्य प्रदेश: में लगातार हो रही बारिश को देखते हुए राज्य सरकार ने आपदा प्रबंधन और राहत व्यवस्था को लेकर सतर्कता बढ़ा दी है। प्रदेश के ज्यादातर हिस्सों में इन दिनों बारिश दर्ज की जा रही है। पश्चिमी मध्य प्रदेश को छोड़कर कई क्षेत्रों में अच्छी बारिश हुई है। मौसम की स्थिति को देखते हुए प्रशासन ने संवेदनशील इलाकों में निगरानी बढ़ाने के साथ राष्ट्रीय आपदा मोचन बल और राज्य आपदा मोचन बल की टीमों को अलग-अलग स्थानों पर तैनात किया है।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने आने वाले दिनों में बारिश की स्थिति को देखते हुए अधिकारियों के साथ तैयारियों की समीक्षा की। बैठक में संभावित जलभराव, अचानक बाढ़ और अन्य आपदा जैसी परिस्थितियों से निपटने के लिए राहत एवं बचाव व्यवस्था पर चर्चा की गई। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि किसी भी आकस्मिक स्थिति में प्रभावित लोगों तक राहत और सहायता तेजी से पहुंचाई जा सके।

    सरकार के अनुसार, पिछले एक महीने के दौरान आपदा प्रबंधन से जुड़ी राहत और बचाव टीमों ने 2,783 से अधिक लोगों को विभिन्न परिस्थितियों में सुरक्षित बाहर निकाला है। लगातार बारिश के कारण प्रदेश के कई इलाकों में जलस्तर बढ़ने और आवागमन प्रभावित होने जैसी स्थितियां बनी हैं। ऐसे में राहत दलों को जरूरत के अनुसार तत्काल कार्रवाई के लिए तैयार रखा गया है।

    मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि अब तक बारिश के कारण प्रदेश में जान-माल का कोई बड़ा नुकसान नहीं हुआ है। उन्होंने राहत एवं बचाव कार्य में पुलिस और संबंधित टीमों की भूमिका की सराहना करते हुए कहा कि सभी विभागों को आपसी समन्वय के साथ काम करना होगा। उनका जोर इस बात पर रहा कि मौसम की स्थिति अचानक बदलने पर प्रशासन के पास तत्काल प्रतिक्रिया देने की क्षमता बनी रहे।

    मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार अगले दो से चार दिनों के दौरान किसी बड़ी परेशानी की आशंका नहीं बताई गई है। इसके बावजूद सरकार ने एहतियाती स्तर पर तैयारियों को मजबूत रखने का फैसला किया है। खासतौर पर निचले इलाकों, जलभराव वाले क्षेत्रों और ऐसे स्थानों पर निगरानी बनाए रखने पर जोर दिया जा रहा है, जहां अचानक पानी बढ़ने की संभावना रहती है।

    NDRF और SDRF की टीमें जरूरत के अनुसार राहत और बचाव अभियान में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। इन टीमों को संवेदनशील क्षेत्रों में तैनात रखने का उद्देश्य किसी भी आपात स्थिति में लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाना है। प्रशासन की ओर से स्थानीय स्तर पर भी संसाधनों और राहत व्यवस्थाओं को तैयार रखने पर जोर दिया गया है।

    बारिश के दौरान नदी-नालों और जलाशयों के आसपास रहने वाले लोगों की सुरक्षा भी प्रशासन के लिए महत्वपूर्ण विषय है। जलस्तर में अचानक वृद्धि होने की स्थिति में लोगों को समय पर चेतावनी देने और जरूरत पड़ने पर सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने की व्यवस्था पर ध्यान दिया जा रहा है। अधिकारियों को स्थानीय परिस्थितियों के आधार पर लगातार निगरानी रखने के निर्देश दिए गए हैं।

    सरकार का कहना है कि फिलहाल स्थिति नियंत्रण में है, लेकिन बारिश के दौरान उत्पन्न होने वाली आकस्मिक परिस्थितियों को देखते हुए राहत दलों को सक्रिय रखा गया है। मुख्यमंत्री की समीक्षा के बाद प्रशासनिक मशीनरी को मौसम से जुड़े बदलावों पर नजर रखने और जरूरत पड़ने पर तेजी से कार्रवाई करने के लिए तैयार रहने को कहा गया है।

    राज्य में मानसून के दौरान हर वर्ष अलग-अलग क्षेत्रों में अतिवृष्टि, जलभराव और अचानक बाढ़ जैसी परिस्थितियां सामने आती हैं। ऐसे में पहले से की गई तैयारी नुकसान को कम करने में अहम भूमिका निभाती है। इसी उद्देश्य से सरकार ने राहत एवं बचाव दलों की तैनाती, अधिकारियों के समन्वय और स्थानीय स्तर पर संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित करने पर जोर दिया है। फिलहाल प्रशासन की प्राथमिकता बारिश के दौरान लोगों की सुरक्षा बनाए रखना और किसी भी आपात स्थिति में तत्काल राहत पहुंचाना है।

