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  • रीवा में आधी रात जल सत्याग्रह पर प्रशासन की कार्रवाई, तालाब से बाहर निकाले गए प्रदर्शनकारी, न्यूक्लियर प्लांट के विरोध में आंदोलन जारी

    रीवा में आधी रात जल सत्याग्रह पर प्रशासन की कार्रवाई, तालाब से बाहर निकाले गए प्रदर्शनकारी, न्यूक्लियर प्लांट के विरोध में आंदोलन जारी


    रीवा । मध्य प्रदेश के रीवा जिले के रोझौही में प्रस्तावित टाटा न्यूक्लियर पावर प्लांट को लेकर विरोध लगातार तेज होता जा रहा है। परियोजना के खिलाफ जल सत्याग्रह कर रहे आप नेता प्रमोद शर्मा और आदिवासी प्रदर्शनकारियों को मंगलवार रात करीब एक बजे प्रशासनिक टीम ने तालाब से बाहर निकलवाया। इस दौरान मौके पर लालगांव पुलिस भी मौजूद रही। लगातार आंदोलन और अनशन के कारण कुछ प्रदर्शनकारियों की तबीयत बिगड़ने के बाद प्रमोद शर्मा समेत चार लोगों को एंबुलेंस से संजय गांधी अस्पताल भेजा गया। हालांकि प्रदर्शनकारियों को तालाब से बाहर निकालने के बावजूद आंदोलन खत्म होने के संकेत नहीं मिले हैं। ग्रामीण अब भी परियोजना को रद्द करने की मांग पर अड़े हुए हैं।

    प्रशासन की ओर से प्रदर्शनकारियों को मौखिक आश्वासन दिया गया है कि अगले 10 दिनों तक रोझौही में प्रस्तावित परियोजना से जुड़ी कोई गतिविधि नहीं होगी। हालांकि इस आश्वासन के संबंध में लिखित आदेश जारी नहीं किया गया है। इसी बात को लेकर ग्रामीणों की चिंता बनी हुई है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि केवल मौखिक भरोसे से उनकी समस्याओं का समाधान नहीं होगा। जब तक परियोजना को लेकर ठोस निर्णय नहीं लिया जाता और उनकी मांगों पर स्पष्ट जवाब नहीं मिलता तब तक आंदोलन जारी रहेगा।

    जल सत्याग्रह में शामिल आप नेता प्रमोद शर्मा के साथ संदीप कोल रावेन्द्र कोल और बबली कोल की तबीयत बिगड़ने पर उन्हें अस्पताल पहुंचाया गया। इससे पहले मदरी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के सीएचओ रविकांत साकेत ने प्रमोद शर्मा की स्वास्थ्य जांच की थी। जांच के दौरान उनका ब्लड प्रेशर और शुगर बढ़ा हुआ पाया गया। लगातार अनशन और पानी में बैठकर विरोध करने के कारण उनकी सेहत को लेकर चिंता जताई गई थी। इसके बाद उन्हें इलाज के लिए अस्पताल भेजने का निर्णय लिया गया।

    इस पूरे मामले में आदिवासी महिला विमला कोल की मौत के बाद ग्रामीणों का आक्रोश और बढ़ गया है। बताया गया है कि परियोजना के विरोध में जल सत्याग्रह कर रही विमला कोल की तबीयत बिगड़ गई थी और इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। इस घटना के बाद ग्रामीणों ने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। प्रदर्शनकारियों ने मामले की निष्पक्ष जांच कराने और उनकी मांगों को गंभीरता से सुनने की अपील की है। ग्रामीणों का आरोप है कि उनकी चिंताओं का समय रहते समाधान नहीं किया गया।

    मध्य प्रदेश विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार भी इस आंदोलन के बीच रोझौही पहुंचे थे। उन्होंने आंदोलनकारी आदिवासियों और विमला कोल के परिजनों से मुलाकात की तथा परिवार को एक लाख रुपये की आर्थिक सहायता दी। सिंघार ने प्रस्तावित परियोजना को लेकर ग्रामसभा की सहमति और अनापत्ति प्रमाणपत्र की प्रक्रिया पर सवाल उठाए। उन्होंने विमला कोल की मौत की जांच की मांग भी की और प्रभावित ग्रामीणों की चिंताओं पर गंभीरता से विचार करने की जरूरत बताई।

    ग्रामीणों को आशंका है कि प्रस्तावित न्यूक्लियर पावर प्लांट से खेती की जमीन जलस्रोत जंगल और पर्यावरण प्रभावित हो सकते हैं। उनका कहना है कि परियोजना के संभावित असर और भविष्य में स्वास्थ्य संबंधी जोखिमों को लेकर स्पष्ट जानकारी दी जानी चाहिए। इससे पहले बोरिंग मशीन पहुंचने पर भी ग्रामीणों ने विरोध जताया था। रोझौही के अलावा सरई कला महुआ टोला मदरी और आसपास के गांवों के लोग भी परियोजना के खिलाफ आवाज उठा चुके हैं। फिलहाल प्रशासन के 10 दिन के मौखिक आश्वासन के बावजूद स्थिति पूरी तरह शांत नहीं हुई है। अब सबकी नजर इस बात पर है कि प्रशासन ग्रामीणों की मांगों पर क्या कदम उठाता है और परियोजना को लेकर आगे क्या निर्णय लिया जाता है।

  • नशे के नेटवर्क पर सख्ती की तैयारी, रीवा संभाग में करोड़ों की ड्रग्स और 312 वाहन जब्त, युवाओं को बचाने पर फोकस

    नशे के नेटवर्क पर सख्ती की तैयारी, रीवा संभाग में करोड़ों की ड्रग्स और 312 वाहन जब्त, युवाओं को बचाने पर फोकस