  • नेपाल में फिर बाढ़ का खतरा बढ़ा, त्रिशूली परियोजना के लापता कर्मियों की तलाश में भारतीय और नेपाली दल जुटे

    नेपाल में फिर बाढ़ का खतरा बढ़ा, त्रिशूली परियोजना के लापता कर्मियों की तलाश में भारतीय और नेपाली दल जुटे

    नई दिल्ली ।नेपाल में आई भीषण बाढ़ और अचानक आई जल आपदा के बाद हालात अब भी बेहद चुनौतीपूर्ण बने हुए हैं। बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में राहत और बचाव अभियान जारी है, जबकि बड़ी संख्या में लोग अब भी लापता हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार गुरुवार तक मृतकों की संख्या बढ़कर 1252 हो गई और करीब 5083 लोगों के लापता होने का अनुमान है। शव नहीं मिलने या पहचान नहीं होने के कारण कई परिवार प्रतीकात्मक अंतिम संस्कार भी कर रहे हैं।

    त्रिशूली पावर प्रोजेक्ट में काम करने वाले कई कर्मचारी भी बाढ़ के बाद से लापता बताए जा रहे हैं। इसी बीच परियोजना में काम करने वाले एक कर्मचारी ने आरोप लगाया कि बाढ़ आने से पहले चीन की कंपनी के एक सुपरवाइजर ने 265 कर्मचारियों को सुरंग के भीतर छोड़ दिया और खुद बाहर निकल गया।

    कर्मी के अनुसार सुरंग के अंदर मौजूद मजदूरों ने एक तेज आवाज सुनी थी। इसके बाद उन्होंने अपने सुपरवाइजर से सुरंग से बाहर निकलने की अनुमति मांगी थी। इस घटना से परियोजना में काम कर रहे लोगों की सुरक्षा और आपदा के समय प्रबंधन की तैयारियों को लेकर सवाल उठे हैं।

    लापता लोगों की तलाश में भारत भी नेपाल की मदद कर रहा है। भारतीय सुरंग बचाव दल नेपाली सेना के साथ मिलकर चिलिमे पावर हाउस में बचाव अभियान चला रहा है। भारतीय दूत ने स्याब्रूबेसी स्थित भारतीय टनल बचाव दल के आधार शिविर का दौरा किया और अभियान की प्रगति की जानकारी ली।

    बचाव दलों ने विशेष उपकरणों की मदद से सुरंग के भीतर करीब 100 मीटर तक का निरीक्षण किया है। अब सुरंग के और अंदर जाने के लिए भारी उपकरण लाने की तैयारी की जा रही है। कठिन परिस्थितियों के बावजूद भारतीय और नेपाली दल बचाव कार्य जारी रखे हुए हैं।

    इस बीच नेपाल के उत्तरी हिस्सों में एक बार फिर बाढ़ का खतरा बढ़ गया है। भोटेकोशी नदी के ऊपरी इलाकों में लगातार बारिश होने के कारण जलस्तर बढ़ने की आशंका जताई गई है। इसका असर भोटेकोशी और त्रिशूली नदियों के अलावा रसुवा और नुवाकोट जिलों से होकर बहने वाली छोटी नदियों और जलधाराओं पर भी पड़ सकता है।

    नेपाल में हालिया तबाही के बाद हिमनदों की स्थिति को लेकर भी चिंता बढ़ी है। तिब्बती पठार के ग्लेशियरों में बदलाव और उनके अस्थिर होने की आशंका को भविष्य में अचानक बाढ़ के संभावित कारणों से जोड़ा जा रहा है। पिछले कुछ दशकों में इस क्षेत्र के ग्लेशियरों में उल्लेखनीय कमी आने की बात भी सामने आई है।

    26 अगस्त को नेपाल-तिब्बत सीमा के आसपास चट्टानों के खिसकने या हिमस्खलन के कारण अचानक बाढ़ आई थी। इससे उत्तरी और मध्य नेपाल के कई कस्बों और गांवों में भारी नुकसान हुआ। मौजूदा परिस्थितियों में लगातार बारिश और बढ़ते जलस्तर ने प्रशासन की चिंता फिर बढ़ा दी है।

    राहत सामग्री के वितरण को व्यवस्थित करने के लिए नेपाल सरकार ने सिंगल विंडो व्यवस्था लागू की है। इसके तहत निजी संस्थाओं और सामाजिक संगठनों को नेपाल में राहत सामग्री सीधे भेजने या ले जाने से पहले अनुमति लेना जरूरी होगा। सीमा पर राहत सामग्री के लिए निर्धारित कस्टम प्रक्रिया पूरी करने के बाद ही उसे आगे ले जाने की अनुमति दी जाएगी।