    रीवा । मध्य प्रदेश के रीवा संभाग में नशे के अवैध कारोबार पर लगाम लगाने के लिए पुलिस और प्रशासन ने कार्रवाई तेज कर दी है। पिछले 18 महीनों के दौरान नशे के कारोबार में शामिल 1615 आरोपियों को जेल भेजा गया है। इस अवधि में गांजा और कोरेक्स से लेकर हेरोइन स्मैक ब्राउन शुगर और एमडी ड्रग्स जैसे नशीले पदार्थ जब्त किए गए हैं। इनकी कुल कीमत 13 करोड़ 17 लाख 39 हजार 600 रुपये बताई गई है। वहीं नशे के अवैध कारोबार में इस्तेमाल होने वाले दोपहिया और चारपहिया वाहनों को भी जब्त किया गया है। अब प्रशासन का जोर नशे के कारोबार को रोकने के साथ इसकी लत से पीड़ित लोगों के उपचार और पुनर्वास पर भी रहेगा।

    उप मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल ने रीवा के सर्किट हाउस में आयोजित बैठक में नशामुक्त भारत अभियान की समीक्षा की। उन्होंने पुलिस और प्रशासन के अधिकारियों को नशे के कारोबार में शामिल लोगों के खिलाफ लगातार सख्त कार्रवाई करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि कार्रवाई केवल छोटे स्तर पर काम करने वाले लोगों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए बल्कि नशीले पदार्थों के उत्पादन और सप्लाई से जुड़े नेटवर्क तक पहुंचना जरूरी है। इसके लिए संबंधित विभागों के बीच समन्वय बनाकर अभियान चलाने पर जोर दिया गया।

    बैठक में रीवा जोन के पुलिस महानिरीक्षक गौरव राजपूत ने पिछले 18 महीनों की कार्रवाई का ब्योरा प्रस्तुत किया। उनके मुताबिक इस दौरान 5535 किलो 931 ग्राम गांजा और 97 हजार 665 शीशी कोरेक्स जब्त की गई। इसके अलावा 4 लाख 13 हजार 310 नशीली टैबलेट और कैप्सूल बरामद किए गए। पुलिस ने अफीम के 450 हरे पौधों के साथ 123.6 ग्राम हेरोइन 206.54 ग्राम स्मैक 244 ग्राम ब्राउन शुगर और 3 किलो 87 ग्राम एमडी ड्रग्स भी जब्त की है। जब्त नशीले पदार्थों की कुल कीमत 13 करोड़ रुपये से अधिक आंकी गई है।

    नशे के अवैध कारोबार में इस्तेमाल किए जाने वाले वाहनों पर भी कार्रवाई की गई। पुलिस ने 181 दोपहिया और 131 चारपहिया वाहन जब्त किए हैं। इन वाहनों की कुल कीमत 10 करोड़ 41 लाख 70 हजार रुपये बताई गई है। अधिकारियों का मानना है कि नशीले पदार्थों की सप्लाई में इस्तेमाल होने वाले संसाधनों पर कार्रवाई करना भी इस नेटवर्क को कमजोर करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

    रीवा संभाग में अवैध शराब के कारोबार के खिलाफ भी अभियान चलाया गया। पिछले 18 महीनों में इस संबंध में 11 हजार 998 मामले दर्ज किए गए और 12 हजार 199 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। कार्रवाई के दौरान 35 हजार 890 लीटर अवैध देशी शराब और 22 हजार 807 लीटर विदेशी शराब जब्त की गई। जब्त शराब की कीमत 3 करोड़ 97 लाख 53 हजार 333 रुपये बताई गई है। उप मुख्यमंत्री ने उत्तर प्रदेश के अधिकारियों के साथ समन्वय बनाकर नशे के कारोबार पर प्रभावी कार्रवाई जारी रखने के निर्देश भी दिए।

    राजेंद्र शुक्ल ने कहा कि विंध्य क्षेत्र में कृषि उद्योग व्यापार और बुनियादी सुविधाओं के विकास से लोगों की आमदनी बढ़ाने के प्रयास किए जा रहे हैं। ऐसे में युवाओं का नशे की गिरफ्त में आना गंभीर चिंता का विषय है। उन्होंने नशामुक्ति केंद्रों को सक्रिय करने और पीड़ितों को उपचार के साथ पुनर्वास की सुविधा देने पर जोर दिया। कलेक्टर नरेंद्र कुमार सूर्यवंशी ने बताया कि इसी सप्ताह नशे की लत से पीड़ित 50 लोगों की पहचान कर उन्हें पुनर्वास के लिए नशामुक्ति केंद्रों में भर्ती कराने की योजना है। कोरेक्स की लत से जूझ रहे लोगों की मदद के लिए स्वयंसेवी संस्थाओं का सहयोग भी लिया जाएगा।

    बैठक में जनप्रतिनिधियों और सामाजिक संस्थाओं की भागीदारी बढ़ाने पर भी जोर दिया गया। प्रशासन की कोशिश है कि नशे के कारोबार के खिलाफ सख्त कार्रवाई के साथ लोगों को नशे से बाहर निकालने के लिए उपचार और जागरूकता पर भी काम किया जाए।

  • दो दिन में बड़ी संख्या में गोवंश सड़क हादसों का शिकार रीवा में फिर 5 की मौत सड़क पर कीर्तन कर जताया विरोध

    दो दिन में बड़ी संख्या में गोवंश सड़क हादसों का शिकार रीवा में फिर 5 की मौत सड़क पर कीर्तन कर जताया विरोध


    रीवा । रीवा सीधी मार्ग पर गुढ़ थाना क्षेत्र के गुढ़वा पेट्रोल पंप के पास देर रात एक दर्दनाक सड़क हादसा सामने आया। तेज रफ्तार अज्ञात वाहन ने सड़क पर बैठे करीब 6 से 7 गोवंश को अपनी चपेट में ले लिया। हादसा इतना भीषण था कि पांच गोवंश की मौके पर ही मौत हो गई जबकि अन्य गोवंश घायल हो गए। घटना की जानकारी मिलते ही हिंदू संगठनों और गौ सेवा से जुड़े कार्यकर्ता मौके पर पहुंच गए। हादसे को लेकर लोगों में नाराजगी देखने को मिली और उन्होंने सड़क पर चक्काजाम कर विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया।

    घटना से नाराज लोग सड़क पर बैठकर कीर्तन करने लगे। प्रदर्शन के कारण रीवा सीधी मार्ग पर कुछ समय के लिए वाहनों की आवाजाही प्रभावित रही। प्रदर्शन कर रहे लोगों ने सड़क पर घायल अवस्था में पड़े गोवंश के उपचार की तत्काल व्यवस्था कराने की मांग की। साथ ही हादसे में मारे गए गोवंश को लेकर भी लोगों ने नाराजगी जताई। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि सड़क पर खुले में घूमने वाले गोवंश की वजह से लगातार हादसे हो रहे हैं और इस समस्या का स्थायी समाधान किया जाना जरूरी है।

    बताया जा रहा है कि घटना की जानकारी मिलने के बाद हिंदू संगठनों और गौ सेवकों के कार्यकर्ता मौके पर पहुंचे। उन्होंने प्रशासन से घायल गोवंश को उपचार उपलब्ध कराने और मृत गोवंश को सम्मानजनक तरीके से हटाने की मांग की। इसके साथ ही हादसे को अंजाम देने वाले अज्ञात वाहन की पहचान कर चालक के खिलाफ कार्रवाई की मांग भी उठाई गई।

    गोसेवकों के मुताबिक यह इस मार्ग पर लगातार दूसरा बड़ा हादसा है। इससे एक दिन पहले भी रीवा सीधी मार्ग पर कसई स्टैंड के पास करीब 12 गोवंश अज्ञात वाहन की चपेट में आ गए थे। लगातार दो दिनों में बड़ी संख्या में गोवंश के सड़क हादसों का शिकार होने से गौ सेवा से जुड़े लोगों में नाराजगी बढ़ गई है। उनका कहना है कि यदि समय रहते सड़क पर घूम रहे गोवंश को सुरक्षित स्थानों और गौशालाओं तक पहुंचाने की व्यवस्था की जाए तो ऐसे हादसों को रोका जा सकता है।

    गोसेवक राधा मोहन ने भी लगातार हो रहे हादसों को लेकर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि सड़क पर खुले में घूम रहे गोवंश के कारण आए दिन दुर्घटनाएं हो रही हैं। प्रशासन को अभियान चलाकर ऐसे गोवंश को सुरक्षित तरीके से गौशालाओं तक पहुंचाना चाहिए। उनका कहना है कि केवल हादसे के बाद कार्रवाई करने के बजाय समस्या के स्थायी समाधान पर ध्यान देने की जरूरत है।

    प्रदर्शनकारियों ने प्रशासन के सामने कई मांगें रखीं। इनमें घायल गोवंश का तत्काल इलाज कराने के साथ सड़क पर घूम रहे गोवंश को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाना और हादसे के जिम्मेदार वाहन की पहचान कर कार्रवाई करना शामिल है। मांगों को लेकर लोगों ने कुछ समय तक चक्काजाम किया। मौके पर पहुंची पुलिस और प्रशासन की टीम ने लोगों को समझाइश दी जिसके बाद स्थिति सामान्य हुई।

    लगातार दो दिनों में हुए हादसों ने सड़क सुरक्षा के साथ आवारा गोवंश की समस्या को लेकर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। अब देखना होगा कि प्रशासन इस समस्या से निपटने के लिए क्या स्थायी कदम उठाता है और अज्ञात वाहन की पहचान कर उसके चालक के खिलाफ क्या कार्रवाई की जाती है।

  • कल्पना मिश्रा मामले में बढ़ा आक्रोश, 9 दिन से अनशन पर पिता; कांग्रेस ने भी तेज किया आंदोलन

    कल्पना मिश्रा मामले में बढ़ा आक्रोश, 9 दिन से अनशन पर पिता; कांग्रेस ने भी तेज किया आंदोलन


    रीवा । रीवा में कल्पना मिश्रा की मौत के मामले में न्याय और जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की मांग को लेकर उनके पिता की भूख हड़ताल लगातार जारी है। गुरुवार को अनशन के नौवें दिन उनकी तबीयत बिगड़ गई। स्वास्थ्य में गिरावट का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि वे अब ठीक से बैठ भी नहीं पा रहे हैं। कमजोरी बढ़ने के कारण उन्हें लेटकर ही अनशन करना पड़ रहा है। परिवार का कहना है कि लगातार कई दिनों तक भोजन नहीं लेने से उनकी हालत लगातार खराब होती जा रही है लेकिन इसके बावजूद वे अपनी मांग से पीछे हटने को तैयार नहीं हैं।

    कल्पना मिश्रा के पिता रीवा के सिरमौर चौराहे पर अनशन कर रहे हैं। परिजनों के मुताबिक पहले वे बैठकर भूख हड़ताल कर रहे थे लेकिन अब कमजोरी इतनी बढ़ गई है कि उनके लिए बैठना भी मुश्किल हो गया है। परिवार के लोगों ने बताया कि उनकी बातचीत करने की क्षमता भी प्रभावित हुई है। स्वास्थ्य बिगड़ने के बावजूद उन्होंने अनशन समाप्त करने से इनकार किया है। परिजनों का कहना है कि जब तक कल्पना को न्याय नहीं मिलता और मामले में जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई नहीं होती तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा।