    बाढ़ के बाद जारी बचाव अभियान में भारत की सहायता से सुरंगों में फंसे लोगों तक पहुंचने की कोशिश की जा रही है। वहीं नेपाल में दोबारा बढ़ते जलस्तर और संभावित आपदा को देखते हुए स्थानीय प्रशासन तथा बचाव एजेंसियां सतर्क हैं। लगातार निगरानी, समय पर चेतावनी और प्रभावित क्षेत्रों तक राहत पहुंचाना फिलहाल सबसे बड़ी प्राथमिकता बनी हुई है।

  • गेटवे ऑफ इंडिया के पास समंदर में फेरी का इंजन हुआ खराब, दूसरी नाव से किया सभी यात्रियों का सुरक्षित रेस्क्यू

    गेटवे ऑफ इंडिया के पास समंदर में फेरी का इंजन हुआ खराब, दूसरी नाव से किया सभी यात्रियों का सुरक्षित रेस्क्यू


    मुंबई। महाराष्ट्र की राजधानी मुंबई में गुरुवार रात गेटवे ऑफ इंडिया के पास समुद्र में एक फेरी का इंजन अचानक खराब हो गया। बीच समुद्र में फेरी के रुकने से उसमें सवार यात्रियों में अफरातफरी मच गई। पुलिस और स्थानीय नाव संचालक की मदद पहुंचने तक यात्रियों की सांसें अटकी रहीं।

    हालांकि, राहत की बात रही कि स्थानीय पुलिस और एक अन्य लोकल बोट ऑपरेटर ने फेरी में सवार 34 यात्रियों और चार चालक दल के सदस्यों समेत सभी 38 लोगों को सुरक्षित बचा लिया। पुलिस अधिकारी के मुताबिक, घटना गुरुवार रात करीब 8:30 बजे की है।

    लौटते वक्त बीच समुद्र में बंद हुआ इंजन
    ‘अनवारी’ नाम की यह फेरी यात्रियों को करीब आधे घंटे की समुद्री सैर कराती है। गेटवे ऑफ इंडिया लौटते समय समुद्र तट से करीब 1.5 नॉटिकल मील दूर अचानक उसका इंजन खराब हो गया। उस समय फेरी पर 34 यात्री और चालक दल के चार सदस्य मौजूद थे।

    फेरी के खराब होने की सूचना पुलिस कंट्रोल रूम को मिली। इसके बाद कांस्टेबल अभिजीत शिंदे और अन्य पुलिसकर्मियों ने आसपास मौजूद नावों की जानकारी जुटानी शुरू की।

    पास में मौजूद थी दूसरी नाव
    पुलिस को पता चला कि समुद्री सैर कराने वाली एक अन्य नाव ‘आजाद हिंद’ खराब फेरी के पास ही मौजूद है। पुलिस अधिकारियों ने नाव के मालिक जुनैद मुल्ला से संपर्क कर तत्काल मदद मांगी।

    इसके बाद ‘आजाद हिंद’ मौके पर पहुंची और खराब पड़ी ‘अनवारी’ को खींचकर सुरक्षित गेटवे ऑफ इंडिया की जेट्टी नंबर 2 तक ले आई। करीब रात 9:30 बजे फेरी को जेट्टी तक पहुंचाया गया। सभी 34 यात्रियों और चालक दल के चारों सदस्यों को बिना किसी चोट के सुरक्षित तट पर उतार लिया गया। इसके बाद यात्रियों ने राहत की सांस ली।

  • नेपाल में बाढ़ से 105 भारतीय समेत 300 विदेशी पर्यटक लापता, बिहार के आठ जिलों में गंडक को लेकर हाई अलर्ट जारी

    नेपाल में बाढ़ से 105 भारतीय समेत 300 विदेशी पर्यटक लापता, बिहार के आठ जिलों में गंडक को लेकर हाई अलर्ट जारी

    नई दिल्ली ।नेपाल के रसुवा जिले में अचानक आई बाढ़ ने बड़े पैमाने पर तबाही मचा दी है। भोटेकोशी नदी के तेज बहाव से घरों, पुलों, वाहनों और अन्य संरचनाओं को भारी नुकसान पहुंचा है। हादसे में अब तक 16 लोगों की मौत की पुष्टि की गई है, जबकि बड़ी संख्या में लोगों के लापता होने की सूचना सामने आई है।

    नेपाल पर्यटन बोर्ड से मिली जानकारी के अनुसार, 105 भारतीय पर्यटकों समेत 300 से अधिक विदेशी नागरिकों के लापता होने की सूचना है। प्रभावित क्षेत्र में विदेशी पर्यटकों के अलावा नेपाली नागरिक भी लापता बताए जा रहे हैं। अलग-अलग रिकॉर्ड की जांच के चलते लापता लोगों की संख्या में बदलाव संभव है।