    कल्पना मिश्रा की मौत के बाद से ही परिवार की ओर से अस्पताल की व्यवस्थाओं और इलाज में कथित लापरवाही को लेकर सवाल उठाए जाते रहे हैं। परिवार का आरोप है कि इलाज के दौरान हुई लापरवाही के कारण यह स्थिति बनी। इसी को लेकर कार्रवाई की मांग लगातार उठाई जा रही है। परिवार की ओर से अलग अलग स्तर पर विरोध और प्रदर्शन भी किए जा रहे हैं। अब पिता की लगातार बिगड़ती सेहत ने इस मामले को और गंभीर बना दिया है।

    इधर कल्पना मिश्रा मामले को लेकर कांग्रेस का आंदोलन भी जारी है। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी गुरुवार को रीवा पहुंचे और अग्रसेन चौराहे पर पार्टी की ओर से चलाए जा रहे धरने में शामिल हुए। उन्होंने आंदोलन को समर्थन दिया। कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेता और जनप्रतिनिधि पहले भी इस धरने में पहुंच चुके हैं। पार्टी नेताओं का कहना है कि रीवा की स्वास्थ्य व्यवस्था से जुड़े सवालों और कल्पना मिश्रा मामले में जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की मांग को लेकर आंदोलन जारी रहेगा।

    कांग्रेस की ओर से स्वास्थ्य व्यवस्था में सुधार और मामले की निष्पक्ष जांच की मांग भी उठाई जा रही है। पार्टी नेताओं का कहना है कि आम लोगों को बेहतर इलाज और जवाबदेह स्वास्थ्य व्यवस्था मिलनी चाहिए। वहीं कल्पना मिश्रा के परिवार का कहना है कि उनकी बेटी की मौत के मामले में जिम्मेदारी तय होना जरूरी है।

    सिरमौर चौराहे पर पिता की बिगड़ती हालत के बीच परिवार और समर्थकों की चिंता लगातार बढ़ रही है। नौ दिन से चल रही भूख हड़ताल का उनके स्वास्थ्य पर साफ असर दिखाई दे रहा है। इसके बावजूद परिवार का कहना है कि वे अपनी मांग पूरी होने तक अनशन समाप्त नहीं करेंगे। अब इस मामले में प्रशासन की ओर से क्या कदम उठाए जाते हैं और परिवार की मांगों पर किस तरह कार्रवाई होती है इस पर सभी की नजर बनी हुई है।

  • कल्पना मिश्रा मौत मामले में मजिस्ट्रियल जांच पर उठे सवाल, CBI जांच की मांग को लेकर आंदोलन की चेतावनी

    कल्पना मिश्रा मौत मामले में मजिस्ट्रियल जांच पर उठे सवाल, CBI जांच की मांग को लेकर आंदोलन की चेतावनी


    भोपाल । रीवा की कल्पना मिश्रा की मौत का मामला अब राजधानी भोपाल तक पहुंच गया है। मामले की CBI जांच की मांग को लेकर विंध्य नागरिक अधिकार मंच ने रविवार को गांधी प्रतिमा के सामने एक दिवसीय सांकेतिक धरना दिया। मंच के अध्यक्ष दिलीप तिवारी के नेतृत्व में आयोजित प्रदर्शन में विंध्य क्षेत्र से आए नागरिकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने हिस्सा लिया। प्रदर्शन के दौरान सरकार और स्वास्थ्य व्यवस्था के खिलाफ नारेबाजी की गई तथा कल्पना मिश्रा को न्याय दिलाने की मांग उठाई गई।

    प्रदर्शनकारियों ने कल्पना मिश्रा को न्याय दो और CBI जांच लागू करो जैसे नारे लगाए। इसके साथ ही स्वास्थ्य मंत्री के खिलाफ भी नारेबाजी की गई। मंच का कहना है कि कल्पना ने मौत से पहले इलाज और मदद के लिए गुहार लगाई थी लेकिन उनकी आवाज पर समय रहते उचित ध्यान नहीं दिया गया। मंच ने इस पूरे प्रकरण को केवल एक परिवार से जुड़ा मामला नहीं बल्कि विंध्य क्षेत्र में स्वास्थ्य व्यवस्था और मरीजों की सुरक्षा से जुड़ा गंभीर सवाल बताया।

    मंच अध्यक्ष दिलीप तिवारी ने कहा कि यदि सरकार जल्द मामले की CBI जांच कराने की दिशा में कदम नहीं उठाती है तो विंध्य क्षेत्र के लोग भोपाल में एकजुट होकर मुख्यमंत्री आवास का घेराव करेंगे। प्रदर्शनकारियों ने मुख्यमंत्री और स्वास्थ्य मंत्री से जवाबदेही तय करने की मांग भी की। धरने में अनीश शर्मा भूपेन्द्र मिश्रा अभिषेक तिवारी प्रवीण शर्मा सुरजन संदीप विश्वकर्मा देवराज राणा अंकित रघुवंशी और धीरेंद्र राणा सहित कई लोग मौजूद रहे।

    प्रदर्शन के दौरान मामले में चल रही मजिस्ट्रियल जांच को लेकर भी सवाल उठाए गए। मंच का तर्क है कि जिन प्रशासनिक व्यवस्थाओं पर सवाल खड़े हो रहे हैं उन्हीं से जुड़ी व्यवस्था के स्तर पर होने वाली जांच से निष्पक्षता को लेकर लोगों के मन में संदेह बना रह सकता है। इसी वजह से मंच ने मामले की जांच किसी स्वतंत्र केंद्रीय एजेंसी से कराने की मांग रखी है।

    विंध्य नागरिक अधिकार मंच ने रीवा की स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर भी कई गंभीर आरोप लगाए। मंच का आरोप है कि सरकारी अस्पतालों में मरीजों को पर्याप्त सुविधाएं और इलाज नहीं मिल पा रहा है जबकि कुछ डॉक्टर निजी नर्सिंग होम में अधिक ध्यान दे रहे हैं। प्रदर्शनकारियों ने सरकारी अस्पतालों से मरीजों को कथित तौर पर निजी अस्पतालों की ओर भेजने और इलाज के नाम पर वसूली के आरोपों की भी निष्पक्ष जांच की मांग की।

    मंच ने सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था में रिकॉर्ड और दस्तावेजों के रखरखाव को लेकर भी गंभीर सवाल उठाए। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि कुछ मामलों में सरकारी रिकॉर्ड में ऐसी विसंगतियां सामने आ रही हैं जिनमें मृत व्यक्ति का इलाज दर्ज होने और जीवित व्यक्ति को मृत दिखाए जाने जैसी स्थिति बताई गई है। हालांकि ये मंच की ओर से लगाए गए आरोप हैं जिनकी स्वतंत्र पुष्टि इस जानकारी में नहीं हुई है।

    मामले की शुरुआत 25 अगस्त को हुई थी जब रीवा जिले के हटवा गांव की 25 वर्षीय कल्पना मिश्रा डिलीवरी के लिए गांधी मेमोरियल अस्पताल पहुंची थीं। परिवार के अनुसार यह उनकी पहली डिलीवरी थी और गर्भावस्था के दौरान उनकी हालत सामान्य थी। 26 अगस्त की रात करीब 8:30 बजे उनका सी-सेक्शन हुआ। बच्चे के जन्म के कुछ समय बाद कल्पना और नवजात दोनों की मौत हो गई।

    मौत से पहले का एक वीडियो सामने आने के बाद मामले ने और गंभीर रूप ले लिया। वीडियो में कल्पना अस्पताल में मदद और वहां से ले जाने की गुहार लगाती नजर आई थीं। इसके बाद अस्पताल की व्यवस्थाओं और इलाज की प्रक्रिया को लेकर सवाल उठे। मामले में दो डॉक्टरों और दो नर्सिंग स्टाफ को निलंबित किया गया जबकि अस्पताल अधीक्षक डॉ. राहुल मिश्रा को पद से हटाकर डॉ. प्रियंक शर्मा को जिम्मेदारी दी गई। इसके बाद जच्चा-बच्चा की मौत की मजिस्ट्रियल जांच के आदेश दिए गए।

    अब विंध्य नागरिक अधिकार मंच इस जांच से संतुष्ट नहीं है और CBI जांच की मांग को लेकर आंदोलन तेज करने की बात कह रहा है। मंच का कहना है कि मामले की निष्पक्ष जांच के साथ स्वास्थ्य व्यवस्था में जवाबदेही भी तय होनी चाहिए। आने वाले दिनों में सरकार इस मांग पर क्या निर्णय लेती है इस पर सभी की नजर रहेगी।

  • बाढ़ ने VIP ठिकाने को भी नहीं छोड़ा, दूसरी मंजिल पर गुजरी रात; पानी उतरते ही कीचड़ का कहर

    बाढ़ ने VIP ठिकाने को भी नहीं छोड़ा, दूसरी मंजिल पर गुजरी रात; पानी उतरते ही कीचड़ का कहर


    रीवा।
    मध्य प्रदेश के रीवा में लगातार बारिश के बाद बीहर नदी का जलस्तर बढ़ने से शहर के कई हिस्सों में बाढ़ जैसे हालात बन गए। इस बाढ़ का असर आम लोगों के साथ जनप्रतिनिधियों के घरों तक भी पहुंचा। गुढ़ विधानसभा क्षेत्र से भाजपा विधायक नागेंद्र सिंह का निजी निवास भी बाढ़ के पानी की चपेट में आ गया। नदी किनारे स्थित उनके घर के निचले हिस्से में पानी भर जाने के कारण उन्हें करीब 18 घंटे से ज्यादा समय तक घर की दूसरी मंजिल पर रहना पड़ा। बारिश और नदी के बढ़े जलस्तर के कारण स्थिति ऐसी बन गई थी कि घर से नीचे उतरना मुश्किल था।

    बीहर नदी के जलस्तर में बढ़ोतरी के साथ ही विधायक के घर के ग्राउंड फ्लोर और आसपास के हिस्सों में पानी पहुंच गया। हालात को देखते हुए नागेंद्र सिंह ने घर की दूसरी मंजिल पर ही रहकर पानी कम होने का इंतजार किया। लंबे समय तक बाढ़ का पानी घर के आसपास जमा रहने से निचले हिस्से में भारी गंदगी और कीचड़ फैल गया। बारिश का दौर कमजोर पड़ने के बाद जब नदी का जलस्तर नीचे आया तो विधायक घर के निचले हिस्से में पहुंचे। इसके बाद वहां सफाई का काम शुरू कराया गया।

    पानी उतरने के बाद घर के भीतर और आसपास की स्थिति ने बाढ़ की भयावहता को साफ दिखा दिया। कई हिस्सों में कीचड़ और गंदगी जमा हो गई थी। बाढ़ का पानी अपने साथ गाद और दूसरी गंदगी भी लेकर आया जिससे घर के निचले हिस्से को साफ करने में काफी मशक्कत करनी पड़ रही है। फिलहाल सफाई का काम जारी है।

    बाढ़ के बाद भाजपा विधायक नागेंद्र सिंह ने शहर में जलभराव और बाढ़ की स्थिति को लेकर कई सवाल उठाए हैं। उन्होंने नदी और उसके आसपास बढ़ते अतिक्रमण को बाढ़ की गंभीर वजहों में से एक बताया। विधायक का कहना है कि नदी के प्राकृतिक बहाव क्षेत्र में अतिक्रमण होने से पानी के निकलने का रास्ता प्रभावित होता है। जब बारिश के दौरान नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ता है तो पानी को पर्याप्त जगह नहीं मिलती और आसपास के क्षेत्रों में जलभराव की स्थिति पैदा हो जाती है।