    पर्यटन और यात्रा क्षेत्र से मिले शुरुआती आंकड़ों में प्रभावित इलाकों से कुल 384 यात्रियों के लापता होने की जानकारी सामने आई है। इनमें 291 विदेशी नागरिक और 93 नेपाली नागरिक बताए गए हैं। प्रशासन, सुरक्षा एजेंसियों, स्थानीय गाइड और यात्रा कंपनियों के रिकॉर्ड का मिलान कर वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने का प्रयास किया जा रहा है।

    लापता विदेशी नागरिकों में भारतीयों के अलावा ऑस्ट्रेलिया, नीदरलैंड्स, अमेरिका, मलेशिया, ब्रिटेन और दक्षिण अफ्रीका के नागरिक भी शामिल बताए गए हैं। राहत और तलाश अभियान को तेज करने के लिए 15 हेलीकॉप्टर लगाए गए हैं। दुर्गम और प्रभावित इलाकों तक पहुंच बनाने के लिए बचाव दल लगातार काम कर रहे हैं।

    बाढ़ के कारण नेपाल में बुनियादी ढांचे को भी बड़ा नुकसान पहुंचा है। तेज बहाव की चपेट में आने से 13 जलविद्युत परियोजनाएं प्रभावित हुई हैं। कई परियोजनाओं के बांध, विद्युतगृह और वहां तक पहुंचने वाले मार्गों को नुकसान पहुंचने की जानकारी है। बाजारों और सीमा क्षेत्र में खड़े कई वाहन भी पानी के बहाव में बह गए।

    स्थिति की गंभीरता को देखते हुए प्रभावित इलाकों में आवाजाही पर भी प्रतिबंध लगाया गया है। रसुवा, नुवाकोट, चितवन और धादिंग की ओर जाने वाले वाहनों की आवाजाही रोकी गई है। नदी के निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को सतर्क रहने और संभावित बाढ़ के खतरे को देखते हुए आवश्यक सावधानी बरतने को कहा गया है।

    नेपाल में बाढ़ की स्थिति का असर बिहार पर भी पड़ने की आशंका के चलते राज्य में सतर्कता बढ़ा दी गई है। नेपाल सीमा से जुड़े पश्चिमी चंपारण, पूर्वी चंपारण, गोपालगंज, सारण, मुजफ्फरपुर, वैशाली, सीतामढ़ी और शिवहर जिलों को हाई अलर्ट पर रखा गया है।

    बिहार आपदा प्रबंधन विभाग ने गंडक नदी में करीब तीन मीटर ऊंची फ्लैश फ्लड वेव आने की आशंका जताई है। इसके मद्देनजर गंडक और अन्य प्रमुख नदियों के आसपास के इलाकों में निगरानी बढ़ाई गई है। संवेदनशील क्षेत्रों में राहत और बचाव व्यवस्था को तैयार रखने के निर्देश दिए गए हैं।

    मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत की अध्यक्षता में उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक कर संभावित बाढ़ की स्थिति और तैयारियों का जायजा लिया गया। बेतिया, मोतिहारी, गोपालगंज, सारण, मुजफ्फरपुर और वैशाली समेत संवेदनशील क्षेत्रों में विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए गए हैं। सीतामढ़ी और शिवहर में भी हालात पर लगातार नजर रखने को कहा गया है।

    गृह मंत्री अमित शाह ने बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से फोन पर बातचीत कर नेपाल में आई बाढ़ और बिहार में संभावित प्रभाव को लेकर तैयारियों की जानकारी ली। एनडीआरएफ की कई टीमों को छह जिलों में तैनात किया गया है। कोसी, गंडक और गंगा के आसपास के इलाकों में भी निगरानी बढ़ाई गई है। फिलहाल प्रशासन का जोर संभावित बाढ़ के प्रभाव को कम करने और जरूरत पड़ने पर तत्काल राहत पहुंचाने पर है।

  • चमोली टनल हादसा: पानी और मलबा गले तक भरा…., नीले ड्रमों के सहारे रेस्क्यू में जुटे जवान

    चमोली टनल हादसा: पानी और मलबा गले तक भरा…., नीले ड्रमों के सहारे रेस्क्यू में जुटे जवान


    चमोली।
    अलकनंदा नदी (Alaknanda River) पर निर्माणाधीन विष्णुगाड-पीपलकोटी जल विद्युत परियोजना (Vishnugad-Pipalkoti Hydroelectric Project) की टीआरटी (टेल रेस टनल) में जिस स्थान पर मजदूर काम कर रहे थे, वहां से करीब 150 मीटर दूर हुए भूस्खलन (Landslide) के बाद पानी के साथ पत्थर और मलबा टनल के अंदर घुस गया, जिसकी चपेट में कई मजदूर आ गए।

    बताया जा रहा है कि टनल में गले तक पानी और मलबा भर गया है। रात करीब दस बजे एनडीआरएफ की टीमें तीन वाहनों से टनल में घुसी। नीले रंग के ड्रम भी टनल में ले जाए गए हैं। पानी में इन ड्रमों के सहारे आगे बढ़कर जवान रेस्क्यू अभियान में जुटे हैं। देर रात तक घायलों का रेस्क्यू अभियान जारी था।

    वहीं, टनल में अधिक पानी भरने के कारण रेस्क्यू में दिक्कतें आ रही हैं। एसपी चमोली सुरजीत सिंह पंवार ने बताया कि श्रीनगर गढ़वाल से राफ्ट मंगाई गई है, उससे लापता छह लोगों का रेस्क्यू किया जाएगा।

    उधर, प्रोजेक्ट निदेशक शरद कुमार ने घटना पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए कहा कि यह एक अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण हादसा है। उन्होंने बताया कि हमारी पहली प्राथमिकता सभी फंसे हुए लोगों को सुरक्षित बाहर निकालना है। इसके लिए सभी संसाधनों को पूरी तरह से लगाया गया है। उन्होंने कहा कि प्रभावित परिवारों को हर संभव सहायता प्रदान की जाएगी और घटना की विस्तृत जांच कराई जाएगी।

    बताया कि प्रोजेक्ट की मैनेजमेंट टीम भी राहत एवं बचाव कार्य में पूरी तरह जुटी हुई है। प्रशासन के साथ मिलकर स्थिति को नियंत्रित करने के प्रयास किए जा रहे हैं। राहत कार्य तब तक जारी रहेगा, जब तक सभी लोगों को सुरक्षित बाहर नहीं निकाल लिया जाता।

    बताया कि घटना की जानकारी मिलते ही तुरंत राहत एवं बचाव कार्य शुरू कर दिया गया था। मौके पर रेस्क्यू ऑपरेशन लगातार जारी है और अन्य फंसे हुए लोगों को निकालने के प्रयास तेज कर दिए गए हैं।

  • भारतीय कार्गो शिप पर समुद्र में बड़ा हमला, रेस्क्यू ऑपरेशन से बचाए गए सभी नाविक, भारत ने जताई कड़ी आपत्ति

    भारतीय कार्गो शिप पर समुद्र में बड़ा हमला, रेस्क्यू ऑपरेशन से बचाए गए सभी नाविक, भारत ने जताई कड़ी आपत्ति

    नई दिल्ली । यमन के तटीय क्षेत्र के पास भारतीय मालवाहक जहाज पर हुए हमले ने अंतरराष्ट्रीय समुद्री सुरक्षा को लेकर नई चिंताएं खड़ी कर दी हैं। भारतीय मालवाहक पोत ‘फैज नूरे औलिया’ अज्ञात दिशा से आए एक प्रोजेक्टाइल की चपेट में आने के बाद गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त हो गया। टक्कर के प्रभाव से जहाज का संतुलन बिगड़ गया और उसमें तेजी से पानी भरने लगा। कुछ ही समय बाद जहाज समुद्र में पलटकर डूब गया। राहत की बात यह रही कि जहाज पर सवार सभी 14 चालक दल के सदस्यों को समय रहते सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया और किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है।

    घटना के तुरंत बाद यमन के तटरक्षक बलों ने बड़े स्तर पर बचाव अभियान शुरू किया। समुद्र में फंसे चालक दल के सदस्यों को सुरक्षित निकालने के लिए कई बचाव इकाइयों को तैनात किया गया। अभियान के दौरान 13 भारतीय नागरिकों सहित सभी 14 नाविकों को सुरक्षित रेस्क्यू कर लिया गया। इसके बाद उन्हें मोखा बंदरगाह पहुंचाया गया, जहां उनकी आवश्यक चिकित्सा जांच और अन्य जरूरी व्यवस्थाएं की गईं। अधिकारियों ने बताया कि सभी नाविक सुरक्षित हैं और उनकी स्थिति सामान्य बनी हुई है।

    घटना की जानकारी मिलते ही भारत सरकार ने इस हमले पर कड़ी आपत्ति दर्ज कराई। जहाजरानी और जलमार्ग मंत्रालय ने इसे बिना किसी उकसावे के किया गया हमला बताया और समुद्री व्यापारिक जहाजों की सुरक्षा पर गंभीर चिंता व्यक्त की। सरकार का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों पर इस प्रकार की घटनाएं वैश्विक व्यापार और नौवहन व्यवस्था के लिए गंभीर चुनौती बन सकती हैं। भारत ने स्पष्ट किया कि ऐसे हमलों को किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जा सकता।