    नागेंद्र सिंह ने रीवा में हाल के वर्षों में बनाए गए कुछ नए पुलों की ऊंचाई और डिजाइन को लेकर भी सवाल खड़े किए। उनके अनुसार नए पुलों की ऊंचाई पुराने पुलों की तुलना में कम दिखाई देती है। उनका दावा है कि पुलों की संरचना और कम ऊंचाई के कारण बीहर नदी के पानी के प्रवाह में रुकावट पैदा हो सकती है। इसका असर बाढ़ के दौरान आसपास के इलाकों में दिखाई देता है।

    विधायक के मुताबिक इस बार नदी का जलस्तर बढ़ने और पानी के बहाव में रुकावट के चलते हालात ज्यादा गंभीर हुए। इसका असर उनके खुद के घर पर भी पड़ा और उन्हें लंबे समय तक दूसरी मंजिल पर रहना पड़ा। हालांकि अब नदी का जलस्तर घटने लगा है और घर में सफाई का काम चल रहा है।

    रीवा में आई इस बाढ़ ने एक बार फिर नदी के प्राकृतिक बहाव क्षेत्र अतिक्रमण और पुलों के निर्माण की गुणवत्ता व डिजाइन को लेकर चर्चा तेज कर दी है। विधायक ने जिन मुद्दों को उठाया है उन पर प्रशासनिक स्तर पर जांच और तकनीकी समीक्षा की जरूरत महसूस की जा रही है ताकि भविष्य में भारी बारिश के दौरान शहर और नदी किनारे रहने वाले लोगों को ऐसी स्थिति का सामना न करना पड़े।

  • रीवा को मिली तैराकी की बड़ी सुविधा, मिहिर सेन तरणताल फिर से शुरू; महिलाओं के लिए अलग समय तय

    रीवा को मिली तैराकी की बड़ी सुविधा, मिहिर सेन तरणताल फिर से शुरू; महिलाओं के लिए अलग समय तय


    मध्य प्रदेश । रीवा शहर के लोगों के लिए राहत और खुशी की खबर है। वर्षों से बंद पड़े पुराने मिहिर सेन तरणताल को अब फिर से शुरू कर दिया गया है। नगर निगम ने 8 जून से इसे आम नागरिकों के लिए खोल दिया है, जिससे शहरवासियों को तैराकी की सुविधा दोबारा मिल सकेगी।

    यह तरणताल करीब तीन दशक पुराना है, जिसका हाल ही में व्यापक जीर्णोद्धार किया गया है। इसके बाद अब इसे आधुनिक सुविधाओं और सुरक्षा मानकों के साथ फिर से शुरू किया गया है।

    मिहिर सेन तरणताल के संचालन के लिए नगर निगम ने दो तरह की व्यवस्था लागू की है। नियमित तैराकी करने वालों के लिए 2500 रुपये प्रतिमाह सदस्यता शुल्क तय किया गया है, जबकि कभी-कभार आने वाले लोग 100 रुपये प्रति घंटे के हिसाब से इसका उपयोग कर सकते हैं।

    तैराकी के लिए दिनभर को तीन सत्रों में बांटा गया है। सुबह 6 बजे से 10 बजे तक सभी नागरिकों के लिए पूल खुला रहेगा। इसके बाद शाम 5 बजे से 6 बजे तक का समय विशेष रूप से महिलाओं के लिए आरक्षित किया गया है, ताकि वे सुरक्षित और सुविधाजनक माहौल में तैराकी कर सकें। शाम 6 बजे से 8 बजे तक फिर से सभी लोगों को प्रवेश की अनुमति दी गई है।

    नगर निगम ने सुरक्षा व्यवस्था को प्राथमिकता देते हुए हर सत्र में प्रशिक्षित लाइफगार्ड और कोच की तैनाती की है। साथ ही एक समय में अधिकतम 30 लोगों को ही पूल में प्रवेश दिया जाएगा, ताकि भीड़ और दुर्घटनाओं से बचा जा सके।

    बच्चों के लिए भी विशेष नियम बनाए गए हैं। 5 वर्ष से कम उम्र के बच्चों को प्रवेश नहीं दिया जाएगा, जबकि 5 से 14 वर्ष तक के बच्चों को अभिभावक के साथ ही पूल में आने की अनुमति होगी।

    तरणताल में प्रवेश के लिए पंजीयन अनिवार्य किया गया है, जिसमें आधार कार्ड, वोटर आईडी या जन्म प्रमाण पत्र जैसे दस्तावेज जरूरी होंगे। 18 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के लिए अभिभावक की लिखित अनुमति भी जरूरी होगी।

    सुरक्षा कारणों से फिलहाल डाइविंग पूल को बंद रखा गया है और केवल मुख्य स्विमिंग पूल ही चालू किया गया है। नगर निगम ने यह भी स्पष्ट किया है कि किसी भी प्रकार की संक्रामक बीमारी से पीड़ित व्यक्ति को पूल में प्रवेश नहीं मिलेगा।

    नगर निगम के अनुसार तरणताल के संचालन के लिए निजी एजेंसी के चयन की प्रक्रिया अभी जारी है, लेकिन जनता की मांग को देखते हुए फिलहाल इसका संचालन नगर निगम स्वयं कर रहा है।

  • रीवा में शराब के लिए पैसे न देने पर बर्बर हमला, जेसीबी संचालक का पैर टूटा, लूटपाट भी

    रीवा में शराब के लिए पैसे न देने पर बर्बर हमला, जेसीबी संचालक का पैर टूटा, लूटपाट भी


    मध्य प्रदेश । मध्य प्रदेश के रीवा जिले में कानून व्यवस्था को चुनौती देने वाली एक गंभीर घटना सामने आई है। मनगवां थाना क्षेत्र के अंतर्गत मनिकवार नंबर-2 इलाके में शराब के लिए पैसे न देने पर कुछ बदमाशों ने दिनदहाड़े हमला, तोड़फोड़ और लूटपाट की वारदात को अंजाम दिया।