    सरकार की ओर से महानिदेशक समुद्री प्रशासन को तत्काल आवश्यक कदम उठाने के निर्देश दिए गए हैं। संबंधित एजेंसियों के साथ समन्वय स्थापित कर पूरे मामले की निगरानी करने, प्रभावित चालक दल को हरसंभव सहायता उपलब्ध कराने तथा क्षेत्र में मौजूद अन्य भारतीय जहाजों और नाविकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने को प्राथमिकता दी गई है। साथ ही स्थिति पर लगातार नजर रखने और भविष्य में ऐसी घटनाओं की रोकथाम के लिए आवश्यक उपायों पर भी जोर दिया गया है।

    भारत ने इस कठिन परिस्थिति में त्वरित बचाव अभियान चलाने वाले यमन के अधिकारियों और तटरक्षक बलों के प्रति आभार भी व्यक्त किया है। सरकार का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय सहयोग के कारण ही सभी नाविकों की जान बचाई जा सकी। इस बीच समुद्री मार्गों पर व्यापारिक जहाजों की सुरक्षा को लेकर वैश्विक स्तर पर चिंता बढ़ गई है। भारत ने सुरक्षित समुद्री आवाजाही, अंतरराष्ट्रीय व्यापार और जहाजों की निर्बाध आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए सभी संबंधित पक्षों से प्रभावी कदम उठाने की आवश्यकता पर बल दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की घटनाएं वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला और समुद्री व्यापार पर भी व्यापक प्रभाव डाल सकती हैं, इसलिए संवेदनशील समुद्री क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करना समय की आवश्यकता बन गई है।

  • मदुरा द्वीप के पास यात्री फेरी में भीषण आग, पांच लोगों की मौत और 41 यात्रियों की तलाश जारी

    मदुरा द्वीप के पास यात्री फेरी में भीषण आग, पांच लोगों की मौत और 41 यात्रियों की तलाश जारी

    नई दिल्ली । इंडोनेशिया के मदुरा द्वीप के निकट समुद्र में रविवार को एक बड़ा समुद्री हादसा सामने आया, जब यात्रियों से भरी एक फेरी में अचानक भीषण आग लग गई। इस दुर्घटना में कम से कम पांच लोगों की मौत हो गई, जबकि 41 लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं। हादसे के बाद समुद्री क्षेत्र में व्यापक स्तर पर राहत और बचाव अभियान शुरू किया गया है। कई बचाव जहाजों और राहत दलों को मौके पर भेजा गया है, जो लापता लोगों की तलाश में लगातार जुटे हुए हैं। अधिकारियों के अनुसार आग लगने के कारणों का अभी तक पता नहीं चल पाया है और इसकी विस्तृत जांच की जा रही है।

    प्रारंभिक जानकारी के अनुसार दुर्घटनाग्रस्त फेरी पूर्वी जावा प्रांत के सुराबाया शहर से दक्षिण सुलावेसी के मकासर के लिए रवाना हुई थी। यात्रा के दौरान जावा के उत्तर-पूर्वी तट पर स्थित मदुरा द्वीप के पास अचानक जहाज में आग भड़क उठी। आग तेजी से फैलने के कारण जहाज पर सवार यात्रियों और चालक दल के बीच अफरा-तफरी मच गई। घटना की सूचना मिलते ही समुद्री बचाव एजेंसियों को सक्रिय किया गया और आसपास मौजूद जहाजों को भी राहत कार्य में शामिल किया गया।

    अधिकारियों ने बताया कि फेरी में यात्रियों और चालक दल सहित कुल 271 लोग सवार थे। अब तक 225 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया है। बचाए गए यात्रियों को प्राथमिक उपचार और आवश्यक सहायता उपलब्ध कराई जा रही है। वहीं लापता 41 लोगों की तलाश के लिए समुद्र के विस्तृत क्षेत्र में खोज अभियान चलाया जा रहा है। राहत दल समुद्री परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए लगातार तलाशी अभियान संचालित कर रहे हैं ताकि अधिक से अधिक लोगों को सुरक्षित खोजा जा सके।

    घटना के बाद संबंधित एजेंसियों ने आसपास के समुद्री मार्गों पर निगरानी बढ़ा दी है। बचाव कार्य में कई जहाजों के अलावा अन्य समुद्री संसाधनों का भी उपयोग किया जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि फेरी में आग कैसे लगी, इसका पता लगाने के लिए तकनीकी जांच शुरू कर दी गई है। जब तक जांच पूरी नहीं हो जाती, तब तक आग लगने के कारणों को लेकर कोई आधिकारिक निष्कर्ष नहीं निकाला जाएगा।

    इंडोनेशिया दुनिया के सबसे बड़े द्वीपीय देशों में शामिल है, जहां हजारों द्वीपों के बीच आवागमन के लिए फेरी सेवाएं प्रमुख परिवहन माध्यम हैं। बड़ी संख्या में लोग प्रतिदिन समुद्री मार्गों का उपयोग करते हैं। ऐसे में किसी भी समुद्री दुर्घटना का प्रभाव व्यापक स्तर पर पड़ता है और राहत एजेंसियों के सामने चुनौतीपूर्ण परिस्थितियां उत्पन्न हो जाती हैं।

    देश में इससे पहले भी कई समुद्री दुर्घटनाएं सामने आ चुकी हैं। जुलाई 2025 में उत्तरी सुलावेसी प्रांत के पास एक यात्री जहाज में आग लगने से तीन लोगों की मौत हुई थी, जबकि बड़ी संख्या में यात्रियों को सुरक्षित बचा लिया गया था। इससे पहले वर्ष 2021 में मोलुक्का सागर में एक अन्य फेरी में आग लगने के बाद सभी यात्रियों और चालक दल के सदस्यों को सफलतापूर्वक बचा लिया गया था। इन घटनाओं के बाद समुद्री सुरक्षा मानकों को और सुदृढ़ करने की आवश्यकता पर लगातार जोर दिया जाता रहा है।

    मौजूदा हादसे के बाद प्रशासन ने मृतकों के परिजनों के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए कहा है कि लापता लोगों की तलाश सर्वोच्च प्राथमिकता है। राहत अभियान लगातार जारी है और जांच पूरी होने के बाद हादसे के वास्तविक कारणों तथा भविष्य में ऐसी घटनाओं की रोकथाम के लिए आवश्यक कदमों की जानकारी सार्वजनिक की जाएगी।

  • यूट्यूब व्लॉग के जरिए अभिनेत्री और उनके पति ने साझा की आपबीती, पूरी रात पुलिस स्टेशन में बिताकर कराई एफआईआर।

    यूट्यूब व्लॉग के जरिए अभिनेत्री और उनके पति ने साझा की आपबीती, पूरी रात पुलिस स्टेशन में बिताकर कराई एफआईआर।

    नई दिल्ली। मनोरंजन जगत की चर्चित अभिनेत्री संभावना सेठ और उनके पति अविनाश द्विवेदी एक गंभीर घटनाक्रम के कारण सुर्खियों में आ गए हैं। इस दंपति ने अपनी इंसानियत और सतर्कता का परिचय देते हुए एक युवती को बंधक बनाए जाने और प्रताड़ित किए जाने के मामले में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। अपनी घरेलू सहायिका की बहन की जान बचाने के लिए इस दंपति को पूरी रात मुंबई के पुलिस स्टेशन में बितानी पड़ी, जिसके बाद पुलिस प्रशासन हरकत में आया और पीड़िता को न्याय दिलाने की दिशा में ठोस कदम उठाए गए।

    पूरे मामले का खुलासा तब हुआ जब अभिनेत्री की घरेलू सहायिका ने रोते हुए अपनी बहन के साथ हो रहे अत्याचार की जानकारी दी। उसने बताया कि उसकी बहन को मुंबई के खारघर इलाके में स्थित एक मकान में एक एजेंसी के जरिए काम पर रखा गया था। वहां उसे दर्जनों पालतू जानवरों की देखभाल के लिए रखा गया था, लेकिन धीरे-धीरे उस पर काम का अत्यधिक बोझ डाल दिया गया। जब युवती ने काम करने में असमर्थता जताई, तो आरोपी दंपत्ति ने उसे घर में ही बंधक बना लिया। आरोप है कि युवती को खाना देना बंद कर दिया गया, उसके पहचान पत्र और कपड़े छीन लिए गए और लगातार जान से मारने की धमकियां दी जाने लगीं।

    स्थिति की गंभीरता को देखते हुए अभिनेत्री और उनके पति तुरंत हरकत में आए। उन्होंने पहले फोन के माध्यम से संबंधित पक्षों से संपर्क कर युवती को छुड़ाने का प्रयास किया, लेकिन सफलता नहीं मिली। इसके बाद एक गैर-सरकारी संगठन की मदद से बेहद मशक्कत के बाद पीड़िता को उस घर से सुरक्षित बाहर निकाला गया। जब पीड़िता को सुरक्षित स्थान पर लाया गया, तो उसकी मानसिक स्थिति काफी दयनीय थी और वह अत्यधिक डरी-सहमी हुई थी।