    जानकारी के अनुसार, रविवार रात कुछ युवक इलाके में पहुंचे और वहां मौजूद लोगों से शराब पीने के लिए पैसे मांगने लगे। जब लोगों ने पैसे देने से इनकार किया, तो विवाद अचानक हिंसक हो गया और आरोपियों ने लाठी-डंडों व अन्य हथियारों से हमला कर दिया।

    इस दौरान बदमाशों ने न सिर्फ लोगों को बेरहमी से पीटा, बल्कि वहां खड़ी जेसीबी मशीन और बोलेरो वाहन को भी निशाना बनाया। दोनों वाहनों के शीशे तोड़ दिए गए और मौके पर जमकर उत्पात मचाया गया।

    हमले में पवन पटेल, पुनीत पटेल और अंकित पटेल गंभीर रूप से घायल हुए हैं। इनमें से जेसीबी संचालक की हालत ज्यादा गंभीर बताई जा रही है, जिसका पैर टूट गया है। घायलों को स्थानीय लोगों की मदद से तुरंत अस्पताल पहुंचाया गया, जहां उनका इलाज जारी है।

    पीड़ित पक्ष ने आरोप लगाया है कि हमलावर करीब 70 से 80 हजार रुपये नकद और दो मोबाइल फोन भी लूटकर फरार हो गए। उनका कहना है कि यह हमला पहले पैसों की मांग से शुरू हुआ और बाद में लूटपाट व मारपीट में बदल गया।

    घटना की सूचना मिलते ही मनगवां थाना पुलिस मौके पर पहुंची और स्थिति का जायजा लिया। पुलिस ने घायलों के बयान दर्ज कर मामला दर्ज कर लिया है और आरोपियों की तलाश शुरू कर दी है।

    स्थानीय लोगों में इस घटना को लेकर आक्रोश है। उनका कहना है कि इलाके में असामाजिक तत्वों की गतिविधियां बढ़ती जा रही हैं, जिससे आम लोगों में भय का माहौल है। लोगों ने पुलिस प्रशासन से सख्त कार्रवाई और सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने की मांग की है।

  • जुए के खेल का वीडियो वायरल, महिला पुलिसकर्मी के पति का नाम आने से चर्चा तेज

    जुए के खेल का वीडियो वायरल, महिला पुलिसकर्मी के पति का नाम आने से चर्चा तेज


    मध्य प्रदेश । रीवा शहर में अवैध जुए के कथित संचालन को लेकर एक वीडियो सामने आने के बाद पुलिस प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो गए हैं। वायरल हो रहे इस वीडियो में बड़ी संख्या में लोगों के एक स्थान पर एकत्र होकर दांव लगाते दिखाई देने का दावा किया जा रहा है। मामला सिटी कोतवाली थाना क्षेत्र के गुढ़ चौराहा इलाके का बताया जा रहा है, जहां एक बस्ती में लंबे समय से अवैध जुए का फड़ संचालित होने की चर्चाएं स्थानीय स्तर पर होती रही हैं।

    जानकारी के अनुसार, वीडियो सामने आने के बाद क्षेत्र में इस बात को लेकर चर्चा तेज हो गई है कि शहर के बीचोंबीच कथित रूप से इतने बड़े स्तर पर जुए का संचालन कैसे हो रहा था। स्थानीय लोगों का दावा है कि यहां प्रतिदिन बड़ी संख्या में लोग पहुंचते हैं और लाखों रुपये तक का दांव लगाया जाता है। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है, लेकिन वायरल वीडियो ने पूरे मामले को चर्चा के केंद्र में ला दिया है।

    स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि इस तरह की गतिविधियां लंबे समय से संचालित हो रही थीं तो संबंधित एजेंसियों को इसकी जानकारी क्यों नहीं थी। लोगों का आरोप है कि अवैध गतिविधियों के खिलाफ कार्रवाई के दावे किए जाते हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर प्रभावी परिणाम दिखाई नहीं देते। यही कारण है कि वीडियो सामने आने के बाद पुलिस की निगरानी व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं।

    मामले को लेकर कुछ व्यक्तियों के नाम भी स्थानीय स्तर पर चर्चा में हैं। बताया जा रहा है कि कथित जुआ फड़ के संचालन में कुछ लोगों की सक्रिय भूमिका होने की बातें कही जा रही हैं। इसके साथ ही एक महिला पुलिसकर्मी के पति का नाम भी चर्चाओं में सामने आया है। हालांकि इस संबंध में अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और न ही किसी जांच एजेंसी ने इन आरोपों को सत्यापित किया है। इसलिए इन दावों को फिलहाल आरोपों के रूप में ही देखा जा रहा है।

    कानूनी जानकारों का कहना है कि किसी भी व्यक्ति की संलिप्तता तभी स्थापित मानी जा सकती है जब जांच में पर्याप्त साक्ष्य मिलें और संबंधित एजेंसियां इसकी पुष्टि करें। ऐसे मामलों में निष्पक्ष जांच बेहद महत्वपूर्ण होती है, ताकि तथ्य और आरोपों के बीच स्पष्ट अंतर सामने आ सके।

    उधर, वीडियो सामने आने के बाद पुलिस हरकत में आई है। सिटी कोतवाली पुलिस का कहना है कि मामले की जानकारी प्राप्त हुई है और वीडियो की जांच की जा रही है। अधिकारियों के अनुसार, वीडियो की सत्यता, स्थान और उसमें दिखाई दे रहे लोगों की पहचान की जाएगी। यदि जांच में जुआ खेले जाने की पुष्टि होती है तो संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ जुआ एक्ट और अन्य प्रासंगिक धाराओं के तहत वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।

    पुलिस का यह भी कहना है कि कानून व्यवस्था बनाए रखना उनकी प्राथमिकता है और किसी भी प्रकार की अवैध गतिविधि को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। फिलहाल पूरे मामले की जांच जारी है और जांच रिपोर्ट आने के बाद ही स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो सकेगी।

    अब शहरवासियों की नजर पुलिस की कार्रवाई पर टिकी है। लोगों का मानना है कि यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई होनी चाहिए, ताकि अवैध गतिविधियों पर प्रभावी रोक लग सके और कानून व्यवस्था में आमजन का विश्वास मजबूत हो।

  • चौपाटियों पर घरेलू गैस का इस्तेमाल उजागर, उज्ज्वला योजना के सिलेंडर भी नजर आए

    चौपाटियों पर घरेलू गैस का इस्तेमाल उजागर, उज्ज्वला योजना के सिलेंडर भी नजर आए


    मध्य प्रदेश । रीवा शहर में घरेलू गैस सिलेंडरों के व्यावसायिक उपयोग का मुद्दा एक बार फिर चर्चा में है। जहां एक ओर आम उपभोक्ता गैस सिलेंडर की समय पर उपलब्धता और रिफिल में होने वाली देरी को लेकर परेशान दिखाई देते हैं, वहीं दूसरी ओर शहर की चौपाटियों और खानपान की दुकानों पर घरेलू गैस सिलेंडरों का खुलेआम उपयोग होता नजर आ रहा है। हालिया पड़ताल में सामने आए तथ्यों ने गैस वितरण व्यवस्था और निगरानी तंत्र दोनों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

    शहर के विभिन्न क्षेत्रों में संचालित चौपाटियों और फूड स्टॉल्स का निरीक्षण करने पर पाया गया कि बड़ी संख्या में दुकानदार घरेलू गैस सिलेंडरों का उपयोग कर रहे हैं। जानकारी के अनुसार, शहर की करीब 90 प्रतिशत चौपाटियों पर घरेलू सिलेंडरों का इस्तेमाल किया जा रहा है। कई स्थानों पर उज्ज्वला योजना के तहत मिलने वाले सिलेंडर भी उपयोग में दिखाई दिए, जबकि इनका उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को घरेलू ईंधन उपलब्ध कराना है।

    सबसे अधिक चौंकाने वाली स्थिति सिरमौर चौराहे के पीछे स्थित एमपी-17 चौपाटी क्षेत्र में देखने को मिली। यहां संचालित अधिकांश दुकानों में घरेलू गैस सिलेंडर उपयोग में पाए गए। निरीक्षण के दौरान ऐसा कोई प्रतिष्ठान नहीं मिला जहां नियमानुसार कमर्शियल गैस सिलेंडर का उपयोग किया जा रहा हो। इससे यह सवाल उठने लगा है कि नियमों का उल्लंघन इतने बड़े पैमाने पर होने के बावजूद संबंधित विभागों की नजर इस ओर क्यों नहीं गई।

    विशेषज्ञों का कहना है कि घरेलू गैस सिलेंडरों पर सरकार की ओर से दी जाने वाली सुविधाओं और व्यवस्थाओं का उद्देश्य आम परिवारों की जरूरतों को पूरा करना है। ऐसे सिलेंडरों का व्यावसायिक गतिविधियों में उपयोग न केवल नियमों का उल्लंघन है, बल्कि इससे गैस आपूर्ति व्यवस्था भी प्रभावित हो सकती है। यदि बड़ी संख्या में घरेलू सिलेंडर व्यवसायों में खपाए जाएंगे तो वास्तविक उपभोक्ताओं को समय पर गैस उपलब्ध कराने में कठिनाइयां बढ़ सकती हैं।

    शहर के कई उपभोक्ताओं ने समय पर रिफिल नहीं मिलने और बुकिंग के बाद लंबा इंतजार करने की शिकायतें भी की हैं। ऐसे में लोगों का मानना है कि घरेलू सिलेंडरों के दुरुपयोग की जांच की जानी चाहिए। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि समय-समय पर कार्रवाई की घोषणाएं तो होती हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर प्रभावी परिणाम दिखाई नहीं देते। उनका आरोप है कि यदि नियमित और निष्पक्ष निरीक्षण किए जाएं तो घरेलू गैस सिलेंडरों के व्यावसायिक उपयोग का बड़ा नेटवर्क सामने आ सकता है।

    नियमों के अनुसार होटल, रेस्टोरेंट, ढाबा, फास्ट फूड सेंटर, चाय की दुकान और अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में केवल कमर्शियल गैस सिलेंडरों का उपयोग किया जाना चाहिए। इसके बावजूद कई स्थानों पर घरेलू सिलेंडरों का उपयोग जारी है, जिससे सुरक्षा और नियामकीय दोनों प्रकार की चिंताएं बढ़ रही हैं।

    मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए एसडीएम अनुराग तिवारी ने कहा कि घरेलू गैस सिलेंडरों का व्यावसायिक उपयोग नियमों के विरुद्ध है। यदि ऐसी शिकायतें सामने आई हैं तो संबंधित विभागों से जांच कराई जाएगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि जहां भी घरेलू गैस सिलेंडर का अवैध रूप से व्यावसायिक उपयोग पाया जाएगा, वहां नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

    अब निगाहें प्रशासन की आगामी कार्रवाई पर टिकी हैं। शहरवासियों को उम्मीद है कि जांच के बाद दोषियों के खिलाफ प्रभावी कदम उठाए जाएंगे, ताकि घरेलू उपभोक्ताओं के लिए निर्धारित संसाधनों का दुरुपयोग रोका जा सके और गैस वितरण व्यवस्था में पारदर्शिता सुनिश्चित हो सके।