    मामले में नया मोड़ तब आया जब आरोपी पक्ष ने खुद को बचाने और पुलिस कार्रवाई से बचने के लिए पीड़िता पर ही झूठे आरोप लगाने की कोशिश की। इसके बाद अभिनेत्री और उनके पति स्वयं आधी रात को मुंबई के बांगुर नगर पुलिस स्टेशन पहुंचे। दोनों ने पूरी रात पुलिस स्टेशन में रुककर अधिकारियों को पूरे घटनाक्रम की जानकारी दी। काफी मशक्कत और सबूत पेश किए जाने के बाद सुबह पुलिस ने मामले की गंभीरता को समझते हुए आरोपियों के खिलाफ औपचारिक प्राथमिकी दर्ज की।

    इस पूरी घटना का विवरण दंपति ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर साझा किया है, जिसकी हर तरफ सराहना हो रही है। घरेलू सहायिका और उसके परिवार ने अभिनेत्री और उनके पति का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यदि वे समय पर ढाल बनकर नहीं खड़े होते, तो बड़ी अनहोनी हो सकती थी। फिलहाल पुलिस ने मामला दर्ज कर आगे की कानूनी जांच शुरू कर दी है और पीड़िता को आवश्यक सहायता प्रदान की जा रही है।

  • पांढुर्णा में तीन दिन तक 350 फीट ऊंचे मोबाइल टावर पर बैठा रहा युवक, SDRF और पुलिस ने सुरक्षित उतारा

    पांढुर्णा में तीन दिन तक 350 फीट ऊंचे मोबाइल टावर पर बैठा रहा युवक, SDRF और पुलिस ने सुरक्षित उतारा


    पांढुर्णा। मध्य प्रदेश के पांढुर्णा जिले में पिछले तीन दिनों से चल रहा हाई-वोल्टेज रेस्क्यू ऑपरेशन बुधवार शाम सफलतापूर्वक समाप्त हो गया। करीब 350 फीट ऊंचे मोबाइल टावर पर चढ़े एक युवक को पुलिस और SDRF की टीम ने लगभग 51 घंटे की मशक्कत के बाद सुरक्षित नीचे उतार लिया। इस दौरान प्रशासन, पुलिस और बचाव दल लगातार मौके पर तैनात रहे।

    जानकारी के अनुसार, सोमवार शाम एक युवक हाथ में शराब की बोतल लेकर अचानक मोबाइल टावर पर चढ़ने लगा। स्थानीय लोगों ने उसे रोकने और नीचे आने के लिए आवाज लगाई, लेकिन उसने किसी की बात नहीं सुनी और टावर के सबसे ऊपरी व संकरे हिस्से पर जाकर बैठ गया। घटना की सूचना मिलते ही पांढुर्णा थाना पुलिस मौके पर पहुंच गई।

    थाना प्रभारी अमित दाणी ने बताया कि युवक अत्यधिक शराब के नशे में था। पुलिस ने लाउडस्पीकर के माध्यम से कई बार उसे नीचे उतरने की अपील की, लेकिन उसने किसी भी प्रयास का जवाब नहीं दिया।

    सुरक्षा के लिए किए गए विशेष इंतजाम
    संभावित हादसे को देखते हुए प्रशासन ने टावर के चारों ओर सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए। यदि युवक नीचे गिर जाए तो उसकी जान बचाई जा सके, इसके लिए टावर के नीचे गद्दे बिछाए गए और सुरक्षा जाल (नेट) लगाया गया। स्थानीय स्तर पर प्रयास सफल नहीं होने पर तत्काल SDRF की टीम को बुलाया गया।

    चुनौतीपूर्ण रहा रेस्क्यू ऑपरेशन
    टावर की ऊंचाई और युवक की अस्थिर स्थिति के कारण बचाव अभियान बेहद चुनौतीपूर्ण रहा। रात के समय अंधेरा और तेज ऊंचाई के बीच युवक लगातार खतरनाक हरकतें करता रहा, जिससे उसके गिरने का खतरा बना हुआ था। पुलिस और SDRF की टीम ने लगातार धैर्य के साथ बातचीत कर उसे शांत रखने की कोशिश की और पूरी रणनीति के साथ रेस्क्यू ऑपरेशन जारी रखा।

    बुधवार शाम सुरक्षित उतारा गया युवक
    करीब 51 घंटे तक चले अभियान के बाद बुधवार शाम लगभग 7 बजे SDRF और पुलिस की टीम ने तकनीकी कौशल और सतर्कता के साथ युवक को सुरक्षित अपने कब्जे में लिया और नीचे उतार लिया। उसके सुरक्षित जमीन पर पहुंचते ही मौके पर मौजूद प्रशासनिक अधिकारियों, पुलिसकर्मियों और बड़ी संख्या में एकत्र लोगों ने राहत की सांस ली।

    फिलहाल युवक की चिकित्सकीय जांच कराई जा रही है। पुलिस उसके पूरी तरह होश में आने का इंतजार कर रही है, ताकि उसकी पहचान और मोबाइल टावर पर चढ़ने के पीछे की वजह का पता लगाया जा सके।